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आंवला की खेती Amla Farming

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आंवला की खेती

आंवला की खेती Amla Farming

सामान्य जानकारी: आँवला युफ़ोरबिएसी परिवार का पौधा है। यह भारतीय मूल का एक महत्वपूर्ण फल है। भारत केविभिन्न क्षेत्रों में इसे विभिन्न नामों, जैसे, हिंदी में ‘आँवला’, संस्कृत में ‘धात्री’ या ‘आमलकी’, बंगाली एवं उड़ीया में, ‘अमला’ या ‘आमलकी’, तमिल एवं मलयालम में, ‘नेल्ली’, तेलगु में ‘अमलाकामू, गुरुमुखी में, ‘अमोलफल’, तथा अंग्रेजी में ‘ऐम्बलिक’, ‘माइरोबालान’ या इंडियन गूजबेरी के नाम से जाना जाता है। अपने अद्वितीय औषधीय एवं पोषक गुणों के कारण, भारतीय पौराणिक साहित्य जैसे वेद, स्कन्दपुराण, शिवपुराण, पदमपुराण, रामायण, कादम्बरी, चरक संहिता, सुश्रुत संहिता में इसका वर्णन मिलता है। महर्षि चरक ने इस फल को जीवन दात्री अथवा अमृतफल के समान लाभकारी माना है। अतः इसे अमृत फल तथा कल्प वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है। आँवले की विशेषतायें हैं, प्रति इकाई उच्च उत्पादकता (15-20 टन/हेक्टेयर), विभिन्न प्रकार की भूमि (ऊसर, बीहड़, खादर, शुष्क, अर्धशुष्क, कांडी, घाड़) हेतु उपयुक्तता, पोषण एवं औषधीय (विटामिन सी, खनिज, फिनॉल, टैनिन) गुणों से भरपूर तथा विभिन्न रूपों में (खाद्य, प्रसाधन, आयुर्वेदिक) उपयोग के कारण आँवला 21वी सदी का प्रमुख फल हो सकता है। धर्म परायण हिन्दू इसके फलों एवं वृक्ष को अत्यंत पवित्र मानते हैं तथा इसका पौराणिक महत्व भी है। ऐसा कहा जाता है कि यदि कार्तिक मास में इसके वृक्ष के नीचे बैठ कर विष्णु की पूजा की जाये तो स्वर्ग की प्राप्ति होती है। यदि तुलसी का पौधा नहीं मिले तो भगवान विष्णु की पूजा आँवले के वृक्ष के नीचे बैठ कर की जा सकती है। हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि आँवले के वृक्ष के नीचे पिण्ड दान करने से पितरों को मुक्ति प्राप्त होती है। हिन्दू धर्म के अनुसार कार्तिक मास में कम से कम एक दिन आँवले के वृक्ष के नीचे भोजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जब इसके फल परिपक्व होते है। हिन्दू धर्म के अनुसार आँवले के फल का लगातार 40 दिनों तक सेवन करते रहने वाले व्यक्ति में नई शारीरिक स्फूर्ति आती है तथा कायाकल्प हो जाता है।

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>>> आँवला क्षेत्र एवं वितरण

आँवला क्षेत्र एवं वितरण
आँवले के प्राकृतिक रूप से उगे वृक्ष भारत, श्रीलंका, क्यूबा, पोर्ट रिको, हवाई, फ्लोरिडा, ईरान, इराक, जावा, ट्रिनिडाड, पाकिस्तान, मलाया, चीन, और पनामा में पाये जाते हैं। परन्तु इसकी खेती भारतवर्ष के उत्तर प्रदेश प्रांत में ज्यादा प्रचलित है। आज कल आँवले का सघन वृक्षारोपण उत्तर प्रदेश के लवणीय एवं क्षारीय मृदाओं वाले बीहड़ एवं खादर वाले जिलों, जैसे आगरा, मथुरा, इटावा एवं फतेहपुर एवं बुन्देलखण्ड के अर्ध शुष्क क्षेत्रों में सफलतापूर्वक किया जा रहा है। इसके अलावा आँवले के क्षेत्र अन्य प्रदेशों जैसे, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु के अर्ध शुष्क क्षेत्रों में, हरियाणा के अरावली क्षेत्रों में, पंजाब, उत्तरांचल एवं हिमाचल में तेजी से बढ़ रहे हैं। एक नये आंकड़े के अनुसार भारतवर्ष में आँवले का क्षेत्रफल लगभग 50,000 हेक्टेयर तथा कुल उत्पादन लगभग 1.5 लाख टन आँका गया है। झारखंड राज्य के शुष्क एवं अर्धशुष्क जिलों जैसे – लातेहार, डाल्टनगंज, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, देवधर आदि में आँवला उत्पादन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

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>>> आँवले का उपयोग

आँवले का उपयोग
आँवले के पौधों के प्रत्येक भाग का आर्थिक महत्व है। इसके फलों में विटामिन ‘सी’ की अत्यधिक मात्रा पायी जाती है। इसके अतिरिक्त इसके फल लवण, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस, कैल्शियम, लोहा, रेशा एवं अन्य विटामिनों के भी धनी होते हैं। इसमें पानी 81.2%, प्रोटीन 0.50%, वसा 0.10%, रेशा 3.40%, कार्बोहाइड्रेट 14.00%, कैल्शियम 0.05%, फोस्फोरस 0.02%, लोहा 1.20 (मिली ग्रा./100 ग्रा.), विटामिन ‘सी’ 400-1300 (मिली ग्रा./100 ग्रा.), विटामिन ‘बी’ 30.00 (माइक्रो ग्रा./100 ग्रा.) पाये जाते है। भारत में औषधीय गुणों से युक्त फलों में आँवले का अत्यंत महत्व है। शायद यह फल ही एक ऐसा फल है जो आयुर्वेदिक औषधि के रूप में पूर्ण स्वास्थ्य के लिए प्रयुक्त होता है। हिन्दू शास्त्र के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि तुलसी एवं आँवले के फलों से सिक्त जल से स्नान करना गंगा जल से स्नान करने के तुल्य है।
इसका फल तीक्ष्ण शीतलता दायक एवं मूत्रक और मृदुरेचक होता है। एक चम्मच आँवले के रस को यदि शहद के साथ मिला कर सेवन किया जाय तो इससे कई प्रकार के विकार जैसे क्षय रोग, दमा, खून का बहना, स्कर्वी, मधुमेह, खून की कमी, स्मरण शक्ति की दुर्बलता, कैंसर अवसाद एवं अन्य मस्तिष्क विकार एन्फ़्जलुएन्जा, ठंडक, समय से पहले बुढ़ापा एवं बालों का झड़ना एवं सफेद होने से बचा जा सकता है। प्राय: ऐसा देखा गया है कि यदि एक चम्मच ताजे आँवले का रस, एक कप करेले के रस में मिश्रित करके दो महीने तक प्राय: काल सेवन किया जाय तो प्राकृतिक इन्सुलिन का श्राव बढ़ जाता है। इस प्रकार यह मधुमेह रोग में रक्त मधु को नियंत्रित करके शरीर को स्वस्थ करता है। साथ ही रक्त की कमी, सामान्य दुर्बलता तथा अन्य कई परेशानियों से मुक्ति दिलाता है। इसका प्रतिदिन प्रात: सेवन करने से कुछ ही दिनों में शरीर में नई स्फूर्ति आती है। यदि ताजे फल प्राप्त न हों तो इसके सूखे चूर्ण को शहद के साथ मिश्रित करके सेवन किया जा सकता है। त्रिफला, च्यवनप्राश, अमृतकलश ख्याति प्राप्त स्वदेशी आयुर्वेदिक औषधियाँ हैं, जो मुख्यत: आँवले के फलों से बनायी जाती हैं। आँवला के इन्हीं गुणों के कारण इसे ‘रसायन’ एवं ‘मेखा रसायन’ (बुद्धि का विकास करने वाला) की श्रेणी में रखा गया है। आँवले के फलों का प्रयोग लिखने की स्याही एवं बाल रंगने के द्रव्य में भी किया जाता है। इसकी पत्तियों को पानी में उबालने के पश्चात उस पानी से कुल्ला करने पर मुँह के छाले ठीक हो जाते हैं। ऐसा इसकी पत्तियों में विद्यमान टैनिन एवं फिनोल की अधिकता के कारण होता है। यही नहीं, आँवले के फल को यदि खाया जाय तो वह मृदुरेंचक (पेट साफ़) का कार्य करता है एवं इसकी जड़ का सेवन पीलिया रोग को दूर करने में सहायक होता है। हिन्दू पौराणिक साहित्य में आँवले एवं तुलसी की लकड़ी की माला पहनना काफी शुभ माना गया है। इस प्रकार आँवला की लकड़ी भी उपयोगी है।

Anwle Ka Upyog Ke Paudhon Pratyek Bhag Aarthik Mahatva Hai Iske Falon Me Vitamin Si Ki Atyadhik Matra Payi Jati Atirikt Fal Lawan Carbohydrate Phoshphorus Calcium Loha Resha Aivam Anya विटामिनों Bhi Dhani Hote Hain Isme Pani 81 20th Protein 0 50th Vasa 100th 3 40th 14 000 050 फोस्फोरस 02 1 20 Mili ग्रा 100 400 1300 B 30 00 Micro Paye Jate Bhaarat Aushadhiy Gunnon Se Yukt Atyant Shayad Yah Hee Ek Aisa Jo ayurvedic Ausha

>>> आँवले की खेती के लिए जलवायु

आँवले की खेती के लिए जलवायु
आँवला एक शुष्क उपोष्ण (जहाँ जाड़ा एवं गर्मी स्पष्ट रूप से पड़ती है) क्षेत्र का पौधा है परन्तु इसकी खेती उष्ण जलवायु में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। भारत में इसकी खेती समुद्र तटीय क्षेत्रों से 1800 मीटर ऊँचाई वाले क्षेत्रों में सफलतापूर्वक की जा सकती है। जाड़े में आँवले के नये बगीचों में पाले का हानिकारक प्रभाव पड़ता है परन्तु एक पूर्ण विकसित आँवले का वृक्ष 0-460 सेंटीग्रेट तापमान तक सहन करने की क्षमता रखता है। गर्म वातावरण, पुष्प कलिकाओं के निकलने हेतु सहायक होता है जबकि जुलाई-अगस्त माह में अधिक आर्द्रता का वातावरण सुसुप्त छोटे फलों की वृद्धि हेतु सहायक होता है। वर्षा ऋतु में शुष्क काल में छोटे फल अधिकता में गिरते हैं तथा नए छोटे फलों के निकलने में देरी होती है।

Anwle Ki Kheti Ke Liye Jalwayu Anwla Ek Shushk Uposhnn Jahan जाड़ा Aivam Garmi Spashta Roop Se Padti Hai Shetra Ka Paudha Parantu Iski Ushnn Me Bhi SafalTapoorvak Jaa Sakti Bhaarat Samudra Tatiya Area 1800 Meter Unchai Wale Jade Naye Bagichon Pale HaniKaarak Prabhav Padta Poorn Viksit Vriksh 0 460 सेंटीग्रेट Tapaman Tak Sahan Karne Shamta Rakhta Garm Watavaran Pushp कलिकाओं Nikalne Hetu Sahayak Hota Jabki July August Month Adh

 

>>> आँवले की खेती के लिए भूमि

आँवले की खेती के लिए भूमि
आँवला एक सहिष्णु फल है और बलुई भूमि से लेकर चिकनी मिट्टी तक में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। गहरी उर्वर बलुई दोमट मिट्टी इसकी खेती हेतु सर्वोत्तम पायी जाती है। बंजर, कम अम्लीय एवं ऊसर भूमि (पी.एच. मान 6.5-9.5, विनियम शील सोडियम 30-35 प्रतिशत एवं विद्युत् चालकता 9.0 म्होज प्रति सें.मी. तक) में भी इसकी खेती सम्भव है। भारी मृदायें तथा ऐसी मृदायें जिनमें पानी का स्तर काफी ऊँचा हो, इसकी खेती हेतु अनुपयुक्त पायी गई हैं।

 

>>> आँवले की किस्में

पूर्व में आँवला की तीन प्रमुख किस्में यथा बनारसी, फ्रांसिस (हाथी झूल) एवं चकैइया हुआ करती थी। इन किस्मों की अपनी खूबियाँ एवं कमियाँ रही हैं। बनारसी किस्म में फलों का गिरना एवं फलों का कम भंडारण क्षमता, फ्रान्सिस किस्म में यद्यपि बड़े आकार के फल लगते हैं परन्तु उत्तक क्षय रोग अधिक होता है। चकैइया के फलों में अधिक रेशा एवं एकान्तर फलन की समस्या के कारण इन किस्मों के रोपण को प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए। पारम्परिक किस्मों की इन सब समस्याओं के निदान हेतु नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, फैजाबाद ने कुछ नयी किस्मों का चयन किया है जिनका संक्षिप्त विवरण निम्न है:

