October 10, 2018 | Hindigk50k

नैतिक शिक्षा पर निबंध-Essay on The Inevitability of Moral Education in Hindi

नैतिक शिक्षा पर निबंध-Essay on The Inevitability of Moral Education in Hindi  Hindi Essay in 100-200 words, Hindi Essay in 500 words, Hindi Essay in 400 words, list of hindi essay topics, hindi essays for class 4, hindi essays for class 10, hindi essays for class 9, hindi essays for class 7, hindi essay topics for college students, hindi essays for class 6, hindi essays for class 8

नैतिक शिक्षा पर निबंध-Essay on The Inevitability of Moral Education in Hindi

नैतिक शिक्षा पर निबंध :

भूमिका : मनुष्य जन्म से ही सुख और शांति के लिए प्रयत्न करता है। जब से सृष्टि का आरंभ हुआ है वो तभी से ही अपनी उन्नति के लिए प्रयत्न करता आ रहा है लेकिन उसे पूरी तरह शांति सिर्फ शिक्षा से ही मिली है। शिक्षा के अस्त्र को अमोघ माना जाता है। शिक्षा से ही मनुष्य की सामाजिक और नैतिक उन्नति हुई थी और वह आगे बढने लगा था।

मनुष्य को यह अनुभव होने लगा की वह पशुतुल्य है। शिक्षा ही मनुष्य को उसके कर्तव्यों के बारे में समझती है और उसे सच्चे अर्थों में इंसान बनाती है। उसे खुद का और समाज का विकास करने का भी अवसर देती है।

अंग्रेजी शिक्षण पद्धति का प्रारंभ : मनुष्य की सभी शक्तियों के सर्वतोन्मुखी विकास को ही शिक्षा कहते हैं। शिक्षा से मानवीय गरिमा और व्यक्तित्व का विकास होता है। नैतिक शिक्षा का अर्थ होता है कि बच्चे की शारीरिक, मानसिक और नैतिक शक्तियों का सर्वतोन्मुखी विकास हो। यह दुःख की बात है शिक्षा भारत में अंग्रेजी की विरासत है। अंग्रेज भारत को अपना उपनिवेश मानते थे। अंग्रेजों ने भारतीयों को क्लर्क और मुंशी बनाने की चाल चली।

उन्हें यह विश्वास था कि इस शिक्षा योजना से एक ऐसा शिक्षित वर्ग बनेगा जिसका रक्त और रंग तो भारतीय होगा लेकिन विचार , बोली और दिमाग अंग्रेजी होगा। इस शिक्षा प्रणाली से भारतीय केवल बाबु ही बनकर रह गये। अंग्रेजों ने भारतीय लोगों को भारतीय संस्कृति से तो दूर ही रखा लेकिन अंग्रेजी संस्कृति को उनके अंदर गहराई से डाल दिया। यह दुःख की बात है की स्वतंत्रता प्राप्त होने के बाद भी अब तक अंग्रेजी भाषा का वर्चस्व बना हुआ है।

प्राचीन शिक्षा पद्धति : प्राचीन कल में भारत को संसार का गुरु कहा जाता था। भारत को प्राचीन समय में सोने की चिड़िया कहा जाता था। प्राचीन समय में ऋषियों और विचारकों ने यह घोषणा की थी कि शिक्षा मनुष्य वृत्तियों के विकास के लिए बहुत आवश्यक है। शिक्षा से मानव की बुद्धि परिष्कृत और परिमार्जित होती है।

शिक्षा से मनुष्य में सत्य और असत्य का विवेक जागता है। भारतीय शिक्षा का उद्देश्य मानव को पूर्ण ज्ञान करवाना, उसे ज्ञान के प्रकाश की ओर आगे करना और उसमें संस्कारों को जगाना होता है। प्राचीन शिक्षा पद्धति में नैतिक शिक्षा का बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता है। पुराने समय में यह शिक्षा नगरों से दूर जंगलों में ऋषियों और मुनियों के आश्रमों में दी जाती थी।

उस समय छात्र पूरे पच्चीस वर्ष तक ब्रह्मचर्य का पालन करते थे और और अपने गुरु के चरणों की सेवा करते हुए विद्या का अध्ययन करते थे। इन आश्रमों में छात्रों की सर्वंगीण उन्नति पर ध्यान दिया जाता था। उसे अपनी बहुमुखी प्रतिभा में विकास करने का अवसर मिलता था। विद्यार्थी चिकित्सा, नीति, युद्ध कला, वेद सभी विषयों सम्यक होकर ही घर को लौटता था।

नैतिक शिक्षा का अर्थ : नैतिक शब्द नीति में इक प्रत्यय के जुड़ने से बना है। नैतिक शिक्षा का अर्थ होता है -नीति संबंधित शिक्षा। नैतिक शिक्षा का अर्थ होता है कि विद्यार्थियों को नैतिकता, सत्यभाषण, सहनशीलता, विनम्रता, प्रमाणिक सभी गुणों को प्रदान करना। आज हमारे स्वतंत्र भारत में सच्चरित्रता की बहुत बड़ी कमी है। सरकारी और गैर सरकारी सभी स्तरों पर लोग हमारे मनों में विष घोलने का काम कर रहे हैं।

इन सब का कारण हमारे स्कूलों और कॉलेजों में नैतिक शिक्षा का लुप्त होना है। मनुष्य को विज्ञानं की शिक्षा दी जाती है उसे तकनीकी शिक्षण भी दिया जाता है लेकिन उसे असली अर्थों में इन्सान बनना नहीं सिखाया जाता है। नैतिक शिक्षा ही मनुष्य की अमूल्य संपत्ति होती है इस संपत्ति के आगे सभी संपत्ति तुच्छ होती हैं। इन्हीं से राष्ट्र का निर्माण होता है और इन्हीं से देश सुदृढ होता है।

नैतिक शिक्षा की आवश्यकता : शिक्षा का उद्देश्य होता है कि मानव को सही अर्थों में मानव बनाया जाये। उसमें आत्मनिर्भरता की भावना को उत्पन्न करे, देशवासियों का चरित्र निर्माण करे , मनुष्य को परम उरुशार्थ की प्राप्ति कराना है लेकिन आज यह सब केवल पटकी पूर्ति के साधन बनकर रह गये हैं। नैतिक मूल्यों का निरंतर ह्रास किया जा रहा है।

आजकल के लोगों में श्रधा जैसी कोई भावना ही नहीं बची है। गुरुओं का आदर और माता -पिता का सम्मान नहीं किया जाता है। विद्यार्थी वर्ग ही नहीं बल्कि पूरा समाज में अराजकता फैली हुई है। ये बात खुद ही पैदा होती है कि हमारी शिक्षण व्यवस्था में आखिर कार क्या कमी है।

कुछ लोग इस बात पर ज्यादा बल दे रहे हैं कि हमारी शिक्षा प्रणाली में नैतिक शिक्षा के लिए भी जगह होनी चाहिए। कुछ लोग इस बात पर बल दे रहे हैं कि नैतिक शिक्षा के बिना हमारी शिक्षा प्रणाली अधूरी है।

उपसंहार : आज के भौतिक युग में नैतिक शिक्षा बहुत ही जरूरी है। नैतिक शिक्षा ही मनुष्य को मनुष्य बनाती है। नैतिक शिक्षा से ही राष्ट्र का सही अर्थों में निर्माण होता है। नैतिक गुणों के होने से ही मनुष्य संवेदनीय बनता है। आज के युग में लोगों के सर्वंगीण विकास के लिए नैतिक शिक्षा बहुत ही जरूरी है। नैतिक शिक्षा से ही कर्तव्य निष्ठ नागरिकों का विकास होता है।

नैतिक शिक्षा पर निबंध-Essay on The Inevitability of Moral Education in Hindi

नैतिक शिक्षा की अनिवार्यता पर निबंध | Essay on The Inevitability of Moral Education in Hindi!

नैतिकता मनुष्य का वह गुण है जो उसे देवत्व के समीप ले जाता है । यदि शुरू में नैतिकता न हो तो पशुता और मनुष्यता में कोई विशेष अंतर नहीं रह जाता है । नैतिकता ही संपूर्ण मानवता का श्रुंगार है ।

वेदों, उपनिषदों एवं अन्य सभी धर्मग्रंथों में नैतिक अथवा सदाचार शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है । समस्त ऋषि-मुनियों व शास्त्रियों की मान्यता है कि मनुष्य का चरित्र तभी तक है जब तक उसमें नैतिकता व चारित्रिक दृढ़ता है ।

चरित्रविहीन मनुष्य पशु के समान है और एक पशु चाहे वह कितना ही सुंदर हो, उसकी आवाज कितनी ही मधुर क्यों न हो, वह एक मानव की ऊँचाइयों को कभी नहीं छू सकता । हमारी भारतीय संस्कृति में सदैव ही नैतिक मूल्यों की अवधारणा पर विशेष बल दिया गया है । मनुष्य के जीवन में अच्छे चरित्र का विशेष महत्व है । दूसरे शब्दों में अच्छे चरित्र से ही मनुष्य की अस्मिता कायम है ।

अच्छे चरित्र के महत्व को उजागर करते हुए संस्कृत की एक सूक्ति निम्नलिखित है:

वृन्तं यत्नेन सरंक्षंद् विन्तयादाति याति च । अक्षीणो विन्तत: क्षीणो, वृन्ततस्तु हतो हत: ।।

ADVERTISEMENTS:

उक्त सूक्ति में चरित्रविहीन व्यक्ति को मृत के समान बताया गया है । अत: चरित्र का बल प्राणि जगत के लिए अनिवार्य है । इस चरित्र-बल की प्राप्ति हेतु नैतिक शिक्षा अनिवार्य है क्योंकि नैतिक मूल्यों की अवधारणा ही चरित्र-बल है ।

नैतिक शिक्षा का अभाव अनेक प्रकार के दुष्परिणामों को देखने के लिए बाध्य करता है । देश में फैले भ्रष्टाचार, लूटमा,र आगजनी, बलात्कार एवं अन्य अपराध नैतिकता के अभाव की ही परिणति हैं । हमारी वर्तमान पीढ़ी जब इतनी अनैतिक व चरित्रविहीन है तो आने वाली पीढ़ियों का स्वरूप क्या होगा इसकी कल्पना हम सहज ही कर सकते हैं । संपूर्ण विश्व में औद्‌योगिक प्रगति की लहर चल रही है ।

विज्ञान व तकनीकी के क्षेत्र में नित नई खोजें व प्रयोग चल रहे हैं परंतु मानव जाति व देश के लिए यह एक दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि हमारे शिक्षा-शास्त्रियों व बड़े-बड़े नेताओं ने देश में नैतिक शिक्षा की अनिवार्यता नहीं समझी है । वह शिक्षा जो आत्म-विकास एवं मनुष्य जीवन में संतुलन बनाए रख सकती है उसे ही पाठ्‌यक्रम में सम्मिलित नहीं किया गया । उसे निरंतर उपहास की दृष्टि से देखा जाता रहा है ।

अब प्रश्न यह उठता है कि नैतिक शिक्षा का स्वरूप कैसा हो ? इस शिक्षा का प्रभावी रूप क्या है ? क्योंकि धर्मग्रंथों के उपदेश या फिर चरित्र निर्माण हेतु सजीले भाषण आज के वातावरण में प्रभावी नहीं हो सकते । इन परिस्थितियों में आवश्यक है कि नैतिक शिक्षा का स्वरूप प्रायोगिक एवं सतत् हो ।

इसके लिए आवश्यक है कि पाठ्‌यक्रमों में नैतिक शिक्षा को समाहित किया जाए तथा विज्ञान व अन्य विषयों की भांति इसे भी पूर्ण महत्व दिया जाए । अन्य विषयों के साथ ही नैतिक शिक्षा की भी विधिवत् परीक्षा होनी चाहिए तभी छात्र एवं शिक्षक दोनों मनोयोग से इसे स्वीकृति देंगे । छात्र को नैतिक शिक्षा में उत्तीर्ण होने की अनिवार्यता होनी चाहिए । यदि ऐसा नहीं किया गया तो इसे प्रभावी रूप दे पाना संभव नहीं होगा।

 

नैतिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में उन महापुरुषों व देशभक्तों की जीवन गाथाएँ होनी चाहिए जिन्होंने देश अथवा मानवता के लिए उल्लेखनीय कार्य किया है तथा जिनके जीवनपथ के पदचिह्‌नों का अनुसरण कर मनुष्य नैतिकता की राह पर चल सकता है । विशिष्ट व्यक्ति के जीवन-चरित्र भी पाठ्‌यक्रम में शामिल किए जाने चाहिए जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है अथवा अपने परिश्रम और संघर्ष के बल पर उच्च स्थान प्राप्त किया है ।

नैतिक शिक्षा के पाठ्‌यक्रम में व्यायाम तथा योग साधना का भी उल्लेख आवश्यक है । अर्थात् पाठ्‌यक्रम में वह सभी सामग्री उपलब्ध होनी चाहिए जो मनुष्य के संपूर्ण चारित्रिक विकास के लिए आवश्यक है । देश अथवा समाज नैतिकता के पदचिह्‌नों का अनुसरण करके ही उन्नति की ओर अग्रसर हो सकता है ।

यदि हम प्रारंभ से ही अपने बच्चों को नैतिक मूल्यों की शिक्षा प्रदान करेंगे तभी भविष्य में हम अच्छे, चरित्रवान, कर्तव्यनिष्ठ एवं ईमानदार शासक, अधिकारी, अध्यापक व कर्मचारी की कल्पना कर सकते हैं । भावी पीढ़ी को नैतिक रूप से सुदृढ़ बनाना हम सभी का उत्तरदायित्व है ।

यदि आज कोई भी समाज या राष्ट्र नैतिक मूल्यों की अनिवार्यता की अनदेखी करता है तो वह स्वयं को पतन की ओर अग्रसर कर रहा है । यदि हम राष्ट्र उत्थान के महत्व को स्वीकारते हैं तो नैतिक शिक्षा की अनिवार्यता को भी समझना होगा, तभी हम राष्ट्र नायकों व निर्माताओं के स्वप्न को साकार कर सकेंगे ।

बच्चों को नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण करने के लिए यह भी आवश्यक है कि अभिभावकों व शिक्षकों में भी नैतिकता का समावेश हो । यदि शिक्षक ही नैतिक मूल्यों से रहित हों तो उनके छात्र भी खुलेआम उनका अनुसरण करेंगे ।

तब उन्हें रोकने व समझाने का नैतिक बल कहाँ से आएगा, यह विचारणीय तथ्य है । लेकिन यदि गुरुजनों एवं अभिभावकों का नैतिक बल उच्च होगा तो छात्र स्वयं ही उनका अनुसरण करने का प्रयास करेंगे ।

नैतिक शिक्षा पर निबंध-Essay on The Inevitability of Moral Education in Hindi

Essay on Moral Education in Hindi- नैतिक शिक्षा पर निबंध

भूमिका- नैतिक शिक्षा से अभिप्राय उन मूल्यों, गुणों और आस्थाओं की शिक्षा से है, जिन पर मानव की निजी और समाज की सर्वश्रेष्ठ समृद्ध निर्भर करती है। नैतिक शिक्षा व्यक्ति के आंतरिक सद्गुणों को विकसित एवं संपुष्ट करती है, क्योंकि व्यक्ति समष्टि का ही एक अंश है, इसलिए उसके सद्गुणों के विकास का अर्थ है-‘समग्र समाज का सुसभ्य एवं सुसंस्कृत होना।”

परिभाषा- नैतिक शिक्षा और नैतिकता में कोई अंतर नहीं है अर्थात् नैतिक शिक्षा को ही नैतिकता माना जाता है। समाज जिसे ठीक मानता है, बह नैतिक है और जिसे ठीक नहीं मानता वह अनैतिक है। कत्र्तव्य की अतिरिक भावना नैतिकता है, जो उचित एवं अनुचित पर बल देती है। नैतिकता की विभिन्न परिभाषाएँ इस प्रकार हैं-

महात्मा गाँधी नैतिक कार्य उसे मानते थे, जिसमें सदैव सार्वजनिक कल्याण की भावना निहित हो। स्वेच्छा से शुभ कर्मों का आचरण ही नैतिकता है।

पंडित मदन मोहन मालवीय के कथनानुसार, ‘नैतिकता मनुष्य की उन्नति का मूल आधार है। नैतिकता विहीन मनुष्य पशु से भी निम्न है। नैतिकता एक व्यापक गुण है।”

सर्वपल्ली डॉ० राधाकृष्णन् के अनुसार, ‘नैतिकता व्यक्ति के आध्यात्मिक, बौदिधक एवं सामाजिक विकास का आधार है। नैतिकता का प्रभाव व्यक्ति के सभी क्रिया-कलापों पर पड़ता है।”

पश्चिमी विचारक नैतिकता को एक धार्मिक गुण मानते हैं। इन गुणों में आत्म-संयम, त्याग, दया, परोपकार सहष्णुिता, सेवा आदि सम्मिलित हैं। इसी कारण हरबर्ट ने उच्चतर विचारों के सृजन एवं निम्न प्रवृत्तियों के दमन को नैतिकता कहा है।

नैतिक शिक्षा का महत्त्व- नैतिक शिक्षा वस्तुत: मानवीय सद्वृत्तियों को उजागर करती है। यदि यह कहा जाए कि नैतिक शिक्षा ही मानवता का मूल है तो असंगत न होगा। नैतिक शिक्षा के अभाव में मानवता पनप ही नहीं सकती। क्योंकि मानव की कुत्सित वृत्तियाँ विश्व के लिए अभिशाप हैं। इन्हें केवल नैतिक शिक्षा से ही नियंत्रित किया जा सकता है। इसी के माध्यम से उसमें नव-चेतना का संचार हो सकता है। नैतिक शिक्षा ही व्यक्ति को उसके परम आदर्श की प्रेरणा दे सकती है और उसे श्रेष्ठ मनुष्य बनाती है।

नैतिक शिक्षा का उददेश्य- नैतिक शिक्षा का संबंध छात्र-छात्राओं की आंतरिक वृत्तियों से है। नैतिक शिक्षा उनके चरित्र-निर्माण का एक माध्यम है। चरित्र ही जीवन का मूल आधार है। अंग्रेजी में यह कथन प्रसिद्ध हैं”

If wealth is gone, nothing is gone, If health is gone, something is gone, If character is gone, everything is gone.” (यदि हमने धन खोया तो कुछ नहीं खोया, यदि हमने स्वास्थ्य खोया तो कुछ खोया, परंतु यदि हमने अपना चरित्र खोया तो अपना सब कुछ खो दिया।)

इसलिए चरित्र की रक्षा करना नैतिक शिक्षा का मूल उद्देश्य है। नैतिकता को आचरण में स्वीकार किए बिना मनुष्य जीवन में वास्तविक सफलता नहीं प्राप्त कर सकता। छात्र-छात्राओं के चरित्र को विकसित एवं संवद्र्धित करने के लिए नैतिक शिक्षा अनिवार्य है। नैतिक शिक्षा के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं-

(1) सर्वागीण विकास- छात्र-छात्राओं के नैतिक गुणों को प्रफुल्लित करना नैतिक शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है, कि वे आगे चलकर देश के आदर्श नागरिक बन सकें। शिष्टाचार, सदाचार, अनुशासन, आत्म संयम, विनम्रता, करुणा, परोपकार, साहस, मानव-प्रेम, देशभक्ति, परिश्रम, धैर्यशीलता आदि नैतिक गुण हैं। इनका उत्तरोत्तर विकास नितांत आवश्यक है। यह कार्य नैतिक शिक्षा के द्वारा ही परिपूर्ण हो सकता है।

(2) धार्मिक सहिष्णुता- छात्र-छात्राओं में धार्मिक सहिष्णुता को विकसित करना भी नैतिक शिक्षा का उद्देश्य है। छात्र विभिन्न धर्मों के मूल तत्वों से परिचित हों, आज के संदर्भ में यह बहुत ही आवश्यक बात है क्योंकि ऐसी स्थिति में ही उन्हें सभी धर्मों के समन्वय सूत्रों की एकता दिखाई देगी। छात्रों के हृदय में धार्मिक सहिष्णुता विकसित होगी। उन्हें धार्मिक संकीर्णता से दूर रखने में नैतिक शिक्षा ही उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

(3) देशभक्ति- नैतिक शिक्षा से ही छात्र-छात्राओं में देश-भक्ति के अटूट भाव पल्लवित हो सकते हैं। वैयक्तिक स्वाथों से ऊपर उठकर उनमें देश के हित को प्राथमिकता प्रदान करने के विचार पनप सकते हैं। नैतिक शिक्षा से छात्र देश के प्रति सदैव जागरूक रहते हैं।

