October 16, 2018 | Hindigk50k

भारत के गाँव पर निबंध-Essay On Indian Village In Hindi

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भारत के गाँव पर निबंध-Essay On Indian Village In Hindi

भारत गाँवों का देश है। भारत की अधिकतम जनता गाँवों में निवास करती हैं। महात्मा गाँधी कहते थे कि वास्तविक भारत का दर्शन गाँवों में ही सम्भव है जहाँ भारत की आत्मा बसी हुई है।

essay on bharat ke gaon in hindiआज हममें से कितने लोगों ने गाँव देखे हैं? गाँव जिन्हें भगवान ने बनाया, जहाँ प्रकृति का सौन्दर्य बिखरा पड़ा है- हरे भरे खेत, कल कल करती नदियाँ, कुँयें की रहट पर सजी धजी औरतों की खिलखिलाहट, हुक्का पीते किसान, गाय के पीछे दौड़ते बच्चे, पेड़ों से आम तोड़कर खट्टे आम खाती किशोरियाँ, तितलियाँ पकड़ते किशोरन बाजरा और मक्की की रोटी, दूध दही, मक्खन और घी की बहुलता यह सब कल्पना में आता है जब हम गाँव की बात करते हैं।

भारत के गाँव उन्नत और समृद्ध थे। ग्रामीण कृषक कृषि पर गर्व अनुभव करते थे, संतुष्ट थे। गाँवों में कुटीर उद्योग फलते फूलते थे। लोग सुखी थे। भारत के गाँवों में स्वर्ग बसता था। किन्तु समय बीतने के साथ नगरों का विकास होता गया और गाँव पिछड़ते गये।

भारत के गाँवों की दशा अब दयनीय है। इसका मुख्य कारण अशिक्षा है। अशिक्षित होने के कारण ग्रामीण अत्यधिक आस्तिक, रूढ़िवादी और पौराणिक विचारधारा के हैं। गाँवों में साहूकारों, जमींदारों और व्यापारियों का अनावश्यक दबदबा है। किसान प्रकृति पर निर्भर करते हैं और सदैव सूखा तथा बाढ़ की चपेट में आकर नुकसान उठाते हैं। कर्जों में फंसे, तंगी में जीते, छोटे छोटे झगड़ों को निपटाने के लिए कचहरी के चक्कर लगाते हुए ये अपना जीवन बिता देते हैं।

गाँव में कृषि कार्य पर पूरी तरह निर्भरता अब पूरे परिवार की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाती। जनसंख्या के निरंतर विकास से खेत छोटे छोटे हो रहे हैं। अतः कृषि के आधुनिक साधन प्रयोग नहीं हो पाते। संक्षेप में गाँववासी अब नगरों की चकाचौंध से प्रभावित हैं। युवा अब गाँव में नहीं रहना चाहता। वह शिक्षा, नौकरी और सुख सुविधाओं का पीछा करते हुए नगर पहुँचता है।

सरकार गाँवों के विकास के लिये प्रयत्न कर रही है। गाँवों में बिजली, पानी, शिक्षा और इलाज के लिए सभी सुविधायें जुटा रही है। बैंक इत्यादि गाँवों की उन्नति में अपना पूर्ण सहयोग दे रही हैं।

भारत के गाँव पर निबंध :

भूमिका : हमारे भारत को गांवों का देश कहा जाता है। भारत की अस्सी प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। गांवों के लोगों का जीवन नगरो में रहने वाले लोगों से बिलकुल अलग होता है। गाँव के लोग भोले होते हैं। वे कड़ी मेहनत और परिश्रम करके दूसरों के पेट भरने के लिए अनाज उगाते हैं।

वे कई शताब्दियों से परम्पराओं के आधार पर अपना जीवन जीते आ रहे हैं लेकिन हमारे गाँव शिवपुरा में लोग सामाजिक संबंध व्यवस्था, भाईचारे और सहयोग के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। गांवों में हमे भारतीय संस्क्रति के दर्शन करने को मिलते हैं।

गाँव की स्थिति : हमारा गाँव जमुना के तट पर स्थित है। करनाल के बीस किलोमीटर की दूरी पर बसा एक गाँव हैं शिवपुरा यह हमारा गाँव है। मुख्य सडक से गाँव तक की पक्की लिंक रोड है। सड़कों के दोनों ओर छायादार वृक्ष लगे हुए हैं। गाँव में घुसते ही वहाँ पर एक सुंदर तालाब है।

तालाब को पक्के घाट से बनाया गया है। तालाब का दूसरा सिरा खेतों से लगा हुआ है। तालाब का पानी साफ और स्वच्छ है। तालाब की दूसरी दिशा में पंचायत घर है। हमारे गाँव में बनी सारी नालियां पक्की हैं। हमारे गाँव में बिजली और पीने के पानी की अच्छी व्यवस्था है। यहाँ पर लगभग चार सौ परिवार रहते हैं।

गाँव के लोगों का व्यवसाय : हमारे गाँव के लोगों का व्यवसाय कृषि करना और पशुपालन करना है। हमारे गाँव के किसान आधुनिक ढंग से बनाए गये कृषि के यंत्रों का प्रयोग करते हैं। हमारे गाँव में बैलों की जगह पर ट्रैक्टरों का प्रयोग किया जाता है। अच्छे किस्म के बीजों को प्रयोग में लाया जाता है।

खाद का प्रयोग आवश्यकतानुसार ही किया जाता है। हमारे गाँव में अच्छी नस्लों वाली भैसों और गायों का पालन किया जाता है। हमारे गांव के किसान दूध बेचकर अच्छा धन कमाते हैं। हमारे गाँव में गेंहूँ, चावल, गन्ना, ज्वार, बाजरा सरसों और मक्का की खेती की जाती है।

गाँव की पंचायत : हमारे गाँव का प्रत्येक कार्य गाँव की पंचायत के द्वारा किया जाता है। हमारे गाँव में सात पंचों के साथ-साथ एक सरपंच भी है। हमारे गाँव में पुरुष और महिला में भेदभाव नहीं किया जाता है इसी वजह से दो महिलाएं पंच हैं जो लोगों के साथ मिलकर गाँव के विकास का काम करती हैं।

चौधरी राम सिंह हमारे गाँव के सरपंच हैं। चौधरी राम सिंह ने बी० ए० पास किया है और हमारे गाँव के सबसे ईमानदार और सम्मानित व्यक्ति हैं। गाँव के कार्यों के लिए बहुत सी समितियों का गठन किया गया है। सफाई समिति हमारे गाँव की गलियों, नालियों, तालाब और नालों के आस-पास की सफाई का काम करवाती हैं।

यह समिति लोगों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था भी करती हैं। बच्चों के पढने के लिए सरकारी स्कूल भी बनवाये गये हैं। बच्चों को उचित शिक्षा व्यवस्था के लिए शिक्षा समिति का भी गठन किया गया है। गरीब लोगों की मदद करने के लिए एक समिति है उसके सरपंच राम सिंह हैं।

स्वस्थ्य प्रबंध और डाक व्यवस्था : हमारे गाँव में दस बिस्तर का एक अस्पताल भी है। इसमें डॉक्टर और नर्सों की भी व्यवस्था है। इस अस्पताल में गाँव के आस-पास के सभी लोगों का इलाज किया जाता है। हमारे गाँव में डाक खाने की भी व्यवस्था है। वह हर रोज नगर से यहाँ पर आता है। यहाँ पर एक डाकिया भी है जो हमारे ही गाँव का है। लोगों की जन सेवा के लिए हमारे गाँव में टेलीफोन की व्यवस्था की गई है।

खेल-कूद और मेलों का प्रबंध : हमारे गाँव में खेल कूद की व्यवस्था भी की गई है। शाम को युवक स्कूल के मैदान में फुटबॉल और वॉलीबाल खेलते हैं। खेलों की सामग्री पंचायत द्वारा पूरी की गई है। हमारे गाँव की क्रिकेट की टीम पूरे ब्लॉक में पहले नम्बर पर रहती है। हमारे गाँव में लोगों को कुश्ती भी सिखाई जाती है। जगराम हमारे गाँव को कुश्ती के लिए प्रेरित करते हैं। हमारे गाँव में हर साल बसंत पंचमी पर मेला लगता है और आस-पास के गाँव इस मेले में भाग लेने के लिए आते हैं।

विकास की ओर अग्रसर : हमारा गाँव विकास की तरफ हमेशा आगे बढ़ता रहता है। यहाँ की सरकार ने दुर्बल लोगों के लिए चौपालें बनाई हैं। छोटे से उद्योग धंधों की व्यवस्था के लिए लोगों की ऋण की व्यवस्था भी की गई है। कृषि के विकास के लिए सहकारी समिति से ऋण दिया जाता है। किसानों को बीज और खाद भी सहकारी समिति ही देती है। गाँव में सभी को साक्षर बनाने के लिए शिक्षा की भी व्यवस्था की गई है।

उपसंहार : हमारा गाँव एक आदर्श गाँव है। यहाँ के लोगों में सद्भावना का भाव है। वे सभी त्यौहारों और रीति -रिवाजों को मिलजुल कर मनाते हैं। हमें अपने गाँव पर बहुत गर्व है कि हमारा गाँव भारत का एक हिस्सा है। मुझे अपने गाँव से बहुत प्यार है और मैं अपने गाँव के उज्ज्वल भविष्य की इच्छा रखता हूँ।

भारत के गाँव पर निबंध-Essay On Indian Village In Hindi

भारतीय गाँव पर निबंध | Essay on Indian Village in Hindi!

भारत एक कृषि प्रधान देश है । प्राचीन काल से ही हमारे देश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार कृषि ही रहा है । कृषि पर हमारी निर्भरता के साथ ही यह भी तथ्य हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है कि देश की सत्तर-प्रतिशत से भी अधिक जनसंख्या गाँवों में ही निवास करती है । किसी कवि ने सत्य ही लिखा है – ” है अपना हिंदुस्तान कहाँ, यह बसा हमारे गाँवों में । ”

अत: भारतवर्ष के महत्व का वास्तविक मूल्यांकन यहाँ के गाँवों से ही संभव है । उन्हें किसी भी दृष्टिकोण से पृथक् नहीं किया जा सकता है । प्राचीन काल में ‘सोने की चिड़िया’ कहलाने वाला हमारा देश धन-धान्य से परिपूर्ण था परंतु विदेशियों के निरंतर आक्रमण तथा इसके पश्चात् अंग्रेजों का आधिपत्य होने के उपरांत भारतीय गाँवों की दशा अत्यंत दयनीय व सभी के लिए चिंता का विषय बन गई ।

भारतीय गाँव समय के साथ बेरोजगारी, अज्ञानता तथा पिछड़ेपन का पर्याय बनकर रह गए ।भारतीय गाँवों की दयनीय व जर्जर अवस्था के अनेक कारण हैं । इतिहास की ओर यदि हम दृष्टि डालें तो हम देखते हैं कि मुगलों के आक्रमण के पश्चात् जब देश में अंग्रेजों का आधिपत्य हुआ, तब गाँवों की दशा अत्यंत चिंतनीय थी ।

इसका प्रमुख कारण था कि अंग्रेजों ने कभी भी भारत को आत्मसात् नहीं किया । उनका दृष्टिकोण सदैव भारत के प्रति व्यावसायिक ही रहा जिसके फलस्वरूप यहाँ के कुटीर उद्‌योग तथा कृषि व्यवस्था का ह्रास होता रहा । अंग्रेजों के साथ-साथ जमींदारों व सेठ-साहूकारों के निरंतर शोषण ने भी ग्रामीणों को उबरने का कभी अवसर प्रदान नहीं किया ।

देश के गाँवों में रहने वाले अधिकांश लोग आज भी रूढ़िवादिता तथा अंधविश्वासों से ग्रसित हैं । पुरानी परंपराओं तथा सामाजिक बंधनों ने उन्हें इस प्रकार जकड़ रखा है कि वे स्वतंत्रता प्राप्ति के पाँच दशकों के बाद भी विकास की प्रमुख धारा से स्वयं को पृथक् किए हुए हैं ।

जातिवाद, भाषावाद जैसी विषमताएँ आज भी उतनी ही प्रबल हैं जितनी वह पहले हुआ करती थीं । झूठी शान-शौकत अथवा सामाजिक प्रतिष्ठा हेतु कुछ लोग सामर्थ्य से अधिक कर्ज ले लेते हैं जिसे वे जीवन पर्यंत चुकाने में असमर्थ रहते हैं ।

गरीबी और अशिक्षा के कारण लोग निरंतर बच्चे पैदा करते रहते हैं जो उनके जीवन स्तर को तो नीचे की ओर खींचता ही है साथ ही साथ समुचित भरण-पोषण व शिक्षा के अभाव में बच्चों के भविष्य को भी अंधकारमय बना देता है ।

 

गाँवों के लोग अभी भी कई प्रकार की ऐसी समस्याओं से जुड़े हैं जिनका समाधान थोड़े से सामूहिक प्रयासों से संभव है । गाँवों में ऊर्जा के गैर-परंपरागत साधनों के प्रयोग की काफी संभावनाएँ हैं परंतु गाँवों की निरंतर उपेक्षा के कारण लोग अभी तक उपले जलाकर खाना पका रहे हैं ।

विज्ञान व तकनीक के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने अपार सफलता अर्जित की है जिसके फलस्वरूप दुनिया सिमटती हुई प्रतीत होती है । विकास की इस दौड़ में भारतीय गाँव भी अब अछूते नहीं रहे हैं । हमारी सरकार भी ग्रामीण विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रही है ।

आज दूर-दराज के गाँवों को भी बिजली-पानी आदि सभी जरूरत की चीजें उपलब्ध कराई जा रही हैं । दूरदर्शन व अन्य संचार माध्यमों के द्‌वारा ग्रामीण लोगों को उत्तम कृषि, स्वास्थ्य व उत्तम रहन-सहन संबंधी जानकारी दी जा रही है ।

गाँवों को सड़क तथा रेलमार्गों द्‌वारा शहरों से जोड़ने की प्रक्रिया निरंतर जारी है । गाँवों के विकास हेतु सरकार द्‌वारा अनेक परियोजनाएँ समय-समय पर प्रस्तुत की गई हैं। इनमें पंचायती राज व्यवस्था भी प्रमुख है जिससे ग्रामीण दशा में काफी सुधार हुआ है । सरकार, ग्रामीणजनों तथा समस्त भारतीय नागरिकों का सामूहिक प्रयास अवश्य ही रंग लाएगा और हमारे भारतीय गाँव आदर्श गाँव बन सकेंगे ।

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भारत की राजधानी–दिल्ली पर निबंध-Essay On Delhi In Hindi

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भारत की राजधानी–दिल्ली पर निबंध-Essay On Delhi In Hindi

भारत की राजधानी–दिल्ली पर निबंध (Essay On Delhi In Hindi) :

भूमिका : हमारा भारत एक विशाल देश है। भारत में कई प्रदेश हैं। भारत के हर प्रदेश में कई नगर हैं। भारत के हर नगर का अपने एक विशेष महत्व है। कोई नगर प्राकृतिक दृष्टि से अपना महत्व रखता है तो कोई सांस्कृतिक दृष्टि से गरिमापूर्ण है। कोई औद्योगिक दृष्टि से समृद्ध है तो कोई अपने धार्मिक स्थान होने की वजह से देश के निवासियों के लिए वंदनीय है।

कोई नगर ऐतिहासिक यादों को संजोये होने की वजह से देश-विदेश के लोगों को आकृष्ट करता है तो कोई नगर राजनीति में होने वाली हल-चल की वजह से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। लेकिन दिल्ली भारत का एक विशाल नगर है जो अनेक नजरों से बहुत महत्वपूर्ण है। दिल्ली भारत की राजधानी है।

दिल्ली भारत का दिल भी है और धडकन भी। दिल्ली एक ऐसा दर्पण है जिसमें पुरे भारत का चित्र दिखाई देता है। दिल्ली राजनीतिक , सामाजिक ,धार्मिक , सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रंगमंच है जो कहीं भी दिखाई नहीं देता। वास्तविकता में कहें तो दिल्ली भारत का दिल है। इसका उल्लेख कई साहित्यकारों ने किया। दिल्ली का एक नाम इंद्रप्रस्थ भी था।

दिल्ली की ऐतिहासिकता :- दिल्ली भारत की एक ऐतिहासिक नगरी है। दिल्ली को ऐतिहासिक रूप से अनंगपाल और पृथ्वीराज की दिल्ली कहा जाता है। ये दिल्ली कभी तो फूलों की सेज पर सोई है और कभी काँटों का ताज पहन कर रोई है। कभी दुल्हनों की तरह सजी है और कभी इसके माथे से सिंदूर मिटाया गया है।

यवन बादशाहों ने भी यहाँ पर अपनी कूटनीति का जल बिछाया था। कुछ राज वंशों ने इसे संवारा तो कुछ लुटेरों ने इसे लुटा भी और उजाड़ा भी। इस दिल्ली ने तैमूर और नादिरशाह के जन-संहार का करुण दृश्य देखा था। देश विदेश के अनेक शिल्पियों ने दिल्ली के सौन्दर्य को बढाया है। यहाँ पर हर कण-कण में इतिहास की गूंज सुनाई देती हैं।

जब कभी भी अंग्रेजी सरकार की विजय होती थी तब उसका मनोरंजन दिल्ली में ही मनाया जाता था। अंग्रेजों ने यहाँ पर अपनी प्रतिमाएं स्थापित करने की कोशिश की लेकिन वे इस बात को नहीं जानते थे कि दिल्ली भारत के निवासियों की भूमि है। यहीं पर अंग्रेजों के खिलाफ नारे लगे थे और हड़तालें हुई थी।

गाँधी , जवाहर लाल नेहरु और भगत सिंह जैसे देश भक्तों ने स्वतंत्रता की मांग की और अंत में अंग्रेजों को भारत छोडकर जाना ही पड़ा। स्वतंत्रता मिलने के बाद यहाँ के कई नेताओं ने दिल्ली का दुबारा से उद्धार किया था। दिल्ली में सभी अंग्रेजी शासन के निशानों को मिटा दिया गया था और भारतीयता के निशानों को स्थापित किया गया था।

भारत का ये नगर दिल्ली सभी देशों और विदेशों के लोगों के लिए भ्रमण की बहुत अच्छी जगह है। भारत सरकार इसे और अधिक सुंदर बनने के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहती है। दिल्ली की सडकें इतनी बड़ी हैं कि हर तरह की गाड़ी इस पर चल सकती हैं। सडकों के दोनों ओर फूल लगें हैं जो सडकों की शोभा बढ़ाते हैं।

दिल्ली की हर सडक किसी न किसी वाटिका का बोध करती है। दिल्ली की सडकों पर गाड़ी , बस , स्कूटर , मोटरसाईकिल और ट्रकों को हमेशा देखा जा सकता है। दिल्ली भारत की राजधानी है इसी वजह से यहाँ पर भारत सरकार के प्रमुख कार्यालय भी हैं। दिल्ली की आबादी बहुत अधिक है यहाँ पर एक करोड़ से भी अधिक लोग रहते हैं।

दर्शनीय स्थल :- भारत के इस नगर का हर अंग दृश्यनीय है। दिल्ली ऐतिहासिक भवनों के लिए अतुल्य मानी जाती है। यहाँ पर अनेक भव्य इमारतें और चौड़ी स्द्कं भी हैं। दिल्ली में सडक परिवहन के साथ -साथ रेल और वायु परिवहन की भी अच्छी व्यवस्था है।

यहाँ के बाजारों का अपना ही आकर्षण होता है ये सजे हुए बहुत सुंदर लगते हैं इसी वजह से लोग यहाँ पर घूमते हुए देखे जा सकते हैं। दिल्ली में बहुत से ऐतिहासिक स्थल जैसे :- लाल किला , कुतुबमीनार , जंतर-मंतर , जामा मस्जिद , बिरला मन्दिर , लोटस टेंपल , मोर्यकालीय लौह स्तंभ , छतर पुर मन्दिर , इंडिया गेट , हुमायु का मकबरा , गुरुद्वारा सीसगंज हैं।

चांदनी चौक और कनाट प्लेस की सजावट देखने के योग्य होती है। लोटस टेंपल में सभी धर्मों के लोग बैठकर भगवान को याद करते हैं। लौह स्तंभ में कभी भी जंग नहीं लगता इसकी इसी विशेषता की वजह से यह आकर्षण का केद्र बन गया है। पुराने किले में पांडवों के अवशेष देखे जा सकते हैं।

दिल्ली के सभी मैदानों की घास आँखों और पैरों के लिए बहुत सुख देती है। दिल्ली का चिड़ियाघर आकर्षण का केंद्र बन चुका है। दिल्ली के चिड़िया घर में अनेक प्रकार के पशु-पक्षी देखे जा सकते हैं। दिल्ली को उद्योग नगरी कहा जाता है। यहाँ पर हर मोहल्ले में उद्यान देखे जा सकते हैं।

यहाँ पर बड़ी बड़ी कपड़ों की कंपनियां और अन्य उद्योग धंधे हैं। खेलों के आयोजन से भी दिल्ली की सुन्दरता में चार-चाँद लग गये हैं। बड़े-बड़े मॉल्स से दिल्ली की शान और अधिक बढ़ गई है। दिल्ली में लोगों के रहने के लिए बड़ी -बड़ी इमारतें हैं जो आकर्षण का कारण बने हुए हैं।

दिल्ली में देश की राजनीतिक व्यवस्था का प्रमुख केंद्र संसद भवन है। दिल्ली में एक मुगल उद्यान है जो बसत ऋतु में आम लोगों के लिए खोल दिया जाता है और इस का आकर्षण का केंद्र गुलाब का फूल है जो यहाँ पर अनेक किस्मों में पाया जाता है। दिल्ली में एक अप्पूघर भी है जो बच्चों की आकर्षण की सैरगाह है।

उपसंहार :- दिल्ली भारत का सबसे अधिक सुंदर और ऐतिहासिक नगर है। यहाँ पर समन्वय का पाठ पढ़ाया जाता है। दिल्ली में बहुत से धर्मों और सम्प्रदायों और राजनीतिक दलों के लोग एक साथ एक परिवार की तरह रहते हैं। दिल्ली में संपन्नता और गरीबी की चर्म सीमा को देखा जा सकता है।

दिल्ली में अनेकता में एकता की भावना को देखा जा सकता है। दिल्ली को लघु भारत के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ के लोग साथ रहने के साथ-साथ सभी त्यौहारों को भी एक साथ मनाते हैं। दीपावली , दशहरा , होली , बैशाख , ईद , आदि प्रमुख त्यौहार मनाये जाते हैं। दिल्ली की समृद्धि से भारत की समृद्धि का पता चलता है।

भारत की राजधानी–दिल्ली पर निबंध-Essay On Delhi In Hindi

भारत की राजधानी–दिल्ली पर निबंध ! Essay on Capital of India – Delhi in Hindi

दिल्ली ऐतिहासिक नगरी है । यह भारतीय सम्राट पृथ्वीराज चौहान की राजधानी थी । बाद में यह मुहम्मद गौरी के नियंत्रण में आ गई । मुगलकाल में भी यह नगर महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक केन्द्र था । अंग्रेजों ने सन् 1911 में कोलकाता के स्थान पर दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया । 1947 ई. में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् यह भारत की राजधानी बनी । आज नई दिल्ली भारत की राजधानी है । यह यमुना नदी के तट पर बसी हुई है ।

आज दिल्ली एक आधुनिक भव्य नगर का रूप ले चुकी है । यहाँ अनेक भव्य इमारतें और चौड़ी सड़कें हैं । सड़क परिवहन के अलावा यहाँ रेल परिवहन और वायु परिवहन की भी अच्छी व्यवस्था है । इक्कीसवीं सदी की आवश्यकताओं को देखते हुए

वातानुकूलित एवं स्वचालित मैट्रो रेल की स्थापना की गई है । इससे स्थानीय यात्रा में लगनेवाले श्रम, समय एवं धन की बचत होती है । दिल्ली के बाजार भी बड़े भव्य हैं । बड़े-घड़े मॉल्स शहर की रौनक बढ़ाते हैं । सुपर बाजारों की संख्या भी दिनोदिन बढ़ती जा रही है । लोगों के निवास के लिए बहुमंजिली इमारतें बनाई गई हैं ।

देश की राजधानी होने के कारण यहाँ भारत सरकार के सभी प्रमुख कार्यालय हैं । देश की राजनीतिक व्यवस्था का प्रमुख केन्द्र संसद भवन है । पास ही अनेक कार्यालय हैं । राष्ट्रपति भवन में भारत के राष्ट्रपति का कार्यालय एवं निवास है । यह बहुत आकर्षक भवन है । यहाँ विदेशी राष्ट्रप्रमुखों का स्वागत किया जाता है । उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है । यहीं पर प्रसिद्ध मुगल उद्‌यान है जिसे बसंत ऋतु में आम लोगों के लिए खोल दिया जाता है । इस उद्‌यान का प्रमुख आकर्षण गुलाब का पुष्प है जो यहाँ विभिन्न किस्मों में पाया जाता है ।

राष्ट्रपति भवन की सीध में इंडिया गेट परिसर है । इंडिया गेट भारत के शहीदों को समर्पित है । यहाँ भारत के लिए प्राण अर्पित करने वाले शहीदों के सम्मान में रात-दिन ज्योति प्रज्वलित रहती है । महत्त्वपूर्ण अवसरों पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति एवं रक्षा मंत्री यहाँ आते हैं तथा राष्ट्र की ओर से शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं ।

राजधानी दिल्ली में अनेक दर्शनीय स्थल हैं । यहाँ शाहजहाँ द्वारा निर्मित लाल किला और जामा मस्जिद बहुत प्रसिद्ध है । लालकिला एक भव्य किला है जिसे लाल बलुए पत्थर से बनाया गया था । इसके भीतर संग्रहालय, दीवाने आम, दीवाने खास जैसी सुंदर इमारतें हैं । जामा मस्जिद भी बहुत आकर्षक है । पर्यटक इन स्थानों को देखने बड़ी संख्या में आते हैं ।

दिल्ली में स्थित कुतुबमीनार भारत की सबसे ऊँची प्राचीन मीनार है । यह भारत की राष्ट्रीय धरोहर है । इसमें की गई कलाकारी बहुत आकर्षक है । पास ही मौर्यकालीय लौह स्तंभ है । इसकी विशेषता यह है कि इसमें कभी जंग नहीं लगता ।

ADVERTISEMENTS:

दिल्ली में कमल मंदिर, पुराना किला, हुमायूँ का मकबरा, बिड़ला मंदिर, छतरपुर मंदिर, जंतर-मंतर, चिड़ियाघर, अप्पुघर जैसे अनेक दर्शनीय स्थान हैं । कमल मंदिर में सभी धर्मों के लोग शांत बैठकर परमात्मा का ध्यान लगा सकते हैं । पुराने किले में पांडव काल के अवशेष देखे जा सकते हैं । छतरपुर मंदिर आधुनिक वास्तुकला का अच्छा नमूना है । जंतर-मंतर राजा जयसिंह द्वारा बनाई गई वेधशाला है । दिल्ली स्थित चिड़ियाघर में अनेक प्रकार के दुर्लभ पशु-पक्षियों के दर्शन होते हैं । अप्पुघर चिड़ियाघर के पास ही है । यह बच्चों की आकर्षक सैरगाह है ।

दिल्ली को उद्‌यानों की नगरी कहा जाता है । यहाँ हर मोहल्ले में पार्क एवं उद्‌यान हैं । ये दिल्ली को हरा- भरा रखने में बहुत मदद करते हैं । ग्रीष्म ऋतु में जब यहाँ अत्यधिक गर्मी पड़ती है, पेड़ तापमान को नियंत्रित करने में बहुत मदद करते हैं ।

दिल्ली की आबादी बहुत घनी है । यहाँ सवा करोड़ से अधिक लोग रहते हैं । उत्तर भारत के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग प्रतिवर्ष यहाँ रोजी-रोटी की खोज में आते हैं । आबादी के बढ़ने से दिल्ली के उपनगरीय क्षेत्र बढ़ रहे हैं । दिल्ली लगातार फैलती जा रही है । इतनी बड़ी आबादी के लिए बिजली, पानी, सड़क, परिवहन आदि का प्रबंध कर पाना सचमुच एक चुनौतीपूर्ण कार्य है । जनसंख्या है तो प्रदूषण की समस्या भी है । वाहनों की अत्यधिक संख्या तथा कूड़े-करकट के ढेर प्रदूषण के मुख्य कारण हैं ।

दिल्ली को ‘ लघु भारत ‘ कहा जा सकता है । यहाँ भारत के कोने-कोने से आए बहुधर्मी और बहुभाषी लोग रहते हैं । सभी लोग मिलजुल कर तथा आपस में भाईचारा बनाकर रहते हैं । लोग एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं । दीपावली, दशहरा, होली, बैशाखी, ईद आदि यहाँ के मुख्य त्योहार हैं । दिल्ली की समृद्धि भारत की समृद्धि की ओर संकेत करती है ।

भारत की राजधानी–दिल्ली पर निबंध-Essay On Delhi In Hindi

Bharat Ki Rajdhani Delhi par laghu nibandh

प्रस्तावना- भारत की राजधानी है दिल्ली। यह भारत का दिल है। इसकी धड़कन से भारत की दशा का पता चल जाता है। वैसे भी दिल्ली ऐतिहासिक नगर है। यह कई बार उजड़ी और कई बार बसी। पर इसका रूप और रंग लगातार निखरता गया है। इसने अपने कई नाम भी बदले। कभी यह हस्तिनापुर कहलाई तो कभी इन्द्रप्रस्थ, पर इसके महत्व में कभी कमी नहीं आई।Short Essay on Bharat Ki Rajdhani Delhi

ऐतिहासिक नगर- दिल्ली एक ऐतिहासिक नगर है। यहाँ का लाल किला, जामा मस्जिद, कुतुब मीनार, जन्तर मन्तर, हुमायूँ का मकबरा, अशोक की लाट, बिरला मन्दिर और अनेक दर्शनीय स्थान हैं।

नई दिल्ली- दिल्ली महानगर है। इसमें विश्व भर की संस्कृतियों का समागम देखा जा सकता है। इस महानगर को दो भागों में बाँटा गया है- नई दिल्ली और पुरानी दिल्ली। नई दिल्ली में ही सभी बड़े बड़े कार्यालय हैं। लोकसभा और राज्यसभा, के सभा भवन, राष्ट्रपति भवन, केन्द्रीय सचिवालय, रिजर्व बैंक आदि नई दिल्ली में ही स्थित हैं। कृषि भवन, रेल भवन, आकाशवाणी केन्द्र, दूरदर्शन केन्द्र, उच्चतक न्यायालय, इण्डिया गेट भी नई दिल्ली में ही स्थित हैं। इतना ही नहीं, निर्वाचन सदन और विज्ञान भवन भी इसी में स्थित हैं।

पुरानी दिल्ली- पुरानी दिल्ली के चारों ओर दीवार बनी हुई थी। इसे परकोटा कहते हैं। इस परकोटे के अवशेष कई स्थानों पर दिखाई देते हैं। कश्मीरी गेट के स्थान पर तो यह परकोटा अभी तक सुरक्षित है। इसकी दीवार बहुत ऊँची और चौड़ी है। पुरानी दिल्ली में कश्मीरी गेट के अतिरिक्त अजमेरी गेट और दिल्ली गेट पर भी परकोटा देखा जा सकता है। गुरूद्वारा सीसगंज भी पुरानी दिल्ली चांदनी चौंक में स्थित है।

फतेहपुरी मस्जिद भी पुरानी दिल्ली में है। इसी मस्जिद के पास खारी बाबली है। यह किराने की बहुत बड़ी मंडी है। सदर बाजार मनियारी, प्लास्टिक आदि की बहुत बड़ी मंड़ी है। यह भी पुरानी दिल्ली में है। पुरानी दिल्ली का यह क्षेत्र बहुत घनी आबादी वाला क्षेत्र है।

दिल्ली में हवाई जहाज से लेकर बेलगाड़ी तक को देखा जा सकता है। यहाँ ओखला, बुद्धागार्डन, तालकटोरा गार्डन, मुगल गार्डन, रोशनआरा बाग आदि बड़े ही सुन्दर और दर्शनीय स्थान हैं।

दिल्ली गेट के पास यमुना नदी के तट पर भारत के महान नेताओं की समाधियाँ हैं। राजघाट, महात्मा गांधी का समाधि स्थल है। शांतिवन में स्वतन्त्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री और युग निर्माता पंडित जवाहर लाल नेहरू की समाधि है। विजय घाट भी शांतिवन के समीप स्थित है। यहाँ लाल बहादुर शास्त्री का समाधि स्थल है। शक्ति स्थल में इन्दिरा गांधी की समाधि है। देश विदेश से आने वाले यात्री इन समाधि स्थलों को देखने के लिए जाते हैं और उन्हें अपने श्रद्धा सुमन भेंट करते हैं।

उपसंहार- पिछले दस सालों में दिल्ली का बहुत विस्तार हुआ है। यमुना के पूर्वी आंचल में शाहदरा है तो पश्चिमी आंचल में पुरानी दिल्ली और नई दिल्ली। दिल्ली के इन दो भागों को जोड़ने के लिए अब कई स्थानों पर पुल बना दिए गए हैं, पर दिल्ली है कि रूकने का नाम ही नहीं लेती। सुरसा के मुँह की भाँति बढ़ती चली जा रही है।

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जन धन योजना पर निबंध-Essay On Jan Dhan Yojana In Hindi

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जन धन योजना पर निबंध-Essay On Jan Dhan Yojana In Hindi

जन धन योजना पर निबंध (Essay On Jan Dhan Yojana In Hindi) :

भूमिका : प्रधानमंत्री जन धन योजना गरीबी को ध्यान में रखकर बनाई गई है जिससे उनमें बचत की भावना का विकास हो और साथ-साथ उनमें भविष्य की सुरक्षा का एक अहम भाव भी जागे। प्रधानमंत्री जन धन योजना केंद्र सरकार का बड़ा और अहम फैसला है जो देश की नीव को मजबूत रखेगा। अगर जरूरत पड़ने पर हमारे पास पैसे हों तो हमारी सारी चिंताएं दूर हो जाती हैं।

जीवन में आपात स्थिति कभी-न-कभी सामने आ जाती हैं। ऐसी स्थिति में अगर हमारे पास पैसा हो तो किसी के भी सामने हाथ फैलाना नहीं पड़ता है। लेकिन आज की पीढ़ी भौतिकतावाद से प्रभावित है। उनके जीवन का मूलमंत्र होता है – कमाओ , खाओ और मौज करो लेकिन ऐसा करते समय वे दूरदर्शिता को भूल जाते हैं , भविष्य की चिंता नहीं करते और धन को बर्बाद करते रहते हैं।

समझदारी इसी में होती है कि थोडा-थोडा पैसा बचाकर बैंक में जमा कराना चाहिए। इसलिए प्रधानमंत्री जन धन योजना गरीब जनता को सशक्त बनाने के लिए चलाई जा रही है। इसमें जिस भी देशवासी का एक भी बैंक अकाउंट नहीं है उनसे बैंक अकाउंट खोलने की अपील की गई है।

इसके अलावा अगर कोई भी भारतीय नागरिक अपने पहले से खुले हुए अकाउंट को प्रधानमंत्री जन धन योजना में शामिल करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है उसे भी वह सभी सुविधाएँ दी जाएँगी जो सभी इस योजना के तहत दी जा रही हैं।

जन धन योजना : प्रधानमंत्री जन धन योजना भारत देश में फाइनेंसियल समावेशन पर एक राष्ट्रिय मिशन है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सभी परिवारों का बैंक खाता खुलवाना है। प्रधानमंत्री जी के द्वारा स्वाधीनता दिवस के अवसर पर लाल किले से घोषित प्रधानमंत्री जन धन योजना देश भर के गरीब लोगों को बैंक और अन्य वित्तीय सेवाओं से जोड़ने के लिए एक महत्वकांक्षी परियोजना है।

जन धन योजना का आरंभ : प्रधानमंत्री जन धन योजना की घोषणा 15 अगस्त , 2014 को हुई थी लेकिन इसका शुभारम्भ 28 अगस्त , 2014 को भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने किया था। इस योजना को शुरू करने से पहले मोदी जी ने सभी बैंकों को ई-मेल भेजा था जिसमें उन्होंने हर परिवार के लिए एक बैंक खाता जरूरी होने की घोषणा की थी।

इस योजना के अंतर्गत सात करोड़ से भी ज्यादा परिवारों को प्रधानमंत्री जन धन योजना में भाग लेने और बैंक खाता खोलने के लिए बैंकों में घोषणा की। प्रधानमंत्री जन धन योजना के उद्घाटन के दिन ही एक करोड़ पचास लाख खाते खोले गये थे। नए बैंक खातों को खोलने के लिए 60000 कैंप लगाए थे। अधिकारीयों के मुताबिक जन धन सिर्फ बैंक खाता नहीं है बल्कि इसके साथ लेनदेन को कैशलेस और अर्थव्यवस्था को डिजिटल बनाने की शुरुआत हो रही है।

खाता खुलवाने के लिए आवश्यक सामग्री : अगर आपके पास आधार कार्ड या आधार संख्या उपलब्ध है तो आपको बैंक खाता खुलवाने के लिए कोई अन्य कागज की जरूरत नहीं पडती है। अगर आपके पास आधार कार्ड उपलब्ध नहीं है तो आपको क़ानूनी दस्तावेजों की जरूरत पडती है जैसे – ड्राइविंग लाइसेंस , मतदाता पहचान पत्र , पैन कार्ड , पासपोर्ट अथवा नरेगा कार्ड आदि। अगर आपका पता बदल गया है तो अपने वर्तमान पते को खुद के द्वारा प्रमाणित करके देना आवश्यक होता है।

जन धन योजना के लाभ : इस योजना में 1 लाख रुपए का बीमा होगा जो विपत्ति के समय पर परिवार की बहुत मदद करेगा। घर से बाहर नौकरी करने वाले लोग आसानी से पैसा घर पर भेज सकेंगे। ग्रामीण व् पिछड़े इलाकों में लोगों की बचत और वित्तीय सुरक्षा भी बढ़ेगी।

इस योजना के तहत जिनके पास आधार कार्ड या कोई अन्य पहचान नहीं है उसका पहचान पत्र बनाया जाएगा। किसानों , आम जनता और अन्य ग्रामीण लोगों के लिए कृषि जैसे अन्य कारणों के लिए लोन लेना सरल हो जाएगा। भारत में नकद धन का कम प्रयोग होगा जिससे काले धन पर नियंत्रण लगेगा और सरकार का खर्च भी बच जाएगा इसके साथ-साथ आमदनी भी बढ़ेगी।

इस योजना के तहत छ: महीने तक संतोषजनक परिचालन के बाद ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी दी जाएगी। इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण लोग भी वित्तीय सुविधाओं जैसे – इंश्योरेंस , वाहन लोन , गृह लोन , फसल बीमा आदि से जुड़ सकेंगे। हर परिवार की महिला के लिए केवल एक खाते में 5000 रुपए तक की ओवरड्राफ्ट की सुविधा उपलब्ध है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 30000 रुपए तक का जीवन बीमा व्यक्ति को उसकी मृत्यु पर सामान्य शर्तों की प्रतिपूर्ति पर ही देय होगा। डेबिट कार्ड और नए मोबाइल इंटरनेट से ग्रामीण भारत के लोग भी दुनिया से जुड़ेंगे और विश्व के किसी भी शहर , बाजार से अपने लिए औजार और सामान खरीद सकेंगे।

लोगों को सरकार से मिलने वाली आर्थिक राशि का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में होगा जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और लोगों को पूरी राशि समय पर मिलेगी। लोगों में बचत की समझ और प्रवृत्ति बढ़ेगी जिससे वह आर्थिक रूप से ज्यादा सक्षम और आत्म निर्भर बनेगा। भारतियों का अधिक-से-अधिक चालीस फीसदी प्रतिदिन एक डॉलर से भी कम पर अपना जीवन व्यतीत करते हैं प्रधानमंत्री जन धन योजना के इस तरह के जीवन को सुधारने तथा उनमें सुरक्षा के भाव को जगाने के लिए बनाई गई है।

जन धन योजना की हानियाँ : सभी वाक्यों के दो पहलू हैं इस प्रधानमंत्री जन धन योजना के भी कुछ दुष्परिणाम हैं जिनमें से एक हैं पुनर्प्राप्ति एवम ऋण संग्रह। अब इस प्रधानमंत्री जन धन योजना के कारण ऋण लेने वाले उधारकर्ता न्यूनतम राशि उधार लेंगे जो कि अधिक मात्रा में होगी जिसका असर व्यापारिक तथा उच्च सामाजिक गतिविधियों पर होगा।

सभी का ब्यौरा रखना भी मुश्किल होगा। इससे बैंक के सिस्टम भी काफी प्रभावित होंगे जिसके लिए उन्हें अभी से तैयार होना जरूरी है तथा उचित वित्तीय नियम बनाना भी जरूरी है ताकि उधार की राशि आसानी से रिकवर की जा सके। अगर उधारकर्ता से ऋण एकत्र करने की कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई है तो इस योजना का मूल उद्देश्य विफल हो जायेगा और बनाए गए अकाउंट निष्क्रियता की स्थिति में चले जायेंगे।

जिस तेजी से बैंकों में अकाउंट ओपन हो रहे हैं अगर उसी तेजी से इस योजना पर काम नहीं किया गया तो यह योजना व्यवस्था वित्तीय प्रणाली को संकट में डाल देगी इसका देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत भारी प्रभाव होगा।

जन धन योजना की मुख्य सेवाएं : प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खाता धारकों को 30000 रूपए की न्यूनतम राशि का जीवन बीमा दिया जाएगा इसके साथ 1 लाख का एक्सीडेंटल बीमा भी दिया जायेगा। गरीब लोगों को आपत्ति के समय पैसे के लिए साहूकार पर निर्भर होना पड़ता है जिस कारण साहूकार उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे मनचाहा ब्याज लेते हैं और गरीब कभी उस कर्ज से मुक्त नहीं हो पाता है।

लेकिन प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खाता धारी छ: महीने के अन्तराल में 5000 रूपए की राशि को सीधे बैंक से लोन के रूप में प्राप्त कर सकता है। अन्य बचत खाते के लिए खाताधारी को कुछ राशि बैंक खाते में जमा करवाना अनिवार्य होता है यह राशि खाताधारी की ही होती है। लेकिन गरीबों की स्थिति को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खाते बिना किसी राशि के खोले जा रहे हैं जिन्हें जीरो बैलेंस सुविधा कहा जाता है।

अन्य प्रकार के एटीएम कार्ड की तरह प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खाताधारी को भी रूपए कार्ड की सुविधा प्रदान की जा रही है यह कार्ड भी अन्य एटीएम कार्ड की तरह ही काम करता है। रूपए कार्ड की सहायता से खाताधारी किसी भी बैंक एटीएम से रूपए निकाल सकता है। इस कार्ड को एक महीने में चार बार प्रयोग किया जा सकता है लेकिन अगर आप चार बार से अधिक प्रयोग करते हैं तो आपको कुछ रुपयों का भुगतान करना पड़ता है।

अन्य खातों की तरह ही प्रधानमंत्री जन धन खाते की सभी जानकारी को मोबाइल पर मेसेज के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए किसी भी महंगे फोन की आवश्यकता नहीं होती है यह सुविधा साधारण फोन पर भी उपलब्ध होती है। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खाता 10 वर्ष से अधिक आयु का बालक या बालिका द्वारा खोला जा सकता है जिसकी देख-रेख उनके माता-पिता द्वारा की जा सकती है।

अगर किसी का पहले से ही कोई खाता खुला हुआ है तो वह उस खाते को प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत ट्रांसफर करवा सकता हैं जिससे वो प्रधानमंत्री जन धन योजना के सारे लाभ उठा सके। किसी भी बैंक में खाता खोलने के लिए एक उचित परिचय पत्र की जरूरत पडती है लेकिन अगर किसी के पास यह पत्र नहीं है तो प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत अपना खाता खोल सकता है जिसमें कोई भी गजेटेड ऑफिसर द्वारा सत्यापित प्रमाण पत्र बैंक में जमा करवाकर खाता खोला जा सकता है जिसे लो रिस्क अकाउंट की गिनती में गिना जाता है और इसे स्माल अकाउंट भी कहा जाता है। इसे एक साल की अवधि तक सुचारू रखा जाएगा इस एक साल में खाताधारी को कोई भी उचित परिचय पत्र बैंक में जमा करना होता है।

उपसंहार : प्रधानमंत्री जन धन योजना में सभी भारत के देशवासियों में बढ़-चढ़ कर भाग लिया है। आज के समय में करोड़ों की तादात में अकाउंट खोले जा चुके हैं। अब हमें यह देखना है कि यह योजना किस प्रकार देश के विकास में सहयोगी बनती है। इस योजना की सफलता का आंकलन एक या दो साल बाद ही किया जा सकता है।

एक खाता , ग्राहकों और बैंकों दोनों के लिए तभी उपयोगी है जब इसका प्रयोग किया जाए। बैंकों के द्वारा पहले खोले गये बहुत से नोफ्रिल बेसिक खाते बेकार साबित हुए हैं क्योंकि उन्होंने पाया कि इनमें बहुत अधिक लेनदेन नहीं हुए। सारे ग्रामीणों के द्वारा यदि लेनदेन इसी के द्वारा होगा तो यह समावेशन के काम को पूरा करने का बहुत ही अच्छा तरीका है।

किसानों को दिया जाने वाला समर्थन मूल्य का भुगतान , मनरेगा की मजदूरी अनिवार्य रूप से इन्हीं खातों में किया जाए वित्तीय समावेशन तभी अच्छी तरह से काम करेगा जब सभी प्रकार की सबसीडी कैश ट्रांसफर के माध्यम से दी जाने लगेगी। केवल बैंक खातों को खोलना ही वित्तीय समावेशन नहीं है।

जन धन योजना पर निबंध-Essay On Jan Dhan Yojana In Hindi

जन धन योजना को प्रधानमंत्री जन-धन योजना भी कहा जाता है क्योंकि बैंक खाता और बचत के लिये भारत के सभी लोगों को जोड़ने के लिये लोगों की एक मुद्रा स्कीम के रुप में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा इसकी शुरुआत की गयी थी। चलिये अपने बच्चों को इस योजना के बारे में बताते हैं और जन धन योजना के विषय पर इस तरह के आसान लिखे हुए निबंध का प्रयोग करके स्कूल या स्कूल के बाहर निबंध लेखन प्रतियोगिता में भाग लेते हैं।

जन धन योजना पर निबंध (जन धन योजना एस्से)

जन धन योजना पर निबंध-Essay On Jan Dhan Yojana In Hindi

You can find here some essays on Jan Dhan Yojana in Hindi language for students in words limit of 100, 150, and 200 words.

