July 11, 2018 | Hindigk50k

रम्पलस्टिल्टस्किन हिंदी कहानी Hindi Story Dwarf Rampalstiltskin

रम्पलस्टिल्टस्किन हिंदी कहानी Hindi Story Dwarf Rampalstiltskin | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, रम्पलस्टिल्टस्किन हिंदी कहानी Hindi Story Dwarf Rampalstiltskin , moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

रम्पलस्टिल्टस्किन हिंदी कहानी Hindi Story Dwarf Rampalstiltskin 

एक समय में एक कारखाने के मालिक की एक सुंदर लडकी थी. एक दिन राजा के सामने उसने अपना महत्व जताने के लिए कह दिया कि उसकी एक बेटी है, जो घास से बुनकर सोना बना सकती है. राजा को सोने से बेहद प्यार था. उसने सोचा, ”यह कला तो मुझे बेहद पसंद आयेगी.” और उसने कारखाने के मालिक से कहा, “यदि तुम्हारी लडकी इतनी चतुर है तो उसे एक दिन महल में लेकर आओ. मैं उसका काम देखूँगा.”

sleepy

जैसे ही वह महल में आयी, राजा उसे एक कमरे में ले गया, जिसमें घास भरी थी. राजा ने उसे एक चरखा और चरखी दी और बोला, ”अब काम शुरू करो. यदि कल सुबह तक तुमने सारी घास को काटकर सोना न बना दिया तो तुम अपनी जान से हाथ धो बैठोगी.” यह कहकर उसने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और लडकी को अकेला छोड़ दिया.

वहाँ वह बहुत देर तक बैठी रही और अपनी जान बचाने के बारे में सोचते रही, क्योंकि वह तो घास से सोना कातने की कला बिलकुल भी नहीं जानती थी. उसकी चिंता बढती गयी और आखिरकार वह रोने लगी. तभी दरवाजा खुला और एक बौना भीतर आकर बोला, ”नमस्कार, सुंदर लडकी, तुम इतनी बुरी तरह क्यों रो रही हो?” वह बोली, ”ओह, मुझे इस घास को कातकर सोना बनाना ही होगा, जो कि मुझे आता ही नहीं है.”
बौने ने पूछा, “यदि मैं तुम्हारे लिए यह कात दूं तो तुम मुझे क्या दोगी?”

लडकी बोली, “मेरा हार”

बौने ने हार ले लिया और चरखे के सामने बैठ गया – सर्र,सर्र,सर्र. तीन बार पहिया घूमा और चरखी भर गयी. फिर उसने दूसरी तरफ लगाया – सर्र,सर्र,सर्र,तीन बार फिर और दूसरी चरखी भर गईं. वह इसी तरह पूरी रात काम करता रहा. जब तक कि पूरी घास खत्म नहीं हो गयी और सारी चरखियां सोने से भर गईं. अगले दिन सुबह-सुबह राजा आया और सोने को देखकर चकित रह गया. वह बेहद खुश था, लेकिन संतुष्ट नहीं, वह लडकी को एक दूसरे और बड़े घास से भरे कमरे में ले गया और उसे जान की धमकी देते हुए घास को कातकर सोना बनाने के लिए कहा.

लडकी परेशान थी और रो रही थी कि तभी पहले की तरह अचानक दरवाजा खुला और बौना भीतर आया. बौने ने पूछा कि लडकी उसे सहायता के बदले क्या देगी. वह बोली, “मेरी अंगूठी,” बौने ने अंगूठी ली और काम शुरू कर दिया. सुबह तक सारी घास सोने में बदल गयी थी. राजा बेहद खुश था, लेकिन अभी भी संतुष्ट नहीं. वह लडकी को तीसरे और बड़े कमरे में ले गया, उसमें भी और कमरों की तरह घास भरी थी. वह बोला, “यह सब तुम रात भर में कात लोगी तो मैं तुमसे विवाह कर लूँगा.” उसने सोचा, “क्योंकि इतनी अमीर पत्नी दुनिया में किसी और को नहीं मिलेगी.”

जब लड़की अकेली रह गयी तो बौना फिर आ गया और उसने तीसरी बार लड़की से पूछा, ”यदि मैं यह कात दूं तो तुम मुझे क्या दोगी?”
लड़की बोली, “मेरे पास तो कुछ नहीं है, तुम्हें देने के लिए.” वह बोला, ‘तब मुझे अपना पहला बच्चा देने का वादा करो.”

लड़की ने सोचा, “कौन जनता है कि कब क्या होगा?” उसे इस मुसीबत से बचने का कोई रास्ता न मालूम था. उसने हाँ कर दी. वह तुरंत बैठ गया और काम खत्म कर दिया. जब सुबह हुई और राजा ने देखा कि उसकी इच्छा पूरी हो गयी है तो उसने लड़की से विवाह कर लिया और कारखाने के मालिक की सुंदर लड़की रानी बन गयी.

एक साल बाद जब वह बौने को बिलकुल भूल चुकी थी, उसका एक बेटा पैदा हुआ. तभी अचानक बौना आया और उसने अपनी इच्छा दुहराई. भयभीत रानी ने उसे अपने राज्य की अमूल्य सम्पति लेकर अपने बेटे को छोड़ने के लिए कहा, लेकिन बौना बोला- “नहीं, दुनिया की सारी सम्पत्ति से अधिक मुझे बच्चा प्यारा है.”

रानी इतना रोयी और चिल्लायी कि बौने को उस पर दया आ गयी और वह बोला, “मैं तुम्हें तीन दिन का समय देता हूँ. इस बीच यदि तुम मेरा नाम पता लगा लोगी तो मैं तुम्हारे बच्चे को छोड़ दूँगा.”

पूरी रात रानी सोचती रही. फिर उसने एक आदमी को पूरे देश में अनोखे और नये नाम खोजने के लिए भी भेजा. अगली सुबह बौना आया और रानी ने ‘कैस्पर,’ ‘मुलशुआर, ’बाल्थासार’और दूसरे अजीब नामों से शुरूआत की, लेकिन हर बार बौना बोलता, “यह मेरा नाम नहीं हैं.”

दूसरे दिन रानी ने अपने आदमियों से नाम पूछे और बौने को ‘गाय की पसली’,’भेड़ का कंधा’और ‘ह्वेल की हड्डी’ कहकर बुलाया. लेकिन हर बार वह बोला, “यह मेरा नाम नहीं है.” तीसरे दिन रानी का एक आदमी वापस आया और बोला, “मुझे एक भी नाम नहीं मिला. लेकिन जब मैं जंगल के पास एक ऊँचे पहाड़ पर आया, जहाँ लोमड़ियाँ और खरगोश एक दूसरे को शुभरात्रि कह रहे थे, तो मैंने वहां एक छोटा-सा घर देखा. उस घर के दरवाजे के सामने आग जल रही थी. आग के आसपास अनोखा-सा बौना एक पैर पर नाच रहा था और जोर-जोर से गा रहा था.-

“आज तो मैंने उबला है, लेकिन कल उसे भूनूंगा,
कल मैं रानी का बच्चा लूँगा;
आह! कितना प्रसिद्ध है, पर सब हैं अनजान,
कि मेरा नाम है – “रम्पलस्टिल्टस्किन.”

जब रानी ने यह सुना तो वह बहुत खुश हुई क्योंकि अब उसे नाम पता चल गया था. जल्दी ही बौना आया और बोला, “अब बोलो रानी, मेरा नाम क्या है?”

पहले वह बोली, “क्या तुम्हारा नाम है कामर्स?” “नहीं.”

“क्या तुम हल हो?”

“नहीं.”

“क्या तुम्हारा नाम है रम्पलस्टिल्टस्किन?”