(4) विश्व बंधुत्व की भावना- नैतिक शिक्षा से छात्र-छात्राओं में विश्व बंधुत्व की भावना को जागृत किया जा सकता है। जब छात्रों में यह भाव विकसित होगा कि मानव उस विराट पुरुष की कृति है तो उनके समक्ष ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का महान् आदर्श साकार हो सकता है। यह तभी हो सकता है, जब उन्हें नैतिक शिक्षा दी गई हो।

उपसंहार- महात्मा गाँधी जी कहा करते थे-‘ स्कूल या कॉलेज पवित्रता का मंदिर होना चाहिए, जहाँ कुछ भी अपवित्र या निकृष्ट न हो। स्कूल-कॉलेज तो चरित्र निर्माण की शालाएँ हैं।’ इस कथन का सारांश यही है कि नैतिक शिक्षा छात्र-छात्राओं के लिए अनिवार्य हैं।

नैतिक शिक्षा अर्थ, 

विद्यार्थी जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व पर निबंध,

नैतिक शिक्षा पर कविता,

नैतिक शिक्षा पर आधारित प्रश्न,

नैतिक शिक्षा के प्रश्न,

नैतिक मूल्य पर निबंध,

नैतिक शिक्षा पर कहानी,

नैतिक शिक्षा का पेपर,

naitik shiksha in hindi,

naitik shiksha in hindi pdf,

naitik shiksha meaning,

naitik shiksha ki avashyakta par nibandh in hindi,

aaj ka samaj aur naitikta essay in hindi,

naitik mulya par nibandh in hindi,

naitik shiksha kya hai,

naitik shiksha questions in hindi,

विद्यार्थी और फैशन पर निबंध-Vidyarthi Aur Fashion Essay In Hindi

विद्यार्थी और फैशन पर निबंध-Vidyarthi Aur Fashion Essay In Hindi  Hindi Essay in 100-200 words, Hindi Essay in 500 words, Hindi Essay in 400 words, list of hindi essay topics, hindi essays for class 4, hindi essays for class 10, hindi essays for class 9, hindi essays for class 7, hindi essay topics for college students, hindi essays for class 6, hindi essays for class 8

विद्यार्थी और फैशन पर निबंध-Vidyarthi Aur Fashion Essay In Hindi

विद्यार्थी और फैशन पर निबंध :

भूमिका : शब्दकोश में फैशन का अर्थ होता है ढंग या शैली लेकिन लोकव्यवहार में फैशन का परिधान शैली अथार्त वस्त्र पहनने की कला को कहते हैं। मनुष्य अपने आप को सुंदर दिखाने के लिए फैशन का प्रयोग करता है। कोई भी व्यक्ति गोरा हो या काला , मोटा हो या पतला , नवयुवक हो या प्रौढ़ सभी का कपड़े पहनने का अपना-अपना ढंग होता है।

मनुष्य केवल अपनी आयु , रूप-रंग और शरीर की बनावट को देखकर ही फैशन करता है। यहाँ तक की फैशन के विषय में कोई विशेष विवाद नहीं है। कोई भी अध्यापक हो या विद्यार्थी , लड़का हो या लडकी , पुरुष हो या स्त्री सभी को फैशन करने का अधिकार होता है।

फैशन पर विवाद : जब हम फैशन का गूढ़ अर्थ बनाव सिंगार लेते हैं तो फैशन के विषय में विवाद उठता है। इस गूढ़ अर्थ दूल्हा और दुल्हन का संबंध हो सकता है लेकिन छात्र और छात्राओं का इससे कोई संबंध नहीं होता है।

छात्र और छात्राएं अभी विद्यार्थी हैं और विद्यार्थी का अर्थ होता है विद्या की इच्छा करने वाला। अगर विद्या की इच्छा करने वाले विद्यार्थी फैशन को चाहने लगेंगे तो वे अपने लक्ष्य से बहुत दूर भटक जायेंगे। अगर विद्यार्थी विद्या की जगह पर फैशन को चाहेगा तो विद्या उससे रूठ जाएगी।

प्राचीनकाल में विद्यार्थियों में फैशन की भावना : प्राचीनकाल में विद्यार्थी फैशन को इतना पसंद नहीं करते थे जितने आज के विद्यार्थी करते हैं। प्राचीनकाल में विद्यार्थी सादा जीवन उच्च विचार में विश्वास रखते थे उनमे फैशन की अपेक्षा विद्या को चाहने की बहुत तीव्र इच्छा होती थी।

आज के विद्यार्थियों में फैशनेबल दिखने की इच्छा तीव्र होती है। आजकल विद्यार्थी जिस तरह के कपड़े दूसरों को पहने हुए देखते हैं वैसे ही कपड़ों की मांग वे अपने माता -पिता से करते हैं। वे ऐसा इसलिए करते हैं ताकि आस-पास के लोगों में खुद को धनी दिखा सकें लेकिन वास्तव में वे धनी नहीं होते हैं।

धनी के साथ-साथ आज का विद्यार्थी खुद को दूसरों से सुंदर दिखाना चाहता है जो वो होता नहीं है। इस तरह वे फैशन में इतना समय व्यर्थ में गंवा देते हैं लेकिन बहुत से महत्वपूर्ण कामों के लिए उसके पास समय ही नहीं होता है। ऐसी अवस्था में कौन उन्हें यह बात समझाएगा कि वे धन के अपव्यय के साथ-साथ समय की भी बरबादी करते हैं।

सौन्दर्य के लिए धन की आवश्यकता : जब विद्यार्थी सुंदर दिखने की भावना को प्रबल कर लेते हैं तो उन में धन विलासिता भी बढ़ जाती है। फैशन के जीवन को जीने के लिए धन की आवश्यकता होती है। जव विद्यार्थी को फैशन का जीवन जीने के लिए धन आसानी से नहीं मिलता है तो वह झूठ का सहारा लेकर धन को प्राप्त करने की कोशिश करता है।

वह धन को पाने के लिए चोरी तक करने लगता है। ऐसा करने के बाद जुआ जैसे बुरे काम भी उनसे दूर नहीं रह पाते हैं। इस तरह से विद्यार्थी की मौलिकता खत्म हो जाती है और वह आधुनिक वातावरण में जीने लगता है। ऐसा करने से घर के लोगों से उसका संबंध टूट जाता है और सिनेमा के अभिनेता उसके आदर्श बन जाते हैं।

वे विद्यालय की जगह पर फिल्मों में अधिक रूचि लेने लगते हैं और अपने मार्ग से भटक जाते हैं। जो विद्यार्थी फैशन के पीछे भागते हैं वे अपने जीवन में कभी भी आगे नहीं बढ़ पाते हैं। आगे चलकर उन्हें पछताना ही पड़ता है।

सिनेमा का कुप्रभाव : आज के समय में हमारे जीवन में सिनेमा एक महत्वपूर्ण अंग बन चुका है। ज्यादातर छात्र-छात्राएं फिल्मों से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। अमीर परिवार तो फैशनेबल कपड़े पहन सकते हैं और अपने बच्चों को भी फैशनेबल कपड़े पहना सकते हैं लेकिन गरीब लोग ऐसा नहीं कर सकते हैं। विद्यार्थियों में देखा-देखी फैशन की होड़ बढती ही जा रही है। टीवी की संस्कृति से हमारे देश के लोगों के लिए समस्याएँ उत्पन्न कर दी हैं। यह फैशनपरस्ती फिल्मों की ही देन है।

फैशन के दुष्परिणाम : आज के विद्यार्थियों में फैशन की प्रवृत्ति के बढने से केवल माता-पिता ही नहीं बल्कि पुरे समाज मे घातक सिद्ध हो रही है। गरीब परिवार के लोग अपने बच्चों की मांगों की पूर्ति नहीं कर पाते हैं। इसकी वजह से उनके घर के बच्चे घर में असहज वातावरण उत्पन्न कर देते हैं।

जो विद्यार्थी फैशन के पीछे भागते हैं वो सिनेमा घरों में जाकर अशोभनीय व्यवहार करते हैं ,गली मोहल्लों में हल्ला मचाते हैं और हिंसक गतिविधियों में भाग लेते हैं। जो विद्यार्थी फैशनपरस्ती होते हैं वे जीवन के विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं | जो विद्यार्थी फैशनपरस्ती के पीछे भागते हैं वो अपनी शिक्षा की तरफ ध्यान नहीं दे पाते हैं। ऐसे विद्यार्थी अपने माता-पिता के सपनों को तोड़ देते हैं।

उपसंहार : हम यह कह सकते हैं कि फैशन विद्यार्थियों के लिए अच्छा नहीं होता है। विद्यार्थियों का आदर्श हमेशा सादा जीवन उच्च विचार होना चाहिए। फैशन के मामलों में विद्यार्थी को अपना जीवन कभी भी खर्च नहीं करना चाहिए।

विद्यार्थी का लक्ष्य बस अपने जीवन का निर्माण होना चाहिए। जो विद्यार्थी अपनी शिक्षा पर ध्यान देते हैं वे ही अपने जीवन में सफल होते हैं। बस फैशन के पीछे भागने वाले बाद में पछताते हैं।

विद्यार्थी और फैशन पर निबंध-Vidyarthi Aur Fashion Essay In Hindi

विद्दार्थी और फैशन

विद्या ही विद्यार्थी का आभूषण है| स्कूलों में तो यूनिफार्म अनिवार्य है| यह एक सुखद अहसास है क्योंकि स्कूल में सभी विद्यार्थी सिर्फ विद्या अर्जन के लिए आते है न कि कोई दिखावा करने| वहां जाति, लिंग,आर्थिक स्थिति के आधार पर कोई भेद नही होता| अत: विद्यार्थियों से ये अपेक्षित है कि वे फेशन की आड़ में किसी प्रतिस्पर्धा का हिस्सा न बनें| सादगी से रहे| अपना श्रम और समय अध्ययन में लगाये| वैसे भी विद्या की देवी सरस्वती है जो स्वयम श्वेत परिधान धारण करती है| अत्यंत सादगी से रहती है पर उनके मुख की आभा और तेज उन्हें सबकी पूजनीय बनाता है| अत: बाहरी चमक-दमक दिखाने की अपेक्षा बेहतर होगा विद्यार्थी अपना व्यक्तित्व आकर्षक बनाये अपने ज्ञान को विस्तृत बनाये| अत: निष्कर्ष रूप में महाकवि कालिदास जी की यह उक्ति प्रासंगिक होगी कि “सुन्दर वस्तुओं के विषय में प्रत्येक वस्तु अलंकार बन जाती है इसलिए विद्यार्थियों को भड़कीले परिधान , आभूषण और दिखावे को त्यागकर विद्या अर्जन को अपना लक्ष्य बनाना चाहिए|”

रहने, खाने-पीने, वेशभूषा आदि में नई-नई रीतियों व ढंगों का अपनाया जाना ही फैशन है | अर्थात शारीरिक प्रसाधनो से समाज के समक्ष आत्म-प्रदर्शन करने को फैशन कहा जाता है | विभिन्न प्रकार की वेश-भूषा, केश –विन्यास व कपड़ो के नये-नये नमूने अपनाना ही आदुनिक फैशन को दर्शाने वाले है | फैशन को अपनाने के कुछ विशेष कारण है _ हिन् – भावना का होना, तथा आत्म – प्रदर्शन की लालसा का होना आदि | मानव सदैव अपनी सौदर्य – पिपासा की सन्तुष्टि हेतु फैशन का सहारा लेता है | विद्दार्थी जीवन पर तो प्रतिदिन परिवर्तित होने वाले फैशन का प्रभाव स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर  होता है |

प्राचीन भारत में फैशन करने का अधिकारी केवल गृहस्थो को ही माना जाता था | विद्दार्थी , सन्यासी , वानप्रस्थी तथा गुरु इससे पूर्ण रूप से अछूते रहते थे | उस समय विद्दार्थी जीवन में फैशन त्याज्य समझा जाता था | सादा जीवन तथा उच्चविचार ही उसेक लक्षण थे तथा विद्दार्जन ही उसका लक्ष्य था विद्दा अर्जित करने वाले को फैशन से क्या लेना देना ?

समय परिवर्तन के साथ-साथ मान्यताएँ भी बदल गई | पशिचमी सभ्यता के प्रभाव से खाओ, पीओ और मौज उडाओ ‘ जैसी मान्यताओ और स्वछन्द जीवन प्रणाली ने समाज के साथ – साथ विद्दार्थी वर्ग को भी बदल डाला वह विद्दा प्राप्ति के मूल लक्ष्य को भूलकर, समाज का अधानुकरण करने लग गया और शीघ्र ही फैशन का दास बन कर रह गया | वह विभिन्न प्रकार की वेशभूषा व केश- विन्यासों को अपनाने लगा चलचित्रों का विद्दार्थियो के जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ा| हीरो तथा हिरोइन के पहने हुए वस्त्र प्रत्येक युवक व युवती के लिए आदर्श वेशभूषा बन जाते है | धीरे – धीरे बालो का विन्यास भी दिलीप क्त, अमिताभ कट या धर्मेन्द्र कट होने लगा | युवतियों के हाथो की चूड़ियाँ और पहनने की साड़ियाँ आदि भी हीरोइनो की पसंन्द के अनुरप ही अपनाई जाने लगी | फैशन का यह प्रभाव केवल नगरो तक ही सीमित नही रहा बल्कि ग्रामो तक भी फैल गया |

फैशन ऐसी जोक है कि यदि इसे दूर न किया गया तो यह युवा समाज अर्थात विद्दार्थी वर्ग का सारा खून चूस जाएगी | विद्दार्थी को इससे बचना चाहिए | इसमें धन का अपव्यय होता है तथा विद्दार्थी पढाई – लिखाई से विमुख हो जाता है | विद्दार्थी को चाहिए कि वह अपना अधिकांश समय विद्दा – अर्जन में लगाए न कि फैशन करने में | विद्दार्थी जीवन में जो स्वर्णिम अवसर उसे प्राप्त हुआ है उसे नष्ट करना अपने भावी जीवन को नष्ट करना है | अंत : विद्दार्थी को फैशन से बचना चाहिए | फैशन का अंत ही जनहित है | गांधी जी के सिद्धांत ‘सादा जीवन उच्चविचार को अपनाना चाहिए |

विद्यार्थी और फैशन पर निबंध-Vidyarthi Aur Fashion Essay In Hindi

Vidyarthi aur fashion essay in hindi

yuva varg aur fashion essay in hindi-हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सभी,आज का हमारा निबंध student and fashion essay in hindi आप सभी के लिए बहुत ही प्रेरणादायक है इसके अलावा हमारे इस nibandh का उपयोग विद्यार्थी अपने स्कूल या कॉलेज की परीक्षा में लिखने के लिए भी इस निबंध से जानकारी ले सकते हैं तो चलिए पढ़ते हैं हमारे आज के इस प्रेरणादायक निबंध को.

Vidyarthi aur fashion essay in hindi
Vidyarthi aur fashion essay in hindi

आजकल के इस आधुनिक युग में विद्यार्थी और फैशन एक साथ चलते हैं विद्यार्थी जो अपने स्कूल या कॉलेज में पढ़ाई करते हैं वह अपने इस जीवन में तरह तरह के फैशन अपनाते हैं यहां पर फैशन से तात्पर्य है किसी व्यक्ति द्वारा अपने खान-पान,रहन-सहन,वेशभूषा आदि में नए तरह से बदलाव लाना फेशन होता है आज के इस आधुनिक युग में सबसे ज्यादा फैशन का प्रभाव विद्यार्थियों पर पड़ा है.विद्यार्थी अभिनेता और अभिनेत्रियों के द्वारा अपनाए गए नए नए फैशन को अपनाते हैं इन फैशन को अपनाने वाले लड़के और लड़कियां दोनों होते हैं जिस वजह से इस युवा उम्र में उनका काफी नुकसान भी होता है वह बहुत सा पैसा अपने इन फैशनो पर खर्च करते हैं.

पहले के जमाने में फैशन सिर्फ गृहस्थ् ही अपनाया करते थे लेकिन आज के इस आधुनिक युग में सभी तरह के वर्ग के लोग फैशन अपनाने लगे हैं जिनमें फेशन अपनाने वालों लोगों की संख्या में से सबसे ज्यादा विद्यार्थियों की है इन विद्यार्थियों में युवक एवं युवतियां हैं आजकल के फैशन के इस दौर में लड़के,लड़कियों को पहचानना भी मुश्किल है क्योंकि बहुत सी लड़कियां लड़कों की तरह कपड़े पहनती हैं लड़कों की तरह ही अपना हेयर स्टाइल बनाती हैं वहीं दूसरी ओर ऐसे लड़के भी हैं जो लड़कियों की तरह हेयर स्टाइल बनाते हैं जिसकी वजह से उन्हें पहचानना भी मुश्किल होता है.विद्यार्थी जीवन वह जीवन होता है जिसमें एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों को शिक्षा का ज्ञान कराकर जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है उन्हें शिक्षा देता है लेकिन फैशन के दौर में विद्यार्थी शिक्षा से ज्यादा अपने फैशन पर ध्यान देते हैं लोगों का फैशन बहुत ही तेजी से बदल रहा है आज हर कोई चाहता है कि मैं किसी दूसरे के सामने अच्छा दिखू,अच्छे कपड़े पहनू,नए फैशन के साथ उसके सामने प्रस्तुत होऊं जिससे उस पर कुछ अच्छा प्रभाव डाल सकूं.विद्यार्थियों का यह फैशन सिर्फ शहरों तक ही सीमित नहीं रहा है गांव के विद्यार्थी भी आज फैशन के लिए जाने जाते हैं.

कॉलेजों में भी युवक,युवतिया अपने आपको अच्छा दिखाने के लिए तरह-तरह के फैशन करके आते हैं वह समझते हैं कि इससे सामने वाले पर कुछ अच्छा प्रभाव पड़ेगा आजकल के इस आधुनिक युग में ज्यादातर लोगों की धारणा बन चुकी है कि जो भी विद्यार्थी नए फैशन के साथ कॉलेज में नहीं आता उसको कुछ भी नहीं समझा जाता या उसका मजाक उड़ाया जाता है आजकल के जमाने में विद्यार्थी और फैशन दोनों साथ-साथ चल रहे हैं विद्यार्थी फिल्मी दुनिया के अभिनेता,अभिनेत्रियों से बहुत ज्यादा प्रभावित होते हैं और उन्हें देखकर उनका फैशन निरंतर बदलता जाता है.नया फैशन अपनाना कुछ गलत नहीं है लेकिन विद्यार्थी जीवन में हर किसी विद्यार्थी को इस फैशन से बचना चाहिए क्योंकि विद्यार्थी जीवन का प्रमुख उद्देश्य केवल विद्या अर्जित करना होना चाहिए तभी वह जीवन में आगे बढ़ सकेगा.अगर वह अपना ध्यान फैशन की तरफ रखेगा तो वह अपनी शिक्षा के ज्ञान में कमजोर हो सकता है उसे हमेशा शिक्षा ग्रहण करने के बारे में सोचना चाहिए तभी वह जीवन में आगे बढ़ सकेगा तथा हर किसी को ऐसे नए फैशन से भी बचना चाहिए जो भड़कीला या काम वासना उत्पन्न करने वाला हो क्योंकि इससे वह अपने आपको मुसीबत में भी डाल सकते है और उसका जीवन भी मुसीबत में फंस सकता है और जीवन बर्बाद भी हो सकता हैं.कहने का तात्पर्य यह है कि विद्यार्थी को केवल शिक्षा ग्रहण करने के बारे में सोचना चाहिए उसको अपने शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाना चाहिए,इस फैशन से दूर रहना चाहिए क्योंकि इससे विद्यार्थी जीवन का अमूल्य समय नष्ट होता है.

एक कहावत है सादा जीवन उच्च विचार.जहां तक हो सके हमें सादा जीवन अपनाना चाहिए और विचार हमारे उच्च होना चाहिए लेकिन फिर भी आप ये ना कर सके तो कम से कम अपने विद्यार्थी जीवन को अमूल्य समझते हुए विद्यार्थी जीवन में जरूर ही सादा जीवन अपनाना चाहिए जिससे आने वाला भविष्य आप का उज्जवल हो सके.
पहले के जमाने में विद्यार्थी फैशन नहीं करते थे सादा जीवन अपनाते थे वह अपने गुरु के साथ गुरुकुल में रहते थे सादा जीवन और उच्च विचार ही उनका विद्यार्थी जीवन था उनके पास फैशन अपनाने के लिए ना तो समय था और ना ही परिवार वालों की किसी तरह की मदद मिलती थी लेकिन बदलते इस जमाने में विद्यार्थियों के लिए फैशन को अपनाने के लिए परिवार के लोगों द्वारा मदद भी की जाती है विद्यार्थी फैशन के नाम पर बहुत पैसा भी खर्च करते हैं कुछ विद्यार्थी तो ऐसे होते हैं जो अपने दोस्त से पढ़ाई के मामले में आगे निकले या ना निकले लेकिन फैशन के मामले में वह अपने दोस्त से आगे निकलना चाहते हैं इसके लिए वह बहुत सारा खर्च करते हैं उनका अमूल्य समय निरंतर बर्बाद होता जाता है और वह अपने अमूल्य समय को खोकर जीवन में कुछ भी खास नहीं कर पाते.विद्यार्थियों का जीवन और उनका समय बहुत ही अमूल्य है.विद्यार्थीयो पर ही हमारे देश का भविष्य निर्भर है लेकिन अगर विद्यार्थी अपना अमूल्य समय बर्बाद करता रहे तो हमारे देश के भविष्य का क्या होगा इसलिए हमें विद्यार्थियों को सबसे ज्यादा विद्या अर्जित करने की ओर ध्यान दिलाना होगा और इस फैशन के कीड़े को विद्यार्थियों से दूर करना होगा.

एक समय था जब बच्चों के माता-पिता अपनी इच्छानुसार वस्त्र पहनते थे। तब बच्चों को भी इतना ज्ञान नहीं था कि फैशन के वस्त्र पहनना क्या होता है। माता-पिता जो कपड़े ला के देते थे वह कपड़े बच्चे खुशी-खुशी पहन लेते थे, लेकिन अब ऐसा बिल्कुल नहीं है।
आज समय और परिस्थतियां परिवर्तित हो गई हैं। आज बच्चों का फैशन के प्रति बहुत तीव्रता से आकर्षण बढ़ा है। आज के युग के छोटे-छोटे बच्चे जिनके दूध के दांत भी नहीं टूटे हैं, उन्हें भी फैशन का कीड़ा काटने लगा है। मेरा स्वयं का बेटा तोहीद जो मात्र अभी ढाई वर्ष का है वह भी बढ़िया वस्त्र अपनी पसंद के पहनता है और उसकी पसंद मेें हस्तक्षेप करना आफत मोल लेने के बराबर है। बहुत आश्चर्य होता है यह देख कर कि जिस फैशन का क्रेज युवा पीढ़ी तक सीमित था आज वह छोटे बच्चों से लेकर प्रौढ़ और वृद्धजनों तक विस्तार पा चुका है। फैशन के निरन्तर बढ़ते क्रेज ने बच्चों को इस सीमा तक प्रभावित किया है कि वह युवावस्था में कदम रखने से पूर्व ही अपने शारीरिक सौष्ठव को आकर्षक बनाने के लिए फैशन के अनगिनत प्रयोग स्वयं के ऊपर करने लगे हैं।
फैशन की इस अंधी दौड़ में कभी वह आकर्षक नजर आते हैं तो कभी नमूना बनकर हंसी का पात्र बनते हैं।
फैशन के प्रति बच्चों के आकर्षण का  मुख्य कारण टी.वी. चैनल के विज्ञापनों और फिल्मों में फैशन को प्रमुखता से दिखाया जाना भी है।
फैशन जिससे दो शब्द भी सम्बन्धित हैं जिसमें प्रथम फैड और क्रेज इन शब्दों को हम इस प्रकार से भी समझ सकते हैं कि फैड को धुन और क्रेज को हम उन्माद भी कह सकते हैं। फैशन के प्रति धुन की अधिकता ही उन्माद के रूप में परिवर्तनशील आकर्षक प्रक्रिया है। आज कुछ तो कल कुछ।
फैशन को आधार प्रदान करने में वस्त्रों का महत्वपूर्ण योगदान होता है वस्त्रों के सम्बन्ध में हरलॉक के शब्द फैशन में वस्त्रों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हैं। वस्त्रों का एक मुख्य मूल्य यह है कि वह व्यक्तियों को अपना इस प्रकार विज्ञापन करने योग्य बनाते हैं जिससे कि वे दूसरों का ध्यान और प्रशंसा आकर्षित कर सकते हैं।
बहुत से लोग जिसमें कोई योग्यता नहीं होती और जो अपने गुणों के आधार पर औसत से ऊपर उठने की आशा नहीं कर सकते, वस्त्रों के माध्यम से सम्मान की इस इच्छा को सन्तुष्ट करने का साधन पा जाते हैं। फैशन में हो रहे निरन्तर परिवर्तन के सम्बन्ध में दिल्ली निवासी जींस के निर्माता रईस अहमद का कहना है कि फैशन को नवीन आधार देने व परिवर्तन की दिशा को स्थापित करने में प्रसिद्ध और चर्चित व्यक्तियों का विशेष स्थान होता है। इस श्रेणी के अंतर्गत फिल्म स्टार व मॉडल आते हैं। यह लोग समाज में एक आदर्श के रूप में होते हैं, इस कारण लोग उनकी हर अच्छी बुरी बात का अनुकरण बिना सोचे करते हैं। उनके द्वारा स्थापित फैशन शीघ्र ही उन्माद का रूप धारण कर लेता है। जिसमें बच्चे, युवा, प्रौढ़ सभी डूब जाते हैं और इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं कि भारत जैसे गरीब देश में भी लोग अपनी आय का अधिक हिस्सा फैशन की चीजों और वस्त्रों की खरीद पर व्यय करते हैं।
मध्यम वर्ग के स्त्री- पुरुषों में फैशन की प्रवृत्ति अधिक देखने को मिलती है। बहरहाल फैशन आज के बदलते युग की मांग है इसलिए अभिभावकों का कर्तव्य बनता है कि वह अपने बच्चों में फैशन के वास्तविक अर्थ समझायें। यह फैशन ही है जो आपको आकर्षक भी बना सकता है और वहीं दूसरी ओर आपके व्यक्तित्व पर प्रश्नचिन्ह भी लगा सकता है।

दोस्तों अगर आपको हमारे द्वारा लिखा गया यह आर्टिकल Vidyarthi aur fashion essay in hindi पसंद आया हो तो इसे शेयर जरूर करें और हमारा Facebook पेज लाइक करना ना भूलें और हमें कमेंट के जरिए बताएं कि आपको हमारा यह आर्टिकल yuva varg aur fashion essay in hindi कैसा लगा

युवा और फैशन पर निबंध, युवा वर्ग और फैशन पर निबंध, फैशन से लाभ और हानि, फैशन का भूत पर निबंध, फायदे और फैशन का नुकसान, फैशन essay, फैशन के दुष्परिणाम, निबंध विद्यार्थी जीवन, yuva varg aur fashion essay in hindi, essay on fashion ka badhta prabhav in hindi, vidyarthi jeevan aur fashion par nibandh, vidyarthi par fashion ka prabhav, anuched vidyarthi jeevan aur fashion, essay on vidyarthi aur fashion in punjabi, essay on student and fashion in hindi, vidyarthi ate fashion essay in punjabi, 

वर्तमान शिक्षा प्रणाली-Essay on Modern Education System in Hindi

वर्तमान शिक्षा प्रणाली-Essay on Modern Education System in Hindi Hindi Essay in 100-200 words, Hindi Essay in 500 words, Hindi Essay in 400 words, list of hindi essay topics, hindi essays for class 4, hindi essays for class 10, hindi essays for class 9, hindi essays for class 7, hindi essay topics for college students, hindi essays for class 6, hindi essays for class 8

वर्तमान शिक्षा प्रणाली-Essay on Modern Education System in Hindi

वर्तमान शिक्षा प्रणाली :

भूमिका : भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली को परतंत्र काल की शिक्षा प्रणाली माना जाता है। यह ब्रिटिश शासन की देन मानी जाती है। इस प्रणाली को लॉर्ड मैकाले ने जन्म दिया था। इस प्रणाली की वजह से आज भी सफेद कॉलरों वाले लिपिक और बाबु ही पैदा हो रहे हैं। इसी शिक्षा प्रणाली की वजह से विद्यार्थियों का शारीरिक और आत्मिक विकास नहीं हो पाता है।

प्राचीन भारत में शिक्षा का महत्व : प्राचीन काल में शिक्षा का बहुत महत्व था। सभ्यता , संस्कृति और शिक्षा का उदय सबसे पहले भारत में हुआ था। प्राचीनकाल में शिक्षा का स्थान नगरों और शोरगुल से बहुत दूर वनों के गुरुकुल में होता था। इन गुरुकुलों का संचालन ऋषि -मुनि करते थे। प्राचीन काल में विद्यार्थी ब्रह्मचर्य का पालन करते थे और अपने गुरु के चरणों में बैठकर ही पूरी शिक्षा प्राप्त करते थे।

कुछ इसी तरह के विद्यालय तक्ष शिला और नालंदा थे। यहाँ पर विदेशी भी शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते थे। फिर मध्ययुग आया तब भारत को लम्बे समय तक परतंत्रता भोगनी पड़ी थी। मुसलमानों के युग में अरबी-फारसी शिक्षा का प्रसार हुआ। जब 18 वीं और 19 वीं शताब्दी आई तो शिक्षा को केवल अमीर और सामंत ही ग्रहण कर सकते थे। स्त्री शिक्षा तो लगभग खत्म ही हो गई थी।

नवीन शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता : हमारा भारत 15 अगस्त , 1947 को आजाद हुआ था। हमारे कर्णधारों का ध्यान नई शिक्षा प्रणाली की तरफ गया क्योंकि ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली हमारी शिक्षा प्रणाली के अनुकूल नहीं थी। गाँधी जी ने शिक्षा के विषय में कहा था कि शिक्षा का अर्थ बच्चों में सारी शारीरिक ,मानसिक और नैतिक शक्तियों का विकास करना होता है। शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए अनेक समितियां बनाई गयीं।

कमेटी द्वारा एक विशाल योजना बनाई गई जो तीन साल के भीतर 50 % शिक्षा का प्रसार कर सके। सैकेंडरी शिक्षा का निर्माण किया गया। विश्वविद्यालय से ही समस्या को सुलझाने के प्रयास किये गये। बाद में बेसिक शिक्षा समिति बनाई गई जिसका उद्देश्य भारत में बेसिक शिक्षा का प्रसार करना था। अखिल भारतीय शिक्षा समिति की सिफारिस की वजह से बच्चों में बेसिक शिक्षा को अनिवार्य कर दिया गया था।

कोठारी आयोग की स्थापना : शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन लाने के लिए कोठारी आयोग की स्थापना की गई। इस आयोग ने राष्ट्रीय स्तर पर नई योजना लागु करने की सिफारिश की। इस योजना की चर्चा-परिचर्चा लम्बे समय तक चली थी। देश के बहुत से राज्यों में इस प्रणाली को लागु किया गया था। इस प्रणाली से दस साल तक दसवीं कक्षा में सामान्य शिक्षा होगी।

इसमें सभी विद्यार्थी एक जैसे विषयों का अध्ययन करेंगे। इस पाठ्यक्रम में दो भाषाएँ , गणित , विज्ञान और सामाजिक पांच विषयों पर अध्ययन किया जायेगा। लेकिन विद्यार्थियों को शारीरिक शिक्षा से भी परिचित होना चाहिए। सातवीं की परीक्षा के बाद विद्यार्थी अलग-अलग विषयों पर अध्ययन करेंगे। अगर वो चाहे तो विज्ञान ले सकता है, कॉमर्स ले सकते हैं , और औद्योगिक कार्यों के लिए क्राफ्ट भी ले सकता है।

नवीन शिक्षा नीति के लाभ : नवीन शिक्षा प्रणाली को रोजगार को सामने रखकर बनाया गया है। हम लोग अक्सर देखते हैं कि लोग विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में भाग तो लेते हैं लेकिन पढने में उनकी रूचि नहीं होती है। ऐसे लोग समाज में अनुशासनहीनता और अराजकता पैदा करते हैं। नई शिक्षा नीति से हमें यह लाभ होगा कि ऐसे विद्यार्थी दसवीं तक ही रह जायेगे और वे महाविद्यालय में प्रवेश नहीं ले पाएंगे।

जो विद्यार्थी योग्य होंगे वे कॉलेजों में प्रवेश ले सकेंगें। दसवीं करने के बाद विद्यार्थी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेकर रोजगार प्राप्त कर सकेंगे। लेकिन अगर हमें नवीन शिक्षा प्रणाली को सफल बनाना है तो स्थान-स्थान पर डिप्लोमा पाठ्यक्रम खोलने पड़ेंगे जिससे दसवीं करने के बाद विद्यार्थी कॉलेजों की तरफ नहीं भागें।

उपसंहार : इससे शिक्षित लोगों की बेरोजगारी में कमी आएगी और शिक्षित लोगों का समाज में मान-सम्मान होगा। इस शिक्षा प्रणाली से विद्यार्थियों का सर्वंगीण विकास होगा और यह भविष्य के निर्माण के लिए भी सहायक होगी। इस प्रणाली को पूरी तरह से सफल बनाने का भार हमारे शिक्षकों पर है।

सरकार को इस बात पर ध्यान देना होगा कि योग्य विद्यार्थी ही शिक्षक बने क्योंकि वो ही उत्तम शिक्षा दे पाएंगे। नई शिक्षा नीति में इस बात पर बल दिया गया है योग्य शिक्षक ही शिक्षा जगत में प्रवेश कर सकते हैं। इसके साथ इस बात पर भी बल दिया गया है कि विद्यार्थियों को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर मिलें।

वर्तमान शिक्षा प्रणाली-Essay on Modern Education System in Hindi

आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर निबंध | Essay on Modern Education System in Hindi!

किसी भी राष्ट्र अथवा समाज में शिक्षा सामाजिक नियंत्रण, व्यक्तित्व निर्माण तथा सामाजिक व आर्थिक प्रगति का मापदंड होती है । भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली ब्रिटिश प्रतिरूप पर आधारित है जिसे सन् 1835 ई॰ में लागू किया गया ।

जिस तीव्र गति से भारत के सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक परिदृश्य में बदलाव आ रहा है उसे देखते हुए यह आवश्यक है कि हम देश की शिक्षा प्रणाली की पृष्ठभूमि, उद्‌देश्य, चुनौतियों तथा संकट पर गहन अवलोकन करें ।

सन् 1835 ई॰ में जब वर्तमान शिक्षा प्रणाली की नींव रखी गई थी तब लार्ड मैकाले ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि अंग्रेजी शिक्षा का उद्‌देश्य भारत में प्रशासन के लिए बिचौलियों की भूमिका निभाने तथा सरकारी कार्य के लिए भारत के विशिष्ट लोगों को तैयार करना है ।

इसके फलस्वरूप एक सदी तक अंग्रेजी शिक्षा के प्रयोग में लाने के बाद भी 1935 ई॰ में भारत की साक्षरता दस प्रतिशत के आँकड़े को भी पार नहीं कर पाई । स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत की साक्षरता मात्र 13 प्रतिशत ही थी ।

इस शिक्षा प्रणाली ने उच्च वर्गों को भारत के शेष समाज में पृथक् रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । ब्रिटिश समाज में बीसवीं सदी तक यह मानना था कि श्रमिक वर्ग के बच्चों को शिक्षित करने का तात्पर्य है उन्हें जीवन में अपने कार्य के लिए अयोग्य बना देना । ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली ने निर्धन परिवारों के बच्चों के लिए भी इसी नीति का अनुपालन किया ।

लगभग पिछले दो सौ वर्षों की भारतीय शिक्षा प्रणाली के विश्लेषण से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि यह शिक्षा नगर तथा उच्च वर्ग केंद्रित, श्रम तथा बौद्‌धिक कार्यों से रहित थी । इसकी बुराइयों को सर्वप्रथम गाँधी जी ने 1917 ई॰ में गुजरात एजुकेशन सोसायटी के सम्मेलन में उजागर किया तथा शिक्षा में मातृभाषा के स्थान और हिंदी के पक्ष को राष्ट्रीय स्तर पर तार्किक ढंग से रखा । स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में शांति निकेतन, काशी विद्‌यापीठ आदि विद्‌यालयों में शिक्षा के प्रयोग को प्राथमिकता दी गई ।

सन् 1944 ई॰ में देश में शिक्षा कानून पारित किया गया । स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत हमारे संविधान निर्माताओं तथा नीति-नियामकों ने राष्ट्र के पुननिर्माण, सामाजिक-आर्थिक विकास आदि क्षेत्रों में शिक्षा के महत्व को स्वीकार किया । इस मत की पुष्टि हमें राधाकृष्ण समिति (1949), कोठारी शिक्षा आयोग (1966) तथा नई शिक्षा नीति (1986) से मिलती है ।

 

शिक्षा के महत्व को समझते हुए भारतीय संविधान ने अनुसूचित जातियों व जनजातियों के लिए शिक्षण संस्थाओं व विभिन्न सरकारी अनुष्ठानों आदि में आरक्षण की व्यवस्था की । पिछड़ी जातियों को भी इन सुविधाओं के अंतर्गत लाने का प्रयास किया गया । स्वतंत्रता के बाद हमारी साक्षरता दर तथा शिक्षा संस्थाओं की संख्या में नि:संदेह वृद्‌धि हुई है परंतु अब भी 40 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या निरक्षर है ।

दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि स्वतंत्रता के बाद विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा व प्राविधिक शिक्षा का स्तर तो बढ़ा है परंतु प्राथमिक शिक्षा का आधार दुर्बल होता चला गया । शिक्षा का लक्ष्य राष्ट्रीयता, चरित्र निर्माण व मानव संसाधन विकास के स्थान पर मशीनीकरण रहा जिससे चिकित्सकीय तथा उच्च संस्थानों से उत्तीर्ण छात्रों में लगभग 40 प्रतिशत से भी अधिक छात्रों का देश से बाहर पलायन जारी रहा ।

देश में प्रौढ़ शिक्षा और साक्षरता के नाम पर लूट-खसोट, प्राथमिक शिक्षा का दुर्बल आधार, उच्च शिक्षण संस्थानों का अपनी सशक्त भूमिका से अलग हटना तथा अध्यापकों का पेशेवर दृष्टिकोण वर्तमान शिक्षा प्रणाली के लिए एक नया संकट उत्पन्न कर रहा है ।

पूँजीवादी अर्थव्यवस्था के नए चेहरे, निजीकरण तथा उदारीकरण की विचारधारा से शिक्षा को भी ‘उत्पाद’ की दृष्टि से देखा जाने लगा है जिसे बाजार में खरीदा-बेचा जाता है । इसके अतिरिक्त उदारीकरण के नाम पर राज्य भी अपने दायित्वों से विमुख हो रहे हैं ।

इस प्रकार सामाजिक संरचना से वर्तमान शिक्षा प्रणाली के संबंधों, पाठ्‌यक्रमों का गहन विश्लेषण तथा इसकी मूलभूत दुर्बलताओं का गंभीर रूप से विश्लेषण की चेष्टा न होने के कारण भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली आज भी संकटों के चक्रव्यूह में घिरी हुई है । प्रत्येक दस वर्षों में पाठ्य-पुस्तकें बदल दी जाती हैं लेकिन शिक्षा का मूलभूत स्वरूप परिवर्तित कर इसे रोजगारोन्मुखी बनाने की आवश्यकता है ।

हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली गैर-तकनीकी छात्र-छात्राओं की एक ऐसी फौज तैयार कर रही है जो अंततोगत्वा अपने परिवार व समाज पर बोझ बन कर रह जाती है । अत: शिक्षा को राष्ट्र निर्माण व चरित्र निर्माण से जोड़ने की नितांत आवश्यकता है ।

 

शिक्षा का वास्तविक अर्थ होता है, कुछ सीखकर अपने को पूर्ण बनाना। इसी दृष्टि से शिक्षा को मानव-जीवन की आंख भी कहा जाता है। वह आंख कि जो मनुष्य को जीवन के प्रति सही दृष्टि प्रदान कर उसे इस योज्य बना देती है कि वह भला-बुरा सोचकर समस्त प्रगतिशील कार्य कर सके। उचित मानवीय जीवन जी सके। उसमें सूझ-बूझ का विकास हो, कार्यक्षमतांए बढ़ें और सोई शक्तियां जागगर उसे अपने साथ-साथ राष्ट्री के जीवन को भी प्रगति पथ पर ले जाने में समर्थ हो सकें। पर क्या आज का विद्यार्थी जिस प्रकार की शिक्षा पा रहा है, शिक्षा प्रणाली का जो रूप जारी है, वह यह सब कर पाने में समथ्र है? उत्तर निश्चय ही ‘नहीं’ है। वह इसलिए कि आज की शिक्षा-प्रणाली बनाने का तो कतई नहीं। यही कारण है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के इतना वर्षों बाद भी, कहने को शिक्षा बहुत अधिक विस्तार हो जाने पर भी, इस देश के व्यक्ति बहुत कम प्रतिशत आमतौर पर साक्षर से अधिक कुछ नहीं हो पाए। वह अपने आपको सुशिक्षित तो क्या सामान्य स्तर का शिक्षित होने का दावा भी नहीं कर सकता। इसका कारण है, आज भी उसी घिसी-पिटी शिक्षा-प्रणाली का जारी रहना कि जो इस देश को कुंठित करने, अपने साम्राज्य चलाने के लिए कुछ मुंशी या क्लर्क पैदा करने के लिए लार्ड मैकाले ने लागू की थी। स्वतंत्रता-प्राप्ति के लगभग पचास वर्ष बीत जाने के बाद भी उसके न बदल पाने के कारण ही शिक्षा ही वास्तविकता के नाम पर यह देश मात्र साक्षरता के अंधेरे में भटक रहा है। वह भी विदेशी माध्यम से, स्वेदेशीपन के सर्वथा अभाव में।

हमारे विचार में वर्तमान शिक्षा-प्रणाली शिक्षित होने के दंभ ढोने वाले लोगों का उत्पादन करने वाली निर्जीव मशीन मात्र बनकर रह गई है। तभी तो वह उत्पादन के नाम पर प्रतिवर्ष लाखों दिशाहीन नवयुवकों को उगलकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री समझ लेती है। इस शिक्षा-प्रणाली का ही तो दोष है कि बी.ए., एम.ए. करने के बाद भी सक्रियता या जीवन व्यवहारों के नाम पर व्यक्ति अपने को कोरा-बल्कि थका-हारा और पराजित तक अनुभव करने लगता है। यह प्रणाली अपने मूल रूप में कई-कई विषयों की सामान्यत जानकारी देकर शिक्षित होने का बोझ तो हम पर लाद देती है, पर वास्तिवक योज्यता और व्यावहारिकता का कोना तक भी नहीं छूने देती। परिणामस्वरूप व्यक्ति व्यक्तित्व से हीन होकर अपने लिए ही एक अबूझ पहेली और बोझ बनकर रह जाता है। ऐसे व्यक्ति से देश जाति के लिए कुछ कर पाने की आशा करना व्यर्थ है।

वर्तमान शिक्षा प्रणाली के गुण पर निबंध, वर्तमान शिक्षा प्रणाली में सुधार, वर्तमान शिक्षा प्रणाली के लाभ, वर्तमान शिक्षा प्रणाली के दोष पर निबंध, वर्तमान शिक्षा प्रणाली के गुण और दोष, वर्तमान शिक्षा प्रणाली के  गुण और दोष इन हिंदी, वर्तमान शिक्षा पद्धति essay, वर्तमान शिक्षा प्रणाली के गुण व दोष wikipedia, 

article on modern education system in hindi, advantages and disadvantages of modern education system in hindi, present education system advantages in hindi, education system in india in hindi pdf,  vartman shiksha pranali essay in hindi, debate on vartman shiksha pranali in hindi, adhunik shiksha par nibandh, vartman shiksha pranali ke gun aur dosh in hindi,

बिजली के उपयोग पर निबंध-Essay on Importance of Electricity in Hindi

बिजली के उपयोग पर निबंध-Essay on Importance of Electricity in Hindi Hindi Essay in 100-200 words, Hindi Essay in 500 words, Hindi Essay in 400 words, list of hindi essay topics, hindi essays for class 4, hindi essays for class 10, hindi essays for class 9, hindi essays for class 7, hindi essay topics for college students, hindi essays for class 6, hindi essays for class 8

बिजली के उपयोग पर निबंध-Essay on Importance of Electricity in Hindi

बिजली के उपयोग पर निबंध (Essay on Importance of Electricity in Hindi) :

भूमिका : विज्ञान ने मनुष्य को अनेक वरदान स्वरूप अविष्कार दिए हैं जिनमें से बिजली भी एक वरदान है। बिजली का आविष्कार करके वैज्ञानिकों ने हम पर बहुत बड़ा अहसान किया है। हमारे जीवन में बिजली का बहुत उपयोग होता है। बिजली ऊर्जा का एक शक्तिशाली स्त्रोत होता है जिसका प्रयोग अनेक कामों को करने के लिए किया जाता है।

बिजली को भाप या पानी से बनाया जाता है। बिजली वैज्ञानिकों के आविष्कारों की बहुत बड़ी नदी है जिससे यह दुनिया हैरान रह गई है। इसके बिना आधुनिक जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। यह पूरा दिन मनुष्य के अनुसार काम करती है यह मनुष्य के लिए भोजन बनती है , कमरे साफ कराती है और रात को दिन में बदल देती है।

बिजली आज हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग बन चुकी है। आज के समय में भी घरों में बिजली का प्रयोग और अधिक बढ़ गया है। अगर थोड़ी बहुत देर के लिए बिजली चली जाती है तो बहुत बड़ी समस्या उत्पन्न हो जाता है। आज के आधुनिक जीवन में बिजली मनुष्य के जीवन की एक बहुत बड़ी जरूरत बन गई है जिसके बिना मनुष्य किसी भी काम को करने में सफल नहीं होता है।

बिजली से चलने वाले उपकरण :- हम बिजली चमत्कारों को चारों और आसानी से देख सकते हैं। आज के समय में हर घर में रोशनी , हवा , गर्मी , दुरी की वार्तालाप , समाचार सुनने के उपकरणों को देखा जा सकता है। अज हर घर में रोशनी करने और हवा देने के लिए उपकरण हैं जिससे हमारा जीवन आरामदायक बन गया है।

आजकल सडकों , दुकानों और घरों में रोशनी की व्यवस्था है। आक के समय में हम वो सब काम रात में भी कर सकते हैं जो सिर्फ दिन में किया जाते थे। पहले हम हवा के लिए मेहनत किया करते थे लेकिन आज पंखों के अविष्कार से हमारा जीवन और भी आरामदायक हो गया है। अब बिजली के प्रयोग से सर्दियों में भी गर्मीं का आनन्द ले सकते हैं।

बिजली के चूल्हों से खाना भी बनाया जाता है। बिजली से कपड़ों पर प्रेस भी की जाती है। बिजली की गर्मी से एक बहुत बड़ा फायदा होता है कि इससे कभी वायु प्रदुषण नहीं होता है। बिजली की वजह से तार और टेलीफोन जैसे साधन उपलब्ध कराये गये हैं। तारों और टेलीफोन के जरिये हम दूर-दूर तक अपने संदेश को भेज सकते हैं।

बेतर साधन की वजह से हम बिना तार के संदेश , फोटो भेजे जा सकते हैं। रेडियो से कहीं दूर होने वाले कार्यक्रमों को आसानी से सुना जा सकता है। बिजली का प्रयोग घर की औरों के लिए एक वरदान की तरह सिद्ध होता है। रसोईघर में भी बिजली की मदद से खाना बनाया जाता है। कपड़े भी बिजली की मदद से धुल जाते हैं।

आजकल चटनी बनाने और मिर्च मसाले पिसने के लिए और जूस बनाने के लिए भी मशीनों का प्रयोग किया जाता है। आजकल घर-घर में कंप्यूटर को देखा जा सकता है वह भी बिजली के करण ही आया है। भारत अभी इतना विकसित नहीं हुआ है इसी वजह से घरों में कंप्यूटर बहुत कम दिखाई देते हैं। जब कंप्यूटर की उपयोगिता का पता चलेगा तो घरों में भी इसका प्रयोग अधिक होने लगेगा।

भारी मशीनों में उपयोग :- बिजली का प्रयोग भरी मशीनों में भी किया जाता है। बिजली का सबसे अधिक प्रयोग परिवहन में किया जाता है। बिजली की मदद से ट्राम और रेलगाड़ियों को भी चलाया जाता है। बिजली के इंजन बहुत शक्तिशाली होते हैं और इनमें से किसी प्रकार के धुएँ के निकलने से प्रदुषण नहीं होता है।

इन यंत्रों को अधिक गति से भी चलाया जा सकता है और धीमी गति से भी। बिजली के सहारे संसार में ओद्योगिक क्रांति आ गई है। आज के समय में भरी-भरी औद्योगिक मशीने बिजली से ही चलाई जाती हैं। इन भारी-भरी औद्योगिक मशीनों से अनेक प्रकार की चीजें बनाई जाती हैं।

बिजली से बहुत भरी क्रेनें भी चलाई जा सकती हैं जो अधिक से अधिक बोझ को उठा सकती हैं। जो कारखाने बिजली से चलते हैं उनसे कभी वायु प्रदूषण नहीं होता है और दूसरे ऊर्जा के स्त्रोतों से यह बहुत सस्ती होती है। चिकित्सा के लिए भी बिजली का प्रयोग किया जाता है।

एक्स रे मशीनों को बिजली से चलाया जाता है जिससे रोगों के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है और डॉक्टर हमें यह बताने में सक्षम हो जाता है की हमारे शरीर की कौन सी हड्डी टूट गई है और कौन सी हड्डी ठीक है। अगर बीमारी है सर्जरी के लिए उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।

बिजली की वजह से ही वायलेट जैसी अनेक किरणों का उत्पादन हुआ है जो अनेक रोगों के इलाज में प्रयोग की जाती हैं। बिजली से चलने वाली मशीनों की वजह से ही दिल की धडकन रुक जाने पर उसे फिर से सक्रिय किया जा सकता है। बिजली कृषि में भी अपना योगदान दे रही है। बिजली से कृषि के लिए ट्यूब और कुएँ चलाने कर उत्पादन में बहुत मदद करता है।

मनोरंजन का साधन :- बिजली की वजह से ही मनोरंजन के साधन उपलब्ध हो पाए हैं। बिजली की वजह से ही रेडियों , टेलीविजन , वी०सी०आर० जैसे साधनों को मनोरंजन के लिए बनाना संभव हुआ है। आज टेलीविजन की वजह से हम दूर किसी स्थान पर होने वाली महत्वपूर्ण घटना को आसानी से देख सकते हैं।

आज हम बहुत से खेलों जैसे – क्रिकेट , टेनिस, फुटबाल, कबड्डी, और वॉलीबाल का सीधा प्रसारण घर बैठे आसानी से देख सकते हैं। बिजली का प्रयोग मनुष्य की सभी गतिविधियों में किया जाता है। बिजली की वजह से हमारे सुख कई गुना बढ़ जाते हैं। जो लोग निर्धन होते हैं उनके घरों में भी मनोरंजन की वस्तुएँ भी आसानी से देखी जा सकती हैं। लेकिन इन साधनों का प्रयोग केवल बिजली से ही किया जा सकता है अगर बिजली न हो तो इनका प्रयोग नहीं किया जा सकता है।

उपसंहार : बिजली का उपयोग बहुत अधिक मात्र में किया जाट है इसी वजह से इसके उपयोगों को गिनना बहुत अधिक कठिन है। बिजली ने हमारे जीवन के हर क्षेत्र को बहुत ही प्रभावित किया है। आज के समय में बिजली के बिना शहरी जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

बिजली का उपयोग घरेलू कामों में भी बहुत किया जाता है। हम इसका प्रयोग जितना चाहें उतना कर सकते हैं। बाजारों में बिजली से चलने वाले अनेक प्रकार के उपकरण मिल जाते हैं जिनका प्रयोग बहुत से घरों में किया जाता है। उपकरणों का प्रयोग व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह इनका प्रयोग कितना करता है।

भविष्य में बिजली का प्रयोग और भी अधिक विस्तृत रूप से हो जायेगा। ऐसा केवल कोई ही घर रहता है जिसमे बिजली का प्रयोग नहीं किया जाता है। बिजली हमारे जीवन की मूल आवश्यकता बन चुकी है इसके बिना जीना बहुत कठिन है।

बिजली के उपयोग पर निबंध-Essay on Importance of Electricity in Hindi

बिजली के उपयोग पर अनुच्छेद | Paragraph on Wonders of Electricity OR Uses of Electricity in Hindi

प्रस्तावना:

विज्ञान ने मनुष्य को अनेक वरदान दिए हैं, जिनमे से बिजली प्रमुख है । यह ऊर्जा का एक शक्तिशाली स्रोत है, जिसे अनेक कामों में लगाया जा सकता है । मुख्यत: यह भाप से अथवा पानी से तैयार की जा सकती है ।

बिजली के चमत्कार

रोशनी और पंखे:

बिजली के चमत्कार चारों ओर दिखाई देते हैं । घर-घर में इससे हम रोशनी करते हैं और पंखे चलाते हैं । इन दो उपयोगों से ही हमारा जीवन आरामदेह और सुविधाजनक बन गया है । जगमगाते घर, रास्ते, सड़कें, दुकाने आदि से हमारी कार्यकुशलता में वृद्धि हुई है । अब हम रात को भी वे सब काम कर सकते हैं, जो पहले केवल रपूर्य के प्रकाश में ही किये जा सकते थे । पंखों की सहायता से भी हमारा जीवन आरामदायक बना है ।

गरम करने का कार्य:

बिजली का उपयोग हीटरों में होता है । बिजली के हीटरों से हम कडाके की सर्दी मे भी वसन्त का सा आनन्द ले सकते हैँ । बिजली के चूल्हों से खाना बनाया जा सकता है । इससे प्रेस गर्म करके हम अपने कपडों पर रजी कर सकते हैं । बिजली की गर्मी से एक सबसे बड़ा लाभ होता है कि इससे वायु दूषित नहीं होती ।

अन्य सभी प्रकार के ईंधनों से कार्बन डाइआक्साइड तथा अन्य जहरीली गैरने निकलती है, जो मनुष्य के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती हैं, लेकिन बिजली की गर्मी से कोई गैस नहीं निकलती । इसलिए यह सबरने सुगम और साफ ईंधन का काम करती है । जरा-सा बटन दबाकर जब चाहें हम हीटर या चूल्हा जला और बुझा सकते हैं ।

तार और टेलीफोन:

बिजली ने तार और टेलीफोन जैसे सचार के सुगम साधन उपलय कराये हैं । तार के जरिये हम दूर-दूर तक संदेश भेज सकते हैं । टेलीफोन के माध्यम से हम ससार के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से आसानी से बातचीत कर सकते हैं ।

बेतार और रेडियो:

बेतार के आविष्कार ने सचार के साधनों को और भी सुगम बना दिया है । इसके द्वारा बिना किसी तार या माध्यम के सदेश, फोटो आदि तक भेजे जा सकते है । घर बैठे अखबारों मे हम कुछ घंटों पहले की विश्व के दूसरे कोने की दुर्घटना या समारोह आदि के चित्र देख लेते हैं । रेडियो से हम हजारों मील दूर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमो को घर बैठे सुनकर आनन्दित होते हैं ।

ट्राम, रेलगाड़ियों आदि में उपयोग:

बिजली की मदद से ट्राम गाडिया और रेलगाडियाँ चलाई जाती हैं । बिजली के इजन अधिक शक्तिशाली होते है और इनमें किसी प्रकार का धुआ आदि भी नहीं उठता । इनकी गति भी बहुत अधिक की जा सकती है ।

भारी मशीनों आदि को चलाना:

बिजली के जरिये ससार में औद्योगिक क्रांति आ गई है । आज भारी-भारी औद्योगिक मशीनें बिजली से चलाई जाती हैं । इन मशीनो द्वारा हजारो किस्म की वस्तुयें तैयार होती हैं । भारी-भारी क्रेनें बिजली से चलती हैं, जो एक साथ सैकडों टन बोझा उठाने की सामर्थ रखती हैं ।

 

बिजली द्वारा चलने वाले कारखानो से वायुमण्डल प्रदूषित नहीं होता तथा ऊर्जा के अन्य स्रोतो की तुलना मे यह सस्ती भी पड़ती है । बिल्किसा के क्षेत्र में बिजली का उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र में भी व्यापक रूप से होता है । एक्सरे मशीन बिजली से ही चलती है, जिसने रोगों के निदान में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ।

अच्छा-वायलेट तथा अन्य किरणो का उत्पादन बिजली से ही संभव हो सका है, जो कैंसर सहित अनेक रोगो के इलाज में प्रयुक्त होती हैं । बिजली की सहायता से हृदय की गति के राक जाने पर उसे पुन: सक्रिय किया जा सकता है । इसी प्रकार शल्य-चिकित्सा के क्षेत्र मे भी बिजली ने बडी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ।

मनोरंजन के साधन:

सिनेमा जैसे मनोरंजन के सुगम और सस्ते साधन बिजली की ही देन हैं । इसके अलावा रेडियो, टेलीविजन और वी॰सी॰आर॰ के आविष्कार ने मनोरंजन के सुगम साधन जुटा दिए हैं । आज घर बैठे हम टेलीविजने ससार के किसी भी कोने में होने वाली महत्त्वपूर्ण घटना को ज्यो-का-त्यों उसी समय देख सकते हैं । क्रिकेट, फुटबाल, टेनिस आदि के अन्तर्राष्ट्रीय मैचों का सीधा प्रसारण हम घर बैठे बड़ी सुविधा से देख सकते है ।

उपसंहार:

बिजली के इतने अधिक उपयोग है कि सभी को गिनाना बड़ा कठिन है । इसने हमारे जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित किया है । आज बिजली के बिना शहरी जीवन की कल्पना तक करना कठिन है ।

 

बिजली के उपयोग पर निबंध-Essay on Importance of Electricity in Hindi

यहां आपको सभी कक्षाओं के छात्रों के लिए हिंदी भाषा में बिजली के महत्व, बिजली बचाने पर निबंध पर निबंध मिलेगा। Here you will get Essay on Importance of Electricity in Hindi Language and Essay on Save Electricity in Hindi Language for Students of all classes in 350, 400 and 700 words.

Essay on Importance of Electricity in Hindi – बिजली के उपयोग पर अनुच्छेद (350 words) : बिजली हमारे समय की सबसे बड़ी खोजों में से एक है। यह सभी वैज्ञानिक प्रगति की बहुत नाड़ी है। यह दुनिया का आश्चर्य है बिजली के बिना आधुनिक जीवन के बारे में सोचना मुश्किल है। हमारे दैनिक जीवन में बिजली हमारे लिए बहुत उपयोगी है। यह दास की तरह मनुष्य की सेवा करता है। यह हमारे भोजन बनाती है, हमारे कपड़े धोता है और हमारे कमरे साफ करता है। यह रात को दिन में परिवर्तित करता है।

Essay on Importance of Electricity in Hindi – बिजली के उपयोग पर अनुच्छेद

हमारे घर, कार्यालय, सड़कों, कारखानों और अन्य इमारतों को बिजली से रोशन किया जाता है हमारे घरों में हमारे पास बिजली के प्रशंसक हैं। बिजली हमारे कमरों को गर्म या ठंडा रख सकती है जैसे हम चाहते हैं। उद्देश्य के लिए हीटर और एसी हैं। इलेक्ट्रिक घंटियां भी बहुत उपयोगी हैं। बिजली का सबसे बड़ा उपयोग परिवहन और संचार में है। इसमें दूरी कम हो गई है हमारे पास टेलीग्राफ, टेलीफोन और वायरलेस हैं इन तरीकों से, हम अपने संदेश भेज सकते हैं। टेलीफोन पर दो व्यक्ति एक-दूसरे से बात कर सकते हैं, भले ही वे हजारों मील की दूरी से अलग हो जाएं। रेडियो पर हम समाचार, भाषण, गीत और संगीत सुन सकते हैं। टीवी पर हम उन व्यक्तियों के चेहरों को देख सकते हैं जो मील की दूरी पर गा या गा या बोलते हैं या बोलते हैं।

बिजली हमारा सबसे अच्छा दोस्त है इसका उपयोग कुछ बीमारियों के इलाज में किया जाता है एक्स-रे के साथ डॉक्टर शरीर के अंदर के हिस्से देख सकते हैं। वे यह पता लगाते हैं कि कौन सी हड्डी टूट गई है और जहां बीमारी है सर्जरी में इलेक्ट्रिक मशीनों और उपकरणों का उपयोग किया जाता है। विद्युत शक्ति का एक रूप है। यह रेलगाड़ियों, बसों और ट्राम चलाता है। समय की कोई कमी के बिना हम एक जगह से दूसरे स्थान पर जाते हैं। इलेक्ट्रिक क्रैंस बहुत भारी चीजों को जगह से स्थानांतरित करते हैं। कई कारखानों बिजली का इस्तेमाल करते हैं और दैनिक उपयोग की चीजों का उत्पादन करते हैं। यह कृषि में भी उपयोगी है ‘ यह उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है। यह किसानों को ट्यूब-कुओं चलाने के द्वारा लिलहेल्प्स करता है। बिजली का उपयोग मनुष्यों की गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में किया जाता है। यह वास्तव में जीवन की भाप है। यह हमारे सुखों को कई गुना बढ़ा दिया है। इस आशीर्वाद के बिना दुनिया की कल्पना करो जीवन एक ठहराव पर आ जाएगा यह।

Bijli Bachao Essay in Hindi – बिजली बचाओ पर निबंध (400 word) 

बिजली के उपयोग पर निबंध-Essay on Importance of Electricity in Hindi

हम इतने हद तक बिजली का इस्तेमाल कर चुके हैं कि इसकी अनुपस्थिति में जीवन लगभग असंभव है| बिजली के लाभ कई हैं दुर्भाग्य से हम उन्हें केवल तब जानते हैं जब बिजली की विफलता होती है हम ऐसी स्थितियों में बहुत असहाय महसूस करते हैं। कई शहरों में पानी की आपूर्ति बिजली की आपूर्ति से जुड़ी हुई है। और जब भी सभी बिजली विघटन होता है, तब तक इन शहरों को पानी के बिना जाना पड़ता है जब तक आपूर्ति बहाल नहीं होती है।

बिजली के बिना जीवन के बारे में सोचने के लिए यह अकल्पनीय है सिर्फ इस तरह की संभावना के बारे में सोचा, बहुत परेशान और तनाव पैदा करता है। बिजली की अनुपस्थिति में हमारे घरों, मिट्टी के लैंप और मोमबत्तियों के साथ धुंधला जलाया जाता है। रेफ्रिजरेटर, कूलर, हीटर, एयर कंडीशनर, टोस्टर और अन्य दैनिक उपयोग के उपकरण बेकार हो गए हैं। घर की पत्नियों को एक बार फिर घर चलाने के लिए पुराने तरीकों का इस्तेमाल करना शुरू करना है। यह इसलिए है क्योंकि सभी श्रम बचत उपकरणों को आमतौर पर बिजली पर चलाया जाता है। बिजली उद्योग को स्वचालन लाया है। इसके अभाव में कोई कार्यालय नहीं, कोई फैक्ट्री, कोई मिल और कोई व्यवसाय चल सकता है। सार्वजनिक और निजी संस्थान एक निर्जन रूप पहनते हैं। उत्पादन के आदिम तरीकों को एक बार फिर माल का उत्पादन करने के लिए उपयोग किया जाता है। उच्च कीमतों के इन दिनों में, उत्पादन के पारंपरिक तरीकों का उपयोग करके कीमतें बढ़ जाती हैं।

कई कृषि उपकरण विद्युत द्वारा संचालित होते हैं इसलिए अनाज की पिटाई, खेतों की सिंचाई और अनाज से भुसा को हटाने जैसे काम काफी धीमा होते हैं। यह कृषि उत्पादन को कम करता है, जिससे भोजन की कमी हो सकती है। स्वास्थ्य सेवाओं में, कोई भी बिजली कई गंभीरता से बीमार रोगियों और नवजात शिशुओं के लिए मृत्यु का कारण नहीं होगा क्योंकि उनके जीवन समर्थन प्रणाली विद्युत मशीन द्वारा चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा, अन्य पेंटों को बिजली के बिना बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मनोरंजन मंच पर पढ़ने या नाटक देखने के लिए सीमित हैं। कोई सिनेमा, टेलीविजन, रेडियो, वीडियो या उपग्रह टेलीविजन नहीं है दूसरे शब्दों में, बिजली हमारे जीवन का अभिन्न अंग बनाती है। इसके बिना हम पृथ्वी के चेहरे पर असहाय प्राणियों को कम कर देंगे।

Essay on Save Electricity in Hindi – बिजली बचाने पर निबंध (700 words)

विद्युत शब्द ग्रीक शब्द ‘इलेक्ट्रॉन’ से आता है जिसका अर्थ एम्बर है| यह खोज प्राचीन काल तक की जाती है जब ‘नारों ने देखा कि बिजली का उत्पादन एम्बर के एक टुकड़े को रेशम के साथ या ऊन द्वारा किया जाता था। यह काल्पनिक बिजली का जन्म था| 1880 में वोल्टा ने अम्लीकृत पानी में डूबने वाले दो भिन्न धातु प्लेटों के संपर्क में बिजली का नया स्रोत पाया। इसे आधुनिक बैटरी और कोशिकाओं में विकसित किया गया है। उन्हें। ओर्स्टेड और फैराडे ने पाया कि बिजली का उत्पादन तब किया जब एक तार के आसपास चुंबकीय क्षेत्र बदल गया था। यह वर्तमान डायनमो में विकसित हुआ है जो इस ऊर्जा का मुख्य स्रोत है – बिजली अब विद्युत ‘इलेक्ट्रान’ नामक छोटे विद्युत कणों के कारण होता है।

प्रकृति के तत्वों में बिजली मौजूद है| यह मशीनों द्वारा भी उत्पन्न होता है| बिजली एक मॉडेम आदमी के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है|  यह ईमानदारी से लाया गया चमत्कार है इसका उपयोग कई और किए जाते हैं। यह शक्ति का स्रोत, प्रकाश और गर्मी के स्रोत के रूप में और कुछ रोगों के एक रोगाणु के रूप में प्रयोग किया जाता है। शक्ति के एक स्रोत के रूप में उसने सभी कष्टदायी व्यक्ति को राहत दी है जो वह करता था और मानवता के लिए महान उछाल साबित हुआ । रेलवे, ट्राम कार, ट्रॉली बसों, मोटर कारों को चलाने के लिए बिजली का इस्तेमाल किया गया है। वर्तमान समय में दुनिया में कुछ भी नहीं है जिसमें बिजली ने अपना स्टाम्प नहीं दिया है। आधुनिक दुनिया में हम अपने आज्ञाकारी स्लेव, बिजली होने पर गर्व महसूस करते हैं।

यह ऐसा कर सकता है जो गुलाम नहीं कर सका। यह भोजन, गर्मी का पानी, साफ कपड़े बनाती है, व्यंजन धोता है, जूते का सेवन करता है, बालों को काटता है और बाल, ब्रश दांत, कंघी बाल, प्रशंसकों को चलाता है, मिलों और कारखानों को चलाता है, टेलीफोन, टेलीग्राफ, सिनेमा, रेडियो और कूलर काम करता है। गर्मी की स्क्रॉलिंग गर्मी रेफ्रिजरेटर हमें ठंडे पानी और आइसक्रीम के साथ ताज़ा करते हैं। बिजली में सिंचाई और कृषि में काफी सुधार हुआ है। ट्यूब कुए बिजली के साथ काम करते हैं | बिजली आधुनिक आदमी के लिए एक तेजी है यह हमारे सामाजिक दृष्टिकोण और पृथ्वी का बहुत ही चेहरा बदल गया है।  उसने मनुष्यों के निपटान में विशाल शक्ति रखी है ताकि वह ईश्वरीय शक्तियों के पास आ सके। यह आश्चर्य की बात है कि बिजली की तरंगें 1,86,000 मील प्रति सेकंड की रफ्तार से यात्रा करती हैं और सूरज में केवल सात मिनट लगती हैं। विद्युत ने दवा के विज्ञान में क्रांति ला दी है कैंसर के कुष्ठ रोग और अन्य अन्य घातक बीमारियां जो अतीत के चिकित्सकों को चकरा देती हैं, वर्तमान में बिजली के जोखिम के बिना दर्द रहित तरीके से ठीक हो जाती हैं।

इलेक्ट्रिक झटके और एक्स रे सर्जरी के लिए एक उछाल हैं बिजली बेहद ‘मानव आराम के लिए जोड़ता है यह आदमी खुश और आरामदायक बनाने के लिए प्रवृत्त है विद्युत प्रकाश बहुत सुविधाजनक है यह तेल, विक्स, चिमनी आदि की आवश्यकता पर निर्भर करता है। इसके अलावा, यह बहुत तैयार है। आप बस स्विच को दबाते हैं और अपने कमरे को एक बार उज्ज्वल रोशनी से भर दिया जाता है। हम संगीत, समाचार और व्याख्याताओं को सुनते हैं और मीटिंग हॉल या सिनेमा हॉल में जाने के बिना घर में लाइव मैच देखते हैं। इसका उपयोग बड़े शहरों में लिफ्टों में भी किया जाता है जहां उच्च इमारतों हैं, जिनमें से कई दस मंजिला हैं बिजली इसके बिना सभ्यता का एक धुरी है, सामाजिक जीवन आदिम युग व्यापार में कम हो जाएगा और वाणिज्य को एक सेट वापस प्राप्त होगा। जीवन आधुनिक आकर्षण और सुविधाओं से वंचित हो जाएगा एक लेखक ने ठीक ही कहा है, “यदि हमारे पूर्वजों ने अपनी कब्रों से उबार लिया और बिजली के तारों के नेटवर्क पर बुक किया, प्रकाश चमकने की चमक, और बिजली की घंटी बजती है, तो बटन दबाकर, वे पेट में मर गए होंगे।”

बिजली के बिना एक दिन पर निबंध, बिजली के बिना एक दिन निबंध, बिजली का महत्व पर निबंध, बिजली के बिना जीवन मुश्किल, बिजली की समस्या पर निबंध, यदि बिजली न होती तो निबंध, दो दिन बिजली के बिना, बिजली की बचत निबंध,

bijli par nibandh in hindi, vartaman jeevan mein bijli ka mahatva essay in hindi, essay on importance of electricity in our daily life, bijli bachao essay in hindi, bijli ka sadupyog essay in hindi,  hindi essay on bijli, bijli ke bina ek din essay in hindi, agar bijli na hoti to kya hota essay in hindi,

ई-कॉमर्स व्यवसाय पर निबंध essay on E-Commerce in Hindi

ई-कॉमर्स व्यवसाय पर निबंध essay on e commerce in Hindi  Hindi Essay in 100-200 words, Hindi Essay in 500 words, Hindi Essay in 400 words, list of hindi essay topics, hindi essays for class 4, hindi essays for class 10, hindi essays for class 9, hindi essays for class 7, hindi essay topics for college students, hindi essays for class 6, hindi essays for class 8

ई-कॉमर्स व्यवसाय पर निबंध essay on e commerce in Hindi

ई-कॉमर्स व्यवसाय पर निबंध :

भूमिका : आजकल लोग प्राचीन तरीकों को बहुत ही कम अपनाते है वे प्राचीन तरीकों को अपनाने की जगह पर आधुनिक तरीकों को अधिक अपनाते हैं। पुराने तरीकों में काम बहुत ही समय में होता है लेकिन आधुनिक तरीकों से काम बहुत ही जल्दी हो जाता है।

ई-कॉमर्स का अर्थ : ई कॉमर्स का अर्थ होता है इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स या हम कह सकते हैं इंटरनेट द्वारा व्यापार करना। आज के समय में इटरनेट के व्यापार में बहुत तेजी से वृद्धि हो रही है। सन 1998 में इस मिडिया से 43 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था। यह आज तक बहुत उन्नति कर रहा है।

ई-कॉमर्स का प्रारंभ : भारत में ई कॉमर्स अभी अधिक लोकप्रिय नहीं हुआ है लेकिन ऐसी आशा की जा रही है कि यह बहुत जल्दी लोकप्रिय हो जायेगा। अभी कुछ दीनों पहले हिमाचल में इंटरनेट के द्वारा एक तर्क सेब बेचा गया था। सुनील मेहता ने इस प्रकार का पहला विक्रय किया था।

इंटरनेट पर ऐसी नीलामी बैंगलोर की एक फर्म संजीवनी इंफाटेक ने की और खरीददारी चेन्नई के अमीर-उल-हसन ने की थी। कंपनी ये नीलामी फर्मारबजारा.कॉम वेबसाइट से की थी। इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे आगे चलकर ई-कॉमर्स से व्यापार में बहुत वृद्धि होगी।

ई-कॉमर्स से कार्यप्रणाली : इंटरनेट से व्यापार प्रणाली बहुत ही सरल होती है। अगर कोई व्यापारी कुछ खरीदना चाहता है तो वह वेब पेज से व्यापारी के इलेक्ट्रोनिक स्टोर में से उत्पादों को चुन लेता है। उस समय वह आर्डरफार्म को भर देता है। इसमें उत्पादों के साथ-साथ चीजों की कीमत भी दी जाती है।

जब वे चीजों का चुनाव कर लेते है तो साईट में हरकत होती है और वो खरीददार के अकाउंट की सुचना देता है। साईट को खरीदने वाले और बेचने वाले की सुरक्षा और प्रामाणिकता का मापदंड होता है। ये संदेश को सुरक्षित भेजने के लिए गुप्त संदेश की विधि को अपनाता है।

जब बेचने वाले को आर्डर मिल जाता है तो वह खरीददार के बैंक को कीमत देने के लिए इजाजत दे देता है। जब उसे इसकी स्वीकृति मिल जाती है तो वह कार्डहोल्डर को इसकी पुष्टि की खबर देने के बाद माल भेज देता है।

ई-कॉमर्स के लाभ : इस प्रिक्रिया को करने के बाद बेचने वाला खरीददार के बैंक को वास्तविक मूल्य की अदायगी का अनुरोध करता है। अंततः खरीददार के बैंक से धन राशि को बेचने वाले के बैंक में ट्रांफर कर देता है। व्यापार की इस प्रणाली से व्यापरी और ग्राहक का सीधा संपर्क हो जाता है।

इस प्रणाली में बिचौलियों को कमीशन नहीं देना पड़ता है। व्यापार का क्षेत्र बहुत बड़ा होता है और बिक्री से फायदा जादा होता है। व्यापार प्रक्रिया को मिनटों में पूरा किया जाता है। इसके साथ-साथ पैसे की अदायगी भी पूरी हो जाती है। इसमें समय की बचत होती है।

घर पर बैठे व्यक्ति के सामने पूरा बाजार स्क्रीन पर आ जाता है और उसे खरीदने के लिए बाजार नहीं जाना पड़ता है। इस प्रक्रिया से जो माल खरीदा जाता है वो विश्वसनीय होता है। अगर इसमें कोई समस्या हुई तो बेचने वाले और खरीदने वाले दोनों ही सीधे बात करके समस्या का कोई न कोई हल ढूँढ लेते हैं।

उपसंहार : ई कॉमर्स के संचालन के लिए विशेष प्रकार के प्रशिक्षण की जरूरत होती है। आज के युवा के लिए इस क्षेत्र में काम के बहुत अधिक अवसर हैं। इसी लिए युवा ई-कॉमर्स में प्रशिक्षण प्राप्त करके अपना करियर बना सकते हैं।

 

ई-कॉमर्स व्यवसाय पर निबंध essay on e commerce in Hindi

ई-कॉमर्स या इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स बस इंटरनेट पर व्यापार लेनदेन करने के लिए संदर्भित करता है पारंपरिक व्यवसायों की तरह, इस प्रकार के व्यापार में व्यापार लेनदेन के सभी पहलुओं जैसे खरीद, बिक्री, और भुगतान शामिल हैं। मुख्य अंतर यह है कि यह व्यवसाय मॉडल इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन पर आधारित है।

ई-कॉमर्स में, कंपनियां इंटरनेट पर स्टोर स्थापित करती हैं और उपयोगकर्ता इंटरफेस प्रदान करती हैं जो व्यापारिक वस्तुओं की खरीद और बिक्री की अनुमति देती हैं। विक्रेताओं और खरीदार के बीच कोई भौतिक संपर्क नहीं है क्योंकि खरीद ऑनलाइन हो गई है

ई-कॉमर्स ग्राहकों की मांगों को पूरा करने और लेनदेन को व्यवस्थित करने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को गोद लेता है। इस व्यवसाय के मॉडल में, किसी उद्यमी को भौतिक आधार की जरूरत नहीं है; वस्तुओं को रखने के लिए केवल एक स्टोर

ई-कॉमर्स के फायदे

1. सुविधा बढ़ाता है: ग्राहक, व्यापार के आधार पर यात्रा के बिना, अपनी स्वयं की सुविधा पर और अपने घरों के आराम से ऑर्डर कर सकते हैं। आदेश उन्हें अपने सबसे आदर्श स्थानों पर भी वितरित किए जाते हैं यह उन लोगों के लिए सबसे अच्छा खरीदारी विकल्प है जो हमेशा व्यस्त होते हैं

2। उत्पाद और मूल्य तुलना की अनुमति देता है: फिर, खरीदारी करते समय, ग्राहक सर्वोत्तम सौदों प्राप्त करना चाहते हैं यह व्यवसाय मॉडल उपभोक्ताओं द्वारा उत्पाद और कीमत की तुलना के लिए अनुमति देता है ताकि बेहतरीन उत्पादों को बेहतरीन कीमतों पर खरीदा जा सके। वे डिस्काउंट, कूपन, बिक्री पर आइटम जैसे अतिरिक्त लाभों का आनंद ले सकते हैं और सर्वश्रेष्ठ सौदों भी प्राप्त कर सकते हैं।

3. आसान फंड-स्थापना शुरुआती उपक्रमों के लिए: इतने सारे लोग व्यापार में उद्यम की इच्छा रखते हैं लेकिन दुकान की स्थापना करने के लिए पर्याप्त धन नहीं है। भौतिक स्टोर पट्टे पर काफी महंगा हो सकता है। ई-कॉमर्स व्यवसाय शुरू करने और बढ़ने के लिए शुरू-शुरू करने में आसान बनाता है।

4. कुशल: संसाधन कुशलतापूर्वक उपयोग किए जाते हैं क्योंकि अधिकांश व्यावसायिक सेवाएं स्वचालित होती हैं। व्यवसाय स्वामी कभी-कभी व्यवसाय की जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुत सारे संसाधन खर्च करते हैं और यह लाभ में खाती है ई-कॉमर्स दक्षता पर पनपती

5. ग्राहक पहुंच: इंटरनेट पर कई ग्राहकों तक पहुंचना आसान है सोशल मीडिया लिंक और अच्छे खोज इंजन अनुकूलन रणनीतियों का उपयोग करना, एक ऑनलाइन व्यवसाय ब्रांड जागरूकता बढ़ाने और अपने ग्राहक आधार को बढ़ा सकता है।

6. शीघ्र भुगतान: भुगतान ऑनलाइन हैं क्योंकि ऑनलाइन स्टोर इलेक्ट्रॉनिक या मोबाइल लेनदेन भुगतान विधियों का उपयोग करते हैं। मर्चेंट खातों के लिए मोबाइल वॉलेट सिस्टम बिक्री को बढ़ाती है और राजस्व पीढ़ी में वृद्धि करता है।

7. विभिन्न उत्पादों को बेचने की योग्यता: इंटरनेट पर व्यवसाय चलाने की लचीलापन, उद्यमियों को कई उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने और एक व्यापक जनसांख्यिकीय को पूरा करने के लिए संभव बनाता है।

नुकसान

1. गरीब गुणवत्ता वाले उत्पादों: आप शारीरिक रूप से देख नहीं सकते हैं और जो कुछ भी दे रहे हैं उसके लिए आप जो भुगतान कर रहे हैं उसका निरीक्षण करें। इसलिए, ग्राहक, झूठे विपणन के लिए शिकार गिरने और आभासी दुकान से खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों को खरीदने के जोखिम को चलाते हैं।

2. आवेगी खरीद: ऑनलाइन स्टोर बड़ी संख्या में उत्पादों को प्रदर्शित करते हैं और शॉपिंग की सुविधा के कारण, ग्राहकों को आवेगी खरीद के माध्यम से बुरा वित्तीय निर्णय लेने के लिए मिल सकता है।

3. इंटरनेट स्कैमर: इंटरनेट एक अच्छी बात है लेकिन कुछ लोगों ने इसे गलत कारणों से इस्तेमाल करने का फैसला किया है। स्कैमर ने कुछ उपभोक्ताओं के लिए इस प्रकार के व्यावसायिक मॉडल को बदसूरत बना दिया है।

4. बिक्री के बाद समर्थन का अभाव: शारीरिक परिसर की कमी के परिणामस्वरूप, ग्राहकों को बिक्री समर्थन के बाद तक पहुंचने में मुश्किल लगता है। जरूरत के मुताबिक किसी भी मदद के लिए किसी भी मदद की ज़रूरत होने से पहले कई दिन लग सकते हैं।

5. तेजी से बदलते कारोबारी माहौल: प्रौद्योगिकी इतनी तेज विकसित होती है कुछ उद्यमियों को इस प्रक्रिया में बहुत अधिक व्यवसाय को बरकरार रखना और खोना मुश्किल लगता है। इससे व्यापारिक विकास अप्राप्य हो सकता है

6. निजी स्पर्श की हानि: व्यापार सभी रिश्तों के बारे में है यह व्यवसाय मॉडल ग्राहक और व्यवसाय के मालिक के बीच निजी स्पर्श को मिटाता है। इस तरह से वफादारी की खेती एक समस्या हो सकती है क्योंकि ऐसे कई ऐसे व्यवसाय हैं जो अलग-अलग विकल्प प्रदान करते हैं।

7. माल की डिलिवरी में देरी हो सकती है: आदेश दिया गया सामान वितरित होने से पहले समय लगता है। कभी-कभी डिलीवरी देरी और ग्राहक को ये असुविधाएं यह भौतिक व्यवसाय परिसर से अलग है जहां ग्राहक खरीदे गए उत्पादों से बाहर निकलते हैं।

निष्कर्ष

प्रौद्योगिकी निश्चित रूप से अच्छी बात है क्योंकि इससे संचार और सूचनाओं तक पहुंच आसान हो गई है। इसने दुनिया को एक वैश्विक गांव बना दिया है और उद्यमियों के लिए एक अद्भुत मंच बनाया है जो अपने उद्यमों का विस्तार करना चाहते हैं। ई-कॉमर्स आधुनिक दुनिया के लिए एक व्यवसाय मॉडल है और सही रणनीतियों को अपनाने के साथ, यह एक छोटे व्यवसाय को एक साम्राज्य में बदल सकता है

ई कॉमर्स फायदे, ई कॉमर्स के लाभ, ई कॉमर्स चे फायदे व तोटे, ई-कॉमर्स औरव्यापार के बीच का अंतर,  कॉमर्स बिज़नेस, टाइप्स ऑफ़ इ कॉमर्स इन हिंदी, ई कॉमर्स मराठी माहिती project, ई कॉमर्स चे महत्व, essay on e commerce pdf, e-commerce essay topics, e commerce essays advantages and disadvantages, essay on e commerce in hindi, essay on ecommerce in india, e-commerce essay conclusion, what is e commerce, types of e commerce wikipedia, 

समाचार पत्र पर निबंध-Essay On Newspaper In Hindi

समाचार पत्र पर निबंध-Essay On Newspaper In Hindi Hindi Essay in 100-200 words, Hindi Essay in 500 words, Hindi Essay in 400 words, list of hindi essay topics, hindi essays for class 4, hindi essays for class 10, hindi essays for class 9, hindi essays for class 7, hindi essay topics for college students, hindi essays for class 6, hindi essays for class 8

समाचार पत्र पर निबंध-Essay On Newspaper In Hindi

समाचार पत्र पर निबंध (Essay On Newspaper In Hindi) :

भूमिका : मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है क्योंकि उसमें बुद्धि और ज्ञान है। जितना ज्ञान मनुष्य में रहता है वह उससे और अधिक प्राप्त करना चाहता है और इसके लिए तरह-तरह के साधनों का अविष्कार करता है। विज्ञान ने संसार को बहुत छोटा बना दिया है। आवागमन के साधनों की वजह से स्थानीय दूरियां खत्म हो गयी हैं।

रेडियों , दूरदर्शन और समाचार पत्रों ने संसार को एक परिवार के बंधन में बांध दिया है। इन साधनों की मदद से हम घर पर बैठकर दूर के देशों की खबर पढ़ लेते हैं और सुन भी लेते हैं। इन साधनों की मदद की वजह से हमें दुसरे देशों में जाना नहीं पड़ता है।

कहाँ पर क्या घटित हुआ है किस देश की गतिविधियाँ क्या है यह बात हमें घर बैठे समाचार पत्रों से ही प्राप्त हो जाती है। मनुष्य के जीवन में जितना महत्व रोटी और पानी का होता है उतना ही समाचार पत्रों का भी होता है। आज के समय में समाचार पत्र जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग बन चूका है। समाचार पत्र की शक्ति असीम होती है।

प्रजातंत्र शासन में इसका बहुत अधिक महत्व होता है। देश की उन्नति और अवनति दोनों समाचार पत्रों पर निर्भर करती है। भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में भी समाचार पत्रों और उनके संपादकों का विशेष योगदान रहा है। सुबह-सुबह जब हम उठते हैं तो हमारा ध्यान सबसे पहले समाचार पत्रों पर जाता है।

जिस दिन भी हम समाचार नहीं पढ़ते हैं , हमारा वह दिन सूना-सूना प्रतीत होता है। आज के समय में संसार के किसी भी कोने का समाचार सारे संसार में कुछ ही पलों में बिजली की तरह फ़ैल जाता है। मुद्रण कला के विकास के साथ समाचार पहुँचने के लिए समाचार-पत्रों का प्रादुर्भाव हुआ। आज के समय में रोज पुरे संसार में समाचार-पत्रों द्वारा समाचारों का विस्तृत वर्णन पहुंच रहा है। वर्तमान समय में संसार के किसी भी कोने में कोई भी घटना घटित ही जाए दुसरे दिन उसकी खबर हमारे पास आ जाती है।

भारत में समाचार पत्र का आरंभ : भारत में अंग्रेजों के आने से पहले समाचार पत्रों का प्रचलन नहीं था। अंग्रेजों ने ही भारत में समाचार पत्रों का विकास किया था। सन् 1780 में कलकत्ता में भारत का सबसे पहला समाचार पत्र प्रकाशित किया गया जिसका नाम दी बंगाल गैजेट था और इसका सम्पादन जेम्स हिक्की ने किया था। यही वो पल था जिसके बाद से समाचार पत्रों का विकास हुआ था।

भारत में सबसे पहले समाचार दर्पण का प्रकाशन आरम्भ हुआ था। समाचार दर्पण के बाद उदंत मार्तंड का प्रकाशन भी आरम्भ हुआ था। उसके तुरंत बाद , 1850 में राजा शिवप्रसाद सितारेहिंद ने बनारस अख़बार को प्रकाशित किया था। इसके बाद भारत में बहुत सी पत्रिकाओं का संपादन किया गया।

जिस तरह से मुद्रण कला का विकास होने लगा उसी तरह से समाचार पत्रों की भी संख्या बढने लगी थी। आज देश के प्रत्येक भाग में समाचार पत्रों का प्रकाशन हो रहा है। कुछ ऐसे राष्ट्रिय स्तर के समाचार भी होते हैं जिनका प्रकाशन नियमित रूप से होता है।

दैनिक हिंदुस्तान , नवभारत टाईम्स , दैनिक ट्रिब्यून , पंजाब केसरी हिंदी भाषा में प्रकाशित कुछ प्रसिद्ध समाचार पत्र होते हैं। इसी तरह से अंग्रेजी में बहुत से ऐसे प्रसिद्ध समाचार पत्र हैं जो पुरे भारतवर्ष में पढ़े जाते हैं। आज के समय में समाचार पत्रों का उद्योग एक स्थानीय उद्योग बन चूका है क्योंकि इससे लाखों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े होते हैं।

समाचार-पत्रों का उद्भव और विकास : प्राचीन काल में समाचार पाने और भेजने के बहुत से साधन थे जैसे – कबूतर , घोडा , बाज , सन्देशवाहक , भ्रमणकारी , पंडित तथा फकीर आदि। देवताओं के संदेशों को एक जगह से दूसरी जगह पर पहुँचाने का काम भी नारद जी करते थे। वे तीनों लोकों में समाचारों को फैलाते थे। वर्तमान समय के नारद हैं समाचार पत्र।

छापाखाना के आविष्कार के बाद समाचार पत्र छपने लगे। मुगलों के जमाने में भारत का पहला समाचार पत्र निकला अखबार इ मुअल्ले निकला था जो हाथ से लिखा जाता था। समाचार-पत्रों का उद्भव 16 वीं शताब्दी में चीन में हुआ था। संसार का सबसे पहला समाचार पत्र पेकिंग गजट है , लेकिन यह समाचार पत्र का नितांत प्रारम्भिक और प्राचीन रूप है। लेकिन समाचार पत्र के आधुनिक और परिष्कृत रूप का सबसे पहले प्रयोग मुद्रण के रूप में 17 वीं शताब्दी में इटली के बेसिन प्रान्त में हुआ था।

उसके समाचारों को दुसरे स्थानों तक भी पहुंचाया गया था। फिर धीरे-धीरे यूरोप के अन्य देशों में भी इसका विकास बढ़ता गया था। समाचार पत्र का मुद्रण के साथ घनिष्ट संबंध होता है। जिस तरह से मुद्रण यंत्रों का विकास होता गया उसी तरह से समाचार पत्रों का भी विकास उत्तरोतर होता है। आज समाचार पत्र राष्ट्रिय स्तर पर ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संसार में प्रयोग में लाये जाते हैं।

समाचार पत्रों के भेद : समाचार पत्र कई प्रकार के होते हैं। समाचार पत्रों को दैनिक , साप्ताहिक , पाक्षिक , मासिक , त्रैमासिक , वार्षिक आदि भागों में बांटा जाता है। दैनिक समाचार पत्रों में हर तरह के समाचार को प्रमुखता दी जाती है। एनी पत्रिकाओं में समसामयिक विषयों पर विभिन्न लेखकों के लेख , किसी भी घटना की समीक्षा , किसी भी गणमान्य जन का साक्षात्कार प्रकाशित होता है। बहुत सी पत्रिकाएँ साल में एक बार विशेषांक निकालती हैं जिसमें साहित्यिक , राजनैतिक , धार्मिक , सामाजिक , पौराणिक विषयों पर ज्ञानवर्धक , सारगर्भित सामग्रियों का वृहंद संग्रह होता है।

जनप्रतिनिधि : आज के समय में समाचार पत्र जनता के विचारों के प्रसार का सबसे बढ़ा साधन सिद्ध हो रहे हैं। समाचार पत्र धनिकों की वस्तु न होकर जनता की आवाज है। समाचार पत्र शोषितों और दलितों की पुकार होते हैं। आज के समय में समाचार पत्र माता-पिता , स्कूल-कॉलेज , शिक्षक , थियेटर के आदर्श और उत्प्रेरक हैं।

समाचार पत्र हमारे परामर्शदाता और साथी सब कुछ होते हैं। इसी वजह से समाचार पत्र सच्चे अर्थों में जनता के विचारों का प्रतिनिधित्व करते हैं। समाचार पत्र बीते हुए कुछ घंटों पहले का ताजा और अच्छा चित्रण करते हैं। इसी वजह से समाचार पत्रों के लिए कहा जाता है कि सुबह के समाचार से ताजा कुछ नहीं और शाम के समाचार से बासी कुछ नहीं।

जन जागरण का माध्यम : समाचार पत्रों से हमें केवल समाचार ही प्राप्त नहीं होते हैं बल्कि जन-जागरण का भी माध्यम होता है। समाचार पत्र मानव जाति को समीप लाने का भी काम करते हैं। जिन देशों में लोकतंत्र की स्थापना हो चुकी है वहां पर उनका विशेष महत्व होता है। समाचार पत्र लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों से परिचित कराते हैं।

समाचार पत्र सरकार के उन कामों की कड़ी आलोचना करते हैं जो देश के लिए या जनसाधारण के लिए लाभकारी नहीं है। खुशी की बात यह है कि दो-चार समाचार पत्रों को छोडकर शेष सभी अपने दायित्व को अच्छी तरह से निभा रहे हैं। आपातकालीन स्थिति में हमारे देश के समाचार पत्रों ने अच्छी भूमिका निभाई और अन्याय तथा अत्याचार का डटकर विरोध किया।

विविधता : आखिर दो-तीन रुपए के समाचार पत्र में क्या नहीं होता है ? कार्टून , देश भर के महत्वपूर्ण और मनोरंजक समाचार , संपादकीय लेख , विद्वानों के लेख , नेताओं के भाषण की रिपोर्ट , व्यापार और मेलों की सूचना , विशेष संस्करणों में स्त्रियों और बच्चों के उपयोग की सामग्री , पुस्तकों की आलोचना , नाटक , कहानी , धारावाहिक , उपन्यास , हास्य व्यंग्यात्मक लेख आदि विशेष सामग्री शामिल होती है।

समाज सुधार : समाचार पत्र सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में सहायता करते हैं। समाचार पत्रों से बड़ों-बड़ों के मिजाज ठीक हो जाते हैं। समाचार पत्र सरकारी नीति के प्रकाश और खंडन का सुंदर साधन होता है। इसके द्वारा शासन में भी सुधार किया जा सकता है।

समाचार पत्रों के लाभ : समाचार पत्र समाज के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। समाचार पत्र विश्व में आपसी भाईचारे और मानवता की भावना उत्पन्न करते हैं और साथ-ही-साथ सामाजिक रुढियों , कुरीतियों , अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाते हैं। यही नहीं , ये लोगों में देशप्रेम की भावना भी उत्पन्न करते हैं। ये व्यक्ति की स्वाधीनता और उसके अधिकारों की भी रक्षा करते हैं।

चुनाव के दिनों में समाचार-पत्रों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जाती है। आज के समय में किसी भी प्रकार की शासन पद्धति ही क्यों न हो लेकिन समाचार पत्र ईमानदारी से अपनी भूमिका निभाते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति निक्सन के विरुद्ध समाचार पत्रों ने ही तो जनमत तैयार किया था। इसी तरह से समाचार-पत्रों के संपादकों और पत्रकारों ने अन्याय का विरोध करने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था।

समाचार पत्र विविध क्षेत्रों में घटित घटनाओं के समाचारों को चारों ओर प्रसारित करने के सशक्त माध्यम हैं। प्रत्येक देश के शसकों के विभिन्न कार्यक्रमों को समाचार पत्र यत्र-तत्र-सर्वत्र प्रसारित करते हैं। संसार में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे विश्व संगठनों की विभिन्न गतिविधियों को समाचार पत्रों द्वारा ही दूर-दूर तक पहुंचाया जाता है।

हमारे देश में कई प्रमुख राष्ट्रिय स्तर के समाचार पत्र हैं जिनके संवाददाता हर क्षेत्र में विद्यमान रहते हैं जो अपने-अपने क्षेत्र की घटनाओं को मुख्य कार्यालय को प्रेषित करते हैं। समाचार पत्रों से ही हमें नवीन ज्ञान मिलता है। नए अनुसंधान , नई खोजों की जानकारी हमें समाचार पत्रों से ही मिलती है।

समाचार पत्रों में प्रकाशित होने वाली सरकारी सूचनाओं , आज्ञाओं और विज्ञापनों से हमें आवश्यक और महत्वपूर्ण जानकारी मिल जाती है। समाचार पत्र एक व्यवसाय बन गया है जिससे हजारों संपादकों , लेखकों , रिपोर्टरों व अन्य कर्मचारियों को जीविका का साधन भी मिलता है। समाचार पत्रों से पाठक का मानसिक विकास होता है।

उनकी जिज्ञासा शांत होती है और साथ-ही-साथ ज्ञान पिप्सा भी बढ़ जाती है। समाचार पत्र एक व्यक्ति से लेकर सरे देश की आवाज होते हैं जो अन्य देशों में पहुंचती है। समाचार पत्रों से भावना एवं चिन्तन के क्षेत्र का विकास होता है। समाचार पत्रों में रिक्त स्थानों की सूचना , सिनेमा जगत के समाचार , क्रीडा जगत की गतिविधियाँ , परीक्षाओं के परिणाम , वैज्ञानिक उपलब्धियाँ , वस्तुओं के भावों के उतार-चढ़ाव , उत्कृष्ट कविताएँ चित्र , कहानियाँ , धारावाहिक , उपन्यास आदि प्रकाशित होते हैं। समाचार पत्रों के विशेषांक बहुत उपयोगी होते हैं। इनमें महान व्यक्तियों की जीवन गाथा , धार्मिक , सामाजिक आदि उत्सवों का बड़े विस्तार से परिचय रहता है।

व्यापार वृद्धि : समाचार पत्र व्यापार के सर्वसुलभ साधन होते हैं। क्रय करने वाले और विक्रय करने वाले दोनों ही अपनी सुचना का माध्यम समाचार पत्रों को बनाते हैं। समाचार पत्रों से जितना अधिक लाभ साधारण जनता को होता है उतना ही लाभ व्यापारियों को भी होता है। बाजारों का उतार-चढ़ाव भी इन समाचार पत्रों की सूचनाओं पर चलता है। सभी व्यापारी बड़ी उत्कंठा से समाचार पत्रों को पढ़ते हैं।

शिक्षा के साधन : समाचार पत्र केवल समाचारों का ही प्रसारण नहीं करते हैं अपितु बहुत से विषयों में ज्ञानवर्धन में । बहुत सहायक होते हैं। नियमित रूप से समाचारों को पढने से बहुत लाभ होते हैं। समाचार पत्रों को पढने से इतिहास , भूगोल , राजनीति , साहित्य , विज्ञान और मानवदर्शन का ज्ञान सहज में ही हो जाता है।

विभिन्न साप्ताहिक , पाक्षिक व मासिक पत्रिकाओं में अनेक साहित्यिक व दार्शनिक लेख निकलते रहते हैं जो विभिन्न अनुभवी एवम् विद्वान लेखकों द्वारा संकलित होते हैं। दैनिक समाचार पत्र के सम्पादकीय में समसामयिक विषयों पर अत्यंत सारगर्भित विचार व रहस्यपूर्ण जानकारी निकलती रहती है , जिससे उस विषय का गहन ज्ञान प्राप्त होता है।

मनोरंजन के साधन : समाचार -पत्रों से जनता का मनोरंजन भी होता है। दैनिक पत्रों में , विशेषकर शनिवार व रविवार के पत्रों में कई मनोरंजक कहानियाँ , चुटकुले , प्रहसन , पहेलियाँ आते हैं। इसके अलावा साप्ताहिक , पाक्षिक व मासिक पत्रिकाओं में तो मनोरंजन की भरपूर सामग्री उपलब्ध होती है। समाचार पत्रों में कहानी , गजलों और कविताओं का बहुत ही सुंदर संकलन होता है।

विज्ञापन : विज्ञापन भी आज के युग में बहुत महत्वपूर्ण हो रहे हैं। सभी लोग विज्ञापन वाले पृष्ठ को जरुर पढ़ते हैं क्योंकि इसी के सहारे वे अपनी जीवन यात्रा का प्रबंध करते हैं। समाचार पत्रों में अनेक व्यवसायिक विज्ञापन निकलते रहते हैं जिनमें विभिन्न कम्पनियों में निर्मित वस्तुओं का प्रचार किया जाता है।

इनसे पाठकों को हर वस्तुओं के गुण , दोष व उपयोग का ज्ञान होता है। समाचार पत्रों में सरकारी , गैर सरकारी व निजी क्षेत्रों में नौकरियों के लिए भी विज्ञापन आते हैं जिनमें पाठक अपनी योग्यता के अनुसार प्रार्थना पत्र भेजते हैं। बहुत से पत्र तो पूर्णरूपेण रोजगार के लिए ही प्रकाशित होते हैं जैसे रोजगार समाचार आदि।

इन्हीं विज्ञापनों में नौकरी की मांगें , वैवाहिक विज्ञापन , व्यक्तिगत सूचनाएँ और व्यापारिक विज्ञापन आदि होते हैं। जो चित्रपट जगत् के विज्ञापन होते हैं उनके लिए विशेष पृष्ठ होते हैं। समाचार पत्र विज्ञान का एक सशक्त माध्यम होता है। उपभोग की वस्तुओं के विज्ञापनों को इन्हीं में छापा जाता है।

समाचार -पत्रों से हानियाँ : समाचार पत्र से जितने लाभ होते हैं उतनी हानियाँ भी होती हैं। समाचार पत्र सीमित विचारधाराओं में बंधे होते हैं। प्राय: पूंजीपति ही समाचार पत्रों के मालिक होते हैं और ये अपना ही प्रचार करते हैं। कुछ समाचार पत्र तो सरकारी नीति की भी पक्षपात प्रशंसा करते हैं।

कुछ ऐसे भी समाचार पत्र होते हैं जिनका एकमात्र उद्देश्य केवल सरकार का विरोध करना होता है। ये दोनों ही बातें उचित नहीं होती हैं। समाचार पत्रों से पूरा समाज प्रभावित होता है। समाचार पत्र कभी-कभी झूठे और बेकार के समाचारों को छापना शुरू कर देते हैं। कभी-कभी तो समाचार पत्र सच्चाई को तोड़-तोडकर छाप देते हैं। इसी तरह से साम्प्रदायिकता का जहर फ़ैलाने में भी कुछ समाचार पत्र भाग लेते हैं।

जो लोग समाज को लूटते हैं और प्रभावशाली लोगों के दवाब में आकर वे उनके खिलाफ कुछ नहीं लिखते हैं। इसकी वजह से समाज में भ्रष्टाचार और अन्याय को बहुत बल मिलता है। कुछ समाचार पत्र पूंजीपतियों की संपत्ति होते हैं। उन समाचार पत्रों से न्याय , मंगल और सच्चाई की आशा ही नहीं की जा सकती है।

कुछ संपादकों और संवाददाता अमीरों तथा राजनीतिज्ञों के हाथ में बिककर उलटे-सीधे समाचार छापकर जनता को गुमराह करते हैं। समाचार पत्रों में सरकार की सही नीतियों को भी कभी-कभी गलत तरीके से पेश करके जनता को भ्रमित किया जाता है। अश्लील विज्ञापन लोगों के मनों में विशेषरूप से बच्चों के मन में कुत्सित भावना उत्पन्न करते हैं। कुछ विज्ञापनों को जनता को ठगने के लिए दिया जाता है।

उपसंहार : जो वस्तु जितनी अधिक महत्वपूर्ण होती है उसका दायित्व भी उतना ही अधिक होता है। समाचार -पत्र स्वतंत्र , निर्भीक , निष्पक्ष , सत्य के पुजारी होते हैं लेकिन उनका लगातार जागरूक होना जरूरी है। समाज में फैले हुए अत्याचार , अनाचार , अन्याय और अधर्म का विरोध करना ही समाचार पत्रों का दायित्व होता है।

इसी तरह से रुढियों , कुप्रथाओं और कुरीतियों का उन्मूलन करने में भी समाचार पत्र बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आधुनिक युग में समाचार पत्रों का बहुत अधिक महत्व है। समाचार पत्रों का उतरदायित्व भी होता है कि उसके समाचार निष्पक्ष हों , किसी विशेष पार्टी या पूंजीपति के स्वार्थ का साधन न बनकर रह जाये।

आज की लोकप्रियता व्यवस्था में समाचार पत्रों का अत्यधिक महत्व होता है। समाचार पत्र ज्ञानवर्धन के साधन होते हैं इसलिए उनका नियमित रूप से अध्धयन करना चाहिए। समाचार पत्रों के बिना आज का युग अधुरा होता है। समाचार पत्रों की ताकत बहुत बड़ी होती है। आधुनिक युग में शासकों को जिसका भय होगा वे समाचार पत्र हैं।

किसी भी देश में समाचार पत्रों की स्वतंत्रता पर अंकुश नहीं लगाना चाहिए। गंदे , अश्लील और भ्रामक पत्रों पर रोक लगनी चाहिए। समाचार पत्रों के लाभ और हानि का पूरा भर संपादक के ऊपर ही निर्भर करता है। सम्पादक को महत्व को अच्छी तरह से समझना चाहिए। अगर वे धर्म , जाति , निजी लाभ जैसे विषयों को छोडकर ईमानदारी से अपना काम करे तो वास्तविक रूप में देश की सच्ची सेवा कर सकते हैं। सम्पादक जनता के विचारों का प्रतिनिधित्व करता है। उसे निर्भय होकर जनता के विचारों को अपनाना चाहिए और देश को उन्नति का मार्ग दिखाना चाहिए।

समाचार पत्र पर निबंध-Essay On Newspaper In Hindi

समाचार पत्र पूरे संसार भर की खबरों का संग्रह होता है, जो हमें विश्व में होने वाली सभी घटनाओं के बारे में जानकारी देता है। हमें नियमित रुप से अखबार पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। यह बहुत ही अच्छी आदत है। आपको अपने बच्चों को इस आदत के लिए बढ़ावा देना चाहिए और उन्हें समाचार पत्र के विषय पर स्कूल या कॉलेज में होने वाली निबंध लेखन प्रतियोगिता या समूह परिचर्चा में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित भी करना चाहिए। हम यहाँ विद्यार्थियों के लिए कुछ सरल और आसान समाचार पत्र या अखबार पर निबंध उपलब्ध करा रहे हैं। वे इनमें से कोई भी समाचार पत्र पर निबंध अपनी आवश्यकता के अनुसार चुन सकते हैं:

समाचार पत्र पर निबंध (न्यूज़पेपर एस्से)

समाचार पत्र पर निबंध-Essay On Newspaper In Hindi

You can find here variety of essay on newspaper in Hindi language in different words limit like 100, 150, 250, 300, 350, and 450 words.

समाचार पत्र पर निबंध 1 (100 शब्द)

समाचार पत्र पर निबंध-Essay On Newspaper In Hindi

आजकल, बिना समाजार पत्र के जीवन की कल्पना करना कठिन है। यह वो पहली और आवश्यक वस्तु है, जिसे सभी हर सुबह सबसे पहले देखते हैं। यह पूरे विश्व में हो रही घटनाओं के बारे में जानकारी देकर वर्तमान समय से जुड़े रखने में हमारी मदद करता है। यह हमें इस बात की जानकारी देता है कि समाज, देश और विश्व में क्या चल रहा है। अखबार विश्व के हरेक कोने से प्रत्येक सूचना और खबर व सभी के प्रमुख विचारों को लाता है। समाचार पत्र व्यापारियों, राजनितिज्ञों, सामाजिक मुद्दों, बेरोजगारों, खेल, अन्तर्राष्ट्रीय समाचार, विज्ञान, शिक्षा, दवाईयों, अभिनेताओं, मेलों, त्योहारों, तकनीकियों आदि की जानकारी देता है। यह हमारे ज्ञान कौशल और तकनीकी जागरुकता को बढ़ाने में मदद करता है।

समाचार पत्र

समाचार पत्र पर निबंध 2 (150 शब्द)

समाचार पत्र पर निबंध-Essay On Newspaper In Hindi

वर्तमान समय में, समाचार पत्र की क्रान्ति पूरे विश्व में फैल गई हैं। आजकल, सभी अपने ज्ञान के बारे में अधिक जागरुक हो गए हैं। नियमित रुप से अखबार पढ़ना बहुत अच्छी आदत है। हम सभी को भी अपने जीवन में अखबार पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। यह हमें आधुनिक तरीकों और परम्पराओं के बारे में जानकारी देता है। यह हमें स्कूलों, कॉलेजों, न्यायालयों, नीतियों, कार्यालयों, होटलों, रेस्तराओं और बाजारों आने वाली अन्य नई चीजों के बारे में जानकारी देता है।

समाचार पत्र सबसे महत्वपूर्ण वस्तु है, जो सभी धर्म, जाति या जनजाति के द्वारा प्रयोग किया जाता है। यह हमारे स्कूल प्रोजैक्ट्स (परियोजनाओं) और ग्रह कार्यों को करने में मदद करता है। यह हमें शोधों, नई तकनीकियों, बाजार के ऊतार-चढ़ाव, और अन्य चीजों के बारे में जानकारी देता है। ब्रांड और भुगतान के अनुसार, समचार पत्र और पत्रिकाएं बहुत प्रकार के होते हैं। जिनमें देश विदेश की सभी तरह की सूचनाओं का संग्रह होता है।

समाचार पत्र पर निबंध 3 (250 शब्द)

समाचार पत्र पर निबंध-Essay On Newspaper In Hindi

आजकल, समाचार पत्र जीवन की एक आवश्यकता बन गया है। यह बाजार में लगभग सभी भाषाओं में उपलब्ध होता है। एक समाचार पत्र खबरों का प्रकाशन होता है, जो कागजों पर छापा जाता है और लोगों के घरों में वितरित किया जाता है। अलग-अलग देश अपना अलग समाचार संगठन रखते हैं। अखबार हमें अपने देश में हो रही सभी घटनाओं के साथ ही संसार में हो रही घटनाओं से भी अवगत कराते हैं। यह हमें खेल, नीतियों, धर्म, समाज, अर्थव्यवस्था, फिल्म उद्योग, फिल्म (चलचित्र), भोजन, रोजगार आदि के बारे में बिल्कुल सटीक जानकारी देता है।

पहले समय में, समाचार पत्रों में केवल खबरों का विवरण प्रकाशित होता था हालांकि, अब इसमें बहुत से विषयों के बारे में खबरें और विशेषज्ञों के विचार यहाँ तक कि, लगभग सभी विषयों की जानकारी भी निहित होती है। बहुत से समाचार पत्रों की कीमत बाजार में उनकी खबरों के विवरण और उस क्षेत्र में प्रसिद्धी के कारण अलग-अलग होती है। समाचार पत्र या अखबार में दैनिक जीवन की सभी वर्तमान घटनाएं नियमित रुप से छपती है हालांकि, उनमें से कुछ हफ्तें या सप्ताह में दो बार, एक बार या महीनें में एक बार भी प्रकाशित होती है।

समाचार पत्र लोगों की आवश्यकता और जरुरत के अनुसार लोगों के एक से अधिक उद्देश्यों की पूर्ति करता है। समाचार पत्र बहुत ही प्रभावी और शक्तिशाली होते हैं और संसार की सभी खबरों व सूचनाओं को एक साथ एक स्थान पर देते हैं। सूचनाओं की तुलना में इसकी कीमत बहुत कम होती है। यह हमें हमारे चारो ओर हो रही सभी घटनाओं के बारे में सूचित करता रहता है।


 

समाचार पत्र पर निबंध 4 (300 शब्द)

समाचार पत्र पर निबंध-Essay On Newspaper In Hindi

इन दिनों समाचार पत्र बहुत ही महत्वपूर्ण वस्तु है। यह सभी के लिए अपने दिन की शुरुआत करने के लिए पहली और महत्वपूर्ण वस्तु है। अपने दिन की शुरुआत ताजी खबरों और सूचनाओं के साथ करना बहुत ही बेहतर होता है। यह हमें आत्मविश्वासी बनाता है और हमारे व्यक्तित्व को सुधारने में हमारी मदद करता है। सुबह को सबसे पहले यह सभी को ढेर सारी सूचनाओं और खबरों से परिचित कराता है। देश का नागरिक होने के नाते, हम अपने देश व दूसरे देशों में होने वाली सभी घटनाओं और विवादों के बारे में जानने के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। यह हमें राजनीति, खेल, व्यापार, उद्योग आदि के बारे में सूचित करता है। यह हमें बॉलीवुड और व्यावसायिक हस्तियों के व्यक्तिगत जीवन के बारे में भी जानकारी देता है।

समाचार पत्र हमें संस्कृति, परम्पराओं, कलाओं, पारम्परिक नृत्य आदि के बारे में जानकारी देता है। ऐसे आधुनिक समय में जब सभी व्यक्तियों को अपने पेशे या नौकरी से अलग कुछ भी जानने का समय नहीं है, ऐसी स्थिति में यह हमें मेलों, उत्सवों, त्योहारों, सांस्कृतिक त्योहारों आदि का दिन व तारीख बताता है। यह समाज, शिक्षा, भविष्य, प्रोत्साहन संदेश और विषयों के बारे में खबरों के साथ ही रुचिपूर्ण वस्तुओं के बारे में बताता है, इसलिए यह हमें कभी भी नहीं ऊबाता है। यह हमें हमेशा संसार में सभी वस्तुओं के बारे में अपने रुचिपूर्ण विषयों के माध्यम से प्रोत्साहित करता है।

वर्तमान समय में, जब सभी लोग अपने जीवन में इतने व्यस्त है, ऐसे में उनके लिए बाहरी संसार के बारे में सूचनाओं या खबरों की जानकारी होना बहुत ही मुश्किल से संभव है, इसलिए समाचार पत्र इस तरह की कमजोरी को हटाने का सबसे अच्छा विकल्प है। यह हमें केवल 15 मिनट या आधे घंटे में विस्तृत जानकारी देता है। यह सभी क्षेत्रों से संबंधित व्यक्तियों के लिए बहुत ही लाभदायक है क्योंकि यह सभी के अनुसार जानकारियों को रखता है; जैसे- विद्यार्थियों, व्यापारियों, राजनेताओं, खिलाड़ियों, शिक्षकों, उद्यमियों आदि।

समाचार पत्र पर निबंध 5 (350 शब्द)

समाचार पत्र पर निबंध-Essay On Newspaper In Hindi

समाचार पत्र हमारे पास प्रतिदिन सुबह को आता है और मैं समाचार पत्र के साथ अपनी बॉलकनी में एक कप गर्म चाय के साथ बेहतर महसूस करता हूँ। समाचार पत्र दिन प्रति दिन अपने बढ़ते हुए महत्व के कारण सभी क्षेत्रों में बहुत ही प्रसिद्धी प्राप्त कर रहा है, चाहे वो क्षेत्र पिछड़ा हुआ हो या उन्नत। समाज में लोग अपने ज्ञान स्तर और सामयिक घटनाओं, विशेषरुप से राजनीति और बॉलीवुड के बारे में जानने के लिए अधिक सचेत हो गए है। विद्यार्थियों के लिए समाचार पत्र पढ़ना बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सभी के बारे में सामान्य जानकारी देता है। यह उनकी किसी भी सरकारी या गैर-सरकारी नौकरी के लिए तकनीकी या प्रतियोगी परीक्षा को पास करने में मदद करता है।

समाचार पत्र पढ़ना बहुत ही रुचि का कार्य है। यदि कोई इसे नियमित रुप से पढ़ने का शौकीन हो गया तो वह कभी भी समाचार पत्र पढ़ना नहीं छोड़ सकता/सकती। यह विद्यार्थियों के लिए बहुत अच्छा है क्योंकि यह हमें सही ढ़ंग से अंग्रेजी बोलना सिखाता है। अखबार अब देश के पिछड़े हुए क्षेत्रों में भी बहुत प्रसिद्ध हो गए हैं। किसी भी भाषा को बोलने वाला व्यक्ति समाचार पत्र पढ़ सकता है क्योंकि यह विभिन्न भाषाओं; जैसे- हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू आदि में क्षेत्रों के अनुसार उपलब्ध है। समाचार पत्र हम सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमारे लिए दुनिया भर के कोनों से सैंकड़ों खबरें लाता है।

समाचार हमारे लिए सबसे पहली रुचि और आकर्षण है। बिना समाचार पत्र और खबरों के, हम बिना पानी की मछली से अधिक और कुछ नहीं हैं। भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहाँ जनता का अपने देश पर शासन होता है, इसलिए उनके लिए राजनीति की सभी गतिविधियों को जानना बहुत आवश्यक है। आधुनिक तकनीकी संसार में, जहाँ सबकुछ उच्च तकनीकियों पर निर्भर करता है, समाचार और खबरें कम्प्यूटर और इंटरनेट पर भी उपलब्ध हैं। इंटरनेट का प्रयोग करके, हम संसार की सभी सूचनाओं को प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी सामाजिक मुद्दे के बारे में सामान्य जनता में जागरुकता बढ़ाने के लिए समाचार पत्र सबसे अच्छा तरीका है। यह देश की जनता और सरकार के बीच संवाद करने का सबसे अच्छा तरीका है।


 

समाचार पत्र पर निबंध 6 (450 शब्द)

समाचार पत्र पर निबंध-Essay On Newspaper In Hindi

समाचार पत्र बहुत ही शक्तिशाली यंत्र है जो व्यक्ति के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व को विकसित करता है। यह लोगों और संसार के बीच वार्ता का सबसे अच्छा साधन है। यह ज्ञान का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। यह अधिक ज्ञान और सूचना प्राप्त करने के साथ ही कुशलता के स्तर को बढ़ाने का सबसे अच्छा स्रोत है। यह सभी क्षेत्रों में बहुत ही कम कीमत पर उपलब्ध है। हम समाचार पत्रों तक आसानी से पहुँच सकते हैं। इसके लिए हमें केवल किसी भी समाचार पत्र के संगठन में सम्पर्क करके इसके लिए केवल भुगतान करने की जरुरत होती है। यह देश की विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित होता है। हरेक सुबह सभी पूरे साहस के साथ समाचार पत्र का इंतजार करते हैं।

समाचार पत्र समाज के लोगों को सकारात्मक रुप से प्रभावित करता है। सभी लोग देश की सामयिक घटनाओं को जानने में रुचि रखने लगे हैं। समाचार पत्र सरकार और लोगों के बीच जुड़ाव का सबसे अच्छा तरीका है। यह लोगों को पूरे संसार की सभी बड़ी व छोटी खबरों का विवरण प्रदान करता है। यह देश के लोगों को नियमों, कानूनों और अधिकारों के बारे में जागरुक बनाता है। समाचार पत्र विद्यार्थियों के लिए बहुत अधिक महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि ये विशेषरुप से राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का सामान्य ज्ञान और सामयिक घटनाओं के बारे में बताता है। यह हमें सभी खुशियों, विकासों, नई तकनीकियों, शोधों, खगोलीय और मौसम में बदलावों, प्राकृतिक वातावरण आदि की सूचना देता है।

समाचार पत्र में सामाजिक मुद्दों, मानवता, संस्कृति, परम्परा, जीवन-शैली, ध्यान, योगा आदि के बारे में बहुत अच्छे लेख भी होते हैं। यह सामान्य जनता के विचारों के बारे में भी सूचना रखता है और बहुत से सामाजिक और आर्थिक विषयों को सुलझाने में मदद करता है। इसके प्रयोग से राजनेताओं, निश्चित सरकारी नीतियों जिसमें दूसरे दलों की भी नीतियाँ शामिल होती है आदि के बारे में जाना जाता है। यह नौकरी ढूँढ़ने वालो की, बच्चों को अच्छे स्कूल में प्रवेश दिलाने, व्यापारियों को वर्तमान व्यापारिक गतिविधियों का जानने, बाजार के वर्तमान प्रचलन, नई रणनीतियों आदि में मदद करता है।

यदि हम प्रतिदिन नियमित रुप से समाचार पत्र पढ़ने की आदत बनाते है, तो यह हमारी बहुत मदद करता है। यह हम में पढ़ने की आदत विकसित करता है, हमारे प्रभाव में सुधार करता है और हमें बाहर के बारे में सभी जानकारी देता है। कुछ लोगों में समाचार पत्र को प्रत्येक सुबह पढ़ने की आदत होती है। वे समाचार पत्र की अनुपस्थिति में बहुत अधिक बेचैन हो जाते हैं और पूरे दिन कुछ अकेलापन महसूस करते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी भी अपने मस्तिष्क को वर्तमान सामयिक घटनाओं से जोडे रखने के लिए नियमित रुप से अखबार पढ़ते हैं। समाचार पत्र आकर्षक मुख्य शीर्षक लाइन के अन्तर्गत सभी की पसंद के अनुसार बहुत अधिक खबरों को प्रकाशित करते हैं इसलिए इससे कोई भी परेशान नहीं होता। हमें विभिन्न अखबारों को पढ़ना जारी रखना चाहिए और परिवार के अन्य सदस्यों और मित्रों को भी समाचार पत्र पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

essay on newspaper and its uses, essay on newspaper for class 10, essay on newspaper in odia, essay on newspaper advantages and disadvantages, essay on newspaper in kannada, benefits of reading newspaper essay, essay on importance of newspaper in student life, bengali essay on newspaper,

समाचार पत्र पर निबंध-Essay On Newspaper In Hindi

समाचार पत्र पर निबन्ध | Essay for Kids on Newspaper in Hindi!

1. भूमिका:

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी (A Social Being) है क्योंकि उसमें बुद्धि और ज्ञान है । जितना ज्ञान मनुष्य में रहता है, वह उससे और अधिकपाना चाहता है औ रइसके लिए तरह-तरह के साधनों (Means) का आविष्कार (Invention Discovery) करता रहता है । संसार भर की घटनाओं (Incidents) के बारे में ताजा जानकारी (Fresh information) पाने का ऐसा ही एक साधन है समाचार-पत्र ।

आज सूचना और जानकारी पाने के अनेक साधनों का आविष्कार हो चुका है जैसे रेडियो, टेलीविजन, मोबाइल टेलीफोन, इन्टरनेट द्वारा ई-मेल, वेबसाइट इत्यादि । किन्तु आज भी समाचार पत्रों का अपना एक अलग स्थान है ।

2. विकास:

प्राचीन काल (Ancient times) में समाचार पाने और भेजने के साधन थे – कबूतर, घोड़ा, बाज (Hawk) तथा संदेशवाहक (Messenger) आदि । भ्रमणकारी (Travellers), पंडित तथा फकीर आदि भी संदेश (Message) लाने-ले जाने का काम करते थे ।

देवताओं के संदेशवाहक नारद के बारे में तो सबने सुना होगा । वे तीनों लोकों में घूमते रहते थे और एक स्थान का समाचार दूसरे स्थान के लोगों को देते थे । आज के नारद हैं समाचार-पत्र । छापाखाना (Press) के आविष्कार के बाद समाचार पत्र छपने लगे । मुगलों के जमाने में भारत का पहला अखबार (Newspaper) निकला ‘अखबार इ मुअल्ले’ जो हाथ से लिखा जाता था ।

अंग्रेजों के समय में सन् 1780 में कलकत्ता से ‘इंडियन गजट’ नाम का समाचार पत्र निकला । इससे पहले हॉलैंड में 1526 में ही समाचार-पत्र निकलना शुरू हो गया था । हिन्दी का पहला पत्र ‘उदन्त मार्तंड’ था, जो सन् 1826 में कोलकाता में निकला था ।

आज दुनिया की सभी भाषाओं में समाचार-पत्र निकलते हैं । हिन्दी में दैनिक हिन्दुस्तान, नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता आदि प्रमुख समाचार पत्र आज-कल प्रकाशित हो रहे हैं । समाचार पत्र पी.टी.आई, भाषा, यू.एन.आई. यूनी.वार्ता, ए.ए.फपी, रॉयटर आदि एजेंसियों से टेलीप्रिंटरों और फैक्स के द्वारा समाचार तथा तस्वीरें प्राप्त करते हैं जिसके लिए अनेक संवाददाता (Correspondants ; News Reports) संसार के अनेक कठिन स्थानों पर पहुँचते रहते हैं और घर बैठे हमें सभी जगहों का समाचार मिल जाता है ।

3. लाभ-हानी:

समाचार पत्रों से हमें कहानियाँ चुटकले, लेख आदि अनेक प्रकार की चीजें पढ़ने को मिल जाती हैं । वे हमें सरकारों के बारे में बताते हैं और सरकारों (Governments) को हमारे बारे में । समाचार पत्र यदि कोई गलत समाचार प्रकाशित कर दें या गलत विचार फैला दें तो इससे समाज की बड़ी हानि हो सकती है । व्यापार के लिए ये वरदान (Boon) या अभिशाप (Bane) साबित हो सकते हैं ।

4. उपसंहार:

 

समाचार पत्र हमारे जीवन की एक जरूरी आवश्यकता (Essential Need) बन चुके हैं । इसके बिना हमारा काम नहीं चल सकता । समाचार पत्र राजा को रैक बना सकता है और रैक को राजा बना सकता है ।

 

मानव और विज्ञान पर निबंध-Science and Human Entertainment Essay In Hindi

मानव और विज्ञान पर निबंध-Science and Human Entertainment Essay In Hindi Hindi Essay in 100-200 words, Hindi Essay in 500 words, Hindi Essay in 400 words, list of hindi essay topics, hindi essays for class 4, hindi essays for class 10, hindi essays for class 9, hindi essays for class 7, hindi essay topics for college students, hindi essays for class 6, hindi essays for class 8

मानव और विज्ञान पर निबंध-Science and Human Entertainment Essay In Hindi

मानव और विज्ञान पर निबंध :

भूमिका : आज का मानव प्राचीन युग के मानव से बिलकुल अलग बन गया है। आज के युग को विज्ञान के चमत्कारों का युग माना जाता है। विज्ञान दो शब्दों से मिलकर बना है – वि+ज्ञान। जिसका अर्थ होता है किसी वस्तु का विशेष ज्ञान। आज के युग के विज्ञान की उन्नति को देखकर संसार चकित हो गया है।

विज्ञान को विवेक का द्वार माना जाता है। अपने भौतिक सुखों के लिए ही मानव विज्ञान की शरण में आया है और विज्ञान मानव के लिए कल्पवृक्ष सिद्ध हुआ है। विज्ञान के बहुत से अद्भुत आविष्कारों को देखकर मनुष्य ने दाँतों तले ऊँगली दबा ली है। विज्ञान की चकाचौंध से मनुष्य स्तब्ध रह गया है।

विज्ञान और आधुनिक जीवन : विज्ञान और जीवन का घनिष्ट संबंध होता है। विज्ञान ने ही मानव जीवन को सुखमय बनाया है। किसी विद्वान् का कहना है कि विज्ञान ने अंधों को आँखें और बहरों को सुनने के लिए कान दिए हैं। उसने जीवन को दीर्घ बनाया है और डर को कम कर दिया है। विज्ञान ने पागलपन को वश में कर लिया है और रोगों का नाश किया है। जहाँ पर मनुष्य को विज्ञान से इतने सुख मिले हैं वहीं पर दुःख भी प्राप्त हुए हैं। विज्ञान को मानव के लिए वरदान भी माना गया है और अभिशाप भी।

विज्ञान वरदान के रूप में : विज्ञान ने मनुष्य को अनेक सुख प्रदान किये हैं। जीवन के प्रत्येक क्रियाकलाप में विज्ञान का योगदान रहा है। विज्ञानं ने मनुष्य की कल्पनाओं को सच कर दिखाया है। विज्ञान ने भाप ,अणुशक्ति को अपने वश में करके मनुष्य के जीवन में चार-चाँद लगा दिए हैं। विज्ञान ने हेलिकोप्टर , हवाई जहाज जैसे यंत्रों का अविष्कार करके मनुष्य के सुख को चर्म सीमा तक पहुँचा दिया है।

विज्ञान ने मनुष्य के मनोरंजन के अनेक साधन प्रदान किये हैं। विज्ञान ने टेलीविजन , रेडियो , फोन , ग्रामोफोन , सिनेमा का अविष्कार करके मनुष्य के जीवन को बहुत ही रोचक बनाया है। आज हम विज्ञान की वजह से घर बैठे दूर-दूर के समाचारों को सुन और देख सकते हैं। विदेश में हो रहे कार्यक्रमों को भी हम घर बैठे आराम से देख सकते हैं। जहाँ पर सिनेमा को मनोरंजन के लिए प्रयोग किया जाता है वहीं पर दूसरी ओर सिनेमा को शिक्षा के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है।

विज्ञान के चमत्कार : विज्ञान के आविष्कारों ने मनुष्य के जीवन को बहुत ही आनन्दमय और रोचक बनाया है। लोग मशीनों के द्वारा ही पूरा काम खत्म कर लेते हैं। अन्न उगाने और कपड़ा बनाने के लिए मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है। पहले लोग मिट्टी से बने दीपक जलाकर घरों में रोशनी किया करते थे और आज के लोग बटन दबाते हैं और घर जगमगाने लगता है।

चिकित्सा क्षेत्र में विज्ञान का उपयोग : विज्ञान ने चिकित्सा में उन्नति करके एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक्स रे से शरीर के अंदर के चित्र ले लिए जाते हैं और दिल , गुर्दे , फेफड़े का ऑपरेशन किया जाता है। अंधों को दूसरों की आँखें देकर देखने के योग्य बनाया जाता है। कैंसर जैसे रोगों को समाप्त करने के लिए कोबाल्ट किरणों का अविष्कार किया जाता है।

विज्ञान अभिशाप के रूप में : लेकिन जब मनुष्य विज्ञान का गलत प्रयोग करने लगता है तो विज्ञान उसके लिए अभिशाप बन जाता है। जब मनुष्य को विज्ञान की भयानकता का पता चल जाता है तो मनुष्य का सारा उत्साह टूट जाता है। विज्ञान ने जिन आविष्कारों को मनुष्य के हित के लिए प्रयोग किया है वहीं पर उसके अहित के लिए भी प्रयोग किया है।

विज्ञान ने ऐटम बम और हाइड्रोजन बम बनाए हैं जिससे पूरा संसार एक पल में ही खत्म हो सकता है। जितना विनाश दूसरे विश्वयुद्ध में हुआ था उसकी पूर्ति विज्ञान सौ सालों में भी नहीं कर सकता है। हिरोशिमा और नागासाकी पर जो अणु बम्ब गिरे थे उनके परिणाम आज हमारे सामने हैं। बम्ब गिरने की वजह से वहाँ की संताने आज तक विकलांग पैदा होती हैं।

जब हम तीसरे विश्वयुद्ध की कल्पना करते हैं तो हमारा ह्रदय काँप उढ़ता है। विज्ञान के कारण ही प्रदुषण होता है। हवाई जहाजों से बम्ब गिराकर लोगों के घरों को तबाह कर दिया जाता है। विज्ञान से सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ है कि इसने मनुष्य को बेकार बना दिया है। मशीनी युग के आ जाने से बहुत से लोगों की रोजी रोटी छिन गई है।

वैज्ञानिक प्रगति की वजह से ही मनुष्य के नैतिक धारणाएँ शिथिल हो गई हैं। हस्तकला में निपुण लोग मशीनों के अविष्कार से बेकार हो गये हैं। विज्ञान ने मनुष्य को शक्ति तो दी है पर शांति नहीं , सुविधाएँ तो दी हैं लेकिन सुख नहीं दिया है।

उपसंहार : विज्ञान तो बस एक शक्ति होती है। विज्ञान का मनुष्य सदुपयोग भी कर सकता है और दुरूपयोग भी। असल में जो विनाश हुआ था उसका जिम्मेदार हम विज्ञान को नहीं मान सकते वह तो निर्जीव होता है। विज्ञान का सदुपयोग करना है या दुरूपयोग यह बात मनुष्य पर ही निर्भर करती है।

विज्ञान तो मनुष्य का दास होता है। मनुष्य उसे जैसी आज्ञा देता है विज्ञान वैसा ही करता है। विज्ञान एक तलवार की तरह होता है जिससे किसी को बचाया भी जा सकता है और मारा भी जा सकता है। विज्ञान के प्रयोग को मनुष्य जाति के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए मनुष्य जाति के विनाश के लिए नहीं।

मानव और विज्ञान पर निबंध-Science and Human Entertainment Essay In Hindi

विज्ञान और मानव-हित पर निबंध | Essay on Science and Human Interest in Hindi!

आधुनिक मानव समाज प्राचीन काल के मानव समाज से पूर्णतया भिन्न है ! उसके रहन-सहन, वेश-भूषा व परिस्थितियों में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिलता है । विगत कुछ दशकों में तो मनुष्य जीवन की कायापलट हो चुकी है ।

इस कायापलट अथवा इस परिवर्तन का संपूर्ण श्रेय विज्ञान को ही जाता है । यदि हम आधुनिक युग को विज्ञान का युग कहें तो कदापि अतिशयोक्ति न होगी, अपितु उपर्युक्त कथन ही आज के परिवेश को देखते हुए सर्वथा उपयुक्त होगा ।

मानव हित में विज्ञान की उपलब्धियाँ अनेक हैं । विज्ञान ने मनुष्य को यातायात के ऐसे साधन प्रदान किए हैं, कि जो दूरी हमारे पूर्वज महीनों-सालों में तय किया करते थे, आज वह दूरी कुछ दिनों, घंटों में तय की जा सकती है । साइकिल, दुपहिया वाहन, कारें व रेलगाड़ी सभी विज्ञान की देन हैं । गगन का चुंबन करते हवाई जहाज ने तो मानव को जैसे पंख ही प्रदान कर दिए हैं ।

चिकित्सा जगत में विज्ञान ने मानव-हित में बहुत कुछ दिया है । आज इस क्षेत्र में ऐसे उच्च तकनीक के उपकरण उपलब्ध हैं जिनके प्रयोग से असंभव व असाध्य समझे जाने वाले रोगों का भी इलाज संभव हो सका है । कैंसर, कुष्ठ रोग जैसी असाध्य समझी जाने वाली बीमारियों का इलाज भी विज्ञान ने संभव कर दिखाया है । यह विज्ञान की ही देन है जिसके कारण विश्व में मृत्यु-दर निरंतर घटती ही जा रही है ।

लंगड़े, लूले, बहरे व अन्य रूप से अपाहिज व्यक्तियों को विज्ञान ने कृत्रिम रूप प्रदान किए हैं, जिसकी मदद से मनुष्य अपेक्षाकृत सरल जीवन गुजार सकता है । अनेक प्रकार की महामारियों का विश्वसनीय इलाज आज इस क्षेत्र में उपलब्ध है । इतना ही नहीं, विज्ञान की मदद से आज के मानव कई खतरनाक रोगों से अपना पूर्व बचाव करने में भी सक्षम हैं । विभिन्न बीमारियों के टीके लगाकर हम उनसे सुरक्षित महसूस कर सकते हैं ।

संचार के क्षेत्र में भी विज्ञान के अद्‌भुत आविष्कारों ने मनुष्य को परस्पर संपर्क साधने के नए मार्ग विकसित कर दिए हैं । टेलीफोन, फैक्स, तार आदि के द्‌वारा विश्व के एक कोने से दूसरे कोने पर घर बैठे व्यक्ति से सीधे बात की जा सकती है अथवा उनसे संपर्क स्थापित किया जा सकता है या फिर सुगमता, त्वरित गति व विश्वसनीय रूप से सूचनाओं का आदान-प्रदान हो सकता है ।

कंप्यूटर के आविष्कार ने तो मानव जीवन में एक नई हलचल उत्पन्न कर दी है । एक कंप्यूटर 400 से भी अधिक मनुष्यों की कार्यक्षमता रखता है । कंप्यूटर के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान, छपाई, चिकित्सा, तकनीक व अंतरिक्ष आदि सभी क्षेत्रों में मनुष्य ने तीव्र गति से विकास प्राप्त किया है ।

 

कंप्यूटर के आविष्कार के बिना मनुष्य का चंद्रमा पर विजय पताका फहराना संभव नहीं था । कंप्यूटर के माध्यम से अब तथ्यों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है तथा आवश्यकता पड़ने पर कोई भी सूचना सैकेंडों में प्राप्त की जा सकती है ।

विज्ञान ने मनुष्य को मनोरंजन हेतु अनेकों नवीनतम साधन प्रदान किए हैं । रेडियो, दूरदर्शन, सिनेमा (चलचित्र) आदि मनोरंजन के नवीनतम साधन विज्ञान की ही देन हैं जिनके माध्यम से मनुष्य अपनी थकान, हताशा व जीवन की नैराश्यता को भुला कर नवीनता व हर्षोल्लास का सुखद अनुभव कर सकता है ।

आधुनिक विज्ञान ने अनेक प्राचीन भ्रांतियों को मिथ्या सिद्‌ध कर दिया है । जिस चंद्रमा की लोग देवता के रूप में पूजा करते थे उस पर आज मानव ने विजय प्राप्त कर ली है और यह सिद्‌ध कर दिया है कि वह भी पृथ्वी की ही भांति एक आकाशीय पिंड है । इसी प्रकार प्राचीन काल की अनेक बीमारियों को जिन्हें लोग दैवी प्रकोप समझते थे उनके इलाज की खोज कर विज्ञान ने अंधविश्वासों को समाप्त करने में सहायता की है ।

विज्ञान की अभूतपूर्व खोजों से संपूर्ण विश्व मानो सिमटता हुआ प्रतीत हो रहा है । हजारों मील की दूरी पर बैठा हुआ व्यक्ति अपने परिजनों से निरंतर संपर्क रख सकता है । वह उनसे बातचीत ही नहीं अपितु उन्हें चित्र पर देख भी सकता है ।

इसके अतिरिक्त दुनिया के एक कोने पर बैठे हुए व्यक्ति दुनिया के दूसरे छोर तक की यात्रा वायुयान के माध्यम से मात्र 24 घंटे के भीतर ही तय कर सकते हैं । वास्कोडिगामा एवं कोलंबस ने जो यात्रा अपने समय में महीनों व वर्षों में तय की थी आज वही यात्रा कुछ दिनों व घंटों में तय की जा सकती है ।

इस प्रकार हम देखते हैं कि प्राचीन काल के मानवों की तुलना में आधुनिक मानव के रहन-सहन व जीवन-यापन आदि के तरीकों में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है । मनुष्य समय के साथ कल्पनाओं की अपनी अनेक उड़ानों को यथार्थ रूप देने में सक्षम हुआ है । इन समस्त सफलताओं का श्रेय विज्ञान की अनगिनत देनों को जाता है ।

विज्ञान के नित नए आविष्कारों से मानव जीवन में और भी अधिक सुखद परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं ।  विज्ञान के क्षेत्र में उन्नति मानव जीवन के उत्थान का भी पर्याय बन गई है । भविष्य के प्रारूप की व्याख्या तो कोई भी व्यक्ति विश्वसनीय रूप में नहीं कर सकता है परंतु वर्तमान को नि:संदेह विज्ञान का ही युग कहा जा सकता है । विज्ञान आज मानव जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है ।

विज्ञान को अधिकाधिक प्रभावी एवं जनोम्मुखी बनाकर हम आने वाली विभिन्न चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकते हैं । वर्तमान युग की भी अनेक समस्याएँ ऐसी हैं जिन्हें विज्ञान की सहायता से हल किया जा सकता है यदि उसे मानवीय इच्छा-शक्ति का संबल प्राप्त हो जाए ।

 

मानव और विज्ञान पर निबंध-Science and Human Entertainment Essay In Hindi

परिचय: आधुनिक विज्ञान को मानव जाति पर वरदान माना गया है, क्योंकि यह हमारी आंखें खोली है और अज्ञान के अंधेरे को हटा दिया है जो हमें हमेशा गलत रास्ते पर ले गया।विज्ञान ने उम्र के पुराने विचारों और अंधविश्वासों को हटा दिया है और हमें सिखाया है कि चीजों को वैज्ञानिक रूप से कैसे देखें यह अंधविश्वासों को सिखाया जाता है कि ये सभी गलत हैं क्योंकि यह वैज्ञानिक तर्क और अवलोकन द्वारा समर्थित नहीं था। अतीत में लोगों का मानना ​​था कि पृथ्वी स्थैतिक और सूरज और दूसरे ग्रहों ने गोल किया था। लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने साबित कर दिया कि पृथ्वी और अन्य ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं इस प्रकार विज्ञान ने मानव विचार और क्रिया में कुल क्रांति लाई है और पूरी तरह से हमारे जीवन को बदल दिया है।

मानव जीवन में विज्ञान का योगदान: विज्ञान ने मनुष्यों के लिए अनेक चीजों का आविष्कार किया है इन वैज्ञानिक आविष्कारों ने हमारे जीवन को सहज बनाया है। आज हम मोमबत्तियों के बजाय बिजली की रोशनी का उपयोग कर रहे हैं। हम मोटर-कार, पंखे, टेलीविजन, रेडियो, एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन और कई अन्य चीजें इस्तेमाल कर रहे हैं।

विज्ञान ने कंप्यूटर, स्मार्टफोन, ईमेल और इंटरनेट का भी आविष्कार किया है जो हमारे काम को बहुत आसान और आरामदायक बना दिया है। आज सब कुछ मशीन द्वारा किया जाता है और मनुष्य को घर पर बस बैठकर इन सभी सुविधाओं का आनंद लेना पड़ता है।

सुख खुशी नहीं है: खुशी मन की एक अवस्था है। विज्ञान ने हमें खुश नहीं किया है और हमें खुशी नहीं ला सकता है क्योंकि खुशी ही आराम या विलासिता के समान नहीं है।

बल्कि जिन चीजों का हम उपयोग कर रहे हैं वे हमें बेकार, आश्रित और यांत्रिक बनाते हैं। आज हम विज्ञान के बिना कुछ भी करने में सक्षम नहीं हैं। हमने हमें सेवा देने के लिए मशीन बनायीं, लेकिन अब हम मशीन के दास बन गए हैं और यह हमारी दुःख में जोड़ता है। आज गैस की सिलिंडर के बिना खाना पकाना असंभव है और जब स्टॉक समाप्त हो जाता है या स्टॉक से बाहर हो जाता है तो हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

इस प्रकार हम आज जो पाते हैं वह यह है कि विज्ञान विज्ञान के इस युग में जीवन अधिक से अधिक यांत्रिक हो रहा है और हम ईमानदारी से महसूस करते हैं कि इन मशीनों द्वारा हम गलतिया जा रहे हैं। हमें लगता है कि हमें उस समय वापस जाना चाहिए जब विज्ञान वहां नहीं था और हम अन्य चीजों से काफी स्वतंत्र जीवन जीते हैं।

विज्ञान के खतरे: फिर से दूसरी चीजें हैं जो हमें दिन-प्रतिदिन अधिक दुखी हैं। इनमें परमाणु बम, हाइड्रोजन बम और अन्य खतरे शामिल हैं जो हमारे जीवन की सुरक्षा और सुरक्षा को खतरा देते हैं। यह विज्ञान के दुरुपयोग की वजह से है

निष्कर्ष: मानवता की सेवा में वैज्ञानिक शक्तियों का सही इस्तेमाल किया जाना चाहिए वैज्ञानिकों को उन चीजों की खोज करना चाहिए, जो जीवन को सुचारू और सुरक्षित बनाएंगे।

विज्ञान मानव जीवन को आसान और सहज बनाता है हालांकि, यह मानव जाति को कुछ जोखिमों को भी उजागर करता है। खुशी सुखद भावनाओं की आंतरिक भावना है। वैज्ञानिक खोज मानवीय उद्देश्यों पर आधारित होना चाहिए।