आँवला की किस्म कंचन (एन ए-4)

आँवला की किस्म कंचन (एन ए-4)
यह चकइया किस्म से चयनित किस्म है। इस किस्म में मादा फूलों की संख्या अधिक (4-7 मादा फूल प्रति शाखा) होने के कारण यह अधिक फलत नियमित रूप से देती है। फल मध्यम आकार के गोल एवं हल्के पीले रंग के व अधिक गुदायुक्त होते है। रेशेयुक्त होने के कारण यह किस्म गूदा निकालने हेतु एवं अन्य परिरक्षित पदार्थ बनने हेतु औद्योगिक इकाईयों द्वारा पसंद की जाती है। यह मध्यम समय में परिपक्व होने वाले किस्म हैं (मध्य नवम्बर से मध्य दिसम्बर) तथा महाराष्ट्र एवं गुजरात के शुष्क एवं अर्धशुष्क क्षेत्रों में सफलतापूर्वक उगायी जा रही है।

आँवला की किस्म कृष्णा (एन.ए.-5)

आँवला की किस्म कृष्णा (एन.ए.-5)
यह बनारसी किस्म से चयनित एक अगेती किस्म है जो अक्टूबर से मध्य नवम्बर में पक कर तैयार हो जाती है। इस किस्म के फल बड़े ऊपर से तिकोने, फल की सतह चिकनी, सफेद हरी पीली तथा लाल धब्बेदार होती है। फल का गूदा गुलाबी हरे रंग का, कम रेशायुक्त तथा अत्यधिक कसैला होता है। फल मध्यम भंडारण क्षमता वाले होते हैं। अपेक्षाकृत अधिक मादा फूल आने के कारण, इस किस्म की उत्पादन क्षमता बनारसी किस्म की अपेक्षा अधिक होती है। यह किस्म मुरब्बा, कैन्डी एवं जूस बनाने हेतु अत्यंत उपयुक्त पायी गयी है।

नरेन्द्र आँवला-6

नरेन्द्र आँवला-6
यह चकैइया किस्म से चयनित किस्म है जो मध्यम समय (मध्य नवम्बर से मध्य दिसम्बर) में पक कर तैयार हो जाती है। पेड़ फैलाव लिए अधिक उत्पादन देने वाले होते हैं। (फलों का आकार मध्यम से बड़ा गोल, सतह चिकनी, हरी पीली, चमकदार, आकर्षक) गूदा रेशाहीन एवं मुलायम होता है। यह किस्म मुरब्बा, जैम एवं कैन्डी बनाने हेतु उपयुक्त पायी जाती है।

नरेन्द्र आँवला-7

नरेन्द्र आँवला-7
यह फ्रांसिस (हाथी झूल) किस्म के बीजू पौधों से चयनित किस्म है। यह शीघ्र फलने वाली, नियमित एवं अत्यधिक फलन देने वाली किस्म है। इस किस्म में प्रति शाखा में औसत मादा फूलों की संख्या 9.7 तक पायी जाती है। यह मध्यम समय (मध्य नवम्बर से मध्य दिसम्बर) तक पक कर तैयार हो जाती है। यह किस्म उत्तक क्षय रोग से मुक्त है। फल मध्यम से बड़े आकार, के ऊपर तिकोने, चिकनी सतह तथा हल्के पीले रंग वाले होते हैं। गूदे में रेशे की मात्रा एन ए-6 किस्म से थोड़ी अधिक होती है। इस किस्म की प्रमुख समस्या अधिक फलत के कारण इसकी शाखाओं को टूटना है। अतः फल वृद्धि के समय शाखाओं में सहारा देना उचित होता है यह किस्म च्यवनप्राश, चटनी, अचार, जैम एवं स्क्वैश बनाने हेतु अच्छी पायी गयी है। इस किस्म को राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तरांचल तथा तमिलनाडु के क्षेत्रों में अच्छी तरह अपनाया गया है।

नरेन्द्र आँवला-10

नरेन्द्र आँवला-10
यह किस्म बनारसी किस्म के बीजू पौधों से चयनित अधिक फलन देने वाली किस्म है। फल देखने में आकर्षक, मध्यम से बड़े आकार वाले, चपटे गोल होते हैं। सतह कम चिकनी, हल्के पीले रंग वाली गुलाबी रंग लिए होती है। फलों का गूदा सफेद हरा, रेशे की मात्रा अधिक एवं फिनाल की मात्रा कम होती है। अधिक उत्पादन क्षमता, शीघ्र पकने के कारण एवं सुखाने एवं अचार बनाने हेतु उपयुक्तता के कारण यह व्यवसायिक खेती हेतु उपयुक्त किस्म हैं, परन्तु इस किस्म में एकान्तर फलन की समस्या पायी जाती है।
इन सब किस्मों के अलावा लक्ष्मी-52, किसान चकला, हार्प-5, भवनी सागर आनंद-1, आनंद-2, एवं आनंद-3 किस्में विभिन्न शोध संस्थाओं से विकसित की गयी हैं परन्तु इनकी श्रेष्ठता देश के अन्य भागों में अभी सिद्ध नहीं हो पाई है।

 

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लहसुन की खेती से होगी लाखों की इनकम, ऐसे करें तैयारी Garlic Farming

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लहसुन की विभिन्न किस्में

लहसुन की विभिन्न किस्में

इन दिनों लहसुन की जी-1 और जी-17 प्रजाति प्रमुख हैं। जी-17 का प्रयोग ज्यादातर हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान कर रहे हैं। यह दोनों प्रजातियां ही 160 से 180 दिनों में पककर तैयार हो जाती हैं। इसके बाद अप्रैल-मई महीने में इसकी खुदाई होती है। एक हेक्टेयर में लगभग 8 से 9 टन पैदावार आसानी से हो जाती है।इसके इलावा प्रमुख किस्मे निचे दी हुई है

टाइप 56-4:लहसुन की इस किस्म का विकास पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की ओर से किया गया है। इसमें लहसुन की गांठे छोटी होती हैं और सफेद होती हैं। प्रत्येक गांठ में 25 से 34 पुत्तियां होती हैं। इस किस्म से किसान को प्रति हेक्टेयर 15 से 20 टन तक उपज मिलती है।

आईसी 49381:इस किस्म का विकास भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की ओर से किया गया है। इस किस्म से लहसुन की फसल 160 से 180 दिनों में तैयार हो जाती है। इस किस्म से किसानों को अधिक उपज मिलती है।

सोलन:लहसुन की इस किस्म का विकास हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय की ओर से किया गया है। इस किस्म में पौधों की पत्तियां काफी चौड़ी व लंबी होती हैं और रंग गहरा होता है। इसमें प्रत्येक गांठ में चार ही पुत्तियां होती हैं और काफी मोटी होती हैं। अन्य किस्मों की तुलना में यह अधिक उपज देने वाली किस्म है।

एग्री फाउंड व्हाईट (41 जी) :लहसुन की इस किस्म में भी फसल 150 से 160 दिनों में तैयार हो जाती है। इस किस्म से लहसुन की उपज 130 से 140 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। यह किस्म गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक आदि प्रदेशों के लिए अखिल भारतीय समन्वित सब्जी सुधार परियोजना के द्वारा संस्तुति की जा चुकी है।

यमुना (-1 जी) सफेद: लहसुन की यह किस्म संपूर्ण भारत में उगाने के लिए अखिल भारतीय सब्जी सुधार परियोजना के द्वारा संस्तुति की जा चुकी है। इस किस्म में फसल से 150 से 160 दिनों में तैयार हो जाती है और प्रति हेक्टेयर उपज 150 से 175 क्विंटल होती है।

यमुना सफेद 2 (जी 50) : यह किस्म मध्य प्रदेश के लिए उत्तम पाई जाती है। इस किस्म में 160 से 170 दिन फसल तैयार हो जाती है और प्रति हेक्टेयर उपज 150 से 155 क्विंटल तक होती है। यह किस्म बैंगनी धब्बा और झुलसा रोग के प्रति सहनशील होती है।

जी 282:इस किस्म में शल्क कंद सफेद और बड़े आकार के होते हैं। इसके साथ ही 140 से 150 दिनों में फसल तैयार हो जाती है। इस किस्म में किसान को 175 से 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज मिल जाती है।

आईसी 42891:लहसुन की इस किस्म का विकास भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान, नई दिल्ली की ओर से किया गया है। यह किस्म किसानों को अधिक उपज देती है और फसल 160-180 दिन में तैयार हो जाती है।

मिट्टी और जलवायु

मिट्टी और जलवायु

जैसा कि आपको पहले बताया जा चुका है कि लहसुन की खेती के लिए मध्यम ठंडी जलवायु उपयुक्त होती है। इसके साथ ही दोमट मिट्टी, जिसमें जैविक पदार्थों की मात्रा अधिक हो, लहसुन की खेती के लिए सबसे अच्छी है।

खेती की तैयारी

खेती की तैयारी

खेत में दो या तीन गहरी जुताई करें। इसके बाद खेत को समतल कर क्यारियां और सिंचाई की नालियां बना लें। बता दें कि लहसुन की अधिक उपज के लिए डेढ़ से दो क्विंटल स्वस्थ कलियां प्रति एकड़ लगती हैं।

ऐसे करें बुवाई और सिंचाई

ऐसे करें बुवाई और सिंचाई

अधिक उपज के लिए किसानों को बुवाई के लिए डबलिंग विधि का उपयोग करना चाहिए। क्यारी में कतारों की दूरी 15 सेंटीमीटर तक होनी चाहिए। वहीं, दो पौधों के बीच की दूरी 7.5 सेंटीमीटर होनी चाहिए। वहीं किसानों को बोने की गहराई 5 सेंटीमीटर तक रखनी चाहिए। जबकि सिंचाई के लिए लहसुन की गांठों के अच्छे विकास के लिए 10 से 15 दिनों का अंतर होना चाहिए।

कितना आता है खर्च

कितना आता है खर्च

एक हेक्टेयर में लगता है 12 हजार रुपए का बीज लहसुन की खेती के लिए नवंबर महीना मुफीद रहता है। इसकी खेती भारत के लगभग हर हिस्से में की जाती है।लेकिन, इसके लिए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश का मौसम बहुत ही उपयुक्त माना जाता है। एक एकड़ खेती में लगभग 5 हजार रुपए का बीज (लहसुन की गांठ) लगता है।

जबकि, एक हेक्टेयर को अगर मॉडल मानकर चलें तो 12 हजार से 13 हजार रुपए का बीज पर्याप्त होता है। छह महीने में खाद, पानी, मजदूरी आदि कुल सब मिलाकर 50 से 60 हजार रुपए खर्च आ जाता है।

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मिर्च की फसल की जानकारियां Chilly Farming

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मिर्च की फसल की जानकारियां Chilly Farming

जलवायु :

मिर्च की खेती के लिये आर्द्र उष्ण जलवायु उपयुक्त होती है। फल परिपक्वता अवस्था में शुष्क जलवायु आवश्यक होती है। ग्रीष्म ऋतु में अधिक तापमान से फल व फूल झड़ते हंै. रात्रि तापमान 16-21डिग्री सेल्सियम फल बनने के लिये अत्यधिक उपयुक्त है।

भूमि :

मिर्च की खेती सभी प्रकार की भूमियों में की जा सकती है। परंतु अच्छे जल निकास वाली एवं कार्बनिक बलुई दोमट, लाल दोमट मिट्टी जिसका पीएच मान 6.0 से 6.7 हो मिर्च की खेती के लिये सबसे उपयुक्त है। वो मिट्टी जिसमें जल निकास व्यवस्था नहीं होती, मिर्च के लिये उपयुक्त नहीं है।
बीज, किस्म एवं बीज दर : संकर किस्मों का 120-150 ग्राम एवं 200-250 ग्राम प्रति एकड़ अच्छी पैदावार देने वाली किस्मों की बीज दर होती है। साथ ही ऐसी किस्मों का चुनाव करना चाहिए जो स्थानीय वातावरण, बाजार एवं उपभोक्ता के अनुसार.
खेत की तैयारी

– उठे हुए शैय्या तकनीक से पौध रोपण करें.
– 5 टन प्रति एकड़ की दर से शैय्या पर सड़ी हुई खाद (गोबर की) डालें.
– आधार उर्वरक के रूप में 250 किग्रा. एसएसपी., 500 कि.ग्रा. नीम खली, 50 कि.ग्रा. मैग्रैशियम सल्फेट एवं 10 कि.ग्रा. सूक्ष्म तत्व को शैय्या में मिलायें
– आधार गोबर खाद व उर्वरक को शैय्या में मिलायें.
– खरपतवार नियंत्रण के लिये 500 मि. ली. बासालीन 200 ली. पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ की दर से शैय्या पर छिड़काव करके मिट्टी में मिलायें.
ड्रिप सिंचाई प्रणाली में पौध रोपण
– अनिश्चित वृद्धि, झाड़ीनुमा सीधे बढऩे वाली किस्मों को 5 फीट की दूरी ड्रिप लाईन पर एकल कतार विधि एवं पौधे से पौधे की दूरी, कतार में 30 से 40 सेमी .रखना चाहिए.
– संकर किस्मों को युगल कतार विधि द्वारा लगाना चाहिए.
जल प्रबंध : यद्यपि मिर्च का मूल/ मुख्य जड़ जमीन में गहराई तक पाया जाता है। परंतु इसकी पोषक तत्व व पानी लेने वाली जड़े ज्यादातर जमीन के ऊपरी एक फीट में रहती है जो पौधे की 70 प्रतिशत जल की जरूरत को पूरा करती है। इसलिए ड्रिप सिस्टम इन जड़ों को हमेशा जीवित रखता है। जिससे पौधे में मिट्टी से पानी व पोषक तत्वों का अवशोषण सरलता से होता है।
नेटाफिम के उच्च एक समान उत्सर्जकता, स्वयं साफ होने एवं लचक समन्वित ड्रिप लाईन मिर्च की खेती के लिये बहुत उपयुक्त है।
आधार खुराक : 200 कि.ग्रा. एसएसपी, 50 कि.ग्रा. डीएपी, 500 कि.ग्रा. नीम खली, 50 कि.ग्रा. मैग्रेशियम सल्फेट, 10 कि.ग्रा. सूक्ष्म पोषक तत्व को जमीन में देना चाहिए.

मिर्च तुड़ाई में सावधानियां

– हरी मिर्च बेचना है तो तोड़ते समय यह सावधानी रखें कि फूलों एवं अविकसित मिर्च के ऊपर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। हरी मिर्च की तुड़ाई 6 से 8 बार औसतन 5 से 6 दिनों के अंतर से करनी पड़ती है।
– ग्रीष्म एवं शीत ऋतु की मिर्च पकने पर सुखाकर बेचते हैं। कभी-कभी अचार वाली जातियों को गीला बेचने हेतु तोड़ा जाता है।
– सामान्यत: पके हुए फल को थोड़े-थोड़े समयान्तराल पर हाथ से तोड़ लिया जाता है। सामान्यत: मिर्च में 3 से 6 तुड़ाई होती है। आमतौर पर मिर्च को प्राय: सूर्य की रोशनी में सुखाते हैं।
– मिर्च को सुखाने के लिये प्रत्येक मौसम में जमीन को समतल करके सुखाने के उपयोग में लाया जाता है।
– स्वच्छ, अच्छी गुणवत्ता वाली मिर्च के लिये पक्के प्लेटफार्म या तिरपाल या प्लास्टिक का उपयोग फलों को सुखाने के लिये किया जाता है।
– तुड़ाई उपरांत मिर्च की फलियों को ढेर के रूप में एक रात के लिये रखते हैं, जिससे आधे पके फल पक जाते हैं और सफेद मिर्च की संख्या कम हो जाती है।
– दूसरे दिन मिर्च को ढेर से उठाकर सुखाने के स्थान पर 2-3 इंच मोटी परत में फैला देते हैं।
– इस तरह दो दिन के बाद, प्रत्येक दिन सुबह मिर्च को उलटने-पलटने से सूर्य का प्रकाश हर पर्त पर समान रूप से पड़ता है।
– सूर्य के प्रकाश में शीघ्र और समान रूप से मिर्च को सुखाने के लिए 10 -25 दिन लगते हैं।
– सौर ऊर्जा से चलने वाली मशीन का उपयोग भी मिर्च को सुखाने के लिये किया जाता है। इससे केवल 10-12 घंटे में मिर्च को सुखाया जा सकता है।
– सौर ऊर्जा द्वारा सुखायी गई मिर्च अच्छे गुणों वाली होती है।

मिर्च की उन्नत खेती

हमारे यहां मिर्च एक नकदी फसल है। इस की व्यावसायिक खेती कर के ज्यादा लाभ कमाया जा सकता ? है। यह हमारे खाने में इस्तेमाल होती है। मिर्च में विटामिन ए और सी पाए जाते हैं और कुछ लवण भी होते हैं। मिर्च का इस्तेमाल अचार, मसालों और सब्जी में भी किया जाता है। मिर्च पर पाले का असर ज्यादा होता है, इसलिए जहां पाला ज्यादा पड़ता ? है उन इलाकों में इस की अगेती फसल लेनी चाहिए. ज्यादा गरमी होने पर फूलों व फलों का झड़ना शुरू हो जाता है। मिर्च की खेती के लिए मिट्टी का पीएच मान 6 से 7.5 के बीच होना अच्छा माना जाता ? है। अच्छी फसल के लिए उपजाऊ दोमट मिट्टी जिस में पानी का अच्छा निकास हो अच्छी मानी जाती है।

उन्नत किस्में

चरपरी मसाले वाली : एनपी 46 ए, पूसा ज्वाला, मथानिया लोंग, पंत सी 1, जी 3, जी 5, हंगेरियन वैक्स (पीले रंग वाली), पूसा सदाबहार, पंत सी 2, जवाहर 218, आरसीएच 1, एक्स 235, एलएसी 206, बीकेए 2, एससीए 235. शिमला मिर्च (सब्जी वाली) : यैलो वंडर, केलीफोर्निया वंडर, बुलनोज व अर्का मोहिनी.

Unnat Kismein Charpari MaSale Wali NP 46 A Pusa Jwala Mathaniya Long Pant Si 1 Ji 3 5 Hungerian Wax Pile Rang Sadabahar 2 Jawahar 218 RCH X 235 LAC 206 BKA SCA Shimla Mirch Sabji यैलो Wonder California BullNose Wa Arka Mohini
नर्सरी तैयार करना
सब से पहले नर्सरी में बीजों की बोआई कर के पौध तैयार की जाती ? है। खरीफ की फसल के लिए मई से जून में व गर्मी की फसल के लिए फरवरी से मार्च में नर्सरी में बीजों की बोआई करें. 1 हेक्टेयर में पौध तैयार करने के लिए 1 से डेढ़ किलोग्राम बीज और संकर बीज 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर काफी रहता है। नर्सरी वाली जगह की गहरी जुताई कर के खरपतवार रहित बना कर 1 मीटर चौड़ी, 3 मीटर लंबी और 10 से 15 सेंटीमीटर जमीन से उठी हुई क्यारियां तैयार कर लें. बीजों को बोआई से पहले केप्टान या बाविस्टिन की 2 ग्राम मात्रा से प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें. पौधशाला में कीड़ों की रोकथाम के लिए 3 ग्राम फोरेट 10 फीसदी कण या 8 ग्राम कार्बोफ्यूरान 3 फीसदी कण प्रति वर्गमीटर के हिसाब से जमीन मिलाएं या मिथाइल डिमेटोन 0.025 फीसदी या एसीफेट 0.02 फीसदी का पौधों पर छिड़काव करें. बीजों की बोआई कतारों में करनी चाहिए. नर्सरी में विषाणु रोगों से बचाव के लिए मिर्च की पौध को सफेद नाइलोन नेट से ढक कर रखें.
Nursery Taiyaar Karna Sab Se Pehle Me Beejon Ki Boai Kar Ke Paudh Jati ? Hai Kharif Fasal Liye May June Wa Garmi February March Karein 1 Hectare Karne Dedh KiloGram Beej Aur Sankar 250 Gram Prati Kafi Rehta Wali Jagah Gahri Jutayi Kharpatwar Rahit Banaa Meter Chaudi 3 Lambi 10 15 Centimeter Jamin Uthi Hui Kyariyan Lein Ko keptaan Ya Bavistine 2 Matra Dar Upcharit PaudhShala Keedon Rokatham Phoret Feesdi Kann 8 Carbofuran V
रोपाई
नर्सरी में बोआई के 4 से 5 हफ्ते बाद पौधे रोपने लायक हो जाते हैं। तब पौधों की रोपाई खेत में करें. गर्मी की फसल में कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर व पौधे से पौधे की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर रखें. खरीफ की फसल के लिए कतार से कतार की दूरी 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर रखें. रोपाई शाम के समय करें और रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई कर दें. पौधों को 40 ग्राम एजोस्पाइरिलम 2 लीटर पानी के घोल में 15 मिनट डुबो कर रोपाई करें.
Ropai Nursery Me Boai Ke 4 Se 5 Hafte Baad Paudhe Ropne layak Ho Jate Hain Tab Paudhon Ki Khet Karein Garmi Fasal Kataar Doori 60 Centimeter Wa 30 45 Rakhein Kharif Liye Aur Sham Samay Turant Sinchai Kar Dein Ko 40 Gram एजोस्पाइरिलम 2 Litre Pani Ghol 15 Minute डुबो
खाद व उर्वरक
खेत की अंतिम जुताई से पहले प्रति हेक्टेयर करीब 150 से 250 क्विंटल अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद खेत में डाल कर अच्छी तरह मिला दें. इस के अलावा मिर्च का अच्छा उत्पादन लेने के लिए 70 किलोग्राम नाइट्रोजन, 48 किलोग्राम फास्फोरस व 50 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की जरूरत होती है। नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपाई से पहले जमीन की तैयारी के समय व बची मात्रा आधीआधी कर के 30 व 45 दिनों बाद खेत में छिड़क कर तुरंत सिंचाई कर दें.
Khad Wa Urvarak Khet Ki Antim Jutayi Se Pehle Prati Hectare Karib 150 250 Quintal Achhi Tarah Sadi Hui Gobar Me Dal Kar Mila Dein Is Ke ALava Mirch Ka Achachha Utpadan Lene Liye 70 KiloGram Nitrogen 48 Phoshphorus 50 Potash Jarurat Hoti Hai Adhi Matra Ropai Jamin Taiyari Samay Bachi आधीआधी 30 45 Dino Baad Chhidak Turant Sinchai
सिंचाई व निराई गुड़ाई
गर्मी में 5 से 7 दिनों के अंतर पर और बरसात में जरूरत के हिसाब से सिंचाई करें. खरपतवार की रोकथाम के लिए समयसमय पर निराईगुड़ाई करनी चाहिए. खरपतवार नियंत्रण के लिए 200 ग्राम आक्सीफ्लूरोफेन प्रति हेक्टेयर का पौधों की रोपाई के ? ठीक पहले छिड़काव (600 से 700 लीटर पानी में घोल कर) करें.

Sinchai Wa Nirai Gudai Garmi Me 5 Se 7 Dino Ke Antar Par Aur BarSaat Jarurat Hisab Karein Kharpatwar Ki Rokatham Liye समयसमय निराईगुड़ाई Karni Chahiye Niyantran 200 Gram आक्सीफ्लूरोफेन Prati Hectare Ka Paudhon Ropai ? Theek Pehle Chhidkaw 600 700 Litre Pani Ghol Kar )

कीड़े व रोग

सफेद लट : इस कीट की लटें पौधों की जड़ों को खा कर नुकसान पहुंचाती ? हैं। इस पर काबू पाने के लिए फोरेट 10 जी या कार्बोफ्यूरान 3 जी 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से रोपाई से पहले जमीन में मिला देना चाहिए. सफेद मक्खी, पर्णजीवी (थ्रिप्स), हरा तेला व मोयला : ये कीट पौधों की पत्तियों व कोमल शाखाओं का रस चूस कर उन्हें कमजोर कर देते हैं। इन के असर से उत्पादन घट जाता ? है। इन पर काबू पाने के लिए मैलाथियान 50 ईसी या मिथाइल डिमेटोन 25 ईसी 1 मिलीलीटर या इमिडाक्लोरोपिड 0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़ाकव करें. 15-20 दिनों बाद दोबारा छिड़ाकव करें.

मूल ग्रंथि सूत्रकृमि : इस के असर से पौधों की जड़ों में गांठें बन जाती ? हैं और पौधे पीले पड़ जाते हैं। पौधों की बढ़वार रुक जाती ? है, जिस से पैदावार में कमी आ जाती है। इस की रोकथाम के लिए रोपाई के स्थान पर 25 किलोग्राम कार्बोफ्यूरान 3 जी प्रति हेक्टेयर की दर से जमीन में मिलाएं.

आर्द्र गलन : इस रोग का असर पौधे जब छोटे होते हैं, तब होता है। इस के असर से जमीन की सतह पर स्थित तने का भाग काला पड़ कर कमजोर हो जाता ? है व नन्हे पौधे गिर कर मरने लगते हैं। रोकथाम के लिए बीजों को बोआई से पहले थाइरम या केप्टान 3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें. नर्सरी में बोआई से पहले थाइरम या केप्टान 4 से 5 ग्राम प्रति वर्गमीटर की दर से जमीन में मिलाएं. नर्सरी आसपास की जमीन से 4 से 6 इंच उठी हुई जमीन में बनाएं.

