15+ Mock test Chandigarh Police Exam 2018

chandigarh police recruitment, chandigarh police written test, chandigarh police written exam date, chandigarh police exam date 2018, chandigarh police recruitment 2018, chandigarh police exam date 2017-18, www.chandigarh police.nic.exam date, chandigarh police admit card, chandigarh police written test, www.chandigarh police.nic.exam date, chandigarh police written exam date, chandigarh police exam date post of 520, chandigarh police exam date 2018, chandigarh police exam date 2017-18, chandigarh police 520 post exam date 2017, chandigarh police written exam date 2018,

Chandigarh Police Constable Exam Free Online Test Series

Chandigarh Police Constable Exam Free Online Test Series

chandigarh police recruitment, chandigarh police written test, chandigarh police written exam date, chandigarh police exam date 2018, chandigarh police recruitment 2018, chandigarh police exam date 2017-18, www.chandigarh police.nic.exam date, chandigarh police admit card, chandigarh police written test, www.chandigarh police.nic.exam date, chandigarh police written exam date, chandigarh police exam date post of 520, chandigarh police exam date 2018, chandigarh police exam date 2017-18, chandigarh police 520 post exam date 2017, chandigarh police written exam date 2018,

अवसर हिंदी कहानी Opportunity Avasar Hindi Kahani Story

अवसर हिंदी कहानी Opportunity Avasar Hindi Kahani Story 100+ hindi story kahaniyan short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

अवसर हिंदी कहानी Opportunity Avasar Hindi Kahani Story

एक युवक एक किसान की बेटी से शादी की इच्छा लेकर किसान के पास गया. किसान ने उसकी ओर देखा और कहा, ” युवक, खेत में जाओ. मैं एक- एक करके तीन बैल छोड़ने वाला हूँ. अगर तुम तीनों बैलों में से किसी भी एक की पूँछ पकड़ लो तो मैं अपनी बेटी की शादी तुमसे कर दूंगा.”युवक खेत में बैल की पूँछ पकड़ने की मुद्रा में खड़ा हो गया. किसान ने खेत में स्थित घर का दरवाजा खोला और एक बहुत ही बड़ा और खतरनाक बैल उसमे से निकला. युवक ने ऐसा बैल पहले कभी नहीं देखा था. उससे डर कर युवक ने निर्णय लिया कि वह अगले बैल का इंतज़ार करेगा और वह एक तरफ हो गया जिससे बैल उसके पास से होकर निकल गया.
दरवाजा फिर खुला. आश्चर्यजनक रूप से इस बार पहले से भी बड़ा और भयंकर बैल निकला. युवक ने सोचा कि इससे तो पहला वाला बैल ठीक था. फिर उसने एक ओर होकर बैल को निकल जाने दिया.
दरवाजा तीसरी बार खुला. युवक के चहरे पर मुस्कान आ गई. इस बार एक छोटा और मरियल बैल निकला. जैसे ही बैल युवक के पास आने लगा, युवक ने उसकी पूँछ पकड़ने के लिए मुद्रा बना ली ताकि उसकी पूँछ सही समय पर पकड़ ले. पर उस बैल की पूँछ थी ही नहीं.
इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि जिन्दगी अवसरों (opportunities) से भरी हुई है. कुछ सरल हैं और कुछ कठिन. पर अगर एक बार अवसर गवां दिया तो फिर वह अवसर दुबारा नहीं मिलेगा. अतः हमेशा प्रथम अवसर को हासिल करने का प्रयास करना चाहिए.
आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. तथा अपने दोस्तों के साथ शेयर करें
धन्यवाद!

मोर और कौआ हिंदी कहानी Hindi kahani Story

मोर और कौआ हिंदी कहानी Hindi kahani Story 100+ hindi story kahaniyan short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

मोर और कौआ हिंदी कहानी Hindi kahani Story

एक दिन कौए ने जंगल में मोरों की बहुत- सी पूंछें बिखरी पड़ी देखीं. वह
मोर और कौआ हिंदी कहानी

मोर और कौआ हिंदी कहानी

अत्यंत प्रसन्न होकर कहने लगा- वाह भगवान! बड़ी कृपा की आपने, जो मेरी पुकार सुन ली. मैं अभी इन पूंछों से अच्छा खासा मोर बन जाता हूं. इसके बाद कौए ने मोरों की पूंछें अपनी पूंछ के आसपास लगा ली. फिर वह नया रूप देखकर बोला- अब तो मैं मोरों से भी सुंदर हो गया हूं. अब उन्हीं के पास चलकर उनके साथ आनंद मनाता हूं. वह बड़े अभिमान से मोरों के सामने पहुंचा. उसे देखते ही मोरों ने ठहाका लगाया. एक मोर ने कहा- जरा देखो इस दुष्ट कौए को. यह हमारी फेंकी हुई पूंछें लगाकर मोर बनने चला है. लगाओ बदमाश को चोंचों व पंजों से कस-कसकर ठोकरें. यह सुनते ही सभी मोर कौए पर टूट पड़े और मार-मारकर उसे अधमरा कर दिया.

कौआ भागा-भागा अन्य कौए के पास जाकर मोरों की शिकायत करने लगा तो एक बुजुर्ग कौआ बोला- सुनते हो इस अधम की बातें. यह हमारा उपहास करता था और मोर बनने के लिए बावला रहता था. इसे इतना भी ज्ञान नहीं कि जो प्राणी अपनी जाति से संतुष्ट नहीं रहता, वह हर जगह अपमान पाता है. आज यह मोरों से पिटने के बाद हमसे मिलने आया है. लगाओ इस धोखेबाज को.
इतना सुनते ही सभी कौओं ने मिलकर उसकी अच्छी धुलाई की.
कहानी का सन्देश यह  है कि ईश्वर ने हमें जिस रूप और आकार में बनाया है, हमें उसी में संतुष्ट रहकर अपने कर्मो पर ध्यान देना चाहिए. कर्म ही महानता का द्वार खोलता है.
आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. तथा अपने दोस्तों के साथ शेयर करें
धन्यवाद!

एक सच्चा भारतीय Hindi Kahani Story

एक सच्चा भारतीय Hindi Kahani Story 100+ hindi story kahaniyan short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

एक सच्चा भारतीय Hindi Kahani Story

इंगलैण्ड की राजधानी लंदन में यात्रा के दौरान एक शाम महाराजा जयसिंह सादे कपड़ों में बॉन्डस्ट्रीट में घूमने के लिए निकले और वहां उन्होने रोल्स रॉयस कम्पनी का भव्य शो रूम देखा और मोटर कार का भाव जानने के लिए अंदर चले गए. शॉ रूम के अंग्रेज मैनेजर ने उन्हें “कंगाल भारत” का सामान्य नागरिक समझ कर वापस भेज दिया. शोरूम के सेल्समैन ने भी उन्हें बहुत अपमानित किया, बस उन्हें “गेट आऊट” कहने के अलावा अपमान करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी.
अपमानित महाराजा जयसिंह वापस होटल पर आए और रोल्स रॉयस के उसी शोरूम पर फोन लगवाया और संदेशा कहलवाया कि अलवर के महाराजा कुछ मोटर कार खरीदने चाहते हैं. कुछ देर बाद जब महाराजा रजवाड़ी पोशाक में और अपने पूरे दबदबे के साथ शोरूम पर पहुंचे तब तक शोरूम में उनके स्वागत में “रेड कार्पेट” बिछ चुका था. वही अंग्रेज मैनेजर और सेल्समेन्स उनके सामने नतमस्तक खड़े थे. महाराजा ने उस समय शोरूम में पड़ी सभी छ: कारों को खरीदकर, कारों की कीमत के साथ उन्हें भारत पहुँचाने के खर्च का भुगतान कर दिया.
भारत पहुँच कर महाराजा जयसिंह ने सभी छ: कारों को अलवर नगरपालिका को दे दी और आदेश दिया कि हर कार का उपयोग (उस समय के दौरान 8320 वर्ग कि.मी) अलवर राज्य में कचरा उठाने के लिए किया जाए. विश्व की अव्वल नंबर मानी जाने वाली सुपरक्लास रोल्स रॉयस कार नगरपालिका के लिए कचरा गाड़ी के रूप में उपयोग लिए जाने के समाचार पूरी दुनिया में फैल गया और रोल्सरॉयस की इज्जत तार-तार हुई. युरोप-अमरीका में कोई अमीर व्यक्ति अगर ये कहता “मेरे पास रोल्स रॉयस कार” है तो सामने वाला पूछता “कौन सी?” वही जो भारत में कचरा उठाने के काम आती है! वही?
बदनामी के कारण और कारों की बिक्री में एकदम कमी आने से रोल्स रॉयस कम्पनी के मालिकों को बहुत नुकसान होने लगा. महाराज जयसिंह को उन्होने क्षमा मांगते हुए टेलिग्राम भेजे और अनुरोध किया कि रोल्स रॉयस कारों से कचरा उठवाना बन्द करवावें. माफी पत्र लिखने के साथ ही छ: और मोटर कार बिना मूल्य देने केलिए भी तैयार हो गए. महाराजा जयसिंह जी को जब पक्का विश्वास हो गया कि अंग्रेजों को वाजिब बोधपाठ मिल गया है तो महाराजा ने उन कारों से कचरा उठवाना बन्द करवाया.

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. तथा अपने दोस्तों के साथ शेयर करें
धन्यवाद!

मानव सेवा ही सच्ची सेवा है Hindi kahani story

मानव सेवा ही सच्ची सेवा है Hindi kahani story 100+ hindi story kahaniyan short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

मानव सेवा ही सच्ची सेवा है Hindi kahani story

प्रसिद्द  रसायनशास्त्री नागार्जुन एक राज्य के राजवैद्य थे. बहुत व्यस्त रहते थे इसलिए उन्होंने  एक दिन  राजा से कहा, ‘मुझे एक सहायक की जरूरत है.’ राजा ने उनके पास दो कुशल युवकों को भेजा और कहा कि उनमें से जो ज्यादा योग्य लगे उसे अपने सहायक के रूप में  रख लें. नागार्जुन ने दोनों की कई तरह से परीक्षा ली पर दोनों की योग्यता एक जैसी थी.
नागार्जुन दुविधा में पड़ गए कि आखिर किसे रखें. अंत में उन्होंने दोनों युवकों को एक पदार्थ दिया और कहा, ‘इसे पहचान कर कोई भी एक रसायन अपनी इच्छानुसार बनाकर ले आओ. हां, तुम दोनों सीधे न जाकर राजमार्ग के रास्ते से जाना.’
दोनों राजमार्ग से होकर अपने-अपने घर चले गए. दूसरे दिन दोनों युवक आए. उनमें से एक युवक रसायन बना कर लाया था जबकि दूसरा खाली हाथ आया था.
आचार्य ने रसायन की जांच की. उसे बनाने वाले युवक से उसके गुण-दोष पूछे. रसायन में कोई कमी नहीं थी. आचार्य ने दूसरे युवक से पूछा, ‘तुम रसायन क्यों नहीं लाए?’ उस युवक ने कहा, ‘मैं पहचान तो गया था मगर उसका कोई रसायन मैं तैयार नहीं कर सका. जब मैं राजमार्ग से जा रहा था तो देखा कि एक पेड़ के नीचे एक बीमार और अशक्त आदमी दर्द से तड़प रहा है. मैं उसे अपने घर ले आया और उसी की सेवा में इतना उलझ गया कि रसायन तैयार करने का समय ही नहीं मिला.’नागार्जुन ने उसे अपने सहायक के रूप में  रख लिया.
दूसरे दिन राजा ने नागार्जुन से पूछा, ‘आचार्य! जिसने रसायन नहीं बनाया उसे ही आपने रख लिया.
ऐसा क्यों?’ नागार्जुन ने कहा, ‘महाराज दोनों एक रास्ते से गए थे. एक ने बीमार को देखा और दूसरे ने उसे अनदेखा कर दिया. रसायन बनाना कोई जटिल काम नहीं था. मुझे तो यह जानना था कि दोनों में कौन मानव सेवा करने में समर्थ हैं.
बीमार व्यक्ति चिकित्सक की दवा से ज्यादा उसके स्नेह और सेवा भावना से ठीक होता है, इसलिए मेरे काम का व्यक्ति वही है जिसे मैंने चुना है.’ इससे सीख मिलती  है कि मानव सेवा ही सच्ची सेवा है.
आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. तथा अपने दोस्तों के साथ शेयर करें
धन्यवाद!

तुम चैंपियन हो- हिंदी कहानी You are Champion Hindi kahani Story

तुम चैंपियन हो- हिंदी कहानी You are Champion Hindi kahani Story 100+ hindi story kahaniyan short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

तुम चैंपियन हो- हिंदी कहानी You are Champion Hindi kahani Story

यह कहानी पहाड़ों की है, लेकिन लागू  हम सब पर होती है. कभी -कभी बहुत छोटी सी घटना हमें एक बहुत बड़ी सीख दे जाती है. जरुरत सिर्फ इस बात की है कि हम उसे समझें और अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें.

You are Champion Hindi Story

You are Champion Hindi Story

एक  पिता और पुत्र पहाड़ों की सैर पर निकले. चलते- चलते अचानक पुत्र गिर पड़ा. पैरों में पत्थर से चोट लगने पर उसके मुंह से निकला,’ ओह पापा!’

तुरंत पहाड़ों में से आवाज आई – ‘ ओह पापा!’

पुत्र अचरज में पड़ गया. उसने फौरन पूछा – यह कौन है ?

सामने से वही सवाल आया ,’ यह  कौन है  ?’

पुत्र चिल्लाया, ‘मैं तुम्हारी प्रशंसा करता हूं !’

पहाड़ों से जवाब आया, ‘मैं तुम्हारी प्रशंसा  करता हूं !’

अपनी बात की नकल करते देखकर पुत्र जोर से  चिल्लाया, ‘डरपोक !’

जवाब मिला, ‘डरपोक !’

उसने बालक ने अपने पिता की ओर देखा और पूछा, ‘यह क्या हो रहा है ?’

पिता ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘बेटा, जरा ध्यान दो।’

इसके बाद पिता जोर से बोला,  ‘तुम चैंपियन हो !’

जवाब मिला, ‘तुम चैंपियन हो !’

पुत्र को हैरानी हुई,  लेकिन वह कुछ समझ नहीं सका.

इस पर उसके पापा ने उसे समझाया, ‘लोग इसे प्रतिध्वनि या गूंज  ( इको ) कहते हैं, लेकिन वास्तव में यह जिंदगी है. जिस प्रकार से तुम्हारे द्वारा बोले गए अच्छे या बुरे वाक्य तुम्हें  इको यानि गूंज के रूप में तुम्हें पुनः सुनाई दे रही थी. उसी तरह से हमारी जिन्दगी भी हमें हर  चीज़ वापस लौटाती है. हम जो भी करते हैं या कहते हैं, वह हमें अपनी जिन्दगी में ही वापस मिल जाती है. हमारी जिंदगी हमारे कार्यों  का ही प्रतिबिंब होती  है.

अगर आप प्यार पाना चाहते हैं तो आपको बदले में प्यार देना भी पड़ेगा. यदि आप प्रेम बाटेंगें तो बदले में आपको भी प्रेम मिलेगा और यदि आप घृणा बाटेंगें तो आपको भी घृणा ही मिलेगा. अब निर्णय हमारे हाथों में है कि हम किसको चुनते हैं.

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. तथा अपने दोस्तों के साथ शेयर करें
धन्यवाद!

माता न कुमाता हो सकती Hindi kahani Story

माता न कुमाता हो सकती Hindi kahani Story 100+ hindi story kahaniyan short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

माता न कुमाता हो सकती Hindi kahani Story

बात बेगुसराय  रेलवे स्टेशन की है. कुछ दिनों पहले की बात है. रात का समय था.  मैं ट्रेन के इंतज़ार में रेल्वे – प्लेटफार्म पर टहल रहा था .
एक वृद्ध महिला , जिनकी उम्र लगभग 60 – 65 वर्ष के लगभग रही होगी, वो मेरे पास आयी और मुझसे खाने के लिए पैसे माँगने लगी …. उनके कपडे फटे ., पूरे तार – तार थे ., उनकी दयनीय हालत देख कर ऐसा लग रहा था की पिछले कई दिनों से भोजन भी ना किया हो .. मुझे उनकी दशा पर बहुत तरस आया तो मैंने अपना पर्स टटोला ., कुछ बीस रुपये के आसपास छुट्टे पैसे और एक हरा ” गांधी ” मेरे पर्स में था ., मैंने वो पूरे छुट्टे उन्हें दे दिए… मैंने पैसे उन्हें दिए ही थे ., की इतने में एक महिला एक छोटे
से रोते – बिलखते., दूधमुहे बच्चे के साथ टपक पड़ी और छोटे दूधमुहे बच्चे का वास्ता देकर वो भी मुझसे पैसे माँगने लगी … मैं उस दूसरी महिला को कोई ज़वाब दे पाता की उन वृद्ध माताजी ने वो सारे पैसे उस दूसरी महिला को दे दिए , जो मैंने उन्हें दिए थे …. पैसे लेकर वो महिला तो चलती बनी… लेकिन मैं सोच में पड़ गया … मैंने उनसे पूछा की-” आपने वो पैसे उस
महिला को दे दिए ..??? ” उनका ज़वाब आया -” उस महिला के साथ उसका छोटा सा दूधमुहा बच्चा भी तो था ., मैं भूखे रह लूंगी लेकिन वो छोटा बच्चा बगैर दूध के कैसे रह पायेगा … ??? भूख के मारे रो भी रहा था …”
उनका ज़वाब सुनकर मैं स्तब्ध रह गया …. सच … भूखे पेट भी कितनी बड़ी मानवता की बात उनके ज़ेहन में बसी थी …. उनकी सोच से मैं प्रभावित हुआ ., तो उनसे यूं ही पूछ लिया की यूं दर -बदर की ठोकरे खाने के पीछे आखिर कारण क्या है …??? उनका ज़वाब आया की उनके दोनों बेटो ने शादी के बाद उन्हें साथ रखने से इनकार कर दिया, पति भी चल बसे, आखिर में कोई चारा न बसा … बेटो ने तो दुत्कार दिया ., लेकिन वो भी हर बच्चे में अपने दोनों बेटो को ही देखती है ., इतना कहकर उनकी आँखों में आंसू आ गए … मैं भी भावुक हो गया ., मैंने पास की एक होटल
से उन्हें खाने का सामान ला दिया … मैं भी वहा से फिर साईड हट गया …
लेकिन बार-बार ज़ेहन में यही बात आ रही थी ., की आज की पीढी कैसी निर्लज्ज है ., जो अपनी जन्म देने वाली माँ तक को सहारा नहीं दे सकती …???  लानत है ऐसी संतान पर …. और दूसरी तरफ वो ” माँ ” जिसे हर बच्चे में अपने ” बेटे ” दिखाई देते है …. धन्य है ” मातृत्व-प्रेम”.
यह कहानी 100 %  वास्तविक है.
आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. तथा अपने दोस्तों के साथ शेयर करें
धन्यवाद!

समय के साथ चलें – एक प्रेरणादायी कहानी Hindi Kahani Story

समय के साथ चलें – एक प्रेरणादायी कहानी Hindi Kahani Story 100+ hindi story kahaniyan short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

समय के साथ चलें – एक प्रेरणादायी कहानी Hindi Kahani Story

दिनेश एक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर डेवलपर था. वह नए- नए सॉफ्टवेयर बनाता, उसे बेचकर अपनी जीविका चलाता था. एक दिन उसका कंप्यूटर नदी में गिर गया. उसने बचपन में एक कहानी पढ़ी थी कि किस तरह से लकडहारे की कुल्हाड़ी नदी में गिर जाती है, जल देवी से वह प्रार्थना करता
है. जल देवी प्रकट होती हैं. पहले उसे सोने की, फिर चांदी की और फिर लोहे की कुल्हाड़ी लाकर देती है. जब लकडहारा लोहे की कुल्हाड़ी मांगकर अपनी ईमानदारी का परिचय देता है और फिर जल देवी प्रसन्न होकर उसे तीनो कुल्हाड़ी दे देती हैं. यह कहानी याद कर दिनेश भी जल की देवी को प्रसन्न करने में लग गया.

जल देवी प्रकट होती हैं. सॉफ्टवेयर डेवलपर दिनेश उनसे अपना कंप्यूटर वापस मांगता है. जल देवी उसे Pentium 10 कंप्यूटर लाकर देती हैं. दिनेश “यह मेरा नहीं है” कहकर उस कंप्यूटर को लौटा देता है. जल देवी पुनः Pentium 20 computer लेकर देती हैं. सॉफ्टवेयर डेवलपर दिनेश इस बार भी “यह मेरा नहीं है,” कहकर उसे लौटा देता है. अब उसे जल देवी Pentium 4  computer लाकर देती हैं. सॉफ्टवेयर डेवलपर खुश हो जाता है और जल की देवी का आभार प्रकट करता है. जल देवी उससे कहती हैं – मै तुम्हारी ईमानदारी से खुश हूँ. तुम कोई एक वर मांग सकते हो. सॉफ्टवेयर डेवलपर दिनेश उनसे एक और Pentium 4 computer की मांग करता है. इस पर जल देवी उस पर नाराज होकर कहती हैं – ” तुम कभी भी उन्नति नहीं कर सकते क्योंकि तुम कछुआ की चाल से चल रहे हो. आज जमाना कहाँ से कहाँ पहुँच गया है. आज जबकि कंप्यूटर जगत में Pentium 25 computer, super computer की बात हो रही है तुम Pentium 4 computer  पर ही अटके पड़े हो.” इतना कह जल देवी अंतर्ध्यान हो गयी.
कहने का अभिप्राय यह है कि जो समय की गति के साथ नहीं चलता है  देवी देवता भी उसकी मदद नहीं करते हैं. समय के साथ चलो. समय की गति को पहचानो. समय के साथ चलनेवाला ही तरक्की के शिखर पर पहुँच सकता है.

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. तथा अपने दोस्तों के साथ शेयर करें
धन्यवाद!

बुद्धिमत्ता हिंदी कहानी Hindi Kahani Story

बुद्धिमत्ता हिंदी कहानी Hindi Kahani Story 100+ hindi story kahaniyan short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

बुद्धिमत्ता हिंदी कहानी Hindi Kahani Story

यह कहानी है चार दोस्तों की. एक लेक्चरर, दूसरा डॉक्टर, तीसरा इंस्पेक्टर

बुद्धिमत्ता हिंदी कहानी

और चौथा एक कंपनी का चार्टर्ड अकाउंटेंट था. चारों लखनऊ से दिल्ली कार से जा रहे थे. हाईवे पर उनकी कार तेजी से भागी जा रही थी. अचानक उनकी कार के पिछले चक्के का पहिया पंक्चर हो गया. गाड़ी रोकी गई. चारों दोस्त उतरे. एक ने जैक निकाला, दूसरे ने चक्का खोला और तीसरा चक्का लगाने लगा. इतने में एक के हाथ से चक्के के चारों बोल्ट खाई में गिर गए. बिना बोल्ट चक्का लगाना मुश्किल था. चारों यह सोच कर परेशान  हो गए. अब क्या करें? चारों ने मोबाइल लगाने की कोशिश की लेकिन नेटवर्क नहीं था. इतने में वहां एक चरवाहा अपने जानवरों को हांकते हुए आया. उन्होंने चरवाहे से पूछा -” सुनो यहाँ कोई मेकेनिक मिलेगा क्या?” चरवाहे ने पहाड़ी की तरफ इशारे करते हुए बताया कि यहाँ से दस किलोमीटर दूर है. सब परेशान. अब क्या करें. उनमें से एक दोस्त ने कहा- “हमारी कर के बोल्ट खाई में गिर गए हैं तुम निकल दो न, सौ रूपये दूंगा.” चरवाहा बोला – “इस गहरी खाई में इतना छोटा बोल्ट कहाँ मिलेगा. साहब, आप ऐसा क्यों नहीं करते तीनो चक्के से एक- एक बोल्ट खोल कर क्यों नहीं लगा लेते.”
चरवाहे की बात सुनकर चारों एक दूसरे का मुंह देखने लगे. इन चारों के पास बड़ी बड़ी डिग्री थी इसके बाबजूद भी उनके दिमाग में यह बात नहीं आई कि तीन चक्कों से एक एक बोल्ट निकल कर काम चलाया जा सकता है. इसका मतलब यह है कि बुद्धिमान लोगों के सामने बड़े- बड़े डिग्रीधारी भी फ़ैल हो जाते हैं. वक्त और परिस्थिति के हिसाब से निर्णय लेकर किस तरह से समस्या का समाधान हो सकता है, यह खास बात है.

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. तथा अपने दोस्तों के साथ शेयर करें
धन्यवाद!

नींद क्यों नहीं आती हिंदी कहानी Sleepless Night Hindi Story

नींद क्यों नहीं आती हिंदी कहानी Sleepless Night Hindi Story 100+ hindi story kahaniyan short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

नींद क्यों नहीं आती हिंदी कहानी Sleepless Night Hindi Story

Sleepless Night Hindi Story/ कमलनाथ एक सफल  व्यापारी  थे. उनके पास धनधान्य की कोई कमी नहीं थी. पर वह लगातार एक समस्या से ग्रस्त थे. उन्हें  नींद न आने की बीमारी थी. उनका नौकर रामदीन अपने मालिक की बीमारी से दुखी रहता था.

Sleepless Night Hindi Story

एक दिन व्यापारी कमल नाथ अपने नौकर रामदीन को सारी संपत्ति देकर चल बसा. संपत्ति का स्वामी बनने के बाद रामदीन को भी कमलनाथ जी वाली बीमारी हो गयी. वह भी  रात को सोने की कोशिश कर रहा था, किन्तु अब उसे नींद नहीं आ रही थी.

एक रात जब वह सोने की कोशिश कर रहा था, उसने कुछ आहट सुनी. रामदीन ने देखा, एक चोर घर का सारा सामान समेट कर उसे बांधने की कोशिश कर रहा था, लेकिन चादर छोटी होने के कारण गठरी बंध नहीं रही थी.

नौकर रामदीन ने अपनी ओढ़ी हुई चादर चोर को दे दी और बोला, ‘सारा सामान इसमें बांध लो.’

उसे जगा देखकर चोर सामान छोड़कर भागने लगा. किन्तु नौकर रामदीन  ने उसे रोककर हाथ जोड़कर कहा, ‘भागो मत, इस सामान को ले जाओ’ चोर बहुत आश्चर्य से उसकी तरफ देखा और बोला – ‘ आप मुझे ऐसा करने क्यों बोल रहे हैं.’ नौकर रामदीन बोला – मैंने तुमसे ऐसा इसलिए कहा  ताकि मैं चैन की नींद सो सकूँ. इसी ने मेरे मालिक की नींद उड़ा रखी थी और अब मेरी भी. उसकी बातें सुन चोर की भी आंखें खुल गईं.

कहानी का सन्देश यह है कि धन दौलत हमारे जीवन में जरुरी तो है लेकिन दिन रात उसी के बारे में सोचना, धन कमाने के लिये अपने जीवन के सुख की अनदेखी करना गलत है. अक्सर हम सोचते हैं कि धन की अधिकता सुख देती है , लेकिन वास्तविक जीवन में यह सही नहीं होता. मेरा धन मुझसे कोई न छीन ले या चुरा ले, यही चिंता बराबर हमारे मन में बनी रहती है और उसी में हमारी नींद उड़ जाती है.

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. तथा अपने दोस्तों के साथ शेयर करें
धन्यवाद!

error: