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सहयोग से काम जल्दी होता है – हिंदी कहानी The Helpful Squirrel Ramayana Hindi Short Story

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सहयोग से काम जल्दी होता है – हिंदी कहानी The Helpful Squirrel Ramayana Hindi Short Story 

रेता युग की बात है. रामेश्वरम में रामचंद्र की वानर सेना इकठ्ठा थी.

उन्हें रावण की लंका पर आक्रमण करने समुद्र के पार जाना था.बंदर समुद्र पर पुल बना रहे थे. हनुमान आगे खड़े कार्य का संचालन कर रहे थे. बंदर बड़े-बड़े पत्थर लाकर समुद्र में डाल रहे थे.

एक गिलहरी बड़े ध्यान से पुल निर्माण के कार्य को देख रही थी.

The Helpful Squirrel Ramayana Hindi Short Story

उसने सोचा कि जब राम के लिए सभी काम कर  रहे हैं, तो मैं भी इनका साथ दूँ. इससे पुल जल्दी बन जाएगा इसके लिए उसने एक उपाय सोचा. वह समुद्र में गोता लगाती और बाहर आकर बालू में लोटती. जब उसके शरीर में खूब बालू लग जाती तो वह पुल पर आ जाती. जहाँ दो पत्थरों के बीच में दरार होती वहीं बालू झाड़ देती. वह काम वह बार –बार करने लगी.

कहाँ छोटी-सी गिलहरी और कहाँ बड़े –बड़े पत्थर उठाए बंदर. गिलहरी के बार-बार पुल पर आने से बंदरों को परेशानी होने लगी.

उनमें से एक मोटे बंदर ने गिलहरी से कहा – ऐ गिलहरी! चल हट रास्ते से! हमें काम करने दो. देखती नहीं कि कितना लम्बा पुल बन रहा है? तुम्हारे एक-दो मुट्ठी बालू लाने से क्या होने वाला? जाओ यहाँ से.

गिलहरी बोली – सहयोग से काम जल्दी होता है. मैं तो तुम्हारी मदद कर  रही हूँ. यह कहकर वह पुनः काम में लग गई.

गिलहरी के न मानने से बंदरों ने हनुमान से शिकायत की. बंदरों की शिकायत सुनकर हनुमान गिलहरी के पास गए. उसकी पूँछ को जरा-सा दबाते हुए बोले – तुम जाओ यहाँ से तुम्हारे काम कर रहे बंदरों को परेशानी होती है. तुम्हारी मदद की आवश्यकता होगी तो बुला लेंगे.

पूँछ दबने से गिलहरी रोने-चिल्लाने लगी. वह गिरते – पड़ते सीधे रामचंद्र जी के पास पहुंची और बोली- महाराज! बचाइए, हनुमान ने मेरी पूँछ दबा दी. मैं भी पुल के निर्माण में बालू का सहयोग कर रही हूँ मैं जितनी बड़ी हूँ उतना ही तो काम करूंगी किन्तु हनुमान मुझे कह रहे हैं कि जाओ यहाँ से. आप भी उनकी पूँछ दबा दीजिए. गिलहरी की बात सुनकर रामचंद्र जी ने हनुमान को बुलाया. हनुमान आकर हाथ जोडकर खड़े हो गए. रामचंद्र जी बोले – हनुमान ! छोटे-बड़े सभी के सहयोग से ही कोई भी कार्य जल्दी और अच्छा होता है. आपने देखा नहीं कि गिलहरी बालू लाकर दो पत्थरों के बीच में डाल रही है. ऐसा करने से पत्थर मजबूती से जुड़ जाएँगे और पुल मजबूत होगा आपको गिलहरी से क्षमा मांगनी  चाहिए अन्यथा सजा मिलेगी.

हनुमान को अपनी गलती समझ में आ गई. उन्होंने गिलहरी से क्षमा मांगी गिलहरी ने प्रसन्नता से राम की जय –जयकार की और पुल बनने तक अपना काम करती रही.

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बच्चों द्वारा स्वच्छता अभियान हिंदी कहानी Swachhata Abhiyan by Kids Hindi Short Story

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बच्चों द्वारा स्वच्छता अभियान हिंदी कहानी Swachhata Abhiyan by Kids Hindi Short Story 

दामोदर  कालोनी अभी नई बनी थी. सभी घर चमकते और साफ – सुथरे थे. कालोनी के बगल में एक तरणताल था. बहुत दिनों से उसकी सफाई नहीं हुई थी. पानी जमा हो जाने से वह गंदे पानी का तालाब बन गया था.

उसी पानी में मच्छरों का परिवार चैन से रहता था. तालाब से थोड़ी दूर पर कूड़े – कचरे का ढेर जमा हो गया था. उस पर मक्खी का परिवार रहता था. दोनों परिवारों में गहरी दोस्ती थी.

Swachhata Abhiyan by Kids Hindi Short Story

एक दिन मोहल्ले के कुछ बच्चे हाथ में तैराकी की पोशाक लिए आए. तालाब गन्दा देखा तो लौट गए.

दूसरे दिन तालाब का गन्दा पानी निकाल कर  उसमें साफ पानी भरा जाने लगा. उस समय मच्छरों का परिवार मक्खी के घर मिलने गया था.जब वे लौटे तो उन्हें बड़ा झटका लगा. यह क्या! गंदे पानी की जगह तालाब में साफ पानी चमक रहा था. मच्छर बिना घर -बार के हो गए.उन्हें समझ में न आया कि क्या करें. परिवार की मादा मच्छर रोने लगी. तभी उसे अपनी सहेली मक्खी आती दिखाई दी.

मादा मच्छर ने पूछा – क्या हुआ बहन? तुम क्यों रो रही हो? मक्खी की आँखों में आँसूं थे. वह बोली – अरे कुछ मत पूछो बहन, आज मेरा दिन खराब है. मैं कालोनी के कई घरों में गई. रसोई में घुसी. मुझे कुछ भी खाने को न मिला. आज सबने खाना ढककर रखा था. कहीं फल कटा और खुला न मिला. जूठे बरतन भी नहीं थे. मैं तो भूखी लौट आई. ऐसा रहा तो मैं भूखी ही मर जाउंगी.

मादा मच्छर बोली – यह तो बहुत बुरा हुआ. और देखो न मेरी परेशानी, तालाब में साफ पानी आ गया. अब मैं अंडे कहाँ दूंगी? हमारा परिवार कैसे बढ़ेगा?

तभी मोहल्ले के बच्चों का झुंड उधर आता दिखाई दिया. वे सब विद्यार्थी थे. साफ तालाब देखकर  वे खुश हुए. जब चलने लगे. तभी एकाएक उनकी नजर कूड़े के ढेर पर पड़ी.वे उसके पास जाकर रूक गए. एक ने कहा – यहाँ अभी कूड़े-कचरे का ढेर पड़ा है. कितनी गंदी बदबू आ रही है.

दूसरा बोला – मच्छर और मक्खियों की तो दावत हो रही है.

चलो कल इसकी सफाई कर  देते हैं – कई बच्चे एक साथ बोल पड़े.

मैं एक बाल्टी लाऊंगा – एक लडके ने कहा.

मैं झाड़ू लाऊंगा – दूसरे ने कहा.

मैं ब्लीचिंग पाउडर लाऊंगी – किसी लडकी की आवाज आई.

हाँ, यह ठीक होगा – सबने सहमति जताई.

तो कल सुबह मिलेंगे – कहकर वे लौट गए.

दूसरे दिन दामोदर कालोनी के सभी बच्चे व्यस्त थे. उन्होंने झाड़ू और फावड़े से कूड़े को साफ किया. कचरे को बाल्टी में भरकर कूड़े के डिब्बे में डाला. जगह साफ कर वहाँ ब्लीचिंग पाउडर डाला.

दामोदर कालोनी साफ – सुथरी हो गई. तालाब का गन्दा पानी और कूड़े का ढेर कुछ न बचा. मक्खी ने मच्छरों से कहा – अब हमारे लिए यहाँ खाने-रहने को कुछ नहीं बचा. चलो, किसी नई जगह को ढूंढें. जहाँ हम रोग के कीटाणु लाएं और कालरा फैलाएँ. हम रोग फैलाएँगे. तभी लोग हमसे डरेंगे. मच्छर बोले – और हम लोग भी मलेरिया फैलाएँ.

मादा मच्छर बोली – तब तो मैं वहीं अंडे दूंगी और मेरा बड़ा – सा परिवार होगा.

मक्खी और मच्छरों का झुंड फिर किसी गंदी जगह की खोज में निकल पड़े.

इस कहानी में बच्चों की सक्रियता ने अपने कोलनी को मच्छर मुक्त कर दिया.  इसी तरह से लोग यदि गंदगी के प्रति जागरूक हो जाएँ तो हमारा देश स्वच्छ और सुन्दर बन जाएगा. आइये आज हम सब संकल्प लेते हैं कि हम अपने आसपास को साफ़ सुथरा रखेंगें.

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गोनू झा की बिल्ली मिथिला की कहानी Gonu Jha Cat Mithilanchal Hindi Story

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गोनू झा की बिल्ली मिथिला की कहानी Gonu Jha Cat Mithilanchal Hindi Story

Gonu Jha Cat Mithilanchal Hindi Story/जिस प्रकार बीरबल और तेनालीराम अपनी चतुराई और हाजिरजबाबी के लिये प्रसिद्द हैं उसी तरह से गोनू झा भी मिथिला क्षेत्र में अपनी वाक्पटुता और चतुराई के लिये प्रसिद्द हैं.

Gonu Jha Cat Mithilanchal Hindi Story

गोनू झा के आश्रयदाता राजा बड़े दानी स्वाभाव के थे. राजा को अपने राज के दान विभाग के लिये एक अध्यक्ष की आवश्यकता थी. इसके लिये वे अपने दरबार के सबसे योग्य और ईमानदार दरबारी को नियुक्त करना चाहते थे. जो सुपात्र की पहचान कर उसे अपेक्षित दान कर सके. बहुत सोच विचार करने के बाद राजा को एक युक्ति सूझी.

राजा ने हर दरबारी को एक एक बिल्ली और एक एक भैंस दी. उन्होंने सभी दरबारियों से कहा – ‘आप सबको जो बिल्ली दी गयी है उसे एक साल तक पालना है. उसके लिये ही आपको एक एक भैंस दी जा रही है जिसका दूध बिल्ली को पिलाना है. एक साल के बाद जिसकी बिल्ली सबसे मोटी होगी उसे पुरस्कार दिया जाएगा.’

सभी दरबारी अपनी अपनी बिल्ली और भैंस लेकर चल दिए. सब अपने अपने भैंस का दूध निकाल निकाल कर बिल्ली को पूरे मनोयोग से पिलाने लगे. पुरस्कार की जो बात थी.

गोनू झा भी भैंस को चराने ले जाते, उसका दूध निकालते और सारा दूध बिल्ली को पिला देते. लेकिन गोनू झा को यह सब करना ठीक नहीं लग रहा था. उन्होंने कभी गाय –भैंस चराने का काम नहीं किया था और अब कर रहे थे वह भी बिल्ली को दूध पिलाने के लिये.

वे तो दुखी थे ही, उनकी पत्नी भी उनसे नाखुश रहती थी, क्योकि उनको भी भैंस की सानी पानी करनी पड़ती थी और दूध उबाल उबालकर बिल्ली को पिलाना पड़ता था.

एक दिन उबकर गोनू झा की पत्नी उनसे बोली – “मैं गंगासागर जा रही हूँ. देख लिया आपको भी और आपके राजा को भी. यदि बिल्ली को दूध पिलाते ही जिन्दगी काटनी है तो उससे अच्छा तो गंगासागर में डुबकी लगाकर और बालू फांककर प्राण दे देना. कम से कम स्वर्ग में जगह तो मिलेगी.”

“मैं खुद भी बहुत दुखी हूँ. आप दूध उबालिए. मैं बिल्ली के लिये कुछ उपाय करता हूँ. मेरे दिमाग में एक उपाय आया है.” – गोनू झा ने अपनी पत्नी को समझाते हुए कहा.

गोनू झा का आश्वासन सुन उनकी पत्नी झुंझलाते हुए रसोई में चली गयी. वे कुछ ही देर में खौलता हुआ दूध लेकर गोनू झा के सामने रख दी. गोनू झा ने भी बिना कोई देर किये वह खौलता हुआ दूध बिल्ली को परोस दी. बिल्ली ने जैसे ही अपनी जीभ से दूध को चाटा, वह चिल्लाते हुए वह वहां से भाग गयी. उसके बाद गोनू झा जब ठंडा दूध भी देते तो बिल्ली दूध का कटोरा देखते ही भाग जाती. गोनू झा चाहते भी यही थे. अब रोज भैंस का दूध निकालते और पति पत्नी  ही पीते. अब दूध का सुख पाकर उनकी पत्नी भी खुश रहने लगी.  बिल्ली को थोडा बहुत जूठन और रोटी भात मिल जाता और बिल्ली का भी काम चल जाता था.

धीरे धीरे साल पूरा हो गया. सारे दरबारी अपनी अपनी बिल्ली लेकर राजा के समक्ष प्रस्तुत हुए. सबकी बिल्ली मोटी तजि दीख रही थी लेकिन गोनू झा की बिल्ली की एक एक हड्डी दिख रही थी. गोनू झा की बिल्ली को देख सभी दरबारी खुश हुए क्योंकि उनको लग रहा था कि यह सब देख राजा बहुत नाराज होंगे और गोनू झा को दरबार से निकाल बाहर करेंगे.

जब राजा ने सबकी बिल्ली देखी तो बहुत खुश हुए लेकिन जब उन्होंने गोनू झा की बिल्ली को देखा तो उन्होंने गोनू झा से पूछा – “आपकी बिल्ली मरणासन्न क्यों दिख रही है? आपने इसे दूध नहीं पिलाया क्या?”

“मैं क्या करूँ महाराज! मुझे जो बिल्ली दी गयी उसमे कुछ षड़यंत्र लगता है. मुझे ऐसी बिल्ली दी गयी जो दूध पीना तो क्या उसे देखना भी नहीं पसंद करती. मैं क्या करता. किसी तरह दाल भात खिला कर इसे जिन्दा रखा है मैंने.’ – गोनू झा ने जबाब दिया.

“महाराज गोनू झा की बात सही नहीं लगती. बिल्ली और दूध से भागे ऐसा हो नहीं सकता. दरबार में सबके सामने इसकी परीक्षा होनी चाहिए – एक दरबारी ने गोनू झा की बात पर आश्चर्य प्रकट करते हुए यह बात कही.

राजा ने उस दरबारी की बात पर सहमती जताते हुए बिल्ली के सामने दूध परोसने का आदेश दिया. दूध जैसे ही उसके सामने रखी गयी वह बिल्ली भाग खड़ी हुई और जैसे ही दूसरी बिल्ली को दी गयी वह सारा दूध गटक गयी.

गोनू झा की बात सच साबित हुई लेकिन राजा को यह समझते देर नहीं लगी कि इसमें गोनू झा की कोई करतूत छिपी हुई है.

राजा ने गोनू झा से कहा – आप अपनी परीक्षा में सफल हुए लेकिन दरबार यह जानना चाहता है कि आपने ऐसा क्या किया और क्यों किया जिससे कि बिल्ली दूध से इस प्रकार से विरत हो गयी.

गोनू झा ने सारी बात राजा को बता दी. राजा गोनू झा की बुद्धि के कायल हो गए. उनको दान विभाग का अध्यक्ष बना दिया गया. सारे दरबारी उनकी प्रशंसा करने लगे.

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वर का चुनाव हिंदी कहानी Bridegroom Selection Hindi Story

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वर का चुनाव हिंदी कहानी Bridegroom Selection Hindi Story

यह कहानी यूनान के एक छोटे से स्थान एपिरस की है. एपिरस के पहाड़ी क्षेत्र के पास एक अमीर व्यक्ति ‘अल्क्मन’ अपनी गुणवती और सुशील कन्या ‘पेनिलोप’ के साथ रहता था. उसके पास बहुत सारे पशु थे.

Bridegroom Selection Hindi Story

एक दिन पिता अल्क्मन ने पुत्री से कहा – ‘बेटी! अब तुम विवाह योग्य हो गयी हो. मैं चाहता हूँ कि तुम्हारी शादी तुम्हारी इच्छानुसार हो. बताओ, तुम किससे विवाह करना चाहती पसंद करोगी?’

पेनिलोप ने सोचते हुए कहा- ‘पिताजी! मैं वैसे इंसान से शादी करूंगी जो संसार का सबसे गरीब व्यक्ति होते हुए भी सबसे अमीर हो.’
अल्क्मन को इस प्रकार का अजीब उत्तर सुन बड़ी उलझन और चिंता हुई.

अपने पिता को इस प्रकार उलझन में देख पेनिलोप ने कहा- ‘पिताजी! आप परेशान न होइए. आप सिर्फ इस सन्देश को चारों तरफ भिजवा दीजिये. मुझे लगता है कोई न कोई जरुर आएगा हमारे पास!’

अपनी पुत्री के इच्छानुसार अल्क्मन ने कुछ संदेशवाहकों को चारों दिशाओं में सन्देश फ़ैलाने भेज दिया.
कुछ ही दिनों बाद कई युवक शादी के लिये आये. पेनिलोप सज धज कर बाहर आयी और अपने पिता के पास जा बैठी.

कुछ युवक बड़े सुन्दर लग रहे थे. उन्होंने बहुमूल्य कपडे पहन रखे थे और पीछे खच्चरों पर हीरे जवाहरात लदवाकर लाए थे ताकि उनकी अमीरी दिख सके.
वे बोले – ‘हम तुमसे विवाह की इच्छा रखते हैं. हममें से तुम किसी को पसंद कर लो.’
पेनिलोप ने उनसे पूछा – ‘यह बताओ कि तुम सब धनी होते हुए भी संसार के सबसे गरीब व्यक्ति कैसे हो.’
‘माना कि हम अमीर हैं. फिर भी हमारे पास संसार की बहुमूल्य वस्तु नहीं है. वह हो तुम!’ – वे बोले.

इसके बाद कुछ और वीर योद्धा आगे बढे. उन्होंने बताया कि वे अमीर नहीं हैं. लेकिन उन्होंने वादा किया कि अपनी तलवार के बल पर और अन्य योद्धाओं की मदद से इस संसार को जीत लेंगे और अमीर बन जायेंगे.

‘बिना अन्य योद्धाओं की मदद के तुम सब बेकार हो’. – पेनिलोप ने कहा.

फिर कुछ युवक आगे बढे. उनके हाथों में संदुकची थी. उनमें बहुत अमूल्य रत्न थे. वे रत्न उन्होंने पेनिलोप को भेंट करने चाहे. उसे भेंट करने के बाद वे गरीब हो जाते.
पेनिलोप ने उनसे कहा – ‘ तुम लोग पहले अमीर हुए और बाद में गरीब. एक ही समय में दोनों हालातों में नहीं हो सकते.’

सबसे बाद में एक तंदुरुस्त नौजवान आया. उसने पुराने और बदरंग कपडे पहने हुए थे. उसे देखते ही वहां उपस्थित सभी लोग हंस पड़े. अल्क्मन ने भी मजाक करते हुए कहा – ‘तुम मेरी लड़की से शादी करना चाहते हो. तुम्हारे पास दौलत कहाँ है?’
“मैं अपनी दौलत हमेशा अपने पास रखता हूँ.’ – इतना कहते हुए उसने अपने थैले से एक सुई निकाली.
अल्क्मन के हाथ में उसे थमाते हुए बोला – ‘ मैं सुई से सुन्दर सुन्दर कोट बना सकता हूँ.’

फिर उसने कहा कि वह लुहार भी है. एक घंटे के अन्दर अस्तबल के सारे घोड़ों के पैर में नाल ठोक सकता है. वह अच्छा खाना भी बना सकता है. युवक की ये बातें सुन सभी लोग आश्चर्यचकित हो उसकी तरफ देखने लगे.
अल्क्मन भी मुस्कुरा रहा था. उस युवक के चेहरे पर गर्व के भाव थे.

पेनिलोप उठी और उस युवक के पास जाकर खड़ी हो गयी. फिर अपने पिता अल्क्मन से बोली – ‘पिताजी! इसके पास न रत्न है न यह योद्धा है, इसलिए गरीब है. लेकिन इसके पास बहुत बड़ी दौलत है वह है इसका दिमाग और इसकी काबिलियत. मुझे ऐसे ही युवक की अपने पति के रूप में तलाश थी.’ अल्क्मन ने अपनी बेटी की शादी उसी युवक से कर दी.

इस कहानी का अभिप्राय यह है कि यदि आपके पास ज्ञान या बुद्धि या दिमाग या काबिलियत है तो आपके पास सफलता जरुर आयेगी. इसलिए काबिल बनने का प्रयास करना चाहिए और कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए.

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न्याय हिंदी प्रेरक् कहानी Justice Hindi Motivational Short Story

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रोम का सम्राट एक बार बहुत बीमार पड़ गया. राजा की बीमारी का इलाज करने के लिये बड़े बड़े वैद्यों और चिकित्सकों को बुलाया गया. सबने अपनी अपनी दवाई दी लेकिन राजा की बीमारी ठीक होने का नाम ही नहीं ले रहा था. बीमारी पहले से भी अधिक बढ़ गया था.

Justice Hindi Motivational Short Story न्याय

Justice Hindi Motivational Short Story न्याय

एक दिन एक बुजुर्ग व्यक्ति आया. वह बहुत ही अनुभवी प्रतीत हो रहा था. उसने सम्राट की जांच की. फिर उसने कहा – जान बचाने का एक ही तरीका है. किसी अन्य व्यक्ति के पित्ताशय से दवा बनाकर सेवन कराने के बाद ही सम्राट की जान बच सकती है.’

सम्राट की जान बचाने के लिये राज दरबार के लोग चिकित्सक के साथ एक जीवित व्यक्ति की तलाश में घूमने लगे. आखिर कर एक लड़का मिल गया. उसके माता पिता गरीब थे. चिकित्सक ने उसके पिता को बहुत सारा धन का लालच दिया. पेट की भूख के आगे बेटे का महत्व फीका पड़ गया. बहुत सारा धन लेकर पिता ने अपने पुत्र को चिकित्सक के हाथ बेच दिया. लड़के को दरबार में राजा के पास लाया गया.सम्राट ने अपने मंत्री से राय माँगी. मंत्री ने कहा – ‘सम्राट! मुल्क बड़ी चीज होती है, लेकिन उससे भी बड़ा होता है उसका सम्राट. वह मुल्क की रक्षा करता है और उन्हें हर प्रकार की सुविधाएँ देकर सूखी रखता है. अपनी प्रजा को संतुष्ट रखना ही उसका कर्त्तव्य होता है. देश और लोगों की हिफाजत करनेवाले सम्राट के लिये एक दो जानों की क़ुरबानी कोई अपराध नहीं है.’

बस इतना काफी था. उस खरीदे गए बच्चे को सम्राट के सामने खड़ा कर दिया गया. जल्लाद भी उसका हत्या कर पित्ताशय निकलने को तलवार लेकर आ गया.

चिकिस्तक दवा बनाने के लिये जरुरी सामान लेकर आ गया. बस अब सम्राट के आदेश की प्रतीक्षा भर की देर थी.
उस लड़के ने एक बार आसमान की ओर देखा और जोर जोर से हँसना शुरू कर दिया. सम्राट लड़के के इस व्यवहार से अचरज में पड़ गए. तलवार का वार रुक गया. सम्राट ने उस बालक से पूछा – अपनी मृत्यु सामने देखकर भी तुम इस तरह से हँस क्यों रहे  हो?’

लड़के ने जबाब दिया- ‘ जिस देश में माँ बाप धन के लिये अपने संतान को बेचे, मंत्री बेकसूर मनुष्य की हत्या को सही ठहराए, चिकित्सक मानवता को त्याग सिर्फ धन के लिये चिकित्सा करे, देश और प्रजा की रक्षा करनेवाला राजा दूसरों की हत्या से अपनी जान बचाने की कोशिश करे, वहां तो उपरवाले के न्याय पर ही भरोसा करना पड़ेगा. इसलिए आसमान की ओर देख दीं दुखियों के मालिक से अर्ज कर रहा था. अब उसका न्याय देखना है.’

उस लड़के की यह बात सुनकर सम्राट की आँखें खुल गयी. जल्लाद को वापस भेज दिया गया. सम्राट ने अपनी गलती के लिये उस लड़के से माफ़ी माँगी. उस लड़के को दरबार में रख लिया गया और उसके पढाई लिखाई की उचित व्यवस्था की गयी.

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खुशामदियों का अन्त Khushamdiyon ka Ant Hindi story

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खुशामदियों का अन्त Khushamdiyon ka Ant Hindi story

एक जमाने में लागोस प्रदेश में बतावा जाति का कबीला रहता था. उस कबीले के सरदार का नाम ओकापी था. वह अत्यंत वीर और बलशाली था. उसने आस – पास के जितने कबीले थे, अपने कबीले में मिला लिए. इस प्रकार वह पूरे लागोस प्रदेश का राजा बन गया.

Khushamdiyon ka ant Hindi story

Khushamdiyon ka ant Hindi story

उसने बाकायदा सेना का गठन किया और कबीलों की देख – रेख के लिए कई कर्मचारी नियुक्त किए.
धीरे – धीरे ओकापी के चारों ओर खुशामदी लोगों की भीड़ एकत्र होने लगी. वे बात – बात पर राजा की तारीफ करते ओकापी को यह सब बुरा लगता था. वह वीर प्रकृति का था उसे इस प्रकार की चाटुकारिता तथा खुशामद से सख्त नफरत थी. लेकिन मना करने के बावजूद वे लोग अपनी करनी से बाज नहीं आते थे.

राजा जब अधिक परेशान हो गया तो वह एक दिन अपने गुरू के पास गया. उसका गुरू दूर एक जंगल में कुटिया बनाकर रहता था. ओकापी ने उसके पास जाकर अपनी मनोव्यथा कह सुनाई. गुरू बोला – “सुनो ,मैं तुम्हें एक नुस्खा बताता हूँ.”
यह कहकर गुरू ने उसके कान में कुछ कहा.

ओकापी गुरू की बात सुन अत्यंत प्रसन्न हुआ, उसने गुरू को प्रणाम किया और अपने किले में लौट आया.
दुसरे दिन सबेरे उसने नाश्ते में बैंगन का भुरता बनाने की आज्ञा दी रसोईयों ने बड़ी लग्न से बैंगन का भुरता बनाया और राजा के सम्मुख रख दिया. सचमुच भुरता स्वादिष्ट था. राजा चाव से खाने लगे और बीच – बीच में तारीफ करने लगे.
दरवार में कई खुशामदी लोग बैठे थे. उन्होंने ओकापी को जब भुर्ते की तारीफ करते देखा तो भला वे क्यों चुप रहते. वे भी सब हाँ – में – हाँ मिलाने लगे. कहने लगे – “हाँ, वीर सरदार! बैंगन का भुरता बड़ा स्वादिष्ट होता है. इसके खाने से शरीर अधिक बलशाली होता है.”

ओकापी ने सुना तो उसके होठों पर मुस्कान थिरक आई. वह जोर – जोर से खिलखिलाने लगा.राजा को खिलखिलाते देखा तो खुशामदियों से भी न रहा गया. वे भी जोर -जोर से खिलखिलाने लगे.ओकापी ने नाश्ता खत्म कर लिया और आराम से बैठ गया.
थोड़ी देर के बाद वे पेट पर हाथ फेरने लगे और दर्द से कराहने लगे. खुशामदियों ने अवसर अनुकूल पाया. वे जरा पास खिसक आए और सहानुभूतिपूर्वक कहने लगे – “हे वीर सरदार ! आपको अचानक क्या हो गया ?”
ओकापी बोला – “लगता है, बैगन का भुरता खाने से पेट में दर्द हो गया है. “
खुशामदी कहने लगे – “बैगन का भुरता कभी नहीं खाना चाहिए. यह बड़ी करता है.”
एक और बोला – “ मैं तो वीर सरदार को सुझाव दूंगा कि बैगन की खेती पर ही पाबंदी लगा देनी चाहिए “
एक और ने कहा – “ हाँ, बैगन एक निकुष्ट सब्जी है.”
ओकापी का क्रोध से चेहरा लाल हो गया. वह चीखकर बोला –“ अभी थोड़ी देर पहले तो तुम बैगन की तारीफ करते थकते नहीं थे, अब बुराई शुरू कर दी !”

खुशामदियों का चेहरा उतर आया वे आंख चुराने लगे, एक ने साहस करके कहा – “हे वीर सरदार ! हम तो आपके मन को देखकर बातें करते थे.”
ओकापी बोला – “ दुसरे के मन को देखकर नहीं, हमेशा अपने विवेक को सामने रखकर बात करनी चाहिए. तुम लोग छोटे – छोटे स्वार्थी के लिए खुशामद करते हो, यह ठीक नहीं “
खुशामदी इधर – उधर ताकने लगे.

ओकापी ने अपने सिपाहियों को आदेश दिया कि इन खुशामदियों को लागोस की सीमा से बाहर खदेड़ दिया जाए.

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हरी दूब और पेड़ प्रेरक हिंदी कहानी Green Grass aur Tree Hindi Short Story

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हरी दूब और पेड़ प्रेरक हिंदी कहानी Green Grass aur Tree Hindi Short Story 

एक विशाल आम का पेड़ था. देखने से ही लगता था कि यह पेड़ सदियों पुराना है. एक बार बहुत तेज आंधी तूफ़ान आया.  और वह विशाल आम का पेड़ गिर पड़ा.

Green Grass aur Tree Hindi Short Story

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जिस स्थान पर आम का पेड़ गिरा हुआ था वहीँ पास में बहुत सारी हरी हरी दूब भी थी. तेज हवा के कारण वह सरसरा रही थी. यह देख आम को बहुत आश्चर्य हुआ. आम इस लिये हैरान था कि इतनी तेज आंधी तूफान में भी इस दूब का कुछ नहीं बिगड़ा.

उसने आम से पूछा – क्यों दूब बहन!  एक बात बताओ.  आंधी ने मुझ जैसे शक्तिशाली और पुराने पेड़ को गिरा दिया लेकिन तुम्हारा बाल भी बांका न कर सका. ऐसा क्यों? तुम्हारी इस शक्ति का क्या रहस्य है? जरा मुझे भी बताओ.’

इस पर दूब ने कहा – इसमें रहस्य की कोई बात नहीं है. बस छोटी सी बात है. जब तेज हवा या आंधी चलती है तो तुम अपना सीना ताने खड़े रहते हो, जरा भी झुकना पसंद नहीं करते हो. मेरा क्या, जैसे ही तेज हवा चलती है मैं झुक जाती हूँ और उसके जाने के बाद आराम से लहलहाने लगती हूँ.

बस इसी वजह से बड़ी से बड़ी आंधी मुझे उखाड़ नहीं पाती.’

इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि झुकना कोई बुरी बात नहीं है. जब इन्सान का समय अच्छा नहीं हो, यानि आंधी तूफ़ान जैसे हालात हों तो देश काल के हिसाब से निर्णय लेकर पीछे हटने में कोई बुराई नहीं है.

हरी दूब से हमें यही सीख मिलती है. प्रायः ऐसा देखा जाता है कि छोटी छोटी बातों को लेकर दो लोग आपस में भीड़ जाते हैं और दोनों अपने अपने जिद के चलते अड़ जाते हैं और पीछे हटने का नाम नहीं लेते.

इसका परिणाम यह होता है कि दोनों का नुकसान होता है, दोनों मानसिक रूप से परेशां रहते हैं, कई बार तो विवाद इतना बढ़ जाता है कि मामला कोर्ट कचहरी में चला जाता है.नतीजा कुछ नहीं निकलता.

इसलिए लोगों को झुकना सीखना चाहिए. झुक्नेवाले लोग कमजोर नहीं होते बल्कि वे होशियार माने जाते हैं.

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काम की दवा प्रेरक हिंदी कहानी

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काम की दवा प्रेरक हिंदी कहानी 

खाली दिमाग शैतान का घर कहा जाता है. वहाँ ऊल-जलूल विचारों का प्रवेश हो जाना भी सहज होता है. प्रस्तुत कहानी द्वारा यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि सद्विचार और कर्म मनुष्य की लिये क्यों बहुत आवश्यक है.

Kaam Ki Davaa Motivational Hindi Story

Kaam Ki Davaa Motivational Hindi Story

एक धनाढ्य सेठ का एकलौता बेटा गुजर गया सेठ को बहुत दुःख हुआ. अपनी विधवा पुत्रवधू को जब –जब देखता उसके दिल में होली जलाने लगती. पर उपाय भी क्या था ? पुत्रवधू को दुखियारी समझ कर सास भी उससे कोई काम नहीं करवाती थी. बहू सारे दिन हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती. ऐसा होते – होते उसकी चढ़ती जवानी ने उसे पथभ्रष्ट हो जाने पर विवश कर दिया. मौका देखकर उसने अपनी निकट की दासी से उसे किसी पुरुष से मिलने को कह दिया.

बात के भी पर होते है. जब इस बात का भेद सेठ को मालूम हुआ तो वह बहुत ही चिंतित हुआ और अपनी  इज्जत का विचार करके एक दिन सेठानी से कहा – ”तुम दुलार के कारण बहू से कुछ कम नहीं करवाती.  निकम्मा आदमी क्या करे ? आज से तुम उससे कुछ काम करवाया करो.” और फिर बहू को सुना कर बोला – ’’ सुना है हमारी बहू रसोई बनाने में बहुत निपुण है. मैंने आज तक उसके हाथ की रसोई नहीं खाई.  आज शाम मै उसी के हाथ का बनाया भोजन करूंगा.”

अपनी प्रशंसा सुनकर बहू फूल गई और रसोई बनाने लगी. धीरे – धीरे वह इतनी व्यस्त रहने लगी कि सारा चिन्तन –मनन ही भुल गई. एक दिन सेठ ने दासी द्वारा बहू से गुप्तरूप से पुछवाया – ”अब बहू को किसी पुरूष की जरूरत है क्या?” उसने तपाक से कहा – ” अब मुझे किसी की जरूरत नहीं है. मुझे जो चाहिए था, वह आलंबन काम और सद विचार मुझे मिल गए हैं.”

वास्तव में काम की दवा काम है और कुविचार की दवा सद्विचार है. इसलिए मनुष्य को सदैव अच्छे कार्य करना चाहिए और मन में बुरे विचार की जगह अच्छे विचार को जगह देनी चाहिए.

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जीवन की चुनौती प्रेरक कहानी Struggleful Life Hindi Motivational Story

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जीवन की चुनौती प्रेरक कहानी Struggleful Life Hindi Motivational Story

किसी गांव में एक बूढी औरत रहती थी. वह अत्यंत गरीब थी. उसका पति लंबे समय से किसी लाइलाज बीमारी से जूझ रहा था. वह दिन-रात उसकी सेवा करती और मेहनत-मजदूरी कर अपना और अपने पति का भरण –पोषण करती थी.

Struggleful Life Hindi Motivational Story

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गाँव के लोग उसकी दशा पर मौखिक सहानुभूति तो व्यक्त करते थे, पर कोई ठोस मदद नहीं करते थे, हालांकि वह वृद्धा किसी के आगे हाथ फैलाना नहीं चाहती थी. एक दिन वह जंगल में लकड़ियाँ काटने गई दिनभर वह किसी तरह लकड़ियाँ काटती रही. जब लकड़ियाँ जमा हो गई तो वह उन्हें उठाने लगी, पर वह लकड़ियों के उस गट्ठर को उठाने में स्वयं को असमर्थ पा रही थी. परेशान होकर वह वहीं बैठ गई. उसका मन खिन्न हो गया. वह उठकर अपने भाग्य को कोसने लगी और मन ही मन कहने लगी, ‘ऐसे जीवन को जीने का क्या फायदा? अच्छा है, अभी मेरी मृत्यु हो जाए. इस रोज-रोज के जंजाल से तो पीछा छूटेगा. हे भगवान, मुझे जल्दी उठा लो.”

Struggleful Life Hindi Motivational Story

तभी उसने देखा कि उसके सामने मृत्यु आ खडी हुई है और कह रही है, “चलो उठो तुम्हारी पुकार मैंने सुन ली है. अब मैं तुम्हें लेने आ गई हूँ.” मृत्यु को सामने देख कर वह बूढी औरत चौंक गई. उसने मृत्यु से कहा, “नहीं, नहीं मुझे नहीं मरना है. मैं मर गई तो मेरे बीमार पति की देखभाल कौन करेगा? फिर मैं अभी इतनी कमजोर भी नहीं हूँ कि कुछ काम न कर सकूं अभी मुझमें दमखम बाकी है. मैं अभी जीना चाहती हूँ. मुझे अभी बहुत काम करने हैं, तुम कृपया मुझे छोड़ दो.”

उसके ऐसा कहते ही मृत्यु चली गई. वह बूढी औरत उठी, उसने दम लगाकर लकड़ियों का गट्ठर उठाया, उसे सिर पर रखा और घर चली आई. वह समझ नहीं पा रही थी कि जो कुछ अभी-अभी हुआ, वह कोई सपना था या सच. लेकिन उसे इस बात का अहसास हो गया था कि जीवन से भागना समस्या का समाधान नहीं है. जीवन की चुनौतियों को स्वीकार कर उनसे जूझना और अपना कर्म करते रहना ही प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है.

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ईश्वर की धरोहर हिंदी कहानी Ishwar kee Dharohar Hindi Short Story

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ईश्वर की धरोहर हिंदी कहानी Ishwar kee Dharohar Hindi Short Story

अपने प्रियजन की मृत्यु हो जाने पर सामान्यत: यह उपदेश सुनने को मिलता है. भगवान ने जीवन दिया था, भगवान ने ही वापस ले लिया. दुःख के समय ऐसे उपदेश को कुछ लोग तो ग्रहण करते हैं लेकिन कुछ ऐसे सुनकर सामान्य नहीं हो पाते. कभी –कभी महत्वपूर्ण यह हो जाता है कि उपदेश कौन दे रहा है, किस प्रकार दे रहा है और ग्रहण करने वाला किस मानसिकता में है.

Ishwar kee Dharohar Hindi Short Story

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इस संबंध में यह  कहानी  बहुत प्रासंगिक है. यह कहानी है एक भक्त परिवार के सम्बन्ध में. पति – पत्नी आस्तिक थे और उनको  भगवान पर पूरा विश्वास था. उनका पुत्र कई दिनों से बीमार चल रहा था. एक दिन पति किसी काम से बाहर गया हुआ था. उसी समय उनका इकलौता पुत्र चल बसा. पत्नी ने धैर्यपूर्वक बेटे के शव को ढंक दिया और पति के लिए भोजन बनाने में लग गई. पति ने आते ही पूछा, “पुत्र की क्या दशा है?” पत्नी बोली, “आज वह पूरा विश्राम कर रहा है. आप भोजन कर  लीजिए.”

भोजन कराते हुए पत्नी ने कहा, “पड़ोसन ने मुझसे एक वर्तन में पानी माँगा था, जो मैंने उसे दे दिया. अब मैं अपना वर्तन माँग रही हूँ तो वह देना नहीं चाहती. उल्टे रोने –चिल्लाने लगती है. पति ने कहा, “बड़ी मूर्ख है वह. दूसरे  की वस्तु लौटाने में रोने का क्या काम?” तब तक पति भोजन से निवृत हो चुका था. तभी पत्नी ने कहा, “अपना पुत्र भी प्रभु की धरोहर था. आज प्रभु ने अपनी वस्तु ले ली है तो क्या हम रोकर मूर्ख बनें?”

पति ने गंभीरतापूर्वक अपनी पत्नी की ओर देखा सारा माजरा समझ में आने पर उसने कहा, “तुम ठीक कहती हो.” और फिर दोनों ने अपने पुत्र का धैर्यपूर्वक दाह – संस्कार किया. यह कहानी हमें यह बताती है कि यह मनुष्य जीवन ईश्वर की धरोहर मात्र है. अतः इसके छिन जाने पर हमें संवेदनाओं से पूर्णत: तो मुक्त नहीं होना चाहिए, किन्तु अवसाद में भी नहीं डूबना चाहिए.

एक अन्य प्रसंग:

इसी सम्बन्ध में श्री कृष्ण और अर्जुन का संवाद अति प्रसिद्द है. जब महाभारत की लड़ाई में अभिमन्यु का वध हो जाता है तो अर्जुन विक्षिप्त हो जाते हैं. अभिमन्यु को लेकर विलाप करने लगते हैं. तब श्री कृष्ण उनको अभिमन्यु के पास ले जाते हैं.  वहां क्या होता है, यह आप सबको पता ही होगा. यदि हम किसी भी चीज को ईश्वर की धरोहर समझे तो उसके प्रति हमारे मन में मोह उत्पन्न होगा ही नहीं.

 

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