Banswada District Rajasthan बाँसवाड़ा जिला Rajasthan GK

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 Rajasthan Districts wise General Knowledge

1. अजमेर  6. भरतपुर  11. चित्तौड़गढ़  16. हनुमानगढ़  21. झुंझुनूं  26. पाली  31. सिरोही 
2. अलवर  7. भीलवाड़ा 12. दौसा  17. जयपुर  22. जोधपुर  27. प्रतापगढ़  32. टोंक
3. बांसवाड़ा  8. बीकानेर  13. धौलपुर  18. जैसलमेर  23. करौली  28. राजसमंद  33. उदयपुर 
4. बारां  9. बूंदी  14. डूंगरपुर  19. जालोर  24. कोटा  29. सवाई माधोपुर 
5. बाड़मेर  10. चुरू  15. गंगानगर  20. झालावाड़  25. नागौर  30. सीकर 

बाँसवाड़ा
                                      ‘सौ दिपो के शहर‘ के रूप में प्रसिद्ध बाँसवाड़ा राज्य की नीव महारावल उदय सिंह के पुत्र महारावल जगमालसिंह ने डाली थी। इसका नाम इस शेत्र में प्रचुरता से पाये जाने वाले बांस के कारण पडा हैं।

प्रशासनिक ईकाइया :-
उपखंड -8 तहसील-11 पंचायत समिति -11

प्रमुख मेले व त्यौहार :
* कल्लाजी का मेला – गोपीनाथ का गढ़ा
* घोटिया अम्बा मेला – घोटिया (बरिगामा)
* अनदेश्वर – अन्देश्वर
* मानगढ़ धाम मेला (आदिवासियों का मेला) – आनन्द पूरी के निकट मानगढ़ धाम
* गोपेश्वर -घाटोल के निकट

Rajasthan Gk In Hindi Series 105

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                प्रमुख मंदिर :
                        * घोटिया अम्बा – यहाँ अम्बा माता धाम के अलावा घोटेश्वर महादेव, पांडव कुम्भ और केलपानी पवित्र तीर्थ हैं।
* घुणी के रणछोड़ रायजी –  यह महाभारत कालीन तीर्थ माना जाता हैं। यहाँ पर हर मनोकामना पूर्ण करने वाला व फसलो के रक्षक देव के रूप में पूजा जाता हैं
* कालिजरा – कालिंजरा गांव बांसवाडा में हिरन नदी के किनारे पर बसा हैं, जहाँ ऋषभदेव जी का प्रशिद्ध मन्दिर हैं।
* छिंछ(बांसवाडा) –यहाँ विक्रम की 12 वी सती का ब्रम्हाजी का मन्दिर हैं तथा आबलीया तालाब की पाल पर छिंछ देवी का प्राचीन मंदिर हैं

* आर्थणा के मंदिर -ये मंदिर वागड के परमार राजाओ (11 वी-12 सदी) द्वारा निर्मित हैं। उस समय वागड परमारो की राजधानी थी । प्राचीन ग्रंथो में इसका नाम उत्थुनक मिलता हैं

* त्रिपुर सुन्दरी मंदिर – तलवाडा (बांसवाडा) से पांच किमी. दूर स्थित त्रिपुर- सुन्दरी का मंदिर स्थानीय लोगो में ‘तुरताई माता’ के नाम से भी जाना जाता हैं। यहाँ काले पत्थर की देवी मूर्ति हैं। मूर्ति की पीठिका पर मध्य में श्री यंत्र अंकित हैं। मंदिर के त्रिपुर नाम का सन्दर्भ प्राचीन काल के तिन पुरो से था । शक्तिपुर, शिवपुर और विष्णपुर में स्थित होने के कारण इसका नाम त्रिपुर सुन्दरी पड़ा । नवरात्रा पर यहाँ उत्सव व मेले का आयोजन किया जाता है। नवरात्रा के प्रथम दिन यहाँ घट स्थापना की जाती हैं और जौ बोये जाते हैं तथा विजयादशमी के दिन इनका माही नदी में विसर्जन किया जाता हैं।

* नन्दिनी माता तीर्थ -बडोदिया नामक कस्बे के निकट विशाल पहाड़ी की चोटी पर नन्दिनी माता का प्राचीन मन्दिर है। यहाँ शवेत प्रस्तर से निर्मित अष्टभुजा देवी की प्रतिमा हैं। पहाड़ पर दर्शनार्थियो द्वारा पत्थर के छोटे छोटे घरोंदे बनाने की परम्परा हैं।

                                   पर्यटन स्थल
* माही बांध – माही नदी पर निर्मित माहि बजाज सागर बांध, जिसने इस शेत्र का कायाकल्प कर दिया।
* यह बोहरा समप्रदाय के संत की मजार हैं।
* केलापनी – महाभारतकालीन पाण्ड्वो के बनवास काल की शरणस्थली।
* वागड के कल्प व्रक्ष –  बांसवाडा रतलाम मार्ग पर बाई लाताब में स्थित एक प्राचीन उद्दान में दो वृक्ष  स्थित है जिन्हें कल्पवृक्ष  कहा जाता हैं।
* अन्य स्थल – तलवाडा, भदारेश्वर, आनद सागर झील, डाइलाव, पाडा हेरा, नागेला टेंक, कागदी पिकप वियर, गोविन्द गुरु स्मृति उद्दान, मनगढ़ धाम

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