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पंडित जी | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #31

पंडित जी | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #31

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शाम ढलने को थी। सभी आगंतुक धीरे-धीरे अपने घरों को लौटने लगे थे। तभी बीरबल ने देखा कि एक मोटा-सा आदमी शरमाता हुआ चुपचाप एक कोने में खड़ा है। बीरबल उसके निकट आता हुआ बोला, ‘‘लगता है तुम कुछ कहना चाहते हो। बेहिचक कह डालो जो कहना है। मुझे बताओ, तुम्हारी क्या समस्या है ?’’

वह मोटा व्यक्ति सकुचाता हुआ बोला, ‘‘मेरी समस्या यह है कि मैं पढ़ा-लिखा नहीं हूं। मैंने अपनी शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया जिसका मुझे खेद है। मैं भी समाज में सिर उठाकर सम्मान से जीना चाहता हूं। पर अब नहीं लगता है ऐसा कभी नहीं हो पाएगा।’’

‘‘नहीं कोई देर नहीं, ऐसा जरूर होगा यदि तुम हिम्मत न हारो और परिश्रम करो। तुममें भी योग्यता है’’ बीरबल ने कहा।

‘‘लेकिन ज्ञान पाने में तो सालों लग जाएंगे।’’ मोटे आदमी ने कहा, ‘‘मैं इतना इंतजार नहीं कर सकता। मैं तो यह जानना चाहता हूँ कि क्या कोई ऐसा तरीका है कि चुटकी बजाते ही प्रसिद्धि मिल जाए।’’

प्रसिद्धि पाने का ऐसा आसान रास्ता तो कोई नहीं है।’’ बीरबल बोला, ‘‘यदि तुम वास्तव में योग्य और प्रसिद्ध कहलवाना चाहते हो, तो मेहनत तो करनी ही होगी। वह भी कुछ समय के लिए।’’

यह सुनकर मोटा आदमी सोच में डूब गया।

‘‘नहीं मुझमें इतना धैर्य नहीं है।’’ मोटे आदमी ने कहा, ‘‘मैं तो तुरंत ही प्रसिद्धि पाकर ‘पंडित जी’ कहलवाना चाहता हूं।’’

‘‘ठीक है।’’ बीरबल बोला, ‘‘इसके लिए तो एक ही उपाय है। कल तुम बाजार में जाकर खड़े हो जाना। मेरे भेजे आदमी वहां होंगे, जो तुम्हें पंडित जी कहकर पुकारेंगे। वे बार-बार जोर-जोर से ऐसा कहेंगे। इससे दूसरे लोगों का ध्यान इस ओर जाएगा, वे भी तुम्हें पंडित जी कहना शुरू कर देंगे। ऐसा होना स्वाभाविक भी है। लेकिन हमारा नाटक तभी सफल होगा जब तुम गुस्सा दिखाते हुए उन पर पत्थर फेंकने लगोगे या हाथ में लाठी लेकर उनको दौड़ाना होगा तुम्हें। लेकिन सतर्क रहना, गुस्से का सिर्फ दिखावा भर करना है तुम्हें। किसी को चोट नहीं पहुंचनी चाहिए।’’

उस समय तो वह मोटा आदमी कुछ समझ नहीं पाया और घर लौट गया।

अगली सुबह वह मोटा आदमी बीरबल के कहेनुसार व्यस्त बाजार में जाकर खड़ा हो गया। तभी बीरबल के भेजे आदमी वहां आ पहुंचे और तेज स्वर में कहने लगे- ‘‘पंडितजी…पंडितजी…पंडितजी…।’’

मोटे आदमी ने यह सुन अपनी लाठी उठाई और भाग पड़ा उन आदमियों के पीछे। जैसे सच ही में पिटाई कर देगा। बीरबल के भेजे आदमी वहां से भाग निकले, लेकिन पंडितजी..पंडितजी…का राग अलापना उन्होंने नहीं छोड़ा। कुछ ही देर बाद आवारा लड़कों का वहां घूमता समूह ‘पंडितजी…पंडितजी…’ चिल्लाता हुआ उस मोटे आदमी के पास आ धमका।

बड़ा मजेदार दृश्य उपस्थित हो गया था। मोटा आदमी लोगों के पीछे दौड़ रहा था और लोग ‘पंडितजी…पंडितजी…’ कहते हुए नाच-गाकर चिल्ला रहे थे।

अब मोटा आदमी पंडितजी के नाम से प्रसिद्ध हो गया। जब भी लोग उसे देखते तो पंडितजी कहकर ही संबोधित करते। अपनी ओर से तो लोग यह कहकर उसका मजाक उड़ाते थे कि वह उन पर पत्थर फेंकेगा या लाठी लेकर उनके पीछे दौड़ेगा। लेकिन उन्हें क्या पता था कि मोटा तो चाहता ही यही था। वह प्रसिद्ध तो होने ही लगा था।

इसी तरह महीनों बीत गए।

मोटा आदमी भी थक चुका था। वह यह भी समझ गया था कि लोग उसे सम्मानवश पंडितजी नहीं कहते, बल्कि ऐसा कहकर तो वे उसका उपहास करते हैं। लोग जान गए थे कि पंडित कहने से उसे गुस्सा आ जाता है। वह सोचता था कि शायद लोग मुझे पागल समझते हैं। यह सोचकर वह इतना परेशान हो गया कि फिर से बीरबल के पास जा पहुंचा।

वह बोला, ‘‘मैं मात्र पंडितजी कहलाना नहीं चाहता। वैसे मुझे स्वयं को पंडित कहलवाना पसंद है और कुछ समय तक यह सुनना मुझे अच्छा भी लगा। लेकिन अब मैं थक चुका हूं। लोग मेरा सम्मान नहीं करते, वो तो मेरा मजाक उड़ाते हैं।’’

मोटे आदमी को वास्तविकता का आभास होने लगा था।

मोटे आदमी को यह कहता देख बीरबल हंसता हुआ यह बोला, ‘‘मैंने तो तुमसे पहले ही कह दिया था कि तुम बहुत समय तक ऐसा नहीं कर पाओगे। लोग तुम्हें वह सब कैसे कह सकते हैं, जो तुम हो ही नहीं। क्या तुम उन्हें मूर्ख समझते हो ? जाओ, अब कुछ समय किसी दूसरे शहर में जाकर बिताओ। जब लौटो तो उन लोगों को नजरअंदाज कर देना जो तुम्हें पंडितजी कहकर पुकारें। एक अच्छे, सभ्य व्यक्ति की तरह आचरण करना। शीघ्र ही लोग समझ जाएंगे कि ‘पंडितजी’ कहकर तुम्हारा उपहास करने में कुछ नहीं रक्खा और वे ऐसा कहना छोड़ देंगे।’’

मोटे आदमी ने बीरबल के निर्देश पर अमल किया।

जब वह कुछ माह बाद दूसरे शहर से लौटकर आया तो लोगों ने उसे पंडितजी कहकर परेशान करना चाहा, लेकिन उसने कोई ध्यान न दिया। अब वह मोटा आदमी खुश था कि लोग उसे उसके असली नाम से जानने लगे हैं। वह समझ गया था कि प्रसिद्धि पाने की सरल राह कोई नहीं है।

 

रेत और चीनी | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #30

रेत और चीनी | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #30

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बादशाह अकबर के दरबार की कार्यवाही चल रही थे, तभी एक दरबारी हाथ मी शीशे का एक मर्तबान लिए वहाँ आया बादशाह ने पूछा “क्या है इस मर्तबान मे ?”

दरबारी बोला “इसमे रेत और चीनी का मिश्रण है “

“वह किसलिए” फ़िर पूछा अकबर ने

“माफ़ी चाहता हूँ हुजुर” दरबारी बोला, “हम बीरबल की काबिलियत को परखना चाहते हैं, हम चाहते हैं की वह रेत से चीनी का दाना दाना अलग कर दे”

बादशाह अब बीरबल से मुखातिब हुए, “देख लो बीरबल, रोज ही तुम्हारे सामने एक नई समस्या रख दी जाती है, अब तुम्हे बिना पानी मे घोले इस रेत मे से चीनी को अलग करना है “

“कोई समस्या नहीं जहाँपनाह” बीरबल बोले, यह तो मेरे बाएँ हाथ का काम है, कहकर बीरबल ने मर्तबान उठाया और चल दिया दरबार से बाहर !

बीरबल बाग़ मे पहुंचकर रुका और मर्तबान मे भरा सारा मिश्रण आम के एक बड़े पेड़ के चारो और बिखेर दिया “यह तुम क्या कर रहे हो? ” एक दरबारी ने पूछा

बीरबल बोले, “यह तुम्हे कल पता चलेगा”

अगले दिन फ़िर वे सभी उस आम के पेड़ के नीचे जा पहुंचे, वहाँ अब केवल रेत पड़ी थी, चीनी के सारे दाने चीटियाँ बटोर कर अपने बिलों मे पहुंचा चुकी थीं, कुछ चीटियाँ तो अभी भी चीनी के दाने घसीट कर ले जाती दिखायी दे रही थीं !

“लेकिन सारी चीनी कहाँ चली गई ?” दरबारी ने पूछा

“रेत से अलग हो गई” बीरबल ने कहा

सभी जोर से हंस पड़े,

बादशाह ने दरबारी से कहा की अब तुम्हे चीनी चाहिये तो चीटियों के बिल मे घुसों”

सभी ने जोर का ठहाका लगाया और बीरबल की अक्ल की दाद दी

जल्दी बुलाकर लाओ | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #29

जल्दी बुलाकर लाओ | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #29

अकबर बीरबल के किस्से से हिंदी मै, बीरबल के छोटे किस्से,  अकबर बीरबल के सवाल जवाब, किस्से कहानियां, अकबर बीरबल video,  अकबर बीरबल बुद्धिमता की कहानियाँ,  अकबर बीरबल short stories, बीरबल की चतुराई के किस्से, bachon ki kahani in hindi,  panchtantra ki kahaniya, baccho ki, dadi maa ki kahaniyan,  bal kahaniyan,, short bal kahani in hindi,  cinderella ki kahani, baccho ki kahaniya aur cartoon, story in hindi, kahani baccho ki,

बादशाह अकबर एक सुबह उठते ही अपनी दाढ़ी खुजलाते हुए बोले, ‘‘अरे, कोई है ?’’ तुरन्त एक सेवक हाजिर हुआ। उसे देखते ही बादशाह बोले-‘‘जाओ, जल्दी बुलाकर लाओ, फौरन हाजिर करो।’’ सेवक की समझ में कुछ नहीं आया कि किसे बुलाकर लाए, किसे हाजिर करें ? बादशाह से पटलकर सवाल करने की तो उसकी हिम्मत ही नहीं थी।

उस सेवक ने यह बात दूसरे सेवक को बताई। दूसरे ने तीसरे को और तीसरे ने चौथे को। इस तरह सभी सेवक इस बात को जान गए और सभी उलझन में पड़ गए कि किसे बुलाकर लाए, किसे हाजिर करें।

बीरबल सुबह घूमने निकले थे। उन्होंने बादशाह के निजी सेवकों को भाग-दौड़ करते देखा तो समझ गए कि जरूर बादशाह ने कोई अनोखा काम बता दिया होगा, जो इनकी समझ से बाहर है। उन्होंने एक सेवक को बुलाकर पूछा, ‘‘क्या बात है ? यह भाग-दौड़ किसलिए हो रही है ?’’ सेवक ने बीरबल को सारी बात बताई, ‘‘महाराज हमारी रक्षा करें। हम समझ नहीं पा रहे हैं कि किसे बुलाना है। अगर जल्दी बुलाकर नहीं ले गए, तो हम पर आफत आ जाएगी।’’ बीरबल ने पूछा, ‘‘यह बताओ कि हुक्म देते समय बादशाह क्या कर रहे थे ?’’ बादशाह के निजी सेवक, जिसे हुक्म मिला था, उसे बीरबल के सामने हाजिर किया तो उसने बताय-‘‘जिस समय मुझे तलब किया उस समय तो बिस्तर पर बैठे अपनी दाढ़ी खुजला रहे थे।’’ बीरबल तुरन्त सारी बात समझ गए और उनके होंठों पर मुस्कान उभर आई। फिर उन्होंने उस सेवक से कहा-‘‘तुम हाजाम को ले जाओ।’’

सेवक हज्जाम को बुला लाया और उसे बादशाह के सामने हाजिर कर दिया। बादशाह सोचने लगे, ‘‘मैने इससे यह तो बताया ही नहीं था कि किसे बुलाकर लाना है। फिर यह हज्जाम को लेकर कैसे हाजिर हो गया ?’’ बादशाह ने सेवक से पूछा, ‘‘सच बताओ। हज्जाम को तुम अपने मन से ले आए हो या किसी ने उसे ले आने का सुझाव दिया था ?’’
सेवक घबरा गया, लेकिन बताए बिना भी तो छुटकारा नहीं था। बोला, ‘‘बीरबल ने सुझाव दिया था, जहांपनाह !’’ बादशाह बीरबल की बुद्धि पर खुश हो गया।

 

खाने के बाद लेटना | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #28

खाने के बाद लेटना | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #28

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किसी समय बीरबल ने अकबर को यह कहावत सुनाई थी कि खाकर लेट जा और मारकर भाग जा-यह सयानें लोगों की पहचान है। जो लोग ऐसा करते हैं, जिन्दगी में उन्हें किसी भी प्रकार का दुख नहीं उठाना पड़ता।

एक दिन अकबर के अचानक ही बीरबल की यह कहावत याद आ गई।

दोपहर का समय था। उन्होंने सोचा, बीरबल अवश्य ही खाना खाने के बाद लेटता होगा। आज हम उसकी इस बात को गलत सिद्ध कर देंगे। उन्होंने एक नौकर को अपने पास बुलाकर पूरी बात समझाई और बीरबल के पास भेज दिया।

नौकर ने अकबर का आदेश बीरबल को सुना दिया।

बीरबल बुद्धिमान तो थे ही, उन्होंने समझ लिया कि बादशाह ने उसे क्यों तुरन्त आने के लिए कहा है। इसलिए बीरबल ने भोजन करके नौकर से कहा-‘‘ठहरो, मैं कपड़े बदलकर तुम्हारे साथ ही चल रहा हूं।

उस दिन बीरबल ने पहनने के लिए चुस्त पाजामा चुना। पाजामे को पहनने के लिए वह कुछ देर के लिए बिस्तर पर लेट गए। पाजामा पहनने के बहाने वे काफी देर बिस्तर पर लेटे रहे। फिर नौकर के साथ चल दिए।

जब बीरबल दरबार में पहुंचे तो अकबर ने कहा-‘‘कहो बीरबल, खाना खाने के बाद आज भी लेटे या नहीं ?’’ ‘‘बिल्कुल लेटा था जहांपनाह।’’ बीरबल की बात सुनकर अकबर ने क्रोधित स्वर में कहा-‘‘इसका मतलब, तुमने हमारे हुक्म की अवहेलना की है। हम तुम्हें हुक्म उदूली करने की सजा देंगे। जब हमने खाना खाकर तुरन्त बुलाया था, फिर तुम लेटे क्यों ।

‘‘बादशाह सलामत ! मैंने आपके हुक्म की अवहेलना कहां की है। मैं तो खाना खाने के बाद कपड़े पहनकर सीधा आपके पास ही आ रहा हूं। आप तो पैगाम ले जाने वाले से पूछ सकते हैं। अब ये अलग बात है कि ये चुस्त पाजामा पहनने के लिए ही मुझे लेटना पड़ा था।’’ बीरबल ने सहज भाव से उत्तर दिया।
अकबर बादशाह बीरबल की चतुरता को समझ गए और मुस्करा पड़े।

छोटा बांस, बड़ा बांस | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #27

छोटा बांस, बड़ा बांस | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #27

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एक दिन अकबर व बीरबल बाग में सैर कर रहे थे। बीरबल लतीफा सुना रहा था और अकबर उसका मजा ले रहे थे। तभी अकबर को नीचे घास पर पड़ा बांस का एक टुकड़ा दिखाई दिया। उन्हें बीरबल की परीक्षा लेने की सूझी।

बीरबल को बांस का टुकड़ा दिखाते हुए वह बोले, ‘‘क्या तुम इस बांस के टुकड़े को बिना काटे छोटा कर सकते हो ?’’ बीरबल लतीफा सुनाता-सुनाता रुक गया और अकबर की आंखों में झांका।

अकबर कुटिलता से मुस्कराए, बीरबल समझ गया कि बादशाह सलामत उससे मजाक करने के मूड में हैं।

अब जैसा बेसिर-पैर का सवाल था तो जवाब भी कुछ वैसा ही होना चाहिए था।

बीरबल ने इधर-उधर देखा, एक माली हाथ में लंबा बांस लेकर जा रहा था।

उसके पास जाकर बीरबल ने वह बांस अपने दाएं हाथ में ले लिया और बादशाह का दिया छोटा बांस का टुकड़ा बाएं हाथ में।

बीरबल बोला, ‘‘हुजूर, अब देखें इस टुकड़े को, हो गया न बिना काटे ही छोटा।’’

बड़े बांस के सामने वह टुकड़ा छोटा तो दिखना ही था।
निरुत्तर बादशाह अकबर मुस्करा उठे बीरबल की चतुराई देखकर।

बीरबल की योग्यता | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #26

बीरबल की योग्यता | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #26

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दरबार में बीरबल से जलने वालों की कमी नहीं थी। बादशाह अकबर का साला तो कई बार बीरबल से मात खाने के बाद भी बाज न आता था। बेगम का भाई होने के कारण अक्सर बेगम की ओर से भी बादशाह को दबाव सहना पड़ता था।

ऐसे ही एक बार साले साहब स्वयं को बुद्धिमान बताते हुए दीवान पद की मांग करने लगे। बीरबल अभी दरबार में नहीं आया था। अतः बादशाह अकबर ने साले साहब से कहा—‘‘मुझे आज सुबह महल के पीछे से कुत्ते के पिल्ले की आवाजें सुनाई दे रही थीं, शायद कुतिया ने बच्चे दिए हैं। देखकर आओ, फिर बताओ कि यह बात सही है या नहीं ?’’

साले साहब चले गए, कुछ देर बाद लौटकर बोले—‘‘हुजूर आपने सही फरमाया, कुतिया ही ने बच्चे दिए हैं।

‘‘अच्छा कितने बच्चे हैं ?’’ बादशाह ने पूछा।

‘‘हुजूर वह तो मैंने गिने नहीं।’’

‘‘गिनकर आओ।’’

साले साहब गए और लौटकर बोले—‘‘हुजूर पाँच बच्चे हैं ?’’

‘‘कितने नर हैं…कितने मादा ?’’ बादशाह ने फिर पूछा।

‘‘वह तो नहीं देखा।’’

‘‘जाओ देखकर आओ।’’

आदेश पाकर साले साहब फिर गए और लौटकर जवाब दिया—‘‘तीन नर, दो मादा हैं हुजूर।’’

‘‘नर पिल्ले किस रंग के हैं ?’’

‘‘हुजूर वह देखकर अभी आता हूं।’’

‘‘रहने दो…बैठ जाओ।’’ बादशाह ने कहा।

साले साहब बैठ गए। कुछ देर बाद बीरबल दरबार में आया। तब बादशाह अकबर बोले—‘‘बीरबल, आज तुम सुबह महल के पीछे से पिल्लों की आवाजें आ रही हैं, शायद कुतिया ने बच्चे दिए हैं, जाओ देखकर आओ माजरा क्या है !’’

‘‘जी हुजूर।’’ बीरबल चला गया और कुछ देर बाद लौटकर बोला—‘‘हुजूर आपने सही फरमाया…कुतिया ने ही बच्चे दिए हैं।’’

‘‘कितने बच्चे हैं ?’’

‘‘हुजूर पांच बच्चे हैं।’’

‘‘कितने नर हैं….कितने मादा।’’

‘‘हुजूर, तीन नर हैं…दो मादा।’’

‘‘नर किस रंग के हैं ?’’

‘‘दो काले हैं, एक बादामी है।’’

‘‘ठीक है बैठ जाओ।’’

बादशाह अकबर ने अपने साले की ओर देखा, वह सिर झुकाए चुपचाप बैठा रहा। बादशाह ने उससे पूछा—‘‘क्यों तुम अब क्या कहते हो ?’’

उससे कोई जवाब देते न बना।

पैसे की थैली किसकी

दरबार लगा हुआ था। बादशाह अकबर राज-काज देख रहे थे। तभी दरबान ने सूचना दी कि दो व्यक्ति अपने झगड़े का निपटारा करवाने के लिए आना चाहते हैं।

बादशाह ने दोनों को बुलवा लिया। दोनों दरबार में आ गए और बादशाह के सामने झुककर खड़े हो गए।

‘‘कहो क्या समस्या है तुम्हारी ?’’ बादशाह ने पूछा।

‘‘हुजूर मेरा नाम काशी है, मैं तेली हूं और तेल बेचने का धंधा करता हूं; और हुजूर यह कसाई है। इसने मेरी दुकान पर आकर तेल खरीदा और साथ में मेरी पैसों की भरी थैली भी ले गया। जब मैंने इसे पकड़ा और अपनी थैली मांगी तो यह उसे अपनी बताने लगा, हुजूर अब आप ही न्याय करें।’’

‘‘जरूर न्याय होगा, अब तुम कहो तुम्हें क्या कहना है ?’’ बादशाह ने कसाई से कहा। ‘‘हुजूर मेरा नाम रमजान है और मैं कसाई हूँ, हुजूर, जब मैंने अपनी दुकान पर आज मांस की बिक्री के पैसे गिनकर थैली जैसे ही उठाई, यह तेली आ गया और मुझसे यह थैली छीन ली। अब उस पर अपना हक जमा रहा है, हुजूर, मुझ गरीब के पैसे वापस दिला दीजिए।’’

दोनों की बातें सुनकर बादशाह सोच में पड़ गए। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वह किसके हाथ फैसला दें। उन्होंने बीरबल से फैसला करने को कहा। बीरबल ने उससे पैसों की थैली ले ली और दोनों को कुछ देर के लिए बाहर भेज दिया। बीरबल ने सेवक से एक कटोरे में पानी मंगवाया और उस थैली में से कुछ सिक्के निकालकर पानी में डाले और पानी को गौर से देखा। फिर बादशाह से कहा—‘‘हुजूर, इस पानी में सिक्के डालने से तेल जरा-सा भी अंश पानी में नहीं उभार रहा है। यदि यह सिक्के तेली के होते तो यकीनन उन पर सिक्कों पर तेल लगा होता और वह तेल पानी में भी दिखाई देता।’’

बादशाह ने भी पानी में सिक्के डाले, पानी को गौर से देखा और फिर बीरबल की बात से सहमत हो गए। बीरबल ने उन दोनों को दरबार में बुलाया और कहा—‘‘मुझे पता चल गया है कि यह थैली किसकी है। काशी, तुम झूठ बोल रहे हो, यह थैली रमजान कसाई की है।’’

‘‘हुजूर यह थैली मेरी है।’’ काशी एक बार फिर बोला।

बीरबल ने सिक्के डले पानी वाला कटोरा उसे दिखाते हुए कहा—‘‘यदि यह थैली तुम्हारी है तो इन सिक्कों पर कुछ-न-कुछ तेल अवश्य होना चाहिए, पर तुम भी देख लो…तेल तो अंश मात्र भी नजर नहीं आ रहा है।’’

काशी चुप हो गया।

बीरबल ने रमजान कसाई को उसकी थैली दे दी और काशी को कारागार में डलवा दिया।

चगत्ता पड़ जायेगा | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #25

चगत्ता पड़ जायेगा | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #25

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एक दिन बीरबल और बादशाह पैदल ही घूमने निकल पड़े । एक जगह रास्ते में पखाना पड़ा हुआ था जो कि सूखकर काला हो गया था । बीरबल का रंग भी काला था ,इसीलिए बादशाह ने उन्हें लज्जित करने के लिए कहा – ‘ बीरबल ! यह पखाना तुम्हारे मुँह जैसा हो गया है’ । बीरबल तो हाज़िर जबाब थे ही , फ़ौरन कहा – ‘हुजूर ! जरा दो बूँद पानी पड़ने दीजिये फूलकर चगत्ता हो जाएगा ।

यह सुनते ही बादशाह शर्म के कारण चुप हो गए , कारण यह था कि बादशाह की जाति का नाम चगत्ता ही था ।

सितार खाना नहीं खाता | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #24

सितार खाना नहीं खाता | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #24

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एक दिन बीरबल ने बादशाह से एक गवैये की बड़ी तारीफ़ की और कहा – हुजूर ! ऐसा सितार बजाने वाला आपके साम्राज्य में दूसरा कोई नहीं है । बादशाह ने कहा – ठीक है ,कल उसे हाज़िर करो ,कल उसका भोजन यही होगा । दूसरे दिन दावत का प्रबंध था। सभी बड़े -बड़े अमीर उमराव आये थे । बीरबल भी पहुंचे ,साथ में उनका पुराना भंगी भी था। जब सब लोग खाना खाने बैठे तो बादशाह ने सितारवाले को सामने आने को कहा । बीरबल के इशारे से भंगी सामने आया । खाली हाथ देख कर बादशाह ने कहा तुम्हारा सितार कहाँ है ? लाये क्यों नहीं ? उसने जबाब दिया – हुजूर! बीरबल ने मुझे यहाँ खाने में शामिल होने का हुक्म दिया था । मेरा सितार खाना नहीं खाता फिर वह खाने के समय क्यों कर आता । बादशाह अपनी भूल पर बड़े शर्मिंदा हुए ।

आपकी बारी कैसे आती | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #23

आपकी बारी कैसे आती | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #23

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एक दिन बादशाह अकबर ने बीरबल से कहा – बीरबल ! कैसा अच्छा हो अगर एक ही व्यक्ति सदा बादशाह बना रहे ।
बीरबल ने कहा – हुजूर ! अगर ऐसा ही होता तो आपकी बारी कैसे आती ? बादशाह यह सुनकर चुप हो गए ।

 

तानसेन को मृत्यु दंड

एक बार तानसेन ने डाह में आकर दरबार के एक बड़े गवैये को जहर देकर मरवा डाला। बादशाह को जब पता चला तो उन्हें बड़ा दुःख हुआ। उन्होंने तुरंत तानसेन को हाज़िर होने का हुक्म दिया । हथकड़ी पहने तानसेन अपराधी के कटघरे में हाज़िर किये गए। बादशाह ने रोष में कहा – तुमने बड़ा जघन्य अपराध किया है। मेरे जीवन का आधा आनंद तुमने नष्ट कर दिया । अतः तुम्हे मृत्यु दंड का हुक्म देता हूँ। पास ही बीरबल बैठे थे ,उन्हें तानसेन के मृत्यु दंड के हुक्म से बड़ा दुःख हुआ । उन्होंने कहा – जहाँपनाह ! इसने आपके जीवन का आधा मज़ा किरकिरा कर दिया तो इसे मृत्यु दंड मिला और आपने तो इसके सम्पूर्ण आनंद को नष्ट कर दिया । बादशाह विचार में पड़ गए और कुछ सोच कर अपनी आज्ञा वापिस ले ली तथा तानसेन को मुक्त कर दिया ।

 

आधा बाप आपका आधा मेरा | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #22

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बीरबल प्रायः नीचे देखकर चला करते थे । एक दिन बादशाह अकबर ने उन्हें ऐसे चलते देख कर पूछा – बीरबल तुम जमीन की ओर क्या देखा करते हो ?
बीरबल ने कहा – हुजूर ! इसमें मेरा बाप गुम हो गया है । मै उसे ही देखता चलता हूँ।
बादशाह ने कहा – अगर हम तुम्हारा बाप खोज दें , तो तुम क्या दोगे ?
बीरबल ने जबाब दिया – अगर आप मेरे बाप को खोज दें , तो आधा बाप मेरा और आधा आपका । बादशाह यह सुनकर हँसने लगे ।

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