Prefix In Hindi-उपसर्ग की परिभाषा, भेद और 50+ उदाहरण

Prefix In Hindi-उपसर्ग की परिभाषा, भेद और उदाहरण

उपसर्ग :

उपसर्ग दो शब्दों से मिलकर बना होता है उप+सर्ग। उप का अर्थ होता है समीप और सर्ग का अर्थ होता है सृष्टि करना। संस्कृत एवं संस्कृत से उत्पन्न भाषाओँ में उस अव्यय या शब्द को उपसर्ग कहते है। अथार्त शब्दांश उसके आरम्भ में लगकर उसके अर्थ को बदल देते हैं या फिर उसमें विशेषता लाते हैं उन शब्दों को उपसर्ग कहते हैं। शब्दांश होने के कारण इनका कोई स्वतंत्र रूप से कोई महत्व नहीं माना जाता है।

उदाहरण :- हार एक शब्द है जिसका अर्थ होता है पराजय। लेकिन इसके आगे आ शब्द लगने से नया शब्द बनेगा जैसे आहार जिसका मतलब होता है भोजन।

उपसर्ग के भेद :-

1. संस्कृत के उपसर्ग

2. हिंदी के उपसर्ग

3. अरबी-फारसी के उपसर्ग

4. अंग्रेजी के उपसर्ग

5. उर्दू के उपसर्ग

6. उपसर्ग की भांति प्रयुक्त होने वाले संस्कृत के अव्यय

1. संस्कृत के उपसर्ग :-

1.अति – ( अधिक ,परे , ऊपर , उस पार ,) –

अत्यधिक , अतिशय , अत्यंत , अतिरिक्त , अत्यल्प , अतिक्रमण , अतिवृष्टि , अतिशीघ्र , अत्याचार , अतीन्द्रिय , अत्युक्ति , अत्युत्तम , अत्यावश्यक , अतीव , अतिकाल , अतिरेक आदि।

2. अप – ( बुरा , अभाव , विपरीत , हीनता , छोटा ) –

अपयश , अपमान , अपशब्द , अपराध , अपकार , अपकीर्ति , अपभ्रश , अपव्यय , अपवाद , अपकर्ष , अपहरण , अपप्रयोग , अपशकुन , अपेक्षा आदि।

3. अ – (अभाव , अन , निषेध , नहीं , विपरीत ) –

अधर , अपलक , अटल , अमर , अचल , अनाथ , अविश्वास , अधर्म, अचेतन , अज्ञान , अलग , अनजान , अनमोल , अनेक , अनिष्ट , अथाह , अनाचार , अलौकिक , अस्वीकार , अन्याय , अशोक , अहिंसा , अवगुण , अर्जित आदि।

4. अनु – (पीछे , समान , क्रम , पश्चात ) –

अनुक्रमांक , अनुकंपा , अनुज , अनुरूप , अनुपात , अनुचर , अनुकरण , अनुसार , अनुशासन , अनुराग , अनुग्रह , अनुवाद , अनुस्वार , अनुशीलन , अनुकूल , अनुक्रम , अनुभव , अनुशंसा , अन्वय , अन्वीक्षण , अन्वेषण , अनुच्छेद , अनूदित आदि।

5. आ – (ओर , सीमा , तक , से , समेत , कमी , विपरीत , उल्टा , अभाव , नहीं ) –

आगमन , आजीवन , आमरण , आचरण ,आलेख , आहार , आकर्षण , आकर , आकार , आभार , आशंका , आवेश , आरक्त , आदान , आक्रमण , आकलन , आकाश , आरम्भ , आमुख , आरोहण , आजन्म , आयात , आतप , आगार , आगम , आमोद , आरक्षण , आकर्षण , आबालवृद्ध , आघात आदि।

6. अधि – (श्रेष्ठ , प्रधान , ऊपर , सामीप्य ) –

अधिकार , अधिसूचना , अधिपति , अधिकरण , अधिनायक , अधिमान , अधिपाठक , अधिग्रहण , अधिवक्ता , आधिक्य , अध्धयन , अध्यापन , अधिराज , अध्यात्म , अध्यक्ष , अधिनियम , अधिमास , अधिकृत , अधिक्षण , अध्यादेश , अधीन , अधीक्षक आदि।

7.अभि – ( सामने , पास , ओर , इच्छा प्रकट करना , चारों ओर ) –

अभ्यास , अभ्युदय , अभिमान , अभिषेक ,अभिनय , अभिनव , अभिवादन , अभिभाषण , अभियोग , अभिभूत , अभिभावक , अभ्यर्थी , अभीष्ट , अभ्यंतर , अभीप्सा , अभिनन्दन , अभिलाप , अभीमुख , अभ्युत्थान ,अभियान , अभिसार , अभ्यागत , अभ्यास , अभिशाप ,अभिज्ञान आदि।

8. उप – ( निकट , छोटा , सहायक , सद्र्श , गौण , हीनता ) –

उपकार , उपग्रह , उपमंत्री , उपहार , उपदेश , उपवन , उपनाम , उपचार , उपसर्ग , उपयोग , उपभोग , उपभेद , उपयुक्त , उपेक्षा , उपाधि , उपाध्यक्ष ,उपकूल , उपनिवेश , उपस्थिति , उपासना , उपदिशा , उपवेद , उपनेत्र , उपरांत , उपसंहार , उपकरण , उपकार आदि।

9. प्र – ( आगे , अधिक , ऊपर , यश ) –

प्रमाण , प्रयोग , प्रताप , प्रबल , प्रस्थान , प्रकृति , प्रमुख ,प्रदान , प्रचार , प्रसार , प्रहार , प्रयत्न , प्रभंजन , प्रपौत्र , प्रारम्भ , प्रोज्जवल , प्रेत , प्राचार्य , प्रयोजक , प्रार्थी , प्रक्रिया , प्रवाह , प्रख्यात , प्रकाश , प्रकट , प्रगति , प्रपंच , प्रलाप , प्रभुता , प्रपिता , प्रकोप , प्रभु , प्रयास आदि।

10. वि – ( विशिष्ट , भिन्न , हीनता ,असमानता , अभाव ) –

विरोध , विपक्ष , विदेश , विकल , वियोग , विनाश , विराम ,विजय , विज्ञान , विलय , विहार , विख्यात , विधान , व्यवहार , व्यर्थ , व्यायाम , व्यंजन , व्याधि , व्यसन , व्यूह , विकास , विधवा , विवाद , विशेष , विस्मरण , विभाग , विकार , विमुख , विनय , विनंती , विफल , विसंगति , विवाह , विभिन्न ,विश्राम आदि।

11. उत – ( श्रेष्ठ , ऊपर , ऊँचा ) –

उल्लास , उज्ज्वल , उत्थान , उन्नति , उदघाटन , उत्तम , उत्पन्न , उत्पत्ति , उत्पीडन , उत्कंडा, उत्तम , उत्कृष्ट , उदय , उद्गम , उत्कर्ष , उत्पल , उल्लेख , उत्साह , उत्पात , उतीर्ण , उभ्दिज्ज आदि।

12. प्रति – ( विरुद्ध , प्रत्येक , सामने , बराबरी , उल्टा , हर एक ) –

प्रत्याशा , प्रतिकूल , प्रतिकार , प्रतिष्ठा , प्रत्येक , प्रतिहिंसा , प्रतिरूप , प्रतिध्वनी , प्रतिनिधि , प्रतीक्षा , प्रत्युत्तर , प्रतीत , प्रतिक्षण , प्रतिदान , प्रत्यक्ष ,प्रतिवर्ष , प्रत्यपर्ण , प्रतिद्वंदी , प्रतिशोध , प्रतिरोधक , प्रतिघात , प्रतिध्वनी आदि।

13. सु – ( अच्छा , सरल , सुखी , सहज ,सुंदर , अधिक ) –

सुशील , स्वागत , स्वल्प , सुगम , सुबोध , सुपुत्र ,सुधार , सुगंध , सुगति , सुगन्ध, सुगति, सुबोध, सुयश, सुमन , सुलभ , सुअवसर, सूक्ति ,सुदूर , सुजन , सुशिक्षित , सुपात्र , सुगठित , सुहाग , सुकर्म , सुकृत , सुभाषित , सुकवि , सुरभि आदि।

14. सम – ( अच्छा , पूर्णता , संयोग , उत्तम , साथ ) –

संताप , संभावना , संयोग , संशोधन , सम्मान , सम्मेलन ,संकल्प, संचय, सन्तोष, संगठन, संचार , संलग्न , संहार, संशय, संरक्षा ,संकल्प, संग्रह, संन्यास, संस्कार, संरक्षण, संहार , सम्मुख, संग्राम , संभव , संतुष्ट , संचालन , संजय आदि।

15. सह – ( साथ ) –

सहोदर , सहपाठी , सहगान , सहचर , सहमती , सहयोग , सहमत आदि।

16. पर – ( अन्य ) –

परदेश , परलोक , पराधीन आदि।

17. कु – ( बुरा ,हीनता ) –

कुपुत्र , कुरूम , कुकर्म , कुमति ,कुयोग , कुकृत्य ,कुख्यात , कुखेत , कुपात्र , कुकाठ , कपूत , कुढंग आदि।

 

18. परि – ( चारों ओर , पास , आसपास ) –

परिवार , परिणाम , पर्यावरण , परिजन , परिक्रम , परिक्रमा , परिपूर्ण, परिमार्जन,परिहार, परिक्रमण, परिभ्रमण, परिधान,परिहास, परिश्रम, परिवर्तन, परीक्षा,पर्याप्त, पर्यटन , पर्यन्त ,परिमित , परिपूर्ण , परिपाक, परिधि आदि।

19. अव – ( हीन , बुरा ,अनादर , पतन ) –

अवशेष , अवगुण , अवकाश , अवसर , अवनति , अवज्ञा , अवधारण, अवगति, अवतार, अवलोकन, अवतरण , अवगत , अवस्था , अवनत , अवसान , अवरोहन , अवगणना , अवकृपा आदि।

20. निर – ( निषेध ,रहित , बिना , बाहर ) –

निर्बल , निर्मल , निर्माण , निर्जन , निरकार , निरपराध, निराहार, निरक्षर, निरादर, निरहंकार, निरामिष, निर्जर, निर्धन, निर्यात, निर्दोष, निरवलम्ब, नीरोग, नीरस, निरीह, निरीक्षण , निरंजन , निराषा , निर्गुण , निर्भय , निर्वास , निराकरण , निर्वाह , निदोष , निर्जीव , निर्मूल आदि।

21. पूरा – ( पुराना , पहला ) –

पुरातत्व , पुरातन , पुरावरित्त आदि।

22. सत – (अच्छा ) –

सदाचार , सत्पुरुष , सत्कर्म , सत्संग , सद्भावना आदि।

23. दुर – ( कठिन , बुरा , विपरीत ,दुष्ट , हीन )-

दुराशा, दुराग्रह, दुराचार, दुरवस्था, दुरुपयोग, दुरभिसंधि, दुर्गुण, दुर्दशा , दुर्घटना, दुर्भावना, दुरुह ,दुरुक्ति , दुर्जन , दुर्गम , दुर्बल , दुर्लभ , दुखद , दुरावस्था , दुर्दमनीय , दुर्भाग्य आदि।

24. दुस – ( बुरा , विपरीत , कठिन , दुष्ट , हीन )-

दुश्चिन्त, दुश्शासन, दुष्कर, दुष्कर्म, दुस्साहस, दुस्साध्य,दुष्कृत्य , दुष्प्राप्य , दु:सह आदि।

25. नि – ( बिना , विशेष , निषेध , अभाव , भीतर , नीचे , अतिरिक्त )-

निडर, निगम, निवास, निदान, निहत्थ, निबन्ध, निदेशक, निकर, निवारण, न्यून, न्याय, न्यास, निषेध, निषिद्ध ,नियुक्त , निपात , नियोग , निपात , निरूपा , निदर्शन , निवास , निरूपण , निम्न , निरोध , निकामी , निजोर आदि।

26. निस – ( बिना ,आहार , बाहर , निषेध , रहित )-

निश्चय, निश्छल, निष्काम, निष्कर्म , निष्पाप, निष्फल, निस्तेज, निस्सन्देह , निस्तार , निस्सार , निश्चल , निश्चित ,निष्फल , नि:शेष आदि।

27. परा – ( विपरीत , पीछे , अधिक , अनादर , नाश )-

पराजय, पराभव, पराक्रम, परामर्श, परावर्तन, पराविद्या, पराकाष्ठा , पराभूत , पराधीन आदि।

28. अन – ( नहीं , बुरा , अभाव , निषेध )-

अनन्त, अनादि, अनेक, अनाहूत, अनुपयोगी, अनागत, अनिष्ट, अनीह , अनुपयुक्त, अनुपम, अनुचित, अनन्य , अनजान , अनमोल , अपढ़ , अनजान , अन्थाह आदि।

29. अध् – (आधे ) –

अधमरा , अधजला , अधपका , अधखिला , अध्सेरा , अधजल , अधस्थल , अधोगति आदि।

30. उन – ( एक कम ) –

उन्नीस , उनतीस , उन्चास , उनसठ , उनहत्तर आदि।

31. औ – ( हीनता , निषेध ) –

औगुन , औघट , औसर , औढर आदि।

32. दु – ( बुरा , हीन ) –

दुकाल , दुबला आदि।

33. बिन – ( निषेध ) –

बिनजाना , बिनब्याहा , बिनबोया , बिनदेखा , बिनखाया , बिनचखा , बिनकाम आदि।

34. भर – ( पूरा , ठीक ) –

भरपेट , भरसक , भरपूर , भरदिन आदि।

35. चिर – ( बहुत , आनन्द ) –

चिरायु , चिरंतन , चिरंजीवी आदि।

36. तत – ( समान ) –

तत्काल , तत्सम , तत्पर आदि।

37. स्व – ( अपना ) –

स्वरोजगार , स्वतंत्र , स्वभाव आदि।

38. अपि – (आवरण )-

अपिधान आदि।

2. हिंदी के उपसर्ग :-

1. अन – (अभाव , निषेध , नहीं ) –

अनजान , अनकहा , अनदेखा , अनमोल , अनबन , अनपढ़ , अनहोनी , अछूत , अचेत , अनचाहा , अनसुना , अलग , अनदेखी आदि।

2. अध् – ( आधा ) –

अधपका , अधमरा , अधक्च्चा , अधकचरा , अधजला , अधखिला , अधगला , अधनंगा आदि।

3. उन – ( एक कम ) –

उनतीस , उनचास , उनसठ , उनहत्तर , उनतालीस , उन्नीस , उन्नासी आदि।

4. दु – (बुरा , हीन , दो , विशेष , कम ) –

दुबला , दुर्जन , दुर्बल , दुलारा , दुधारू , दुसाध्य , दुरंगा , दुलत्ती , दुनाली , दुराहा , दुपहरी , दुगुना , दुकाल आदि।

5. नि – ( रहित , अभाव , विशेष , कमी ) –

निडर , निक्कमा , निगोड़ा , निहत्था , निहाल आदि।

6. अ -( अभाव , निषेध ) –

अछुता , अथाह , अटल , अचेत आदि।

7. कु – ( बुरा , हिन् ) –

कुचाल , कुचैला , कुचक्र , कपूत , कुढंग , कुसंगति , कुकर्म , कुरूप , कुपुत्र , कुमार्ग , कुरीति , कुख्यात , कुमति आदि।

8. औ – (हीन , अब , निषेध ) –

औगुन , औघर , औसर ,औसान , औघट , औतार , औगढ़ , औढर आदि।

9. भर – ( पूरा , ठीक ) –

भरपेट , भरपूर , भरसक , भरमार , भरकम , भरपाई , भरदिन आदि।

10. सु – ( सुंदर , अच्छा ) –

सुडौल , सुजान , सुघड़ , सुफल , सुनामी , सुकाल , सपूत आदि।

11. पर – ( दूसरी पीढ़ी , दूसरा , बाद का ) –

परलोक , परोपकार , परसर्ग , परहित , परदादा , परपोता , परनाना , परदेशी , परजीवी , परकोटा , परलोक , परकाज आदि।

12. बिन – ( बिना , निषेध ) –

बिनब्याहा , बिनबादल , बिनपाए , बिनजाने , बिनखाये , बिनचाहा , बिनखाया , बिनबोया , बिनामांगा , बिनजाया , बिनदेखा , बिनमंगे आदि।

13. चौ – (चार ) –

चौपाई , चौपाया , चौराहा , चौकन्ना , चौमासा , चौरंगा , चौमुखा , चौपाल आदि।

14. उ – ( अभाव , हीनता ) –

उचक्का , उजड़ना , उछलना , उखाड़ना , उतावला , उदर , उजड़ा , उधर आदि।

15. पच – (पांच ) –

पचरंगा , पचमेल , पचकूटा , पचमढ़ी आदि।

16. ति – ( तीन ) –

तिरंगा , तिराहा , तिपाई , तिकोन , तिमाही आदि।

17 . का – ( बुरा ) –

कायर , कापुरुष , काजल आदि।

18. स – ( सहित ) –

सपूत , सफल , सबल , सगुण , सजीव ,सावधान , सकर्मक आदि।

19. चिर – (सदैव ) –

चिरकाल , चिरायु , चिरयौवन , चिरपरिचित , चिरस्थायी , चिरस्मरणीय , चिरप्रतीक्षित आदि।

20. न – (नहीं ) –

नकुल , नास्तिक , नग , नपुंसक , नगण्य , नेति आदि।

21. बहु – (ज्यादा ) –

बहुमूल्य , बहुवचन , बहुमत , बहुभुज , बहुविवाह , बहुसंख्यक , बहुपयोगी आदि।

22. आप – (स्वंय ) –

आपकाज , आपबीती , आपकही , आपसुनी आदि।

23. नाना – (विविध ) –

नानाप्रकार , नानारूप , नानाजाति , नानाविकार आदि।

24. क – (बुरा , हीन ) –

कपूत , कलंक , कठोर , कचोट आदि।

25. सम – ( समान ) –

समतल , समदर्शी , समकोण , समकक्ष आदि।

26. अव – (हीन , निषेध ) –

औगुन , औघर , औसर , औसान आदि।

3. अरबी -फारसी के उपसर्ग :-

1.दर – (में , मध्य में ) –

दरकिनार , दरमियान , दरअसल , दरकार , दरगुजर , दरहकीकत आदि।

2. कम – ( थोडा , हीन , अल्प ) –

कमजोर , कमबख्त , कमउम्र , कमअक्ल , कमसमझ , कमसिन आदि।

3. ला – (नहीं , रहित ) –

लाइलाज , लाजवाब, लापरवाह , लापता ,लावारिस , लाचार , लामानी , लाजवाल आदि।

4. ब – (के साथ , और , अनुसार ) –

बखूबी , बदौलत , बदस्तूर , बगैर , बनाम , बमुश्किल आदि।

5. बे – (बिना ) –

बेनाम , बेपरवाह , बेईमान , बेरहम , बेहोश , बैचैन , बेइज्जत , बेचारा , बेवकूफ , बेबुनियाद ,बेवक्त , बेतरह , बेअक्ल , बेकसूर , बेनामी , बेशक आदि।

6. बा – ( साथ से , सहित ) –

बाकायदा , बादत , बावजूद , बाहरो , बाइज्जत , बाअदब , बामौका , बाकलम , बाइंसाफ , बामुलाहिजा आदि।

7. बद – (बुरा , हीनता ) –

बदनाम , बदमाश , बदतमीज , बदबू , बदसूरत , बदकिस्मत , बदहजमी , बददिमाग , बदमजा , बदहवास , बददुआ , बदनीयत , बदकार आदि।

8. ना – (अभाव ) –

नालायक , नाकारा , नाराज , नासमझ , नाबालिक , नाचीज , नापसंद , नामुमकिन , नामुराद , नाकामयाब , नाकाम , नापाक आदि।

9. गैर – (भिन्न , निषेध ) –

गैरहाजिर , गैरकानूनी , गैरसरकारी , गैरजिम्मेदार , गैरमुल्क , गैरवाजिब , गैरमुमकिन , गैरमुनासिब आदि।

10. हम – ( आपस में , समान , साथ वाला ) –

हमराज , हमदर्द , हमजोली , हमनाम , हमउम्र , हमदम , हमदर्दी , हमराह , हमसफर आदि।

11. हर – ( सब , प्रत्येक ) –

हरलाल , हरसाल , हरवक्त ,हररोज , हरघडी , हरएक , हरदिन , हरबार आदि।

12. खुश – (अच्छा ) –

खुसबू , खुशनसीब , खुशमिजाज , खुशदिल , खुशहाल , खुशखबरी , खुशकिस्मत आदि।

13. सर – ( मुख्य ) –

सरताज , सरदार , सरपंच , सरकार , सरहद , सरगना आदि।

14. अल – ( अलमस्त , निश्चित , अंतिम ) –

अलबत्ता , अलबेला , अलविदा आदि।

4. अंग्रेजी के उपसर्ग :-

1. हाफ – ( आधा ) –

हाफ पेंट , हाफ बाड़ी , हाफटिकट , हाफरेट , हाफकमीज आदि।

2. सब – ( अधीन , नीचे ) –

सब पोस्टर , सब इंस्पेक्टर , सबजज , सबकमेटी , सबरजिस्टर आदि।

3. चीफ – (प्रमुख ) –

चीफ मिनिस्टर , चीफ इंजीनियर , चीफ सेक्रेटरी आदि।

4. जनरल – (प्रधान , सामान्य ) –

जनरल मैनेजर , जनरल सेक्रेटरी , जनरल इंश्योरेंस आदि।

5. हैड – ( मुख्य ) –

हैड मुंशी , हैड पंडित , हेडमास्टर , हेड क्लर्क , हेड ऑफिस , हेड कांस्टेबल आदि।

6. डिप्टी – ( सहायक ) –

डिप्टी कलेक्टर , डिप्टी रजिस्टर , डिप्टी मिनिस्टर आदि।

7. वाइस – ( सहायक , उप ) –

वाइसराय , वाइस चांसलर , वाइस प्रेजिडेंट , वाइस प्रिंसिपल आदि।

8. एक्स – ( मुक्त ) –

एक्सप्रेस , एक्स कमिश्नर , एक्स स्टूडेंट , एक्स प्रिंसिपल आदि।

5. उर्दू के उपसर्ग :-

1. अल – (निश्चित ) –

अलगरज , अलबत्ता आदि।

2. कम – ( थोडा , हीन ) –

कमजोर , कमउम्र , कमबख्त , कमसिन , कमख्याल , कमदिमाग , कमजात आदि।

3. खुश – (अच्छा ) –

खुशनसीब , खुशहाल , खुशकिस्मत , खुशदिल , खुशनुमा , खुशगवार , खुशमिजाज , खुसबू आदि।

4. गैर – (निषेध , के बिना ) –

गैरहाजिर , गैरकानूनी , गैरसरकारी , गैरजरूरी , गैरकौम , गैरहाजिब , गैरमुनासिब आदि।

5. दर – ( में ) –

दरकार , दरबार , दरमियान , दरअसल , दरहकीकत आदि।

6. ना – ( अभाव , निषेध ) –

नालायक , नासमझ , नाबालिक , नाराज , नामुमकिन , नादान , नापसंद , नामुराद , नाकामयाब , नाचीज , नापाक , नाकाम आदि।

7. बद – ( बुरा ) –

बदतर , बदनाम , बदकिस्मत , बदसूरत , बदमाश , बददिमाग , बदचलन , बदहजमी , बदमजा , बददुआ , बदनीयत , बदकार आदि।

8. बर – (बाहर , ऊपर ) –

बरखास्त , बरदास्त , बरबाद , बरवक्त , बरकरार , बरअक्स , बरजमा आदि।

9. बे – ( बिना ) –

बेवक्त , बेझिझक , बेवकूफ , बेइज्जत , बेकाम , बेअसर , बेरहम , बेईमान , बेचारा , बेअक्ल , बेबुनियाद , बेतरह , बेमानी , बेशक आदि।

10. ला – ( बिना , रहित ) –

लाजवाब , लापता , लाचार , लावारिस , लापरवाह , लाइलाज , लामानी , लाइल्म आदि।

11. हर – ( प्रत्येक , प्रति ) –

हरदम , हरवक्त , हरपल , हरदिन , हरसाल , हरएक , हरबार आदि।

12. हम – ( समान , बराबर ) –

हमसफर , हमदर्द , हमशक्ल , हमउम्र , हमदर्दी , हमपेशा , हमराज , हमदम आदि।

13. बिल – ( के साथ , बिना ) –

बिलआखिर , बिलकुल , बिलवजह , बिलावजह , बिलाशक , बिलालिहज , बिलानागा आदि।

14. फिल /फी – ( में प्रति ) –

फ़िलहाल , फिआदमी , फीसदी आदि।

15. ब – ( और , अनुसार ) –

बनाम , बदौलत , बदस्तूर , बगैर , बमुश्किल आदि।

16. बा – ( सहित , अनुसार ) –

बाकायदा , बाइज्जत , बाअदब , बामौका , बाकलम , बामुलाहिजा आदि।

17. सर – ( मुख्य ) –

सरताज , सरदार , सरपंच , सरकार , सरहद , सरगना आदि।

6. उपसर्ग की भांति प्रयुक्त होने वाले संस्कृत के अव्यय :-

1. का – ( निषेध ) – कापुरुष आदि।

2. कु – ( हीन ) – कुपुत्र आदि।

3. चिर – ( बहुत देर ) –

चिरकाल , चिरायु , चिरंतन , चिरंजीवी , चिरकुमार आदि।

4. अ – ( निषेध , अभाव ) –

अधर्म , अनीति , अनन्त , अज्ञान , अभाव , अचेत , अशोक , अकाल आदि।

5. अन – ( निषेध ) –

अनीति , अनन्त , अनागत , अनर्थ , अनादि आदि।

6. अंतर – ( भीतर ) –

अन्तर्नाद , अन्तर्ध्यान , अंतरात्मा , अंतर्राष्ट्रीय , अंतर्जातीय आदि।

7. स – ( सहित ) –

सजल , सकल , सहर्ष आदि।

8. अध्: – ( नीचे ) –

अध्:पतन , अधोगति , अधोमुख , अधोलिखित आदि।

9. पुरस – ( आगे ) –

पुरस्कार , पुरस्कृत आदि।

10. पुनः – ( फिर ) –

पुनर्गमन , पुनर्जन्म , पुनर्मिलन , पुनर्लेखन , पुनर्जीवन आदि।

11. पुरा – ( पुराना ) –

पुरातत्व , पुरातन , पुरावृत आदि।

12. तिरस – ( बुरा , हीन ) –

तिरस्कार , तिरोभाव आदि।

13. सत – ( श्रेष्ठ , सच्चा ) –

सत्कार , सज्जन , सत्कार्य , सदाचार , सत्कर्म आदि।

14. अंत: – (भीतरी ) –

अंत:करण , अंत:पुर , अंतर्मन , अंतर्देशीय आदि।

15. बहिर – ( बाहर ) –

बहिर्गमन , बहिष्कार आदि।

16. सम – ( समान ) –

समकालीन , समदर्शी , समकोण ,समकालिक आदि।

17. सह – ( साथ ) –

सहकार , सहपाठी , सहयोग , सहचर आदि।

दो उपसर्गों से बने उपसर्ग :-

1. अ+नि+यंत्रित = अनियंत्रित
2. प्रति+उप+कार = प्रतुप्कार
3. परी+आ+वरण = पर्यावरण
4. अति+आ+चार = अत्याचार
5. सु+प्र+स्थान = सुप्रस्थान
6. अन+आ+गत = अनागत
7. वि+आ+करण = व्याकरण
8. अ+परा+जय = अपराजय
9. सत+आ+चार = सदाचार
10. निर+अभि+मान = निरभिमान
11. सु+आ+गत = स्वागत
12. अन+आ+चार = अनाचार आदि।

Question 1 : किस शब्द में “कु” का प्रयोग उपसर्ग के रूप में नहीं है ?
1. कुफल
2. कुरूप
3. कुमार्ग
4. कुसुम

Question 2 : “स्वेच्छा”, “स्वागत” शब्दों में उपसर्ग है ?
1. सु सु
2. स्व स्व
3. स्व सु
4. सव् सू

Question 3 : “चिरायु” शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है ?
1. चि
2. चीर
3. चिर
4. ची

Question 4 : “स्पृष्य” शब्द में पूर्व कौनसा उपसर्ग जोडें कि विपरीतार्थक शब्द बन जाए ?
1. दुर्
2. नि
3.
4. अप

Question 5 : “पराधीन” एवं “परोक्ष” शब्दों में उपसर्ग होंगे ?
1. परा पर
2. परा परः
3. पर परः
4. परा परि.

Question 6 : किस शब्द में उपसर्ग का प्रयोग हुआ है ?
1. अच्छाई
2. कठिनता
3. उत्कर्ष
4. आलसी

Question 7 : “प्रच्छन” शब्द में उपसर्ग व शब्द होंगे ?
1. प्रत् + छन्न
2. प्रः + छन्न
3. प्र + छन्न
4. प्रत् + षन्न

Question 8 : “प्रतिकूल” व “प्रहलाद” शब्दों में उपसर्ग होंगे ?
1. प्र प्र
2. प्रत् प्रह्
3. प्रति प्र
4. प्रती प्र

Question 9 : “पर्यवेक्षण” में प्रयुक्त उपसर्ग एवं मूल शब्द है ?
1. पर्य + अव + ईक्षण
2. परि+ अव + ईक्षण
3. परी + अब + ईक्षण
4. पर्यव + ईक्षण

Question 10 : निम्नलिखित में से किस शब्द में उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है ?
1. निपात
2. निन्दा
3. निडर
4. निबंध

Question 11 : “अन्वय” एवं “अनुपयोग” शब्दों में उपसर्ग होंगे ?
1. अन अन्
2. अनु अन्
3. अन् अनु
4. अन अनु

Question 12 : “प्रत्यर्पण” शब्द में उपसर्ग निहित है ?
1. प्र
2. प्रत्
3. प्रती
4. प्रति

Question 13 : “अनुवाद” में कौनसा उपसर्ग है ?
1.
2. अन
3. अन्
4. अनु

Question 14 : “नाइन्साफी” में कौनसा उपसर्ग है ?
1. ना
2. नाई
3. नाइन्
4. नाईन्

Question 15 : “निर्दोश” में कौनसा उपसर्ग है ?
1. नि
2. नी
3. नीर्
4. निर्

Question 16 : “खुशबू” में कौनसा उपसर्ग है?
1. खुश
2. बू
3. शबू
4. खु

Question 17 : “सज्जन” में कौनसा उपसर्ग है?
1. सज्
2. सत्
3. जन्
4.

Question 18 : “उन्नति” में उपसर्ग है?
1.
2.
3. उत्
4. उन

Question 19 : “प्रतिहार” में उपसर्ग है?
1. प्रती
2. अति
3. प्रति
4. प्र

Question 20 : “स्वाधीन” में उपसर्ग है ?
1. स्व
2. सु
3. सम्
4. इनमें से कोई नहीं

Question 21 : “संस्कार” में किस उपसर्ग का प्रयोग हुआ है ?
1. सम्
2. सव
3. सु
4. सः

Question 22 : किस शब्द में उपसर्ग का प्रयोग नही हुआ है ?
1. आहार
2. कहार
3. विहार
4. प्रहार

Question 23 : किस शब्द में “सु” उपसर्ग का प्रयोग के रूप में नहीं हुआ है ?
1. सुयोग्य
2. स्वार्थ
3. सुपुत्र
4. सुहास

Question 24 : किस शब्द में “सु” उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है ?
1. सुहास
2. सुयोग्य
3. सुफल
4. सुरेन्द्र

Question 25 : वह शब्द जो उपसर्ग प्रयोग की दृष्टि से शुद्ध है ?
1. प्राक्कथन
2. प्राकथन
3. प्रक्थन
4. प्राक्थन

Question 26 : “अनभिज्ञ” में कौनसा उपसर्ग है ?
1. अन
2. अन्
3.
4. अनः

Question 27 : “स्वजन” में कौनसा उपसर्ग है?
1. सु
2. सू
3. सव
4. स्व

Question 28 : “पर्यावरण” में उपसर्ग तथा मूल शब्द होगें ?
1. पर्य-आवरण
2. पर्या-आवरण
3. परि-आवरण
4. परी-आवरण

Question 29 : “अत्यंत” शब्द में किस उपसर्ग का प्रयोग हुआ है ?
1. अत्
2. अति
3.
4. अत्य

Question 30 : “बिन ब्याहा” शब्द में उपसर्ग है ?
1. बा
2. बे
3. बिन्
4. बिन

Question 31 : “बेफकूफ” शब्द में उपसर्ग है ?
1. बे
2. वद्
3. बद
4.

Question 35 : “सु” उपसर्ग किस शब्द में हैं ?
1. सुख
2. सुप्त
3. स्वागत
4. सुंदर

Question 34 : “नि” उपसर्ग का प्रयोग किस शब्द में नहीं हुआ हैं ?
1. निकृष्ट
2. निष्कर्म
3. नियम
4. निबंधV

Question 36 : “अनुचित” शब्द में उपसर्ग है ?
1. अन्
2. अनु
3. अनू
4. अन

Question 37 : किस शब्द में उपसर्ग का उपयोग नहीं किया गया है ?
1. अच्छाई
2. अनुच्छेद
3. परिच्छेद

Question 38 : सत्कार” में उपसर्ग है ?
1. सत
2. सत्
3. सम्

Question 39 : “अलबत्ता” शब्द में उपसर्ग है ?
1.
2. अल्
3. अल
4.

Question 40 : निम्न में से किस शब्द में “तत्” उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है ?
1. तल्लीन
2. तद्भव
3. तदंतर
4. तिरस्कार

Question 41 : “सम्मुख” शब्द में कौनसा उपसर्ग है ?
1. सम्
2. सु
3. सम
4.

Question 42 : “अनुरूप” शब्द में उपसर्ग है ?
1. अनु
2. अन
3. सम
4.

Question 43 : “ग्रह” शब्द में कौनसा उपसर्ग जोडें कि अर्थ “संग्रह” हो जाए ?
1. परि
2. वि
3.
4. नि

Question 44 : “उन्यासी” शब्द में उपसर्ग है ?
1.
2. उन
3. उन्
4. उत्

Question 45 : “पराजय” शब्द में उपसर्ग है?
1. परा
2. पर
3. पर
4. परि

Question 46 : “अंतर्द्वद्व” में किस उपसर्ग का प्रयोग हुआ है
1. अंत
2.
3. अंतर्
4. अन्तर

Question 47 : किस शब्द में “उप” उपसर्ग का प्रयोग नहीं हुआ है?
1. उपन्यास
2. उद्गम
3. उपमंत्री
4. उपकार

Question 48 : किस शब्द में “प्र” उपसर्ग का प्रयोग हुआ है
1. प्रबंध
2. प्रगति
3. प्रस्थान
4. उपर्यक्त सभी

Question 49 : “आकाश” में उपसर्ग है
1.
2.
3. अक्
4. इनमें से कोई नहीं

Question 50 : “कु” उपसर्ग से बना देषज शब्द कौनसा है ?
1. कुकर्म
2. कुठौर
3. कुरूप
4. कुप्रबंध

 

उपसर्ग examples,

उपसर्ग ट्रिक,

उपसर्ग की परिभाषा,

उपसर्ग कितने होते है,

अन उपसर्ग से शब्द,

उपसर्ग से शब्द,

उपसर्ग और प्रत्यय के शब्द,

कु उपसर्ग से शब्द,

Hindi Prefix (उपसर्ग)

Upsarg(Prefixes)-उपसर्ग

उपसर्ग examples in hindi,

उपसर्ग examples in sanskrit,

उपसर्ग examples in marathi,

हिन्दी के उपसर्ग,

अन् उपसर्ग से शब्द,

उपसर्ग वाले शब्द,

उपसर्ग से शब्द,

अन उपसर्ग से शब्द,

The Use and Non-Use of Articles A, An,The

Use and Non-Use of articles a, an, the

Articles-A, An or The  The Use and Non-Use of Articles A, An,The

An article is a word that describes or tell more about the Noun. It is used before the noun to show whether it refers to something specific or general. So, in a way, articles can also be described as a type of adjectives as they also tell us something about the nouns, like adjectives. Articles are also known as Determiners.

Article are of two types:
1 Indefinite Articles – A/An – Indicate to general things or persons. The things or persons which are not sure / not particular / not certain or not specific.

2 Definite Article – The – Indicate to particular things or persons. The things or persons which are certain / specific or particular.