श्याम ब्रण : इस रोग से पत्तियों पर छोटेछोटे काले धब्बे बन जाते हैं और पत्तियां झड़ने लगती ? हैं। जब इस का असर ज्यादा होता है, तो शाखाएं ऊपर से नीचे की तरफ सूखने लगती हैं। पके फलों पर भी बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं। रोकथाम के लिए जाइनेब या मेंकोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल कर 2 से 3 बार छिड़काव 15 दिनों के अंतराल पर करें.

पर्णकुंचन व मोजेक विषाणु रोग : पर्णकुंचन रोग के असर से पत्ते सिकुड़ कर छोटे रह जाते हैं व उन पर झुर्रियां पड़ जाती ? हैं। मोजेक विषाणु रोग के कारण पत्तियों पर गहरे व हलका पीलापन लिए हुए धब्बे बन जाते हैं। रोगों को फैलाने में कीट सहायक होते ? हैं। रोकथाम के लिए रोग लगे पौधों को उखाड़ कर जला देना चाहिए. रोग को आगे फैलने से रोकने के लिए डाइमिथोएट 30 ईसी 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें.

नर्सरी तैयार करते समय बोआई से पहले कार्बोफ्यूरान 3 जी 8 से 10 ग्राम प्रति वर्गमीटर के हिसाब से जमीन में मिलाएं. रोपाई के समय निरोगी पौधे काम में लें. रोपाई के 10 से 12 दिनों बाद मिथाइल डिमेटोन 25 ईसी 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें. छिड़काव 15 से 20 दिनों के अंतर पर जरूरत के हिसाब से दोहराएं. फूल आने पर मैलाथियान 50 ईसी 1 मिलीलीटर प्रति लीटर के हिसाब से छिड़कें.

तना गलन : गर्मी में पैदा होने वाली मिर्च में तना गलन को रोकने के लिए टोपसिन एम 0.2 फीसदी से बीजोपचार कर के बोआई करें.

Kide Wa Rog Safed Lat Is Keet Ki Lantein Paudhon Jadon Ko Kha Kar Nuksan Pahunchati ? Hain Par Kabu Pane Ke Liye Phoret 10 Ji Ya Carbofuran 3 25 KiloGram Prati Hectare Dar Se Ropai Pehle Jamin Me Mila Dena Chahiye Makhhi ParnnJeevi Thrips Hara Tela Moyla Ye Pattiyon Komal Shakhaon Ka Ras choos Unhe Kamjor Dete In Asar Utpadan Ghat Jata Hai Malathion 50 EC Methyl Dematone 1 मिलीलीटर इमिडाक्लोरोपिड 0 5 Litre Pani छिड़ाकव

तोड़ाई व उपज

हरी मिर्च के लिए तोड़ाई फल लगने के 15 से 20 दिनों बाद कर सकते हैं। पहली तोड़ाई से दूसरी तोड़ाई का अंतर 12 से 15 दिनों का रखते ? हैं। फलों की तोड़ाई उस के अच्छी तरह से तैयार होने पर ही करनी चाहिए. हरी चरपरी मिर्च तकरीबन 150 से 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और 15 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर सूखी लाल मिर्च प्राप्त की जा सकती है

TodaEe Wa Upaj Hari Mirch Ke Liye Fal Lagne 15 Se 20 Dino Baad Kar Sakte Hain Pehli Doosri Ka Antar 12 Rakhte ? Falon Ki Us Achhi Tarah Taiyaar Hone Par Hee Karni Chahiye Charpari Takriban 150 200 Quintal Prati Hectare Aur 25 Sookhi Laal Prapt Jaa Sakti Hai


Mirch Ki Fasal Jankariyan Jalwayu Kheti Ke Liye Aadra Ushnn Upyukt Hoti Hai Fal Paripakwta Avastha Me Shushk Awashyak Grishm Ritu Adhik Tapaman Se Wa Fool Jhadte हंै Ratri 16 21डिग्री Celcius Banne Atyadhik Bhumi Sabhi Prakar Bhumiyon Jaa Sakti Parantu Achhe Jal Nikas Wali Aivam Carbonic Balui Domat Laal Mitti Jiska PH Maan 6 0 7 Ho Sabse Wo Jisme Vyavastha Nahi Beej Kism Dar Sankar Kismon Ka 120 150 Gram 200 250 Prati E

नींबू की खेती How to start Lemon Farming – Kaise kare nimbu ki kheti

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नींबू की खेती How to start Lemon Farming – Kaise kare nimbu ki kheti

नींबू की खेती कैसे करें

क्या आप नींबू की खेती करने की सोच रहे हैं ? जानिए इससे जुडी जानकारी, कैसे आप 1 acer से ही लाखों कम सकते है और कैसे करे इसकी उन्नत और वैज्ञानिक खेती, कीड़ों से बचाव । पूरे world में नींबू (lemon) का सबसे ज्यादा उत्पादन India में ही होता है । इसलिए India के किसान चाहे तो निम्बू की खेती कर के अच्छा पैसा कमा सकते है । यदि निम्बू की खेती को कृषि वैज्ञानिक द्वारा बताए गए तरीके से किया जाये तो किसानो को अच्छी उपज मिल सकती है । Jharkhand, Maharashtra, Andhra Pradesh, Tamil Nadu जैसे states में निम्बू की काफी अच्छी पैदावार होती है । इसमें सुरुवाती से ले कर उत्पादन तक कम पूंजी लगती है और अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है । तो चलिए जानते है निम्बू की खेती से जुडी जानकारी विस्तार में ।

How to start Lemon Farming – Kaise kare nimbu ki kheti

>>> नींबू की खेती कैसे करे / How to Start Lemon Farming

नींबू की खेती कैसे करे / How to Start Lemon Farming

मैं हमेशा suggest करता रहा हूँ की अगर आप agriculture से जुड़ा कोई business करना चाहते है और अगर आपके पास 1 से 5 acer तक की जमीन है तो proper training ले कर इसमें जम जाइये । तो अगर आपके पास खली पड़ी हुई कम से कम 1 acer की land हो तो आप lemon farming का business अपने India में ही कर के अच्छा profit कम सकते है । सुरुवात में भले ही आपको 2-3 साल का wait करना पड़े पर उसके बाद आप आसानी से हर साल लाख रूपया बैठे बैठे कमा सकते हैं । तो चलिए जानते है कैसे आप भी निम्बू की उन्नत खेती कर के खुद का agriculture business setup कर सकते हैं ।

 

>>> नींबू की खेती के लिए भूमि / Land Selection for Lemon Farming

नींबू की खेती के लिए भूमि / Land Selection

नींंबू की खेती को लगभग सभी तरह की भूमि पर Successfully किया जा सकता है । लेकिन फिर भी दोमट मिट्टी वाली भूमि जहाँ जल-प्रणाली का उत्तम प्रबंध किया गया हो उसे ही निम्बू की खेती के लिए सबसे अच्छा माना गया है । निम्बू की खेती के लिए भूमि की गहराई लगभग 2.5 मी.या से ज्यादा होनी चाहिए और इसका ph मान लगभग 7.0 तक होना चाहिए तभी निम्बू की अच्छी वृद्धि और उपज मिलती है । ऐसी मिट्टियाँ और ऐसा area जहाँ पर पानी जमा हो जाता हो उसे नींबू की खेती के लिए सही नहीं माना जाता है ।

निम्बू की खेती के लिए जलवायु / Suitable Climate for Citrus Cultivation For Lemon Farming

निम्बू की खेती के लिए जलवायु / Suitable Climate for Citrus Cultivation

निम्बू की खेती के लिए Warm और moderate humidity, पाला और जोड़ की हवा से मुक्त वाले area को अच्छा माना जाता है । निम्बू की अच्छी वृद्धि और इसके अच्छे उत्पादन के लिए 20-32 डिग्री से. तक का temperature की आवश्यकता होती है साथ ही इसकी खेती में औसत वार्षिक वर्षा 750 mm से ज्यादा नहीं होनी चाहिए ।

>>> निम्बू की उन्नत किस्मे / Varieties of Lemon

निम्बू की उन्नत किस्मे / Varieties of Lemon

वैसे तो आज market में कई तरह के निम्बू available हैं जिसकी अच्छी demand है । अगर आप निम्बू की खेती को एक बड़े business model में ले जाना चाहते है तो यह काफी जरुरी है की आप सही किस्म के निम्बू का चुनाव करे ताकि आपको अधिक से अधिक मुनाफा मिले । इनमे से कुछ lemon hybrid भी होते है जो अच्छी पैदवार देतीं हैं ।

Varieties of Lemon

कागजी निम्बू – इसकी Wide popularity के वजह से इसे खट्टा नींंबू का समानार्थी माना जाता है।
प्रमालिनी निम्बू – इस किस्म के निम्बू bunch में फलते है, और इसके एक गुच्छे में लगभग 3 से 7 तक फल लगते हैं । प्रमालिनी निम्बू,कागजी नींंबू के compare में 30% ज्यादा उपज देती है ।
विक्रम निम्बू – इसके फल भी bunch में ही फलते है । एक bunch में लगभग 5 से 10 फल लगते है ।
चक्र धर निम्बू – इस निम्बू में बीज नहीं होते है और इसके फल से लगभग 65% रस निकलता है ।
पि.के. एम् -1 – यह भी ज्यादा उत्पादन वाली किस्मो में से एक है । इसके फलो से लगभग 50% रस प्राप्त हो जाते है ।
ऊपर दिए गए निम्बू के किस्मो के अलावा साईं सर्बती, सीडलेस निम्बू , भी निम्बू के उन्नत किस्मो में से एक है ।

Nimbu Ki Unnat Kisme Varieties Of Lemon Waise To Aaj Market Me Kai Tarah Ke available Hain Jiski Achhi demand Hai Agar Aap Kheti Ko Ek Bade business model Le Jana Chahte Yah Kafi Jaroori Sahi Kism Ka Chunav Kare Taki Aapko Adhik Se Munafa Mile Inme Kuch lemon hybrid Bhi Hote Jo पैदवार देतीं Kagji Iski Wide popularity Wajah Ise Khatta Nimboo Samanarthi Mana Jata प्रमालिनी Is bunch Falte Aur Iske गुच्छे Lagbhag 3 7 Tak F

बीज रोपण

बीज रोपण

नींबू के पौधों को रोपने का सबसे सही समय June से July तक का होता है और अगर सिंचाई का प्रबंध सही से किया जाये तो इसकी रोपाई February और March में भी की जा सकती है । पौधे को रोपने से पूर्व हर एक गड्ढे की मिट्टी में लगभग 20 kg गोबर की खाद और 1 kg सुपर फ़ॉस्फ़ेट को अच्छी तरह से mix कर दें । पौधों को रोपने समय हर एक पौधों के बीच का distance लगभग 20-20 cm का space होना चाहिए ।

Beej Ropann Nimboo Ke Paudhon Ko Ropne Ka Sabse Sahi Samay June Se July Tak Hota Hai Aur Agar Sinchai Prabandh Kiya Jaye To Iski रोपाई February March Me Bhi Ki Jaa Sakti Paudhe Poorv Har Ek गड्ढे Mitti Lagbhag 20 kg Gobar Khad 1 Super Phosphate Achhi Tarah mix Kar Dein Beech distance CM space Hona Chahiye

खाद प्रबंधन

खाद प्रबंधन

नींबू की खेती में सड़ी हुई गोबर की खाद को हर साल दिया जाता है । पहले साल में 5 kg दुसरे साल में 10 kg तीसरे साल में 20 kg और इसी तरह हर साल पिछले साल का दोगुना खाद देना होता है । निम्बू की खेती में Organic manure साल में दो बार पड़ता है । पहला december और January में और दूसरा April और May में । जो वृक्ष फल देने वाले होते है ऐसे वृक्ष में 60 kg गोबर की खाद, 2.5 kg अमोनियम सल्फ़ेट, 2.5 kg सुपर फास्फेट और 1.5 kg म्यूरेट ऑफ़ पोटाश का use करना चाहिए ।

Khad Prabandhan Nimboo Ki Kheti Me सड़ी Hui Gobar Ko Har Sal Diya Jata Hai Pehle 5 kg Dusare 10 Teesre 20 Aur Isi Tarah Pichhle Ka Doguna Dena Hota Nimbu Organic manure Do Baar Padta Pehla december January Doosra April May Jo Vriksh Fal Dene Wale Hote Aise 60 2 Amonium Sulphate Super Phosphate 1 म्यूरेट Of Potash use Karna Chahiye

>>> सिंचाई

सिंचाई

निम्बू की खेती में साल भर नमी की जरूरत होती है । वर्षा के मौसम में सिंचाई की जरूरत नहीं होती है । ठंड के समय 1 month के interval पर सिंचाई और गर्मियों में 10 days के interval पर सिंचाई करना होता है ।

Sinchai Nimbu Ki Kheti Me Sal Bhar Nami Jarurat Hoti Hai Varsha Ke Mausam Nahi Thand Samay 1 month interval Par Aur Garmiyon 10 days Karna Hota

निम्बू का रोग व कीट से बचाव / Tips to Control Disease and Pest For Lemon Farming

निम्बू का रोग व कीट से बचाव / Tips to Control Disease and Pest

नींंबू का सिला – यह कीट नयी पत्तियों और कलियों से रस चूस जाते है । इस कीट के प्रकोप से पत्तियां गिरने लगती है । इस कीट से एक तरह का चिटचिटा पदार्थ निकलता है जिस पर काली मोल्ड जम जाती है । इस कीट के नियंत्रण हेतु इससे प्रभावित सभी parts को काट कर जला दे ।

निम्बू कि तितली – यह कीट नर्सरी के पौधों को काफी नुकसान पहुंचाती है । इसके green color के इल्ली पत्तियों को खा जाते है । यह किट April से May तक और August से October तक ज्यादा लगते है । निम्बू कि तितली से नियंत्रण के लिए अपने खेतो में नीम के काढ़ा का छिडकाव micro झाइम में mix कर करना चाहिए ।

माहू कीट – माहू कीट december से march तक ज्यादा लगते है । यह कीट फूलों व पत्तियों के सारे रस चूस जाते है जिससे फूल व पत्ते दोनों ही कमजोर होकर गिरने लगते है । इस कीट के नियंत्रण हेतु खेतो में नीम का काढ़ा का छिड़काव करना चाहिए ।

कैंकर रोग – यह रोग विशेष रूप से निम्बू पर ही लगते है । इस रोग के लगते ही पहले निम्बू के पत्तियों पर light yellow color के धब्बे होने लगते है और फिर वे धब्बे आहिस्ता आहिस्ता dark brown color के हो जाते है । इस रोग के बढ़ने से शाखाएं और फल दोनों ही ग्रसित हो जाते है । इस रोग के नियंत्रण हेतु रोग से ग्रसित शाखाओ को पौधों से छाट कर अलग कर देना चाहिए । उसके बाद कटे हुए सभी शाखाओ पर ग्रीस लगा दिया जाता है । इसके बाद बरसात start होते ही माइक्रो झाइम और नीम का काढ़ा का छिड़काव किया जाता है ।

गोदार्ती रोग – यदि इस रोग का आक्रमण तने पर हो तो इस रोग को गोदार्ती तना बिगलन कहा जाता है । इस रोग के प्रकोप से छाल में से गोंद की तरह एक पदार्थ निकालता है जिससे छाल brown हो जाती है और उसमें दरारें होने लगती है । इसके रोग से बचने हेतु बहुत से उपाय है जैसे की :-

खेत में से जल निकलने का अच्छा प्रबंध करना होगा और साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना होगा की सिंचाई का पानी direct तने के संपर्क में नहीं आने चाहिए ।
इस रोग से ग्रसित भाग को किसी तेज़ धार वाले चाकू से छिल कर फिर उसके ऊपर से ग्रीस लगा दें ।
नीम का काढ़ा या मिट्टी का तेल (Kerosene) का भूमि में छिड़काव करे ।
विष्णु रोग – इस रोग के वजह से पत्तियों पर हरे रंग की महीनता नज़र आने लगती है । इसके अलावा पत्तियां और टहनियां dry होकर सुख जाती है । इससे बचना है तो नीम के काढ़ा को पूरे खेत में छिड़क दें ।

Nimbu Ka Rog Wa Keet Se Bachav Tips To Control Disease and Pest Nimboo Sila Yah Nayi Pattiyon Aur कलियों Ras choos Jate Hai Is Ke Prakop Pattiyan Girne Lagti Ek Tarah चिटचिटा Padarth Nikalta Jis Par Kali मोल्ड Jam Jati Niyantran Hetu Isse Prabhavit Sabhi parts Ko Kat Kar Jala De Ki Titli Nursery Paudhon Kafi Nuksan Pahunchati Iske green color Illi Kha Kit April May Tak August October Jyada Lagte Liye Apne खेतो Me Neem

फसल की तुड़ाई / Picking FOr Lemon Farming

फसल की तुड़ाई / Picking

खट्टे नींबू के पौधों में एक साल में कई बार फल लगते है और इसके फलो को तैयार होने में लगभग 6 month का time लगता है । जब फल पक कर हरे रंग से पीला रंग हो जाता है तब उसकी तुड़ाई start कर दी जाती है ।

उपज / Production for Lemon Farming

उपज / Production

यह अक्सर पुचा जाता है की निम्बू के पेड़ पर कितने साल से फल लगने लगते है । वैसे तो 1 साल के बाद ही निम्बू के छोटे-छोटे फल लगने लगते है पर वह किसी काम का नहीं होता है । 3 से 4 साल के होने तक निम्बू के पेड़ में अच्छी मात्र में निम्बू फल लगने लगते है । और 5 से 6 साल की उम्र वाले पौधो से सालाना 2,000 से 5,000 निम्बू के फल प्राप्त किये जा सकते है ।

आज के date में लगभग सभी सहरों में 10 रूपए (INR) में 3 से 5 piece ही निम्बू मिलता है ।

उस हिसाब से अगर आप देखे तो किसान भाई आसानी से हर एक piece पर Rs 0.75 से ले कर Rs 1.00 मिल सकते हैं । अगर किसान भाई कम ही मान कर चले और हर एक lemon के piece का price Rs 0.75 ही लगाये तो, कुछ इस प्रकार से profit margin आएगा :

Average Annual Production of Lemon from one Tree: 3,000 piece
Total no. of Lemon Trees in One Acer of Land: 150 Trees
Total production = 4,50,000 Lemon
Total Sales (4,50,000 x Rs 0.75) = Rs 3,37,500
अब अगर मान कर चला जाये की सब मिल कर खर्चा maximum 1 लाख सालाना भी हो तो आप आसानी से Rs 2,00,000 कम से कम कम सकते है वो भी केवल 1 acer से । यह सही बात है की सुरुवात में आपको 3 से 4 साल तक का इंतज़ार करना होगा और investment भी थोडा होगा, पर अगर आप 4 से 10 साल तक का नजरियाँ ले कर चलते है तो आपको यह बैठा बैठाया on-going कम से कम 2 लाख आसानी से कम सकते है ।

Upaj Production Yah Aksar पुचा Jata Hai Ki Nimbu Ke Ped Par Kitne Sal Se Fal Lagne Lagte Waise To 1 Baad Hee Chhote Wah Kisi Kaam Ka Nahi Hota 3 4 Hone Tak Me Achhi Matra Aur 5 6 Umra Wale Podhon Salana 2 000 Prapt Kiye Jaa Sakte Aaj Date Lagbhag Sabhi सहरों 10 Rupaye INR piece Milta Us Hisab Agar Aap Dekhe Kisaan Bhai Asani Har Ek Rs 0 75 Le Kar 00 Mil Hain Kam Maan Chale lemon price Lagaye Kuch Is Prakar pr

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Agriculture GK in hindi for all competitive Exams Series #31

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Agriculture GK in hindi for all competitive Exams Series #31

Hello readers,

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2. ग्रेनुलशन {Granulation } किस फल का एक Phisiological {दैहिकी} विकार है ?
  1. सेब
  2. सपोटा
  3. नींबू (Right Ans)
  4. केला
3. निम्नांकित में कौन सी कोल क्रॉप {Cole Crop} की श्रेणी में है ?
  1. चुकन्दर
  2. शलजम
  3. गांठगोभी (Right Ans)
  4. पालक
4. निम्नांकित में से कौन से फल में Ascorbic Acid की सबसे अधिक मात्रा पायी जाती है ?
  1. आँवला(Right Ans)
  2. आम
  3. सेब
  4. संतरा
5. सर्वाधिक विटामिन A किसमें पाया जाता है ?
  1. पके हुए आम के फल में (Right Ans)
  2. गाजर की जड़ों में
  3. पके हुए पपीते के फल में
  4. पके हुए टमाटर के फल में
6. विश्व में सर्वाधिक फलोत्पादन करने वाला देश है :-
  1. चीन (Right Ans)
  2. संयुक्त राज्य अमेरिका
  3. ब्राजील
  4. भारत
7. विश्व में सर्वाधिक सब्जी उत्पादन करने वाला देश है :-
  1. चीन (Right Ans)
  2. ऑस्ट्रेलिया
  3. दक्षिण अफ्रीका
  4. उपर्युक्त में से कोई नहीं
8. निम्नलिखित में से किस फसल का विश्व में सर्वाधिक उत्पादन किया जाता है :-
  1. आम
  2. टमाटर
  3. आलू (Right Ans)
  4. अंगूर
9. प्याज में तीखापन {झार} होने  प्रमुख कारण है :-
  1. एलाइड प्रोपाइल डाईसल्फाइड(Right Ans)
  2. कैप्सेसिन
  3. कुकुरबिटेसिंन
  4. कुरकुमीन

10. नर तथा उभयलिंगी दोनों ही प्रकार के पुष्प किस फसल में पाये जाते हैं ?

  1. आम (Right Ans)
  2. अमरुद
  3. भिन्डी
  4. बैंगन
11. वैज्ञानिक वर्गीकरण के जनक {Father of Taxonomy} के रूप में किसको माना जाता है ?
  1. ग्रीस के दार्शनिक थियोफ्रेस्टस को
  2. स्वीडन के डॉक्टर कार्ल वान लिने को (Right Ans)
  3. लिबर्टी हाइड बेली को
  4. ग्रेगर जॉन मेण्डल को
12. निम्नलिखित में से किस सब्जी में सर्वाधिक कैल्शियम तत्त्व पाया जाता है ?
  1. प्याज
  2. मेथी (Right Ans)
  3. लोबिया
  4. इनमे से कोई नहीं

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13. फलों की जेली बनाने में सामान्यतः किस अम्ल का प्रयोग किया जाता है ?
  1. साइट्रिक एसिड (Right Ans)
  2. मैलिक एसिड
  3. टारटेरिक एसिड
  4. हाइड्रोक्लोरिक एसिड

14. “अनिषेकफलन “{Parthenocarpy} बहुतायत से किसमे होता है ?

  1. कटहल
  2. लीची
  3. आम
  4. केला(Right Ans)

15. फलों को पकाने वाला पादप वृद्धि नियामक {Plant Hormone} है :-

  1. I.B.A {इन्डोल ब्यूटाइरिक एसिड}
  2. एथिलीन गैस (Right Ans)
  3. एसिटिलीन गैस
  4. मैलिक हाईड्रेजाइड

16. आँवला की कौन सी किस्म पेठा {candy} बनाने के लिए उपयुक्त है ?

  1. नरेन्द्र आँवला- 4 (Right Ans)
  2. नरेन्द्र आंवला -5
  3. नरेन्द्र आँवला -9
  4. फ्रांसिस

17. निम्नलिखित में से कौन सा “प्रतियोगी बाजार” है ?

  1. पूर्ण बाजार (Right Ans)
  2. प्राथमिक बाजार
  3. पूँजी बाजार
  4. थोक बाजार

18. मूल्य सिद्धांत {Price Theory} भाग होता है :-

  1. सूक्ष्म अर्थशास्त्र का (Right Ans)
  2. वृहत अर्थशास्त्र का
  3. प्रक्षेत्र प्रबंध का
  4. विपडन का

19. उत्पादन लागत को किस अर्थशास्त्र के सिद्धांत का प्रयोग करके न्यूनतम किया जा सकता है ?

  1. उत्पादन ह्रास नियम {Law of diminishing return}
  2. अवसर लागत का सिद्धांत {Law of opportunity cost}
  3. लागत का सिद्धांत {Cost Principle}
  4. लीस्ट कॉस्ट कॉम्बिनेशन का सिद्धांत {Principle of least cost combination}(Right Ans)

20.  औसत कुल लागत तथा औसत परिवर्तनीय लागत के बीच की दूरी उत्पादन की वृद्धि  के साथ :-

  1. घटती जाएगी (Right Ans)
  2. बढ़ती जायेगी
  3. स्थिर रहेगी
  4. शुरू में बढ़ेगी, बाद में घटेगी
21. मुद्रा स्फीति का कारण है :-
  1. मुद्रा आपूर्ति की बढ़ोत्तरी
  2. उत्पादन में गिरावट
  3. मुद्रा आपूर्ति में बढ़ोत्तरी और उत्पादन में गिरावट (Right Ans)
  4. मुद्रा आपूर्ति में गिरावट और उत्पादन में गिरावट
22. कृषि वस्तुओं का “समर्थन मूल्य” क्या है ?
  1. सरकार के द्वारा मूल्य में रियायत देना,जो बाजार भाव हो
  2. फ्लोर प्राइस, जिसके नीचे यह बेचा न जा सके
  3. वह न्यूनतम मूल्य, जिस पर सरकार खरीदने के लिए तैयार हो (Right Ans)
  4. किसानों को उनकी फसल का सूखा आदि आपदा के समय जो धन जाये

23. “गिफेन वस्तुओं” का सम्बोधन होता है :-

  1. प्रचुर मात्रा में वस्तुएं
  2. वस्तुओं की कमी
  3. निम्न कोटि की वस्तुएं (Right Ans)
  4. उच्च कोटि की वस्तुएं

24. y = f, a + bx सम्बोधन करता है :-

  1. एक उत्पादन फलन का (Right Ans)
  2. एक माँग वक्र का
  3. एक पूर्ती वक्र का
  4. एक लागत वक्र का
25. अन्धी गुड़ाई {Blind hoeing} संस्तुति है :-
  1. गेंहूँ में
  2. गन्ना में (Right Ans)
  3. मक्का में
  4. सूरजमुखी में
26. गेंहूं के अंकुरित बीज का वह भाग जो जमीन के ऊपर सबसे पहले दिखाई देता है, उसे कहते हैं :-
  1. भ्रूण मूल चोल {Coleorchiza}
  2. वरुथिका {Scutellum}
  3. भ्रूणाग्र चोल {Coleoptile}(Right Ans)
  4. बहिः स्तर {Epiblast}
27.धान के खेत में पंकभंजन {Pudding} की जाती है :-
  1. मृदा सतह को मृदु बनाने में
  2. खरपतवार नियन्त्रण हेतु
  3. जड़ों को गहरा जाने से रोकने के लिए
  4. पानी का रिसाव कम करने हेतु (Right Ans)
28. आनुवंशिक संरचना में परिवर्तन {Transgenic} करके बनायी गई पहली फसल, जिसे भारत में व्यापारिक स्तर पर खेती के लिए उपयोग किया गया :-
  1. सोयाबीन
  2. धान
  3. कपास (Right Ans)
  4. सरसों

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29. दलहनी फसल, जिसमे प्रायः मैदानी क्षेत्रों में सहजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकरण {Symbiotic nitrogen fixation} नहीं होता है :-
  1. सोयाबीन
  2. मूंग
  3. फ्रेंच बीन {राजमा} (Right Ans)
  4. मटर
30. पौधों में नत्रजन की कमी के लक्षण सर्वप्रथम दिखाई देते हैं :-
  1. निचली पत्तियों पर (Right Ans)
  2. मध्य की पत्तियों पर
  3. ऊपरी पत्तियों पर
  4. उपर्युक्त सभी पर
31. ट्रीटीकेल {Triticale} एक संकरण {Cross} है :-
  1. गेंहूँ और जौ का
  2. मक्का और ज्वार का
  3. गेंहूँ और राई का (Right Ans)
  4. राई और जौ का

32. गेंहूँ का अच्छी प्रकार भण्डारण करने के लिए उसमें न्यूनतम नमी होनी चाहिए :-

  1. 10% से कम (Right Ans)
  2. 4% से कम
  3. 8% से कम
  4. 3% से कम

33. मैग्नीशियम {Mg} के प्रयोग से पौधों द्वारा बढ़ता है :-

  1. फॉस्फोरस का अपटेक (Right Ans)
  2. पोटाश का अपटेक
  3. नाइट्रोजन का अपटेक
  4. गन्धक का अपटेक

34. गेंहूँ में ताजमूल निकलने {CRI – Crown Root initiation} की अवस्था आती है :-

  1. कल्ले निकलने के बाद {After Tillering}
  2. कल्ले निकलने से पहले {Before Tellering}
  3. आवार अवस्था के बाद {After Booting}(Right Ans)
  4. आवार अवस्था से पहले {Before Booting}
35. गेंहूँ के फसल की सिचाई हेतु सर्वाधिक क्रान्तिक अवस्था {Most critical stage} है :-
  1. शिखर मूल निकलते समय {Crown root initiation} (Right Ans)
  2. कल्ले फूटते समय {Tillering}
  3. फूल आते समय Flowering}
  4. दानों में दूध पड़ते समय {Dough}
36. सूरजमुखी {Sunflower} का उत्पत्ति स्थान कौन सा देश है ?
  1. दक्षिणी यूनाइटेड स्टेट्स और मैक्सिको (Right Ans)
  2. स्पेन
  3. सोवियत यूनियन
  4. अर्जेंटीना
37. जिन भूमियों में फॉस्फोरस {P}की मात्रा 20 KG /Hec. होती है, उनका वर्गीकरण होता है :-
  1. फॉस्फोरस की अधिकता
  2. फॉस्फोरस की कमी
  3. फॉस्फोरस में मध्यम (Right Ans)
  4. उपर्युक्त में से कोई नहीं
38. कांस {Kans- Saccharum Spontaneum L.} के सफल नियंत्रण हेतु उपयुक्त संस्तुत खरपतवारनाशक कौन सा है ?
  1. ग्लाइफोसेट 41% S.L. 3-4 Lit/Hec.(Right Ans)
  2. ग्लाइफोसेट 41% S.L. 2-3 Lit/Heca
  3. एट्राजिन 50% W.P. 3 Lit/Hec.
  4. पेण्डीमेथालिन 30 E.C. 3.3 Lit/Hec
39. निम्न में से कौन सही सुमेलित नहीं है :-
  1. लोबिया -विग्ना साइनेंसिस एल.
  2. जौ – हार्डियम वलगेयर एल.
  3. मूंग – फैजियोलस मूंगों राक्स बी(Right Ans).
  4. चना – साइसर एराइतिनम एल.

40. यूरिया का रासायनिक सूत्र है :-

  1. NHCONH
  2. NHCONH2
  3. NH2CONH2(Right Ans)
  4. NH2CONH3

41. उत्तर-प्रदेश के मैदानी भागों के लिए रबी की बुवाई हेतु मक्के {Maize} की सबसे उपयुक्त प्रजाति कौन सी है :-

  1. मंजरी (Right Ans)
  2. नवीन
  3. तरुण
  4. कंचन

42. एक हेक्टेयर क्षेत्र की रोपाई हेतु “डैपोग” विधि से धान की पौध तैयार करने के लिए आवश्यक क्षेत्रफल होगा :-

  1. 30 से 40 वर्ग मीटर (Right Ans)
  2. 50 से 60 वर्ग मीटर
  3. 60 से 70 वर्ग मीटर
  4. 80 से 100 वर्ग मीटर

43. बीज की सुषुप्तावस्था तोड़ने के लिए भीगे बीज को ऑक्सीजन की उपस्थिति में निम्न तापक्रम पर रखने की क्रिया को कहते हैं :-

  1. स्तरण
  2. बसन्तीकरण (Right Ans)
  3. संजलीयन
  4. खरोचन

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44. C3 प्रकार के पौधे में एक CO2 अणु को शर्करा में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक A.T.P अणुओं  संख्या है :-

  1. दो
  2. तीन (Right Ans)
  3. चार
  4. पांच
45. कोशिका का वर्धन {Cell elongation} मुख्या रूप से निर्भर  होता है :-
  1. कोशिका के जल विभव {Water Potential} पर (Right Ans)
  2. कोशिका के पानी की मात्रा पर
  3. कोशिका के आसृति विभव पर
  4. कोशिका के स्फीति दाब पर
46. एक स्वयं परागित फसल है :-
  1. मक्का
  2. धान (Right Ans)
  3. बरसीम
  4. अण्डी
47. जर्म प्लाज्मा का सिद्धांत {Germ Plasm Theory} दिया था :-
  1. डार्विन ने
  2. लीवमेन हाक ने
  3. स्पेलांजनी ने
  4. वीसमैन ने (Right Ans)
48. आदर्श व्यवसायिक प्रजाति की तुलना में F1 संकर की श्रेष्ठता को कहते हैं :-
  1. Heterobeltiosis(Right Ans)
  2. अतिवर्धनशीलता {Luxuriance}
  3. आर्थिक संकर ओज {Economic Heterosis}
  4. मध्य-जनक संकर ओज {Relative Heterosis}
  49. “विरकोला आइसोक्रेट्स” किस फसल का पीडक कीट है ?
  1. आम
  2. नींबू
  3. सेब
  4. अनार(Right Ans)

50. कैलोसोब्रूकस चाईनेंसिस {Callosobruchus Chinensis} किसका भण्डारण पीडक कीट है ?

  1. गेंहूं
  2. चना (Right Ans)
  3. चावल
  4. मूंगफली

    (All Haryana Distt Gk In Hindi)– ( Haryana Gk Distt Wise)

    Charkhi Dadri  │  │Faridabad │ │Rewari │  │Mahendragarh   │  │Gurgaon/ Gurugram  │  │Palwal  │  │Rohtak │  │Bhiwani  │  │Ambala    │  │Kaithal   │   │Panchkula  │   │Karnal    │  │YamunaNagar    │  │Sonipat     │  │Panipat    │  │Fatehabad  │    │Jind  │    │Hisar   │    │Sirsa     │  │Kurukshetra  │ 

Agriculture GK in hindi for all competitive Exams Series #30

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Haryana Gk for HSSC

Haryana GK 1500 QUestions.

India Gk in hindi 10000+ Questions

Science gk in hindi 3000+ Questions

Computer gk 3000+Questions

Agriculture gk in hindi

1. मूंग में पीला चित्रवर्ण {Yellow Mosaic Virus} रोग किस कीट द्वारा होता है ?

  1. बेमिसिया टैबेसाई(Right Ans)
  2. एफिस क्रैसीवोरा
  3. नेफोटेटिक्स वाइरेसेन्स
  4. अमरास्का बिगुटुला 

2.  N.S.K.E किस नाशी जीव के नियन्त्रण में प्रभावशाली है ?

  1. सरसों की आरा मक्खी {Saw Fly}
  2. आम का चेंपा Mealy bug}
  3. टिड्डी {Locust}
  4. घास फुदके  {Grass hoppers}(Right Ans)
3. अधिकतर मृदाओं में धनायन विनिमय क्षमता {Cation Exchange Capacity}-
  1. P.H के साथ बढ़ती है (Right Ans)
  2. P.H 7.00 पर सर्वाधिक होती है
  3. P.H 6.00 पर स्थिर रहती है
  4. P.H पर निर्भर नहीं होती

    Agriculture GK in hindi for all competitive Exams Series #29

    Agriculture GK in hindi for all competitive Exams Series #31

4. निम्नलिखित में से किस विधि से उर्वरक देने से फास्फेटिक उर्वरकों की उपयोग क्षमता बढ़ जाती है ?

  1. भूमि उपरिस्तर पर बुरककर देना {Broadcasting on surface soil}
  2. खड़ी फसल में पर्णीय छिड़काव {Foliar Spray}
  3. कड़ी फसल में Top dressing करना
  4. कूड़ों में नीचे डालना {Placement or drilling}(Right Ans)

5. भूमि में जीवांश पदार्थ {Organic Matter} किस तत्व की उपलब्धता का सूचकांक है ?

  1. नत्रजन (Right Ans)
  2. फॉस्फोरस
  3. पोटाशियम
  4. जस्ता

6. वनस्पति तत्वों का सही समूह कौन सा है, जो नाइट्रोजिनेज एंजाइम का अंग है ?

  1. पोटेशियम,सोडियम, क्लोरीन
  2. जस्ता, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन
  3. कैल्शियम, वैनेडियम, क्लोरीन
  4.   लोहा, गन्धक, मोलिब्डेनम (Right Ans)
7. निम्नलिखित में से कौन जैव उर्वरक {Bio-Fertilizer} सहजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकरण {Symbiotic N Fixer} है ?
  1. एजोटोबैक्टर
  2. एजोस्पाइरिलम
  3. नील-हरित शैवाल
  4. राइजोबियम (Right Ans)

8. लवणीय मृदा {Saline Soil} के लिए निम्नांकित में से कौन सा कथन सही है ?

  1. पी० एच० मान 8.5 से अधिक, विद्युत चालकता 4.0 dsm-1 से कम, दानेदार संरचना, सफ़ेद रंग।
  2.  पी० एच० मान 8.5 से कम , विद्युत चालकता 4.0 dsm-1 से अधिक, कठोर संरचना, काला रंग।
  3. पी० एच० मान 8.5 से कम, विद्युत चालकता 4.0 dsm-1 से अधिक, दानेदार संरचना, सफ़ेद रंग। (Right Ans)
  4. पी० एच० मान 8.5 से अधिक, विद्युत चालकता 4.0 dsm-1 से कम, कठोर संरचना।

9. यदि 1000 ग्राम विलायक में 1 ग्राम मोल विलय घुला हो, तो इसे कहते हैं :-

  1. नॉर्मल विलयन/घोल
  2. मोलर घोल
  3. मोलल घोल (Right Ans)
  4. 0.001 N घोल

    Agriculture GK in hindi for all competitive Exams Series #29

    Agriculture GK in hindi for all competitive Exams Series #31

10. तनावमापी {Tensiometer} मापता है :-

  1. पूर्ण मृदा-जल विभव {Total soil water potential}
  2. पूर्ण मृदा-जल तनाव {Total soil moisture tension}(Right Ans)
  3. मैट्रिक विभव  {Metric potential}
  4. पूर्ण मृदा-जल चूषय {Total soil moisture suction}

11. सर्वाधिक रन्ध्र युक्त मृदा संरचना {Porus soil structure} है :-

  1. कणीय {Granular}
  2. मृदु कण {Crumb}(Right Ans)
  3. प्रिज्मी Prismatic}
  4. प्लेटी {Platy}
12.मृदा रन्ध्रों व वायुमंडलीय हवा के बीच O2 और CO2  के विनिमय {Exchange} को कहते हैं :-
  1. मृदा वायु क्षमता {Soil-air capacity}
  2. मृदा वायु-विसरण {Soil-Oxygen diffusion}(Right Ans)
  3. मृदा-वायु पारगम्यता {Soil-Air permeability}
  4. मृदा वातन {Soil aeration}
13. Humus का वह भाग, जो किसी अम्ल या क्षार में विलय न हो, को कहते हैं :-
  1. Humic Acid
  2. Fulvic Acid
  3. Humin(Right Ans)
  4. उपर्युक्त में से कोई नहीं
14. भिन्डी की पत्ती का पीतवर्ण {Yellow leaf mosaic} रोग फैलता है :-
  1. फुदकों से  {Jassids}(Right Ans)
  2. छेदकों से {Borers}
  3. फुदकों और छेदकों दोनों से
  4. इनमे से कोई नहीं
15. अनावृत कण्डुआ {Loose Smut} का नियंत्रण किसके द्वारा किया जाता है ?
  1. रसायनों के छिड़काव से
  2. भूमि उपचार से
  3. बीजोपचार से (Right Ans)
  4. इनमे से कोई नहीं
16. सूची – First को सूची- Second से सुमेलित कीजिये और नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर चुनिये :-
सूची- First {फसल रोग }
a.  गेंहूं का अनावृत कण्डुआ
b. मटर में चूर्णिल आसिता
c. सब्जियों में Damping Off
d. खैरा रोग
सूची- Second {उपचार }
  1. सलफेक्स
  2. ज़िंक सल्फेट
  3. वीटावैक्स
  4. मृदा का सौर ऊर्जीकरण
कूट : 
              [a]             [b]                [c]               [d]
{A}         2                1                   4                 3
{B}         3                1                   2                 4
{C}         1                2                   3                 4
{D}         3                1                   4                 2(Right Ans)
17. गल्ला गोदाम में अनाजों  पर लगने वाली फफूँदी कौन सी है ?
  1. म्यूकर
  2. राइजोपस
  3. कैंडिडा
  4. एस्पर्जिलस (Right Ans)
18. “बक आइ राट “ {Buck eye rot} बीमारी है :-
  1. शकरकन्द की
  2. टमाटर के फल की (Right Ans)
  3. गार्डन पी की फलियों की
  4. सिंघाड़ा की

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19. निम्नलिखित में से कौन सी बीमारी सेब की नहीं है ?

  1. Bird eye disease
  2. Powdery mildew
  3. downy mildew
  4. Bunchy Top(Right Ans)

20. निम्नलिखित में से कौन से “सैक फंजाई” कहलाते हैं ?

  1. फाइकोमाइसिटीज(Right Ans)
  2. एस्कोमाइसिटीज
  3. बेसिडियोमाइसिटीज
  4. ड्यूरोमाइसिटीज

21. मटर की चूर्णिल आसिता अवरोधी प्रजाति {Powdery mildew resistant variety} है :-

  1. वी एल – 1
  2. टा. 163
  3. रचना (Right Ans)
  4. पी. – 3
22. निम्नलिखित में से कौन सुमेलित नहीं है ?
  1. आलू    – झुलसा {Blight}
  2. ज्वार   – कण्डुआ Smut}
  3. गेंहूं     –  अरगट {Erogt}(Right Ans)
  4. तिल   –  फाइलोडी {Phyllody}

23. भिन्डी का पीला शिरा मोज़ेक {Yellow Vein Mosaic} का रोगवाहक है :-

  1. हवा
  2. बीटल कीट
  3. एफिड कीट
  4. सफ़ेद मक्खी (Right Ans)
24. भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद [IARI] किस वर्ष में स्थापित की गयी ?
  1. 1928
  2. 1929(Right Ans)
  3. 1904
  4. 1866
25. प्रसार शिक्षा [Extension Education] का सिद्धांत है :-
  1. देखकर सीखना तथा करने में विश्वास करना
  2. देखकर विश्वास करना तथा करके सीखना (Right Ans)
  3. केवल गरीबों के लिए शिक्षा
  4. उपर्युक्त में से कोई नहीं
26. “Indian Village Service Programme” [IVSP] प्रारम्भ किया गया :-
  1. भारत सरकार (1947) द्वारा
  2. विनोबा भावे (1947) द्वारा
  3. W.H Visher (1947) द्वारा (Right Ans)
  4. स्पेंसर हेच (1948) द्वारा
27. राष्ट्रीय प्रसार सेवा बोर्ड [NESB] का शुभारम्भ हुआ :-
  1. 15 अगस्त,1953 को
  2. 26 जनवरी, 1953 को
  3. 2 अक्टूबर, 1953 को (Right Ans)
  4. उपर्युक्त में से कोई नहीं
28. प्रजातान्त्रिक विकेंद्रीकरण अस्तित्व में आया था :-
  1. 1957 में (Right Ans)
  2. 1958 में
  3. 1956 में
  4. 1965 में

    Agriculture GK in hindi for all competitive Exams Series #29

    Agriculture GK in hindi for all competitive Exams Series #31

29. NARP आरम्भ हुई थी :-
  1. पांचवीं पंचवर्षीय योजना में (Right Ans)
  2. छठवीं पंचवर्षीय योजना में
  3. चौथी पंचवर्षीय योजना में
  4. सातवीं पंचवर्षीय योजना में
30. सम्प्रेषण की प्रभावशीलता निर्भर करती है :-
  1. केवल विचारों की स्पस्टता
  2. विचारों की स्पष्टता और पारस्परिक अमीक्षा (Right Ans)
  3. केवल पारस्परिक मनोदशा
  4. उपर्युक्त में से कोई नहीं
31. निम्नलिखित में से कौन सही सुमेलित नहीं है ?
  1. इटावा अग्रगामी योजना        – 1950 (Right Ans)
  2. सामुदायिक विकास प्रखण्ड   –  1952
  3. राष्ट्रीय प्रसार सेवा                –  1953
  4. जनजाति विकास प्रखण्ड       –  1957
32. “प्रौद्योगिकी मूल्यांकन एवं परिष्करण” [Technology Assesment and Refinement] होता है :-
  1. T and; V System द्वारा (Right Ans)
  2. I. V. L. P द्वारा
  3. C.D.P द्वारा
  4. I.R.D.P द्वारा
33. सूची First को सूची Second से सुमेलित कीजिये :-
सूची First : संपर्क विधि 
a. समूह प्रदर्शन
b. विराट संपर्क
c. व्यक्तिगत संपर्क
d. सामुदायिक संपर्क
सूची  Second : तकनीक 
  1. प्रदर्शनी
  2. लेक्चर
  3. प्रक्षेत्र एवं गृह भ्रमण
  4. पत्रिका
कूट : 
             (a)         (b)          (c)            (d)
[A]         1           2             3              4
[B]         2           4             3              1 (Right Ans)
[C]         2           3             4              1
[D]         1           3             2              4
34. ग्रामीण जन अभिप्रेरित {Motivated} किये  जा सकते हैं :-

  1. पुरस्कार द्वारा
  2. सुविधा द्वारा
  3. प्रशंसा द्वारा
  4. उपरोक्त सभी के द्वारा (Right Ans)
35. कौन सा एक जनसंपर्क (Mass approach) से सम्बंधित है :-
  1. फिल्म, प्रदर्शन तथा रेडियो
  2.  रेडियो, टीवी तथा लेक्चर
  3. टेलीफोन कॉल, रेडियो तथा टीवी
  4. एक्सिबिशन, न्यूज़पेपर तथा मैगजीन (Right Ans)
36. राष्ट्रीय प्रदर्शन (National Demonstration) उदाहरण है :-
  1. प्रदर्शन का
  2. विधि प्रदर्शन का
  3. संकुल प्रदर्शन का
  4. परिणाम प्रदर्शन का(Right Ans)
37. सामान्यतः पोस्टर की विशेषताएं हैं :-
  1. शब्दों तथा चित्रों का बराबर आकार
  2. शब्दों तथा चित्रों की बराबर संख्या
  3. न्यूनतम शब्द तथा आकर्षक चित्र (Right Ans)
  4. उपर्युक्त में से कोई नहीं
38. स्वरोजगार प्रशिक्षण योजना (TRYSEM) का शुभारम्भ वर्ष था :-
  1. 1959
  2. 1969
  3. 1979(Right Ans)
  4. 1989

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39. सब्जियों के लिए डिब्बाबंदी (Canning) का माध्यम है :-
  1. चीनी
  2. ब्राइन(Right Ans)
  3.  1 और 2 दोनों
  4. इनमे से कोई नहीं

40. N.A.T.P के घटक हैं :-

  1. ICAR के संगठन एवं प्रबंध प्रणाली का विकास (Right Ans)
  2. Agro Eco System Research
  3. प्रौद्योगिकी विस्तार में नवाचार
  4. उपर्युक्त सभी

Agriculture GK in hindi for all competitive Exams Series #29

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Agriculture gk in hindi

1. आलू का वानस्पतिक नाम है :-

  1. पायसम सैटाईवम
  2. सोलेनम नाइग्रम
  3. सोलेनम ट्यूबरोसम  (Right Ans)
  4. ट्रिटिकम एस्टीवम
2. ‘कल्याण सोना’ निम्नलिखित में से किस फसल की किस्म है :-
  1. जौ
  2. धान
  3. मक्का
  4. गेंहू (Right Ans)
3. ‘मारकोनी गेंहू’ का वानस्पतिक नाम है :-
  1. ट्रिटिकम ड्यूरम (Right Ans)
  2. ट्रिटिकम एस्टीवम
  3. ट्रिटिकम डाइकोकम
  4. ट्रिटिकम स्पेल्टा
4. ‘Lens esculenta’ किस फसल का वानस्पतिक नाम है :-
  1. उर्द का
  2. मटर का
  3. मूंग का
  4. मसूर का (Right Ans)
5. निम्न में से कौन लम्बी अवधि का प्रकाश चाहने वाला पौधा नहीं है ?
  1. मटर
  2. लोबिया
  3. बरसीम
  4. जई (Right Ans)

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6. आलू में सिंचाई की सबसे क्रान्तिक अवस्था है :-
  1. कन्द बनते समय
  2. 25 % कन्द  बनते समय (Right Ans)
  3. स्टोलन बनते समय
  4. उपरोक्त में से कोई नहीं
7. धान में कितने पुंकेसर पाए जाते हैं ?
  1. 3
  2. 4
  3. 5
  4. 6 (Right Ans)
8. ‘आर्केल’ किस फसल की किस्म है ?
  1. मटर की (Right Ans)
  2. लोबिया की
  3. तोरिया की
  4. सेम की
निम्नलिखित में से कौन सी प्रजाति अमेरिका की है ?
  1. गौसिपीयम अरबोरियम
  2. गौसिपीयम हिर्सुटम (Right Ans)
  3. गौसिपीयम वारवेडेंस
  4. गौसिपीयम हरवेसियम
10. ‘चुकंदर’ किस कुल से सम्बन्ध रखता है ?
  1. क्रूसीफेरी
  2. मालवेसी
  3. कम्पोजिटी
  4. चिनोपोडिएसी (Right Ans)
11. सोयाबीन में कितने किग्रा० /हे० बीज की आवश्यकता पड़ती है ?
  1. 40-50 Kg.
  2. 45-55 Kg.
  3. 70-80 Kg. (Right Ans)
  4. 60-65 Kg.
12. सोयाबीन में कितने प्रतिशत प्रोटीन पायी जाती है ?
  1. 40% (Right Ans)
  2. 20%
  3. 70%
  4. 50%
13. H-777 किस फसल की किस्म है ?
  1. धान की
  2. गेंहू की
  3. कपास की  (Right Ans)
  4. लूसर्न की

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14. भारत की फसल सघनता है :-
  1. 140%
  2. 135% (Right Ans)
  3. 150%
  4. 130%
15. कुफरी सिंदूरी आलू की :-
  1. अगेती किस्म है
  2. पिछेती किस्म है (Right Ans)
  3. माध्यम-मौसम किस्म है
  4. उक्त में से कोई भी नहीं
16. धान में शीत ब्लाइट (Sheath blight) खेत में निम्न तत्व अधिक मात्रा डालने पर होता है :-
  1. नाइट्रोजन  (Right Ans)
  2. फॉस्फोरस
  3. पोटाश
  4. ज़िंक
निम्न में से कौन सी पहली गेंहू की बौने जीन वाली सबसे पहली प्रजाति है :-
  1. प्रताप
  2. मालवीय -12
  3. नोरिन 10 (Right Ans)
  4. मेघदूत
18. मक्का में ज़िंक की कमी से  निम्न में से कौन सा रोग होता है ?
  1. डण्ठल विगलन रोग (Stalk Rot)
  2. सफ़ेद कली (Right Ans)
  3. पर्ण अंगमारी
  4. चारकोल विगलन रोग
19. डेन्सीन्यूरा लाईनाइ किस फसल का पीड़क कीट है ?
  1. अरण्डी का
  2. तिल का
  3. अलसी का (Right Ans)
  4. मूंगफली का
20. सरसों में जिप्सम निम्न में से किस तत्व की पूर्ति के लिए दिया जाता है ?
  1. नाइट्रोजन के लिए
  2. लोहे के लिए
  3. गंधक के लिए (Right Ans)
  4. फॉस्फोरस के लिए
21. रोपण विधि द्वारा बासमती धान की बीज दर होती है :-
  1. 25-30 Kg/hec.
  2. 35-40 Kg/hec.(Right Ans)
  3. 45-60 Kg/hec.
  4. 55-70 Kg/hec.

22. आपेक्षिक खरपतवार है :-

  1. खेत में उसी फसल का पौधा परन्तु प्रजाति दूसरी
  2. किसी फसल में अन्य फसल का पौधा (Right Ans)
  3. फसल के खेत में मौसमी खरपतवार
  4. उपरोक्त सभी
23. चिप्सोना (chipsona) प्रजाति है :-
  1. कसावा की
  2. शकरकन्द की
  3. जमीकंद की
  4. आलू की (Right Ans)
24. दलहनी फसलों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण होता है :-
  1. एजोटोबेक्टर द्वारा
  2. राइजोबियम द्वारा (Right Ans)
  3. नाइट्रोबैक्टर द्वारा
  4. नीली-हरी शैवाल द्वारा

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2. कौन सी फसल सर्वाधिक लवणता रोधी है ?
  1. सूर्यमुखी
  2. जौ (Right Ans)
  3. चवला (Cowpea)
  4. मूंगफली
3. किस तत्व की उपलब्धता जल-प्लावित भूमि में कम हो जाती है ?
  1. फॉस्फोरस
  2. लोहा (Right Ans)
  3. जस्ता
  4. मैंगनीज
4. नाइट्रोजन एक मुख्य पोषक तत्व है, क्योंकि :-
  1. यह मृदा में अधिक उपलब्ध है
  2. यह प्रोटीन का भाग है (Right Ans)
  3. यह वायुमंडल में अधिक उपलब्ध है
  4. यह पौधों में अधिक मात्रा में लिया जाता है
5. स्वस्थ धान की जड़ों का रंग होता है :-
  1. सफ़ेद
  2. आसमानी
  3. रक्ताभ बादामी (Right Ans)
  4. इनमें से कोई नहीं
6. आलू में सीड प्लाट टेक्निक (SPT) किसके द्वारा प्रस्तावित हुई ?
  1. डॉ० जे० एस० ग्रेवाल
  2. डॉ० मुख्तार सिंह
  3. डॉ० बी० बी० नगाइच
  4. डॉ० पुष्कर नाथ (Right Ans)
7. ‘एकसाली’ विधि द्वारा पौध लगाई जाती है :-
  1. तम्बाकू की
  2. चुकंदर की
  3. गन्ने की (Right Ans)
  4. चाय की
8. सीढ़ीदार वेदिकाएं उन क्षेत्रों में बनायीं जाती हैं जहां भूमि का ढाल इससे अधिक होता है :-
  1. 10% (Right Ans)
  2. 15%
  3. 20%
  4. 25%

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9. चारा फसलों को जंगली वृक्षों के साथ उगाने की पद्द्ति को कहते हैं :-
  1. स्ट्रिप क्रॉपिंग
  2. सिल्वीकल्चर
  3. सिलविपास्चर (Right Ans)
  4. एलेक्रॉपिंग
10. ढाल के विपरीत मृदा कटाव को रोकने वाली तथा मृदा कटाव बढ़ाने वाली फसलों की पट्टियों में खेती करना कहलाता है :-
  1. संरक्षण खेती (Conservation cropping)
  2. समोच्च खेती (Contour cropping)
  3. ले खेती ( Lay cropping)
  4. समोच्च पट्टीदार खेती  (Contour strip cropping)
11. ‘कैरिओप्सिस’ किस कुल का फल है ?
  1. मालवेसी
  2. कुकरबिटेसी
  3. सोलेनेसी
  4. ग्रेमिनी (Right Ans)
12. गेंहू में सिंचाई की कौन सी मुख्य क्रान्तिक अवस्था होती है ?
  1. गाँठ बनना
  2. कल्ला बनना
  3. दानों में दूध पड़ना
  4. क्राउन जड़ बनना (CRI Stage) (Right Ans)
13. भारत के कौन से राज्य में धान की तीन फसलें उगाई जाती हैं ?
  1. उत्तर प्रदेश में
  2. पश्चिम बंगाल में  (Right Ans)
  3. उड़ीसा में
  4. आन्ध्र प्रदेश में
14. IRRI कहाँ स्थित है ?
  1. रोम में
  2. फिलिपिन्स में (Right Ans)
  3. नई दिल्ली में
  4. न्यूयॉर्क में
15. “नीली क्रांति’ का सम्बन्ध है :-
  1. अण्डा उत्पादन से
  2. दूध उत्पादन से
  3. मछली उत्पादन से  (Right Ans)
  4. तेल उत्पादन से
16. कपास की पत्ती के व्याकुंचन का कारक है :-
  1. जस्ते की विषाक्ता
  2. तांबे की कमी से
  3. बोरॉन की विषाक्ता (Right Ans)
  4. मैग्नीज की विषाक्ता
17. अवरोधी किस्म है :-
  1. चना (Right Ans)
  2. मटर
  3. मूंगफली
  4. लोबिया
18. ‘ डेपोग’ विधि से उगाई गयी धान की पौध रोपाई के लिए तैयार होती है :-
  1. 6-10 days में
  2. 11-14 days में (Right Ans)
  3. 15-19 days में
  4. 20-24 days में
19. निम्न में से कौन सुमेलित नहीं है :-
  1. सूरजमुखी – कम्पोजिटी
  2. कपास – मालवेसी
  3. अण्डी – कम्पोजिटी (Right Ans)
  4. गन्ना – ग्रेमिनी
20. HCN के विषैलेपन का सम्बन्ध है :-
  1. सोयाबीन से
  2. खेसारी से
  3. बाजरा से
  4. ज्वार से  (Right Ans)

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पातगोभी का मूल स्थान है :-

  1. संयुक्त राज्य अमेरिका
  2. ब्राजील
  3. भू-मध्य सागरीय क्षेत्र (Right Ans)
  4. उपरोक्त में से कोई नहीं
2. “सितम्बर” किस फसल की किस्म है ?
  1. पातगोभी (Right Ans)
  2. गांठगोभी
  3. मटर
  4. फूलगोभी
3. “स्प्राउट ब्रोक्कोली” का जन्म स्थान है :-
  1. इटली (Right Ans)
  2. भारत
  3. चीन
  4. अमेरिका
4. “डायमण्ड बैक मोथ” नामक कीट किस सब्जी का है ?
  1. मटर
  2. टमाटर
  3. फूलगोभी (Right Ans)
  4. लौकी
5. गाँठ-गोभी की पिछेती पकने वाली किस्म है :-
  1. व्हाइट वियना
  2. परपल वियना (Right Ans)
  3. (1) और (2) दोनों
  4. उपरोक्त में से कोई नहीं
केन्द्रीय आलू अनुसन्धान संसथान (CPRI) शिमला, (हिमाचल – प्रदेश) की स्थापना कब हुई ?
  1. 1950
  2. 1952
  3. 1949 (Right Ans)
  4. 1955
7. बैंगन या ‘ऐग प्लांट’ के फल में कड़वाहट का कारण है :-
  1. सल्फर
  2. ग्लाइकोएल्केलॉइड (Right Ans)
  3. मारमेलोसिन
  4. उपरोक्त में से कोई नहीं
8. बैंगन की फसल में ‘लघु पत्ती'(लिटिल लीफ) बीमारी का कारण है :-
  1. माईक्रोप्लाज़्मा (Right Ans)
  2. विषाणु
  3. जीवाणु
  4. कवक
9. मिर्च में चरपराहट (pungency) का कारण है :-
  1. केपसेन्थिन
  2. ग्लाइकोप्रोटीन
  3. कैप्सेसिन (Right Ans)
  4. आइसोथायोसाइनेट
10. टमाटर का उद्भव केंद्र है :-
  1. भू मध्य सागरीय क्षेत्र
  2. पेरू व मैक्सिको (Right Ans)
  3. चीन
  4. भारत
टमाटर की खेती के लिए उपयुक्त मृदा में pH होना चाहिए :-
  1. 6.7 – 7.0 (Right Ans)
  2. 8.5
  3. 5.5 – 6.5
  4. 4.5 – 5.0

12. सामान्य रूप से “तैरता हुआ उद्यान” पाया जाता है :-

  1. बैंगलौर में
  2. कश्मीर में (Right Ans)
  3. दिल्ली में
  4. पुणे में
13. मिर्च का लाल रंग किस वर्णक का कारण है ?
  1. कैप्सेसिन
  2. करसेन्थिन (Right Ans)
  3. सोलेनिन
  4. ग्लाइकोलाइकोपिन
14. टमाटर में “कायिक गुणसूत्र” की संख्या होती है :-
  1. 2n = 48
  2. 2n = 42
  3. 2n = 24 (Right Ans)
  4. 2n = 14
15. “हरभजन” किस सब्जी की महत्वपूर्ण किस्म है ?
  1. ओकरा  (Right Ans)
  2. मिर्च
  3. शकरकन्द
  4. बैंगन
बैंगन किस जाति  से सम्बंधित है /
  1. टूबरोसम
  2. मेलोनजेना  (Right Ans)
  3. एस्कुलेंट्स
  4. एनम
17. अनार किस प्रकार का फल है :-
  1. Berry
  2. Drupe
  3. Pome
  4. Balusta (Right Ans)
18. प्याज की गाँठ है, एक रूपांतरित :-
  1. पत्ती
  2. तना (Right Ans)
  3. जड़
  4. फल
19. नागफनी है, एक रूपांतरित :-
  1. पत्ती
  2. तना (Right Ans)
  3. जड़
  4. फल
20. निम्न में से किसमें क्लोरोफिल नहीं होता ?
  1. पर्णांग (Fern)
  2. काई (Moss)
  3. कवक (Fungus)(Right Ans) 
  4. शैवाल (Algae)
निम्न में से कौन सा पौधा माँसाहारी है ?
  1. कलश पौधा (Urn plant)
  2. घटपर्णी (PitcherPlant) (Right Ans)
  3. नागफनी
  4. फीता पौधा (Ribbon Plant)
22. आलू है, एक रूपांतरित (modified form of) :-
  1. जड़
  2. तना (Right Ans)
  3. पत्ती
  4. फल
23. हल्दी पौधे के किस भाग से प्राप्त की जाती है ?
  1. जड़
  2. फल
  3. बीज
  4. तना (Right Ans)
24. टमाटर में “ब्लूसम एंड रॉट” किस तत्व की कमी के कारण घटित होता है ?
  1. बोरोन
  2. कैल्शियम (Right Ans)
  3. मैग्निसियम
  4. कॉपर
निम्न में से कौन सा पौधा माँसाहारी है ?
  1. कलश पौधा (Urn plant)
  2. घटपर्णी (PitcherPlant) (Right Ans)
  3. नागफनी
  4. फीता पौधा (Ribbon Plant)
22. आलू है, एक रूपांतरित (modified form of) :-
  1. जड़
  2. तना (Right Ans)
  3. पत्ती
  4. फल
23. हल्दी पौधे के किस भाग से प्राप्त की जाती है ?
  1. जड़
  2. फल
  3. बीज
  4. तना (Right Ans)
24. टमाटर में “ब्लूसम एंड रॉट” किस तत्व की कमी के कारण घटित होता है ?
  1. बोरोन
  2. कैल्शियम (Right Ans)
  3. मैग्निसियम
  4. कॉपर

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