उत्तर प्रदेश मे सिंचाई और प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं Irrigation Projects in Uttar Pradesh UP GK in Hindi

उत्तर प्रदेश मे सिंचाई और प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं Irrigation Projects in Uttar Pradesh UP GK in Hindi  up gk in hindi 2018,  up gk in hindi 2017, up gk in hindi pdf 2018, up gk in hindi question answer, up gk book in hindi pdf, up gk in hindi pdf 2017, uttar pradesh general knowledge book in hindi, up gk book in hindi pdf free download, up gk in hindi pdf 2018, up gk book in hindi pdf, up gk 2018, up gk book in hindi pdf free download, up current affairs in hindi 2018, up gk in hindi question answer, uttar pradesh general knowledge in hindi pdf free download, up gk download, 

उत्तर प्रदेश मे सिंचाई और प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं Irrigation Projects in Uttar Pradesh UP GK in Hindi

Uttar Pradesh Gk In Hindi UP Gk in Hindi Series #3

Uttar Pradesh Gk In Hindi MCQ UP Gk in Hindi Series #14

Uttar Pradesh Gk In Hindi MCQ UP Gk in Hindi Series #25

Uttar Pradesh Gk In Hindi MCQ UP Gk in Hindi Series #35

Uttar Pradesh Gk In Hindi MCQ UP Gk in Hindi Series #51

खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि कृषि की सघनता एवं अधिक उपज प्रदान, करने वाली फसलों को बढ़ाकर ही सम्भव है। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु प्रदेश के कृषि क्षेत्रों की सिंचाई का पर्याप्त साधन होना आवश्यक है।

सिंचाई की सुविधा के दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश का तीसरा स्थान है। सिंचाई के साधनों की मुख्य आवश्यकता वर्षा के असमान वितरण के कारण होती है। प्रदेश में उपलब्ध सिंचाई के साधन निम्नलिखित हैं –

  • कुओं के द्वारा सिंचाई – पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं गंगा की घाटी के क्षेत्रों में कुआं सिंचाई का एक महत्त्वपूर्ण साधन है।
  • तालाब द्वारा सिंचाई – प्रदेश के कई क्षेत्रों में तालाब द्वारा सिंचाई की जाती है।
  • नहरों द्वारा सिंचाई – प्रदेश में खासकर पश्चिमी भाग में नहरों द्वारा सिंचाई की उत्तम व्यवस्था है। नहरों द्वारा 20.9% से अधिक सिंचाई की जाती है।
  • राज्य में सबसे ज्यादा सिंचाई नलकूपों द्वारा की जाती है। नलकूपों द्वारा की जाने वाली सिंचाई कुल सिंचाई का 70.8 प्रतिशत है।

मुख्य सिंचाई परियोजनाएँ

uttar pradesh general knowledge book in hindi

प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने हेतु अनेक लघु, मध्यम एवं वृहत सिंचाई परियोजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है –