आर्टिकल वह शब्द है जो नाउन के बारे में बताता है या व्याख्या करता है । यह नाउन से पहले यह बताने के लिये प्रयोग होता है की नाउन खास / विशेष है या नही । इसलिये, आर्टिकल भी एक प्रकार का एड्जिक्टिव है जो नाउन के बारे में बताता है । आर्टिकल्स को ड़िटर्मिनर्स् भी कहा जाता है

आर्टिकल्स दो प्रकार के होते है:
1 इंड़ेफ़िनेट आर्टिकल्स – A or An – निश्चित वस्तु, व्यक्ति या स्थान की तरफ संकेत नही करते  । 2 ड़ेफ़िनेट आर्टिकल – The –  किसी निश्चित वस्तु, व्यक्ति या स्थान की तरफ संकेत करता है ।

 

Article ‘A/An’

A and an are the indefinite articles. In a sentence when Noun is Singular Countable Noun and it is not a definite, then Article A/An is used.

A और An अनिश्चित आर्टिकल्स है । वाक्यो में अनिश्चित सिंगुलर काउंटेबल नाउन से पूर्व आर्टिकल A/An का प्रयोग किया जाता है ।

मेरे पास एक पेन है । I have a pen.
वह एक आर्टिस्ट है । She is an artist.
मैने कल एक छाता खरीदा । I bought an umbrella yesterday.
उसने मुझे एक प्याज दिया । She gave me an onion.
क्या आपके पास पुस्तक है? Do you have a book?

Difference between ‘A’ and ‘An’ 

‘A’ is used before a word (singular) beginning with a consonant or a vowel with consonant sound. Consonant letters in the English alphabet are B, C, D, F, G, H, J, K, L, M,N, P, Q, R, S, T, V,W, X,Y, Z.
For example: A boy, a girl, a pen, a book, a dog, a table, etc.

‘An’ is used before a word beginning with a vowel sound. Vowel letters in the English alphabet are A, E, I, O, U.
For example: An umbrella, an elephant, an apple, an orphan, an artist, etc.

Please Note that ‘An’ is used on the basis of vowel sound and not only on the basis of the starting vowel letter of the word.
For example: “An hour” , “An honest man””, “A young man””, “A house”, “An heir”, “A useful book”, “An M.L.A”, “An F.I.R.”, “An X-ray”, “An LL.B”, “A husband”, “An honour”, “An year”, “A one-rupee note”, “An IAS” etc.

In the above examples, ‘An’ is used on the basis of sound’. The words ‘hour’, ‘heir, and ‘honest’ both begin with a vowel sound, as the consonant ‘h’ is silent. Similarly, the word ‘house’ and ‘useful’ begins with the consonant sound of ‘h’ & ‘yoo’ hence ‘A’ is used before them.

‘A’ और ‘An’ के बीच क्या अन्तर है  

‘A’ का प्रयोग उस सिंगुलर नाउन शब्द से पहले किया जाता है जिस शब्द का प्रथम अक्षर व्यंजन (कॉन्सनन्ट) है या प्रथम अक्षर की ध्वनि स्वर नही है  । इंग्लिश भाषा में व्यंजन अक्षर है – B, C, D, F, G, H, J, K, L, M, N, P, Q, R, S, T, V, W, X, Y, Z ।
उदाहरण :  A boy, a girl, a pen, a book, a dog, a table, etc ।

‘An’ का प्रयोग उस सिंगुलर नाउन शब्द से पहले किया जाता है जिस शब्द की प्रथम ध्वनी  स्वर हो । इंग्लिश भाषा में स्वर अक्षर है – A, E, I, O, U ।
उदाहरण :  An umbrella, an elephant, an apple, an orphan, an artist, etc.

ध्यान दीजिये  ‘An’ का प्रयोग प्रथम अक्षर की स्वर ध्वनि के आधार पर किया जाता है, ना की शब्द के प्रथम स्वर अक्षर होने पर ।
उदाहरण “An hour” , “An honest man”, “A young man””, “A house”, “An heir”, “A useful book”, “An M.L.A”, “An F.I.R.”, “An X-ray”, “An LL.B”, “A husband”, “An honour”, “An year”, “A one-rupee note”, “An IAS” आदि ।

Specific use of ‘A/An’ 

Specific use of A/An A/An का प्रयोग Examples
A/An’ is used before Singular Countable Noun. A Noun which can be counted. सिंगुलर काउंटेबल नाउन से पहले ‘A/An’ का प्रयोग किया जाता है । काउंटेबल का अर्थ है जिसकी गिनती हो सके । An Artist, a doctor, a boy, a dog, an umbrella.
A/An’ is used before singular noun. It is not used before plural noun. A/An’ सिंगुलर नाउन से पहले प्रयोग किया जाता है, प्लुरल (बहुवचन) नाउन से पहले नही । A book’ is correct, ‘a books’ is incorrect as word ‘books’ is plural.
A/An’ is not used before proper noun, but when it is unknown for the speaker, ‘A/An’ is used. प्रोपर नाउन से पहले ‘A/An’ का प्रयोग नही होता है लेकिन जब वक्ता के लिये वह अंजान है तो ‘A/An’ का प्रयोग होता है । This book is written by a Rajeev Ailawadi (Here Ailawadi is an unknown person for the speaker).
A/an’ is used after words what & such in exclamatory sentences. एक्सक्लेमेटरी वाक्यों में What & Such के बाद सिंगुलर काउंटेबल नाउन से पहले A/An का प्रयोग किया जाता है । What a scene, What a lovely boy, Such a big hall.
A/An’ is used before professions. प्रोफेशन से पहले ‘A/An’ का प्रयोग किया जाता है । She is a teacher, He is an engineer, He is a manager, Ram is an MP.
A/An’ is used when someone is introduced by features or personality of important/famous persons. किसी विशिष्ट व्यक्ति की उपमा से किसी अन्य की पहचान दी जाये तो A/An का प्रयोग होता है । He is a Dara Singh of our colony, She is a Hitler, She is a Lata Mangeshkar of our college.
A/An’ is used before a verb which is used as a noun in a sentence. वाक्य में जब वर्ब का प्रयोग नाउन की तरह किया जाये, तो उससे पहला A/An का प्रयोग होता है । We go for a walk daily, We had a long discussion, She wants to have a bath.
A/An is used after words -many/rather/quite/such, if it come before singular noun. Many/rather/quite/such के बाद यदि सिंगुलर नाउन आये, तो उससे पहले A/An का प्रयोग होता है । Many a times, quite an easy question, such an intelligent boy, rather a lovely place.
If Adjective comes before singular noun, then A/An is used before Adjective. यदि सिंगुलर नाउन से पहले कोई एड्जिक्टिव आता है, तो A/An को एड्जिक्टिव से पहले लगाते है । She is a beautiful girl, He is not a good person, He is an intelligent boy, She is an honest minister.
Before a singular noun which refers to a class of things. किसी जाति / विशेष को व्यक्त करने के लिये, A/An का प्रयोग सिंगुलर नाउन से पहले किया जाता है । An orange is rich in vitamins. A dog is an animal. A parrot is a bird, I am a journalist, She is an Indian.
A/An is used for certain expressions of quantity and numbers. कुछ मात्रा और नंबर से पहले, A/An का प्रयोग होता है । A lot of things, a few samples, a couple of days, a hundred rupee note, a million dollar question.

 

Article – The

‘The’ is known as a definite article as it is used for a particular thing or person. ‘The’ article is same for all genders in singular and in plural.

‘The’ आर्टिकल निश्चित व्यक्ति, वस्तु या स्थान की और संकेत करता है । ‘The’ आर्टिकल सभी सिंगुलर और प्लुरल के लिये सामान है ।

Use of ‘The’ Article 

Before पहले Examples
Things of Nature or Unique प्राक्रतिक या बेजोड़ चीजें The Sun, the sky, the earth but ‘The’ is not used before Hell, Heaven, God, Parliament.
Directions (if preposition comes before it) दिशांए (जब इनसे पहले प्रेपॉज़िशन दिया हुआ हो) The sun rises in the east.
East or West, home is the best.
The names of Rivers, oceans, seas, hills, lakes, dams, trains, ships, deserts नदियों, समुंद्रों, महासागरों, पहाड़ों, झीलों, नहरों, डैम, जहाजों, मरुस्थलों, आदि के नाम से पहले । The Ganga, the Shatabdi Express, the Himalayas, the Bhakhra dam, the Sahara desert, the Arabian sea, the Indian ocean etc.
The names of newspapers, magazine, religious books. धार्मिक ग्रंथ, अखबार, पत्रिका, आदि के नाम से पहले । The Gita, the Indian Express, the India Today.
The names of historical buildings, public places, religious places. एतिहासिक भवनों, सार्वजनिक स्थलों, धार्मिक स्थानों के नाम से पहले । The Taj Mahal, The Golden Temple, The zoo.
The singular noun which represents the whole of its class उन सिंगुलर नाउन से पहले जो पूरी जाति का बोध कराते हैं । The dog is a faithful animal.
The Proper noun which is used as a Common noun. उन प्रोपर नाउन से पहले जो कॉमन नाउन के रूप में प्रयोग किए गए हों । He is the Rustam of Japan.
The name of organisation of workshop, factory, party, bank. वर्कशॉप, फैक्टरी, पार्टी, बैंक, आदि के संगथन के नाम से पहले The Congress, The state bank of India.
Historical events एतिहासिक घटनांओ से पहले The battle of Panipat.
Big posts बड़े़ बड़े़ पदों के लिये The President, The Prime Minister, The Director
Words -evening, morning, afternoon (if words – last, next or every, is not coming before it) Evening/morning/afternoon से पहले (यदि इनसे पहले last, next या every शब्द ना दिया हुआ हो) In the evening, in the morning, last evening, every morning.
Superlative Degree सुपरलेटिव डिग्री से पहले The greatest, the most, the fastest
Comparative Degree (if ‘than’ is not used before it) कम्पैरेटिव डिग्री से पहले (यदि उसके आगे ‘than’ नही हो) । She is the wiser of the two. She is wiser than Suman. The older he grew, the worse he became.
The Common noun which has already been mentioned or which is already known. उन कॉमन नाउन से पहले जिनका उल्लेख पहले ही हो गया हो या उन शब्दों से पहले जिनसे पूर्व परिचय हो । There was a fox. The fox was hungry. I know the man who came here last night.
Proper noun for making it plural. प्रोपर नाउन को बहुवचन बनाने के लिये । The Guptas, The Greens, the Sharmas
The Adjectives which are used as noun. उन एड्जिक्टिव से पहले जो नाउन के रूप में प्रयुक्त होते हैं । The rich, the brave, the poor.
The dates तिथी/तरीख से पहले Today is the 3rd of December.
After words ‘All & Both’ and before words ‘Whole & Same’) All और Both’ के बाद तथा ‘Whole और Same’ से पहले All the boys, Both the girls, The whole class, The same shirt.
The thing which is specific or particular जब कोई खास चीज हो That is the house. The girl standing in the first row.
Community, castes सम्प्रदायों और जातियों से पहले The English (angrej log), The Hindus (Hindu log), The French
Normally ‘The’ is not used before the name of any country or person. But such countries which are united, ‘The’ is used before their name. अधिकतर किसी नाम के आगे (चाहे किसी आदमी का हो या देश का ) ‘The’ का प्रयोग नही होता है । लेकिन ऐसे देश जो संगथन से बने है उनके आगे ‘The’ का प्रयोग होता है । The UK, The USA, The UAE.

 

No Article

Zero Article No आर्टिकल Examples
The’ is not used before School, college, church, prison when the purpose of going there is same for which it was meant for. School, college, bed, church, Prison से पहले ‘The’ का प्रयोग उस स्थिति में नही होता जब वहां जाने का उद्देश्य वही हो जिस हेतु उसका निर्माण किया गया है । I go to college daily (purpose-study), I go to bed (purpose-sleep), She goes to temple (purpose-prayer)
Article is not used before a noun which comes after the words – appoint, made, nominate, elect, declare वर्ड्स – Appoint, made, nominate, elect, declare के बाद आने वाले नाउन से पहले ‘आर्टिकल’ का प्रयोग नही होता । He is elected MP, He made him finance in charge, Viraat will be declared captain of Indian team.
Article’ is not used before words – lunch, dinner, breakfast. वर्ड्स – Lunch, dinner, breakfast से पहले सामान्यतः ‘आर्टिकल’ नही लगाया जाता । I invited him to dinner, I had my breakfast, I shall have lunch at 2 pm.
Article’ is not used before the name of Disease, Language & Colours. बीमारी, भाषा, रंग के नाम से पहले ‘आर्टिकल’ का प्रयोग नही होता । She died of dengue fever, I can speak English, She likes pink colour. If colour is used as an adjective, then Article is used e.g. She always keeps a red pen, She has a green saree.
Article is not used before plural noun when it refers to a class. प्लुरल नाउन से पहले आर्टिकल का प्रयोग तब नही होता जब वह किसी वर्ग को व्यक्त करता है । Doctors are normally humble. Teachers are strict towards students. Working women are normally over-stressed.
The’ is not used before shops, banks, hotels which are affiliated with the name of persons who started them. कई shop, bank, hotel, church उन व्यक्तियों के नाम से जुड़े होते है जिन्होनें उसे शुरू किया है – इनसे पहले ‘The’ का प्रयोग नही होता । Raymonds (shop), McDonalds, Subway, Lloyds bank, St Paul’s Cathedral.
The’ is not used with the name of company कंपनियों के नाम के साथ भी ‘The’ का प्रयोग नही होता । Indian Oil Corporation Ltd, Maruti, Colgate, Sony, Samsung.
The’ is not used when possessive pronouns -My, His, Her comes before superlative degree सुपरलेटिव डिग्री से पूर्व यदि My, His, Her जैसे पज़ेसिव प्रोनाउन का प्रयोग हो तो ‘The’ का प्रयोग नही होता । She is my best friend, She is her best classmate, I am her dearest friend.
Many Buildings and Institutions names are made of two words out of which one word is of a person or place, ‘The’ is not used before them. कई बिल्डिंग और इंस्टीट्यूशन के नाम दो शब्दों से मिलकर बने होते हैं जिनमें से एक शब्द किसी व्यक्ति या स्थान का होता है, उससे पहले ‘The’ का प्रयोग नही होता । Victoria station, Indira Gandhi Airport, Chhatrapati Shiva jee Stadium.

 

More examples 

अकबर एक महान राजा था । Akbar was a great king.
बांए रहो । Keep to the left.
भाड़ में जाओ । Go to hell.
भारत का बिलगेट कौन बनने जा रहा है? Who is going to be the Bill Gate of India?
बस की एक घंटे की सेवा है । There is an hourly bus service.
कश्मीर भारत का स्विटज़रलैंड है । Kashmir is the Switzerland of India.
क्या बात है? What is the matter?
क्या डाकिया मेरा पत्र ले आया? Has the postman brought my letter?
मैं स्नान करने जा रहा हूँ । I am going to take a bath.
मैं बिस्तर पर बैठा । I sat on the bed.
मैं बिस्तर पर लेटा । I lay on the bed.
मैं अर्थशास्त्र में बहुत अच्छा हूँ । I am very good in Economics.
मै् इंग्लिश सीख रहा हूँ । I am learning English.
मैने तुम्हें चर्च के नजदीक पाया । I found you near the church
मैने तुम्हें सेंट् पॉल चर्च के नजदीक पाया । I found you near St. Paul Church.
मतलब की बात करो । Come to the point.
सूर्य पश्चिम में अस्त होता है । The Sun sets in the west.
वह होशियार विध्यार्थी नही है । She is not a bright student.
यह सबसे अच्छी वेब साइटों में से एक है । This is one of the best web sites.

muhavare-idioms-मुहावरे Muhavare (Idioms) ( मुहावरे) मुहावरे Muhaware और उनका प्रयोग

muhavare-idioms-मुहावरे Muhavare (Idioms) ( मुहावरे) मुहावरे Muhaware और उनका प्रयोग

muhavare-idioms-मुहावरे Muhavare (Idioms) ( मुहावरे) मुहावरे Muhaware और उनका प्रयोग with example

मुहावरा :- विशेष अर्थ को प्रकट करने वाले वाक्यांश को मुहावरा कहते है। मुहावरा पूर्ण वाक्य नहीं होता, इसीलिए इसका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं किया जा सकता । मुहावरा का प्रयोग करना और ठीक -ठीक अर्थ समझना बड़ा ही  कठिन है ,यह अभ्यास से ही सीखा जा सकता है । इसीलिए इसका नाम मुहावरा पड़ गया ।

यहाँ पर कुछ प्रसिद्ध मुहावरे और उनके अर्थ वाक्य में प्रयोग सहित दिए जा रहे है।

१.अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना – (स्वयं अपनी प्रशंसा करना ) – अच्छे आदमियों को अपने मुहँ मियाँ मिट्ठू बनना शोभा नहीं देता ।
२.अक्ल का चरने जाना – (समझ का अभाव होना) – इतना भी समझ नहीं सके ,क्या अक्ल चरने गए है ?
३.अपने पैरों पर खड़ा होना – (स्वालंबी होना) – युवकों को अपने पैरों पर खड़े होने पर ही विवाह करना चाहिए ।
४.अक्ल का दुश्मन – (मूर्ख) – राम तुम मेरी बात क्यों नहीं मानते ,लगता है आजकल तुम अक्ल के दुश्मन हो गए हो ।
५.अपना उल्लू सीधा करना – (मतलब निकालना) – आजकल के नेता अपना अपना उल्लू सीधा करने के लिए ही लोगों को भड़काते है ।

६.आँखे खुलना – (सचेत होना) – ठोकर खाने के बाद ही बहुत से लोगों की आँखे खुलती है ।
७.आँख का तारा – (बहुत प्यारा) – आज्ञाकारी बच्चा माँ -बाप की आँखों का तारा होता है ।
८.आँखे दिखाना – (बहुत क्रोध करना) – राम से मैंने सच बातें कह दी , तो वह मुझे आँख दिखाने लगा ।
९.आसमान से बातें करना – (बहुत ऊँचा होना) – आजकल ऐसी ऐसी इमारते बनने लगी है ,जो आसमान से बातें करती है ।
१० .ईंट से ईंट बजाना – (पूरी तरह से नष्ट करना) – राम चाहता था कि वह अपने शत्रु के घर की ईंट से ईंट बजा दे।
११.ईंट का जबाब पत्थर से देना – (जबरदस्त बदला लेना) – भारत अपने दुश्मनों को ईंट का जबाब पत्थर से देगा ।
१२.ईद का चाँद होना – (बहुत दिनों बाद दिखाई देना) – राम ,तुम तो कभी दिखाई ही नहीं देते ,ऐसा लगता है कि तुम ईद के चाँद हो गए हो ।
१३.उड़ती चिड़िया पहचानना – (रहस्य की बात दूर से जान लेना) – वह इतना अनुभवी है कि उसे उड़ती चिड़िया पहचानने में देर नहीं लगती ।
१४.उन्नीस बीस का अंतर होना – (बहुत कम अंतर होना) – राम और श्याम की पहचान कर पाना बहुत कठिन है ,क्योंकि दोनों में उन्नीस बीस का ही अंतर है ।
१५.उलटी गंगा बहाना – (अनहोनी हो जाना) – राम किसी से प्रेम से बात कर ले ,तो उलटी गंगा बह जाए ।

१६.कलेजा टूक टूक होना (शोक में दुखी होना ) – पुत्र की मृत्यु का स्मरण होते ही कलेजा टूक टूक हो जाता है .
१७.कागजी घोड़े दौड़ाना ( बेहद लिखी पढ़ी करना ) कुछ काम धाम क्यों नहीं करते ,केवल कागजी घोड़े दौड़ाने से क्या लाभ ?
१८.कमर कसना (तैयार होना ) शत्रुओं से लड़ने के लिए भारतीयों को कमर कसकर तैयार हो जाना चाहिए .
१९.कलेजा मुँह का आना (भयभीत होना ) गुंडे को देख कर उसका कलेजा मुँह को आ गया .
२०. कलेजे पर सांप लोटना (ईर्ष्या करना ) राम के प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने पर मोहन की माँ के कलेजे पर सांप लोट गया .
२१. कमर टूट जाना -(बहुत बड़ी हानि होना) डाकुओं ने जब से उसके घर को लूटा है ,उसकी कमर ही टूट गयी है .
२२. किताब का कीड़ा होना (पढाई के अलावा कुछ न करना ) विद्यार्थी को केवल किताब का कीड़ा नहो होना चाहिए .
२३.ख़ाक छानना (दुःख उठाना ) मैंने आपके लिए सारे जगत की छान डाली .

