Haryana culture & Its Words meanings : हरियाणवी संस्कृति और उसके शब्द अर्थ | Hindigk50k
Haryana culture & Its Words meanings : हरियाणवी संस्कृति और उसके शब्द अर्थ

Haryana culture & Its Words meanings : हरियाणवी संस्कृति और उसके शब्द अर्थ

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  1. ओरना- बिजाई के काम आने वाला बांस से बना एक उपकरण |
  2. कजावा- ऊंट की पीठ पर रखकर सामान धोने का एक साधनजिसे प्लाण पर रखा जाता था|
  3. कड़बी- बाजरे/ज्वार के पोधों का भूसा|
  4. कढावणी- हारे में दूध गर्म करने का मटका|
  5. कसार/पंजीरी – आटे को भूनकर उसमें मीठा मिलकर बनाया गया सूखा पाउडर |
  6. कहोड- ऐसी लकड़ी जो ऊपर दो हिस्सों में बंट जाती है और जिस पर चाक लगाकर कुएं से पानी निकाला जाता है|
  7. कीला- हाथ से चलने वाली चक्की का धुरा जिस पर ऊपरी पाट घूमता है|
  8. कुंडा- मिटटी का एक पात्र जिसमें आटा गूंथा जाता था|
  9. कुलडा- मिटटी का मटके जैसा छोटा पात्रजो पानी लस्सी आदि डालने के काम आता था|
  10. कुलड़ी- कुलडे से छोटे आकर का पात्र|Haryana Gk For HSSC Exams Series #18 Ques= (851-900)Haryana Gk For HSSC Exams Series #17 Ques= (801-850)

    Haryana Gk For HSSC Exams Series #15 Ques= (701-750)

    Haryana Gk For HSSC Exams Series #14 Ques= (651-700)

  11. कुस/फाल- हल में प्रयोग होने वाला लोहे का उपकरण |
  12. कूंची- ऊंट की सवारी करने के लिए उसके ऊपर रखा जाने वाला एक ढांचा|
  13. कूप/ बूंगा- चारा डालने का सरकंडों/ घासफूस से बना ढांचा|
  14. कोठला- अनाज डालने का मिटटी का बड़ा पात्र|
  15. कोठली- अनाज डालने का मिटटी का छोटा पात्र।
  16. खाट- चारपाई|
  17. खेल- पशुओं के पानी पीने की हौद|│hssc gk in hindi│
  18. खोड़िया- एक नृत्य |
  19. गरंड- हाथ चक्की का घेरा जिसमें पिसा हुआ आटा गिरता है|
  20. गिर्डी- पत्थर का गोल आकर का एक उपकरण जो गहाई के काम आता है|
  21. गूण- कुएं से पानी खींचते समय ऊंट या बैल जिस गढ़े में जाते हैं|
  22. गोस्से/उपले/पाथिये- गोबर के कंडे|
  23. घीलडी- घी डालने का मिटटी का पात्र |│haryana gk for hssc in hindi│
  24. चाक- लकड़ी का बना वह गोल चक्का जिस पर रस्सी चढ़ा कर कुंए से पानी निकाला जाता है|
  25. चाकी- पत्थर से बना आटा पीसने का यन्त्र|
  26. चीड़स- चमड़े का एक पात्र जिससे कुएं से पानी निकाला जाता था|
  27. चूरमा- मोटी रोटी का चूरा बनाकर उसमें घी डालकर बनाया गया व्यंजन|
  28. छाज- सरकंडे के उपरी हिस्से तुलियों से बना एक पात्र जो अनाज साफ़ करने के काम आता है|
  29. छालनी- लोहे से बना एक पात्र जो छानने के काम आता है|
  30. छिक्का- घीदूध या रोटी रखने का रस्सी का जालापशुओं के मुंह पर लगने वाले जले को भी छिक्का कहते हैं|
  31. जमावनी- दूध जमाने का मटका |
  32. जमावनी- दूध जमाने का मटका |
  33. जामण- दूध ज़माने के लिए डाली जाने वाली छाछ |│haryana gk book download│
  34. जुआ/जूडा- ऊंट अथवा बैल को हल में जोतने के लिए प्रयोग होने वाला लकड़ी का ढांचा|
  35. झाल/मौण- मिटटी का घड़े से बड़े आकार का बर्तन|
  36. झावला- दूध गर्म करने के मटके (कढ़ावनी) को ढकने का मिटटी का पात्र जिसमें भाप निकलने को छेद होते थे|
  37. झावली- मिटटी का एक पात्रजिसमें सामान डालते थे|
  38. टोकनी- पीतल का घड़ा|
  39. ढाणा- कुएं से चीड़स से पानी निकाल कर जिस हौद में डाला जाता है|
  40. तूड़ी- गेंहूँ/जौ के पोधों का भूसा|
  41. दुबका- ऊंट या किसी अन्य पशु के पैरों को बांधना ताकि वह भाग न सके|
  42. दोघड- सिर पर ऊपर नीचे एक साथ दो घड़े|│haryana gk in hindi│
  43. धोरा/धाना- खेतों में पानी बहाने का नाला|
  44. नलाव/नलाई/निनान- फसल
  45. नांगला- रई को सीधी रखने के लिए डाले जाने वाले दो रस्से |
  46. नेता- हाथ से दूध बिलोने की रई को घुमाने वाला रस्सा|
  47. नोट- मिटटी के मटके आदि बर्तन बनाने का यंत्र भी चाक कहलाता है|
  48. न्याणा- गाय का दूध निकालने के पूर्व उसके पिछले पैरों को बांधने का रस्सा|
  49. पंखी- हाथ से हवा करने की घूमने वाली पंखी|
  50. पंजवाल- खेत में पानी देने वाला|
  51. पनघट- वह सार्वजानिक कुआं जहाँ से पीने का पानी लाया जाता था|
  52. पनिहारन-कुएं से पानी लाने वाली|
  53. पांत/सीरा- आटे को भूनकर उसमें मीठा पानी मिलाकर बनाया गया पतला व्यंजन
  54. पाली- पशु चराने वाला|
  55. पूली- फसल की कटाई से समय कुछ मात्र के एक साथ बांधे गए पौधे |
  56. प्लाण- गाडी में जोतने से पहले ऊंट की पीठ पर रखा जाने वाला एक लकड़ी का ढांचा |
  57. बटेऊ- दामाद
  58. बधाण- ऊंट/बैल गाडीट्रक्टर ट्राली या ट्रक आदि में लादे गए सामान को बांधने का रस्सा
  59. बरवा- मिट्टी का एक बर्तन |
  60. बरही/नेजू- कुएं से पानी खींचने की मोटी रस्सी|
  61. बांठ/ चाट- पकाकर पशुओं को डाली जानी वाली खाद्य सामग्रीजैसे बिनोलेग्वारचने आदि|
  62. बिजंडी- बीज डालने का थैला या अन्य पात्र|
  63. बिजणा- हाथ से हवा करने का पंखा|
  64. बिटोड़ा- गोसे/ उपलों का व्यवस्थित ढेर|
  65. बिलोवना/बिलोवनी- दूध बिलोने के लिए प्रयोग होने वाला मटका|
  66. बींड- ऊंट को हल में जोतने के लिए प्रयोग होने वाला रस्सों का जाल |
  67. मंडासा- कुएं के उपरी हिस्से पर बनायीं गयी दीवार|
  68. मन्जोली- मुज़ की गठरी|Haryana Gk For HSSC Exams Series #18 Ques= (851-900)Haryana Gk For HSSC Exams Series #17 Ques= (801-850)

    Haryana Gk For HSSC Exams Series #15 Ques= (701-750)

    Haryana Gk For HSSC Exams Series #14 Ques= (651-700)

  69. मूंज- सरकंडों में से निकला गया वह हिस्सा जिससे रस्सी बनती है|
  70. मांडना- गेरू या रंगों से दीवारों पर की जाने वाली चित्रकारी|
  71. मानी- हाथ चक्की के ऊपरी पाट में लगने वाला लकड़ी का टुकड़ा जो कीले पर टिकता है|
  72. मूंज- सरकंडों में से निकला गया वह हिस्सा जिससे रस्सी बनती है|
  73. मोगरी- मूंज. फसल आदि को कूटने की मोटी लकड़ी|
  74. रई- दूध बिलोने का लकड़ी का यन्त्र|
  75. रहट- बैलों की मदद से कुएं से पानी निकालने का एक यन्त्र|
  76. राछ- औजार |
  77. रास- ऊंट की लगाम।
  78. लनीहार- दुल्हन को लेने आया मेहमान|
  79. लापसी- आटे को भूनकर उसमें मीठा पानी मिलाकर बनाया गया गाढा व्यंजन|
  80. सत्तू- भूने हुए जौ का आटा|
  81. सरकंडा/झूंडा/झूंड – एक प्रकार का पौधा जिस के तने और पत्ते छप्पर आदि बनाने काम में लिए जाते हैं|
  82. सांकल- दरवाजे की कुण्डी|
  83. साथिये- स्वस्तिक आदि |
  84. सिकोरा- मिटटी का एक बर्तन|
  85. सीठना- दामाद को गीत के रूप में दी जाने वाली गालियाँ |
  86. सुराही- लम्बी गर्दन और बीच में पानी निकालने के छेड़ युक्त घड़े के आकर का मिटटी का पात्र|
  87. सूड़- खेत में हल चलाने से पहले की जाने वाली कटाई-छंटाई|
  88. हलसोतिया- बिजाई शुरू करने के दिन का उत्सव||
  89. हाथेली- हल का वह भाग जिसे पकड़ कर हल चलाया जाता है|
  90. हारा- गोबर के कंडे (उपले) जलाकर कुछ पकाने का स्थान |
  91. हारी- कपडे या घास से बना गोल घेरा जिस पर गर्म बर्तन रखा जाता था|
  92. हाली- हल चलाने वाला|
  93. हरियाणवी लोकोक्तियाँ

    उनके अर्थ

    गां की भैंस की तलै, भैंस की गां तलै कठिन परिस्थितियों में भी जीवन-यापन करना
    दूध की रखवाली बिल्ली बेईमान व्यक्ति को विश्वसनीय कार्य सौपना
    ठाली बैठी नाण, काटडे मुंडे उपयोगी कार्य के अभाव में निरुपयोगी कार्य करना
    आपणा मारै छा मं गेरै सबको अपने के प्रति आतिम्क लगाव होता है
    नेक्की नौ कोस, बदी सौ कोस अच्छाई की अपेक्षा बुराई जल्दी फैलती है
    मुस्सै नै पागी हल्दी की डली, पंसारी ए बन बैठा छोटी-सी उपलब्धि पर घमंड करना
    आपणा होक्का, आपणी मरोड़ सम्पन्नता के चलते स्वाभिमान होना
    आपणा भरया तै जगत का भरया स्वार्थी व्यक्ति दूसरों की परवाह नहीं करता है
    छाज तै बोलें बी,  छालनी बी कै बोलें जिसमे बहतर छेद दोषी व्यक्ति को दूसरों के दोष गिनाना शोभा नहीं देता
    आपै मारे बिना स्वर्ग किस्नै देख्या दूसरों के भरोसे सफलता नहीं मिलती है
    झोट्या की लड़ाई मै, झुंडो का खो बलवानों के झगड़े में कमजोर को हानि होती है
    गुड़ खावै गुड़ियानी की आण करै किसी व्यक्ति को वस्तु को त्याज्य मानना और उसी प्रकार के गुण-दोष वाली वस्तु या व्यक्ति को अपनाया
    जिसी नाचकुद, उसी ए वार फेर मेहनत के अनुसार फल मिलता है
    गांम बसया नहीं मंगते पहल्या फिरन्गे काम पूरा होने से पहले ही लाभ उठाने वालों का आ जाना
    जिसका खावै टिकड़ा, उसका गावै गीतडा अहसानों के प्रति समर्पित होना
    तावला से बावला उतावला व्यक्ति विवेक शून्य हो जाता है
    नाईयां की बारात में सब ठाकुर अज्ञानियों के बीच स्वयं को महान समझना
    बूढी घोड़ी लाल लगाम बुढ़ापे में अनावश्यक श्रृगांर शोभा नहीं देता है
    कहै तै कुम्हार गधे पै नहीं चढ़ता जिद्दी व्यक्ति किसी की उचित सलाह भी नहीं मानता
    खड्या डरावा खेत में, खावै न खावण दे कंजूस व्यक्ति सम्पति का उपभोग न तो स्वयं करता है, न दूसरें को करने देता है
    जाट गण्डा न दे, भेली दे दे मुर्खता का काम करना
    लंका में सब बावन गज के नीच परिवार में सब समान होते है
    काणी के ब्याह में सौ-सौ जोखम अभागे व्यक्ति के काम में सैकड़ो अड़चनें आती है

    हरियाणवी मुहावरे

    उनके अर्थ

    अक्कल के पाच्छै लठ ले कै पड़ना मूर्खतापूर्ण व्यवहार करना
    घर का खोद्या पाणी पीना आत्मनिर्भर होना
    ची बोलना तौबा करना
    टांग तलै के लिकड़ना पराजय स्वीकार करना
    कौली भरना गले लगाना
    ठोडडी पकड़ना मिन्नते करना
    एक हांडी में दो पेट करणा पक्षपातपूर्ण व्यवहार करना
    तिकड़म भिड़ाना युक्ति निकालना
    बाराबाट होना नष्ट होना
    गंगाजल ठाणा कसम खाना
    थेकली चढ़ाणा गरीबी में दिन काटना
    चुरने लड़ना उतेजित होना
    धिंकताना करना जबरदस्ती करना
    इमली के पाट्या पै डंड पेल समृद्धि की कल्पना करके मग्न रहना
    चिलम भरना खुशामद करना
    आल करना दंगा करना
    ठाडा छिकना तृप्त हो जाना
    खुरी खोदना बल प्रदर्शन करना
    ततैया लड़ना क्रोध करना
    कोलै लठ्ठी धरना लड़ाई के लिए तैयार रहना
    थूक कै चाटना बात से मुकर जाना
    अंघाई करना अभिमान करना
    गोड्डे टूटना निराश होना
    दा मारना अनपेक्षित लाभ उठाना
    जड़ पाडना समूल नाश करना
    पलै गाँठ मारणा कसम खाना

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