जन धन योजना पर निबंध 1 (100 शब्द)

जन धन योजना पर निबंध-Essay On Jan Dhan Yojana In Hindi

सुरक्षित तरीके से पैसों की बचत के उद्देश्य के लिये बैंक खातों से हरेक भारतीय नागरिक को जोड़ने के लिये 28 अगस्त 2014 को भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा जन धन योजना की शुरुआत की गयी है। लाल किले पर राष्ट्र को संबोधित करने के दौरान 15 अगस्त 2015 को उन्होंने इस योजना के बारे में घोषणा की। हालांकि इसकी शुरुआत दो हफ्ते बाद हुई। इस योजना के अनुसार, इस योजना के शुरुआत होने के पहले दिन ही लगभग 1 करोड़ बैंक खाते खोले गये। भारत में अंतिम स्तर तक विकास लाने के लिये मुद्रा बचत योजना बहुत जरुरी है जिसको ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में अपने बचत के बारे में अधिक सतर्क बनाने के द्वारा शुरुआत और प्राप्त किया जा सकता है।

जन धन योजना

जन धन योजना पर निबंध 2 (150 शब्द)

जन धन योजना पर निबंध-Essay On Jan Dhan Yojana In Hindi

भारत के गरीब लोगों को खोले गये खातों के सभी लाभ को देने और बैंक खातों से उनको जोड़ने के लिये भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा खासतौर से बनायी गयी खाता खोलने वाली और पैसा बचत स्कीम है जन धन योजना। भरतीय स्वतंत्रता दिवस से दो सप्ताह बाद 28 अगस्त को पीएम के द्वारा इस योजना की शुरुआत की गयी। बैंक से उसके लाभ से सभी भारतीय नागरिकों को जोड़ने के लिये एक राष्ट्रीय चुनौती के रुप में इस खाता खोलने वाली और मुद्रा बचत योजना की शुरुआत की गयी थी।

इस योजना को एक सफल योजना बनाने के लिये बहुत सारे कार्यक्रमों को लागू किया गया है। बैंक खातों के महत्व के बारे में जागरुक बनाने के साथ ही बैंक खाता खोलने के फायदे और प्रक्रिया के बारे में उनको समझाने और लोगों के दिमाग को इस ओर खींचने के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 60 हजार नामांकन कैंप लगाये गये।

जन धन योजना पर निबंध 3 (200 शब्द)

जन धन योजना पर निबंध-Essay On Jan Dhan Yojana In Hindi

28 अगस्त 2014 को भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा शुरुआत की गयी लोगों की मुद्रा बचत योजना है जन धन योजना। इसे प्रधानमंत्री जन धन योजना भी कहा जाता है जोकि वास्तव में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आम भारतीय लोगों के लिये कुछ अवसर बनाने के लिये लोगों की एक संपत्ति योजना है। प्रधानमंत्री के द्वारा शुरु की गयी ये योजना गरीब लोगों को पैसा बचाने में सक्षम बनाती है। यहाँ रहने वाले लोगों को स्वतंत्र बनाना ही सही मायने में एक स्वतंत्र भारत बनाना है। भारत एक ऐसा देश है जो भ्रामीण क्षेत्रों में रहने लोगों की पिछड़ेपन की स्थिति के कारण अभी भी एक विकासशील देशों में गिना जाता है। अनुचित शिक्षा, असमानता, सामाजिक भेदभाव और बहुत सारी सामाजिक मुद्दों की वजह से भारत में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की दर उच्च है।

ये बहुत जरुरी है कि पैसा बचाने की आदत के बारे में लोगों के बीच जागरुकता बढ़े जिससे भविष्य में कुछ बेहतर करने के लिये वो स्वतंत्र हों और उनके भीतर कुछ विश्वास बढ़े। बचत किये गये पैसों की मदद से वो बुरे दिनों में बिना किसी के सहारे अपनी मदद कर सकते हैं। जब हरेक भारतीय लोगों के पास अपना बैंक खाता होगा तब वो पैसों की बचत के महत्व को ज्यादा अच्छे से समझ सकेंगे।

जन धन योजना पर निबंध-Essay On Jan Dhan Yojana In Hindi

Jan Dhan Yojana Essay in Hindi – जन धन योजना निबंध ( 100 words ) : प्रधानमंत्री जन धन योजना का कार्यकरम सरकार द्वारा गरीबों को ध्यान में रखते हुए शुरू किया गया है। इसकी घोषणा 15 अगस्त 2014 को की गई थी और शुरूआत 28 अगस्त 2014 को हुई थी । इस योजना के तहत सभी परिवारों का बैंक में एक खाता खोला गया है और एक लाख तक का बीमा भी किया गया है। इसमें लोगों को रूपये कार्ड दिया गया है जो ए.टी.एम.की तरह काम करता है। गाँव के लोगों को बैंको के प्रति सहज बनाना उनमें बचत की सोच और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए इस योजना को शुरू किया गया है। इससे गरीब लोगों को लोन भी आसानी से मिल सकेगा और उनकी जीवन शैली में सुधार होगा।

Jan Dhan Yojana Essay in Hindi – जन धन योजना निबंध

Jan Dhan Yojana Essay in Hindi - जन धन योजना निबंध

Jan Dhan Yojana Essay in Hindi – जन धन योजना निबंध ( 200 words )

प्रधानमंत्री जन धन योजना एक ऐसी योजना है जिसमें बैंक में हर परिवार का एक खाता होगा और एक लाख तक का बीमा भी किया गया है। इसकी घोषणा नरेंदर् मोदी जी द्वारा 15 अगस्त 2014 को हुई थी और शुरूआत 28 अगस्त 2014 को हुई थी। इसका मुख्य उद्धेश्य गरीबों की सहायता करना है और साथ ही उन्हें बैंको के प्रति सहज भी करना है। सरकार की यह पहली योजना है जिसका लाभ गाँव और शहर दोनों में रहने वाले लोगों को बराबर होगा अन्यथा सरकार द्वारा दी गई सभी सुविधाएँ शहरों तक ही सीमित रह जाती थी।

इस योजना के तहत खाता खुलवाने के लिए आप भारत के नागरिक होने चाहिए। खाता खुलने के 6 महीने बाद आप 5000 रूपये का लॉन ले सकते है। सरकार ने रूपये कार्ड भी दिया है जो कि ए.टी.एम.की तरह प्रयोग किया जाता है। इस योजना के कारण लोगों को साहुकारों के उच्च दर के ब्याज से छुटकारा मिला है। गरीबों में आत्मविश्वास और बचत की भावना उत्पन्न हुई है। इस खाते के लिए न्युनतम राशि शुन्य हैं। छोटे शहर और गाँव के लोगों के विकास के लिए यह योजना बहुत कल्याणकारी है और सफल भी साबित हुई है। लोगों की जीवन शैली में सुधार हुआ है।

Jan Dhan Yojana Essay in Hindi – जन धन योजना निबंध ( 450 words )

भूमिका- मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद से ही देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए और देश के विकास के लिए बहुत से कार्य किए हैं। गरीबों को ध्यान में रखते हुए उन्हें बैंक से जोड़ने के लिए सरकार ने सभी परिवारों को बैंक में एक खाता अवश्य होने की घोषणा १५ अगस्त २०१४ को की थी और उसकी शुरूआत २८ अगस्त २०१४ को हुई। इसके अंतर्गत लोगों का खाता खोला जाता है और एक लाख तक का बीमा भी किया जाता है।

भारत देश का एक बड़ा हिस्सा गाँव के गरीब लोग और किसान है। जब तक उनका विकास नहीं होगा तब तक देश भी आगे नहीं बढ़ सकेगा। गाँव के लोगों को भी बैंक की सुविधा देने,उनमें आत्मविश्वास जगाने और बैंको को लेकर सजगता पैदा करने के लिए ही इस योजना को शुरू किया गया। सरकार द्वारा दी गई सुविधाओं से गाँव के लोग वंचित रह जाते है क्योंकि सारी सुविधाएँ शहरों तक सीमित रह जाती थी। यह पहली योजना है जो गाँव और शहर दोनों को लाभ देगी।

प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खाते खुलवाने के नियम-
१. आप भारत के नागरिक होने चाहिए ।
२. यदि आपके पास भारत के नागरिक होने का प्रमाण नही है तो लॉ रिस्क पर खाता खोला जाएगा। जिसमें आपको एक साल में कोई भी प्रमाण बैंक को देना होगा।
३. दस साल की उमर के बच्चों का भी खाता खुल सकता है।
४. आप अपने साधारण खाते को प्रधान मंतरी जन धन खाते में स्थानांतरित करवा सकते है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना के लाभ- इस योजना से गरीबों को बहुत लाभ हुआ है। वो लोग भी बैंक की सुविधाओं से जुड़ सके है जो कि पहले उनकी पहुँच से दुर थी और वों बैंको के प्रति असहज थे।

प्रधानमंत्री जन धन योजना के निम्नलिखित लाभ-

१. इसके तहत लोगों का खाता खोला जाता है और एक लाख का बीमा भी किया जाता है।
२. खाता खुलने के ६ महीने बाद लोग ५००० तक का लॉन ले सकते है जिससे कि वो साहुकारों के उच्च दर के ब्याज से बच सकते है।
३. लोगों को रूपये कार्ड भी दिया गया है जिसे वो ए.टी.एम. की तरह प्रयोग कर सकते है।

निष्कर्ष- प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खाता खोलने की न्युनतम राशि शुन्य हैं। जन धन योजना की वजह से गरीब लोगों का भी विकास हुआ है। पिछड़े हुए गाँव भी अब तरक्की कर रह् है। गरीब लोगों की जीवन शैली में बहुत सुधार हुआ है। यदि बैंक सुचारू रूप से काम करे तो लोगों और देश की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। प्रधानमंत्री जन धन योजना एक कल्याणकारी योजना है।

Jan Dhan Yojana Essay in Hindi – जन धन योजना निबंध ( 800 words ) 

लोकतंत्र प्रत्येक व्यक्ति को बुनियादी जरूरतों और संस्थागत और आर्थिक सुधारों तक पहुंच के अधिकार देता है। माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने पहले स्वतंत्रता दिवस में मई 2014 में नए निर्वाचित सरकार के भाषण में घोषणा की थी कि लोकतांत्रिक भारत के सभी लोगों के बीच एक चर्चा का निर्माण हुआ।

भारत की गरीब जनसंख्या को शामिल करने के एक कदम के रूप में, प्रधान मंत्री मोदी ने बैंकिंग, बचत और जमा खातों जैसे वित्तीय सेवाओं तक पहुंच प्रदान करने के लिए 28 अगस्त 2014 को प्रधान मंत्री जन धन योजना शुरू की। यह कहा जा सकता है कि योजना की शुरूआत के लिए दो तरफ हैं सबसे पहले, उसने पिछड़े लोगों को दिया, जिनके पास बैंक अप्राप्य थे, विश्वास है कि मोदी को सामने लाने का निर्णय एक जोखिम था जो कि भुगतान किया गया था। और, यह जून 1,2016 के रूप में वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में रु 384.11 अरब लाया, जिससे बैंकिंग विभाग में गिरावट का सकारात्मक संकेत दिया गया।

यह योजना वित्तीय सेवा विभाग, वित्त मंत्रालय द्वारा चलायी जाती है, और उद्घाटन के दिन लगभग 1.5 करोड़ बैंक खातों को खोला गया था। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इस उपलब्धि को स्वीकार करते हैं और एक विश्व रिकॉर्ड बनाने के एक प्रमाण पत्र को सम्मानित करते हुए कहते हैं, “वित्तीय समावेश अभियान के एक हिस्से के रूप में 1 सप्ताह में सबसे बैंक खाता खोले”। सप्ताह के दौरान, 23-29 अगस्त 2014; 18,096,130 खाते खोले गए।

योजना के औपचारिक प्रक्षेपण के लिए, प्रधान मंत्री ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अध्यक्षों को व्यक्तिगत रूप से 7.5 करोड़ से अधिक घरों में दाखिला लेने और अपने बैंक खाते खोलने के विशाल कार्य के लिए भेज दिया। अपने ईमेल में उन्होंने स्पष्ट रूप से घोषित किया कि प्रत्येक घर के लिए एक बैंक खाता “राष्ट्रीय प्राथमिकता” है। यह योजना ओवरड्राफ्ट सुविधा के साथ “बेसिक बैंकिंग अकाउंट्स” के साथ शुरू होने वाले ‘सार्वभौमिक और स्पष्ट बैंकिंग सुविधाएं’ प्रदान करने के लक्ष्य से शुरू की गई है। छह महीने के बाद 5,000 रुपये और रुपु डेबिट कार्ड ₹ 1 लाख और रुपे किसान कार्ड के इनबिल्ट दुर्घटना बीमा कवर के साथ। अगले चरण में, लघु बीमा और पेंशन आदि भी जोड़ दिए जाएंगे।

लोगों की प्रतिक्रिया का जश्न मनाते हुए प्रधान मंत्री ने कहा, “आज हम वित्तीय स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते हैं।” इस योजना के प्रदर्शन पर आगे बढ़ते हुए लोगों ने बड़ी संख्या में वित्तीय आजादी के कदम उठाए और एक भारी योजना के तहत खोले गए खातों की संख्या 18 मई 2016 तक 21 9 मिलियन (57 मिलियन शून्य शेष खातों सहित) तक पहुंच गई। जमा राशि की राशि अप्रैल 2016 तक 380.47 अरब हो गई। 1 9 लाख घरों ने 2.56 ओवरड्राफ्ट सुविधा का लाभ उठाया है मई 2016 तक बिलियन। बिहार और पश्चिम बंगाल को इस योजना के तहत कुल जमा का 2 9% हिस्सा मिला है, जबकि केरल और गोवा देश के पहले राज्य बन गए हैं ताकि हर घर में एक बुनियादी बैंक खाता उपलब्ध कराया जा सके।

लेकिन, लेकिन, लेकिन जब से शत्रु हमेशा शत्रु हो जाते हैं और राजनीति हमारे देश में कभी भी बंद नहीं हो सकती! इस पहल ने विपक्ष की आलोचना की। उन्हें लगा कि यह उन प्रयासों को खुश करने का प्रयास था, जिन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर अनावश्यक काम का बोझ बनाया है। विपक्षी ने गरीबों के लिए आवश्यक खासतौर पर बैंक खाते और वित्तीय सुरक्षा नहीं महसूस की। इसके अलावा, इन खातों ने अभी तक पीएसयू बैंकों को काफी मुनाफा नहीं जोड़ा है। विशेषज्ञों के मुताबिक शून्य बैलेंस, फ्री इंश्योरेंस और ओवरड्राफ्ट सुविधा की पेशकश दोहराव के रूप में होगी। कई व्यक्तियों, जिनके पहले से ही बैंक खाते हैं, हो सकता है कि वे स्वयं के लिए खाते बनाते हैं, बीमा कवर और ओवरड्राफ्ट सुविधाएं द्वारा प्रलोभित होते हैं। इस योजना के अनुसार, बहुत कम लोग सिर्फ पांच साल की वैधता के साथ 30,000 रुपये का जीवन बीमा प्राप्त करने के लिए पात्र हैं । दावा किया गया ओवरड्राफ्ट सुविधा बैंकों पर पूरी तरह से छोड़ी गई है सरकारी नोटिस के अनुसार, केवल उन लोगों को ओवरड्राफ्ट सुविधा मिलेगी जिनके लेनदेन का रिकॉर्ड संतोषजनक और आर्थिक रूप से है।

इस निष्कर्ष पर पहुंचे, मेरी राय में, केंद्र सरकार की खबर जो कि अब और नए नहीं है, खासकर हमारे प्रधान मंत्री, इस देश की भलाई के लिए अतिरिक्त प्रयास कर रहे हैं और मुझे लगता है कि आलोचकों को उन्हें दिए गए समय की तरह ही उन्हें देना चाहिए। पिछली सरकारों के लिए जहां वास्तव में कोई बड़ी घटनाएं नहीं हुईं प्रधान मंत्री ने भ्रष्टाचार और धन के रिसावों को रोकने और लोगों के कल्याण के लिए इसे सीधे धन में डाल दिया है और मुझे लगता है कि यह कठिन प्रयास है जब समय कठिन है, अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत नहीं है, लोग भ्रष्ट लोगों के साथ सामान्य हैं इस देश को बेहतर बनाने के लिए काम करने की बजाय प्रथाओं इसलिए मैं इस देश के लोगों से हाथ मिलाने और भारत को एक बेहतर स्थान बनाने और मोदी को अपने सपने में सहायता करने के लिए प्रोत्साहन देने के लिए अपील करता हूं।

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राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

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राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध (National Flag In Hindi) :

भूमिका : प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट का अपना एक ध्वज होता है जो उस देश के स्वतंत्र देश होने का संकेत होता है। भारतीय राष्ट्रिय ध्वज को सभी लोग तिरंगा के नाम से जानते हैं जिसका मतलब होता है तीन रंग। यह केसरिया , सफेद और हरे रंग से बना होता है और इसके केंद्र में नीले रंग से बना हुआ अशोक चक्र होता है।

भारतीय राष्ट्रिय ध्वज की अभिकल्पना पिंगली वैकैयानंद ने की थी और इसे इसके वर्तमान स्वरूप में 22 जुलाई , 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था। यह ध्वज देश के एकजुट अस्तित्व का प्रतीक होता है। यह 15 अगस्त , 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के कुछ दिन पहले ही की गयी थी।

तिरंगे का विस्तार : तिरंगे में तीनों रंग समतालीय एक बराबर हिस्सों में बंटे होते हैं। सबसे उपर केसरिया रंग होता है जो साहस , निस्वार्थता व शक्ति का प्रतीक होता है। केसरिया रंग से नीचे सफेद रंग होता है जो सच्चाई , शांति और पवित्रता का प्रतीक होता है।

यह रंग देश में सुख-शांति की उपयोगिता को दर्शाता है। सफेद रंग से नीचे हरा रंग होता है जो विश्वास , शिष्टता , वृद्धि व हरी भूमि की उर्वरता का प्रतीक होता है। यह रंग समृद्धि व जीवन को दर्शाता है। तिरंगे की चौडाई व लम्बाई का अनुपात 2:3 होता है।

तिरंगे के बीच में सफेद रंग के उपर नीले रंग का अशोक चक्र बना होता है जिसमें 24 धारियां होती हैं। इसे धर्म चक्र और विधि चक्र भी कहा जाता है। नीले रंग का अशोक चक्र तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक द्वारा बनाया गया था इसे तिरंगे के बीच में लगाया गया था। यह चक्र जीवन के गतिशील होने को दर्शाता है। इसके न होने का अर्थ मृत्यु है।

भारतीय राष्ट्रिय ध्वज का इतिहास : राष्ट्रिय ध्वज स्वतंत्रता के लिए भारत की लम्बी लड़ाई व राष्ट्रिय खजाने का प्रतिनिधित्व करता है। तिरंगा स्वतंत्र भारत के गणतंत्र का प्रतीक होता है। देश के आजाद होने के कुछ दिन पहले 22 जुलाई , 1947 को स्वतंत्र भारत के संविधान को लेकर एक सभा आयोजित की गई थी जहाँ पर पहली बार सबके सामने राष्ट्रिय ध्वज तिरंगे को प्रस्तुत किया गया था।

इसके बाद 15 अगस्त , 1947 से लेकर 26 जनवरी , 1950 तक राष्ट्रिय ध्वज को भारत के अधिराज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया था। सन् 1950 में संविधान लागू होने पर इसे स्वतंत्र गणतंत्र का राष्ट्रिय ध्वज घोषित किया गया था। राष्ट्रिय ध्वज को पिंगली वेंक्क्या द्वारा बनाया गया था।

राष्ट्रिय ध्वज से जुडी बातें : ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड ने ध्वज निर्माण के लिए मानक सेट किया था। उन्होंने उसके निर्माण से जुडी हर छोटी बड़ी बात जैसे- उसका कपड़ा , धागा , रंग उसका अनुपात सब कुछ नियम के अनुसार सेट किया यहाँ तक कि उसके फहराने से जुडी हुई बातें भी नियम में लिखी गई हैं।

यह एक राष्ट्रिय प्रतीक है जिसका सम्मान हर भारतीय करता है। राष्ट्रिय ध्वज के सम्मान से जुडी कुछ बातें आम आदमी को हमेशा याद रखनी चाहिए। जब राष्ट्रिय ध्वज को उपर उठाया जाए तो ध्यान रखें कि केसरिया रंग सबसे उपर हो। कोई भी ध्वज अथवा प्रतिक राष्ट्रिय ध्वज के उपर नहीं होना चाहिए।

अगर और अन्य ध्वज फहराए जा रहे हों तो वे हमेशा इसके बायीं ओर पंक्ति में फहराए जाने चाहिए। अगर कोई जुलुस या परेड निकल रही हो तो राष्ट्रिय ध्वज दाहिने ओर होना चाहिए या फिर बाकि सभी ध्वजों की पंक्ति में बीच में होना चाहिए।

राष्ट्रिय ध्वज हमेशा मुख्य सरकारी ईमारत व् संस्थान जैसे राष्ट्रपति भवन , संसद भवन , सुप्रीम कोर्ट , हाई कोर्ट आदि में फेहरा हुआ होना चाहिए। राष्ट्रिय ध्वज किसी भी पर्सनल व्यवसाय या काम के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता। राष्ट्रिय ध्वज शाम को सूर्यास्त के समय उतार देना चाहिए।

तिरंगे का विकास : हमारा राष्ट्रिय ध्वज अपने आरंभ में बहुत से परिवर्तनों से गुजरा है। इसे हमारे स्वतंत्रता के राष्ट्रिय संग्राम के दौरान खोजा गया था। भारतीय राष्ट्रिय ध्वज का विकास आज के इस रूप में पहुंचने के लिए अनेक दौरों से गुजरा है। पहला रष्ट्रीय ध्वज 7 अगस्त , 1906 को पारसी बागान चौक कलकत्ता में फहराया गया था जिसे अब कोलकाता कहा जाता है इस ध्वज को लाल , पीले और रंग की पट्टियों से बनाया गया था।

दूसरे ध्वज को पेरिस में मैडम कामा और 1907 में उनके साथ निर्वासित किये गये क्रांतिकारियों द्वारा फहराया गया था। यह भी पहले ध्वज की तरह था लेकिन इसमें उपर की पट्टी में एक कमल था किन्तु सात तारे सप्तऋषि को दर्शाते हैं। इस ध्वज को बर्लिन के समाजवादी सम्मेलन में भी प्रदर्शित किया गया था। तीसरा ध्वज 1917 में आया जब हमारे राजनैतिक संघर्ष ने एक निश्चित मोड़ लिया था।

डॉ एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक जी ने घरेलू शासन आन्दोलन के दौरान इसे फहराया था। इस ध्वज में 5 लाल और 4 हरी पट्टियाँ एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर बने सात सितारे थे। बायीं और उपरी किनारे पर यूनियन जैक था। एक कोने में सफेद अर्धचन्द्र और सितारा भी था।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के स्तर के दौरान इसको 1921 में बेजवाडा में किया गया यहाँ आंध्रप्रदेश के एक युवक ने एक झंडा बनाया और गाँधी जी को दिया। यह ध्वज दो रंगों से बना हुआ था। लाल और हरा रंग जो दो प्रमुख समुदायों अथार्त हिन्दू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता है। गाँधी जी ने सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसमें एक सफेद पट्टी और राष्ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए।

राष्ट्रिय ध्वज फहराने के नियम : हमें राष्ट्रिय ध्वज को फहराने के नियमों का सख्ती के साथ पालन करना चाहिए। कभी भी खराब या क्षतिग्रस्त ध्वज को फहराना नहीं चाहिए। ध्वज को कभी भी किसी भी सजावट के काम में नहीं लिया जाना चाहिए। तिरंगे का साईज हमेशा 3:2 के अनुपात में होना चाहिए।

ध्वज पर किसी भी प्रकार से कुछ लिखना या बनाना मना होता है। राष्ट्रिय शोक दिवस के अवसर पर ध्वज को आधा झुका हुआ होना चाहिए। किसी भी दुसरे झंडे को राष्ट्रिय झंडे से उपर या बराबर नहीं लगाना चाहिए। कोई भी भारत का नागरिक ध्वज को फहरा सकता है।

ध्वज को सिर्फ सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाता है। जब विशेष अवसर होते हैं तो इन्हें रात को भी फहराया जाता है। ध्वज का पोल इमारत के सबसे ऊँचे हिस्से पर होना चाहिए। प्राईवेट इंस्टीटूशन्स सभी सामान्य दिन भी ध्वज को फहराया जा सकता है लेकिन पूरे सम्मान , कायदे व नियम के अनुसार।

ध्वज को कभी भी किसी गाड़ी , नाव या हवाई जहाज के पीछे नहीं लगाया जाना चाहिए। ध्वज का प्रयोग किसी भी सामान को या किसी इमारत को ढकने के लिए नहीं करना चाहिए। ध्वज हमेशा कॉटन , खादी या सिल्क का होना चाहिए। ध्वज को बनाने के लिए प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

उपसंहार : भारतीय राष्ट्रिय ध्वज भारत के नागरिकों की आशाएं और आकांक्षाएं दर्शाता है। यह हमारे राष्ट्रिय गर्व का प्रतीक होता है। पिछले 5 दशकों से अधिक समय से सशस्त्र सेना बलों के सदस्यों सहित अनेक नागरिकों ने तिरंगे की शान को बनाये रखने के लिए लगातार अपने जीवन न्यौछावर किये हैं। हमारी यह जिम्मेदारी होती है कि इसकी शान को जाने या अनजाने में किसी भी प्रकार की चोट न पहुंचाई जाए।

 

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

हमारा राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध | Essay on Our National Flag in Hindi!

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा । झंडा ऊंचा रहे हमारा ।।

प्रत्येक देश का अपना राष्ट्रीय ध्वज होता है जो उस देश के गौरव और सम्मान का प्रतीक होता है । हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है, जो देश की स्वतंत्रता के बाद से हमारे राष्ट्रीय भवनों पर फहरा रहा है ।

15 अगस्त 1947 को भारतवर्ष स्वतन्त्र हुआ था और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहरलाल नेहरू ने लालकिले पर प्रथम बार ध्वजारोहण किया था । हमारी पराधीनता का प्रतीक यूनियन जैक उस दिन उतार दिया गया था । तब से आज तक राष्ट्र की आन-बान और शान का प्रतीक तिरंगा फहरा रहा है ।

हमारा राष्ट्रीय ध्वज केसरीया, श्वेत और हरे रंगों से बना है । इस के मध्य में अशोक चक्र है । इस चक्र में चौबीस शलाकाएं हैं और इसका रंग गहरा नीला (Navy Blue) है । भारत सरकार ने सम्राट अशोक के इस चक्र को ग्रहण कर भारतीय प्राचीन गौरव की रक्षा की है ।

 

तिरंगे के तीन रंग अपने विशेष गुणों के प्रतीक हैं । केसरिया रंग उत्साह और वीरता का परिचायक है । इसी से प्रेरणा लेकर देश के अगणित वीरों ने देश की स्वतन्त्रता प्राप्ति हेतु अपने प्राणों की बाजी लगा दी थी । श्वेत रंग हमारी पवित्रता, उज्यल चारित्रिकता सत्य और सांस्कृतिक श्रेष्ठता का प्रतीक है ।
हरा रंग हमारे वैभव, श्री और सम्पत्रता का परिचायक है । लहलहाती हरी-भरी फसलों का रंग ही तो झलकता है, इस हरे रंग में । किसी दिन हमारा देश सोने की चिड़िया कहलाता था । यह हरा रंग उसी ओर संकेत करता है । आज हजारे देश ने कृषि उद्योग और व्यापार के क्षेत्र में जो बहुमुखी प्रगति की है हरा रंग उसी प्रगति का सूचक है ।

ध्वज के मध्य में बना अशोक चक्र हमारी धार्मिक स्वतन्त्रता का प्रतीक है । उसकी चौबीस शलाकाएं हमारे विभिन्न धर्मों और उनकी समन्वित सांस्कृतिक एकता तथा ‘सर्वधर्म समभाव’ का परिचायक है । हमारे देश में सभी धर्मों के अनुयायियों को पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त है ।

 

सभी धर्म अपनी पूजा-पद्धति अपनाने में स्वतंत्र हैं । सभी धर्म अलग-अलग दिखाई पड़ते हैं । पर अनेकता में एकता ही हमारे राष्ट्र की वह विशेषता है जो विश्व में अन्यत्र दुर्लभ है । स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर यह ध्वज समारोह पूर्वक फहराया जाता है । स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले पर प्रधानमंत्री द्वारा ध्वजारोहण किया जाता है ।

गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्वारा इंडिया गेट पर ध्वज फहराया जाता है । दोनों ही अवसरों पर इक्कीस तोपों की सलामी दी जाती हैं । सेना की टुकड़िया ध्वज का अभिवादन करती हैं । देश के राज्यों में मुख्यमंत्रियों अथवा राज्यपालों द्वारा ध्वजारोहण किया जाता हैं । विभिन्न देशों में राजदूत ध्वजारोहण करते हैं ।

देश के विभिन्न भागों में नगरों और गांवों में भी देश के नागरिक सांसदों, विधान सभा सदस्यों, पार्षदों, और मुख्य अधिकारियों की अध्यक्षता में ध्वजारोहण करते हैं । दोनों ही अवसरों पर राष्ट्रीय-एकता और स्वतंत्रता से संबंधित सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं ।

स्वतंत्रता के प्रतीक तिरंगे के अनन्तकाल तक फहराते रहते की कामना की जाती है । राष्ट्र ध्वज के नीचे दिवंगत स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी जाती है । हमें इस ध्वज की आन-बान और शान बनाए रखने के लिए प्राणों की परवाह भी नहीं करनी चाहिए ।

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

भारत का राष्ट्रीय ध्वज़ देश के लिये सम्मान और स्वतंत्रता का प्रतीक है। इसका हमारे लिये बहुत महत्व है। हमें इसका सम्मान करना चाहिये साथ ही इसके बारे हमें जानकारी होनी चाहिये। यहाँ पर हम स्कूली विद्यार्थी और अन्य सभी के लिये सरल और विभिन्न शब्द सीमाओं के साथ राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध उपलब्ध करा रहें हैं। दिये गये इन निबंधों का प्रयोग आप अपनी जरुरत के अनुसार किसी भी स्कूली परीक्षा या अन्य प्रतियोगिता में आसानी कर सकते हैं।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध (नेशनल फ्लैग एस्से)

Find here some essays on National Flag of India in Hindi language for students in different words limit (100, 150, 200, 250, 300, and 400 words).

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 1 (100 शब्द)

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

भारत हमारा देश है और इसका राष्ट्रीय ध्वज़ हमारे लिये बहुत मायने रखता है। यहाँ पर रह रहे विभिन्न धर्मों के लोगों के लिये हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ एकता के प्रतीक के रुप में है। हमें अपने देश के राष्ट्रीय ध्वज़ का सम्मान करना चाहिये। ये बहुत जरुरी है कि सभी आजाद देशों के पास उनका अपना राष्ट्रीय ध्वज़ हो। हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ तीन रंगों का है इसलिये इसे तिरंगा भी कहते हैं। तिरंगे के सबसे ऊपर की पट्टी में केसरिया रंग, बीच की पट्टी में सफेद रंग और सबसे नीचे की पट्टी में हरा रंग होता है। तिरंगे के बीच की सफेद पट्टी में एक नीले रंग का अशोक चक्र होता है जिसमें एक समान दूरी पर 24 तीलियाँ होती है।

राष्ट्रीय ध्वज़

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 2 (150 शब्द)

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

राष्ट्रीय ध्वज़ एक स्वतंत्र राष्ट्र के एक नागरिक होने की हमारी अलग पहचान है। हर स्वतंत्र राष्ट्र का अपना अलग राष्ट्रीय ध्वज़ होता है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ एकता और आजादी का प्रतीक है। सरकारी अधिकारियों के द्वारा सभी राष्ट्रीय अवसरों पर राष्ट्रीय ध्वज़ को फहराया जाता है हालाँकि भारतीय नागरिकों को भी कुछ अवसरों पर राष्ट्रीय ध्वज़ को फहराने की अनुमति है। गणतंत्रता दिवस, स्वतंत्रता दिवस और कुछ दूसरे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में सरकारी कार्यालयों, स्कूल और दूसरे शिक्षण संस्थानों में इसे फहराया जाता है।

22 जुलाई 1947 को पहली बार भारतीय राष्ट्रीय ध्वज़ को अंगीकृत किया गया था। हमारे राष्ट्रीय ध्वज़ को बहुत ही सुंदर तरीके से तीन रंगों में डिज़ाइन किया गया है, जिसे तिरंगा भी कहते हैं। ये खादी के कपड़े से हाथ से बना हुआ होता है। ख़ादी के अलावा तिरंगे को बनाने के लिये किसी दूसरे कपड़े का इस्तेमाल करने की सख्ती से मनाही है। तिरंगे के सबसे ऊपर केसरिया रंग होता है, दूसरी पट्टी में सफेद रंग होता है इसमें एक नीले रंग का चक्र भी होता है जिसमें एक सामन दूरी पर 24 तीलियाँ होती हैं तथा अंतिम पट्टी में हरा रंग होता है। केसरिया रंग समर्पण और नि:स्वार्थ भाव का प्रतीक है, सफेद रंग शांति, सच्चाई और शुद्धता को प्रदर्शित करता है जबकि हरा रंग युवा और ऊर्जा को दिखाता है।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 3 (200 शब्द)

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

22 जुलाई 1947 को भारत ने अपना राष्ट्रीय ध्वज़ अंगीकृत किया और इसके कुछ ही दिन बाद 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से भारत स्वतंत्र घोषित हुआ। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज़ में तीन रंग है इसलिये इसे तिरंगा भी कहते हैं। तिरंगे के सबसे ऊपर केसरिया रंग समर्पण और निस्वार्थ भाव को दिखाता है, सफेद रंग शांति, सच्चाई और शुद्धता को इंगित करता है और सबसे नीचे का हरा रंग युवा और ऊर्जा को प्रदर्शित करता है। बीच के सफेद पट्टी में एक नीले रंग का अशोक चक्र बना हुआ है जिसमें एक बराबर 24 तीलियाँ होती हैं। हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ स्वतंत्रता, गर्व, एकता और सम्मान का प्रतीक है तथा अशोक चक्र ईमानदारी और न्याय की वास्तविक जीत को दिखाता है।

हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ हमें एकता, शांति और इंसानियत की सीख देता है। सच्चाई और एकता में ये हमें भरोसा करने में मदद करता है। यह हर वर्ष 15 अगस्त को भारत के प्रधानमंत्री द्वारा और 26 जनवरी को देश के राष्ट्रपति द्वारा इसे फहराया जाता है। हालाँकि, भारत के लोगों को संबंधित करने के द्वारा ये दोनों के द्वारा लाल किले पर फहराया जाता है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ ख़ादी के कपड़े से बना होता है, ये एक हाथ से बना हुआ कपड़ा है जिसकी पहल महात्मा गाँधी द्वारा की गयी थी। ख़ादी के अलावा किसी दूसरे कपड़े से बने तिरंगे को भारत में फहराने की बिल्कुल इज़ाजत नहीं है।


 

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 4 (250 शब्द)

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

हजारों लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के अथक प्रयास से लंबे संघर्ष के बाद भारत को आजादी मिली। 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजी शासन से भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुयी। आजादी मिलने के कुछ दिनों पहले 22 जुलाई 1947 (संविधान सभा के सम्मेलन में) को भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ को एकता और विजय के प्रतीक रुप में अंगीकृत किया गया। हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ तीन रंगों का है इसलिये इसे तिरंगा झंडा भी कहते हैं। हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ हमारे लिये हिम्मत और प्रेरणा के रुप में है। ये हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में हमें याद दिलाता है। ये हमें बताता है कि उनके लिये देश को आजाद कराना कितना कठिन कार्य था। आजादी पाना आसान नहीं था। हमें हमेशा अपने राष्ट्रीय ध्वज़ का सम्मान करना चाहिये और अपनी मातृभूमि के लिये कभी भी इसे झुकने नहीं देना चाहिये।

हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ केसरिया, सफेद और हरे रंग की तीन पट्टीयों के साथ क्षितिज के समांतर दिशा में डिज़ाइन किया गया है। बीच की सफेद पट्टी में एक नीले रंग का अशोक चक्र बना हुआ है जिसमें 24 तीलियाँ हैं। सभी तीन रंग, अशोक चक्र और 24 तीलियों के अपने मायने हैं। सबसे ऊपर का केसरिया रंग लगन और त्याग का प्रतीक है, सफेद पट्टी शांति और सौहार्द को इंगित करती है तथा सबसे नीचे की हरी पट्टी युवा और ऊर्जा को प्रदर्शित करती है। जबकि, अशोक चक्र (अर्थात् अशोक का पहिया) शांति और हिम्मत का प्रतीक है।

हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ ख़ादी के कपड़े से बना हुआ है जो कि हाथ से बुना हुआ कपड़ा होता है इसकी शुरुआत महात्मा गाँधी के द्वारा हुयी थी। निर्माण की सभी प्रक्रिया और डिज़ाइन के विशेष विवरण को भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा देखा जाता है। हमारे देश में ख़ादी के अलावा किसी भी दूसरे कपड़े से तिरंगा बनाने की एकदम मनाही है।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 5 (300 शब्द)

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

अपने तीन रंगों के कारण हमारे राष्ट्री ध्वज़ को तिरंगा झंडा भी कहते हैं। इसमें क्षितिज के समांतर दिशा में तीन रंग की पट्टियाँ होते है, सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और सबसे नीचे की पट्टी में हरा रंग होता है। बीच की सफेद पट्टी में एक अशोक चक्र (धर्म चक्र भी कहा जाता है) होता है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज़ को पहली बार संविधान सभा द्वारा 22 जुलाई 1947 को अंगीकृत किया गया था। राष्ट्रीय ध्वज़ की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 का है।

अनुचित प्रयोग की रोकथाम धारा 1950 और अपमान की रोकथाम के लिये राष्ट्रीय सम्मान की धारा 1971 के तहत ही इसके इस्तेमाल और प्रदर्शन को निर्धारित किया जाता है। भारतीय ध्वज़ के सम्मान और आदर के लिये सभी कानून, प्रथा और निर्देशों के नियमन करने के लिये वर्ष 2002 में भारत के ध्वज़ कोड की स्थापना की गयी थी। भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के लिये वर्ष 1921 में महात्मा गाँधी के द्वारा पहली बार भारतीय राष्ट्रीय ध्वज़ को प्रस्तावित किया गया था। पिंगली वैंकया के द्वारा पहली बार तिरंगे झंडे को डिज़ाइन किया गया था। ऐसा माना जाता है कि हिन्दू और मुस्लिम जैसे दोनों धर्मों के लिये सम्मान के लिये केसरिया और हरे रंग की पट्टी की घोषणा की गयी थी। बाद में सफेद पट्टी को बीच में दूसरे धर्मों के लिये आदर के प्रतीक के रुप में घूमते हुए पहियों के साथ जोड़ा गया था।

भारत की आजादी के पहले ब्रिटिश शासन से आजादी प्राप्ति के लिये भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के पहले से कई सारे भारतीय झंडे को डिज़ाइन किया गया था। अंतत: राष्ट्रीय ध्वज़ के मौजूदा डिज़ाइन को आधिकारिक रुप से अंगीकृत किया गया। पूर्व में इसे आम लोगों द्वारा प्रदर्शित करना मना था और किसी राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान इसे केवल सरकारी अधिकारियों द्वारा ही प्रदर्शित किया जा सकता था हालाँकि बाद में अपने परिसर के अंदर राष्ट्रीय ध्वज़ को आम लोगों द्वारा फहराने की अनुमति मिल गयी। हमारी मातृभूमि के लिये ये एकता और सम्मान का प्रतीक है। इसलिये हम सभी को हमेशा अपने राष्ट्रीय ध्वज़ का सम्मान करना चाहिये और इसे कभी भी झुकने नहीं देना चाहिये।


 

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 6 (400 शब्द)

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज़ को तिरंगा झंडा भी कहा जाता है। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा के सम्मेलन के दौरान इसे पहली बार आधिकारिक रुप से अंगीकृत किया गया। अंग्रेजी हुकुमत से भारत की स्वतंत्रता के 24 दिन पहले ही इसे अंगीकृत किया गया। इसे पिंगाली वैंकया द्वारा डिज़ाइन किया गया था। एक बराबर अनुपात में, ऊर्द्धवाकार में केसरिया, सफेद और हरे रंग की पट्टी के साथ डिज़ाइन किया गया था। इसमें सबसे ऊपर की पट्टी में केसरिया, बीच में सफेद और सबसे नीचे की पट्टी में गाढ़ा हरा रंग है। हमारे तिरंगे झंडे की लंबाई और चौड़ाई 3:2 के अनुपात में है। तिरंगे के मध्य सफेद पट्टी में 24 तीलियों के साथ एक अशोक चक्र है। सारनाथ के अशोक स्तंभ से अशोक चक्र को लिया गया है (अशोक की लॉयन कैपिटल राजधानी)।

हम सभी के लिये हमारे राष्ट्रीय ध्वज़ का बहुत महत्व है। सभी रंगों की पट्टियाँ, पहिया और तिरंगे में इस्तेमाल होने वाले कपड़े का खास महत्व है। भारतीय ध्वज़ कोड इसके इस्तेमाल और फहराने के नियम को निर्धारित करता है। भारत की आजादी के 52 वर्ष के बाद भी इसे आम लोगों के द्वारा प्रदर्शन या फहराने की इज़ाज़त नहीं थी हालाँकि बाद में नियम को बदला गया (ध्वज़ कोड 26 जनवरी 2002 के अनुसार) और इसको घर, कार्यालय और फैक्टरी में कुछ खास अवसरों पर इस्तेमाल करने की छूट दी गयी। राष्ट्रीय ध्वज़ को राष्ट्रीय अवसरों पर फहराया जाता है जैसे गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस आदि। भारतीय ध्वज़ को सम्मान और आदर करन के लिये तथा विद्यार्थियों को प्रेरणा देने के लिये इसे स्कूल और शिक्षण संस्थानों (कॉलेज, विश्वविद्यालय, खेल कैंप, स्कॉऊट कैंप आदि) में भी फहराया जाता है।

स्कूल और कॉलेज में झंडा रोहण के दौरान विद्यार्थी प्रतिज्ञा लेते हैं और राष्ट्र-गान गाते हैं। सरकारी और निजी संगठन भी किसी भी अवसर या कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज़ को फहरा सकते हैं। किसी भी सांप्रदायिक और निजी फायदे के लिये ऱाष्ट्रीय ध्वज़ को फहराने की सख्त मनाही है। किसी को भी ख़ादी के अलावा किसी दूसरे कपड़े से बने तिरंगे को फहराने की अनुमति नहीं है ऐसा करने पर जेल और अर्थदंड की व्यवस्था है। राष्ट्रीय ध्वज़ को किसी भी मौसम में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच में फहराया जा सकता है। इसे जमीन से स्पर्श कराने या पानी में डुबाने, तथा जानबूझकर अपमान करने की सख्त मनाही है। कार, बोट, ट्रेन या हवाई जहाज जैसे किसी भी सवारी के बगल, पिछले हिस्से, सबसे ऊपर या नीचे को ढकने के लिये इसका प्रयोग नहीं होना चाहिये।


भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के महत्व पर निबंध 7 (600 शब्द)

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

प्रस्तावना : प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट्र का अपना एक ध्वज होता है। यह एक स्वतंत्र देश होने का संकेत है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की अभिकल्पना पिंगली वैंकैयानन्द ने की थी और इसे इसके वर्तमान स्वरूप में 22 जुलाई 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था।


यह 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के कुछ ही दिन पूर्व की गई थी। इसे 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 के बीच भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया और इसके पश्चात भारतीय गणतंत्र ने इसे अपनाया। भारत में ‘तिरंगे’ का अर्थ भारतीय राष्ट्रीय ध्वज है।
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में तीन रंग की क्षैतिज पट्टियां हैं, सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद ओर नीचे गहरे हरे रंग की पट्टी और ये तीनों समानुपात में हैं। ध्वज की चौड़ाई का अनुपात इसकी लंबाई के साथ 2 और 3 का है। सफेद पट्टी के मध्य में गहरे नीले रंग का एक चक्र है। यह चक्र अशोक की राजधानी के सारनाथ के शेर के स्तंभ पर बना हुआ है। इसका व्यास लगभग सफेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर होता है और इसमें 24 तीलियां है।
तिरंगे का विकास : यह जानना अत्यंत रोचक है कि हमारा राष्ट्रीय ध्वज अपने आरंभ से किन-किन परिवर्तनों से गुजरा। इसे हमारे स्वतंत्रता के राष्ट्रीय संग्राम के दौरान खोजा गया या मान्यता दी गई। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का विकास आज के इस रूप में पहुंचने के लिए अनेक दौरों से गुजरा। हमारे राष्ट्रीय ध्वज के विकास में कुछ ऐतिहासिक पड़ाव इस प्रकार हैं :
प्रथम राष्ट्रीय ध्वज 7 अगस्त 1906 को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कलकत्ता में फहराया गया था जिसे अब कोलकाता कहते हैं। इस ध्वज को लाल, पीले और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों से बनाया गया था।
द्वितीय ध्वज को पेरिस में मैडम कामा और 1907 में उनके साथ निर्वासित किए गए कुछ क्रांतिकारियों द्वारा फहराया गया था (कुछ के अनुसार 1905 में)। यह भी पहले ध्वज के समान था सिवाय इसके कि इसमें सबसे ऊपरी की पट्टी पर केवल एक कमल था किंतु सात तारे सप्तऋषि को दर्शाते हैं। यह ध्वज बर्लिन में हुए समाजवादी सम्मेलन में भी प्रदर्शित किया गया था।
तृतीय ध्वज 1917 में आया जब हमारे राजनैतिक संघर्ष ने एक निश्चित मोड़ लिया। डॉ. एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान इसे फहराया। इस ध्वज में 5 लाल और 4 हरी क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर बने सात सितारे थे। बांयी और ऊपरी किनारे पर (खंभे की ओर) यूनियन जैक था। एक कोने में सफेद अर्धचंद्र और सितारा भी था।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र के दौरान जो 1921 में बेजवाड़ा (अब विजयवाड़ा) में किया गया यहां आंध्र प्रदेश के एक युवक ने एक झंडा बनाया और गांधी जी को दिया। यह दो रंगों का बना था। लाल और हरा रंग जो दो प्रमुख समुदायों अर्थात हिन्दू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता है।
गांधी जी ने सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्वि करने के लिए इसमें एक सफेद पट्टी और राष्ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए।
वर्ष 1931 ध्वज के इतिहास में एक यादगार वर्ष है। तिरंगे ध्वज को हमारे राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया। यह ध्वज जो वर्तमान स्वरूप का पूर्वज है, केसरिया, सफेद और मध्य में गांधी जी के चलते हुए चरखे के साथ था।
22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने इसे मुक्त भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया। स्वतंत्रता मिलने के बाद इसके रंग और उनका महत्व बना रहा। केवल ध्वज में चलते हुए चरखे के स्थान पर सम्राट अशोक के धर्म चक्र को दिखाया गया। इस प्रकार कांग्रेस पार्टी का तिरंगा ध्वज अंतत: स्वतंत्र भारत का तिरंगा ध्वज बना।
ध्वज के रंग : भारत के राष्ट्रीय ध्वज की ऊपरी पट्टी में केसरिया रंग है जो देश की शक्ति और साहस को दर्शाता है। बीच में स्थित सफेद पट्टी धर्म चक्र के साथ शांति और सत्य का प्रतीक है। निचली हरी पट्टी उर्वरता, वृद्धि और भूमि की पवित्रता को दर्शाती है।


चक्र : इस धर्म चक्र को विधि का चक्र कहते हैं जो तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनाए गए सारनाथ मंदिर से लिया गया है। इस चक्र को प्रदर्शित करने का आशय यह है कि जीवन गति‍शील है और रुकने का अर्थ मृत्यु है।


उपसंहार : भारतीय राष्ट्रीय ध्वज भारत के नागरिकों की आशाएं और आकांक्षाएं दर्शाता है। यह हमारे राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है। पिछले पांच दशकों से अधिक समय से सशस्त्र सेना बलों के सदस्यों सहित अनेक नागरिकों ने तिरंगे की शान को बनाए रखने के लिए निरंतर अपने जीवन न्यौछावर किए हैं।

प्रस्तावना

भारत का राष्ट्रीय  झंडा जो की तिरँगा के नाम से जाना जाता है और यह हमारे राष्ट्र के गौरव का प्रतिक है। यह भारतीय गणराज्य का एक महत्वपूर्ण और अभिन्न अंग है। तिरंगा हमारे देश के एकता और अखंङता को दर्शाता को है इसी कारणवश देश के सभी नागरीक इसका सम्मान करते हैं।

तिरँगा देश के सभी सरकारी भवनों पे फहराया जाता है। गणतंत्र दिवस, स्वतन्त्रा दिवस और गांधी जंयती जैसे अवसरो पऱ तिरंगा फहराना एक सामान्य प्रथा है।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का महत्व

हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा हमारे देश के सांस्कृतिक विरासत, सभ्यता और इतिहास को दर्शाता है। हवा में लहराता हुआ तिरंगा हमारी आज़ादी का प्रतिक है। यह हम भारतीय नागरिको को उन स्वतंत्र सेनानियों की याद दिलाता है, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत से लड़ते हुए देश के लिए बलिदान दिया।

इसके साथ ही यह हमे विनम्र रहने की भी प्रेरणा देता है तथा हमारे स्वतन्त्रा और आजादी के महत्व को दर्शाता है, जो हमे इतने अथक प्रयासों के बाद मिली है।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को तिरंगा कहते हैं क्योंकि इसमें तीन रंग केसरिया, सफेद और हरा समाहित हैं। इसमें से सबसे उपर केसरिया रंग तटस्थता को दर्शता है, जिसका अर्थ है कि हमारे देश के नेताओ को सभी  भौतिकवादी चीजो से तटस्थ रहना चाहिये और राष्ट्र की सेवा उनकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिये। इसके बाद मध्य में आता है सफेद रंग जोकि सत्य और पवित्रता को दर्शता है, जिसका अर्थ है कि हमे सदैव सत्य के मार्ग पर चलना चाहिये।

तिरंगे के सबसे निचले हिस्से मे हरा रंग होता है जोकि हमारे देश की मिट्टी और प्राकृतिक धरोहर को दर्शाता है। इसके साथ ही तिरंगे के मध्य मे अशोक चक्र का चिन्ह अंकित है जोकि धर्म के नियम को प्रदर्शित करता है, यह दर्शाता है कि धर्म और सदाचार राष्ट्र सेवा के मुख्य गुण है। इसके साथ ही यह हमें जीवन मे चुनौतियो और कठिनाइयों के को पार करके निरन्तर आगे बढने की प्रेरणा देता है।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास बहुत ही रोचक है, सन् 1921 में भारतीय स्वाधीनता संर्घष के दौरान सर्वप्रथम महात्मा गाँधी के मन में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के लिये एक झंण्डे का विचार आया। इस झंण्डे के मध्य में चरखे का घूमता हुआ पहिया बना हुआ था। जोकि गाँधी जी के देशवासियों को चरखे द्वारा खादी कातकर उससे कपडे बनाकर स्वालम्बित बनने के लक्ष्य को दर्शाता था, समय के साथ इसमे कई परिवर्तन आये और भारत के आजादी के समय इसमे और कई बदलाव किये गये। जिसमें चरखे के पहियें को अशोक चक्र से परिवर्तित कर दिया गया, जोकि धर्म चक्र को प्रदर्शित करता करता है।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के नियमानुपालन से जुडी महत्वपूर्ण बातें

भारतीय गणराज्य के प्रत्येक व्यक्ति से भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के आदर और सम्मान करने की अपेक्षा रखी जाती है। इसी कारणवश राष्ट्रीय ध्वज के अनादर को रोकने को लिये कुछ नियम-कानून बनायें गये  है। इन्ही में से कुछ नियम क्रमशः नीचे दिये गये हैं।

  • लहराये जाने वाला तिरंगा सिर्फ खादी या हाँथ से बुने हुये कपडे से बनाया जा सकता है, अन्य किसी प्रकार के वस्तु से बनाया हुआ तिरंगा कानून के तहत दंडनीय है।
  • समारोह के दौरान तिरंगा ध्वजवाहक द्वारा सिर्फ दाहिनें कन्धे पे धारण किया जा सकता है और ध्वजयात्रा सदैव समारोह के सामने से निकाली जानी चाहियें।
  • तिरंगा हमेशा उंचा लहराया जाना चाहिये, यह कीसी वस्तु के सामने झुका नही होना चाहीये।
  • अन्य कोई झण्डा तिरंगे से उपर या इसके बराबर नही लहराया जा सकता।
  • जब भी तिरंगा फहराया जा रहा हो, तो वहा मौजूद लोगो को सावधान मुद्रा मे खड़े होकर तिरंगे का सम्मान करना आवश्यक है।
  • मस्तूल की आँधी ऊँचाई पर फहराया हुआ तिरंगा शोक को प्रदर्शित करता है, यदि अपने सेवाकाल के दौरान राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री की मृत्यु हो जाती है तो देश भर में तिरंगा आँधे मस्तूल तक ही फहराया जाता है।

निष्कर्ष

हमारा राष्ट्रीय ध्वज हमारे गौरव का प्रतीक है, हमे हर कीमत पर इसके गरिमा की रक्षा करनी चाहिये। तिरंगा सदैव ऊँचा फहराया होना चाहिये क्योंकि ये हमारी उस आजादी का प्रतीक है, जो हमे इतने वर्षो के संर्घषो और बलिदानों के बाद मिली है।

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मेक इन इंडिया पर निबंध-Make In India Essay In Hindi

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मेक इन इंडिया पर निबंध-Make In India Essay In Hindi

मेक इन इंडिया पर निबंध (Make In India Essay In Hindi) :

भूमिका : भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र देश है और विश्व में जनसंख्या के विषय में दुसरे स्थान पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भारत देश के विकास के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं उनकी सोच बिलकुल युवाओं की तरह की है। नरेंद्र मोदी जी में उर्जा कूट-कूटकर भरी हुई है उनके मन में काम के प्रति लगन को साफ तरीके से देखा जा सकता है।

मेक इन इंडिया भारत सरकार द्वारा शुरू की गयी एक नई पहल है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने बहुत से देशों में IT कंपनियों के सीईओ से मुलाकात की और उन्हें भारत में निवेश करने के लिए प्रेरित किया था। इस योजना का साथ बहुत ही मल्टीनेशनल कंपनियां दे रही थीं और साथ-ही-साथ उन कंपनियों ने भारत में कई जगह पर अपने कारखानों को खोलकर भारत में निवेश किया है और साथ में कई भारतीय लोगों को इससे रोजगार भी मिल रहा है।

मेक इन इंडिया का आरम्भ : मेक इन इण्डिया का शुभारम्भ माननीय प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा 25 सितम्बर 2014 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुआ था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यही है कि लोगों की रोजमर्रा में उपयोग किया जाने वाले समान का निर्माण इण्डिया में ही हो।

इस योजना को सबको समझाने के लिए औद्योगिक नीति व विकास विभाग द्वारा 29 दिसम्बर 2014 को एक वर्कशॉप आयोजित की गई थी। इसमें खुद नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए इनके साथ उनके कैबिनेट मंत्री , सभी राज्यों के मुख्य सचिव व बड़ी-बड़ी इंडस्ट्री के लीडर भी शामिल थे।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले 25 जगहों पर बदलाव लाना है योजना के तहत इसमें रोजगार बढ़ेंगे जिससे देश में बेरोजगारी की समस्या दूर होगी साथ में ही इन क्षेत्रों में कौशल विकास होगा। जिससे देश विदेश में सभी बड़े निवेशकों का ध्यान हमारी ओर केंद्रित होगा।

मेक इन इंडिया के फायदे : मेक इन इण्डिया अभियान की मदद से बहुत से बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिल रहा है इसी वजह से देश का विकास भी हो रहा है। इस अभियान की सहायता से हम अपने देश भारत को अन्य विकसित देशों को सूचि में जल्द ही देखा जायेगा।

अगर बाहरी देशों की कंपनियां हमारे देश में शाखाएं बनायेंगे तो हमारे भारत के साथ-साथ उन्हें भी फायदा होगा और देश के लोगों को भी कम दाम में उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे और साथ में लोगों को भी नौकरी मिल सकेगी। इससे देश की अर्थव्यवस्था में सुधार और विकास होगा।

मेक इन इण्डिया जब से मेक इन इण्डिया अभियान शुरू हुआ है तब से भारत में जोर शोर से कई निवेशकों ने विनिर्माण , वस्त्र , ऑटोमोबाइल , उत्पादन , खुदरा , रसायन , आईटी , बंदरगाह , फार्मास्यूटिकल , पर्यटन , कल्याण , रेलवे के क्षेत्र में निवेश किया है जो भारत के लिए एक बहुत ही अच्छी बात है।

मेक इन इण्डिया के शुभारम्भ के दिन सभी अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय कंपनियों को इस अभियान का साथ देने के लिए आमंत्रित किया गया था। मेक इन इण्डिया अभियान ने भारत में अंतर्राष्ट्रीय व्यापर में निवेश के क्षेत्र में एक क्रांति उत्पन्न कर दी है। इससे रोज कोई ना कोई बड़ी अंतर्राष्ट्रीय कंपनी भारत में निवेश कर रही है और अपनी शाखाओं को भारत में शुरू कर रही है जो आने वाले सालों में लोगों के लिए रोजगार का एक आच्छा माध्यम होगा।

मेक इन इंडिया का मुख्य उद्देश्य : मेक इन इण्डिया अभियान का उद्देश्य भारत में नई टेक्नालॉजी के विकास और भारत में ही बनाए जाने वाले उत्पादों को बढ़ावा देना है। मेक इन इण्डिया का मुख्य सिद्धांत है कि विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए प्रेरणा मिले तथा भारत में ही उत्पादों को बनाने का प्रोत्साहन दिया जाए।

ना सिर्फ विदेशी उत्पादों बल्कि योजना के तहत भारतीय कंपनियों के उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत में आज तक असाक्षरता , बेरोजगारी , महिलाओं की गिनती में गिरावट , भ्रष्टाचार , गरीबी और स्वास्थ्य सेवाओं में कमी मौजूद है। मेक इन इण्डिया अभियान इन सभी मुश्किलों को भारत से दूर करने का एक बहुत ही अच्छी पहल है।

मेक इन इण्डिया अभियान के अनुसार भारत में 100 स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और किफायती आवास योजना लोगों को मिलने की आशा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बड़े निवेशकों की सहायता से देश में मजबूत विकास और मूल्यवान रोजगार हर घर के लोगों तक सुनिश्चित करना है।

ज्यादा से ज्यादा समान भारत में बने जिससे समान की कीमत कम होगी और बाहर निर्यात होने देश की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। देश में रोजगार बढ़ेगा , गरीबी कम होगी। उच्च गुणवत्ता का समान कम कीमत पर मिलेगा। दुसरे मुल्क के निवेशक हमारे यहाँ आकर पैसा लगाएगा जिससे देश में बाहर से पैसा आएगा साथ ही देश का नाम दुनिया में प्रसिध्य होगा। देश के नौजवानों को अपनी सोच सबको बताने का मौका मिलेगा। देश के नौजवान विदेश में जाकर काम करने की जगह , यही रहकर काम करना पसंद करेंगे।

मेक इन इंडिया को रिस्पांस : सितम्बर 2014 में जब से इस योजना की शुरुआत हुई है तब से नवम्बर 2015 तक भारत सरकार को दुनिया भर की ढेरों इलेक्ट्रॉनिकस कंपनी ने प्रोपोसल भेजे है जो भारत में काम करना शुरू करना चाहती हैं। जनवरी 2015 को स्पाइस मोबाईल कंपनी के मालिक ने उत्तर प्रदेश के साथ डील करके वहां पर अपने मोबाइल फोन बनाने की कंपनी डाली।

जनवरी 2015 में ही सैमसंग मोबाईल कंपनी के सीईओ ह्यून चिल होंग MSME के मंत्री कलराज मिश्रा से मिले थे उन्होंने साथ में काम करने की बात कही थी और नोएडा में इसके प्लांट की बात भी कही थी। फरवरी 2015 में हिताची ने भी भारत में निवेश की बात कही और कहा वे चेन्नई में अपना सेटअप लगा सकते है।

फरवरी 2015 में HUAWEI ने बैगलुरु में अपना रिसर्च व् डेवलोपमेंट कैंपस खोला। इसके साथ ही उन्होंने टेलीकॉम हार्डवेयर प्लांट चेन्नई में बनाने की बात कही जिसे चेन्नई सरकार से मान्यता दे दी। फरवरी 2015 में XIAOMI मोबाइल कंपनी ने आंध्रप्रदेश सरकार के सामने साथ काम करने का प्रस्ताव रखा।

अगस्त 2015 में लेनोवो ने कहा कि उसके मोटोरोला के मोबाइल फोन चेन्न्यो के पास प्लांट में बनने शुरू हो गये है। दिसम्बर 2015 में VIVO मोबाइल कंपनी ने नॉयडा में अपने मोबाइल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जिसमें 2200 लोगों को काम पर रखा गया। इसके साथ-साथ कई विदेशी कंपनियों ने सरकार को अपने प्लांस भेजे और साथ देने का प्रस्ताव भेजा।

दिसम्बर 2015 में जापान के प्रधानमंत्री भारत दौरे में थे उन्होंने मेक इन इण्डिया प्रोजेक्ट के लिए जापान की तरफ से 12 लाख करोड़ का फंड दिया। इसके साथ जब नरेंद्र मोदी दिसम्बर में रूस दौरे पर थे , तब उन्होंने मेक इन इंडिया कैम्पेन के तहत अब तक कि सबसे बड़ी डील साइन की। मलती रोल हेलिकोप्टर भारत में बनते हैं जिसे रूस ने खरीदने का निश्चय किया।

मेक इन इंडिया योजना से जुडी बातें : इस योजना ने देश विदेश सभी स्थानों के निवेशकों के लिए भारत में व्यापर करने के दरवाजे खोल दिए हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियां इस मंत्र को अपना रही हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है जो अब अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की राह पर चल पड़ा है।

सरकार ने इस योजना के लिए 25 सेक्टर का चुनाव किया है जैसे – ऑटोमोबाइल , बायोटेक्नोलाजी , केमिकल , इलेक्ट्रोनिक्स , फ़ूड प्रोसेसिंग , इम्फोर्मेशन टेक्नोलोजी , लेदर , माइनिंग , मिडिया व् एंटरटेनमेंट , आउल व गैस , रेलवे , पोर्ट्स एंड शिपिंग , टेक्सटाइल व् गारमेंट्स , थर्मल पॉवर , टूरिज्म , थर्मल पॉवर , इलेक्ट्रिकल मशीन , रोड व् हाईवे , विमान उद्योग , निर्माण आदि। इसके अलावा रक्षा , स्पेस और भी दुसरे सेक्टर के रास्ते यहाँ निवेश के लिए खुल गए।

इसके साथ ही नियामक राजनीति ने निवेशकों व् व्यापर करने वालों को बहुत सी छुट भी दी। आंकलन के अनुसार ये पूरी योजना में 20 हजार करोड़ की है , लेकिन शुरुआत में इसके लिए 930 करोड़ का इन्वेस्टमेंट प्लान किया गया है , जिसमें से 580 करोड़ भारत की सरकार दे रही है।

प्रत्येक देश में व्यापर व् निवेश करने के अलग अलग नियम कानून होते हैं। 2015 में 189 देशों के बीच वर्ल्ड बैंक द्वारा एक रिसर्च की गई जिसके अनुसार भारत की रैंक 130 नंबर है। मोदी जी इन्हीं सब बैटन को ध्यान में रखकर योजनायें निकालते है अब देश में व्यापर संबंधित बहुत से नियम बदले जा रहे हैं। वर्ल्ड बैंक ने भारत में व्यापर के लिए देश के 17 शहरों में सर्वे किया था जिसके अनुसार लुधियाना , हैदराबाद , भुवनेश्वर , गुडगाँव , आहमदाबाद टॉप 5 शहर है , जहाँ आसानी से कोई व्यापर किया जा सकता है।

मेक इन इंडिया कैम्पेन : मेक इन इंडिया कैम्पेन को जन जन तक पहुँचाने के लिए 13 फरवरी 2016 को मुम्बई में मेक इन इण्डिया विक इवेंट मनाया गया था। यहाँ 2500 अंतर्राष्ट्रीय व् 8000 राष्ट्रिय कंपनियों ने हिस्सा लिया था इसके साथ ही 72 देशों के बिजनेश टीम व् देश के 17 प्रदेशों से भी लोग आये थे। मेक इन इण्डिया की तर्ज पर महाराष्ट्र सरकार से मेक इन महाराष्ट्र कैम्पेन शुरू किया। इसका उद्देश्य मेक इन इण्डिया को और आगे बढ़ाना है। इससे महाराष्ट्र में व्यापार के लिए लोग आकर्षित होंगे व् अर्थव्यवस्था सुधरेगी।

मेक इन इंडिया पर नारे : मेक इन इण्डिया अभियान के लिए बहुत से नारों का प्रयोग किया गया है।

1. नई सुबह की भौर , नव निर्माण की ओर।
2. देश-देश में शौर है , भारत निर्माण की ओर है।
3. भारत निर्माण की ओर , नए युग का दौर।
4. दिल से निकले एक ही दरकार , मेक इन इण्डिया का सपना हो साकार।
5. वही देश हैं समृद्धशाली , जहाँ का युवा हो प्रभावशाली।
6. कण-कण कर मूरत बनायेंगे , देश को विकसित करके दिखलायेंगे।
7. इतिहास हमारा सदियों पुराना , वेदों में निहित ज्ञान हैं , जिस देश की महिमा अलक निरंजन , उसे दिलाना पुनः सम्मान है।
8. मेक इन इण्डिया , युवा शक्ति का आईना।
9. ज्ञान का है जहाँ अलौकिक प्रकाश , जहाँ की मिट्टी में अमरता का आशीर्वाद , क्यूँ झुके वो देश करने विकास , चलो मिलकर करे मेक इन इण्डिया का आगाज।
10. विकास का दौर , निर्माण की ओर।

उपसंहार : यह योजना भारत को विकसित बनाने में एक बहुत ही बेहतरीन पहल साबित हुई है। भारत सरकार अपनी पूरी कोशिश कर रही है मेक इन इण्डिया को सही मार्ग देने की लेकिन हमको भी ऐसी कोशिश करनी चाहिए। हमें सदेशी अपनाने की सोचनी चाहिए जिससे ज्यादा से ज्यादा हमारा भी लाभ ही होगा।

हमें सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का ओर लाभ उठाना चाहिए इसके लिए पीछे नहीं हटना चाहिए। क्योंकि अगर हम इनका लाभ लेने से पीछे हटेंगे तो कोई और जिसको इस लाभ की जरूरत नहीं वो इसका लाभ होगा। अत: किसी काम से पीछे नहीं हटना चाहिए।

मेक इन इंडिया पर निबंध-Make In India Essay In Hindi

चूँकि सामान्यत: बच्चों को अपनी कक्षा में परीक्षा या किसी भी प्रतियोगिता के दौरान निबंध लेखन दिया जाता है, इसलिये हम यहाँ पर मेक इन इंडिया विषय पर विद्यार्थियों की मदद के लिये कई प्रकार के निबंध उपलब्ध करा रहें हैं। विद्यार्थियों की आवश्यकतानुसार विभिन्न कक्षाओं के लिये यहाँ दिये गये निबंध बेहद आसान और अलग-अलग शब्द सीमाओं में लिखें गये हैं। विभिन्न विषयों पर विद्यार्थियों के कौशल स्तर को सुधारने के लिये स्कूल या कॉलेज में आमतौर पर निबंध या पैराग्राफ लेखन प्रतियोगिता रखी जाती है। जिसे देखते हुए ये निबंध बेहद उपयोगी साबित होगा।

मेक इन इंडिया पर निबंध

Make in India Essay in Hindi मेक इन इंडिया की शुरुवात भारत सरकार द्वारा शुरू की गई इसमें बहुराष्ट्रीय कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए और साथ ही राष्ट्रीय कंपनियों को भारत में अपने उत्पादों का निर्माण करने के लिए 25 सितम्बर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया| मेक इन इंडिया पर निबंध हमने सभी कक्षा के बच्चों के लिए लिखा है तो चलिए अब हम निचे मेक इन इंडिया का एस्से पढ़ते है|

Make in India Essay in Hindi 100 Words

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितम्बर, 2014 को दिल्ली के विज्ञान भवन मे “मेक इन इंडिया” मिशन की शुरुआत करते हुआ कहा की हम नहीं चाहते की भारत की किसी भी उद्योग कंपनियों को भारत छोड़ कर जाना पड़े  नरेंद्र मोदी ने कहा हम चाहते है की भारत की कंपनियों की छवि भी अन्तर्राष्ट्रीय कंपनियों की तरह लगे| एस अवसर पर उन्होंने निवेशकों को यह भरोसा दिलाया की सरकार आपका लोगो का पैसा डूबने नहीं देगी और इस मेक इन इंडिया के मिशन को शेर के कदम जैसा बताया|

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस मेक इन इंडिया का मुख्य उद्देश्य था, की विदेशी निवेश को भारत मे ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा देना और हमारे यहाँ के नागरिकों को रोज़गार भी प्राप्त हो सके, ताकि विनिर्माण के क्षेत्र मे हमारा देश अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक पहचान बना सके|

Make In India Essay in Hindi Language
मेक इन इंडिया पर निबंध – Make In India Essay in Hindi Language

Make in India Essay in Hindi 200 Words

अगर हम ‘मेक इन इंडिया’ को दूसरे शब्दों मे कहे तो ‘मेड इन इंडिया‘| मेड इन इंडिया का तात्पर्य यह है की जिन वस्तुयों का निर्माण हमारे ही देश में किया गया हो| हमारे देश मे बनी वस्तुयों का मूल्य भी हमारे लिए कम होगा तथा हम उनको दूसरे देशों में निर्यात करके अपने देश की आय में बढ़ोतरी करेंगे और साथ -साथ बहुत से हमारे देश के नौजवानों को रोज़गार भी मिलेगा| एफ डी आई (FDI) को नए ढंग से परिभाषित करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा भी था की एफ डी आई से तात्पर्य है- “फ़र्स्ट डेवलप इंडिया“| 30 देशो की भागीदारी सहित देश – विदेश में एक साथ शुरू किये गए इस मिशन के लिए लगभग 930 करोड़ का प्रावधान किया गया है|

नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान के लिए लगभग 3000 कंम्पनियों को जोड़ने का लक्ष्य है| इस अभियान के अन्तर्गत सॉफ्टवेयर, बिजली, मोटर वाहन, कागज़ ऐसे ही बहुत सारे क्षेत्रो में विनिर्माण को विशवस्तरिय बनाने पर जोर दिया गया है| केंद्र सरकार के इस कार्यक्रम की शुरुआत के साथ ही देश में रोज़गार के अवसरों मे तेजी की सम्भावना नज़र आने लगी है|

Make in India Essay in Hindi 300 Words

मेक इन इंडिया के उद्घाटन समारोह में मुकेश अम्बानी, चंद कोचर, सायरस मिस्री अन्य नामी उद्योगपति शामिल होने से मेक इन इंडिया मिशन की शोभा और भी बढ़ गयी है यही हमारे प्रधानमंत्री चाहते है की हमारा देश आगे बड़े और तरक्की करते रहे| इस अवसर पर मुकेश अम्बानी का यह कहना है की आने वाले 12-15 महीनो में रिलायंस इंडस्ट्रीज लगभग 2 लाख करोड़ का निवेश करके लाखो रोज़गार प्राप्त कराएगी| निश्चय ही इस अभियान के मार्ग में अनेक बाधाएं भी हैं, पर उन बाधाओं को दूर करने में भारत पूर्णतः सक्षम है| देश में उद्यमियों के अनुकूल वातावरण तैयार करने हेतु यातायात, ऊर्जा, बैंकिंग आदि क्षेत्रों का विस्तार कर इनमें हर स्तर पर सुधार किए जाने की आवश्यकता है|

श्रम कानून में सुधार कर, निर्णय में गति लाकर, विनियोग को सुरक्षा प्रदान करे एवं कर ढांचे को और प्रभावी प्रभावी बनाकर पूरे देश में विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा सकता है| बुनियादी ढांचे में विकास के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में भी काफी विकास किया जाना अति आवश्यक है| इन सबके अलावा प्रशासनिक स्तर पर भी व्यापक सुधार करने की जरूरत है| स्वयं नरेंद्र मोदी जी की कि शब्दों में सरकार, उद्योगपतियो, शिक्षाविदों और नौजवानों की सोच में एकरूपता लाने की आवश्यकता है| नरेंद्र मोदी के इस अभियान से देशवासियों को हर स्तर पर लाभ मिलेगा और मेक इन इंडिया अभियान विशवस्तरिय पर अपनी छवि बनाने में सफलता हासिल करेगा|

मेक इन इंडिया अभियान के लिए, भारत सरकार ने 25 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की है जिन्हें पर्याप्त रूप से बढ़ावा दिया जाएगा| ऑटोमोबाइल, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा, ऑटोमोबाइल अवयव, आईटी और बीपीएम, सड़क और राजमार्ग, विमानन, चमड़ा, अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी, मीडिया और मनोरंजन, कपड़ा और वस्त्र, रसायन, खनन, तापीय उर्जा, निर्माण, तेल और गैस, पर्यटन और आतिथ्य, रक्षा निर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, कल्याण, विद्युत मशीनरी, बंदरगाहों, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, रेलवे|ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) की संभावना सबसे ज्यादा है और भारत सरकार द्वारा निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा| मेक इन इंडिया अभियान लॉन्च पर, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इन क्षेत्रों के विकास से यह सुनिश्चित होगा कि दुनिया आसानी से एशिया में आयेगा, विशेष रूप से भारत के लिए जहां दोनों लोकतांत्रिक स्थितियों और विनिर्माण श्रेष्ठता की उपलब्धता ने इसे सर्वश्रेष्ठ स्थलों बना दिया, खासकर जब उनके प्रशासन द्वारा प्रभावी प्रभावी शासन के साथ मिलाया जाए|

मेक इन इंडिया पर निबंध (मेक इन इंडिया एस्से)

Find below some essays on Make in India in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

मेक इन इंडिया पर निबंध 1 (100 शब्द)

मेक इन इंडिया पर निबंध-Make In India Essay In Hindi

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरु किया गया मेक इन इंडिया अभियान एक नयी योजना है, जिसके तहत विदेशों के कई निवेशकों को भारत में विभिन्न व्ययसायों में पैसा लगाने के लिये एक अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। भारत में बने हुए उत्पादों के लिये राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घरेलू कंपनी के साथ ही बहुदेशीय कंपनीयों को प्रसन्न करने के लिये भारतीय सरकार द्वारा ये एक शुरुआती अभियान चलाया जा रहा है। भारत में रोजगार लाने के लिये प्रधानमंत्री के द्वारा किया गया ये एक प्रयास है। नयी दिल्ली के विज्ञान भवन में 25 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री द्वारा इस मुहिम की शुरुआत की गयी थी।

मेक इन इंडिया

मेक इन इंडिया पर निबंध 2 (150 शब्द)

