September 10, 2018 | Hindigk50k

jalore District GK in Hindi जालोर जिला Rajasthan GK in Hindi

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 Rajasthan Districts wise General Knowledge

1. अजमेर  6. भरतपुर  11. चित्तौड़गढ़  16. हनुमानगढ़  21. झुंझुनूं  26. पाली  31. सिरोही 
2. अलवर  7. भीलवाड़ा 12. दौसा  17. जयपुर  22. जोधपुर  27. प्रतापगढ़  32. टोंक
3. बांसवाड़ा  8. बीकानेर  13. धौलपुर  18. जैसलमेर  23. करौली  28. राजसमंद  33. उदयपुर 
4. बारां  9. बूंदी  14. डूंगरपुर  19. जालोर  24. कोटा  29. सवाई माधोपुर 
5. बाड़मेर  10. चुरू  15. गंगानगर  20. झालावाड़  25. नागौर  30. सीकर 

स्वर्णगिरि के चारों ओर स्थित जालोर जिला अरब सागर के रेगिस्तानी तट पर धूप स्नान करती हुई उस मछली के समान प्रतीत होता है जिसने अपना मुख समुद्र में डाल रखा हो। सदियों से दूर सरकता हुआ समुद्र अपने पीछे दलदल का असीम विस्तार छोड़ गया है, जिसे आज नेहड़ के नाम से जाना जाता है।

जालोर (jalore)— ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

➤ महर्षि जाबालि की तपोभूमि होने के कारण जिले के प्रमुख नगर का नाम जाबालिपुर तथा कालान्तर में जालोर हुआ।
➤ यहां के प्रतिहार नरेश नागभट्ट द्वितीय ने अपनी राज्य सीमाओं का विस्तार अरब सागर से लेकर बंगाल की खाड़ी (सिन्ध से बंगाल) तक किया।
➤ अपनी राष्ट्रभक्ति और आन-बान के लिए समरांगण में मर-मिटने वाले सोनगरा चैहानों ने परमारों से छीनकर इसे अपनी राजधानी बनाया।
➤ जिले के तीन प्रमुख नगरों-जालोर, भीनमाल तथा सांचोर पर प्राचीन क्षत्रियों के प्रतिहार, परमार, चालुक्य, चौहान, खिलजी, पठान, मुगल और राठौड़ राजवंशों ने शासन किया।
➤ स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व वर्तमान जालोर जिला तत्कालीन जोधपुर रियासत(मारवाड़) का एक भाग था।
➤ प्रशासनिक दृष्टि से यह तीन परगनों या हुकूमतों-जालोर, जसवंतपुरा तथा सांचोर मेें विभक्त था।
➤ 30 मार्च, 1949 को राजस्थान निर्माण के समय जोधपुर रियासत के साथ ही इसका राजस्थान राज्य में विलय हो गया तथा जोधपुर संभाग का हिस्सा बना।
➤ विभिन्न जिलों का निर्माण हुआ तब वर्तमान जालोर जिला अपने अस्तित्व में आया।

जालोर (jalore)— भौगोलिक स्थिति

➤ जालोर जिला राजस्थान राज्य के दक्षिण-पश्चिम भाग में 24.45’’5’ उत्तरी अक्षांश से 25.48’’37’ उत्तरी अक्षांश तथा 71.7’ पूर्वी देशान्तर से 75.5’’53’ पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है।
➤ जिले का कुल क्षेत्रफल 10,564.44 वर्ग किलोमीटर है तथा राज्य का 3.11 प्रतिशत क्षेत्र घेरे हुए है।
➤ इस दृष्टि से राज्य में जिले का 13वां स्थान है।
➤ जिले की उत्तर-पश्चिमी सीमा पर बाड़मेर जिला, उत्तर पूर्वी सीमा पर पाली जिला, दक्षिण-पूर्वी सीमा पर सिरोही जिला तथा दक्षिण में गुजरात राज्य की सीमा लगती है।
➤ भूगर्भिक संरचना की दृष्टि से जिले का अधिकांश भाग चतुर्थ युगीन व अभिनूतन कालीन जमावों से आच्छादित है।
➤ ये जमाव वायु परिवहित रेत (बालु), नवीन कछारी मिट्टी, प्राचीन कछारी मिट्टी तथा ग्रिट के रुप में जिले के अधिकांश धरातल पर दृष्टिगोचर होते हैं।
➤ चट्टानों में मालानी ज्वालामुखीय तथा जालोर ग्रेनाइट प्रमुख हैं।
➤ भीनमाल तहसील के दक्षिण-पूर्वी भाग में जिले की सबसे ऊंची पहाड़ियां जसवंतपुरा की पहाड़ियां हैं।
➤ इसकी सबसे ऊंची चोटी सुन्धा 977 मीटर(3252) ऊंची है।
➤ यही इस जिले की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है।
➤ सम्पूर्ण जिला लूनी बेसिन का एक भाग है।
➤ अतः लूनी तथा उसकी सहायक जवाई, सूकड़ी, खारी, बाण्डी तथा सागी नदियां जिले के प्रवाह तन्त्र का निर्माण करती हैं।
➤ सभी नदियां बरसाती है।
➤ शुष्क एवं अर्द्ध शुष्क जलवायु वाला जिला होने के कारण यहां वार्षिक एवं दैनिक तापांतर अधिक रहता है।
➤ वार्षिक वर्षा का औसत 43.4 सेन्टीमीटर है।
➤ जनवरी सबसे ठण्डा महीना होता है और न्यून्तम तापमान 1 या 2 डिग्री सेन्टीग्रेड से नीचे चला जाता है।
➤ मई-जून में तापमान सर्वाधिक ऊंचाई पर रहता है।
➤ औसत दैनिक उच्चतम तापमान 41 या 42 डिग्री सेन्टीग्रड रहता है।
➤ कुछ दिन तो तापमान 48 डिग्री सेन्टीग्रेड को भी पार कर जाता है।

जालोर (jalore)— तोपखाना

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➤ जालोर का तोपखाना वस्तुतः परमार राजा भोज द्वारा बनवाई गई संस्कृत पाठशाला है।
➤ यह धार की भोजशाला की अनुकृति जान पड़ती है जिसे सरस्वती कण्ठाभरण पाठशाला के नाम से जाना जाता है।
➤ ऐसा प्रतीत होता है कि किसी कारणवश भोज इसका निर्माण पूरा नहीं करवा सका।
➤ रियासतकाल में इसमें जोधपुर राज्य की तोपें रखी जाती थीं और तब से इसका नाम तोपखाना पड़ा।
➤ इसी की अनुकृति जान पड़ता एक मन्दिर खण्डहर रूप में रानीवाड़ा के पास रतनपुर गांव में स्थित है।

जालोर (jalore)— सुन्धा मन्दिर

➤ अरावली पर्वत श्रृंखला में 1220 मीटर की ऊंचाई के सुन्धा पर्वत पर चामुण्डा देवी का प्रख्यात मन्दिर जालोर जिले का प्रमुख धार्मिक स्थल है।
➤ राजस्थान एवं गुजरात से लाखों यात्री प्रतिवर्ष इस मन्दिर में दर्शनार्थ आते हैं।
➤ यहां का वातावरण अत्यन्त रमणीय है। वर्ष भर झरना बहता है जिससे प्राकृतिक वनावलि की छटा देखते ही बनती है।
➤ कलात्मक ढंग से अंकित की गई विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां एवं मण्डप की कलाकृतियां पर्यटकों को देलवाड़ा के जैन मन्दिरों की याद दिलाती हैं।
➤ यहां स्थित सुन्धा अभिलेख भारतीय इतिहास का अनोखा दस्तावेज है।
➤ वस्तुतः प्रयाग का हरिषेण प्रशान्ति लेख या दिल्ली का महरौली स्तंभ लेख भारतीय इतिहास पर जितना महत्वपूर्ण प्रकाश डालता है, उतना ही महत्वपूर्ण योगदान सुन्धा अभिलेख का भारतीय इतिहास के संकलन में रहा है।

जालोर (jalore)— भीनमाल का वराह मन्दिर

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Rajasthan Gk In Hindi Series 39

➤ भीनमाल स्थित वराह श्याम का मन्दिर भारत के अति प्राचीन व गिने-चुने वराह श्याम मन्दिरों से एक है।
➤ यहां स्थापित नर वराह की मूर्ति जैसलमेर के पीले प्रस्तर से निर्मित है जो सात फीट ऊंची तथा अढ़ाई फीट चैड़ी है।
➤ मंदिर के बाहरी चैक में स्थान-स्थान पर भूमि की खुदाई से प्राप्त मूर्तियां स्थापित की गई हैं।
➤ इसमें भगवान श्याम की चतुर्भुज मूर्तियां पुरातात्विक महत्त्व की हैं, जो तत्कालीन सभ्यता, संस्कृति एवं इतिहास की अन्यत्र स्थानों से मिली जानकारियों की पुष्टि करती हैं।

जालोर (jalore)— आशापुरी मंदिर (मोदरा)

➤ समदड़ी-भीलड़ी रेल मार्ग पर महोदरी माता का अति प्रसिद्ध मंदिर स्थित है।
➤ मार्कण्डेय पुराण के दुर्गा सप्तशती नामक भाग में भगवती दुर्गा का महोदरी अर्थात् बड़े पेट वाली नाम वर्णित है।
➤ यहां स्थापित मूर्ति लगभग एक हजार वर्ष प्राचीन है। उत्तरी गुजरात के खेरालू नामक ग्राम के एक भाजक से प्राप्त कर स्थापित की गई है।
➤ विक्रम संवत् 1532 के एक शिलालेख के अनुसार इस मंदिर का प्राचीन नाम आशापुरी मंदिर था।
➤ जालोर के सोनगरा चैहानों की जो शाखा नाडोल से उठकर जालोर आई थी, आशापुरी देवी उनकी कुलदेवी थी।
➤ कहा जाता है कि आशापुरी देवी ने राम लक्ष्मण को स्वप्न में दर्शन देकर नाडोल का राज दिया था।
➤ इस बात की चर्चा मूथा नैणसी के ख्यात में है। यहां नवरात्रि के विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से लोग देवी के दर्शनों के लिए आते हैं।

जालोर (jalore)— सिरे मंदिर

➤ जालोर दुर्ग की निकटवर्ती पहाड़ियों में स्थित सिरे मंदिर नााि सम्प्रदाय के प्रसिद्ध जालन्धर नाथ की तपोभूमि है।
➤ वर्तमान मंदिर का निर्माण मारवाड़ रियासत के तत्कालीन शासक राजा मानसिंह ने करवाया था। ➤ अपनी विपत्ति के दिनों में उन्होंने यहां शरण प्राप्त की थी।
➤ यहां रत्नेश्वर महादेव, झालरा, जलकूप, भंवर गुफा, तालाब, भव्य हस्ति प्रतिमा, मंदिर का अभेद्या परकोटा, जनाना व मर्दान महल, भुल-भुलैया, चन्दर कूप आदि बड़े दर्शनीय एवं आकर्षक स्थल हैं

जालोर (jalore)— सेवाड़ा मंदिर

➤ रानीवाड़ा-सांचोर मार्ग पर अत्यन्त प्राचीन शिव मंदिर आज जीर्णशीर्ण अवस्था में है।
➤ शिल्पकला एवं कारीगरी में इसे भारत के किसी भी मंदिर के समकक्ष रखा जा सकता है।
➤ इस मंदिर को सर्वप्रथम खिलजी शासक ने दिल्ली से गुजरात जाते समय तोड़ा था।
➤ बाद में इस मंदिर का जीर्णाेद्धार करवाया गया।
➤ तेरहवीं शताब्दी में कराए गए जीर्णाेद्धार का शिालेख मंदिर में आज भी उपलब्ध है।
➤ बाद में पालनपुर के नवाब द्वारा भी इस पर आक्रमण कर इसे तोड़ा गया।
➤ आज यह ऊपर से लगभग आधा उतार हुआ प्रतीत होता है।
➤ मंदिर के चारों ओर कलात्मक खुदाई वाले प्रस्तर खण्ड बिखरे हुए है।

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जालोर (jalore)— जागनाथ महादेव

➤ प्राचीन आश्रम व्यवस्था का युगों के व्यतीत होने के बाद आज के युग में प्रतिनिधित्व करने वाले आश्रमों में से यह एक अत्यन्त मनोहर स्थान है।
➤ अरावली पर्वतमाला में बना यह आश्रम चारों ओर रेत के टीलों से घिरा हुआ है जो कि वर्ष भर बहने वाले झरने के लगभग चरणों में स्थित है।
➤ यह झरना मंदिर से कुछ ही आगे चलकर बालू रेत में विलीन हो जाता है।
➤ यहां स्थित शिवलिंग इतना प्राचीन है कि इसे श्वेत स्फटिक प्रस्तर पट्टिकाओं से ढक दिया गया है ताकि जलाघात से लिंग को बचाया जा सके।
➤ शिवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन होता है।
➤ मंदिर की महत्ता के कारण यहां जागनाथ रेलवे स्टेशन भी स्थापित किया गया है।

जालोर (jalore)— आपेश्वर महादेव

➤ तेरहवीं शताब्दी में बना भगवान अपराजितेश्वर शिव मंदिर आज आपेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।
➤ कहा जाता है कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल में यहां रात्रि विज्ञाम किया था।
➤ इस कारण इस स्थान का नाम राम शयन पड़ा जो कालान्तर में बिगड़ कर रामसीन हो गया। ➤ यहां स्थापित शिव प्रतिमा पांच फीट ऊंची है और श्वेत स्फटिक से निर्मित है।
➤ आदिदेव भगवान भोलेनाथ समाधिस्थ मुद्रा में विराजित हैं, कंठ में मालाएं, कानों में कुण्डल, भुजाओं में बाजूबन्द, पैरों में नूपुर, कटि में नागपाश धारण किए हैं।
➤ समझा जाता है कि जीर्णाेद्धार कार्य के दौरान पुरातात्विक महत्व की कुछ मूर्तियां खण्डित हो गई जिनमें प्राचीन गणपति मूर्ति भी सम्मिलित है।
➤ मंदिर के बाई ओर गोमती कुण्ड नामक बावड़ी है जिसका जल खारा है।
➤ मंदिर में श्वेत-श्याम वर्ण की दो मूर्तियां स्थापित हैं जिन्हें कुछ लोग काले एवं भैरव तथा कुछ लोग ब्रह्मा एवं विष्णु की मूर्तियां बताते हैं।
➤ इन मंदिरों के अतिरिक्त किले की प्राचीर में स्थित सोमनाथ महादेव मंदि, जोगमाया का मंदिर, जालोर से कुछ दूरियों पर स्थित कानीवाड़ा हनुमानजी, स्वरूपपुरा महादेव मंदिर, संकराना का सोमनाथ मंदिर, भीनमाल के पास आडेश्वर महादेव का मंदिर और जिले का यत्र-तत्र स्थापित छोटे-बड़े अनेक शिवालयों के देखते हुए यहां की भूमि को शंकर-पार्वती की रमण स्थली कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

जालोर (jalore)— जैन मंदिर

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➤ अत्यन्त प्राचीकाल से ही मण्डल जैन मत की साधना स्थली रहा है।
➤ कहा जाता है कि स्वयं भगवान महावीर इस क्षेत्र में पधारे थे।
➤ आठवीं शताब्दी के कुवलयमाला ग्रंथ से भी तत्कालीन जैन सम्प्रदाय की समृद्धि का परिचय मिलता है।

जालोर (jalore)— माण्डोली का गुरू मंदिर

➤ गुरूवर शान्ति सूरीश्वर का यह मंदिर भारत भर के जैन मतावलम्बियों के लिए अत्यन्त श्रद्धा एवं विश्वास का केन्द्र है।
➤ सम्पूर्ण रूप से श्वेत स्फटिक से निर्मित यह विशाल, भव्य एवं आकर्षक गुरु मंदिर जालोर जिले की अनुपम धरोहर है।
➤ प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु यहां गुरुवर के दर्शनों के लिए आते हैं।

जालोर (jalore)— नन्दीश्वर तीर्थ

➤ जालोर कचहरी परिसर के ठीक सामने स्थित नन्दीश्वर तीर्थ भी पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं के विशष आकर्षण का केन्द्र रहा है।
➤ मंदिर में बना कीर्तिस्तंभ कलात्मक दृष्टि से अनूठा है।
➤ मंदिर परिसर में स्थित विशाल धर्मशाला एवं भोजनशाला में तीर्थ यात्रियों के लिए आवास एवं भोजन की सुविधा उपलब्ध है।
➤ इनके अतिरिक्त भाण्डपुर का जैन मंदिर भी विख्यात एवं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र है।
➤ खगोल के प्रकाण्ड पण्डित ब्रह्मगुप्त इस जिले की महान विभूति थे जिन्होंने ब्रह्मस्फुट सिद्धन्त की रचना की थी।
➤ यमकालीन साहित्यकारों में मुनि कल्याण विजय, नैनमल जैन, रामेश्वर दयाल श्रीमाली, डा. देवदत्त नाग तथा लालदास राकेश के नाम उल्लेखनीय हैं।

जालोर (jalore)— हस्तकला

➤ जिलें में मिट्टी व लकड़ी के खिलौने बनाने की कला अपनी विकसित अवस्था में है।
➤ हरजी गांव में बने मिट्टी के सवार सहित घोड़े ‘मामाजी के घोड़े’ कहलाते हैं।
➤ ये लोक देवता के रुप में एक खुले चबूतरे पर स्थापित कर पूने जाते हैं।
➤ इसी प्रकार लकड़ी खिलौनों में विविध प्राचीन एवं नवीन अनुेकृतियां बनाई जाती हैं, जिनका निर्यात होता है। लकड़ी के खिलौने बनाने वाले कारीगरों की माली हालत अच्छी है।

जालोर (jalore)— शिवरात्रि मेला

➤ जालोर जिले में प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि पर्व पर सिरे मंदिर, जागनाथ मंदिर, रामसीन स्थित आपेश्वर महादेव, ऊण ग्राम में ऊणेश्वर महादेव मंदिर आदि स्थानों पर धार्मिक मेलों का आयोजन होता है जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु भक्तजन एकत्रित होते हैं। रामसीन में यह मेला सप्ताह पर्यन्त चलता है।

जालोर (jalore)— शीतला माता का मेला

➤ यह मेला वर्ष में एक बार चैत्र शुक्ला सप्तमी को जालोर, रणोदर, मूंगथलासिली आदि स्थानों पर आयोजित होता है।
➤ जालोर मुख्यालय पर आयोजित मेले में विभिन्न जाति की महिलाएं आंचलिक गीत गाती हैं।
➤ विभिन्न ग्रामों की टोलियां ढपली पर फागुन के मस्ताने गीत गाती हुई आती हैं।
➤ यह मेला जालेर से कोई 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित शीतला माता के मंदिर पर आयोजित होता है। पारम्परिक वेशभूषा में ग्रामीणों का मेले के प्रति उत्साह देखते ही बनता है।

जालोर (jalore)— आशापुरी माताजी का मेला

➤ जालोर से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित मोदरा ग्राम में प्रतिवर्ष होली के दूसरे दिन आशापुरी माताजी के मंदिर में मेला लगता है।
➤ श्रद्धालु ग्र्रामीणजनों ने जन सहयोग से मंदिर में नवनिर्माण के अनेक कार्य कराएं हैं, जिससे मंदिर की शोभा बढ़ गई है।

जालोर (jalore)— सुन्धा माताजी का मेला

➤ जिले के जसवन्तपुरा पंचायत समिति क्षेत्र में दांतलावास ग्राम के समीप स्थित पहाड़ियों के मध्य सुन्धा माता का मंदिर भक्तों का श्रद्धास्थल है।
➤ यहां पर वैशाख तथा भादों में शुक्ल पक्ष की तेरस से पूनम तक मेला लगता है तथा प्रति माह पूर्णिमा को भी मेले का सा वातावरण रहता है।

जालोर (jalore)— सेवाड़ियां पशु मेला

➤ रानीवाड़ा रेलवे स्टेशन से लगभग एक किलोमीटर दूरी पर आयोजित होने वाले इस पशु मेेलें में प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में कांकरेज नस्ल के बैल एवं मुर्रा नस्ल के भैंसों का क्रय-विक्रय होता है।
➤ यह मेला चैत्र शुक्ला एकादशी से प्रारम्भ होकर पूर्णिमा तक चलता है जिसमें राजस्थान के अतिरिक्त पंजाब, हरियाणा एवं गुजरात आदि राज्यों से व्यापारी आते हैं।

जालोर (jalore)— सांचोर का पशु मेला

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➤ संवाड़ियां पशु मेले के समय ही सांचोर में भी पशु मेला प्रारम्भ हो जाता है।
➤ मेले का आयोजन पंचायत समिति सांचोर द्वारा किया जाता है।
➤ यह पशु मेला राज्य स्तर का मेला है जिसमें समीपवर्ती प्रान्तों से भारी संख्या में पशु एवं व्यापारी भाग लेते हैं।
➤ मेले में पहुंचने के लिए रानीवाड़ा तक रेलमार्ग एवं रानीवाड़ा से सांचोर तक 47 किलोमीटर सड़क मार्ग की दूरी तय करनी पड़ती है।
➤ इस मेले में प्रतिवर्ष विभिन्न इकाइयों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम, फिल्म प्रदर्शन, आकर्षक प्रदर्शनी आदि का आयोजन किया जाता है।

जालोर (jalore)— पीरजी का उर्स

➤ ऐतिहासिक स्वर्णगिरि दुर्ग की सर्वोच्च चोटी पर मलिक शाह पीर के उर्स का आयोजन होता है जो धर्मिक एकता एवं हिन्दू-मुस्लिम संस्कृति के समन्वय का प्रतीक है।
➤ नाथ सम्प्रदाय के महन्त शंतिनाथजी द्वारा मलिकशाह पीर की मजार पर चादर चढ़ाने का निर्णय धार्मिक एकता का अद्वितीय प्रतीक है।
➤ इस अवसर पर आयोजित हुए जुलूस में हिन्दू-मुस्लिम सम्प्रदायों के सभी वर्गों के नर-नारी व बालक उत्साह से भाग लेते हैं।
➤ रात्रि मेें कव्वाली कार्यक्रम के साथ-साथ भगवान श्री राम, कृष्ण, शिव की अर्चना व मीरा के भजनों का गायन हिन्दू और मुस्लमानों में परस्पर आत्मीयता उत्पन्न कर देता है।

जालोर (jalore)— औद्योगिक परिदृश्य

➤ जालोर जिले में ग्रेनाइट, इमारती पत्थर, बजरी, चूना एवं ईट निर्माण हेतु मिट्टी आदि खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
➤ मांग एवं आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए जिले में आॅयल एक्सपैलर रिफाइनरी, लकड़ी फर्नीचर, लैदर-प्रोसेसिंग(बैग्स, पर्स, जूतियां) अगरबत्ती, आॅटो रिपेयर्स, आरा मशीन, प्लास्टर आॅफ पेरिस, ऊन प्रोसेसिंग मिल, टायर रिट्रेड़िंग, मसाला पिसाई, ईसबगोल पर आधारित प्रोसेसिंग तथा गोंद बनाने जैसे उद्योगों के विकास की पर्याप्त संभावनांए हैं।

जालोर (jalore)— ग्रेनाइट उद्योग

➤ पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, जालोर, बाड़मेर, पाली तथा सिरोही जिलों में ग्रेनाइट उद्योग अत्यन्त विकसित अवस्था में है जिनमें जालोर जिला सबसे आगे है।
➤ इस पत्थर की आयल्स बनाने का काम सबसे पहले यहीं आरम्भ हुआ।
➤ भारत सरकार के भू सर्वेक्षण विभाग की एक रिपोर्ट के प्रकाशन के बाद राजस्थान सरकार का ध्यान इस ओर गया। इस रिपोर्ट में ग्रेनाइट पत्थर के क्षेत्रों को दर्शाया गया था।
➤ वर्ष 1965 में राजस्थान सरकार ने खान एवं भू विभाग के माध्यम से एक ग्रेनाइट इकाई जालोर में स्थापित की जिसमें समस्त काम हाथ से होता था।
➤ वर्ष 1971 में इसे राजस्थान उद्योग एवं खनिज विकास निगम के अन्तर्गत लाया गया।
➤ इस संस्थान की प्रगति देखकर ही हजनी क्षेत्र इस ओर आकर्षित हुआ। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 1987 में ग्रेनाइट उद्योग निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया गया।
➤ आज जालोर जिले में ग्रेनाइट की 60-70 खानें कार्यरत है लगभग हर खान से निकलने वाला पत्थर अलग रंग तथा मजबूती लिए होता है।
➤ इनमें जालोर, नून, लेटा, पीजोपुरा, रानीवाड़ा, तवाब, खाम्बी, धवला, मेटाला तथा नब्बी की खानों का पत्थर अधिक लोकप्रिय है।
➤ पीलोपुरा खान का पत्थर सबसे मंहगा है जबकि दूसरे नम्बर पर गढ़ सिवाना आता है।
➤ ग्रेनाइट का भाव 40 रुपये प्रति वर्ग फुट से लेकर 150 रुपये प्रति वर्ग फुट तक होता है।
➤ जालोर जिला मुख्यालय की 40 किलोमीटर की परिधि में लगभग सभी रंग के ग्रेनाइट चट्टानें उपलब्ध हैं। फिर भी काला रंग दक्षिण से ही प्राप्त होता है।
➤ वहां से इसके ब्लाॅक्स लाकर जालोर में इनके कटिंग, पाॅलिशिंग का कार्य किया जाता है।

जालोर (jalore)— जूती उद्योग

➤ जिले की भीनमाल पंचायत समिति में जूती उद्योग काफी विकसित है।
➤ यहां की जूतियां राज्य से बाहर निर्यात की जाती हैं, जिनसे अच्छी खासी आमदनी यहां के कारीगरों को प्राप्त होती है।
खेसला उद्योग
➤ जिला मुख्यालय के निकट स्थित लेटा ग्राम में हथकरघा आधारित खेसला उद्योग काफी उन्नत अवस्था में है।
➤ यहां के स्थानीय कारीगर बड़ी सफाई से पक्के रंगों वाली सूती खेस बनाते हैं, जिंन्हे बाजार में अच्छी कीमत प्राप्त होती है।

जालोर (jalore)— विशिष्ट कृषि उपज

➤ राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र में होने वाली सामान्य फसलों के अतिरिक्त तीन विशिष्ट फसलों के रुप में जिले के कृषक सफलतापूर्वक उगाते हैं।
➤ लगभग 15 हजार हैक्टर क्षेत्र में सरसों की खेती होती है, जिससे लगभग एक लाख टन सरसों का उत्पादन होता है।
➤ जीरे की खेती लगभग 70 हजार हैक्टर में की जाती है जिससे लगभग 30 हजार टन जीरा उत्पन्न होता है।
➤ पूरे देश का 40 प्रतिशत ईसबगोल जिले में पैदा होता है। यह एक औषधीय फसल है।
➤ लगभग 40-45 हजार हैक्टर में ईसबगोल बोया जाता है तथा 25-30 हजार टन ईसबगोल प्राप्त होता है जिससे करोड़ों रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित होती है।
➤ सब्जी की फसलों में टमाटर तथा फलों में बेदाना अनार जिले की विशिष्ट फसलें हैं।

jalore District GK in Hindi जालोर जिला Rajasthan GK in Hindi

Jalore: History, Geography, Places

Location, Area & Administration of Jalore:

Jalore district situated in the south western part of Rajasthan, formed out of the erstwhile Jodhpur state after independence. This district is situated between 24.48″ 5′ to 25.48″ 37′ North Latitude and 71.7′ to 75.5″ 53′ East Longitude. The North Western border of Jalore is shared with Barmer, North Eastern boundary is shared with Pali, towards South East lies Sirohi  and in south state of  Gujarat is in contact.

The total area of the district is 10,640 Sq. KMs, which is 3.11% of the State. The district is divided into 7 tehsils of Jalore, Ahore, Bhinmal, Raniwara, Sanchore, Sayla, Bagoda, Bhadrajun, Chitalwana.
Jalore

History of Jalore:

According to mythology, Jalore was called as ‘Drumkulya’ , which stood for the northern part of southern Ocean.  Jalore’s old name was Jabalipur named after a saint- Mahirishi Jabali. By the passage of time the name of mountain Kanchangiri & Swarngiri were also frequently used as names of Jalore.

Prathihar king VatsaRaja was the ruler of Jalore during 8th century.

Towards the end of 12th Century,  Parmars ruled here. Historians believe that the Jalore fort was built by Parmar rulers. It is known from a stone inscription of 1238 A.D. of fort that Parmar King Biral’s-queen Maludevi powered Gold win on Sindhu King.

Nadol king, Arhan’s, youngest son Kirtipala started Chouhan tradition in Jalore. The Chauhan lineage of Jalore is as under:

  • Kirtipala (c. 1160-1182 CE)
  • Samara-simha (c. 1182-1204 CE)
  • Udaya-simha (c. 1204-1257 CE)
  • Chachiga-deva (c. 1257-1282 CE)
  • Samanta-simha (c. 1282-1305 CE)
  • Kanhada-deva (c. 1292-1311 CE)
    • Wrote Kanha-Prabhandha: Epic elaborating war between Kanha Dev & Alaudin Khilji.

Subsequent Rulers:

  • Rathore king Rao Maldev ruled the fort of Jalore in 15th Century.
  • During Akbar’s rule, Abdul Rahim Khan Khana took it infinitely from Gazni Khan.King.
  • Jehangir built the walls of the fort.
  • After the death of Aurangzeb it permanently became a part of Jodhpur.

Historical Places of Jalore:

Jalore Fort:jalore-fort

Jalore Fort is one of the nine castles of the Maru’, under the Paramaras in the 10th century. It  has been known through history as the Sonagir or the ‘golden mount’. The precise year of its construction is not known however it is believed to be built between the 8th and 10th centuries. Jalore fort is located atop a steep and perpendicular hill 336m high, fortified with a wall and bastions with cannon mounted upon them. The fort has four gigantic gates and is approachable only from one side, after a two-mile long serpentine ascent.

Topekhana:

Topekhana or “the cannon foundry” was built by “Ujjain King” Vkramditya as a “sansrut Pathshala” for education for his public. Later, Muslin Emperor Ala ud din Khilji converted it into a Muslim monument. The structure is imposing, with a spacious forecourt and an intricate facade. The colonnade and the ceiling have been tastefully carved.

Sundha Mata:s1

Sundha Mata temple is about 900 years old temple of Mother goddess situated on a hilltop called ‘Sundha’. At 1220 m height in the Aravalli ranges there on Sundha mountain is temple of goddesses Chamunda Devi, a very sacred place for devotees.

Dances of Jalore:

Dandiya Dance:dandiya

This dance start after holi and continues for many days. In the middle of stage the shehnai players, Nagada beaters and singers sit and male Singer sings ‘Folk Lori’ in lengthy song. Dances beating their sticks together dances parallel with this dance various Dhamal & dance oriented holi songs are sung.

Jalore Dhol Dance:

dholThis dance is performed on the occasion of marriage by mali, Dholi, Sargaras and people of Bhil Communities. It is predominantly a male dance and  at start leaders beat drum in ‘Thakna Shaili’. As soon as thakna ends some dancers puts swords in mouth, some with lathis and others taking handkerchief in hands rest only manage body thus the dance starts. Sargaras & Dholis are professional folk singer & drum beaters who are very proficient in the art.

Gair Dance:

gairThis also also involves male, who take long sticks and dances around. Dancers are called ‘Gairiya’. This dance start next day from holi and lasts fifteen days. Drums, Baakiya and Plate(Thaali) are used for playing music. Folk songs influenced by. “Shringar Ras” & “Bhakti Ras” are also used in this dance. Dancers wear white clothes from shoulder to waist, leather belt is tied, there is also a place for keeping sword in it, frills are tied on the turban.

Crafts of Jalore:

  • Handloom work is done at Leta, Jelatara, Degaon, Pur, Vodha, Vasandevda, Lalpura, Bhatip, Khara, Gundau.
  • Bhinmal is famous for its Leather traditional footwear (Juti)

Geography of Jalore:

Physiographically, the district is oblong in shape, extending up to Rann of Kutch (Gujarat). The region is generally plain but for some scattered thickly wooded hills in the north and some hillocks in the centre. The eastern portion of the district is rocky while the western tract is a roughly plain dotted with Sand dunes & sand ridges.

In respect of its geological formation, most part of district is formed of fourth century modern century deposits. These deposits can be seen in Grid pattern formed by sand (Balu), new alluvial and old alluvial Soils. In Bhinmal Teshil’s South Eastern part of Jaswantpur, highest mountains of the district are situated. the highest peak is Sundha (991 meters, 3252 feet).

Luni is the main river in the district with its tributaries Jawai, Sukdi, Khari, Bandi and Sagi.  All the rivers are seasonal.

Natural Places of Jalore:

Sundha Mata Wildlife Sanctuary:sundha-mata

Sundha Mata wildlife sanctuary has an area of 107 square kilometers and is located in jawai forest area. The Sanctuary has Sloth Bear, Nilgai, jungle cat, Desert fox, striped hyena, hanuman langoor, Vulture, owl, Indian porcupine, rock &jungle Bush Quail & Spotted dove and 120 species of birds.

Natural Resources/Minerals of Jalore:

The following are the rocks and mineral resources of Jalore district:

Fluorspar

  • Fluorspar is an important industrial mineral and is the only major source of fluorine.
  • It is chiefly used in the manufacture of hydrofluoric acid, as a flux in steel making, as an opacifier and flux in the ceramic industry.
  • Fairly large deposits of fluorspar have been discovered near village Karada of Tehsil Bhinmal.
  • The main activities of mining are located at Krisna hill, Rekha hill & Santoshi hills.

Granite

  • The granite rocks belong to the Malani System of rocks.
  • The Siwana and Jalor granites provides rocks of high fassinating colours ranging from flesh to pink and light colors .
  • The main activities of mining are located at Khambi, Kavala, Tayab, Bala, Raniwara Khurd etc.

Clay

  • Clay occurrence has bee reported near village Bhadrajun and  Pal.

Saltpetre

  • Village Kanwla in Tehsil Ahor has deposits of saltpetre.
  • Saltpetre which is used for local pottery and fire works and ammunitions industry.

Gypsum

  • Gypsum deposits are located near Ramsin, chawarda in Ahor Tehsil and at number of places in Sanchore Tehsil.
  • Other small deposits are located near Vediya, Chittarwana, Sewada, Hemagura and Haryali area.

Other Minerals:

  • Besides above, building stones and masonary stones, Bajri etc. have been produced in the district for local use since long back.
  • Dolomitic marble is known to occur near village Rupi, 9.5 Kms. south west of Bhinmal.
  • Minor occurrences of graphite and feldspar has also been found in the east of Bhinmal town.

Population:

  • According to the 2011 census Jalore district had a population of 18,30,151.
  • Its population growth rate over the decade 2001-2011 was 26.31%.
  • The district has a population density of 172 inhabitants per square kilometer.

 

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Jalore Fort:

Jalore Fort is the main attraction of Jalore, a town in the Indian state of Rajasthan, one of the nine castles of the Maru’, under the Paramaras in the 10th century. It is one of the most famous and impressive forts in the state and has been known through history as the Sonagir.
Nestled atop a hill nearly 1200 ft in height, the entry gate can only be be reached though a serpentine ascent of around two-miles up the hill. The fort features four gates – Suraj Pol, Dhruv Pol, Bal Pol and Siroh Pol. The typical construction of the Suraj Pol helps the first rays of the rising sun enter through its gateway. The major residential palace inside the fort is now deserted, with only its ruins left to view. The Topekhana or the canon foundry is the most vital structure of the fort. It was built by Ala-ud-din Khilji in the 14th century. A few mosques are found inside the fort, which are believed to be built using the remnants of 84 Hindus and Jain temples. Presently, this fort belongs to the State Government’s archaeological department and has been declared as a protected building since 1956.

Jalore Mahotsav 2018

will be held from 15th February to 17th February 2013 at Jalore stadium in Jalore district of Rajasthan. Jalore Mahotsav showcase the culture of Jalore and the best of the things Jalore district has to offer. Handicrafts, cattle, crops, plants, wild life, dance forms, Academic seminars, singing & dancing, village-life, sports, youth career guidance ,cultural programmes, trade fair, food-stalls,sports for all age-groups, Kavi sammelan, artificial rock-climbing etc.

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 Rajasthan Districts wise General Knowledge

1. अजमेर  6. भरतपुर  11. चित्तौड़गढ़  16. हनुमानगढ़  21. झुंझुनूं  26. पाली  31. सिरोही 
2. अलवर  7. भीलवाड़ा 12. दौसा  17. जयपुर  22. जोधपुर  27. प्रतापगढ़  32. टोंक
3. बांसवाड़ा  8. बीकानेर  13. धौलपुर  18. जैसलमेर  23. करौली  28. राजसमंद  33. उदयपुर 
4. बारां  9. बूंदी  14. डूंगरपुर  19. जालोर  24. कोटा  29. सवाई माधोपुर 
5. बाड़मेर  10. चुरू  15. गंगानगर  20. झालावाड़  25. नागौर  30. सीकर 

करौली जिला – एक परिचय

राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी भाग मे यह जिला 26.3 से 26.49 उत्तरी अक्षांश तथा 7.35 से 77.6 पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है. यह जिला मध्यप्रदेश राज्य का समीपवर्ती जिला हैं जिसके पश्चिम में दौसा, दक्षिण-पश्चिमी में सवाईमाधोपुर, उत्तर-पूर्व से धौलपुर तथा उत्तर-पश्चिम में भरतपुर जिले की सीमाएं लगती हैं. चम्बल नदी जिले को मध्यप्रदेश राज्य के मुरैना जिले से पृथक् करती है. राज्य का यह बत्तीससवां जिला वित्तीय वर्ष से अस्तित्व में आया है.

 

करौली का इतिहास

देशी राज्यों के विलीनीकरण के समय करौली रियासत के महाराजा गणेशपाल देव बहादुर ने इस राज्य को 17 मार्च, 1948 को मत्सय संघ में सम्मिलित कराया. मई, 1949 में मत्स्य संघ का विशाल राजस्थान विलीनीकरण हुआ.
करौली रियासत की स्थापना यदुवंशी राजा अर्जुन सिंह ने विक्रम सम्वत् 1405 (सन् 1348) में कल्याणपुरी नाम से की थी जो कालान्तर में करौली के नाम से प्रचलित हुआ.

करौली की जलवायु

जिले के अल्पकालीन बरसाती मौसम के अलावा शेष समय जलवायु शुष्क रहती है. जिले की सामान्य वार्षिक वर्षा 68.92 डिग्री सेंटीमीटर है. जिले का दैनिक अधिकतम तापमान का औसत मई माह से 49 डिग्री सेल्सियस रहता है तथा न्यूनतम 2 डिग्री सेल्सियस जनवरी में रहता है.

करौली के भूगर्भ संसाधन एवं खनिज

करौली एक तरफ से चम्बल तथा तीन तरफ से मैदानों से घिरा हुआ है. यह मैदान कैमब्रियन-पूर्व की आग्नेय चट्टानों तथा उनकी तलछट से बनी चट्टानों के रूपान्तरण से बने हैं. अरावली, की पूर्व चट्टानें स्फटिक, अभ्रक, नाईसिस्ट, मिग्मा, टाइटस आदि की बनी हुई है. यहां विंध्य श्रेणी की विभिन्न चट्टेनें जिनमें कैमूल, रीवा, भाण्डेर प्रमुख रूप से पाई जाती है. विभिन्न प्रकार के सलेटी पत्थर, बालू पत्थर तथा चूना पत्थर यहां उपलब्ध हैं.
जिला अनेक प्रकार के धात्मिक एवं खनिजों से समृद्ध है. धातुओं मे शीशा, ताम्बा, लोहा अयस्क आदि तथा अधातुओं में चूना पत्थर, चिकनी मिट्टी, सिलिका, सेलखड़ी आदि प्रमुख रूप से पाए जाते हैं. इसके अलावा जिले में लेटेराइट, रेड़ आक्साइड, बेन्टोनाइट, बेराईट, मैगनीज तथा काली मिट्टी पाई जाती है. जिलें में विभिन्न प्रकार की चट्टानों से मिलने वाले खनिज जैसे- इमारती पत्थर, सजावट के पत्थर आदि प्रचुर मात्रा मे उपलब्ध हैं. भाण्डेर रेणी का  गुलाबी पत्थर एवं सफेद निशानों वाला पत्थर करौली एवं हिण्डौन क्षेत्र में काफी मात्रा में पाया जाता है. सीमेंट श्रेणी का चूना पत्थर एवं सिलिकासेण्ड सपोटरा, नादोती मे पाया जाता है.

करौली के दर्शनीय स्थल

करौली के महल

करौली कस्बा चारों तरफ से लाल बलुई पत्थर से निर्मित है जिसकी परिधि 3.7 किलोमीटर. जिसमें 6 दरवाजें हैं एवं 11 खिड़कियां हैं. यहां महाराज गोपालदास के समय का एक खूबसूरत महल है जिसके रंगमहल एवं दीवाए-ए-आम को बड़ी खूबसूरती से बनाया गया है.

 

मदनमोहनजी का मन्दिर

इस कस्बे में लगभग 250 मन्दिर हैं. जिसमें प्रमुख मन्दिर मदनमोहनजी का है . यह मन्दिर सुन्दर सरामदे एवं सुसज्जित पंेटिंग से निर्मित है तथा महाराज गोपालदासजी के द्वारा जयपुर में लायी गयी काले मार्बल से निर्मित मदनमोहनजी की मूर्ति है. प्रत्येक अमावस्या को मेला लगता है. करौली में जैन मन्दिर, जामा मस्जिद, ईदगाह आदि भी धार्मिक आस्था स्थल है.

श्री महावीरजी

श्री महावीरजी दिगम्बर जैन सम्प्रदाय का एक प्रमुख स्थान है. यहां पर भगवान महावीर लगभग 400 वर्ष पुरानी मूर्ति है. महावीरजी में निर्मित मन्दिर आधुनिक एवं प्राचीन शिल्पकला का बेजोड़ नमूना है. प्रतिवर्ष चत्र सुदी 13 से वैशाख कृष्णा 2 तक मेला लगता है जिसमें लोखों लोग विभिन्न क्षेत्रों से यहां आते हैं. मेले के अंत में रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है.

केलादेवी का मन्दिर

करौली से 26 किलोमीटर दूर यह प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है. यहां पर प्रतिवर्ष मार्च-अप्रैल माह में एक बहुत बड़ा मेला लगता है. इस मेले में राजस्थान के अलावा दिल्ली, हरियाणा, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश के तीर्थ यात्री भी आते है. मुख्य मन्दिर संगमरमर से बना हुआ है. जिसमें केला (महालक्ष्मी) एवं चामुण्डा देवी की प्रतिमाएं हैं. कैलादेवी की आठ भुजाएं है सिंह पर सवारी करते हुए दर्शाया हैं. यहां क्षेत्रीय लांगुरिया के गीत विशेष रूप से गाए जाते हैं.

मेहन्दीपुर बालाजी का मन्दिर

Rajasthan Gk In Hindi Series 43

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Rajasthan Gk In Hindi Series 41

Rajasthan Gk In Hindi Series 40 (400 Questions)

Rajasthan Gk In Hindi Series 39

यह एक छोटा-सा गांव टोडाभीम तहसील से 5 किलोमीटर दूर है तथा जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा है. यहां पर पहाड़ी की तलहटी में निर्मित हनुमानजी का बहुत पुराना मन्दिर है. लोग काफी दूर-दूर से यहां आते हैं. ऐसी मान्यता ही हिस्टीरिया एवं डिलेरियम के रोगी दर्शन लाभ से स्वस्थ होकर लौटते हैं. होली एवं दीपावली के त्योहार पर काफी संख्या में लोग यहां दर्शन के लिए आते है.

शिवरात्रि पशु मेला (करौली)

शिवरात्रि के अवसर पर करौली में पशुपालन विभाग द्वारा राज्य स्तरीय पशु मेले का आयोजन किया जाता है. इस मेले में ऊंट, बैल, गाय, घोड़े, खच्चर, गधे आदि सभी जानवरों का क्रय-विक्रय होता है.

करौली की हस्तकला

जिले की खानों से निकलने वाले मजबूत पत्थरों को करौली, हिण्डौन और इसके आसपास के कारीगरों द्वारा तराशकर कई प्रकार की कलात्मक कृतियां बनाई जाती है. इनमें मूर्तियां, आटा पीसने की चक्की, कुण्डा, कुण्डी, प्यालियां, चकले, इमारतों के बारसोत, जालियां आदि प्रमुख हैं. हिण्डौन के आसपास के स्थानों पर कारीगरों द्वारा स्लेट का निर्माण किया जाता है. इन स्थानों पर बनने वाली स्लेटें राज्य से बाहर भी भेजी जाती हैं. हिण्डौन में चूड़ी का कार्य भी किया जाता है.

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Karauli: History, Geography, Places

Location, Area & Administration of Karauli:

Karauli lies in the north eastern part of Rajasthan. stretching between 26° 02′ to 27° North latitude & 76° 28′ to 77°25′ East longitude, having an average altitude of 260 meters above sea level. It is bounded on west by Dausa, South west by Sawai Madhopur, north east by Dholpur and north-east by Bharatpur and east by state of Madhya Pradesh. The main river of the state, Chambal separates the district from Madhya Pradesh.

The district has an area of app. 4985 sq.km. and has been divided into 6 tehsils namely Karauli, Hindaun,  Nandauti, Sapotara, Toda Bhim, Mandrail.

Imagesource: MapsofIndia
Imagesource: MapsofIndia

History of Karauli:

The predecessor state of the princely state of Karauli, the Kingdom of Mathura, was founded about 995 by Raja Bijai Pal a Yaduvanshi Rajput ruler. Historical data point to Arjun Deo as the founder of the Karauli State in 1348.he capital was successively in the towns of Mathura, Dwarika, Bayana, Timan Garh, Andher Kotla, Mandrayal, U’ntgir and Bahadurpur.

During the 18th century Karauli was under the Maratha Empire until the Marathas were defeated by the British. In 1817, Karauli’s ruler signed a treaty with the East India Company and became a British protectorate, the status was maintained till the independence of India in 1947.

After India’s independence in 1947, the state under Maharaja Ganesh Pal Deo acceded to the Dominion of India on 7 April 1949; Karauli later merged with the Union of India and became part of the state of Rajasthan.

On 1st March 1997 government of Rajasthan established Karauli district which included five Tehsils of Sawai Madhopur.

Rulers of Karauli State:

The rulers of the state bore the title ‘Maharaja’. Karauli was ruled by Jadubansi Rajputs.

Maharajas

  • 1688 – 1724 Kunwar Pal II
  • 1724 – 1757 Gopal Singh
  • 1757 –  1772 Tursam Pal
  • 1772 – 1804 Manik Pal
  • 1804 – 1805 Amola Pal
  • 1805 – 1837 Herbaksh Pal
  • 1837 – 1849 Pratap Pal
  • 1849 –  1852 Narsingh Pal
  • 1852 –  1854 Bharat Pal
  • 1854 –  1869 Madan Pal
  • 1869 Lakshman Pal
  • 1869 – 1875 Jaisingh Pal
  • 1869 – 1871 Vrishbhan Singh Tanwar -Regent
  • 1876 –  1886 Arjun Pal II
  • 1886 – 1927  Sir Bhanwar Pal
  • 1927 – 1947 Sir Bhom Pal
  • 1947 – 1947 Ganesh Pal

Historical Places of Karauli

Rajasthan Gk In Hindi Series 62

Rajasthan Gk In Hindi Series 61

Rajasthan Gk In Hindi Series 60

Rajasthan Gk In Hindi Series 59

Fort of Timangarh:timangarh-fort

Timangarh fort is situated in Masalpur village. According to prevaling believes in Samvat (Hindu Calendar) 1244 Yadhuvanshi ruler Timanpal constructed this Fort.  On all four side of this fort their exists unique sample of 5 feet wide and 30 feet high battledore atchitecture.It seems as a complete city is enclosed within fort. Market inside fort wall, flooring, garden, temples and remains of well are still available.

Unt Giri Fort:

This fort was established during 15th Century in Kalyanpura village on a tunnel shaped high mountain range. The fort is spread over 4 Km of area,  and has a 100 feet high waterfall which directly drop water over a Shivlinga. Till last Mughal Empire, this fort remained in ownership of Yadhuvanshi.

Dev Giri Fort:

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devgiri-fort

The Fort is located on east of Unt Giri on bank of Chambal River. In year 1506-07 attack of Sikander Lodhi caused major damage to this fort. In present it has one Bavdi, ransacked stone scriptures and few remains of palace are available.

Mandrayal Fort:

mandrayal-fort-3In south of Karauli, on the bank of Chambal River and between the mountain ranges, Mandrayal fort made of red stone is situated on a small hill. Due to its location near Gwalior, from the view of a monument it is considered important. The Surya Pol of Fort receives direct sunlight starting from sunrise to sunset. In year 1327 Maharaja Arjun Dev had acquired this fort, which remained under custodianship of Karauli.

Bahadurpur Ka Killa:

This fort is located on Mundrayal Route, near forest of Sasand Village and deserted environment. ‘Bahadurpura Ka Quilla’ stands like an insuppressible warrior is an actual example of inseparable Mughal art. Double storied Narp Gopal Bhawan, Saheliyon Ki Bavdi, Artistic Jharokha, 18 feet long girder of common and VIP courts, 5 warriors, Magadh Rai Ki Chatri are worth watching. The fort was constructed by Nagraj was son of Yadhuvanshi King Timanpal, expansion of this fort was done throughout 1566 to 1644. Ruler of Jaipur Sawai Jaising also resided in this fort.

Ramthera Fort:ramthara-fort-1

The Ramthera fort is Situated in Sapotara Subdivision of Karauli district between Ranthambore Wildlife Sanctuary and Bharatpur Bird Reserve; it is just 15 kilometers away from Kailadevi Sanctuary.

Rawal Palace:

rajvilas-in-karauli-1Established during 13 century Palace (Rawal Palace) made out of Red and White Stone is an example of stone craft. Artistic pictures and carving on huge gate, reticulated vents, artillery, Nahar Kathara, Suri Gurj, Gopalsingh Akhada, Bhanwar Bank, Nazar Bagichi, Manik Mahal, Fountain Pond, Gopal Temple, Deewan-e-Aam, Fauj Kachari, Kirkiri Khana, Giyan Bangla, Sheesh Mahal, Moti Mahal, Harvillas, Ranglal, Teda Kuwa, Jannani Dayothi and others along with effective establishment are also part of its culture and traditions.

Fairs & Festivals of Karauli

There are multiple fairs organized in Karauli including, Kaila Goddess- March- April, Shri Mahaveerji – April- May,  Shri Bala ji , Shri Madan Mohan Ji, Ajnimata, Jagdeesh Ji, Gadh Mora, Barwasan Mata, Kadam Khundi, The Ganga Dushera Mela Sagar, Nande Bhumiya Fair, Mahashivratri Pashu Mela, Gandharbh Mela Kailadevi.

Kailadevi Chaitra Melakailadevi_mela_2

The famous temple of Kela devi is situated 25 Kms. from district head quarters. Kaila devi fair is organized in month of march-april, in which men-women, youths, dance without the influence of religion, rich and poor on the Languriya songs. In this fair along with Rajasthan pilgrims from Delhi, Haryana, Madhya Pradesh and Uttar Pradesh participate.

Shri Mahaveerji Fairmahaveerjit

The famous Shri Mahaveer ji temple is situated in Hindaun tehsil. It is a prominent place of Digamber Jain Community of India. Here, resides a 400 year old statue of Lord Mahaveer. Three day fair of Jain shrine Shri Mahavirji fair has special identity and a chariot festival is the center of attraction.

Fair of Lord Jagdish

Rajasthan Gk In Hindi Series 105

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The fair is organized of Lord Jagdish in the Kaimri village of Nadouti region. The Gurjar community has a majority in the fair and the people of other category also come to visit the fair.

Geography of Karauli

Karauli is famous for its geographical specialities and having full of natural beauty and covered by Vindhyanchal and Aravali mountains. In the Karauli tehsil hills become more high and extensive. Hills & broken grounds characterises almost entire area locally known as Dang.

Plains are very fertile and clay is very light in weight and sandy. A major part of Karauli & Sapotara tehsils falls in reserve & protected forest. Reserve forest also occur in northern part of Nandauti tehsil. The drainage system is dendritic.

Rivers of Karauli:

  • The major river is Chambal which forms district and state boundary in east with MP .
  • Other river is Gambhiri emerging from hills of Nandauti tehsil & flowing though Hindaun and Toda Bhim tehsils.
  • Other rivers like Kalisil, Bhadrawati, Bhaisavat, Ata, Manchi and Barkheda solemn rivers are also flowing into the district.

Natural Resources/ Minerals of Karauli

The newly formed Karauli district has some very important non-metalic mineral deposits of the state. It has good resources of Silica sand, sandstone and quartz, besides soap stone, limestone, red oxide, laterite etc. Karauli sandstone is well known for its sculpture and engraving property. The red and spotted variety of Karauli sand stone is exported to various countries i.e. Japan, Gulf & other Asian countries. Hindaun is the main business centre for its processing. The details of the mineral deposits are given below.

SOAP STONE

  • The soapstone in the district occurs in Morra-ka­-Dungar ridge of Toda Bhim tehsil.
  • The talc deposits have been exposed at as many as seven localities near Dhaota, Dwain, Kamalpura, Rajuli, Giarhi, Pura & Morra.
  • Of these, the deposits of Dwain, Rajauli and Garhi are fairly large.

LIME STONE

  • About 25 kms. S.S.W. of Karauli the Mohali­-Keladevi lime stone belt is exposed intermitently over a strike length of 16 kms. with 100 to 200 mts width.
  • The limestone is greyish, pinkish and purple in colour and is associated with chert bands at places.

SILICA SAND

  • The important silica sand deposits are located in Pator-Sapotara area extending from Ganeshwari to Machh villages over a strike length of 1 km. in Sapotara and Karauli tehsils.
  • Besides this the other occurrences are near Jon, Ghat, Parli and Badrela in Toda Bhim tehsil.

LATERITE

  • The laterite occurs near village Bajna, Gathra in Sapotra tehsil capping over Rewa sand stone of Upper Vindhyan Supergroup.

RED OXIDES

  • It is exposed near Rodhai village of Karauli tehsil. One lease has been executed in the area. At present the production is closed.

OCHRES

  • Both red and yellow ochres are available in the district.
  • These are found associated with quartzites of Bhilwara Super group.
  • The main localities for red ochres are Narayanpura & Tantwara in Sapotra tehsil, Kachrauli in Karauli tehsil.
  • Yellow ochre is only located near village Kherata of Karauli tehsil.

IRON ORE

  • Near village Karuali about 7 km. east of Hindaun, Iron ore deposit occurs in the banded hematite chert of Kaimur Group of Vindhyan Supergroup.

SAND STONE

  • Karauli sand stone is an excellent building stone as it is amenable to receive good polish and intricate carving meant for lattices and arches.
  • The sand stone occurs in the form of hill range crossing across the district.
  • Most of the quarries are situated in nearby areas of Karauli and Sapotra tehsils.
  • Recently Mines & Geology Department has identified 5 splittable sandstone blocks viz. Bhauapura-Ratiapura (10 sq. kms.) Kasara (2.88 sq.km.) Chobe ki Guwari (4.88 sq.km.) Mokanpura­-Berda( 2 sq. km.) and Bhakri ( 5 sq. km.) of about 25 sq.km. total area.
  •  Sand stone is red and buff in colour, fine grained and bedded in nature.

Population

  • According to the 2011 census Karauli district has a population of 14,58,459.
  • The district has a population density of 264 inhabitants per square kilometer

 

Karauli District

Karauli is a famous district in the state of Rajasthan. The headquarters of the district is located in the town of Karauli. Karauliis known as the commercial hub and numerous industries are situated here.Karauli district previously known as Kalyanpuri due to a famous local deity Kalyanji. The presence of more than 300 temples in Karauli makes it one of the holiest places of Rajasthan. Pale red-stone architecture and boasts of various magnificent monuments are one of the main attraction of Karauli.

District Karauli
Headquater Karauli
Area (km2) 5530
Population(2011) 1,458,459
Division Bharatpur
Official Website http://www.karauli.nic.in

Tourist Places In Karauli District

  • Bhanwar Vilas Palace
  • City Palace Karauli
  • Shahi Kund, Karauli
  • Shikar Ganj
  • Shahar Fort, Nadauti
  • Mandrayal Fort
  • Rangawa Tal, Karauli
  • Gopal Singh Ji Ki Chhatri
  • Timan Garh fort
  • Kaila Devi Temple
  • Shri Mahavir Ji Temple
  • Madan mohan Ji Temple
  • Kaila Devi wild Life Sanctuary
  • Panchna Dam

Karauli District Location

Karauli district is located at a distance of 160 km from Jaipur. It has border with Dholpur District in the east; with Bharatpur District in the north-east; with Dausa District in the north; and with Sawai Madhopur District in the west.

Karauli District Climate

Karauli enjoys extreme climates in summers as well as winters. Temperature reach maximum 47 C in summers and dips to minimum 4 C in winters. Rainfall during monsoon is also medium.

Transportation In Karauli District

Nearest to Karauli, the main railway station is Gangapur, which is 81 km away from Karauli. Karauli has Sanganer Airport, Jaipur as its nearest airport which is at a distance of 160 km. There are regular buses from Gangapur and Jaipur to Karauli.

 

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Sawai madhopur District GK in Hindi सवाई माधोपुर जिला Rajasthan GK in Hindi

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Sawai madhopur District GK in Hindi सवाई माधोपुर जिला Rajasthan GK in Hindi

 Rajasthan Districts wise General Knowledge

1. अजमेर  6. भरतपुर  11. चित्तौड़गढ़  16. हनुमानगढ़  21. झुंझुनूं  26. पाली  31. सिरोही 
2. अलवर  7. भीलवाड़ा 12. दौसा  17. जयपुर  22. जोधपुर  27. प्रतापगढ़  32. टोंक
3. बांसवाड़ा  8. बीकानेर  13. धौलपुर  18. जैसलमेर  23. करौली  28. राजसमंद  33. उदयपुर 
4. बारां  9. बूंदी  14. डूंगरपुर  19. जालोर  24. कोटा  29. सवाई माधोपुर 
5. बाड़मेर  10. चुरू  15. गंगानगर  20. झालावाड़  25. नागौर  30. सीकर 

सवाईमाधोपुर का संक्षिप्त इतिहास

राजस्थान के पूर्व में स्थित सवाई माधोपुर जिला अपनी नैसर्गिक सुन्दरता से देश-विदेश के सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र है. यहां स्थित रणथम्भौार अभयारण्य (बाघ परियोजना) का स्थान विश्व के पर्याटन मानचित्र पर है. जिले में ही देवताओं में प्रथम पूज्य श्री गणेशजी का ऐतिहासिक त्रिनेत्र गणेश मन्दिर है. ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्त्व का प्रसिद्ध रणथम्भोर का अभेय दुर्ग है. सवाई माधेपुर में राम हम्मीर जैसे देशभक्त हुए हैं जिसने यहा की आन-बान एवं शान के लिए लड़ते हुए अपने प्राणों की आहूति दी थी. यह वही स्थान है जहां की रानियों की शान के साथ जौहर कर प्राण न्योछावर किये थे.

भौगोलिक स्थिति

अरावली पर्वतमालाओं से आच्छादित एवं प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर यह जिला 25.45 से 26.41 तक 23.03 से 30.12 तक पूर्वी देशान्तर 75.59 से 77.0 तक 69.30 से 780.17 तक देशान्तर के मध्य स्थित है. जिले की समुद्र तल से ऊंचाई 400 मीटर से 600 मीअर के मध्य है. इसके पूर्व में करौली, मध्यप्रदेश तथा कोटा, उत्तर में भरतपुर और धौलपुर, दक्षिण में बून्दी व टोंक तथा पश्चिम में दौसा जिले की सीमायें लगी हैं. दिल्ली-मुम्बई रेलमार्ग तथा जयपुर-मुम्बई सड़क मार्ग से सीधा जुड़ा सवाईमाधोपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर से मात्र 132 किलामीटर एव कोटा से 108 किलामीटर की दूरी पर स्थित है. इसका कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 4.98 हजार वर्ग किलोमीटर है जो राज्य के क्षेत्रफल का  1.46 प्रतिशत है.

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

जिला सवाईमाधोपुर जो पुराने करौली तथा जयपुर राज्य की सवाईमाधोपुर, गंगापुर न हिण्डौन निजामतों में आता था, विभिन्न देशी रियासतों के सात चरणों में विलय के बाद राजस्थान बना. सन् 1948 से सर्वप्रथम अलवर, भरतपुर, करौली तथा धोलपुर राज्यों का मत्स्य संघ के नाम से एक संयुक्त प्रदेश बनां सभी भूतपूर्व करौली राज्य तथा जयपुर राज्य की सवाईमाधोपुर, गंगापुर तथा हिण्डौन निजामतों को मिलाकर जयपुर के पूर्व महाराजा स्वर्गीय माधोसिंह प्रथम ने नाम पर 15 मई, 1949 को सवाई माधोपुर अलग जिला बनाया गया.

दर्शनीक स्थल

रणथम्भौर

Rajasthan Gk In Hindi Series 43

Rajasthan Gk In Hindi Series 42

Rajasthan Gk In Hindi Series 41

Rajasthan Gk In Hindi Series 40 (400 Questions)

Rajasthan Gk In Hindi Series 39

सवाईमाधोपुर जिला मुख्यालय से 13 किलामीटर की दूरी पर ऊंची पहाड़ी पर राणथम्भोर दुर्ग में स्थिति त्रिनेत्र गणेशजी का बड़ा महत्त्व है. यहां देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आकर शादी-विवाह, फसल की बुवाई एवं अन्य मांगलिक अवसरों पर गणेशजी को प्रथम आमंत्रण देते हैं.
अरावली की पर्वत श्रृखंलाओं के घुमावदार पहाड़ियों के मध्य स्थित रणथम्भोर किले में गणेशजी का का मन्दिर ऐसी अनुपम तीर्थ स्थली है जहां आसपास में अनेक मन्दिर तथा मुस्लिम और जैन संस्कृति के पवित्र स्मारक मौजूद हैं. इसी ऐतिहासिक दुर्ग में चौहान वंश की राजाओं ने स्वतंत्रता, आन-बान एवं शान तथा सम्मान की रक्षा के लिए खिलजी बादशाहों से लोहा लिया था तथा रानियों ने अपने आत्म सम्मान के लिए जौहर किये था. गणेशजी के इस पवित्र स्थान पर वर्ष भर यात्रियों का तांता लगा रहता है तथा प्रत्येक बुधवार को यहां आने वाले यात्रियों की भीड़ लघु मेले का रूप ले लेती है.
रणथम्भोर दुर्ग अपनी प्राकृतिक बनावट तथा सुरक्षात्मक दृष्टि से भी अद्धितीय स्थान रखता है. ऐसा सुरक्षित, अभेद्य दुर्ग विश्व में अनूठा है. ऊंची और ठोस दीवारों से घिरा हुआ किला बुर्जों और बुर्जिंयों से मजबूत बनाया गया हैं. किले की इमारतों में महलों के अवशेष, फौजी छावनी, अनेक हिन्दू और जैन मन्दिर तथा दरगाह व मस्जिद उल्लेखनीय है. दुर्ग क्षेत्र मु गुप्त गंगा, बाहरदरी महल, हम्मीर कचहरी, चैहानों के महल, बत्तीस खंभा की छतरी, देवालय एवं सरोवर ऐतिहासिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है. दुर्ग में सैकड़ों छतरियां, प्राचीरें, विशाल दरवाजें, मस्जिदें, शिलालेख, जलाशय, घाटियों का अनुपम सौन्दर्य यात्रियों एवं सैलानियों को बरबस ही आकर्षित करता है. दुर्ग में स्थिति हम्मीर महल में पुरातात्विक महत्त्व के हथियार, जिरह बक्ष्तर एवं अन्य महत्त्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध है.

रणथम्भोर बाघ परियोजना

सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय के समीप स्थित रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान (बाघ अभयारण्य) लगभग 400 वर्ग किलोमीटर में फैला-पसरा है. करौली जिलें का केवलादेव अभयारण्य भी इसी अभयारण्य के समीप से सटा हुआ है. इस बाघ अभयारण्य में स्वच्छन्द विचरण करते वन्य जीव सैलानियों का मन मोह लेते हैं.
प्रतिवर्ष भारी संख्या में देशी-विदेशी सैलानी इस अभयारण्य का भ्रमण का आनन्द उठाते है. इस अभयारण्य में बाघ मुख्य आकर्षण हैं इसके अलावा बघेरा, भालू, जंगली सूअर, बिल्ली, गीदड़, लकड़बणा, बिज्जू, भेड़िया, खरगोश, लोमड़ी, नीलगाय, बारहसिंगा, चीतल, चिंकारा, हिरण भी यहां स्वच्छन्द रूप से विचरण करते हुए देखे जाते हैं. यहां के तालाबों में मगर बहुतायत में है. इस क्षेत्र में सर्दियों से सुदूर प्रदेशों से आने वाले कई प्रकार के पक्षी यहां देखे जा सकते है.
रणथम्भोर अभयारण्य क्षेत्र की भूगर्भीय रचना की अद्वितीय है. यहां दो अलग-अलग पर्वत श्रृंखलायें- विध्यांचल एवं अरावली मिलती हैं. वहीं चम्बल और बनास नदियां यहां की जैविक विविधता को चार चांद लगाती हैं. क्षेत्र के उष्ण कटिबंध शुष्क एवं मिश्रित पतझड़ वाले वृक्षों की प्रजातियां आच्छादित है. यहां के वनों में वन्य जीवों की बहुतायात एवं सघन वनस्पति बाघों को समुचित भोजन, पानी और शरणस्थल देने के लिए पर्याप्त हैं.

रामेश्वर घाट

जिला मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पर मध्यप्रदेश की सीमा पर चम्बल नदी पर स्थित रामेश्वर घाट धार्मिक दृष्टि से पवित्र स्थल के रूप में विख्यात है. यहा स्थान त्रिवेणी के रूप में भी जाना जाता है. जहां पर तीन प्रमुख नदियां चम्बल, बनास एवं सीप आकर मिलती हैं.
जिले की खंडार पंचायत समिति के अनियाला ग्राम पंचायत के इस प्रमुख स्थल पर भगवान चतुर्भुजनाथ का मन्दिर मौजूद है जहां पर दूर-दराज से आने वाले भक्तगण त्रिवेणी में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं. इसी स्थान पर प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णमा पर विशाल मेला भरता है तथा अमावस्य के दिन त्रिवेणी में स्नान करने वाले लोगों की संख्या अधिक होती है.

चमत्कारजी जैन मन्दिर

सवाई माधोपुर स्टेशन से शहर के रास्ते पर आलनपुर में श्री चमत्मारजी जैन मन्दिर स्थित है. इस मन्दिर में स्फटिक पाषाण की बनी भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा प्रतिष्ठापित है. मन्दिर की व्यवस्था श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र कमेटी चमत्कारजी द्वारा संचालित है. इस स्थान पर प्रतिवर्ष शरद पूर्णिमा को मेला भरता है.

चौथ का बरवाड़ा

सवाईमाधोपुर-जयपुर रेल मार्ग पर चौथ का बरवाड़ा ग्राम में पहाड़ी पर स्थित चैथमाता का मन्दिर प्रसिद्धि लिये हुए है. इस स्थान पर वर्षभर श्रद्धालुओं का मेला लगा सा रहता है. चौथ माता महिलाओं में विशेष पूजनीय है. चौथ का बरवाड़ा में प्रतिवर्ष माघ कृष्ण तृतीया से माघ कृष्णा अष्टमी तक विशाल मेले का आयोजन भी किया जाता है.

अमरेश्वर महादेव

जिला मुख्यालय से रणथम्भोर के रास्ते में समीप ही अमरेश्वर महादेव का मुख्य स्थल मौजूद है. यहां पर दो पहाड़ियों के बीच से हमेशा बहने वाले झरने से जलधारा निरन्तर प्रवाहित होती है. इस स्थान पर कुण्ड बना हुआ है जहां दर्शनार्थी स्नान करते हैं. मनोरम पहाड़ी में मध्य स्थित इस कुण्ड के पास महादेवजी एवं भगवान राम-जानकी का प्राचीन मन्दिर भी स्थित है.

काला-गौरा भैरव मन्दिर

सवाई मधोपुर शहर के प्रवेश द्वार पर स्थित यह प्राचीन मन्दिर ऐतिहासिक महत्त्व का प्रमुख दर्शनीक स्थल है. पहाड़ी पर स्थित नौ मंजिले इस आकर्षक मन्दिर का दृश्य देखते ही बनता है. कहा जाता है कि इस मन्दिर का उपयोग तंत्र विद्या के लिए किया जाता था. इस मन्दिर के प्राचीन महत्त्व को देखते हुए पर्यटन विभाग की ओर से इसकी मरम्मत एवं जीर्णोद्धार भी किया गया है.

घुश्मेश्वर महादेव

जिले के उत्तरी-पश्चिमी छोर पर मनोरम विंध्याचल पर्वत श्रृंखला के अंचल में अवस्थित ऐतिहासिक एवं पौराणिक अतीत के वैभव से परिपूर्ण घुश्मेश्वर महादेव का मन्दिर शिवाड़ में स्थित है. शिव पुराण शिवालय और मध्यकाल में शिवाल के रूप में उल्लेखित यह स्थान कालान्तर में शिवाड़ के रूप में विख्यात हो गया. ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण यह पावन स्थल भगवान श्री घुश्मेश्वर ज्योतिलिंग की लीला स्थली है. मन्दिर के समीप शिवाड़ का प्रसिद्ध किला भी स्थित है. इस पवित्र मन्दिर में प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि को विशाल मेला आयोजित किया जाता है इस मन्दिर में वर्ष भर श्रद्धालओं एवं पर्यटकों का तंता लगा रहता है.

प्रमुख मेले

सवाई माधोपुर जिले में रणथम्भोर दुर्ग में लगने वाले गणेश चतुर्थी का मेला, चैथमाता का मेला एवं रामेश्वर घाट के वार्षिक मेले के साथ ही गंगापुर मे कल्याण जी महाराज का मेला, गंगापुर से 4 किलोमीटर दूर धंूधेश्वर महादेव शिवरात्रि मेला शिवाड़, पशु मेला खण्डार एवं सवाई मधोपुर  में पशु मेलों का प्रतिवर्ष आयोजन किया जता है जिले की बौंली तहसील में एदलकी का हनुमानजी का मेला तथा कुछ स्थानों पर तेजाजी एवं हीरामनजी के मेलों का आयोजन भी होता है.

हस्तकला

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जिले में बनास नदी के टीलों पर उपलब्ध खस का उपयोग इत्र निकालने के काम में लिया जाता है. इसके साथ ही समीपवर्ती श्यामोता गांव में कुम्हारों द्वारा तेयार किये जाने वाले मिट्टी के खिलौने एवं बरतन अन्य प्रदेशों में भी विक्रय के लिए भिजवाए जाते है.
चौथ का बरवाड़ा, बहतेड, गंगापुर आदि स्थानों पर चमडेद्य से बने जूते वं जूतियां कारीगरों द्वारा  बड़ी मेहनत से तैयार की जाती हैं. सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय सहित जिले के कई स्थानों पर  हथकर्घा से बनी रेजी, रजाई के खोल भी भारी मात्रा में बिकते हैं. सवाई माधोापुर शहर एवं अन्य स्थानों पर रंगाई-छपाई का कार्य भी खूबसूरती से किया जाता है. यहां के पोमचे जनजाति महिलाओं में विशेष लोकप्रिय हैं.
सवाई मधोपुर जिले में बांस व चबेनी की लकड़ी से बनी टोकरी तथा चटाइयां बनाने का काम भी भारी तादाद में होता है. मूंज की रस्सी, मूंज और सरकी से बनाए जाने वाले मुड्डे और मकानों पर छत के रूप में बिछाए जाने वाले सरकोडे़ भी यहां तैयार किए जाते है. इसके साथ ही हस्तकला के कारीगरों द्वारा कशीदाकारी का श्रेष्ठ काम भी किया जाता है.
लुहारों द्वारा बनाए जाने वाले चिमटे, चलनी, कढ़ाही आदि ग्रामीण अंचलों में लोकप्रिय हैं. कई कस्बों और गांवों में कृषि औजार, दरवाजे, जालियां, खिड़कियां, बाॅक्स, अलमारी आदि बनाने का काम किया जाता है.

मूर्तिकला

सवाई मधोपुर जिले के बौंली तहसील के बांस टोरड़ा में संगमरमर की मूर्तियां बनाने का कार्य किया जाता है. यहां तैयार की जाने वाली मूर्तियां देश के अन्य भागों में भेजी जाती है. जिले के अन्य स्थानों पर पत्थर की कटिंग कर बनायी जाने वाली पत्थर की जालियां, बाई-दरवाजे,  खम्भे भी लोगों में लोकप्रिय हैं.

लघु एवं कुटीर उद्योग

जिलें में अधिकांश पैदावार सरसों की होने के फलस्वरूप कई स्थानों पर तेल घाणी उद्योग स्थापित है. गंगापुर में चावल मि, तेल मिल, पत्थर कटिंग उद्योग, डायमण्ड कटिंग आदि उद्योग प्रमुख हैं. जिले में ‘ड्रिप जिला ग्रामीण उद्योग परियोजना‘ से गांव-गांव में लघु एवं कुटीर उद्योग स्थापित हुए हैं.

कला एवं साहित्य

जिले के ग्रामीण अंचलों में कच्चे एवं पक्के मकानों की दीवारों पर की जाने वाली भित्ती चित्रकला विशेष महत्त्व रखती है. सवाई माधोपुर में रणथम्भोर स्कूल आॅफ आर्ट्स तथा अन्य चित्रकारों द्वारा चित्रकारी सीखने के इच्छुक युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है. यहां चित्रकारों द्वारा तेयार चित्र देश-विदेश में अपनी अमिट पहचान बनाए हुए हैं. संगीत के क्षेत्र में गंगापुर में एक संगीत विद्यालय तथा कुछ स्वयंसेवी संस्थाए भी कार्यरत हैं. साहित्य की दृष्टि से भी यह क्षेत्र समृद्ध है.

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Sawai Madhopur: History, Geography, Places

Location, Area & Administration:

Sawai Madhopur, popularly known as the ‘Gateway to Ranthambore‘ is a city with historic episodes and reigns. It is located between 25°.45′ to 26°.41′ North Latitude and between 75°.59′ to 77°.0’ East Longitude.  On east it is separated from Madhya Pradesh by Chambal river and is bounded by Kota District on the southeast, Bundi District on the south, Tonk District on the west,  Dausa District on the north, Karauli District on the northeast and Jaipur District on the northwest.

Sawai Madhopur has an area of 5042 Square Kms which is divided into 8 Tehsils namly Sawai Madhopur, Gangapur, Bamanwas, Bonli, Khandar, Chauth Ka Barwara, Malarna Dungar, and Vazirpur for puprose of administration.

Image Source: MapsofIndia
Image Source: MapsofIndia

History of Sawai Madhopur:

The early history of Sawai Madhopur originates in Ranthambore fort. The oldest settlements are located near the fort only. According to one popular belief Ranthambore Fort was built by Chauhan Rajput King Sapaldaksha in the year 944 AD, whereas, according to another school of thought the fort was constructed by Chauchan King Jayant in 1110 A.D.

During the course of medieval period, the fort of Ranthambore kept changing hands till 1765, when Mughals handed over the fort to the Jaipur ruler, Sawai Madho Singh.

Brief History of Fort of Rathambore:

Painting depicting Akbar's entry to Ranthambore Fort
Painting depicting Akbar’s entry to Ranthambore Fort
  • The Chauhan lost Ranthambore as a result of defeat of Prithviraja III in battle of Tarain 1192. by Mohd. Ghori. But, Prithviraja’s son Govindaraja IV accepted the Ghurid suzerainty, and ruled Ranthambore as his vassal.
  • The fort was captured by the kingdom of Mewar under Rana Hamir Singh (1326–1364) and Rana Kumbha (1433–1468) and later passed to Hada Rulers of Bundi.
  • Sultan Bahadur Shah of Gujarat captured the fortress from 1532 to 1535.
  • The Mughal Emperor Akbar captured the fort in 1569 and merged Ranthambore with his kingdom. The Mughal rulers ruled the fort till 18th century.

Foundation  of Sawai Madhopur:

During the mid 18th centuries the Maratha rulers  were gradually gaining power in Western India. In order to check their power, Ruler of Jaipur, Sawai Madho Singh, requested the Mughal king to hand the fort to him but request was not honored. Nevertheless, the Madho Singh fortified the village of Sherpur and named it after himself, Sawai Madhopur. Two years later the Mughals handed over the fort to the Jaipur ruler.

 

During the British Rule Sawai Man Singh built a railway line between Jaipur and Sawai Madhopur. As a result it became accessible from a central spot in the state of Rajasthan.

Historical Places of Sawai Madhopur:

Ranthambore Fort:640px-rnp-32

Ranthambore Fort was built by the Chauhan rulers in the 10th century. It has been declared a UNESCO World Heritage Site under the group Hill Forts of Rajasthan. The fort is characterized by temples, tanks, massive gates and huge walls. The fort is well protected by a massive fortification wall provided with stepped and Z-shaped gateway with two strong and massive doors. An architectural marvel, the fort includes  includes the Hammir Badi Kachahari, Chhoti Kachahari, Battis Khambha Chhatri, Hamir Palace, Rani Palace, Toran Dwar, Mahadeo Chhatri and Sametonki Haveli within its premises. Among temples, the Ganesa temple is important besides a few Jain temples.

Khandhar Fort:kandhar

The imposing Khandar Fort is a place worth visiting and is situated just 45 kms from Sawai Madhopur. Located on top of a strategic vertical hill,could never come under an easy attack and thus was truly regarded as invincible. This magnificent fortification was long ruled by the Sisodia Kings of Mewar after which it was taken over by the Mughals.

Ghumeshwar Templeghumeshwar

Enshrined in the Puranas, the Ghushmeshwar Temple is believed to be 12th or the last of the Jyotirlingas of Lord Shiva. Situated at the Siwar village in Sawai Madhopur, this temple has many mythological stories weaved around it.

Alanpur Jain Temple:

alanpur-jain-templeThe early medieval Jaina temple, known as Chamatkarji, is situated outside the city and dedicated to lord Adinatha. The temple compound is enclosed by a modern high parapet wall with small cells all round and is entered from the west. The main shrine is situated in the centre of the courtyard and is enclosed by high wall with entrance in the north. The garbhagriha facing east, is pancharatha on plan with circumambulatory passage around. The sikhara is curvilinear.

Alanpur Baori:

alanpurA four line Persian inscription on a rectangular stone slab, fixed in the Ghori Baori in Alanpur village, belongs to Alauddin Fidan Shah, son of  Mahmud Shah Khalji I, Sultan of Malwa.  It is dated A.H. 874 (A.D. 1469-70) and records construction of the step-well by Khwaja Jahan son of Bir Ali Turk Khurasani. The slab now broken into four pieces has been taken to the Ranthambhore Fort collection of antiquities.

 

Fairs & Festivals of Sawai Madhopur:

Ganesh Chaturti Fair:

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jhunjhunu District GK in Hindi झुन्झुनूं जिला Rajasthan GK in Hindi

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jhunjhunu District GK in Hindi झुन्झुनूं जिला Rajasthan GK in Hindi

 Rajasthan Districts wise General Knowledge

1. अजमेर  6. भरतपुर  11. चित्तौड़गढ़  16. हनुमानगढ़  21. झुंझुनूं  26. पाली  31. सिरोही 
2. अलवर  7. भीलवाड़ा 12. दौसा  17. जयपुर  22. जोधपुर  27. प्रतापगढ़  32. टोंक
3. बांसवाड़ा  8. बीकानेर  13. धौलपुर  18. जैसलमेर  23. करौली  28. राजसमंद  33. उदयपुर 
4. बारां  9. बूंदी  14. डूंगरपुर  19. जालोर  24. कोटा  29. सवाई माधोपुर 
5. बाड़मेर  10. चुरू  15. गंगानगर  20. झालावाड़  25. नागौर  30. सीकर 

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राजस्थान के उत्तरी-पूर्वी भाग में शेखावाटी का सिरमौर जिला झुंझुनूं स्थ्तिा हैं अरावली पर्वत श्रृंखला के प्राकृतिक सौन्दर्य और भू-गर्भीय वैभव से महिमा मंडित देश के नामी-गिरामी उद्योगपतियों, सीमा पर खून बहाने वाले अनगिनत शहीदों, मेहनतकश खेतिहरों तथा चंग की थाप के साथ बहती कर्णप्रिय स्वर पहरियों पर इतराते स्वाभिमानी लोगों की जन्म-भूमि है झुंझुनूं।

झुन्झुनूं (jhunjhunu)— भौगोलिक स्थिति

➤ झुन्झुनू जिला 27॰.5 से 28॰.5 उत्तरी अक्षांश तथा 75॰ से 76॰ पूर्वी देशान्तर पर स्थित है।
➤ जिले के दक्षिण-पश्चिम भाग में सीकर जिले की, उत्तर में चूरू की और पूरब में हरियाणा राज्य की सीमायें हैं।
➤ झुन्झुनू जिले का क्षेत्रफल 5 हजार 928 वर्ग किलोमीटर है।
➤ जिले के दक्षिण और पूर्वी भाग में अरावली पर्वत श्रृंखला है जबकि उत्तरी एवं पश्चिमी भाग रेतीला है।

झुन्झुनूं (jhunjhunu)— ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

➤ इतिहासवेत्ता हरनाथसिंह के अनुसार झुन्झुनू को कब और किसने बसाया, इसका स्पष्ट विवरण नहीं मिलता।
➤ उनके अनुसार पांचवीं-छठी शताब्दी में गुर्जरों के काल में झुन्झुनू बसाया गया था।
➤ आठवीं शताब्दी में चैहान शासकों के काल का अध्ययन करते हैं तो उसमें झुन्झुनू के अस्तित्व का उल्लेख मिलता है।
➤ डाॅ. दशरथ शर्मा ने तेरहवीं शताब्दी के कस्बों की जो सूची जारी की है उसमें भी झुन्झुनू का नाम है।
➤ इसी प्रकार ‘अनन्त’ और ‘वागड़’ राज्यों के उल्लेख में भी झुन्झुनू का अस्तित्व कायम था।
➤ सुलतान फिरोज तुगलक (ई. सन् 1351-1388) के बाद कायमखानी वंशज अस्तित्व में आया।
➤ कहते हैं कि कायम खां के बेटे मुहम्मद खां ने झुन्झुनूं में अपना राज्य कायम किया।
➤ इसके बाद लगातार यह क्षेत्र कायमखानी नवाबों के आधिपत्य में रहा।
➤ एक उल्लेख यह भी है कि सन् 1451-1488 के बची झूंझा नामक जाट के नाम पर झुन्झुनू बसाया गया।
➤ डाॅ. उदयवीर शर्मा ने लिखा है कि झूंझा जाट के नाम पर झुन्झुनूं बसाने की बात पुष्ट प्रमाणों के आधार पर खरी नहीं उतरती।
➤ झुन्झुनूं का अन्तिम नवाब रूहेल खां था जो आसपास के अपने ही वंश के नवाबों से प्रताडित था।
➤ ऐसे में उसने शार्दूल सिंह शेखावत् को झुन्झुनू बुला लिया।
➤ रूहेल खां की मृत्यु के बाद विक्रम संवत् 1787 में झुन्झुनूं पर शेखावत राजपूतों का आधिपत्य हो गया।
➤ उनकी सत्ता जागीर अधिग्रहण तक चलती रहीं
➤ शार्दूलसिंह के निधन के बाद उनके पांच पुत्रों जोरावरसिंह, किशनसिंह, अखयसिंह, नवलसिंह और केसीसिंह के बीच झुन्झुनू ठिकाने का विभाजन हुआ।
➤ यही पंचपाना कहलाया।
➤ इतिहासकार डाॅ. हरफूलतसिंह आर्य के अनुसार जोरावर सिंह एवं उनके वंशजों के अधीन चौकड़ी, मलसीसर मण्ड्रेला, डाबड़ी, चनाना, सुलताना, ओजटू, बगड़, टाई, गांगियासर और काली पहाड़ी आदि का शासन था।
➤ जबकि किशनसिंह और उनके वंशज खेतड़ी, अलसीसर, हीरवा, अडूका, बदनगढ़, सीगड़ा, तोगड़ा, बलरिया आदि के शासक रहे।
➤ नवलसिंह व उनके वंशजों के अधीन नवलगढ़, मण्डावा, महनसर, मुकुन्दगढ़, इस्माईलपुर, परसरामपुरा, कोलिण्डा आदि की शासन व्यवस्था थी।
➤ जबकि केशरीसिंह और उनके वंशजों का बिसाऊ, सूरजगढ़ और डूडलोद में शासन रहा।
➤ अखयसिंह चूंकि निःसंतान थे अतः उनका हिस्सा अन्य भाइयों को दे दिया गया।
➤ अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ झुंझुनूं क्षेत्र में जन आक्रोश कई आन्दोलनों के रूप में सामने आया।
➤ स्वतंत्रता सेनानी सांवलराम भारतीय के अनुासार इस जनपद में आर्य समाज आन्दोलन, जागीरदारों के खिलाफ आन्दोलन, प्रजामण्डल आन्दोलन और अंग्रेजों के विरूद्ध स्ततंत्रता आन्दोलन छेड़े गये जो कमोबेश एक-दूसरे के पूरक थे।
➤ झुंझुनूं जिला राजस्थान के शेखावाटी जनपद का प्रमुख जिला है।
➤ इतिहासकार मोहनसिंह लिखते हैं कि जयपुर राज्य की सबसे बड़ी निजामत शेखावाटी थी।
➤ जिसमें वर्तमान झुंझुनूं और सीकर जिलों की संपूर्ण सीमाएं थीं।
➤ शेखाावाटी निजामत का कार्यालय झुंझुनूं था।
➤ सन् 1834 में झुंझुनूं में मेजर हेनरी फोस्टर ने एक फौज का गठन किया था जिसका नाम शेखावाटी बिग्रेड रखा गया था।
➤ झुंझुनूं में जिस जगह यह फौज रहती थी वह इलाका आज भी छावनी बाजार और छावनी मोहल्ला कहलाता है।

झुन्झुनूं (jhunjhunu)— महापुरूषों से रिश्ता

Rajasthan Gk In Hindi Series 43

Rajasthan Gk In Hindi Series 42

Rajasthan Gk In Hindi Series 41

Rajasthan Gk In Hindi Series 40 (400 Questions)

Rajasthan Gk In Hindi Series 39

➤ महान युगदृष्टा स्वामी विवेकानन्द का खेतड़ी से गहरा रिश्ता था।
➤ शिकागो धर्म सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करने से पूर्व वे खेतड़ी आये थे।
➤ खेतड़ी नरेश महाराजा अजीतसिंह से उनका पारिवारिक संबंध था।
➤ उल्लेखनीय बात यह है कि स्वामीजी को विवेकानन्द नाम खेतड़ी की ही देन है।
➤ पंडित मोतीलाल नेहरू का भी खेतड़ी से अटूट सम्बन्ध था।
➤ कहा जाता है कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा खेतड़ी में हुई थी।
➤ शेरशाह सूरी का खेतड़ी के निकट शिमला गांव से सम्बन्ध था।
➤ शेरशाह सूरी ने इस गांव में सैकड़ों कुएं खुदवाये थे।

झुन्झुनूं (jhunjhunu)— पर्यटन

➤ सम्पूर्ण शेखावाटी को पर्यटन की दृष्टि से एक ‘कला दीर्घा’ के नाम से जाना जाता है।
➤ यहां इन्द्रधनुषी भित्ति चित्रों वाली हवेलियां, किले, स्मारक, धार्मिक, स्थल और प्राकृतिक सौन्दर्य का साक्षात्कार कराने वाले दर्शनीय स्थान हैं।
झुन्झुनूं (jhunjhunu)— लोहार्गल
➤ झुंझुनूं जिले के दक्षिण में जिला मुख्यालय से करीब साठ किलोमीटर दूर अरावली पर्वत श्रृंखला में स्थ्तिा यह पवित्र स्थान सीकर-नीम का थाना सडक मार्ग पर सीकर से लगभग 35 किलोमीटर दूर है।
➤ इस मार्ग पर गोल्याणा बस स्टेण्ड से पांच किलोमीटर का एक पृथक रास्ता लोहार्गल के लिए जाता है।
➤ प्रशासनिक दृष्टि से यह नवलगढ पंचायत समिति का एक ग्राम पंचायत मुख्यालय है।
➤ लगभग 70 मन्दिर, मालकेत और बरखण्डी शिखर, सूर्यकुण्ड आदि के साथ-साथ यहां का अनुपम प्राकृतिक सौन्दर्य दर्शनीय है।
➤ भाद्रपद माह में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से अमावस्या तक हर वर्ष लोहार्गल के पहाड़ों में हजारों-लाखों नर-नारी पद परिक्रमा करते हैं।
➤ अमावस्या के रोज सूर्यकुण्ड मं पवित्र स्थान के साथ यह ‘फेरी’ विधिवत सम्पन्न होती है।

झुन्झुनूं (jhunjhunu)— किरोड़ी

➤ जिला मुख्यालय से यह स्थान 5-6 किलोमीटर दूर है।
➤ अरावली पर्वत माला की गोद में बसा किरोडी एक रमणीय स्थल है जिसे प्रकृतिक ने वनस्पति और सौन्दर्य सम्पदा से मालामाल कर रखा है।
➤ आम, निम्बू, जामुन और बील-पत्र के वृक्षों की तो बहुतायत है ही साथ ही केवड़े के दुर्लभ वृक्ष भी किरोडी में उपलब्ध हैं।
➤ ऐतिहासिक दृष्टि से यहां उदयपुरवाटी के दानवीर शासक टोडरमल और उनके वित्त मंत्री मुनशाह के स्मारक हैं।
➤ गुनगुने निर्मल जल के तीन कुण्ड हैं, जिनमें गन्धक का मिश्रण बताया जाता है।

झुन्झुनूं (jhunjhunu)— नरहड़ दरगाह

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➤ झुंझुनूं से चालीस किलोमीटर दूर जयपुर-पिलानी सड़क मार्ग पर चिड़ावा से आठ किलोमीटर आगे (पिलानी की ओर) देवरोड नामक स्थान है।
➤ जहां से दो किलोमीटर लम्बा एक अलग सड़क मार्ग नरहड दरगाह तक जाती है।
➤ यह स्थान न केवल शेखावाटी और राजस्थान का अपितु भारतपर्ष का एक गौरवशाली स्थल है।
➤ यहां हर वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर दरगाह का मेला भरता है।
➤ नरहर के शक्कर पीर बाबा की दरगार पर हिन्दू और मुस्लिम दोनों बड़ी श्रद्धा के साथ आते हैं।
➤ विशाल एवं भव्य बुलन्द दरवाजे से होकर दरगाह शरीफ तक पहुंचा जाता है। जहां एक आयताकार चौक में मानसिक विकृतिक वाले लोगो के शरीर पर पवित्र मिट्टी रगड़ी जाती है।
➤ कहते हैं ऐसा करने पर उन्हें विक्षिप्तावस्था से मुक्ति मिल जाती है।
➤ यह स्थान चिड़ावा पंचायत समिति का ग्राम पंचायत मुख्यालय है और यहां यात्रियों के आवास के लिए धर्मशाला और तिबारे बने हुए हैं।

झुन्झुनूं (jhunjhunu)— खेतड़ी

➤ प्राचीन शेखावाटी का सबसे बडा ठिकाना खेतड़ी भारत की ताम्र नगरी के नाम से जाना जाता है।
➤ झुंझुनूं से 70 तथा दिल्ली से 180 किमी की दूरी पर स्थित यह स्थान दिल्ली, जयपुर और झुंझुनूं से सडक मार्ग से जुड़ा हुआ है।
➤ अरावली के गर्भ में करीब 75 किलोमीटर लम्बी ताम्र पट्टी छिपी हुई है।
➤ इस सम्पूर्ण पट्टी के ऊपरी छोर पर खेतड़ी स्थित है जहां देश का एक मात्र ताम्बा उत्पादक संस्थान हिन्दुस्तान काॅपर लिमिटेड स्थित है।
➤ प्राचीन खेतडी ओर वर्तमान खेतडी नगर के बीच करीब आठ किमी का फासला है।
➤ खेतडी नगर जहां ताम्बा उपक्रम के कारण देश में चर्चित है वहीं पुराना खेतड़ी कस्बा अपनी ऐतिहासिक पहचान के कारण दर्शनीय है।
➤ खेतड़ी में रामकृष्ण मिशन का मठ, भोपालगढ़ का दुर्ग, पन्नाला शाह का तालाब, अजीतसागर, बागोर का किला, भटियानीजी का मन्दिर जैसे दर्शनीय स्थल हैं।
➤ खेतड़ी अरावली पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है।

झुन्झुनूं (jhunjhunu)— टीबा-बसई

➤ खेतड़ी के निकट हरियाणा राज्य की सीमा पर जिले का टीबा-बसई गांव है।
➤ यहां बाबा रामेश्वरदास का मन्दिर दर्शनीय है।
➤ इस मंदिर में अति विशाल मूर्तियां, दीवारों पर अंकित गीता व अन्य धर्म ग्रन्थों के पवित्र श्लोक और मंदिर के विशाल परिसर की भव्यता एक अपूर्व झांकी के समान है।

झुन्झुनूं (jhunjhunu)— पिलानी

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Rajasthan Gk In Hindi Series 60

Rajasthan Gk In Hindi Series 59

➤ पिलानी को तकनीकी शिक्षा संस्थान बिरला इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस की वजह से देश भर में जाना जाता है।
➤ पिलानी में भारत सरकार का एक उपक्रम केन्दीय इलेक्ट्रोनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीरी) भी है जो देश के विज्ञान और तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण योगदान कर रहा है।

झुन्झुनूं (jhunjhunu)— महनसर

➤ झुंझुनूं जिले का महनसर कस्बा जयपुर-चूरू रेलमार्ग पर स्थित है।
➤ झुंझुनूं से 45 किमी दूर इस कस्बे में चूरू, झुंझुनूं तथा सीकर जिले के रामगढ़ शेखावाटी से बस द्वारा भी पहुंचा जा सकता है।
➤ महनसर में पोद्दारों की सोने की दुकान पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण केन्द्र है।
➤ इस दुकान के भित्ति चित्रों पर स्वर्णिम पालिश होने के कारण ही यह सोने की दुकान कहलाती है।
➤ महनसर में रघुनाथजी मंदिर, तोलाराम मसखरा का आकर्षक भित्ति चित्रों वाला महफिल खाना तथा अन्य हवेलियां भी दर्शनीय हैं।

झुन्झुनूं (jhunjhunu)— मण्डावा

➤ शेखावाटी में सर्वाधिक विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने वाला झुंझुनूं जिले का मण्डावा कस्बा जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर है।
➤ झुंझुनूं, मुकुन्दगढ़ और फतेहपुर से जुड़ा होने के कारण यह कस्बा दिल्ली, जयपुर और बीकानेर से भी जुड़ गया है।
➤ मण्डावा में किला, रेत के धोरे आदि दर्शनीय हैं। इनके अलावा भी कई हवेलियां यहां ऐसी हैं जिनके नयनाभिराम भित्ति चित्रों को देखकर सैलानी मंत्र मुग्ध हो जाते हैं।

झुन्झुनूं (jhunjhunu)— डूण्डलोद

➤ झुंझुनूं से 35 किमी (सीकर की तरफ) जयपुर-झुंझुनूं सड़क मार्ग पर स्थित डूण्डलोद कस्बा दिल्ली और जयपुर से सीधी रेल सेवा से जुड़ा है।
➤ डूण्डलोद में किला, गोयनका हवेली, गोयनका छतरी इत्यादि दर्शनीय स्थल हैं।
➤ मण्डावा की तरह यहां भी विदेशी सैलानियों का जमघट लगा रहता है।

झुन्झुनूं (jhunjhunu)— नवलगढ़

➤ जयपुर-झुंझुनूं सड़क और रेल मार्ग पर झुंझुनूं से 40 तथा सीकर से 30 किमी की दूरी पर नवलगढ़ कस्बा बसा हुआ है।
➤ नवलगढ़ का दुर्ग, रूप निवास पैलेस, आठ हवेली, पोद्दार, पाटोरिया, भगत, चौखानी व अन्य परिवारों की हवेलियां, गंगामाता का मंदिर आदि नवलगढ़ के दर्शनीय स्थल हैं।
➤ नवलगढ़ की हवेलियों में भित्ति चित्रों का तो आकर्षण है ही साथ ही लकड़ी के दरवाजों की बारीक जालियां भी जादुई काष्ठ कला का दिग्दर्शन कराती है।

झुन्झुनूं (jhunjhunu)

➤ हिन्दू एव मुस्लिम शासकों के अधीन रहा झुंझुनूं शहर आज प्रदेश में साम्प्रदायिक सद्भाव की दृष्टि से अपना एक विशिष्ट स्थान रखता है।
➤ झुन्झुनूं में कमरूद्दीन शाह की दरगाह का विशाल और विहंगम परिसर देखने लायक है तो पहाड़ी पर बना मनसा माता का मंदिर भी दर्शनीय है।
➤ इन दोनों स्थानों से शहर का नयाभिराम दृश्य बहुत आकर्षक लगता है।
➤ ईश्वरदास मोदी की हवेली में भित्ति चित्रों की भव्यता के साथ-साथ सैकड़ों झरोखों की चित्ताकर्षक छटा भी दर्शनीय है।
➤ शहर में बना खेतड़ी महल एक प्रकार का हवा महल है तो मेड़तणी बावड़ी और बादलगढ भी नजरों में कैद हो जाने वाले स्थल हैं।
➤ समसतालाब, चंचलनाथ का टीला, जोरावर गढ, बिहारी जी का मन्दिर, राणी सती मन्दिर, खेमी शक्ति मंदिर, लक्ष्मीनाथ जी का मंदिर, दादाबाडी, अरविन्द आश्रम, मोडा पहाड, खेतान बावडी, शेखावत शासकों की छतरियां, टीबडेवाला की हवेलियां, जवाब रूहेल खां का मकबरा, जमाा मस्जिद तथा झुन्झुनूं के निकट आबूसर में नेतका टीला जैसे अनेक अन्य दर्शनीय स्थल भी झुन्झुनूं में हैं।
➤ पर्यटन की दृष्टि से चिड़ावा, बिसाऊ, चूड़ीअजीतढ़, परसरामपुरा, मुकुन्दगढ़, अलसीसर, मलसीसर, गांगियासर, काजड़ा, बगड़, सूरजगढ़, सिंघाना और उदयपुरवाटी में भी हवेलियां, छतरियां, तालाब, धार्मिक स्थल, एऐतिहासिक स्मारक आदि दर्शनीय हैं।

झुन्झुनूं (jhunjhunu)— साहित्य, कला एवं संस्कृति

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➤ साहित्यिक और सांस्कृतिक दृष्टि से झुन्झुनूं जिले की माटी में पल बढकर अनेक इतिहास वेत्ताओं ने इतिहास लेखन कर समाज को समर्पित किया हैं इस दृष्टि से हरनाथसिंह, पंडित झाबरमल शर्मा, डाॅ. उदयवीर शर्मा, मोहन सिंह, रघ्ज्ञुवीरसिंह शेखावत आदि के नाम प्रमुख हैं।
➤ साहित्य के क्षेत्र में जनाब सालिक अजदज, युसुफ झुंझुनवी, डाॅ. गोरधन सिंह शेखावत, डाॅ. मनोहर शर्मा, विश्वनाथ ‘विमलेश’ रामनिरंजन शर्मा ‘ठिमाऊ’, बनवारी लाल ‘सुमन’, परमेश्वर द्विरेफ, भागीरथसिंह ‘भाग्य’, रामस्वरूप ‘परेश’, नागराज, ओमप्रकाश पचरंगिया आदि अनेक हस्ताक्षर हैं।
➤ मातुराम वर्मा (पिलानी) तथा राजकुमार गनेड़ीवाला (मुकन्दगढ़) ने जहां कलाकार के रूप में अपनी जादुई अंगुलियों का कमाल दिखाया है वहीं सूरतसिंह शेखावत कार्टून विधा के शिरोमणि रहे हैं।
➤ शेखावाटी के चंग और गीन्दड़ नृत्यों ने इस जनप्रद की लोक संस्कृति को पंख प्रदान किये हैं।
➤ वहीं भोपा-भोपी के गायन, बांसुरी और अलगोजों के स्वर तथा सामाजिक उत्सवों पार गहिलाओं द्वारा गाये जाने वाले गीतों में समृद्ध लोक परम्पराओं की झांकी का प्रतिबिम्ब झलकता है।
➤ चिड़ावा के राणा परिवार का परम्परागत शैली का ख्याल तथा विभिन्न कस्बों में गजल गायकी की परम्परा ने भी इसे जिले का नाम रोशन किया है।

झुन्झुनूं (jhunjhunu)— मेले एवं त्यौंहार

➤ लोहार्गल में प्रतिवर्ष भादवा बदी अमावस्या को एक विशाल मेला लगता है जिसमें हजारों श्रृद्धालु भक्त् यहां बने कुण्ड में स्नान करके पुण्य के भागीदार बनते है।
➤ यहां राजस्थान के दूर-दराज स्थानों से हजाों मेलार्थी आते हैं और मालखेत वनखण्डी की जय के उद्घोष से पर्वत श्रृंखलाओं को गुंजाते हैं।
➤ यहां आने वालले यात्री चैबीस कोस की पैदल यात्रा करते हैं।
➤ नरहड़ ग्राम में हजरत हाफिज शक्करबार शाह की प्राचीन दरगाह का मेला जन्माष्टमी के दिन लगता है।
➤ भावात्मक एव सांस्कृतिक एकता के प्रीत इस मेले में सभी धर्मों के लोग समान रूप से पीर बाबा की मजार पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।
➤ जायरीनों द्वारा मजार पर चादरें, कपड़े, नारियल और मिष्ठान चढ़ाई जाती है।
➤ दरगाह में एक जाल का वृक्ष है जिस पर जायरीन अपानी मन्नतों के डोरे टांग देते हैं और उनकी मन्नतें पूरी हो जाती हैं।
➤ झुन्झुनूं में मनसा देवी का मेला वर्ष में दो बार चैत्र सुदी अष्टमी एवं आसोज सुदी अष्टमी को लगता है जिसमें जिले के हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।

झुन्झुनूं (jhunjhunu)— खनिज सम्पदा

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➤ झुन्झुनूं जिले के उत्तरी-पूर्वी भाग से लेकर दक्षिणी छोर तक फैली अरावली पर्वतमाला ने प्राकृतिक रूप से जिले को काफी समृद्ध किया हुआ है।
➤ सिंघाना से लेकर रघुनाथगढ़ तक भू-गर्भ में करीब 75 किलोमीटर क्षेत्र में ताम्र (तांबा) पट्टी फैली हुई है।
➤ इसका दोहन खेतड़ी स्थित हिन्दुस्तान काॅपर लिमिटेड के माध्यम से किया जाता है।
➤ खेतड़ी में तीन खानें हैं, इनमें कोलिहान और खेतड़ी में भूमिगत खदानें हैं जबकि चांदमारी में खुली खान है।
➤ अरावली की गोद में जिले में ग्रेनाइट और लाइम स्टोन के विपुल भण्डार हैं।
➤ उदयपुरवाटी तहसील के अनेक गांवों में इनका खनन होता है।
➤ ग्रेनाइट पत्थर को तराशने और काटने तथा चूने के पत्थर (लाइम स्टोन) से सीमेंट निर्माण के लिए गत एक दशक में अनेक औद्योगिक इकाइयों का फैलाव इस जिले में हुआ है।

jhunjhunu District GK in Hindi झुन्झुनूं जिला Rajasthan GK in Hindi

Jhunjhunu: History, Geography, Places

Location, Area & Administration of Jhunjhunu:

Jhunjhunu lies between 27° 38′ & 28° 31′ north latitude and 75° 02′ and 76° 06′ east longitude. It is surrounded by Churu district on the northwestern side Hissar and Mahendragarh district of Haryana State in the northeastern part and by Sikar district in the west, south and south eastern part.

The Total geographical area of the district is 2928 square Kms which is divided into 8 tehsils namely Jhunjhunu, Malsisar, Buhana, Udaipurwati, Nawalgarh, Khetri, Chirawa, Surajgarh.

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History of Jhunjhunu:

Ancient History of Jhunjhunu, forms part of Indian mythology, with an anecdote that Pandwas, the heroes of the Mahabharata took bath and bathed their weapons in the Surya Kund, Lohargal.

It is said that, it was ruled over by the Chauhan Dynasty in the Vikram era 1045, and Sidhraj was a renowned king. In the year 1450 Mohammed Khan & his son Samas khan defeated the Chauhans and conquered Jhunjhunu.

Mohammed khan was first Nawab of Jhunjhunu. In 1459, his son Samas khan ascended the throne and . Jhunjhunu was ruled over by of the following Nawabs in succession:

Rulers of Jhunjhunu:

  • Mohammed Khan
    • First Nawab of Jhunjhunu
  • Samas Khan
    • Ascended throne in 1459
    • Founded the village Samaspur and got Samas Talab constructed
  • Fateh Khan
  • Mubark Shah
  • Kamal Khan
  • Bheekam Khan
  • Mohabat Khan
  • Khijar Khan
  • Bahadur Khan
  • Samas Khan Sani
  • Sultan khan
  • Vahid Khan
  • Saad Khan
  • Fazal Khan
  • Rohilla Khan
    • Last Nawab of Jhunjhun
    • Shardul Singh, diwan of Rohilla Khan, occupied jhunjhunu, after the death of Rohilla Khan in 1730.

Shardul Singh

  • Shardul Singh was as brave as his ancestor Rao Shekha ji.
  • He ruled for  twelve years. After his death the estate was divided equally among his five sons.  The administration by his five sons was cumulatively known as “Panchpana”.
  • Their descendants continued to rule over it till Indian Independence in 1947.

Fairs & Festivals of Jhunjhunu:

Rani Sati Fair:

The Rani Sati Mela in Jhunjhunu which is in the northern part of Shekhawati, attracts thousands of pilgrims and tourists from all over the globe. The fair is held at The Rani Sati Temple on Bhado Amavasya which means no-moon day.

Ramdevji Fair:download1

This fair is held at Nawalgarh city of Rajasthan. Named after Baba Ramdev, he was believed to have magical powers and is believed that he is an embodiment of lord Krishna. Respected by both the Hindus and Muslims this fair is celebrated in the honor of death anniversary of Baba Ramdev.

Geography of Jhunjhunu:

Physiographically, the district is a mass of rolling sand dunes, hillocks and low lying mounds in its western part. The south eastern part, has off shoots of Aravalli range of hills, which extend from south of Udaipurwati tehsil and continue up to Khetri & Singhana following an almost NE-SW trend. The average elevation is 300-450 mt. above MSL with highest peak near Lohagarh at 1051 mts. above MSL.

Shifting sands, active dunes and soil erosion are hallmark of western and central part of the district. The inland drainage is related to Katli river system. There are four major streams in the district namely Dohau, Chandrawati, Udaipur-Lohagarh ki Nadi & Sukh Nadi.

  • River katli originated from Khadela hill sides of Shrimadhopur Tehsil. Sikar and enters near south west of Udaipurwati tehsil running towards north – west direction and ultimately disappears in the sandy tracks of the Churu District. This river, however, divides the district almost into two parts.
  • Similarly Dohan River also originates from Shrimadhopur hills and flows to north – eastern direction passing through some eastern part and ultimately disappears in sandy tracks of Mahendragarh district of Haryana.
  • There is no lake in the district however small tanks are in existence in some areas. There are only four tanks used for irrigation purposes.

Natural Resources/ Minerals of Jhunjhunu:

Jhunjhunu is fairly endowed with various minerals whose industrial use has immensely contributed to the economy of the district. Of these, the most important is the copper belt of Khetri from which mining has been carried out since time immemorial. The different minerals found in the district can be enlisted as under:-

Copper-Gold-Silver

  • Out of the three copper producing belts of India, the Khetri copper belt has a special importance due to the ancient workings and its configuration.
  • The Khetri Copper belt extends for a strike length of 80 kms. from Raghunathgarh in South to Singhana in North.
  • The off-shoots and parallel mineralised zones have been identified around Deoru, Banswas, Dhola Mala etc.

Iron

  • Iron ore in the form of a mixture of hematite and magnetite occurs near Jaonda where about 0.25 M.T. of reserves with 65% to 70% Fe have been estimated.
  • Another 0.38 M.T. reserves with 55% – 65% Fe have been reported from Soir Zamalpura area. Minor occurrences have been also reported between Rajpur and J aintapura and Kali Pahari area.

Cobalt

  • G.S.I. has reported presence of Cobalt associated with pyrrhotite in Akwali – Babai section of Khetri Copper bolt. The ore is a mixture of Cobaltite and Danite with about 2.83% Co content.

Limestone

  • Limestone is reported from Khiror-Basawa-­Parasrampura area, teh. Nawalgarh,
  • It occurs beneath a thick soil cover and only intermittent exposures are found.
  • Small occurrences of limestone are also reported in the form of small bands and pockets around Paprna, Meena Ki Dhani etc.

FIuorite

  • A small occurrence of fluorite is located near village Chhapoli, Teh. Udaipurwati. This prospect was worked by R.S.M.D.C. previously, though no mining activity is being carried out now.

Quartz – Feldspar

  • Minor occurrences of quartz-feldspar have been reported from localities in teh.Khetri and teh. Udaipurwati. .

Clays-Red Ochre

  • A few leases for clays and red ochre are existing in the district near Gudha, Ponkh, Girawadi, Udaipurwati, Mehrana etc.

Soapstone – Pyrophyllite

  • Soapstone-pyrophyllite occurrences have been reported from Khoh, Guda, Mehrana etc. of teh. Udaipurwati and Khetri.

Calcite

  • Calcite is being mined in minor quantities around villages Dada, Bansiyal, Badalwas etc. of teh. Khetri.

Granite

  • Granites belonging to the Erinpura as well as Malani Igneous suite are exposed intermittently in the district.
  • The prominent exposures are of Nand, Rizhani, Maragsar, Makhar, Rasoda & Jhunjhunu of teh.
  • Jhunjhunu and Hukumpura Bamlawas, teh. Udaipurwati.
  • The granite of the district is light to dark grey pink and red.
  • The red granite of Makhar is also being exported.

Marble

  • Marble occurrences are reported from Papurna, Meena Ki Dhani, Bhagwatwala ki Dhani etc. of teh. Khetri. The marble is grey, medium to coarse grained, hard and compact.

Population:

  • According to the 2011 census, Jhunjhunu district has a population of 21,39,658.
  • The district has a population density of 361 inhabitants per square kilometer.

 

केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान, पिलानी ।

Central Electronics Engineering Research Institute (CEERI), Pilani (Jhunjhunu):

केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान, पिलानी देश का अग्रणी अनुसंधान संस्थान है तथा यह वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), नई दिल्ली की घटक प्रयोगशाला है । वर्ष 1953 में अपनी स्थापना के उपरांत यह इलेक्ट्रॉनिकी के संवर्द्धन तथा इस क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास कार्य के लिए राष्ट्र की सेवा में समर्पित है ।
CSIR-Central Electronics Engineering Research Institute, popularly known as CSIR-CEERI, is a constituent establishment of the Council of Scientific and Industrial Research (CSIR), New Delhi. The foundation stone of the institute was laid on 21st September , 1953 by the then Prime Minister Pt. Jawahar Lal Nehru. The actual R&D work started towards the end of 1958. The Institute (CSIR-CEERI) has since blossomed into a center of excellence for development of technology and for advanced research in electronics. Over the years the institute has developed a number of products and processes and has established facilities to meet the emerging needs of electronics industry.
Objectives of CEERI, Pilani are:
  • To carry out R&D in electronic devices and systems
  • To assist industry in technology absorption, upgradation and diversification
  • To provide R&D services to industry and users in design, fabrication and testing
  • To provide technical services for specific needs towards product development, precision and quality.

 

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Kota District GK in Hindi कोटा जिला Rajasthan GK in Hindi

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Kota District GK in Hindi कोटा जिला Rajasthan GK in Hindi

 Rajasthan Districts wise General Knowledge

1. अजमेर  6. भरतपुर  11. चित्तौड़गढ़  16. हनुमानगढ़  21. झुंझुनूं  26. पाली  31. सिरोही 
2. अलवर  7. भीलवाड़ा 12. दौसा  17. जयपुर  22. जोधपुर  27. प्रतापगढ़  32. टोंक
3. बांसवाड़ा  8. बीकानेर  13. धौलपुर  18. जैसलमेर  23. करौली  28. राजसमंद  33. उदयपुर 
4. बारां  9. बूंदी  14. डूंगरपुर  19. जालोर  24. कोटा  29. सवाई माधोपुर 
5. बाड़मेर  10. चुरू  15. गंगानगर  20. झालावाड़  25. नागौर  30. सीकर 

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चम्बल नदी के तट पर बसा हुआ कोटा जिला राजस्थान का एक प्रमुख शैक्षणिक और औद्योगिक केन्द्र है। पानी की बहुतायत की वजह से यह कृषि के क्षेत्र में भी बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है.यह जयपुर—जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 12 पर अवस्थित है. राजस्थान के लिए कोटा आधुनिक के साथ ही ऐतिहासिक महत्व भी रखता है. आजादी से पहले कोटा स्वयं एक रियासत रही है.

कोटा (Kota)— संक्षिप्त इतिहास’

➤ कोटा जिले का नाम इसके जिला मुख्यालय नगर कोटा के नाम पर रखा गया है जो कोटा रियासत की राजधानी भी थी।
➤ प्राप्त अभिलेखों के अनुसार चम्बल नदी के पूर्व में स्थित अकेलगढ, जिसका कि शासक कोटिया भील था उसने कोटा नगर बसाया था।
➤ जिसका नाम उसने कोटाह (कोटा) रखा।
➤ सन् 1625 तक कोटा परगना बूंदी राज्य के अधीन रहा।
➤ बाद में मुगल बादशाह जहांगीर ने राजा राव रतन सिंह के पुत्र माधोसिंह की शूरवीरता से प्रसन्न होकर उसे कोटा एवं उसके साथ 360 गांव भेंट किये एवं माधोसिंह को कोटा का प्रमुख बनाया गया।
➤ आगे चलकर कोटा को अलग राज्य घोषित कर दिया गया एवं यहां के शासक महाराव कहलाने लगे।
➤ माधोसिंह के बाद राव मुकन्द सिंह, जगत सिंह, प्रेमसिंह, किशोर सिंह, राम सिंह, भीम सिंह, अर्जुन सिंह, अजीत सिंह, छत्रसाल सिंह प्रथम, गुमानसिंह, उम्मेदसिंह प्रथम, किशोर सिंह द्वितीय, रामसिंह द्वितीय, छत्रसाल सिंह द्वितीय, उम्मेद सिंह द्वितीय एवं भीम सिंह द्वितीय कोटा के शासक बने।
➤ कोटा के अन्तिम शासक महाराव भीमसिंह द्वितीय रहे।

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Rajasthan Gk In Hindi Series 40 (400 Questions)

Rajasthan Gk In Hindi Series 39

कोटा (Kota)— भौगोलिक स्थिति

➤ यह जिला राजस्थान के दक्षिणी पूर्वी भाग में 24.2 और 25.2 उत्तरी अक्षांश तथा 75.37 एवं 77.26 दक्षिणी अक्षांश के मध्य स्थित है।
➤ जिले के पश्चिम में चितौड़गढ़ जिला व बूंदी जिला दक्षिण में झालावाड़, पूर्व में बारां, उत्तर में सवाईमाधोपुर एवं टोंक जिला है।
धरातल का हल्का सा ढलान दक्षिण से उत्तर की तरफ हैं दक्षिण एवं उत्तरी भागों में पहाड़ियां दिखाई देती हैं।
➤ विध्य पहाड़ियों की मुकन्दरा श्रेणी जिले में स्थित है।
➤ कई स्थानों पर दोहरी विरचना दो पृथक पर्वत श्रेणियों की है जो एक दूसरे से दो किलो मीटर से अधिक दूरी पर समानान्तर जाती हैं इन पर्वत श्रेणियों के मध्य पड़ने वाला भाग कहीं-कहीं घने जंगलों से आच्छादित हैं
➤ जिले में बारहमासी बहने वाली चम्बल नदी है जिसका उद्गम स्थल विंध्याचल पर्वत है, जो मध्यप्रदेश एवं राजस्थान में होकर बहती है।
➤ उत्तर प्रदेश में 32 किलोमीटर बहने के पश्चात् इटावा शहर के समीप यमुना नदी में मिल जाती है।
➤ जिले की अन्य सहायक नदियां काली सिंध, पार्वती, परवन एवं उजाड़ है।
➤ जिले का कुल भोगौलिक क्षेत्रफल 5198.14 वर्ग किलोमीटर हैं जिसमें शहरी 310.05 वर्ग किलोमीटर एवं 4906.95 वर्ग किलोमीटर ग्रामीण है।

कोटा (Kota)— चम्बल उद्यान

➤ चम्बल उद्यान कोटा में चम्बल नदी के तट पर स्थित है।
➤ 10 एकड़ भूमि में स्थित यह उद्यान राजस्थान के श्रेष्ठतम उद्यानों में से एक है जो 1976 में विकसित हुआ।
➤ चट्टानी भूमि पर विकसित किये गये इस उद्यान को भूतल को समतल कर स्थान प्राकृतिक एवं मौलिक रूप में विकसित किया गया है।
➤ उद्यान में एक बड़ा फव्वारा कई आकर्षक मूर्तियां विद्यमान है।
➤ यहां से चम्बल नदी में नौका विहार की सुविधा भी उपलब्ध है।
➤ सभी आयु वर्ग के पर्यटकों को आकर्षिक करने वाले इस उद्यान में बच्चों के लिए विद्युत चलित टाॅयट्रेन मेरी-गो राउण्ड झूला, लक्ष्मण झूला व अन्य झूले आकर्षण का केन्द्र है।

कोटा (Kota)— हाड़ौती यातायात प्रशिक्षण पार्क

➤ चम्बल उद्यान के निकट 12 एकड़ भूमि पर निर्मित यातायात पार्क राजस्थान का पार्क व देश के सर्वश्रेष्ठ यातायात पार्कों में से एक है।
➤ इसका निर्माण जुलाई 1992 में पूर्ण हुआ पार्क के किशोरों एवं बालकों को यातायात के महत्वपूर्ण जानकारी देने के उद्देय से यातायात प्रशिक्षण दीर्घा का निर्माण किया गया।
➤ पार्क में सड़कों पर स्थान-स्थान पर सड़क संकेत चिन्ह लगाये गये हैं तथा कई भवनों यथा अस्पताल, स्कूल, डाकघर, हवाईअड्डा आदि के माॅडल भी बनाये गये हैं।
➤ बच्चों के मनोरंजन हेतु यहां वनस्पति उद्यान, पक्षी विहार एवं रंगबिरंगे झूले हैं।
➤ पार्क में निर्मित फ्लाई ओवर ब्रिज का अपना अलग आकर्षण है रात्रि में समय प्रकाश की मनोहारी प्रभाावी व्यवस्था की गई है।

कोटा (Kota)— क्षार बाग

➤ छत्र विलास तालाब व बाग के निकट स्थित स्थल पर कोटा के हाड़ा शासकों में दाह संस्कार करने की परम्परा रही है।
➤ दिवंगत शासक की स्मृति में प्रस्तरों से छतरी बनवाई जाती हैं बाग में स्थित अनेक छतरियां राजपूत स्थापत्यकला का सुन्दर नमूना है।
➤ छतरियों पर पशु-पक्षी, देवी देवताओं एवं लता-बल्लरियों की कलात्मक आकृतियां उत्कीर्ण हैं।
➤ छतरियों के चारों और उद्यान फव्वारे एवं विद्युत सज्जा से बाग और अधिक रमणीय हो गया है।

कोटा (Kota)— मथुराधीश मंदिर

➤ कोटा शहर के पाटनपोल में भगवान मथुराधीश का मंदिर है जिससे यह नगर वैष्णव संप्रदाय का प्रमुख तीर्थधाम है।
➤ देश में बल्लभ संप्रदाय की प्रमुख सात पीठों में से कोटा प्रथम पीठ है।
➤ मंदिर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर नंद महोत्सव, सावन में झूलोत्सव, दिपावली पर अन्नकूट उत्सव तथा होली पर आयोजित होने वाले डोल उत्सव प्रमुख हैं।

कोटा (Kota)— कन्सुआ का शिव मंदिर

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➤ आठवीं शताब्दी का कन्सुआ का शिव मंदिर कोटा शहर से लगभग 6 किलोमीटर दूर डी.सी.एम. मार्ग पर स्थित है।
➤ मंदिर के परिक्रमा पथ में बाईं ओर दीवार पर कुटिला लिपि में लिखा हुआ आठवीं शताब्दी का शिलालेख है।
➤ यह शिलालेख शिवगणमौर्य का है जिसमें इस मंदिर के निर्माास का सविस्तार उल्लेख किया गया है।
➤ प्रसिद्ध कवि जय शंकर प्रसाद ने अपने चन्द्रगुप्त नाटक के प्राकथन में इस स्थान को कणवाश्रम की संज्ञा देकर आम लोगों की धारणाओं को पुष्ट किया है।
➤ इस धारणा के अनुसार यह कण्य ऋषि का आश्रम था। ऐसा भी कहा जाता है कि यही पर शकुन्तला ने अपना बाल्यकाल व किशोरावस्था व्यतीत की थी।
➤ मंदिर के गर्भगृह में काले पत्थर का चतुर्मुख शिवलिंग है।
➤ मंदिर की विशेषता यह है कि सूर्य की प्रथम किरण मंदिर के 20-25 फुट भीतर स्थित शिवलिंग पर सीधी पड़ती है।
➤ यहां स्थित भैरव मंदिर में भैरव की आदमकद मूर्ति विराजमान है। यह शिवलिग 3 फिट ऊंचा और एक फुट चौड़ा है।

कोटा (Kota)— चारचौमा का शिवालय

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➤ कोटा से 25 किलोमीटर दूर चारचौमा ग्राम के समीप प्राचीन शिव मंदिर है, जिसे गुप्तकालीन अर्थात चौथी पांचवीं शताब्दी का बताया जाता है।
➤ कोटा राज्य के इतिहासकार डाॅ. मथुरालाल शर्मा ने चारचौमा के शिवमंदिर को सबसे प्राचीन शिवालय बताया है।
➤ मंदिर में चतुर्मुख शिव प्रतिमा बहुत आकर्षक है, वेदी से चोटी तक प्रतिमा की ऊंचाई 3 फीट है।
➤ कंठ उपर के चारों मुख श्यामवर्ण और चमकीले हैं। चारों मुखों का केशविन्यास वास्तुशास्त्र की दृष्टि से दर्शनीय है।

कोटा (Kota)— भीमचौरी का मंदिर

➤ प्राचीन भीमचौरी का मंदिर कोटा से 50 किलोमीटर दूर दर्रा नामक स्थान की नाभी में भीमचौरी अवस्थित है।
➤ एक लम्बे चौड़े पत्थर के दो स्तरीय चबूतरों पर खम्भों वाला एक ध्वस्त मंदिर ही भीमचौरी या भीम चवंरी कहा जाता है।
➤ इतिहासकार इसे गुप्तकालीन मानकर इसका निर्माण काल चौथी शताब्दी बताते हैं।
➤ यहां पर 44 फुट चौड़े और 74 फुट बड़े—बड़े शिला खण्डों से बने एक चबूतरे पर भमचौरा का वह मूल मंदिर खण्डहर अवस्था में उपलब्ध है, जिसे भीम का मण्डप माना जाता है।
➤ मंदिर में शिवलिंग की प्रतिष्ठा मानी गई है।
➤ कोटा के राजकीय संग्रहालय की एक प्रतिमा तंत्रिका पट्टिका का शिल्प की दृष्टि से पूरी हाड़ौती चंचल में अनूठी है जो विदेशों की यात्रा भी कर चुकी हैं मगर मुख से अलंकृत इस पट्टिका में एक व्यक्ति को वाद्य यंत्र बजाते हुए देखा जा सकता है।

कोटा (Kota)— बूढ़ादीत का सूर्य मंदिर

➤ कोटा के पूर्व में ग्वालियर की ओर जाने वाली सड़क पर दीगोद उपखण्ड मुख्यालय से 24 किलोमीटर दूर दक्षिण में बूढादीत गांव के तालाब के पश्चिमी किनारे पर पूर्वाभिमुख शिखर बंध सूर्य मंदिर स्थित है।
➤ पंचायतन शैली के मंदिर में गर्भगृह और महामण्डप है।
➤ मंडप का आधुनिकीकरण अठारहवीं शताब्दी में कराया गया।
➤ मंदिर आज भी अपने मूल रूप में विद्यमान है।
➤ यह सूर्य मंदिर नवीं शताब्दी का माना जाता है।

कोटा (Kota)— गेपरनाथ

➤ चर्मण्यवती के तट पर स्थित महत्वपूर्ण शिवालयों में से गेपरनाथ शिवालय अपना विशिष्ट स्थान रखता है।
➤ इतिहासकारों के अनुसार मंदिर का निर्माणकाल पांचवीं से 11 वीं सदी के मध्य माना गया है।
➤ यहां पर बिखरे विस्तृत सांस्कृतिक अवशेषों से इस बात के प्रमाण मिले हैं कि कभी इस क्षेत्र में मौर्य, शुंग, कुषाण, परमार तथा गुप्तवंशीय राजाओं का शासन था।
➤ कोटा नगर से 22 किलोमीटर दूर रावतभाटा मार्ग पर ग्राम रथ कांकरा के समीप घाटी में 300 से 350 फुट गहराई में स्थित गेपरनाथ का शिव मंदिर अपने अनुपम प्राकृतिक सौन्दर्य, चट्टानों से निकलते हुए अनेक झरनों की लय के मध्य अपनी उन्मुक्तता के साथ दर्शकों को आकर्षित करता है।
➤ यहां हर वर्ष शिवरात्रि का मेला लगता है जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

कोटा (Kota)— मुकंदरा हिल्स अभ्यारण्य

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➤ कोटा नगर से 50 किलोमीटर दूर विंध्य पहाड़ियों की मुकंदरा पर्वत मालाओं के सौन्दर्यमयी प्राकृतिक दर्रा गेम सेन्चुरी पर्यटकों के विचरण और मनोरंजन हेतु विशेष आकर्षण का केन्द्र है।
➤ लगभग 80 किलोमीटर लम्बी एवं 5-6 किलोमीटर चैड़ी प्राकृतिक घाटी में दर्रा सेन्चुरी का आरंभ 1955 में किया गया।
➤ घाटी के दोनों ओर 335 से 505 मीटर उंची पहाडियां एवं घाटियां मनोहारी लगती है।
➤ अभयारण्य में तेंदुए, सांभर, चीतल, नीलगाय, रींछ, जंगली सूअर आदि प्राकृतिक वातावरण में उन्मुक्त विवरण करते हैं।

कोटा (Kota)— विभीषण मंदिर

➤ कोटा से 16 किलोमीटर दूर कैथून में स्थित यह मंदिर तीसरी से पांचवीं शताब्दी के मध्य का बताया जाता है।
➤ एक छतरी में स्थापित विशाल मूर्ति धड़ से ऊपर तक की हे। जिसे विभीषण की मूर्ति कहा जाता है।

कोटा (Kota)— अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थल

➤ कोटा के अन्य दर्शनीय स्थलों में जग मंदिर, घंटाघर, लक्खी बुर्ज, छोटी व बड़ी समाध, अधरशिला, भीतरियाकुण्ड, गोदावरीधाम, कोटा बैराज, महात्मा गांधी भवन, रंगबाड़ी चिड़ियाघर, खड़ेगणेश जी मंदिर, धाभाईयों के मंदिर एवं नीलकण्ठ महादेव का मंदिर प्रमुख है।

Kota District GK in Hindi कोटा जिला Rajasthan GK in Hindi

Kota: History, Geography, Places

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Location, Area and Administration of Kota:

Kota district lies between 24º 25′ and 25º 51′ North Latitude and 75º 37′ and 77º 26′ East Longitude. It is bounded on north and north west by Sawai Madhopur, Tonk and Bundi districts. The Chambal river separates these from Kota district and forms the natural boundary. The district is bounded by Jhalawar, and Mandsor district of M.P. on the south, Baran district on the east and Chittorgarh district of Rajasthan on the west.

Kota district has an area of 5098 sq. km. and comprises of 6 tehsils namely Pipalda, Digod, Kanwas, Ladpura (Kota), Sangod & Ramganj Mandi.

Imagesource: MapsofIndia Tehsil of Kanwas not shown in map
Imagesource: MapsofIndia
Tehsil of Kanwas not shown in map

History of Kota:

  • Kota seceded from Bundi in 1631.
  • Between 1707- 1713 it was again reunited with Bundi
  • Kota became British protectorate in 1817.
  • Kota rulers bore the title “Maharao”.

Rulers of Kota:

  • Madho Singh
    • 2nd Son of raja rattan Singh of Bundi, who confirmed grant of Kota to Madho Singh & separation, took place.
  • Mukund Singh
  • Jagat Singh
  • Kishore Singh
  • Ram Singh I (1696-1707)
  • United with Bundi (1707-13)
  • Bhim Singh I (1713-20)
  • Arjun Singh (1720-23)
  • Durjan Sal (1723-56)
  • Ajit Singh (b. bf.1756-57)
  • Chhatar Sal Singh I (1757-64)
  • Guman Singh (1764-71)
  • Umaid Singh I (1771-1819)
    • Dewan Zalim Singh – formed state of Jhalawar – 1791
  • Kishor Singh II (1819-28)
  • Ram Singh II (1828-1866)
  • Chhatar Sal Singh II (1866-89)
  • Umaid Singh II (1889-1940)
  • Maharo Bhim Singh II (1940-1947)

Historical Places of Kota:

Alnia:

The Alnia Dam is one of the must-see attractions of Kota. It is renowned for the beautiful rock paintings that date back to the Upper Paleolithic age. Still in good condition, they adorn the bank of the river, making this place definitely worth a visit.

Jagmandir Palace:jagmandir

The Jagmandir Palace was built by one of the queens of Kota between 1743 and 1745, and is situated in the middle of the Kishore Sagar Lake. Built in red sandstone, it is a monument of exquisite beauty. The palace is open to tourists who can enjoy boat rides in the Kishore Sagar Lake and the panoramic view of the palace from the lake. The Keshar Bagh, situated near the Jagmandir Palace is well known for its royal cenotaphs.

Garh Palace:maharao-madho-singh-museam

This large complex, also known as the City Palace, is built in a predominantly Rajput style of architecture. The palace is a sprawling complex of suites and apartments built by different rulers of the Rajput dynasty at different times in history.

Maharao Madho Singh Museum

Situated within the walls of the Garh palace, Maharao Madho Singh Museum houses a splendid collection of Rajput miniature paintings of the Kota school.The exquisite sculptures, frescoes and murals present a breathtaking view.

Fairs & Festivals of Kota:

Kota Dussehra Fair:dussehra4

Dussehra marks the victory of Ram over the demon king Ravana, and the rescue of his wife Sita. Dussehra means the Tenth Day, being the 10th day of the bright half of Ashvin. Highlight of the festivities is the theatrical representation of the encounter popularly known as ‘Ramleela’. The climax of the show holds most appeal as it ends with setting alight gigantic effigies of the 10-headed Ravana along with his brother Kumbhkarana and his son Meghnath. These 75-feet tall statues are stuffed with crackers and once set on fire, they burst to create an extravagant show.

Kota Adventure Festival:kota

Chambal Adventure Festival (9-11 Feb) is three day festival is organized in Kota where Tourists can enjoy Water & Air Sports. Tourists from across the world can witness various events such parasailing, rafting, wind surfing, water skiing and kayaking. Apart from these activities, visitors can also indulge in rock climbing, gliding, trekking, angling and rural excursions.

Gangaur Festival:gangaur_festival_fair

(March- April) – This Festival is dedicated to Gauri, the consort of Lord Shiva and the symbol of marital happiness. It is the most important festival of  Rajasthan which maidens and married women celebrate with great gusto and enthusiasm. It begins on the day after Holi and is celebrated for eighteen days. Maidens collect poppy flowers from the fields and make garlands for the Goddess.

Annant Chaturdashi Mahotsavaaa

Geography of Kota:

Kota is one of the eastern districts of Rajasthan and is something like a dumber in shape.  A major part of the district is a flat plain called Kota-­Haravati-Plain which has its average elevation of 250 m. above MSL. The Mukundara-Hill range with flat tops trending NW-SE and rising-up to 492M. above MSL in the South-Eastern and Eastern parts of the district, is the prominent geomorphic feature of the district. The area slopes gently northward from the high table land of Malwa in Madhya Pradesh.

The area is drained by the perennial river Chambal and its north flowing tributaries. ­

Natural Places of Kota:

Mukundara Tiger Reserve:196

The Mukundara Tiger Reserve is 50 kilometers from Kota. Tigers are often relocated here from Ranthambore Reserve. It has a core area of 417 square kilometers and a buffer zone covering 342.82 square kilometers. Other wildlife includes panther, deer, wild boar and bear. This thickly wooded area is home to a large variety of birds as well.

Jawahar Sagar Damjawahar-sagar-dam

Built in the yaer of 1972, Jawahar Sagar Dam is part of the chain of dams constructed under the Chambal Valley Project. Erected over the mighty River Chambal, Jawahar Sagar Dam is an important multipurpose dam of the region of Kota that serves several important functions. The dam is situated 26 km downstream from Rana Pratap Sagar Dam.

Garadiya Mahadev Temple:chambal-canyon

One can get a grand view of River Chambal from the Garadia Mahadev Temple. Situated on Dabi Road (NH 76), this temple provides an incredible view of the surrounding wilderness. It is a must visit, especially during monsoon.

Natural Resources/Minerals of Kota:

Owing to the total absence of Metamorphic rocks ( to which mostly metallic minerals are associated) no important ore deposits occurr in the district. However, it is compensated by dimensional stone of economic importance, such as limestone and sandstone.

SANDSTONE

Owing to it’s durability, attractive red and white colours and susceptibility to carving and polishing, Vindhyan sandstone has been extensively used as building material.

WHITE SANDSTONE

  • Khimuch is an important locality from where white sandstone is produced.
  • Since the sandstone is very hard as such it takes polish with great difficulty but if once polished it remains for a very long period.

RED SANDSTONE

  • The important quarries are concentrated neer Borawas, Deoli, Kasar, Mandana, Kanwas, villages.

LIMESTONE:

There are extensive deposits of Vindhyan limestone in the district around Morak, Chechat, Deoli, Kotri, Milo, Julmi, Nimoda, Darra etc. The limestone is fine grained, hard and thickly bedded. Being of splittable nature at places, it is extensively quarried in Morak, Suket and Ramganjmandi as slab stone and is famous as “Kota Stone”.

Limestone is also used for lime making near Indargarh, Mandana, etc. Limestone is found in district in following location:

  • Morak-Chechat-Deoli Belt:
  • Milo-Julmi Belt :
  • Deposit near Suket :
  • Deposits between Kolipura and Darra :
  • Deposit near Nimoda:
  • Deposit near Nimoda-Debri:
  • Deposit near Gadepan:

Population:

  • The district has a population density of 374 inhabitants per square kilometer.

 

ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम) 2017

, कोटा का आयोजन राजस्थान के कोटा में आरएसी परेड ग्राउंड में 24 मई से 26 मई2017 तक आयोजित किया जाएगा। तीन दिवसीय यह आयोजन कोटा के आरएसी परेड ग्राउंड पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें लगभग 30,000 किसान भाग लेंगे। यह कार्यक्रम राजस्थान सरकार तथा फैडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (फिक्की) द्वारा आयोजित किया जा रहा है। गत वर्ष जयपुर में आयोजित ‘ग्राम 2016‘ की उपलब्धियों को देखते हुए राजस्थान सरकार द्वारा ‘ग्राम कोटा‘ का आयोजन किया जा रहा है।
‘ग्राम कोटा‘ के आयोजन के प्रमुख उद्देश्यों में कोटा संभाग के किसानों को कृषि क्षेत्र में उपलब्ध सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों से अवगत कराना और कोटा के कृषि विकास को गुणात्मक रूप से अगले स्तर पर ले जाना है। इस आयोजन के दौरान कृषि क्षेत्र के सभी हितधारक – जिनमें कोटा एवं आसपास के किसान, शिक्षाविद, प्रौद्योगिकीविद, कृषि व्यवसाय कंपनियां और नीति निर्माता शामिल हैं, एक मंच पर एकत्रित होंगे। ‘ग्राम कोटा‘ के बारे में जागरूकता लाने एवं इसे लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से गत माह बारां, छबड़ा, भवानी मंडी, झालरापाटन एवं रामगंजमंडी में ऑन-ग्राउंड एक्टिवेशन आयोजित किए गए थे, जिनमें किसानों से जबरदस्त रूझान प्राप्त हुये थे। ‘ग्राम‘ के प्रचार-प्रसार के लिए सरपंचों के साथ बैठकें एवं किसान सभाएं भी आयोजित करना प्रस्तावित है।

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udaipur District GK in Hindi उदयपुर जिला Rajasthan GK in Hindi

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udaipur District GK in Hindi उदयपुर जिला Rajasthan GK in Hindi

 Rajasthan Districts wise General Knowledge

1. अजमेर  6. भरतपुर  11. चित्तौड़गढ़  16. हनुमानगढ़  21. झुंझुनूं  26. पाली  31. सिरोही 
2. अलवर  7. भीलवाड़ा 12. दौसा  17. जयपुर  22. जोधपुर  27. प्रतापगढ़  32. टोंक
3. बांसवाड़ा  8. बीकानेर  13. धौलपुर  18. जैसलमेर  23. करौली  28. राजसमंद  33. उदयपुर 
4. बारां  9. बूंदी  14. डूंगरपुर  19. जालोर  24. कोटा  29. सवाई माधोपुर 
5. बाड़मेर  10. चुरू  15. गंगानगर  20. झालावाड़  25. नागौर  30. सीकर 

भारत का दूसरा कश्मीर माना जाने वाला उदयपुर खूबसुरत वादियों से घिरा हुआ है। अपने नैसर्गिक सौन्दर्य सुषमा से भरपूर झीलों की यह नगरी सहज ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उदयपुर जिला हस्तशिल्प की विभिन्न विधाओं से देश विदेश में अपनी पहचान बनाए हुए है।

उदयपुर (udaipur) — भौगोलिक स्थिति

➤ राज्य के दक्षिणाचंल में स्थित उदयपुर जिले का विस्तार 23.46’ से 26. से उत्तरी अंक्षाश एवं 73. से 70.35’ पूर्वी देशान्तर के मध्य है।
➤ इसका भौगोलिक क्षेत्रफल 12,499 वर्ग किलोमीटर है।
➤ इसकी समुद्रतल से ऊंचाई 577 मीटर आंकी गई है।
➤ उदयपुर के पूर्व में चित्तौड़गढ़ जिला, उत्तर में राजसमन्द, उत्तर-पश्चिम में पाली, पश्चिम में सिरोही, पश्चिम-दक्षिण में गुजरात राज्य की सीमा, दक्षिण में डूंगरपूर तथा दक्षिण-पूर्वी भाग में बांसवाड़ा जिला है।

उदयपुर (udaipur) — जलवायु

➤ उदयपुर जिले की जलवायु समशीतोष्ण एवं स्वास्थ्यप्रद मानी जाती है, जिसमें मौसमी परिवर्तनों का दबाव सर्वाधिक गर्मी के माह है।
➤ वर्ष 2000 में यहां न्यूनतम तापमान 5 सेन्टीग्रेड रिकार्ड किया गया।
➤ औसत तापमान 22 सेन्टीग्रेड दर्ज किया गया।
➤ उदयपुर नगर में वर्षा का औसत 40.25 सेन्टीमीटर है।

उदयपुर (udaipur) — खनिज सम्पदा

➤ उदयपुर जिले में खनिजों का अनुपम भण्डार है। यहां महत्वपूर्ण खनिजों की विभिन्न किस्में पाई जाती है।
➤ जिले में प्राप्त होने वाले धातु तथा अधातु खनिजों में तांबा, लेड, जस्ता, चांदी आदि प्रमुख है।
इनके अलावा मैगजीन, लोहा, चट्टानी फाॅस्फेट, ऐस्बेस्टोस, केल्साइट, लाइमस्टोन, डोलोमाइट तथा संगमरमर आदि प्रमुख है।

उदयपुर (udaipur) — वन एवं वन्य-जीव

➤ उदयपुर जिले में 4,367.77 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सघन वन पाए जाते हैं।
➤ लकड़ी, कोयला, गोंद, बांस, तेन्दूपत्ता, कत्था, शहद, मोंम, लाख, आदि की सुलभता से राज्य की अर्थ-व्यवस्था को काफी सहारा मिलता है।
➤ वनस्पतियों की भी यहां विभिन्न श्रेणियां हैं, जिनमें आम, बबूल, बरगद, ढाक, खेजड़ी, गूलर, नीम तथा सालर बहुतायात से मिलती है।
➤ जिले के विभिन्न भागों में पाए जाने वाले वन्य-जीवों में पशु-पक्षी तथा सरासृप (रेंगने वाले जन्तु) भी मिलते है।
➤ चीतल धरियावद के निकट जाखम नदी के तट पर स्थित वनों में बहुतायात से पाए जाते हैं।
जिले के जयसमन्द वन्य जीव अभयारण्य तथा सुन्दरमाता अभयारण्य में कई नवीन जीवों का पता चला है।

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उदयपुर (udaipur) — ऐतिहासिक परिदृश्य

➤ तत्कालीन मेवाड़ रियासत की यह राजधानी देशी रजवाड़ों के समय में अपने शौर्य एवं पराक्रम के कारण चर्चित रही।
➤ इसका गौरवपूर्ण इतिहास, प्राकृतिक सुषमा एवं धरातलीय विशिष्टता, प्रागैतिहासिक काल के अवशेष, वर्तमान सांस्कृतिक एवं शोध केन्द्र बरबस ही लोगों को अपनी ओर खींचते हैं।
➤ मेवाड़ रियासत की चर्चा के दौरान हम महाराणा प्रताप की शौर्य एवं पराक्रम की चर्चा किए बिना नहीं रह सकते।
➤ उस समय भारतीय राजतंत्र में यही एक मात्र हिन्दु शासक बचा हुआ था। जिसने मुगल सम्राट की अधीनता नहीं स्वीकारी।
➤ अपनी वीरता के दम पर उन्होंने मातृभूमि की रक्षार्थ विश्व प्रसिद्ध हल्दीघाटी जनयुद्ध लड़ा और मुगल सम्राट अकबर के हौंसलें पस्त कर दिए।
➤ सुरक्षा की दृष्टि से एवं अन्य कारणों से मेवाड़ रियासत की राजधानी निरन्तर बदलती रही।
जिले के आहोर (भीण्डर), आधारपुर, आहड़, कुम्भलगढ़, नागदा, चावण्ड आदि स्थानों के साथ ही उदयपुर को भी मेवाड़ की राजधानी रहने का सौभाग्य मिला।
➤ अतीत में मेदपाट के नाम से विख्यात मेवाड़ की राजधानी उदयपुर में पाषाणयुगीन सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
➤ इस क्षेत्र में प्रारम्भिक मानव का अस्तित्व पाया गया है जो पत्थरों के औजार इस्तेमाल करता था और वह मानव खाने की सतत् खोज में व्यस्त रहता था।
➤ आहड़ एवं गिलूण्ड जैसे स्थानों में हुई पुरातात्विक खुदाई के परिणामस्वरूप प्राप्त भौतिक अवशेषों से ताम्रपाषाण कालीन सभ्यता के अवशेषों का पता चला है जो ईसा से 1800 वर्ष पूर्व की है।
➤ उस समय का मानव उच्च कोटि के चक्र निर्मित काले एवं लाल पात्रों का प्रयोग करता था।
ये आम तौर पर सफेद रंग के पुते होते थे तथा उस काल में ताम्बा धातु का प्रयोग भी प्रचलित था।
➤ कुछ शताब्दियों के बाद आहड़ (आधार नगरी) में ईसा पूर्व ही मानव पुनः आबाद हुआ जिसका सम्बन्ध कुषाणकालीन युग से मेल खाता है।
➤ पुरातत्ववेताओं ने आहड़ के समीप टीले पर हुई खुदाई के अवशेषों के आधार पर हड़प्पा एवं मोहन जोदड़ों की सभ्यता से इस नगर का सम्पर्क रहा होना सिद्ध किया है।
➤ मेवाड़ रियासत देश की प्राचीनतम रियासतों में से है।
➤ जहां ईसा पश्चात छठी शताब्दी में गुहिलवंशियों का शासन रहा, जिनका यश एवं कीर्ति पताकाएं दूर-दूर तक फैली हुई थी।
➤ पौराणिक वंशावली के अनुसार मेवाड़ का राजवंश सूर्यवंशी माना गया है, इतिहासविदों के अनुसार गुहिलवंशी भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज है।
➤ कुछ शिलालेखों एवं प्राचीन सिक्कों के अनुसार गुहिलों के आदि पुरूष गुहदत्त थे जबकि कर्नल टाॅड ने विक्रम संवत 1034 के शिलालेखों की पंक्ति ‘‘जयति श्री गुहदत्त प्रभवः’’ श्री गुहिलवंशस्य के आधार पर गुहदत्त से पूर्व गुहिलवंश का अस्तित्व सिद्ध किया है।
➤ गुहदत्त का छठी शताब्दी में मेवाड़ पर शासन रहा। उन्हीं के नाम के आधार पर यहां के शासक गुहिलवंशी अथवा गहलोत वंशी कहलाए।
➤ मेवाड़ में भी योद्धा रियासती सेना के महत्वपूर्ण अंग थे।
➤ सूर्यवंशी क्षत्रियों के इस राजवंश की धर्म के प्रति अगाध श्रद्धा थी एवं सम्मान रहा इसीलिए मेवाड़ के राजचिन्ह में एक तरफ राणा तो दूसरी तरफ तीर कमान लिए भील तथा इसके नीचे नीति वाक्य अंकित है।
➤ ‘‘जो दृढ़ राखे धर्म को तिहि राखें करतार’’ इसका आशय है कि -संसार का कर्ता परमात्मा उसी की रक्षा करता है, जो अपने कर्तव्य (धर्म) पर दृढ़ रहता है।
➤ मेवाड़ के अधिपति (श्रद्धावश) ‘‘एकलिंगजी-शिव’’ माने गए हैं।
➤ राज सत्ता संचालित करने वाले शासकगण अपने आपको एकलिंगजी का ‘‘दीवाण’’ (मंत्री) मानते हैं।
➤ इसी मान्यता के आधार पर सभी राजकीय दस्तावेजों तथा ताम्रपत्रों पर ‘श्री एकलिंगजी प्रसातातु तथा दीवाणजी आदेशात’ अंकित रहते थे।
➤ मातृभूमि की रक्षार्थ त्याग, बलिदान एवं शौर्य की अनुपम मिसाल महाराणा प्रताप के पिता एवं पन्नाधाय द्वारा रक्षित महाराणा उदयसिंह ने सन् 1559 में उदयपुर नगर की स्थापना की।
➤ उदयपुर शहर का नामकरण इसीलिए उदयसिंह के नाम पर किया गया।
➤ लगातार मुगलों के आक्रमणों से सुरक्षित स्थान पर राजधानी स्थानान्तरित किए जाने की योजना से इस नगर की स्थापना हुई।
➤ सन् 1572 में महाराणा उदयसिंह की मृत्यु के बाद उनके पुत्र प्रताप का राज्याभिषेक हुआ।
➤ उन दिनों एक मात्र यही ऐसे शासक थे जिन्होंने मुगलों की अधीनता नहीं स्वीकारी। महाराणा प्रताप एवं मुगल सम्राट अकबर के बीच हुआ हल्दीघाटी का घमासान युद्ध मातृभूमि की रक्षा के लिए इतिहास प्रसिद्ध रहा है।
➤ देश के आजाद होने से पूर्व रियासती जमाने में गुहिल वंश के अंतिम शासक महाराणा भोपालसिंह थे। जो राजस्थान के एकीकरण के समय सन् 30 मार्च 1949 में राज्य के महाराज प्रमुख रहे।
➤ सन् 1948 में संयुक्त राजस्थान राज्य बनने के साथ पूर्व रियासती ठिकानों को मिला कर उदयपुर जिले का गठन हुआ।

उदयपुर (udaipur) — दर्शनीय स्थल

➤ अद्वितीय सौन्दर्य एवं प्राकृतिक छटा से सुसज्जित उदयपुर को पूर्व का वेनिस, झीलों की नगरी, राजस्थान का कश्मीर आदि अनेक विशेषण दिए गए हैं।
➤ सुन्दर पर्वतमालाओं के मध्य अवस्थित शहर नीले जल से युक्त झीलों में अपनी परछाई निहारते हुए यहां के राजप्रासाद, शीतल समीर के झोंकों से सम्पूर्ण वातावरण को सुवासित करने वाले यहां के पुष्पोद्यान और मेवाड़ के शौर्यपूर्ण अतीत का स्मरण कराने वाले यहां के अवशेष निस्संदेह रूप से उदयपुर को पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाते हैं।

उदयपुर (udaipur) — राजमहल

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➤ पिछोला झील के तट पर स्थित ये महल उदयपुर नगर में सबसे ऊंचे स्थान पर स्थित ये महल इतने भव्य और विशाल है कि प्रसिद्ध इतिहासकार फग्र्यूसन ने इन्हें ‘राजस्थान के विण्डसर महलों’ की संज्ञा दी।
➤ महलों में सबसे पुराना भाग ‘रायआंगन’ नौचैकी, धूणी आदि को महाराणा उदयसिंह ने बनवाया था। इन महलों से नगर का विहंगम और पिछोला झील का अत्यन्त सुन्दर दृश्य दृष्टिगोचर होता है।
➤ इन महलों के प्रताप कक्ष, बाड़ी महल, दिलखुश महल, मोती महल, भीम विलास, छोटी चित्रशाला, स्वरूप चैपाड़, प्रीतम निवास, शिवनिवास, इत्यादि बहुत सुन्दर व दर्शनीय है।
➤ राजमहल में मयूर चैक का सौन्दर्य अनूठा है।
चारों ओर कांच की बड़ी बारीकी एवं कौशल से जमाकर मोर और कुछ मुर्तियां बनाई गई हैं। यहां बने पांच मयूरों का सौन्दर्य देखते ही बनता है।
➤ प्रताप कक्ष में महाराणा प्रताप के जीवन से संबधित अनेकों चित्र, अस्त्र-शस्त्र, जिरह-बख्तर, इत्यादि का संग्रह है।
➤ यहीं महाराणा प्रताप का ऐतिहासिक भाला रखा है जिससे हल्दीघाटी के युद्ध में उपयोग किया गया था।

उदयपुर (udaipur) — लेक पैलेस

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➤ यह महल सन् 1746 में महाराणा जगतसिंह द्वितीय ने बनवाया।
➤ लगभग चार एकड़ में फैले इस महल के चारों ओर जल है, जिसके कारण विश्व के सुन्दर महलों में इसकी गणना की जाती है।
➤ महल की दीवारों पर बेजोड़ चित्रकारी नयनाकर्षक है। वर्तमान में यहां भारत के सर्वश्रेष्ठ होटलों में से लेक पैलेस होटल है।

उदयपुर (udaipur) — जनान महल

➤ राजमहल के दक्षिण में एक मध्यकालीन भवन है जो मेवाड़ के महाराणा कर्णसिंह की महारानियों हेतु सन् 1620 में निर्मित किया गया था।
➤ महल के अन्दर एक विशाल प्रांगण है। महल के ऊपर बनी जालीदार खिड़कियों से हवा और प्रकाश तो मिल ही जाता था, साथ ही रनिवास का पर्दा भी हो जाता था।
➤ जनानी ड्योढी से गुजर कर बाएं हाथ की ओर रंगमहल में पहुंचा जाता है जहां राज्य का सोना-चांदी और खजाना रखा जाता था, बाई ओर पीताम्बर रायजी, गिरधर गोपालजी तथा बाणनाथजी की मूर्तियां है।
➤ द्वितीय द्वार पत्थरों से जड़े विशाल प्रांगण लक्ष्मी चौक में खुलता है। इस चौक के दोनों ओर छतरियां वाले सुसज्जित भवन है। दक्षिणी छोर महारानी के अतिथियों के लिए था।

उदयपुर (udaipur) — राजकीय संग्रहालय

➤ राजमहल के ही एक हिस्से में राज्य सरकार का संग्रहालय है।
➤ इस संग्रहालय में ऐतिहासिक एवं पुरातत्व संबंधी साम्रगी का सम्पन्न संग्रह है।
➤ भारत के विभिन्न प्रदेशों में पहने जाने वाली पगड़ियों व साफों के नमूने, सिक्के, उदयपुर के महाराणाओं के चित्र, अस्त्र-शस्त्र व पोशाकों के संग्रह के साथ-साथ शहजादा खुर्रम की वह ऐतिहासिक पगड़ी भी है जो मेवाड़ के तत्कालीन महाराणा की दोस्ती में अदला-बदली की गई थी।

➤ उदयपुर के आस-पास के भागों में खुदाई में प्राप्त मूर्तियों एवं शिलालेखों का भी यहां अच्छा संग्रह है।

उदयपुर (udaipur) — जगदीश मंदिर

➤ यह मंदिर राजमहलों के पहले मुख्य द्वार बड़ीपाल से लगभग 175 गज की दूरी पर स्थित है।
इसका निर्माण सन् 1651 में महाराणा जगतसिंह प्रथम (1628-59) द्वारा हुआ था।
➤ अनुमानतः इस पर 15 लाख रुपया व्यय हुआ था। यह 80 फुट ऊंचे प्लेटफार्म पर निर्मित है। मंदिर में काले पत्थर से निर्मित भगवान जगदीश की भव्य मूर्ति है।

उदयपुर (udaipur) — पिछोला झील

➤ इस झील को चैदहवीं शताब्दी में एक बनजारे द्वार महाराणा लाखा के समय में बनवाया गया था।
➤ कालान्तर में उसके पुननिर्माण एवं जीर्णाेद्धार भी हुए हैं।
➤ उत्तर से दक्षिण तक करीब 4.5 किलोमीटर चैड़ी यह झील 10-15 फुट गहरी है।
➤ इसकी जल क्षमता 41 करोड़ 20 लाख घन फुट है। झील के तट पर बने घाट और मंदिर आकर्षण के केन्द्र हैं।

उदयपुर (udaipur) — फतहसागर

➤ नगर के उत्तर-पश्चिम में करीब 5 किलोमीटर दूर झील सर्वप्रथम सन् 1678 में महाराणा जयसिंह द्वारा बनवाई गई थी, परन्तु एक बार की अतिवृष्टि ने इसे तहस नहस कर दिया।
➤ उसके पुननिर्माण का श्रेय महाराणा फतेहसिंह को है जिन्होंने 6 लाख रुपयों की लागत से इस सशक्त बांध का निर्माण करवाया, उन्हीं के नाम पर झील को फतहसागर कहा जाने लगा।
➤ यह झील तीन वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है।

उदयपुर (udaipur) — नेहरू गार्डन

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➤ फतहसागर के मध्य में समुद्रतट से लगभग 1960 फुट ऊंचाई पर स्थित यह उद्यान अधिकतम 779 फुट लम्बा, 292 फुट चैड़ा है तथा साढ़े चार एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।
➤ उद्यान में पहुंचने के लिए झील के किनारे से नियमित नौका सेवा की व्यवस्था उपलब्ध है।
इस उद्यान के फव्वारें मैसूर के वृन्दावन उद्यान की तरह है।
➤ रात्रि में रंगीन प्रकाश व्यवस्था से ये ऐसे दृष्टिगोचर होते हैं मानों धरती के वृक्ष से रंगों की सहस्त्रों धाराएं प्रस्फुटित हो रही हों।
➤ फतहसागर झील के मध्य किनारे से कुछ दूर एक छोटे से टापू पर एक विशाल जेट फव्वारा भी लगाया गया है।

उदयपुर (udaipur) — महाराणा प्रताप स्मारक (मोती मगरी)

➤ फतहसागर के किनारे पहाड़ी मोती नगरी को महाराणा प्रताप स्मारक के रूप में विकसित किया गया है।
➤ मोती नगरी का बड़ा ऐतिहासिक महत्व है। उदयपुर के संस्थापक महाराणा उदयसिंह उदयपुर नगर के बसाने के पूर्व इसी पहाड़ी ‘‘मोती महल’’ बनवा रहे थे, जिनके भग्नावेष आज भी विद्यमान है।
➤ इन्हीं खण्डहरों के पास चेतक पर सवार प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप की भव्य मूर्ति स्थापित की गई है।
➤ फूलदार पौधों की क्यारियां, फव्वारों से युक्त जलाशय एवं छोटे-बड़े सुन्दर लाॅन इस स्मारक की भव्यता की श्रीवृद्धि करते हैं।

उदयपुर (udaipur) — गुरू गोविन्दसिंह चट्टान बाग

➤ फतहसागर के सर्पाकार मार्ग पर पहाड़ी को कांट-छांट कर एक सुन्दर उद्यान बनाया गया है जिसे चट्टान बाग कहते है।
➤ इस उद्यान से सम्पूर्ण झील का दृश्य बड़ा ही सुन्दर दिखाई देता है। यहां से सूर्यास्त अत्यधिक आकर्षक एवं सुन्दर दिखाई देता है।
➤ इसी के पास से नेहरू उद्यान के लिए नावें जाती है। समीप ही जापानी उद्यान पद्धति के आधार पर एक सुन्दर ‘भामाशाह उद्यान’ भी है।

उदयपुर (udaipur) — पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र

➤ भारतीय संस्कृति, लोककला तथा परम्पराओं के संरक्षण एवं उन्हें पुनर्जीवित करने हेतु चार राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा व राजस्थान का पश्चिमी सांस्कृतिक केन्द्र पिछोला के तट गणगौर घाट पर स्थित बागोर की हवेली में स्थापित किया गया है।

उदयपुर (udaipur) — उदयसागर

➤ उदयपुर के पूर्व में लगभग 13 किलोमीटर दूरी पर स्थित इस झील का निर्माण उदयपुर के संस्थापक महाराणा उदयसिंह ने सन् 1559 से सन् 1565 के मध्य करवाया था।
➤ झील लगभग 4 किलोमीटर क्षेत्र में फैली है।

उदयपुर (udaipur) — सहेलियों की बाड़ी

➤ यह उदयपुर का सुन्दरतम उद्यान है। महाराणा संग्रामसिंह द्वितीय ने इसका निर्माण तथा महाराणा फतहसिंह ने इसका पुननिर्माण करवाया था।
➤ कहा जाता है कि यहां राजकुमारियां अपनी सहेलियों के साथ मनोरंजन के लिए आती थी। इसीलिए इसे सहेलियों की बाड़ी कहा जाता है।
➤ यहां फव्वारों की इतनी सुन्दर व्यवस्था है कि ग्रीष्म ऋतु की तपती दोपहरी में भी सावन का सा आनन्द प्राप्त होता है।
➤ सहेलियों की बाड़ी में प्रवेश करते ही केन्द्रीय हौज के चारों ओर काले संगमरमर की छतरियां है तथा मध्य में श्वेत संगमरमर की बड़ी छतरी बनी है।
➤ हौज तथा छतरियों में फव्वारें लगे हैं। इसके पीछे संगमरमर के चार गज निर्मित है तथा जलाशय के मध्य एक सुन्दर फव्वारा है। यहां बच्चों की एक रेलगाड़ी भी है।

उदयपुर (udaipur) — सुखाड़िया सर्किल

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➤ पश्चिम रेलवे ट्रेनिंग स्कूल के समक्ष स्थित सुखाड़िया सर्किल के मध्य में निर्मित 42 फुट ऊंचा फव्वारा देश में अपने ढंग का अनोखा है।
➤ फव्वारे के ऊपरी भाग में विशाल गेहूं की बाली बनाई गई है।
सर्किल के एक कोने पर आधुनिक राजस्थान के निर्माता पूर्व मुख्यमंत्री स्व. श्री मोहनलाल सुखाड़िया की प्रतिमा के पास उद्यान भी बनाया गया है।
➤ जिले में उपरोक्त दर्शनीय स्थलों के अलावा यहां गुलाब बाग, संजयपार्क, सज्जनगढ़ महल, सौर वैधशाला आदि भी है।

उदयपुर (udaipur) — मेले एवं त्योहार

➤ जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के सांस्कृतिक, धार्मिक तथा सामाजिक जीवन में मेले और त्योहारों की विशेष भूमिका है। अधिकांश मेले सामान्यतः मौसमी तथा धार्मिक है।
➤ व्यावसायिक तथा पर्यटन की दृष्टि से पिछले कुछ वर्षों में इनका महत्व और भी बढ़ गया है।
इन मेलों में आज भी लोगों को पहले जैसा आनन्द और मनोरंजन की अनुभूति होती है तथा इनसे स्थानीय निकाय को आय होती है।
➤ प्रमुख मेलों में नाथद्वारा का अन्नकूट का मेला, एकलिंगजी का शिवरात्रि का मेला, उदयपुर नगर का गणगौर मेला, चावंड की प्रताप जयन्ती, चारभुजाजी का मेला, रिखबदेव में दशहरा का मेला आदि महत्वपूर्ण मेलें हैं।
➤ राज्य के अन्य भागों की तरह यहां भी हिन्दुओं के प्रमुख त्योहार दीपावली, होली, दशहरा, गणगौर, तीज, रक्षाबन्धन, मकर संक्रान्ति तथा जन्माष्टमी है। मुसलमान समुदाय द्वारा ईद, ईदुलफितर, ईदुल जुहा तथा रमजान त्योहार प्रमुख रूप से मनाएं जाते हैं।

udaipur District GK in Hindi उदयपुर जिला Rajasthan GK in Hindi

 

Udaipur: History, Geography, Places

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Location, Area & Administration:

Udaipur, more famous as City of Lakes & Venice of East is 24.58 degrees N. latitude and 73.68 degrees E. Longitude. Udaipur is bordered by Rajsamand  district in north, Chittorgarh & Pratapgarh district in the east,  Banswara District in the southeast by, Dungarpur in south and Gujarat is south-east direction, Sirohi in West & Pali in North-west.

Udaipur has an area of 13,883 square kms which has been divided into 12 tehsils namely: Mavli , Gogunda, Kotda, Jhadol, Girwa, Vallabhnagar, Lasadiya, Salumber, Sarada, Rishabhdeo, Kherwara & Semari.

History of Udaipur:

The present city of Udaipur as founded in 1559 by Maharana Udai Singh II as a new capital of the Mewar kingdom. However, the history of Udaipur is of considerable antiquity in form AHAR civilization that flourished in the vicinity of Berach River.

The Ahar culture, also known as the Banas culture is a Chalcolithic archaeological culture of southeastern Rajasthan state in India, lasting from c.3000 to 1500 BCE, contemporary and adjacent to the Indus Valley Civilization. Situated along the Banas and Berach Rivers, as well as the Ahar River, the Ahar-Banas people were exploiting the copper ores of the Aravalli Range to make axes and other artefacts. They were sustained on a number of crops, including wheat and barley.

The present city of Udaipur was founded in 1559 by Maharana Udai Singh II  in the fertile circular Girwa Valley to the southwest of Nagda, on the Ahar River. In November 1567, the Mughal emperor Akbar laid siege to the venerated fort of Chittor. To protect Udaipur from External attacks, Maharana Udai Singh built a six kilometre long city wall, with seven gates, namely Surajpole, Chandpole, Udiapole, Hathipole, Ambapole, Brahmpole and so on. The area within these walls and gates is still known as the old city or the walled city.

As the Mughal empire weakened, the Sisodia rulers, reasserted their independence and recaptured most of Mewar except for Chittor. Udaipur remained the capital of the state, which became a princely state of British India in 1818.

Rulers of Udaipur:

Rana’s before Rana Udai SIngh II appear in genealogy of Chittorgarh as Chittorgarh was the previous seat of Government. Both Chittorgarh & Udaipur form part of State of Mewar. The subsequent rulers, when seat of government was Udaipur are mentioned as under:

  • Udai Singh II (1540–1572)
    • 1540, he was crowned in Kumbhalgarh by the nobles of Mewar.
    • Maharana Pratap born in same year (9th May-1540)
    • In 1562, he gave refuge to Baz Bahadur of Malwa. Using this as a pretext, Akbar attacked Mewar in October 1563.
    • Udai Singh retired to Gogunda.
    • Rao Jaimal & Patta – fought with Valor – even Akbar impressed – statute erected at Fatehpur Sikri
    • Jauhar- 3rd Jauhar of chitter (1568)
    • Founded city of Udaipur.
  • Maharana Pratap(9th May 1540- 29 Jan 1597)
    • Pratap Jayanti, is celebrated annually on the 3rd day of the Jyestha Shukla.
    • 1576-Akbar deputed Man Singh I against Maharana Pratap – 18 June 1576- Battle of Haldighati – Pratap defeated.
    • Slowly, Pratap recovered many of the territories , made Chavand
    • Tod, the famous British antiquarian, gave Pratap the title of ‘Leonidas of Rajasthan’.
  • Amar Singh I (1597-1620)
    • Born 1559, same year as Udaipur foundation laid by Udai Singh.
    • Amar Singh fought with Jehangir
    • Battle of Dewar – showed great bravery – killed commander sultan.
    • Finally, made peace with Jehangir – treaty negotiated by Shah Jehan – Amar Singh was relieved of making in person presence to Mughal court.
  • Karan Singh II (1620–1628)
  • Jagat Singh I (1628–1652)
    • Made jag Mandir in Lake Pichola
  • Raj Singh I (1652–1680)
    • Made Rajsamand
  • Jai Singh (1680–1698)
    • Treaty with Aurangzeb
    • Made Lake Jaisamand
  • Amar Singh II (1698–1710)
  • Sangram Singh II (1710–1734)
  • Jagat Singh II (1734–1751)
  • Pratap Singh II (1751–1754)
  • Raj Singh II (1754–1762)
  • Ari Singh II (1762–1772)
  • Hamir Singh II (1772–1778)
  • Bhim Singh (1778–1828)
  • Jawan Singh (1828–1838)
  • Shambhu Singh (1861–1874)
    • Adopted son of Maharana Swarup Singh
    • He was the first to set up a school for girls and thus promoted opportunities of education for everyone.
    • He enforced special measures to curb the Sati pratha
  • Sajjan Singh (1874–1884)
    • Cousin – was adopted by Maharana Shambhu Singh.
  • Fateh Singh (1884–1930)
    • Adopted by Sajjan Singh
    • Built Cannuaght dam on Lake Dewali – now named FatehSagar
    • Built Fateh Prakash Palace in Chittorgarh fort
    • Only Maharaja to not attend the Delhi Durbar, both of 1903 and 1911.
  • Bhupal Singh (1930–1947)
    • On 28 July 1921, following some social unrest in Mewar, Fateh Singh was formally deposed – Bhupal Singh made ruler.
    • On 18 April 1948 he became Rajpramukh of Rajasthan and from 1 April 1949 his title was raised to Maha Rajpramukh.

Historical Places of Udaipur:

Udaipur City Palace:Citypalace

City Palace, Udaipur, was built over a period of nearly 400 years, with contributions from several rulers of the Mewar dynasty. Construction began in 1553, started by Maharana Udai Singh II of the Sisodia Rajput family as he shifted his capital from the erstwhile Chittor to the new found city of Udaipur.

Lake Palace:taj_lake_palace

Now a hotel, The Lake Palace was originally called Jag Niwas Palace and served as a summer palace. Built between 1743 and 1746 on the island near Jagmandir Palace in Lake Pichola, the palace, which faces east, is a wondrous sight to behold. The walls made of black and white marbles are adorned by semi-precious stones and ornamented niches. Gardens, fountains, pillared terraces and columns line its courtyards.

Jag Mandir:jagmandir

Jag Mandir is a palace built on an island on the Lake Pichola. Also called the ‘Lake Garden Palace’, the construction for this began in 1551 and was completed around 1652. The royal family used the palace as its summer resort and for hosting parties. Interestingly, Prince Khurram – later Emperor Shah Jahan – was given shelter here when he rebelled against his father Emperor Jahangir. The palace had such an impact on Emperor Shah Jahan that it went on to become the inspiration for one of the most magnificent Wonders of the World, the Taj Mahal.

Monsoon Palace (SajjanGarh)badal

This 19th century palace is built by  Maharana Sajjan Singh on top of Bansdara Mountain . Built with white marble, the palace offers a panoramic view of the city’s lakes, palaces and surrounding countryside.

Jagdish Temple:

Jagdsih templeAn example of the Indo-Aryan style of architecture, Jagdish Temple was built in 1651 and continues to be one of the most famous temples in Udaipur. Dedicated to Lord Vishnu, the structure is an architectural marvel with carved pillars, graceful ceilings and painted walls. This three-storied temple was built by Maharana Jagat Singh.

Ahar Musuem:

Ahar Museum is in close proximity to an impressive cluster of cenotaphs of the Maharanas of Mewar. The museum has a small, but rare collection of earthen pottery. You can also browse through sculptures and archaeological finds, a few dating back to 1700 BC. A 10th century metal figure of Buddha is a special attraction here.

Udaipur Fairs & Festivals:

The dynamic and vibrant dances of Bhavai, Ghoomar, Kachchhi Ghodi, Kalbeliya and Terahtaali add a sparkle to the rich cultural heritage of Udaipur.

  • Ghoomar dance is a part of the tribal culture of the Mewar Region of Rajasthan. This is a community dance for women and performed on auspicious occasions where the ladies move gracefully in circles.
  • Kalbelia, one of the most sensuous dance forms of Rajasthan, is performed by the Kalbeliya snake charmers’ community with the sapera dancers wearing long, black skirts embroidered with silver ribbons.
  • Bhavai dance consists of veiled women dancers balancing up to seven or nine brass pitchers as they dance nimbly, pirouetting and then swaying with the soles of their feet perched on the top of a glass or on the edge of the sword
  • Kachchhi Ghodi dance dance is performed on dummy horses where men in elaborate costumes ride the equally well decorated dummy horses. Holding naked swords, these dancers move rhythmically to the beating of drums and fifes.

Gangaur Festival

Gangaur is one of the most important local festivals in Rajasthan. It is celebrated in the month of Chaitra (March–April), the first month of the Hindu calendar.  On the eve of Gangaur festival, women decorate their palms and fingers with henna. Udaipur has the privilege of having a dedicated Ghat named after Gangaur. Gangaur Ghat or Gangori Ghat is situated on the waterfront of Lake Pichola. This ghat servers as prime location for celebration of multiple festivals, including Gangaur festival. The idols of Gan and Gauri are immersed in the Lake Pichola from this ghat.

A traditional procession of Gangaur commences from the City Palace which passes through various areas of the city. The procession is headed by an old palanquins, chariots, bullock carts and performance by folk artistes.

Shilpgram Utsav

Shilpgram, a crafts village 3 km west of Lake Fateh Sagar, has displays of traditional houses from Rajasthan, Gujarat, Goa and Maharashtra. There are also demonstrations by musicians, dancers, or artisans from these states. The 10-day festival organised here in the month of December-January which is a treat for the visitor to an array of exquisite art and craft.

Hariyali Amavasya

Hariyali Amavasya (new moon day of the Sawan / Shravan month) marks the beginning of the monsoons and greenery. It arrvies three days before the famous Hartalika Teej (Shravan Shukla Tritiya). People worship God Shiva for abundant rains and good agricultural season. Melas and fests are arranged in several places in the city.

Jagannath Rath Yatra

In Udaipur, the third biggest Ratha-Yatra is organised on the auspicious day of Ashadh Shukla Paksha (bright fortnight) Dwitiya according to Indian Vikram Samvat.

Jal-Jhulni Ekadashi

According to the Hindu calendar, Gyaras, or Ekadashi is basically, the 11th day of each waxing (Shukla paksha ) and waning moon (Krishna paksha). This ekadashi, known as Jal-Jhulni Gyaras, or Jal-Jhulni Ekadashi, like all other festivals, is celebrated with great enthusiasm in Udaipur.

Geography of Udaipur:

Udaipur with its lakes lies on the south slope of the Aravalli Range in Rajasthan. The Northern part of the district consists generally of elevated plateaus, while the eastern part has vast stretches of fertile plains. The southern part is covered with rocks, Hills and dense Forest. There are two important passages in the Aravali ranges viz. Desuri Nal and Saoke which serves as a link between Udaipur and Jodhpur District.

The Udaipur Lake System can be divided into the following categories:

  • Upper lakes: Lake Badi, Chhota Madar & Bada Madar.
  • City Lakes: Lake Pichola, Fateh Sagar Lake, Swaroop Sagar, Rang Sagar, Kumharia Talab, Goverdhan Sagar.
  • Downstream Lake: Udaisagar Lake.
  • River: Ahar River.

Natural Places of Udaipur:

Doodh Talai, Udaipurdoodh-talai

The road that takes visitors to Pichola Lake has another popular destination – the Doodh Talai Lake. The lake is nestled between several small hillocks which themselves are tourist attractions. The Deen Dayal Upadhyay Park and the Manikya Lal Verma Garden are part of the Doodh Talai Lake Garden.

Fateh SagarLake, Udaipurfateh-sgar

This delightful lake, bordered by hills and woodlands, lies to the north of Lake Pichola. This artificial lake is connected to Lake Pichola by a canal. The lake houses the beautiful Nehru Island as well as an islet on which stands the Udaipur Solar Observatory. It was inaugurated by the Duke of Connaught and was initially called Connaught Bundh.

Jaisamand Lake, Udaipurjaisamand

Jaisamand Lake is known for being the second largest man-made sweet water lake in Asia. It is popular among the locals as a weekend picnic destination. Locals say that the lake was constructed to halt the waters of Ruparel River. This lake boasts of a large island, which is home to various species of birds, at its centre.

Pichola Lake, Udaipurpichola

Pichola was the name of a village that was submerged and lent its name to the lake when it was expanded. The islands of Jag Niwas and Jag Mandir as housed in this lake. Along the eastern banks of the lake lies the City Palace. A boat ride in the lake around sunset offers a breathtaking view of the Lake and City Palaces.

Udai Sagar Lake, Udaipurudaisagar

Udai Sagar Lake is one of the five striking lakes situated in Udaipur. Located about 13 kilometres to the east of Udaipur, the construction of this lake was started in 1559 by Maharana Udai Singh. The lake is actually a result of a dam being built on the river Berach to supply adequate water to the Maharana’s kingdom. Udai Sagar Lake is 4 kms in length, 2.5 kilometres in width and about 9 meters at its deepest.

Sajjangarh Biological Park

Located within parameters of city boundary, Sajjangarh wildlife park has different varieties of animals and birds which have been brought from different parts of world. At present, it houses 60 animals of 21 species including tigers, panthers, lions, ostriches, alligators, rhesus monkeys etc

Natural Resources of Udaipur:

The mining activity in the Udaipur is known since 14th century when the mining and smelting of lead and zinc was started in Zawar area.

The district is endowed with metallic as well as non metallic mineral wealth, the important are lead-zinc, copper, rock phosphate, soapstone, limestone, barytes, marble etc. In the field of gemstones, the district has shown potential for emerald. It is the leading producer of rock phosphate in the country. Among other minerals like lead-zinc, soapstone, green and pink marble, it has an important place. In the state, Udaipur district holds Ist position as far as the sale value of mineral production is concerned and is the IInd mineral revenue earning district.

Population:

According to the 2011 census, the total urban population of Udaipur district was 608,426. and the population density was 262/km2.

udaipur District GK in Hindi उदयपुर जिला Rajasthan GK in Hindi 

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Rajasthan Gk In Hindi Series 105

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 Rajasthan Districts wise General Knowledge

1. अजमेर  6. भरतपुर  11. चित्तौड़गढ़  16. हनुमानगढ़  21. झुंझुनूं  26. पाली  31. सिरोही 
2. अलवर  7. भीलवाड़ा 12. दौसा  17. जयपुर  22. जोधपुर  27. प्रतापगढ़  32. टोंक
3. बांसवाड़ा  8. बीकानेर  13. धौलपुर  18. जैसलमेर  23. करौली  28. राजसमंद  33. उदयपुर 
4. बारां  9. बूंदी  14. डूंगरपुर  19. जालोर  24. कोटा  29. सवाई माधोपुर 
5. बाड़मेर  10. चुरू  15. गंगानगर  20. झालावाड़  25. नागौर  30. सीकर 

Q.1161 निम्न में से कौनसी फसल “रबी” की है
A. खरबूजा
B. मोठ
C. तारामीरा
D. बाजरा
ANS: CQ.1162 Total National park in Rajasthan are ?
A. 3
B. 4
C. 5
D. 6
Ans: AQ.1163 “जोजोबा” क्या है ?
A. फसल
B. वस्त्र
C. पेड़
D. अफ्रीका का देश
Ans: A

Q.1164  जमनापरी किसकी नस्ल है ?
A. गाय
B. भैंस
C. बकरी
D. भेड़
Ans: C

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Rajasthan Gk In Hindi Series 102

Q.1165 निम्न में से कौनसी फसल “खरीब” की है ?
A. खरबूजा
B. मोठ
C. तारामीरा
D. चना
ANS: B

Q.1166 उड़न गिलहरी किस अभ्यारण में पाई जाती है?
A. कुम्भलगढ़
B. सीतामाता
C. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान
D. फुलवारी की नाल
Ans: B

Q.1167 राजस्थान  में गधों का मेला कहाँ लगता है?
A. ब्यावर
B. फलोदी
C. लुनियावास
D. बहरोड़
Ans: C

Q.1168 निम्न में से कौनसी फसल “जायद” की है?
A. खरबूजा
B. मोठ
C. तारामीरा
D. चना
ANS: A

Q.1169 कृषि महाविद्यालय लालसोट किस जिले में स्थित है?
A. उदयपुर
B. जयपुर
C. दौसा
D. बीकानेर
Ans: C

Q.1170 मुर्रा, सूरती , जाफराबादी किसकी नस्ल है
A. गाय
B. भैंस
C. बकरी
D. घोडा
Ans: B

Q.1171 राजस्थान में सर्वाधिक सिंचाई किससे की जाती है

  1. कुओं – नलकूपों
  2. तालाब
  3. नहरों
  4. नदी

Ans: A

Q.1172 मतस्य प्रशिक्षण विद्यालय कहाँ स्थित है ?

  1. उदयपुर
  2. जयपुर
  3. अलवर
  4. कोटा

ANS: A

Q.1173 AFRI is situated at ?

  1. Jaisalmer
  2. Jodhpur
  3. Bikaner
  4. Udaipur

Ans: B

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Q.1174 राजस्थानी में रोजड़ा किसे कहते है ?

  1. एक पशु
  2. एक फसल
  3. एक राजस्थानी लोकगीत
  4. एक पक्षी

ANS: A

Q.1175 Which dam of chambal is not used for Power Generation ?

  1. Gandhi Sagar
  2. Kota Barrage
  3. Rana Pratap Sagar
  4. Jawahar Sagar

Ans: B

Q.1176 पहली आंवला नर्सरी कहाँ स्थित है ?

  1. उदयपुर
  2. जयपुर
  3. अलवर
  4. अजमेर

ANS: D

Q.1177 गंगनहर परियोजना का निर्माण कार्य कब समाप्त हुआ ?

  1. 1921
  2. 1927
  3. 1947
  4. 1961

Ans: B

Q.1178 राजस्थान की मरुशोभा किसे कहते है ?

  1. खेजड़ी
  2. खेर
  3. रोहिडा
  4. गोडावन

ANS: C

Q.1179 As per Jawaharlal Nehru which is “New Temple of Resurgent India”

  1. Bhakhada dam
  2. Indira gandhi canel
  3. Dwarkadhis temple
  4. Tirupati Balaji temple

Ans: A

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Q.1180 “थार का घड़ा” किसे कहा जाता है ?

  1. इंदिरा गाँधी नहर
  2. गंगनहर
  3. गघर नदी
  4. चन्दन नलकूप

ANS: D

Rajasthan GK Sample Question Paper No. 38
Q.1181 Frozen seamon Bank is situated at ?
A. Bassi
B. Ramsar
C. Avikapur
D. Malpura
Ans: A

Q.1182 Highest dam in India is ?
A. Bhakara Dam
B. Tihari Dam
C. Nagarjuna sagar dam
D. Nangal Dam
Ans: B

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Q.1183 मोल्या रोग किसमे होता है ?
A. गेंहू-जो
B. भेड़
C. सरसों
D. मुंग
Ans: A

Q.1184 Relay Cropping is ?
A. Three crops in a year in a field
B. Four crops in a year in a field
A. Single crop in a year in a field
A. Leaving black field for 1 Year.
Ans: B

Q.1185 बजाज सागर बांध किस नदी पर बना है ?
A. चम्बल
B. बनास
C. माही
D. सतलुज
ANS: C

Q.1186 Which crop is Known as “Delight of Diabitic” ?
A. Mushroom
B. Groundnut
C. Kharbuja
D. Tarbooj
Ans: A

Q.1187 Indira Gandi canel starts from ?
A. Harike dam
B. Bhakhra dam
C. Nagal dam
D. Gandhi sagar
Ans: A

Q.1188 जवाहर सागर बांध किस नदी पर  बना है ?
A. चम्बल
B. बनास
C. माही
D. सतलुज
ANS: A

Q.1189 इंदिरा गाँधी पर कितनी लिफ्ट नहरें है ?
A. 6
B. 7
C. 5
D. 10
Ans: B

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Q.1190 भाखड़ा-नांगल सागर बांध किस नदी पर बना है ?
A. चम्बल
B. बनास
C. व्यास
D. सतलुज
ANS: D

Rajasthan GK Sample Question Paper No. 39
Q.1191 किस बांध से इंदिरा गाँधी नहर को शीतकाल में अतिरिक्त जल दिया जाता है ?
A. नांगल बांध
B. पंडोह बांध
C. पोंग बांध
D. बिस्त नहर
ANS: C

Q.1192 गंगनहर परियोजना किस नदी से निकलती है ?
A. लूनी
B. चिनाव
C. व्यास
D. सतलुज
Ans: D

Q.1193 किस प्रकार के खनिज के उत्पादन में राजस्थान का प्रथम स्थान है ?
A. लौह धातु
B. अलौह धातु
C. खनिज-तेल
D. किसी में नहीं
Ans: B

Q.1194 The headquarter of Indian Buerau of Miners is situated at ?
A. Delhi
B. Nagpur
C. Udaipur
D. Hyderabad
Ans: B

Q.1195 किस खनिज के उत्पादन में राजस्थान का प्रथम स्थान है ?
A. जास्पर
B. लौह धातु
C. मार्बल
D. अभ्रक
Ans: A

Q.1196 Ghotaru is known for which mineral?
A. Copper
B. Natural Gas
C. Petroleum
D. Slate Stone
Ans: B

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Q.1197 The headquarter of Mineral Exploration Corporation of India (MECI) is situated at ?
A. Delhi
B. Nagpur
C. Udaipur
D. Hyderabad
Ans: B

Q.1198 मोरीजा-बानोला किस खनिज के उत्पादन के लिए जाना जाता है ?
A. लौह-अयस्क
B. सीसा-जस्ता
C. ताम्बा
D. पेट्रोलियम
ANS: A

Q.1199 “जावर-देबारी” किस खनिज के उत्पादन के लिए जाना जाता है ?
A. लौह-अयस्क
B. सीसा-जस्ता
C. ताम्बा
D. पेट्रोलियम
ANS: B

Q.1200 “डेगाना” किस खनिज के उत्पादन के लिए जाना जाता है ?
A. टंगस्टन
B. सीसा-जस्ता
C. ताम्बा
D. पेट्रोलियम
ANS: A

 

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Rajasthan Gk In Hindi Series 104

Rajasthan Gk In Hindi Series 104 Here we are providing Rajasthan gk in hindi for upcoming exams in rajasthan. rajasthan gk questions with answers in hindi, rajasthan gk hindi, rajasthan gk notes in hindi. Rajasthan Gk in Hindi MCQ DOwnload.

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 Rajasthan Districts wise General Knowledge

1. अजमेर  6. भरतपुर  11. चित्तौड़गढ़  16. हनुमानगढ़  21. झुंझुनूं  26. पाली  31. सिरोही 
2. अलवर  7. भीलवाड़ा 12. दौसा  17. जयपुर  22. जोधपुर  27. प्रतापगढ़  32. टोंक
3. बांसवाड़ा  8. बीकानेर  13. धौलपुर  18. जैसलमेर  23. करौली  28. राजसमंद  33. उदयपुर 
4. बारां  9. बूंदी  14. डूंगरपुर  19. जालोर  24. कोटा  29. सवाई माधोपुर 
5. बाड़मेर  10. चुरू  15. गंगानगर  20. झालावाड़  25. नागौर  30. सीकर 

Q.1 लोक देवता “तेजाजी का प्रतिक” क्या है ?

  1. त्रिशूल
  2. शेर
  3. स्वास्तिक
  4. सर्प

Ans: D

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Q.2 दलहन फसल है ?

  1. ज्वार
  2. अरहर
  3. बाजरा
  4. मक्का

Ans:B

Q.3 RIICO मुख्यालय स्थित है ?

  1. जयपुर
  2. अलवर
  3. कोटा
  4. जोधपुर

Ans: A

 

Q.4 देश में राजस्थान किसका प्रमुख उत्पादक है

  1. चना
  2. गेहू
  3. कपास
  4. सरसों

Ans: D

Q.5 “शीतला माता” मेला कहाँ लगता है

  1. जयपुर
  2. करौली
  3. भरतपुर
  4. कोटा

Ans: A

Q.6 राजस्थान में कुबड़पट्टी कहाँ है

  1. भरतपुर – अलवर
  2. कोटा – बूंदी
  3. बांसवाडा – डूंगरपुर
  4. नागौर – अजमेर

Ans: D

Q.7 कालीबंगा स्थल की खोज सर्वप्रथम किसने की ?

  1. दयाराम साहनी
  2. आर डी बनर्जी
  3. अमलानंद घोष
  4. आरेल स्टीन

Ans: C

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Q.8 पृथ्वीराज राठौड़ किस भाषा में रचनाएं लिखते थे ?

  1. डिंगल
  2. पिंगल
  3. फारसी
  4. संस्कृत

Ans: A

Q.9 महाराणा प्रताप का राजतिलक कहाँ हुआ था ?

  1. उदयपुर
  2. हल्दीघाटी
  3. गोगुन्दा
  4. कुम्भलगढ़

Ans: C

Q.10 क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा संभाग है ?

  1. जयपुर
  2. जोधपुर
  3. अजमेर
  4. उदयपुर

Ans: B

Q.11 महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की समाधी कहाँ है ?

  1. उदयपुर
  2. हल्दीघाटी
  3. गोगुन्दा
  4. कुम्भलगढ़

Ans: B

Q.12 भारत में वीरता के लिए सैनिकों को दिया जाने वाला सवोच्य पुरस्कार कौनसा है।

  1. परमवीर चक्र
  2. अशोक चक्र
  3. वीर चक्र
  4. सेना मैडल

Ans: A

Q.13 मेवाड़ प्रजामंडल की स्थापना किसने की थी

  1. माणिक्यलाल वर्मा
  2. केसरीलाल बारहट
  3. मोहनलाल सुखाडिया
  4. हीरालाल शाश्त्री

Ans: A

Q.14 राजस्थान में केन्द्रीय भेड़ प्रजनन केन्द्र कहाँ स्थित है?

  1. आंबिका नगर
  2. बॉकलियाय
  3. जोड़बीर
  4. फतेहपुर

Ans: A

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Q.15 राजस्थान का जिब्राल्टर किस दुर्ग को कहा जाता है ?

  1. तारागढ़
  2. कुम्भलगढ़
  3. चित्तोड़गढ़
  4. लालगढ़

Ans: A

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Q.16 हल्दीघाटी युद्ध के पीछे अकबर का मुख्य उद्देश्य क्या था?

  1. राणा प्रताप को अपने अधीन लाना
  2. राजपूतों में फूट डालना
  3. मानसिंह की भावना को संतुष्ट करना
  4. साम्राज्यवादी नीति

Ans: A

 

Q.17 राजस्थान के प्रमुख महत्वपूर्ण संसाधन निम्न में से किन स्थानों पर स्थित हैं?

  1. पलाना, आंगूचा और मेड़ता
  2. पलाना, कपूरड़ी और सोनू
  3. कपूरड़ी, मेड़ता और सोनू
  4. कपूरड़ी मेड़ता और पलाना

Ans: B

Q.18 राजस्थान के किस जिले में राज्य सरकार सबसे अधिक पशु मेलों का आयोजन करती है?

  1. बाड़मेर
  2. बीकानेर
  3. नागौर
  4. अजमेर

Ans: C

Q.19 ‘अमेरिकन कपास’ राजस्थान के किस जिले मेँ होती है?

  1. श्रीगंगानगर
  2. उदयपुर
  3. कोटा
  4. अलवर

ANS: A

Q.20 सबसे कम अवधि तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता है ?

  1. हीरालाल देवपुरा
  2. भेरूसिंह शेखावत
  3. अशोक गहलोत
  4. हीरालाल शाश्त्री

Ans: A

Q.21 चित्र कला के लिए प्रसिद्ध संग्रहालय ‘सरस्वती भण्डार’ कहां है ?

  1. उदयपुर
  2. जोधपुर
  3. बूंदी
  4. कोटा

Ans:A

Q.22 सर्वाधिक समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकोर्ड किनके नाम है ?

  1. मोहनलाल सुखाडिया
  2. भेरूसिंह शेखावत
  3. अशोक गहलोत
  4. हीरालाल शाश्त्री

Ans: A

Q.23 धावा डोली अभ्यारण किसके संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है

  1. घड़ियाल
  2. कृष्ण मृग
  3. सर्प
  4. गोडावन

Ans:B

Q.24 “कोठारी नदी” के किनारे बसा एक प्रमुख शहर है

  1. भीलवाडा
  2. पाली
  3. जयपुर
  4. कोटा

Ans: A

Q.25 “फाइसागर” झील कहाँ स्थित है ?

  1. उदयपुर
  2. जोधपुर
  3. अजमेर
  4. बीकानेर

Ans: C

Q.26 महाराणा प्रताप स्मारक कहाँ बना है ?

  1. मोती डूंगरी
  2. सज्जनगढ़
  3. मोती मंगरी
  4. फतेहसागर

Ans: C

  1. 27 “नटनी का चबूतरा” किस झील पर बना है ?
  2. फतेहसागर झील
  3. पिछोला झील
  4. आनासागर झील
  5. सांभर झील

Ans: B

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  1. 28 चित्तौड़ का किला किसने बनवाया था ?
  2. चित्रांगद मौर्य
  3. महाराणा चित्रा
  4. महाराणा कुम्भा
  5. चन्द्रगुप्त मौर्य

Ans: A

  1. 29 वह कौन सा खनिज पत्थर है जो राजस्थान में सर्वाधिक कुल विक्रय मूल्य अर्जित करता है?
  2. चुनाई का पत्थर
  3. चूने का पत्थर
  4. बालू पत्थर
  5. संगमरमर

Ans: D

  1. 30 “कर्क रेखा” राजस्थान के किन जिलों से गुजराती है ?
  2. डूंगरपुर बांसवाडा
  3. जोधपुर बाड़मेर
  4. उदयपुर डूंगरपुर
  5. झालावाड डूंगरपुर

Ans: A

Q.31 पहले आम चुनाव में राजस्थान विधानसभा में कितनी सीटे थी ?

  1. 160
  2. 180
  3. 150
  4. 120

Ans: A

Q.32 “बनेश्वर मैला” कहाँ आयोजित किया जाता है ?

  1. उदयपुर
  2. बाँसवाड़ा
  3. डूंगरपुर
  4. करौली

Ans: C

Q.33 राजस्थान दिवस कब मनाया जाता है ?

  1. 30 मार्च
  2. 31 मार्च
  3. 1 अप्रैल
  4. 30 अप्रैल

Ans:A

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Q.34 “साली”, “साखून”, “दांतरी” है ?

  1. एक प्रकार की रस्म
  2. जयपुर जिले के गाँव
  3. डूंगरपुर जिले में भीलों के काबिले
  4. जायद की फसलें

Ans: B

  1. 35 बाड़मेर प्रिंट किस नाम से जाना जाता है ?
  2. फड
  3. पिछवई
  4. अजरक
  5. बदला

Ans: C

Q.36 तेजाजी का मेला कहाँ आयोजित होता है ?

  1. कुचामन सिटी
  2. मेड़ता सिटी
  3. देशनोक
  4. परबतसर

Ans: D

Q.37 रेगिस्तान का कल्पवृक्ष है

  1. बबूल
  2. बरगद
  3. रोहिडा
  4. खेजड़ी

Ans: D

  1. नेवलों की पूजा किस दिन की जाती है
  2. गुरु पूर्णिमा
  3. निडरी नवमी
  4. योगिनी एकादशी
  5. नेवालाष्टमी

Ans: B

Q.39 संतरा उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान का नागपुर किसे कहा जाता है

  1. गंगानगर
  2. बांसवाडा
  3. कोटा
  4. झालावाड़

Ans: D

Q.40 “कैला देवी” की आराधना में गाये जाने वाले गीत है

  1. लांगुरिया
  2. हिंडो
  3. इंडोनी
  4. लावणी

Ans: A

Q.1 First time Cement Production plant in Rajasthan started at ?

  1. Beawar
  2. Lakheri
  3. Jaipur
  4. Chittorgarh

Ans: B

Q.2 Deficiency of Vitamin D gives rise to ?

  1. Rheumatism
  2. Arthritis
  3. Hernia
  4. Rickets

Ans: D

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Q.3 Justice JS Verma Committee is related to ?

  1. Reservation to Minorities
  2. Telangana Issue
  3. Delhi Gang-Rape & Law for rape victims
  4. Haryana JBT Recruitment Scam

Ans: C

 

  1. 4 MNIT is Located at ?
  2. Jaipur
  3. Jodhpur
  4. Ajmer
  5. Udaipur

Ans: A

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Q.5 “Akshardham Temple” is located at ?

  1. Gandhi nagar
  2. Mumbai
  3. Ahmadabad
  4. Surat

Ans: A

 

Q.6 Maharana Pratap University of Agriculture and Technology (MPUAT) is located at ?

  1. Bikaner
  2. Chittorgarh
  3. Udaipur
  4. Jodhpur

Ans: C

Q.7 Largest Division of Rajasthan in term of Population ?

  1. Jaipur
  2. Jodhpur
  3. Bharartpur
  4. Ajmer

Ans: A

Q.8 “Tannot Mata” Temple is located at ?

  1. Udaipur
  2. Bikaner
  3. Karauli
  4. Jaisalmer

Ans: D

 

Q.9 Amar Sagar is located in ?

  1. Ajmer
  2. Jaipur
  3. Udaipur
  4. Jaisalmer

Ans: D

Q.10 Commissionary System was re-enforced by Govt. of Rajasthan from ?

  1. January 1987
  2. July 1887
  3. January 1992
  4. July 1992

Ans: A

Q.11 The Author of ‘Annals and Antiquities of Rajasthan’ was ?

  1. Rabindra Nath Tagore
  2. Col. Todd
  3. George Thomas
  4. George Wahington

Ans: B

 

Q.12 The Ancient “Shurusen Desh” was ?

  1. Nagaur
  2. Alwar
  3. Bharatpur, Dholpur
  4. Jaipur-Tonk

Ans: C

  1. 13 Which Districts among following Do Not have river ?
  2. Jaisalmer Barmer
  3. Jaisalmer Jalore
  4. Bikaner Churu
  5. Jodhpur Pali

Ans: C

  1. 14 “Rajasthan Police University is announced in which city ?
  2. Jaipur
  3. Udaipur
  4. Jodhpur
  5. Ajmer

Ans: C

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Q.15 Who is Current Leader of the Opposition in Rajasthan

A, Vasundhara Raje

  1. Gulabchand Kataria
  2. Sanwarlal Jat
  3. Arun Chaturvedi

Ans: A

 

Q.16 Modern Jaipur was founded in 1727 by ?

  1. Sawai Jai Singh
  2. Sawi Man Singh
  3. Maharaja Surajmal
  4. Sawai Jagat Singh

Ans: A

Q.17 Which among following is NOT archaeological site in Rajasthan ?

  1. Kalibanga
  2. Peelibanga
  3. Ahar
  4. Banawali

And: B

Q.18 Shape of Rajasthan State is ?

  1. Rectangle
  2. Square
  3. Irregular Rhomboid
  4. Circular

Ans: C

Q.19 Rajasthani song Kesariya Balam is of ?

  1. Mand style
  2. Sufi
  3. Ghazal
  4. Thumri

Ans: A

  1. 20 Ranthambhor town was founded by ?
  2. Sawai Jai singh
  3. Maharaja Suraj Mal
  4. Ran Mal Jat
  5. Maharana Kumbha

Ans: C

Q. 1 Which among following is NOT archaeological site in Rajasthan ?
A. Kalibanga
B. Peelibanga
C. Ahar
D. Banawali
Ans: D
Banawali is an archaeological site belonging to Indus Valley Civilization period in Fatehabad district, Haryana and is locatedabout 120 km northeast of Kalibangan.Q. 2 Shape of Rajasthan State is ?
A. Rectangle
B. Square
C. Irregular Rhomboid
D. Circular
Ans: CQ 3. Rajasthani song Kesariya Balam is of ?
A. Mand style
B. Sufi
C. Ghazal
D. Thumri
Ans: A

Q4 . Rajasthan Govt. to provide FREE Laptops to ?
A. All 12th Science Students
B. University Toppers
C. All Engineering Students
D. All SC/ST Engineering Students
Ans: B

Q5 . Integrated Aadhar Services in Rajasthan was launched by PM at ?
A. Kishangarh, Ajmer
B. Dudu, Jaipur
C. Chomu, Jaipur
D. Alwar
Ans: B
Q6. Pushkar Fair ends each year on ?
A. 15th November each year
B. Kartika, Purnima
C. Kartika, Amavasya
C. Kartika, Ekadashi
Ans: B

Q 7. Which among the following is NOT winner of Rajasthan Ratna Award 2012 ?
A. Rajyavardhan Singh Rathore
B. Jagjit Singh
C. Komal Kothari
D. Vijay Lal Detha

Ans: A

Q 8. Consider the following crops:
1. Cotoon
2. Groundnut
3. Rice
4. Wheat
Which of these are Kharif Crops ?
A. 1 and 4
B. 2 and 3
C. 1,2, and 3
D. 3 and 4
Ans: C

Q 9. Adani Logistics Park in Rajasthan is Located at ?
A. Jodhpur
B. Kishangarh
C. Udaipur
D. Jaipur
Ans: B

Q 10.  Which one among the following is a major Tobaco-growing state ?
A. Andhra Pradesh
B. Chhattisgarh
C. Rajasthan
D. Madhya Pradesh
Ans: A

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Q 11.  Indian railways factory – Diesel Component Works(DCW) is located at:
A. Varanasi
B. Ajmer
C. Patiala
D. Kapurthala
Ans: A

Q 12 . Which one of the following rivers does Chambal river merge ?
A. Banas
B. Narmada
C. Ganga
D. Yamuna
Ans: D

Q 13. Gandhi Sagar Reservoir is of the river ?
A. Chambal
B. Narmada
C. Mahi
D. Banas
Ans: A

Q 14. Larget capacity Solar power plant of India is:
A. Dhirubhai Ambani Solar Park, Rajasthan
B. Chranka Solar Park, Gujarat
C.Bitta Solar Power Plant, Gujarat
D. Mahindra & Mahindra Solar Plant, Rajasthan
ANS: B
Chranka Solar Park is the largest site built on a 2,000 h.a. plot of land near Charanka village in Patan district, Gujarat. This hosts about 17 different projects by different developers. On 19th April 2012, 214 MW had been commissioned. It also became the world’s largest photovoltaic power station. When fully built out, the Charanka Solar Park will host 500 MW of solar power.

Q15. “Anta Power plant” in Rajasthan by NTPC is based on:
A. Coal
B. Gas
C. Hydro
D. Solar
Ans: B

Q 16. What is Present Installed capacity of Rajasthan Rajya Vidyut Utpadan Nigam (RRVUN) ?
A. 3500 MW
B. 4000 MW
C. 4500 MW
D. 5000 MW
Ans: Present Installed capacity of Rajasthan Rajya Vidyut Utpadan Nigam is 4097.35 MW

Q. 17 The Proposed 1200 MW Kalisindh TPS is located in district of ?
A. Ganganagar
B. Kota
C. Udaipur
D. Jhalawar
Ans:DQ. 18. Natural habitat of a species of Monkey called “lion tailed macaque” is:
A. Garo Hills
B. Kullu Valley
C. Nallmalai Hills
D. Silent Valley
Ans: DQ. 19 Which law officer shall have the right to speak in both the Houses of Parliament ?
(A) Solicitor General
(B) Advocate General
(C) Attorney General
(D) Legal Advisor
Ans: C

Q. 20 Which of Following Pakistani District do Not make Boarder with Rajasthan ?
A. Meerpur Khas District
B. Tharparkar District
C. Sukkur District
D. Khairpur District
Ans: A

Q.1 “Direct cash transfer scheme” is rolled out in which three district of Rajasthan ?
A. Alwar, Ajmer, Jaipur
B. Ajmer, Udaipur, Alwar
C. Udaipur, Jaipur, Alwar
D. Ajmer, Jaipur, Alwar
Ans: B (Ajmer, Udaipur, Alwar)

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Q.2 Brahma Mandir is situated at ?

A. Galtaji
B. Eklingarh
C. Pushkar
D. Udaipur
Ans: C 

Q.3 Maharaja Jhunjhar singh established which city ?
A. Sikar
B. Jhunjhunu
C. Jhotwada
D. Alwar
Ans: B

Q.4 First Female MLA of Rajasthan was ?

A. Vashundhara Raje
B. Gayatri Devi
C. Yashoda Devi
D. Nirmala Devi
Ans: C

Q.5 Who is current Chief Justice (CJ) of Rajasthan –

A. Amitava Roy
B. Arun Kumar Mishra
C. Deepak Verma
D. Jagadish Bhalla
Ans: A

Q. 6 GAAR stands for ?
A. Global Audit Avoidance Rule
B. General Anti-Avoidance Rule
C. Global Anti-Audit Rule
D. General Audit Avoidance Rule
Ans: B

Q.7 Who is appointed International Goodwill ambassador for UNAIDS ?

A. Amitabh Bachchan
C. Aishwarya Rai Bachchan
D. Sushmit Sen
D. Arundati Roy
Ans: B

Q.8 Mangala, Bhagyam and Aishwariya are ?

A. Oil Field in Barmer
B. Oil field in Jaisalmer
C. Village in Jaisalmer
D. Film actress from Rajasthan
Ans: A

Q.9 Second highest peak of Arawali Hills in Rajasthan is ?

A. Ser
B. Gurushikhar
C. Taragarh
D. Kumbhalgarh
Ans: A

Q.10 “Bank of Rajasthan” was merged into ?
A. H.D.F.C.
B. ICICI
C. State Bank of Bikaner and Jaipur
D. State Bank of India
Ans: Test your GK & Reply as CommentQ.11 “Chhappan Basin” is in the district of ?
A. Alwar
B. Banswara
C. Pali
D. Tonk
Ans: B
Q. 12 “Gang Canal was constructed in Year ?
A. 1930
B. 1927
C. 1944
D. 1932
Ans: B
Q. 13 Luni River originates from
A. Pali
B. Ajmer
C. Tonk
D. Udaipur
Ans: BQ. 14 Rajasthan’s first Telemedicine Village is ?
A. Kaithun
B. Nayla
C. Kanpura
D. Harmara
Ans: A
Q. 15 College of Dairy and Food Science Technology (CDFST) is situated at ?
A. Jaipur
B. Bikaner
C. Jodhpur
D. Udaipur
Ans: DQ. 16 Rajasthan Technical University (RTU) is situated at ?
A. Jodhpur
B. Udaipur
C. Kota
D. Ajmer
Ans: CQ. 17 Official Language of Rajasthan is ?
A. Rajasthani
B. English
C. Hindi
D. Marwadi
Ans: C

Q.18 Devendra Jhajharia is associated with sports of ?
A. 1000 Meter race
B. Jvelin throw
C. Swimming
D. Rowing
Ans: B

Q. 19 Red-rot and Ergot disease are associated with the Production of:
A. Bajra and wheat
B. Groundnut and sugarcane
C.Wheat and groundnut
D.Sugarcane and Bajra
Ans: DQ.20 Which of the following are infected by “foot and mouth” disease ?
A. Cats
B. Cattle
C. Dogs
D. Poultry
Ans: BQ.21  Night blindness can be corrected by the intake of ?
A. Vitamin A
B. Vitamin B Complex
C. Vitamin C
D. Vitamin D
Ans: A

Q. 22 The audible range of sound is-
A. 20 Hz to 20 MHz
B. 20 Hz to 20 kHz
C. 20 kHz to 20 MHz
D. 20 Hz to 2000 Hz
Ans: B

Q23 . White cement is rajasthan is produced at ?
A. Beawar
B. Gotan
C. Nimbahera
D. Chittorgarh
Ans: B

Q.24 Which place do not have Smelters by Hindustan Zinc’s ?
A. Chanderiya, Chittorgarh
B. Debari, Udaipur
C. Dariba, Rajsamand
D. Gulabpura, Bhilwara
Ans: D

Q.25 The main source of Irrigation in Rajasthan is ?
A. Canels
B. Tanks
C. Wells & Tubewells
D. Others
Ans: C (approx. 51% contribution by Wells, Tubewells)Q. 26 Terah Taali dance is done mainly by ?
A. Bhopa of Ramdevji
B. Bhopa of Devnarayan ji
C. Bheel womans
D. None of above
Ans: A
Q. 27 Which of Following is Not PSU owned by Govt. of Rajasthan ?
A. RSMML, Udaipur
B. BSNL, Rajasthan Circle
C. Rajasthan Housing Board
D. Rajasthan Renewal Energy Corporation Ltd
Ans: B
Govt. of Rajasthan has no stake in BSNL, Rajasthan Circle or Bharat Sanchar Nigam Ltd (BSNL). The owner of BSNL is Govt. of India. with 100% stake. under Department of Telecom (DoT).
Q.28 RSMML have Corporate Office at ?
A. Jaipur
B. Udaipur
C. Bikaner
D. Jodhpur
Ans: A
Rajasthan State Mines and Minerals Limited(RSMML) has Corporate Office at Udaipur, Registered Office at JaipurQ.29 Who is current Speaker of Rajasthan Legislative Assembly?
A. Deependra Singh Shekhawat
B. Sumitra Singh
C. Parasram Maderna
D. Nathuram Sinodia
Ans: A
Q. 30 Bharatpur Maharaja Surajmal belong to which Jat Clan ?
A. Poonia
B. Godara
C. Sinsinwar
D. Meel
Ans: C
1. Two district of rajasthan without river are:
A. Jaisalmer,Barmer
B. Jaisalmer, Jalore
C. Bikaner,Churu
D. Jodhapur, Jaisalmer
Ans: C2. Which gas is used for filling baloons used for Meteorological Observation:
A. Oxygen
B. Carbon-dioxide
C. Methane
D. Helium
Ans: D3. Measles(KHASARA) disease is caused by:
A. Virus
B. Fungi
C. Bacteria
D. Mycoplasma
Ans: A

4. Which one of the following is used for determining the structure of crystal:
A. Gamma Rays
B. X-Rays
C. UV Rays
D. Visible Lights
Ans: B

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5. Which one of the following is a true fish:
A. Star fish
B. Jelly fish
C. Hag fish
D. Sea horse
Ans: D

6. Lichens are composite organishms made up of:
A. Fungi, Bacteria
B. Fungi, Algae
C. Fungi, Bryophyta
D. Algae, Bacteria
Ans: B

7. Identify the parasitic(PARJIVI) plant amongs the following:
A. Pithce plant
B. Doder(AKASHBEL)
C. Bladderwort
D. Sun flower
Ans: B

8. The biggest Type and tube industry in rajasthan is established at:
A. Kelwa
B. Kankroli
C. Karoli
D. Kotputli
Ans: B

9. Udyog Protsahan Sansthan has been setup in rajasthan for:
A. Assisting the marketing of industrial products
B. Providing finance to sick industries
C. Providing incentives to new industrialist
D. Providing training to New enterprenurs
Ans: C

10. Main producer of ISABGOL, JEERA, TOMOTO is:
A. Ganganagar
B. Bundi
C. Jalore
D. Kota
Ans: C

11. JEEVAN DHARA YOJNA is related to:
A. Insurance scheme for poor
B. Construction of irrigation wells
C. Providing electricity to rural poor
D. Providing medical facilities
Ans: B

12. Name of scent poetess MEERA was:
A. Rana ratan singh
B. Rajkumar Bojraj
C. Rana udaisingh
D. Rana sanga
Ans: B

13. Martyr Sagarmal Gopa belongs to:
A. Jaipur
B. Bikaner
C. Jodhpur
D. Jaisalmer
Ans: D

14. Book written by Chander-vardai is:
A. Prithviraj raso
B. Prithviraj Charit
C. Prithvi khyat
D. Prithvi Nath
Ans: A

15. Marblecity is ?
A. Ajmer
B. Jaipur
C. Kishangarh
D. Udaipur
Ans: C

Rajasthan GK Questions in Hindi ( राजस्थान सामान्य ज्ञान हिंदी में ):
1. बनी – ठनी पेन्टिंग शैली का सम्बन्ध किस शहर से है ?
अ. बीकानेर
ब. किशनगढ़
स. बूंदी
द. सांगानेर
Ans: B

Rajasthan GK App: http://tinyurl.com/RajasthanGK2. राजस्थान के राज्य पक्षी का नाम है ?
अ. मोर
ब. बाज़
स. गोडवान
द. हंस
Ans:c

3. जीण माता मंदिर स्थित है ?

A. करोली
B. सीकर
C. बीकानेर
D. सवाई माधोपुर
Ans: B

4. “महारानी कॉलेज ” कहाँ पर स्थित है ?

A. जयपुर
B. उदयपुर
C. जोधपुर
D. दिल्ली
Ans A

5. “बीकानेर के राठोरान री ख्यात” के लेखक हैं ?

A. नेनसी
B. सूर्यमाल मिश्र
C. दयालदास
D. श्यामलदास
Ans: c


6. भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है ?

A. तमिल
B. बंगाली
C. मराठी
D. पंजाबी
Ans:B

7. मार्बल नगरी के नाम से मशहूर शहर का नाम है ?

A. उदयपुर
B. कोटा
C. किशनगढ़
D. राजनगर
Ans:c

8. श्री तेजाजी धाम “सुरसुरा” किस जिले में स्थित है ?

A. नागौर
B. अजमेर
C. जयपुर
D. सीकर
Ans: B
Rajasthan GK App: http://tinyurl.com/RajasthanGK

9. टायर ट्यूब उद्योग राजस्थान में कहाँ स्थित हैं ?
A. केलवा
B. करोली
C. कांकरोली
D. कोटपुतली
Ans: c

10. तारागढ़ किला कहाँ स्थित है ?
A. अजमेर
B. उदयपुर
C. जैसलमेर
D. बूंदी
Ans :  A, D (Both)

11. भरतपुर का संबंध किस राजघराने से है ?
A. राजपूत
B. जाट
C. मीना
D. मुस्लिम
Ans: B

12. “जैसलमेर का गुंडाराज” के लेखक है ?
A. नेनसी
B. सूर्यमाल मिश्र
C. दयालदास
D. सागरमल गोपा
Ans: D

13. मीराबाई के पति का क्या नाम था ?
A. राणा सांगा
B. राणा रतनसिंह
C. भोजराज
D. उदयसिंह
Ans: C

14. बिष्नोई समाज के संस्थापक कोन थे ?
A. रामदेवजी
B. पाबूजी
C. जम्भोजी
D. हरबुजी
Ans: C

15. शेखावाटी क्षेत्र का प्रमुख नृत्य है ?
A. घूमर
B. दे ताली
C. गीदड़
D. ग़ैर
Ans: C

16. उदयपुर क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा है ?
A. मारवाडी
B. मेवाडी
C. खड़ी
D. हाडोती
Ans: B

17. “बादशाह” का मैला कहाँ लगता है ?
A. अजमेर
B. ब्यावर
C. बूंदी
D. कोटा
Ans: B

18. चौरासी खम्भों वाली छतरी कहाँ स्थित है ?
A. जयपुर
B. उदयपुर
C. बूंदी
D. कोटा
Ans: C

19. टेलीफोन नम्बर 1098 किससे सम्बंधित है ?
A. राजस्थान पुलिस
B. BSNL ब्रॉडबैंड
C. चुनाव आयोग
D. चाइल्ड लाइन
Ans: D

20. राजस्थान सरकार की अपना खाता सुविधा का सम्बन्ध है ?
A. जमीन की ऑनलाइन नक़ल हेतु
B. फ्री बैंक अकाउंट हेतु
C. नकद सब्सिडी हेतु फ्री बैंक अकाउंट
D. आधार कार्ड हेतु
Ans: A

21. राजस्थान की कुल जनसँख्या है ?
A. 5.66 करोड़
B. 6.86 करोड़
C. 6.26 करोड़
D. 7.66 करोड़
Ans:

22. झीलों की नगरी किस शहर को कहा जाता है ?
A. अजमेर
B. उदयपुर
C. राजसमन्द
D. जयपुर
Ans: B

23. पांचना बांध किस जिले में स्थित है ?
A. करौली
B. जयपुर
C. भरतपुर
D. बांसवारा
Ans: A

24. सेवन घास किस जिले में मुख्यता पाई जाती है ?
A. जैसलमेर
B. बाड़मेर
C. भरतपुर
D. बांसवाडा
Ans: A

25. ऊंट के बीमार होने पर किस लोक देवता की पूजा की जाती है ?
A. गोगाजी
B. तेजाजी
C. पाबूजी
D. केसरिया कुंवर
Ans: C

26. अंता पॉवर प्लांट किस प्रकार का है ?
A. गैस
B. कोयला
C. वाटर
D. आणविक
Ans: A

27. गोगुन्दा किस जिले में स्थित है ?
A. बांसवाडा
B. उदयपुर
C. डूंगरपुर
D. सिरोही
Ans: B

28. लाषोडीया आन्दोलन किसने शुरू किया था ?
A. मावजी
B. गोविन्द गिरी
C. सुरमल दास
D. मोतीलाल तेजावत
Ans: C

29. ईसबगोल का मुख्य उत्पादक जिला कोन सा है ?
A. जालोर
B. उदयपुर
C. गंगानगर
D. भरतपुर
Ans: A

30. आनासागर कहाँ स्थित है ?
A. जयपुर
B. अजमेर
C. उदयपुर
D. जोधपुर
Ans: B

Q.1 कन्हैयालाल सेठिया का सम्बन्ध है ?

 

  1. राजस्थानी साहित्य

 

  1. राजस्थानी लोकगीत

 

  1. प्रशाशनिक सेवाएं

 

  1. राजस्थानी राजनीतिज्ञ

 

Ans: A

 

  1. 2  राजस्थान का राज्य पक्षी है ?

 

  1. गोडावन

 

  1. मोर

 

  1. बाज़

 

  1. कबूतर

 

Ans: A

 

Q.3 किस खनिज में राजस्थान को देश में एकाधिकार प्राप्त है ?

 

  1. सीसा जस्ता

 

  1. ताम्बा

 

  1. मैगनीज

 

  1. चांदी

 

Ans: A

 

Q.4 विलास सिंचाई योजना का सम्बन्ध है ?

 

  1. बारां

 

  1. झालावाड़

 

  1. बूंदी

 

  1. गंगानगर

 

Ans: B

Q.5 कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति के रचियता थे ?

  1. सोमदेव

 

  1. जेता

 

  1. नाथा

 

  1. जयानक

 

Ans: B

 

Q.6 राजस्थान में नमक उत्पादन का प्रमुख केंद्र है ?

 

  1. सांभर

 

  1. पचपद्रा

 

  1. जयपुर

 

  1. बाड़मेर

 

Ans: A

 

Q.7 घोटारू व मणिहारी का सम्बन्ध किससे है ?

 

  1. पन्ना

 

  1. ताम्बा

 

  1. तामड़ा

 

  1. खनिज तेल

 

Ans: D

 

Q.8 “राजस्थान का हृदय” किसे कहा जाता है ?

 

  1. जयपुर

 

  1. अजमेर

 

  1. नागौर

 

  1. उदयपुर

 

Ans: B

 

Q.9 अजमेर की आनासागर झील का निर्माण किसने करवाया था

 

  1. पृथ्वीराज चौहान

 

  1. नरेश अर्णोराज

 

  1. अजयराज

 

  1. मोहमद गौरी

 

Ans: B

 

Q.10 मयूर-ध्वज के नाम से मशहूर किला कहाँ स्थित है

 

  1. जोधपुर

 

  1. उदयपुर

 

  1. जयपुर

 

  1. चित्तोडगढ

 

Ans: A

 

Q.11 “थार मरुस्थल का प्रवेश द्वार” के नाम से जाना जाता है ?

 

  1. जोधपुर

 

  1. जैसलमेर

 

  1. बाड़मेर

 

  1. बीकानेर

 

Ans: A

 

Q.12 नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में किस भगवान की प्रतिमा है

 

  1. भगवान श्रीराम

 

  1. भगवान श्रीकृष्ण

 

  1. भगवान हनुमान जी

 

  1. सर्वधर्म उपासना स्थल बिना प्रतिमा के

 

Ans: B

 

Q.13 किस शहर को “पूर्व का वेनिस ” कहा जाता है ?

 

  1. अजमेर

 

  1. जयपुर

 

  1. उदयपुर

 

  1. भीलवाडा

 

Ans: c

 

Q.14  किस शहर को “पूर्व का पेरिस” कहा जाता है ?

 

  1. अजमेर

 

  1. जयपुर

 

  1. उदयपुर

 

  1. भीलवाडा

 

Ans: B

 

Q.15 किस शहर को “राजस्थान का मैनचेस्टर” कहा जाता है ?

 

  1. अजमेर

 

  1. जयपुर

 

  1. उदयपुर

 

  1. भीलवाडा

 

Ans: D

 

Q.16 “रामदेवजी पशु मेला” कहाँ आयोजित होता है ?

 

  1. जैसलमेर

 

  1. रामदेवरा

 

  1. नागौर

 

  1. बीकानेर

 

Ans: C

 

Q.17 “अलगोज़ा” वाद्य यंत्र बजाया जाता है ?

 

  1. हाथ से

 

  1. मुह से

 

  1. लकड़ी के डंडे से

 

  1. बिजली से

 

Ans: B

 

Q.18 “तगारी” राजस्थानी भाषा में किसे कहा जाता है ?

 

  1. एक मिठाई है

 

  1. मजदूरों का औज़ार है

 

  1. एक आभूषण है

 

  1. एक पौधा है

 

Ans: B

 

  1. 19 भीलों को किस शस्त्र / अश्त्र चलाने में निपुण माना जाता है ?

 

  1. तीर

 

  1. तलवार

 

  1. भाला

 

  1. लाठी

 

Ans: C

 

Q.20 अरब सागर की ओर बहने वाली नदी नहीं है ?

 

  1. लूनी

 

  1. सोम

 

  1. माही

 

  1. कोठारी

 

Ans: D

Rajasthan Gk In Hindi Series 104

 

 

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Rajasthan Gk In Hindi Series 103

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Rajasthan Gk In Hindi Series 103

 Rajasthan Districts wise General Knowledge

1. अजमेर  6. भरतपुर  11. चित्तौड़गढ़  16. हनुमानगढ़  21. झुंझुनूं  26. पाली  31. सिरोही 
2. अलवर  7. भीलवाड़ा 12. दौसा  17. जयपुर  22. जोधपुर  27. प्रतापगढ़  32. टोंक
3. बांसवाड़ा  8. बीकानेर  13. धौलपुर  18. जैसलमेर  23. करौली  28. राजसमंद  33. उदयपुर 
4. बारां  9. बूंदी  14. डूंगरपुर  19. जालोर  24. कोटा  29. सवाई माधोपुर 
5. बाड़मेर  10. चुरू  15. गंगानगर  20. झालावाड़  25. नागौर  30. सीकर 

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Q.451 Best Marble is found at ?

  1. Udaipur
  2. Jalore
  3. Makrana
  4. Sirohi

Ans: C

Q.452 “भीनमाल” किसका प्राचीन नाम है ?
A. भीलवाड़ा
B. गुलाबपुरा
C. बाड़मेर
D. बीकानेर
Ans: C

Q.453 कालीबंगा संस्कृति का सम्बन्ध किस काल से है ?
A. पाषण काल
B. ताम्र पाषण काल
C. पुरा पाषण काल
D. वैदिक काल

Ans: B

Q.454 राजस्थान में चुकुन्दर का सबसे ज्यादा उत्पादन कहाँ होता है ?
A. अजमेर
B. नागौर
C. कोटा
D. गंगानगर

Ans: D

Q.455 राजस्थान में इसबगोल का सबसे ज्यादा उत्पादन कहाँ होता है ?
A. अजमेर
B. नागौर
C. कोटा
D. जालोर

Ans: D

Q.456 Rajasthan University of Health Science कहाँ स्थित है   ?

  1. जयपुर
  2. अजमेर
  3. उदयपुर
  4. कोटा

Ans: A

Q.457 राजस्थान में तिल का सबसे ज्यादा उत्पादन कहाँ होता है ?
A. अजमेर
B. नागौर
C. पाली
D. जोधपुर
Ans: B

Q.458   Jagadguru Ramanadacharya Rajasthan Sanskrit University कहाँ स्थित है ?

  1. जयपुर
  2. अजमेर
  3. उदयपुर
  4. कोटा

Ans: A

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Q.459 राजस्थान में गन्ना का सबसे ज्यादा उत्पादन कहाँ होता है ?
A. भरतपुर
B. गंगानगर
C. धोलपुर
D. बूंदी
Ans: D

Q.460 राजस्थान में ज्वार का सबसे ज्यादा उत्पादन कहाँ होता है ?
A. कोटा
B. नागौर
C. प्रतापगढ़
D. चित्तोड़गढ़
Ans: A

Q.461 राजस्थान में चने का सबसे ज्यादा उत्पादन कहाँ होता है ?
A. कोटा
B. नागौर
C. हनुमानगढ़
D. चित्तोड़गढ़
Ans: C

Q.462 जाजोबा क्या है ?
A. एक गहना
B. एक  मिठाई
C. एक फसल
D. एक फल
Ans: C

Q.463 जेतसर कृषि फार्म की स्थापना 1956 में किस देश के सहयोग से की गयी थी ?
A. रूस
B. जापान
C. अमेरिका
D. चीन
Ans: A

Q.464 “बत्रा” क्या है ?
A. स्थानांतरित कृषि
B. गाय की प्रजाति
C. एक फल
D. बीमारी का नाम
Ans: A

Q.465 निम्न में से किस छावनी ने 1857 के संग्राम में भाग नहीं लिया था ?
A. नसीराबाद
B. ब्यावर
C. नीमच
D. देवली
Ans: B

Q.466 राजस्थान के संदर्भ में 1857 के संग्राम के विफल होने का कारण था ?
A. सैनिक बहादुर नहीं थे
B. राजस्थान के राजा अंग्रेजों के वफादार थे
C. नसीराबाद छावनी का भाग न लेना
D. इनमे से कोई नही
Ans: B

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Q.467 समाचार पत्र दैनिक नवज्योति कब शुरू हुआ
A. 1943
B. 1947
C. 1941
D. 1957
ANS: A

Q.468 राजस्थान मेँ त्रिनेत्र गणेशजी का मन्दिर कहाँ है ?

  1. रणथम्भौर
  2. B. सरिस्का
  3. दर्रा
  4. गजनेर

Ans: A

Q.469 ढिल्लिका( बाद की दिल्ली) की स्थापना किसने की थी ?
A.तोमर
B. जाट
C. परमार
D. कछवाहा
Ans: A

Q.470  संगीत सार के लेखक है ?
A. राणा कुम्भा
B. राणा सांगा
C. प्रथ्वीराज चौहान
D. रतन सिंह
Ans: A

Q.471  बोरला आभूषण कहाँ पहना जाता है?
A. हाथों में
B. पैरों में
C. सिर पर
D. गले में
Ans: C

Q.472  माओटा झील कहाँ स्थित है ?
A. उदयपुर
B. जयपुर
C. आमेर
D. अलवर
Ans: C

Q.473 गरासिया जनजाति का प्रमुख त्यौहार है?
A. होली
B.  दीपावली
C. रक्षाबन्धन
D. नव वर्ष
Ans: A

Q.474  खारे पानी की सबसे बड़ी झील कौन सी है ?
A. सांभर
B.  डीडवाना
C. पचपद्रा
D. कायलाना
Ans: A

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Q.475  झाली आभूषण कहाँ पहना जाता है?
A. हाथों में
B. चेहरे पर
C. सिर पर
D. गले में
Ans: B

Q.426. Which district have lowest Forest area ?
A. Jodhpur
B. Churu
C. Kota
D. Bundi

Ans: B

Q.427   ईसरलाट कहाँ है ?
A. अजमेर
B. बीकानेर
C. जयपुर
D. उदयपुर
Ans: C

Q.428 पांडुपोल कहाँ है
A. अलवर
B. बीकानेर
C. जयपुर
D. उदयपुर
ANS: A

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Q.429 फलोदी  किस जिले में है
A. जोधपुर
B. बीकानेर
C. जयपुर
D. उदयपुर

Ans: A

 

Q.430 रामदेवरा का प्राचीन नाम क्या था ?
A. रूणेचा
B. मरुभाषा
C. मेवाड़
D. नागौर
Ans: A

Q.431 भटनेर का किला कहाँ है
A. अजमेर
B. बीकानेर
C. हनुमानगढ़
D. उदयपुर
ANS: C

Q.432 राजस्थान का तीर्थराज कहाँ है
A. अजमेर
B. पुष्कर
C. जयपुर
D. बानेश्वर
ANS: B

Q.433 माघ की नगरी के नाम से जाना जाता है
A. अजमेर
B. पुष्कर
C. भीमनाल
D. बानेश्वर
ANS: C

Q.434   राजस्थान का नागपुर किसे कहा जाता है
A. अजमेर
B. कोटा
C. झालावाड़
D. उदयपुर
ANS: B

Q.435 राजस्थान का खुजराहो कहाँ है
A. किराडू
B. नाथद्वारा
C. जयपुर
D. उदयपुर
ANS: A

Q.436 किलों का शहर किसे कहा जाता है
A. जोधपुर
B. बीकानेर
C. जयपुर
D. उदयपुर
ANS:A

Q.437 राजस्थान का गौरव किसे कहा जाता है
A. चित्तोड़गढ़
B. उदयपुर
C. जयपुर
D. मारवाड़

ANS: A

Q.438 विजय स्तम्भ किस उपलक्ष में बनाया गया था ?
A. मेवाड़ विजय
B. हाड़ोती विजय
C. मालवा विजय
D. खानवा विजय
ANS: C

Q.439 जगमंदिर महल कहाँ है
A. जयपुर
B. बीकानेर
C. अलवर
D. उदयपुर
ANS: A

Q.440 मालपुरा किस जिले में है ?
A. जयपुर
B. टोंक
C. अजमेर
D. भीलवाडा

ANS: B

Q.441 गागरोन का किला कहाँ है
A. झालावाड़
B. बीकानेर
C. कोटा
D. उदयपुर
ANS: A

Q.442 लोहागढ़ किला कहाँ स्थित है ?
A. अजमेर
B. बीकानेर
C. भरतपुर
D. धोलपुर
ANS: C

Q.443 Jantar-Mantar is located at ?

  1. Ajmer
  2. Jaipur
  3. Jodhpur
  4. Bikaner

Ans: B

Q.444 राजस्थानी आभूषण “टणका” कहाँ पहना जाता है ?

  1. पैर में
  2. हाथ में
  3. कमर में
  4. गले में

Ans: A

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Q.445 Rajasthan’s 96% of Fluorspar is produced in ?

  1. Jaipur
  2. Ajmer
  3. Banswada
  4. Udaipur

Ans: B

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Q.446 Ghotaru place is situated in ?

  1. Nagour
  2. Tonk
  3. Jaisalmer
  4. Bundi

Ans: C

Q.447 Mando-ki-pal is famous for which mineral ?

  1. Fluorspar
  2. Oil
  3. Copper
  4. Zinc

Ans: A

Q.448 Which mineral is used for fertilizers ?

  1. Gypsum
  2. Multani Soil
  3. Copper
  4. Marble

Ans: A

Q.449 Rank of Rajasthan in production of Copper is ?

  1. 1st
  2. 2nd
  3. 3rd
  4. None of above

Ans: B (First is AP, 2nd is Rajasthan)

Q.450 Gadisar Talab is situated in ?

  1. Jaisalmer
  2. Jhunjhunu
  3. Ajmer
  4. Jodhpur

Ans: A

Q.401 दिलवाड़ा स्थित “आदिनाथ का मंदिर” किसने बनाया था ?
A. विमल शाह वैश्य
B. महाराणा कुम्भा
C. तेजपाल
D. वस्तुपाल
Ans: A

Q.402 अंग्रेजों से संधि करने वाला पहला राज्य था ?
A. कोटा
B. जोधपुर
C. जयपुर
D. उदयपुर

Ans: C

Q.403 राजस्थान में अत्यधिक मात्रा में पाए जाने वाला अज्वालित खनिज है ?
A. मैगनीज
B. क्रोमाईट
C. अभ्रक
D. बक्साईट
Ans: C
Q. 404 ब्लू पाटरी के लिए प्रसिद्ध है ?
A. बीकानेर
B. जयपुर
C. अजमेर
D. कोटा

Ans: B

  1. 405 चमड़े की हस्तशिल्प वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध है ?
  2. तिलोनिया
  3. हरमाड़ा
  4. सांगानेर
  5. कोटा

Ans:A

 

  1. 406 “बंधेज के वस्त्र” के लिए प्रसिद्ध है ?
  2. बीकानेर
  3. जयपुर
  4. अजमेर
  5. कोटा

Ans: B

  1. 407 शांतिलाल जोशी का सम्बन्ध किससे है ?
  2. बंधेज के वस्त्र
  3. खेल
  4. राजस्थानी संगीत
  5. फड चित्रकारी

Ans: D

Q.408 राजस्थान में पहली बार राष्ट्रपति शाशन कब लगा था ?

  1. 1967
  2. 1977
  3. 1980

D.1992

Ans: A

Q.409 राजस्थान में लोकसभा की कितनी सीटें है ?

  1. 200
  2. 15
  3. 25

D.40

Ans: A

Q.410 वर्तमान राजस्थान कब अस्तित्व में आया था ?

  1. 1 NOV. 1956
  2. 1 NOV. 1957
  3. 19 NOV 1956

D.26 NOV 1972

Ans: A

Q.411 राजस्थान में राज्यसभा की कितनी सीटें है ?

  1. 10
  2. 15
  3. 25

D.12

Ans: A

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Q.412 बाबर ने महाराणा सांगा को किस युद्ध में हराया था ?
A. खातोली का युद्ध
B. खानवा का युद्ध
C. पानीपत का युद्ध
D.हल्दीघाटी का युद्ध
Ans: B

Q.413 पुरातत्व के लिए महत्वपूर्ण “दर” नामक कहाँ स्थित है ?
A. भरतपुर
B. बीकानेर
C. उदयपुर
D. गंगानगर
ANS: A

Q.414 राजस्थान के एकीकरण का पहला रूप 1948 में था   ?
A. मत्स्य संघ
B. वृहत राजस्थान
C. राजस्थान
D. संयुक्त राजस्थान
ANS: A

Q.415 पुरातत्व के लिए महत्वपूर्ण “धूलकोट” नामक स्थान कहाँ स्थित है ?
A. भरतपुर
B. बीकानेर
C. उदयपुर
D. गंगानगर
ANS: C

Q.416 Who is author of “Annals and antiquities of Rajasthan” ?

  1. James Tadd
  2. George Tomas
  3. Sawai Jaisingh
  4. None of above

ANS: A

Q.417 पुरातत्व के लिए महत्वपूर्ण “सौथी” नामक स्थान कहाँ स्थित है ?
A. भरतपुर
B. बीकानेर
C. उदयपुर
D. भीलवाड़ा
ANS: A

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Q.418 राजस्थान में पहला तारघर कहाँ लगाया गया ?
A. अजमेर
B. जयपुर
C. उदयपुर
D. अलवर

Ans: C, 22nd Feb.1897

Q.419 पुरातत्व के लिए महत्वपूर्ण “बागौर” नामक स्थान कहाँ स्थित है ?
A. भरतपुर
B. बीकानेर
C. उदयपुर
D. भीलवाड़ा
ANS: B

Q.420 “आहड़ संस्कृति” किस जिले में है ?
A. भरतपुर
B. बीकानेर
C. उदयपुर
D. भीलवाड़ा
ANS: C

Q.421 पांडवों ने 1 वर्ष का अज्ञातवास कहाँ बिताया था
A. बैराठ
B. आहड़
C. ऊलूक प्रदेश
D. पुष्कर
ANS: A

Q.422 राजस्थान के किस पुरातत्व स्थल पर जुते हुए खेत के अवशेष मिले हैं
A. कालीबंगा
B. आहड़
C. बाणगंगा
D. मोहनजोदड़ो
ANS: A

Q.423 आदि महाकाव्य किसे कहा जाता है ?
A. रामायण
B. महाभारत
C. मेघदूत
D. कामायनी

ANS: A

Q.424 1 नवम्बर 1956 को राजस्थान में विलय होने वालों में नहीं है “
A. अजमेर
B. आबू रोड
C. सुनेल टप्पा
D. डूंगरपुर

ANS: D

Q.425 RNT Medical College is situated at ?

  1. Ajmer
  2. Udaipur
  3. Jodhpur
  4. Bikaner

ANS: B

Q.1 Rashtriya Bal Swasthya Karyakram (RBSK) is launched in ?
A. Rajasthan
B. Maharashtra
C. UP
D. Bihar
Ans: B

Q.2 Who is Current Governor of Rajasthan ?
A. Shivraj Singh
B. Kamla Beniwal
C. Margret Alva
D. Ashok Gehlot
Ans:C

Q.3 Where in Rajasthan is famous enamel Jewellery(MENAKARI GAHANE) made:
A. Jaipur
B. Jodhpur
C. Udaipur
D. Bharatpur
Ans:A

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Q.4 Which of the following cities is the biggest producer of Cement in Rajasthan ?
A. Jodhpur
B. Jaipur
C. Chittorgarh
D. Nagaur
Ans: C

Q.5 Who among following was NOT Speaker of Rajasthan Assembly ?
A. Sumitra Singh
B. Nathuram Sinodia
C. Gopal Singh
D. Parasram Maderna
Ans: B

Q.6 In which district of Rajasthan large reserve of natural gas have been discovered ?
A. Jaisalmer
B. Dholpur
C. Banswara
D. Bikaner
Ans: A Jaisalmer

Q.7 Rajasthan is single largest producer in country of ?
A. Balrley
B. Maize
C. Gram
D. Millet
Ans:D

Q.8 What Fraction of Rajasthan’s land area is desert ?
A. 1/4
B. 1/3
C. 1/2
D. 2/3
Ans: D

Q.9 Which NH goes from Punjab to gujrat through Rajasthan passing by Bikaner and Jaisalmer ?
A. NH 8
B. NH 10
C. NH 11
D. NH 15
Ans: NH 15
Tips: NH 15 passes through Pathankot, Amritsar, Tarn Taran Sahib, Zira, Kotkapura, Bhatinda, Ganganagar, Bikaner, Jaisalmer and Barmer. At Bikaner the National Highway 11 terminates on this Highway.

Q.10 “BYTE” is associated with ?
A. Computer
B. Rajasthani Food
C. Unit of Sound
D. Unit of Work
Ans: A (BYTE, BIT, MB, GM, TB(Tera Byte) are Unit of Memory Usage in Computer/Electronic devices.)

Q.11 World Bank Headquarter is situated at ?
A. Geneva
B. Austria
C. New york
D. Washington DC
Ans: D

Q.12 WTO Headquarter is situated at ?
A. Geneva
B. Austria
C. New york
D. Washington DC
Ans:A

Q.13 Australian Open 2013 Woman title winner is ?
A. Victoria Azarenka
B. Li Na
C. Serena Williams
D. Venus Williams
Ans: A

Q.14 Who is winner of 23rd Lal Bahadur Shashtri Hockey Tournament ?
A. BPCL
B. BSNL
C. Air India
D. NTPC
Ans: C

Q.15 Which bollywood actress awarded Bharat Muni Award 2012 ?
A. Rekha
B. Shridevi
C. Hema Malini
D. Jaya Prada
Ans: C

Q.16 Which country in December 2012 got their First Woman President ?
A. North Korea
B. South Korea
C. Austria
D. Australia
Ans: B, South Koria’s first woman president Park Geun-Hye

Q.17 Who is chairmen of 14th Finance Commission ?
A. YV Reddy
B. D. Subborao
C. Rangrajan
D. Montek singh Ahluvaliya
Ans: A

Q.18 11 ITU stands for ?
A. Indian Telecom Unions
B. International Telecommunication Union
C. International Trade Union
D. Indian Truck Union
Ans: B

Q.19 Who is new President of Japan ?
A. Shinzo Abe
B. Yoshiko Noda
C. Ban Ki- Moon
D. Yosho Kama
Ans: A

Q.20 The Chief guest on 26th Jan. 2013 belong to country ?
A. Nepal
B. Afganistan
C. Philistine
D. Bhutan
Ans: D, King and queen of Bhutan

Q.21 Who is only player to score three triple century in First Class Cricket ?
A. Virendra Sehwag
B. Sunil Gavaskar
C. Ravindra Jadeja
D. Cheterswar Pujara
Ans: C

Q.22 “Kyoto Protocol-II” is related to ?
A. Nuclear Deal
B. Human rights
C. Climate Change
D. Indo-Pak Boarder talk
Ans:C

Q.23 Surajkund Fair is held in ?
A. Rajasthan
B. UP
C. Bihar
D. Haryana
Ans: D

Q.24 Rajasthan Explosives is situated at ?
A. Kota
B. Jaipur
C. Dholpur
D. Bikaner
Ans:C

Q.25 The main seat of “Dadu Panth” is situated at ?
A. Nathdwara
B. Salemabad
C. Naraina
D. Deshnok
Ans: C

Q.1 “महात्मा गाँधी का पाँचवा पुत्र” किसे कहा जाता है ?

 

  1. विजयसिंह पथिक

 

  1. जमनालाल बजाज

 

  1. भोगीलाल पंड्या

 

  1. गोकुलभाई भट्ट

 

Ans: B

 

Q.2 चित्तोड़गढ़ में कीर्ति स्तंभ का निर्माण किसने कराया था ? A. राणा सांगा B. राणा कुम्भा C. राणा प्रताप D. सुल्तान खिलजी

 

Ans: B

 

Q.3 “अमृता देवी स्मृति पुरुष्कार” किस क्षेत्र में अग्रणी कार्य के लिए दिया जाता है ? A. समाज सेवा B. पत्रकारिता C. राष्ट्रीय एकता  D. वन संरक्षण

 

Ans: D

 

Q.4 “डूंगरपुर प्रजामंडल” की स्थापना किसने की थी ? A. विजयसिंह पथिक B. जमनालाल बजाज C. भोगीलाल पंड्या D. गोकुलभाई भट्ट

 

Ans: C

Q.5 ध्रुव गोदारा किस खेल से सम्बंधित हैं ?
A. क्रिकेट

  1. पोलो

 

  1. निशानेबाजी

 

  1. कबड्डी

 

Ans: B

 

Q.6 राजस्थान के प्रमुख तीरंदाज हैं ? A. मिल्खा सिंह B. लिम्बा राम C. डूंगरा राम D. भोगीलाल पंड्या

 

Ans: B

 

Q.7 नागौर के एक प्रमुख नेता थे ? A. कल्याण सिंह काल्वी B. रामनिवास मिर्धा C. राजेश पायलट D. भेरूसिंह शेखावत

 

Ans: B

 

Q.8 बांगड़ का गाँधी किसे कहा जाता है ? A. विजयसिंह पथिक B. जमनालाल बजाज C. भोगीलाल पंड्या D. गोकुलभाई भट्ट

 

Ans: C

 

Q.9 कैलाश सांखला सम्बंधित हैं ? A. वन्यजीव B. अर्थशाश्त्र C. जल संरक्षण D. राजस्थानी साहित्य

 

Ans: A

 

Q.10 राजस्थान टेबल टेनिस संघ मुख्यालय कहाँ स्थित हैं ? A. जयपुर B. अजमेर C. गंगानगर D. बीकानेर

 

Ans: B

 

Q.11 “चरखा संघ” की स्थापना किसने की थी ?  A. जमनालाल बजाज B. पी के सेठी C. के के बिड़ला D. डॉ नागेन्द्र सिंह

 

Ans: A

 

Q.12 राजस्थान हॉकी संघ मुख्यालय कहाँ स्थित हैं ? A. जयपुर B. अजमेर C. गंगानगर D. बीकानेर

 

Ans: C

 

Q.13 “कँवर सेन” किससे सम्बंधित हैं ?
A. वन्यजीव
B. अर्थशाश्त्र
C. जल संरक्षण
D. योजनाकार

 

Ans: D

 

Q.14 “हल्दीघाटी पुरुष्कार” किस क्षेत्र में अग्रणी कार्य के लिए दिया जाता है ? A. समाज सेवा B. पत्रकारिता C. खेल D. बहादुरी

 

Ans: B

 

Q.15 “जयपुर फुट” के संस्थापक कौन हैं ? A. जमनालाल बजाज B. पी के सेठी C. के के बिड़ला D. डॉ नागेन्द्र सिंह

 

Ans: B

 

Q.16 राजस्थान वॉलीबॉल संघ मुख्यालय कहाँ स्थित हैं ? A. जयपुर B. अजमेर C. गंगानगर D. बीकानेर

 

Ans: A

 

Q.17 “ऑपरेशन सरस्वती” किसके द्वारा चलाया गया है ?

 

  1. ONGC

 

  1. BSNL

 

  1. Hindustan Copper Ltd.

 

  1. RBSE (Rajasthan Board of Sec. Education), Ajmer

 

Q.18 देश में RTI ACT. को लागु करने वाला पहला राज्य कोनसा था ? A. राजस्थान B. मध्यप्रदेश C. केरल D. गुजरात

 

Ans: A

 

Q.19 राजा हम्मीर कहाँ का शाशक था ?

 

  1. चित्तोड़गढ़

 

  1. रणथम्भोर

 

  1. उदयपुर

 

  1. जोधपुर

 

Ans: B

 

Q.20 “रूपायन संस्थान” कहाँ स्थित है ?

 

  1. तिलोनिया, अजमेर

 

  1. पावटा, जोधपुर

 

  1. चोमू ,जयपुर

 

  1. गोगुन्दा , उदयपुर

 

Ans: B. Borunda, Jodhpur

 

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 Rajasthan Districts wise General Knowledge

1. अजमेर  6. भरतपुर  11. चित्तौड़गढ़  16. हनुमानगढ़  21. झुंझुनूं  26. पाली  31. सिरोही 
2. अलवर  7. भीलवाड़ा 12. दौसा  17. जयपुर  22. जोधपुर  27. प्रतापगढ़  32. टोंक
3. बांसवाड़ा  8. बीकानेर  13. धौलपुर  18. जैसलमेर  23. करौली  28. राजसमंद  33. उदयपुर 
4. बारां  9. बूंदी  14. डूंगरपुर  19. जालोर  24. कोटा  29. सवाई माधोपुर 
5. बाड़मेर  10. चुरू  15. गंगानगर  20. झालावाड़  25. नागौर  30. सीकर 

Q.936 भारतीय बैले के जनक कौन कहलाते है
A. कोमल कोठारी
B. उदय शंकर
C. कमल साकर खा
D. सुरजीत कोर चोयल
Ans: B

Q.937 Which state is first to provide Industry status to Tourism ?
A. UP
B. Delhi
C. Rajasthan
D. MP
Ans: C (Rajasthan in 1989)

Q.938 देश में राजस्थान किसका प्रमुख उत्पादक है?
A. चना
B. गेहू
C. कपास
D. सरसो
Ans: D

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Q.939 First Rope-way in rajasthan was started in ?
A. Bhimnal, Jalore
B. Pushkar, Ajmer
C. Udaipur
D. Galtaji, Japur
Ans: A (Bhimnal rope-way in 20 December 2006)

Q.940 Jaipur Metro Rail Corporation (JMRC) was incorporated on ?
A. 1st January 2008
B. 1st January 2010
C. 1st July 2008
D. 1st July 2010
Ans: B

Q.941 Which tourism site in rajashtan is among “Seven wonders of India” ?
A. City palace, Udaipur
B. Jantar-Mantar
C. Jaisalmer Kila
D. Mehrangarh Fort
Ans: C

Q.942 Which district of rajasthan have Naro-guage railway line ?
A. Ajmer
B. Dholpur
C. Sirohi
D. Udaipur

Q.943 Which statement is NOT True about Tourism ?
A. Tourism is 2nd Highest Industry to earn Foreign currency
B. 1/3 of Foreign tourist visits rajastan
C. HigHest Foreign visitor’s visit Ajmer
D. Highest Foreign visitor’s are from France
Ans: C

Q.944 हिंडोला महोत्सव कहाँ आयोजित होता है
A. जयपुर
B. पुष्कर
C. उदयपुर
D. जैसलमेर

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Q.945 TAF is ?
A. Tata Auto Factory
B. Tourist Assistance Force
C. Tourist At Fort
D. Travel at Fort
Ans: B (TAF started in 2000 with Ex-Serviceman)

Q.946 हाथी गाँव कहाँ स्थित है
A. कुंडा
B. तिलोनियाँ
C. नारेली
D. कोटपुतली
Ans: A ( Kunda Gram near Aamer, Jaipur on NH-8)

Q.947 मरू महोत्सव कहाँ आयोजित होता है
A. बाड़मेर
B. बीकानेर
C. पुष्कर
D. जैसलमेर
Ans: D

Q.948 साल्व प्रदेश कौनसा क्षेत्र हैं
A. गंगानगर
B. बीकानेर
C. अलवर
D. झालावाड
Ans: C

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Q.949  A Money Bill passed by the Lok Sabha is deemed to have been passed by the Rajya
Sabha also when no action is taken by the Upper House within:
A. 10 days
B. 14 days
C. 20 days
D. 30 days
Ans: B

Q.950. Name the committee for formulating the framework of restructuring railways:
A. Jain Committee
B. Venkatachelliah
C. Rakesh Mohan Committee
D. Dinesh Goswami Committee
Ans: C

Q.921 Name the school of painting in which stress is given on Birds and Animals ?
A. Kishangarh School
B. Bundi school
C. Bikaner school
D. Jaipur school
Ans: BQ.922 मार्बल नगरी के नाम से मशहूर शहर का नाम है ?
A. उदयपुर
B. कोटा
C. किशनगढ़
D. राजनगर
Ans: CQ.923 Which Rajpur rular continued his struggle for Independance against Mugals and did not surrender ?
A. Raisingh of Bikaner
B. Rao Chandrasen of Marwar
C. Raja Bharmal of Amber
D. Mansingh of Jaipur
Ans: B

Q.924. Which of following gas has minimum quanitity of Atmosphere ?
A. Argon
B. Carbon-di-oxide
C. Nitrogen
D. Oxygen
Ans: B

Q.925 टायर ट्यूब उद्योग राजस्थान में कहाँ स्थित हैं ?
A. केलवा
B. करोली
C. कांकरोली
D. कोटपुतली
Ans: C
Q.926 शेखावाटी क्षेत्र का प्रमुख नृत्य है ?
A. घूमर
B. दे ताली
C. गीदड़
D. ग़ैर
Ans: C

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Q.927 उदयपुर क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा है ?
A. मारवाडी
B. मेवाडी
C. खड़ी
D. हाडोती
Ans: B

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Q.928 तेजाजी की घोड़ी का क्या नाम था ? (RAS 2007)
A. चेतक
B. लीलन
C. जीवन
D. वीरम
Ans: B

Q.929 राजस्थान का खुजराहो कहा जाता है ?
A. किराडू मंदिर
B. कालीबंगा मंदिर
C. रणकपुर मंदिर
D. ओशियाँ मंदिर
Ans: A
Q.930 Which of following is a true Fish ?
A. Star fish
B. Jelly fish
C. Hang fish
D. Sea fish
Ans: AQ.930 टेलीफोन नम्बर 1098 किससे सम्बंधित है ?
A. राजस्थान पुलिस
B. BSNL ब्रॉडबैंड
C. चुनाव आयोग
D. चाइल्ड लाइन
Ans: D
Q 931. अलगोजा वाद्य-यन्त्र बजाया जाता है ?
A. हाथ से
B. मुंह से
C. लकड़ी के डंडे से
D. ढोलक की तरह

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Ans: BQ.932 राजस्थानी महिलाओं द्वारा “कणकती” आभुषण पहनी जाती है ?
A. कमर में
B. हाथ में
C. पैर में
D. गले में
Ans: A

Q.933 बिश्नोई संप्रदाय के संस्थापक का नाम है ?
A. जाम्भोजी
B. दादू दयालजी
C. जसनाथजी
D. रामदेवजी
Ans: AQ. 934 Ashok Leland संयत्र कहाँ स्थित है ?
A. कोटा
B. जयपुर
C. अलवर
D. अजमेर
Ans: CQ.935 Light year is unit of:
A. Distance
B. Time
C. Age
D. Intensity of light
Ans: A

Q.686 भारत की पहली महिला मुख्य मन्त्री कौन बनीं?
A. सरोजनी नायडू
B. सुचेता कृपलानी
C. जय ललिता
D. इन्दिरा गांधी
Ans: BQ.687 Ravindra Nath Tegor (RNT) Medical College is situated at ?
A. Jaipur
B. Jodhpur
C. Udaipur
D. Kota
Ans: CQ.688 निम्न इमारतों में से कौन सी इमारत फतेहपुर सीकरी में स्थित नहीं है?
A. मोती मस्जिद
B. मरियम भवन
C. पंच महल
D. सलीम चिश्ती का मकबरा
Ans: A

Q.689 “जलमहल” किस झील में स्थित है ?
A.फतेहसागर
B.मानसागर
C.राजसमन्द
D.आनासागर
Ans: B

Q.690 RJ-01 is registration code of which district ?
A. Alwar
B. Ajmer
C. Bikaner
D. Bikaner
Ans: B

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Q.691 कर्क रेखा को दो बार पार करने वाली नदी कोनसी है ?
A. बनास नदी
B. लूनी नदी
C. माही नदी
D. चम्बल नदी
Ans: C

Q.692 राजस्थान में रॉक फॉस्फेट कहां पाया जाता है ?
A.उदयपुर
B.रामपुरा
C.भीलवाड़ा
D.बांसवाड़ा
Ans: A

Q.693 बाणगंगा राजस्थान के किन तीन जिलों में बहती है ?
A.जयपुर, दौसा, भरतपुर
B.अलवर, सीकर, झुंझुनू
C.जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर
D.कोटा, बारां, झालावाड
Ans: A

Q.693 महिला शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित पद्मश्री मिस लूटर का कार्य क्षेत्र था ?
A.जयपुर
B.जोधपुर
C.अजमेर
D.उदयपुर
Ans: A

Q.694 राजस्थान के प्रथम वित्त मंत्री कौन थे ?
A.हीरालाल शास्त्री
B.जमनालाल बजाज
C.टीकाराम पालीवाल
D.चंदनमल बैद
Ans: D

Q.695 कितने डिग्री सेल्सियस पर पानी का घनत्व सर्वाधिक होता है?
A.40
B.4
C.-4
D. 0
Ans: B

Q.696 महाराणा सांगा और बाबर के बीच खानवा का युद्ध सन् 1527 ई. में किस जिले में हुआ?
A. भरतपुर
B. दौसा
C. अलवर
D. चित्तौड़गढ़
Ans: A

Q.697 प्रसिद्ध लोककथा संग्रह “बातां री फुलवारी” के रचयिता हैं-
A. कोमल कोठारी
B. विजयदान देथा
C. केसरीसिंह बारहठ
D. सूर्यमल्ल मिश्रण
Ans: B

Q.698 टाइगरमैन के नाम से विख्यात पर्यावरणविद् थे-
A. राजेन्द्र सिंह
B. फतह सिंह राठौड़
C. अमृता देवी
D. सुंदर लाल बहुगुणा
Ans:B

Q.699 राजस्थान में सफेद सीमेंट सबसे ज्यादा कहाँ होती है
A.गोटन
B.निम्बाहेडा
C.करौली
D.उदयपुर
Ans: A

Q.700 मीराबाई के पति का क्या नाम था
A.राणा रतनसिंह
B.भोजराज
C.कृष्ण
D.उदयसिंह
Ans: B

Q.676 राजस्थान के पश्चिम की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा कहलाती है –
A. मेक मोहन रेखा
B. कर्क रेखा
C. रेड किल्फ रेखा
D. इनमें से कोई नहीं
Ans: CQ.677 राज्य का सर्वाधिक न्यूनतम वन क्षेत्र वाला जिला है –
A. गंगानगर
B. हनुमानगढ़
C. चूरू
D. जोधपुर
Ans: cQ.678 राज्य में सर्वाधिक मसाले किस जिले में उत्पादित होते हैं?
A. गंगानगर
B. बाराँ
C. डूंगरपुर
D. बांसवाड़ा
Ans:B

Q.679 राजस्थान की प्रथम लोक अदालत किस जिले में लगाई गई थी?
A. कोटा
B. अजमेर
C. जोधपुर
D. जयपुर
Ans: A

Q.680 “उड़न गिलहरी” के लिए प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्य है ?
A. सीतामाता
B. फुलवारी की नाल
C. कुम्भलगढ़
D. टाटगढ़ रावली
Ans: A

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681 “समदडी” में किस लोक देवता का मेला प्रतिवर्ष चेत्र शुक्ल पूर्णिमा को लगता है ?
A.पाबूजी
B.तेजाजी
C.मलूकदास
D.पीपा
Ans: D

Q.682 ”संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय” वाराणसी की स्थापना किसने की?
A. लार्ड मेयो
B. लार्ड कार्नवालिस
C. लार्ड डलहौजी
D. लार्ड कर्जन
Ans: B

Q.683 “ब्ल्यू पोट्री” कला कहाँ की प्रसिद्ध है ?
A.किशनगढ़
B.जयपुर
C.बालोतरा
D.अकोल
Ans: B

Q.684 “जानकी लाल भांड” किस कला के प्रसिद्ध कलाकार है ?
A.स्वांग
B.फड़
C.तमाशा
D.ख्याल
Ans: A

Q.685 घडियालों की शरण स्थली किसे कहा जाता है ?
A. बनास नदी
B.माही नदी
C. लूनी नदी
D. चम्बल नदी
Ans: D

Q.666 तलवारें कहाँ की बनी हुई प्रसिद्ध है
A. सिरोही
B. नागौर
C. अलवर
D. भरतपुर
Ans: AQ.667 गरासिया जनजाति किन राजपूतों के वंशंज है
A. परमार
B. चौहान
C. सिसोदिया
D. इनमे से कोइ नहीं
Ans: BQ.668 अरावली श्रेणी की दूसरी सबसे ऊँची चोटी है
A. गुरु शिखर
B. सेर
C. रिगढ़
D. तारागढ़
Ans: B

Q.669 कौन सा नृत्य होली पर नहीं किया जाता ?
A. गेर
B. नेजा
C. चंग
D. पनिहारी
Ans: D

Q.670 छप्पन बेसिन किस जिले में है ?
A. अलवर
B. बांसवाडा
C. पाली
D. उदयपुर
Ans: B

Q.671 भारत की सबसे प्राचीनतम पर्वत श्रृंखला है ?
A. अरावली
B. विंध्य
C. सतपुड़ा
D. हिमालय
Ans: A

Q.672 राजस्थान दिवस कब मनाया जाता है ?
A 28 March
B 29 March
C 30 March
D 31 March
Ans:C

Q.673 राजस्थान का क्षेत्रफल है ?
A. 3,42,239 वर्ग किमी.
B. 3,45,240 वर्ग किमी.
C. 3,30,238 वर्ग किमी.
D. 3,42,259 वर्ग किमी
Ans: A

Q.674 राज्य में ऐसे कौन से जिले है जहाँ कोई नदी नहीं है?
A. चूरू व बीकानेर
B. सिरोही व पाली
C. डूंगरपुर व बांसवाड़ा
D. बीकानेर व गंगानगर
Ans:A

Q.675 राजस्थान का कौन सा शहर कर्क रेखा के सबसे निकट स्थित है?
A. डूंगरपुर
B. बांसवाड़ा
C. उदयपुर
D. जैसलमेर
Ans: B

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Q.631 गुड़गांव नहर परियोजना से कौनसे जिले में सिंचाई होती है ?
A. अलवर
B. जयपुर
C. भरतपुर
D. कोटा
Ans: C

Q.632 उत्तर भारत का सर्वप्रथम पूर्ण साक्षर जिला है ?
A. अजमेर
B. मंदसौर
C. कानपुर
D. झांसी
Ans: A

Q.633 अजबदे पंवार कौन थी ?
A. पृथ्वीराज चौहान की मां
B. महाराणा प्रताप की पत्नी
C. मेवाड़ की संत
D. स्वतंत्रता सेनानी
Ans: B

Q.634 The Current “Rajasthan Industrial and Investment Promotion Policy” is adopted in year ?
A. 2010
B. 2008
C. 2012
D. 2003
Ans: A

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Q.635 औरंगजेब ने ताजमहल के समान मकबरा/स्थल कहाँ बनवाया था ?
A. अहमदाबाद
B. दौलताबाद
C. होशिन्गाबाद
D. औरंगाबाद
Ans: D

Q.636 Which one among the following statement is correct
A. All enzymes are proteins
B. All Proteins are enzymes
C. None of the enzymes is protein
D. None of proteins is enzymes
Ans:A

Q.637 In sonar we use –
A. Radio wave
B. Audible sound wave
C. infrasonic waves
D. ultrasonic waves
Ans: D

Q.638 The first house of every sitting of the Lok sabha is called ?
A. Question hour
B. Public Hour
C. Zero Hour
D. Privilege Hour
Ans: A

Q.639 Which one of the following is main cause of Energy in Sun
A. Diffusion reaction
B. Chemical reaction
C. Nuclear Fusion
D. Nuclear Fission
As: C

Q.640 The most Abundant gas in the Earth’s atmosphere is ?
A. Nitrogen
B. Oxygen
C. Carbon dioxide
D. Hydrogen
Ans: A

Q.641 राजस्थान में पेट्रोल रिफाईनरी किसके सहयोग से लगायी जा रही है ?
A. IOCL
B. ONGC
C. BPCL
D. HPCL
Ans: D

Q.642 राजस्थान का कौन सा शहर पाकिस्तान की सीमा के सबसे नज़दीक है ?
A. बीकानेर
B. जैसलमेर
C. गंगानगर
D. हनुमानगढ़
Ans: C

Q.643 राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा शहर कौन सा है ?
A. जयपुर
B. जोधपुर
C. कोटा
D. उदयपुर
Ans: B

Q.644 “बीसलपुर बाँध” किस जिले में स्थित है ?
A. अजमेर
B. टोंक
C. पाली
D. बारा
Ans: B

Q.645 “पंच-परमेश्वर” का सिद्धांत किस जनजाति में है ?
A. मीणा
B. भील
C. कालबेलिया
D. सहरिया
Ans: A

Q.616 1972 तक भारत का “राष्ट्रिय पशु” क्या था ?
A. बाघ
B. शेर
C. हाथी
D. ऊंट
Ans: B

Q.617 Bhooton ka Kila is situated at ?
A. Mangarh
B. Bhangarh
D. Shangarh
D. Anoopgarh
Ans: B

Q. 618 OPEC headquarter is at ?
A. Geneva
B. Geneva
C. Singapore
D. Viena
Ans:D

Q.619 होली कब मनाई जाती है ?
A. फाल्गुन, अमावश्या
B. फाल्गुन, पूर्णिमा
C. कार्तिक, अमावश्या
D. कार्तिक, पूर्णिमा
Ans: B

Q.620 “आखा-तीज” किसके लिए जानी जाती है ?
A. विवाह का एक उत्तम मुहूर्त है
B. फसल काटने का पर्व है
C. सावन में मनाये जाने वाला पर्व है
D. होली के 3 दिन बाद मनाये जाने वाला पर्व है
Ans: A

Q.621 राजस्थान का भुवनेशवर किसे कहते हैँ ?
A.ओसियाँ
B.किशनगढ़
C.डीडवाना
D.पोकरण
Ans: A

Q.622 राजस्थान में क्रिकेट का प्रारंभ कहाँ हुआ ?
A. अजमेर
B. जयपुर
C. जोधपुर
D. बीकानेर
Ans:A

Q.623 राजस्थान में “महला-बगरू” कहाँ स्थित हैं ?
A. अजमेर
B. जयपुर
C. नागौर
D. अलवर
Ans: B

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Q.624 राजस्थानी हिंदी के अंतर्गत कौन सी बोली नहीं आती ?
A. मालवी
B. मगही
C. मेवाती
D. मारवाड़ी
Ans: B

Q.625 National Library of India of India is situated at ?
A. Delhi
B. Mumbai
C. Kolkata
D. Chennai
Ans: C

Q. 626 हाल ही में किस देश के प्रधान-मंत्री अजमेर आये थे?
A. अमेरिका
B. जापान
C. चीन
D. पाकिस्तान
Ans: D

Q.627 इसाई धर्म के नये पोप के चुने जाने पर सेंट पीटर स्क्वायर पर चिमनी में से कैसा धुआं निकाला जाता है ?
A. काला
B. सफ़ेद
C. कोई धुँआ नहीं निकालता
D. लाल
Ans: B

Q.628 New Pope Fransis belongs to which country ?
A. USA
B. Argentina
C. UK
D. Brazil
Ans: B

Q.629 Who is current CM of Punjab ?
A. Capt. Amrinder Singh
B. Prakash Singh Bhadal
C. Sukhveer Singh Badal
D. Prakat Singh
Ans: B

Q.630 “राष्ट्रीय महिला आयोग” की अध्यक्ष कौन है ?
A. गिरिजा व्यास
B. अनीता शर्मा
C. ममता शर्मा
D. रेणुका चौधरी
Ans: C

Q.601 रंगमाला के लेखक कौन थे ?
A. पुंडरिक विट्ठल
B.राधाकृष्ण
C. राणा कुम्भा
D. हम्मीर
Ans: A

Q.602 “फूंदी” का संबंध है ?
A. चित्रकला
B. लोक नृत्य
C. संगीत
D. मूर्तिकला
Ans: B

Q.603 राधा गोविन्द संगीत सार के लेखक कौन थे ?
A. पुंडरिक विट्ठल
B. राधाकृष्ण
C. सवाई प्रताप सिंह
D. हम्मीर
Ans: C

Q.604 लकड़ी पर निर्मित चित्र कहे जाते हैं ?
A. पिछवाई
B. कावड़
C. पाने
D. पथवारी
Ans: B

Q.605 राग कल्पद्रम के लेखक कौन थे ?
A. कृष्णानंद व्यास
B. राधाकृष्ण
C. राणा कुम्भा
D. हम्मीर
Ans: A

Q.606 कागज़ से निर्मित चित्र कहे जाते हैं ?
A. पिछवाई
B. फड
C. पाने
D. पथवारी
Ans: C

Q.607 संगीत राज के लेखक कौन थे ?
A. पुंडरिक विट्ठल
B. राधाकृष्ण
C. राणा कुम्भा
D. हम्मीर
Ans: C

Q.608 रागमंजरी के लेखक कौन थे ?
A. पुंडरिक विट्ठल
B. राधाकृष्ण
C. राणा कुम्भा
D. हम्मीर
Ans: A

Q.609 भित्ति चित्र कहे जाते हैं ?
A. पिछवाई
B. फड
C. पाने
D. पथवारी
Ans: D

Q.610 मानव शरीर पर निर्मित चित्र कहे जाते हैं ?
A. पिछवाई
B. गुदना
C. पाने
D. पथवारी
Ans: B

Q.611 राग रत्नाकर के लेखक कौन थे ?
A. पुंडरिक विट्ठल
B. राधाकृष्ण
C. राणा कुम्भा
D. हम्मीर
Ans: B

Q.612 राजस्थानी भाषा में “गोफण” किसे कहा जाता है ?
A. पशुओं को बांधने का स्थान
B. खेत में चिड़िया उड़ाने वाला रस्सी का यन्त्र
C. कुत्ते के गले का पट्टा
D. खेत में बना लकड़ी / कपडे का बूत
Ans: B

Q.613 “Elephant Festival” is held in which city of Rajasthan ?
A. Udaipur
B. Jaipur
C. Jodhpur
D. Bikaner
Ans: B

Q. 614 बजट 2013-14 में वार्षिक योजना का आकर कितना निर्धारित है ?
A. 40139 करोड़
B. 41039 करोड़
C. 33250 करोड़
D. 40533 करोड़
Ans: A

Q.615 “Roof-Top Power Generation scheme” is proposed in which City ?
A. Jaipur
B. Bikaner
C. Jodhpur
D. Jaisalmer
Ans: C

 

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