October 9, 2018 | Hindigk50k

प्रातःकाल का भ्रमण पर निबंध-Paragraph On Morning Walk In Hindi

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प्रातःकाल का भ्रमण पर निबंध-Paragraph On Morning Walk In Hindi

प्रातःकाल का भ्रमण पर निबंध :

भूमिका : व्यक्ति को सबसे पहले अपने स्वास्थ्य की सुरक्षा करनी चाहिए क्योंकि व्यक्ति के बहुत से कर्त्तव्य होते हैं। इन कर्त्तव्यों को बिना अच्छे स्वास्थ्य के पूरा नहीं किया जा सकता है। स्वास्थ्य की रक्षा के अनेक साधन होते हैं। प्रातःकाल के भ्रमण का इन साधनों में बहुत महत्व है।

प्रातःकाल का दृश्य दिन के सभी दृश्य के मुकाबले में अधिक मनोहर और मन मोह लेने वाला होता है। रात के बाद जब उषा की मधुर मुस्कान उत्पन्न होती है वो हमारे ह्रदय को जीत लेने वाली मुस्कान होती है। धरती के कण-कण में नया उल्लास और उमंग छा जाती है। ऐसे समय में भ्रमण करना बहुत ही लाभकारी होता है।

प्रकृति का सर्वश्रेष्ठ समय : प्रकृति प्रातःकाल सभी जीवों को स्वास्थ्य का वरदान देती है। अलग-अलग ऋतुओं की सुगंध वाली वायु भी उसी समय चलना शुरू होती है। चारों ओर आनन्द छाया होता है। खुशबू से भरे खिलखिलाने वाले फूल बहुत ही मोहक लगते हैं। जो फूल बेलों से झड़ते हैं उन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे वे धरती का श्रृंगार कर रहे हों।

चारों ओर हरियाली को देखकर मन मस्ती से भर जाता है। पक्षियों का चहचहाना मन को बहुत ही प्रसन्नता देता है। प्रातःकाल का सूर्य और अस्त होता हुआ सूर्य ऐसा लगता है जैसे भगवान की दो आँखें आँख-मिचौली खेल रही हो। जो मनुष्य ऐसे समय में भ्रमण करता है उसका स्वास्थ्य ही नहीं अपितु उसकी आयु भी दीर्घ होती है।

प्रातःकाल के भ्रमण के लाभ : प्रातःकाल के भ्रमण करने से मनुष्य के शरीर में फुर्ती के साथ-साथ नए जीवन का भी संचार होता है। हमारा मन अनेक प्रकार की खुशियों से भर जाता है। पुरे दिन काम करने से भी व्यक्ति थकता नहीं है। पूरे दिन मुंह पर तेज सा छाया रहता है। साफ हवा से रक्त भी साफ होता है। फेफड़ों को भी बल मिलता है।

जब बूंदों से सजी घास पर नंगे पैरों से चलते हैं तो दिमाग के सभी रोग ठीक हो जाते हैं। मनुष्य के शरीर में बुद्धि, तेज और यश की वृद्धि होती है। मनुष्य में परिश्रम और साहस की शक्ति आ जाती है। व्यक्ति के दो शत्रु होते हैं – आलस्य और काम। जो लोग प्रातःकाल का भ्रमण करते हैं उन लोगों के पास ये दोनों फटकते भी नहीं हैं।

प्रातःकाल का भ्रमण की हानियाँ : आजकल सभी लोग बैठकर काम करते हैं। सभी लोग सुबह से लेकर शाम तक बैठकर ही काम करते हैं। मनुष्य शरीर से परिश्रम बिलकुल भी नहीं करता है। शरीर के जिस भाग से काम नहीं किया जाता है वो नाकारा हो जाता है।

जब मनुष्य प्रातःकाल का भ्रमण करता है तो उसके शरीर का हर भाग हरकत करने लगता है। जो लोग बुद्धिजीवी होते हैं उनके चेहरे पीले और शरीर क्षीण दिखता है। व्यापारी, विद्यार्थी, अध्यापक, दफ्तर के क्लर्क ये सभी बुद्धिजीवी होते हैं। इसी कारण आजकल प्रातःकाल का भ्रमण जरूरी होता है।

प्रातःकाल का भ्रमण की आवश्यकता : जो मनुष्य आज सभ्य और शिक्षित कहलाता है वो बिस्तर से तब उठता है जब धूप आधे आकाश में आ जाती है। वह चाय भी बिस्तर पर ही पीता है। इन सब का परिणाम उसके स्वास्थ्य पर पड़ता है वह चिडचिडा हो जाता है और उसके निर्णय करने की शक्ति क्षीण हो जाती है। लेकिन जो लोग प्रातःकाल का भ्रमण करते हैं वे स्वस्थ और हंसते हुए दिन को बिताते हैं।

उपसंहार : प्रातःकाल के भ्रमण न करने से हमारे स्वास्थ्य को बहुत बड़ा नुकसान होता है लेकिन प्रातःकाल का भ्रमण करने से हमें स्वस्थ रहने का वरदान मिलता है। हमें प्रातःकाल के भ्रमण की आदत डाल लेनी चाहिए यह हमारे शरीर के लिए बहुत ही लाभकारी होती है।

प्रातःकाल का भ्रमण पर निबंध-Paragraph On Morning Walk In Hindi

प्रात:काल की सैर अथवा प्रात:कालीन भ्रमण पर निबंध |Essay on Morning Walk in Hindi!

मनुष्य के लिए प्रात:काल की सैर जितनी सुखदायक व रोमांचकारी होती है उतनी ही स्वास्थ्यवर्धक भी । व्यक्ति के अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रात:कालीन भ्रमण अत्यंत आवश्यक है । यह शरीर में नवचेतना व स्कूर्ति का संचार करता है ।

शारीरिक व मानसिक दोनों ही रूपों में यह स्वास्थ्यवर्धक है । चिकित्सा शास्त्रियों की राय है कि बीमार वृद्‌ध तथा अन्य लाचार व्यक्ति यदि व्यायाम के अन्य रूपों को नहीं अपना पाते हैं तो वे प्रात:काल की सैर कर अपना काम चला सकते हैं । इस सैर से शरीर के बिगड़े हुए आंतरिक अवयवों को सही ढंग से कार्य करने में बहुत मदद मिलती है।

शहरों एवं महानगरों में प्रात:कालीन भ्रमण के लिए जगह-जगह पर हरे-भरे पेड़-पौधों से युक्त पार्क बनाए गए हैं । जहाँ पर पार्क की सुविधा नहीं होती है वहाँ लोग सड़कों के किनारे पर लगे वृक्षों के समीप से होकर टहलते हैं । गाँवों में इस प्रकार की समस्या नहीं होती है । वहाँ शहरों की भाँति मोटरगाड़ियाँ नहीं होतीं अत: जिस और निकल जाएँ उधर ही शुद्‌ध वायु प्राप्त होती है ।

सभी जानते हैं कि हमारे लिए ऑक्सीजन बहुत महत्वपूर्ण है । दिन के समय तो यह मोटरगाड़ियों आदि के धुएँ से मिलकर प्रदूषित हो जाती है । दोपहर व अन्य समय में शुद्‌ध ऑक्सीजन का मिलना दुष्कर होता जा रहा है । अत: प्रात:काल सर्वथा उपयुक्त होता है । प्रात:कालीन भ्रमण से मनुष्य अधिक मात्रा में शुद्‌ध ऑक्सीजन ग्रहण करता है । इससे शरीर में उत्पन्न अनेक विकार स्वत: ही दूर हो जाते हैं ।

साथ ही साथ शरीर की मांसपेशियाँ भी कार्यरत हो जाती हैं तथा रक्त का संचार सामान्य हो जाता है । इसके फलस्वरूप मनुष्य आंतरिक रूप से अच्छे स्वास्थ्य एवं चैतन्यता का अनुभव करता है । उच्च रक्तचाप, पेट की समस्याएँ, मधुमेह आदि रोगियों को चिकित्सक खूब सैर करने या पैदल चलने की सलाह देते हैं । मधुमेह को नियंत्रित करने की तो यह रामबाण दवा है ।

 

सुबह के समय प्रकृति की सुंदरता देखते ही बनती है । उगते हुए सूरज की लालिमा समस्त अंधकार को मिटा देती है । वृक्षों पर बैठी कोयल का मधुर गान सभी के मन को मोह लेता है । आकाश में स्वच्छंद गति से उड़ते एवं चहचहाते पक्षियों का समूह नवीनता का संदेश देता है । सुबह की मंद-मंद बहती सुगंधित हवा शरीर को नई ताजगी प्रदान करती है । सुबह के समय हरी-भरी घास पर ओस की बूँदें ऐसी प्रतीत होती हैं जैसे प्रकृति ने उन बूँदों के रूप में मोती बिखेर दिए हों ।

 

पार्क व बगीचों में चहल-पहल देखते ही बनती है । बच्चे, बूढ़े तथा युवा सभी वर्ग के लोग यहाँ दिखाई देते हैं । लोग भ्रमण के साथ अनेक विषयों पर बातचीत भी करते हैं जिससे नई जानकारियों के साथ परस्पर मेल भी बढ़ता है । बच्चे अनेक प्रकार के खेलों का आनंद उठाते हैं ।

प्रात:कालीन शुद्‌ध व सुगंधित वायु तथा विभिन्न प्रकार के खेल उनके शारीरिक व मानसिक विकास में सहायक होते हैं । वे अन्य बच्चों की अपेक्षा स्कूर्तिवान व कुशाग्र बुद्‌धि के होते हैं । कुछ लोग प्रात:कालीन भ्रमण को समय का दुरुपयोग मानकर उसे जीवन भर टाल देते हैं । दिन चढ़ने पर उठना, फिर बिना हाथ-मुँह धोए ही चाय पीने में ही उनका समय नष्ट होता है, इसे वे समझ नहीं पाते हैं । ऐसे लोग प्रकृति के कई मूल्यवान उपहारों से वंचित हो जाते हैं ।

इस प्रकार हम देखते हैं कि प्रात:कालीन भ्रमण बच्चे, बूढ़े व युवा सभी के लिए अनिवार्य है । यह हमारे शरीर में नई स्कूर्ति, नई चेतना व नया उल्लास प्रदान करता है । सुबह की शुद्‌ध व सुगंधित वायु शरीर के अनेक विकारों को दूर करती है ।

प्रात: कालीन मनोरम दृश्य अत्यंत सुखद प्रतीत होता है । इस प्रकार दिन की अच्छी शुरुआत मनुष्य को अधिक स्वस्थ एवं प्रसन्न रखती है जिससे वह अपनी क्षमताओं का पूर्ण रूप से उपयोग कर सकता है ।

 

डॉ मनमोहन सिंह पर निबंध-Dr. Manmohan Singh in Hindi

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डॉ मनमोहन सिंह पर निबंध-Dr. Manmohan Singh in Hindi

डॉ. मनमोहन सिंह पर निबंध (Short Essay on Dr Manmohan Singh In Hindi Language)

 

विश्व में वर्ष 2008 में आई आर्थिक मंदी से संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे विकसित देश भी त्रस्त नजर आए,  किंतु पूरी दुनिया इस बात से आश्चर्यचकित थी कि भारत जैसे विकासशील देश पर इसका कोई असर नहीं हुआ ! भारत ने यदि आर्थिक मंदी के बावजूद प्रगति हासिल की, तो इसमें इसकी आर्थिक नीतियों का बहुत बड़ा योगदान था और जिन आर्थिक नीतियों के कारण इसने यह करिश्मा कर दिखाया उनके निर्माण क्रियान्वयन में डॉ. मनमोहन सिंह की भूमिका प्रमुख रही है | यही कारण है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री दुनियाभर में एक कुशल अर्थशास्त्री के रूप में अधिक प्रसिद्ध हैं |

डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर, 1932 को पश्चिम पंजाब के गाह नमक स्थान (जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था | उनके पिता का नाम श्री गुरमुख सिंह तथा माता का नाम श्रीमती किशन कौर था | जब भारत का विभाजन हुआ तो उनका परिवार अमृतसर में आकर बस गया |

डॉक्टर मनमोहन सिंह की प्रारंभिक शिक्षा ज्ञान आश्रम स्कूल में हुई | इसके बाद 1948 में उन्होंने मैट्रिकुलेशन तथा 1950 ई. में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की | उन्होंने 1952 ई. में पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी में स्नातक प्रतिष्ठा की उपाधि तथा 1954 में इसी विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी के साथ स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की | स्नातकोत्तर परीक्षा में उन्होंने विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया था | इसके बाद उन्होंने लंदन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पी.एच.डी एंव ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डी.फिल. की उपाधि प्राप्त की |

उच्च शिक्षा प्राप्त कर वे स्वदेश लौट आए एंव अर्थशास्त्र के अध्यापक के रूप में काफी ख्याति अर्जित की | 1957 ई. से लेकर 1959 ई. तक वे चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के वरिष्ठ प्रवक्ता रहे | 1959 से 1963 तक वे इसी विश्वविद्यालय में रीडर के पद पर कार्यरत रहे तथा 1963 ई. से 1965 ई. तक वहीँ प्रोफेसर के रूप में कार्य करने के बाद इन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार विभाग में प्रोफेसर के रूप में कार्य किया | 1976 ई. में वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में ऑनरेरी प्रोफेसर के रूप में नियुक्त हुए | इसके बाद वे अध्यापन का कार्य छोड़कर आर्थिक जगत की शीर्षस्थ संस्थाओं में कार्य करने लगे | इस दौरान उन्होंने कई विश्वविद्यालयों में ऑनरेरी प्रोफेसर के पद को भी सुशोभित किया |

1972 ई. से 1974 ई. तक उन्होंने भारत में अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष समिति की अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक सुधार समिति के डिप्टी के रूप में कार्य किया | 1972 ई. से 1976 ई. तक वे भारत के वित्त मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष रहे | 1982 ई. से 1985 ई. तक वे भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में कार्यरत रहे | सन 1985 ई. में वे इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे तथा साथ ही 1985 से 1987 ई. तक योजना आयोग के उपाध्यक्ष के पद पर भी कार्यरत रहे |

डॉ. मनमोहन सिंह को विश्वस्तरीय राजनीतिक पहचान तक मिली, जब 1991 से 1996 ई. के बीच वे नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री के पद पर कार्यरत रहे | जब डॉ. मनमोहन सिंह वित्त मंत्री बने थे, उस समय देश की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी | उन्होंने वित्त मंत्री के रूप में कार्य करते हुए आर्थिक उदारीकरण की नीति से भारत को आर्थिक विकास के पथ पर अग्रसर कर दिया | इसके बाद 1998 ई. एंव 2001 ई. में वे राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे |

2004 ई. में समय से पूर्व राष्ट्रीय गठबंधन सरकार द्वारा करवाए गए लोकसभा चुनाव में आशा के विपरीत भाजपा को कम सीटों पर विजय हासिल हुई एंव कांग्रेस अधिक सीटों पर जीत के साथ अन्य पार्टियों के सहयोग से सरकार बनाने में सफल रही | कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने स्वयं प्रधानमंत्री का पद अस्वीकार करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह को भारत का नया प्रधानमंत्री घोषित कर दिया | इस तरह 22 मई 2004 को डॉ. मनमोहन सिंह ने देश के 15वें प्रधानमंत्री के रुप में शपथ ली | डॉ. मनमोहन सिंह ने इस पद पर रहते हुए अपने उत्तरदायित्वों का हमेशा सही ढंग से पालन किया | 2009 ई. में हुए लोकसभा चुनाव में मिली जीत के बाद वे जवाहरलाल नेहरू के बाद भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री बन गए, जिनको 5 वर्षों का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिला | 22 मई 2009 को उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में अपनी दूसरी पारी प्रारंभ की |

डॉ मनमोहन सिंह की उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें भारत सरकार एवं विश्व के कई अन्य संस्थानों ने विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया | 1956 ई. में कैंब्रिज विश्वविद्यालय में उन्हें ‘ऐडम-स्मिथ पुरस्कार’ से सम्मानित किया | 1987 ई. में भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया | 1995 ई. में उन्हें इंडियन कांग्रेस का जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार प्राप्त हुआ | उन्हें 1993 ई. एंव 1994 ई. का ‘एशिया मनी अवार्ड फॉर फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर’ एंव इसके साथ ही 1994 ई. का ‘यूरो मनी अवार्ड फॉर द फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर’ भी प्राप्त हुआ | प्रतिष्ठित अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्स द्वारा मार्च 2011 को जारी विश्व की सर्वाधिक शक्तिशाली 100 व्यक्तियों की सूची में भारत के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को 18वां स्थान प्रदान किया गया |

डॉ. मनमोहन सिंह ने कई अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में भारत का नेतृत्व किया है | भ्रष्टाचार से त्रस्त भारतीय राजनीति में जहां अधिकतर नेता दागदार हैं, वहीं डॉ. मनमोहन सिंह अपनी बेदाग एंव ईमानदार छवि के कारण न केवल जनता के बीच लोकप्रिय हैं बल्कि सभी राजनीतिक दलों में भी उनकी अच्छी साख है | अनुभवी अर्थशास्त्रियों का मानना है कि उदारीकरण एंव वैश्वीकरण के इस दौर में भारत की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ विश्वस्तरीय आर्थिक प्रतिद्विन्द्ता के दृष्टिकोण से डॉ. मनमोहन सिंह जैसे अनुभवी अर्थशास्त्री के हाथ में देश की बागडोर के दूरगामी सकारात्मक परिणाम होंगे, जिससे यह देश आर्थिक जगत में नए मुकाम हासिल करेगा |

