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उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन (President Rule in Uttar Pradesh)

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उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन (President Rule in Uttar Pradesh)

अनुच्छेद-356

अनुच्छेद भारतीय संविधान की धारा 356 के तहत केंद्र सरकार को किसी भी राज्य की सरकार को भंग करने का अधिकार है, बशर्ते राज्य में सांविधानिक तंत्र विफल हो गया हो। यदि किसी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत न मिला हो तो राज्यपाल भी विधानसभा को भंग कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में राज्यपाल विधानसभा को छह महीने के लिए निलंबित अवस्था में रख सकते हैं। उसके बाद भी यदि कोई दल स्पष्ट बहुमत न जुटा पाए तो फिर चुनाव कराए जाते हैं। इसे राष्ट्रपति शासन कहा जाता है, क्योंकि मुख्यमंत्री की जगह भारत के राष्ट्रपति शासन संभालते हैं और प्रशासनिक सत्ता राज्यपाल के हाथों में होती है।

क्रम संख्या  अवधि  समयावधि
पहली बार 25 फरवरी 1968 से 26 फरवरी 1969 तक
विधान सभा निलम्बित तथा 15 अप्रैल 1968 को विधान सभा भंग
1 वर्ष 02 दिन
दूसरी बार 1 अक्टूबर, 1970 से 18 अक्टूबर, 1970 तक
विधान सभा निलम्बित
18 दिन
तीसरी बार  13 जून, 1973 से 8 नवम्बर, 1973 तक
विधान सभा निलम्बित
4 माह 25 दिन
चौथी बार 30 नवम्बर, 1975 से 21 जनवरी, 1976 तक
विधान सभा निलम्बित
1 माह 22 दिन
पाचवीं बार 30 अप्रैल, 1977 से 23 जून, 1977 तक
विधान सभा भंग
1 माह 24 दिन
छठी बार 17 फरवरी, 1980 से 9 जून, 1980 तक
विधान सभा भंग
3 माह 21 दिन
सातवीं बार 6 दिसम्बर, 1992 से 4 दिसम्बर, 1993 तक
विधान सभा भंग
11 माह 29 दिन
आठवीं बार 18 अक्टूबर, 1995 से 17 अक्टूबर, 1996 तक
18 अक्टूबर, 1995 को निलम्बित 27 अक्टूबर, 1995 को विधान सभा भंग
11 माह 29 दिन
नौवीं बार 17 अक्टूबर, 1996 से 21 मार्च, 1997 तक
विधान सभा निलम्बित
5 माह 04 दिन
दसवीं बार 08 मार्च,2002 से 03 मई 2002 तक
विधान सभा निलम्बित
1 माह 25 दिन

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उत्तर प्रदेश राज्य के प्रमुख संग्रहालय (Museum of Uttar Pradesh)

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उत्तर प्रदेश राज्य के प्रमुख संग्रहालय (Museum of Uttar Pradesh)

उत्तर प्रदेश में कला, संस्कृति, इतिहास, पुरातत्त्व विज्ञान, औषधि, वस्त्र, वाद्य यन्त्र आदि अन्य विशिष्ट विषयों से संबंधित दुर्लभ वस्तुओं के संग्रह हेतु लगभग 70 संग्रहालयों की स्थापना की गई है। प्रदेश का सबसे प्राचीन संग्रहालय राजकीय संग्रहालय लखनऊ है जिसकी स्थापना सन् 1853 में की गई थी। प्रदेश के अन्य प्रमुख संग्रहालयों का विवरण इस प्रकार है।

उत्तर प्रदेश राज्य में लगभग 70 संग्रहालय हैं। वे कला, संस्कृति, पुरातत्त्व विज्ञान, इतिहास, औषधि, वस्त्र, वाद्य यन्त्र तथा अन्य विशिष्ट विषयों से सम्बन्धित हैं। इसमें राजकीय संग्रहालय लखनऊ, प्रदेश का सबसे प्राचीन संग्रहालय है। इसकी स्थापना सन् 1853 में की गई थी और इसकी शाखाएँ लखनऊ तथा इलाहाबाद दोनों स्थानों पर स्थित थीं। सन् 1860 में दोनों शाखाओं को मिला दिया गया।

यहाँ अनेक दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह किया गया है। शोध कार्य, सुप्रसिद्ध विद्वानों के भाषण तथा जनता के लिए प्रदर्शनियाँ यहाँ आयोजित की जाती हैं। अनेक दुर्लभ वस्तुओं को खरीदा भी जाता है। मलिक मोहम्मद जायसी कृत ‘पद्मावत’ की सचित्र पोथी क्रय की गई कलाकृतियों में विशेष महत्त्व की उपलब्धि है। इसमें 337 रंगीन चित्र हैं। ऐसा समझा जाता है कि देवनागरी अक्षरों में लिखी गई ‘पद्मावत’ है। यह प्राचीनतम पोथी है, इसका रचनाकाल सन् 1693 ई० (संवत सुदी 5 शुक्रवार, सम्वत् 1750) है। इसके अलावा अन्य संग्रहालय निम्नलिखित हैं –

राज्य संग्रहालय, लखनऊ
(State Museum, Lucknow)

राज्य संग्रहालय, लखनऊ उ0 प्र0 का प्राचीनतम तथा विशालतम् बहुउद्देशीय संग्रहालय है। इसकी स्थापना सन् 1863 ई0 में लखनऊ डिवीजन के तत्कालीन कमिश्नर कर्नल एबट द्वारा सींखचे वाली कोठी में की गयी थी। सन् 1883 में यह प्रान्तीय संग्रहालय के रूप में लाल बारादरी में व्यवस्थित हुई। सन् 1950 में इसका नाम प्रान्तीय संग्रहालय के स्थान पर राज्य संग्रहालय रखा गया तथा वर्ष 1963 में नवीन भवन का निर्माण बनारसी बाग, प्राणि उद्यान में किया गया। इस संग्रहालय के संकलन में लगभग एक लाख से अधिक कलाकृतियां हैं, जिसमें पुरातत्व अनुभाग, चित्रकला अनुभाग, प्राणि शास्त्र अनुभाग, मुद्रा अनुभाग, कला एवं सज्जा कला अनुभाग और धातु कला अनुभाग आदि प्रमुख हैं। इसके साथ ही राज्य संग्रहालय, लखनऊ में एक वृहद पुस्तकालय भी है, जहां भारतीय संस्कृति, कला, पुरातत्व, इतिहास तथा प्राच्य विद्या से सम्बन्धित दुर्लभ पुस्तकें हैं, जो विशेष रूप से शोधार्थियों के लिये उपयोगी हैं। संग्रहालय ज्ञान का वातायन, भविष्य का शिक्षक, अतीत का संरक्षक एवं भविष्य का उन्नायक है। संग्रहालय सांस्कृतिक सम्पदा, ऐतिहासिक एवं पुरातातिवक धरोहरों को सुरक्षित एवं संरक्षित रखने का वह केन्द्र है, जहां प्राचीन कलाकृतियों को संग्रहीत कर राष्ट्र के अतीत की गौरवशाली संस्कृति का दर्शन शोधार्थियों बुद्विजीवियों तथा सामान्य जनमानस को कराया जाता है। संग्रहालय का कार्य कलाकृतियों एवं पुरावशेषों का संग्रह करना, संरक्षित करना, शोध करना तथा उन्हें प्रदर्शित करना है।

मथुरा का संग्रहालय
(Museum of Mathura)

राजकीय संग्रहालय, मथुरा की स्थापना भारतीय कला के मनीषी विद्वान पुरातत्ववेत्ता तत्कालीन जिलाधीश श्री एफ0 एस0 ग्राउज द्वारा वर्ष 1874 ई0 में कचहरी के समीप कलात्मक भवन में की गई थी। राजकीय संग्रहालय, मथुरा अपने प्रारम्भ में ‘‘कर्जन म्यूजियम ऑफ आर्कियोलॉजी’’ के नाम से विख्यात रहा। वर्ष 1933 ई0 में संग्रहालय वर्तमान भवन में स्थानान्तरित हुआ। वर्ष 1945 से इसे ‘‘पुरातत्व संग्रहालय’’ तथा वर्ष 1974 से ‘‘राजकीय संग्रहालय, मथुरा’’ के रूप में जाना जाता है।

मूर्ति शिल्प में मथुरा कला शैली का स्थानीय केन्द्र होने तथा प्रारम्भ से ही संग्रहालय का स्वरूप मूलरूप से पुरातात्विक होने के कारण स्पष्टतः संग्रहालय के संकलन में अधिसंख्य कुषाण एवं गुप्तकालीन मथुरा शैली की प्रस्तर कलाकृतियां हैं, परन्तु अन्य वर्गों जैसे मृण्मूर्ति, सिक्के, लघुचित्र, धातुमूर्ति, काष्ठ एवं स्थानीय कला के अनेक दुर्लभ कलारत्न संग्रहीत हैं, जो संस्था के लिए गौरव स्वरूप हैं। मृण्मूर्तियों में शुंगकालीन मातृ देवी, कामदेव फलक, गुप्तकालीन नारी व विदूषक, कार्तिकेय, सॉचे, सिक्कों में बलराम अंकित आहत मुद्राओं के सॉचे, गोविन्द नगर से प्राप्त निधि तथा सौंख से प्राप्त सिक्के एवं कुषाण कालीन धातु मूर्तियों में कार्तिकेय, देव युगल प्रतिमा व नाग मूर्तियां, स्थानीय कला में मन्दिरों की पिछवईयां, सांझी के चित्र आदि संग्रहालय की अत्यन्त मूल्यवान धरोहर हैं।

राजकीय पुरातत्व संग्रहालय, कन्नौज
(Government Archaeological Museum, Kannauj)

इत्र और इतिहास की नगरी ‘‘कान्यकुब्ज‘‘ वर्तमान जिला कन्नौज ईसा की छठी शती के उत्तरार्द्ध से लेकर बारहवीं शती ई. के अन्त तक उ0 भारत का महत्वपूर्ण अग्रणी नगरों में से एक था। कन्नौज लगभग 600 वर्ष तक उत्तर भारत का केन्द्र बिन्दु था। जहां मौखरी वंश, वर्द्धन वंश, प्रतिहार वंश, गहड़वाल वंश, पुष्पित पल्लवित हुये, नवीं शती ई. में कन्नौज दक्षिण के ‘‘राष्ट्रकूट‘‘ पूर्व के ‘‘पाल‘‘ और उत्तर पश्चिम के ‘प्रतिहार‘ शक्तियों के मध्य त्रिकोणात्मक शक्ति संतुलन का केन्द्र बन गया था। जिस प्रकार मौर्य युग से लेकर गुप्त काल तक पाटलीपुत्र (पटना) का शासक भारत का सार्वभौम चक्रवर्ती सम्राट माना जाता था। उसी प्रकार हर्षोत्तर काल में ‘कान्यकुब्जाधिपति‘ को शक्ति का प्रतीत माना जाता था। कन्नौज संग्रहालय समिति ने 25 फरवरी, 1975 को कन्नौज में संग्रहालय की स्थापना की। कन्नौज संग्रहालय में प्रागैतिहासिक अस्थि उपकरण महाभारत कालीन स्लेटी भूरे चित्रित पात्र, उत्तरी कृष्ण मार्जित मृद्भांड, पाटल मुद्रा, सील, सिक्के, मृण्मूर्ति, हाथी दांत की कलाकृतियां, मनकें, पाषाण प्रतिमायें संग्रहित है, जिसमें विशेष रावणानुग्रह, भैरवरूप में विषपान, तपस्विनी पार्वती, कार्तिकेय, नृत्य गणेश, विष्णु, विश्वरूप विष्णु, हरिहर, सूर्य प्रतिमांए, ब्रहमा, अग्नि, देवी प्रतिमाएं, महिषासुरमर्दिनी दुर्गा, शान्ती रूप दुर्गा, चामुण्डा, सप्तमातृका, नवग्रह, तीर्थकर प्रतिमाएं संग्रहीत है। यह संग्रहालय प्रतिहार काल की कलाकृतियां के लिये विश्वविख्यात है।

कन्नौज संग्रहालय समिति ने 25 फरवरी, 1975 को कन्नौज में एक संग्रहालय की स्थापना की। वर्ष 1995 में संस्कृति विभाग द्वारा इस संग्रहालय को अधिग्रहण करने का निर्णय शासन द्वारा किया गया। 29 फरवरी, 1996 को पुरातत्व संग्रहालय को शासकीय संग्रहालय घोषित करते हुये राजकीय पुरातत्व संग्रहालय का स्वरूप प्रदान किया गया। उक्त संग्रहालय का नवीन भवन बनकर तैयार हो गया है, जिसमें संग्रहालय का संचालन किया जा रहा है।

राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय, मेरठ
(State Freedom Struggle Museum, Meerut)

वर्ष 1995 में उ0प्र0 शासन द्वारा राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय का निर्माण का निर्णय लिया गया, तत्क्रम में वर्ष 1997 में टास्कफोर्स द्वारा की गई संस्तुतियों के अनुरूप उ0प्र0 शासन के अधीन उ0प्र0 संग्रहालय निदेशालय द्वारा संचालित राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय, मेरठ की स्थापना हुई। जिसका औपचारिक लोकार्पण 10 मई, 2007 को हुआ।

पश्चिमी उ0 प्र0 स्वतंत्रता आन्दोलन का उद्भव एवं क्रान्ति स्थल रहा है। स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी घटनाओं से सम्बन्धित स्थान मेरठ छावनी, देवबन्द, बरेली, बुलन्दशहर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर एवं बागपत इत्यादि इसके महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में मेरठ का विशिष्ट स्थान है, जहाँ से प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी फूटी। स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी घटनाओं एवं संस्मरणों, जीवन गाथाओं को संरक्षित करना, भावी पीढ़ी को नवीन दिशा प्रदान करना तथा राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय, मेरठ को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट संग्रहालय के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है। स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी घटनाएं कैसी थीं एवं स्वतंत्रता संग्राम किस प्रकार से लड़ा गया इसका उल्लेख लिखित रूप से तो किताबों एवं अभिलेखों में मिलता है लेकिन दृश्य रूपों में इसका अभाव है, मुख्य रूप से 10 मई 1857 को मेरठ में घटित घटनाएं जो आम जनसामान्य की पहुँच से दूर रही हैं । इन तथ्यों को संग्रहालय में दिखाने का अनूठा प्रयास किया गया है।

जनपदीय संग्रहालय, सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 01 किमी0 एवं बस स्टेशन से 500 मीटर दूरी पर सुल्तानपुर, सुपर मार्केट में स्थित है। गूगल मैप के अनुसार यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया के सामने संग्रहालय स्थित है।

संग्रहालय सुलतानपुर जनपद के अनेक महत्वपूर्ण पुरास्थलों जैसे शनिचरा कुंड भांटी, सोमना भार, कालूपाठक का पुरवॉ, अहिरन पलिया, सोहगौली, महमूदपुर आदि स्थलो पर पुरासांस्कृतिक सम्पदा बिखरी दिखायी देती है। यही नहीं इस जनपद के आस-पास के जनपदों में भी धरती के गर्भ से बराबर अतीत की धरोहर निकलती रहती है। इनके विविध आयामों से सम्बन्धित सामग्रियां और बिखरी सांस्कृतिक पुरा सम्पदा को संकलित, सुरिंक्षत, प्रदर्शित, प्रलेखीकृत व प्रकाशन कर उन पर अध्ययन अनुसंधान करने कराने के बहुउद्देश्य से वर्ष 1988-89 में इस संग्रहालय की स्थापना की गई।

अन्तर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय एवं आर्ट गैलरी, अयोध्या, फैजाबाद
(International Ramakatha Museum & Art Gallery, Ayodhya, Faizabad)

अयोध्या के महत्व तथा रामकथा की व्यापकता को दृष्टिगत रखते हुए मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम की जन्म स्थली तथा भारतीय जनमानस की वन्दनीया नगरी अयोध्या में संस्कृति विभाग, उ0 प्र0 सरकार द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय एवं आर्ट गैलरी की स्थापना माह जनवरी, 1988 में की गयी तब से निरन्तर अपने उद्देश्यों के प्रति रामकथा संग्रहालय अग्रसर है।

संग्रहालय का उद्देश्य जहां एक ओर रामकथा विषयक सचित्र, पाण्डुलिपियों, मूर्तियों, रामलीला व अन्य प्रदर्श कलाओं से सम्बन्धित सामग्री, अयोध्या परिक्षेत्र के पुरावशेषों, दुर्लभ सांस्कृतिक सम्पदा व प्रदर्श कलाओं, अनुकृतियों, छायाचित्रों का संकलन व परिवीक्षा करना है वहीं दूसरी तरफ संकलित सामग्री का वीथिकाओं में प्रदर्शन, छायाचित्रीकरण व अभिलेखीकरण तथा शैक्षिक कार्यक्रमों के अन्तर्गत व्याख्यानों, गोष्ठियों प्रतियोगिताओं व कार्यशालाओं तथा अस्थायी प्रदर्शिनियों का आयोजन करना भी है।

संग्रहालय में अभी तक 1020 कलाकृतियों का संकलन हो चुका है तथा 313 कलाकृतियों को संग्रहालय वीथिका में प्रदर्शित किया गया है। संग्रहालय देखने के लिए दर्शकों के लिए निःशुल्क व्यवस्था है।

राजकीय जैन संग्रहालय, मथुरा
(State Jain Museum, Mathura)

जैन संग्रहालय, मथुरा. राजकीय जैन संग्रहालय, मथुरा. विवरण, प्रारम्भ में यह संग्रहालय स्थानीय तहसील के पास एक छोटे भवन में रखा गया था। कुछ परिवर्तनों के बाद सन् 1881 में उसे जनता के लिए खोल दिया गया।

राजकीय जैन संग्रहालय – इसकी मथुरा रेलवे स्‍टेशन से दूरी मात्र 2 कि‍लोमीटर की है। यह मथुरा तहसील के बराबर में स्थित है। आप यहां ऑटों या रिक्‍शा कर आसानी से पहुंच सकते है। मथुरा में बौद्धकला के साथ-साथ जैन कला का विकास हुआ था और यहां की कला विश्व भर में प्रसिद्ध है। राजकीय जैन संग्रहालय में सारी मूर्तियां मथुरा कला की ही हैं। जिसकी खासियत लाल पत्थर पर जीवंत कारीगरी है। मथुरा कला की पहचान है कि लाल पत्थर पर मूर्तियां बनती थीं और उनमें चेहरे के हाव भाव को जीवंत किया जाता है। मथुरा में अग्रेजों के शासन काल में कंकाली टीला के पास की गयी खुदाईं में जैन धर्म के तीर्थकरों की मू‍र्तियां प्राप्‍त की गयी थीं, लेकिन स्‍वतंत्रता प्रा‍प्ति के पश्‍चात कंकाली टीला से प्राप्‍त अधिकांश मूर्तियों को लखनऊ संग्रहालय में भेज दिया गया और कुछ मूर्तियों को मथुरा के जैन संग्रहालय में रखा गया है इन मूर्तियों में अधिकांश मू‍र्तियां खं‍डित है।

राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर
(State Buddhist Museum, Gorakhpur)

पूर्वी क्षेत्र में यत्र-तत्र बिखरी सम्पदा के संग्रह, संरक्षण, अभिलेखीकरण, प्रदर्शन एवं शोध के साथ ही इस क्षेत्र के गरिमामय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व की जानकारी जन सामान्य को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, उ0 प्र0 शासन द्वारा सन् 1988 में राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर की स्थापना की गई। पूर्व में यह संग्रहालय किराये के भवन में था। वर्तमान में रामगढ़ताल परियोजना गोरखपुर के अन्तर्गत निर्मित संग्रहालय भवन, गोरखपुर रेलवे एवं बस स्टेशन से लगभग 6 किमी0 दक्षिण एवं सर्किट हाउस से लगभग 1 कि0मी0 दक्षिण-पूर्व में स्थित है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश बौद्ध धर्म के उद्भव और विकास का हृदय स्थल रहा है। भगवान बुद्ध के जीवन की घटनाओं से सम्बन्धित स्थान लुम्बिनी, देवदह, कोलियों का रामग्राम, कोपिया एवं तथागत की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर इसके महत्वूपर्ण साक्ष्य हैं। जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर महावीर की परिनिर्वाण स्थली पावानगर भी इसी क्षेत्र में विद्यमान है। आमी नदी के तट पर स्थित संत शिरोमणि कबीरदास की निर्वाण स्थली मगहर और नाथ पंथ के गोरखनाथ की तपोभूमि भी यहां के इतिहास के कलेवर को उद्घाटित करता है।

डा. भीमराव अम्बेडकर संग्रहालय एवं पुस्तकालय, रामपुर
(Dr. Bhimrao Ambedkar Museum & Library, Rampur)

डॉ0 भीमराव अम्बेडकर संग्रहालय एवं पुस्तकालय, रामपुर का निर्माण वर्ष 1997 में प्रारम्भ किया गया तथा 30 नवम्बर 1999 में इसका निर्माण कार्य पूर्ण हुआ । इसके उपरान्त 12 अगस्त, 2000 को उ0 प्र0 शासन के संस्कृति विभाग ने इसे अपने अधिकार में ले लिया और 21 अगस्त 2004 को माननीय मो0 आज़म खाँ, तत्कालीन मंत्री, नगर विकास एवं संसदीय कार्य, उ0 प्र0 सरकार द्वारा इसका औपचारिक लोकार्पण किया गया।

जनपद रामपुर प्रचीन काल से ही ऐतिहासिक महत्व को बनाये हुए है। यह क्षेत्र उत्तर पाँचाल के नाम से विख्यात रहा है। यहाँ से लगभग 100 किमी0 की दूरी पर प्राचीन नगर अहिछत्र भी अवस्थित है जिसका सम्बन्ध महाभारत काल से जोड़ा जाता है । ऐसा कहा जाता है कि पाँचाल राजा द्रुपद ने इसको बसाया था । कालान्तर में रामपुर रोहिला राजाओं के अधीन रहा और इसके उपरान्त नवाबों के अधिकार क्षेत्र में रहा । रामपुर में संगीत घराने भी देश विदेश तक ख्याति प्राप्त रहे हैं । इसी जनपद में ऐतिहासिक दस्तावेजों को सहेजे रजा लाइब्रेरी भी स्थित है।

लोक कला संग्रहालय, लखनऊ
(Lok Art Museum, Lucknow)

लोक कला हमें विरासत एवं परम्पराओं से प्राप्त होती है, जिनका मूल अति प्राचीन है। जन्म से लेकर मृत्यु तक यह हमारे जीवन में रची बसी होती है जो पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होती रहती हैं किन्तु सामयिक परिवर्तन के कारण आधुनिकीकरण एवं औद्योगिकीकरण की आंधी में हमारे प्रदेश की लोक परम्परायें शनैः शनैः विलुप्त होती जा रही हैं एवं इनका मूल स्वरूप भी परिवर्तित हो रहा है। इन प्राचीन लोक कलाओं एवं परम्पराओं के मूल स्वरूप को अक्षुण्ण बनाये रखने एवं भविष्य के लिए सुरक्षित रखने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, उ0 प्र0 द्वारा फरवरी, 1989 में लोक कला संग्रहालय की स्थापना कैसरबाग में की गयी थी। वर्तमान में नवनिर्मित लोक कला संग्रहालय भवन, राज्य संग्रहालय परिसर, बनारसीबाग, लखनऊ में स्थापित है।  लोक कलाओं के संकलन, संरक्षण तथा प्रदर्शन की दिशा में कार्यरत् लोक कला संग्रहालय प्रदेश का एक मात्र संग्रहालय है।

संग्रहालय में प्रदेश के विभिन्न अंचलों की उत्कृष्ट एवं दुर्लभ लोक कलाओं से सम्बन्धित लगभग 1800 कलाकृतियों का संग्रह किया गया है, जिसके अन्तर्गत डायोरामा लोक नृत्य, लोक वाद्य, लोक कला आलेखन, आभूषण, पोशाक, टेराकोटा, पारम्परिक मुखौटे, काष्ठ, लौह एवं प्रस्तर के खिलौने बर्तन आदि के उत्कृष्ठ कला प्रदर्श उपलब्ध हैं। संग्रहालय में भूमि एवं भित्ति अलंकरण से सम्बन्धित लोक कला चित्रों का विशाल संग्रह है, जो संरक्षित संकलन के रूप में व्यवस्थित है। उक्त संग्रह के अन्तर्गत धार्मिक अनुष्ठान व तीज त्यौहार विषयक पेन्टिंग, रामलीला से सम्बन्धित मुखौटे, लोकनृत्यों के डायोरामा विभिन्न अंचलों के लोक नृत्यों में प्रयुक्त होने वाले लोकवाद्य, हस्त निर्मित टेराकोटा धातु निर्मित खिलौने तथा लगभग विभिन्न प्रकार के आभूषण और उत्कृष्ट पोशाकों आदि का संग्रह संग्रहालय में विशेष आकर्षण का क्रन्द्र है।

राजकीय बौद्ध संग्रहालय, पिपरहवां (सिद्धार्थनगर)
(State Buddhist Museum, Piparhava (Siddhartha Nagar))

भगवान बुद्ध के जीवन से सम्बन्धित प्रमुख स्थलों में से एक इस स्थल की पहचान प्राचीन कपिलवस्तु के रूप में की जाती है। प्राचीन काल में कपिलवस्तु शाक्यों की राजधानी थी तथा भगवान बुद्ध के पिता शुद्धोधन शाक्य गणराज्य के प्रमुख थे। छठी शताब्दी ईसापूर्व के दस प्रमुख गणराज्यों में इसकी गणना की जाती थी। इस स्थल पर भगवान बुद्ध का बाल्यकाल व्यतीत हुआ था तथा राजकुमार सिद्धार्थ के रूप में 29 वर्ष की अवस्था में सत्य की खोज के लिये उन्होंने यहां से प्रस्थान किया। बौद्ध साहित्य में इस बात का उल्लेख है कि बुद्ध के महापरिनिर्वाण के पश्चात उनके अस्थि अवशेषों को आठ भागों में विभक्त किया गया था, जिसका एक भाग शाक्यों को भी प्राप्त हुआ था। यहां का मुख्य स्तूप मूल रूप से शाक्यों द्वारा भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेषों के अपने भाग पर निर्मित किया गया था। यहां पर सर्वप्रथम पुरातात्विक कार्य प्रारम्भ करने का श्रेय डब्ल्यू0 सी0 पेप्पे को है। उत्खनन के परिणामस्वरूप यहां स्थित स्तूप से एक धातु मंजूषा प्राप्त हुई थी, जिस पर ब्राह्मी में लेख है-सुकिति-भतिनं स भगिनिकनम स-पुत-दलनं, इयं सलिल निधने बुधस भगवते सकियानं। अर्थात इस स्तूप का निर्माण उनके शाक्य भाईयों द्वारा अपनी बहनों, पुत्रों एवं पत्नियों के साथ मिलकर किया गया था। यहां से प्राप्त मृण मृदाओं पर ‘‘देव पुत्र विहारे कपिलवस्तु भिक्खु संघस’’ तथा ‘‘महा कपिलवस्तु भिक्खुसंघस’’ अंकित है। इससे यह प्रमाणित होता है कि यह स्थल प्राचीन कपिलवस्तु का बौद्ध प्रतिष्ठान था।

भगवान बुद्ध की स्मृतियों से जुड़ा होने के कारण यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से अन्तर्राष्ट्रीय महत्व का है। इस क्षेत्र में यत्र-तत्र बिखरी कला सम्पदा एवं देश के अन्य भागों से प्राप्त कलाकृतियों का संकलन, संरक्षण, अभिलेखीकरण, शोध एवं प्रदर्शन कर जन सामान्य को इसके गरिमामय इतिहास की जानकारी प्राप्त कराने के बहुउद्देश्य से बौद्ध हेरिटेज सेन्टर, पिपरहवा, सिद्धार्थ नगर के अन्तर्गत बौद्ध संग्रहालय एवं प्रशासनिक भवन कला वीथिका सहित अनेक परियोजनाओं का शिलान्यास वर्ष 1997 में मा0 मुख्यमंत्री जी, उ0 प्र0 के कर कमलों द्वारा किया गया था। शासन द्वारा दिये गये निर्देश के क्रम में संग्रहालय/प्रशासनिक भवन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, भारत सरकार को दिनांक 03 अक्टूबर, 2009 को हस्तांतरित कर दिया गया है।

जनपदीय संग्रहालय, सुल्तानपुर
(Janpadian Museum, Sultanpur)

जनपदीय संग्रहालय, सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 01 किमी0 एवं बस स्टेशन से 500 मीटर दूरी पर सुल्तानपुर, सुपर मार्केट में स्थित है। गूगल मैप के अनुसार यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया के सामने संग्रहालय स्थित है।
संग्रहालय सुलतानपुर जनपद के अनेक महत्वपूर्ण पुरास्थलों जैसे शनिचरा कुंड भांटी, सोमना भार, कालूपाठक का पुरवॉ, अहिरन पलिया, सोहगौली, महमूदपुर आदि स्थलो पर पुरासांस्कृतिक सम्पदा बिखरी दिखायी देती है। यही नहीं इस जनपद के आस-पास के जनपदों में भी धरती के गर्भ से बराबर अतीत की धरोहर निकलती रहती है। इनके विविध आयामों से सम्बन्धित सामग्रियां और बिखरी सांस्कृतिक पुरा सम्पदा को संकलित, सुरिंक्षत, प्रदर्शित, प्रलेखीकृत व प्रकाशन कर उन पर अध्ययन अनुसंधान करने कराने के बहुउद्देश्य से वर्ष 1988-89 में इस संग्रहालय की स्थापना की गई।

वर्तमान में संग्रहालय में दो वीथिकायें जनसामान्य के अवलोकनार्थ खुली हैं। एक वीथिका में प्रस्तर प्रतिमायें, मृण मूर्तिया एवं काष्ठ कलाकृतियॉ प्रदर्शित है। द्वितीय वीथिका रफी अहमद किदवई को समर्पित है। इस वीथिका में उनके जीवन से जुड़ी वस्तुओं को संजोया गया है। आलोच्य अवधि में बड़ी संख्या में लोगों ने संग्रहालय का भ्रमण किया।

पाषाण प्रतिमाएं, मृण्मूर्तियां, ताम्र सिक्के, रजत सिक्के, स्वर्ण सिक्के, चित्र/पाण्डुलिपियां, ताम्र/पाषाण अभिलेख, विशिष्ट सिक्के, रजत/ताम्र पदक, आभूषण, कलात्मक वस्तुएं संग्रहालय में संग्रहीत है।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी का भारत कला विज्ञान
(Kashi Hindu University Varanasi of India Arts Science)

श्री राय कृष्णदास के निजी संग्रहालय से स्थापित भारतीय चित्रकारी, वस्त्र, रत्नाभूषण, मुद्राएँ टेरोकोइ एवं पाण्डुलिपियाँ आदि इसमें संगृहीत हैं।

सारनाथ संग्रहालय
(Sarnath Museum)

इसकी स्थापना सन् 1904 ई० में हुई। इसमें ईसा से तीसरी शताब्दी पूर्व से 12वीं शताब्दी तक की पुरातन वस्तुओं का भण्डार है।

राहुल सांकृत्यायन संस्थान, गोरखपुर
(Rahul Sankrityayan Institute, Gorakhpur)

इसमें मुहरें, मृदा पात्र, सिक्के, मनके, प्रस्तर मूर्तियाँ एवं पाण्डुलिपियों का संग्रह है।

इलाहाबाद संग्रहालय
(Allahabad Museum)

इसकी स्थापना नगरपालिका द्वारा सन् 1931 ई० में की गई। इसमें पुरातत्त्व, कला एवं हस्तशिप की वस्तुएँ संगृहीत हैं।

राजकीय संग्रहालय, झाँसी
(State Museum, Jhansi)

झांसी उत्तर प्रदेश में बुन्देलखण्ड क्षेत्र का मण्डल मुख्यालय है। यह दिल्ली-मद्रास तथा लखनऊ-भोपाल रेलवे लाइन पर स्थित मध्य रेलवे का जंक्शन स्टेशन है। झांसी सड़क मार्ग से भी आगरा, लखनऊ, खजुराहो, सागर आदि से जुड़ा है।
चारों तरफ चार दीवारी के अन्दर स्थित झांसी नगर को ओरछा नरेश वीरसिंह देव ने बसाया था और यहां की पहाड़ी पर सन् 1613 ई0 में एक किले का निर्माण भी कराया था। सन् 1857 ई0 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का महत्वपूर्णं योगदान रहा है। यद्यपि रानी लक्ष्मीबाई के वीरगति को प्राप्त करने के बाद झांसी पर अंग्रेजों का अधिकार हो गया था, परन्तु उनके अदम्य साहस एवं वीरतापूर्णं योगदान के कारण झांसी भारत में ही नहीं सम्पूर्णं विश्व के इतिहास में अमर हो गयी।

बुन्देलखण्ड में यत्र-तत्र बिखरी पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक सम्पदा को सजाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने सन् 1978 में झांसी में राजकीय संग्रहालय की स्थापना की। इसका शुभारम्भ ग्वालियर रोड स्थित संस्कृत विद्यालय के किराये के भवन से किया गया। वर्तमान में संग्रहालय झांसी दुर्ग के पास अपने नवीन भवन में पूर्णं विकसित रूप में राजकीय संग्रहालय के रूप में स्थित है। पुरातात्विक संग्रह की दृष्टि से बुन्देलखण्ड क्षेत्र के एरच से प्राप्त प्राचीन सिक्के, अभिलिखित ईंट एवं मृण्मूर्तियां तथा सीरौनखुर्द, ललितपुर, महोबा, मैहर इत्यादि स्थानों से प्राप्त मध्यकालीन पाषाण कलाकृतियां प्राप्त हुई हैं। परन्तु सर्वेक्षण, क्रय, पुलिस सहयोग एवं दान से वर्तमान में धातुमूर्तियां, लघुचित्र, पाण्डुलिपि, सिक्के, अस्त्र-शस्त्र, मृण्मूर्तियां, प्रागैतिहासिक मृद्भाण्ड एवं हथियार, लोक कला से सम्बन्धित सामग्री, लोक वाद्य यन्त्र, अमर शहीदों के तैल चित्र, 1857 के दुर्लभ फोटो चित्र, काष्ठ कला के नमूने, डाक टिकट एवं दुर्लभ साहित्य आदि संग्रहीत है। जो अध्ययन एवं शोध की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं।

वर्तमान में संग्रहालय भवन की दस वीथिकाओं में प्रदर्शन की व्यवस्था की गयी है। भूतल पर स्थित प्रथम वीथिका महारानी लक्ष्मीबाई एवं 1857 के युद्ध को समर्पित है। इस वीथिका को चार भागों में विभक्त किया गया है। प्रथम भाग में महारानी लक्ष्मीबाई के जीवन एवं युद्ध की झलकियों को अट्ठारह डायोरामा के द्वारा प्रस्तुत किया गया है। इन डायोरामा में ध्वनि एवं प्रकाश की व्यवस्था के द्वारा भी महारानी की बाल्यावस्था, किशोरावस्था एवं उनके अन्तिम युद्ध को दर्शकों को दिखाने की व्यवस्था भी की गयी है।

बरेली का पांचाल इतिहास परिषद् संग्रहालय
(Panchal History Council Museum of Bareilly)

यहाँ ऐतिहासिक महत्त्व की वस्तुओं का संग्रह है।

बुन्देलखण्ड छत्रसाल संग्रहालय (बाँदा)
(Bundelkhand Chhatrasal Museum (Banda))

इसमें बुन्देलखण्ड क्षेत्र की दुर्लभ वस्तुएँ संगृहीत हैं।

मोतीलाल नेहरू बाल संग्रहालय (लखनऊ)
(Motilal Nehru Children’s Museum (Lucknow))

यह 1957 ई० में मोतीलाल नेहरू मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा खोला गया। यहाँ बालकों के विकास के लिए ज्ञान, विज्ञान, संस्कृति सम्बन्धी कक्ष हैं।

राजकीय बौद्ध संग्रहालय, कुशीनगर
(State Buddhist Museum, Kushinagar)

भारत के बौद्ध स्थलों में कुशीनगर (कुशीनारा) का प्रमुख स्थान है। बौद्ध धर्म प्रवर्तक भगवान बुद्ध ने लगभग 80 वर्ष की अवस्था में अपना भ्रमण पूर्ण जीवन व्यतीत करने के पश्चात यहां के शालवन में महापरिनिर्वाण प्राप्त (शरीर त्याग) किया था। कुशीनगर जैसे पवित्र स्थल पर असंख्य पर्यटक एवं बौद्ध धर्मानुयायी प्रति वर्ष भगवान बुद्ध को श्रद्धाजंलि अर्पित करने आते हैं। कुशीनगर की धार्मिक महत्ता एवं समृद्ध ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक धरोहर ने कई देशों एवं विभागों को इस क्षेत्र में अपने धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठन स्थापित करने की प्रेरणा दी। परिणामस्वरूप यह स्थल सम्पूर्ण विश्व में आर्कषण का केन्द्र बन गया। कालान्तर में कुशीनगर की पुरातात्विक सम्पदा सहित भारतीय संस्कृति को संकलित तथा सुरक्षित करने के उद्ेदश्य से संग्रहालय के निर्माण की आवश्यकता प्रतीत हुई। एतदर्थ पूर्वी क्षेत्र में यत्र-तत्र बिखरी कला सम्पदा के संग्रह, संरक्षण, अभिलेखीकरण, प्रदर्शन एवं शोध के साथ ही इस क्षेत्र के गरिमामय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व की जानकारी जन सामान्य को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, उ0 प्र0 शासन द्वारा सन् 1993-94 मे राजकीय बौद्ध संग्रहालय की स्थापना की गयी।

संग्रहालय द्वारा संग्रहीत कलाकृतियां जहां एक ओर हमारे समृद्ध कला एवं संस्कृति का आभास कराती हैं, वहीं दूसरी ओर वर्तमान पीढ़ी को उनके गौरवमयी विरासत से परिचित भी कराती हैं।

संग्रहालय का प्रमुख उद्देश्य पूर्वी क्षेत्र एवं देश के अन्य भागों से प्राप्त पुरासम्पदा का संकलन, अभिलेखीकरण, संरक्षण, प्रदर्शन, प्रकाशन तथा देशी-विदेशी पर्यटकों को आकृष्ट कर उन्हें भारतीय संस्कृति के विविध पहलुओं की जानकारी उपलब्ध कराना है। भारतीय इतिहास, कला, संस्कृति और पुरातत्व की जानकारी जन-सामान्य को उपलब्ध कराने के बहुउद्देश्य से संग्रहालय द्वारा शैक्षिक कार्यक्रमों के अन्तर्गत प्रतिष्ठित विद्वानों के व्याख्यान एवं संगोष्ठी के अतिरिक्त विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता है।

रामकथा संग्रहालय, अयोध्या (फैजाबाद)
(Ramakatha Museum, Ayodhya (Faizabad))

रामकथा विषयक चित्रों, सचित्र पांडुलिपियों, मूर्तियों, रामलीला व अन्य प्रदर्श कलाओं से सम्बन्धित सामग्री, अयोध्या परिक्षेत्र के पुरावशेषों, दुर्लभ सांस्कृतिक सम्पदा एवं प्रदर्श कलाओं, अनुकृतियों एवं छायाचित्रों के संकलन व उनकी परिरक्षा करने के उद्देश्य से इस संग्रहालय की स्थापना 1988 में तुलसी स्मारक भवन, अयोध्या में की गई।

प्रान्तीय हाइजीन इंस्टीट्यूट (लखनऊ)
(Provincial Hygiene Institute (Lucknow))

इसकी स्थापना 1928 ई० में हुई। इसमें भौतिकशास्त्र, रसायनशास्त्र, निरोधक रोग, शरीर विज्ञान, जलापूर्ति, सीवर, नालियाँ तथा पोषण से सम्बन्धित अनेक प्रदर्शनीय वस्तुएँ हैं।

  • इसके अलावा राजकीय पुरातत्त्व संग्रहालय, कन्नौज, राजकीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय, मेरठ, जनपदीय संग्रहालय सुल्तानपुर, राजकीय बौद्ध संग्रहालय, रामगढ़ताल, गोरखपुर, अम्बेडकर संग्रहालय एवं पुस्तकालय, रामपुर अन्य संग्रहालय हैं।
  • इसके अलावा, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों द्वारा संचालित अन्य संग्रहालय भी है। इनमें एनाटॉमी, पैथोलॉजी, फार्माकोलॉजी, फोरेन्सिक साइन्स, मैडिसिन, पब्लिक हैल्थ, जूलॉजी, जियोलॉजी, एन्थ्रोपोलॉजी, बायोलॉजी, बॉटनी, कॉमर्स, इण्डियन पेंटिंग्स, आर्केलॉजी तथा अन्य विविध विषयों की सामग्री संगृहीत है, जिनसे शोध कार्यों के प्रयासों में काफी सहायता मिलती है, क्योंकि इन संग्रहालयों द्वारा जनता के लिए प्रदर्शनियों और विचार गोष्ठियों का आयोजन किया जाता है।

Note –

  • उत्तर प्रदेश का सबसे प्राचीन राजकीय संग्रहालय लखनऊ में है।
  • उत्तर प्रदेश राज्य में लगभग 70 संग्रहालय हैं।
  • सारनाथ संग्रहालय की स्थापना सन् 1904 ई० में हुई।
  • इलाहाबाद संग्रहालय की स्थापना नगरपालिका द्वारा सन् 1931 ई० में की गई।
  • बुन्देलखण्ड छत्रसाल संग्रहालय (बाँदा) में बुन्देलखण्ड क्षेत्र की दुर्लभ वस्तुएँ संगृहीत हैं।
  • मोतीलाल नेहरू बाल संग्रहालय (लखनऊ) 1957 ई० में मोतीलाल नेहरू मैमोरियल ट्रस्ट द्वारा खोला गया।
  • प्रान्तीय हाइजीन इंस्टीट्यूट (लखनऊ) की स्थापना 1928 ई० में हुई।

उत्तर प्रदेश राज्य के प्रमुख संग्रहालय (Museum of Uttar Pradesh)

लखनऊ म्यूजियम,

पुरातत्व संग्रहालय uttar pradesh,

इलाहाबाद संग्रहालय allahabad uttar pradesh,

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उत्तर प्रदेश के प्रमुख शिक्षण संस्थान (Education Institute of Uttar Pradesh)

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उत्तर प्रदेश के प्रमुख शिक्षण संस्थान (Education Institute of Uttar Pradesh)

  • शिक्षा की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का भारत में महत्वपूर्ण स्थान है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार प्रदेश की साक्षरता दर 69.72 प्रतिशत हैं, जिसमें पुरुष साक्षरता दर 79.249% और महिला साक्षरता दर 59.26% है।
  • कुल साक्षरता की दृष्टि से राज्य का देश में 29वां स्थान है, पुरुष साक्षरता दर के मामले में प्रदेश का 28वां एवं महिला साक्षरता दर में 31वां स्थान है।
  • प्रदेश की शिक्षा प्रणाली कोठारी आयोग की संस्तुतियों पर आधारित हैं।
  • सर्वप्रथम ब्रिटिश शासकों ने 1858 में म्योर सेन्ट्रल कॉलेज, इलाहाबाद के तहत आधुनिक शिक्षा व्यवस्था की शुरूआत की। सन् 1921 में एक अधिनियम के तहत विश्वविद्यालय शिक्षा को अलग करके माध्यमिक स्तर की शिक्षा हेतु शिक्षा विभाग की स्थापना की गई। सन् 1972 में शिक्षा निदेशालय को प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च स्तर पर विभक्त किया गया। सन् 1981 में राज्य शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद् तथा सन् 1985 में राज्य बेसिक शिक्षा परिषद की स्थापना की गई। प्रदेश में 10 वर्षीय स्कूली शिक्षा एवं विश्वविद्यालय स्तर पर पहुँचने के पूर्व दो वर्ष इण्टरमीडिएट शिक्षा का प्रावधान है।
  • स्वतंत्रता के पूर्व राज्य में केवल 5 विश्वविद्यालय एवं 16 महाविद्यालय संचालित थे जिनकी संख्या वर्तमान समय में क्रमशः 30 एवं 2040 हो गई है।
  • इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्थापना सन् 1887 में हुई थी, लेकिन सन् 2005 में केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ।
  • प्रदेश में तकनीकी, प्राविधिक एवं चिकित्सा शिक्षा की भी समुचित व्यवस्था है।

शोध संस्थान

  • इन्डस्ट्रियल टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च सेन्टर, लखनऊ
  • नेशनल बॉटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट, लखनऊ
  • बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोबॉटनी, लखनऊ
  • सेन्ट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट, लखनऊ
  • सेन्ट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड ऐरोमैटिक प्लान्ट, लखनऊ
  • इण्डियन टेक्नोलॉजिकल रिसर्च सेन्टर, लखनऊ
क्र.

विश्वविद्यालय का नाम 

स्थापना वर्ष

केन्द्रीय विश्वविद्यालय

1 इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद 1887
2 काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी 1916
3 अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ 1921
4 डॉ० भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ 1989

प्रादेशिक विश्वविद्यालय

1 लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ 1921
2 डॉ० भीमराव अम्बेडकर आगरा विश्वविद्यालय, आगरा 1927
3 दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर 1957
4 सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी 1958
5 छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर 1965
6 चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय, मेरठ 1965
7 महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी 1974
8 बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी 1975
9 महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली 1975
10 डॉ० राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद 1975
11 वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर 1987
12 गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, नोएडा 2002
13 मान्यवर श्री कांशीराम जी उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय, लखनऊ 2010

कृषि विश्वविद्यालय

1 चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर 1974
2 नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फैजाबाद 1974
3 सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ 2004

चिकित्सा विश्वविद्यालय

1 छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ 2004

प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय

1 गौतम बुद्ध प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, लखनऊ 2001
2 महामाया प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, नोएडा 2010

विधि विश्वविद्यालय

1 डॉ० राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ 2005

डीम्ड विश्वविद्यालय

1 दयालबाग एजूकेशनल शिक्षण संस्थान, दयालबाग, आगरा 1981
2 पशु चिकित्सा अनुसन्धान संस्थान, इज्जतनगर, बरेली 1983
3 केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ, वाराणसी 1989
4 इलाहाबाद एग्रीकल्चरल इन्स्टीट्यूट, नैनी, इलाहाबाद 2000
5 भातखण्डे म्यूजिक इन्स्टीट्यूट, लखनऊ 2000
6 राष्ट्रीय प्रौद्योगिक संस्थान, इलाहाबाद 2000
7 इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद 2000
8 संजय गाँधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ 2002
9 संतोष यूनिवर्सिटी, गाजियाबाद 2004
10 शोभित विश्वविद्यालय, मेरठ 2005

पुनर्वास विश्वविद्यालय

1 डॉ० शकुन्तला मिश्रा पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ 2008

मुक्त विश्वविद्यालय

1 उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन विश्वविद्यालय, इलाहाबाद 2004

पशु-चिकित्सा विश्वविद्यालय

1 पं० दीनदयाल पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं अनुसंधान संस्थान, (मथुरा) 2001

निजी विश्वविद्यालय

1 जगदगुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट 2001
2 उत्तर प्रदेश महर्षि महेश योगी सूचना प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, लखनऊ 2001
3 इन्टीग्रल विश्वविद्यालय, लखनऊ 2004
4 एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा 2005
5 मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़ 2006
6 मो० अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर 2006
7 तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद 2008
8 स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ 2008
9 शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा 2009
10 बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय, लखनऊ 2010
11 जी० एल० ए० विश्वविद्यालय, मथुरा 2010
12 आई० एफ टी० एम० विश्वविद्यालय, मुरादाबाद 2010
13 इन्वर्टिस विश्वविद्यालय, बरेली 2010
14 श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, गजरौला 2010
15 गलगोटिया विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा 2011

राष्ट्रीय महत्त्व के संस्थान

  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर
  • भारतीय प्रबन्धन संस्थान, लखनऊ
  • मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद
  • राजीव गाँधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान, रायबरेली
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (BHU), वाराणसी
  • भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद
  • नेशनल शुगर रिसर्च इंस्टीट्यूट, कानपुर
  • नॉर्दर्न रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ पेपर टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद
  • सेन्ट्रल पल्प एण्ड इंस्टीट्यूट, सहारनपुर
  • सेन्ट्रल टेक्सटाइल इंस्टीट्यूट, कानपुर
  • क्लॉथ रिसर्च इंस्टीट्यूट, गाजियाबाद

शासकीय संस्थान

  • राजकीय वास्तुकला विद्यालय, लखनऊ
  • राजकीय अभिलेखागर, लखनऊ तथा इलाहाबाद राजकीय संग्रहालय, लखनऊ, मथुरा तथा झाँसी
  • राज्य पुरातत्व विभाग, लखनऊ
  • राज्य संग्रहालय, लखनऊ
  • सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, लखनऊ
  • भातखण्डे हिन्दुस्तानी संगीत महाविद्यालय, लखनऊ (डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा)
  • क्षेत्रीय अभिलेखागार, वाराणसी

अशासकीय संस्थान

  • उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ
  • भारतेन्दु नाट्य अकादमी, लखनऊ
  • प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद
  • उत्तर प्रदेश संस्कृत अकादमी, लखनऊ
  • राज्य ललित कला अकादमी, लखनऊ

प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में राज्य की महत्त्वपूर्ण योजनाएँ तथा उनकै लक्ष्य

  • अनौपचारिक शिक्षा योजना – सामाजिक, आर्थिक कारणों से प्राथमिक शिक्षा से वंचित बच्चों को प्राथमिक सतर तक की पढ़ाई पूर्ण कराना।
  • बेसिक शिक्षा परियोजना II – कम साक्षरता दर वाले जिलों में साक्षरता प्रतिशत की वृद्धि
  • बेसिक शिक्षा योजना II – अविकसित क्षेत्रों में प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना।
  • सर्व शिक्षा योजना – शत-प्रतिशत साक्षरता का लक्ष्य प्राप्त करने हेतु विशेष प्रयत्न
  • जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम I – प्रदेश के सभी वर्गों को प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराना।
  • जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम II – साक्षरता दर में वृद्धि करना।
  • शिक्षा-मित्र योजना – प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को पूरा करना।
  • ऑपरेशन ब्लैकबोई योजना – प्राथमिक विद्यालयों में भौतिक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • कल्प शिक्षा योजना – प्राथमिक विद्यालयों में आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण करना।
  • शिक्षा गारण्टी योजना – असेवित गाँवों में प्राथमिक विद्यालय की स्थापना करना।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शिक्षण संस्थान (Education Institute of Uttar Pradesh)

उत्तर प्रदेश की शिक्षा संस्कृति,

उत्तर प्रदेश की शिक्षा संस्कृति और सामाजिक प्रथाओं के संबंध में विशिष्ट जानकारी,

उत्तर प्रदेश की संस्कृति,

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उत्तर प्रदेश से प्रकाशित होने वाले प्रमुख पत्र-पत्रिकाएं (Latter, Magazines Published from Uttar Pradesh)

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उत्तर प्रदेश से प्रकाशित होने वाले प्रमुख पत्र-पत्रिकाएं (Latter, Magazines Published from Uttar Pradesh)

उत्तर प्रदेश के विभिन्न नगरों से प्रकाशित होने वाली प्रमुख समाचार-पत्र पत्रिकाएँ निम्नांकित हैं

दैनिक समाचार-पत्र प्रकाशन का स्थान
विश्वमित्र कानपुर
वीर भारत कानपुर
तरुण भारत लखनऊ
स्वतन्त्र भारत लखनऊ
सन्मार्ग वाराणसी
प्रयाग पत्रिका इलाहाबाद
नवोदित कानपुर
नवजीवन लखनऊ
जय भारत कानपुर
दैनिक जागरण कानपुर, मेरठ, झाँसी व आगरा
हिन्दी दैनिक गोरखपुर
गांडीव वाराणसी
बमबम कानपुर
भारत इलाहाबाद
अमर उजाला आगरा, बरेली, मेरठ, मुरादाबाद व कानपुर
आज वाराणसी, कानपुर व आगरा
नॉर्दर्न इण्डिया पत्रिका (अंग्रेजी) इलाहाबाद
स्वराज्य टाइम्स आगरा
सैनिक आगरा
साप्ताहिक समाचार पत्र
राष्ट्रमत कानपुर
राष्ट्रभाषा सन्देश इलाहाबाद
आर्य मित्र लखनऊ
प्रेम प्रचारक आगरा
प्रवाद अलीगढ़
नीर क्षीर कानपुर
नया संसार मुजफ्फरनगर
नया भारत लखनऊ
नागरिक कानपुर
लोकपथ झाँसी
कुटज़ बलिया
जनयुग लखनऊ
पाक्षिक समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ
कानपुर टाइम्स कानपुर
नया युवक लखनऊ
निर्माण मैनपुरी
प्रलयंकर गाजियाबाद
उत्तर प्रदेश पंचायतीराज लखनऊ
विकास मार्ग बस्ती
मासिक पत्र और पत्रिकाएँ
अटल तपस्वी लखनऊ
अरुण मुरादाबाद
आरोग्य गोरखपुर
आपका स्वास्थ्य वाराणसी
अमिता लखनऊ
अखण्ड ज्योति मथुरा
अहिंसा वाणी अलीगंज (एटा)
अग्रहायण लखनऊ
अध्यात्म इलाहाबाद
अध्यापक सन्देश मुजफ्फनगर
गाँव की ओर गोरखपुर
फिल्म संगीत हाथरस
बहुरंगी मेरठ
बाल सखा इलाहाबाद
भारतीय शिक्षा कानपुर
बुनियादी शिक्षक लखनऊ
छात्र शक्ति आगरा
धन्वन्तरी विजयगढ़ (अलीगढ़)
धरती माँ गाजियाबाद
एकान्त बेरली
ग्रामोत्थान जालौन, उरई
ग्रामोद्योग स्वरूपनगर, कानपुर
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उत्तर प्रदेश की मुख्य नदियाँ Major Rivers In Uttar Pradesh

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उत्तर प्रदेश की मुख्य नदियाँ Major Rivers In Uttar Pradesh

उत्तर प्रदेश की मुख्य नदियाँ (Rivers in Uttar Pradesh)

उत्तर प्रदेश की मुख्य नदियों में गंगा, घाघरा, गोमती, यमुना, सोन, चम्बल आदि मुख्य हैं। प्रदेश के विभिन्न भागों में प्रवाहित होने वाली नदियों के उदगम स्थल भी अलग-अलग है। विभिन्न उदगम स्थलों के आधार पर नदियों को निम्नलिखित भागों में विभक्त किया जा सकता है –
(1) हिमालय से निकलने वाली नदियाँ – गंगा, यमुना, शारदा, गण्डक आदि।
(2) गंगा के मैदानी भाग से निकलने वाली नदियाँ – गोमती, वरुण, रिहन्द, पाण्डो, ईसन आदि।
(3) दक्षिणी पठार से निकलने वाली नदियाँ – चम्बल, बेतवा, केन, सोन, रिहन्द तथा कन्हार।

प्रदेश से होकर बहने वाली नदियों का विवरण इस प्रकार है –

उत्तर प्रदेश में बहने वाली प्रमुख नदियों तथा उनकी सहायक नदियों की तालिका –

गंगा नदी (Ganga River)

उद्गम स्थल – केदारनाथ चोटी के उत्तर में गऊमुख (गौमुख) नामक स्थान पर 6,600 मीटर की ऊँचाई पर स्थित हिमानी
प्रमुख प्रदेश/क्षेत्र जहाँ से होकर बहती है – उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, बिहार, पं० बंगाल एवं बांग्लादेश
लम्बाई (किमी) –  2,655
अपवाह क्षेत्र (वर्ग किमी) –  9,51,600
अन्त – ग्वालन्दों के समीप ब्रह्मपुत्र नदी के साथ मिलकर बंगाल की खाड़ी में
सहायक नदियाँ – अलकनन्दा, भागीरथी, रामगंगा, यमुना, गोमती, घाघरा, गण्डक, कोसी
नदी पर बने मुख्य बाँध – फरक्का बाँध तथा  टिहरी बाँध

यमुना नदी (Yamuna River)

उद्गम स्थल – बन्दरपूँछ के पश्चिमी ढाल के जमुनोत्री (यमुनोत्री) नामक स्थान पर 6,315 मीटर की ऊँचाई पर स्थित हिमानी
प्रमुख प्रदेश/क्षेत्र जहाँ से होकर बहती है – उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, दिल्ली
लम्बाई (किमी) –  1,376
अपवाह क्षेत्र (वर्ग किमी) – 3,59,000
अन्त – इलाहाबाद में गंगा नदी में
सहायक नदियाँ – गिरी, असम, चम्बल, बेतवा, केन

रामगंगा नदी (Ramganga River)

उद्गम स्थल – रामगंगा नैनीताल जनपद के समीप
प्रमुख प्रदेश/क्षेत्र जहाँ से होकर बहती है – उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड
लम्बाई (किमी) –  590
अपवाह क्षेत्र (वर्ग किमी) – 32,800
अन्त – कन्नौज के समीप गंगा नदी में
सहायक नदियाँ – कोह
नदी पर बने मुख्य बाँध – कालागढ़ बाँध

गोमती नदी (Gomti River)

उद्गम स्थल – पीलीभीत जनपद
प्रमुख प्रदेश/क्षेत्र जहाँ से होकर बहती है – उत्तर प्रदेश
लम्बाई (किमी) –  940
अपवाह क्षेत्र (वर्ग किमी) – 30,437
अन्त – गाजीपुर के समीप गंगा नदी में
सहायक नदियाँ – सई, जोमकाई, बर्ना, गच्छई, चुहा

घाघरा (सरयू) नदी (Ghagarra (Saryu River)) 

उद्गम स्थल – तिब्बत में मानसरोवर के समीप भारचाचुंगर मिनद राक्षसताल
प्रमुख प्रदेश/क्षेत्र जहाँ से होकर बहती है – नेपाल, उत्तर प्रदेश
लम्बाई (किमी) –  1,080
अपवाह क्षेत्र (वर्ग किमी) –  1,27,950
अन्त – छपरा के निकट गंगा नदी में
सहायक नदियाँ – राप्ती, शारदा, छोटी गण्डक
नदी पर बने मुख्य बाँध – घाघरा बाँध

शारदा नदी (काली नदी) (Sharda (Kali River))

उद्गम स्थल – तिब्बत के सीमान्त पूर्वोत्तर कुमायूँ के निकट मिलाप हिमनद
प्रमुख प्रदेश/क्षेत्र जहाँ से होकर बहती है – उत्तराखण्ड
लम्बाई (किमी) –  480
अपवाह क्षेत्र (वर्ग किमी) –
अन्त – बहराम घाट के समीप घाघरा नदी में
सहायक नदियाँ – धर्या, लिसार, सरयू, पूर्वी रामगंगा, ऊल, हिमनद चौका, दहावर, सुहेली
नदी पर बने मुख्य बाँध – शारदा बाँध

गण्डक नदी (Gandak River)

उद्गम स्थल – तिब्बत-नेपाल सीमा पर धौलागिरि पर्वत श्रेणी
प्रमुख प्रदेश/क्षेत्र जहाँ से होकर बहती है – नेपाल में सालिग्रामी नाम से उत्तर प्रदेश-बिहार की सीमा रेखा और बिहार का मैदानी क्षेत्र
लम्बाई (किमी) –  300 (भारत)
अपवाह क्षेत्र (वर्ग किमी) –  46,300 (कुल) तथा 7,620 (भारत)
अन्त – पटना के समीप गंगा नदी में
सहायक नदियाँ – काली गण्डक, त्रिशूली गंगा
नदी पर बने मुख्य बाँध – त्रिवेणी के निकट बैराज

राप्ती नदी (Rapti River)

उद्गम स्थल – रूकुमकोट (नेपाल)
प्रमुख प्रदेश/क्षेत्र जहाँ से होकर बहती है – उत्तरी-पूर्वी उत्तर प्रदेश
लम्बाई (किमी) –  640
अन्त – बरहस के समीप घाघरा नदी में

चम्बल नदी (Chambal River)

उद्गम स्थल – मध्य प्रदेश में मऊ के समीप विंध्य पर्वतमाला की जनापाव पहाडी
प्रमुख प्रदेश/क्षेत्र जहाँ से होकर बहती है – मध्य प्रदेश के धार, उज्जैन, रतलाम तथा मन्दसौर जनपद तथा मुरैना जनपद की उत्तरी सीमा, राजस्थान के कोटा, बूंदी, धौलपुर जनपद
लम्बाई (किमी) –  966
अपवाह क्षेत्र (वर्ग किमी) –  1,43,227
अन्त – इटावा के पास यमुना नदी में
सहायक नदियाँ – काली सिन्ध, सिप्ता, पार्वती, बनास, नेवाज, क्षिप्रा, दूधी
नदी पर बने मुख्य बाँध – गाँधी सागर, राणा प्रताप सागर तथा जवाहर सागर बाँध (राजस्थान)

बेतवा नदी (Betwa River)

उद्गम स्थल – रायसेन जनपद (मध्य प्रदेश) के कुमरा गाँव के समीप विंध्य पर्वतमाला
प्रमुख प्रदेश/क्षेत्र जहाँ से होकर बहती है – भोपाल, विदिशा, गुना, टीकमगढ़ (मध्य प्रदेश) तथा ललितपुर, झाँसी तथा हमीरपुर (उत्तर प्रदेश)
लम्बाई (किमी) –  480
अपवाह क्षेत्र (वर्ग किमी) –  45,580
अन्त – हमीरपुर के समीप यमुना नदी में
सहायक नदियाँ – धसान, बीना
नदी पर बने मुख्य बाँध – माताटीला बाँध (उत्तर प्रदेश), राजघाट बाँध

कैन नदी (Cane River)

उद्गम स्थल – सतना जनपद (मध्य के प्रदेश) में कैमूर पहाड़ियाँ
प्रमुख प्रदेश/क्षेत्र जहाँ से होकर बहती है – मध्य प्रदेश तथा दक्षिणी उत्तर प्रदेश
लम्बाई (किमी) –  360
अपवाह क्षेत्र (वर्ग किमी) –  28,224
अन्त – चिल्ला (बाँदा) समीप यमुना नदी में

सोन (स्वर्ण नदी) (Son (Svarn River))

उद्गम स्थल – अमरकण्टक की पहाड़ियों में सोनभद्रं जनपद
प्रमुख प्रदेश/क्षेत्र जहाँ से होकर बहती है – मध्य प्रदेश के सीथी और रीवा जनपद तथा बिहार के पालामऊ, औरंगाबाद तथा भोजपुर जनपद
लम्बाई (किमी) –  784
अपवाह क्षेत्र (वर्ग किमी) –  71,259
अन्त – उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर के दक्षिणी भाग से होती हुई पटना से पूर्व गंगा नदी में।
सहायक नदियाँ – महानदी, बांस, गोफ्त, रिहन्द, कांकर, उत्तरी कोयल, कांहर, घघर
नदी पर बने मुख्य बाँध – डेहरी में सिंचाई, सहायक नदी, बरास बाण, सागर बाँध, रिहन्द पर रिहन्द बाँध

उत्तर प्रदेश की मुख्य नदियाँ Major Rivers In Uttar Pradesh

प्रदेश का उत्तरी एवं पश्चिमी भाग ऊंचा है हिमालय पर पर्याप्त जल स्रोत है अतः प्रदेश की अधिकांश नदियों का प्रभाव उत्तर पश्चिम से दक्षिण पूर्व की ओर है। उद्गम स्थल के आधार पर प्रदेश की नदियों को तीन प्रकार से विभाजित किया जाता है:-

  1. हिमालय से निकलने वाली नदियाँ जैसे – गँगा, यमुना रामगंगा काली गंडक सरयू आदि इन नदियों में वर्ष भर जल बना रहता है।
  2. प्रदेश के मैदानी क्षेत्र में स्थित झीलों एवं दलदलों से निकलने वाले नदियां:- जैसे गोमती,वरुणा, पांडो, ईसन आदि। इन नदियोँ में गर्मी में जल का काफी कम हो जाता है लेकिन सूखती नहीँ।
  3. प्रदेश की दक्षिण में स्थित पठारों तथा विंध्य श्रेणियों से निकालने वाली नदियां जैसे:- सोन,रिहंद,टोंस, केन, चंबल, बेतवा आदि। इन नदियों में ग्रीष्म ऋतु में प्रायः जल का अभाव हो जाता है और अधिकांशता हां सूख भी जाती हैं।

?उत्तर प्रदेश मे नदी तंत्र?

 

गंगा:-

यह उत्तरी भारत के सबसे प्रमुख व हिन्दुओ की पवित्र धार्मिक नदी है गंगा को सुरसरि ,भागीरथी,पदमा, देवनदी,जान्हवी आसी नमो से जाना जाता है।

  • भागीरथी का उद्गम उत्तराखंड के केदारनाथ के समीप स्तिथि गंगोत्री ग्लेशियर के गुमुख नामक स्थान से होता है
  • उत्तराखंड में बहती हुई गंगा उत्तर प्रदेश में सर्वप्रथम बिजनौर जिले में प्रवेश करती है और राज्य में बहते हुए इसमें बाई ओर से रामगंगा ,गोमती,घाघरा, आदि नदिया तथा दाई ओर से यमुना,टोंस, चंद्रप्रभा,कर्मनाशा,आदि नदिया मिलती है।
  • रामगंगा कनौज के निकट, गोमती गाजीपुर के निकट, यमुना इलाहाबाद में, टोंस सिरसा के निकट, गंगा में मिलती है

यमुना:-
यह गंगा नदी क्रम की सबसे महत्वपूर्ण नदी है इसका उद्गम बंदर पूछ के पश्चिमी ढल पर स्तिथि यमुनोत्री हिमनद(उत्तरकाशी) है जो उत्तरकाशी के गर्म श्रोत से 8 किमी उत्तर स्तिथि है प्रदेश में इसका प्रवेश सहारनपुर के फैजाबाद नामक स्थान पर होता है

इनमे दाहिनी ओर से औरैया के मुराद गंज (पंचनंदा) के पास चम्बल ,हमीरपुर के पास बेतवा,जालौन के जमनपुर के निकट सिंधु,बाँदा के पैलानी व भजोह के निकट केन आदि नदियां तथा बाई ओर से नोएडा के पास हिंडन नदी मिलती है। यह बृहत चाप के आकार में बहती हुई प्रदेश के 19 जिलों (प्रयाग) इलाहाबाद में मिल जाती है इसकी लम्बी 1376 किमी है।

प.रामगंगा:-
यह पौढ़ी जिले के दूधातोली पर्वत के जलागम क्षत्र से निकलती है कालागढ़ किले के निकट मैदानों में उतरती है मैदानी यात्रा के 24 किमी के उपरांत कोह नदी इससे मिलती है यह नदी 690 किमी बहने के उपरांत कन्नौज के निकट गंगा में मिल जाती है।

काली(शारदा):-
काली नदी उत्तरखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्तिथि कालापानी नामक स्थान से तथा गौरी गंगा मिलम हिमनद से निकलती है टनकपुर के बाद इसे शारदा के नाम से जाना जाता है प्रदेश में सर्वप्रथम पीलीभीत जिले में प्रवेश करती है सीतापुर के बसरा या बहरामघट के निकट पहुचकर यह करनाली(घाघरा नदी) से मिल जाती है।

घाघरा (करनाली)
इस नदी का उद्गम तिब्बत के पठार पर स्तिथि मापचा चुंगो हिमनद से होता है यह नदी पर्वतीय प्रदेश से करनाली और मैदानी प्रदेश में घाघरा कहलाती है इसकी कुल लंबाई 1080 किमी है

राप्ती:-
राप्ती नेपाल के रुकुमकोट के समीप से निकलती है उत्तरी वहज में इसकी एक मुख्य शाखा बूढ़ी राप्ती के नाम से जानी जाती है इसकी मुख्य सहायक नदी रोहिणी है इसकी कुल लम्बाई 640 किमी है

गोमती:-गोमती एक स्थलीय नदी है जिसका उद्गम स्थान पीलीभीत का दलदली क्षेत्र है पीलीभीत से यह शाहजहापुर , खीरी, सीतापुर, लखनऊ, सुल्तानपुर, एवं जौनपुर आदि जिलों में बहती है गाजीपुर के निकट कैथी नामक स्थान पर गंगा नदी में मिल जाती है इसकी लम्बाई 940 किमी है।

गण्डक:-
यह नेपाल में सलिग्रामी तथा मैदानमे नारायणी कहलाती है गोल व चिकने सालिगराम पत्थर बहकर लाने के कारण यह नाम दिया गया। इसकी दो प्रमुख सहायक नदियां पश्चिम में काली व पूर्व में त्रिशूल गंगा है इसकी लम्बाई 425 किमी है

चम्बल:-
चम्बल का उद्गम मध्य्प्रदेश में इंदौर के पास महू के निकट स्तिथि जनपव पहाड़ी से हुआ है। इटावा से लगभग 40 किमी दूर पंचनंदा स्थान पर यमुना में मिल जाती है। इसकी कुल लम्बाई 1050 किमी है

बेतवा:-
इस नदी को संस्कृत में वेत्रवती कहा जाता है यह मध्यप्रदेश में भोपाल के दक्षिण पश्चिम से निकलकर भोपाल,ग्वालियर,ललितपुर,जालौन से होती है इस लम्बाई 480 किमी है।

टोंस:- (तमसा)
इसका उद्गम मैहर के निकट तमसा कुंड से होता है इसके मार्ग में कई सुंदर जल प्रपात है इसकी कुल लम्बाई 265 किमी है

केन:-
केन को संस्कृत में कर्णवती कहा जाता है।इसका उद्गम कैमुर पहाड़ियों के उत्तरी ढल है इस नदी की कुल लम्बाई 308 किमी है।

सोन:-
इसे स्वर्ण नदी भी कहा जाता है यह अमरकंटक पहाड़ी के शोषकुण्ड नामक स्थान से निकलकर पूर्व की मध्यप्रदेश में बहने के बाद उत्तर प्रदेश के सोन भद्र में बहती है इसकी लम्बाई 780 किमी है।

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उत्तर प्रदेश की मुख्य झीलें व कुंड (Major Lakes in Uttar Pradesh)

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उत्तर प्रदेश की मुख्य झीलें व कुंड (Major Lakes in Uttar Pradesh)

यद्यपि प्रदेश में प्रायः झीलों का अभाव ही है फिर भी झीलों का निर्माण भू-गार्भिक हलचलों, गर्तों के जलप्लावित होने से तथा नदियों के मोङ्गों से निर्मित गोखुर झील आदि के अनेक उदाहरण राज्य में दृष्टिगोचर होते हैं। उत्तर प्रदेश में स्थित प्रमुख झीलों/ तालों/कुण्डों की सूची इस प्रकार है –

झीलें/ताल स्थान
रामगढ़ ताल गोरखपुर
बखिरा झील संत कबीर नगर
करेला व इतौज्ञा झील लखनऊ
बड़ाताल (गौखुर) शाहजहाँपुर
सिरसी जलाशय मिर्जापुर
टाण्डा दरी ताल (दरारगर्त) मिर्जापुर
भुगेताल व विसैथाताल रायबरेली
लीलौर झील बरेली
बेती तथा नइया झील प्रतापगढ़
जिर्गो जलाशय मिर्जापुर
कुन्द्रा समुन्दर उन्नाव
मोती व गौर झील रामपुर
शुक्रताल मुजफ्फरनगर
मोराय ताल फतेहपुर
कीमठ ताल आगरा
गोविन्द बल्लभ पंत सागर (कृत्रिम झील) सोनभद्र
आँधी ताल वाराणसी
राजा का बाँध सुल्तानपुर
लौधी व भोजपुर ताल सुल्तानपुर
दरवन झील फैज़ाबाद
बल हापारा कानपुर
बरूआ सागर व भसनेह जलाशय झाँसी
लक्ष्मीताल झाँसी
मदन सागर महोबा
फुल्हर झील पीलीभीत
दहर झील हरदोई
देवरिया ताल कन्नौज
नौह झील मथुरा
राधा व श्याम कुण्ड गोवर्धन, मथुरा
मानसीगंगा कुण्ड/ताल गोवर्धन, मथुरा

उत्तर प्रदेश की मुख्य झीलें व कुंड (Major Lakes in Uttar Pradesh)

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उत्तर प्रदेश के प्रमुख हवाई अड्डे (Airports in Uttar Pradesh)

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उत्तर प्रदेश के प्रमुख हवाई अड्डे (Airports in Uttar Pradesh)

उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित विभिन्न राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डों (Major List of National and International Airports in Uttar Pradesh) की सूची इस प्रकार है –

उत्तर प्रदेश के प्रमुख हवाई अड्डे (Airports in Uttar Pradesh)

हवाई अड्डे स्थान
चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (अमौसी हवाई अड्डा) अमौसी (लखनऊ)
लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (बाबतपुर हवाई अड्डा) बाबतपुर (वाराणसी)
सरसावा हवाई अड्डा सहारनपुर
हिंडन हवाई अड्डा गाजियाबाद
फैजाबाद एयरपोर्ट फैजाबाद
बमरौली हवाई अड्डा इलाहाबाद
चकेरी हवाई अड्डा अहिरवाँ (कानपुर)
नागरिक हवाई अड्डा कानपुर
खेरिया हवाई अड्डा आगरा
बरेली हवाई अड्डा बरेली
ललितपुर हवाई अड्डा ललितपुर
झांसी हवाई अड्डा ( भारतीय सेना का एयरपोर्ट) झांसी
बाबा गोरखनाथ हवाई अड्डा गोरखपुर
आईआईटी कानपुर हवाई अड्डा (कल्याणपुर हवाई अड्डा) कानपुर
ताज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (प्रस्तावित) आगरा
जेवर हवाई अड्डा (निर्माणाधीन) गौतमबुद्ध
कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा कुशीनगर
एयरपोर्ट फ्लाइंग स्कूल ( सैफई ) इटावा
इंदिरा गांधी हवाई अड्डा रायबरेली
बी आर अंबेडकर एयरपोर्ट मेरठ

उत्तर प्रदेश के प्रमुख हवाई अड्डे (Airports in Uttar Pradesh)

List of airports in Uttar Pradesh in hindi

जिले का नाम
हवाई अड्डे का नाम
गाजियाबाद जिला
हिंडन हवाई अड्डा
सहारनपुर
सरसावा हवाई अड्डा
गौतम बुद्ध नगर
जेवर हवाई अड्डा
आगरा
खेरिया हवाई अड्डा
इटावा
एयरपोर्ट फ्लाइंग स्कूल ( सैफई )
कानपुर नगर
ITI हवाई अड्डा, चकेरी हवाई अड्डा
झांसी
झांसी हवाई अड्डा ( भारतीय सेना का एयरपोर्ट)
बरेली
बरेली हवाई अड्डा
लखनऊ
चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डा ( अमौसी हवाई अड्डा), भारतीय वायुसेना का एयरपोर्ट ( बख्शी का तालाब)
फैजाबाद
फैज़ाबाद एयरपोर्ट
गोरखपुर
बाबा गोरखनाथ हवाई अड्डा
कुशीनगर
कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
वाराणसी
लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा ( बाबतपुर)
इलाहाबाद
बमरौली हवाई अड्डा
रायबरेली
इंदिरा गांधी हवाई अड्डा
मेरठ
बी आर अंबेडकर एयरपोर्ट

उत्तर प्रदेश के प्रमुख हवाई अड्डे

उत्तर प्रदेश के प्रमुख हवाई अड्डे व उनकी स्थिति निम्नलिखित है

  1. हिंडन हवाई अड्डा – गाजियाबाद 
  2. सरसावा हवाई अड्डा – सहारनपुर 
  3. चौधरी चरण सिंह अन्तराष्ट्रीय हवाई अड्डा – लखनऊ 
  4. लाल बहादुर शास्त्री अन्तराष्ट्रीय हवाई अड्डा – वाराणसी 
  5. बमरौली हवाई अड्डा – इलाहाबाद 
  6. चकेरी हवाई अड्डा – कानपुर
  7. नागरिक हवाई अड्डा – कानपुर 
  8. खेरिया हवाई अड्डा – आगरा 
  9. फैजाबाद हवाई अड्डा – फैजाबाद 
  10. जेवर हवाई अड्डा –  गौतम बुद्ध नगर 
  11. ललितपुर हवाई अड्डा – ललितपुर 
  12. झांसी हवाई अड्डा –   झाँसी 
  13. ताज अन्तराष्ट्रीय हवाई अड्डा –   ग्रेटर नॉएडा 
  14. बरेली हवाई अड्डा – बरेली 

 

उत्तर प्रदेश में कितने हवाई अड्डे है,

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उत्तर प्रदेश राज्य के प्रमुख शहरों के नाम व उपनाम (Name and Sobriquet of Major Cities in Uttar Pradesh)

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उत्तर प्रदेश राज्य के प्रमुख शहरों के नाम व उपनाम (Name and Sobriquet of Major Cities in Uttar Pradesh)

उत्तर प्रदेश राज्य के प्रमुख शहर, नगरों के नाम व उनके उपनाम –

शहर का नाम उपनाम
लखनऊ नवाबों का शहर, बागौ का नगर, नजाकत नफासत का शहर
वाराणसी घाटों का नगर, विश्वनाथ नगरी, मुक्त नगर
आगरा ताज नगरी, पेठानगरी
इलाहाबाद संगम नगरी, कुम्भनगरी, तार्थराज
गोरखपुर गोरख धाम, नाथ नगर
मथुरा कृष्ण नगरी , पेड़ों का नगर, पण्डों  का नगरी
फिरोजाबाद चूड़ा नगरी, सुहागनगरी
मुरादाबाद बर्तनों का शहर, पीतल नगरी
मलाहाबाद आमी का नगर
गाजियाबाद उद्योग नगरी, छोटा दिल्ला
अयोध्या रामनगरी, रामभूमि स्थल, तार्थनगर
कन्नोज खुशबुओं का शहर, इत्रनगरी
अलीगढ़ ताला नगरी
बरेला सुरमा नगरी, बांस बरेला
कानपुर उद्योग नगरी, चर्मनगर
मेरठ क्रान्ति नगर, केंचा नगर
रामपुर चाकुओं का नगर, नवाबों का शहर
गाजीपुर काशी की बहिन

उत्तर प्रदेश राज्य के प्रमुख शहरों के नाम व उपनाम (Name and Sobriquet of Major Cities in Uttar Pradesh)

इलाहबाद – संगम नगरी, कुम्भनगरी, तीर्थराज, अमरुद नगरी

प्रतापगढ़ – आंवला नगरी

मलीहाबाद – आमों का नगर

गोरखपुर – गोरख-धाम, नाथ नगर, गीता प्रेस नगर

कानपुर – चर्मनगर, उद्योग नगर, पूर्वोत्तर भारत का मैनचेस्टर

गाजियाबाद – छोटा दिल्ली, उद्योग नगरी

नोएडा – उत्तर प्रदेश का शो विंडो

अयोध्या – रामनगर, रामजन्मभूमि स्थल

शुक्रताल – भागवत कथा नगर

नैमिषारण्य – 88 हज़ार ऋषियों की तपोभूमि, 30 हज़ार तीर्थों का स्थान

मेरठ – कैंची नगर, क्रांति नगर

कन्नौज – इत्रनगरी, खुशबुओं का शहर

गाजीपुर – काशी की बहन

चंदौली – धान का कटोरा

रामपुर – चाकुओं का नगर

आगरा – ताजनगरी, पेठानगरी

संडीला (हरदोई) – लड्डू नगरी

फ़िरोज़ाबाद – सुहागनगरी, चूड़ीनगरी

हाथरस – हींग व गुलाल नगरी

मथुरा – कृष्णनगरी, पेड़ानगर, पंडो का नगर

अलीगढ – ताला नगरी

सोनभद्र – सोनांचल, पावर कैपिटल ऑफ़ इंडिया

बरेली – बांस बरेली, सुरमा नगरी

लखनऊ – नवाबों का शहर, बागों का नगर, नजाकत-नफासत का शहर

मुरादाबाद – पीतल नगरी, बर्तनों का शहर

जौनपुर – शिराज-ए-हिन्द, पूर्व का शिराज

वाराणसी – विश्वनाथ नगरी, शिव नगरी, घाटों का नगर, मुक्ति क्षेत्र

इलाहबाद – संगम नगरी, कुम्भनगरी, तीर्थराज, अमरुद नगरी

प्रतापगढ़ – आंवला नगरी

मलीहाबाद – आमों का नगर

गोरखपुर – गोरख-धाम, नाथ नगर, गीता प्रेस नगर

कानपुर – चर्मनगर, उद्योग नगर, पूर्वोत्तर भारत का मैनचेस्टर

गाजियाबाद – छोटा दिल्ली, उद्योग नगरी

नोएडा – उत्तर प्रदेश का शो विंडो

अयोध्या – रामनगर, रामजन्मभूमि स्थल

शुक्रताल – भागवत कथा नगर

नैमिषारण्य – 88 हज़ार ऋषियों की तपोभूमि, 30 हज़ार तीर्थों का स्थान

मेरठ – कैंची नगर, क्रांति नगर

कन्नौज – इत्रनगरी, खुशबुओं का शहर

गाजीपुर – काशी की बहन

चंदौली – धान का कटोरा

रामपुर – चाकुओं का नगर

आगरा – ताजनगरी, पेठानगरी

संडीला (हरदोई) – लड्डू नगरी

फ़िरोज़ाबाद – सुहागनगरी, चूड़ीनगरी

हाथरस – हींग व गुलाल नगरी

मथुरा – कृष्णनगरी, पेड़ानगर, पंडो का नगर

अलीगढ – ताला नगरी

सोनभद्र – सोनांचल, पावर कैपिटल ऑफ़ इंडिया

बरेली – बांस बरेली, सुरमा नगरी

लखनऊ – नवाबों का शहर, बागों का नगर, नजाकत-नफासत का शहर

मुरादाबाद – पीतल नगरी, बर्तनों का शहर

जौनपुर – शिराज-ए-हिन्द, पूर्व का शिराज

वाराणसी – विश्वनाथ नगरी, शिव नगरी, घाटों का नगर, मुक्ति क्षेत्र

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नदियों के किनारे बसे प्रमुख नगर (Major Cities of Uttar Pradesh, Town on the banks of different Rivers)

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नदियों के किनारे बसे प्रमुख नगर (Major Cities of Uttar Pradesh, Town on the banks of different Rivers)

नदियों के किनारे बसे प्रमुख नगर
(Major Cities of Uttar Pradesh, Town on the banks of different Rivers)

उत्तर प्रदेश में कई नदियां बहती है, और यहाँ के अधिकतर शहर (नगर) नदियों के किनारे बसे हुए है, इनमे से कुछ शहर इस प्रकार है।

यमुना नदी के किनारे स्थित प्रमुख नगर

  • मथुरा, वृन्दावन, आगरा, इटावा, कालपी, कौशाम्बी, हमीरपुर।

गंगा नदी के किनारे स्थित प्रमुख नगर

  • कानपुर, वाराणसी, गुढ़मुक्तेश्वर, कन्नौज, इलाहाबाद, गाजीपुर।

सरयू नदी के किनारे स्थित प्रमुख नगर

  • अयोध्या।

गोमती नदी के किनारे स्थित प्रमुख नगर

  • लखनऊ, जौनपुर, सुल्तानपुर, शाहजहाँपुर, सीतापुर, खीरी।

रामगंगा नदी के किनारे स्थित प्रमुख नगर

  • बिजनौर, मुरादाबाद, बरेली, बदायूँ।

राप्ती नदी के किनारे स्थित प्रमुख नगर

  • गोरखपुर, बस्ती, गोंडा, बहराइच।

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उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग National Highways of Uttar Pradesh UP GK in Hindi

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उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग National Highways of Uttar Pradesh UP GK in Hindi

उत्तर प्रदेश से होकर गुजरने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग
(National Highways passing through Uttar Pradesh)

उत्तर प्रदेश से होकर गुजरने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highways – 7) है – NH-2, NH-3, NH-7, NH-11, NH-24, NH-25, NH-26, NH-27, NH-28, NH-29, NH-56, NH-86, NH-87, NH-22A, NH-12A, NH-19, NH-24A, NH-24B, NH-25A, NH-28B, NH-28C, NH-56A, NH-56B, NH-58, NH-72A, NH-73, NH-74, NH-75, NH-76, NH-91, NH-91A, NH-92, NH-93, NH-96, NH-97, NH-119, NH-231, NH-232, NH-232A, NH-233, NH-235, NE-II, NH-3A, NH-330A, NH-730, NH-730A, NH-931 और NH-931A है।

उत्तर प्रदेश से गुजरने वाले कुछ प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग व उनसे सम्बंधित शहर निम्नलिखित है –
(Major National Highways Passing Through Uttar Pradesh and The Cities related to them are the following:-)

  • NH-2 – दिल्ली – मथुरा – आगरा – कानपूर – इलाहाबाद – वाराणसी – कोलकाता
  • NH-3 – आगरा – ग्वालियर – इंदौर – नासिक – मुंबई
  • NH-7 – वाराणसी – रीवा – कन्याकुमारी
  • NH-11 – आगरा – जयपुर – बीकानेर
  • NH-24 – दिल्ली – बरेली – लखनऊ
  • NH-26 – झाँसी – लखनदेव
  • NH-26 – इलाहबाद – मनगवां
  • NH-28 – बरौनी – मुजफ्फरपुर – पिपरा – गोरखपुर – लखनऊ
  • NH-29 – गोरखपुर – गाजीपुर – वाराणसी
  • NH-56 – लखनऊ – वाराणसी
  • NH-86 – कानपुर – छतरपुर – भोपाल
  • NH-87 – रामपुर – पंतनगर – नैनीताल – रानीखेत – गैरसैण – कर्ण प्रयाग

Key Notes – 

  • राष्ट्रीय राजमार्ग 7 (National Highways – 7) की कुल लंबाई 2369 किमी है। यह भारत का सबसे बड़ा राजमार्ग है, जो उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर को भारत के दक्षिणी कोने, तमिलनाडु के कन्याकुमारी शहर के साथ जोड़ता है।
  • उत्तर प्रदेश से होकर निकलने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल संख्या 60 है। भारत में लगभग 87 राष्ट्रीय राजमार्ग हैं और भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लम्बाई लगभग 115,435 किमी है।
  • उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय परिवहन 15 मई,1947 से शुरू हुआ था।
  • केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways of Uttar Pradesh) की कुल लम्बाई 8483 किमी. है। इस प्रकार यह प्रदेश पूरे देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लम्बाई के मामले में पहले नम्बर पर है और राजस्थान दूसरे नम्बर पर है।
  • उत्तर प्रदेश से होकर गुजरने वाला सबसे लम्बा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 2 है जो दिल्ली को कोलकाता से जोड़ता है

उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग National Highways of Uttar Pradesh UP GK in Hindi

केंद्र सरकार ने बाराबंकी-देवा शरीफ-लखीमपुर रोड समेत 25 मार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) घोषित कर दिया है। इसे प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अब इन सड़कों का रखरखाव पूरी तरह से केंद्र सरकार के जिम्मे होगा। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने इन सभी सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए हैं। बाराबंकी-देवा शरीफ-लखीमपुर मार्ग को एनएच घोषित कर 727-एच नंबर दिया गया है। यह मार्ग बाराबंकी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-27 के साथ अपने जंक्शन से शुरू होकर देवाशरीफ, फतेहपुर, महमूदाबाद, बिसवां, लहरपुर को जोड़ते हुए लखीमपुर के पास एनएच-730 के साथ अपने जंक्शन पर खत्म होगा।

इसी तरह से सैदपुर के पास एनएच-31 के साथ अपने जंक्शन से शुरू होकर खुटहन, जौनपुर, सुल्तानपुर, लखनऊ, हरदोई व शाहजहांपुर को जोड़ते हुए पलिया में खत्म होगा। इसी तरह से हरैया के पास एनएच-27 के साथ अपने जंक्शन से शुरू होकर बभनान, स्वामीनारायण, छपिया, मनकापुर को जोड़ते हुए गोंडा के पास एनएच-330 पर खत्म होने वाले मार्ग को भी एनएच-727 जी घोषित किया गया है।

इस मार्ग की कुल लंबाई 70 किलोमीटर है। कन्नौज-बिलग्राम-हरदोई और बधौली-मिश्रिख-सीतापुर मार्ग को मिलाकर एनएच-330 डी घोषित किया गया है। इसकी कुल लंबाई 129 किलोमीटर है। इन सड़कों के एनएच घोषित होने से इनके निर्माण व रखरखाव की जिम्मेदारी एनएचएआई की होगी।

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