“जरूर जादूगरनी ने तुम्हें बताया है – जादूगरनी ने बताया है.” बौना चीखा और उसने अपना दायाँ पैर गुस्से में इतनी जोर से जमीन पर पटका कि वह उसे दोबारा उठा ही नहीं पाया. फिर उसने दोनों हाथों से अपना बायां पैर पकड़ा और दायाँ पैर इतनी जोर से खींचा कि वह बाहर आ गया और जोर से चीखते हुए दूर भाग गया. उस दिन के बाद से आज तक रानी ने अपने उस दुष्ट मेहमान को फिर कभी नहीं देखा.

इस कहानी से यह सीख मिलती है कि धैर्य और बुद्धिमत्ता से कठिन से कठिन समस्या का समाधान हो जाता है. आपको इस कहानी को पढने के लिये और इस ब्लॉग पर पधारने के लिये बहुत – बहुत धन्यवाद!

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

कमाने की कला हिंदी कहानी Art of Earning Hindi Story

कमाने की कला हिंदी कहानी Art of Earning Hindi Story | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, कमाने की कला हिंदी कहानी Art of Earning Hindi Story,  moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

कमाने की कला हिंदी कहानी Art of Earning Hindi Story 

Art of Earning Hindi Story  में यह बताया गया है कि बुद्धिमान व्यक्ति हर स्थिति में शांत रहकर कोई न कोई उपाय जरुर निकाल लेता है. किसी  राजा के राज्य में एक मुंशी जी थे. वे राजा के करिन्दा थे. मुंशी जी बहुत ही चतुर व्यक्ति थे.कमाने का कोई अवसर हाथ से जाने नहीं देते. अगर गुंजाइश न हो तो भी कोई न कोई राह निकाल ही लेते. जबान के मीठे और कलम के तेज उनके बारे में यह प्रसिद्ध था कि वे इस तरह पैसा बनाते हैं कि न तो कभी जनता को किसी प्रकार की कोई शिकायत होती, न ही राजकोष को कोई हानि. मुंशी जी दाल में नमक के बराबर खाते थे. जनता भी खुश, राजा भी खुश और मुंशी जी भी खुश.

art of earning

धीरे-धीरे मुंशी जी की ख्याति राजा के कानों में पड़ी. राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ. एक दिन उन्होंने मुंशी जी बुलवा भेजा. मुंशी जी कान पर कलम रखे, अपना चौपडा बगल में दबाये, फौरन हाजिर हुए. राजा को सलाम किया और डर के मारे कांपते हुए से एक तरफ खड़े हो गये.
राजा ने पूछा –‘मुंशी जी आपकी बड़ी तारीफें सुनी हैं. कभी आपकी कोई शिकायत नहीं मिली.’

सब आपकी कृपा है, गरीब परवर, मुंशी जी बोले.

Art of Earning Hindi Story

मुंशी जी, आपको भी कुछ मिल जाता है? राजा ने कहा. मुंशी जी बोले ‘सारी रियाया ही आपका दिया खाती है अन्नदाता. राजा समझ गये कि मुंशीजी काफी चतुर, पैसा कमाने में घाघ तथा औरों की तुलना में ज्यादा विश्वस्त हैं. मुंशी जो भी समझ गये कि दाई के आगे पेट छिपाना बेवकूफी है. राजा ने कुछ जानकर ही उन्हें बुलवाया है और यह सवाल पूछ रहा है. अत: जबाब इस प्रकार दिया जाये कि झूठ बोलकर राजा की निगाह में गिरने की नौबत भी न आये और इस विषम अवसर का कुछ फायदा भी मिले.

राजा मुंशी जी से बातचीत कर बहुत संतुष्ट हुआ. उसने उन्हें एक घड़े में से सौ लड्डू दिये और कहा कि कल शाम इन लड्डूओं को लेकर वापस आना. इनकी संख्या कम नहीं होनी चाहिये, न ये टूटे. आपको भी कुछ मिले.

मुंशी जी ने सिर झुककर कहा – ‘जैसी सरकार की आज्ञा.’ और लड्डू लेकर चले गये.

Art of Earning Hindi Story

घर जाकर मुंशी जी ने एक बांस का टोकरा लिया. घड़े में से एक एक लड्डू निकाल कर टोकरे में रखते. इस प्रकार घड़े में जो चूरा बच जाता, उसे एक वर्तन में रख लेते. इसी प्रकार टोकरे में से लड्डू निकालकर जब घड़े में रखते तब भी कुछ चूरा टोकरे में बच जाता. शाम तक काफी चूरा इकट्ठा हो गया. एक भी लड्डू न कम हुये, न टूटे. सूरज डूबते-डूबते मुंशी जी लड्डू का घडा और चूरे से भरा बर्तन लेकर राजदरबार में हाजिर हुये और राजा से हाथ जोडकर बोले ‘सरकार, माई-बाप, ये लड्डू गिनवा लीजिये. राजा ने गिनवाया तो सौ के सौ लड्डू तहदर्ज मिले. उन्होंने मुस्कुराकर मुंशी जी से पूछा – ‘मुंशी जी, कुछ मिला?’ मुंशी जी ने लड्डूओं के चूरे से भरा बर्तन राजा के सामने रख दिया और हाथ जोडकर एक तरफ खड़े हो गये. राजा बहुत खुश हुये.

राजा ने सोचा कि मुंशी है पूरा घाघ. व्यवहार में भी नफीस है. इसकी अक्लमंदी का एक और इम्तहान लेना चाहिये. इस बार इसे ऐसे काम पर लगाया जाना चाहिये जहाँ कुछ मिलने की संभावना शून्य हो. अत: उन्होंने मुंशी जी से कहा –‘मुंशी जी, कल से आप नदी के किनारे बैठकर लहरें गिनिये. एक सप्ताह में आकर मुझे बतलाइये कि आपने क्या किया? मुंशी जी सिर झुकाकर चले गये.

दूसरे दिन सबेरे ही मुंशी जी अपना चौपडा और कलम लेकर नदी के घाट पर बैठ गये. वहां उन्होंने एक बड़ी सी तख्ती लगवा दी जिस पर लिखा था –‘शासन के आदेश से लहरों की गिनती. गडबडी पैदा करने वालों को सजा.’ मुंशी जी झूठ-मूठ लहरों की संख्या चौपडा में लिखने लगे.

Art of Earning Hindi Story

अब नाव चलाने वाले परेशान हुये कि क्या माजरा है. उन्होंने मुंशी जी से पूछा. मुंशी जी ने कहा –‘भाई, सीधे राजा साहब का हुक्म है. लहरों में गडबडी नहीं होनी चाहिये.’ नाव वालों ने आपस में सलाह किया कि भाई यह काम पता नहीं कब तक जारी रहेगा. नाव चलाने से लहरें तो टूटेगी ही. अत; मुंशी जी की हथेली गर्म कर अपना काम करें, नहीं तो नाव चलाना बंद कर देने से पता नहीं कब तक कमाई बंद रहेगी.’ और मुंशी जी को हर फेरे की उतराई का कुछ न कुछ देने लगे. दूसरे दिन उस पार मेला था.

उसमें मुंशी जी को और भी आमदनी हुई. धीरे-धीरे प्रचार होने लगा. अब तो नहाने वाले, जानवरों को धोने वाले, मछली मारने वाले सभी से बिना मांगे मुंशी जी को कुछ न कुछ मिलने लगा.

सप्ताह बीतने पर मुंशी जी राजा के दरबार में हाजिर हुये और रूपयों से भरी थैली राजा के सामने रखकर हाथ जोडकर एक कोने में खड़े हो गये.

राजा ने मुंशी जी की अक्ल का लोहा मान लिया. उन्हें अपना वजीरे खजाना बना लिया.