डॉ मनमोहन सिंह पर निबंध :

भूमिका : सरदार डॉ मनमोहन सिंह हमारे लोकप्रिय नेताओं में सर्वप्रमुख हैं। उन्हें भारत के प्रतिभासंपन्न प्रधानमंत्री माना जाता है। भारत राष्ट्र के प्रधानमंत्री होने की वजह से वे आज विश्व के नेताओं में उनका बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है।

आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे एक गंभीर और समर्पित व्यक्ति भी हैं। डॉ मनमोहन सिंह जी में ज्ञान और योग्यता का अपार भंडार छिपा हुआ है उनसे कोई कुछ न कुछ सीख सकता है।

मनमोहन सिंह का जन्म : डॉ मनमोहन सिंह जी का जन्म 26 सितंबर 1932 को एक गाँव गाह में हुआ था। ये एक सरदार थे। इनके पिता का नाम गुरमुख सिंह और माता का नाम अमृत कौर है। जब इनके घर का बंटवारा हुआ था तब इन्हें अमृतसर के स्वांग मंडी के किशन सिंह संत राम तबेले में भी रहना पड़ा था।

बाल्यकाल एवं परिवार : इनका विवाह 14 सितंबर 1958 को गुरशरण कौर से हुआ था। इनकी तीन बेटियाँ हैं। जब इनके पिता ने इनको कठिन परिश्रम करते हुए देखा तो इनके पिता ने कहा कि – मैं रहूँ या न रहूँ लेकिन तुम एक अच्छे प्रधानमंत्री जरुर बनोगे। उनके पिता की बातों को सच होने में लगभग तीस साल लगे थे। इस समय उनके पिता उनके साथ नहीं हैं लेकिन उनके आशीर्वाद से डॉ मनमोहन सिंह जी प्रधानमंत्री बने गये हैं।

शिक्षा का सम्मान : इन्होने बी० ए० ऑनर्स की परीक्षा को स्थानीय हिन्दू कॉलेज से सन् 1952 में प्रथम श्रेणी से पास किया था। इन्होने एम० ए० ऑनर्स की परीक्षा को होशियार पुर के खालसा कॉलेज से सन् 1954 को प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण किया था। इन्होने केंब्रिज विश्व विद्यालय के रेनबरी स्कॉलर सन् 1969 से लेकर सन् 1971 को प्राप्त किया था।

इन्होने डी० फ़िल० और डी० लि० की उपाधियाँ ऑक्सफोर्ड विश्व विद्यालय और होनोरिस कौसा से प्राप्त की थीं। उन्होंने भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता पर पीएच० डी० की उपाधि प्राप्त की थी। इन्हें कैंब्रिज विश्व विद्यालय ने एडम स्मिथ पुरुस्कार से सन् 1965 को सम्मानित किया था।

भारत ने इन्हें पदम् विभुषण पुरस्कार से सन् 1987 में सम्मानित किया था। इन्हें साल के वित्तमंत्री के लिए युरोमनी पुरस्कार से सन् 1993 में सम्मानित किया था। इन्हें एशिया के साल के वित्तमंत्री के रूप में एशिया मनी पुरस्कार से सन् 1993 और सन् 1994 में सम्मानित किया गया था।

मनमोहन सिंह की नौकरी : इन्होने पंजाब विश्व विद्यालय में अर्थशास्त्र के अध्यापक और रीडर के रूप में सन् 1957 से सन् 1965 तक काम किया था। इन्होने दिल्ली विश्वविद्यालय में भी अर्थशास्त्र के अध्यापक के रूप में सन् 1969 से सन् 1971 तक काम किया था।

ये सन् 1976 में जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के मानद प्रोफेसर के रूप में भी कार्यरत रहे थे। ये दिल्ली विश्वविद्यालय में भी मानद प्रोफ़ेसर के रूप में सन् 1996 में काम किया था। इन्होने प्रधानमंत्री बनने से पहले बहुत से पदों का दायित्व संभाला था।

प्रधानमंत्रित्व एक चुनौती : डॉ मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ 22 मई 2004 को ली थी। इस पद पर चुने जाने के बाद भी इनके सामने अपनी प्रतिभा और क्षमता को दिखाने के लिए अनेक विराट चुनौतियाँ थीं। उन सब को उन्होंने बहुत ही ख़ुशी से निभाया था।

जिस समय पर सोनिया गाँधी ने प्रधानमंत्री पद को ठुकराया था उस समय डॉ मनमोहन सिंह के विपक्ष दल के पास कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था जो इस पद को सर्व संपत्ति के साथ स्वीकार कर सके। डॉ मनमोहन सिंह को दुबारा से प्रधानमन्त्री पद के लिए सन् 2009 को चुना गया था।

कुशल अर्थशास्त्री : डॉ मनमोहन सिंह को अर्थशास्त्र के रूप में लब्धब्द्ध माना जाता था। वे नर सिंह राव सरकार में भी सन् 1991 में वित्तमंत्री रहे थे। उन्ही की नीतियों पर चलने से अर्थव्यवस्था दृढता की ओर आगे बढ़ी थी।

आज के समय में देश जिस दौर से गुजर रहा है उसमें हमे प्रधानमंत्री के रूप में ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी जो राजनीति के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को भी समझ सके। डॉ मनमोहन सिंह इस कसौटी पर खरे उतरे थे।

अंतर्मुखी व्यक्तित्व : दुनिया की नजर में प्रधानमंत्री पद का दायित्व राजनितिक एवं सार्वजनिक दृष्टि से देखा जाये तो बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें प्रधानमंत्री को अपनी राजनितिक पारी में स्वभावगत संकोचों को दूर करके जनता के समक्ष अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करनी चाहिए। यह ख़ुशी की बताई की अब वे अपनी अंतर्मुखी और संकोची स्वभाव को दूर करके बहुत से मंचों के द्वारा अपनी बात को निडरता से रख रहे हैं और साथ ही साथ जनता क साथ संवाद भी स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

समस्याओं से निबटने का साहस : जब प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने सत्ता की बागडोर संभाली तभी जनता को सूखा , बाढ़ , बढती मुद्रा स्फीति दर ,ट्रक हड़ताल , विवाद ,बंधक संकट जैसी बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ा था।

इसके बाद देरी से राजनीति में प्रवेश करने की वजह से अर्थशास्त्री डॉ मनमोहन सिंह को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। इसी क्रम में उनका अर्थशास्त्री का रूप सामने आता है क्योंकि वे छोटी-से-छोटी जानकारी प्राप्त करने की कोशिश करते थे।

विनम्र एवं संवेदन शील : डॉ मनमोहन सिंह जी विनम्र,उदार,और संवेदनशीलता से धनी व्यक्ति है। मनमोहन जी का विश्वास सादा जीवन उच्च विचार में था। वे एक साधारण वेशभूषा में भी बहुत ही प्रभावशाली व्यक्तित्व रखते हैं। इतने बड़े पद पर काम करने पर भी घमंड उनके पास भी नहीं फटका। इतने पदों पर सम्मानित होते हुए भी परिवार के प्रति उनकी जिम्मेदारियाँ कम नहीं हुई हैं।

उपसंहार : भारत की जनता को अपने इस सपूत से बहुत आशाएं हैं। हम लोग यह आशा करते हैं की डॉ मनमोहन जी के नेतृत्व में यह देश लगातार आगे बढ़ता रहेगा। भगवान इन्हें लम्बी उम्र और स्वास्थ्य प्रदान करे।

डॉ मनमोहन सिंह पर निबंध-Dr. Manmohan Singh in Hindi

 

नरेंद्र मोदी पर निबंध-Essay On Narendra Modi In Hindi

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नरेंद्र मोदी पर निबंध-Essay On Narendra Modi In Hindi

Narendra Modi Essay in Hindi नरेंद्र मोदी 2014 में भारत के 14वें प्रधानमंत्री बने और वह भारत के प्रधानमंत्री बनने से पूर्व गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री थे| वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता है| नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक सदस्य भी है। नरेंद्र मोदी के उपर निचे हमने एस्से लिखा है तो चलिए अब एस्से को पढ़ते है यह एस्से हमने सभी कक्षाओं के लिए लिखा है जैसे – 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, एवं 12|

Narendra Modi Essay in Hindi 100 Words

नरेंद्र मोदी पर निबंध-Essay On Narendra Modi In Hindi

नरेंद्र मोदी का पूरा नाम नरेंद्र दामोदरदास मोदी है उनका का जन्म 17 सितंबर 1950 वडनगर गुजरात मे हुआ था। नरेंद्र मोदी एक भारतीय राजनीतिज्ञ है और वर्तमान मे भारत के 15 वे प्रधानमंत्री है| भारत के राष्ट्रपति ने 26 मई 2014 को नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री की शपथ दिलाई थी| नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी के एक नेता भी है और भारत के प्रधानमंत्री बनने से पहले वह गुजरात के 2001 से 2014 तक मुख्यमंत्री थे और वाराणसी मे संसद के सदस्य भी थे| नरेंद्र मोदी दामोदरदास का जन्म एक गुजराती परिवार मे हुआ था और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी उनके पिता दामोदरदास मूलचन्द मोदी चाये बेचने का काम करते थे और बचपन की उम्र से ही नरेंद मोदी अपने पिता के साथ काम करते थे और बाद मे उन्होंने अपना एक स्टाल ख़रीद लिया था|

Narendra Modi Essay in Hindi 200 Words

नरेंद्र मोदी पर निबंध-Essay On Narendra Modi In Hindi

नरेंद्र मोदी के पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद मोदी और माता का नाम हीराबेन मोदी है| नरेंद्र मोदी के माता और पिता ने कभी इसकी कल्पना भी नहीं की होगी की एक दिन उनका बेटा देश का प्रधानमंत्री बनेगा| नरेंद्र मोदी छोटी सी ही उम्र मे ही, वडनगर के रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने में अपने पिता की मदद करते थे और थोड़े ही समय बाद वह अपने भाई के साथ अपनी टी स्टाल मै काम करने लगे| आठ वर्ष की उम्र मे ही नरेंद्र मोदी ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ज्वाइन कर लिया था । मोदी ने अपनी उच्चतर माध्यमिक शिक्षा 1967 मे वडनगर मे पूरी की|

Narendra Modi Essay in Hindi Language
नरेंद्र मोदी पर निबंध – Narendra Modi Essay in Hindi Language

वर्ष 1973 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में प्रचारक के रुप में अपना कैरियर शुरु करने वाले मोदी ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर वर्ष 1987 में भारतीय जनता पार्टी BJP में जगह बना ली थी| इसके बाद मोदी ने पार्टी में अनेक जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाते हुए निरंतर अपना कद बढ़ाया| इसी का परिणाम है कि मोदी वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद मई 2000 तक इस पद पर बने रहे| नरेंद्र मोदी के राजनीतिक कैरियर में वर्ष 2002 बहुत महत्वपूर्ण था इस वर्ष गुजरात में सांप्रदायिक दंगे भड़के उठे हुए थे जिनमें 2000 से अधिक लोग मारे गए और कई हजार व्यक्ति घायल हुए थे| इन दंगों ने मोदी की छवि को दागदार बना दिया था|

Narendra Modi Essay in Hindi 300 Words

नरेंद्र मोदी पर निबंध-Essay On Narendra Modi In Hindi

मोदी सरकार न केवल दंगों को प्रभावी ढंग से न रुकवाने के लिए आलोचना का शिकार हुई बल्कि उस पर दंगो को भड़काने का भी आरोप लगाया गया| मोदी पर चारों ओर से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का दबाव बनने लगा था, तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई ने भी मोदी को “राजधर्म” का निर्वाह करने की नसीहत दी थी, लेकिन मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर बने रहें| वर्ष 2002 के दंगों ने मोदी के व्यक्तिगत को बदल कर रख दिया| अब तक हिंदुत्ववादी छवि को लेकर आगे बढ़ने वाले मोदी ने गुजरात दंगों के बाद अपना सारा ध्यान आरती विकास पर केंद्रित कर दिया, जिसका परिणाम यह हुआ कि उनके नेतृत्व में वर्ष 2012 और 13 तक आते-आते गुजरात राज्य के स्थान पर ब्रांड बन गया और मोदी के गुजरात विकास मॉडल की गूंज हर कहीं सुनाई देने लगी| मोदी को इसी विकास पुरुष की छवि ने उन्हें वर्ष 2014 के आम चुनावों में विजय दिलाकर प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचा दिया तेरी जैसी बिछड़ी हुई जाती का एक चाय बेचने वाला लड़का भारत का प्रधानमंत्री बने यह बेमिसाल है वह किले से प्रधानमंत्री है जो इतनी गरीबी से उठे हैं|

आजाद भारत में जन्मे पहले प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सही मायने में ‘युवा भारत’ के ‘युवा प्रधानमंत्री’ हैं| स्कूली दिनों में नाटकों में भाग लेने के शौकीन मोदी वक्त के साथ कदम मिलाकर चलने वालों में से हैं| यही वजह है कि भारत जैसे देश में जहां तमाम राजनीतिक दल प्रौद्योगिकी से दुरी रखने मे विश्वास रखते हैं| वही मोदी कंप्यूटर एवं इंटरनेट प्रौद्योगिकी का जमकर प्रयोग करते हैं| उन्होंने चुनाव प्रचार में भी सूचना प्रौद्योगिकी का भरपूर इस्तेमाल करते हुए जनता के एक बड़े वर्ग तक अपनी पहुंच बनाई है| वह जनता से जुड़ने के लिए सोशल नेटवर्किंग का सहारा लेते हैं|

Narendra Modi Essay in Hindi 400 Words

नरेंद्र मोदी पर निबंध-Essay On Narendra Modi In Hindi

नागरिकों से ‘लाइव चैट’ करके वाले पहले भारतीय राजनेता होने का गौरव भी मोदी को ही मिला| वह सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट “ट्विटर” पर सदैव सक्रिय रहते हैं| उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी उद्देश्य से लगाया जा सकता है कि ट्विटर पर उनकी 30 मिलियन से भी अधिक फॉलोवर है और वे विश्व के ऐसे चतुर्थ राजनेता हैं जिनका ट्विटर पर सबसे अधिक प्रयोग किया जाता है|

नरेंद्र मोदी का मुख्य एजेंडा सिर्फ और सिर्फ तरक्की है| वह सबका साथ सबका विकास की विचारधारा की पक्षधर हैं| शायद यही कारण है कि भारत की जनता ने गुजरात दंगों को भुलाकर उन्हें प्रधानमंत्री के पद के रूप में इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है| हर सरकार अपने तरीके से देश के विकास के लिए कार्य करती है, किंतु नरेंद्र मोदी की सरकार से जनता की उम्मीदें बहुत ज्यादा है, क्योंकि भारत में संभवत पहली बार कोई लोकसभा चुनाव जाति-पाति तथा सांप्रदायिकता जैसे मुद्दों को छोड़कर विकास के मुद्दे पर लड़ा गया और जीता गया| इसलिए जनता अपने नए प्रधानमंत्री से यूपिये-2 के शासनकाल में आए ठहराव से मुक्ति पाने की अपेक्षा रखती है| लेस गवर्नमेंट, मोर गवर्नेंस और ‘नो रेड टेप’ ओन्ली रेड कारपेट पर जोर देने वाली मोदी को भी इसका आभास अवश्य होगा कि एक प्रधानमंत्री के रूप में उनके सामने महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक घाटा, भ्रष्टाचार जैसी अनेक चुनौती हैं जिनका समाधान उन्हें करना होगा|

नरेंद्र मोदी ने लंबे समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री का पद संभाला, जिससे उन्हें सफलता भी मिली है| उन्हें गुजरात रत्न, सर्वश्रेठ मुख्यमंत्री तथा एशियन एफडीआई पर्सनालिटी ऑफ द ईयर के समान से भी नवाजा जा चुका है| उन पर प्रधानमंत्री बनने से पूर्व ही “Narendra Modi: The Man The Times” तथा “The Namo Story: A Political Life” सहित पांच पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं| ऐसे सफल व्यक्ति की शख्सियत और इरादे जानने के लिए सारी दुनिया बेताब है| भारतीय जनता उनसे बदलाव और बेहतरीन की आशा रखती है, लेकिन इन सब के लिए हमें उन्हें पर्याप्त समय देना होगा| आखिरकार सुखद परिवर्तन रातो रात नहीं होता और अचानक होने वाले परिवर्तन लोकतंत्र की गरिमा के अनुकूल होते भी नहीं|

Narendra Modi Essay in Hindi
नरेंद्र मोदी पर निबंध – Narendra Modi Essay in Hindi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांव के समय के विकास के लिए 11 अक्टूबर 2014 को सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की| इस योजना के तहत प्रत्येक वर्ष 2019 तक तीन गांवों में बुनियादी यहां संस्थागत ढांचा विकसित करने की जिम्मेदारी उठाएं, जिनमें से एक आदर्श गांव को वर्ष 2016 तक विकसित किया जाना है| इसके बाद 5 आदर्श का चयन किया जाएगा और उनके विकास के काम के वर्ष 2024 तक का पूरा किया जाएगा|