मेक इन इंडिया पर निबंध-Make In India Essay In Hindi

पीएम नरेन्द्र मोदी के द्वारा शुरु हुआ मेक इन इंडिया एक ऐसा अभियान है जो भारत में व्यापार की इच्छा रखने वाले पूरे विश्व भर के बड़े व्यापारिक निवेशकों को सहज बनाता है। इस कार्यक्रम की शुरुआत नयी दिल्ली के विज्ञान भवन में पीएम के द्वारा 25 सितंबर 2014 हुई। देश के युवाओं के द्वारा सामना किये जा रहे है बेरोजगारी के स्तर को घटाने के लिये भारतीय सरकार के द्वारा ये एक बड़ा कदम उठाया गया है। मंगल मिशन के एक दिन बाद इस अभियान की शुरुआत की गयी थी जब भारत के प्रधानमंत्री के रुप में नरेन्द्र मोदी यूएसए के अपने पहले दौरे पर जाने वाले थे।

इस अभियान को शुरु करने का उद्देश्य भारत को विश्व स्तर का उत्पादन का पावरहाऊस बनाने है जो भातीय अर्थव्यवस्था के बड़े मुद्दे का समाधान करने में जरुर मदद करेगी। मुकेश अंबानी (रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के अध्यक्ष), अजीम प्रेमजी (विप्रो के अध्यक्ष) आदि सहित भारत के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ नयी दिल्ली में सफलतापूर्वक विदेशी निवेशकों के लिये नये समझौते के साथ इस पहल की शुरुआत हुई।

मेक इन इंडिया पर निबंध 3 (200 शब्द)

मेक इन इंडिया पर निबंध-Make In India Essay In Hindi

नयी दिल्ली के विज्ञान भवन में 25 सितंबर 2014 को मेक इन इंडिया अभियान की शुरुआत की गयी थी। भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के साथ ही एक प्रभावशाली लक्ष्य की ओर भारत को मुख्य भूमिका निभाने के लिये इस अभियान को चलाया गया। ये देश के युवाओं के लिये रोज़गार का एक सफल रास्ता उपलब्ध कराता है जो निश्चित ही भारत में गरीबी के स्तर को घटाने और दूसरे सामाजिक मद्दों में मदद करेगा। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पूरे विश्व के प्रमुख निवेशकों के लिये मेक इन इंडिया एक आह्वान है, कि भारत आओ और यहाँ उत्पादों के निर्माण के द्वारा अपने व्यापार को बढ़ाओ। भारत के पीएम ने निवेशकों से कहा कि इससे कोई मतलब नहीं कि आप किस देश में अपने उत्पाद को बेच रहें हैं हालाँकि आपको भारत में उत्पादन करना चाहिये। लक्ष्य को पाने के लिये भारत के युवाओं में प्रचुर मात्रा में योग्यता, कौशल, अनुशासन और प्रतिबद्धता है।

मेक इन इंडिया अभियान सभी मुख्य निवेशकों को एक लाभदायक अवसर उपलब्ध कराता है कि आप भारत आये और उपग्रह से पनडुब्बी, ऑटोमोबाईल से कृषि मूल्य योग, विद्युत से इलेक्ट्रॉनिक आदि किसी भी व्यवसाय में निवेश करें। नयी दिल्ली के विज्ञान भवन में, मुकेश अंबानी, कुमार मंगलम बिरला, साइरस मिस्त्री, अजीम प्रेमजी आदि शिखर के उद्योगपतियों की मौजूदगी में अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिये मेक इन इंडिया योजना के संदर्भ में पीएम ने एक घोषणा की।


 

मेक इन इंडिया पर निबंध 4 (250 शब्द)

मेक इन इंडिया पर निबंध-Make In India Essay In Hindi

नयी दिल्ली में 25 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा आरंभ किया गया मेक इन इंडिया एक महत्वकांक्षी अभियान है। इस अभियान की शुरुआत का उद्देश्य भारत को वैश्विक उत्पादन केन्द्र का एक स्थान बनाना है। इस अभियान को एक सफल अभियान बनाने के लिये अलग-अलग 500 धनी कंपनियों के प्रमुख 40 सीईओ से भारत के पीएम ने मुलाकात की। इंडिया इंक के प्रमुख सीईओ, एम्बेस्डर्स, अंतरराष्ट्रीय उद्योग नेता, मंत्री, सरकारी अधिकारी आदि की मौजूदगी में इस योजना की शुरुआत की गयी। अच्छे से निर्धारित किये गये देशों के प्रमुख कंपनियों का आह्वान करने के लिये इस अभियान ने लक्ष्य बनाया है। कुछ चुनी हुई घरेलू कंपनियाँ जो नवाचार और नयी तकनीक के क्षेत्र में प्रमुख है, उनको भी आमंत्रित किया गया है। “इन्वेस्ट इंडिया” नाम से वाणिज्य मंत्रालय में एक विशेष ईकाई है जो नियामक अनापत्ति को प्राप्त करने में सहयोग करने के साथ ही नियामक और नीतिगत मुद्दे के संबंध में सभी प्रमुख विदेशी निवेशकों का मार्गदर्शन करता है।

निवेशकों पर से किसी भी प्रकार का बोझ घटाने के लिये भारतीय सरकार एक बड़ा प्रयास कर रही है। वेब पोर्टल (makeinindia.com) के द्वारा व्यापारिक कंपनियों से सभी सवालों के उत्तर देने के लिये एक तैयार समर्पित टीम का प्रबंध है। 72 घंटों के अंदर विशेष प्रश्नों के जवाब के लिये एक पश्च सिरा की टीम भी सहायता के लिये तैयार है। एक विश्व अगुआ बनने और निवेशकों के लिये कार्य करने के लिये सरकार द्वारा लगभग 25 मुख्य क्षेत्रकों (जैसे विमानन, रसायन, आईटी, ऑटोमोबाईल, टेक्सटाईल्स, बंदरगाह, दवा के क्षेत्र में, चमड़ा, मेहमानदारी, पर्यटन, स्वास्थ्य, रेलवे आदि) को पहचाना गया है।

मेक इन इंडिया पर निबंध 5 (300 शब्द)

मेक इन इंडिया पर निबंध-Make In India Essay In Hindi

नयी दिल्ली में 25 सितंबर 2014 को भारत में मेक इन इंडिया नाम से एक पहल की शुरुआत भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गयी। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य भारत को आर्थिक वैश्विक पहचान दिलाना है। इस कार्यक्रम के आरंभ के दौरान, पीएम ने कहा कि निवेशकों को इसे एक अवसर के रुप में देखना चाहिये ना कि भारत में बाजार के रुप में। सेवा-चालित वृद्धि मॉडल से श्रम वृद्धिकर उत्पादन चालित वृद्धि से भारतीय अर्थव्यवस्था को नया रुप देना इस अभियान का लक्ष्य है। इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक लागू करना भारत में 10 मिलियन लोगों से ज्यादा के लिये रोजगार का कारण बनेगा। ये एक असरदार योजना है जो यहाँ भारत में अपने व्यवसाय को लगाने के लिये प्रमुख विदेशी कंपनियों को आकर्षित करेगी।

विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिये, रक्षा उत्पादन और बीमा क्षेत्रों में बहुत बड़ा बदलाव किया गया है, हालाँकि विश्लेषकों के अनुसार इसे और असरदार तरीके से करने की जरुरत है। देश में ज्यादा रोजगार आम आदमी की क्रय शक्ति को बढ़ायेगा। भारत एक ऐसा देश है जिसके पास अलग तरह की जनसांख्यिकी, लोकतंत्र और माँग है जो निवेशकों को फायदा पहुँचा सकता है।

नीतिगत मुद्दों पर स्पष्टता और संसाधनों की कमी के कारण, भारतीय व्यापारी भी भारत को छोड़ने और अपना व्यापार कहीं और जमाने की योजना बना रहे थे। अगर ऐसा होता तो ये और खराब अर्थव्यवस्था का कारण बनता। विभिन्न असरदार संसाधनों के साथ मेक इन इंडिया अभियान किसी भी व्यापार के लिये भारत में निवेश के लिये विश्व के प्रमुख उद्योगपतियों का ध्यान खींचेगा। दूसरे देशों से भारतीय कारोबार की अनिवार्यता से बचने के लिये पीएम मोदी ने इस आकर्षिक योजना की शुरुआत की। अपने असरदार शासन के द्वारा वृद्धि केन्द्रित रोजगार और विकास लाने के द्वारा पीएम मोदी का सपना इस देश को बेरोज़गारी मुक्त बनाने का है। युवाओं के लिये बेरोजगारी की समस्या का समाधान करने के द्वारा भारत में बड़े स्तर पर गरीबी को घटाया जा सकता है जिसकी वजह से कई सामाजिक मुद्दे सुलझ सकते हैं।


 

मेक इन इंडिया पर निबंध 6 (400 शब्द)

मेक इन इंडिया पर निबंध-Make In India Essay In Hindi

25 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नयी दिल्ली में मेक इन इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की गयी थी। भारत में निवेश करने के लिये (राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय) पूरे विश्व से मुख्य व्यापारिक निवेशकों को बुलाने के लिये ये एक पहल थी। देश में किसी भी क्षेत्र में (उत्पादन, टेक्सटाईल्स, ऑटोमोबाईल्स, निर्माण, खुदरा, रसायन, आईटी, बंदरगाह, दवा के क्षेत्र में, अतिथि सत्कार, पर्यटन, स्वास्थ्य, रेलवे, चमड़ा आदि) अपने व्यापार को स्थापित करने के लिये सभी निवेशकों के लिये ये एक बड़ा अवसर है। भारत में विनिर्माण पावरहाऊस की स्थापना के लिये विदेशी कंपनियों के लिये इस आकर्षक योजना के पास साधन-संपन्न प्रस्ताव है।

व्यापार (उपग्रह से पनडुब्बी तक, कार से सॉफ्टवेयर, औषधीय से बंदरगाह तक, कागज़ से ऊर्जा तक आदि) के लिये इसे एक वैश्विक केन्द्र बनाने के लिये देश में डिजिटल नेटवर्क के बाजार के सुधार के साथ ही असरदार भौतिक संरचना के निर्माण पर केन्द्रित भारतीय सरकार द्वारा मेक इन इंडिया अभियान की शुरुआत की गयी। इसका प्रतीक (भारत के राष्ट्रीय प्रतीक से लिया हुआ) एक विशाल शेर है जिसके पास ढ़ेर सारे पहिये (शांतिपूर्णं प्रगति और चमकीले भविष्य के रास्ते को इंगित करता है) है। कई पहियों के साथ चलता हुआ शेर हिम्मत, मजबूती, दृढ़ता और बुद्धिमत्ता को इंगित करता है। फेसबुक पर मेक इन इंडिया पेज़ को 1,20,00 लाईक्स मिलें हैं और आरंभ करने के तारीख से कुछ महीनों के अंदर 1,30,000 से ज्यादा फालोअर्स इसके ट्वीटर पर हो चुके हैं।

एक वैश्विक व्यापारिक केन्द्र में देश को बदलने के लिये इस राष्ट्रीय कार्यक्रम को डिज़ाईन किया गया है क्योंकि इसके पास स्थानीय और विदेशी कंपनियों के लिये आकर्षक प्रस्ताव है। देश के युवाओं की स्थिति को सुधारने के लिये लगभग 25 क्षेत्रकों में कौशल को बढ़ाने के साथ ही इस अभियान का ध्यान बड़ी संख्या में मूल्यवान और सम्मानित नौकरी उत्पन्न करना है। इसमें ऑटोमोबाईल, रसायन, आईटी तथा बीपीएम, विमानन उद्योग, औषधीय, निर्माण, बिजली से संबंधित मशीन, खाद्य प्रसंस्करण, रक्षा, विनिर्माण, अंतरिक्ष, टेक्सटाईल्स, कपड़ा उद्योग, बंदरगाह, चमड़ा, मीडिया और मनोरंजन, स्वास्थ्य, खनन, पर्यटन और मेहमानदारी, रेलवे, ऑटोमोबाईल घटक, नवीकरणीय ऊर्जा, बायोटेक्नोलॉजी, सड़क और हाईवे, इलेक्ट्रानिक निकाय और थर्मल ऊर्जा शामिल हैं।

इस योजना के सफलतापूर्वक लागू होने से भारत में 100 स्मार्ट शहर प्रोजेक्ट और वहन करने योग्य घर बनाने में मदद मिलेगी। प्रमुख निवेशकों के मदद के साथ देश में ठोस वृद्धि और मूल्यवान रोजगार उत्पन्न करना इसका मुख्य लक्ष्य है। ये दोनों तरफ के लोगों को फायदा पहुँचायेगा, निवेशक और हमारे देश दोनों को। निवेशकों के असरदार और आसान संचार के लिये एक ऑनलाईन पोर्टल (makeinindia.com) और एक समर्पित सहायक टीम भारतीय सरकार ने बनायी है। किसी भी समय व्यापारिक कंपनियों के सभी प्रश्नों का उत्तर देने के लिये एक वफादार शेल भी समर्पित है।

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डिजिटल इंडिया पर निबंध-Digital India Essay In Hindi

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डिजिटल इंडिया पर निबंध-Digital India Essay In Hindi

डिजिटल इंडिया पर निबंध (Digital India Essay In Hindi) :

भूमिका : डिजिटल इंडिया भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक मुहीम है ताकि भारत में लोगों को टेक्नोलॉजी और डिजिटल दुनिया का ज्ञान मिल सके। आज के समय तक डिजिटल दुनिया से बहुत दूर हैं क्योंकि अधिकतर लोग ऑनलाइन दुनिया से अभी कोशों दूर हैं इसी वजह से इस मुहीम को शुरू किया गया है।

देश के लोगों के बेहतर विकास और वृद्धि के लिए रूपांतरित भारत के लिए यह एक बहुत ही प्रभावशाली योजना है। सुशासन और अधिक नौकरियों के लिए भारत को डिजिटल विस्तार देना इसका लक्ष्य है। डिजिटल इंडिया का मुख्य लक्ष्य सभी सरकारी सुविधाओं को इलेक्ट्रॉनिक रूप से उपलब्ध और इंटरनेट से जोड़ने का काम शुरू किया गया है।

सरकारी सेवा और लोगों के बीच की दूरी के अंतर को मिटाने के लिए डिजिटलीकरण अभियान की ओर भारत के पीएम ने अपना श्रेष्ठ प्रयास किया। किसी भी दुसरे देश से ज्यादा वृद्धि और अच्छे भविष्य के लिए भारत में डिजिटलीकरण की बहुत अधिक जरूरत है। इससे सिर्फ भारतीय लोगों का डिजिटल लेन-देन ही नहीं बढ़ेगा बल्कि देश में भ्रष्टाचार भी कम हो जायेगा।

डिजिटल इण्डिया : डिजिटल इण्डिया भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है जिसका मूल उद्देश्य देश के हर विभाग व रिकार्ड को एक ही कड़ी से जोड़ना है और वह कड़ी है देश की इलेक्ट्रॉनिक डाटा सिस्टम की कड़ी जो काम की गति को बढ़ाने में सहायता करती है।

डिजिटल इण्डिया वह कार्यक्रम होगा जो देश को एक डिजिटल शसक्ति सोसाइटी में बदल सके और भारत को एक नया रूप दे सके। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम से देश की हर जानकारी और रिकॉर्ड को स्वच्छता से इलेक्ट्रानिक मोड़ में रखा जा रहा है जो कि आगे काम में सरलता के साथ-साथ तेज गति को लाएगा।

डिजिटल इण्डिया का शुभारम्भ : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा 1 जुलाई 2015 को डिजिटल इण्डिया प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी। सरकार द्वारा इस अभियान को 2019 तक पूरे भारत में डिजिटल सुविधाएँ प्रदान करने की योजना बनाई गई है। इस योजना के अनुसार ग्रामीण स्थानों को तेज इंटरनेट की सुविधा प्रदान की जाएगी।

डिजिटल इण्डिया से कागजों में लिखा-पढ़ी का समय भी बचेगा और कार्यालयों में लोगों की लम्बी कतारों में भी कमी आएगी। इस प्रोजेक्ट में मुख्य भूमिका संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की है जो इसके पीछे काम में लगे हुए हैं। वरिष्ठ मंत्रालयी सहयोगियों और प्रमुख कंपनियों के सीईओ की मौजूदगी में बुधवार को पीएम के द्वारा डिजिटल इण्डिया सप्ताह का शुभारम्भ हुआ।

डिजिटल इंडिया अभियान के लाभ : डिजिटल लॉकर व्यवस्था लागू करने को यह मुमकिन बनाएगा जिसके परिणाम स्वरूप रजिस्टर्ड संग्रह के माध्यम से ई-शेयरिंग सक्षम बनाने के साथ ही भौतिक दस्तावेज को कम करेगा जिसके द्वारा कागजी कार्यवाही को घटाया जायेगा। यह एक प्रभावशाली ऑनलाइन मंच है जो चर्चा , कार्य करना और वितरण करना जैसे विभिन्न दृष्टिकोण के द्वारा शासन प्रणाली में लोगों को सम्मिलित कर सकता है।

यह सरकार के द्वारा विभिन्न ऑनलाइन लक्ष्यों की प्राप्ति को सुनिश्चित करेगा। यह किसी भी स्थान से अपने दस्तावेज और प्रमाणपत्र को ऑनलाइन जमा करना लोगों के लिए संभव बनाएगा भी जो शारीरिक काम को घटाएगा। ई-हस्ताक्षर संरचना के द्वारा नागरिक अपने दस्तावेजों को ऑनलाइन हस्ताक्षरित करा सकते हैं।

ई-अस्पताल के माध्यम से महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परक सेवाओं को आसान बनाया जा सकता है। इसके बहुत से उदाहरण हैं जैसे – ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन , डॉक्टर से मिलने का समय निश्चित करना , फ़ीस जमा करना , ऑनलाइन लक्षणिक जाँच करना , खून जाँच आदि। यह अर्जियां जमा करने , प्रमाणीकरण प्रक्रिया , अनुमोदन और संवितरण की स्वीकृति के द्वारा राष्ट्रिय छात्रवृति पोर्टल के माध्यम से लाभार्थी के लिए लाभ उपलब्ध कराता है।

डिजिटल इण्डिया अभियान एक बड़ा मंच है जो अपने नागरिकों के लिए पुरे देश भर में सरकारी और निजी सेवाओं के प्रभावशाली वितरण को आसान बनाता है। भारत का नेट कार्यक्रम भारत देश के लगभग 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को जोड़ेगा। डिजिटल इण्डिया अभियान में मदद करने के लिए बाहरी स्त्रोत नीति भी एक योजना है।

मोबाईल पर ऑनलाइन सेवाओं के बेहतर प्रबंधन के लिए बीएसएनएल की आने वाली पीढ़ी का नेटवर्क 30 साल पुराने टेलीफोन एक्सचेंज को बदल देगा। राष्ट्रिय केंद्र द्वारा फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक के लिए फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

पूरे देश में बीएसएनएल के द्वारा बड़े पैमाने पर वाई-फाई हॉटस्पॉट को फ़ैलाने की योजना बनाई गई है। कनेक्टिविटी से जुड़े हुए सभी संबंधित मुद्दों को संभालने के लिए ब्रॉडबैंड हाइवे है। सभी शहरों , नगरों और गांवों में ब्रॉडबैंड हाइवे की खुली पहुंच माउस के एक क्लिक पर विश्व स्तरीय सेवा की उपलब्धता को मुमकिन बनाएगा।

डिजिटल इंडिया अभियान के नुकसान : जिस प्रकार से डिजिटल इंडिया अभियान के लाभ हैं उसी प्रकार से डिजिटल इण्डिया के नुकसान भी हैं। डिजिटल इण्डिया मिशन से हानि तो कुछ नहीं है लेकिन शॉर्ट-टर्म में डिजिटल इण्डिया का नुकसान गरीब और कम पढ़े लोगों को होगा क्योंकि उन्हें यह तकनीक समझने में और इससे अभियस्त होने में कुछ समय लग जायेगा।

गरीब लोग जिनके पास Android मोबाइल ही नहीं हैं वो BHIM APP का लाभ कैसे उठा सकते हैं। जब कोई भी बड़ा बदलाव होता है तो वह एक झटके में नहीं होता है उसके लिए वक्त और अभ्यास चाहिए होता है। आज के समय में डिजिटल इण्डिया मिशन सफलता के कदमों को तेज गति से छू रही है।

डिजिटल व्यवस्था के मुख्य उद्देश्य : अगर यह योजना भारत में पूरी तरह से सफल हो जाती है तो इससे देश के विकास में बहुत बड़ा योगदान मिलेगा। इससे लोग ऑनलाइन की सभी सेवाओं को उपयोग कर सकेंगे जिससे देश में उनकी पूंजी और अधिक सुरक्षित रह सकेगी।

डिजिटल इण्डिया मुहीम के अनुसार भारत में छोटे गाँव से लेकर शहर तक सभी जगह हाई स्पीड इंटरनेट की सुविधा दी जाएगी जिसकी सहायता से लोग ऑनलाइन की सुविधाओं का उपयोग करना सीखेंगे और उसे जीवन का एक हिस्सा बनायेंगे। आज के समय में अधिकतर कार्यालयों में इंटरनेट के माध्यम से काम हो रहा है।

लेकिन अभी भी कुछ सरकारी कार्यलयों में ऑनलाइन काम शुरू नहीं हुआ है। इस मुहीम के अनुसार सभी गवर्नमेंट आर्गेनाइजेशन में बहुत ही जल्द सभी सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया जाएगा। ऑनलाइन सेवाओं की सहायता से लोगों को ज्यादा देर तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और भ्रष्टाचार भी कम हो जायेगा।

सरकार ने इस मुहीम के साथ-साथ आधार कार्ड से मोबाइल नंबर , PAN , बैंक अकाउंट , जीवन बीमा जैसी सेवाओं को बहुत पहले ही जोड़ दिया है जिसकी मदद से अब हर भारतीय की पहचान सही ढंग से हो पाएगी और लोग इन सेवाओं को आधार से लिंक होने के कारण आसानी से उपयोग कर पाएंगे।

अब नौकरी के लिए और स्कूलों में आवेदन देना बहुत आसान हो गया है क्योंकि अब सब कुछ डिजिटल रूप से लिंक किया जा रहा है। डिजिटल इण्डिया कार्यक्रम से देश के करीब 2.5 लाख पंचायतों के समेत 6 लाख गांवों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने का लक्ष्य है। सरकार ने इस लक्ष्य को 2017 के अंत तक हासिल करने का लक्ष्य रखा है। आजकल देश में सरकार द्वारा विभिन्न स्कीम चलाई जा रही हैं।

इन स्कीमों के तहत गरीबों और जरुरतमन्द लोगों को विभिन्न मदद प्रदान की जाएगी। लेकिन असल में इन स्कीमों को जन तक पहुंचाया ही नहीं जाता है और बीच में ही स्कीम के अनुसार अयोग्य लोग इसका फायदा उठा लेते हैं। इस प्रकार के लोभ और अनैतिक कार्यों को रोकने के लिए सरकार ने डिजिटल पैमेंट और डिजिटल प्रोग्रेम का आरम्भ किया है। नरेंद्र मोदी जी चाहते हैं कि डिजिटल इण्डिया का लाभ हर कोई उठा सके। इससे देश के कृषि क्षेत्र को भी लाभ होगा।

डिजिटल व्यवस्था की मुख्य सेवाएं : इस योजना को सफल बनाने के लिए सबसे पहले सरकार ने आधार की मदद से लोगों का बायोमेट्रिक डाटा लिया जिससे उनकी अद्वितीय पहचान मिल सकें। सभी भारतीय लोगों को अद्वितीय पहचान मिलने के बाद भारतीय नागरिकों से सभी सेवाओं जैसे मोबाइल नंबर , PAN , बैंक अकाउंट , जीवन बिमा , राशन कार्ड , गैस कनेक्शन , ड्राइविंग लाइसेंस को आधार कार्ड से जोड़ा जा रहा है।

उसके बाद आधार की सहायता से लोगों को सभी सुविधाएँ दी जा रही हैं। इससे लोगों की पहचान सही प्रकार से हो पा रही है और साथ ही बीच में भ्रष्टाचार करने वाले कम हो गये हैं। आज आप घर पर बैठे आधार की मदद से मोबाइल सिम खरीद सकते हैं , अपना PAN अप्लाई कर सकते हैं और ऐसी कई सेवाएं हैं जो Online KYC और OTP की सहायता से कुछ ही मिनटों में पुरे हो रहे हैं जिनके लिए कभी लोगों को महीनों तक इंतजार करना पड़ता था।

आज के समय में लगभग सभी भारतीय बैंकों में ऑनलाइन बैंकिंग और ATM की सुविधा है जिसकी सहायता से लोग घर बैठे सभी पैसों का लेन-देन कर सकते हैं। अब PAN को भी आधार से जोड़ा जा रहा है जिसकी मदद से कोई भी आयकर चोरी या घोटाला नहीं कर पायेगा और साथ ही लोग TDS भी घर में बैठे भुगतान कर सकते हैं।

अगर आपको बिना बाहर गए सस्ते दामों में सामान मिलेगा तो आप जरुर खरीदेंगे। अब ऑनलाइन शौपिंग वेबसाईट पर घर बैठे समान खरीद सकते हैं और अपना समय और पैसा बचा सकते हैं। अब आप DigiLocker की सुविधा से अपने सभी जरूरी दस्तावेजों को Verify करके मोबाईल फोन में रख सकते हैं। इससे आपको दस्तावेज गुम जाने का खतरा नहीं रहेगा।

उपसंहार : सरकार सभी डिजिटल सुविधाएँ और सेवाएं लोगों के लिए शुरू कर रही है। ऐसी स्थिति में हर भारतवासी का कर्तव्य है कि वह डिजिटल लेन-देन का इस्तेमाल करना सीखे क्योंकि यह सरल , सुरक्षित और सफल जीवन की शुरुआत है। इससे हम लोगों का समय भी बचता है और समय का मूल्य सभी को पता होता है आज की दुनिया में पैसों से ज्यादा समय का मूल्य होता है।

डिजिटल इंडिया पर निबंध-Digital India Essay In Hindi

डिजिटल इंडिया पर निबंध इन हिंदी : (Essay on Digital India 500 words in Hindi)

दोस्तों, निचे नीले रंग में दिया हुआ अंश “डिजिटल इंडिया पर निबन्ध या भाषण” है|
इसका आप ज्यों का त्यों अपने भाषण या निबंध में इस्तेमाल करें| इस विषय में अधिक जानकारी के लिए नीले अंश के निचे डिजिटल इंडिया व अभियान व प्रोजेक्ट के बारे में कई रोचक तथ्य दिए गए हें | उन्हें पढना मत भूलिए|

डिजिटल इंडिया मोदी सरकार द्वारा एक छत्र अभियान है जिसके अंतर्गत बहोत सारे अभियानों का आरम्भ करना सरकार का मूल उद्देश्य है| डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट भारत के बर्तमान सरकार (मोदी सरकार) द्वारा 2 जुलाई 2015 को शुरू किया गया था| इस अभियान का जस्न पूरा एक सप्ताह तक किया गया जिसे “डिजिटल वीक” कहा जा रहा  हें|

डिजिटल इंडिया योजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किया गया है| इस अवसर पर देश की कई बड़ी बिजनेस मैन और अन्य जानी मानी हस्तियाँ मौजूद थे| जैसे की, रिलायंस कंपनी की अध्यक्ष मुकेश अम्बानी, देश की टेलिकॉम मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद , आदि| इस अवसर पर मोदी जी ने अपने भाषण में देश को डिजिटल बनाने के फायदे के बारे में विस्तार से बताया था|

डिजिटल इंडिया योजना के सफलता के लिए देश की बड़ी बड़ी कंपनियों ने काफि खर्च किया हुआ है| इस योजना की अब तक की लागत करीब 4.5 लाख करोड़ की आंकड़े छु चुकी है| सरकार के अनुमान डिजिटल इंडिया योजना करीब 18 लाख  नई नौकरियों को जन्म देगा| इससे देश में पनपती बेरोजगारी कुछ हद तक घटेगी| ये अभियान अपने साथ साथ काफी और छोटे छोटे अभियानों को साथ लाया है जिससे की देश की कई क्षेत्र में सुधार की उम्मीद है|

मोदी जी के कहेनुसार वह दिन दूर नहीं जब डिजिटल इंडिया के कारण पूरा विश्व में भारत की एक अलग पहचान होगी| विश्व की कोई ऐसा देश नहीं होगा जिसे भारत की कभी जरुरत ही नहीं होगी| भारत मदद लेने वाले देशों से मदद देने वाले देशों मे गिणा जाएगा|

डिजिटल इंडिया अभियान से देश की नौजवानों को भी काफी मदद मिलेगी| आज कल पूरे देश में स्टार्ट अप शुरू करने में देश की नौजवानों को डिजिटल इंडिया से काफी मदद मिलेगी| ये नई तकनीकों और सरलता को जन्म देगी| नई नौकरियां भी अपने आप उत्पन्न होने लगेगी|

डिजिटल इंडिया से देश की आर्थिक अवस्था में भी काफी सुधार आने की आशा है| देश को बाहरी राज्यों और देशों से कई प्रकार की चीजों और सामानों का इम्पोर्ट करना पड़ता है| लेकिन अब डिजिटल इंडिया से काफी मात्रा में नई स्टार्ट अप खोले जाएंगे, जिससे की लगभग सारी चीजों का हमारे देश में ही प्रोडक्शन हो पायेगा| इससे देश में नौकरियां के साथ साथ कमाई भी बढेगी| और देश की आर्थिक अवस्था में सुधार होगी|

डिजिटल इंडिया काफी सोची और समझी हुई ख्याल है जिससे पूरा देश उपकृत होगा, और पुरे विश्व के लिए एक उदाहरण बनेगा| तो’आईए हम सब भी देश की डिजिटल इंडिया अभियान को सफल होने में अपना पूरा योगदान दे|

धन्यवाद !!

डिजिटल भारत या डिजिटल इंडिया के बारे में जानकारी:

आज के इस व्यस्त जीवन में सब कुछ बदलता है | हमारे खाने पिने से हमारे काम करने के अंदाज़ भी समय के साथ साथ बदलते हें|  ऐसी ही  कुछ बदलाव हमने अपने देश में भी पाया है |

जी हाँ, हम बात कर रहे देश में डिजिटल इंडिया से बदलाव के बारे में | डिजिटल इंडिया देश में एक क्रांति लेके आया है  जो कि हर काम में स्वच्चाता और सरलता लाने में एक महान अस्त्र है| डिजिटल इंडिया का मिशन देश के हर कार्य को इलेक्ट्रानिकली करना है | चाहे वह जमीन की रिकॉर्ड हो, या फिर सरकारी कर्मचारियों की वेतन का हिसाब| डिजिटल इंडिया का मकसद देश की हर रिकॉर्ड  को इलेक्ट्रानिकली सुरखित रखने का है |

यह भी पढ़ें ››  आम पर निबन्ध: फलों के राजा आम के पेड़ पर निबंध Essay in Hindi

अगस्त 2014 के चुनाव के तुरंत बाद से ही मोदी की सरकार ने डिजिटल इंडिया का फैसला कर लिया था, और करीब एक साल की कड़ी तय्यारी के बाद इसका लांच किया गया|

डिजिटल इंडिया क्या है? What Is Digital India?

डिजिटल इंडिया भारत सरकार द्वारा आरम्भ किया हुआ एक महत्वाकांक्षि कार्यक्रम है जिसका मूल उद्देश्य देश के हर विभाग व रिकॉर्ड को एक ही कड़ी से जुड़ना है | और वह कड़ी है देश की इलेक्ट्रॉनिक डाटा सिस्टम की कड़ी जो की काम की गति को बढाने में मददगार है |

डिजिटल इंडिया वह कार्यक्रम है जो की देश को एक डिजिटली शसक्ति सोसाईटी में तब्दील कर सके और भारत को एक नया रूप दे सके| डिजिटल इंडिया कार्यक्रम से देश की हर जानकारी और रिकॉर्ड को स्वछता से इलेक्ट्रॉनिक मोड में रखा जा रहा है जो की आगे काम में सरलता के साथ साथ तेज रफ़्तार भी लाएगा |

डिजिटल इंडिया की शुरुआत: किसने और कब शुरू किया डिजिटल भारत अभियान? Launch of Digital India:

डिजिटल इंडिया की सुरुवात दिल्ली के इंदिरा गाँधी इंडोर स्टेडियम में 1 जुलाई 2015 को देश के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा कई बड़े बड़े हस्तियों की उपस्तिथि में हुआ था| इस पहल के सुभारम्भ समारोह में विभिन्न उद्योगपतिओं जैसे की टाटा ग्रुप के तब के अध्यक्ष साइरस मिस्त्री, आर.आई.एल अध्यक्ष मुकेश अम्बानी, विप्रो के अजीम प्रेमजी मौजूद थे | इस प्रोग्राम की शुरुवात ख़बरों में काफी छाई| लोगों के मन में नए नौकरी और काम करने के तरीके में बदलाव के काफी आस जागने लगे|

डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के मुख्य उद्देश्य : Aim of Digital India in Hindi

डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट मोदी सरकार द्वारा आरम्भ किया हुआ एक एहम प्रोजेक्ट है जो की देश के हर विभाग को इलेक्ट्रानिकली जुड़ता है | इस कार्यक्रम से देश की करीब 2.5 लाख पंचायतों के समेत 6 लाख गाँव को ब्रॉडबैंड से जोड़ने का लख्य है| सरकार ने इस लख्य को 2017 के अंत तक हासिल करने का लख्य रखा है|

डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट का उद्देश्य देश की डाटा को इलेक्ट्रॉनिक मोड में रखना है जिससे की देश की संपत्ति की चोरी होने का संभावना कम हो जायेगा |

आज कल देश में सरकार द्वारा विभिन्न स्कीम चलाया जा रहा है| इन स्कीमों के तहत गरीब और जरुरत लोगों को विभिन्न मदद प्रदान किया जाता है| लेकिन असल में ये स्कीमों को सही जन तक पहुंचाया ही नहीं जाता है, और बिच में ही स्कीम के अनुसार अयोग्य लोग इसका फाईदा उठा लेते थे|

इस तरह की लोभ और अनैतिक कार्यीं को रोकने के लिए सरकार ने डिजिटल पैमेंट और डिजिटल प्रोग्राम का आरम्भ किया | डिजिटल पैमेंट का उद्देश्य सही लोग तक उनके हक़ को पहुंचाना भी है|

प्रधान मंत्री मोदी जी चाहते हें की डिजिटल इंडिया का लाभ हर कोई उठाये| इससे देश की कृषि क्षेत्र भी लाभ पाता है| कृषि उत्पादन, मुद्रा संबधि विवरण और बिक्री मूल्यों का पता लगा के कृषि क्षेत्र में अधिक कमाई किया जा सकता है|

इस मुहीम का लक्ष देश से कागज़ कार्यवाही को हटाना है जिससे की देश की लाखों रुपये खर्च होने के साथ साथ अनियमितता भी पनपता है|

अगले चार साल के अन्दर ढाई लाख पंचायतों को ब्रॉडबैंड से जोड़े जाने की लक्ष रख सरकार ने अपनी तैयारी भी शुरू कर ली है| सरकार की सारी योजनायें और नियम अब हर किसी के स्मार्ट फ़ोन में होगी| लेकिन भारत देश में करीब 90 करोड़ लोगों की पहुँच इन्टरनेट तक नहीं होने के कारण, सरकार ने डिजिटल साक्षरता के प्रोग्राम को भी आरम्भ कर दिया है|

गाँव गाँव में डिजिटल ईंडिया की बारे में और डिजिटल ईंडिया के महत्व व लाभ के बारे में देश के नागरिकों को बताया जायेगा| पुरे देश में डिजिटल ईंडिया की एक लहर छाया जाएगा ताकि देश की तकनिकी सुविधाओं से कोई भी देशवाशी बंचित न रहे|

डिजिटल इंडिया के लाभ व फाईदा:  Advantages Of Digital India Mission in Hindi:

डिजिटल ईंडिया कार्यक्रम के अनेक लाभ और गूण हें | डिजिटल ईंडिया से हर व्यक्ति की जिंदगी में एक बदलाव आया है | डिजिटल इंडिया के फायदे अनेक हें | अगर सरकार की इस मुहीम को हम सब मिल के और मदद करें तो ये प्रोजेक्ट हमें अपनी जिंदगी में एक वरदान के रूप में वापस मदद करेगा| डिजिटल इंडिया प्रोग्राम से हर व्यक्ति और सरकारी बेसरकारी कार्यालयों में समय की बचत हो रहा  है |

  1. डिजिटल इंडिया प्रोग्राम से सही जण को उसका सही लाभ मिल रहा  है |
  2. डिजिटल इंडिया प्रोग्राम से रिश्वत की आदत को जड़ से मिटाने में एक प्रकार की मदद हो रहा है|
  3. डिजिटल इंडिया प्रोग्राम से कागज़ कार्यवाही में बेकार की खर्च में कमी नज़र आ रही है |
  4. डिजिटल इंडिया प्रोग्राम से हर चीज़ का सही सूचना लोगों तक पहुँच रहा है|
  5. डिजिटल इंडिया प्रोग्राम से देश में हो रही विभिन्न मुहीम की जानकारी पाने में सरलता दिख रही है|
  6.  डिजिटल इंडिया प्रोग्राम से एक स्वच्छ और सत्य भारत का निर्माण हो रहा है |

डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट एक ऐसी मुहीम है जो की सेवा प्रदाता और उपभोक्ता दोनों को फाईदा पहुंचाता है |

देश में हाल ही में डीमोनेटाईसेसन व वीमुद्रिकरण लागू होने के बाद से लोगों में डिजिटल इंडिया की काफी ज्यादा आग्रह देखने को मिल रहा है| लोग आज कल अपना हर खरीद और बिक्री को कैशलेश करना पसंद कर रहे हें| छोटे छोटे व्यापारियों से लेकर बड़ी दुकानों में भी आज कल लगभग हर खरीद पे- टिएम, जैसे कंपनियों के कैश्लेश तरीकों से की जा रही है|

डिजिटल पेमेंट और डिजिटल सुरक्षा का एक माहोल पुरे देश में छाया हुआ है | पे-टीएम्, मोबिक्विक जैसे कंपनियां सरकार की डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के प्रमोशन में काफी मददगार साबित हुए हें| आज लगभग पूरा देश इन कंपनियों कि डिजिटल  पैमेंट के तरीके को अपना के देश को डिजिटल बना रहे हें | छोटे से लेकर बड़े व्यापारियों को भी ग्राहकों कि सुविधा के लिए इस तरह के पैमेंट और कैशलेश तरीकों को अपनाना पड़ा| देखते ही देखते एक साल से भी कम वक़्त (विमुद्राकरण के वक़्त से) में देश की जनता ने अपना कारोबार ऑनलाइन करना पसंद करने लगे|

सरकार ने नोटबंदि के बाद कैशलेश पैमेंट के तरीकों को अपनाने के लिए पुरे देश से अनुरोध किया| देश में कैशलेश को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा एक स्वतंत्र एप्प का आरम्भ किया गया जो की  लोग आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं| इस एप्प का नाम भीम एप्प रखा गया|

डिजिटल ईंडिया ने देश भर में कई नौकरियां और रोज़गार भी प्रदान किया है| सरकार ने देश में तकनिकी सुधार और नयी तकनीकों के लांच के कार्य में कई युवाओं को नौकरियां प्रदान करी|

डिजिटल इंडिया के हानि या नुक्सान: Disadvantages of Digital India in Hindi:

डिजिटल ईंडिया अभियान पर ये निबंध अधूरा होगा अगर हम डिजिटल भारत के नुक्सान पे चर्चा ना करें| जहां तक में देख सकता हूँ, डिजिटल इंडिया मिशन के हानि तो कुछ नहीं है लेकिन हां शॉर्ट-टर्म में डिजिटल इंडिया का नुक्सान ग़रीब ओर कम पढ़े लोगो को होगा क्योंकि उन्हें ये तकनीक समझने में ओर इससे अभियस्त होने मे कुछ वक़्त लग जाएगा|

ग़रीब लोग जिनके पास “android” मोबाइल ही नहीं है, वह “BHIM APP” का लाभ कैसे उठाएंगे?