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

पैसा माँ बाप रिश्ता नहीं हिंदी कहानी Hindi Story

पैसा माँ बाप रिश्ता नहीं हिंदी कहानी Hindi Story | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, पैसा माँ बाप रिश्ता नहीं हिंदी कहानी Hindi Story, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

पैसा माँ बाप रिश्ता नहीं हिंदी कहानी Hindi Story

यह कहानी एक गरीब युवक की है. वह गरीब युवक कमाने के लिए गांव से शहर आया. कुछ समय बाद उसको अच्छी नौकरी मिल गयी.
इसी दौरान उसके कई भी दोस्त बन गए. इनमें से एक दोस्त का घर रास्ते में ही पड़ता था। दोनों ऑफिस साथ -साथ जाया करते थे।

hindistory

वक़्त बीतता गया, काम चलता रहा। अब उसे नौकरी में भी तरक्की मिल गयी थी. तनख्वाह भी अच्छी खासी हो गयी थी. वह बहुत खुश था।
आज उसका जन्म दिन है. वह आज बहुत प्रसन्न है. ऑफिस में लोगों ने जन्म दिन की बधाइयाँ दी. शाम को ऑफिस से छूटते ही अपने दोस्तों को साथ ले शहर के एक बड़े होटल में जबरदस्त पार्टी की. पार्टी समाप्त होते ही सारे दोस्त अपने-अपने घर चले गए गए।

वह गरीब युवक यहाँ आकर इतना घुल-मिल गया कि उसे आपने माँ-बाप, भाई-बहन का जरा भी ख्याल नहीं आया. गांव में
माँ-बाप ने अपने बेटे के लिए मंदिर जाकर पूजा की. ईश्वर से अपने बेटे की लंबी उम्र की कामना की.

उसके घर वाले वहां उसपर आस लगाए बैठे थे कि शहर से उनका बेटा आएगा तो सब मुश्किल हल हो जाएगी। लेकिन वह सब भूल गया था. उसे दोस्तों के साथ घूमना, पार्टी करना, फोन पर बातें करना यह करने के लिए उसे समय था, लेकिन अपने घरवालों की ओर कभी ध्यान ज्ञान ही नहीं गया.

पैसों से घर खरीदा, कार ख़रीदी, एक बार भी अपने घर वालों को बुलाना उसने जरुरी नहीं समाझा। ऐशो आराम की सारी चीजें खरीदी, सब कुछ पा लिया।

एक दिन वह अचानक बीमार हुआ, अस्पताल में भर्ती हुआ. रात हुई दवाइयां लेने के बाद डॉक्टर ने उसे आराम करने को कहा।

जब वह सोया तो गहरी नींद में चिल्लाने लगा. माँ-बाबा … माँ-बाबा … माँ-बाबा… रात भर यही चलता रहा. डॉक्टर ने दवाइयां दी लेकिन असर नहीं हो रहा था।

आखिर में सुबह डॉक्टर ने उसके घर सन्देश भिजवाया कि उनका बेटा बीमार है, और यहाँ हॉस्पिटल में भर्ती है. माँ-बाप को जैसे ही पता चला, वे भागे चले आये. माँ ने बेटे को देखते ही अपने सीने से लगाया। उनको देखते ही उसके स्वास्थ्य में बहुत सुधार हुआ. डॉक्टर ने उसे उसी दिन अस्पताल से घर भेज दिया. मानो माँ-बाप उसके लिये दवाइयां बनकर आये थे.

 

उसने पैसों से दुनिया की सारी चीजें खरीदी. पैसों से दोस्त, डॉक्टर, नर्स, दवाइयां सबकुछ उसने पा लिया. सबकुछ मिला, लेकिन माँ-बाप नहीं!

पैसा अच्छा जीवन जीने के लिए आवश्यक है लेकिन माँ, बाप या अन्य कोई रिश्ता भी बहुत जरुरी होता है. कमाने के पीछे रिश्तों को गवाना बेबकूफी है.

दोस्तो, यह कहानी रवि चव्हाण (Sgurram) जो नांदेड़, महाराष्ट् के रहनेवाले हैं, ने भेजी है. अभी रवि एक छात्र हैं और पढाई करते हैं. अपने आस-पास की घटनाओं को देख उसे शब्दों में पिरोकर कहानी लिखना उनका शौक है. बेहतरलाइफ डॉट कॉम की ओर से रवि को बहुत बहुत धनयवाद! मैं इनके उज्ज्वल जीवन की कामना करता हूँ.

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

तीन दिहाड़ी मजदूर हिंदी कहानी Three Daily Wages Workers Hindi Story

तीन दिहाड़ी मजदूर हिंदी कहानी Three Daily Wages Workers Hindi Story | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, तीन दिहाड़ी मजदूर हिंदी कहानी Three Daily Wages Workers Hindi Story , moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

 

तीन दिहाड़ी मजदूर हिंदी कहानी Three Daily Wages Workers Hindi Story 

 

प्रस्तुत कहानी तीन दिहाड़ी मजदूरों  के जीवन से सम्बंधित है. इसमें मानवीय जीवन की कठिनाइयों का वर्णन किया गया है. बेरोजगारी किस तरह से मजदूरों को पलायन करने पर मजबूर कर  देता है.

 Three Daily Wages Workers Hindi Story

तीन दिहाड़ी मजदूर थे. वे हमेशा एक साथ ही कहीं जाते-आते थे और हमेशा एक ही शहर में काम करते थे. लेकिन एक बार उन्हें कोई नौकरी नहीं मिली और धीरे-धीरे उनके पास खाने के लिए भी कुछ नहीं बचा. उन्होंने एक-दूसरे से पूछा कि अब उन्हें क्या करना चाहिए.  एक मजदुर ने प्रस्ताव रखा कि अब उन्हें इस जगह पर नहीं रहना चाहिए, बल्कि अन्य जगह पर जाना चाहिए. वे एक शहर में पहुंचें. वहां काम ढूंढने के लिए वे अलग-अलग हो जाते और शाम को एक सराय पर वापस आ जाते.  एक दिन उन्होंने सराय के मालिक से तय किया कि अगर वे अलग हो गए तो  वे उसे चिट्ठियाँ लिखेंगे, जिससे कि हरेक को पता रहेगा कि दूसरा कहाँ पर है.

यह योजना सबको  अच्छी लगी. आखिर वे सभी यात्रा पर निकल पड़े. सडक पर उन्हें अच्छे कपड़े पहने हुए एक आदमी मिला. उसने उनके बारे में जानना चाहा तो वे बोले, “हम दिहाड़ी मजदूर हैं, हम काम तलाश कर रहे हैं. अभी तक तो हम सफल रहे हैं, लेकिन जब हमें काम मिलना एकदम बंद हो जाएगा, हम अलग-अलग हो जाएँगे.”

अजनबी ने कहा, “इसकी कोई जरूरत नहीं है, मैं कहूँ यदि तुम लोग वैसा ही करो तो तुम्हें काम या पैसे की कमी नहीं होगी. तब तुम सेठ बन जाओगे और बग्घी में चलोगे.”

Three Daily Wages Workers Hindi Story

एक ने कहा, “यदि इससे हमारी खुशी और अंतरात्मा को कोई हानि नहीं होती है तो हम तुम्हारे कहे अनुसार ही करेंगे.”
वह आदमी बोला, “नहीं, मैं तुम्हारा कुछ नहीं लेना चाहता, कम से कम तुम्हारी सुख-शांति तो बिलकुल नहीं.”

दूसरे ने इस बीच अजनबी के पैर देखे. उसके पैरों में से एक घोड़े का खुर था. यह देखकर पहले पहल तो वह उस अजनबी की बात सुनने से डर गया, लेकिन वह बुरा व्यक्ति बोला कि उसे उनकी आत्माओं से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि किसी और की आत्मा उसे चाहिए. यह आश्वासन मिलने पर तीनों ने उसे हामी भर दी. बुरे व्यक्ति ने उनसे कहा कि वह यह चाहता है कि हर सवाल के जबाब में पहला व्यक्ति ‘हम तीनों ‘ दूसरा व्यक्ति “पैसों के लिए” और तीसरा व्यक्ति “यह सही है” चिल्लाए.