नरेंद्र मोदी ने सितम्बर, 2014 मे स्वच्छ भारत अभियान को शुरुआत करने की घोषणा की| स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत सफाई देशभर मे प्रत्येक गाँव और शहर मे होनी चाहिए| नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करने को कहा है| नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर, 2014 को दिल्ली के राजघाट मे जा कर स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की और 2019 तक भारत को स्वच्छ बनाने को कहा । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गाँवों के विकास के लिए 11 अक्टूबर, 2014 को ‘आदर्श ग्राम योजना‘ की शुरुआत की| नरेंद्र मोदी एक ऐसे जननेता है, जो लोगो के कल्याण के लिए समर्पित है| भारत को विदेश नीति पहले की सरकार से बहुत अलग है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस विदेश नीति को नई दिशा दे रहे है, और यह भारत के लिए बहुत ही गौरव की बात है|

नरेंद्र मोदी पर निबंध (Essay On Narendra Modi In Hindi) :

भूमिका : नरेंद्र मोदी जी का जन्म 17 सितम्बर 1950 को हुआ था। इनका पूरा नाम नरेंद्र दामोदरदास मोदी है। नरेंद्र मोदी जी का जन्म बॉम्बे राज्य के महेसाना जिले में स्थित वडनगर ग्राम में हुआ था। इनकी माता का नाम हीराबेन मोदी और पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद मोदी था।

नरेंद्र मोदी जी में प्रशासनिक सूझबूझ , स्पष्ट दूरदर्शिता और चरित्र की अखंडता आदि की कुशलता है। इन्हीं कुशलताओं की वजह से उन्हें चुनावों में सफलता प्राप्त हुई। नरेंद्र मोदी जी की छवि एक कठोर प्रशासक और कड़े अनुशासन आग्रही की मानी जाती है। वे यथार्थवादी के साथ आदर्शवादी भी हैं।

बाल्यकाल एवं परिवार : नरेंद्र मोदी जी का जन्म एक मध्य वर्गीय शाकाहारी परिवार में हुआ था। दामोदरदास मूलचंद मोदी की छ: संताने थीं जिनमें से नरेंद्र मोदी जी तीसरी संतान थे। उन्होंने बचपन से ही अपने पिता का हाथ बंटाना शुरू कर दिया था। जब भारत और पाकिस्तान के बीच द्वितीय युद्ध हुआ था तब नरेन्द्र मोदी जी किशोरावस्था में थे।

उन्होंने रेलवे स्टेशन पर सफर करने वाले सैनिकों की सेवा की। 13 साल की उम्र में नरेंद्र मधि जी की सगाई जसोदा बेन चमनलाल के साथ कर दी गई थी। जब वे 17 साल के थे तब उनका विवाह हुआ। उनकी शादी तो हुई थी लेकिन वे दोनों एक साथ कभी नहीं रहे थे क्योंकि शादी के कुछ सालों बाद नरेंद्र मोदी जी ने घर त्याग दिया था।

नरेंद्र मोदी जी की शिक्षा : नरेंद्र मोदी जी ने अपनी स्कूली शिक्षा वडनगर से पूर्ण की थी। ये बेशक से एक औसत दर्जे के छात्र थे लेकिन इन्हें वाद-विवाद और नाटक प्रतियोगिताओं में उनकी बहुत रूचि थी। उन्हें राजनीतिक विषयों पर नई-नई परियोजनाओं को प्रारंभ करने में भी बहुत रूचि थी।

नरेंद्र मोदी जी ने गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त करके वे नरेंद्र मोदी विकास पुरुष के नाम से प्रसिद्ध हो गये। नरेंद्र मोदी जी राजनेता के साथ -साथ एक कवि भी थे। वे गुजरती और हिंदी में में देशभक्ति पर कविताएँ लिखते थे।

नरेंद्र मोदी जी का राजनीतिक जीवन : नरेंद्र मोदी जी ने किशोरावस्था में अपने भाई के साथ चाय की दुकान पर काम किया था। नरेंद्र मोदी जी ने युवावस्था छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में शामिल हुए थे। नरेंद्र मोदी जी ने भ्रष्टाचार के विरोधी नवनिर्माण आन्दोलन में भी हिस्सा लिया था।

एक पूर्णकालिक आयोजक के रूप में काम करने के बाद उन्हें भारतीय जनता पार्टी में संगठन का प्रतिनिधि मनोनीत किया गया था। नरेंद्र मोदी जी विपक्ष पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने 2014 में लोकसभा चुनाव लदा था जिसमें उन्हें सफलता प्राप्त हुई थी। नरेंद्र मोदी जी ने एक सांसद के रूप में उत्तर परदेश की वाराणसी नगरी और अपने गृहराज्य के वडोदरा में संसदीय क्षेत्र के चुनाव लदे थे जिसमें उन्हें सफलता प्राप्त हुई थी।

नरेंद्र मोदी जी जब विश्वविद्यालय में पढ़ते थे तभी से वे राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ की शाखा में नियमित जाने लगे थे। नरेंद्र मोदी जी ने 1958 के शुरू में निस्वार्थता , सामाजिक जवाबदारी , समर्पण , और राष्ट्रवाद की भावना को आत्मसात किया। नरेंद्र मोदी ने 1967 में गुजरात के बाढ़ पीड़ितों की बहुत सेवा की थी।

इसी तरह से उनकी जिंदगी एक संघ के निष्ठावान प्रचारक के रूप में शुरू हुआ। उन्होंने शुरू से ही राजनीतिक सक्रियता दिखलाई और भारतीय जनता पार्टी का जनाधार मजबूत करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गुजरात में भी शंकरसिंह वाघेला का जनाधार मजबूत करने में भी इन्हीं का हाथ था।

जब अप्रैल 1990 में केंद्र से मिली जुली सरकारों का दौर शुरू हुआ था तो उनकी मेहनत सफल हुई और उन्हें विधानसभा के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी से दो तिहाई बहुमत प्राप्त हुई। इसी समय देश में दो राष्ट्रीय घटनाएँ भी घटीं। पहली घटना थी सोमनाथ से लेकर अयोध्या तक की रथयात्रा।

इस रथयात्रा में आडवाणी के प्रमुख सारथि की भूमिका में नरेंद्र मोदी जी का सहयोग था। इसी तरह से दूसरी घटना भी कन्याकुमारी से लेकर सुदूर उत्तर के कश्मीर तक की रथयात्रा थी। इस रथयात्रा का आयोजन नरेंद्र मोदी जी की देखरेख में हुआ था।

इसके पश्चात शंकरसिंह वाघेला ने त्यागपत्र दे दिया जिसकी वजह से केशुभाई पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया गया और नरेंद्र मोदी जी को दिल्ली बुला कर केन्द्रीय मंत्री का दायित्व सौंपा गया और फिर राष्ट्रीय मंत्री का पद सौंपा गया। उन्हें 1995 में राष्ट्रीय मंत्री के नेता होने की वजह से 5 राज्यों में संगठन का काम दिया गया था जिसे उन्होंने बखूबी निभाया था।

1998 में इन्हें राष्ट्रीय महामंत्री का उत्तरदायित्व दिया गया और इस पद पर उन्होंने 2001 तक काम किया। उसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने 2001 में केशुभाई पटेल की जगह पर नरेंद्र मोदी जी को गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया।

गुजरात के मुख्यमंत्री : नरेंद्र मोदी जी 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे। संसदीय चुनावों को जीतने के बाद वे गुजरात के 14 वें मुख्यमंत्री बने थे। 2001 में गुजरात भूकंप और प्राकृतिक आपदाओं से पड़े विपरीत प्रभावों से लड़ रहा था। उन्होंने गुजरात में विकास की कई महत्वपूर्ण योजनाएँ चलाईं जैसे – पंचामृत योजना , कृषि महोत्सव योजना , चिरंजीवी योजना , मातृ वन्दना योजना , बालभोग योजना , कर्मयोगी अभियान , बेटी बचाओ योजना , ज्योतिग्राम योजना आदि।

इन योजनाओं में उन्हें बहुतायत सफलता भी प्रापर हुई। उन्होंने इन विकास योजनाओं के अलावा आदिवासी और वनवासी क्षेत्र के विकास के लिए गुजरात राज्य में 10 सूत्री कार्यक्रम भी चलाया जो इस तरह से है – 5 लाख परिवारों को रोजगार , उच्चतर शिक्षा की गुणवत्ता , आर्थिक विकास , स्वास्थ्य , आवास , साफ और स्वच्छ पेयजल , सिंचाई , समग्र विद्युतीकरण , हर मौसम में सडक की उपलब्धता , शहरी विकास आदि हैं। उनके नेक कार्यों की वजह से गुजरात में वे 2001 से 2014 तक लगातार चार बार मुख्यमंत्री बने थे।

प्रधानमंत्रित्व : उन्होंने एक प्रत्याशी के रूप में देश की दो लोकसभा सीटों में विजय प्राप्त की थी। जब न्यूज एजेंसीज और पत्रिकाओं के सर्वेक्षणों ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए जनता को पहली पसंद बताया था। जब पार्टी ने पीएम प्रत्याशी घोषित किये गये तो नरेंद्र मोदी जी ने पुरे भारत का भ्रमण किया।

इसी दौरान नरेंद्र मोदी जी ने तीन लाख किलोमीटर की यात्रा करके पुरे देश में 437 बड़ी रेलियाँ , 3 डी सभाएं और चाय पर चर्चा को कुल मिलाकर 5827 कार्यक्रम किये। उन्होंने चुनाव अभियान को 26 मार्च 2014 को जम्मू से शुरू की और मंगल पाण्डे की जन्मभूमि बलिया पर समाप्त की।

भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व 2014 में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की। जहाँ पर चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन 336 सीटों से जीता था वहीं पर अकेले भारतीय जनता पार्टी ने 282 सीटों पर विजय प्राप्त की। कांगेस को केवल 44 सीटें प्राप्त हुई थीं और उसके संगठन को 59 सीटें मिली थी।

जब 20 मई 2014 को संसद भवन में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित भाजपा संसदीय दल एवं सहयोगी दल की संयुक्त बैठक में जब लोग आ रहे थे तो नरेंद्र मोदी ने संसद भवन में प्रवेश करने से पहले उसकी जमीन को झुककर वैसे ही प्रणाम किया जैसे किसी पवित्र मन्दिर में प्रणाम करते हैं।

संसद भवन के इतिहास में ऐसा करके उन्होंने सभी के लिए एक उदाहरण दिया है। बैठक में नरेंद्र मोदी जी को जो न केवल भाजपा संसदीय दल अपितु एनडीए का नेता भी चुना गया। नरेंद्र मोदी जी ने अनेक संघर्षों के बाद 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री की शपथ ली थी। वे स्वतंत्र भारत के 15 वें प्रधानमंत्री थे। वे ऐसे पहले व्यक्ति थे जो स्वतंत्र भारत में जन्में और उस पद पर आसीन हुए थे।

नरेंद्र मोदी जी का सम्मान : नरेंद्र मोदी जी को साउदी अरब के उच्चतम नागरिक के सम्मान ‘अब्दुलअजीज अल सऊद के आदेश’ से नवाजा गया। उन्हें अफगानिस्तान के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘ अमीर अमानुल्ला खान अवार्ड ‘ से सम्मानित किया गया।

उपसंहार : नरेंद्र मोदी जी बहुत ही अच्छे नेता हैं। उन्होंने जन सेवा का एक भी मौका नहीं गंवाया। उन्होंने अपने जीवन में संघर्ष अपने लक्ष्य को प्राप्त कर प्रधानमंत्री बने थे। उन्होंने देश को अधिक अवसरों का लाभ उठाने के लिए अनेक योजनाएँ भी चलाईं। इन दिनों में उनकी जीवन शैली और विदेशी यात्रायें अक्सर चर्चा में रहती हैं उन्होंने विकास के लिए भी बहुत कार्य किया है।

आतंकवाद युद्ध से भी बदतर होता है। एक आतंकवादी के कोई नियम नहीं होते हैं। एक आतंकवादी केवल यह तय करता ही कि कब, कैसे , कहाँ और किसे मारना है। भारत ने युद्ध में इतने लोगों को नहीं खोया है जितने लोगों को आतंकी हमले में लोगों को खोया है। नरेंद्र मोदी जी को एक सफल कवि और राजनेता के रूप में हमेशा याद रखा जायेगा।

नरेंद्र मोदी पर निबंध-Essay On Narendra Modi In Hindi

 

बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर निबंध-Beti Bachao Beti Padhao In Hindi

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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध

बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर निबंध-Beti Bachao Beti Padhao In Hindi

Beti Bachao Beti Padhao Essay in Hindi आखिर हमें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के इस अभियान की जरूरत क्यों पड़ी जाहिर है इसके पीछे कन्या भ्रूण हत्या के कारण देश में तेजी से घटता लिंगानुपात है जिसके कारण अनेक सामाजिक समस्याएं समाज में उत्पन्न हो रही है आखिर कन्या भ्रूण हत्या क्यों की जाती है इसके पीछे छुपी मानसिकता क्या है इसके क्या खतरे हैं इसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ रहा है तथा कैसे इस समस्या का निदान किया जा सकता|

मैं माताओं से पूछना चाहता हूं कि बेटी नहीं पैदा होगी तो बहू कहां से लाओगे हम जो चाहते हैं समाज भी वही चाहता है हम चाहते हैं कि बहु पढ़ी-लिखी मिले वीडियो को पढ़ाने के लिए हम तैयार नहीं होते हैं आखिर यह दोहरापन कब तक चलेगा यदि हम बेटी को पढ़ा नहीं सकते तो शिक्षित बहू की उम्मीद करना भी बेमानी है जिस धरती पर मानवता का संदेश दिया गया हो वहां बेटियों की हत्या बहुत ही दुख देती है भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जो 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत पर व्यक्त कर रहे थे यह अभियान केंद्र सरकार के महत्वकांक्षी कार्यक्रमों में से एक है|

कन्या भ्रूण हत्या लड़कों को प्राथमिकता देने तथा कन्या जन्म से जुड़े निम्न सामाजिक मूल्यों के कारण जान मुझ की की गई हत्या होती है कन्या भ्रूण हत्या उन क्षेत्रों में अधिक होती है जहां के सांस्कृतिक मूल्य लड़के को करने की तुलना में अधिक महत्व देते हैं भारत में यह प्रथा कोई नहीं नहीं है मध्य काल से इस प्रथा के अस्तित्व में आने के प्रमाण मिले हैं जब मुस्लिम आक्रमण कार्य तथा शासक वर्ग के द्वारा लड़कियों का शोषण किया जाता था इनसे बचने के लिए कन्या शिशु को मारने की परंपरा तब से प्रारंभ हुई|

Beti Bachao Beti Padhao Essay in Hindi
Beti Bachao Beti Padhao Essay in Hindi – बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध

Beti Bachao Beti Padhao Essay in Hindi 200 Words

बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर निबंध-Beti Bachao Beti Padhao In Hindi

इसके अलावा विद्वानों ने इसे दहेज से जुड़कर भी देखा था ना कि प्राचीन काल में इस प्रकार नहीं मिले हैं वैदिक काल में तो कंयाओं की शिक्षा दीक्षा का उचित प्रबंध किया जाता था ऋग्वेद में सकता घोसा अपाला आदि अनेक विदेशी स्त्रियों के नामों का उल्लेख किया गया है जिन्होंने ऋग्वेद के अनेक मंत्रों की रचना की है गाड़ी के नाम से भी हम परिचित हैं जिन्होंने गार्गी संहिता नामक प्रसिद्ध खगोल विज्ञान के ग्रंथ की रचना की तथा यज्ञ कर लिया जैसे विज्ञान विषयों को शास्त्रार्थ युद्ध में पराजित कर दिया था|

प्रसिद्धि स्मृति कार महर्षि मनु ने तो अपनी विश्वविख्यात कृति मनुस्मृति में लिखा है यत्र ना्यरस्तुपूज्यंते रमंते तत्र देवता अर्थात जहां नारी नारियों का सम्मान होता है वहां देवताओं का निवास होता है परंतु वर्तमान में इसकी एकदम विपरीत स्थिति हो रही है क्योंकि पहले तकनिक नहीं थी इसलिए कन्या शिशु को जन्म लेने के बाद मार दिया जाता था किंतु अब तकनीकी कारण कन्या भूर्ण को गर्भ में ही मार दिया जाता है|

यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में सुनियोजित लिंग भेद के कारण भारत की जनसंख्या से लगभग 5 करोड़ लड़कियां गायब है विश्व में अधिकतर देशों में प्रति पुरुषों पर लगभग 105 स्त्रियों का जन्म होता है जबकि भारत में सबसे ऊपर केवल 930 ही है संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि भारत में अनुमानित तौर पर प्रतिदिन 2000 में जन्मी कन्या की हत्या की जाती है| भारत में यह स्त्री विरोधी नजरिया समाज के सभी वर्गों में फैला है भारत में स्त्रियों को महत्व ना देने के कई कारण हैं जिन में आर्थिक उपयोगिता सामाजिक उपयोगिता तथा धार्मिक उपयोगिता प्रमुख है|

Beti Bachao Beti Padhao Essay in Hindi Language
Beti Bachao Beti Padhao Essay in Hindi Language – बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध

Beti Bachao Beti Padhao Essay in Hindi 300 Words

बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर निबंध-Beti Bachao Beti Padhao In Hindi

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि भारत में कन्या भ्रूण हत्या जनसंख्या से जुड़े संकट उत्पन्न कर सकती है वर्ष 1981 में 0 से 6 साल के बच्चों का लिंग अनुपात 962 जानू में घटकर 945 तथा 2001 में 9 से 27 अगस्त 2011 और अधिकतर हटकर 914 रह गया इसाई वर्ग में सर्वाधिक चिंताजनक स्थिति हरियाणा 830 पंजाब 846 जम्मू-कश्मीर 800 राजस्थान 888 तथा उत्तराखंड आज 890 रन घटते लिंगानुपात के कारण इन राज्यों में अविवाहित युवकों की संख्या बढ़ रही है हरियाणा एवं पंजाब में तो 9:00 बजे यहां एक ही विवाह के लिए लड़कियों को गरीब राज्य तथा आदिवासी क्षेत्रों से खरीद कर लाया जा रहा है हरियाणा में तो अनिकेत ऐसे हैं जहां एक ही स्त्री से एक से अधिक पुलिस विभाग कर रहे हैं|

यह तो सामाजिक प्रभाव है यदि हम एक दूसरे नजरिए से देखें तो कन्या भ्रूण हत्या से भारत की उस महिला शक्ति का विनाश हो रहा है जो वर्तमान में भारत को आर्थिक सामाजिक रुप से समृद्ध कर सकती है इसी कारण भारत सरकार लंबे समय से मीठे को बचाने के लिए प्रयत्नशील रही है इसको रीति को समाप्त यह तो सामाजिक प्रभाव है यदि हम एक दूसरे नजरिए से देखते तो कन्या भ्रूण हत्या से भारत की ओर से मेरा शक्ति का विनाश हो रहा है जो वर्तमान में भारत को आर्थिक सामाजिक रुप से समर्थन कर सकती है इसी कारण भारत सरकार लंबे समय बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के लिए प्रदर्शित रही है इसको टोक्यो को समाप्त करने तथा लोगों के दृष्टिकोण में परिवर्तन लाने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं सरकार द्वारा देश में कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए अपना ही गई बहु आयामी रणनीति इस में जागरूकता पैदा करने और विश्वविद्यालय वह उपाय करने के सांसद महिलाओं पर सामाजिक आर्थिक रुप से अधिकतर संपन्न बनाने के लिए कार्यक्रम शामिल हैं |

इनमे से कुछ उपाय निम्नलिखित है:-

  • गर्भधारण करने से पहले और बाद में लिंग चयन रोकने और प्रसव पूर्व निदान तकनीक नियमित करने के लिए सरकार ने व्यापक कानून का पधानाचाय पूर्व और प्रसव पूर्व निदान लिंकन पर रोक कानून 1994 में लागू किया है इसमें वर्ष 2003 में संशोधन किया गया|
  • सरकारी कानून को प्रभावशाली तरीके से लागू करने में 30 जुलाई और उसने विभिन्न नियमों में संशोधन की है जिसमें गैर पंजीकृत मशीनों को सील करने और उन्हें जब तक करने तथा गैर पंजीकृत क्लीनिकों में दंडित करने का प्रावधान है वो टेबल अल्ट्रासाउंड उपकरण का इस्तेमाल का नियमन केवल पंजीकृत परिसर के भीतर अधिसूचित किया गया इस के तहत कोई भी मेडिकल प्रेक्टिशनर एक जिले के भीतर अधिकतम 2 अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर ही अल्ट्रासोनोग्राफी कर सकता है साथ ही पंजीकरण शुल्क अभी बनाया गया|
  • स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा सभी राज्यों से आग्रह किया गया है कि वह अधिनियम को मजबूती से कार्यनीति करें और गैरकानूनी रूप से लिंग पता लगाने के तरीके को रोकने के लिए कदम उठाएं|
  • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत सभी राज्यों के मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे लिंग अनुपात की प्रवृत्ति को लड़ते हैं और शिक्षा पर बालिकाओं की अनदेखी की प्रवृति पर रोक लगाएं|
  • स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्य और संघ राज्य क्षेत्रों में कहा कि वह इस कानून को गंभीरता से लागू करने पर अधिकतम ध्यान दें|
  • पीएनडीटी कानून के अंतर्गत केंद्रीय निगरानी बोर्ड का गठन किया गया और इसकी नियमित बैठक कराई गई|
  • वेबसाइट ओपन लिंग चयन के विज्ञापन रोकने के लिए यह मामला संचार है उस सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के समक्ष उठाया गया हाल ही में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सर्च इंजन गूगल को लिंग जांच से संबंधित सभी विज्ञापन हटाने का निर्देश दिया था|
  • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत राष्ट्र निरीक्षण और निगरानी समिति का पुनर्गठन किया गया और अल्ट्रासाउंड संबंधी सेवा समिति बिहार छत्तीसगढ़ दिल्ली हरियाणा मध्य प्रदेश पंजाब उत्तराखंड राजस्थान गुजरात और उत्तर प्रदेश में निगरानी का कार्य किया गया|
  • राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कानून के कार्यान्वयन के लिए सरकार सूचना शिक्षा और संचार अभियान के लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता दे रही है|
  • राज्य को सलाह दी गई की कन्या भ्रूण हत्या के कारणों का पता लगाने के लिए कम लिंग अनुपात वाले जिले ब्लॉकों काम पर विशेष ध्यान दें उपयुक्त व्यवहार परिवर्तन संपर्क अभियान तरह तैयार करें और पीसी एंड पीएनडीटी कानून के प्रावधानों को प्रभावशाली तरीके से लागू करें|
  • धार्मिक नेता और महिलाएं लिंग अनुपात और लड़कियों के साथ भेदभाव के खिलाफ चलाए जा रहे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान में शामिल हो|
  • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के साथ ही इस विषय को अधिक व्यापक बनाने के लिए से शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना आवश्यक है आने वाली पूरी पीढ़ी तभी शिष्य के प्रति संवेदनशील हो पाएगी जब बचपन से ही उसे यह शिक्षा दी जाए|

Beti Bachao Beti Padhao Essay in Hindi 400 Words

बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर निबंध-Beti Bachao Beti Padhao In Hindi

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के इस कार्यक्रम के तहत भारत सरकार ने लड़कियों को बचाने उनकी सुरक्षा करने और उन्हें शिक्षा देने के लिए निम्न बाल लिंग अनुपात वाले साउथ हीरो में इस पूरी रीती को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है यह कार्यक्रम महिला एवं बाल विकास मंत्रालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की संयुक्त पहल है |

इस कार्यक्रम के अंतर्गत निम्नलिखित क्रियाकलाप शामिल भी किए गए हैं :-

  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय आंगनवाड़ी केंद्रों पर गर्भावस्था के पंजीकरण को पद स्थापित करना भागीदारों को प्रशिक्षित करना समुदाय के लाभ लामबंदी और संविदा विकरण लैंगिक चैंपियन को शामिल करना अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं एवं संस्थानों को मान्यता और संस्कार देना
  • स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय गर्भधारण पूर्व जन्म पूर्व जांच तकनीकों का निगरानी 9394 अस्पतालों में प्रसव का पंजीकरण पटेल को मजबूत करना निगरानी समिति का गठन
  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय लड़कियों को का संयोजन के पंजीकरण ड्रॉपआउट दर में कमी लाना विद्यालयों में लड़कियों की आवश्यकता अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराना शिक्षा के अधिकार अधिनियम का शक्ति से क्रियांवयन कर्नल लड़कियों के लिए शौचालयों का निर्माण करना

सरकार द्वारा चलाए गए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत बेटी को बचाना है उसे पढ़ा लिखा कर योग्य बनाने के लिए जब तक हम समझ गए शील नहीं होंगे हम अपना ही नहीं आने वाली सदियों तक पीढ़ी-दर-पीढ़ी एक भयानक संकट को निमंत्रण दे रहे आज का भविष्य है इतिहास साक्षी है कि जब भी स्त्रियों का अवसर मिले हैं उन्होंने अपनी उपलब्धियों के कीर्तिमान स्थापित किए हैं आज शिक्षा के क्षेत्र में सत्ता से 75% और चिकित्सा क्षेत्र में 7% से अधिकतर महिलाएं हैं भारत में मूल्य की प्रथम महिला 2000 साइना नेहवाल सभी ने अपने अपने चित्र में भारत का नाम गौरा ने महीने तक किया है लेकिन यह सब तभी हो सकता है जब इन्हें बचाया पढ़ाया गया एक बेटी के शब्दों से हम बेटियों को पढ़ाने एवं बचाने की भावनाओं को शायद आसानी से समझ सकेंगे |

हर लडाई जीतकर दिखाऊंगी, मैं अग्नि में जल कर भी जी जाऊंगी

चंद लोगों की पुकार सुन ली, मेरी पुकार न सुनी

मैं बोझ नहीं भविष्य हूं, बेटा नहीं पर बेटी हूं

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बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर निबंध-Beti Bachao Beti Padhao In Hindi

देश की बेटियों की रक्षा और उन्नति के लिये प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ नाम से एक योजना का शुभारंभ किया गया है। सामाजिक योजनाओं पर निबंध लेखन के लिये अपने स्कूल में सामान्यत: निर्दिष्ट किये गये विद्यार्थियों की मदद के लिये हम यहाँ पर ऐसे मुद्दों पर निबंध उपलब्ध करा रहें हैं। विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिये अलग-अलग शब्द सीमा तथा बेहद आसान शब्दों में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर निबंध दिया गया है। बच्चों और विद्यार्थियों के लेखन कौशल को सुधारने के लिये स्कूलों में निबंध और पैराग्राफ प्रतियोगिता आयोजित की जाती है जिसमें नीचे दिये गये निबंध उनकी सहायता कर सकता है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ निबंध (बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ एस्से)

Get here some essays on Beti Bachao Beti Padhao in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध 1 (100 शब्द)

बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर निबंध-Beti Bachao Beti Padhao In Hindi

भारतीय समाज में छोटी बच्चियों के खिलाफ भेदभाव और लैंगिक असमानता की ओर ध्यान दिलाने के लिये बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ नाम से प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा एक सरकारी सामाजिक योजना की शुरुआत की गयी है। हरियाणा के पानीपत में 22 जनवरी 2015, बुधवार को प्रधानमंत्री के द्वारा इस योजना की शुरुआत हुयी। ये योजना समाज में लड़कियों के महत्व के बारे लोगों को जागरुक करने के लिये है। कन्या भ्रूण हत्या को पूरी तरह समाप्त करने के द्वारा लड़कियों के जीवन को बचाने के लिये आम लोगों के बीच ये जागरुकता बढ़ाने का कार्य करेगी तथा इसमें एक लड़के की भाँति ही एक लड़की के जन्म पर खुशी मनाने और उसे पूरी जिम्मेदारी से शिक्षित करने के लिये कहा गया है।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध 2 (150 शब्द)

बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर निबंध-Beti Bachao Beti Padhao In Hindi

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ (इसका अर्थ है लड़कियों को बचाना और शिक्षित करना) योजना की शुरुआत भारतीय सरकार द्वारा 2015 के जनवरी महीने में हुई। इस योजना का मकसद भारतीय समाज में लड़कियों और महिलाओं के लिये कल्याणकारी कार्यों की कुशलता को बढ़ाने के साथ-साथ लोगों के बीच जागरुकता उत्पन्न करने के लिये भी है। इस योजना के लिये 100 करोड़ की शुरुआती पूँजी की आवश्यकता थी।

इस योजना की शुरुआत की जरुरत 2001 के सेंसस के आँकड़ों के अनुसार हुई, जिसके तहत हमारे देश में 0 से 6 साल के बीच का लिंगानुपात हर 1000 लड़कों पर 927 लड़कियों का था। इसके बाद इसमें 2011 में और गिरावट देखी गयी तथा अब आँकड़ा 1000 लड़कों पर 918 लड़कियों तक पहुँच चुका था। 2012 में यूनिसेफ द्वारा पूरे विश्वभर में 195 देशों में भारत का स्थान 41वाँ था इसी वजह से भारत में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के प्रति लोगों की जागरुकता जरुरी हो गयी। ये योजना कन्या भ्रूण हत्या को जड़ से मिटाने के लिये लोगों से आह्वन भी करती है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध 3 (200 शब्द)

बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर निबंध-Beti Bachao Beti Padhao In Hindi

देश में छोटी बच्चियों को सशक्त करने के साथ-साथ समाज में लड़कियों की  गिरती संख्या के अनुपात के मुद्दे को बताने के लिये एक उद्देश्यपूर्णं ढंग से एकराष्ट्रव्यापी योजना की शुरुआत हुई जिसका नाम बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ है। हरियाणा के पानीपत में 22 जनवरी 2015 को भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सफलतापूर्वक इस योजना का आरंभ हुआ। लड़कियों के प्रति लोगों की विचारधारा में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ ही ये योजना भारतीय समाज में लड़कियों की महत्ता की ओर भी इंगित करता है। भारतीय समाज में लड़कियों के प्रति लोगों की मानसिकता बहुत क्रूर हो चुकी है। ऐसे लोगों का मानना है कि लड़कियाँ पहले परिवार के लिये बोझ होती है और फिर पति के लिये तथा ये सिर्फ लेने के लिये होती है देने के लिये नहीं।

हालाँकि ये सच नहीं है, दुनिया की आधी जनसंख्या लगभग महिलाओं की है इसलिये वो धरती पर जीवन के अस्तित्व के लिये आधी जिम्मेदार होती है। लड़कियों या महिलाओं को कम महत्ता देने से धरती पर मानव समाज खतरे में पड़ सकता है क्योंकि अगर महिलाएँ नहीं तो जन्म नहीं। लगातार प्रति लड़कों पर गिरते लड़कियों का अनुपात इस मुद्दे की चिंता को साफतौर पर दिखाता है। इसलिये, उन्हें गुणवत्तापूर्णं शिक्षा प्रदान कराने के साथ, छोटी बच्ची की सुरक्षा को पक्का करना ,लड़कियों को बचाना, कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिये इस योजना की शुरुआत की गयी है।


 

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध 4 (250 शब्द)

बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर निबंध-Beti Bachao Beti Padhao In Hindi

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ एक सरकारी योजना है जिसे भारत के प्रधानमंत्री ने जनवरी 2015 में शुरु किया है। लड़कियों की सामाजिक स्थिति में भारतीय समाज में कुछ सकारात्मक बदलाव लाने के लिये इस योजना का आरंभ किया गया है। भारतीय समाज में छोटी लड़कियों पर बहुत सारे प्रतिबंध किये जाते है जो उनकी उचित वृद्धि और विकास में रोड़ा बना हुआ है। ये योजना छोटी लड़कियों के खिलाफ होने वाले अत्यचार, असुरक्षा, लैंगिक भेदभाव आदि को रोकेगा। 18वीं सदी के लोगों की बजाय आधुनिक में समय महिलाओं के प्रति लोगों की मानसिकता ज्यादा घटिया होती जा रही है। इस कार्यक्रम की शुरुआत करते समय प्रधनमंत्री ने कहा कि, भारतीय लोगों की ये सामान्य धारणा है कि लड़कियाँ अपने माता-पिता के बजाय पराया धन होती है। अभिवावक सोचते है कि लड़के तो उनके अपने होते है जो बुढ़ापे में उनकी देखभाल करेंगे जबकि लड़कियाँ तो दूसरे घर जाकर अपने ससुराल वालों की सेवा करती हैं।

लड़कियों के बारे में 21वीं सदी में लोगों की ऐसी मानसिकता वाकई शर्मनाक है और जन्म से लड़कियों को पूरे अधिकार देने के लिये लोगों के दिमाग से इसे जड़ से मिटाने की जरुरत है।

छोटी लड़कियों की स्थिति अंतिम दशक में बहुत खराब हो चुकी थी क्योंकि कन्या भ्रूण हत्या एक बड़े पैमाने पर अपना पैर पसार रही थी। उच्च तकनीक के द्वारा लिंग का पता लगाकर जन्म से पहले ही लड़कियों को उनके माँ के गर्भ में ही मार दिया जाता था। लड़कियों की संख्या को कम करने के लिये ये प्रथा प्रचलन में थी साथ ही साथ परिवार एक लड़की की जिम्मेदारी तुच्छ समझता है। योजना की शुरुआत करने के लिये सबसे बेहतर जगह के रुप में हरियाणा को चुना गया था क्योंकि देश में (775 लड़कियाँ/1000 लड़के) लड़कियों के लिंगानुपात हरियाणा के महेन्द्रगण जिला में सबसे खराब है।

 

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध 5 (300 शब्द)

बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर निबंध-Beti Bachao Beti Padhao In Hindi

हरियाणा के पानीपत में 22 जनवरी 2015 को पीएम नरेन्द्र मोदी के द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नाम से एक सरकारी योजना की शुरुआत हुई। भारतीय समाज में लड़कियों की दयनीय दशा को देखते हुए इस कार्यक्रम की शुरुआत की गयी। आँकड़ों के अनुसार, 1991 में (0-6 वर्ष के उम्र के) हर 1000 लड़कों पर 945 लड़कियाँ है, जबकि 2001 में लड़कियों की संख्या 927 पर और दुबारा 2011 में इसमें गिरावट होते हुए ये 1000 लड़कों पर 918 पर आकर सिमट गयी। अगर हम सेंसस के आँकड़ों पर गौर करें तो पाएँगे कि हर दशक में लड़कियों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज हुई है। ये धरती पर जीवन की संभावनाओं के लिये भी खतरे का निशान है। अगर जल्द ही लड़कियों से जुड़े ऐसे मुद्दों को सुलझाया नहीं गया तो आने वाले दिनों में धरती बिना नारियों की हो जायेगी और तथा कोई नया जन्म नहीं होगा।

देश में लड़कियों के बुरे आँकड़ों को ध्यान में रखते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत की। ये बेहद प्रभावकारी योजना है जिसके तहत लड़कियों की संख्या में सुधार, इनकी सुरक्षा, शिक्षा, कन्या भ्रूण हत्या का उन्मूलन, व्यक्तिगत और पेशेवर विकास आदि का लक्ष्य पूरे देश भर में है।  इसे सभी राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों में लागू करने के लिये एक राष्ट्रीय अभियान के द्वारा देश (केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय, स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय) के 100 चुनिंदा शहरों में इस योजना को लागू किया गया है। इसमें कुछ सकारात्मक पहलू ये है कि ये योजना लड़कियों के खिलाफ होने वाले अपराध और गलत प्रथाओं को हटाने के लिये एक बड़े कदम के रुप में साबित होगा। हम ये आशा करते हैं कि आने वाले दिनों में सामाजिक-आर्थिक कारणों की वजह से किसी भी लड़की को गर्भ में नहीं मारा जायेगा, अशिक्षित नहीं रहेंगी, असुरक्षित नहीं रहेंगी, बलात्कार नहीं होगा आदि। अत: पूरे देश में लैंगिक भेदभाव को मिटाने के द्वारा बेटी-बचाओ बेटी-पढ़ाओ योजना का लक्ष्य लड़कियों को आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह से स्वतंत्र बनाने का है।


 

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध 6 (400 शब्द)

बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर निबंध-Beti Bachao Beti Padhao In Hindi

पूरे भारत में लड़कियों को शिक्षित बनाने और उन्हें बचाने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ नाम से लड़कियों के लिये एक योजना की शुरुआत की। इसका आरंभ हरियाणा के पानीपत में 22 जनवरी 2015, गुरुवार को हुआ। पूरे देश में हरियाणा में लिंगानुपात 775 लड़कियाँ पर 1000 लड़कों का है जो बेटीयों की दयनीय स्थिति को दर्शाता है इसी वजह से इसकी शुरुआत हरियाणा राज्य से हुई। लड़कियों की दशा को सुधारने के लिये पूरे देश के 100 जिलों में इसे प्रभावशाली तरीके से लागू किया गया है, सबसे कम स्त्री-पुरुष अनुपात होने की वजह से हरियाणा के 12 जिलों (अंबाला, कुरुक्षेत्र, रिवारी, भिवानी, महेन्द्रगण, सोनीपत, झज्जर, रोहतक, करनाल, यमुना नगर, पानीपत और कैथाल) को चुना गया।

लड़कियों की दशा को सुधारने और उन्हें महत्व देने के लिये हरियाणा सरकार 14 जनवरी को ‘बेटी की लोहड़ी’ नाम से एक कार्यक्रम मनाती है। इस योजना का उद्देश्य लड़कियों को सामाजिक और आर्थिक रुप से स्वतंत्र बनाना है जिससे वो अपने उचित अधिकार और उच्च शिक्षा का प्रयोग कर सकें। आम जन में जागरुकता फैलाने में ये मदद करता है साथ ही महिलाओं को दिये जाने वाले लोक कल्याणकारी सेवाएँ की कार्यकुशलता को भी बढ़ाएगा। अगर हम 2011 के सेंसस रिपोर्ट पर नजर डाले तो हम पाएँगे कि पिछले कुछ दशकों से 0 से 6 वर्ष के लड़कियों की संख्या में लगातार गिरावट हो रही है। 2001 में ये 927/1000 था जबकि 2011 में ये और गिर कर 919/1000 पर आ गया। अस्पतालों में आधुनिक लक्षण यंत्रों के द्वारा लिंग पता करने के बाद गर्भ में ही कन्या भ्रूण की हत्या करने की वजह से लड़कियों की संख्या में भारी कमी आयी है। समाज में लैंगिक भेदभाव की वजह से ये बुरी प्रथा अस्तित्व में आ गयी।

जन्म के बाद भी लड़कियों को कई तरह के भेदभाव से गुजरना पड़ता है जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, खान-पान, अधिकार आदि दूसरी जरुरतें है जो लड़कियों को भी प्राप्त होनी चाहिये। हम कह सकते हैँ कि महिलाओं को सशक्त करने के बजाय अशक्त किया जा रहा है। महिलाओं को सशक्त बनाने और जन्म से ही अधिकार देने के लिये सरकार ने इस योजना की शुरुआत की। महिलाओं के सशक्तिकरण से सभी जगह प्रगति होगी खासतौर से परिवार और समाज में। लड़कियों के लिये मानव की नकारात्मक पूर्वाग्रह को सकारात्मक बदलाव में परिवर्तित करने के लिये ये योजना एक रास्ता है। ये संभव है कि इस योजना से लड़कों और लड़कियों के प्रति भेदभाव खत्म हो जाये तथा कन्या भ्रूण हत्या का अन्त करने में ये मुख्य कड़ी साबित हो। इस योजना की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने चिकित्सक बिरादरी को ये याद दिलाया कि चिकित्सा पेशा लोगों को जीवन देने के लिये बना है ना कि उन्हें खत्म करने के लिये।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर निबंध-Beti Bachao Beti Padhao In Hindi

Beti Bachao Beti Padhao Essay In Hindi

भूमिका : पृथ्वी पर मानव जाति का अस्तित्व , आदमी और औरत दोनों की समान भागीदारी के बिना संभव नहीं होता है। दोनों ही पृथ्वी पर मानव जाति के अस्तित्व के साथ-साथ किसी भी देश के विकास के लिए समान रूप से जिम्मेदार है। महिलाएं पुरुषों से अधिक महत्वपूर्ण होती हैं क्योंकि महिलाओं के बिना मानव जाति की निरंतरता के बारे में कल्पना भी नहीं की जा सकती हैं क्योंकि महिलाएं ही मानव को जन्म देती हैं।

लडकियाँ प्राचीनकाल से भारत में बहुत प्रकार के अपराधों से पीड़ित हैं। सबसे बड़ा अपराध कन्या भ्रूण हत्या है जिसमें अल्ट्रासाउंड के माध्यम से लिंग परीक्षण के बाद लडकियों को माँ के गर्भ में ही मार दिया जाता है। बेटी बचाओ अभियान को सरकार द्वारा कन्या भ्रूण हत्या के साथ-साथ बालिकाओं के विरुद्ध अन्य अपराधों को समाप्त करने के लिए शुरू किया गया है।

भारतीय समाज में लडकियों की स्थिति बहुत समय से विवाद का विषय बनी हुई है। आमतौर पर प्राचीन समय से ही देखा जाता है कि लडकियों को खाना बनाने और गुड़ियों के साथ खेलने में शामिल होने की मान्यता होती है जबकि लडके शिक्षा और अन्य शारीरिक गतिविधियों में शामिल होते हैं। ऐसी पुराणी मान्यताओं की वजह से लोग महिलाओं के खिलाफ हिंसा करने को आतुर हो जाते हैं। इसके परिणाम स्वरूप समाज में बालिकाओं की संख्या लगातार कम होती जा रही है।

कन्या भ्रूण हत्या का कन्या शिशु अनुपात कमी पर प्रभाव : कन्या भ्रूण हत्या अस्पतालों में लिंग परीक्षण के बाद गर्भपात के माध्यम से किया जाने वाला एक बहुत ही भयानक अपराध है। यह भयानक कार्य भारत में लडकियों की अपेक्षा लडकों की अधिक चाह की वजह से उत्पन्न हुआ है। इस समस्या ने भारत में बहुत हद तक कन्या शिशु लिंग अनुपात में कमी की है।

यह समस्या देश में अल्ट्रासाउंड तकनीकी की वजह से ही संभव हो पाया है। इस समस्या ने समाज में भयानक दानव का रूप ले लिया है। भारत में महिला लिंग अनुपात में भारी कमी 1991 की राष्ट्रिय जनगणना के बाद देखी गई थी।

बाद में 2001 की राष्ट्रिय जनगणना के बाद इसे समाज की एक बिगडती हुई समस्या के रूप में घोषित किया गया था। महिलाओं की आबादी में 2011 तक कमी जारी रही थी। बाद में कन्या शिशु के अनुपात को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा इस प्रथा पर सख्ती से प्रतिबंध लगाया गया था।

सन् 2001 में मध्य प्रदेश में लडकियों/लडकों का अनुपात 932/1000 था और 2011 में यह अनुपात 912/1000 तक कम हो गया था। इसका अर्थ यह है कि यह समस्या आज तक जारी है और अगर इसी तरह भ्रूण हत्या होती रही तो आने वाले 2021 तक यह समस्या 900/1000 तक कम हो जाएगी।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ जागरूकता अभियान : बेटी बचाओ बेटी पढाओ एक ऐसी योजना है जिसका अर्थ होता है कन्या शिशु को बचाओ और इन्हें शिक्षित करो। इस योजना को भारतीय सरकार के द्वारा 22 जनवरी , 2015 को कन्या शिशु के लिए जागरूकता का निर्माण करने के लिए और महिला कल्याण में सुधार करने के लिए शुरू किया गया था।

इस अभियान को कुछ गतिविधियों जैसे – बड़ी रेलियों , दीवार लेखन , टीवी विज्ञापनों , होर्डिंग , लघु एनिमेशन , वीडियो फिल्मों , निबन्ध लेखन , वाद-विवाद आदि को आयोजित करके लोगों में फैलाया गया था। इस अभियान को बहुत से सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों द्वारा समर्थित किया गया है।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना देश की बेटियों की आने वाली जिन्दगी को सुधारने वाली मुहीम और हमारे देश की भविष्य लिखने वाली अहम कलम है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बहुत ही सुरक्षित वातावरण लाएंगी।

इस अभियान को समाज के हर वर्ग के लोगों ने बहुत ही प्रोत्साहित किया है। हमारे समाज में ऐसे बहुत से घर या परिवार हैं जहाँ पर लडकियों को बराबर नहीं समझा जाता है लडके लडकियों में भेदभाव किया जाता है। लडकियों को परिवार में वह दर्जा नहीं मिलता है जिसकी वे हकदार होती हैं।

लडकियों को अपने ही परिवार में अपने पक्ष को रखने का अधिकार भी नहीं दिया जाता है। लडकियों को वस्तु की तरह समझा जाता है जिन्हें स्नेह भावना , प्यार और ममता बस एक सपने के समान लगता है। इन सभी कुरीतियों को खत्म करने और समाज के मनोभाव को सुधारने के लिए ही बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान को चलाया गया है।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान के प्रभावशाली कदम : सरकार द्वारा लडकियों को बचाने और शिक्षित करने के लिए बहुत से कदम उठाए गये हैं। इस विषय में सबसे बड़ी पहल बेटी बचाओ बेटी पढाओ है जिसे बहुत ही सक्रिय रूप से सरकार , एनजीओ , कॉर्पोरेट समूहों और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं और गैर सरकारी संगठनों ने आगे बढ़ाया है।

इसी दिशा में आगे कदम बढ़ाते हुए सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना शुरू की है जिसके तहत लड़कियों की पढाई और शादी के लिए सरकार पैसे मुहैया कराएगी।

सन् 1961 से कन्या भ्रूण हत्या एक गैर क़ानूनी अपराध है और लिंग परीक्षण के बाद गर्भपात कराना प्रतिबंधित कर दिया गया है। इन कदमों को समाज के लोगों को यह बताने के लिए लिया गया है कि लडकियाँ समाज में अपराध नहीं होती है अपितु भगवान का दिया हुआ एक बहुत ही खुबसुरत तोहफा होती हैं।

कन्याओं को बचाने और उनके सम्मान को बनाने के लिए शिक्षा सबसे बड़ी क्रांति है। लडकी को सभी क्षेत्र में समान अवसर देने चाहिए। सभी सार्वजनिक स्थानों पर लडकियों के लिए रक्षा और सुरक्षा आयोजित करनी चाहिए। विभिन्न सामाजिक संगठनो ने महिला स्कूलों में शौचालय के निर्माण से अभियान में मदद की है। बालिकाओं और महिलाओं के विरुद्ध अपराध भारत में विकास के रास्ते में बहुत बड़ी बाधा है।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान की आवश्यकता : बेटी किसी भी क्षेत्र में लडकों की तुलना में कम सक्षम नहीं होती है और लडकियाँ लडकों की अपेक्षा अधिक आज्ञाकारी , कम हिंसक और अभिमानी साबित होती हैं। लडकियाँ अपने माता-पिता की और उनके कार्यों की अधिक परवाह करने वाली होती हैं। एक महिला अपने जीवन में माता , पत्नी , बेटी , बहन की भूमिका निभाती है।

प्रत्येक मनुष्य को यह सोचना चाहिए कि उसकी पत्नी किसी और आदमी की बेटी है और भविष्य में उसकी बेटी किसी और की पत्नी होगी। इसीलिए हर किसी को महिला के प्रत्येक रूप का सम्मान करना चाहिए। एक लडकी अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों को भी बहुत ही वफादारी से निभाती है जो लडकियों को लडकों से अधिक विशेष बनाती है। लडकियाँ मानव जाति के अस्तित्व का परम कारण होती हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ का उद्देश्य : इस मिशन का मूल उद्देश्य समाज में पनपते लिंग असंतुलन को नियंत्रित करना है। हमारे समाज में कन्या भ्रूण हत्या बढती ही जा रही है जिसकी वजह से हमारे देश का भविष्य एक चिंताजनक विषय बन चुका है।

इस अभियान के द्वारा कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध आवाज उठाई गयी है। यह अभियान हमारे घर की बहु-बेटियों पर होने वाले अत्याचार के विरुद्ध एक संघर्ष है। इस अभियान के द्वारा समाज में लडकियों को समान अधिकार दिलाए जा सकते हैं। आज के समय में हमारे समाज में लडकियों के साथ अनेक प्रकार के अत्याचार किये जा रहे हैं जिनमें से दहेज प्रथा भी एक है।

लडकियों को समाज में कन्या भ्रूण हत्या का सामना करना पड़ता है। लेकिन अगर कोई लडकी पैदा भी हो जाती है तो जन्म के बाद बहुत सारे सामाजिक अत्याचारों का सामना करना पड़ता है जैसे – लडकियों को शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रखना , उन्हें समाज में अपने सही अधिकारों से वंचित रखना आदि। इन सभी आत्याचारों को खत्म करने के लिए यह अभियान बहुत हद तक सफल रहा है।

बेटियों को पढ़ाकर हम अपने समाज की प्रगति को एक गति प्रदान कर सकते हैं। हम अपनी बेटियों को पढ़-लिखकर अपने सपनों को हासिल करने का मौका दे सकते हैं जो भविष्य में कन्या भ्रूण हत्या और दहेज प्रथा को ना कहने की हिम्मत देगा। बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान हमारे देश के प्रधानमंत्री द्वारा चलाया गया एक मुख्य अभियान है। भारत का यह सपना है कि लडकियों को उनका अधिकार मिलना चाहिए और एक स्वस्थ समाज का निर्माण करना चाहिए।

उपसंहार : भारत के प्रत्येक नागरिक को कन्या शिशु बचाओ के साथ-साथ इनका समाज में स्तर सुधारने के लिए प्रयास करना चाहिए। लडकियों को उनके माता-पिता द्वारा लडकों के समान समझा जाना चाहिए और उन्हें सभी कार्यक्षेत्रों में समान अवसर प्रदान करने चाहिए।

बेटी बचाओं अभियान को लोगों द्वारा एक विषय के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए ये एक सामाजिक जागरूकता का मुद्दा है जिसे गंभीरता से लेने की जरूरत है।

लडकियाँ पुरे संसार के निर्माण की शक्ति रखती हैं। लडकियाँ भी देश के विकास और वृद्धि के लिए समान रूप से आवश्यक होती हैं। लडकियाँ लडकों की तरह देश के विकास में समान रूप से भागीदार है। समाज और देश की भलाई के लिए उसे सम्मानित और प्यार किया जाना चाहिए।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर निबंध-Beti Bachao Beti Padhao In Hindi

 

स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध-Swachh Bharat Abhiyan Essay In Hindi

स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध-Swachh Bharat Abhiyan Essay In Hindi Hindi Essay in 100-200 words, Hindi Essay in 500 words, Hindi Essay in 400 words, list of hindi essay topics, hindi essays for class 4, hindi essays for class 10, hindi essays for class 9, hindi essays for class 7, hindi essay topics for college students, hindi essays for class 6, hindi essays for class 8

स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध-Swachh Bharat Abhiyan Essay In Hindi

Swachh Bharat Abhiyan Essay in Hindi भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने महात्मा गाँधी जी की जयंती 2 अक्टूबर 2014 के उपलक्ष में स्वच्छ भारत अभियान की शुरुवात की थी| यह एस्से हमने हमने स्वच्छ भारत अभियान के उपर लिखा है, तो चलिए निचे अब इस एस्से को पढ़ते है|

Swachh Bharat Abhiyan Essay in Hindi 100 Words

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाया गया भारत सरकार का एक सफाई अभियान है। यह एक महत्वपूर्ण विषय है और हमारे बच्चों और छात्रों को इसकी जानकारी होना आवश्यक है| यह एक सामान्य ज्ञान का विषय है और आम तौर पर छात्रों को स्कूलों में इसके बारे में लिखने को दिया जाता है। हम कुछ निम्नलिखित निबंध प्रदान कर रहे है जो आपके बच्चो व छात्रों को निबंध प्रतियोगिता में भाग लेने व उसे जितने में मदद करेंगी|

स्वच्छ भारत अभियान निबंध (स्वच्छ भारत अभियान एस्से)

Get here some essays on Swachh Bharat Abhiyan in easy Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, 400, 500 and 1400 words.

स्वच्छ भारत अभियान निबंध 1 (100 शब्द)

स्वच्छ भारत अभियान को स्वच्छ भारत मिशन और स्वच्छता अभियान भी कहा जाता है| यह एक राष्ट्रीय स्तर का अभियान है और भारत सरकार द्वारा चलायी जा रही है जो की शहरों और गाओं की सफाई के लिए आरम्भ की गयी है| इस अभियान में शौचालयों का निर्माण, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना, गलियों व सड़कों की सफाई, देश के बुनियादी ढांचे को बदलना आदि शामिल है। इस अभियान को आधिकारिक तौर पर राजघाट, नई दिल्ली में 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की 145 वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया था।

स्वच्छ भारत अभियान

स्वच्छ भारत अभियान निबंध 2 (150 शब्द)

स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध-Swachh Bharat Abhiyan Essay In Hindi

स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार द्वारा चलायी गयी एक स्वच्छता मिशन है। यह अभियान 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की 145 वें जन्मदिन के अवसर पर भारत सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर शुरू किया गया था| यह राजघाट, नई दिल्ली जो की महात्मा गांधी का अंतिम संस्कार का स्थान है, में शुरू किया गया था। भारत सरकार २ अक्टूबर 2019 तक भारत को स्वच्छ भारत बनाने का उद्देश्य रखी है जो की महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती होगी|

यह एक राजनीति मुक्त अभियान है और देशभक्ति से प्रेरित है। यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक जिम्मेदारी है और इस देश को स्वच्छ देश बनाने के लिए हर भारतीय नागरिक की भागीदारी की आवश्यकता है| इस अभियान को सफल बनाने के लिए विश्व स्तर पर लोगों ने पहल की है। शिक्षक और स्कूल के छात्र इसमें पूर्ण उत्साह और उल्लास के साथ शामिल हो रहे है और ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को सफल बनाने का प्रयास कर रहे है| इसके अंतर्गत, मार्च 2017 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक और स्वच्छता पहल की शुरूआत की है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों में चबाने वाले पान, गुटखा और अन्य तम्बाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया है।

स्वच्छ भारत अभियान निबंध 3 (200 शब्द)

स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध-Swachh Bharat Abhiyan Essay In Hindi

स्वच्छ भारत अभियान के एक राष्ट्रव्यापी सफाई अभियान के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई एक स्वच्छता अभियान है। यह एक स्वच्छ भारत की कल्पना की दृष्टि से लागू किया गया है। भारत को एक स्वच्छ देश बनाना महात्मा गांधी का एक सपना था इसीलिए इसे महात्मा गांधी की जयंती पर भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया। महात्मा गांधी ने अपने वक्त में नारो द्वारा और लोगो को प्रेरित करके स्वच्छ भारत की कोशिश की थी किन्तु वो लोगो की कम रूचि के कारण असफल रहे|

लेकिन कुछ वर्षो बाद इस स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा पुनः आरम्भ किया गया जो की महात्मा गांधी के 150 वीं जयंती तक समाप्त होने का अनुमान है| यह महात्मा गांधी की 145 वीं जयंती पर 2 अक्टूबर 2014 में शुरू किया गया। यह भारत के सभी नागरिकों के लिए एक बड़ी चुनौती है। यह तभी संभव है जबकि भारत में रहने वाला हर व्यक्ति इस अभियान के लिए अपनी जिम्मेदारी को समझे हैं और इसे एक सफल मिशन बनाने के लिए एक साथ होकर पूरा करने की कोशिश करे। प्रसिद्ध भारतीय हस्तियों ने इसकी पहल की और पूरे भारत से एक जागरूकता कार्यक्रम के रूप में इसका प्रसार किया| उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मार्च 2017 में उत्तर प्रदेश में सरकारी कार्यालयों में चबाने वाले पान, गुटखा और अन्य तम्बाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया है।


स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध-Swachh Bharat Abhiyan Essay In Hindi

स्वच्छ भारत अभियान निबंध 4 (250 शब्द)

स्वच्छ भारत मिशन या स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार द्वारा चलाया गया एक विशाल जन आंदोलन है जोकि पुरे भारत में सफाई को बढ़ावा देता है। इस अभियान को 2019 तक एक स्वच्छ भारत का लक्ष्य रखते हुए 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की 150 वीं जन्मदिन के सुबह अवसर पर शुरू किया गया था। राष्ट्र पिता महात्मा गांधी ने भारत को एक स्वच्छ भारत बनाने का सपना देखा और इसके लिए हमेशा कठिन प्रयास किये। राष्ट्रपिता के सपने को साकार करने के लिए भारत सरकार ने इस अभियान को शुरू करने का फैसला किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश सरकार के कार्यालयों में सफाई सुनिश्चित करने के लिए पान, गुटका और अन्य तम्बाकू उत्पादों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

इस मिशन का उद्देश्य सभी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को कवर करना है ताकि दुनिया के सामने हम एक आदर्श देश का उदाहरण प्रस्तुत कर सके। मिशन के उद्देश्यो में से कुछ उद्देश्य है, खुले में शौच समाप्त करना, अस्वास्थ्यकर शौचालयों को फ्लश शौचालय में परिवर्तित करना, हाथ से मल की सफाई को रोकना, ठोस और तरल कचरे का पुन: उपयोग, लोगों को सफाई के प्रति जागरूक करना, अच्छी आदतो के लिए प्रेरित करना, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था अनुकूल बनाना, व भारत में निवेश के लिए रुचि रखने वाले सभी निजी क्षेत्रों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करना आदि है|

इस अभियान में बहुत ही रूचि पूर्ण तरीका इस्तेमाल हो रहा है जिसमे प्रत्येक व्यक्ति 9 लोगो को इससे जुड़ने के लिए आमंत्रित करेगा और फिर वह प्रत्येक व्यक्ति अगले 9 लोगो को जुड़ने के लिए आमंत्रित करेंगे और ये शृंखला तब तक चलती रहेगी जब तक की भारत का प्रत्येक नागरिक इससे जुड़ न जाए|

 

स्वच्छ भारत अभियान निबंध 5 (300 शब्द)

स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध-Swachh Bharat Abhiyan Essay In Hindi

स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार द्वारा चलाये जाने वाला एक राष्ट्रव्यापी सफाई अभियान है जिसकी शुरुवात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महात्मा गांधी के 145 वें जन्मदिन के अवसर पर 2 अक्टूबर २०१४ को की गयी थी| यह अभियान पूरे भारत में सफाई के उद्देश्य को पूरा करने के लिए शुरू किया गया है। प्रधानमंत्री ने लोगो से अपील की है की वो स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े और अन्य लोगो को भी इससे जुड़ने की प्रेरित करे ताकि हमारा देश दुनिया का सबसे अच्छा और स्वच्छ देश बन सके| इस अभियान की शुरुवात स्वयं नरेंद्र मोदी ने सड़क की सफाई कर के की थी|

स्वच्छ भारत अभियान भारत की सबसे बड़ी कभी सफाई अभियान है जिसके शुभारम्भ पर लगभग 30 लाख स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों और सरकारी कर्मचारियों ने भाग लिया। शुभारंभ के दिन प्रधानमंत्री ने नौ हस्तियों के नामो की घोषणा की और उनसे अपने क्षेत्र में सफाई अभियान को बढाने और आम जनता को उससे जुड़ने के लिए प्रेरित करने को कहा| उन्होंने यह भी कहा कि इन हस्तियों को अगले ९ लोगो को इससे जुड़ने के लिए प्रेरित करना है और ये शृंखला तब तक चलेगी जब तक की पुरे भारत तक इसका सन्देश न पहुंच जाये|

उन्होंने यह भी कहा कि हर भारतीय इसे एक चुनौती के रूप में ले और इसे सफल अभियान बनाने के लिए अपना पूरा प्रयास करे। नौ लोगों की श्रृंखला पेड़ की एक शाखाओं की तरह है। उन्होंने आम जनता को इससे जुड़ने के लिए अनुरोध किया और कहा की वे सफाई की तस्वीर सोशल मीडिया जैसे की फेसबुक, ट्विटर व अन्य वेबसाइट पर डालें और अन्य लोगो को भी इससे जुड़ने के लिए प्रेरित करे। इस तरह भारत एक स्वच्छ देश हो सकता है।

इस मिशन की निरंतरता बनाए रखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी आधिकारिक सरकारी इमारतों में सफाई सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश में चबाने वाला पान, गुटका और अन्य तम्बाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया है।


 

स्वच्छ भारत अभियान निबंध 6 (400 शब्द)

स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध-Swachh Bharat Abhiyan Essay In Hindi

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भारत की स्वतंत्रता से पहले अपने समय के दौरान “स्वच्छता आजादी से अधिक महत्वपूर्ण है” कहा था। वे भारत के बुरे और गन्दी स्थिति से अच्छी तरह परिचित थे| उन्होंने भारत के लोगों को साफ-सफाई और स्वच्छता के बारे और इससे अपने दैनिक जीवन में शामिल करने पे बहोत जोर दिया था। हालांकि यह लोगो के कम रूचि के कारण असफल रहा। भारत की आजादी के कई वर्षों के बाद, सफाई के प्रभावी अभियान के रूप में इसे आरम्भ किया गया है और लोगो के सक्रिय भागीदारी चाहती है जिससे इस मिशन को सफलता मिले।

भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जून 2014 में संसद को संबोधित करते हुए कहा कि “एक स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया जाएगा जो देश भर में स्वच्छता, वेस्ट मैनेजमेंट और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए होगा। यह महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर 2019 में हमारे तरफ से श्रद्धांजलि होगी”। महात्मा गांधी के सपने को पूरा करने और दुनिया भर में भारत को एक आदर्श देश बनाने के क्रम में, भारत के प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी के जन्मदिन (2 अक्टूबर 2014) पर स्वच्छ भारत अभियान नामक एक अभियान शुरू किया। इस अभियान के पूरा होने का लक्ष्य 2019 है जो की महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती है|

इस अभियान के माध्यम से भारत सरकार वेस्ट मैनेजमेंट तकनीकों को बढ़ाने के द्वारा स्वच्छता की समस्याओं का समाधान करेगी। स्वच्छ भारत आंदोलन पूरी तरह से देश की आर्थिक ताकत के साथ जुड़ा हुआ है। महात्मा गांधी के जन्म की तारीख मिशन के शुभारंभ और समापन की तारीख है। स्वच्छ भारत मिशन शुरू करने के पीछे मूल लक्ष्य, देश भर में शौचालय की सुविधा देना, साथ ही दैनिक दिनचर्या में लोगों के सभी अस्वस्थ आदतो को समाप्त करना है। भारत में पहली बार सफाई अभियान 25 सितंबर 2014 में शुरू हुयी और इसका आरम्भ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सड़क की सफाई से की गयी|

इस मिशन की सफलता परोक्ष रूप से भारत में व्यापार के निवेशकों का ध्यान आकर्षित करना, जीडीपी विकास दर बढ़ाने के लिए, दुनिया भर से पर्यटकों को ध्यान खींचना, रोजगार के स्रोतों की विविधता लाने के लिए, स्वास्थ्य लागत को कम करने, मृत्यु दर को कम करने, और घातक बीमारी की दर कम करने और भी कई चीजो में सहायक होंगी। स्वच्छ भारत अधिक पर्यटकों को लाएगी और इससे आर्थिक हालत में सुधार होगी। भारत के प्रधानमंत्री ने हर भारतीय को 100 घंटे प्रति वर्ष समर्पित करने के लिए अनुरोध किया है जोकि 2019 तक इस देश को एक स्वच्छ देश बनाने के लिए पर्याप्त है|

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में 2017 में सरकारी भवनों में सफाई सुनिश्चित करने के लिए स्वच्छता अभियान शुरू किया है। इसके अनुसार उन्होंने सरकारी कार्यालयों में पान, गुटका और अन्य तम्बाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया है।


 

स्वच्छ भारत अभियान निबंध 7 (500 शब्द)

स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध-Swachh Bharat Abhiyan Essay In Hindi

स्वच्छ भारत अभियान भारत को गंदगी-रहित बनाने की एक ऐसी मुहिम और अभियान है जो राष्ट्रीय आंदोलन के रुप में भारत सरकार द्वारा देश के 4041 सांविधिक नगर की आधारभूत संरचना, सड़के, और पैदल मार्ग, की साफ-सफाई का लक्ष्य कर आरंभ किया गया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आधिकारिक रुप से इसकी शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 गाँधी जयंती के दिन नई दिल्ली के राजघाट पर किया। इस अभियान के आरंभ के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने खुद सड़क को साफ किया। ये अभी तक का सबसे बड़ा सफाई अभियान है जिसमें 30 लाख सरकारी कर्मचारियों के साथ स्कूल कॉलेजों के बच्चों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।

इस अभियान की शुरुआत के दिन प्रधानमंत्री ने कला, खेल और साहित्य से जुड़े 9 हस्तियों को नामित किया अपने-अपने क्षेत्रों में इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिये। स्कूल कॉलेजों ने भी अपने तरीके से कई सारे कार्यक्रम आयोजित कर इसमें भाग लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने उन नौ नामित लोगों से आग्रह किया कि वो अपनी तरफ से नौ व्यक्ति चुने जो भारत स्वच्छता अभियान में पूरी इच्छाशक्ति से भाग ले और इस तरह एक पूरी मानव श्रृंखला का निर्माण हो जिसमें देश के हर कोने से हर भारतीय शामिल हो और इसे राष्ट्र मिशन के रुप में आगे बढ़ाये।

किसी पेड़ की शाखाओं की तरह ही इस मिशन का भी मकसद भारत के हर-एक व्यक्ति को जोड़ना है, चाहे वो किसी भी व्यवसाय से हो। स्वच्छ भारत मिशन का लक्ष्य गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन कर रहे सभी परिवारों को स्वास्थ्य प्रद शौचालय प्रदान करना है, बेकार शौचालय को अल्प लागत स्वास्थ्य-प्रद शौचालयों में बदलना, हैण्ड पंप उपलब्ध कराना, सुरक्षित नहाना, स्वच्छता संबंधी बाजार हो, निकास नली, ठोस और द्रव कचरे की उचित व्यवस्था हो, शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता हो, घरेलू और पर्यावरण संबंधी सफाई व्यवस्था आदि।

भारत सरकार द्वारा व्यक्तिगत स्वच्छता और पर्यावरणीय स्वच्छता को लेकर इसके पहले कई सारे जागरुकता कार्यक्रम( जैसे पूर्णं स्वच्छता अभियान,निर्मल भारत अभियान आदि ) प्रारंभ किये गए थे लेकिन इस तरह के अभियान ज्यादा प्रभावी साबित नहीं हुए। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य खुले में शौच की प्रवृति को खत्म करना, अस्वास्थयकर शौचालयों को बहाने वाले शौचालयों में तब्दील करना, हाथ से शौच की सफाई न करना, ठोस और द्रव कचरे को अचछी तरह से निपटान कर देना, साफ-सफाई को लेकर लोगों को जागरुक करना, लोगों के सोच में बदलाव लाना, साफ-सफाई के सुविधाओं के प्रति प्राइवेट क्षेत्रों की भागीदारी को सुगम बनाना आदि।

इस मिशन में प्रधानमंत्री द्वारा नामित किये गए नौ सदस्य थे, सलमान खान, अनिल अंबानी, कमल हासन, कॉमेडियन कपिल शर्मा, प्रियंका चोपड़ा, बाबा रामदेव, सचिन तेंडुलकर, शशि थरुर और प्रसिद्ध टीवी धारावाहिक “तारक मेहता का उल्टा चश्मा” की पूरी टीम। भारतीय फिल्म अभिनेता आमिर खान को इसके शुभारंभ के मौके पर आमंत्रित किया गया था। इस अभियान के लिये प्रधानमंत्री द्वारा कई ब्रैंड एम्बेस्डर्स का भी चुनाव किया गया था जिनको स्वच्छ-भारत अभियान को अलग-अलग क्षेत्रों में प्रारंभ और प्रोत्साहित करने की जिम्मेदारी थी। 8 नवंबर 2014 को उन्होंने कुछ और लोगों को इससे जोड़ा (मोहम्द कैफ, सुरेश रैना, अखिलेश यादव, स्वामी रामभद्रचार्या, कैलाश खेर, राजू श्रीवास्तव, मनु शर्मा, देवी प्रसाद द्विवेदी और मनोज तिवारी ) और 25 दिसंबर 2014 को सौरव गांगुली, किरन बेदी, रामो जी राव, सोनल मानसिंह, और पदमानभा आचार्या आदि को स्वच्छ भारत अभियान का हिस्सा बनाया।

उत्तर प्रदेश के सरकारी भवनों में, सफाई सुनिश्चित करने के लिए, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा चबाने वाले पान, गुटका और अन्य तम्बाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

कई सारे दूसरे कार्यक्रम जैसे स्वच्छ भारत रन, स्वच्छ भारत ऐप्स, रियल टाईम मॉनिटरिंग सिस्टम, स्वच्छ भारत लघु फिल्म, स्वच्छ भारत नेपाल अभियान आदि इस मिशन के उद्देशय को सक्रियता से समर्थन करने के लिये प्रारंभ और लागू किया गया।


 

स्वच्छ भारत अभियान निबंध 8 (1400 शब्द)

स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध-Swachh Bharat Abhiyan Essay In Hindi

परिचय:

स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत सरकार द्वारा देश को स्वच्छता के प्रतीक के रुप में पेश करना है। स्वच्छ भारत का सपना महात्मा गाँधी के द्वारा देखा गया था जिसके संदर्भ में गाँधीजी ने कहा कि, ”स्वच्छता स्वतंत्रता से ज्यादा जरुरी है” उनके अपने समय में वो देश की गरीबी और गंदगी से अच्छे से अवगत थे इसी वजह से उन्होंने अपने सपनों को पाने के लिये कई सारे प्रयास किये, लेकिन सफल नहीं हो सके। जैसा कि उन्होंने स्वच्छ भारत का सपना देखा था, उन्होंने कहा कि निर्मलता और स्वच्छता दोनों ही स्वस्थ और शांतिपूर्ण जीवन का अनिवार्य भाग है। लेकिन दुर्भाग्य से भारत आजादी के 67 साल बाद भी इन दोनों लक्ष्यों से काफी पीछे है। अगर आँकड़ो की बात करें तो केवल कुछ प्रतिशत लोगों के घरों में शौचालय है, इसीलिये भारत सरकार पूरी गंभीरता से बापू की इस सोच को हकीकत का रुप देने के लिये देश के सभी लोगों को इस मिशन से जोड़ने का प्रयास कर रही है जिससे विश्व भर में ये सफल हो सके।

इस मिशन को अपने प्रारंभ की तिथि से बापू की 150वीं पूण्यतिथि (2 अक्दूबर 2019) तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस अभियान को सफल बनाने के लिये सरकार ने सभी लोगों से निवेदन किया कि वो अपने आसपास और दूसरी जगहों पर साल में सिर्फ 100 घंटे सफाई के लिये दें। इसको लागू करने के लिये बहुत सारी नीतियाँ और प्रक्रिया है जिसमें तीन चरण है, योजना चरण, कार्यान्वयन चरण, और निरंतरता चरण।

स्वच्छ भारत अभियान क्या है ?

