जैसे – भूख, प्यास, थकावट, चोरी, घृणा, क्रोध, सुंदरता आदि। भाववाचक संज्ञाओं का संबंध हमारे
भावों से होता है, इनका कोई रूप या आकार नहीं होता ।

कुछ भाववाचक संज्ञाएँ मूल शब्द होते हैं, जैसे – घृणा, प्रेम, क्रोध इत्यादि ।
परन्तु अधिकांश भाववाचक संज्ञाएँ ऐसी होती हैं, जो जातिवाचक संज्ञाओं, सर्वनामो, विशेषणों एवं अव्यय शब्दों में प्रत्यय जोड़कर बनती हैं।