  • गोकुल बैराज परियोजना – आगरा और मथुरा की पेयजल समस्या के निदान हेतु इस परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
  • गंगा-बैराज (कानपुर) – कानपुर नगर की जल आपूर्ति की समस्या के समाधान हेतु।
  • गंगा-घाघरा दोआब – राज्य के इस सबसे बड़े प्राकृतिक भाग में क्षेत्रफल 80.24 लाख हे० तथा बोया हुआ क्षेत्रफल 69.87 लाख हे० है।
  • शारदा नहर प्रणाली जल प्रबन्ध सुधार परियोजना – राज्य की इस सबसे लम्बी नहर प्रणाली का निर्माण वर्ष 1928 में गंगा-घाघरा दोआब के 25.50 लाख हे० क्षेत्र में सिंचाई सुविधा प्रदान करता है। यह नहर चम्पावत जिले के बनबसा स्थल (उत्तर प्रदेश-नेपाल सीमा के निकट) पर शारदा नदी से निकलती है। शारदा नहर प्रणाली की कुल लम्बाई 9743 किमी है। इस नहर से पीलीभीत, चम्पावत, बरेली, ऊधमसिंह नगर, शाहजहाँपुर, रायबरेली, हरदोई, उन्नाव, लखीमपुर, बाराबंकी, सीतापुर तथा लखनऊ में सिंचाई की जाती है।
  • शारदा सहायक परियोजना – लखीमपुर, लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, प्रतापगढ़, सीतापुर, सुल्तानपुर, जौनपुर, आजमगढ़, फैजाबाद, मऊ, वाराणसी, बलिया, अम्बेडकर नगर तथा गाजीपुर जनपदों को पानी की आपूर्ति हेतु इस परियोजना का निर्माण किया जा रहा है।
  • ज्ञानपुर पम्प नहर परियोजना – इस परियोजना को मार्च, 1991 में स्वीकृति दी गई थी। इसके अन्तर्गत इलाहाबाद, भदोही, वाराणसी एवं मिर्जापुर जनपदों के क्षेत्र शामिल हैं।
  • सरयू नहर परियोजना – बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, सन्त कबीर नगर, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती एवं गोरखपुर जनपदों में घाघरा, सरयू एवं ताप्ती नदियों से उपलब्ध जल द्वारा सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
  • बाण गंगा बाँध एवं नहर प्रणाली – उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा बिहार राज्य की संयुक्त परियोजना के अन्तर्गत केन्द्र सरकार के अधीन बाण सागर नियन्त्रण परिषद् की स्थापना की गई है।
  • राजघाट बाँध तथा राजघाट नहर परियोजना – इस परियोजना के अन्तर्गत ललितपुर जनपद में बेतवा नदी पर राजघाट के निकट यह परियोजना निर्माणाधीन है। इस परियोजना का निर्माण बेतवा नदी परिषद के द्वारा उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के सहयोग से किया जा रहा है।
  • बदायूँ सिंचाई परियोजना – बरेली जिले में रामगंगा नदी पर 674.50 मी. लम्बा बैराज बनाकर बरेली जिले के अलावा बदायूँ एवं दातागंज तथा शाहजहाँपुर जिले को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराए जाने के उद्देश्य से बदायूँ सिंचाई परियोजना प्रस्तावित है।
  • जरौली पम्प नहर परियोजना – इस परियोजना में फतेहपुर जनपद के असोधन विकास खण्ड के ऐंझी कोटवा ग्राम में यमुना नदी के बायें तट पर एक पम्प गृह प्रस्तावित है।
  • ऊपरी गंगा नहर सिंचाई आधुनिकीकरण परियोजना – पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गंगा-यमुना दोआब में रबी फसल की सिंचाई व्यवस्था हेतु वर्ष 1854 में ऊपरी नहर का निर्माण किया गया।
  • राजा महेन्द्र रिपुदमन सिंह चम्बल डाल नहर परियोजना – आगरा जनपद की तहसील वाह एवं इटावा जनपद की तहसील इटावा में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने हेतु चम्बल डाल नहर परियोजना निर्माणाधीन है।