यही जबाब उन्हें हर समय देना होगा और कोई दूसरा शब्द मुंह से नहीं निकालना होगा. जब तक वे उसकी बात मानेंगे, उनकी जेबें पैसों से भरी रहेंगी. शुरूआत में बुरे व्यक्ति ने उन्हें बहुत सारे रूपये दिये और एक खास शहर में जाकर एक खास सराय में रूकने के लिए कहा. वे वहां पहुंचे तो सराय के मालिक ने उनके पास आकर पूछा कि उन्हें कुछ खाने के लिए चाहिए या नहीं.

पहले आदमी ने कहा, ’हम तीनों ‘ दूसरा व्यक्ति “पैसों के लिए” और तीसरा व्यक्ति “यह सही है” सराय मालिक ने दोहराया “हाँ, यह सही है.”
जल्दी ही उनके सामने ढेर सारा खाना आ गया. जैसे ही उन्होंने खाना खत्म किया, सराय-मालिक खाने के पैसे लेने आ गया और बिल उनके सामने रख दिया.

Three Daily Wages Workers Hindi Story

पहले आदमी ने कहा, ’हम तीनों’ दूसरा व्यक्ति “पैसों के लिए” और तीसरा व्यक्ति “आप लोग एकदम सही कह रहे है” “आप तीनों को भुगतान करना पड़ेगा. पैसों के बिना मैं आपकी सेवा नहीं कर सकता. सराय-मालिक के ऐसा कहने पर उन्होंने मांगे गये पैसों से भी ज्यादा पैसे निकालकर दे दिये. यह देखकर वहां बैठे मेहमान एक-दूसरे से बोले, “ये लोग एकदम पागल हैं.”

सराय- मालिक बोला, “हाँ, इनकी दिमागी हालत एकदम ठीक नहीं लगती.” फिर भी वे उसकी सराय में रहे और ‘हम तीनों’ ‘पैसों के लिए’ और ‘यह सही है’ के अलावा एक भी शब्द नहीं बोले, इसके अलावा वे वहाँ की एक-एक गतिविधि को भी देखते-जानते थे.

एक दिन वहाँ एक बड़ा व्यापारी आया, जो अपने साथ बहुत सारे पैसे लेकर आया था. उसने सराय-मालिक से कहा, “मेरे सोने की देखभाल करो नहीं तो ये तीनों बेवकूफ इसे चुरा लेंगे.” सराय-मालिक ने थैले अपने कमरे में लाकर रख दिये. उसने महसूस भी किया कि वे थैले सोने से भरे हुए हैं. उसने तीनों दिहाड़ी मजदूरों को नीचे के कमरों में रख दिया और व्यापारी को सबसे अच्छे कमरे में रखा.

Three Daily Wages Workers Hindi Story

आधी रात में जब सराय-मालिक को लगा कि सभी सो गये हैं तो वह अपनी पत्नी को साथ लेकर धनी व्यापारी के कमरे में गया और उसे कुल्हाडी के वार से मार डाला. उसकी हत्या करके वे फिर सोने चले गये. जब सूरज उगा तो हंगामा शुरू हो गया, क्योंकि व्यापारी मरा हुआ पाया गया था. सराय में ठहरे हुए सभी लोगों को बुलाया गया. सराय-मालिक ने कहा कि व्यापारी की हत्या इन तीनों दिहाड़ी मजदूरों ने की है.

इस बात से अन्य लोगों ने भी सहमती व्यक्त की और कहा कि कोई और व्यक्ति यह काम नहीं कर सकता. उन तीनों से जब पूछा गया कि यह काम उन्होंने किया है या नहीं, तो पहले ने जबाब दिया, ’हम तीनों ‘ दूसरा व्यक्ति “पैसों के लिए “ और तीसरा व्यक्ति “यह सही है.”

सराय-मालिक बोला, “इनकी बात सुनो, वे अपने आप ही स्वीकार कर रहे हैं.” तीनो को कैद में डाल दिया गया और उन्हें समझ में आया कि यह तो बड़ी कठिन परिस्थिति आ गयी है. शाम तक बुरा व्यक्ति वहाँ आया और उनसे बोला,”एक दिन और हौसला रखो और बेचैन मत होओ तुम्हारा बाल भी बांका नहीं होगा.”

अगली सुबह उन्हें न्यायधीश के सामने ले जाया गया. उसने उनसे पूछा, ”क्या तुमने खून किया है?” पहला बोला, ’हम तीनों ‘न्यायधीश ने पूछा, ”क्यों?” दूसरा बोला, “पैसों के लिए “न्यायधीश चिल्लाया, “दुष्ट व्यक्तिओं, तुम्हें अपने किये का अफसोस नहीं है?” तो तीसरे ने कहा, “यह सही है.” न्यायधीश ने उन्हें मृत्युदंड दिया, क्योंकि उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था और उस पर दृढ़ता से टिके थे.

Three Daily Wages Workers Hindi Story

तीनों साथियों को ले जाया गया और सराय-मालिक को उनके साथ आरोपी के रूप में जाना पड़ा. जैसे ही उन्हें जल्लाद ने पकड़ा और उस तख्ते पर खड़ा किया, जहाँ एक व्यक्ति तेज तलवार लेकर खड़ा था. अचानक चार लाल लोमड़ियों से जुती गाड़ी वहाँ तेजी से उडती हुई आयी और उसकी खिड़की से एक सफेद रूमाल दिखाई दिया. जल्लाद ने कहा,” यह तो माफी का संकेत है.” गाडी में से आवाज भी आ रही थी, ’क्षमा ! क्षमा !’ गाड़ी से बुरा व्यक्ति उतरा. उसने एक राजा की तरह कपड़े पहने थे. उसने तीनों कैदियों से कहा, ”तुम निर्दोष हो, तुम अब बता सकते हो कि तुमने क्या देखा और क्या सुना.”

इस पर पहले मजदूर ने कहा, “हमने व्यापारी को नहीं मारा, खूनी वहाँ खड़ा है, ”उन्होंने सराय-मालिक की और इशारा किया, ”इसका सबूत इसके कमरे में है, जहाँ इसके द्वारा मारे गये और दूसरे लोगों की लाशें भी पड़ी होंगी.”

न्यायाधीश ने अपने सिपाहियों को भेजा. वहाँ वैसा ही था. सराय-मालिक को पकडकर उसका सर धड़ से उड़ा दिया गया. बुरी आत्मा ने फिर तीनों से कहा, ”तुम मुक्त हो, तुम्हें जिन्दगी भर के लिए पैसे भी मिलेंगे, क्योंकि मुझे जो चाहिए था, वह मुझे मिल गया है.”

कभी-कभी दृढ़ता से किसी बात पर  अडिग रहना  सही होता है. अगर वे मजदूर बीच में ही कुछ और बोल पड़ते तो शायद अंजाम कुछ और होता.

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

निःस्वार्थ सेवा हिंदी पौराणिक कहानी Selfless Service Hindi Puranic Story

निःस्वार्थ सेवा हिंदी पौराणिक कहानी Selfless Service Hindi Puranic Story | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, निःस्वार्थ सेवा हिंदी पौराणिक कहानी Selfless Service Hindi Puranic Story,  moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

 

निःस्वार्थ सेवा हिंदी पौराणिक कहानी Selfless Service Hindi Puranic Story

रस्तुत कहानी श्री शिव पुराण से ली गयी है. गंगा के तट पर दानरूची नाम का एक विद्वान और दयालु ब्राह्मण रहता था. उसकी रूपवान और सुशील पत्नी भी उसी की तरह धार्मिक थी. दोनों ने अतिथि सेवा का व्रत ले रखा था.

selfless service hindi puranic story

दानरूची नित्य अतिथि को भोजन कराकर ही भोजन किया करता था. अतिथि के आने पर वह उसके विषय में कोई शंका या विकल्प नहीं रखता था. अतिथि से ज्ञान, ऐश्वर्य, स्वभाव अथवा जाति भी नहीं पूछता था. वह अत्यंत सरल स्वभावी था. अतिथि-सेवा वह अपना व्रत व कर्तव्य समझकर करता था, लोभ या यश अथवा प्रदर्शन के लिए नहीं.

एक दिन वह अतिथि की प्रतीक्षा करता रहा. भोजन का समय बीत गया, परन्तु कोई अतिथि नहीं आया. आकाश काले-काले बादलों से घिर गया. हिमालय से आनेवाली शीतल वायु कंपकंपी पैदा कर रही थी. संध्या समय तक अतिथि आगमन नहीं हुआ. उसने उपवास करने का विचार कर नारायण को स्मरण किया. उसकी पत्नी पति का अनुसरण करती थी. अतः उसने भी उपवास का निश्चय किया.

अग्निदेव ने उस ब्राह्मण की परीक्षा का विचार किया. योजना के अनुसार उन्होंने रूप बदल लिया. ब्राह्मण ने वृक्ष के नीचे अत्यंत कुरूप, सर्दी से कांपते हुए; सैकड़ों घावों, कीड़े झर रहे थे, से युक्त ’अरे बाप रे सर्दी’ चिल्लाते हुए एक चांडाल को देखा. ब्राह्मण ने मधुर वचनों से उसे सांत्वना दी और ठंड दूर करने के लिए अग्नि जला दी. आग तापने से जब उसकी कंपकंपी दूर हो गई तो ब्राह्मण ने उसे आदरपूर्वक भोजन के लिए निमंत्रित किया.

Selfless Service Hindi Puranic Story

उस दिन चाण्डाल ने तपस्वी से कहा, “हे द्विजश्रेष्ठ, मैं चाण्डाल हूँ. मुझे पशु-पक्षियों की तरह अन्न यहीं लाकर डाल दीजिए. मैं इसी योग्य हूँ.”

ब्राह्मण ने उससे कहा, “मैं आपकी जाति का नहीं, आपकी पूजा करता हूँ. आत्मा ही श्रेष्ठ है और वह सभी प्राणियों में विद्दमान है. मैं उसी परम शिव आत्मा की पूजा करता हूँ. कृपया मेरे घर में भोजन कर मुझे पवित्र कीजिए.”

ब्राह्मण के वचनों से प्रसन्न होकर वह चाण्डाल उसके घर गया. ब्राह्मण ने अत्यंत भक्तिभाव से उसकी पूजा की. शुद्ध भाव और शुद्ध मन से विधिवत आतिथ्य किया.

भोजन करके प्रसन्न होकर अतिथि देवता अपने अग्नि रूप में प्रकट हुए. उसे मनोवांछित ऐश्वर्य प्रदान किया.

वस्तुतः सम्पूर्ण सेवा की भावना का होना बहुत  जरुरी  है. प्राणिमात्र में समान आत्मतत्व के दर्शन करना बहुत आवश्यक होता है. इसी को ‘आत्मौपम्य’ भाव कहा जाता है. दूसरे को अपना समझना इसका पहला चरण है. इसका अगला चरण है समस्त प्राणियों में स्वयं का दर्शन करना. इस आत्मौपम्य भाव से ही अहिंसा और करूणा की भावना का विकास होता है. इस भावना के पश्चात् ही सेवाभाव संभव है.

प्रत्येक व्यक्ति अपनी  इच्छा  के अनुरूप  सेवा  कार्य  करता है. जब वह दूसरे में आत्मभाव के दर्शन करता है तो उसके मन के सारे संदेह दूर हो जाते हैं. वह जाति, वर्ण, रंग और रूप से ऊपर उठ जाता है. आज ‘सेवा’ शब्द भी अपनी मूल्यवत्ता और चमक खो रहा है. कारण, आज सेवा भी स्वार्थावेष्टित हो गई है. सभी अपने आपको देश और समाज  के सेवक कहते या समझते हैं; परन्तु अन्य आत्मा के साथ तादात्म्य के बिना अथवा समता के भाव को आत्मसात किए बिना सेवाव्रत संभव नहीं. समता के भाव से ही सच्ची सेवा की  जा सकती है.

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

असलियत कभी नहीं छुपती हिंदी कहानी Truth Never Hides Hindi Inspirational Story

असलियत कभी नहीं छुपती हिंदी कहानी Truth Never Hides Hindi Inspirational Story | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

असलियत कभी नहीं छुपती हिंदी कहानी Truth Never Hides Hindi Inspirational Story

एक शहर में मुचकुन और बुचकुन दो आदमी थे. दोनों की आँखे कमजोर थीं. पर वे इसे मानने को तैयार नहीं होते थे. लोग कहते भी कि अरे मुचकुन, बुचकुन तुम्हारी आंखें कमजोर हो रही हैं. तुम दोनों किसी आंख के डॉक्टर से मिलो. वह तुम्हारी आंखें देखकर दवा देगा. हो सकता है कि उचित नंबर का चश्मा दे. तब तुम्हें साफ दिखाई देगा. आँखों की रोशनी बच जाएगी. तुम्हारी लापरवाही से कहीं आँखों की रोशनी न चली जाए.

hindi-story

पर वे दोनों इसे हँसकर टाल देते और कहते – आँखें मेरी हैं. देखना हमें है. जब हम दोनों को सब दिखाई देता है तो डॉक्टर के पास क्यों जाएँ? लोगों को क्या पता कि कमजोर आँखों का तो हम बहाना करते हैं लोगों को मूर्ख बनाने के लिए.

उन्हीं दिनों उनके घर के पास की सडक पर काम हो रहा था. सडक चौड़ीकरण का काम किया जा रहा था. उस पर कंकड़ और सीमेंट डाला जा रहा था. मुचकुन और बुचकुन रोज इसे देखने जाते. सडक को बनते देख वे दोनों बहुत खुश होते.

ऐसे ही एक दिन जब वे सडक देखने गए तब चलते हुए आगे बढ़ गए. वहाँ गड्ढा था. वहाँ लाल झंडी लगी थी कि कोई आगे न जाए. वे आगे बढ़े कि पीछे से मजदूर चिल्लाए – उधर मत जाओ, गड्ढा है. मुचकुन और बुचकुन ठिठक कर रूक गए. पीछे से ठेकेदार की आवाज आई – आप दोनों को लाल झंडी नहीं दिखाई दे रही है. लगता है कि आपको कम दिखाई देता है. झंडी का मतलब है कि उधर खतरा है.

Truth Never Hides Hindi Inspirational Story

दोनों ने कहा – अरे हमने झंडी देख ली थी. हम तो मजाक कर रहे थे. देखना चाहते थे कि गड्ढा कितना गहरा है. धीरे – धीरे सडक नई बन गई. उसका नामकरण किया गया. सडक का नाम रखा गया वीर शिवाजी मार्ग. नामकरण के दिन सडक को खूब सजाया गया. बच्चों के कार्यक्रम हुए. मिठाईयां बांटी गई. कार्यक्रम के अंत में घोषणा की गई कि यहाँ चौराहे पर वीर शिवाजी की घोड़े पर सवार पत्थर की प्रतिमा भी लगेगी. प्रतिमा ऊँचे चबूतरे पर रखी जाएगी. इस घोषणा पर दोनों ने खूब तालियाँ बजाई.

 असलियत कभी नहीं छुपती हिंदी कहानी Truth Never Hides Hindi Inspirational Story

दूसरे दिन आसमान में बादल थे. सूरज बादलों से ढक गया था. लगता था कि बारिश आने वाली है. तभी खबर आई कि प्रतिमा लगाई जाने वाली है. सभी चौराहे की ओर रहे थे. मुचकुन और बुचकुन भी चले चौराहे पर भीड़ थी, वे दोनों दूर से खड़े होकर देखने लगे.

