Wooden Horse Hindi Story काठ का घोड़ा | हिंदी कहानी | Baccho ki Kahaniyan in hindi | Hindigk50k

Wooden Horse Hindi Story काठ का घोड़ा | हिंदी कहानी | Baccho ki Kahaniyan in hindi |

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लालच बुरी बला (Wooden Horse Hindi Story काठ का घोड़ा हिंदी कहानी)

किसी गाँव में एक लड़का रहता था. उसका नाम अंकुर था. पढने-लिखने ने तो होशियार था ही, पर उसे घूमने-फिरने का भी बहुत शौक था. वह चाहता था कि दुनिया में चारों ओर घूमे, पर उसके पास कोइ साधन नहीं था. उसके माता-पिता भी बहुत गरीब थे. एक बार वह घूमते-घूमते जंगल में चला गया.

Wooden Horse Hindi Story काठ का घोड़ा हिंदी कहानी

जंगल में अन्दर दूर तक जाने पर उसे एक महात्मा जी मिले. इतने घने जंगल में उसे अकेला देख महात्मा जी को बड़ा आश्चर्य हुआ. जब अंकुर ने उन्हें अपने घूमने-फिरने के शौक के बारे में बताया तो महात्मा जी ने उसे एक काठ का घोड़ा दिया. वह घोड़ा बहुत अनोखा था. उसकी मूठ घुमाने से वह आकाश में उड़ सकता था. महात्मा जी ने अंकुर से कहा, ”देखो पुत्र, मैं तुम्हें जो घोड़ा दे रहा हूँ, वह तुम्हारी घूमने-फिरने की इच्छा को पूरी करने में पूर्णत: समर्थ है. परन्तु तुम एक बात सदैव याद रखना.”
“वह कौन सी बात है बाबा ” अंकुर ने पूछा.
“वह यह कि कभी लोभ मत करना. तुम लोभ की भावना मन में लेकर घोड़े पर बैठोगे तो इसकी शक्ति चली जाएगी.”

अंकुर को यह बात बताकर महात्मा जी अन्तर्धान हो गए. उनके जाने के बाद अंकुर घोड़े पर बैठा और उसकी मूठ घुमा दी. देखते ही देखते घोड़ा हवा से बातें करने लगा. अंकुर को बादलों के बीच उड़ते हुए बड़ा आनन्द आ रहा था. धीरे-धीरे शाम घिरने लगी. वह घोड़े को नीचे उतारना चाहता था पर तभी उसे याद आया कि महात्मा जी ने घोड़े को नीचे उतारना तो उसे सिखाया ही नहीं. अब तो वह बुरी तरह से घबरा गया कि अब क्या होगा?

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तभी उसने देखा कि मूठ के पास ही लकड़ी का एक छोटा-सा बटन लगा हुआ है. उसने जल्दी से उसे दबाया तो घोड़ा निर्जन जंगल में उतर गया रात हो गई थी, इस निर्जन जंगल में वह कहाँ जाएगा, यह सोचकर अंकुर बहुत घबरा गया तभी पास ही में उसे एक झोपड़ी में उसे  दीपक की रोशनी नजर आई. वह घोड़े को लेकर उस झोपड़ी में पहुंचा.

झोपड़ी में एक आदमी बैठा हुआ था. अंकुर ने उसे अपने बारे में बता कर रात भर ठहराने की बात कही. वह आदमी तैयार हो गया. उसने अंकुर को भोजन कराया और रात को सुला दिया. सुबह अंकुर ने उस आदमी को घोड़े के चमत्कार के बारे में भी बता दिया, तब उस आदमी ने कहा कि मेरे पास सोने के चार हार हैं. उनमें से दो हार मैं तुम्हें दे सकता हूँ, बशर्ते तुम अपना घोड़ा मुझे दे दो.

अंकुर सोच में पड़ गया. उसने सोचा कि मेरे माँ-बाप बहुत गरीब हैं.  इस घोड़े का क्या करूंगा, यदि मैं चारों ही हार ले लूं तो मेरे माता-पिता की दरिद्रता दूर हो जाएगी. हम खूब धनवान बन जाएँगे. अंकुर ने उसे चारों हार देने के लिए कहा तो उस आदमी ने मना कर दिया. विवश होकर अंकुर घोड़ा लेकर झोपडी से बाहर निकल आया. वह पैदल ही चलता हुआ झोपड़ी से बहुत दूर निकल आया. फिर उस पर बैठकर उसे उड़ाने के लिए उसकी मूठ घुमाने लगा, लेकिन घोड़ा उड़ा नहीं.

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तभी उसे याद हो आया कि महात्मा जी ने कहा था कि लोभ मत करना, पर मैंने लोभ किया. तभी एस घोड़े की शक्ति जाती रही. अब इस घने जंगल में वह खो ना जाए? उसे तो झोपड़ी का भी रास्ता नहीं मालूम रहा. तभी दूर कहीं सियारों के गुर्राने की आवाजें आने लगीं. वह भय के मारे रोने लगा और ‘बचाओ –बचाओ’ पुकारने लगा.

तभी उसकी आँखें खुल गई, उसके पिता जी उसे झिंझोड़ते हुए उठा रहे थे और पूछ रहे थे कि वह क्यों ‘बचाओ-बचाओ’ कहकर चीख रहा था? अब अंकुर को भी ध्यान आ गया कि वह काठ का घोड़ा तो महज एक सपना था. उसने अपने माता-पिता को भी अपना सपना सुनाया, उसकी बातें सुनकर उसके पिता ने उसके सर को धीरे-धीरे सहलाते हुए कहा, ” बेटा ! सपने में ही सही, उन महात्मा जी ने बिलकुल ठीक ही कहा था कि आदमी को लोभ नहीं करना चाहिए, लोभ समस्त पापों की जड़ होता है. जो भी व्यक्ति किसी लोभ में फंसा, कि वह पाप की दल-दल में समा जाता है, जहाँ से निकलना फिर कभी संभव ही नहीं होता.”

पिता की इस सीख को अंकुर ने हमेशा के लिए याद कर लिया. उसने अपने जीवन में अच्छा इन्सान बनने का संकल्प कर लिया उस दिन के बाद वह फिर कभी किसी लोभ में नहीं फंसा.

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