लेकिन डिजिटल ईंडिया का लाभ और हानि के बारे में चर्चा हो रही है तो हमें ये भी याद रखना चाहिए की कोई भी बड़ा बदलाव एक ही झटके में नहीं होता| वक़्त ओर अभ्यास सब में चाहिए होता है|

आज डिजिटल इंडिया मिशन सफलता की कदम बड़े ही तेज़ रफ़्तार से छु रही है| आइये जानते हें डिजिटल इंडिया की सफलता की कहानी|

डिजिटल इंडिया की सफलता: Success of Digital India in Hindi:

डिजिटल ईंडिया हर रोज़ नई सफलता को चूमती है, इस बात की तो पूरा देश गवाह है|

डिजिटल ईंडिया भारतीयों की जिंदगी में वह परिवर्तन लाने की मिशन है जिससे की हर उपभोक्ता को अपने रोज्मरा जीवन की कई काम पहले से आसान और कम खर्च में निभाने का मौका दे रही है| डिजिटल इंडिया की कई सफल कहानियाँ  हें-

  1. डिजिटल इंडिया प्रोग्राम से देश की हर गाँव को डिजिटल गाँव का रूप मिला:

अब तो डिजिटल इंडिया से सरकार देश की हर गाँव को इन्टरनेट के माध्यम से जोड़ने की काम पर लगे हैं| ये काम करीब 1 साल पहले से शुरु किया जा चूका है| इसके लिए देश की हर गाँव को इन्टरनेट के माध्यम से जोडा जाएगा, जो की देश की टेलिकॉम कंपनी बीएसएनएल को सौंपा जा चूका है की वह इस काम को अपने तकनिकी उपाय से मंजिल दिखाए|  इ-गवर्नेंस की जिल्ला प्रबंधक की माने तो ये कार्य अपने अंतिम कगार तक पहुँच गया है|

  1.   डिजिटल इंडिया प्रोग्राम से कार्य विधि में तेज़ी और सठीकता की एक पहल बन गयी:

डिजिटल इंडिया के जादू से देश की आर्थिक सहर मुंबई के सभी कोर्ट और कार्यालयों से टाइपराइटर की इस्तेमाल को जल्द ही समाप्त किया जायेगा| देश की कार्य व्यवस्था को और तेज़ी रफ़्तार देने के लिए ये नया कदम उठाया जायेगा|

  1.   डिजिटल इंडिया प्रोग्राम से गाडीयों  की आर.सी. करवाने में अब आसानी हुई (डिजिटल इंडिया के लाभ)

अब देश में गाडियों की आर.सी बनाने के लिए घंटों लाइन में खड़े होने की जरुरत नहीं है| क्यूंकि डिजिटल इंडिया के कारण अब आर.सी बस कुछ मिनटों में ऑनलाइन बन जायेगी जिससे समय की काफी बचत हुई| ये देश वासीओं के लिए एक वरदान है |

जानिए कितना सफल रहा डिजिटल इंडिया? डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट कैसे चल रहा है?

डिजिटल इंडिया मिशन हर दिन नयी ऊँचाइओं को छूने की कगार पर पहुँचने की तो हम सब रोज देख रहे हें, लेकिन क्या ये सिलसिला यूँ ही बढेगा, या इसके तरीकों में बदलाव की सख्त जरुरत है? आइए जानते हैं |

डिजिटल इंडिया को देश भर से अच्छी रेस्पोंस मिल रही है| इस मुहीम को गाँव और सहर दोनों वातावरण में काफी सराया गया है| गाँव की ज्यादा से ज्यादा लोग आज कल इन्टरनेट की व्यवहार करने में जूट गए हें| कहा ये भी जा रहा है की अगर गाँव में   डिजिटल इंडिया को इसी तरह से प्रोत्साहन मिलता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब गाँव की लोगों की इन्टरनेट व्यवहार की संख्या सहरी संख्या को पीछे छोड़ जायेगा |

डिजिटल इंडिया के प्रोग्राम को अभी भी पूरी तरह से सफलता हासिल करने के लिए बहोत सी मुश्किलों का सामना करना पड रहा है | आज भी देश के ज्यादातर लोग अनपढ़ हैं जो डिजिटल इंडिया की बढोत्तरी में सबसे बड़ा रुकावट साज़ रहा है| साइबर थ्रेट के कारण भी डिजिटल इंडिया की मुस्किलें बढ़ने लगी है| और इस मुहीम की सबसे बड़ी रुकावट है देश की राजनीति, जिससे की देश की ओप्पोसिसन पार्टी हर नए योजना या सिस्टम को नकारात्मक घोषित करके देश की बढोत्तरी में रुकावट बन रहे है|

डिजिटल इंडिया से इन्टरनेट के प्रयोग में भारी मात्र में बढ़ोत्तरी हुई है| लेकिन आज भी हमारे देश के करीब ३७ फिशादी लोग अनपढ़ हैं, और करीब 90 करोड़ लोगों के पास स्मार्ट फ़ोन की उपलबधी नहीं है| देश के टेंडर व्यवस्था में इ-टेंडर का माहोल बनाने पर सरकार ने कमर कस ली है| लेकिन इ-टेंडर या कहें इ- गवर्नेंस लोगों की परेशानी तो ख़त्म कर सकती है, लेकिन क्या इससे भ्रष्टाचार खत्म होगा इसका कोई पर्याप्त प्रमाण है| कानूनी नियम की देखें तो 2 लाख से ऊपर की खरीद के लिए इ-टेंडर जारी करना होता है, लेकिन देश की कई जगहों से तो ये भी आरोप आ रहा है की बिना टेंडर से ही ठेके बांटा जा रहा है|

कहा जा रहा है की देश में डिजिटल हवा का लहर छा रहा है, लेकिन सच तो ये भी है की देश की कई हिस्सों में आज भी मोबाइल फ़ोन का सिग्नल तक नहीं पहुँच पाया है, और स्थान कुछ ऐसे भी हैं जहां सिग्नल तो पहुँचता है लेकिन इस पर भरोषा करना बेवकूफी होगी| देश की कई हिस्सों में मरीजें कम से कम सरकारी एम्बुलेंस को खबर तक नहीं कर पाते हैं जिससे की राज्य में हर साल कई मात्र में लोगों की मौत भी होने की खबर हम रोज़ अखबारों में पढ़ते हैं|

हम मानते हैं की सरकार इन सारे परिस्तिथियों से अवगत है और इसका समाधान करने के लिए कई प्रकार की कदम भी उठा रही है, लेकिन अभी डिजिटल इंडिया जैसी एलानो को हम पूरी तरह से सफल नहीं कह सकते| लेकिन हम सब की मिली-भगत से वह दिन दूर नहीं जब डिजिटल इंडिया जैसी स्कीम से हम सब को फायदा मिलेगा और हम गौरव से देश को डिजिटल देश कहेंगे|

लेकिन इतनी सफलताओं के बावजूद, आज भी डिजिटल इंडिया के सामने कई चुनौतियां हें| डिजिटल इंडिया की सफलता में कोई सवाल्या निशाँ है, लेकिन आने वाले वक़्त में सरकार को इस मुहीम पे और मेहनत करना होगा|

डिजिटल इंडिया के सामने मुश्किल चुनौतीयां? Challenges Before Digital India Mission:

डिजिटल इंडिया भारत सरकार की आस्वस्नात्मक योजना है|  इ-कॉमर्स डिजिटल इंडिया प्रोग्राम को सुगम बनाने में मदद करेगा| कई कानूनी सलाहकारों की माने तो बिना साइबर सुरक्षा के डिजिटल इंडिया व्यर्थ है |

डिजिटल इंडिया को सफल बनाने  के लिए हर कार्यालयों की कर्मियों को उचित तालीम प्रदान करना अनिवार्य है |

डिजिटल इंडिया के कई बड़ी चुनौतियां है | जैसे की

  1. देश की इन्टरनेट स्पीड डिजिटल इंडिया के लिये एक बड़ी बाधा बनी :

देश की कई हिस्सों में इन्टरनेट स्पीड की बड़ी मुसीबत है जो की डिजिटल इंडिया को उन इलाकों में बढ़ने नहीं दे रही है| इस तरह से कहीं न कहीं इस प्रोजेक्ट के लिए एक बड़ी बाधा साबित हो रही है |

    2. देश की तकनिकी कमी की कारण सुरक्षा पर खतरा लहरा रही है :

देश की कंप्यूटर तथा सूचना प्रणाली इन्टरनेट से जुडी है | इन पर विदेशी कम्पन्यों की आधिपत्य है, जो की डिजिटल इंडिया के सफलता पर एक सवाल-इ-निसान लगा दे रही है | इसके लिए  देश को चाहिए स्वदेशी तकनिकी नियंत्रण जो की देश की तथ्य को बाहरी देशों की तकनीक से दूर रखे, ताकि देश में सुरक्षा की एक वातावरण बने |

   3.बच्चों पर इन्टरनेट की व्यवहार की आजादी पर ख़तरा के चलते डिजिटल इंडिया पर मुस्किल लहराई :

देश की बच्चों को डिजिटल इंडिया के कारण इन्टरनेट से जुड़ने की मुहीम और उनके इन्टरनेट व्यवहार पर आजादी भी हमें एक बार फिर डिजिटल इंडिया के बारे में सोचने के लिए मजबूर कर दे रहा है | आज कल बच्चे इन्टरनेट पर पढ़ाई करने के लिए उसकी इस्तेमाल करते हें| लेकिन इन्टरनेट जो की दुनिया भर की जानकारी को हम तक उपलब्ध करा रही है, वह बच्चों को अपनी मतलब और बेमतलब जानकारी की जाल में फसाने में कई बार सख्यम भी होते हम सब ने देखा है|

    4. देश में बिजली की परेशानी भी डिजिटल इंडिया की सफलता में एक रुकावट है :

आजादी की इतने वर्षों बाद भी हमारे देश की कई हिस्से आज भी बिजली को एक सपने की तरह देख रहे हें| बिजली की परेशानी भी डिजिटल इंडिया के खिलाफ खड़ी एक रुकावट है| बिना बिजली के देश में प्रगति का सपना देखना बेवजह और बेमतलब है| सीधी बात है की बिना बिजली के इन्टरनेट चल नहीं पायेगा जो की सीधा डिजिटल इंडिया पर अपना असर दिखायेगा| जरुरत है की देश की सरकार को देश की हर गाँव को बिजली उपलब्धि कराये|

डिजिटल इंडिया निबंध in हिंदी के सारांश in 5 lines : Digital India Mission Summary

डिजिटल इंडिया भारत सरकार के बहुउपयोगी कदम है जो की आगे चल के देश की हर कार्यालयों की काम काज में सहजता और आसानी लाने की एक बड़ी पहल है | इससे देश की विकास में अपना अमूल्य योगदान है | ये नागरिकों को डिजिटल सशक्त बनाने में अहम् भूमिका निभा रही है|

आज डिजिटल इंडिया कैंपेन के कारण देश को काफी लाभ मिला है, जैसे की कई सरकारी ऑफिस में डिजिटाईसेसन के कारण काम ने रफ़्तार पकड़ी है, काम काज में निर्भुलता की लहर झलक रही है| और सबसे अहम् की सरकारी बाबुओं की चोरी-कमाई में अब ताला पड़ने की दिन आ गई है जो की कई गरीबों को एक बड़ी राहत देने में सफल प्रयास है|

तो आइऐ हम सब मिल के देश की डिजिटल इंडिया प्रोग्राम में हिस्सा ले के देश के प्रति अपना फ़र्ज़ निभाएं और ज्यादा से  ज्यादा डिजिटाईसेसन को अपने जिंदगी का हिस्सा बनाएं |

क्या आप हमारे डिजिटल इंडिया पर निबंध की आर्टिकल से खुश हैं? अगर आप भी डिजिटल इंडिया के बारे में अपना कोई सोच रखना चाहते हें, तो निचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर दें, और इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा लोगों में शेयर करें, ताकि देश में डिजिटाईसेसन की लहर बन जाए और हमें एक आसान और तेज़ गति ज़िन्दगी जीने में मददगार हो |

विद्यार्थियों की मदद के लिये डिजिटल इंडिया अभियान पर हम यहाँ कई निबंध उपलब्ध करा रहें हैं क्योंकि सामान्यत: उन्हें कक्षा में किसी परीक्षा या प्रतियोगिता में निबंध लेखन का कार्य सौंपा जाता है। विभिन्न शब्द सीमा के साथ ही डिजिटल इंडिया पर दिये गये सभी निबंध बेहद सरल शब्दों में पिरोये गये हैं जो अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों की जरुरत के आधार पर लिखे गये हैं।

डिजिटल इंडिया पर निबंध (डिजिटल इंडिया एस्से)

डिजिटल इंडिया पर निबंध-Digital India Essay In Hindi

Find here some essays on Digital India in easy Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

डिजिटल इंडिया पर निबंध 1 (100 शब्द)

डिजिटल इंडिया पर निबंध-Digital India Essay In Hindi

डिजिटल इंडिया के रुप में, एक महत्वकांक्षी कार्यक्रम का आरम्भ दिल्ली के इंदिरा गाँधी इनडोर स्टेडियम में 1 जुलाई (बुधवार) 2015 को हुआ था। इसकी शुरुआत विभिन्न प्रमुख उद्योगपतियों (टाटा समूह के अध्यक्ष साइरस मिस्त्री, आरआईएल अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी, विप्रो अध्यक्ष अज़ीम प्रेमजी आदि) की मौजूदगी में हुई। सम्मेलन में, गाँव से शहर तक भारत की बड़ी संख्या में डिजिटल क्रांति लाने के अपने विचार को इन लोगों ने साझा किया। देश में 600 जिलों तक पहुँच के लिये सूचना तकनीक कंपनी की मौजूदगी में कई सारे कार्यक्रम रखे गये। देश को डिजिटल रुप से सशक्त बनाने के लिये भारतीय सरकार द्वारा लिया गया एक बड़ा कदम है डिजिटल इंडिया कार्क्रम। इस योजना से संबंधित विभिन्न स्कीमों को अनावृत किया जा चुका है (एक लाख करोड़ से ज्यादा की कीमत) जैसे डिजीटल लॉकर, ई-स्वास्थ्य, ई-शिक्षा, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल, ई-हस्ताक्षर आदि।

डिजिटल इंडिया

डिजिटल इंडिया पर निबंध 2 (150 शब्द)

डिजिटल इंडिया पर निबंध-Digital India Essay In Hindi

इस देश को डिजिटल रुप से सशक्त देश बनाने के लिये भारतीय सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया अभियान चलाया जा रहा है। इस मुहिम का लक्ष्य कागजी कार्यवाही को घटाने के द्वारा भारतीय नागरिकों को इलेक्ट्रॉनिक सरकार की सेवा उपलब्ध कराने की है। ये बहुत ही प्रभावशाली और कार्यकुशल है जो बड़े स्तर पर समय और मानव श्रम की बचत करेगा। किसी भी जरुरी सूचना तक पहुँच के लिये तेज गति इंटरनेट नेटवर्क के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों से जुड़ने के लिये 1 जुलाई 2015 को इस पहल की शुरुआत की गयी थी।

पूरे देश भर में डिजिटल संरचना का निर्माण, डिजिटल साक्षरता, डिजिटल तरीके से सेवा प्रदान करना जैसे डिजिटल इंडिया के तीन महत्वपूर्णं तत्व हैं। 2019 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य है। ये एक कार्यक्रम है जो सेवा प्रदाता और उपभोक्ता दोनों को फायदा पहुँचायेगा। इस कार्यक्रम की निगरानी और नियंत्रण करने के लिये डिजिटल इंडिया सलाहकार समूह (संचार एवं आईटी मंत्रालय के द्वारा संचालन) की व्यवस्था है।

डिजिटल इंडिया पर निबंध 3 (200 शब्द)

डिजिटल इंडिया पर निबंध-Digital India Essay In Hindi

विभिन्न प्रमुख उद्योगपतियों की मौजूदगी में दिल्ली के इंदिरा गाँधी इनडोर स्टेडियम में 1 जुलाई 2015 को भारत की सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया अभियान की शुरुआत की गयी। इसका लक्ष्य भारत को विश्व का एक बेहतर नियंत्रित स्थान बनाना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इस प्रोजेक्ट को (एक लाख करोड़ रुपये) अनुमोदित किया गया है और 2019 तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। इस कार्यक्रम की सफलता ई-गर्वनेंस के साथ भारतीय लोगों की सेवा करने के नरेन्द्र मोदी के सपने के सच होने जैसा होगा। कागज़ी कार्यवाही को घटाने, कार्य कुशलता में सुधार और समय की बचत के लिये इलेक्ट्रॉनिक सरकार की सेवा के साथ ये भारतीय नागरिकों को सहज करने के लिये है।

ये योजना वास्तव में तेज गति की इंटरनेट सेवा के साथ दूर-दराज़ के गाँवों और ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने के द्वारा खास तौर से भारत के ग्रामीण इलाकों में वृद्धि और विकास को सुनिश्चित करेगी। खुद प्रधानमंत्री के इस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी करेंगे। इंटरनेट की पहुँच में आने के बाद डिजिटल इंडिया के नागरिक अपने कौशल स्तर और ज्ञान में सुधार कर सकते हैं। ये एक महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट है जो हरेक को फायदा पहुँचायेगा खासतौर से गाँव वालों को जो कई कारणों से कागज़ी कार्य करने में लंबी दूरी तय करते हैं और समय तथा पैसा बर्बाद करते है। पहले से प्रचलित राष्ट्रीय ई-गर्वनेंस योजना का ये एक बहुत ही प्रभावशाली रुप (नो स्तंभों के साथ जो ब्रॉडबैण्ड हाइवे, लोक हित पहुँच कार्यक्रम, हर जगह मोबाईल कनेक्टिविटी, ई-क्रांति, ई-गर्वनेंस, सभी की सूचना, नौकरी के लिये आईटी, पूर्व फसल कार्यक्रम और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण) है।


 

डिजिटल इंडिया पर निबंध 4 (250 शब्द)

डिजिटल इंडिया पर निबंध-Digital India Essay In Hindi

विश्व के जानकार देशों के साथ ही एक संपूर्णं डिजिटल सशक्त भारत में बदलने के लिये 1 जुलाई 2015 (डिजिटल सप्ताह के रुप में 1 जुलाई से 7 जुलाई तक) को भारतीय सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई। एक आशाजनक अच्छे प्रतिफल को प्राप्त करने के लिये विभिन्न सरकारी विभाग जैसे आईटी, शिक्षा, कृषि आदि के द्वारा ये प्रोजेक्ट परस्पर संबद्ध है। दूरसंचार और सूचना तकनीक मंत्रालय द्वारा इसकी योजना और अध्यक्षता की गई है। अगर ये अच्छे से लागू हुआ तो भारत के लिये ये एक सुनहरे अवसर के समान होगा। इस प्रोजेक्ट के लोकार्पण के बेहद शुरुआत में ही लगभग 250,000 गाँवों और देश के दूसरे आवासीय इलाकों में तेज गति के इंटरनेट कनेक्शन को उपलब्ध कराने के लिये राज्य सरकार के द्वारा एक योजना बनायी गयी थी। इस प्रोजेक्ट में “भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड” द्वारा एक महत्वपूर्णं भूमिका अदा की है गयी जो वाकई सराहनीय है।

डिजिटल इंडिया में डेटा का डिजिटलाईजेशन आसानी से होगा जो भविष्य में चीजों को तेज और ज्यादा दक्ष बनाने में मदद करेगा। ये कागजी कार्य, समय और मानव श्रम की भी बचत करेगा। सरकार और निजी क्षेत्रक के बीच गठबंधन के द्वारा ये प्रोजेक्ट गति पकड़ेगा। तेज गति नेटवर्क के साथ आपस में जुड़े हुए बड़ी संख्या के गाँव वास्तव में पिछड़े क्षेत्रों से पूर्णं रुप से डिजिटली लैस इलाकों के रुप में एक बड़े बदलाव से गुजरेगा। भारत में सभी शहर, नगर और गाँव ज्यादा तकनीकी होंगे। मुख्य कंपनियों (राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय) के निवेश के साथ 2019 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की योजना है। डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट में लगभग 2.5 लाख करोड़ के निवेश के लिये अंबानी के द्वारा घोषणा किया गया है।

डिजिटल इंडिया पर निबंध 5 (300 शब्द)

डिजिटल इंडिया पर निबंध-Digital India Essay In Hindi

भारत को एक संपूर्ण डिजिटल देश में बदलने के लिये 1 जुलाई 2015 को भारतीय सरकार के द्वारा डिजिटल इंडिया अभियान की शुरुआत की गयी। सरकारी विभागों और प्रमुख कंपनियों (राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर) के एकीकरण के द्वारा डिजिटल रुप से सशक्त भारतीय समाज के लिये ये एक योजनागत पहल है। भारतीय नागरिकों के लिये आसान पहुँच पर सभी सरकारी सेवा उपलब्ध कराने के लिये इस देश का डिजाटाईजेशन करना मुख्य कारण है। इस कार्यक्रम के तीन मुख्य दृष्टिगत क्षेत्र हैं:

  • भारतीय लोगों के लिये एक जनोपयोगी सेवा की तरह पूरे देश में डिजिटल संरचना हो क्योंकि ये तेज गति की इंटरनेट पहुँच उपलब्ध करायेगा जिससे सभी सरकारी सेवा तक आसान और तेज पहुँच हो जायेगी। ये नागरिकों को जीवन पर्यन्त, अनोखा, ऑनलाईन और प्रामाणिक रुप से डिजिटल पहचान उपलब्ध करायेगा। ये किसी भी ऑनलाईन सेवा जैसे बैंक खाता संभालना, वित्त प्रबंधन, सुरक्षित और सुनिश्चित साईबर स्पेस, शिक्षा, दूरस्थ शिक्षा आदि के लिये बेहद कारगर साबित होगा।
  • सुशासन की अत्यधिक माँग और ऑनलाईन सेवा डिजिटाईजेशन के द्वारा वास्तविक समय में सभी सेवाओं को उपलब्ध करायेगा। डिजिटल रुप से बदली हुई सेवा भी वित्तिय लेन-देन को आसान, इलेक्ट्रॉनिक और बिना नकद के बनाने के द्वारा ऑनलाईन व्यापार करने के लिये लोगों को बढ़ावा देगी।
  • भारतीय लोगों का डिजिटल सशक्तिकरण डिजिटल संसाधनों की वैश्विक पहुँच के द्वारा डिजिटल साक्षरता को वास्तव में मुमकिन बनाएगी। ऑनलाईन प्रमाणपत्र या जरुरी दस्तावेज़ों को जमा करने के लिये ये लोगों को सक्षम बनायेगी ना कि स्कूल, कॉलेज, कार्यालय या किसी संस्थान में भौतिक रुप से प्रस्तुति की जरुरत होगी।

इस पहल के निम्न लक्ष्यों को सुनिश्चित करने के लिये भारतीय सरकार के द्वारा डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को लागू किया गया है।

  • ब्रॉडबैंड हाइवे सुनिश्चित करना।
  • मोबाईल फोन के लिये वैश्विक पहुँच को सुनिश्चित करना।
  • तेज गति इंटरनेट से लोगों को सुगम बनाना।
  • डिजिटाईजेशन के माध्यम से सरकार में सुधार के द्वारा ई-गर्वनेंस लाना।
  • सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक डिलिवरी के द्वारा ई-क्रांति लाना।
  • सभी के लिये ऑनलाईन सूचना उपलब्ध कराना।
  • ज्यादा आईटी नौकरियों को सुनिश्चित करना।

 

डिजिटल इंडिया पर निबंध 6 (400 शब्द)

डिजिटल इंडिया पर निबंध-Digital India Essay In Hindi

 

1 जुलाई 2015 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट की शुरुआत की गयी थी। देश के लोगों के बेहतर विकास और वृद्धि के लिये रुपांतरित भारत के लिये ये एक प्रभावशाली योजना है। वरिष्ठ मंत्रालयी सहयोगियों और प्रमुख कंपनियों के सीईओ की मौजूदगी में बुधवार को पीएम के द्वारा डिजिटल इंडिया सप्ताह (1 जुलाई से 7 जुलाई) शुभारंभ हुआ। सुशासन और अधिक नौकरियों के लिये भारत को एक डिजिटल विस्तार देना इसका लक्ष्य है। सरकारी सेवा और लोगों के बीच की दूरी के अंतर को मिटाने के लिये डिजिटलीकरण अभियान की ओर भारत के पीएम ने अपना श्रेष्ठ प्रयास किया। किसी भी दूसरे देश से ज्यादा वृद्धि और अच्छे भविष्य के लिये भारत में डिजिटलीकरण की बहुत जरुरत थी।

डिजिटल इंडिया अभियान के निम्न लाभ:

  • डिजिटल लॉकर व्यवस्था लागू करने को ये मुमकिन बनाएगा जिसके परिणाम स्वरुप रजिस्टर्ड संग्रह के माध्यम से ई-शेयरिंग सक्षम बनाने के साथ ही भौतिक दस्तावेज़ को कम करने के द्वारा कागजी कार्यवाही को घटाएगा।
  • ये एक प्रभावशाली ऑनलाईन मंच है जो “चर्चा, कार्य करना, और वितरण” जैसे विभिन्न दृष्टिकोण के द्वारा शासन प्रणाली में लोगों को शामिल कर सकता है।
  • सरकार के द्वारा विभिन्न ऑनलाईन लक्ष्यों की प्राप्ति को ये सुनिश्चित करेगा।
  • कहीं से भी अपने दस्तावेज़ और प्रमाणपत्र को ऑनलाईन जमा करना लोगों के लिये ये संभव बनायेगा जो शारीरिक कार्य को घटायेगा।
  • ई-हस्ताक्षर संरचना के द्वारा नागरिक अपने दस्तावेज़ों को ऑनलाईन हस्ताक्षरित करा सकता है।
  • ई-अस्पताल के माध्यम से महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परक सेवाओं को आसान बना सकता है जैसे ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन, डॉक्टर से मिलने का वक्त लेना, फीस जमा करना, ऑनलाईन लक्षणिक जाँच करना, खून जाँच आदि।
  • अर्जियों के जमा करने, प्रमाणीकरण प्रकिया, अनुमोदन और संवितरण के स्वीकृति के द्वारा राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल के माध्यम से लाभार्थी के लिये ये लाभ उपलब्ध कराता है।
  • ये एक बड़ा मंच है जो अपने नागरिकों के लिये पूरे देश भर में सरकारी और निजी सेवाओं के प्रभावशाली वितरण को आसान बनाता है।
  • भारत नेट कार्यक्रम (तेज गति का डिजिटल हाइवे) देश के लगभग 250,000 ग्राम पंचायतों को जोड़ेगा।
  • डिजिटल इंडिया पहल में मदद के लिये बाहरी स्रोत नीति भी एक योजना है। मोबाईल पर ऑनलाईन सेवाओं के बेहतर प्रबंधन के लिये जैसे वॉइस, डाटा, मल्टीमीडिया आदि, बीएसएनएल के अगली पीढ़ी का नेटवर्क 30 साल पुराने टेलिफोन एक्सचेंज को बदल देगा।
  • फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक के लिये राष्ट्रीय केन्द्र फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक को बढ़ावा देने में मदद करेगा।
  • पूरे देश में बीएसएनएल के द्वारा बड़े पैमाने पर वाई-फाई हॉटस्पॉट को फैलाने की योजना बनायी गयी है।
  • कनेक्टिवीटी से जुड़े सभी संबंधित मुद्दों को संभालने के लिये ब्रॉडबैंड हाइवे है।
  • सभी शहरों, नगरों और गाँवों में ब्रॉडबैंड हाइवे की खुली पहुँच माऊस के एक क्लिक पर विश्व स्तरीय सेवा की उपलब्धता को मुमकिन बनायेगा।

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भारतीय संस्कृति पर निबंध-Indian Culture In Hindi

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भारतीय संस्कृति पर निबंध-Indian Culture In Hindi

भारतीय संस्कृति पर निबंध (Indian Culture In Hindi) :

भूमिका : भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वाधिक प्राचीन एवं समृद्ध संस्कृति है। इससे विश्व की सभी संस्कृतियों की जननी माना जाता है। जीने की कला हो या विज्ञान और राजनीति का क्षेत्र , भारतीय संस्कृति का सदैव विशेष स्थान रहा है। अन्य देशों की संस्कृतियाँ तो समय की धारा के साथ-साथ नष्ट होती रही हैं किन्तु भारत की संस्कृति आदि काल से ही अपने परम्परागत अस्तित्व के साथ अजर-अमर बनी हुई है।

आज के समय में सभ्यता और संस्कृति को एक-दुसरे का पर्याय समझा जाने लगा है जिसके फलस्वरूप संस्कृति के संदर्भ में अनेक भ्रांतियाँ पैदा हो गई हैं। लेकिन वास्तव में संस्कृति और सभ्यता अलग-अलग होती हैं। सभ्यता का संबंध हमारे बाहरी जीवन के ढंग से होता है यथा – खान-पान , रहन-सहन , बोलचाल जबकि संस्कृति का संबंध हमारी सोच , चिन्तन , और विचारधारा से होता है।

संस्कृति का क्षेत्र सभ्यता से कहीं व्यापक और गहन होता है। सभ्यता का अनुकरण तो किया जा सकता है लेकिन संस्कृति का अनुकरण नहीं किया जा सकता है। हम पेंट-कोट पहनकर और अंग्रेजी बोलकर पाश्चात्य सभ्यता का अनुकरण करते हैं न कि पाश्चात्य संस्कृति का।

संस्कृति शब्द का अर्थ : संस्कृति किसी भी देश , जाति और समुदाय की आत्मा होती है। संस्कृति से ही देश , जाति या समुदाय के उन समस्त संस्कारों का बोध होता है जिनके सहारे वह अपने आदर्शों , जीवन मूल्यों आदि का निर्धारण करता है। संस्कृति का साधारण अर्थ होता है – संस्कार , सुधार , परिष्कार , शुद्धि , सजावट आदि।

भारतीय प्राचीन ग्रंथों में संस्कृति का अर्थ संस्कार से ही माना गया है। कौटिल्य जी ने विनय के अर्थ में संस्कृति शब्द का प्रयोग किया गया है। भारतीय प्राचीन ग्रंथों में भी अंग्रेजी शब्द कल्चर के समान संस्कृति शब्द का प्रयोग होने लगा है। संस्कृति का अर्थ हम भले ही कुछ निकाल लें किन्तु संस्कृति का संबंध मानव जीवन मूल्यों से है।

भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृति है। विश्व की विभिन्न संस्कृतियाँ भारतीय संस्कृति के समक्ष पैदा हुई और मिट गईं। भारतीय संस्कृति में महान समायोजन की क्षमता होती है। यहाँ पर विभिन्न संस्कृतियों के लोग आए और यहीं पर बस गए। उनकी संस्कृतियाँ भारतीय संस्कृति का अंग बन गईं।

इसी वजह से भारतीय संस्कृति लगातार आगे बढती जा रही है। भारतीय संस्कृति की प्रष्ठभूमि में मानव कल्याण की भावना निहित है। यहाँ पर जो भी काम होते हैं वो बहुजन हिताय और बहुजन सुखाय की दृष्टि से ही होते हैं। यही संस्कृति भारतवर्ष की आदर्श संस्कृति होती है। भारत की संस्कृति की मूल भावना ‘ वसुधैव कुटुम्बकम ‘ के पवित्र उद्देश्य पर आधारित है अथार्त सभी सुखी हों , सब निरोग हो , सबका कल्याण हो , किसी को भी दुःख प्राप्त न हो ऐसी पवित्र भावनाएं भारतवर्ष में सदैव प्राप्त होती रहें।

भारतीय संस्कृति की प्राचीनता : भारतीय संस्कृति संसार की प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है। मध्य प्रदेश के भीमबेटका में पाए गए शैलचित्र , नर्मदा घटी में की गई खुदाई तथा कुछ अन्य नृवंशीय एवं पुरातत्वीय प्रमाणों से सिद्ध हुआ है कि भारत की भूमि आदि मानव की प्राचीनतम कर्मभूमि रही है।

सिधु घटी सभ्यता के विवरणों से यह साबित होता है कि आज के समय से लगभग पांच हजार साल पहले उत्तरी भारत के बड़े भाग में एक उच्च कोटि की संस्कृति का विकास हो चुका था। इसी तरह से वेदों में परिलक्षित भारतीय संस्कृति न सिर्फ प्राचीनता का एक प्रमाण है बल्कि वह भारतीय अध्यात्म और चिन्तन की भी सर्वश्रेष्ठ अभिव्यक्ति है। उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर भारतीय संस्कृति से रोम और यूनानी संस्कृति को प्राचीन तथा मिस्त्र , असीरिया एवं बेबिलोनिया जैसी संस्कृतियों के समकालीन माना गया है।

भारतीय संस्कृति की निरंतरता : भारतीय संस्कृति की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि हजारों सालों के बाद भी यह अपने मूल स्वरूप में जीवित है जबकि मिस्त्र , असीरिया , यूनान और रोम की संस्कृतियाँ अपने मूल स्वरूप को विस्मृत कर चुकी हैं। भारत में नदियों , वट , पीपल जैसे वृक्षों , सूर्य तथा अन्य प्राकृतिक देवी-देवताओं की पूजा करने का क्रम शताब्दियों से चला आ रहा है।

देवताओं की मान्यता , हवन और पूजा-पाठ की पद्धतियों की निरंतरता आज के समय तक अप्रभावित रही है। वेदों में और वैदिक धर्मों में करोड़ों भारतियों की आस्था और विश्वास आज भी उतना ही है जितना हजारों साल पहले था। गीता और उपनिषदों के संदेश हजारों साल से हमारी प्रेरणा और क्रम का आधार रहे हैं।

किंचित परिवर्तनों के बाद भी भारतीय संस्कृति के आधारभूत तत्वों , जीवन मूल्यों और वचन पद्धति में एक ऐसी निरंतरता रही है कि आज भी करोड़ों भारतीय खुद को उन मूल्यों एवं चिंतन प्रणाली से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं और इससे प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

आध्यात्मिकता पर बल और भौतिकता का समन्वय : भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र आध्यात्मिकता है। भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिकता का आधार ईश्वरीय विश्वास होता है। यहाँ पर विभिन्न धर्मों और मतों में विश्वास रखने वाले लोग आत्मा-परमात्मा के अस्तित्व में विश्वास रखते हैं। उनकी दृष्टि में भगवान ही इस संसार का रचियता एवं निर्माता है।

वही संसार का कारण , पालक और संहारकर्ता है। त्याग और तपस्या भारतीय संस्कृति के प्राण होते हैं। भारतीय संस्कृति के प्रमुख तत्व त्याग की वजह से मनुष्य में संतोष गुण परिपूर्ण रहता है। त्याग की भावना की वजह से मनुष्य के मन में दूसरों की सहायता सहानुभूति जैसे गुणों का विकास होता है और स्वार्थ और लालच जैसी बुरी भावनाओं का नाश होता है।

यहाँ पर त्याग की भावना में जन कल्याण की भावना छिपी होती है। काम में संयम भारतीय संस्कृति की प्रमुख विशेषता होती है। भारतीय संस्कृति में उन्मुक्त अथवा स्वच्छन्द सुख भोग का विधान नहीं है। मुक्त सुख भोग से मानव में लालच प्रवृति का उदय होता है और व्यक्ति हमेशा असंतोषी बना रहता है।

इसी वजह से भारतीय संस्कृति काम में संयम का आदेश देती है। भारतीय संस्कृति में धर्म में निष्ठा का भी आदर्श होता है। भारत में विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं। वे सभी अपने-अपने धर्मों में विश्वास और निष्ठा रखते हैं और दूसरों के धर्म के प्रति सम्मान भी करते हैं। यही भारतीय संस्कृति में धार्मिक आदर्श प्रस्तुत किया गया है।

भारतीय संस्कृति में आश्रम व्यवस्था के साथ धर्म , अर्थ और मोक्ष का विशिष्ट स्थान रहा है। इन्हीं ने भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिकता के साथ-साथ भौतिकता का एक अद्भुत समन्वय कर दिया है। हमारी संस्कृति में जीवन के ऐहिक और पारलौकिक दोनों पहलुओं से धर्म का संबंध रखा गया था।

धर्म उन तत्वों , सिद्धातों और जीवन प्रणाली को कहा जाता है जिससे मानव जाति परमात्मा प्रदत्त शक्तियों के विकास से अपना लौकिक जीवन सुखी बना सके तथा मृत्यु के पश्चात जीवात्मा शांति का अनुभव कर सके। शरीर नश्वर होता है आत्मा अमर होती है यह अमरता मोक्ष से जुडी हुई है।

इस मोक्ष को पाने के लिए अर्थ और काम का पुरुषार्थ करना भी जरूरी होता है। इस तरह से भारतीय संस्कृति में धर्म और मोक्ष आध्यात्मिक संदेश एवं काम और अर्थ की भौतिक अनिवार्यता में परस्पर संबंध होता है। आध्यात्मिकता और भौतिकता के इस समन्वय में भारतीय संस्कृति की वह विशिष्ट अवधारणा परिलक्षित होती है जो मनुष्य के इस लोक और परलोक को सुखी बनाने के लिए भारतीय मनीषियों ने निर्मित की थी। सुखी मानव जीवन के लिए ऐसी चिंता संसार की अन्य संस्कृतियाँ नहीं करती हैं।

अनेकता में एकता : भौगोलिक दृष्टि से भारत विविधताओं का देश है फिर भी सांस्कृतिक रूप से एक इकाई के रूप में इसका अस्तित्व प्राचीन समय से ही बना हुआ है। इस विशाल देश में उत्तर का पर्वतीय भू-भाग जिसकी सीमा पूर्व में ब्रह्मपुत्र और पश्चिम में सिन्धु नदियों तक विस्तृत है।

इसके साथ गंगा , यमुना , सतलुज की उपजाऊ कृषि भूमि , विन्ध्य और दक्षिण का वनों से आच्छादित पठारी भू-भाग , पश्चिम में थार का रेगिस्तान , दक्षिण का तटीय प्रदेश तथा पूर्व में असम और मेघालय का अतिवृष्टि का सुरम्य क्षेत्र सम्मिलित है। भौगोलिक विभिन्नता के साथ इस देश में आर्थिक और सामाजिक भिन्नता भी पर्याप्त रूप से विद्यमान है। इन भिन्नताओं की वजह से ही भारत में अनेक सांस्कृतिक उपधाराएँ विकसित होकर पल्लवित और पुष्पित हुई हैं।

अनेक विभिन्नताओं के बाद भी भारत की पृथक सांस्कृतिक सत्ता रही है। हिमालय पुरे देश के गौरव का प्रतिक रहा है। गंगा , यमुना और नर्मदा जैसी नदियों की स्तुति यहाँ के लोग प्राचीनकाल से करते आ रहे हैं। राम , कृष्ण और शिव की आराधना यहाँ पर सदियों से की जाती है।

सभी में भाषाओँ की विविधता जरुर है लेकिन फिर भी संगीत , नृत्य और नाटी के मौलिक स्वरूपों में आश्चर्यजनक समानता है। यहाँ की संस्कृति में अनेकता में भी एकता स्पष्ट रूप से झलकती है। भारतीय संस्कृति स्वाभाविक रूप से शुद्ध है जिसमें प्यार , सम्मान , दूसरों की भावनाओं का मान-सम्मान और अहंकाररहित व्यक्तित्व अंतर्निहित है।

गुरु का सम्मान : गुरु का सम्मान भी हमारी संस्कृति का ही एक रूप कहा जा सकता है। भारतवर्ष में शुरू से ही गुरु का सम्मान किया जाता है। गुरु द्रोणाचार्य के मांगने पर एकलव्य ने अपने हाथ का अंगूठा दान में दे दिया था। भारतीय संस्कृति के अनुसार गुरु का स्थान और सम्मान भगवान से भी बढकर होता है।

बड़ों के लिए आदर और श्रद्धा भारतीय संस्कृति का एक बहुत ही बड़ा सिद्धांत है। बड़े खड़े हों तो उनके सामने न बैठना , बड़ों के आने पर स्थान को छोड़ देना , उनको सबसे पहले खाना परोसना जैसी क्रियाओं को अपनी दिनचर्या में देखा जा सकता है जो हमारी संस्कृति का एक अभिन्न अंग हैं।

हम लोग देखते हैं कि युवा कभी भी अपने बुजुर्गों का नाम लेकर संबोधन नहीं करते हैं। सभी बड़ों , पवित्र पुरुषों और महिलाओं का आशीर्वाद प्राप्त करने और उन्हें मान -सम्मान देने के लिए हम उनके चरणों को स्पर्श करते हैं। छात्र अपने शिक्षक के पैर छूते हैं।

मन , शरीर , वाणी , विचार , शब्द और कर्म में शुद्धता हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। शून्य की अवधारणा और ॐ की मौलिक ध्वनी भारत द्वारा ही संसार को दी गयी है। हमें कभी भी कठोर और अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए तथा अपने शरीर को स्वच्छ और स्वस्थ रखना चाहिए। दूसरों को बाएं हाथ से कोई भी वस्तु देना अपमान माना जाता है। देवी-देवताओं को चढ़ाने के लिए उठाए जाने वाले फूलों को सूंघना नहीं चाहिए।

उपसंहार : भारतीय संस्कृति एक विचार , एक भाग , अथवा जीवन मूल्य है जिनको जीवन में अपनाकर जीवन के विकास को प्राप्त किया जा सकता है। भारतीय संस्कृति का उद्देश्य मनुष्य का सामूहिक विकास है। उसमें वसुधैव कटुम्बकम और सर्वे भवन्तु सुखिन: के भाव सर्वत्र विद्यमान हैं।

भारतीय संस्कृति एक महान जीवनधारा है जो प्राचीनकाल से सतत प्रवाहित है। इस तरह से भारतीय संस्कृति स्थिर एवं अद्वितीय है जिसके संरक्षण की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी पर हैं। इसकी उदारता और समन्यवादी गुणों ने अन्य संस्कृतियों को समाहित तो किया है किन्तु अपने अस्तित्व के मूल को सुरक्षित रखा है। एक राष्ट्र की संस्कृति उसके लोगों के दिल और आत्मा में बस्ती है। सर्वांगीनता , विशालता , उदारता और सहिष्णुता की दृष्टि से अन्य संस्कृतियों की अपेक्षा भारतीय संस्कृति अग्रणी स्थान रखती है।

भारतीय संस्कृति पर निबंध-Indian Culture In Hindi

भारत समृद्ध संस्कृति का एक ऐसा देश है जहाँ एक से ज्यादा धार्मिक संस्कृति के लोग एक साथ रहते हैं। भारतीय संस्कृति को दुनिया के सामने रखने के लिये हम यहाँ पर स्कूल के विद्यार्थियों के लिये बेहद सरल और विभिन्न शब्द सीमाओं के साथ निबंध उपलब्ध करा रहें हैं। इसका प्रयोग विद्यार्थी स्कूली परीक्षा अथवा विभिन्न प्रतियोगताओं के दौरान कर सकते हैं।

भारतीय संस्कृति पर निबंध (इंडियन कल्चर एस्से)

Find below some essays on Indian Culture in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

भारतीय संस्कृति पर निबंध 1 (100 शब्द)

भारतीय संस्कृति पर निबंध-Indian Culture In Hindi

पूरे विश्व में भारत अपनी संस्कृति और परंपरा के लिये प्रसिद्ध देश है। ये विभिन्न संस्कृति और परंपरा की भूमि है। भारत विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता का देश है। भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण तत्व अच्छे शिष्टाचार, तहज़ीब, सभ्य संवाद, धार्मिक संस्कार, मान्यताएँ और मूल्य आदि हैं। अब जबकि हरेक की जीवन शैली आधुनिक हो रही है, भारतीय लोग आज भी अपनी परंपरा और मूल्यों को बनाए हुए हैं। विभिन्न संस्कृति और परंपरा के लोगों के बीच की घनिष्ठता ने एक अनोखा देश, ‘भारत’ बनाया है। अपनी खुद की संस्कृति और परंपरा का अनुसरण करने के द्वारा भारत में लोग शांतिपूर्णं तरीके से रहते हैं।

भारतीय संस्कृति

भारतीय संस्कृति पर निबंध 2 (150 शब्द)

भारतीय संस्कृति पर निबंध-Indian Culture In Hindi

भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है जो लगभग 5,000 हजार वर्ष पुरानी है। विश्व की पहली और महान संस्कृति के रुप में भारतीय संस्कृति को माना जाता है। “विविधता में एकता” का कथन यहाँ पर आम है अर्थात् भारत एक विविधतापूर्ण देश है जहाँ विभिन्न धर्मों के लोग अपनी संस्कृति और परंपरा के साथ शांतिपूर्णं तरीके से एक साथ रहते हैं। विभिन्न धर्मों के लोगों की अपनी भाषा, खाने की आदत, रीति-रिवाज़ आदि अलग हैं फिर भी वो एकता के साथ रहते हैं।

भारत की राष्ट्रीय भाषा हिन्दी है हालाँकि विभिन्न राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में लगभग 22 आधिकारिक भाषा और 400 दूसरी भाषाएँ रोज बोली जाती हैं। इतिहास के अनुसार, हिन्दू और बुद्ध धर्म जैसे धर्मों की जन्मस्थली के रुप में भारत को पहचाना जाता है। भारत की अधिसंख्य जनसंख्या हिन्दू धर्म से संबंध रखती है। हिन्दू धर्म की दूसरी विविधता शैव, शक्त्य, वैष्णव और स्मार्ता है।

भारतीय संस्कृति पर निबंध 3 (200 शब्द)

भारतीय संस्कृति पर निबंध-Indian Culture In Hindi

पूरे विश्व भर में भारतीय संस्कृति बहुत प्रसिद्ध है। विश्व के बहुत रोचक और प्राचीन संस्कृति के रुप में इसको देखा जाता है। अलग-अलग धर्मों, परंपराओं, भोजन, वस्त्र आदि से संबंधित लोग यहाँ रहते हैं। विभिन्न संस्कृति और परंपरा के रह रहे लोग यहाँ सामाजिक रुप से स्वतंत्र हैं इसी वजह से धर्मों की विविधता में एकता के मजबूत संबंधों का यहाँ अस्तित्व है।

अलग परिवारों, जातियों, उप-जातियों और धार्मिक समुदाय में जन्म लेने वाले लोग एकसाथ शांतिपूर्वक एक समूह में रहते हैं। यहाँ लोगों का सामाजिक जुड़ाव लंबे समय तक रहता है। अपनी तारतम्यता, और सम्मान की भावना, इज़्ज़त और एक-दूसरे के अधिकार के बारे में अच्छी भावना रखते हैं। अपनी संस्कृति के लिये भारतीय लोग अत्यधिक समर्पित रहते हैं और सामाजिक संबंधों को बनाए रखने के लिये अच्छे सभ्याचार को जानते हैं। भारत में विभिन्न धर्मों के लोगों की अपनी संस्कृति और परंपरा होती है। उनका अपने त्योंहार और मेले होते हैं जिसे वो अपने तरीके से मनाते हैं। लोग विभिन्न भोजन संस्कृति जैसे पोहा, बूंदा, ब्रेड ऑमलेट, केले का चिप्स, आलू का पापड़, मुरमुरे, उपमा, डोसा, इडली, चाईनीज़ आदि का अनुकरण करते हैं। दूसरे धर्मों के लोगों की कुछ अलग भोजन संस्कृति होती है जैसे सेवईयाँ, बिरयानी, तंदुरी, मठ्ठी आदि।


 

भारतीय संस्कृति पर निबंध 4 (250 शब्द)

भारतीय संस्कृति पर निबंध-Indian Culture In Hindi

संस्कृतियों से समृद्ध एक देश भारत है जहाँ अलग-अलग संस्कृतियों के लोग रहते हैं। हम अपनी भारतीय संस्कृति का बहुत सम्मान और आदर करते हैं। संस्कृति सबकुछ है जैसे दूसरों के साथ व्यवहार करने का तरीका, विचार, प्रथा जिसका हम अनुसरण करते हैं, कला, हस्तशिल्प, धर्म, खाने की आदत, त्योंहार, मेले, संगीत और नृत्य आदि सभी संस्कृति का हिस्सा है। भारत अधिक जनसंख्या के साथ एक बड़ा देश है जहाँ विभिन्न धर्मों के लोग अपनी अनोखी संस्कृति के साथ एकसाथ रहते हैं। देश के कुछ मुख्य धर्म हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, जैन और यहूदी हैं। भारत एक ऐसा देश है जहाँ देश के अलग-अलग हिस्सों में भिन्न – भिन्न भाषाएँ बोली जाती हैं। आमतौर पर यहाँ के लोग वेशभूषा, सामाजिक मान्यताओं, प्रथा और खाने की आदतों में भिन्न होते हैं।

अपने धर्म के अनुसार लोग मान्यताओं, रीति-रिवाज़ और परंपरा को मानते हैँ। हम अपने त्योंहारों को अपने रस्मों के हिसाब से मनाते हैं, व्रत रखते हैं, पवित्र गंगा नदी में स्नान करते हैं, भगवान की पूजा और प्रार्थना करते हैं, रस्मों से संबंधित गीत गाते हैं, नृत्य करते हैं, लज़ीज़ पकवान खाते हैं, रंग-बिरंगे कपड़े पहनते हैं और दूसरी ढ़ेर सारी क्रियाकलाप करते हैं। विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों सहित हम कुछ राष्ट्रीय उत्सवों को एकसाथ मनाते हैं जैसे गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गाँधी जयंती आदि। बिना एक-दूसरे में टाँग अड़ाये बेहद खुशी और उत्साह के साथ देश के विभिन्न भागों में विभिन्न धर्मों के लोग अपने त्योंहारों को मनाते हैं।

कुछ कार्यक्रम जैसे गौतम बुद्ध का जन्मदिन (बुद्ध पूर्णिमा), भगवान महावीर जन्मदिन (महावीर जयंती), गुरु नानक जयंती (गुरु पर्व) आदि कई धर्मों के लोगों द्वारा एकसाथ मनाया जाता है। भारत अपने विभिन्न सांस्कृतिक नृत्यों जैसे शास्त्रीय (भरत नाट्यम, कथक, कथक कली, कुच्ची पुड़ी) और अपने क्षेत्रों के लोक नृत्यों के अनुसार बहुत प्रसिद्ध है। पंजाबी भाँगड़ा करते हैं, गुजराती गरबा करते हैं, राजस्थानी घुमड़ करते हैं, आसामी बिहू करते हैं जबकि महाराष्ट्रा के लोग लाँवणी का आनन्द लेते हैं।

भारतीय संस्कृति पर निबंध 5 (300 शब्द)

भारतीय संस्कृति पर निबंध-Indian Culture In Hindi

समृद्ध संस्कृति और विरासत की भूमि है भारत जहाँ लोगों में इंसानियत, उदारता, एकता, धर्मनिर्पेक्षता, मजबूत सामाजिक संबंध और दूसरे अच्छे गुण हैं। दूसरे धर्मों के लोगों द्वारा ढ़ेर सारी क्रोधी क्रियाओं के बावजूद भी भारतीय हमेशा अपने दयालु और सौम्य व्यवहार के लिये जाने जाते हैं। अपने सिद्धांतों और विचारों में बिना किसी बदलाव के अपनी सेवा-भाव और शांत स्वाभाव के लिये भारतीयों की हमेशा तारीफ होती है। भारत महान किंवदंतियों की भूमि है जहाँ महान लोगों ने जन्म लिया और ढ़ेर सारे सामाजिक कार्य किये। वो आज भी हमारे लिये प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं। भारत महात्मा गाँधी की भूमि है जहाँ उन्होंने लोगों में अहिंसा की संस्कृति पल्लवित की है। उन्होंने हमेशा हम लोगों से कहा कि अगर तुम वाकई बदलाव लाना चाहते हो तो दूसरों से लड़ाई करने के बजाय उनसे विनम्रता से बात करो। उन्होंने कहा कि इस धरती पर सभी लोग प्यार, आदर सम्मान और परवाह के भूखे हैं; अगर तुम उनकों सबकुछ दोगे तो निश्चित ही वो तुम्हारा अनुसरण करेंगे।

गाँधी जी अहिंसा में विश्वास करते थे और अंग्रेजी शासन से भारत के लिये आजादी पाने में एक दिन वो सफल हुए। उन्होंने भारतीयों से कहा कि अपनी एकता और विनम्रता की शक्ति दिखाओ, तब बदलाव देखो। भारत पुरुष और स्त्री, जाति और धर्म आदि का देश नहीं है बल्कि ये एकता का देश है जहाँ सभी जाति और संप्रदाय के लोग एक साथ रहते हैं। भारत में लोग आधुनिक है और समय के साथ बदलती आधुनिकता का अनुसरण करते हैं फिर भी वो अपनी सांस्कृतिक मूल्यों और परंपरा से जुड़े हुए हैं। भारत एक आध्यात्मिक देश है जहाँ लोग आध्यात्म में भरोसा करते हैं। यहाँ के लोग योग, ध्यान और दूसरे आध्यात्मिक क्रियाओं में विश्वास रखते हैं। भारत की सामाजिक व्यवस्था महान है जहाँ लोग आज भी संयुक्त परिवार के रुप में अपने दादा-दादी, चाचा, ताऊ, चचेरे भाई-बहन आदि के साथ रहते हैं। इसलिये यहाँ के लोग जन्म से ही अपनी संस्कृति और परंपरा के बारे में सीखते हैं।


 

भारतीय संस्कृति पर निबंध 6 (400 शब्द)

भारतीय संस्कृति पर निबंध-Indian Culture In Hindi

भारत की संस्कृति में सबकुछ है जैसे विरासत के विचार, लोगों की जीवन शैली, मान्यताएँ, रीति-रिवाज़, मूल्य, आदतें, परवरिश, विनम्रता, ज्ञान आदि। भारत विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता है जहाँ लोग अपनी पुरानी मानवता की संस्कृति और परवरिश का अनुकरण करते हैं। संस्कृति दूसरों से व्यवहार करने का, सौम्यता से चीजों पर प्रतिक्रिया करने का, मूल्यों के प्रति हमारी समझ का, न्याय, सिद्धांत और मान्यताओं को मानने का एक तरीका है। पुरानी पीढ़ी के लोग अपनी संस्कृति और मान्यताओं को नयी पीढ़ी को सौंपते हैं। इसलिये सभी बच्चे यहाँ पर अच्छे से व्यवहार करते हैं क्योंकि उनको ये संस्कृति और परंपराएँ पहले से ही उनके माता-पिता और दादा –दादी से मिली होती हैं। हमलोग यहाँ सभी चीजों में भारतीय संस्कृति की झलक देख सकते हैं जैसे नृत्य, संगीत, कला, व्यवहार, सामाजिक नियम, भोजन, हस्तशिल्प, वेशभूषा आदि। भारत एक बड़ा पिघलने वाला बर्तन है जिसके पास विभिन्न मान्यताएँ और व्यवहार है जो कि अलग-अलग संस्कृतियों को यहाँ जन्म देता है।

लगभग पाँच हजार वर्ष पहले से ही विभिन्न धर्मों की उत्पत्ति की अपनी जड़ है। ऐसा माना जाता है कि यहाँ वेदों से हिन्दू धर्म का आरंभ हुआ है। हिन्दू धर्म के सभी पवित्र धर्मग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखे गये है। ये भी माना जाता है कि जैन धर्म का आरंभ प्राचीन समय से है और इसका अस्तित्व सिन्धु घाटी में था। बुद्ध एक दूसरा धर्म है जिसकी उत्पत्ति भगवान गौतम बुद्ध की शिक्षा के बाद अपने देश में हुयी है। ईसाई धर्म को यहाँ अंग्रेज और फ्रांसीसी लेकर आये जिन्होंने लगभग 200 वर्ष के लंबे समय तक यहाँ पर राज किया। इस तरीके से विभिन्न धर्मों की उत्पत्ति यहाँ प्राचीन समय से या किसी तरह से यहाँ लायी गयी है। हालाँकि, अपने रीति-रिवाज़ और मान्यताओं को बिना प्रभावित किये सभी धर्मों के लोग शांतिपूर्ण तरीके से एकसाथ रहते हैं।

कई सारे युग आये और गये लेकिन कोई भी इतना प्रभावशाली नहीं हुआ कि वो हमारी वास्तविक संस्कृति को बदल सके। नाभिरज्जु के द्वारा पुरानी पीढ़ी की संस्कृति नयी पीढ़ी से आज भी जुड़ी हुयी है। हमारी राष्ट्रीय संस्कृति हमेशा हमें अच्छा व्यवहार करना, बड़ों की इज़्ज़त करना, मजबूर लोगों की मदद करना और गरीब और जरुरत मंद लोगों की मदद करना सिखाती है। ये हमारी धार्मिक संस्कृति है कि हम व्रत रखे, पूजा करें, गंगा जल अर्पण करें, सूर्य नमस्कार करें, परिवार के बड़ों सदस्यों का पैर छुएँ, रोज ध्यान और योग करें तथा भूखे और अक्षम लोगों को अन्न-जल दें। हमारे राष्ट्र की ये महान संस्कृति है कि हम बहुत खुशी के साथ अपने घर आये मेहमानों की सेवा करते है क्योंकि मेहमान भगवान का रुप होता है इसी वजह से भारत में “अतिथि देवो भव:” का कथन बेहद प्रसिद्ध है। हमारी संस्कृति की मूल जड़ इंसानियत और आध्यात्मिक कार्य है।

भारतीय संस्कृति पर निबंध-Indian Culture In Hindi

1. प्रस्तावना:

किसी देश या समाज के परिष्कार की सुदीर्घ परम्परा होती है । उस परम्परा में प्रचलित उन्नत एवं उदात्त विचारों की भूखला ही किसी देश या समाज की संस्कृति कहलाती है, जो उस देश या समाज के जीवन को गति प्रदान करती है । संस्कृति में किसी देश, कालविशेष के आदर्श व उसकी जीवन पद्धति सम्मिलित होती है ।  परम्परा से प्राप्त सभी विचार, शिल्प, वस्तु किसी देश की संस्कृति कहलाती है ।

2. संस्कृति का अर्थ:

संस्कृति शब्द संस्कार ने बना है । शाब्दिक अर्थ में संस्कृति का अर्थ है: सुधारने वाली या परिष्कार करने वाली । यजुर्वेद में संस्कृति को सृष्टि माना गया है । जो विश्व में वरण करने योग्य है, वही संस्कृति है । डॉ॰ नगेन्द्र ने लिखा है कि संस्कृति मानव जीवन की वह अवस्था है, जहां उसके प्राकृत राग द्वेषों का परिमार्जन हो जाता है ।

इस तरह जीवन को परिकृत एवं सम्पन्न करने के लिए मूल्यों, स्थापनाओं और मान्यताओं का समूह संस्कृति है । किसी भी देश की संस्कृति अपने आप में समग्र होती है । इससे उसका अत: एवं बाल स्वरूप स्पष्ट होता है । संस्कृति परिवर्तनशील है ।

यही कारण है कि एक काल के सांस्कृतिक रूपों की तुलना दूसरे काल से तथा दूसरे काल के सांस्कृतिक रूपों की अभिव्यक्तियों की तुलना नहीं करनी चाहिए, न ही एक दूसरे को निकृष्ट एवं श्रेष्ठ बताना चाहिए । एक मानव को सामाजिक प्राणी बनाने में जिन तत्त्वों का योगदान होता है, वही संस्कृति है । निष्कर्ष रूप में मानव कल्याण में सहायक सम्पूर्ण ज्ञानात्मक, क्रियात्मक, विचारात्मक गुण संस्कृति कहलाते हैं । संस्कृति में आदर्शवादिता एवं संक्रमणशीलता होती है ।

3. सभ्यता और संस्कृति:

सभ्यता को शरीर एवं संस्कृति को आत्मा कहा गया है; क्योंकि सभ्यता का अभिप्राय मानव के भौतिक विकास से है जिसके अन्तर्गत किसी परिकृत एवं सभ्य समाज की वे स्थूल वस्तुएं आती हैं, जो बाहर से दिखाई देती हैं, जिसके संचय द्वारा वह औरों से अधिक उन्नत एवं उच्च माना जाता है ।

 

उदाहरणार्थ, रेल, मोटर, सड़क, वायुयान, सुन्दर वेशभूषा, मोबाइल । संस्कृति के अन्तर्गत वे आन्तरिक गुण होते हैं, जो समाज के मूल्य व आदर्श होते हैं, जैसे-सज्जनता, सहृदयता, सहानुभूति, विनम्रता और सुशीलता । सभ्यता और संस्कृति का आपस में घनिष्ठ सम्बन्ध है; क्योंकि जो भौतिक वस्तु मनुष्य बनाता है, वह पहले तो विचारों में जन्म लेती है । जब कलाकार चित्र बनाता है, तो वह उसकी संस्कृति होती है ।

सभ्यता और संस्कृति एक-दूसरे के पूरक हैं । संखातिविहीन सभ्यता की कल्पना नहीं की जा सकती है । जो सभ्य होगा, वह सुसंस्कृत होगा ही । सभ्यता और संस्कृति का कार्यक्षेत्र मानव समाज है । भारतीय संस्कृति गंगा की तरह बहती हुई धारा है, जो क्लवेद से प्रारम्भ होकर समय की भूमि का चक्कर लगाती हुई हम तक पहुंची है ।

जिस तरह गंगा के उद्‌गम स्त्रोत से लेकर समुद्र में प्रवेश होने वाली अनेक नदियां एवं धाराएं मिलकर उसमें समाहित हैं, उसी तरह हमारी संस्कृति भी है । हमारी संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है । अनेक प्रहारों को सहते हुए भी इसने अपनी सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखा है ।

हमारे देश में शक, हूण, यवन, मंगोल, मुगल, अंग्रेज कितनी ही जातियां एवं प्रजातियां आयीं, किन्तु सभी भारतीय संस्कृति में एकाकार हो गयीं । डॉ॰ गुलाबराय के विचारों में: ”भारतीय संस्कृति में एक संश्लिष्ट एकता है ।

 

इसमें सभी संस्कृतियों का रूप मिलकर गंगा में मिले हुए, नदी-नालों के जी की तरह (गांगेय) पवित्र रूप को प्राप्त करता है । भारतीय संस्कृति की अखण्ड धारा में ऐसी सरिताएं हैं, जिनका अस्तित्व कहीं नहीं दिखाई देता । इतना सम्मिश्रण होते हुए भी वह अपने मौलिक एवं अपरिवर्तित रूप में विद्यमान है ।”

4. भारतीय संस्कृति की विशिष्टताएं:

भारतीय संस्कृति कई विशिष्टताओं से युक्त है । जिन विशिष्टताओं के कारण वह जीवित है, उनमें प्रमुख हैं:

1. आध्यात्मिकता: आध्यात्म भारतीय संस्कृति का प्राण है । आध्यात्मिकता ने भारतीय संस्कृति के किसी भी अंग को अछूता नहीं छोड़ा है । पुनर्जन्म एवं कर्मफल के सिद्धान्त में जीवन की निरन्तरता में भारतीयों का विश्वास दृढ़ किया है और अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष के चार पुराषार्थो को महत्च दिया गया है ।

2. सहिष्णुता की भावना:  भारतीय संस्कृति की महत्पपूर्ण विशेषता है: उसकी सहिष्णुता की भावना । भारतीयों ने अनेक आक्रमणकारियों के अत्याचारों को सहन किया है । भारतीयों को सहिष्णुता की शिक्षा राम, बुद्ध. महावीर, कबीर, नानक, चैतन्य महात्मा गांधी आदि महापुरुषों ने दी है ।

3. कर्मवाद:  भारतीय संस्कृति में सर्वत्र करणीय कर्म करने की प्रेरणा दी गयी है । यहां तो परलोक को ही कर्मलोक कहा गया है । गीता में कर्मण्येवाधिकाररते मां फलेषु कदाचन पर बल दिया गया है । अथर्ववेद में कहा गया है-कर्मण्यता मेरे दायें हाथ में है, तो विजय निश्चित ही मेरे बायें हाथ में होगी ।

4. विश्वबसुत्च की भावना:  भारतीय संस्कृति सारे विश्व को एक कुटुम्ब मानते हुए समस्त प्राणियों के प्रति कल्याण, सुख एवं आरोग्य की कामना करती है । विश्व में किसी प्राणी को दुखी देखना उचित नहीं समझा गया है । सर्वे भद्राणी सुखिन: संतु सर्वे निरामया: । सर्वे भद्राणि पश्यंतु मां कश्चित् दुःखमायुयात ।

5. समन्वयवादिता:  भारतीय संस्कृति की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण विशेषता है समन्वयवादिता । यहां के रुषि, मनीषी, महर्षियों व समाज सुधारकों ने सदैव समन्वयवादिता पर बल दिया है । भारतीय संस्कृति की यह समन्वयवादिता बेजोड़ है । अनेकता में एकता होते हुए भी यहां अद्‌भुत समन्वय है । भोग में त्याग का समन्वय यहां की विशेषता है ।

6. जाति एवं वर्णाश्रम व्यवस्था:  भारतीय संस्कृति में वर्णाश्रम एवं जाति-व्यवस्था श्रम विभाजन की दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण थी । यह व्यवस्था गुण व कर्म पर आधारित थी, जन्म पर नहीं । 100 वर्ष के कल्पित जीवन को ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास के अनुसार बांटा  गया । यह व्यवस्था समाज में सुख-शान्ति व सन्तोष की अभिवृद्धि में सहायक थी ।

7. संस्कार:  भारतीय संस्कृति में संस्कारों को विशेष महत्त्व दिया गया है । ये संस्कार समाज में शुद्धि की धार्मिक क्रियाओं से सम्बन्धित थे । इन अनुष्ठानों का महत्च व्यक्तियों के मूल्यों, प्रतिमानों एवं आदर्शों को अनुशासित व दीक्षित रखना होता है ।

8. गुरू की महत्ता:  भारतीय संस्कृति में गुरा को महत्त्व देते हुए उसे सिद्धिदाता, कल्याणकर्ता एवं मार्गदर्शक माना गया है । गुरा का अर्थ है: अन्धकार का नाश करने वाला ।

9. शिक्षा को महत्त्व: भारतीय संस्कृति में शिक्षा को पवित्रतम प्रक्रिया माना गया है, जो बालकों का चारित्रिक, मानसिक, नैतिक, आध्यात्मिक विकास करती है ।

10. राष्ट्रीयता की भावना:  भारतीय संस्कृति में राष्ट्रीयता की भावना को विशेष महत्त्व दिया गया है । जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी कहकर इसकी वन्दना की गयी है ।

11. आशावादिता:  भारतीय संस्कृति आशावादी है । वह निराशा का प्रतिवाद करती है ।

12. स्थायित्व:  यह भारतीय संस्कृति की महत्त्वपूर्ण विशेषता है । यूनान, मिश्र, रोम, बेबीलोनिया की संस्कृति अपनी चरम सीमा पर पहुंचकर नष्ट हो गयी है । भारतीय संस्कृति अनेक झंझावातों को सहकर आज भी जीवित है ।

13. अतिथिदेवोभव:  भारतीय संस्कृति में अतिथि को देव माना गया है । यदि शत्रु भी अतिथि बनकर आये, तो उसका सत्कार करना चाहिए ।

5. उपसंहार:  संस्कृति का निस्सन्देह मानव-जीवन में विशेष महत्त्व है । संस्कृति हमारा मस्तिष्क है, हमारी आत्मा है । संस्कृति में ही मनुष्य के संस्कार हस्तान्तरित होते हैं । संस्कृति वस्तुत: मानव द्वारा निर्मित आदर्शो और मूल्यों की व्यवस्था है, जो मानव की जीवनशैली में अभिव्यक्ति होती है । सभ्यता और संस्कृति एक दूसरे के पूरक हैं ।

भारतीय संस्कृति आज भी अपनी विशेषताओं के कारण विश्वविख्यात है । अपने आदर्शो पर कायम है । समन्वयवादिता इसका गुण है । चाहे धर्म हो या कला या भाषा, भारतीय संस्कृति ने सभी देशी-विदेशी संस्कृतियों को अपने में समाहित कर लिया । जिस तरह समुद्र अपने में विभिन्न नदियों के जल को एकाकार कर लेता है, भारतीय संस्कृति इसका एक श्रेष्ठ उदाहरण है ।

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राष्ट्रीय एकता पर निबंध-Rashtriya Ekta Essay In Hindi

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राष्ट्रीय एकता पर निबंध-Rashtriya Ekta Essay In Hindi

राष्ट्रीय एकता पर निबंध (Rashtriya Ekta Essay In Hindi) :

भूमिका : भारत एक विशाल देश है। इसकी भौगोलिक और प्राकृतिक स्थिति ऐसी है कि इस एक देश में अनेक देशों की कल्पना को सहज रूप से किया जा सकता है। इस देश में 6 ऋतुओं का एक अद्भुत क्रम है। देश में एक ही समय में एक क्षेत्र में गर्मी का वतावरण होता है तो एक तरफ सर्दी का वातावरण होता है। एक क्षेत्र में हरियाली होती है तो दुसरे क्षेत्र में दूर-दूर तक रेती के अलावा और कुछ दिखाई नहीं देता है।

जनसंख्या की दृष्टि से भारत का संसार में दूसरा स्थान है। भारत में हिन्दू , सिक्ख , ईसाई , मुसलमान , पारसी , बौद्ध धर्म आदि सभी धर्मों और संप्रदायों के लोग रहते हैं। सभी लोग भारत को राष्ट्र कहने में गौरव का अनुभव करते हैं। भारत देश किसी भी एक धर्म , जाति , वंश या संप्रदाय का देश नहीं है। भारत में आचार-विचार , रहन-सहन , भाषा और धर्म आदि सभी विभिन्नताओं का होना स्वभाविक है।

इन विभिन्नताओं में अनेकता में एकता के दर्शन भारत की सर्वप्रमुख विशेषता है। इसी विशेषता और समन्वय की भावना के कारण भारतीय संस्कृति अजर-अमर बन गयी है। जब किसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए बहुत से लोग मिलकर काम करते हैं तो उसे संगठन कहते हैं। संगठन ही सभी शक्तियों की जड़ होता है। एकता एक महान शक्ति है इसी के बल पर अनेक राष्ट्रों का निर्माण हुआ था। सभी लोगों के पूजा स्थल व उपासना विधि अलग होते हुए भी सभी लोग एक ही ईश्वर की पूजा करते हैं।

सभी में एक भारतीयता की भावना व राष्ट्रीय एकता है। इसी तरह भारत कश्मीर से कन्याकुमारी और असम से काठियावाड़ तक एक व्यापक अखण्ड भारत है जिसके पश्चिम में पाकिस्तान, पूर्व में बर्मा , बांग्लादेश , उत्तर में नगाधिराज हिमालय व दक्षिण में हिन्द महासागर है। उक्त सीमाओं से घिरा हुआ यह देश हमारा भारत है। इसका कहीं से भी कोई खण्ड अलग न हो , इसको अखण्ड भारत कहते हैं। देश की एकता व अखंडता हमेशा बनी रहे यह सभी भारतवासियों का कर्तव्य होता है।

एकता को खतरा : अंग्रेजों ने भारत में एकछत्र राज्य करने के लिए सबसे पहले यहाँ की एकता पर प्रहार किया क्योंकि कोई भी शासक अपना प्रभुत्व जमाने के लिए जनता में एकता नहीं चाहता है। इसलिए अंग्रेजों ने फूट डालो राज करो की प्रबल नीति अपनाई जिसके कारण वे सैंकड़ों वर्षों तक भारत के सशक्त शासक बने रहे।

जिसका परिणाम यह हुआ कि भारत में धर्मों व जातियों तथा वर्गों के आधार पर कलह , दंगे भडकते रहते हैं। वे कभी किसी एक धर्म के लोगों को संरक्षण देते और दूसरों को तंग करते तो कभी दुसरे धर्मों के लोगों को प्रोत्साहित करते थे जिससे जनता परस्पर लडती रहे। फिर भारत के स्वतंत्र होने पर अंग्रेज भारत की अखंडता समाप्त करके ही गये थे।

भारत का विभाजन होना अंग्रेजों की नीति थी। इस तरह से उन्होंने हमारी एकता और अखण्डता को तोडा था। आज के समय में भारत में समय-समय पर साम्प्रदायिक दंगे होते रहते हैं। एक धर्म के लोग दूसरे धर्म के लोगों से लड़ते रहते हैं। देश में कई जगहों पर वर्ग संघर्ष छिड़ा रहता है। स्वर्ण और हरिजनों के कलह भी देखने को मिलते हैं।

आज के समय में आरक्षण और अनारक्षण पर लड़ाई-झगड़ा चलता रहता है। भाषा के आधार पर भी कई जगहों पर झगड़ा होता रहता है। दक्षिण में हिंदी के विरोध में सरकारी सम्पत्ति को क्षति पहुंचाई जाती है। उत्तर भारत में अंग्रेजी का विरोध प्रबल है। कहीं पर उर्दू का विरोध हुआ था तो कहीं पर हिंदी का विरोध हुआ।

इस तरह से ही राष्ट्रिय एकता खतरे में पड़ी थी। राष्ट्रिय अखण्डता भी विगत दशकों से संकट में है। कुछ आतंकवादी अलग जगह चाहते हैं। कश्मीर के आतंकवादी अलग कश्मीर की मांग कर रहे हैं। कुछ समय से अब पुरे भारत में हिन्दू आतंकवाद ने भी अपने पैर फैलाकर हमारी सरकार को परेशान कर दिया है। इस तरह कतिपय स्वार्थी तत्व भारत को छिन्न-छिन्न कर देना चाहते हैं।

भेदभाव के कारण : देश और राष्ट्र में अंतर होता है। देश का संबंध सीमाओं से होता है क्योंकि देश एक निश्चित सीमा से घिरा हुआ होता है। राष्ट्र का संबंध भावनाओं से होता है क्योंकि एक राष्ट्र का निर्माण देश के लोगों की भावनाओं से होता है। जब तक किसी देश के वासियों की विचारधारा एक नहीं होती है वह राष्ट्र कहलाने का हकदार नहीं होता है।

हमारे यहाँ आज तक शासकों ने अपने स्वार्थों की वजह से इस देश को राष्ट्र नहीं बनने दिया था। आज राजनैतिक नेताओं ने अपनी दलगत राजनीति की वजह से देश को राष्ट्र बनाने में बाधा पहुंचाई है। वोट प्राप्त करने के लिए सारे देश को धर्मों , जातियों , भाषाओँ की संकीर्ण धाराओं में बाँट दिया है।

अभी देश के नेताओं , अधिकारीयों व जनता में राष्ट्रिय भावना जाग्रत नहीं हुई है। वे पहले कोई और होते हैं और फिर बाद में भारतीय होते हैं। जब कोई भी व्यक्ति सत्ता में आता है तो वह अपने वहाँ के वर्ग का समर्थन करते हुए दिखाई देता है। वोटों की राजनीति सभी को लड़ाने का काम करती है।

इसी कारण से नेताओं की तुष्टिकरण की नीति देश को राष्ट्र बनने से रोक रही है। आज देश के लोग ही संविधान के प्रति जल रहे हैं। कहीं-कहीं पर राष्ट्र ध्वज को जलाने और उसे फाड़ने के समाचारों को भी सुना जाता है। जब राष्ट्रिय गीत गया जाता है उस समय खड़े न रहना एक साधारण सी बात बन गई है। इस सभी गलतियों के लिए दंडों को निर्धारित किया गया है लेकिन किसी को भी दंड नहीं दिया जाता है।

यही है नेताओं की तुष्टिकरण की नीति। इसकी वजह से देशद्रोहियों को अक्सर बढ़ावा मिलता है। आज के समय में देश में देश-द्रोहियों , राजनेताओं को बहुत अधिक प्रोत्साहन मिलता है। इसी वजह से सभी में राष्ट्रिय भावना का आभाव बढ़ता ही जा रहा है जिसकी वजह से देश की एकता और अखंडता खतरे में पड़ रही है। देश में भ्रष्टाचार , अनाचार , बेईमानी , धोखाधड़ी उच्च स्तर पर छाए हुए है।

भारत में उत्पन्न समस्याएँ : स्वतंत्रता प्राप्त होने के बाद से ही देश में अनेक समस्याएं उत्पन्न होती रही है। इन समस्या में साम्प्रदायिक की समस्या सबसे प्रमुख समस्या है। हमारे देश का विभाजन भी इसी समस्या की वजह से हुआ था। कुछ स्वार्थी लोगों ने हमारे देश में साम्प्रदायिकता की भावना को फैला दिया था जिसकी वजह से हम आज तक उससे मुक्त नहीं हो पाए हैं। हमें अपनी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए और प्रगति के लिए राष्ट्रिय एकता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। हर वर्ग में एकता के बिना कोई भी देश उन्नति नहीं कर सकता है। वर्तमान समय के देश में अनुशासन और आपसी वातावरण की बहुत जरूरत है।

दूषित राजनीति : कुछ सालों से हमारे देश का वातावरण दूषित राजनीति की वजह से विषैला होता जा रहा है। धर्म में अंधे होने के कारण लोग आपस में झगड़ रहे हैं। अपने-अपने स्वार्थों की पूर्ति में लगे हुए लोग आपसी प्रेम को निरंतर भूलते जा रहे हैं। स्वार्थ की भावनाओं , प्रांतीयता एवं भाषावाद की वजह से राष्ट्रिय भावना बहुत प्रभावित हो रही है।

हमारे देश के लोगों में संकीर्णता की भावना पनप रही है और व्यापक दृष्टिकोण लुप्त होता जा रहा है। इसी वजह से विश्व-बन्धुत्व की भावना अपने परिवार तक ही सीमित होकर रह गई है। अगर कोई कोशिश भी करता है तो वह प्रदेश स्तर तक जाकर ही असफल हो जाता है। इसी के फलस्वरूप साम्प्रदायिक ताकतें मजबूत होती जा रही हैं।

असमानताओं में समानता : जम्मू-कश्मीर , असम आदि प्रदेशों में नर-संहार के किस्से सुनने को मिलते हैं। इन सब के लिए स्वार्थी नेता जिम्मेदार हैं , जो अपना उल्लू सीधा करने के लिए देश को दांव पर लगा रहे हैं। अनेक प्रकार की विषमताओं के होते हुए भी जब हम राष्ट्रिय एकता के बारे में सोचते हैं तो हमें पता चलता है कि इस राष्ट्रिय एकता की वजह से धार्मिक भावना , आध्यात्मिकता , समन्वय की भावना , दार्शनिक दृष्टिकोण , साहित्य , संगीत और नृत्य आदि ऐसे अनेक तत्व हैं जो देश को एकता के सूत्र में बांधे हुए हैं।

सिर्फ जनता को एकजुट होकर कोशिश करने की जरूरत है। आज के समय में राष्ट्रिय एकता के लिए व्यक्तिगत और सार्वजिनक संपत्ति की सुरक्षा का प्रबंध करना जरूरी है। शत्रुपक्ष पर कठोर दंडनीति लागू की जानी चाहिए। पुलिस की गतिविधियों पर भी नियंत्रण रखना चाहिए।

आज के समय में सभी संगठनों को मिलकर राष्ट्रिय एकता के लिए कोशिश करनी चाहिए। हमारी स्वतंत्रता राष्ट्रिय एकता पर निर्भर करती है। इसके अभाव की वजह से स्वतंत्रता असंभव है। हमारी स्वतंत्रता के लिए हमें पूरी कोशिश करनी चाहिए , हमें एकजुट होकर राष्ट्रिय एकता की रक्षा करनी चाहिए , जिससे हम और हमारे वंशज खुली हवा में साँस ले सकें।

भारतीय संस्कृति और सभ्यता : भारतीय संस्कृति भावात्मक एकता का आधार है लेकिन बहुत बार राजनीतिक स्वार्थ , अस्पर्शयता , साम्प्रदायिक तनाव , भाषा भेद , क्षेत्रीय मोह तथा जातिवाद आदि की संकीर्णता की भावनाओं के प्रबल होने पर हमारी भावात्मक एकता को खतरा पैदा हो जाता है।

परिणामस्वरूप अदूरदर्शी , मंद बुद्धि , धर्मांध लोग गुमराह होकर अपने छोटे-छोटे स्वार्थों की पूर्ति के लिए अलग-अलग रास्ते की मांग करने लगते हैं। राजनीतिक दलबंदी का सहयोग पाकर ये स्वार्थ कई बार भयंकर रूप धारण कर लेते हैं। राष्ट्रिय एकता के लिए भावात्मक एकता बहुत जरूरी होती है।

भावात्मक एकता बनाये रखने के लिए भारत सरकार हमेशा से ही प्रयत्नशील रही है। हमारे संविधान में ही धर्म निरपेक्ष , समाजवादी समाज की परिकल्पना की गयी है। धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में भी ऐसे अनेक संगठन बनाये गए हैं जो राष्ट्रिय एकता के लिए प्रयत्नशील रहते हैं। सच्चा साहित्य भी प्रथक्तावादी प्रवृत्तियों का विरोधी रहा है।

अनेकता में एकता : वर्तमान समय में भावात्मक एकता के लिए सरकार को चाहिए कि वह राष्ट्रिय शिक्षा की व्यवस्था करें। चल-चित्र , दूरदर्शन और रेडियो भी राष्ट्रिय एकता में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर सकते हैं। सामूहिक खेल-कूद , सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा धार्मिक और शैक्षिक यात्राएं भी राष्ट्रिय और भावात्मक एकता में सहायक हो सकती है।

ह्रदय परिवर्तन और सद्भावना वातावरण बनाने की बहुत अधिक जरूरत है। धार्मिक संकीर्णता और साम्प्रदायिक मोह राष्ट्रिय एकता में सबसे बाधक तत्व हैं। धर्म , ज्ञान और विश्वास में नहीं , वह तो कर्म और आचरण में बस्ता है। वास्तव में पूछा जाये तो सभी धर्म एक हैं , केवल पूजा विधियाँ भिन्न-भिन्न हैं।

इसी भिन्नता की वजह से एक ही धर्म के भिन्न-भिन्न रूप होते हैं। प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने भी देशवासियों को संकीर्णता से ऊपर उठकर धर्म के व्यापक रूप की प्रेरणा देते हुए कहा था कि हे मेरे देश के लोगों ! धर्म को एकवचन में ही रहने दो। हमारे देश में लोग धर्म के नाम पर कुछ लोग स्वार्थों की पूर्ति करने के लिए अनेक लोगों की शक्ति का दुरूपयोग करके राष्ट्रिय भावना का हनन कर रहे हैं।

उपसंहार : किसी भी देश की रक्षा और प्रगति देश की एकता और अखंडता पर निर्भर करती है। हमारे देश में जब तक उच्च स्तर पर राष्ट्रिय भावना नहीं आती है तब तक राष्ट्रिय एकता भी नहीं आती है। भारत देश को सबल बनाने के लिए साम्प्रदायिक सद्भाव और सौहार्द बनाये रखने की जरूरत है।

हमें इस बात को हमेशा याद रखना चाहिए कि प्रेम से प्रेम और नफरत से नफरत उत्पन्न होती है। हमारा रास्ता प्रेम और अहिंसा का होना चाहिए। नफरत और हिंसा सब तरह की बुराईयों की जड़ होती है। संतों , महात्माओं और धर्म गुरुओं ने भी यह संदेश दिया है कि किसी में भी छोटे -बड़े का भेदभाव नहीं होता है।

सभी धर्मों में सत्य , प्रेम , समता , सदाचार और नैतिकता का पाठ विस्मरण होता है। प्रार्थना और आराधना की पद्धति अलग हो सकती है लेकिन उसकी उनके लक्ष्य हमेशा एक ही होते हैं। मन्दिर , मस्जिद , गुरुद्वारे और चर्च सभी धार्मिक स्थल एक ही संदेश देते हैं।

यह ख़ुशी की बात है कि हमारा देश राष्ट्रिय एकता के लिए राष्ट्र की आय का तीन प्रतिशत व्यय कर रहा है और हमारी सरकार भी इसके लिए अनेक प्रयास कर रही है। हम भारतवासियों से प्रार्थना करते हैं कि वे भी अपने पूर्वजों की तरह एकता के सूत्र में बंध जाएँ क्योंकि यही सच्चे अर्थों में देश की उन्नति की आपकी उन्नति होती है।

राष्ट्रीय एकता पर निबंध-Rashtriya Ekta Essay In Hindi

राष्ट्रीय एकता पर निबंध  (दो निबंध) | Read These Two Essays on National Unity in Hindi.

#Essay 1: राष्ट्रीय एकता पर निबंध | Essay on National Unity in Hindi!

राष्ट्रीय एकता एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया व एक भावना है जो किसी राष्ट्र अथवा देश के लोगों में भाई-चारा अथवा राष्ट्र के प्रति प्रेम एवं अपनत्व का भाव प्रदर्शित करती है ।

राष्ट्रीय एकता राष्ट्र को सशक्त एवं संगठित बनाती है । राष्ट्रीय एकता ही वह भावना है जो विभिन्न धर्मों, संप्रदायों, जाति, वेश-भूषा, सभ्यता एवं संस्कृति के लोगों को एक सूत्र में पिरोए रखती है । अनेक विभिन्नताओं के उपरांत भी सभी परस्पर मेल-जोल से रहते हैं ।

हमारा भारत देश राष्ट्रीय एकता की एक मिशाल है । जितनी विभिन्नताएँ हमारे देश में उपलब्ध हैं उतनी शायद ही विश्व के किसी अन्य देश में देखने को मिलें । यहाँ अनेक जातियों व संप्रदायों के लोग, जिनके रहन-सहन, खान-पान व वेश-भूषा पूर्णतया भिन्न हैं, एक साथ निवास करते हैं । सभी राष्ट्रीय एकता के एक सूत्र में पिरोए हुए हैं ।

जब तक किसी राष्ट्र की एकता सशक्त है तब तक वह राष्ट्र भी सशक्त है । बाह्‌य शक्तियाँ इन परिस्थितियों में उसकी अखंडता व सार्वभौमिकता पर प्रभाव नहीं डाल पाती हैं परंतु जब-जब राष्ट्रीय एकता खंडित होती है तब-तब उसे अनेक कठिनाइयों से जूझना पड़ता है । हम यदि अपने ही इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो हम यही पाते हैं कि जब-जब हमारी राष्ट्रीय एकता कमजोर पड़ी है तब-तब बाह्‌य शक्तियों ने उसका लाभ उठाया है और हमें उनके अधीन रहना पड़ा है ।

इसके विपरीत हमारी राष्ट्रीय अवचेतना से ही हमें वर्षों की दासता से मुक्ति मिल सकी है । अत: किसी भी राष्ट्र की एकता, अखंडता व सार्वभौमिकता बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय एकता का होना अनिवार्य है । भारत जैसे विकासशील देश के लिए जो वर्षों तक दासत्व का शिकार रहा है वहाँ राष्ट्रीय एकता की संपूर्ण कड़ी का मजबूत होना अति आवश्यक है ताकि भविष्य में उसकी पुनरावृत्ति न हो सके ।

देश में व्याप्त सांप्रदायिकता, जातिवाद, भाषावाद, क्षेत्रीयता आदि सभी राष्ट्रीय एकता के अवरोधक तत्व हैं । ये सभी अवरोधक तत्व राष्ट्रीय एकता की कड़ी को कमजोर बनाते हैं । इन अवरोधक तत्वों के प्रभाव से ग्रसित लोगों की मानसिकता क्षुद्र होती है जो निजी स्वार्थ के चलते स्वयं को राष्ट्र की प्रमुख धारा से अलग रखते हैं तथा अपने संपर्क में आए अन्य लोगों को भी अलगाववाद के लिए उकसाते हैं । यही आगे चलकर लोगों में विघटन का रूप लेता है जो फिर खून-खराबे, मारकाट व दंगों आदि में परिवर्तित हो जाता है ।

इन विघटनकारी तत्वों की संख्या जब और अधिक होने लगती है तब ये पूर्ण अलगाव के लिए प्रयास करते हैं । हमारे देश की भौगोलिक भिन्नता जिसमें अनेक क्षेत्रों व उनमें रहने वाली अनेक जातियों व संप्रदायों का समावेश है ये सभी परस्पर राष्ट्रीय एकता को कमजोर बनाते हैं । इस प्रकार ये विभिन्नताएँ जो हमारी संस्कृति का गौरव हैं जब उग्र रूप धारण करती हैं तब यह हमारी एकता और अखंडता की बाधक बन जाती हैं ।

 

देश की एकता के लिए आंतरिक अवरोधक तत्वों के अतिरिक्त बाह्‌य शक्तियाँ भी बाधक बनती हैं । जो देश हमारी स्वतंत्रता व प्रगति से ईर्ष्या रखते हैं वे इसे खंडित करने हेतु सदैव प्रयास करते रहते हैं । कश्मीर की हमारी समस्या इन्हीं प्रयासों की उपज है जिससे हमारे देश के कई नवयुवक दिग्भ्रमित होकर राष्ट्र की प्रमुख धारा से अलग हो चुके हैं ।

राष्ट्रीय एकता व इसकी अक्षुण्णता बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि राष्ट्रीय एकता के तत्वों; जैसे हमारी राष्ट्रभाषा, संविधान, राष्ट्रीय चिह्‌नों, राष्ट्रीय पर्व व सामाजिक समानता तथा उसकी उत्कृष्टता पर विशेष ध्यान दें । उन सच्चे व महान देशभक्तों की गाथाओं को उजागर करें जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता व सार्वभौमिकता बनाए रखने के लिए अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिए । महापुरुषों के आदर्शों पर चलना व उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना भी राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देता है ।

राष्ट्रीय एकता को संबल प्रदान करने वाले तत्व कम नहीं हैं, बस उन्हें समय-समय पर अपने जीवन में आत्मसात् करने की आवश्यकता है । विभिन्न राष्ट्रीय दिवसों पर होने वाली गोष्ठियाँ, विचार-विमर्श आदि के माध्यम से राष्ट्र की एकता को बल मिलता है ।

विभिन्न संगीत सम्मेलनों, समवेत् गान, सांस्कृतिक कार्यक्रमों आदि के माध्यम से जनता के बीच एकता को बढ़ावा देनेवाला संदेश जाता है । सबसे बढ़कर आवश्यक यह है कि हम निजी रूप से ऐसा प्रयास जारी रखें जिससे देश की एकता को बल मिले ।

भारत एक महान, स्वतंत्र एवं प्रगतिशील राष्ट्र है । राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि हम अपनी क्षुद्र मानसिकता से स्वयं को दूर रखें तथा इसमें बाधक समस्त तत्वों का बहिष्कार करें । हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हम चाहे जिस क्षेत्र, प्रांत, जाति या समुदाय के हैं परंतु उससे पूर्व हम भारतीय नागरिक हैं । भारतीयता ही हमारी वास्तविक पहचान है । अत: हम कभी भी ऐसे कृत्य न करें जो हमारे देश के गौरव व उसकी प्रगति में बाधा डालते हों ।

हम स्वयं अपने राष्ट्रीय प्रतीकों व अपने संविधान का सम्मान करें तथा अपने संपर्क में आने वाले समस्त व्यक्तियों को भी इसके लिंए प्रेरित करें जिससे हमारी राष्ट्रीय एकता युग-युगांतर तक बनी रहे । हम विघटनकारी तत्वों को राष्ट्रीय एकता की मशाल जलाकर ही भस्मीभूत कर सकते हैं । हम एक थे एक हैं और सदा एक बने रहेंगे, जैसे-जैसे यह विश्वास दृढ़ होता जाएगा हमारी राष्ट्रीय एकता त्यों-त्यों मजबूत होती जाएगी ।


#Essay 2 : राष्ट्रिय एकता पर निबंध | Essay on National Unity

”हम जब-जब असंगठित हुए, हमें आर्थिक व राजनीतिक रूप में इसकी कीमत चुकानी पडी । हमारे विचारों में जब-जब संकीर्णता आई, आपस में झगड़े हुए । हमने जब कभी नए विचारों से अपना मुख मोड़ा, हमें हानि ही हुई, हम विदेशी शासन के अधीन हो गए ।”

ये बातें स्व. प्रधानमन्त्री श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने अखिल भारतीय राष्ट्रीय एकता सम्मेलन के दौरान कही थीं । सचमुच राष्ट्रीय एकता सशक्त और समृद्ध राष्ट्र की आधारशिला होती है । राष्ट्रीय एकता के छिन्न होने पर देश की स्वतन्त्रता भी अक्षुण्ण नहीं रह पाती ।

राष्ट्रीय एकता का तात्पर्य हैं- राष्ट्र के विभिन्न घटकों में परस्पर एकता, प्रेम एवं भाईचारे का कायम रहना, भले ही उनमें वैचारिक और आस्थागत असमानता क्यों न हो ।  भारत में कई धर्मों एवं जातियों के लोग रहते हैं, जिनके रहन-सहन एवं आस्था में अन्तर तो है ही, साथ ही उनकी भाषाएँ भी अलग-अलग हैं । इन सबके बावजूद पूरे भारतवर्ष के लोग भारतीयता की जिस भावना से ओत-प्रोत रहते हैं उसे राष्ट्रीय एकता का विश्वभर में सर्वोत्तम उदाहरण कहा जा सकता है ।

 

राष्ट्रीय एकता का परिणाम है कि जब कभी भी हमारी एकता को खण्डित करने का प्रयास किया गया, भारत का एक-एक नागरिक सजग होकर ऐसी असामाजिक शक्तियों के विरुद्ध खड़ा दिखाई दिया । रवीन्द्र नाथ ‘टैगोर’ ने कहा है- ”भारत की एकता तथा चेतना समय की कसौटी पर सही सिद्ध हुई है ।”

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीयता के लिए भौगोलिक सीमाएँ, राजनीतिक चेतना और सांस्कृतिक एकबद्धता अनिवार्य होती हैं । यद्यपि प्राचीनकाल में हमारी भौगोलिक सीमाएँ इतनी व्यापक नहीं थी और यहाँ अनेक राज्य स्थापित थे तथापि हमारी संस्कृति और धार्मिक चेतना एक थी ।

कन्याकुमारी से हिमालय तक और असोम से सिन्ध तक भारत की संस्कृति और धर्म एक थे । यही एकात्मकता हमारी राष्ट्रीय एकता की नींव थी । भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में अपनी-अपनी अलग परम्परा, रीति-रिवाज व आस्थाएँ थी, किन्तु समूचा भारत एक सांस्कृतिक सूत्र में आबद्ध था ।

इसी को अनेकता में एकता एवं विविधता में एकता कहा जाता है और यही पूरी दुनिया में भारत की अलग पहचान स्थापित कर, इसके गौरव को बढाता है । हम जानते हैं कि राष्ट्र की आन्तरिक शान्ति तथा सुव्यवस्था और बाहरी दुश्मनों से रक्षा के लिए राष्ट्रीय एकता परम आवश्यक है ।

यदि हम भारतवासी किसी कारणवश छिन्न-भिन्न हो गए, तो हमारी पारस्परिक फूट को देखकर अन्य देश हमारी स्वतन्त्रता को हड़पने का प्रयास करेंगे । इस प्रकार, अपनी स्वतन्त्रता की रक्षा एवं राष्ट्र की उन्नति के लिए भी राष्ट्रीय एकता परम आवश्यक है ।

इतिहास के अध्ययन से हमें पता चलता है कि प्राचीनकाल में समूचा भारत एक ही सांस्कृतिक सूत्र में आबद्ध था, किन्तु आन्तरिक दुर्बलता के कारण विदेशी शक्तियों ने हम पर आधिपत्य स्थापित कर लिया । इन विदेशी शक्तियों ने हमारी सभ्यता और संस्कृति को नष्ट करना शुरू किया जिससे हमारी आस्थाओं एवं धार्मिक मूल्यों का धीरे-धीरे पतन होने लगा ।

राष्ट्रीय एकता परिषद के अधिवेशन में तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्री मोरारजी देसाई ने कहा था- ”भारत में 1865 ई से पूर्व कभी साम्प्रदायिक दगे नहीं हुए । यहाँ सदियों से विभिन्न धर्मों के लोग मिल-जुलकर रहते आए है, किन्तु अंग्रेजों के शासनकाल में यहाँ हिन्दू-मुस्लिम दगे शुरू हो गए । यह अंग्रेजों की सोची-समझी कूटनीतिक चाल थी और इसका लाभ ब्रिटिश सरकार ने उठाया । कभी उन्होंने हिन्दुओं का समर्थन किया, तो कभी मुसलमानों का और कभी ईसाइयों का। अन्त में विभाजन हुआ । अगर हम इस विभाजन को न स्वीकारते, तो अंग्रेज अपने को बनाए रखते ।”

लगभग एक हजार वर्षों की परतन्त्रता के बाद अनेक संघर्षों व बलिदानों के फलस्वरूप हमें स्वाधीनता प्राप्त हुई । स्वतन्त्रता प्राप्त करने के बाद हमारी एकता सुदृढ़ तो हुई, परन्तु आज साम्प्रदायिकता, क्षेत्रीयता, जातीयता और भाषागत अनेकता ने पूरे देश को आक्रान्त कर रखा है ।

आज कभी देशवासी मन्दिर-मस्जिद को लेकर झगड़ पड़ते हैं, तो कभी अंग्रेजी-हिन्दी को लेकर, कभी असोम, महाराष्ट्र जैसे राज्यों से अन्य राज्यवासियों को भगाया जाता है, तो कभी एक ही धर्म के लोग जात-पाँत की बातों पर उलझ पडते हैं ।

देश में बाबरी मस्जिद गिराए जाने, गोधरा काण्ड, मुजफुफरनगर दगे जैसी स्थितियाँ फिर से न आएँ, इसके लिए साम्प्रदायिक विद्वेष, स्पर्द्धा, ईर्ष्या आदि राष्ट्र विरोधी भावनाओं को अपने मन से दूर रखकर सद्‌भावना का वातावरण कायम रखना आवश्यक है ।

तभी हम ‘डॉ. एस राधाकृष्णन’ की कही गई इस बात को सही साबित कर सकते हैं- ”भारत ही अकेला देश है, जहाँ मन्दिरों, गिरिजाघरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों और मठों में शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व है ।”  आज देश की राष्ट्रीय एकता को सबसे बड़ा खतरा आतंकवाद से है । आतंकवाद न केवल हमारी, बल्कि सम्पूर्ण विश्व की समस्या है ।

आतंकवादियों द्वारा कभी मुम्बई को निशाना बनाया जाता है, तो कभी देश की राजधानी दिल्ली को । आज कश्मीर की समस्याएँ आतंकवाद की ही देन हैं ।  पिछले दो दशकों में इस आतंकवाद ने देश के कई राज्यों में अपार क्षति पहुँचाई है । इन सबके अतिरिक्त अलगाववादियों ने भी हमारी एकता को भंग करने का असफल प्रयास किया है ।

राष्ट्रीय एकता में बाधक अनेक शक्तियों में अलगाव की राजनीति भी एक है । यहाँ के राजनेता वोट बैंक बनाने के लिए कभी अल्पसंख्यकों में अलगाव के बीज बोते हैं, कभी आरक्षण के नाम पर पिछड़े वर्गों को देश की मुख्य धारा से अलग करते हैं, तो कभी किसी विशेष जाति, प्रान्त या भाषा के हिमायती बनकर देश की राष्ट्रीय एकता को खण्डित करने की कोशिश करते हैं ।

जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हो, खालिस्तान की माँग हो, असोम या गोरखालैण्ड की पृथकता का आन्दोलन हो इन सबके पीछे वोटबैंक की राजनीति ही दिखाई पड़ती है । इस देश के हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई सभी परस्पर प्रेम से रहना चाहते हैं, लेकिन भ्रष्ट राजनेता उन्हें बाँटकर अपना उल्लू सीधा करने में जुटे रहते हैं ।

इन समस्याओं के समाधान का उत्तरदायित्व मात्र राजनेताओं अथवा प्रशासनिक अधिकारियों का ही नहीं है, इसके लिए तो सम्पूर्ण जनता को मिल-जुलकर प्रयास करना होगा । इतिहास साक्षी है कि अनेक धर्मों, अनेक जातियों और अनेक भाषाओं वाला यह देश अनेक विसंगतियों के बावजूद सदा एकता के एकसूत्र में बँधा रहा है । यहाँ अनेक जातियों का आगमन हुआ और बे धीरे-धीरे इसकी मूल धारा में विलीन हो गई ।

उनकी परम्पराएँ, विचारधाराएँ और संस्कृतियाँ इस देश के साथ एक रूप हो गई । भारत की यह विशेषता आज भी ज्यों-की-त्यों बनी हुई है । भारत के नागरिक होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि हम इस भावना को नष्ट न होने दे वरन् इसको और अधिक पुष्ट बनाएँ ।

यदि हमारा देश संगठित है, तो विश्व पटल पर इसे बड़ी शक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता । हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जो राष्ट्र संगठित होता है, उसे न कोई तोड़ सकता है और न ही कोई उसका कुछ बिगाड़ ही सकता है बह अपनी एकता एवं सामूहिक प्रयास के कारण सदा प्रगति के पथ पर अग्रसर रहता है ।

कई बार हमारे विरोधी, देश या पैसे के लिए सब कुछ बेच देने वाले कुछ स्वार्थी लोगों ने अराजकता एवं आतंकी कार्यों द्वारा हमारी एकता को भंग करने का असफल प्रयास किया है । अगर इन बिघटनकारी और विध्वंसकारी प्रवृत्तियों पर पूरी तरह से नियन्त्रण नहीं किया गया, तो भारत की एकता और अखण्डता पर खतरा बना ही रहेगा । जब देश में कोई भी दो राष्ट्रीय घटक आपस में संघर्ष करते हैं, तो उसका दुष्परिणाम भी पूरे देश को भुगतना पड़ता है ।

मामला आरक्षण का हो या अयोध्या के राम मन्दिर का, सबकी गूँज प्रदेश के जन-जीवन को प्रभावित करती है । ऐसे में देश के सभी नागरिकों का कर्तव्य बन जाता है कि वे राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने हेतु तन, मन, धन से समर्पित रहें ।

आज आवश्यकता है हम सब देशवासियों को महात्मा गाँधी के इस कथन से प्रेरणा लेकर अपने कर्म पथ पर दृढ़प्रतिज्ञ होकर चलते हुए देश की एकता और अखण्डता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए भारत माता की सेवा में तन-मन-धन से जुट जाने की – ”जब तक हम एकता के सूत्र में बँधे हैं, तब तक मजबूत हैं और जब तक खण्डित हैं, तब तक कमजोर है ।”

आज आवश्यकता है केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय एकता परिषद को फिर से सक्रिय करने की, ताकि देशवासी आन्तरिक मतभेदों को भुलाकर आपस में प्रेम-भाईचारे के साथ रह सकें । सारे संचार माध्यमों को भी मिल-जुलकर राष्ट्रीय एकता को बढावा देने में सहयोग करना चाहिए, क्योंकि सिनेमा, टेलीविज़न, अखबार व पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से लोगों में राष्ट्रीय एकता की भावना का संचार प्रभावपूर्ण ढंग से किया जा सकता है ।

लेखकों व कलाकारों का भी दायित्व बनता है कि वे अपनी रचनाओं व कला के माध्यम से लोगों में राष्ट्रीय एकता की भावना जागृत करें, क्योंकि साहित्य व कला का संसार जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के बन्धनों से परे होता है । राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए असमानता लाने वाले कानूनों को खत्म किया जाना भी अति आवश्यक है ।

शैक्षिक संस्थानों को भी इस कार्य में बढ़-चढ़कर योगदान देना होगा । पूर्व प्रधानमन्त्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की इन पंक्तियों को पढ़कर अपनी राष्ट्रीय एकता को सर्वदा अक्षुण्ण रखने का संकल्प लें-

‘बाधाएँ आती हैं आएँ

घिरें प्रलय की घोर घटाएँ

पाँवों के नीचे अंगारे

सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ

निज हाथों में हँसते-हँसते

आग लगाकर जलना होगा

कदम मिलाकर चलना होगा

राष्ट्रीय एकता पर निबंध-Rashtriya Ekta Essay In Hindi

एक देश में रह रहे लोगों के बीच एकता की शक्ति के बारे में लोगों को जागरुक बनाने के लिये ‘राष्ट्रीय एकता’ एक तरीका है। अलग संस्कृति, नस्ल, जाति और धर्म के लोगों के बीच समानता लाने के द्वारा राष्ट्रीय एकता की जरुरत के बारे में ये लोगों को जागरुक बनाता है। हम यहाँ पर स्कूल जाने वाले विभिन्न आयु वर्ग और कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों के लिये अलग-अलग शब्द सीमा में राष्ट्रीय एकता पर निबंध उपलब्ध करा रहें हैं। इसका प्रयोग वो किसी भी स्कूली परीक्षा तथा अन्य प्रतियोगिताओं में कर सकते हैं।

राष्ट्रीय एकता पर निबंध (नेशनल इंटीग्रेशन एस्से)

राष्ट्रीय एकता पर निबंध-Rashtriya Ekta Essay In Hindi

Find here some essays on National Integration in easy Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

राष्ट्रीय एकता पर निबंध 1 (100 शब्द)

राष्ट्रीय एकता पर निबंध-Rashtriya Ekta Essay In Hindi

राष्ट्रीय एकीकरण को राष्ट्रीय एकता दिवस भी कहा जाता है। देश के लोगों के बीच असमानता के साथ ही समाजिक संस्कृति और अर्थशास्त्र के भेदभाव को घटाना इसका एक सकारात्मक पहलू है। देश में राष्ट्रीय एकता लाने के लिये किसी समूह, समाज, समुदाय और पूरे देश के लोगों के बीच एकता को मजबूती देने के लिये ये बढ़ावा देता है। किसी सत्ता के द्वारा ये कोई एक दबाव नहीं है बल्कि भारत को एक विकसित देश बनाने के लिये ये लोगों से आग्रह करता है। ये केवल लोगों की एकता और सौहार्द के द्वारा ही संभव होगा। अपने भावनात्मक संबंध को बढ़ाने के लिये उन्हें अपने विचार, मूल्य और दूसरे मुद्दों को बाँटना चाहिये। लोगों को विविधता के अंदर एकता को जीना और महसूस करना चाहिये और अपने राष्ट्र की पहचान एक सुप्रिम शक्ति के रुप में बनानी चाहिये।

राष्ट्रीय एकीकरण

राष्ट्रीय एकता पर निबंध 2 (150 शब्द)

राष्ट्रीय एकता पर निबंध-Rashtriya Ekta Essay In Hindi

इस देश में व्यक्तिगत स्तर के विकास को बढ़ाने के लिये भारत में राष्ट्रीय एकीकरण का बहुत महत्व है और ये इसे एक मजबूत देश बनाता है। पूरी तरह से लोगों को इसके प्रति जागरुक बनाने के लिये, 19 नवंबर से 25 नवंबर तक राष्ट्रीय एकता दिवस और राष्ट्रीय एकीकरण सप्ताह (अर्थात् कौमी एकता सप्ताह)

के रुप में 19 नवंबर (भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी का जन्म दिवस) को हर वर्ष एक कार्यक्रम के रुप में मनाया जाता है। एकीकरण का वास्तविक अर्थ है अलग-अलग भागों को एक बनाने के लिये जोड़ना।

भारत एक ऐसा देश है जहाँ लोग विभिन्न धर्म, क्षेत्र, संस्कृति, परंपरा, नस्ल, जाति, रंग और पंथ के लोग एक साथ रहते हैं। इसलिये, राष्ट्रीय एकीकरण बनाने के लिये भारत में लोगों का एकीकरण जरुरी है। अगर एकता के द्वारा अलग-अलग धर्मों और संस्कृति के लोग एक साथ रहते हैं, वहाँ पर कोई भी सामाजिक या विकासात्मक समस्या नहीं होगी। भारत में इसे विविधता में एकता के रुप में जाना जाता है हालाँकि ये सही नहीं है लेकिन हमें (देश के युवाओं को) इसे मुमकिन बनाना है।

राष्ट्रीय एकता पर निबंध 3 (200 शब्द)

राष्ट्रीय एकता पर निबंध-Rashtriya Ekta Essay In Hindi

भारत में, हर साल 19 नवंबर को एक बहुत जरुरी सामाजिक कार्यक्रम के रुप में राष्ट्रीय एकीकरण दिवस को देखा जाता है। राष्ट्रीय एकीकरण के बारे में लोगों के बीच अधिक जागरुकता फैलाने के लिये, 19 से 25 नवंबर तक राष्ट्रीय एकीकरण सप्ताह के रुप में वार्षिक तौर पर देखे जाने के लिये भारतीय सरकार द्वारा एक पूरे सप्ताह का कार्यक्रम भी लागू किया गया है। भारत एक ऐसा देश है जो अपने विभिन्न संस्कृतियों, परंपराओं, नस्ल, धर्मों, जाति और पंथ के जाना जाता है लेकिन इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है कि यहाँ निवास कर रहे लोगों की सोच में विविधता के कारण ये अभी भी विकासशील देशों में आता है। यहाँ रह रहे लोग अपनी संस्कृति और धर्म के अनुसार अलग-अलग सोचते हैं जो व्यक्तिगत और देश के विकास को रोकने का एक बड़ा कारण हैं।

भारत अपनी विविधता में एकता के लिये प्रसिद्ध है लेकिन ये सही नहीं है क्योंकि विकास के लिये दूसरे के विचार को स्वीकार करने के लिये लोग तैयार नहीं है। यहाँ सभी मानते हैं कि उनका धर्म ही सबसे बेहतर है और जो भी वो करते हैं वही सबसे ठीक है। अपने खुद के फायदे के लिये केवल खुद को अच्छा साबित करने के लिये यहाँ रह रहे विभिन्न नस्लों के लोग आपस में शारीरिक, भावनात्मक, बहस और चर्चा आदि के द्वारा लड़ते हैं। अपने देश के बारे में एक साथ होकर वो कभी नहीं सोचते हैं। वो कभी नहीं सोचते कि हमारे देश का विकास केवल व्यक्तिगत वृद्धि और विकास के साथ ही संभव है।


 

राष्ट्रीय एकता पर निबंध 4 (250 शब्द)

“लोगों की एकता” के रुप में भारत की एक पहचान बनाने के लिये अलग धर्मों के लोगों के बीच एकता को लाने के लिये राष्ट्रीय एकीकरण एक प्रक्रिया है। समन्वय और एकता की मजबूती के साथ ही समाज में असमानता और दूसरे सामाजिक मुद्दे जैसे विविधता, नस्लीय भेद-भाव आदि को हटाने के लिये ये एक और एकमात्र रास्ता है। भारत एक बहु-जातिय और बहु-भाषायी देश है जहाँ विभिन्न जाति के लोग एक साथ रहते हैं और अलग-अलग भाषाएँ बोलते हैं। वो अपनी प्रथा और परंपरा अपने धर्म के अनुसार निभाते हैं। भारत में लोगों के बीच केवल धर्म, जाति, पंथ, रंग और संस्कृति से ही विविधता नहीं है बल्कि सोच में भी विविधता दिखाई देती है जो भारत में अनुचित विकास का एक बड़ा विषय है।

भारतीय लोगों के बीच अलगाव की एक उच्च स्थिति है जो सांप्रदायिक और दूसरी समस्याओं के साथ यहाँ एक बुरा परिदृश्य बनाती है। भारत में अलगाव के कारण, हम लोगों ने ढ़ेर सारी सामाजिक समस्याओं का सामना किया जैसे 1947 में भारत का बँटवारा, 1992 में बाबरी मस्जिद का विध्वंस, हिन्दू और मुस्लिमों के बीच दंगे आदि। अस्पृश्यता की बाधा, भाषा की बाधा, सामाजिक स्थिति की बाधा और दूसरी सामाजिक बाधाएँ हमें पीछे ले जा रहीं हैं। विविधता में एकता लाने के लिये भारतीय सरकार द्वारा बहुत सारे नियम-कानून लागू किये गये हैं हालांकि ये केवल मानव दिमाग है जो लोगों के बीच विविधता में स्वाभाविक एकता ला सकता है।

राष्ट्रीय एकीकरण में कमी के कारण यहाँ सभी सामाजिक समस्याओं का उदय हो रहा है। हम सभी को इस राष्ट्रीय एकीकरण के वास्तविक अर्थ, उद्देश्य और जरुरत को समझना चाहिये। अपने देश के मुख्य विकास के लिये भारतीय सरकार द्वारा सभी नियम-कानूनों को मानने के साथ ही हमें एक साथ रहना और सोचना चाहिये।

 

राष्ट्रीय एकता पर निबंध 5 (300 शब्द)

राष्ट्रीय एकता पर निबंध-Rashtriya Ekta Essay In Hindi

भारत एक ऐसी भूमि है जहाँ अपनी अनोखी संस्कृति और विविध जीवनशैली को मानने वाले विरोधी लोग रहते हैं। ये बहुत ही साफ है कि हमें हमारे जीवन में राष्ट्रीय एकीकरण के अर्थ को समझने की जरुरत है और अपने देश को एक पहचान देने के लिये सबकुछ मानना होगा। भारत में लोग विभिन्न धर्म, जाति, समुदाय, नस्ल और सांस्कृतिक समूह से संबंध रखते हैं और वर्षों से एक साथ रह रहें हैं। भारत की सांस्कृतिक विरासत को विविध धर्म, जाति और पंथ ने समृद्ध बनाया हुआ है जिसने यहाँ पर एक मिश्रित संस्कृति को सामने रखा है हालाँकि ये बहुत ही साफ है कि भारत में हमेशा राजनीतिक एकता की कमी रही है।

भारत में केवल एक बार राजनीतिक एकता दिखाई दी थी जब सभी ने मिलकर 1947 में अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर किया गया था। अंग्रेजों ने यहाँ कई प्रकार से बाँटो और राज करो की नीति अपनाई थी हालाँकि, इसमें वो बाद में असफल हो गये थे। कुछ बिंदु जैसे सांस्कृतिक एकता, रक्षात्मक निरंतरता, संविधान, कला, साहित्य, सामान्य आर्थिक समस्याएँ राष्ट्रीय ध्वज़, राष्ट्र गान, राष्ट्रीय उत्सव और राष्ट्रीय प्रतीक के द्वारा भारत में राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा दिया जाता है।

अलग धर्म और जाति होने के बावजूद हमें पहचाना चाहिये कि एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करने के लिये हम सब एक हैं। हमें भारत में विविधता में एकता का वास्तविक मतलब समझना चाहिये। इसका ये कतई मतलब नहीं है कि अखंडता की प्रकृति यहाँ पर नस्लीय और सांस्कृतिक समानता के कारण होनी चाहिये। बल्कि इसका मतलब है कि इतने अंतर के बावजूद भी एकात्मकता है। पूरे विश्वभर में दूसरी सबसे बड़ी जनसंखया वाले देश के रुप में भारत को गिना जाता है, जहाँ पर 1652 भाषाएँ बोली जाती हैं और विश्व के सभी मुख्य धर्म के लोग यहाँ एक साथ रहते हैं। सभी मतभेदों के बावजूद भी हमें बिना किसी राजनीतिक और सामाजिक विरोधाभास के शांति से एक-दूसरे के साथ रहना चाहिये। हमें इस महान देश में एकता का आनन्द उठाना चाहिये जहाँ राष्ट्रीय एकीकरण के उद्देश्य को पूरा करने के लिये सबकुछ विविधता है।


 

राष्ट्रीय एकता पर निबंध 6 (400 शब्द)

राष्ट्रीय एकता पर निबंध-Rashtriya Ekta Essay In Hindi

लोगों में जाति, धर्म, भाषा, नस्ल आदि में विविधता का एक देश है भारत हालाँकि अंग्रेजी शासन से आजादी के लिये सामान्य क्षेत्र, इतिहास और लगातार लड़ने के प्रभाव के तहत बहुत बार एकता यहाँ भी देखी गयी है। भारत पर राज करने के लिये अंग्रेजों ने यहाँ पर कई वर्षों तक बाँटो और राज करो की नीति अपनायी। हालाँकि विभिन्न धर्म, जाति, नस्ल का होने के बावजूद भी भारतीयों की एकता ने अंग्रेजों को यहाँ से खदेड़ दिया। लेकिन आजादी के बाद अलगाव ने जगह ले ली जिसने भारत को भारत और पाकिस्तान में बाँट दिया।

भारत विभिन्न धार्मिक समुदायों जैसे हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसियों की एक भूमि है। यहाँ पर राष्ट्रीय एकीकरण तभी संभव है जब सभी समुदाय एक-साथ शांतिपूर्वक रहें, एक-दूसरे समुदाय की सराहना करें, प्यार करें तथा एक-दूसरे की संस्कृति और परंपरा का सम्मान करें। हरेक समुदाय को उनके मेले, उत्सवों और दूसरे अच्छे दिनों को शांतिपूर्वक देखना चाहिये। हरेक समुदाय को एक दूसरे की मदद के साथ ही धार्मिक त्योंहारो की खुशियों को बाँटना चाहिये। किसी भी धार्मिक समुदाय को कुछ भी ऐसा बुरा नहीं करना चाहिये जो किसी दूसरे धर्म को ठेस पहुँचाये या उस धर्म में मनाही हो।

विभिन्न धर्मों के लोग अलग-अलग भाषा बोलते हैं जैसे हिन्दी, अंग्रेजी, ऊर्दू, उड़ीया, पंजाबी, बंगाली, मराठी आदि। सभी धर्मों के बीच समानता और सभी जाति के विद्यार्थीयों के लिये समान सुविधा होनी चाहिये। देश के मुख्य विकास के लिये सभी समुदायों के बराबर वृद्धि और विकास और सभी नस्लों के लोगों के बीच समानता लाने के लिये आधुनिक समय में भारत में राष्ट्रीय एकीकरण की तुरंत जरुरत है। भारतीय सरकार ने इस आशा में राष्ट्रीय एकीकरण की परिषद का गठन किया है कि इसके सभी कार्यक्रमों के उद्देश्यों को पूरा करने में यहाँ रहने वाले लोग सहयोग करेंगे।

एक पहचान बनाने के लिये राष्ट्र के रहने वाले सभी लोगों का एक संघठित समूह राष्ट्रीय एकीकरण है। राष्ट्रीय एकीकरण एक खास मनोभाव है जो धर्म, जाति, भाषा या पृष्ठभूमि को बिना ध्यान दिये राष्ट्र को एक सामान संबंध में जोड़ता है। हमलोगों को खदु को भारतीय के रुप में पहचानना चाहिये ना कि किसी खास धर्म या जाति के व्यक्ति के रुप में। ये विरासत से समृध देश है हालांकि हमलोग ये नहीं कह सकते कि यहाँ लोगों में पूरी तरह से एकता है। ये देश के युवाओं में जागरुकता फैलने से ही संभव हो पायेगा। एक युवा के रुप में, हम देश का भविष्य हैं इसलिये हमें देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझना चाहिये और राष्ट्रीय एकीकरण के लिये जरुरी सभी कदम उठाने चाहिये।

राष्ट्रीय एकता पर निबंध-Rashtriya Ekta Essay In Hindi

राष्ट्रीय एकता पर निबंध
Essay on National Unity in Hindi

 

राष्ट्रीय एकता पर निबंध  Essay on National Unity in Hindi – एकता का साधारण अर्थ होता है – मिलजुल कर किसी काम को संपन्न करना . किसी देश या राष्ट्र की उन्नति के लिए एकता बनाये रखना बहुत जरुरी है . एकता का महत्व मनुष्य को उस समय को उस समय ही पता चलता है ,जब वह बिलकुल आदिम अवस्था में था . अपनी उस स्थिति  में भी वह एकता के बल पर जंगलों में रहने वाले हिंसक पशुवों से अपनी रक्षा करता था .

एकता की आवश्यकता –

आज भी समाज या राष्ट्र के लिए एकता की बहुत बड़ी आवश्यकता है . जब तक समाज या राष्ट्र में एकता बनी रहती हैं ,तब तक कोई शत्रु उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकता .लेकिन एकता के भंग होते ही कमज़ोर से कमज़ोर

एकता
एकता

शत्रु भी उस देश पर आक्रमण कर विजयी बन जाता है . कहा भी गया है कि संघे शक्ति कलियुगे ! अर्थात कलियुग में संगठन शक्ति ही प्रधान है. 

किसी भी कार्य या उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें एकता की जरुरत पड़ती हैं . कोई भी बड़ा से बड़ा कार्य अगर हमारे सामने आता है तो उसके हल या निराकरण के लिए हमें सामूहिक सलाह या मशविरे की आवश्कयता पड़ती है .उससे लाभ उठाकर हम उस काम को आसानी से संपन्न कर डालते हैं . पाँव तले रौंदी जाने वाली चीटियाँ का उदहारण हमारे सामने है . एकता के बल से ही वे हाथी जैसे बलशाली जानवर को परास्त कर डालती हैं .पानी की एक एक बूँद से ही तालाब भरता है , एक एक पैसा इकठ्ठा करने से व्यापारी लखपति बनता है .
एकता एक बहुत मूल्यवान वस्तु हैं . इससे बहुत लाभ हैं . हमें परिवार ,समाज और देश की एकता बनाये रखने के लिए हर संभव उपाय अपनाना चाहिए .परिवार की प्रगति एकता बनाये रखने पर ही हो सकती हैं . समाज का अग्रसर होना भी एकता पर आधारित है. देश की सुरक्षा भी एकता के द्वारा ही हो सकती हैं .एकता के द्वारा हम अपनी सुख सुविधा में चार चाँद लगा सकते हैं . अगर समाज में थोड़े व्यक्ति गरीब हैं तो उनकी गरीबी हम एकता के बल से दूर कर सकते हैं .

एकता से लाभ –

एकता से प्रत्येक व्यक्ति को लाभ पहुँचता है . व्यक्ति से ही समाज बनता है .इसी समाज का व्यक्ति अपने स्वतंत्र देश का शासक या संचालक बनता हैं .उसे भी शासन को उचारु रूप से चलाने के लिए एकता की अवास्क्यता पड़ती हैं .एकता में अद्भूत शक्ति होती हैं .एकता के बल पर ही बाबर की बारह हज़ार सेना ने सांगा की एक लाख सेना को पराजित कर दिया था . भारत में एकता के बल पर ही अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए बाध्य किया या यों कहिये की देश को गुलामी के बंधन से मुक्ति दिलाई .

एकता न होने से हानि –

एकता न होने से समाज की बड़ी हानि होती हैं . कोई भी राष्ट्र या देश एकता के अभाव में रोगी या जीर्ण शीर्ण हो जाता हैं . भारत के राजाओं में एकता न होने के कारण ही इस देश पर मुसलमान का अधिपात्य हुआ और वे सैकड़ों वर्षों तक शासक रहे .हमारी एकता के अभाव के कारण ही देश सदियों तक गुलाम बना रहा .अतः हमें सदैव तैयार रहना चाहिए कि हमारी एकता भंग न हो और हम हमेशा एकता के बल से बलशाली बने रहें .

निष्कर्ष –

प्रत्येक भारतवासी को चाहिए कि प्रतिदिन एकता का पाठ पढ़ें और एकता को जीवन का संबल बनाये .इसमें आगे इतना और याद रखें कि एकता ही वास्तव में जीवन है .

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महिला सशक्तिकरण पर निबंध-Women Empowerment Essay In Hindi

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महिला सशक्तिकरण पर निबंध-Women Empowerment Essay In Hindi

महिला सशक्तिकरण पर निबंध (Women Empowerment Essay In Hindi) :

भूमिका : महिला सशक्तिकरण को समझने से पहले सशक्तिकरण को समझना बहुत जरूरी है। सशक्तिकरण से तात्पर्य किसी व्यक्ति की उस क्षमता से होता है जिससे उसमें यह योग्यता आ जाती है जिसमें वह अपने जीवन से जुड़े सभी फैसलों को खुद ले सके।

महिला सशक्तिकरण में भी उसी क्षमता की बात होती है जहाँ पर महिलाएं परिवार और समाज के सभी बन्धनों से मुक्त होकर अपने फैसलों की निर्माता खुद होती है। महिला सशक्तिकरण संसार भर में महिलाओं को सशक्त बनाने की एक मुहीम है जिससे की महिलाएं खुद अपने फैसले ले सकें और हमारे इस समाज और अपने परिवार के बहुत से निजी दायरों को तोडकर अपने जीवन में आगे बढ़ सके।

महिला सशक्तिकरण : महिला सशक्तिकरण को बहुत ही आसान शब्दों में परिभाषित किया जा सकता है। इससे महिलाएँ शक्तिशाली बनती हैं जिससे वो अपने जीवन से जुड़े हर फैसले को खुद ले सकती हैं और अपने परिवार तथा समाज में अच्छी तरह से रह सकती हैं। समाज में महिलाओं के वास्तविक अधिकार को प्राप्त करने के लिए उन्हें सक्षम बनाना महिला सशक्तिकरण कहलाता है।

महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य होता है महिलाओं को शक्ति प्रदान करना जिससे वे हमारे समाज में पीछे न रह सके और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर फैसलें ले सकें तथा अपना सिर उठाकर चल सकें। महिला सशक्तिकरण का मुख्य लक्ष्य महिलाओं को उनका अधिकार दिलाना है।

महिला सशक्तिकरण का तात्पर्य ऐसी सामाजिक प्रक्रिया से है जिसमें महिलाओं के लिए सर्वसम्पन्न तथा विकसित होने हेतु सम्भावनाओं के द्वार खुले , नए विकल्प तैयार हों , भोजन , पानी , घर , शिक्षा , स्वास्थ्य , सुविधाएँ , शिशु पालन , प्राकृतिक संसाधन , बैंकिंग सुविधाएँ , क़ानूनी हक तथा प्रतिभाओं के विकास हेतु पर्याप्त रचनात्मक अवसर प्राप्त हों।

महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता : हम सभी को पता है कि हमारा देश एक पुरुष प्रभुत्व वाला देश है जहाँ पर पुरुषों को महिलाओं की तुलना में अधिक सक्षम समझा जाता है जो उचित नहीं है। आज भी बहुत से स्थानों पर महिलाओं को पुरुषों की तरह काम करने नहीं दिया जाता है और उन्हें परिवार की देखभाल और घर से न निकलने की हिदायत दी जाती है।

भारत एक पुरुषप्रधान समाज है जहाँ पर पुरुष का प्रत्येक क्षेत्र मंक दखल होता है और महिलाएँ केवल घर-परिवार की जिम्मेदारी उठाती है साथ ही उन पर कई पाबंदियाँ भी होती हैं। भारत की लगभग 50% आबादी महिलाओं की है अथार्त सारे देश के विकास के लिए इस आधी आबादी की बहुत ज्यादा जरूरत है जो आज तक सशक्त नहीं है और बहुत से सामाजिक प्रतिबंधों से बंधी हुई है।

भविष्य में इस आधी आबादी को मजबूत किये बिना हमारे देश के विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। हमारे देश को विकसित करने के लिए यह आवश्यक है कि सरकार , पुरुष और स्वंय महिलाओं द्वारा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जाए। महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि प्राचीनकाल में भारत में लैंगिक असमानता थी और पुरुषप्रधान समाज था।

महिलाओं को उनके परिवार और समाज के द्वारा दबाया गया , उनके साथ बहुत प्रकार से हिंसा की गई तथा परिवार और समाज में भेदभाव किया गया ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुसरे देशों में भी दिखाई देता है। प्राचीनकाल से महिलाओं के साथ समाज में चल रहे गलत और पुराने चलन को नए रीती-रिवाजों और परम्पराओं में ढाल दिया गया है।

भारतीय समाज में महिलाओं को सम्मान देने के लिए माँ , बहन , पुत्री , पत्नी के रूप में महिला देवियों को पूजने की परम्परा है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि सिर्फ महिलाओं के पूजने से देश के विकास की आवश्यकता को पूरा किया जा सकता है। आज के समय में आवश्यकता है कि देश की आधी आबादी यानि महिलाओं का प्रत्येक क्षेत्र में सशक्तिकरण किया जाये क्योंकि यही देश के विकास का आधार बनेंगी।

भारत एक सुप्रसिद्ध देश है जिसने विविधता में एकता के मुहावरे को साबित करके दिखाया है। भारत के समाज में विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं। महिलाओं को प्रत्येक धर्म में एक भिन्न स्थान दिया गया है जो लोगों की आँखों को ढके हुए पर्दे के रूप में और बहुत वर्षों से आदर्श के रूप में महिलाओं के विरुद्ध बहुत सारे गलत कामों को जारी रखने में सहायता कर रहा है।

प्राचीनकाल के भारतीय समाज में भेदभाव दस्तूरों के साथ-साथ सती प्रथा , नगर वधु व्यवस्था , दहेज प्रथा , यौन हिंसा , घरेलू हिंसा , गर्भ में बच्चियों की हत्या , पर्दा प्रथा , कार्य स्थल पर यौन शोषण , बाल मजदूरी , बाल विवाह , देवदासी प्रथा , कन्या भ्रूण हत्या आदि परम्परा थीं।

पुरुष पारिवारिक सदस्यों के द्वारा सामाजिक राजनीतिक अधिकारों को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। महिलाओं के विरूद्ध बहुत से बुरे चलनों को खुले विचारों और महान भारतीय लोगों के द्वारा हटाया गया है और महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव पूर्ण कामों के लिए अपनी आवाज को उठाया। अंग्रेजों द्वारा सती प्रथा को खत्म करवाने के लिए राजा राम मोहन राय में लगातार कोशिशें की थीं जिसमें उन्हें सफलता प्राप्त हुई थी।

इसके बाद बहुत से भारतीय समाज सुधारकों ने भी महिला उत्थान के लिए अपनी आवाज को बुलंद किया और बहुत संघर्ष किया। भारत देश में विधवाओं की स्थिति को सुधारने के लिए ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ने लगातार कोशिशों से विधवा पुर्न विवाह अधिनियम 1856 की शुरुआत करवाई थी।

पिछले कुछ सालों में महिलाओं के विरुद्ध होने वाले लैंगिक असमानता और बुरी प्रथाओं को हटाने के लिए सरकार द्वारा बहुत सारे सैवैधानिक और क़ानूनी अधिकार बनाये गये और उन्हें लागु किया गया है। ऐसे बड़े विषयों को सुलझाने के लिए महिलाओं सहित अभी के लगातार सहयोग की बहुत अधिक जरूरत है।

आधुनिक समाज महिलाओं के अधिकारों को लेकर अधिक जागरूक है जिसका परिणाम यह है कि बहुत सारे स्वयं-सेवी समूह और एनजीओ आदि सभी इस दिशा में अपने सफल प्रयास कर रहे हैं। महिलाएं अधिक खुले हुए दिमाग की होती हैं और सभी आयामों में अपने अधिकारों को पाने के लिए सभी सामाजिक बंधनों को तोड़ रही है।

क़ानूनी अधिकार के साथ महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए संसद द्वारा पास किए गए कुछ अधिनियम जैसे – एक बराबर पारिश्रमिक एक्ट 1976 , दहेज रोक अधिनियम 1961 , अनैतिक व्यापर रोकथाम अधिनियम 1956 , मेडिकल तर्म्नेशन ऑफ़ प्रेग्नेंसी एक्ट 1987 , बाल विवाह रोकथाम एक्ट 2006 , लिंग परीक्षण तकनीक एक्ट 1994 , कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन शोषण एक्ट 2013 आदि को चलाया गया है।

राष्ट्र निर्माण में भूमिका : महिलाएं हमारे देश की आबादी का लगभग आधा हिस्सा होती हैं। इसी वजह से राष्ट्र के विकास के इस महान काम में महिलाओं की भूमिका और योगदान को पूरी तरह और सही परिप्रेक्ष्य में रखकर ही राष्ट्र निर्माण के कामों को समझा जा सकता है।

समूची सभ्यता में व्यापक बदलाव के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में महिला सशक्तिकरण आन्दोलन 20 वीं शताब्दी के अंतिम दशक का एक बहुत ही महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक विकास कहा जा सकता है। राष्ट्र निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है जो सुव्यवस्थित रूप से तैयार की गयी विकास नीतियों के रूप में राजनीतिक इच्छा को रेखांकित करती है।

जिससे व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता का प्रयोग करके अपनी कार्यक्षमता में वृद्धि कर सके, इसके लिए आर्थिक , सामाजिक , शैक्षिक तथा बुनियादी ढांचों का होना जरूरी होता है। जनता की खुशहाली तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार करके मानव विकास का मूलभूत लक्ष्य हमारी राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का बहुत आवश्यक अंग है।

भारत में महिला सशक्तिकरण के बुनियादी तथ्य : भारत में महिला कल्याण से संबंधित गतिविधियों को संस्थागत ढांचा उपलब्ध कराने तथा संवैधानिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए अनेक कदम उठाए गये हैं। स्वतंत्रता के बाद से ही महिलाओं का विकास भारतीय आयोजन प्रणाली का एक केन्द्रीय विषय रहा है।

पिछले 20 सालों में बहुत से नीतिगत बदलाव आये हैं। सन् 1970 में जहाँ पर कल्याण की अवधारणा महत्वपूर्ण थी वहीं 80 के दशक में विकास पर जोर दिया गया था। 1990 के दशक से हो महिला अधिकारिता अथार्त महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया जा रहा है।

ऐसी कोशिशें की जा रही हैं , महिलाएँ फैसला लेने की प्रक्रिया में सम्मिलित हों तथा नीति निर्माण के स्तर पर भी उनकी सहभागिता हो। सिमित अर्थों में सामूहिक कार्यवाई से ही महिलाओं में शक्ति का संचार होता है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। इस प्रकार से दमन का विरोध करने से उनकी क्षमता और इच्छा में भी वृद्धि होती है।

लेकिन व्यापक अर्थों में सामूहिक कार्यवाई सशक्तिकरण का ही एक जरिया है। इसके माध्यम से स्त्री-पुरुष असामनता को चुनौती देने के साथ-साथ उसे खत्म करने की कोशिश भी की जा सकती है। विचार , धर्म , आस्था और अंतरात्मा की स्वतंत्रता के साथ महिलाओं की प्रगति के प्रयासों से व्यक्तिगत तथा सामूहिक रूप से महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों की भी नैतिक , आध्यात्मिक तथा बौद्धिक आवश्यकताओं की पूर्ति होती है। इससे समाज में उनकी पूर्ण क्षमता के उपयोग की संभावना सुनिश्चित होती है तथा अपनी आकांक्षाओं के अनुसार अपनी जिन्दगी को रूप देने की पक्की गारंटी भी देती है।

महिला सशक्तिकरण के प्रयास : भारत सरकार ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सहयोग से देश में महिलाओं को राजनैतिक , आर्थिक तथा सामाजिक विकास में बराबर भागीदारी के अवसर प्रदान करने के प्रमुख उद्देश्य को लेकर राष्ट्रिय महिला उत्थान नीति 2001 में घोषित की गयी थी।

सभी निर्णायक निकायों में निर्णय प्रक्रिया में नारी सहभागिता को सुनिश्चित किया गया है। वर्तमान कानून में संशोधन द्वारा नारी आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील तथा घरेलू हिंसा या वैयक्तिक आक्रमण की रोकथाम के लिए नए कानूनों का निर्माण एवं अपराधियों के लिए उचित दण्ड की व्यवस्था की गयी है।

गांवों एवं शहरों की आवस नीतियों एवं योजनाओं में महिला परिप्रेक्ष्य को सम्मिलित किया गया है। महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करने के लिए समुदाय धार्मिक नेताओं एवं पणधारियों की पुरम भागीदारी एवं फल पर विवाह , तलाक , अनुक्षण तथा अभिभावकता जैसे व्यक्तिक कानूनों में परिवर्तन किया गया है।

महिलाओं के शिक्षा स्तर को बढ़ाने एवं अनुकूल शिक्षा प्रणाली के निर्माण के लिए विशेष नियम लागु किये गए हैं। महिला स्वास्थ्य पोषाहार , बालिका विवाह एवं विवाह के पंजीकरण को अनिवार्य बनाया गया है। महिलाओं को पुरुषों के समान संपत्ति में अधिकार दिलाने के लिए उससे संबंधित कानूनों में परिवर्तन किया गया है।

ग्लोबलाइजेशन उत्पन्न नकारात्मक एवं सामाजिक तथा आर्थिक प्रभावों के विरुद्ध महिलाओं की क्षमता में वृद्धि के साथ उन्हें पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने की योजना है। महिलाओं को मुख्य धारा में लाने वाले तंत्रों की प्रगति का समय-समय पर मुल्यांकन करने के लिए समन्वय तथा प्रबन्धन तंत्र का निर्माण हुआ है।

पर्यावरण संरक्षण एवं बहाली कार्यक्रमों में महिलों को सम्मिलित किया गया है। गरीब महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता हेतु कार्यक्रम चलाए गए हैं। उत्पादन में उपभोग के लिए ऋण सहायता तथा सामाजिक आर्थिक विकास में उत्पादकों एवं कार्यकर्ताओं के रूप में महिलाओं के योगदान को मान्यता दी गई है। सभी केंद्रीय तथा राज्य मंत्रालय केन्द्रियाराज्य महिला एवं बाल विकास विभागों तथा राष्ट्रियारस्य महिला आयोगों के साथ परामर्श की प्रतिभागी प्रक्रिया द्वारा नीति को ठोस कार्यवाही में बदलने की योजना तैयार की जाएगी।

उपसंहार : भारतीय समाज में सच में महिला सशक्तिकरण लाने के लिए महिलाओं के विरुद्ध बुरी प्रथाओं के मुख्य कारणों को समझना और उन्हें हटाना होगा जो समाज की पितृसत्तामक और पुरुष युक्त व्यवस्था है। यह बहुत आवश्यक है कि हम महिलाओं के विरुद्ध अपनी पुरानी सोच को बदलें और संवैधानिक तथा क़ानूनी प्रावधानों में भी बदलाव लाये।

महिला सशक्तिकरण पर निबंध-Women Empowerment Essay In Hindi

‘महिला सशक्तिकरण’ के बारे में जानने से पहले हमें ये समझ लेना चाहिये कि हम ‘सशक्तिकरण’ से क्या समझते है। ‘सशक्तिकरण’ से तात्पर्य किसी व्यक्ति की उस क्षमता से है जिससे उसमें ये योग्यता आ जाती है जिसमें वो अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय स्वयं ले सके। महिला सशक्तिकरण में भी हम उसी क्षमता की बात कर रहे है जहाँ महिलाएँ परिवार और समाज के सभी बंधनों से मुक्त होकर अपने निर्णयों की निर्माता खुद हो। सामान्यत: विद्यार्थी अपने स्कूल में चर्चा करने या कुछ पैराग्राफ लिखने या निबंध लिखने के लिये इस विषय को लेते है। यहाँ विद्यार्थीयों के मदद के लिये इस विषय पर हम कुछ निबंध उपलब्ध करा रहे है।

महिला सशक्तिकरण पर निबंध (वीमेन एम्पावरमेंट एस्से)

महिला सशक्तिकरण पर निबंध-Women Empowerment Essay In Hindi

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महिला सशक्तिकरण पर निबंध 1 (100 शब्द)

महिला सशक्तिकरण पर निबंध-Women Empowerment Essay In Hindi

अपनी निजी स्वतंत्रता और स्वयं के फैसले लेने के लिये महिलाओं को अधिकार देना ही महिला सशक्तिकरण है। परिवार और समाज की हदों को पीछे छोड़ने के द्वारा फैसले, अधिकार, विचार, दिमाग आदि सभी पहलुओं से महिलाओं को अधिकार देना उन्हें स्वतंत्र बनाने के लिये है। समाज में सभी क्षेत्रों में पुरुष और महिला दोनों को लिये बराबरी में लाना होगा । देश, समाज और परिवार के उज्जवल भविष्य के लिये महिला सशक्तिकरण बेहद जरुरी है। महिलाओं को स्वच्छ और उपयुक्त पर्यावरण की जरुरत है जिससे कि वो हर क्षेत्र में अपना खुद का फैसला ले सकें चाहे वो स्वयं, देश, परिवार या समाज किसी के लिये भी हो। देश को पूरी तरह से विकसित बनाने तथा विकास के लक्ष्य को पाने के लिये एक जरुरी हथियार के रुप में है महिला सशक्तिकरण।

महिला सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण पर निबंध 2 (150 शब्द)

महिला सशक्तिकरण पर निबंध-Women Empowerment Essay In Hindi

भारतीय संविधान के प्रावधान के अनुसार, पुरुषों की तरह सभी क्षेत्रों में महिलाओं को बराबर अधिकार देने के लिये कानूनी स्थिति है। भारत में बच्चों और महिलाओं के उचित विकास के लिये इस क्षेत्र में महिला और बाल विकास विभाग अच्छे से कार्य कर रहा है। प्राचीन समय से ही भारत में महिलाएँ अग्रणी भूमिका में थी हालाँकि उन्हें हर क्षेत्र में हस्तक्षेप की इज़ाजत नहीं थी। अपने विकास और वृद्धि के लिये उन्हें हर पल मजबूत, जागरुक और चौकन्ना रहने की जरुरत है। विकास का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को समर्थ बनाना है क्योंकि एक सशक्त महिला अपने बच्चों के भविष्य को बनाने के साथ ही देश का भविष्य का सुनिश्चित करती है।

विकास की मुख्यधारा में महिलाओं को लाने के लिये भारतीय सरकार के द्वारा कई योजनाओं को निरुपित किया किया गया है। पूरे देश की जनसंख्या में महिलाओं की भागीदारी आधे की है और महिलाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिये हर क्षेत्र में इन्हें स्वतंत्रता की जरुरत है।

महिला सशक्तिकरण पर निबंध 3 (200 शब्द)

महिला सशक्तिकरण पर निबंध-Women Empowerment Essay In Hindi

भारत एक प्रसिद्ध देश है जो प्राचीन समय से ही अपनी सभ्यता, संस्कृति, सांस्कृतिक विरासत, परंपरा, धर्म और भौगोलिक विशेषताओं के लिये जाना जाता है। जबकि दूसरी ओर, ये अपने पुरुषवादी राष्ट्र के रुप में भी जाना जाता है। भारत में महिलाओं को पहली प्राथमिकता दी जाती है हालाँकि समाज और परिवार में उनके साथ बुरा व्यवहार भी किया जाता है। वो घरों की चारदीवारी तक ही सीमित रहती है और उनको सिर्फ पारिवारिक जिम्मेदारीयों के लिये समझा जाता है। उन्हे अपने अधिकारों और विकास से बिल्कुल अनभिज्ञ रखा जाता है। भारत के लोग इस देश को माँ का दर्जा देते है लेकिन माँ के असली अर्थ को कोई नहीं समझता ये हम सभी भारतीयों की माँ है और हमें इसकी रक्षा और ध्यान रखना चाहिये।

इस देश में आधी आबादी महिलाओं की है इसलिये देश को पूरी तरह से शक्तिशाली बनाने के लिये महिला सशक्तिकरण बहुत जरुरी है। उनके उचित वृद्धि और विकास के लिये हर क्षेत्र में स्वतंत्र होने के उनके अधिकार को समझाना महिलाओं को अधिकार देना है। महिलाएँ राष्ट्र के भविष्य के रुप में एक बच्चे को जन्म देती है इसलिये बच्चों के विकास और वृद्धि के द्वारा राष्ट्र के उज्जवल भविष्य को बनाने में वो सबसे बेहतर तरीके से योगदान दे सकती है। महिला विरोधी पुरुष की मजबूर पीड़ित होने के बजाय उन्हें सशक्त होने की जरुरत है।


 

महिला सशक्तिकरण पर निबंध 4 (250 शब्द)

महिला सशक्तिकरण पर निबंध-Women Empowerment Essay In Hindi

नारी सशक्तिकरण के नारे के साथ एक प्रश्न उठता है कि “क्या महिलाएँ सचमुच में मजबूत बनी है” और “क्या उसका लंबे समय का संघर्ष खत्म हो चुका है”। राष्ट्र के विकास में महिलाओं की सच्ची महत्ता और अधिकार के बारे में समाज में जागरुकता लाने के लिये मातृ दिवस, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आदि जैसे कई सारे कार्यक्रम सरकार द्वारा चलाये जा रहे और लागू किये गये है। महिलाओं को कई क्षेत्र में विकास की जरुरत है। अपने देश में उच्च स्तर की लैंगिक असमानता है जहाँ महिलाएँ अपने परिवार के साथ ही बाहरी समाज के भी बुरे बर्ताव से पीड़ित है। भारत में अनपढ़ो की संख्या में महिलाएँ सबसे अव्वल है। नारी सशक्तिकरण का असली अर्थ तब समझ में आयेगा जब भारत में उन्हें अच्छी शिक्षा दी जाएगी और उन्हें इस काबिल बनाया जाएगा कि वो हर क्षेत्र में स्वतंत्र होकर फैसले कर सकें।

भारत में महिलाएँ हमेशा परिवार में कलंक से बचाने हेतु किये गये वध के विषय के रुप में होती है और उचित शिक्षा और आजादी के लिये उनको कभी भी मूल अधिकार नहीं दिये गये। ये पीड़ित है जिन्होंने पुरुषवादी देश में हिंसा और दुर्व्यवहार को झेला है। भारतीय सरकार के द्वारा शुरुआत की गयी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये राष्ट्रीय मिशन के अनुसार 2011 गणना में इस कदम की वजह से कुछ सुधार आया। इससे महिला लिगांनुपात और महिला शिक्षा दोनों में बढ़ौतरी हुई। वैश्विक लिंग गैप सूचकांक के अनुसार, आर्थिक भागीदारी, उच्च शिक्षा और अच्छे स्वास्थ्य के द्वारा समाज में महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने के लिये भारत में कुछ ठोस कदम की जरुरत है। जरुरत है कि इसे आरम्भिक स्थिति से निकालते हुए सही दिशा में तेज गति से आगे बढ़ाया जाये।

 

महिला सशक्तिकरण पर निबंध 5 (300 शब्द)

महिला सशक्तिकरण पर निबंध-Women Empowerment Essay In Hindi

पंडित जवाहर लाल नेहरु द्वारा कहा गया मशहूर वाक्य “लोगों को जगाने के लिये”, महिलाओं का जागृत होना जरुरी है। एक बार जब वो अपना कदम उठा लेती है, परिवार आगे बढ़ता है, गाँव आगे बढ़ता है और राष्ट्र विकास की ओर उन्मुख होता है। भारत में, महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये सबसे पहले समाज में उनके अधिकारों और मूल्यों को मारने वाले उन सभी राक्षसी सोच को मारना जरुरी है जैसे दहेज प्रथा, अशिक्षा, यौन हिंसा, असमानता, भ्रूण हत्या, महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा, बलात्कार, वैश्यावृति, मानव तस्करी और ऐसे ही दूसरे विषय। लैंगिक भेदभाव राष्ट्र में सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक अंतर ले आता है जो देश को पीछे की ओर ढ़केलता है। भारत के संविधान में उल्लिखित समानता के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं को सशक्त बनाना सबसे प्रभावशाली उपाय है इस तरह की बुराईयों को मिटाने के लिये।

लैंगिक समानता को प्राथमिकता देने से पूरे भारत में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला है। महिला सशक्तिकरण के उच्च लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये इसे हर एक परिवार में बचपन से प्रचारित व प्रसारितकरना चाहिये। ये जरुरी है कि महिलाएँ शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रुप से मजबूत हो। चूंकि एक बेहतर शिक्षा की शुरुआत बचपन से घर पर हो सकती है, महिलाओं के उत्थान के लिये एक स्वस्थ परिवार की जरुरत है जो राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिये आवश्यक है। आज भी कई पिछड़े क्षेत्रों में माता-पिता की अशिक्षा, असुरक्षा और गरीबी की वजह से कम उम्र में विवाह और बच्चे पैदा करने का चलन है। महिलाओं को मजबूत बनाने के लिये महिलाओं के खिलाफ होने वाले दुर्व्यवहार, लैंगिक भेदभाव, सामाजिक अलगाव तथा हिंसा आदि को रोकने के लिये सरकार कई सारे कदम उठा रही है।

महिलाओं की समस्याओं का उचित समाधान करने के लिये महिला आरक्षण बिल-108वाँ संविधान संशोधन का पास होना बहुत जरुरी है ये संसद में महिलाओं की 33% हिस्सेदारी को सुनिश्चित करता है। दूसरे क्षेत्रों में भी महिलाओं को सक्रिय रुप से भागीदार बनाने के लिये कुछ प्रतिशत सीटों को आरक्षित किया गया है। सरकार को महिलाओं के वास्तविक विकास के लिये पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में जाना होगा और वहाँ की महिलाओं को सरकार की तरफ से मिलने वाली सुविधाओं और उनके अधिकारों से अवगत कराना होगा जिससे उनका भविष्य बेहतर हो सके। महिला सशक्तिकरण के सपने को सच करने के लिये लड़िकयों के महत्व और उनकी शिक्षा को प्रचारित करने की जरुरत है।


 

महिला सशक्तिकरण पर निबंध 6 (400 शब्द)

महिला सशक्तिकरण पर निबंध-Women Empowerment Essay In Hindi

लैंगिक असमानता भारत में मुख्य सामाजिक मुद्दा है जिसमें महिलाएँ पुरुषवादी प्रभुत्व देश में पिछड़ती जा रही है। पुरुष और महिला को बराबरी पर लाने के लिये महिला सशक्तिकरण में तेजी लाने की जरुरत है। सभी क्षेत्रों में महिलाओं का उत्थान राष्ट्र की प्राथमिकता में शामिल होना चाहिये। महिला और पुरुष के बीच की असमानता कई समस्याओं को जन्म देती है जो राष्ट्र के विकास में बड़ी बाधा के रुप में सामने आ सकती है। ये महिलाओं का जन्मसिद्ध अधिकार है कि उन्हें समाज में पुरुषों के बराबर महत्व मिले। वास्तव में सशक्तिकरण को लाने के लिये महिलाओं को अपने अधिकारों से अवगत होना चाहिये। न केवल घरेलू और पारिवारिक जिम्मेदारियों बल्कि महिलाओं को हर क्षेत्रों में सक्रिय और सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिये। उन्हें अपने आस-पास और देश में होने वाली घटनाओं को भी जानना चाहिये।

महिला सशक्तिकरण में ये ताकत है कि वो समाज और देश में बहुत कुछ बदल सकें। वो समाज में किसी समस्या को पुरुषों से बेहतर ढ़ंग से निपट सकती है। वो देश और परिवार के लिये अधिक जनसंख्या के नुकसान को अच्छी तरह से समझ सकती है। अच्छे पारिवारिक योजना से वो देश और परिवार की आर्थिक स्थिति का प्रबंधन करने में पूरी तरह से सक्षम है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाएँ किसी भी प्रभावकारी हिंसा को संभालने में सक्षम है चाहे वो पारिवारिक हो या सामाजिक।

महिला सशक्तिकरण के द्वारा ये संभव है कि एक मजबूत अर्थव्यवस्था के महिला-पुरुष समानता वाले वाले देश को पुरुषवादी प्रभाव वाले देश से बदला जा सकता है। महिला सशक्तिकरण की मदद से बिना अधिक प्रयास किये परिवार के हर सदस्य का विकास आसानी से हो सकता है। एक महिला परिवार में सभी चीजों के लिये बेहद जिम्मेदार मानी जाती है अत: वो सभी समस्याओं का समाधान अच्छी तरह से कर सकती है। महिलाओं के सशक्त होने से पूरा समाज अपने आप सशक्त हो जायेगा।

मनुष्य, आर्थिक या पर्यावरण से संबंधित कोई भी छोटी या बड़ी समस्या का बेहतर उपाय महिला सशक्तिकरण है। पिछले कुछ वर्षों में हमें महिला सशक्तिकरण का फायदा मिल रहा है। महिलाएँ अपने स्वास्थ्य, शिक्षा, नौकरी, तथा परिवार, देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी को लेकर ज्यादा सचेत रहती है। वो हर क्षेत्र में प्रमुखता से भाग लेती है और अपनी रुचि प्रदर्शित करती है। अंतत: कई वर्षों के संघर्ष के बाद सही राह पर चलने के लिये उन्हें उनका अधिकार मिल रहा है।


 

महिला सशक्तिकरण पर निबंध 7 (800 शब्द) (दीर्घ निबंध)

महिला सशक्तिकरण पर निबंध-Women Empowerment Essay In Hindi

महिला सशक्तिकरण क्या है ?

महिला सशक्तिकरण को बेहद आसान शब्दों में परिभाषित किया जा सकता है कि इससे महिलाएँ शक्तिशाली बनती है जिससे वो अपने जीवन से जुड़े हर फैसले स्वयं ले सकती है और परिवार और समाज में अच्छे से रह सकती है। समाज में उनके वास्तविक अधिकार को प्राप्त करने के लिये उन्हें सक्षम बनाना महिला सशक्तिकरण है।

भारत में महिला सशक्तिकरण की क्यों जरुरत है ?

जैसा कि हम सभी जानते है कि भारत एक पुरुषप्रधान समाज है जहाँ पुरुष का हर क्षेत्र मंक दखल है और महिलाएँ सिर्फ घर-परिवार की जिम्मेदारी उठाती है साथ ही उनपर कई पाबंदीयाँ भी होती है। भारत की लगभग 50 प्रतिशत आबादी केवल महिलाओं की है मतलब, पूरे देश के विकास के लिये इस आधी आबाधी की जरुरत है जो कि अभी भी सशक्त नहीं है और कई सामाजिक प्रतिबंधों से बंधी हुई है। ऐसी स्थिति में हम नहीं कह सकते कि भविष्य में बिना हमारी आधी आबादी को मजबूत किये हमारा देश विकसित हो पायेगा। अगर हमें अपने देश को विकसित बनाना है तो ये जरुरी है कि सरकार, पुरुष और खुद महिलाओं द्वारा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जाये।

महिला सशक्तिकरण की जरुरत इसलिये पड़ी क्योंकि प्राचीन समय से भारत में लैंगिक असमानता थी और पुरुषप्रधान समाज था। महिलाओं को उनके अपने परिवार और समाज द्वार कई कारणों से दबाया गया तथा उनके साथ कई प्रकार की हिंसा हुई और परिवार और समाज में भेदभाव भी किया गया ऐसा केवल भारत में ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी दिखाई पड़ता है। महिलाओं के लिये प्राचीन काल से समाज में चले आ रहे गलत और पुराने चलन को नये रिती-रिवाजों और परंपरा में ढ़ाल दिया गया था। भारतीय समाज में महिलाओं को सम्मान देने के लिये माँ, बहन, पुत्री, पत्नी के रुप में महिला देवियो को पूजने की परंपरा है लेकिन इसका ये कतई मतलब नहीं कि केवल महिलाओं को पूजने भर से देश के विकास की जरुरत पूरी हो जायेगी। आज जरुरत है कि देश की आधी आबादी यानि महिलाओं का हर क्षेत्र में सशक्तिकरण किया जाए जो देश के विकास का आधार बनेंगी।

भारत एक प्रसिद्ध देश है जिसने ‘विविधता में एकता’ के मुहावरे को साबित किया है, जहाँ भारतीय समाज में विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोग रहते है। महिलाओं को हर धर्म में एक अलग स्थान दिया गया है जो लोगों की आँखों को ढ़के हुए बड़े पर्दे के रुप में और कई वर्षों से आदर्श के रुप में महिलाओं के खिलाफ कई सारे गलत कार्यों (शारीरिक और मानसिक) को जारी रखने में मदद कर रहा है। प्राचीन भारतीय समाज दूसरी भेदभावपूर्ण दस्तूरों के साथ सती प्रथा, नगर वधु व्यवस्था, दहेज प्रथा, यौन हिंसा, घरेलू हिंसा, गर्भ में बच्चियों की हत्या, पर्दा प्रथा, कार्य स्थल पर यौन शोषण, बाल मजदूरी, बाल विवाह तथा देवदासी प्रथा आदि परंपरा थी। इस तरह की कुप्रथा का कारण पितृसत्तामक समाज और पुरुष श्रेष्ठता मनोग्रन्थि है।

पुरुष पारिवारिक सदस्यों द्वारा सामाजिक राजनीतिक अधिकार (काम करने की आजादी, शिक्षा का अधिकार आदि) को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया। महिलाओं के खिलाफ कुछ बुरे चलन को खुले विचारों के लोगों और महान भारतीय लोगों द्वारा हटाया गया जिन्होंने महिलाओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण कार्यों के लिये अपनी आवाज उठायी। राजा राम मोहन रॉय की लगातार कोशिशों की वजह से ही सती प्रथा को खत्म करने के लिये अंग्रेज मजबूर हुए। बाद में दूसरे भारतीय समाज सुधारकों (ईश्वर चंद्र विद्यासागर, आचार्य विनोभा भावे, स्वामी विवेकानंद आदि) ने भी महिला उत्थान के लिये अपनी आवाज उठायी और कड़ा संघर्ष किया। भारत में विधवाओं की स्थिति को सुधारने के लिये ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने अपने लगातार प्रयास से विधवा पुर्न विवाह अधिनियम 1856 की शुरुआत करवाई।

पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले लैंगिक असमानता और बुरी प्रथाओं को हटाने के लिये सरकार द्वारा कई सारे संवैधानिक और कानूनी अधिकार बनाए और लागू किये गये है। हालाँकि ऐसे बड़े विषय को सुलझाने के लिये महिलाओं सहित सभी का लगातार सहयोग की जरुरत है। आधुनिक समाज महिलाओं के अधिकार को लेकर ज्यादा जागरुक है जिसका परिणाम हुआ कि कई सारे स्वयं-सेवी समूह और एनजीओ आदि इस दिशा में कार्य कर रहे है। महिलाएँ ज्यादा खुले दिमाग की होती है और सभी आयामों में अपने अधिकारों को पाने के लिये सामाजिक बंधनों को तोड़ रही है। हालाँकि अपराध इसके साथ-साथ चल रहा है।

कानूनी अधिकार के साथ महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये संसद द्वारा पास किये गये कुछ अधिनियम है – एक बराबर पारिश्रमिक एक्ट 1976, दहेज रोक अधिनियम 1961, अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम 1956, मेडिकल टर्म्नेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1987, बाल विवाह रोकथाम एक्ट 2006, लिंग परीक्षण तकनीक (नियंत्रक और गलत इस्तेमाल के रोकथाम) एक्ट 1994, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन शोषण एक्ट 2013।

निष्कर्ष

भारतीय समाज में सच में महिला सशक्तिकरण लाने के लिये महिलाओं के खिलाफ बुरी प्रथाओं के मुख्य कारणों को समझना और उन्हें हटाना होगा जो कि समाज की पितृसत्तामक और पुरुष प्रभाव युक्त व्यवस्था है। जरुरत है कि हम महिलाओं के खिलाफ पुरानी सोच को बदले और संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों में भी बदलाव लाये।

 

महिला सशक्तिकरण के बारे में जानने से पहले हमें ये समझ लेना चाहिये इसका वास्तविक मतलब क्या है. महिला सशक्तिकरण मतलब महिलाओ की उस क्षमता से है जिससे उनमे ये योग्यता आ जाती है जिसमे वे अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय ले सकती है.

8 March को पुरे विश्व में अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस / International Women’s Day मनाते है, सही मायने में इस महिला दिन का उदेश्य क्या है ? ये आज के विद्यार्थियों के लिये जानना आवश्यक है, उन्हें ये समझना होंगा देश की तरक्की करनी होंगी तो महिलाओं को सशक्त बनना होगा.

Mahila Sashaktikaran Essay

विद्यार्थियों के लिये महिला सशक्तिकरण विषय पर निबंध / Mahila Sashaktikaran Essay in Hindi

महिला सशक्तिकरण / Mahila Sashaktikaran को बेहद आसान शब्दों में परिभाषित किया जा सकता है कि इससे महिलाएँ शक्तिशाली बनती है जिससे वो अपने जीवन से जुड़े हर फैसले स्वयं ले सकती है और परिवार और समाज में अच्छे से रह सकती है. समाज में उनके वास्तविक अधिकार को प्राप्त करने के लिये उन्हें सक्षम बनाना महिला सशक्तिकरण है.

नरेंद्र मोदी जी द्वारा महिला दिन / Mahila Din पर कहा गया मशहूर वाक्य “देश की तरक्की के लिये पहले हमें भारत के महिलाओं को सशक्त बनाना होंगा”. एक बार जब महिला अपना कदम उठा लेती है, तो परिवार आगे बढ़ता है, गाँव आगे बढ़ता है और राष्ट्र विकास की ओर बढ़ता है.

भारत में, महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये सबसे पहले समाज में उनके अधिकारों और मूल्यों को मारने वाले उन सभी राक्षसी सोच को मारना जरुरी है, जैसे दहेज प्रथा, यौन हिंसा, अशिक्षा, भ्रूण हत्या, असमानता, महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा, कार्य स्थल पर यौन शोषण, बाल मजदूरी, वैश्यावृति, मानव तस्करी और ऐसे ही दूसरे विषय. लैंगिक भेदभाव राष्ट्र में सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक अंतर ले आता है जो देश को पीछे की ओर ढ़केलता है.

भारत के संविधान में लिखे गये समानता के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं को सशक्त बनाना सबसे प्रभावशाली उपाय है. लैंगिक समानता को प्राथमिकता देने से पूरे भारत में नारी सशक्तिकरण / Nari Sashaktikaran को बढ़ावा मिला है.

महिला सशक्तिकरण के उच्च लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये इसे हर एक परिवार में बचपन से प्रचारित व प्रसारित करना चाहिये. ये जरुरी है कि महिलाएँ शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रुप से मजबूत हो. एक बेहतर शिक्षा की शुरुआत बचपन से घर पर हो सकती है, महिलाओं के उत्थान के लिये एक स्वस्थ परिवार की जरुरत है जो राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिये आवश्यक है.

आज भी कई पिछड़े क्षेत्रों में माता-पिता की अशिक्षा, असुरक्षा और गरीबी की वजह से कम उम्र में विवाह और बच्चे पैदा करने का चलन है. महिलाओं को मजबूत बनाने के लिये महिलाओं के खिलाफ होने वाले दुर्व्यवहार, लैंगिक भेदभाव, सामाजिक अलगाव तथा हिंसा आदि को रोकने के लिये सरकार कई सारे कदम उठा रही है.

महिलाओं के खिलाफ कुछ बुरे चलन को खुले विचारों के लोगों और महान भारतीय लोगों द्वारा हटाया गया जिन्होंने महिलाओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण कार्यों के लिये अपनी आवाज उठायी. राजा राम मोहन रॉय की लगातार कोशिशों की वजह से ही सती प्रथा को खत्म करने के लिये अंग्रेज मजबूर हुए.

बाद में दूसरे भारतीय समाज सुधारकों आचार्य विनोबा भावे, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, स्वामी विवेकानंद, महात्मा ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले आदि ने भी महिला उत्थान के लिये अपनी आवाज उठायी और कड़ा संघर्ष किया. भारत में विधवाओं की स्थिति को सुधारने के लिये ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने अपने लगातार प्रयास से विधवा पुर्न विवाह अधिनियम 1856 की शुरुआत करवाई.

महिलाओं की समस्याओं का उचित समाधान करने के लिये महिला दूसरे क्षेत्रों में भी महिलाओं को सक्रिय रुप से भागीदार बनाने के लिये कुछ प्रतिशत सीटों को आरक्षित किया गया है. सरकार को महिलाओं के वास्तविक विकास के लिये पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में जाना होगा और वहाँ की महिलाओं को सरकार की तरफ से मिलने वाली सुविधाओं और उनके अधिकारों से अवगत कराना होगा जिससे उनका भविष्य बेहतर हो सके.

महिला सशक्तिकरण के सपने को सच करने के लिये लड़िकयों के महत्व और उनकी शिक्षा को प्रचारित करने की जरुरत है. इसके साथ ही हमें महिलाओ के प्रति हमारी सोच को भी विकसित करना होगा.

  1. अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम 1956
  2. दहेज रोक अधिनियम 1961
  3. एक बराबर पारिश्रमिक एक्ट 1976
  4. मेडिकल टर्म्नेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1987
  5. लिंग परीक्षण तकनीक एक्ट 1994
  6. बाल विवाह रोकथाम एक्ट 2006
  7. कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन शोषण एक्ट 2013

जब हैं नारी में शक्ति सारी, तो फिर क्यों नारी को कहे बेचारी…

 

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