स्वच्छ भारत अभियान एक राष्ट्रीय स्वच्छता मुहिम है जो भारत सरकार द्वारा स्थापित किया गया है, इसके तहत 4041 सांविधिक नगरों के सड़क, पैदल मार्ग और अन्य कई स्थल आते है। ये एक बड़ा आंदोलन है जिसके तहत भारत को 2019 तक पूर्णंत: स्वच्छ बनाना है। इसमें स्वस्थ और सुखी जीवन के लिये महात्मा गाँधी के स्वच्छ भारत के सपने को आगे बढ़ाया गया है। इस मिशन को 2 अक्टूबर 2014(145वीं जन्म दिवस) को बापू के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर आरंभ किया गया है और 2 अक्टूबर 2019 (बापू के 150वीं जन्म दिवस ) तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है । भारत के शहरी विकास तथा पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के तहत इस अभियान को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लागू किया गया है।

इस मिशन का पहला स्वच्छता अभियान(25 सितंबर 2014) भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा इसके पहले शुरु किया जा चुका था। इसका उद्देश्य सफाई व्यवस्था की समस्या का समाधान निकालना साथ ही सभी को स्वच्छता की सुविधा के निर्माण द्वारा पूरे भारत में बेहतर मल प्रबंधन करना है।

स्वच्छ भारत अभियान की जरुरत

अपने उद्देश्य की प्राप्ति तक भारत में इस मिशन की कार्यवाही निरंतर चलती रहनी चाहिये। भौतिक, मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक कल्याण के लिये भारत के लोगों में इसका एहसास होना बेहद आवश्यक है। ये सही मायनों में भारत की सामाजिक स्थिति को बढ़ावा देने के लिये है जो हर तरफ स्वच्छता लाने से शुरु किया जा सकता है। यहाँ नीचे कुछ बिंदु उल्लिखित किये जा रहे है जो स्वच्छ भारत अभियान की आवश्यकता को दिखाते है।

  • ये बेहद जरुरी है कि भारत के हर घर में शौचालय हो साथ ही खुले में शौच की प्रवृति को भी खत्म करने की आवश्यकता है।
  • अस्वास्थ्यकर शौचालय को पानी से बहाने वाले शौचालयों से बदलने की आवश्यकता है।
  • हाथ के द्वारा की जाने वाली साफ-सफाई की व्यवस्था का जड़ से खात्मा जरुरी है।
  • नगर निगम के कचरे का पुनर्चक्रण और दुबारा इस्तेमाल, सुरक्षित समापन, वैज्ञानिक तरीके से मल प्रबंधन को लागू करना।
  • खुद के स्वास्थ्य के प्रति भारत के लोगों की सोच और स्वाभाव में परिवर्तन लाना और स्वास्थ्यकर साफ-सफाई की प्रक्रियों का पालन करना।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में वैश्विक जागरुकता का निर्माण करने के लिये और सामान्य लोगों को स्वास्थ्य से जोड़ने के लिये।
  • इसमें काम करने वाले लोगों को स्थानीय स्तर पर कचरे के निष्पादन का नियंत्रण करना, खाका तैयार करने के लिये मदद करना।
  • पूरे भारत में साफ-सफाई की सुविधा को विकसित करने के लिये निजी क्षेत्रों की हिस्सेदारी बढ़ाना।
  • भारत को स्वच्छ और हरियाली युक्त बनाना।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना।
  • स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रमों के माध्यम से समुदायों और पंचायती राज संस्थानों को निरंतर साफ-सफाई के प्रति जागरुक करना।
  • वास्तव में बापू के सपनों को सच करने के लिये ये सब करना है।

शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान

शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ भारत मिशन का लक्ष्य हर नगर में ठोस कचरा प्रबंधन सहित लगभग सभी 1.04 करोड़ घरों को 2.6 लाख सार्वजनिक शौचालय, 2.5 लाख सामुदायिक शौचालय उपलब्ध कराना है। सामुदायिक शौचालय के निर्माण की योजना रिहायशी इलाकों में की गई है जहाँ पर व्यक्तिगत घरेलू शौचालय की उपलब्धता मुश्किल है इसी तरह सार्वजनिक शौचालय की प्राधिकृत स्थानों पर जैसे बस अड्डों, रेलवे स्टेशन, बाजार आदि जगहों पर। शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता कार्यक्रम को पाँच वर्षों के अंदर 2019 तक पूरा करने की योजना है। इसमें ठोस कचरा प्रबंधन की लागत लगभग 7,366 करोड़ रुपये है, 1,828 करोड़ जन सामान्य को जागरुक करने के लिये है, 655 करोड़ रुपये सामुदायिक शौचालयों के लिये, 4,165 करोड़ निजी घरेलू शौचालयों के लिये आदि। वो कार्यक्रम जिन्हें पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है-खुले में शौच की प्रवृति को जड़ से हटाना, अस्वाथ्यकर शौचालय को पानी से बहाने वाले शौचालयों में परिवर्तन, खुले हाथों से साफ-सफाई की प्रवृति को हटाना, लोगों की सोच में परिवर्तन लाना और ठोस कचरा प्रबंधन करना।

ग्रामीण स्वच्छ भारत मिशन

ग्रामीण स्वच्छ भारत मिशन एक ऐसा अभियान है जिसमें ग्रामीण भारत में स्वच्छता कार्यक्रम को अमल में लाना है। ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ बनाने के लिये 1999 में भारतीय सरकार द्वारा इससे पहले निर्मल भारत अभियान (जिसको पूर्णं स्वच्छता अभियान भी कहा जाता है) की स्थापना की गई थी लेकिन अब इसका पुर्नगठन स्वच्छ भारत अभियान(ग्रामीण) के रुप में किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को खुले में शौच करने की मजबूरी से रोकना है, इसके लिये सरकार ने 11 करोड़ 11 लाख शौचालयों के निर्माण के लिये एक लाख चौतिस हजार करोड़ की राशि खर्च करने की योजना बनाई है। ध्यान देने योग्य है कि सरकार ने कचरे को जैविक खाद् और इस्तेमाल करने लायक ऊर्जा में परिवर्तित करने की भी है। इसमें ग्राम पंचायत, जिला परिषद, और पंचायत समिती की अच्छी भागीदारी है। निम्नलिखित स्वच्छ भारत मिशन(ग्रामीण) का लक्ष्य है:

  • ग्रामीण क्षेत्रों मे रह रहे लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना।
  • 2019 तक स्वच्छ भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में साफ-सफाई के लिये लोगों को प्रेरित करना।
  • जरुरी साफ-सफाई की सुविधाओं को निरंतर उपलब्ध कराने के लिये पंचायती राज संस्थान, समुदाय आदि को प्रेरित करते रहना चाहिये।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस और द्रव कचरा प्रबंधन पर खासतौर से ध्यान देना तथा उन्नत पर्यावरणीय साफ-सफाई व्यवस्था का विकास करना जो समुदायों द्वारा प्रबंधनीय हो।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में निरंतर साफ-सफाई और पारिस्थितिक सुरक्षा को प्रोत्साहित करना।

स्वच्छ भारत-स्वच्छ विद्यालय अभियान

ये अभियान केन्द्रिय मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा चलाया गया और इसका उद्देश्य भी स्कूलों में स्वच्छता लाना है। इस कार्यक्रम के तहत 25 सितंबर 2014 से 31 अक्टूबर 2014 तक केंद्रिय विद्यालय और नवोदय विद्यालय संगठन जहाँ कई सारे स्वच्छता क्रिया-कलाप आयोजित किये गए जैसे विद्यार्थियों द्वारा स्वच्छता के विभिन्न पहलूओं पर चर्चा, इससे संबंधित महात्मा गाँधी की शिक्षा, स्वच्छता और स्वाथ्य विज्ञान के विषय पर चर्चा, स्वच्छता क्रिया-कलाप(कक्षा में, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, मैदान, बागीचा, किचन शेड दुकान, खानपान की जगह इत्यादि)। स्कूल क्षेत्र में सफाई, महान व्यक्तियों के योगदान पर भाषण, निबंध लेखन प्रतियोगिता, कला, फिल्म, चर्चा, चित्रकारी, तथा स्वाथ्य और स्वच्छता पर नाटक मंचन आदि। इसके अलावा सप्ताह में दो बार साफ-सफाई अभियान चलाया जाना जिसमें शिक्षक, विद्यार्थी, और माता-पिता सभी हिस्सा लेंगे।

उत्तर प्रदेश में स्वच्छता की एक और पहल

मार्च 2017 में योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री) ने स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए सरकारी कार्यालयों में चबाने वाला पान, पान-मसाला, गुटका और अन्य तम्बाकू उत्पादों (विशेषकर ड्यूटी के समय में) पर प्रतिबंध लगा दिया है। उन्होंने इस पहल की शुरुआत सरकारी इमारत में अपनी पहली यात्रा के बाद की जब उन्होंने पान के दाग वाली दीवारों और कोनों को देखा।

निष्कर्ष

इस तरह हम कह सकते है कि 2019 तक भारत को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के लिये स्वच्छ भारत अभियान एक स्वागत योग्य कदम है। जैसा कि हम सभी ने कहावत में सुना है ‘स्वच्छता भगवान की ओर अगला कदम है’। हम विश्वास के साथ कह सकते है कि अगर भारत की जनता द्वारा प्रभावी रुप से इसका अनुसरण किया गया तो आने वाले चंद वर्षों में स्वच्छ भारत अभियान से पूरा देश भगवान का निवास स्थल सा बन जाएगा। चूँकि स्वच्छता से ईश्वर का गर्मजोशी से स्वागत शुरु हो चुका है तो हमें भी अपने जीवन में स्वच्छता को जारी रख उनको बनाये रखने की आवश्यकता है, एक स्वस्थ्य देश और स्वस्थ्य समाज को जरुरत है कि उसके नागरिक स्वस्थ्य रहें तथा हर व्यवसाय में स्वच्छ हो।

वैसे तो स्वच्छ भारत अभियान को स्वच्छ भारत मिशन और स्वच्छता अभियान भी कहा जाता है| स्वच्छ भारत अभियान एक राष्ट्रीय स्तरीय अभियान है| महात्मा गाँधी जी की 145वीं जयंती के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस अभियान के आरंभ की घोषणा की| यह अभियान प्रधानमंत्री जी की महत्वकांशी परियोजना में से एक है 2 अक्टूबर 2014 को उन्होंने राजपथ पर जनसमूह को संबोधित करते हुए सभी राष्ट्रवासियों से स्वच्छ भारत अभियान में भाग लेने और इसे सफल बनाने को कहा| साफ-सफाई के संदर्भ में देखा जाए तो यह बयान अब तक का सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान है| साफ सफाई को लेकर दुनिया भर में भारत की छवि बदलने के लिए हमारे प्रधानमंत्री जी बहुत गंभीर है| उनकी इच्छा स्वच्छ भारत अभियान को एक जन आंदोलन बनाकर देशवासियों को गंभीरता से इससे जोड़ने की है|

Swachh Bharat Abhiyan Essay in Hindi Language
स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध – Swachh Bharat Abhiyan Essay in Hindi Language

Swachh Bharat Abhiyan Essay in Hindi 200 words

स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध-Swachh Bharat Abhiyan Essay In Hindi

हमारे प्रधानमंत्री जी ने 2 अक्टूबर के दिन सर्वप्रथम गांधी जी को राजघाट पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की और फिर नई दिल्ली स्थित वाल्मीकि बस्ती में जाकर झाडू लगाई कहां जाता है कि वाल्मीकि बस्ती जिले में गांधीजी का सबसे खुश इंसान था वह यहां आकर ठहर थे| अब समय आ गया है कि हम सवा सौ करोड़ भारतीय अपनी मातृभूमि को स्वच्छ बनाने का प्रण करें| क्या साफ-सफाई केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी है? क्या यह हम सभी की जिम्मेदारी नहीं हैं हमें यह नजरिया बदलना होगा मैं जानता हूं कि इसे केवल एक अभियान बनाने से कुछ नहीं होगा| पुरानी आदतों को बदलने में समय लगता है यह मुश्किल काम है मैं जानता हूं लेकिन हमारे पास वर्ष 2019 तक का समय है|

प्रधानमंत्री जी ने 5 साल में देश को साफ सुथरा बनाने के लिए लोगों को शपथ दिलाई कि ना मैं गंदगी करूंगा और ना ही गंदगी करने दूंगा| अपने साथ में 100 लोगों को साफ सफाई के प्रति जागरुक करूंगा और उन्हें सफाई की शपथ दिलवाऊंगा| उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति साल में 100 घंटे का श्रम दान करने की शपथ ले और सप्ताह में कम से कम 2 घंटे सफाई के लिए निकालें| अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने स्कूलों में गांव में शौचालय निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया|

Swachh Bharat Abhiyan Essay in Hindi 250 Words

स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध-Swachh Bharat Abhiyan Essay In Hindi

स्वच्छ भारत अभियान को पूरा करने के लिए 5 वर्ष (2 अक्टूबर 2019) तक की अवधि निश्चित किए गई है| इस अभियान पर लगभग दो लाख करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया गया है| इसके अंतर्गत 4041 शहरों को सम्मिलित किया जाएगा| इस अभियान की सफलता को सुनिश्चित करने के लिए, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय 1 लाख 34 हजार करोड़ और केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय 62 हजार करोड़ की आर्थिक सहायता प्रदान करेंगे|

इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने क्लीन इंडिया कैंपेन के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत को सालाना 20 लाख रुपए देने की घोषणा की| यह अभियान अभी प्रारंभिक चरण में ही है लेकिन सरकारी प्रयासों से यह आभास हो रहा है कि सरकार इस अभियान को निर्धारित समयअवधि में पूर्ण करने के लिए प्रतिबद्ध है| इस अभियान के प्रति जनसाधारण को जागरुक करने के लिए सरकार समाचार पत्रों, विज्ञापनों आदि के अतिरिक्त सोशल मीडिया का भी उपयोग कर रही है|

क्लीन इंडिया नाम से एक नई वेबसाइट की भी शुरुआत की गई है और फेसबुक जैसे प्रसिद्ध नेटवर्किंग साइट के माध्यम से भी लोगों को इस से जोड़ा जा रहा है ट्विटर पर भी माइक्रो इन इंडिया के नाम से एक ट्विटर हैंडल का अकाउंट का भी शुभारंभ किया गया है| प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री जी ने सभी से अपील की है कि लोग पहले गंदी जगह की फोटो सोशल नेटवर्क साइट पर अपलोड करें और फिर उस स्थान को साफ करके उसकी वीडियो तथा फोटो भी अपलोड करें इस अभियान में प्रधानमंत्री जी ने मशहूर हस्तियों को भी शामिल किया है उन्होंने इसके लिए 9 लोगों को नॉमिनेट भी किया है|

Swachh Bharat Abhiyan Essay in Hindi
स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध – Swachh Bharat Abhiyan Essay in Hindi

इन 9 हस्तियों में अनिल अंबानी, सचिन तेंदुलकर, सलमान खान, प्रियंका चोपड़ा, बाबा रामदेव, कमल हासन, मृदुला सिन्हा, शशि थरूर और शाजिया इल्मी शामिल है| इसके अलावा उन्होंने टीवी सीरियल “तारक मेहता का उल्टा चश्मा” की पूरी टीम को भी नॉमिनेट किया है| उन्होंने कहा कि यह सभी लोग स्वच्छता अभियान के लिए काम करें| इस तरह स्वच्छता अभियान ना रहकर एक आंदोलन बन जाएगा उन्होंने कहा यह दायित्व सिर्फ सफाई कर्मचारियों का नहीं है सभी 125 करोड़ भारतीयों का है|

केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री की गंदगी मुक्त भारत की संकल्पना अच्छी है तथा इस दिशा में उनकी ओर से किए गए आरंभिक प्रयास भी सराहनीय है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण प्रशन यह है कि आखिर क्या कारण है कि साफ-सफाई हम भारत वासियों के लिए कभी महत्व के विषय ही नहीं रहा आखिर क्यों तमाम प्रयासों के बाद भी हम साफ सुथरे नहीं रहते हमारे गांव गंदगी के लिए बहुत पहले से बदनाम है लेकिन ध्यान दिया जाए तो यह पता चलता है कि इस मामले में शहरों की स्थिति भी गांव से से बहुत भिन्न नहीं है| आज पूरी दुनिया में भारत की छवि एक गंदे देश की है जब-जब भारत की अर्थव्यवस्था, तरक्की, ताकत और प्रतिभा की बात होती है तब-तब इस बात की भी चर्चा होती है कि भारत एक गंदा देश है| पिछले ही वर्ष हमारे पड़ोसी देश चीन के ब्लॉग पर गंगा में तैरती लाश और भारतीय सड़कों पर कूड़े के ढेर वाली तस्वीरें छाई रहेगी|

कुछ साल पहले इंटरनेशनल हाइजीन काउंसिल ने अपने एक सर्वे में यह कहा था कि औसत भारतीय घर बेहद गंदे और अस्वास्थ्यकर होते हैं| इस सर्वे में काउंसिल ने कमरों, बाथरुम और रसोई घर की साफ-सफाई को आधार बनाया था| उसके द्वारा जारी गंदे देशों की सूचना मैं सबसे पहला स्थान मलेशिया और दूसरा स्थान भारत को मिला था| हद तो तब हो गई जब हमारे ही एक पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यहां तक कह दिया कि यदि गंदगी के लिए नोवेल पुरस्कार दिया जाता तो वह भारत को ही मिलता|

Swachh Bharat Abhiyan Essay in Hindi 400 Words

स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध-Swachh Bharat Abhiyan Essay In Hindi

यह सभी बातें और तथ्य हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि हम भारतीय साफ-सफाई के मामले में भी पिछड़े हुए क्यों हैं ? जबकि हम उस समर्थ एवं गौरवशाली भारतीय संस्कृति के अनुयायी हैं जिसका मुख्य उद्देश्य सदा “पवित्रता” और “शुद्धि” रहा है| वास्तव में भारतीय जनमानस इसी अवधारणा के चलते एक उलझन में रहा है| उसने इसे सीमित अर्थों में ग्रहण करते हुए मन और अंत करण की शुचिता को ही सर्वोपरि माना है इसलिए हमारा यह कहा गया है  “मन चंगा तो कठौती में गंगा”|

कुल मिलाकर सार यही है कि वर्तमान समय में स्वच्छता हमारे लिए एक बड़ी आवश्यकता है| यह समय भारतवर्ष के लिए बदलाव का समय है बदलाव के इस दौर में यदि हम स्वच्छता के क्षेत्र में पीछे रह गए तो आर्थिक उन्नति का कोई महत्व नहीं रहेगा| हाल ही में हमारे प्रधानमंत्री जी ने 25 सितंबर 2014 को “मेक इन इंडिया” अभियान का भी शुभारंभ किया इसका लक्ष्य भारत को मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अव्वल बनाना है इस अभियान से अधिक गति तो अवश्य मिलेगी लेकिन इसके साथ ही हमें प्रदूषण के रूप में एक बड़ी चुनौती भी मिलने वाली है हमें अपने दैनिक जीवन में तो सफाई को एक मुहीम की तरह शामिल करने की जरूरत है  साथ ही हमें इसे एक बड़े स्तर पर भी देखने की जरूरत है ताकि हमारा पर्यावरण भी स्वच्छ रहे|

स्वछता समान रुप से हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है| हर समय कोई सरकारी संस्था या बाहरी वह हमारे पीछे नहीं लगा रह सकता| हमें अपनी आदतों में सुधार करना होगा और स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा हालांकि आदतों में बदलाव करना आसान नहीं होगा लेकिन यह इतना मुश्किल भी नहीं है| प्रधानमंत्री जी ने ठीक ही कहा कि जल्दी हम कम से कम खर्च में अपनी पहली ही कोशिश में मंगल ग्रह पर पहुंच गए तो क्या हम स्वच्छ भारत का निर्माण सफलतापूर्वक नहीं कर सकते हैं कहने का तात्पर्य है कि क्लीन इंडिया का सपना पूरा करना कठिन नहीं हमें हर हाल में इस लक्ष्य को वर्ष 2019 तक प्राप्त करना होगा तभी हमारी ओर से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व उनकी 150वीं जयंती पर सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकेगी|

स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध-Swachh Bharat Abhiyan Essay In Hindi

भूमिका : स्वच्छ भारत अभियान को सरकार द्वारा देश को स्वच्छता के प्रतिक के रूप में शुरू किया गया है। स्वच्छ भारत का सपना महात्मा गाँधी जी ने देखा था। अपने सपने के सन्दर्भ में गाँधी जे ने कहा कि स्वच्छता स्वतंत्रता से ज्यादा जरूरी है और स्वतंत्रता ही स्वस्थ और शांतिपूर्ण जीवन का एक अनिवार्य भाग है। महात्मा गाँधी जी अपने समय में देश की गरीबी और गंदगी से अच्छी तरह अवगत थे इसीलिए उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए बहुत से प्रयास किये लेकिन वो उसमें सफल न हो सके।

अगर आंकड़ों की बात की जाये तो बहुत ही कम लोग ऐसे हैं जिनके घरों में शौचालय हैं। इसलिए सरकार गंभीर रूप से सभी को महात्मा गाँधी जी के सपने के साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए सरकार ने सभी लोगों से निवेदन किया वे अपने आस-पास की और दूसरी जगहों की सफाई के लिए साल में केवल 100 घंटों के लिए अपना योगदान दे।

इसको लागू करने के लिए बहुत सारी नीतियाँ और प्रिक्रिया हैं। स्वच्छ भारत अभियान के जरिए भारत को स्वच्छ बनाना हर भारतीय का सपना होता है। सभी के जीवन में स्वच्छता का बहुत अधिक महत्व होता है। अगर हम स्वच्छ और सुंदर माहौल में न रहें तो हमें गंदगी से अनेक प्रकार की बिमारियों और परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिसके लिए हम खुद जिम्मेदार होते हैं। हम सभी यही सोचते हैं कि हम अपने घर और आस पास की सफाई रखें लेकिन सफाई करने के बाद कूड़े-कचरे को इधर-उधर फेंक देते हैं।

स्वच्छता अभियान : स्वच्छ भारत अभियान एक राष्ट्रिय स्वच्छता मुहिम है जो भारत सरकार द्वारा स्थापित किया गया है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत 4041 सांविधिक नगरों के सडक , पैदल मार्ग और अन्य कई स्थान आते हैं। यह एक बहुत ही बड़ा आन्दोलन है जिसके तहत भारत को 2019 तक पूरी तरह से स्वच्छ बनाना है।

भारत में स्वस्थ और सुखी जीवन के लिए महात्मा गाँधी जी के स्वच्छ भारत के सपने को आगे बढ़ाया गया है। स्वच्छ भारत अभियान को 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गाँधी जी के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर शुरू किया गया है और 2 अक्टूबर 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

भारत सरकार द्वारा शहरी विकास , पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के तहत इस अभियान को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लागु किया गया है। इस मिशन का पहला स्वच्छता अभियान भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा पहले ही शुरू किया जा चुका था। स्वच्छ भारत अभियान के द्वारा सफाई व्यवस्था की समस्या का समाधान निकालना साथ में सभी को स्वच्छता की सुविधा के निर्माण द्वारा पूरे भारत में मल प्रबंधन करना है।

स्वच्छता अभियान की आवश्यकता : अपने उद्देश्य की प्राप्ति तक भारत में स्वच्छता अभियान की कार्यवाई लगातार चलती रहनी चाहिए। भौतिक , मानसिक , सामाजिक , बौद्धिक कल्याण के लिए भारत के लोगों में इसका एहसास होना बहुत ही जरूरी है। यह भारत की सामाजिक स्थिति को बढ़ावा देने के लिए है जो हर तरफ स्वच्छता लाने से शुरू किया जा सकता है।

भारत के प्रत्येक घर में शौचालय होना बहुत ही जरूरी होता है और खुले में शौच करने की प्रवृति को बंद किया जाना भी बहुत जरूरी है। अस्वास्थ्यकर शौचालयों को पानी से बहने वाले शौचालयों में बदलने की जरूरत है। हाथ से की जाने वाली सफाई व्यवस्था को खत्म किया जाना चाहिए।

नगर के कचरे का पुनर्चक्रण और दुबारा इस्तेमाल , सुरक्षित समापन , वैज्ञानिक तरीके से मल प्रबंधन को लागू करना चाहिए। भारत के लोगों की खुद के स्वास्थ्य के प्रति सोच और स्वाभाव में परिवर्तन लाना और स्वास्थ्यकर साफ-सफाई की प्रक्रियों का पालन करना चाहिए।

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में वैश्विक जागरूकता का निर्माण करने के लिए और सामान्य लोगों को स्वास्थ्य से जोड़ने के लिए इसे चलाना बहुत जरूरी है। इसमें काम करने वाले लोगों के द्वारा स्थानीय स्तर पर कचरे के निष्पादन का नियंत्रण करना और खाका तैयार करने में मदद करना जरूरी है।

पुरे भारत में साफ-सफाई की सुविधा को विकसित करने के लिए निजी क्षेत्रों की हिस्सेदारी बढ़ाना जरूरी है। भारत को स्वच्छ और हरियाली युक्त बनाने के यह लिए बहुत आवश्यक है। ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए बहुत ही जरूरी है।

स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रमों के माध्यम से समुदायों और पंचायती राज संस्थानों को लगातार साफ-सफाई के प्रति जागरूक करने के लिए बहुत ही आवश्यक है। वास्तव में ही महात्मा गाँधी जी के सपने को सच करने के लिए यह सब करना बहुत ही जरूरी है।

शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान : शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान का लक्ष्य हर नगर में ठोस कचरा प्रबंधन सहित लगभग सभी 1.04 करोड़ घरों , 2.5 लाख सार्वजनिक शौचालयों , 2.4 लाख सामुदायिक शौचालय उपलब्ध कराना है। सामुदायिक शौचालयों के निर्माण की योजना को रिहायशी इलाकों में किया गया है जहाँ पर व्यक्तिगत घरेलू शौचालय की उपलब्धता मुश्किल है।

इसी तरह से सार्वजनिक शौचालयों की प्राधिकृत स्थानों जैसे बीएस अड्डों , रेलवे स्टेशन , बाजार आदि जगहों पर उपलब्धता करायी गई है। शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान को पांच वर्षों के अंदर पूरा करने की योजना है। शहरी क्षेत्रों में खुले में शौच की प्रवृति को जड़ से हटाना , अस्वास्थ्यकर शौचालयों को पानी से बहाने वाले शौचालयों में परिवर्तित करना , खुले हाथों से साफ-सफाई की प्रवृति को हटाना , लोगों की सोच में परिवर्तन लाना और ठोस कचरे का प्रबंधन करना आदि लक्ष्य रखे गए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान : ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान एक ऐसा अभियान है जिससे ग्रामीण भारत में स्वच्छता कार्यक्रम को अमल में लाना है। ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ बनाने के लिए इससे पहले भारतीय सरकार द्वारा निर्मल भारत अभियान की स्थापना की गई थी लेकिन अब इस समय इसका पुनर्गठन स्वच्छ भारत अभियान के रूप में किया गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों को खुले में शौच करने की मजबूरी से रोकना , इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सरकार ने 11 करोड़ 11 लाख शौचालयों के निर्माण के लिए एक लाख करोड़ रुपए की राशी को खर्च करने की योजना बनाई है।

सरकार ने कचरे को जैविक खाद और इस्तेमाल करने लायक उर्जा में परिवर्तित करने की योजना भी है। इससे ग्राम पंचायत , जिला परिषद , पंचायत समिति की बहुत अच्छी भागीदारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार करने के लिए इसे चलाया गया है।

2019 तक स्वच्छ भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में साफ-सफाई के लिए लोगों को प्रेरित करना है। साफ-सफाई की जरूरी सुविधाओं ओ लगातार उपलब्ध करने के लिए पंचायती राज संस्थान , समुदाय आदि को प्रेरित करते रहना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार साफ-सफाई और पारिस्थितिक सुरक्षा को प्रोत्साहित करना है।

स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय अभियान : स्वच्छ भारत अभियान केन्द्रिय मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा चलाया गया है और इसका उद्देश्य भी स्कूलों में स्वच्छता लाना है। इस अभियान के तहत 25 सितम्बर 2014 से 31 अक्टूबर 2014 तक केन्द्रिय विद्यालय और नवोदय विद्यालय संगठन जहाँ कई सारे स्वच्छता क्रियाकलाप आयोजित किये गये हैं जैसे विद्यार्थियों द्वारा स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा , इससे संबंधित महात्मा गाँधी की शिक्षा , स्वच्छता और स्वच्छता और स्वास्थ्य विज्ञान के विषय पर चर्चा , स्वच्छता क्रियाकलाप।

इसके द्वारा स्कूल क्षेत्र में सफाई , महान व्यक्तियों के योगदान पर भाषण , निबन्ध लेखन प्रतियोगिता , कला , फिल्म , चर्चा , चित्रकारी , स्वास्थ्य और स्वच्छता पर नाटक मंचन किया जाता है। इसके अलावा सप्ताह में दो बार साफ-सफाई अभियान चलाया जाना जिसमें शिक्षक , विद्यार्थी ओए माता-पिता सभी हिस्सा लेंगे।

स्वच्छ भारत अभियान पर नारे : स्वच्छ भारत अभियान के लिए बहुत से नारों का प्रयोग किया जाता है।

1. जागो युवा जागो स्वच्छ भारत हैं तुम्हारा अधिकार लेकिन उठाओं पहले कर्तव्य का भार।

2. सीमा पर लड़ना ही नहीं है देशभक्ति का नाम स्वच्छ बने देश करो ऐसा काम।

3. कदम से कदम मिलाओ स्वच्छता की तरफ हाथ बढाओ।

4. क्या दोगे आने वाले को ? पूर्वजों से तुम्हे स्वतंत्र आसमान मिला न करो कोई बड़ा वादा बस दो स्वच्छ आसमा की छाया।

5. युवा शक्ति हैं सब पे भारी , उठाओं झाड़ू गंदगी बाहर करो सारी।

6. स्वच्छता ही हैं देश का सौन्दर्य , जिसे लाना हैं हमारा कर्तव्य।

7. एक कदम स्वच्छता की ओर।

8. एक नया सवेरा लायेंगे , पूरे भारत को स्वच्छ और सुंदर बनायेंगे।

9. देश भी साफ हो , जिसमे सबका साथ हो।

10. अब सबकी बस एक ही पुकार , स्वच्छ भारत हो यार।

11. स्वच्छता का रखना हमेशा ध्यान , तभी तो बनेगा हमारा भारत महान।

12. आओ मिलकर सबको जगाये , गंदगी को स्वच्छता से दूर भगाए।

13. स्वच्छता अपनाना है समाज में खुशियाँ लाना है।

14. कदम से कदम बढ़ाते जाओ , स्वच्छता की तरफ मिलकर जुट जाओ।

15. युवा शक्ति है सब पर भारी , चलो करो अब स्वच्छ भारत की तैयारी।

16. आओ मिलजुलकर खुशिया मनाये , भारत को स्वच्छ बनाये।

17. स्वच्छ भारत अभियान में सब मिल जाओ , मिलकर सब अपने प्यारे भारत को स्वच्छ बनाओ।

18. सफाई से खुद को स्वच्छ बनाना है स्वच्छता से पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाना है।

19. अब हर भारतियों ने मन में यही ठाना है पूरे भारत को स्वच्छ बनाना है।

20. करो कुछ ऐसा काम , की स्वच्छ भारत के चलते हो विश्व में भारत की शान।

21. गाँव गाँव गली गली ऐसी ऐसी ज्योति जलाएंगे , पूरे भारत को स्वच्छ बनायेंगे।

22. खूबसूरत होगा देश का हर छोर , क्यूंकि कम करेंगे गंदगी चारो ओर।

23. गांधीजी के सपनों का भारत बनायेंगे , चारों तरफ स्वच्छता फैलाएँगे।

24. चलाओ जोरों से स्वच्छता अभियान , तभी यो बनेगा हमारा भारत महान।

25. स्वच्छ भारत है एक बड़ा अभियान , सब मिलके करे अपना योगदान।

26. बापू का घर घर पहुंचे संदेश , स्वच्छ और सुंदर हो अपना देश।

उपसंहार : 2019 तक भारत को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के लिए स्वच्छ भारत अभियान एक बहुत ही अच्छा कदम है। अगर भारत की जनता द्वारा प्रभावी रूप से इसका अनुसरण किया गया तो आने वाले समय में स्वच्छ भारत अभियान से सारा देश भगवान का निवास स्थल बन जायेगा।

क्योंकि स्वच्छता से भगवान का गर्मजोशी से स्वागत शुरू हो चुका है तो हमें भी अपने जीवन में स्वच्छता को जारी रख कर उनको बनाए रखने की जरूरत है , एक स्वस्थ देश और स्वस्थ समाज को जरूरत है कि उसके नागरिक स्वस्थ रहें और हर व्यवसाय में स्वच्छ हों।

स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध-Swachh Bharat Abhiyan Essay In Hindi