Truth Never Hides Hindi Inspirational Story 

मुचकुन बोला – ओह हो हो ! क्या गजब प्रतिमा है! ऊँचाई पन्द्रह फीट से कम न होगी.
बुचकुन – अरे, वीर शिवाजी के हाथ की तलवार तो देखो, कितनी चमक रही है. लगता है ओस की एक बूँद भी पड़ी तो उस जंग लग जाएगी.
मुचकुन – घोड़े के गले की माला देखो ऐसा लगता है कि घंटियाँ बज उठेंगी और नीचे वाली घंटी तो हीरे जैसी चमक रही है.
बुचकुन – वीर शिवाजी के पैर की जूती तो देखो. कैसे घोड़े की पीठ पर लगी जीन की पेटी में फंसी है.
मुचकुन – वीर शिवाजी ने जूती कहाँ पहनी है? वह तो बड़ा जूता है जो टखनों को ढंके हुए है,
बुचकुन – नहीं वह तो जूती है. उसमे चमकीले तार लगे हैं.
मुचकुन – वह बड़ा जूता है जिसमें फीता लगा है.
बुचकुन – वह जूती है ——.
मुचकुन – वह जूता है—–
‘जूती है’
‘जूता है ‘

दोनों झगड़ने लगे. वे अपनी- अपनी बात पर अड़े हुए थे. तभी उन्हें अपने पडोस का लड़का टिल्लू दिखाई दिया. वह दस वर्ष का था. उन्होंने उसे रोका. टिल्लू, रूको, रूको. जरा बताओ कि उस वीर शिवाजी की प्रतिमा ने पैरों में क्या पहना है ? छोटी जूती या – बड़ा जूता – दोनों एक साथ बोले.

टिल्लू अचरज से उन्हें देखने लगा. उसने अपने सिर पर हाथ मारा और बोला – प्रतिमा! कैसी प्रतिमा? वहाँ तो कुछ भी नहीं है. प्रतिमा तो अभी तक रखी नहीं गई है. वहाँ तो मजदूर अभी चबूतरा बना रहे हैं, उफ! अब तो आप लोग मान लें कि आपकी आँखें कमजोर हो गई हैं.
अचानक अपनी पोल खुलती देख वे दोनों शरमा गए.

दूसरे दिन मोहल्ले के लोगों ने देखा कि वे दोनों आँख के डॉक्टर के यहाँ जा रहे थे. असलियत कभी नहीं छुपती. बनावटीपन और झूठ- मुठ का ढोंग ज्यादा दिन तक नहीं चलता.

आशा ही जीवन है – हिंदी प्रेरक कहानी Aasha Hi Jeevan Hindi Motivational Story

आशा ही जीवन है – हिंदी प्रेरक कहानी Aasha Hi Jeevan Hindi Motivational Story | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

 

आशा ही जीवन है – हिंदी प्रेरक कहानी Aasha Hi Jeevan Hindi Motivational Story 

संसार के सृजन का कार्य चल रहा था. तरह-तरह की वनस्पतियों, पशुओं और पक्षियों का सृजन किया जा रहा था. एक दिन सभी देवी देवताओं की सभा हुई और उसमें तय किया गया कि किसी विशिष्ठ चीज का निर्माण किया जाय.

Aasha Hi Jeevan Hindi Motivational Story

सभी देवी-देवता ने अपने अपने अंशदान से पेन्डोरा नाम की एक लडकी का सृजन किया. चूँकि उसमें सभी देवी-देवताओं का अंश था, इसलिए वह बहुत ही सुन्दर, बुद्धिमती और गुणों से सम्पन्न थी. उसे देवराज इन्द्र के पास लाया गया ताकि देवराज भी उसे कुछ ज्ञान दे सकें.

देवराज से शिक्षा लेने के बाद जब वह जाने लगी तो देवराज ने उसे एक उपहार दिया- एक सुन्दर सा संदूक. देवराज ने पेन्डोरा से कहा – इस संदूक को कभी खोलना नहीं. हाँ तुम इस संदूक से जो कुछ भी मांगोगी, वह तुम्हें शीघ्र ही मिल जाएगा.

लेकिन पेन्डोरा से रहा नहीं गया. वह इतनी उत्सुक हो गयी कि देवराज इन्द्र के संदूक न खोलने के निर्देश को भूल गयी. उसने संदूक खोला और उसके अन्दर झांककर देखा तो वह भयभीत हो उठी. संदूक के अन्दर सारी बुराइयां जैसे लालच, घृणा, बुढ़ापा, द्वेष, मक्कारी, चोरी, हिंसा आदि थी. संदूक खुलते ही ये सारी बुराइयां उससे बाहर निकलने लगीं.

उसने संदूक को बंद करने की बहुत कोशिश की, लेकिन तबतक सारी बुराइयां पूरे संसार में फ़ैल चुकी थी. यह सब देखकर पेन्डोरा को बहुत दुःख हुआ. उसे अपने इस कृत्य पर बहुत पछतावा हुआ. लेकिन अब वह कुछ कर नहीं सकती थी.
सौभाग्य वश आशा जैसी अच्छाई उसी संदूक के अन्दर रह गयी थी. इसलिए संसार में मनुष्य इन सभी बुराइयों को आशा के सहारे झेलता है.

यह सोचकर कि यह सब एक दिन ठीक हो जाएगा. आज भी ये सारी बुराइयां आज भी सर्वत्र विद्यमान है और आशा के सहारे उससे छुटकारा पा लेता है. इसलिए यह कहावत आज भी प्रचलित है कि आशा ही जीवन है.

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

वीणा वादक की चतुराई हिंदी प्रेरक कहानी Veena Vaadak Hindi Motivational Story

वीणा वादक की चतुराई हिंदी प्रेरक कहानी Veena Vaadak Hindi Motivational Story | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

वीणा वादक की चतुराई हिंदी प्रेरक कहानी Veena Vaadak Hindi Motivational Story

एक बार तुर्की के राजा ने रूस पर आक्रमण कर दिया. तुर्की और रूस के बीच बहुत भारी युद्ध हुआ. लेकिन तुर्की के राजा ने अपने सैन्य कौशल का परिचय देते हुए रूस के जार यानि राजा को बंदी बना लिया. तुर्की ने जार को छोड़ने के बदले ढेर सारे धन की मांग की.

Veena Vaadak Hindi Motivational Story

रूस के जार ने एक पत्र अपनी पत्नी को लिखा कि वह तुर्की के सैनिकों को धन देकर उसे छुड़ा ले. लेकिन जार की पत्नी ने उस पत्र का कोई उत्तर नहीं दिया.

दिन बीतते गए और लगभग एक महीने हो गए. एक दिन तुर्की राजदरबार में एक वीणा बजानेवाला आया. उसने इतनी मधुर वीणा बजाई कि राजा ने प्रसन्न होकर उस वीणा वादक से एक वर मांगने को कहा. उस वीणावादक ने रूस के जार को अपने नौकर के रूप में माँगा. तुर्की के राजा ने उसकी यह मांग मान ली.

वीणावादक रूस के जार को लेकर उसकी राजधानी पहुंचा. लेकिन जार के अपने महल में पहुँचते ही वह वीणावादक ऐसे गायब हो गया, जैसे गधे के सिर से सींग. दूसरी तरफ जब जार अपने महल पहुंचा तो उसने अपनी पत्नी से मिलने से मना कर दिया. उसने कहा कि मैं उस झूठी और धोखेबाज औरत को कभी नहीं छोडूंगा. उसने मुझे बंदी जीवन से छुड़ाने का तनिक भी प्रयास नहीं किया.

Veena Vaadak Hindi Motivational Story

‘अरे यह तो उसी वीणावादक के वीणा की आवाज है जिसने मुझे बंदी जीवन से मुक्त किया’, जार ने वीणा की मधुर आवाज को सुनकर बोला. उसने अपने सैनिकों से उस वीणावादक को आदरपूर्वक दरबार में लाने को कहा. अचानक अपनी पत्नी के हाथ में उस वीणा को देखकर जार बहुत आश्चर्यचकित हुआ. जार बहुत खुश हुआ कि उसकी पत्नी ने किस प्रकार अपनी कला का प्रयोग कर चतुराईपूर्वक उसे तुर्की के राजा की कैद से छुड़ा लिया. उसने बिना कोई धन दिए जार को कैदमुक्त करा दिया.

जार ने भरे दरबार में अपनी पत्नी और रूस की रानी के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की. इसलिए यह सच है कि यदि आपके मन में किसी के प्रति कोई भी बुरे विचार आये तो उसपर पुनर्विचार करें कि आपके ये विचार कहीं जल्दीबाजी का परिणाम तो नहीं. जल्दीबाजी में लिया गया फैसला बहुधा गलत होता है और कालांतर में उसके लिए पछताना भी पड़ सकता है.

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

तीन दिहाड़ी मजदूर हिंदी कहानी Three Daily Wages Workers Hindi Story

तीन दिहाड़ी मजदूर हिंदी कहानी Three Daily Wages Workers Hindi Story | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

 

तीन दिहाड़ी मजदूर हिंदी कहानी Three Daily Wages Workers Hindi Story 

रस्तुत कहानी तीन दिहाड़ी मजदूरों  के जीवन से सम्बंधित है. इसमें मानवीय जीवन की कठिनाइयों का वर्णन किया गया है. बेरोजगारी किस तरह से मजदूरों को पलायन करने पर मजबूर कर  देता है.

 Three Daily Wages Workers Hindi Story

तीन दिहाड़ी मजदूर थे. वे हमेशा एक साथ ही कहीं जाते-आते थे और हमेशा एक ही शहर में काम करते थे. लेकिन एक बार उन्हें कोई नौकरी नहीं मिली और धीरे-धीरे उनके पास खाने के लिए भी कुछ नहीं बचा. उन्होंने एक-दूसरे से पूछा कि अब उन्हें क्या करना चाहिए.  एक मजदुर ने प्रस्ताव रखा कि अब उन्हें इस जगह पर नहीं रहना चाहिए, बल्कि अन्य जगह पर जाना चाहिए. वे एक शहर में पहुंचें. वहां काम ढूंढने के लिए वे अलग-अलग हो जाते और शाम को एक सराय पर वापस आ जाते.  एक दिन उन्होंने सराय के मालिक से तय किया कि अगर वे अलग हो गए तो  वे उसे चिट्ठियाँ लिखेंगे, जिससे कि हरेक को पता रहेगा कि दूसरा कहाँ पर है.

यह योजना सबको  अच्छी लगी. आखिर वे सभी यात्रा पर निकल पड़े. सडक पर उन्हें अच्छे कपड़े पहने हुए एक आदमी मिला. उसने उनके बारे में जानना चाहा तो वे बोले, “हम दिहाड़ी मजदूर हैं, हम काम तलाश कर रहे हैं. अभी तक तो हम सफल रहे हैं, लेकिन जब हमें काम मिलना एकदम बंद हो जाएगा, हम अलग-अलग हो जाएँगे.”

अजनबी ने कहा, “इसकी कोई जरूरत नहीं है, मैं कहूँ यदि तुम लोग वैसा ही करो तो तुम्हें काम या पैसे की कमी नहीं होगी. तब तुम सेठ बन जाओगे और बग्घी में चलोगे.”

Three Daily Wages Workers Hindi Story

एक ने कहा, “यदि इससे हमारी खुशी और अंतरात्मा को कोई हानि नहीं होती है तो हम तुम्हारे कहे अनुसार ही करेंगे.”
वह आदमी बोला, “नहीं, मैं तुम्हारा कुछ नहीं लेना चाहता, कम से कम तुम्हारी सुख-शांति तो बिलकुल नहीं.”

दूसरे ने इस बीच अजनबी के पैर देखे. उसके पैरों में से एक घोड़े का खुर था. यह देखकर पहले पहल तो वह उस अजनबी की बात सुनने से डर गया, लेकिन वह बुरा व्यक्ति बोला कि उसे उनकी आत्माओं से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि किसी और की आत्मा उसे चाहिए. यह आश्वासन मिलने पर तीनों ने उसे हामी भर दी. बुरे व्यक्ति ने उनसे कहा कि वह यह चाहता है कि हर सवाल के जबाब में पहला व्यक्ति ‘हम तीनों ‘ दूसरा व्यक्ति “पैसों के लिए” और तीसरा व्यक्ति “यह सही है” चिल्लाए.

यही जबाब उन्हें हर समय देना होगा और कोई दूसरा शब्द मुंह से नहीं निकालना होगा. जब तक वे उसकी बात मानेंगे, उनकी जेबें पैसों से भरी रहेंगी. शुरूआत में बुरे व्यक्ति ने उन्हें बहुत सारे रूपये दिये और एक खास शहर में जाकर एक खास सराय में रूकने के लिए कहा. वे वहां पहुंचे तो सराय के मालिक ने उनके पास आकर पूछा कि उन्हें कुछ खाने के लिए चाहिए या नहीं.

पहले आदमी ने कहा, ’हम तीनों ‘ दूसरा व्यक्ति “पैसों के लिए” और तीसरा व्यक्ति “यह सही है” सराय मालिक ने दोहराया “हाँ, यह सही है.”
जल्दी ही उनके सामने ढेर सारा खाना आ गया. जैसे ही उन्होंने खाना खत्म किया, सराय-मालिक खाने के पैसे लेने आ गया और बिल उनके सामने रख दिया.

Three Daily Wages Workers Hindi Story

पहले आदमी ने कहा, ’हम तीनों’ दूसरा व्यक्ति “पैसों के लिए” और तीसरा व्यक्ति “आप लोग एकदम सही कह रहे है” “आप तीनों को भुगतान करना पड़ेगा. पैसों के बिना मैं आपकी सेवा नहीं कर सकता. सराय-मालिक के ऐसा कहने पर उन्होंने मांगे गये पैसों से भी ज्यादा पैसे निकालकर दे दिये. यह देखकर वहां बैठे मेहमान एक-दूसरे से बोले, “ये लोग एकदम पागल हैं.”

सराय- मालिक बोला, “हाँ, इनकी दिमागी हालत एकदम ठीक नहीं लगती.” फिर भी वे उसकी सराय में रहे और ‘हम तीनों’ ‘पैसों के लिए’ और ‘यह सही है’ के अलावा एक भी शब्द नहीं बोले, इसके अलावा वे वहाँ की एक-एक गतिविधि को भी देखते-जानते थे.

एक दिन वहाँ एक बड़ा व्यापारी आया, जो अपने साथ बहुत सारे पैसे लेकर आया था. उसने सराय-मालिक से कहा, “मेरे सोने की देखभाल करो नहीं तो ये तीनों बेवकूफ इसे चुरा लेंगे.” सराय-मालिक ने थैले अपने कमरे में लाकर रख दिये. उसने महसूस भी किया कि वे थैले सोने से भरे हुए हैं. उसने तीनों दिहाड़ी मजदूरों को नीचे के कमरों में रख दिया और व्यापारी को सबसे अच्छे कमरे में रखा.

Three Daily Wages Workers Hindi Story

आधी रात में जब सराय-मालिक को लगा कि सभी सो गये हैं तो वह अपनी पत्नी को साथ लेकर धनी व्यापारी के कमरे में गया और उसे कुल्हाडी के वार से मार डाला. उसकी हत्या करके वे फिर सोने चले गये. जब सूरज उगा तो हंगामा शुरू हो गया, क्योंकि व्यापारी मरा हुआ पाया गया था. सराय में ठहरे हुए सभी लोगों को बुलाया गया. सराय-मालिक ने कहा कि व्यापारी की हत्या इन तीनों दिहाड़ी मजदूरों ने की है.

इस बात से अन्य लोगों ने भी सहमती व्यक्त की और कहा कि कोई और व्यक्ति यह काम नहीं कर सकता. उन तीनों से जब पूछा गया कि यह काम उन्होंने किया है या नहीं, तो पहले ने जबाब दिया, ’हम तीनों ‘ दूसरा व्यक्ति “पैसों के लिए “ और तीसरा व्यक्ति “यह सही है.”

सराय-मालिक बोला, “इनकी बात सुनो, वे अपने आप ही स्वीकार कर रहे हैं.” तीनो को कैद में डाल दिया गया और उन्हें समझ में आया कि यह तो बड़ी कठिन परिस्थिति आ गयी है. शाम तक बुरा व्यक्ति वहाँ आया और उनसे बोला,”एक दिन और हौसला रखो और बेचैन मत होओ तुम्हारा बाल भी बांका नहीं होगा.”

अगली सुबह उन्हें न्यायधीश के सामने ले जाया गया. उसने उनसे पूछा, ”क्या तुमने खून किया है?” पहला बोला, ’हम तीनों ‘न्यायधीश ने पूछा, ”क्यों?” दूसरा बोला, “पैसों के लिए “न्यायधीश चिल्लाया, “दुष्ट व्यक्तिओं, तुम्हें अपने किये का अफसोस नहीं है?” तो तीसरे ने कहा, “यह सही है.” न्यायधीश ने उन्हें मृत्युदंड दिया, क्योंकि उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था और उस पर दृढ़ता से टिके थे.

Three Daily Wages Workers Hindi Story

तीनों साथियों को ले जाया गया और सराय-मालिक को उनके साथ आरोपी के रूप में जाना पड़ा. जैसे ही उन्हें जल्लाद ने पकड़ा और उस तख्ते पर खड़ा किया, जहाँ एक व्यक्ति तेज तलवार लेकर खड़ा था. अचानक चार लाल लोमड़ियों से जुती गाड़ी वहाँ तेजी से उडती हुई आयी और उसकी खिड़की से एक सफेद रूमाल दिखाई दिया. जल्लाद ने कहा,” यह तो माफी का संकेत है.” गाडी में से आवाज भी आ रही थी, ’क्षमा ! क्षमा !’ गाड़ी से बुरा व्यक्ति उतरा. उसने एक राजा की तरह कपड़े पहने थे. उसने तीनों कैदियों से कहा, ”तुम निर्दोष हो, तुम अब बता सकते हो कि तुमने क्या देखा और क्या सुना.”

इस पर पहले मजदूर ने कहा, “हमने व्यापारी को नहीं मारा, खूनी वहाँ खड़ा है, ”उन्होंने सराय-मालिक की और इशारा किया, ”इसका सबूत इसके कमरे में है, जहाँ इसके द्वारा मारे गये और दूसरे लोगों की लाशें भी पड़ी होंगी.”

न्यायाधीश ने अपने सिपाहियों को भेजा. वहाँ वैसा ही था. सराय-मालिक को पकडकर उसका सर धड़ से उड़ा दिया गया. बुरी आत्मा ने फिर तीनों से कहा, ”तुम मुक्त हो, तुम्हें जिन्दगी भर के लिए पैसे भी मिलेंगे, क्योंकि मुझे जो चाहिए था, वह मुझे मिल गया है.”

कभी-कभी दृढ़ता से किसी बात पर  अडिग रहना  सही होता है. अगर वे मजदूर बीच में ही कुछ और बोल पड़ते तो शायद अंजाम कुछ और होता.

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

निःस्वार्थ सेवा हिंदी पौराणिक कहानी Selfless Service Hindi Puranic Story

निःस्वार्थ सेवा हिंदी पौराणिक कहानी Selfless Service Hindi Puranic Story | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

 

निःस्वार्थ सेवा हिंदी पौराणिक कहानी Selfless Service Hindi Puranic Story 

प्रस्तुत कहानी श्री शिव पुराण से ली गयी है. गंगा के तट पर दानरूची नाम का एक विद्वान और दयालु ब्राह्मण रहता था. उसकी रूपवान और सुशील पत्नी भी उसी की तरह धार्मिक थी. दोनों ने अतिथि सेवा का व्रत ले रखा था.

selfless service hindi puranic story

दानरूची नित्य अतिथि को भोजन कराकर ही भोजन किया करता था. अतिथि के आने पर वह उसके विषय में कोई शंका या विकल्प नहीं रखता था. अतिथि से ज्ञान, ऐश्वर्य, स्वभाव अथवा जाति भी नहीं पूछता था. वह अत्यंत सरल स्वभावी था. अतिथि-सेवा वह अपना व्रत व कर्तव्य समझकर करता था, लोभ या यश अथवा प्रदर्शन के लिए नहीं.

एक दिन वह अतिथि की प्रतीक्षा करता रहा. भोजन का समय बीत गया, परन्तु कोई अतिथि नहीं आया. आकाश काले-काले बादलों से घिर गया. हिमालय से आनेवाली शीतल वायु कंपकंपी पैदा कर रही थी. संध्या समय तक अतिथि आगमन नहीं हुआ. उसने उपवास करने का विचार कर नारायण को स्मरण किया. उसकी पत्नी पति का अनुसरण करती थी. अतः उसने भी उपवास का निश्चय किया.

अग्निदेव ने उस ब्राह्मण की परीक्षा का विचार किया. योजना के अनुसार उन्होंने रूप बदल लिया. ब्राह्मण ने वृक्ष के नीचे अत्यंत कुरूप, सर्दी से कांपते हुए; सैकड़ों घावों, कीड़े झर रहे थे, से युक्त ’अरे बाप रे सर्दी’ चिल्लाते हुए एक चांडाल को देखा. ब्राह्मण ने मधुर वचनों से उसे सांत्वना दी और ठंड दूर करने के लिए अग्नि जला दी. आग तापने से जब उसकी कंपकंपी दूर हो गई तो ब्राह्मण ने उसे आदरपूर्वक भोजन के लिए निमंत्रित किया.

उस दिन चाण्डाल ने तपस्वी से कहा, “हे द्विजश्रेष्ठ, मैं चाण्डाल हूँ. मुझे पशु-पक्षियों की तरह अन्न यहीं लाकर डाल दीजिए. मैं इसी योग्य हूँ.”

ब्राह्मण ने उससे कहा, “मैं आपकी जाति का नहीं, आपकी पूजा करता हूँ. आत्मा ही श्रेष्ठ है और वह सभी प्राणियों में विद्दमान है. मैं उसी परम शिव आत्मा की पूजा करता हूँ. कृपया मेरे घर में भोजन कर मुझे पवित्र कीजिए.”

ब्राह्मण के वचनों से प्रसन्न होकर वह चाण्डाल उसके घर गया. ब्राह्मण ने अत्यंत भक्तिभाव से उसकी पूजा की. शुद्ध भाव और शुद्ध मन से विधिवत आतिथ्य किया.

भोजन करके प्रसन्न होकर अतिथि देवता अपने अग्नि रूप में प्रकट हुए. उसे मनोवांछित ऐश्वर्य प्रदान किया.

वस्तुतः सम्पूर्ण सेवा की भावना का होना बहुत  जरुरी  है. प्राणिमात्र में समान आत्मतत्व के दर्शन करना बहुत आवश्यक होता है. इसी को ‘आत्मौपम्य’ भाव कहा जाता है. दूसरे को अपना समझना इसका पहला चरण है. इसका अगला चरण है समस्त प्राणियों में स्वयं का दर्शन करना. इस आत्मौपम्य भाव से ही अहिंसा और करूणा की भावना का विकास होता है. इस भावना के पश्चात् ही सेवाभाव संभव है.

प्रत्येक व्यक्ति अपनी  इच्छा  के अनुरूप  सेवा  कार्य  करता है. जब वह दूसरे में आत्मभाव के दर्शन करता है तो उसके मन के सारे संदेह दूर हो जाते हैं. वह जाति, वर्ण, रंग और रूप से ऊपर उठ जाता है. आज ‘सेवा’ शब्द भी अपनी मूल्यवत्ता और चमक खो रहा है. कारण, आज सेवा भी स्वार्थावेष्टित हो गई है. सभी अपने आपको देश और समाज  के सेवक कहते या समझते हैं; परन्तु अन्य आत्मा के साथ तादात्म्य के बिना अथवा समता के भाव को आत्मसात किए बिना सेवाव्रत संभव नहीं. समता के भाव से ही सच्ची सेवा की  जा सकती है.

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

error: