Short Essay on ‘Ramvriksha Benipuri’ in Hindi | ‘Ramvriksha Benipuri’ par Nibandh (240 Words)

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Short Essay on ‘Ramvriksha Benipuri’ in Hindi | ‘Ramvriksha Benipuri’ par Nibandh (240 Words)

रामवृक्ष बेनीपुरी

‘रामवृक्ष बेनीपुरी’ का जन्म सन् 1902 ई० में बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर जिले के बेनीपुर नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री फूलवन्त सिंह था। वे एक साधारण किसान थे। बचपन में ही इनके पिता और माता जी का देहांत हो गया था। इनकी मौसी ने इनका पालन-पोषण किया।

रामवृक्ष बेनीपुरी की प्रारंभिक शिक्षा बेनीपुर में हुई। बाद में इनकी शिक्षा इनके ननिहाल में हुई। मैट्रिक पास करने के पूर्व ही सन् 1920 ई० में इन्होने अध्ययन छोड़ दिया और महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में असहयोग आन्दोलन में भाग लिया। राम चरित मानस के अध्ययन से इनमें साहित्यिक रुचि जाग्रत हुई।

रामवृक्ष बेनीपुरी ने देश सेवा के साथ ही साहित्यिक सेवा भी की। पन्द्रह वर्ष की अवस्था में ही इन्होने पत्र-पत्रिकाओं में लिखना आरम्भ कर दिया था। ये राजनीतिक आन्दोलनों के फलस्वरूप कई वर्षों तक जेलों में रहे। सन् 1968 ई० में इनका स्वर्गवास हो गया।

रामवृक्ष बेनीपुरी जी की प्रमुख रचनाएं निम्नलिखित हैं– ‘पतियों के देश में’ (उपन्यास), ‘माटी की मूरतें’, ‘लालतारा’ (रेखा चित्र), ‘चिता के फूल’ (कहानी), ‘अम्बपाली’ (नाटक), ‘गेहूं बनाम गुलाब’, ‘वन्दे वाणी विनायक’, ‘मशाल’ (निबन्ध), ‘जंजीरे और दीवारें’ (संस्मरण), ‘पैरों में पंख बांध कर’ (यात्रा वर्णन)।

रामवृक्ष बेनीपुरी जी ने पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से हिन्दी साहित्य की बड़ी सेवा की। ‘तरुण भारती’, ‘किसान मित्र’, ‘कर्मवीर’, ‘जनता’ आदि पत्रों का सम्पादन करके आपने सम्पादन कला में अनुपम योग दिया। ये गांधी वादी विचार धारा के लेखक थे। इनकी प्रतिभा बहुमुखी थी।

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