  • मध्य गंगा नहर परियोजना – वर्षा ऋतु में गंगा नदी में पर्याप्त जल उपलब्धता को देखते हुए मध्य गंगा नहर परियोजना का निर्माण 1978-78 में प्रारम्भ किया गया। इस परियोजना के तहत बिजनौर जनपद के समीप गंगा नदी पर बैराज का निर्माण कर 115.54 किमी लम्बी प्रमुख नहर को गंगा नहर में 190.8 किमी पर मिलाया गया है। इस परियोजना से लाभान्वित होने वाले जिले गाजियाबाद, बुलन्दशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस एवं फिरोजाबाद आदि जनपद लाभान्वित होंगे।
  • समानान्तर माण्ट शाखा एवं समानान्तर हाथरस शाखा – मध्य गंगा नहर योजना में समानान्तर माण्ट शाखा एवं समानान्तर हाथरस शाखा की कुल 86.0 किमी लम्बाई में नहरों का निर्माण प्रस्तावित है।
  • up current affairs in hindi 2018
  • मध्य गंगा नहर परियोजना, द्वितीय चरण – गंगा नदी के बायें किनारे से बिजनौर से निर्मित बैराज से गंगा एवं रामगंगा दोआब में मुरादाबाद, ज्योतिबाफूले नगर, बदायूँ तथा बरेली जिले के क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मध्य गंगा नहर परियोजना प्रस्तावित हैं।
  • कनहर सिंचाई परियोजना – सोनभद्र जिले की दुद्धी तहसील में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने हेतु कनहर नदी पर उपयोग करने की योजना है।
  • मौहदा बाँध परियोजना – यह परियोजना हमीरपुर जनपद की मौहदा तहसील में छानी ग्राम के निकट बिरमा नदी पर निर्माणाधीन है।
  • कचनौदा बाँध परियोजना – इस परियोजना के अन्तर्गत ललितपुर जिले की महरौनी तहसील में सजनम नदी पर निर्मित है। इस परियोजना का उद्देश्य ललितपुर जिले में गोविन्द सागर बाँध की नहर प्रणाली के टेल भाग में सिंचाई की कमी की पूर्ति करना है।
  • गुन्टा बाँध परियोजना – चित्रकूट जनपद में रैपुरा ग्राम के निकट गुन्टा नाला पर निर्माणाधीन बाँध।
  • चरखारी डाल नहर परियोजना – यह परियोजना मौहदा बाँध परियोजना का एक भाग है। महोबा जिले में चरखारी तहसील में सिंचाई उपलब्ध कराने हेतु।
  • भोरंट/उटारी बाँध परियोजना – इस परियोजना के अन्तर्गत लतिलपुर जिले की महरौनी तहसील में जामनी बाँध से निकलने वाली बायीं जामनी नहर के टेल कमाण्ड में सिंचाई की जाती है।
  • पथरई बाँध परियोजना – झाँसी जनपद के मऊरानीपुर तहसील के बंगरा ब्लॉक में पथरई नदी पर निर्माणाधीन परियोजना।
  • पूर्वी गंगा नहर परियोजना – इस परियोजना के अन्तर्गत हरिद्वार में नवनिर्मित भीम गोंडा शीर्ष के बायीं ओर 48.55 किमी लम्बी व 137.4 क्यूसेक शीर्ष क्षमता की प्रमुख नहर निकाली गई है। मुख्य नहर से पाँच शाखाएँ चन्दोक, नगीना, नजीबाबाद, नहटोर, अलावलपुर निकाली गई हैं।
  • राजघाट बाँध परियोजना – इस परियोजना से झाँसी, जालौन एवं हमीरपुर जिले लाभान्वित होते हैं।
  • लखवाड़ी बाँध परियोजना – इस परियोजना से सहारनपुर, मुजफ्फरनगर एवं मेरठ जिले लाभान्वित हैं।
  • जमरानी बाँध परियोजना – इस परियोजना से रामपुर बरेली का तराई एवं भाबर क्षेत्र लाभान्वित हैं।
  • बेवर फीडर परियोजना – निचली गंगा नहर प्रणाली की वर्तमान बेवर शाखा के अन्तिम आने वाले मैनपुरी तथा इटावा जनपदों में पानी की कमी को दूर करने हेतु काली नदी पर मोहर घाट के समीप एक बैराज बनाने का प्रस्ताव है।

लघु सिंचाईup gk in hindi 2018

प्रदेश में लगभग 77% सिंचाई लघु सिंचाई साधनों से की जाती है। इसमें से, लगभग 79% सिंचाई निजी साधनों से की जाती है। प्रदेश में लघु सिंचाई सम्बन्धी निम्न कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं –

  • निःशुल्क बोरिंग योजना – सामान्य श्रेणी के लघु सीमान्त तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के कृषकों हेतु यह योजना 1985 से चल रही है। इसमें ₹ 5, 7 या 10 हजार दिये जाते हैं।
  • हैवी रिंग मशीनों द्वारा गहरे नलकूपों के निर्माण की योजना – यह योजना कठिन स्ट्रेटा वाले पठारी आदि क्षेत्रों में चल रही है। इसमें किसानों को सरकार द्वारा लागत का 50% अधिकतम ₹ 1 लाख का अनुदान प्रदान किया जाता है। इसमें 60 मीटर से अधिक गहराई की बोरिंग की जाती हैं।
  • इनवेल रिंग मशीनों द्वारा पथरीले स्थानों पर बोरिंग योजना – यह योजना बुन्देलखण्ड व इलाहाबाद, आगरा, मिर्जापुर व सोनभद्र आदि जिलों में चल रही है। इसमें भी सरकार द्वारा लागत का 50% अधिकतम ₹ 7,500 का अनुदान प्रदान किया जाता है।
  • मध्यम गहराई नलकप योजना – यह योजना 2004-05 में प्रारंभ की गई। इस योजना में सरकार द्वारा 50% (अधिकतम ₹ 7,500) का । अनुदान प्रदान किया जाता है। इसमें 31-60 मीटर गहराई तक की बोरिंग की जाती है।
  • चेकडैम निर्माण योजना – प्रदेश के पठारी क्षेत्रों (बुन्देo) में वर्षा जल का उपयोग सिंचाई के साथ-साथ भूगर्भ जल को अधिक-से-अधिक रिचार्ज करने के लिए नदी/नालों पर चेकडैम बनाने सम्बन्धी यह योजना 2008-09 से चलाई जा रही है।
  • आर्टीजन वेल योजना – जालौन में नदी गाँव ब्लॉक में पाताल तोड़ कूप बनाये जाते हैं। इस योजना में हैण्डसेट आर्टीजन वेल के लिए कुल लागत का 50%, अधिकतम ₹ 5 हजार और मशीन निर्मित वेल के लिए 50%, अधिकतम ₹ 15 हजार तक अनुदान दिया जाता है।
  • सामुदायिक ब्लास्ट वेल योजना – यह योजना प्रदेश के झाँसी, ललितपुर, चित्रकूट, महोबा, इलाहाबाद, मिर्जापुर, सोनभद्र व चन्दौली जिलों के 39 पठारी/अर्द्ध पठारी ब्लॉकों में लघु एवं सीमान्त कृषकों के लिए उन स्थानों पर लागू है जहाँ निःशुल्क बोरिंग सम्भव नहीं। इस योजना में 6 मी० व्यास के 15 मी० गहरे कूप का निर्माण किया जाता है।
  • डॉ० राम मनोहर लोहिया सामूहिक नलकूप योजना – नवम्बर, 2012 से संचालित यह योजना भी गहरे स्ट्रेटा वाले क्षेत्रों में चलाई जा रही है, जहाँ निःशुल्क बोरिंग सम्भव नहीं है। इस योजना में सामान्य श्रेणी के लघु व सीमान्त कृषक बाहुल्य समूह को अधिकतम ₹ 3 लाख 92 हजार का अनुदान, जबकि एससी/एसटी/बीसी/अल्पसंख्यक श्रेणी के बाहुल्य समूह को अधिकतम ₹ 5 लाख का अनुदान दिया जाता है।

भूगर्भ जल कार्यक्रम

प्रदेश की भू-जल सम्पदा एवं उससे सम्बन्धित समस्याओं का अध्ययन, आंकलन, सर्वेक्षण, नियोजन तथा विकास हेतु दिशा-निर्देशन तथा प्रबन्धन के लिए 1975 में भू-गर्भ जल विभाग की स्थापना की गयी।

  • इस विभाग के अन्तर्गत राज्य के नगरीय तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्तर मापन हेतु हाइडोग्राफ स्टेशन (निरीक्षण कूप/पोजोमीटर) का नेटवर्क स्थापित है, जिन पर वर्ष में 6 बार (जनवरी, मई, जून, अगस्त, अक्टूबर व नवम्बर) जल-स्तर की मॉनीटरिंग की जाती है। 2010-11 तक राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में 9170 तथा शहरी क्षेत्रों में 1770 हाइड्रोग्राफ स्थापित थे।
  • भूगर्भ जल के नियोजित विकास व प्रबंधन हेतु जनपदवार/विकास खण्डवार भूगर्भ जल का आंकलन तथा विकास खण्डों का वर्गीकरण अतिदोहित, क्रिटिकल, सेमी-क्रिटिकल तथा सेफ श्रेणी में जीईसी-97 के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाता है।
  • भूगर्भ जल की सघन मॉनीटरिंग हेतु हाइड्रोग्राफ स्टेशन नेटवर्क के विस्तार हेतु पीजोमीटर का निर्माण ग्रामीण क्षेत्रों में न्याय पंचायत को इकाई मानकर 5×5 किमी ग्रिड पर तथा शहरी क्षेत्रों में वाटर सप्लाई जोन को इकाई मानकर 2×3 किमी ग्रिड पर किया जा रहा है।
  • प्रदेश के सभी विकास खण्डों के भूजल गुणवत्ता मॉनीटरिंग स्टेशनों से एकत्र किए गए जल नमूनों से भूजल की रासायनिक गुणवत्ता (13 अवयव) का आंकलन/अनुश्रवण, कृषि उपयुक्तता की दृष्टि से किया जाता है।

जी०आई०एस० बेस मानचित्र – इस विभाग द्वारा भूगर्भ जल से सम्बन्धित विकास खण्डवार विविध प्रकार के जी०आई०एस० आधारित मानचित्र तैयार किए जाते हैं, जिसका उपयोग अन्य विभाग किसी विकास कार्यक्रम को तैयार करने में करते हैं।

रेन वाटर हार्वेस्टिग एवं रिचार्जिंग – वर्षा जल संचयन व भूजल रिचार्जिंग हेतु प्रदेश के विभिन्न विभागों द्वारा अनेक कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। इसके तहत सरकारी भवनों पर रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिग, एल्यूवियम क्षेत्रों में तालाबों तथा पठारी क्षेत्रों में परकोलेशन टैंकों का निर्माण किया जाता है।

पेयजल गुणता अनुश्रवण एवं निगरानी – प्रदेश के समस्त ग्रामीण पेयजल स्रोतों का गन्दलापन (टर्बिडिटी), पीएच, क्लोराइड, कठोरता, आयरन, नाइट्रेट, फ्लोराइड, अवशेष क्लोरीन एवं जैविक परीक्षण के लिए अनुश्रवण एवं निगरानी हेतु ग्राम पंचायत, जनपद एवं राज्य-स्तर की त्रिस्तरीय व्यवस्था स्थापित की जा रही है।

जल प्रबन्धन व नियामक प्राधिकरण – अंधाधुंध भूगर्भ जलदोहन पर लगाम लगाने हेतु 2010 में जल प्रबंधन सम्बन्धी एक कानून बनाकर उसको कड़ाई से लागू करने के लिए इस प्राधिकरण का गठन किया गया है। अत्यधिक भूजल दोहन को अब अपराध की श्रेणी लाते हुए दोषी को एक वर्ष की कैद की सजा या प्रतिदिन के 2,000 के हिसाब से (अधिकतम ₹ 1 लाख तक) जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

  • इस कानून के अनुसार अब शहरी क्षेत्रों में 0.5 हॉर्सपावर व ग्रामीण क्षेत्रों में 7.5 हॉर्सपावर से अधिक क्षमता के पम्प बिना अनुमति के नहीं लगाये जा सकते हैं।
  • भूगर्भ जल के व्यावसायिक यूजर को अब न केवल अपना रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा, बल्कि वह जितने भूगर्भ जल का उपयोग करेगा, उससे ज्यादा उसे रेन वाटर हार्वेस्टिग की व्यवस्था से रिचार्ज करना पड़ेगा। वाटर यूजर से फीस लेने की भी व्यवस्था की गई है।
  • अब 300 वर्ग मी० या उससे अधिक क्षेत्रफल के नवनिर्मित भवनों के रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिग की व्यवस्था करना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • 20 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल की योजनाओं में कम-से-कम 5% भूमि पर भूजल रिचार्ज जलाशय अनिवार्य है।
  • आवासी भूखण्डों में 200 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल के भूखण्ड के अन्दर कम-से-कम एक पेड़, 200 से 300 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल के भूखण्डों में दो पेड़, 300 से 500 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल के भूखण्डों में चार पेड़, समूह आवासीय योजना में प्रति हेक्टेयर 50 पेड़ व आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग, मलिन बस्ती सुधार आदि योजना में प्रति 50 परिवार पर न्यूनतम 100 वर्ग मीटर क्षेत्रफल पर समूह के रूप में पेड़ लगाना अनिवार्य है।
  • औद्योगिक क्षेत्र में प्रति 80 वर्ग मीटर भूखण्ड पर एक पेड़ की दर से पेड़ लगाना व बड़े प्रदूषणकारी उद्योगों को आवासीय क्षेत्र में सघन ग्रीन बेल्ट द्वारा पृथक् करना जो औद्योगिक क्षेत्रफल का 15 प्रतिशत होना अनिवार्य है।
  • भूगर्भ जल प्रभावित क्षेत्र – प्रदेश के लखनऊ, उन्नाव, आगरा, प्रतापगढ़, झाँसी, मुरादाबाद, मथुरा, बाँदा, मिर्जापुर, गाजियाबाद, रामपुर, बागपत, इलाहाबाद, सहारनपुर आदि 36 जिलों के 108 ब्लॉक अतिदोहित विकास खण्ड के रूप में चिह्नित किए गए हैं। अतः इन ब्लॉकों में भू-जल सुधार कार्यक्रम गंभीरता से चलाये जाने की आवश्यकता है। उपरोक्त 108 ब्लाकों में से सर्वाधिक 66 ब्लॉक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं।

Note –

  • सिंचाई की सुविधा के दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश का तीसरा स्थान है।
  • नहरों द्वारा 20.9% से अधिक सिंचाई की जाती है।
  • राज्य में सबसे ज्यादा सिंचाई नलकूपों द्वारा की जाती है।
  • उत्तर प्रदेश के रिहन्द बाँध की ऊँचाई 91 मीटर है।
  • उत्तर प्रदेश के रामगंगा बाँध (1978) की ऊँचाई 128 मीटर है।
  • उत्तर प्रदेश की आगरा नहर का उद्गम स्थल ओखला (यमुना नदी) है।
  • उत्तर प्रदेश की केन नहर का लाभान्वित जिला बांदा है।
  • उत्तर प्रदेश का अर्जुन बाँध नहर का उद्गम स्थल निकट चरखारी (हमीरपुर) अर्जुन नदी है।
  • उत्तर प्रदेश की चन्द्रप्रभा बाँध नहर का उद्गम स्थल चकिया (वाराणसी) चन्द्रप्रभा नदी है।
  • उत्तर प्रदेश में राजस्व मण्डल तथा जनपद मेरठ है और मेरठ की नहर की कुल लम्बाई 758.10 (किमी में) है।
  • पीलीभीत जनपद की नहर की लम्बाई 971.01 (किमी में) है।
  • उन्नाव जनपद की नहर की लम्बाई 1868.99 (किमी में) है।
  • वाराणसी जनपद की नहर की लम्बाई 306.20 (किमी में) है।
  • देवरिया जनपद की नहर की लम्बाई 411.00 (किमी में) है।
  • राजघाट बाँध परियोजना से सहारनपुर, मुजफ्फरनगर एवं मेरठ जिले लाभान्वित हैं।
  • प्रदेश में लगभग 77% सिंचाई लघु सिंचाई साधनों से की जाती है।
  • 20 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल की योजनाओं में कम-से-कम 5% भूमि पर भूजल रिचार्ज जलाशय अनिवार्य है।