२४.खून पसीना एक करना ( अधिक परिश्रम करना ) खून पसीना एक करके विद्यार्थी परीक्षा में सफल होते है .
२५.खून खौलना (क्रोधित होना ) झूठ बातें सुनते ही मेरा खून खौलने लगता है .
२६.खून का प्यासा (जानी दुश्मन होना )उसकी क्या बात कर रहे हो ,वह तो मेरे खून का प्यासा हो गया है .
२७.गले का हार होना (बहुत प्रिय होना )छोटू अपने घर में गले का हार बन गया है .
२८.गला छूटना (पिंड छोड़ना)बुरी तरह फँस गया था किन्तु अब गला छूट गया .
२९.गर्दन पर छुरी चलाना (नुकसान पहुचाना) मुझे पता चल गया कि विरोधियों से मिलकर किस तरह मेरे गले पर छुरी चला रहे थे .
३०.गड़े मुर्दे उखाड़ना (पुरानी बातों का याद दिलाना )आप समय देख कर चलें . गड़े मुर्दें उखाड़ना ठीक नहीं है .
३१.गागर में सागर भरना (थोड़े शब्दों में अधिक बातें कहना )बिहारी ने अपने दोहों में ऐसा भाव भरा है,लगता है कवि ने गागर में सागर भर दिया है .
३२.गुल खिलना (नयी बात का भेद खुलना ,विचित्र बातें होना) सुनते रहिये ,देखिये अभी क्या गुल खिलेगा .
३३.गिरगिट की तरह रंग बदलना (बातें बदलना) गिरगिट की तरह रंग बदलने से तुम्हारी कोई इज्जत नहीं करेगा .
३४.घर का न घाट का (कहीं का नहीं )तुम्हारी आदत ने तुम्हे न घर का न घाट का बना रखा है .
३५.घाव पर नमक छिड़कना (दुःख में दुःख देना )राम वैसे ही दुखी है ,तुम उसे परेशान करके घाव पर नमक छिड़क रहे हो .

३६. चल बसना (मर जाना ) उसकी माँ अचानक ही चल बसी .
३७.चार चाँद लगाना (चौगुनी शोभा देना ) निबन्धों में मुहावरों का प्रयोग करने से चार चाँद लग जाता है .
३८.चिकना घड़ा होना (बेशर्म होना ) तुम ऐसा चिकना घड़ा हो तुम्हारे ऊपर कहने सुनने का कोई असर नहीं पड़ता .
३९.चिराग तले अँधेरा (भलाई में बुराई) छात्र की मूर्खता पर शिक्षक ने कहा बेटा चिराग तले अँधेरा होता है .
४०.चैन की बंशी बजाना(मौज करना ) आजकल राम चैन की बंशी बजा रहा है .
४१.छक्के छुड़ाना ( परेशान करना ) झाँसी की रानी ने थोड़ी सी सेना के बल पर अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिया था .
४२.छप्पर फाडकर देना (बिना मेहनत का अधिक धन पाना) ईश्वर जिसे देता है ,छप्पर फाड़कर देता है .

४३.छाती पर पत्थर रखना (कठोर ह्रदय) उसने छाती पर पत्थर रखकर अपने पुत्र को विदेश भेजा था .
४४.छाती पर सवार होना (आ जाना) अभी वह बात कर रही थी कि बच्चे उसके छाती पर सवार हो गए .
४५.जहर उगलना (द्वेषपूर्ण बात करना )पडोसी देश चीन और पाकिस्तान हमारे देश के प्रति हमेशा जहर उगलते रहते है .
४६.जलती आग में घी डालना (क्रोध बढ़ाना)बहन ने भाई की शिकायत करके जलती आग में भी डाल दिया .
४७.जमीन आसमान एक करना (बहुत प्रयन्त करना)मै शहर में अच्छा मकान लेने के लिए जमीन आसमान एक कर दे रहा हूँ परन्तु सफलता नहीं मिल रही है .
४८.जान पर खेलना (प्राण की परवाह न करना) भगत सिंह देशभक्ति के लिए अपनी जान पर खेल गए .
४९.जूते चाटना(जी में जी करना) वह नेताओं की जूते चाटते चाटते थक गया .
५०.झक मारना (विवश होना)दूसरा कोई साधन नहीं है . झक मारकर तुम्हे साइकिल से जाना पड़ेगा .

५१ . टका सा जबाब देना ( साफ़ इनकार करना ) – मै नौकरी के लिए मैनेज़र से मिला लेकिन उन्होंने टका सा जबाब दे दिया .
५२.टस से मस न होना ( कुछ भी प्रभाव न पड़ना ) – दवा लाने के लिए मै घंटों से कह रहा हूँ , परन्तु आप आप टस से मस नहीं हो रहे हैं .
५३.टोपी उछालना (अपमान करना ) – अपने घर को देखो ,दूसरों की टोपी उछालने से क्या लाभ ?
५४. डकार जाना ( हड़प जाना ) – सियाराम अपने भाई की सारी संपत्ति डकार गया .
५५. तिल का ताड़ बनाना (छोटी बातों को बढ़ा देना ) – मै समझ रहा हूँ कि तुम तिल को ताड़ बनाकर झगड़ा कर रहे हो .
५६.तूती बोलना (प्रभावशाली होना ) – सत्ता में सोनिया गांधी की तूती बोल रही थी .
५७.थूक कर चाटना (बात देकर फिरना ) – मै राम की तरह थूक कर चाटना वाला नहीं हूँ.
५८.दम टूटना (मर जाना ) – शेर ने एक ही गोली में दम तोड़ दिया .
५९.दाल में काला होना (संदेह होना ) – हम लोगों की ओट में ये जिस तरह धीरे -धीरे बातें कर रहें है, उससे मुझे दाल में काला लग रहा है .
६०.बाजी मारना (जीत पाना ) – आज आपने खेल में बाजी मार लिया .
६१.बात बनाना (बहाना बनाना ) – तुम हर काम में बात बनाना जानते हो .
६२.भीगी बिल्ली होना (बिलकुल डर जाना) – वह अपने पापा के सामने भीगी बिल्ली हो जाता है .
६३.मिट्टी के मोल (बहुत सस्ता ) – यह मकान मिट्टी के मोल बिक गया .
६४.मुट्ठी गरम करना (घूस लेना ) – चलो मुट्ठी गरम कराओ, आज ही काम करवा देता हूँ.
६५.मुँह बंद कर देना (शांत कराना) – तुम धमकी देकर मेरा मुँह बंद कर देना चाहते हो .
६६. मीठी छुरी (छली मनुष्य )- वह तो मीठी छुरी है ,मैं उसके बातों में नहीं आता हूँ।
६७. मुँह काला होना – अपमानित होना – उसका मुँह काला हो गया है ,अब वह कैसे किसी के सामने आएगा।
६८. मुँह की खाना ( पराजित होना ) – पाकिस्तान ,भारत के आगे हमेशा मुँह की खाता रहता है।
६९. मख्खन लगाना ( चापलूसी करना ) – साहब को मख्खन लगाने के बाद भी मेरा काम नहीं बना।
७०. मगरमच्छ के आँसू ( दिखावटी सहानुभूति ) मेरे घर में चोरी हो जाने पर रहीम चाचा मगरमच्छ के आँसू बहाने लगे।
७१. न रहेगा बॉस न बजेगी बाँसुरी – (कारण का ही नाश कर देना) – अपने मोहल्ले को मच्छरों के प्रकोप से बचाने के लिए लोग गन्दी नालियों की सफाई में जुट गए। इस तरह न रहेगा बॉस न बजेगी बाँसुरी।
७२. राम मिलायी जोड़ी ,एक अँधा एक कोढ़ी – (दो मनुष्यों का एक सामान होना) – राम और श्याम की अच्छी जोड़ी मिली। दोनों चोर हैं। इस तरह ठीक ही कहा है राम मिलायी जोड़ी ,एक अँधा एक कोढ़ी।
७३. लकीर के फ़क़ीर – (पुरानी परम्परों का पालन करने वाला) – कबीरदास लकीर के फ़क़ीर नहीं थे तभी तो उन्होंने भक्ति मार्ग द्वारा उन्नति की राह निकाली।
७४. लाठी टूटे न साँप मरे – (किसी की हानि हुए बिना स्वार्थ सिद्ध हो जाना)- राम किसी को हानि पहुँचाए बिना काम करना चाहते है। जैसे – लाठी टूटे न साँप मरे।
७५. लालच बुरी बला – (लालच से बहुत हानि होती है) – सभी जानते है कि लालच बुरी बला है ,फिर भी लालच में पड़ जाते हैं।

Kriya Aur Kriya ke Bhed in Hindi Grammar (क्रिया के भेद)

क्रिया के उदाहरण, सकर्मक क्रिया उदाहरण, अकर्मक क्रिया का उदाहरण, नामधातु क्रिया के उदाहरण, प्रेरणार्थक क्रिया के उदाहरण, सकर्मक क्रिया की पहचान, क्रिया की संकल्पना, पूर्वकालिक क्रिया,

Kriya Aur Kriya ke Bhed in Hindi Grammar (क्रिया के भेद)

 

जिस शब्द से किसी काम का करना या होना प्रकट हो, उसे क्रिया कहते हैं। जैसे-खाना, पीना, सोना, जागना, पढ़ना, लिखना, इत्यादि ।
संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण की तरह ही क्रिया भी विकारी शब्द है । इसके रूप लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार बदलते रहते हैं ।

Dhatu in Hindi Grammar – धातु:

जिस मूल शब्द से क्रिया का निर्माण होता है, उसे धातु कहते हैं। धातु में ना’ जोड़कर क्रिया बनायी जाती है ।
जैसे-

खा + ना = खाना
पढ़ + ना = पढ़ना
जा + ना = जाना
लिख + ना = लिखना।
शब्द-निर्माण के विचार से धातु भी दो प्रकार की होती हैं-
(1) मूल धातु और (2) यौगिक धातु ।

मूल धातु स्वतंत्र होती है तथा किसी अन्य शब्द पर आश्रित नहीं होती। जैसे-खा, पढ़, लिख, जा, इत्यादि ।
यौगिक धातु किसी प्रत्यय के संयोग से बनती है । जैसे-पढ़ना से पढ़ा, लिखना से लिखा, खाना से खिलायी जाती, इत्यादि ।

क्रिया के भेद (Kriya ke Bhed in Hindi Vyakaran)

कर्म, जाति तथा रचना के आधार पर क्रिया के दो भेद हैं

(1) अकर्मक क्रिया (Sakarmak Kriya)  तथा
(2) सकर्मक क्रिया  (Akarmak Kriya)

(1) अकर्मक क्रिया (Akarmak Kriya)–जिस क्रिया के कार्य का फल कर्ता पर ही पड़े, उसे अकर्मक क्रिया (Akarmak Kriya) कहते हैं । अकर्मक क्रिया का कोई कर्म (कारक) नहीं होता, इसीलिए इसे अकर्मक कहा जाता है ।
जैसे-श्याम रोता है। वह हँसता है । इन दोनों वाक्यों में ‘रोना’ और ‘हँसना’ क्रिया अकर्मक हैं, क्योंकि यहाँ इनका न तो कोई कर्म है और न ही उसकी संभावना है । ‘रोना’ और ‘ हँसना।” क्रियाओं का फल कर्ता पर (ऊपर के उदाहरणों में ‘श्याम’ और ‘वह’ कर्ता हैं) ही पडता है ।

(2) सकर्मक क्रिया (Sakarmak Kriya)–जिस क्रिया के कार्य का फल कर्ता पर न पड़कर किसी दूसरी जगह पड़ता हो, तो उसे सकर्मक क्रिया (Sakarmak Kriya) कहते हैं ।

 

 

सकर्मक क्रिया के साथ कर्म (कारक) रहता है या उसके साथ रहने की संभावना रहती है। इसीलिए इसे ‘सकर्मक” क्रिया कहा जाता है । सकर्मक अर्थात् कर्म के साथ । जैसे-राम खाना खाता है । इस वाक्य में खानेवाला राम है, लेकिन उसकी क्रिया ‘खाना’ (खाता है) का फल ‘खाना’ (भोजन) पर पड़ता है। एक और उदाहरण लें-वह जाता है । इस वाक्य में भी ‘जाना’ (जाता है) क्रिया सकर्मक है, क्योंकि इसके साथ किसी कर्म का शब्दत: उल्लेख न रहने पर भी कर्म की संभावना स्पष्ट रूप से प्रतीत होती है । ‘जाता है’ के पहले कर्म के रूप में किसी स्थान जैसे-घर, विद्यालय या पटना जैसे गन्तव्य स्थान की संभावना स्पष्ट है ।

कुछ क्रियाएँ अकर्मक और सकर्मक दोनों होती हैं । वाक्य में प्रयोग के आधार पर उनके अकर्मक या सकर्मक होने का ज्ञान होता है । जैसे
अकर्मक: उसका शरीर खुजला रहा है ।
सकर्मक: वह अपना शरीर खुजला रहा है ।
अकर्मक: मेरा जी घबराता है ।
सकर्मक: मुसीबत किसी को भी घबरा देती है ।

Akarmak Kriya se Sakarmak Kriya Banana
अकर्मक क्रिया से सकर्मक क्रिया बनाना:

1.एक अक्षरी या दो अक्षरी अकर्मक धातु में ‘लाना’ जोड़कर सकर्मक क्रिया बनायी जाती है । किंतु कहीं-कहीं धातु के दीर्घ स्वर को हृस्व तथा “ओकार” को “उकार” कर देना पड़ता है ।
जैसे-जीना-जिलाना, रोना-रुलाना

2.दो अक्षरी अकर्मक धातु में कहीं पहले अक्षर अथवा कहीं दूसरे अक्षर के हृस्व को दीर्घ करके ‘ना’ प्रत्यय जोड़कर भी सकर्मक क्रिया बनायी जाती है ।
जैसे-उडना-उड़ाना, कटना-काटना
3.दो अक्षरी अकर्मक धातु के दीर्घ स्वर को हृस्व करके तथा ‘आना’ जोड़कर सकर्मक क्रिया बनायी जाती है ।
जैसे-जागना-जगाना, भींगना-मिंगाना, आदि
किंतु कुछ ‘अकर्मक’ धातुओं के स्वर में बिना किसी बदलाव के ही ‘आना’ जोड़कर भी सकर्मक क्रियाएँ बनायी जाती हैं । जैसे-चिढ़ना-चिढ़ाना
4.दो अक्षरी अकर्मक धातुओं में ‘उकार’ को ‘ओकार’ तथा ‘इकार’ को ‘एकार’ में बदलकर तथा ‘ना’ जोड़कर भी सकर्मक क्रियाएँ बनायी जाती हैं। जैसेखुलना-खोलना, दिखना-देखना, आदि ।
5.तीन अक्षरी अकर्मक धातुओं में दूसरे अक्षर के हृस्व स्वर को दीर्घ करके तथा अंत में ‘ना’ जोड़कर सकर्मक क्रियाएँ बनायी जाती हैं ।
जैसे-उतरना-उतारना, निकलना-निकालना, उखड़ना-उखाड़ना, बिगड़ना-बिगाड़ना ।
6.कुछ अकर्मक धातुएँ बिना किसी नियम का अनुसरण किये ही सकर्मक में परिवर्तित की जाती हैं । जैसे-टूटना-तोड़ना, जुटना-जोड़ना ।

Sakarmak Kriya ke Bhed:
सकर्मक क्रिया के भेद-सकर्मक क्रिया के भी दो भेद हैं-
(1) एककर्मक तथा (2) द्विकर्मकः ।
(1) एककर्मक जिस क्रिया का एक ही कर्म (कारक) हो, उसे एककर्मक (सकर्मक) क्रिया कहते हैं जैसे-वह रोटी खाता है | इस वाक्य में ‘खाना” क्रिया का एक ही कर्म ‘रोटी’ है ।
(2) द्विकर्मकजिस क्रिया के साथ दो कर्म हों तथा पहला कर्म प्राणिवाचक हो और दूसरा कर्म निर्जीव हो अर्थात् प्राणिवाचक न हो । ऐसे वाक्य में प्राणिवाचक कर्म गौण होता है, जबकि निर्जीव कर्म ही मुख्य कर्म होता है । जैसे-नर्स रोगी को दवा पिलाती है। इस वाक्य में ‘रोगी” पहला तथा प्राणिवाचक कर्म है और ‘दवा’ दूसरा निर्जीव कर्म है ।

संरचना (बनावट के आधार पर क्रिया के भेद):

संरचना के आधार पर क्रिया के चार भेद हैं-
(1) प्रेरणार्थक क्रिया, (2) संयुक्त क्रिया, (3) नामधातु क्रिया तथा (4) कृदंत क्रिया ।

 (1) प्रेरणार्थक क्रिया– (Prernarthak Kriya) जिस क्रिया से इस बात का ज्ञान हो कि कर्ता स्वयं कार्य न कर किसी अन्य को उसे करने के लिए प्रेरित करता है, उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं ।
जैसे-बोलना- बोलवाना, पढ़ना- पढ़वाना, खाना- खिलवाना, इत्यादि ।
प्रेरणार्थक क्रियाओं के बनाने की निम्नलिखित विधियाँ हैं-
(a) मूल द्वि-अक्षरी धातुओं में ‘आना’ तथा ‘वाना’ जोड़ने से प्रेरणार्थक क्रियाएँ बनती हैं ।
जैसे-पढ़ (पढ़ना) – पढ़ाना – पढ़वाना
चल (चलना) – चलाना – चलवाना, आदि ।
(b) द्वि-अक्षरी धातुओं में ‘ऐ’ या ‘ओ’ को छोड़कर दीर्घ स्वर हृस्व हो जाता है।
जैसे – जीत (जीतना) – जिताना – जितवाना
लेट (लेटना) – लिटाना – लिटवाना, आदि ।
(c) तीन अक्षर वाली धातुओं में भी ‘आना’ और ‘वाना’ जोड़कर प्रेरणार्थक क्रियाएँ बनायी जाती हैं । लेकिन ऐसी धातुओं से बनी प्रेरणार्थक क्रियाओं के दूसरे ‘अ’ अनुच्चरित रहते है ।
जैसे-समझ (समझना) – समझाना – समझवाना
बदल (बदलना) – बदलाना – बदलवाना, आदि ।
(d) ‘खा’, ‘आ’, ‘जा’ इत्यादि एकाक्षरी आकारान्त ‘जी’, ‘पी’, ‘सी’ इत्यादि ईकारान्त, ‘चू’, ‘छू-ये दो ऊकारान्त; ‘खे’, ‘दे’, ‘ले’ और ‘से’-चार एकारान्त: ‘खो’, ‘हो’, ‘धो’, ‘बी’, ‘ढो’, ‘रो’ तथा ‘सो”-इन ओकारान्त धातुओं में ‘लाना’, ‘लवाना’, ‘वाना’ इत्यादि प्रत्यय आवश्यकतानुसार लगाये जाते हैं ।
जैसे- जी (जीना) – जिलाना – जिलवाना
 
(2) संयुक्त क्रिया (Sanyukat Kriya) दो या दो से अधिक धातुओं के संयोग से बननेवाली क्रिया को संयुक्त क्रिया कहते हैं ।
जैसे-चल देना, हँस देना, रो पड़ना, झुक जाना, इत्यादि ।

(3) नामधातु क्रिया–(Nam Dhatu Kriya) संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण इत्यादि से बननेवाली क्रिया को नामधातु क्रिया कहते हैं।
जैसे-हाथ से हथियाना, बात से बतियाना, दुखना से दुखाना, चिकना से चिकनाना, लाठी से लठियाना, लात से लतियाना, पानी से पनियाना, बिलग से बिलगाना, इत्यादि । ये संज्ञा या विशेषण में “ना” जोडने से (जैसे-स्वीकार-स्वीकारना, धिक्कार-धिक्कारना, उद्धार-उद्धारना, इत्यादि) तथा हिंदी शब्दों के अंत में ‘आ’ करके और आदि ‘आ’ को हृस्व करके (जैसे-दुख-दुखाना, बात—बतियाना, आदि) बनायी जाती हैं ।

(4) कृदंत क्रिया-(Kridant Kriya) कृत्-प्रत्ययों के संयोग से बनने वाले क्रिया को कृदंत क्रिया कहते हैं; जैसे – चलता, दौड़ता, भगता हँसता.

प्रयोग के आधार पर क्रिया के अन्य रूप:

(1) सहायक क्रिया (Sahayak Kriya)
(2) पूर्वकालिक क्रिया (Purvkalik Kriya)
(3) सजातीय क्रिया (Sajatiya Kriya)
(4) द्विकर्मक क्रिया (Dvikarmak Kriya)
(5) विधि क्रिया (Vidhi Kriya)
(6) अपूर्ण क्रिया (Apurn Kriya)
(a) अपूर्ण अकर्मक क्रिया (Apurn Akarmak Kriya)
(b) अपूर्ण सकर्मक क्रिया (Apurn Sakarmak Kriya)

 

(1) सहायक क्रिया-(Sahayak Kriya) मुख्य क्रिया की सहायता करनेवाली क्रिया को सहायक क्रिया कहते हैं ।
जैसे- उसने बाघ को मार डाला ।

सहायक क्रिया मुख्य क्रियां के अर्थ को स्पष्ट और पूरा करने में सहायक होती है । कभी एक और कभी एक से अधिक क्रियाएँ सहायक बनकर आती हैं । इनमें हेर-फेर से क्रिया का काल परिवर्तित हो जाता है ।
जैसे- वह आता है ।
तुम गये थे ।
तुम सोये हुए थे ।
हम देख रहे थे ।
इनमे आना, जाना, सोना, और देखना मुख्य क्रिया हैं क्योंकि इन वाक्यों में क्रियाओं के अर्थ प्रधान हैं ।
शेष क्रिया में- है, थे, हुए थे, रहे थे– सहायक हैं। ये मुख्य क्रिया के अर्थ को स्पष्ट और पूरा करती हैं ।

(2) पूर्वकालिक क्रिया-(Purvkalik Kriya) जब कर्ता एक क्रिया को समाप्त करके तत्काल किसी दूसरी क्रिया को आरंभ करता है, तब पहली क्रिया को पूर्वकालिक क्रिया कहते हैं ।

जैसे- वह गाकर सो गया।
मैं खाकर खेलने लगा ।

(3) सजातीय क्रिया-(Sajatiya Kriya) कुछ अकर्मक और सकर्मक क्रियाओं के साथ उनके धातु की बनी हुई भाववाचक संज्ञा के प्रयोग को सजातीय क्रिया कहते हैं । जैसे-अच्छा खेल खेल रहे हो । वह मन से पढ़ाई पढ़ता है । वह अच्छी लिखाई लिख रहा है ।

(4) द्विकर्मक क्रिया-(Dvikarmak Kriya) कभी-कभी किसी क्रिया के दो कर्म (कारक) रहते हैं । ऐसी क्रिया को द्विकर्मक क्रिया कहते हैं । जैसे-तुमने राम को कलम दी । इस वाक्य में राम और कलम दोनों कर्म (कारक) हैं ।

(5) विधि क्रिया-(Vidhi Kriya)जिस क्रिया से किसी प्रकार की आज्ञा का ज्ञान हो, उसे विधि क्रिया कहते हैं । जैसे-घर जाओ । ठहर जा।

(6) अपूर्ण क्रिया-(Apurn Kriya)जिस क्रिया से इच्छित अर्थ नहीं निकलता, उसे अपूर्ण क्रिया कहते हैं। इसके दो भेद हैं- (1) अपूर्ण अकर्मक क्रिया तथा (2) अपूर्ण सकर्मक क्रिया ।
(a) अपूर्ण अकर्मक क्रिया-(Apurn Akarmak Kriya) कतिपय अकर्मक क्रियाएँ कभी-कभी अकेले कर्ता से स्पष्ट नहीं होतीं । इनके अर्थ को स्पष्ट करने के लिए इनके साथ कोई संज्ञा या विशेषण पूरक के रूप में लगाना पड़ता है। ऐसी क्रियाओं को अपूर्ण अकर्मक क्रिया कहते हैं। जैसे – वह बीमार रहा । इस वाक्य में बीमार पूरक है।
(b) अपूर्ण सकर्मक क्रिया(Apurn Sakarmak Kriya) कुछ संकर्मक क्रियाओं का अर्थ कर्ता और कर्म के रहने पर भी स्पष्ट नहीं होता । इनके अर्थ को स्पष्ट करने के लिए इनके साथ कोई संज्ञा या विशेषण पूरक के रूप में लगाना पडता है । ऐसी क्रियाओं को अपूर्ण सकर्मक क्रिया कहा जाता है ।
जैसे-आपने उसे महान् बनाया । इस वाक्य में ‘महान् पूरक है.

Visheshan Aur Visheshan ke Bhed विशेषण और विशेषण के भेद

visheshan banaiye, visheshan shabd, visheshan visheshya in hindi, hindi visheshan list, kriya visheshan, sarvanamik visheshan, visheshan kise kehte hai, visheshan in Marathi,

Visheshan Aur Visheshan ke Bhed विशेषण और विशेषण के भेद

Visheshan Definition in Hindi: visheshan kise kehte hai

संज्ञा और सर्वनाम की विशेषता बतानेवाले शब्द को (विशेषण Visheshan) कहते हैं।
जैसे-

‘काली’ गाय,
‘अच्छा’ लड़का।
विशेषण जिस शब्द की विशेषता बतलाता है, उसे विशेष्य कहते हैं।
जैसे-उजली गाय मैदान में खड़ी है। यहाँ ‘उजली’ विशेषण और ‘गाय’ विशेष्य है ।

Visheshan Ke Bhed
अर्थ की दृष्टि से विशेषण (Visheshan) के मुख्यत: छह भेद हैं-
(1) गुणवाचक विशेषण (Gunvachak Visheshan)
(2) परिमाणवाचक विशेषण (Parimaan Vachak Visheshan)
(3) संख्यावाचक विशेषण (Sankhya Vachak Visheshan)
(4) सार्वनामिक विशेषण (Sarvanamik Visheshan)
(5) तुलनाबोधक विशेषण (Tulna Bodhak Visheshan)
(6) संबंधवाचक विशेषण (Sambandh Vachak Visheshan)

(1) गुणवाचक विशेषण– (Gunvachak Visheshan) संज्ञा या सर्वनाम के गुण, रूप, रंग, आकार, अवस्था, स्वभाव, दशा, स्वाद, स्पर्श, गंध, दिशा, स्थान, समय, भार, तापमान, इत्यादि का बोध करानेवाले शब्द गुणवाचक विशेषण कहलाते हैं। गुणवाचक विशेषण के साथ ‘सा’ जोड़कर इसके गुणों में कमी की जाती है । जैसे-मोटा-सा, थोड़ा-सा, छोटा-सा, इत्यादि ।

(2) परिमाणवाचक विशेषण (Parimaan Vachak Visheshan) यह किसी वस्तु की नाप या तौल का बोध कराता है । जैसे-सेर भर दूध, थोड़ा पानी, कुछ पानी, सब धन, और घी, इत्यादि । परिमाणवाचक के दो भेद हैं-
(i) निशिचत परिमाणवाचक– दो सेर घी, दस हाथ जगह, आदि ।
(ii) अनिश्चित परिमाणवाचक– बहुत दूध, थोड़ा धन, पूरा आनन्द, इत्यादि ।

(3) संख्यावाचक विशेषण (Sankhya Vachak Visheshan) -जिस विशेषण से संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का बोध हो, उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं।
जैसे—चार घोडे, तीस दिन, कुछ लोग, सब लड़के, इत्यादि ।
संख्यावाचक के भी दो भेद हैं
(i) निश्चित संख्यावाचक–आठ गाय, एक दर्जन पेन्सिल, आदि ।
(ii) अनिश्चित संख्यावाचक-कुछ लड़के, कई आदमी, थोड़े चावल, इत्यादि ।

(4) सार्वनामिक विशेषण (Sarvanamik Visheshan sarvanamik visheshan )

जिस सर्वनाम का प्रयोग विशेषण की तरह होता है, उसे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं। जैसे-वह आदमी, यह लड़की ।
इन वाक्यों में ‘वह’ तथा ‘यह’ ‘आदमी’ और ‘लड़की’ की विशेषता बताते हैं ।
सार्वनामिक विशेषण के भी दो भेद हैं-
(i) मौलिक सार्वनामिक विशेषण–सर्वनाम का मूल रूप जो किसी संज्ञा की विशेषता बताए, वह मौलिक सार्वनामिक विशेषण कहलाता है। जैसे- यह लड़का, कोई नौकर, कुछ काम इत्यादि।
(ii)यौगिक सार्वनामिक विशेषण-सर्वनाम का रूपान्तरित रूप, जो संज्ञा की विशेषता बताए, वह यौगिक सार्वनामिक विशेषण कहलाता है। जैसे- ऐसा आदमी, कैसा घर, उतना काम इत्यादि।
(5) तुलनाबोधक विशेषण (Tulna Bodhak Visheshan)-दो या दो से अधिक वस्तुओं या भावों के गुण, रूप, स्वभाव, स्थिति इत्यादि की परस्पर तुलना जिन विशेषणों के माध्यम से की जाती है, उन्हें तुलनाबोधक विशेषण कहते हैं ।
तुलना की तीन अवस्थाएँ होती हैं—
(1) मूलावस्था,
(2) उत्तरावस्था,
(3) उत्तमावस्था।

जैसे- अधिक, अधिकतर, अधिकतम । ये क्रमश: तुलनात्मक अवस्थाएँ हैं ।

(6) संबंधवाचक विशेषण (Sambandh Vachak Visheshan)-जो विशेषण किसी वस्तु की विशेषताएँ दूसरी वस्तु के संबंध में बताता है, तो उसे संबंधवाचक विशेषण कहते हैं ।
इस तरह के विशेषण संज्ञा, क्रिया-विशेषण तथा क्रिया से बनते हैं ।
जैसे-‘दयामय’ ‘दया’ संज्ञा से, ‘बाहरी’ ‘बाहर’ क्रियाविशेषण से, ‘गला’ ‘गलना’ क्रिया से ।

विशेषणों का निर्माण-
कुछ शब्द तो अपने मूल रूप में ही विशेषण होते हैं। जैसे-अच्छा, बुरा, सुंदर, बदमाश, इत्यादि ।

लेकिन कुछ विशेषण दूसरी जातियों के शब्दों में उपसर्ग, प्रत्यय आदि लगा कर भी बनाये जाते हैं, ऐसे विशेषणों को व्युत्पन्न विशेषण कहते हैं| उदाहरण-

(क) संज्ञा से– उपसर्ग लगाकर-निर्दय, निस्संकोच, निर्गुण, निर्बल, प्रबल, इत्यादि । प्रत्यय लगाकर-धनी, इलाहाबादी, बलवान, बंबइया, इत्यादि ।
(ख) सर्वनाम से-आप से आपसी, वह से वैसा, यह से ऐसा, इत्यादि ।
(ग) क्रिया से-लगना से लागू, भूलना से भुलकृड्, देखना से दिखाऊ, बेचना से बिकाऊ, इत्यादि ।
(घ) अव्यय से-भीतर से भीतरी, बाहर से बाहरी, आदि ।

विशेषण की कुछ विशेषताएँ :
(क) विशेषण के लिंग, पुरुष और वचन विशेष्य के अनुरूप ही होते हैं । अर्थात् विशेष्य (संज्ञा या सर्वनाम) के जो लिंग, पुरुष और वचन होंगे, वही विशेषण के भी होंगे ।

(ख) जब एक विशेषण के एक से अधिक विशेष्य हों, तो जो विशेष्य उसके बिलकुल निकट होगा, उसी के अनुसार विशेषण के लिंग, वचन आदि होंगे । जैसे— उजली धोती और कुरता ।

(ग) सार्वनामिक विशेषण तथा सर्वनाम की पहचान-कुछ सार्वनामिक विशेषणों तथा निश्चयवाचक सर्वनामों के रूप में कोई फर्क नहीं होता । दोनों आवस्थाओं में उनका रूप एकसमान बना रहता है । अतः उनकी पहचान के लिए इस बात का ध्यान रखें कि यदि ऐसे शब्द संज्ञा के पहले आयें, तो विशेषण होंगे और यदि वे संज्ञा के स्थान पर या उसके बदले अकेले प्रयुक्त हों, तो वे सर्वनाम होंगे ।
जैसे-(1) यह गाड़ी मेरी है । इस वाक्य में ‘यह’ संज्ञा (गाड़ी) के पहले आया है, अत: विशेषण है ।
(2) वह आपके साथ रहता है| इस वाक्य में ‘वह’ संज्ञा के रूप में अकेले ही आया है, अतः ‘वह’ सर्वनाम है|

(घ) जब एक से अधिक शब्दों के मेल से किसी संज्ञा का विशेषण बनता है, तब उस शब्द-समूह को विशेषण-पदबंध कहते हैं । जैसे-भवन-निर्माण के काम में आनेवाले सारे सामान काफी महँगे हो गये हैं ।

प्रविशेषण:- जिस शब्द से विशेषण की विशेषता का ज्ञान होता है, उसे प्रविशेषण कहते हैं ।
जैसे-
(1) वह बहुत अच्छा विद्यार्थी है।
(2) कौशल बड़ा साहसी है।
(3) हमारे पिताजी अत्यधिक उदार हैं।
(4) घनश्याम अतिशय भावुक व्यक्ति है।
ऊपर के सभी वाक्यों के काले अक्षरों वाले शब्द प्रविशेषण के उदाहरण हैं, क्योंकि ये सभी विशेषण की विशेषता का ज्ञान कराते हैं।

विशेषण का प्रयोग :
प्रयोग के विचार से विशेषण के दो भेद हैं- hindi visheshan list
(1)विशेष्य-विशेषण और (2) विधेय-विशेषण।

(1) विशेष्य-विशेषण–visheshan visheshya in hindi = विशेष्य से पहले आनेवाले विशेषण को विशेष्य-विशेषण कहते हैं। जैसे-चंदू अच्छा लड्का है । इस वाक्य में ‘अच्छा’ लड़का का विशेषण है और उसके पहले आया है, अतः यहाँ ‘अच्छा’ विशेष्य-विशेषण है ।

(2) विधेय-विशेषण-जो विशेषण विशेष्य के बाद प्रयुक्त होता है, उसे विधेय-विशेषण कहते हैं । जैसे-यह आम मीठा है । इस वाक्य में ‘मीठा’ ‘आम’ का विशेषण है, और उसके बाद आया है, अत: विधेय-विशेषण है ।visheshan banaiye

 

Sarvanam in Hindi (सर्वनाम – Pronoun in Hindi)

Sarvanam in Hindi (सर्वनाम – Pronoun in Hindi)

Sarvanam in Hindi(सर्वनाम):

जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त किए जाते हैं, वे सर्वनाम (Sarvnam)कहलाते हैं।

सर्वनाम सभी संज्ञा शब्दों के स्थान पर प्रयोग होने वाले वे शब्द हैं, जो भाषा को संक्षिप्त एवं रचना की दृष्टि से सुंदर बनाने में सहायक होते हैं।

“पूजा ने कहा कि पूजा कल विद्यालय नहीं जाएगी, क्योंकि पूजा को दिल्ली जाना है। पूजा पूजा की नानी जी को देखने दिल्ली जा रही है। पूजा की नानी जी बीमार हैं।”

उपर्युक्त पंक्तियों में “पूजा” नाम बार-बार आने से भाषा सटीक नहीं लग रही है।
नाम की पुर्नावृति (repetition) से भाषा के प्रवाह में भी रुकावट उत्पन्न हो रही है।
हम इन वाक्यों को ऐसे भी लिख या बोल सकते हैं-
पूजा ने कहा कि वह कल विद्यालय नहीं जाएगी, क्योंकि उसे दिल्ली जाना है।
वहअपनी नानी जी को देखने दिल्ली जा रही है।
उसकी नानी जी बीमार हैं।
इस बार पूजा नाम की आवृत्ति से बचने के लिए पूजा के स्थान पर वह, उसे, अपनी शब्दों का प्रयोग किया है। ये शब्द सर्वनाम कहलाते हैं।

सर्वनाम शब्द दो शब्दों के योग से बना है – सर्व + नाम।
सर्व का अर्थ है-सबका अर्थात् जो शब्द सबके नाम के स्थान पर प्रयोग किए जाते हैं, उन्हें सर्वनाम कहते हैं।

मैं
तू
तुम
आप
हम
यह
वह
जो
कोई
कुछ
क्या, आदि सर्वनाम हैं।

सर्वनाम सभी प्रकार की संज्ञाओं (नामों) के स्थान पर प्रयोग किए जाते हैं। अत: संज्ञा के समान ही विकारी शब्द होने के कारण इनमें भी कारक के कारण विकार या परिवर्तन आता है-जैसे- तू, तुमको, तुझको, तुझे, तेरा, तेरे लिए, तुझमें, आदि।

संज्ञा के समान ही सर्वनाम के भी दो वचन होते हैं-
(क) एकवचन ; जैसे-मैं, तू, यह, वह, आदि।
(ख) बहुवचन ; जैसे-हम, तुम, ये, वे, आदि।

सर्वनाम शब्द दोनों लिंगों में एक जैसे ही रहते हैं; जैसे-
मैं, तू, तुम, आप, आदि तथा लिंग-संबंधी जो प्रभाव वाक्य में दिखाई देता है, वह क्रिया-पदों से स्पष्ट होता है;
जैसे-(क) वह जाता है। (ख) वह जाती है।

सर्वनाम के निम्नलिखित छह भेद हैं

1.    Purush Vachak Sarvnam – पुरुषवाचक सर्वनाम
2.    Nishchay Vachak Sarvnam – निश्चयवाचक सर्वनाम
3.    Anishchay Vachak Sarvnam – अनिश्चयवाचक सर्वनाम
4.    Prashan Vachak Sarvnam – प्रश्नवाचक सर्वनाम
5.    Sambandh Vachak Sarvnam – सम्बन्धवाचक सर्वनाम
6.    Nij Vachak Sarvnam – निजवाचक सर्वनाम

Purushvachak Sarvanam पुरुषवाचक सर्वनाम)

Purushvachak Sarvanam पुरुषवाचक सर्वनाम)

पुरुषवाचक सर्वनाम (Purushvachak Sarvanam)
अपने लिए, सुनने वाले के लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए प्रयोग किये गए सर्वनाम पुरुषवाचक सर्वनाम की श्रेणी में आते हैं,

जैसे –
(क) मैं खेल रहा हूँ। तू भी खेल। वे सब भी खेल रहे हैं।
(ख) हम खेल रहे हैं। तुम भी खेलो। ये सब भी हमारे साथ खेलेंगे।

उपर्युक्त वाक्यों में –
(i) वक्ता द्वारा अपने लिए प्रयोग किए गए सर्वनाम हैं- मैं, हम।
(ii) वक्ता द्वारा श्रोता के लिए प्रयोग किए गए सर्वनाम हैं- तू, तुम।
(iii) वक्ता द्वारा अन्य व्यक्तियों के लिए प्रयोग किए गए सर्वनाम हैं- वे, ये।

इसी आधार पर पुरुषवाचक सर्वनाम के निम्नलिखित तीन उपभेद हैं :
(i). उत्तम पुरुष
(ii). मध्यम पुरुष
(iii). अन्य पुरुष

(i) उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम (Uttam Purushvachak Sarvanam): वक्ता या लेखक जिन सर्वनामों का प्रयोग अपने लिए करता है, उन्हें उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं|
जैसे-मैं, हम, आदि।
(ii) मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम (Madhayam Purushvachak Sarvanam): वक्ता या लेखक द्वारा जो सर्वनाम श्रोता के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं, उन्हें मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं|
जैसे-तू, तुम, आप, आदि।
(iii) अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम (Anya Purushvachak Sarvanam): वक्ता अथवा लेखक जिन सर्वनामों का प्रयोग अपने या श्रोता के अतिरिक्त अन्य व्यक्तियों के लिए करते हैं, उन्हें अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं|
जैसे-यह, वह, ये, वे, आदि।
पुरुषवाचक सर्वनाम कारक के रूप में-

कारक एकवचन बहुवचन
मैं तू वह हम तुम वे
कर्ता मैं, मैंने तू, तूने वह, उसने हम, हमने तुम, तुमने वे, उन्होंने
कर्म मुझे, मुझको तुझे, तुझको उसे, उसको हमें, हमको तुम्हे, तुमको उन्हें, उनको
करण मुझसे,
मेरे द्वारा
तुझसे,
तेरे द्वारा
उससे,
उसके द्वारा
हमसे,
हमारे द्वारा
तुमसे,
तुम्हारे द्वारा
उनसे, उनके द्वारा
सम्प्रदान मेरे लिए, मुझे, मुझको तेरे लिए, युझे, तुझको उसके लिए, उसे, उसको हमारे लिए, हमको, हमें तुम्हारे लिए, तुम्हे, तुमको उनके लिए, उन्हें, उनको
अपादान मुझसे (अलगाव) तुझसे (अलगाव) उससे (अलगाव) हमसे (अलगाव) तुमसे (अलगाव) उनसे (अलगाव)
सम्बन्ध मेरा, मेरी, मेरे तेरा, तेरी, तेरे उसका, उसकी, उसके हमारा, हमारी, हमारे तुम्हारा, तुम्हारी, तुम्हारे उनका, उनकी, उनके
अधिकरण मुझमे, मुझ पर तुझमे, तुझपर उसमे, उस पर हममे, हम पर तुममे, तुम पर उनमे, उनपर

 

Nishchay Vachak Sarvanam (निश्चयवाचक सर्वनाम)

Nishchay Vachak Sarvanam (निश्चयवाचक सर्वनाम)

निश्चयवाचक सर्वनाम – (Nishchay Vachak Sarvanam)
जिस सर्वनाम के द्वारा पास या दूर स्थित व्यक्तियों, प्राणियों अथवा वस्तुओं की ओर संकेत किया जाए, उन्हें

निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं
जैसे
(क) वह मेरा मित्र है।
(ख) यह अमन का खिलौना है।
(ग) वे मोहन के चित्र हैं।
(घ) वे नेहा की पुस्तकें हैं।

इन वाक्यों में– वह, वे निश्चयवाचक सर्वनाम हैं, जो दूर स्थित वस्तुओं एवं व्यक्तियों की ओर संकेत कर रहे हैं, इन्हें दूरवर्ती
निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।

यह, ये भी निश्चयवाचक सर्वनाम हैं, जो निकटवर्ती वस्तुओं की ओर संकेत कर रहे हैं, अत: ये निकटवतीं
निश्चयवाचक सर्वनाम हैं।

Anishchay Vachak Sarvanam (अनिश्चयवाचक सर्वनाम)

Anishchay Vachak Sarvanam (अनिश्चयवाचक सर्वनाम)

अनिश्चयवाचक सर्वनाम (Anishchay Vachak Sarvanam): जिन सर्वनामों से निश्चित वस्तु एवं व्यक्ति का बोध न हो, उन्हें अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं|

जैसे-
कोई आया है|
कुछ लाया है|
किसी से बताना नहीं|
इन वाक्यों में कोई, कुछ तथा किसी सर्वनाम शब्द किसी निश्चित व्यक्ति अथवा निश्चित वस्तु की ओर संकेत नहीं करते, अतः ये अनिश्चयवाचक सर्वनाम हैं।

Prashn Vachak Sarvanam (प्रश्नवाचक सर्वनाम)

जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग प्रश्न पूछने के लिए किया जाता है, वे ‘प्रश्नवाचक सर्वनाम’ कहलाते हैं.
जैसे–
(क) दरवाजे पर कौन खड़ा है?
(ख) तुम्हारे हाथ में क्या है?
कौन प्रश्नवाचक सर्वनाम का प्रयोग प्राणिवाचक संज्ञाओं के स्थान पर किया जाता है। जबकि क्या प्रश्नवाचक सर्वनाम का प्रयोग अप्राणिवाचक संज्ञाओं के स्थान पर किया जाता है।

Sambandh Vachak Sarvanam (सम्बन्धवाचक सर्वनाम)

 

 

Sambandh Vachak Sarvanam (सम्बन्धवाचक सर्वनाम)

सम्बन्धवाचक सर्वनाम (Sambandh Vachak Sarvanam) :

जो सर्वनाम शब्द किसी अन्य उपवाक्य में प्रयुक्त संज्ञा या सर्वनाम से संबंध दर्शाते हैं, उन्हें संबंधवाचक सर्वनाम कहते हैं|
जैसे –

(क) जो करेगा, सो भरेगा।
(ख) जिसकी लाठी उसकी भैस।
(ग) यह वही लड़का है, जो बाज़ार में मिला था।
(घ) जो जीता वही सिकंदर।

Nij Vachak Sarvanam (निजवाचक सर्वनाम)

जो सर्वनाम वाक्य में कर्ता के साथ अपनेपन का बोध कराते हैं, उन्हें ‘निजवाचक सर्वनाम’ कहते हैं| जैसे –

(क) मैं यह काम स्वयं कर लूंगा।
(ख) मैं आप ही चला जाऊँगा।
(ग) वह अपने आप आ जाएगा।
(घ) उसे अपना काम खुद करने दो।
उपर्युक्त वाक्यों में स्वयं, आप, अपने आप एवं अपना निजवाचक सर्वनाम हैं, जो वाक्यों में कर्ता के साथ अपनेपन का बोध करा रहे हैं।

 

Sangya Definition (संज्ञा की परिभाषा)

sANGYA nOUN

Sangya Definition (संज्ञा की परिभाषा) 

संसार के किसी भी प्राणी, वस्तु, स्थान, जाति या भाव, दशा आदि के नाम को संज्ञा (Sangya) कहते हैं|
निम्नलिखित उदाहरण से हम संज्ञा तथा उनके प्रकार आसानी से समझ सकते हैं-
भारत एक विकासशील देश है
नरेन्द्र मोदी भारत के सजग नेता हैं
गंगा एक पवित्र नदी है
कुरान मुसलमानों का पवित्र ग्रन्थ है
आज मोहन बहुत खुश है.
त्योहार हमारे घर खुशियां लाता है.
क्रिकेट भारत का लोकप्रिय खेल है.
मोहन रोज़ दो गिलास दूध और चार अंडे खाता है

ऊपर लिखे वाक्यों में सभी चिन्हित शब्द संज्ञा के किसी ना किसी प्रकार हैं.
भारत– देश का नाम
नरेन्द्र मोदी, मोहन – व्यक्ति का नाम
गंगा – नदी का नाम
कुरान – ग्रन्थ का नाम
मुसलमानों – विशेष समुदाय का नाम
ग्रन्थ – किताब की विशेष श्रेणी का नाम
क्रिकेट – खेल का नाम
गिलास – बर्तन का नाम
दूध, अंडा – खाद्य पदार्थ का नाम
खुशियां – विशेष मनः स्थिति (भाव) का नाम

संज्ञा के भेद – (Sangya ke Bhed):

1 . व्यक्तिवाचक संज्ञा (Vyakti Vachak Sangya)- गुलाब, दिल्ली, इंडिया गेट, गंगा, राम आदि
2 . जातिवाचक संज्ञा (Jativachak Sangya) – गधा, क़िताब, माकन, नदी आदि
3. भाववाचक संज्ञा -(Bhav Vachak Sangya) सुंदरता, इमानदारी, प्रशन्नता, बईमानी आदि

जातिवाचक संज्ञा के दो उपभेद हैं –
4. द्रव्यवाचक संज्ञा (Dravya Vachak Sangya) तथा
5. समूहवाचक संज्ञा (Samuh Vachak Sangya).
इन दो उपभेदों को मिला कर संज्ञा के कुल 5 प्रकार को जाते हैं|

अब संज्ञा के सभी प्रकार का विस्तृत वर्णन नीचे किया गया है-

1. व्यक्तिवाचक संज्ञा (Vyakti Vachak Sangya)

जिन शब्दों से किसी विशेष व्यक्ति, विशेष प्राणी, विशेष स्थान या किसी विशेष वस्तु का बोध हो उन्हें व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते है.

जैसे- रमेश (व्यक्ति का नाम), आगरा (स्थान का नाम), बाइबल (क़िताब का नाम), ताजमहल (इमारत का नाम), एम्स (अस्पताल का नाम) इत्यादि.

2. जातिवाचक संज्ञा (Jativachak Sangya)

वैसे संज्ञा शब्द जो की एक ही जाति के विभिन्न व्यक्तियों, प्राणियों, स्थानों एवं वस्तुओं का बोध कराती हैं उन्हें जातिवाचक संज्ञाएँ कहते है।
कुत्ता, गाय, हाथी, मनुष्य, पहाड़ आदि शब्द एकही जाति के प्राणियों, वस्तुओं एवं स्थानों का बोध करा रहे है।

जातिवाचक संज्ञा के अंतर्गत निम्नलिखित दो है –

(क) द्रव्यवाचक संज्ञा – (Dravya Vachak Sangya)

जिन संज्ञा शब्दों से किसी पदार्थ या धातु का बोध हो, उन्हें द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है ।

जैसे – दूध, घी, गेहूँ, सोना, चाँदी, उन, पानी आदि द्रव्यवाचक संज्ञाएँ है।

(ख) समूहवाचक संज्ञा -(Samuh Vachak Sangya)

जो शब्द किसी समूह या समुदाय का बोध कराते है, उन्हें समूहवाचक संज्ञा कहते हैं।

जैसे – भीड़, मेला, कक्षा, समिति, झुंड आदि समूहवाचक संज्ञा हैँ।

व्यक्तिवाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग: (Vyakti Vachak Sangya Use in form of Jati Vachak Sangya)

व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ कभी कभी ऐसे व्यक्तियों की ओर इशारा करती हैं, जो समाज में अपने विशेष गुणों के कारण प्रचलित होते हैं। उन व्यक्तियों का नाम लेते ही वे गुण हमारे मस्तिष्क में उभर आते है, जैस-

हरीशचंद्र (सत्यवादी), महात्मा गांधी (मकात्मा), जयचंद (विश्वासघाती), विभीषण (घर का भेदी), अर्जुन (महान् धनुर्धर) इत्यादि। कभी कभी बोलचाल में हम इनका इस्तेमाल इस प्रकार कर लेते हैं-

1. इस देश में जयचंदों की कमी नहीं । (जयचंद- देशद्रोही के अर्थ में)
2.  कलियुग में हरिशचंद्र कहां मिलते हैं । (हरिशचंद्र- सत्यवादी के अर्थ में प्रयुक्त)
3.  हमेँ देश के विभीषणों से बचकर रहना चाहिए । (विभीषण- घर के भेदी के अर्थ में प्रयुक्त)

जातिवाचक संज्ञा का व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग- (Jativachak Sangya Use in form of Vyakti Vachak Sangya)

कमी-कभी जातिवाचक संज्ञाएँ रूढ हो जाती है । तब वे केवल एक विशेष अर्थ में प्रयुक्त होने लगती हैं- जैसे:
पंडितजी हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री थे।
यहाँ ‘पंडितजी’ जातिवाचक संज्ञा शब्द है, किंतु भूतपूर्व प्रधानमंत्री ‘पंडित जवाहरलाल नेहरू’ अर्थात् व्यक्ति विशेष के लिए रूढ़ हो गया है । इस प्रकार यहाँ जातिवाचक का व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग किया गया है।
राष्ट्रपिता गांधी जी ने हरिजनों का उद्धार किया । (राष्ट्रपिता गांधी)
नेता जी ने कहा- “तुम मुझे खून दे, मैं तुम्हें आजादी कूँरा । (नेता जी – सुभाष चंद्र बोस)

3. भाववाचक संज्ञा – (Bhav Vachak Sangya)

जो संज्ञा शब्द गुण, कर्म, दशा, अवस्था, भाव आदि का बोध कराएँ उन्हें भाववाचक संज्ञाएँ कहते है।
जैसे – भूख, प्यास, थकावट, चोरी, घृणा, क्रोध, सुंदरता आदि। भाववाचक संज्ञाओं का संबंध हमारे
भावों से होता है । इनका कोई रूप या आकार नहीं होता । ये अमूर्त (अनुभव किए जाने वाले) शब्द होते है।

भाववाचक संज्ञाओं का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग :

भाववाचक संज्ञाएँ जब बहुवचन में प्रयोग की जाती है, तो वे जातिवाचक संज्ञाएँ बन जाती हैं ; जैसे –

(क) बुराई से बचो । ( भाववाचक संज्ञा)
बुराइयों से बचो । (जातिवाचक संज्ञा)
(ख) घर से विद्यालय की दूरी अधिक नहीं है। (भाववाचक संझा)
मेरे और उसके बीच दूरियाँ बढ़ती जा रही है । (जातिवाचक संज्ञा)

द्रव्यवाचक संज्ञाएँ एवं समुहवाचक संज्ञाएँ भी जब बहुवचन में प्रयोग होती हैं तो वे जातिवाचक
संज्ञाएँ बन जाती हैं, जैसे-

(क) मेरी कक्षा में 50 बच्चे हैं । (समूहवाचक संज्ञा)
भिन्न – भिन्न विषयों की कक्षाएँ चल रही है । (जातिवाचक संज्ञा)

(ख) सेना अभ्यास कर रही है। (समूहवाचकसंज्ञा)
हमारी सारी सेनाएँ वीरता से लडी। (जातिवाचक संज्ञा)
(ग) रोहन का परिवार यहां रहता है। (समूहवाचक संज्ञा)
आज कल सभी परिवारों में छोटे-मोटे झगड़े होते रहते है । (जातिवाचक संज्ञा)
(घ) लकडी से अलमीरा बनता है। (द्रव्यवाचक संझा)
ढेर सारी लकडियां इकट्ठी करो। (जातिवाचक संज्ञा)
(ङ) सरसों का तेल पीला होता है। (द्रव्यवाचक संज्ञा)
वनस्पति तेलों का प्रचलन शहरों में ज्यादा है। (जातिवाचक संज्ञा)

Bhav Vachak Sangya Examples | भाववाचक संज्ञाएँ बनाना

Bhav Vachak Sangya Definition – जो संज्ञा शब्द गुण, कर्म, दशा, अवस्था, भाव आदि का बोध कराएँ उन्हें भाववाचक संज्ञाएँ कहते है।

जैसे – भूख, प्यास, थकावट, चोरी, घृणा, क्रोध, सुंदरता आदि। भाववाचक संज्ञाओं का संबंध हमारे
भावों से होता है, इनका कोई रूप या आकार नहीं होता ।

कुछ भाववाचक संज्ञाएँ मूल शब्द होते हैं, जैसे – घृणा, प्रेम, क्रोध इत्यादि ।
परन्तु अधिकांश भाववाचक संज्ञाएँ ऐसी होती हैं, जो जातिवाचक संज्ञाओं, सर्वनामो, विशेषणों एवं अव्यय शब्दों में प्रत्यय जोड़कर बनती हैं।

विशेषण से
मीठा मिठास
गोरा गोराप्पन, गोराई
दुष्ट दुष्टता
महान् महानता
संपन्न संपन्नता
निर्धन निर्धनता
असभ्य अब्दुरभ्यता
प्रयुक्त प्रयाग
धीर धीरता,
नीला पीलापन

लधु लघुता, लघुत्व
अंध अधिकार, अंधेरा
सुखद सुखदायी
विपन्न विपन्नता
सभ्य सभ्यता
साहित्यिक साहित्य
एक एकता
शूर शूरता, शौर्य
सम समता, समानता
कायर कायरता

मित्र मित्रत्व
मित्रता चतुर
सफल सफ़लता
पथरीली पथरीलापन
गरीब गरीबी
लम्बा लम्बाई
चौड़ा चौडाई
क्षुब्ध क्षोभ
बहुत बहुतायत
शीघ्र शीघ्रता
अमीर अमीरी
बड़ा बड़प्पन
शीतल शीतलता
रोगी रोग
साफ सफाई
खट्टा खटास
बुरा बुराई
शिष्ट शिष्टता
पीला पीलापन
उदार उदारता
विद्वान विद्वता
वीर वीरत्व, वीरता
शत्रु शत्रुत्व, शत्रुता
चतुरता चतुराई
उपेक्षित उपेक्षा
सामाजिक सामाजिकता
सुंदर सुंदरता
कठोर कठोरता
ऊँचा ऊँचाई
फुर्तीला फुर्ती
गरम गरमी
धीरज धीरता
स्वस्थ स्वास्थ्य
शैतान शैतानियत
नम्र नम्रता
भला भलाई
अशिष्ट अशिष्टता
चिकना चिकनाई
स्वतंत्र स्वतंत्रता
तेज तेजी
आसक्त आसक्ति
अरुण अरुणिमा
युवा यौवन
नूतन नूत्तनता
गँवार गँवारपन
सौम्य सौम्यता
जाति जातीयता
कुमार, कुमारी, कौमार्य
अपना अपनापन, अपनत्व
आवश्यक आवश्यकता
गंदा गंदगी
मधुर मधुरता
सुंदर सुंदरता

 सर्वनाम से
अपना अपनत्व, अपनापन
स्व स्वत्व
निज निजत्व, निजता
अहं अहंकार
सर्ब सर्वस्व
मम ममता, ममत्व

जातिवाचक संज्ञा से
मनुष्य मनुष्यता
बच्चा बचपन
दानव दानवता
लड़का लड़कपन
बूढा बुढापा
गुरु गुरुत्व
मित्र मैत्री
नर नरत्ता
नारी नारीत्व
बालक बालपन
पशु पशुता
युवक यौवन
चोर चोरी
शिशु शैशव
शत्रु शत्रुता
शिष्य शिष्यत्व
माता मातृत्व
पिता पितृत्व
भ्राता भ्रातृत्व
साधू साधुता
दूत दौत्य
प्रतिनिधि प्रतिनिधित्व
राष्ट्र राष्ट्रीयता
मानव मानवता
पंडित पांडित्य
दास दासत्व
भाई भाईचारा
पुरुष पुरुषत्व
इंसान इंसानियत
वकील वकालत
कृपण कृपणता
बहन बहनापा

क्रिया से
उतरना उतार
पुकारना पुकार
लिखना लिखावट
बनाना बनावट
घबराना घबराहट
चढ़ना चढाई
चलना चलन
बचना बचत
मारना मार
पालना पालन
धोना धुलाई
सजना सजावट
बिकना बिक्री
जपना जाप
जमना जमाव
रोना रुलाई
जगना जागरण
चीखना चीख
पढ़ना पढाई
बचाना बचाव
सजाना सजावट
बहना बहाव
उड़ना उड़ान
मिलना मिलान, मिलावट
चुनना चुनाव
काटना कटाई
समझना समझ
पिटना पिटाई
घूमना घुमाव
पूजना पूजन
कमाना कमाई
बनना बनावट
छटपटाना छटपटाहट

अव्यय से
समीप सामीप्य
धिक् धिक्कार
निकट निकटता
दूर दूरी
मना मनाही
वाहवाह वाहवाही

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (One Word Substitution)

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (One Word Substitution)

This site will teach you How To Learn Hindi Grammar, Hindi Vyakaran, Learn Hindi Grammar Online.

भाषा में कई शब्दों के स्थान पर एक शब्द बोल कर हम भाषा को प्रभावशाली एवं आकर्षक बनाते हैजैसे
राम बहुत सुन्दर कहानी लिखता हैअनेक शब्दों के स्थान पर हम एक ही शब्दकहानीकार का प्रयोग कर सकते है । इसी प्रकार ,अनेक शब्दों के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग कर सकते हैयहां पर अनेक शब्दों के लिए एक शब्द के कुछ उदाहरण दिए जा रहे है : –
1. जिसमें कोई विवाद ही न हो – निर्विवाद
2. जो निन्दा के योग्य हो – निन्दनीय
3. मांस रहित भोजन- निरामिष
4. रात्रि में विचरण करने वाला- निशाचर
5. किसी विषय का पूर्ण ज्ञाता – पारंगत
6. पृथ्वी से सम्बन्धित – पार्थिव
7. रात्रि का प्रथम प्रहर- प्रदोष
8. जिसे तुरंत उचित उत्तर सूझ जाए – प्रत्युत्पन्नमति
9. मोक्ष का इच्छुक- मुमुक्षु
10. मृत्यु का इच्छुक – मुमूर्षु
11. युद्ध की इच्छा रखने वाला- युयुत्सु
12. जो विधि के अनुकूल है – वैध
13. जो बहुत बोलता हो – वाचाल
14. शरण पाने का इच्छुक – शरणार्थी
15. सौ वर्ष का समय – शताब्दी
16. शिव का उपासक – शैव
17. देवी का उपासक – शाक्त

Haryana Gk for HSSC

Haryana GK 5500 QUestions.

India Gk in hindi 10000+ Questions

Science gk in hindi 3000+ Questions

Computer gk 3000+Questions

Agriculture gk in hindi

18. समान रूप से ठंडा और गर्म -समशीतोष्ण
19. जो सदा से चला आ रहा हो– सनातन
20. समान दृष्टि से देखने वाला – समदर्शी 

21. आदि से अन्त तक- आघन्त 
22. जिसका परिहार करना सम्भव न हो – अपरिहार्य 
23. जो ग्रहण करने योग्य न हो – अग्राह्य 
24. जिसे प्राप्त न किया जा सके – अप्राप्य 
25. जिसका उपचार सम्भव न हो – असाध्य 
26. भगवान में विश्वास रखने वाला आस्तिक 
27. भगवान में विश्वास न रखने वाला – नास्तिक 
28. आशा से अधिक- आशातीत 
29. ऋषि की कही गई बात – आर्ष 
30. पैर से मस्तक तक – आपादमस्तक 
31. अत्यंत लगन एवं परिश्रम वाला – अध्यवसायी 
32. आतंक फैलाने वाला – आंतकवादी 
33. देश के बाहर से कोई वस्तु मंगाना – आयात 
34. जो तुरंत कविता बना सके- आशुकवि 
35. नीले रंग का फूल – इन्दीवर 
36. उत्तर -पूर्व का कोण – ईशान 
37. जिसके हाथ में चक्र हो – चक्रपाणि 
38. जिसके मस्तक पर चन्द्रमा हो – चन्द्रमौलि 
39. जो दूसरों के दोष खोजे – छिद्रान्वेषी 
40. जानने की इच्छा- जिज्ञासा 
41. जानने को इच्छुक – जिज्ञासु 
42. जीवित रहने की इच्छा – जिजीविषा 
43. इन्द्रियों को जीतने वाला- जितेन्द्रिय 
44. जीतने की इच्छा वाला – जिगीषु 
45. जहाँ सिक्के ढाले जाते हैं – टकसाल 
46. जो त्यागने योग्य हो – त्याज्य 
47. जिसे पार करना कठिन हो- दुस्तर 
48. जंगल की आग – दावाग्नि
49. गोद लिया हुआ पुत्र – दत्तक
50. बिना पलक झपकाए हुए – निर्निमेष 
51. जिसका जन्म नहीं होता – अजन्मा
52. पुस्तकों की समीक्षा करने वाला समीक्षक , -आलोचक
53. जिसे गिना न जा सके – अगणित
54. जो कुछ भी नहीं जानता हो -अज्ञ

Haryana Gk for HSSC

Haryana GK 5500 QUestions.

India Gk in hindi 10000+ Questions

Science gk in hindi 3000+ Questions

Computer gk 3000+Questions

Agriculture gk in hindi

55. जो बहुत थोड़ा जानता हो- अल्पज्ञ
56. जिसकी आशा न की गई हो – अप्रत्याशित
57. जो इन्द्रियों से परे हो – अगोचर
58. जो विधान के विपरीत हो – अवैधानिक
59. जो संविधान के प्रतिकूल हो – असंवैधानिक
60. जिसे भले -बुरे का ज्ञान न हो – अविवेकी
61. जिसके समान कोई दूसरा न हो – अद्वितीय
62. जिसे वाणी व्यक्त न कर सके – अनिर्वचनीय
63. जैसा पहले कभी न हुआ हो – अभूतपूर्व
64. जो व्यर्थ का व्यय करता हो – अपव्ययी
65. बहुत कम खर्च करने वाला – मितव्ययी
66. सरकारी गजट में छपी सूचना – अधिसूचना
67. जिसके पास कुछ भी न हो – अकिंचन
68. दोपहर के बाद का समय – अपराह्न
69. जिसका निवारण न हो सके – अनिवार्य
70. देहरी पर रंगों से बनाई गई चित्रकारी – अल्पना
71. जो क्षण भर में नष्ट हो जाए – क्षणभंगुर 
72. फूलों का गुच्छा – स्तवक 
73. संगीत जानने वाला -संगीतज्ञ 
74. जिसने मुकदमा दायर किया है- वादी 
75. जिसके विरुद्ध मुकदमा दायर किया है- प्रतिवादी 
76. मधुर बोलने वाला -मधुरभाषी 
77. धरती और आकाश के बीच का स्थान – अंतरिक्ष 
78. हाथी के महावत के हाथ का लोहे का हुक – अंकुश 
79. जो बुलाया न गया हो -अनाहूत 
80. सीमा का अनुचित उल्लंघन – अतिक्रमण 
81. जिस नायिका का पति परदेश चला गया हो प्रोषित- पतिका
82. जिसका पति परदेश से वापस आ गया हो आगत- पतिका 
83. जिसका पति परदेश जाने वाला हो – प्रवत्स्यत्पतिका 
84. जिसका मन दूसरी ओर हो -अन्यमनस्क 
85. संध्या और रात्रि के बीच की वेला -गोधुलि 
86. माया करने वाला -मायावी 
87. किसी टूटी – फूटी इमारत का अंश- भग्नावशेष 
88. दोपहर से पहले का समय -पूर्वाह्न 
89. कनक जैसी आभा वाला -कनकाय 
90. हृदय को विदीर्ण कर देने वाला – हृदय विदारक 
91. हाथ से कार्य करने का कौशल – हस्तलाघव 
92. अपने आप उत्पन्न होने वाला – स्त्रैण 
93. जो लौटकर आया है – प्रत्यागत 
94. जो कार्य कठिनता से हो सके – दुष्कर 
95. जो देखा न जा सके – अलक्ष्य 
96. बाएँ हाथ से तीर चला सकने वाला- सव्यसाची 
97. वह स्त्री जिसे सूर्य ने भी न देखा हो – असुर्यम्पश्या 
98. यज्ञ में आहुति देने वाला – हौदा 
99. जिसे नापना सम्भव न हो – असाध्य 
100. जिसने किसी दूसरे का स्थान अस्थाई रूप से ग्रहण किया हो – स्थानापन्न

Haryana Gk for HSSC

Haryana GK 5500 QUestions.

India Gk in hindi 10000+ Questions

Science gk in hindi 3000+ Questions

Computer gk 3000+Questions

Agriculture gk in hindi

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (One Word Substitution)

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (One Word Substitution)

This site will teach you How To Learn Hindi Grammar, Hindi Vyakaran, Learn Hindi Grammar Online.

भाषा में कई शब्दों के स्थान पर एक शब्द बोल कर हम भाषा को प्रभावशाली एवं आकर्षक बनाते हैजैसे
राम बहुत सुन्दर कहानी लिखता हैअनेक शब्दों के स्थान पर हम एक ही शब्दकहानीकार का प्रयोग कर सकते है । इसी प्रकार ,अनेक शब्दों के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग कर सकते हैयहां पर अनेक शब्दों के लिए एक शब्द के कुछ उदाहरण दिए जा रहे है : –

.जो दिखाई देअदृश्य
.जिसका जन्म होअजन्मा
.जिसका कोई शत्रु होअजातशत्रु
.जो बूढ़ा होअजर
.जो कभी मरेअमर
.जो पढ़ालिखा होअपढ़ ,अनपढ़
.जिसके कोई संतान होनिसंतान
.जो उदार होअनुदार
. जिसमे धैर्य होअधीर
१०.जिसमे सहन शक्ति होसहिष्णु
११.जिसके समान दूसरा होअनुपम
१२.जिस पर विश्वास किया जा सकेअविश्वनीय
१३.जिसकी थाह होअथाह
१४.दूर की सोचने वालादूरदर्शी
१५.जो दूसरों पर अत्याचार करेंअत्याचारी
१६.जिसके पास कुछ भी होअकिंचन
१७.दुसरे देश से अपने देश में समान आनाआयात
१८.अपने देश से दुसरे देश में समान जानानिर्यात
१९.जो कभी नष्ट होअनश्वर
२०.जिसे कोई जीत सकेअजेय
२१.अपनी हत्या स्वयं करनाआत्महत्या
२२.जिसे दंड का भय होउदंड
२३.जिस भूमि पर कुछ उग सकेऊसर
२४.जनता में प्रचलित सुनीसुनाई बातकिंवदंती
२५.जो उच्च कुल में उत्पन्न हुआ होकुलीन
२६.जिसकी सब जगह बदनामीकुख्यात
२७.जो क्षमा के योग्य होक्षम्य
२८.शीघ्र नष्ट होने वालाक्षणभंगुर
२९.कुछ दिनों तक बने रहना वालाटिकाऊ
३०.पतिपत्नी का जोड़ादम्पति

Haryana Gk for HSSC

Haryana GK 5500 QUestions.

India Gk in hindi 10000+ Questions

Science gk in hindi 3000+ Questions

Computer gk 3000+Questions

Agriculture gk in hindi

३१.जो कम बोलता होमितभाषी
३२.जो अधिक बोलता होवाचाल
३३.जिसका पति जीवित होसधवा
३४.जिसमे रस होसरस
३५.जिसमे रस होनीरस
३६.भलाई चाहने वालाहितैषी
३७.दूसरों की बातों में दखल देनाहस्तक्षेप
३८.दिल से होने वालाहार्दिक
३९.जिसमे दया होनिर्दय
४०.जो सब जगह व्याप्त होसर्वव्यापक
४१.जानने की इच्छा रखने वालाजिज्ञासु
४२.सप्ताह में एक बार होने वालासाप्ताहिक
४३.साहित्य से सम्बन्ध रखने वालासाहित्यिक
४४.मांस खाने वालामांसाहारी
४५.जिसके आने की तिथि होअतिथि
४६.जिसके ह्रदय में दया होदयावान
४७.जो चित्र बनाता होचित्रकार
४८.विद्या की चाह रखने वालाविद्यार्थी
४९.हमेशा सत्य बोलने वालासत्यवादी
५०.जो देखने योग्य होदर्शनीय
५१ . जो धन का दुरुपयोग करता है – अपव्ययी
५२. जहाँ पहुँचा न जा सके – अगम्य
५३ . जिसे जीता न जा सके – अजेय
५४. जिसका अंत न हो – अनन्त
५५. जिसका जन्म न हो सके – अजन्मा .
५६. अवसर के अनुसार बदल जाने वाला – अवसरवादी
५७ . जो कानून के विरुद्ध हो – अवैध
५८ .दूसरे के पीछे चलने वाला – अनुचर
५९ . जिसका कोई स्वामी न हो – अनाथ

 

Haryana Gk for HSSC

Haryana GK 5500 QUestions.

India Gk in hindi 10000+ Questions

Science gk in hindi 3000+ Questions

Computer gk 3000+Questions

Agriculture gk in hindi

६० .जिसे क्षमा न किया जा सके – अक्षम्य .
६१. जिसका इलाज न हो सके – असाध्य
६२ . जिसका विश्वास न किया जा सके – अविश्वसनीय
६३. जिस पर अभियोग लगाया गया हो – अभियुक्त
६४. जिसमे शक्ति न हो – अशक्त
६५. जो पहले न पढ़ा हो – अपठित
६६. जिसकी कोई उपमा न हो – अनुपम .
६७ . कम जानने वाला – अल्पज्ञ .
६८ . जो कुछ न करता हो – अकर्मण्य
६९. जो दिखाई न दे – अदृश्य
७० . जिसका मूल्य न आँका जा सके – अमूल्य
७१ . जो नष्ट न होने वाला हो – अविनाशी .
७२ . जो आँखों के सामने न हो – अप्रत्यक्ष
७३ . जिसका पार न पाया जाए – अपार .
७४ . जो परिचित न हो – अपरिचित
७५ . जहाँ जाना संभव न हो – अगम .
७६ . चार मुखों वाला – चतुरानन
७७ . दूसरों के दोष को खोजने वाला – छिद्रान्वेसी
७८ . छात्रों के रहने का स्थान – छात्रवास
७९ . जनता द्वारा चलाया जाने वाला राज – जनतंत्र .
८० . जल में रहने वाला – जलचर .
८१ . जो जन्म से अँधा हो – जन्मांध .
८२ . जीने की इच्छा – जिजीविषा .
८३. वह पहाड़ जिससे आग निकलती हो – ज्वालामुखी .
८४ . जो किसी का पक्ष न ले – तटस्थ
८५ . जिसकी तीन भुजाएँ हो – त्रिभुज .
८६ . तीनों लोकों का स्वामी – त्रिलोकी .
८७ . जो पुत्र गोद लिया हो – दत्तक .
८८. बुरे आचरण वाला – दुराचारी .
८९ . जो दो भाषाएँ जानता हो – दुभाषिया .
९० . जिसकी आयु बड़ी लम्बी हो – दीर्घायु
९१ . प्रतिदिन होने वाला – प्रतिदिन .
९२ . बुरे चरित्र वाला – दुश्चरित्र .
९३. जिसमे दया हो – दयालु .
९४. जो कठिनाई से प्राप्त हो – दुर्लभ .
९५. जहाँ पहुँचना कठिन हो – दुर्गम .
९६ . दर्द से भरा हुआ – दर्दनाक .

Haryana Gk for HSSC

Haryana GK 5500 QUestions.

India Gk in hindi 10000+ Questions

Science gk in hindi 3000+ Questions

Computer gk 3000+Questions

Agriculture gk in hindi

९७ . जो धर्म का काम करे – धर्मात्मा .
९८ . जिसका कोई अर्थ न हो – निरर्थक .
९९ . जिसके मन में कोई कपट न हो – निष्कपट .
१००. जो अभी – अभी पैदा हुआ हो – नवजात .
१०१ . परदेश में जाकर बस जाने वाला – प्रवासी
१०२. जो सबके साथ प्रेमपूर्वक बोलता हो – प्रियभाषी
१०३. इतिहास से पहले का – प्रागैतिहासिक
१०४. फल खाकर ही रहने वाला – फलाहारी .
१०५. बच्चों के लिए उपयोगी – बालोपयोगी .
१०६. जिस स्त्री की संतान न हो – बंध्या .
१०७. अवश्य होने वाली घटना – अवश्यंभावी
१०८. जिसकी आत्मा महान हो – महात्मा .
१०९. मास में एक बार होने वाला – मासिक .
११०. युद्ध में स्थिर रहने वाला – युधिष्ठिर.
१११. शक्ति के अनुसार – यथाशक्ति .
११२. अत्यंत सुन्दर स्त्री – रूपसी .
११३. खून से रंगा हुआ – रक्तरंजित.
११४. रजोगुण सम्बन्धी – राजसी .
११५. लोहे के समान दृढ निश्चय वाला – लौहपुरुष.
११६. जिसका इलाज़ न हो – लाइलाज .
११७. किसी विषय का विशेष ज्ञान रखने वाला – विशेषज्ञ.
११८. व्याकरण जानने वाला – वैयाकरण.
११९. विष्णु का उपासक – वैष्णव .
१२०. वर्ष /साल में एक बार होने वाला – वार्षिक .
१२१. जिसका कोई आकार न हो – निराकार .
१२२. शिव का उपासक – शैव .
१२३. हर पन्द्रहवें दिन आने वाला – पाक्षिक .
१२४. एक व्यक्ति का राज – एकतंत्र .
१२५. जिसने ऋण चूका दिया हो – उऋण
१२६. जिसका ध्यान एक स्थान पर हो – एकाग्र
१२७. जो भौतिक सुख – सुविधाओं से युक्त हो – ऐश्वर्यशाली
१२८. जिसकी कल्पना न की जा सके – कल्पनातीत
१२९. जो कठिनाई से पचे – गरिष्ठ
१३० . जो गाया जा सके – गेय
१३१ . जिसे गुप्त रखा जाए – गोपनीय
१३२ . नकली रूप धारण करने वाला – छद्मवेशी
१३३. जो किसी का पक्ष न ले – तटस्थ
१३४. जो छोड़ दिया गया हो – त्यक्त
१३५. जल्दी चलने वाला – द्रुतगामी
१३६. जिसके आरपार देखा जा सके – पारदर्शी
१३७. जो पास हुआ है – पारित
१३८. प्राण देनी वाली – प्राणदा
१३९. जिस स्त्री का पुरुष परदेश गया हुआ हो – प्रोषितपतिका
१४०. ऐतिहासिक युग के पहले का – प्रागैतिहासिक
१४१. जो दूसरों पर आश्रित हो – पराश्रित
१४२. पिता की हत्या करने वाला – पितृहन्ता
१४३. दूसरे के अन्न पर जीने वाला – परान्नभोगी
१४४. अधिक व्यय करने वाला – अपव्ययी
१४५. कम व्यय करने वाला – मितव्ययी
१४६. किसी मत का अनुसरण करने वाला – मतानुयायी
१४७. वीर पुत्र पैदा करने वाली – वीरप्रसू
१४८. अच्छे मार्ग पर चलने वाला – सुपथगामी
१४९. बुरे मार्ग पर चलने वाला – विपथगामी

Haryana Gk for HSSC

Haryana GK 5500 QUestions.

India Gk in hindi 10000+ Questions

Science gk in hindi 3000+ Questions

Computer gk 3000+Questions

Agriculture gk in hindi

१५०. कई में से एकमात्र – अन्यतम
१५१. बिना पलक झपके – एकटक
१५२. किसी काम में दूसरे से बढ़ने की इच्छा – स्पर्धा
१५३. अन्य से सम्बन्ध न रखने वाला – अनन्य
१५४. भरत – वंशियों से संबध्य – भारत
१५५. जो सबमे साधारण या सामान्य रूप से पाया जाय – सर्वसाधारण
१५६. क्रम के अनुसार – यथाक्रम
१५७. जो बाएं हाथ से तीर चलाता है – सव्यसाची
१५८. मेघ की तरह नाग करने वाला – मेघनाद
१५९. गुरु के समीप रहने वाला विद्यार्थी – अन्तेवासी
१६०. समान उदर से जन्म लेने वाला – सहोदर
१६१. जिसकी थाह न लगायी जा सके – अथाह
१६२ . जो समय बीत चुका है – अतीत
१६३. जो देने योग्य न हो – अदेय
१६४. जो पढ़ा न जा सके – अपाठ्य
१६५ . जो कभी ठीक न हो – असाध्य
१६६. जो कठिनाई से साधित हो – दु:साध्य
१६७. जो अपने स्थान से न डिगे – अडिग
१६८. जो स्थिर न रह सके – अस्थिर
१६९. जिसका मूल्य न आका जा सके – अमूल्य
१७०. जिसके पास कुछ भी न हो – अकिंचन
१७१. जिसका कभी जन्म न हो – अजन्मा
१७२ . जो इन्द्रियों के अनुभव के बाहर हो – अगोचर
१७३. जो स्वाभाविक न हो – अप्राकृतिक
१७४. जो परिश्रमी हो – अध्यवसायी
१७५. जो परिचित न हो – अपरिचित
१७६. जिससे सबकुछ कहा जा सके – अन्तरंग
१७७. बिना सोचे – समझे किसी बात पर विश्वास करने वाला – अंधविश्वासी
१७८. जो किसी पर आधारित हो – अवलंबित
१७९. जो ठीक पका न हो – अपरिपक्व
१८०. जिसके बराबर दूसरा न हो – अद्वितीय
१८१. जिसकी बाहुएँ दीर्घ हैं – दीर्घबाहु
१८२. जिसकी बाहुएँ महान हैं – महाबाहु
१८३. चंद्रमा जैसे मुख वाली – चंद्रमुखी
१८४. वृक जैसे उदर वाला – वृकोदर
१८५. दाम से बंधे पेट वाला – दामोदर
१८६. जिसका दमन कठिन है – दुर्दांत
१८७. जिसका तेज़ निकल गया है – निस्तेज
१८८. जिसकी प्रभा विद्युत की तरह है – विधुत्प्भ
१८९. जो भेदा या तोड़ा न जा सके – अभेद्य
१९०. जो कठिनाई से भेदा या तोड़ा जा सके – दुर्भेद्य
१९१. जो विषय विचार में आ सकता है – विचारगम्य
१९२. जिसकी आशा न की गयी हो – अप्रत्याशित
१९३. जिसका कार्य सिद्ध हो चुका हो – कृतकार्य
१९४. जो मापा न जा सके – अप्रमेय
१९५. जो इच्छा के अधीन हो – इच्छाधीन
१९६. जो दूसरे के स्थान पर अस्थायी रूप से काम करे – स्थानापन्न
१९७. जो पीने योग्य हो – पेय
१९८. एक स्थान से दूसरे स्थान को प्रेषित – स्थानांतरित
१९९. जानने की इच्छा – जिज्ञासा
२००. जीतने की इच्छा – जिगीषा
२०१. तैरने की इच्छा – तितिश्रा
२०२. देखने की इच्छा – दिदृक्षा
२०३. लाभ की इच्छा – लिप्सा
२०४. करने की इच्छा – चिकीर्षा
२०५. आत्मा से समबन्ध रखने वाला – आध्यात्म
२०६. मरण तक – आमरण
२०७. जीवन भर – आजीवन
२०८. जन्म भर या जन्म से लेकर – आजन्म
२०९. कष्ट से सिद्ध होने वाला – कष्टसाध्य
२१०. अत्यधिक वृष्टि – अतिवृष्टि
२११. उपकार के प्रति किया गया उपकार – प्रत्युपकार
२१२. दिन पर दिन – दिन प्रतिदिन
२१३. अपने देश में बना हुआ – स्वदेशी
२१४. सौ बर्षों का समाहार – शताब्दी
२१५. एक हज़ार बर्षों का समाहार – सहस्राब्दी

Haryana Gk for HSSC

Haryana GK 5500 QUestions.

India Gk in hindi 10000+ Questions

Science gk in hindi 3000+ Questions

Computer gk 3000+Questions

Agriculture gk in hindi

२१६. जन्म से सौ वर्ष बीत जाने पर मनाया जाने वाला उत्सव – जन्मशती
२१७. अक्षर – अक्षर करके या मिलता हुआ – अक्षरश :
२१८. सौ में से सौ – शतप्रतिशत
२१९. जिसका मन किसी अन्य ओर  है – अन्यमनस्क
२२०. जो पंचाल  देश की है – पांचाली
२२१. द्रुपद की पुत्री – द्रौपदी
२२२. जो यान जल में चलता है – जलयान
२२३. जो यान वायु में चलता है – वायुयान
२२४. जो पुरुष लोहे की तरह बलिष्ठ है – लौहपुरुष
२२५. जो परदे में रहे – पर्दानशीन
२२६. पुरूषों में सबसे उत्तम – पुरषोत्तम
२२७. वह देश जहाँ नदी ही माता हो – नदीमातृक
२२८. जो सबसे आगे ले चलता है – अग्रणी
२२९. सुन्दर ह्रदय वाला – सुह्रदय
२३०. जो मोक्ष चाहता है – मुमुक्षु
२३१. जिसकी मति प्रत्युपन्न है – प्रत्युपन्नमति
२३२. जिसकी बुद्धि  कुश के अग्र  की तरह पैनी है – कुशाग्रबुद्धि
२३३. वह मनुष्य जिसकी दृष्टि दूर तक जाय – दूरदर्शी
२३४. वह  मनुष्य जिसकी दृष्टि सबको सामान भाव से देखे – समदर्शी
२३५. वह मनुष्य जिसकी स्त्री मर गयी है – विधुर
२३६. एक ही समय में वर्तमान – समसामयिक
२३७. वह जिसकी प्रतिज्ञा दृढ़ हो – दृढ़प्रतिज्ञ
२३८. जिसने चित्त किसी विषय में लगाया हुआ है – दत्तचित्त
२३९. मन से चाहा हुआ – इष्ट
२४०. किसी विषय को विशेष रूप से जानने वाला – विशेषज्ञ
२४१. आकाश चूमने वाला – गगनचुम्बी
२४२. अपनी इच्छा से दूसरों की सेवा करने वाला – स्वयंसेवक
२४३. जानने  की इच्छा रखने वाला – जिज्ञासु
२४४. जो कानून के विरुद्ध है – अवैध
२४५. लोम खड़े करने वाला – लोमहर्षक
२४६. जिसकी पत्नी साथ है – सपत्नीक
२४७. जिसे पति छोड़ दे – परित्यक्ता
२४८. जो इस लोक में संभव न हो – अलौकिक
२४९. विलायत से लाया हुआ – विलायती
२५०. जो मन को हर ले – मनोहर
२५१. जो कला जानता हो – कलाविद।
२५२. जो सबको प्यार से देखें – प्रियदर्शी।
२५३. जो हमेशा खड्ग  लेके खड़ा रहे – खड्गहस्त।
२५४. जो जन्म से अँधा है – जन्मांध।
२५५. जो चक्र धारण करता है – चक्रधर।
२५६. जो नष्ट होने वाला हो – नश्वर।
२५७. जो बहुत कठिनाई से मिलता है – दुर्लभ।
२५८. जो आसानी से मिलता है – सुलभ।
२५९. जो चिरकाल तक रहे – चिरस्थायी।
२६०. आँखों  से सामने – प्रत्यक्ष
२६१. आँखों  से परे – परोक्ष।
२६२. अपने परिवार के साथ – सपरिवार।
२६३. जो दूसरे  से ईर्ष्या करता है – ईर्ष्यालु
२६४. जो शत्रु का नाश करता है – शत्रुघ्न
२६५. जो मांस का आहार करता है – माँसाहारी  .
२६६. जो शाक का आहार करता है – शाकाहारी।

Haryana Gk for HSSC

Haryana GK 5500 QUestions.

India Gk in hindi 10000+ Questions

Science gk in hindi 3000+ Questions

Computer gk 3000+Questions

Agriculture gk in hindi

२६७. जो फ़ल  का आहार करता है – फलाहारी।
२६८. कम भोजन करने वाला – अल्पाहारी।
२६९. जो अपनी हत्या करता है – आत्मघाती।
२७०. निशा में विचरण करने वाला – निशाचर।
२७१. जो नभ में चलता है – नभचर।
२७२. गृह बसाकर रहने वाला – गृहस्थ
२७३. जो द्वार का पालन करता –  द्वारपाल
२७४. जो प्रिय बोलता है – प्रियवादी।
२७५. बिना वेतन के – अवैतनिक।
२७६. बिना अंकुश का – निरंकुश
२७७. जो व्याकरण जानता है – वैयाकरण
२७८. ह्रदय को विदीर्ण करने वाला दृश्य – ह्रदय विदारक
२७९. समान  उम्र वाला – समवयस्क
२८०. बहुत सी भाषाओँ को जानने वाला – बहुभाषाविद
२८१. जो  शोक करने योग्य नहीं है – अशोच्य
२८२. कठिनाई से समझने योग्य – दुर्बोध
२८३. जो बुरी लतों में लीन है – विषयासक्त
२८४. जो पर के अधीन है – पराधीन
२८५. जो अत्यंत कष्ट से निवारित किया जा सके – दुर्निवार
२८६. परदेश में रहने वाला – प्रवासी
२८७. जो देखा नहीं जा सकता – अदृश्य
२८८. प्रतिकूल पक्ष का – विपक्षी
२८९. सहन करना जिसका स्वभाव है – सहनशील
२९०. जो मृत्यु के समीप हो – मरणाशन्न
२९१. जो नाटा है – नाटा
२९२. जो वर्णन से परे है – वर्णनातीत
२९३. भविष्य में होने वाला – भावी
२९४. जो तालाब में जन्मता है – सरोज
२९५. जो पूर्व में था या हुआ ,पर अब नहीं है – भूतपूर्व
२९६. बहुत बढ़ा चढ़ा कर बात की जाय – अतिशयोक्ति
२९७. जो नहीं हो सकता – असंभव
२९८. मधुर भाषण करने वाला – मधुरभाषी
२९९. जो मुक़दमा लड़ता रहता है – मुक़दमेबाज़
३००. जो देने योग्य है – देय
३०१. भाग्य पर भरोसा करना – विधिवाद
३०२. पुराने भवनों की मरम्मत – जीर्णोद्धार
३०३. अपने देश से दूसरे देश में जाकर रहने वाले – प्रवासी
३०४. जिसके समान दूसरा कोई न हो – अनन्य
३०५. बदले से प्रेरित प्रहार – प्रत्याघात
३०६. जो सत्य ,चेतन और आनंदी है – सच्चिदानंद
३०७. वंदना करने योग्य – अचिन्त्य
३०८. निरंतर रहने वाला – शश्वत
३०९. रक्षा करने वाला – रक्षक
३१०. मोहमाया में फँसा – ममतारत

Haryana Gk for HSSC

Haryana GK 5500 QUestions.

India Gk in hindi 10000+ Questions

Science gk in hindi 3000+ Questions

Computer gk 3000+Questions

Agriculture gk in hindi

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (One Word Substitution)

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (One Word Substitution)

This site will teach you How To Learn Hindi Grammar, Hindi Vyakaran, Learn Hindi Grammar Online.

भाषा की सुदृढ़ता, भावों की गम्भीरता और चुस्त शैली के लिए यह आवश्यक है कि लेखक शब्दों (पदों) के प्रयोग में संयम से काम ले, ताकि वह विस्तृत विचारों या भावों को थोड़े-से-थोड़े शब्दों में व्यक्त कर सके। समास, तद्धित और कृदन्त वाक्यांश या वाक्य एक शब्द या पद के रूप में संक्षिप्त किये जा सकते है। ऐसी हालत में मूल वाक्यांश या वाक्य के शब्दों के अनुसार ही एक शब्द या पद का निर्माण होना चाहिए।

Read moreअनेक शब्दों के लिए एक शब्द (One Word Substitution)

error: