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पद चिह्न Hindi Kahani Story

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पद चिह्न HIndi Kahani Story

कल रात मयंक ने एक स्वप्न देखा. उसने देखा कि अभी उसके सुख के दिन चल रहे हैं. वह समुद्र तट के किनारे बिखरे रेत पर चला जा रहा था. जहाँ –जहाँ भी वह जा रहा था, वहाँ–वहाँ उसके पद चिह्न रेत पर बनते जा रहे थे. लेकिन एक चमत्कारिक बात थी. रेत पर एक जोड़ी के स्थान पर दो जोड़ी पद चिह्न दिख रहे थे. मयंक सोचा, यह दूसरा पद चिह्न किसका है ईश्वर का! अर्थात वह जहाँ–जहाँ भी गया ईश्वर उसके साथ थे.
अब वह आगे स्वप्न देखता है. वह मुसीबत में है. उसके लिए यह विपत्ति की घड़ी है. वह फिर रेत पर चला जा रहा है. अरे यह क्या? अभी तो सिर्फ एक जोड़ी पद चिह्न बन रहे हैं! यह क्या जब मैं संकट में हूँ तो ईश्वर ने मेरा साथ छोड़ दिया क्या? यह देख कर मयंक को अत्यन्त दुःख हुआ कि ऐसे समय में रेत पर केवल एक जोड़ी पैरों के निशान ही दिख रहे थे. उसने ईश्वर से शिकायत की – हे ईश्वर ऐसा क्यों? विपत्ति के समय में आपने मेरा साथ क्यों छोड़ दिया? जब मेरे खुशहाली के दिन थे,जब मैं प्रसन्न था तब तब तो आप मेरे साथ थे और विपत्ति में आपने मुझे क्यों छोड़ दिया?
इस पर ईश्वर ने उत्तर दिया,” अरे पगले, मैंने संकट में भी तेरा साथ नहीं छोड़ा. जब तूने सुख के समय में मेरा साथ नहीं छोड़ा तो मैं संकट के समय में तेरा साथ कैसे छोड़ सकता हूँ?”
“फिर संकट और विपत्ति के समय में मुझे सिर्फ एक जोड़ी पद चिह्न ही क्यों दिखे?” मयंक ने पूछा.
“पुत्र ! संकट के समय मैंने तुम्हें अपनी गोद में उठाया हुआ था, ” ईश्वर ने उत्तर दिया. अतः सिर्फ मरे पद चिह्न ही रेट पर बने.

अतः हमें सुख या दुःख कोई भी स्थिति हो हमेशा ईश्वर को याद करते रहना चाहिए. वे सदैव हमारे साथ होते हैं.

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आत्म परिष्कार Hindi Kahani story

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आत्म परिष्कार Hindi Kahani story

यह कहानी कर्नाटक एक प्रसिद्ध संत श्री चिदंबर दीक्षित के जीवन से जुड़ी है.
एक बार एक महिला जो निःसंतान थी उनसे ‘माँ ‘बनने का आशीर्वाद लेने पहुँची. पंडित दीक्षित ने उस महिला को दो -तीन मुट्ठी चने देकर एक कोने में बैठने को कहा. कुछ देर बाद पंडित दीक्षित जी ने देखा कि सड़क पर खेलते हुए कुछ बच्चे उसके पास आये और उस महिला से चने मांगा. लेकिन महिला ने अपनी मुंह दूसरी तरफ फेर ली. बेचारे बच्चे कातर भाव से उसकी ओर देखते रहे.
यह दृश्य देखकर पंडित दीक्षित उस महिला से बोले -“ जब तुम मुफ्त में मिले चनों को बाँटने में इतनी कठोरता दिखा सकती  हो तो भगवान से यह कैसे आशा करती हो कि वे अपनी एक प्यारी आत्मा को तुम्हारे घर भेज देंगे. पहले अपने में ममता और करुणा लाओ, जब सही पात्रता तुम्हारे अंदर आएगी तभी परमात्मा का अनुदान भी तुम्हे मिले पायेगा.’
उस महिला की आँखे खुल गईं और उसने अपना आत्म परिष्कार करने का वचन पंडित दीक्षित को दिया.
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सबसे बड़ा दाता Sabse Bada Daata Hindi Short Story

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सबसे बड़ा दाता Sabse Bada Daata Hindi Short Story

राजपुर नगर में दो व्यक्ति शामू और झामु रहते थे. दोनों ही थोड़े आलसी थे और भाग्य पर विश्वास करते थे. शामू कहता – यदि राजा विक्रम सिंह मुझे कुछ देता है तो गुजारा हो जाता है अन्यथा मेरे पास कुछ भी नहीं है. झामु कहता – भगवान भोलेनाथ मुझे कुछ देते हैं तो मेरा गुजारा हो जाता है नहीं तो मेरे पास तो कुछ भी नहीं.

एक दिन राजा ने दोनों को बुलाया और यह बातें उनके मुंह से सुनी.

राजा विक्रम सिंह ने एक गोल कद्दू मंगाया और उसके बीज निकाल कर शामू को दे दिया जिसका मानना था कि राजा ही उसे जो कुछ देता है उसी से उसका गुजारा होता है. राजा को भी लगने लगा कि सच में वही दाता है.

शामू उस कद्दू को पाकर बड़ा खुश हुआ और बाजार में जाकर उसे चार पैसे में बेच आया. थोड़ी देर बाद उधर से झामु गुजरा जो सोचता था कि भगवान् शिव ही उसे जो कुछ देते हैं उसी से उसका गुजारा होता है. झामु ने वह कद्दू छह पैसे में खरीद ली.

कद्दू लाकर जब उसे सब्जी बनाने के लिए काटा तो पैसों की बारिश होने लगी. उसे बड़ा आश्चर्य हुआ. बात राजा तक पहुंची. राजा का घमंड टूट चुका था. सारी बातें जानने के बाद उसने कहा – भगवान् ही असली दाता हैं. उनसे बड़ा कोई नहीं. उसे इसका बोध हो चुका था.

यह कथा कर्नाटक की एक प्रसिद्द लोक कथा है

 

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श्रम और वेतन हिंदी कहानी Shram Aur Vetan Hindi Short Story

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श्रम और वेतन हिंदी कहानी Shram Aur Vetan Hindi Short Story

दिव्यपुर राज्य में एक बहुत ही अच्छा राजा राज करता था. वह अपनी प्रजा को अपनी संतान की तरह चाहता था. वह अमीर – गरीब में कोई भेद नहीं करता था. वह सबकी शिकायतों को ध्यान से सुनता था.

एक बार राज्य का एक लकडहारा ने राजा से शिकायत की :- “महाराज! आप कहते हैं कि आप सब मनुष्यों से समान रूप से व्यवहार करते हो. मैं दिन भर कठिन परिश्रम करके एक दो रूपये मजदूरी पाता हूँ जबकि आपका एक राज कर्मचारी न कोई खास काम करता है, दिन भर धूप सेंकता है फिर भी वह 5000 रूपये पाता है. हममें इतना अंतर क्यों?”

तभी राजा ने देखा कि सामने एक गाड़ी जा रही थी. राजा ने उस लकडहारे से कहा :- जाओ और उस गाड़ीवाले से पूरी सुचना लेकर आओ.

लकडहारा खुश हो गया. मन ही मन सोचा भला यह भी कोई काम है. उस गाड़ीवाले से पूछ कर आया और राजा को आकर बताया – महाराज उस गाड़ी में चावल जा रहा है. राजा ने कहा सो तो ठीक है लेकिन वह जा कहाँ रहा है. लकडहारा फिर पूछने गया और पूछकर आया और बताया – महाराज वह अगले शहर को जा रहा है.

राजा ने पूछा – और चावल लेकर आ कहाँ से रहा है. लकडहारा बोला – अभी पूछकर आता हूँ. इस तरह से 10 बार में लकडहारा 10 बात पूछकर आया और भागता रहा.

अब राजा ने अपने एक राज कर्मचारी को बुलाया और कहा :- अभी यहाँ से चावल से लदी एक गाडी गई है. जाइए और उसके बारे में सूचना लेकर आइए.

उस कर्मचारी ने राजा से कहा – जी महाराज कुछ देर पहले मैंने उस गाड़ी को जाते देखा था. मैंने पूरी जानकारी ले ली थी. वह पिछले नगर से आयी थी और अगले नगर को जा रही थी. वह 2 रूपये किलो वाली बासमती चावल थी. कुल 32 बोरी थी. मालिक का नाम शेखरन था. वह 40 वर्ष का था. उसने राज कर का भुगतान भी कर दिया था.

लकडहारा उस कर्मचारी की बातें सुन हैरान था.

राजा ने लकडहारे की तरफ देखा. वह चुपचाप राजा को देखे जा रहा था.

इसलिए योग्य व्यक्ति को हमेशा ज्यादा मान सम्मान और पारिश्रमिक मिलता रहा है.

 

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गुनहगार हिंदी लघु कथा GunahGar Hindi Short Story

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गुनहगार हिंदी लघु कथा GunahGar Hindi Short Story

एक चोर रात के समय किसी मकान की खिड़की से भीतर जाने लगा कि खिड़की की चौखट टूट जाने से गिर पड़ा और उसकी टांग टूट गयी. अगले दिन उसने अदालत में जाकर अपनी टांग के टूटने का दोष उस मकान के मालिक पर लगाया.

मकान -मालिक को बुलाकर पूछा गया, तो उसने अपनी सफाई में कहा – “इसका जिम्मेदार वह बढई है ,जिसने खिडकी बनाई. बढई को बुलाया गया, तो उसने कहा – “मकान बनाने वाले ठेकेदार ने दीवार का खिड़की वाला हिस्सा मजबूत नहीं बनाया था. ‘ वह इसके लिए जिम्मेदार है.

ठेकेदार ने अपनी सफाई देते हुए कहा – ‘मुझसे यह गलती एक औरत की वजह से हुई, जो वहां से गुजर रही थी. उसने मेरा ध्यान अपनी तरफ खीच लिया था.

जब उस औरत को अदालत में पेश किया गया, तो उसने कहा -‘उस समय मैंने बहुत बढ़िया लिबास पहन रखा था. आम तौर पर मेरी तरफ किसी की नजर उठती नहीं है. सो, कसूर उस लिबास का है कि जो इतना बढ़िया सिला हुआ था.

न्यायाधीश ने कहा – ‘तब तो उसे सीने वाला दरजी मुजरिम हुआ. उसे अदालत में हाजिर किया जाए.

वह दरजी उस स्त्री का पति निकला और वही वह चोर भी था, जिसकी टांग टूटी थी.

आज के परिवेश में लोग अपनी जिम्मेदारी दूसरे पर डालने लगे हैं. लेकिन उन्हें पता नहीं कि यह आधुनिक परिवेश कहीं न कहीं सबसे पहले उन्हें ही नुकसान पहुचाता है. इसलिए हमें हमेशा यथार्थ मार्ग का अनुसरण करना चाहिए. यह मार्ग थोड़ा कठिन जरुर है लेकिन इसके पथिक को मंजिल मिलती है जरुर!

 

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चार मूर्ख Four Foolish Hindi Lok katha

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चार मूर्ख Four Foolish Hindi Lok katha

यह काशी की प्रसिद्ध लोक कथा है. काशी अर्थात बाबा विश्वनाथ की नगरी!  बड़े बड़े राजा कभी कभी ऐसे अटपटे काम कर देते हैं जिनको जानकर बहुत आश्चर्य होता है.

एक बार काशी नरेश ने अपने मंत्रियों  को यह आदेश दिया कि जाओ और तीन दिन के भीतर चार मूर्खों को मेरे सामने पेश करो. यदि तुम ऐसा नहीं कर सके तो तुम सबका  सिर कलम कर दिया जाएगा.

पहले तो मंत्री जी थोड़े से घबराये लेकिन मरता क्या न करता. राजा का हुक्म जो था. ईश्वर का स्मरण कर मूर्खों की खोज में चल पड़े.

कुछ मील चलने के बाद उसने एक आदमी को देखा. वह आदमी गदहे पर सवार था और सिर पर एक बड़ी सी गठरी उठाये हुए था. मंत्री को पहला मूर्ख मिल चुका था. मंत्री ने चैन की सांस ली.

कुछ और आगे बढ़ने पर दूसरा मूर्ख भी मिल गया. वह लोगों को लड्डू बाँट रहा था. पूछने पर पता चला कि शत्रु के साथ भाग गयी उसकी बीबी ने एक बेटे को जन्म दिया था जिसकी ख़ुशी में वह लड्डू बाँट रहा था.

दोनों मूर्खों को लेकर मंत्री राजा के पास पहुंचा.

राजा ने पूछा – ये तो दो ही हैं? तीसरा मूर्ख कहाँ है?

“महाराज वह मैं हूँ. जो बिना सोचे समझे मूर्खों की खोज में निकल पड़ा. बिना कुछ सोचे समझे आपका हुक्म बजाने चल पड़ा.”

और चौथा मूर्ख ?

“क्षमा करें महाराज? वह आप हैं. जनता की भलाई और राज काज के काम के बदले आप मूर्खों की खोज को इतना जरुरी काम मानते हैं.”

राजा की आँखें खुल गयी और उनसे अपने मंत्री से क्षमा मांगी.

 

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अमरूद हिंदी कहानी Amrud Hindi kahani Story

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अमरूद हिंदी कहानी Amrud Hindi kahani Story

एक गाँव में दो भाई थे विजय और अजय. दोनों भाई में खूब प्रेम थे और उनका परिवार काफी खुशहाल और साथसाथ था. दोनों भाइयों को एक एक बेटा था. एक दिन विजय को उसके बेटे और भतीजे ने दोनों आकर कहा – “पापा चलो न अमरुद के पेड़ पर दो अमरुद हैं उसे तोड़ दो न. हमें खाना है.” अजय वहीँ पास में बैठा कुछ काम कर रहा था. विजय ने एक बड़ा सा डंडा लिया और लगा अमरुद तोड़ने. पेड़ पर दो ही अमरुद थे. उसने दोनों अमरुद तोड़ लिए. उसमें एक अमरुद थोड़ा ज्यादा पका था और दूसरा थोड़ा कच्चा था. उसने एक अमरुद अपने दायें हाथ में और दूसरा अमरुद बाएं हाथ में पकड़ रखा था. दोनो बच्चे भागते हुए आये. दायें हाथ में पका अमरुद था जिधर उसका भतीजा आया और बाएं हाथ में कच्चा अमरुद था जिधर उसका बेटा था. विजय ने झट से अपने हाथों को क्रॉस कर दिया जिससे पका अमरुद उसके बेटे को मिल गया और कच्चा अमरुद उसके भतीजे को मिला. अजय भी यह सब कुछ देख रहा था. उसी समय वह अपने भाई के पास आया और बोला भाई साहब! अब आपके नीयत में बदलाव आ गयी है, इसलिए हम अपना अपना गृहस्थी अलग कर लेते हैं. इस प्रकार एक अमरुद के चक्कर में परिवार टूट गया. कभी कभी छोटी छोटी बातों से भी बड़ा नुकसान होता है और सालों से साथ चल रहा परिवार टूट जाता है.
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अहंकार उन्नति के सारे रास्ते बंद कर देता है Ahankar Ego Hindi Story

अहंकार उन्नति के सारे रास्ते बंद कर देता है Ahankar Ego Hindi Story 100+ hindi story kahaniyan short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

अहंकार उन्नति के सारे रास्ते बंद कर देता है Ahankar Ego Hindi Story

एक मूर्तिकार था. उसकी बनाई मूर्तियां दूर-दूर तक प्रसिद्ध थीं. उसने अपने बेटे को भी मूर्तिकला सिखाई. वह भी अपने पिता के समान ही परिश्रमी और कल्पनाशील था. अत: जल्दी ही वह इस कला में पारंगत हो गया और सुंदर-सुंदर मूर्तियां बनाने लगा.
Ahankar Ego Hindi Story
लेकिन मूर्तिकार अपने पुत्र द्वारा बनाई गई मूर्तियों में कोई न कोई कमी निकाल देता. इस तरह कई वर्ष गुजर गए. सब उसकी तारीफ करते, लेकिन उसके पिता का व्यवहार नहीं बदला. इससे पुत्र दुखी और चिंतित रहने लगा.
एक दिन उसे एक उपाय सूझा. उसने एक आकर्षक मूर्ति बनाई और अपने एक मित्र के हाथों उसे अपने पिता के पास भिजवाया. उसके पिता ने यह समझकर कि मूर्ति उसके बेटे के मित्र ने बनाई है,उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की.
तभी वहां छिपकर बैठा उसका पुत्र सामने आया और गर्व से बोला, यह मूर्ति तो मैंने बनाई है. आखिरकार यह मूर्ति आपको पसंद आ ही गई और आप इसमें कोई खोट नहीं निकाल पाए. मूर्तिकार बोला – बेटा मेरी एक बात गांठ बांध लो. अहंकार व्यक्ति की उन्नति के सारे रास्ते बंद कर देता है. आज तक मैं तुम्हारी बनाई मूर्तियों में कमियां निकालता रहा, इसलिए आज तुम इतनी अच्छी मूर्ति बनाने में सफल हो पाए हो. यदि मैं पहले ही कह देता कि तुमने बहुत अच्छी मूर्ति बनाई है तो शायद तुम अगली मूर्ति बनाने में पहले से ज्यादा ध्यान नहीं लगाते.
यह सुनते ही पुत्र लज्जित हो गया. इसका सारांश यह है कि कला के क्षेत्र में पूर्णता की कोई स्थिति नहीं होती. उत्तरोत्तर सुधार से ही श्रेष्ठता प्राप्त की जा सकती है.
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अवसर हिंदी कहानी Opportunity Avasar Hindi Kahani Story

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अवसर हिंदी कहानी Opportunity Avasar Hindi Kahani Story

एक युवक एक किसान की बेटी से शादी की इच्छा लेकर किसान के पास गया. किसान ने उसकी ओर देखा और कहा, ” युवक, खेत में जाओ. मैं एक- एक करके तीन बैल छोड़ने वाला हूँ. अगर तुम तीनों बैलों में से किसी भी एक की पूँछ पकड़ लो तो मैं अपनी बेटी की शादी तुमसे कर दूंगा.”युवक खेत में बैल की पूँछ पकड़ने की मुद्रा में खड़ा हो गया. किसान ने खेत में स्थित घर का दरवाजा खोला और एक बहुत ही बड़ा और खतरनाक बैल उसमे से निकला. युवक ने ऐसा बैल पहले कभी नहीं देखा था. उससे डर कर युवक ने निर्णय लिया कि वह अगले बैल का इंतज़ार करेगा और वह एक तरफ हो गया जिससे बैल उसके पास से होकर निकल गया.
दरवाजा फिर खुला. आश्चर्यजनक रूप से इस बार पहले से भी बड़ा और भयंकर बैल निकला. युवक ने सोचा कि इससे तो पहला वाला बैल ठीक था. फिर उसने एक ओर होकर बैल को निकल जाने दिया.
दरवाजा तीसरी बार खुला. युवक के चहरे पर मुस्कान आ गई. इस बार एक छोटा और मरियल बैल निकला. जैसे ही बैल युवक के पास आने लगा, युवक ने उसकी पूँछ पकड़ने के लिए मुद्रा बना ली ताकि उसकी पूँछ सही समय पर पकड़ ले. पर उस बैल की पूँछ थी ही नहीं.
इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि जिन्दगी अवसरों (opportunities) से भरी हुई है. कुछ सरल हैं और कुछ कठिन. पर अगर एक बार अवसर गवां दिया तो फिर वह अवसर दुबारा नहीं मिलेगा. अतः हमेशा प्रथम अवसर को हासिल करने का प्रयास करना चाहिए.
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मोर और कौआ हिंदी कहानी Hindi kahani Story

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मोर और कौआ हिंदी कहानी Hindi kahani Story

एक दिन कौए ने जंगल में मोरों की बहुत- सी पूंछें बिखरी पड़ी देखीं. वह
मोर और कौआ हिंदी कहानी

मोर और कौआ हिंदी कहानी

अत्यंत प्रसन्न होकर कहने लगा- वाह भगवान! बड़ी कृपा की आपने, जो मेरी पुकार सुन ली. मैं अभी इन पूंछों से अच्छा खासा मोर बन जाता हूं. इसके बाद कौए ने मोरों की पूंछें अपनी पूंछ के आसपास लगा ली. फिर वह नया रूप देखकर बोला- अब तो मैं मोरों से भी सुंदर हो गया हूं. अब उन्हीं के पास चलकर उनके साथ आनंद मनाता हूं. वह बड़े अभिमान से मोरों के सामने पहुंचा. उसे देखते ही मोरों ने ठहाका लगाया. एक मोर ने कहा- जरा देखो इस दुष्ट कौए को. यह हमारी फेंकी हुई पूंछें लगाकर मोर बनने चला है. लगाओ बदमाश को चोंचों व पंजों से कस-कसकर ठोकरें. यह सुनते ही सभी मोर कौए पर टूट पड़े और मार-मारकर उसे अधमरा कर दिया.

कौआ भागा-भागा अन्य कौए के पास जाकर मोरों की शिकायत करने लगा तो एक बुजुर्ग कौआ बोला- सुनते हो इस अधम की बातें. यह हमारा उपहास करता था और मोर बनने के लिए बावला रहता था. इसे इतना भी ज्ञान नहीं कि जो प्राणी अपनी जाति से संतुष्ट नहीं रहता, वह हर जगह अपमान पाता है. आज यह मोरों से पिटने के बाद हमसे मिलने आया है. लगाओ इस धोखेबाज को.
इतना सुनते ही सभी कौओं ने मिलकर उसकी अच्छी धुलाई की.
कहानी का सन्देश यह  है कि ईश्वर ने हमें जिस रूप और आकार में बनाया है, हमें उसी में संतुष्ट रहकर अपने कर्मो पर ध्यान देना चाहिए. कर्म ही महानता का द्वार खोलता है.
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