उत्तर प्रदेश मे सिंचाई और प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं Irrigation Projects in Uttar Pradesh UP GK in Hindi

उत्तर प्रदेश में सिंचाई व नहरे ( Uttar Pradesh Irrigation and Canal  )

Image result for उत्तर प्रदेश में सिंचाई व नहरे

तालाबो ,पोखरों,झीलों,एवं नदियों,से सिंचाई:-

उत्तर प्रदेश में सिंचाई के ये प्रमुख स्रोत है जिनमे बेडी, धकैंची आदि तकनीकों से सिंचाई की जाती थी।

कुओं द्वारा सिंचाई:-

प्रदेश के कोमल शैल तथा उनके जलस्तर वाले क्षेत्रो में कुओं की सिंचाई की परंपरा काफी प्राचीन है। कुँए से जल को बाहर निकलने के लिए रहट, मयदास, लिफ्ट, चैन, पंप,वाशर, हैंडपुम्प आदि साधनों से किसी का भी प्रयोग किया जाता था

गंडक व गंगा घाटी के मशवर्ती क्षेत्र में कुओ द्वारा सर्वाधिक सिंचाई की जाती है इसके अंर्तगत प्रदेश के गोंडा, बहराइच, बस्ती, फैजाबाद, सुल्तानपुर, आजमगढ़ बलिया, रायबरेली, प्रतापगढ़, मऊ आदि जिले में आते है।

नलकूप द्वारा सिंचाई;-

प्रदेश में सर्वाधिक सिंचाई इसी माध्यम से की जाती है नलकूप 20वी शताब्दी के देंन है प्रदेश में इसका प्रयोग 1930 में सर्वप्रथम मेरठ में शुरू हुआ

नहरों से सिंचाई:-

प्रदेश में सदवाहिनी नदियों की अधिकता होने के कारण नहरों का विकाश करना आसान है। लेकिन अन्य भागों की अपेक्षा पचिमी उत्तरप्रदेश में नहरों का आशिक विस्तार हुआ है। प्रदेश की मुख्य वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं एवं नहर प्रणालियों में सृजित सिंकजै क्षमता का वैज्ञानिक ढंग से शीघ्र एवं अधिकतम उपयोग करते है।

शारदा सहायक समादेश के तहत शारदा नहर प्रणाली,  शरद सहायक नहर प्रणाली फेज 2, सरयू नहर प्रणाली फेज 1 व 2, सिरसी, नारायणपुर पम्प नहर, देवकलि पम्प नहर परियोजना सम्बन्धित है। दोनों समादेशो के तहत इस समय कुल 55 जिले सम्मलित है

ऊपरी गंगा नहर:-

इसका निर्माण 1840 से 1854 के बीच हुआ। इस नहर को हरिद्वार के समीप गंगा के दाहिने किनारे से निकाला गया है इसकी लम्बाई 340 किमी है,लेकि न शाखाओं -प्रशाखाओं सहित 5640 किमी है इससे आगरा नहर तथा निचली गंगा नहर को भी जल मिलता है। यह नहर सहारनपुर, मुज्जफरनगर, मेरठ, कानपुर, इटावा, मैनपुरी,आदि जिलों की लगभग 7 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करती है।

निचली गंगा नहर:-

1878 से निर्मित यह नहर नरोरा (बुलंदशहर) नामक स्थान पर गंगा से निकली गयी है इससे बुलन्दशहर, एटा,फिरोजाबाद, कानपुर,आदि जिलों की लगभग 4.5 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है।

रामगंगा नहर :-

उत्तरखंड के पौढ़ी जिले में कालागढ़ नामक स्थान पर रामगंगा नदी पर 1975 में 128 मि ऊंचा बांध और नहरों का निर्माण किया गया है।
इसमें उत्तखण्ड व उत्तर प्रदेश के बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर,आदि जिलों में लगभग 17.05 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई की जाती है।

आगरा नहर :-

यह अन्तराजिय नहर 1874 में बनकर तैयार हुई।इसे दिल्ली के पास (ओखला) से यमुना के दाहिने किनारे से निकल गया है यह नहर दिल्ली , गुड़गांव मथुरा, आगरा,और भरतपुर,की लगभग 1.5 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करती है। यह दिल्ली, हरियाणा तथा राजस्थान से भी गुजराती है

पूर्वी यमुना नहर:-

यह राज्य की सबसे पुरानी नहर है इसका निर्माण 1830 में किया गया था यह फैजाबाद (सहारनपुर) नामक स्थान पर यमुना के बाएं किनारे से निकली गयी है, जिसकी कुल लम्बाई 1440 किमी है इस नहर के द्वारा सहारनपुर शामली, मुजफ्फरनगर, हापुड़, मेरठ, गाजियाबाद, दिल्ली की लगभग 2 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचाई की जाती है

यह शाहजंहा द्वारा खुदवाई गयी थी बाद में अंग्रेजो द्वारा विस्तार किया गया।

शारदा नहर:-

यह प्रदेश की सबसे बड़ी नहर प्रणाली है जिसका निर्माण 1920 से 1928 के बीच हुआ। यह चंपावत के वनवशा(उत्तर प्रदेश ,उत्तराखंड,व नेपाल सीमा पर) नामक स्थान पर शारदा(काली या महाकाली) नदी से निकली है।
इस नहर द्वारा उत्तराखण्ड के कुछ जिलों तथा उत्तरप्रदेश के पीलीभीत, बरेली, शाहजहापुर, लखीपुर, हरदोई, लखनऊ, इलाहाबाद आदि जिलों में सिंचाई होती है।

गंडक नहर :-

यह उत्तर प्रदेह और बिहार राज्य की एक सयुंक्त नहर प्रणाली है जो इन दोनों के सीमा बिंदु से 18 किमी अंदर नेपाल में बूढ़ी गंडक पर एक बांध बनाकर निकली गयी है।इससे कुशीनगर,महराजगंज,गोरखपुर,और देवरिया जिले में सिंचाई होती है

सरयू नहर :-

इसका उद्देश्य पूर्वांचल के बहराइच,श्रावस्ती,गोंडा, सिद्धार्थ नगर,बस्ती,गोरखपुर,महाराजपुर,जिलों में घाघरा,सरयू, व राप्ती नदियों के जल से सिंचाई उपलब्ध करवाना है इस परियोजना के तहत बहराइच जिले की नानपारा तहशील में कटरकनिया घाट के निकट घाघरा नदी पर एक बैराज बनाया गया है

1977-78 से निर्माणधिन इस परियोजना को अगस्त, 2012 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया।

प्रायद्वीपीय भारत में सिंचाई का प्रमुख साधन है,

भारत में सिंचाई के साधन,

सिंचाई के पुराने साधन,

सिंचाई के स्रोत,

नलकूप से सिंचाई,

भारत में सिंचाई परियोजना,

राजस्थान में सिंचाई के साधन,

मध्य प्रदेश में सिंचाई के साधन,

upcoming irrigation projects in uttar pradesh,

irrigation in uttar pradesh,

canals in uttar pradesh,

major irrigation projects,

current irrigation projects in india,

major irrigation projects in india,

ongoing irrigation project in india,

irrigation department uttar pradesh,

Comments

comments

Leave a Comment

error: