July 6, 2018 | Hindigk50k

Current affairs 06 July 2018 Daily Current Affairs Today

Current affairs 06 July 2018 Daily Current Affairs Today
Current affairs 06 July 2018 Daily Current Affairs Today Hello Aspirants, Today’s current affairs  06 July 2018 Current Affairs Today, daily current affair, daily current affairs quiz which is going to help you all in coming exams like SSC CGL, SSC CPO, BANK PO, UPSC etc…
1. Assam Chief Minister Sarbananda Sonowal has laid the foundation stone of a Rs 139.82 crore multi-purpose sports complex in Dibrugarh. 
असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने डिब्रूगढ़ में 139 .83 करोड़ रुपये के बहुउद्देश्यीय खेल परिसर की आधारशिला रखी है।
2. Prime Minister of Bhutan Tshering Tobgay is on a three-day visit to India. 
भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं।
 
3. Mahesh Shrama Inaugurates exhibition titled “Arth – art for earth” at IGNCA, New Delhi.
महेश श्रमा ने आईजीएनसीए, नई दिल्ली में “Arth – art for earth” शीर्षक की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
4. Cabinet has approved accession to WIPO Copyright Treaty, 1996 and WIPO Performance and Phonograms Treaty, 1996. 
मंत्रिमंडल ने विपो कॉपी राइट संधि 1996 और विपो प्रदर्शन व फोनोग्राम संधि 1996 के प्रस्‍ताव को मंजूरी दी है|
5. The Union Cabinet has approved the extension of the scheme of recapitalization of Regional Rural Banks (RRBs) for the next three years i.e. upto 2019-20. 
केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की पुनर्पूंजीकरण योजना को अगले तीन वर्षों अर्थात् 2019-20 तक विस्‍तार देने की मंजूरी दी है।
6. Piyush Goyal launched the Coal Mine Surveillance & Management System (CMSMS) and Mobile Application ‘Khan Prahari’. 
पीयूष गोयल ने कोयला खान निगरानी और प्रबंधन प्रणाली (सीएमएसएमएस) और मोबाइल एप्लिकेशन ‘खान प्रहरी’ लॉन्च की है।
7. India Innovation Summit by the Confederation of Indian Industry (CII) will be held in Bengaluru. 
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा बेंगलुरू में ‘भारत नवाचार शिखर सम्मेलन’ का आयोजन किया जाएगा।
8. Indian Space Research Organisation (ISRO) has successfully carried out a flight test for a newly-designed Crew Escape System. 
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक नव-डिजाइन किए गए क्रू एस्केप सिस्टम की उड़ान का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है।

 

पुण्य का प्रताप हिंदी प्रेरक कहानी Virtue Glory Hindi Motivational Story

पुण्य का प्रताप हिंदी प्रेरक कहानी Virtue Glory Hindi Motivational Story  Baccho ki Kahaniyan in hindi | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

किसी गाँव में सिर्फ ब्राह्मण रहते थे. उनका जीवन धर्मनिष्ठ और सादा था. वे सुबह-शाम नियमित रूप से पूजा करते थे. चारों वेद उन्हें कंठस्थ थे. वैदिक कर्मकांड और सिधान्तों का वे अक्षरशः पालन करते थे. सभी वैदिक ब्राह्मणों की तरह गाँव की हर कुटिया के मध्य में हवनकुंड था जिसकी पवित्र अग्नि को वे कभी बुझने नहीं देते थे.

Virtue Glory Hindi Motivational Story

Virtue Glory Hindi Motivational Story

गाँव के ऐसे ही एक परिवार में एक रात छोटी पुत्रवधू को लघुशंका लगी. अँधेरे में उसे अकेले बाहर जाते हुए डर लग रहा था, सो उसने कुटिया के मध्य में बने हवनकुंड के पवित्र अंगारों पर पेशाब कर दिया. सुबह सुबह घरवालों को अंगारों के बीच शुद्ध सोने की सिल्ली मिली. उनकी आँखें फटी की फटी रह गई. घर का बूढा मुखिया बहुत चतुर था. उसने तुरंत कहा – “अवश्य ही किसी ने कुछ गड़बड़ की है. नहीं तो ब्राह्मण के यज्ञकुंड में सोने की सिल्ली कैसे आती!” उसने पूरे परिवार को कतार में खड़ा किया और एक-एक से पूछताछ करने लगा. आखिर छोटी पुत्रवधू को बताना पड़ा कि रात को उसने क्या किया. मुखिया ने उसे और सब घरवालों को फिर ऐसी गलती न करने की चेतावनी दी. साथ ही उसने आदेश दिया कि रात को छोटी बहू को बाहर जाना हो तो कोई उसके साथ जाए.

पुण्य का प्रताप हिंदी प्रेरक कहानी Virtue Glory Hindi Motivational Story

इस चमत्कार की बात धीरे-धीरे पूरे गाँव में फैल गई. पहले कभी-कभार और फिर अक्सर गाँव के दूसरे यज्ञकुण्डों में भी सोने की सिल्लियाँ मिलने लगीं. बहुत-से लोग अमीर हो गए. घर-घर में पक्के मकान बन गए. सूती कपड़ों का स्थान रेशम और मलमल ने ले लिया. बेटियों को ढेरों दहेज दिया जाने लगा. देखते-देखते गाँव का रंग-ढंग बदल गया.

पर उस गाँव में एक परिवार अब भी गरीब ही बना रहा. यह परिवार गाँव की सीमा पर बनी कुटिया में रहता था. पूरे गाँव में बस एक यही कुटिया रह गई थी. घरवाली रोज पति से तकरार करती थी, “तुम मुझे हवनकुंड तक क्यों नहीं जाने देते? कम से कम एक बार तो जाने दो! फिर हम गरीब नहीं रहेंगे. रोटी-कपड़े का झंझट तो बचेगा. एक बार तो जाने दी, सिर्फ एक बार! सोने की एक सिल्ली हमारे लिए सालों तक काफी होगी.” उसने पति को बहुत तंग किया. खुशामद की. फुसलाया. अपने सारे दांव-पेंच आजमाए. पर उससे निराशा ही हाथ लगी. अमीर बनना कितना आसान था, पर हठी पति ने इसकी अनुमति नहीं दी. एक दिन पत्नी ने ज्यादा कहा-सुना किया तो वह फट पड़ा – “जानती हो यह ब्राह्मणों का गाँव अब तक क्यों बचा हुआ है?”

क्रुद्ध पत्नी ने खिल्ली उड़ाते हुए कहा, “क्यों? क्या इसलिए कि मुझे यज्ञकुंड में मूतने नहीं देते और तुम हमें गरीब ही रखना चाहते हो जबकि सब पैसे वाले हो गए हैं? यही कहना चाहते हो न तुम?”

“हां, बिलकुल यही. हमारे कारण ही यह गाँव बचा हुआ है. यदि हम भी वही करने लगें जो सब कर रहे हैं या यह गाँव छोड़ दें तो यह गाँव उजड़ जाएगा.”

पुण्य का प्रताप हिंदी प्रेरक कहानी Virtue Glory Hindi Motivational Story

पत्नी को यह अपने पति की यह बात निरी सनक लगी. “गाँव के धनवान तभी तक जीवित हैं जब तक हम दरिद्र बने रहे? ऊंह! पता नहीं तुम अपने को क्या समझते हो!”
पति ने कहा – ”मैं तुम्हें दिखाऊंगा कि जो मैंने कहा वह सच है. सामान बाँधो. हम यहाँ नहीं रहेंगे. फिर तुम देखना क्या होता है.”

उन्होंने सारा सामान बाँधा और दूसरे गाँव चले गए.

एक हफ्ता बीतते न बीतते गाँव वाले आपस में झगड़ने लगे. हरेक दूसरे पर आरोप लगाने लगा कि वह उसकी जमीन और मकान हड़पना चाहता है. ज्यादा लालची लोगो ने अपनी पत्नियों, बेटियों और बहुओं को आदेश दिया कि वे यज्ञकुंड में अधिक से अधिक पेशाब करें जब तक कि कुंड की आग बुझने ही न लगे. एक दिन किसी घर के लोगों ने लालच और क्रोध से पड़ोसी के घर पर अंगारे फेंके. पड़ोसियों ने बदले में और अधिक अंगारे फेंके. एक घर से दूसरे, दूसरे से तीसरे, तीसरे से चौथे घर में आग फैलती चली गई. पूरा गाँव जलकर राख हो गया. एक घर भी बाकी नहीं बचा.

यह समाचार मिलने पर गाँव छोड़ने वाले ब्राह्मण ने पत्नी से कहा – “अब तो तुम्हें मेरी बात पर भरोसा हुआ? एक आदमी के पुण्य के प्रताप से ही व्यक्ति के परिवार, समाज और गाँव की भलाई और रक्षा होती है.”

सच ही कहा गया है कि पुण्यात्मा के साथ रहनेवाले के पाप धुल जाते हैं और उसके पुण्य के प्रताप से समाज और देश का संस्कार बढ़ता है.

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

राक्षस और दर्जी हिंदी कहानी Demon and Tailor Hindi Story

राक्षस और दर्जी हिंदी कहानी Demon and Tailor Hindi Story  Baccho ki Kahaniyan in hindi | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

एक दर्जी था, जो शेखीबाज था, लेकिन काम बहुत करता था. उसे एक बार दुनिया की सैर करने का विचार आया. उसने तुरंत अपनी दूकान छोडी और पहाड़ों और घाटियों में निकल पड़ा. इधर-उधर चलते-चलते आगे बढ़ता रहा.

Demon and Tailor Hindi Story

थोड़ी दूर चलने पर उसे एक ऊँचा पहाड़ दिखाई पड़ा. उसके पीछे एक ऊँची मीनार थी, जो घने जंगलों में बनी हुई थी. दर्जी चिल्लाया, “अरे, यह क्या हुआ?” वह उत्सुकता से उस जगह के पास पहुंचा. लेकिन जैसे ही वह उसके पास पहुंचा तो उसका मुंह खुला रह गया और आँखें फटी रह गईं – उस मीनार के तो पैर थे. वह मीनार एक क्षण में पहाड़ी पर उछली और अचानक दर्जी के सामने एक विशाल राक्षस खड़ा हो गया.

राक्षस ने गड़गड़ाती आवाज में पूछा, ”तुम यहाँ क्या कर रहे हो मच्छर?” दर्जी ने धीरे से कहा, “मैं इस जंगल में अपनी जीविका कमाने आया हूँ.”

राक्षस ने गुस्से से कहा, ”ठीक है, तुम मेरी नौकरी शुरू कर दो.” दर्जी ने विन्रमता से कहा, “यदि ऐसा है तो ठीक है, लेकिन मुझे तनख्वाह क्या मिलेगी?” राक्षस बोला, “तनख्वाह?” फिर उसकी आवाज गूंजी – “सुनो – हर साल में तीन सौ पैंसठ दिन और किसी साल में एक दिन ज्यादा भी ठीक?”

दर्जी बोला, “ठीक.” लेकिन उसने सोचा, ”हरेक को अपनी चादर देखकर ही पैर फैलाना चाहिये. मुझे जल्दी से यहाँ से स्वतंत्र होना चाहिये.”

 राक्षस और दर्जी हिंदी कहानी Demon and Tailor Hindi Story

राक्षस चिल्लाया, ”जल्दी जाओ बेवकूफ और जाकर मेरे लिए एक गिलास पानी लाओ.”

दर्जी ने कहा- ”पूरा कुआँ क्यों नहीं और झरना भी?” कहकर उसने पूरा कुआँ उठाने का अभिनय किया. राक्षस चिल्लाया, ”क्या ! कुआँ और झरना भी?” राक्षस थोडा डरपोक और कमजोर था. वह डरने लगा और उसने सोचा, ”यह आदमी सेव भूनने के अलावा भी बहुत कुछ कर सकता है. यह बहुत बहादुर है. मुझे ध्यान रखना चाहिए नहीं तो यह तो मेरा भी मालिक बन जायेगा.”

इसलिए जब दर्जी पानी लेकर लौटा तो राक्षस ने उसे जंगल से कई गट्ठर लकड़ी लाने के लिए भेज दिया. दर्जी ने पूछा, “पूरा जंगल एक बार में क्यों नहीं – हर पेड़-बड़ा-छोटा, अच्छा-खराब ?” और चला गया. डरा हुआ राक्षस धीरे से बडबडाया, “क्या पूरा जंगल, कुआँ भी, झरना भी.” वह और भी डर गया था. वह सोचने लगा कि दर्जी उससे कहीं बलवान है और उसका नौकर बनने लायक नहीं है. दर्जी लकड़ी के गट्ठर लेकर लौटा तो राक्षस ने उसे दोपहर के भोजन के लिए दो-तीन जंगली सूअर मारने के लिए कहा. शेखी बघारनेवाला दर्जी बोला, ”एक बार में हजार क्यों न मारूं. और बाकी सब उसके बाद?” डरपोक राक्षस हडबडाया, ”क्या, क्या ओह ! आज के लिए इतना काफी है, तुम अब सो जाओ.”

बेचारा राक्षस अब दर्जी से बेहद डर गया था. वह रात में अपनी आँखें भी नहीं बंद कर पाता था और पूरे समय इस नौकर से मुक्ति पाने का उपाय सोचता रहा था. उसे लगता था कि वह कोई जादूगर है, जो उसकी जान के पीछे पड़ा है. समय के साथ समझ भी आती है. अगली सुबह राक्षस और दर्जी एक साथ एक मैदान में गये जहाँ बहुत से बेंत के पेड़ उगे थे. जब वे वहाँ पहुंचे तो राक्षस बोला, ”इनमें से एक पर बैठो. मैं देखना चाहता हूँ कि तुम इसे झुका सकते हो या नहीं ?”

राक्षस और दर्जी हिंदी कहानी Demon and Tailor Hindi Story

शेखीमार दर्जी पेड़ पर चढ़ा और एक शाख पर बैठ गया. अपनी साँस रोककर उसने अपने आपको भारी बनाया और पेड़ नीचे झुकाया. जल्दी ही उसे फिर से साँस लेनी पड़ी. वह दुर्भाग्य से अपना फीता जेब में नहीं लाया था और शाख वापस ऊपर चली गयी. राक्षस बेहद खुश हुआ, क्योंकि उसने देखा कि उस शाख के साथ दर्जी हवा में खूब ऊपर उछला और गायब हो गया. वह अभी भी हवा में उड़ रहा है या जमीन पर पड़ा है, यह मैं आपको अच्छी तरह नहीं बता सकता. शेखी बघारने वाले का यही हाल होता है.

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

मुझे मत मारो मुझे जीने दो हिंदी कहानी | Baccho ki Kahaniyan in hindi |

मुझे मत मारो मुझे जीने दो हिंदी कहानी | Baccho ki Kahaniyan in hindi |  Baccho ki Kahaniyan in hindi | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

एक गुरु थे. उनके आश्रम में उनके कई शिष्य भी रहते थे. एक दिन अचानक उस गुरु के अंतस में अपने भावी जीवन की झलक कौंधी. इससे उनको यह बोध हो गया कि अगले जन्म में उसे कौन-सी योनि यानि जीवन मिलेगी.

मुझे मत मारो मुझे जीने दो हिंदी कहानी

मुझे मत मारो मुझे जीने दो हिंदी कहानी

एकांत देखकर गुरु ने अपने सबसे प्रिय शिष्य को बुलाया और उससे पूछा कि उसने उससे जो ज्ञान प्राप्त किया उससे उऋण होने के लिए वह क्या कर सकता है. शिष्य ने उत्तर दिया कि जो गुरू कहे वह करने को तैयार है.

शिष्य का उत्तर सुनकर गुरू ने कहा, “मुझे अभी-अभी आभास हुआ है कि मेरी मृत्यु में अधिक समय शेष नहीं है और मेरा जो दूसरा जन्म होगा, वह सूअर के रूप में होगा. यहाँ अहाते में मैला खाती सूअरी को तो तुमने देखा ही होगा? वह अगली बार ब्याएगी तो मैं उसके चौथे बच्चे के रूप में जन्म लूँगा. मेरी भौंह के चिन्ह से तुम मुझे पहचान लोगे. सूअरी ब्याए तो भौंह के चिन्ह से तुम चौथे बच्चे (घेंटे) को ढूँढना और चाकू से उसका गला काट देना. इससे मुझे सूअर के घृणित जीवन से मुक्ति मिल जाएगी. क्या मेरे लिए तुम इतना कर सकोगे?”

सुनकर शिष्य को बहुत दुःख हुआ. पर वह अपने गुरु को अपना वचन दे चुका था. इसलिए वह यह करने को तैयार हो गया.

मुझे मत मारो मुझे जीने दो हिंदी कहानी | Baccho ki Kahaniyan in hindi |

कुछ दिनों बाद सच में गुरू का निधन हो गया और सूअरी ने यथासमय चार बच्चों को जन्म दिया. एक दिन शिष्य ने चाकू को पैना किया और चौथे बच्चे को ढूंढ लिया. वास्तव में गुरु द्वारा बताये अनुसार उसकी भौंह पर एक निशान था. घेंटे का गला काटने के लिए उसने चाकू नीचे किया ही था कि नन्हा सूअर चीखा, “रूक जाओ! मुझे मत मारो !”

घेंटे को आदमी की तरह बोलते सुनकर शिष्य की आँखें फटी की फटी रह गई. वह आश्चर्य से उबरा भी न था कि घेंटे ने कहा, – “मुझे मत मारो मुझे जीने दो! मैं सूअर का जीवन जीना चाहता हूँ. जब मैंने तुमसे मुझे मारने के लिए कहा था, तब मुझे पता नहीं था कि सूअर का जीवन कैसा होता है. लेकिन अब इस जीवन में भी खूब आनंद है. मुझे मत मारो मुझे जीने दो. मुझे छोड़ दो, मुझपर कृपा करो!”

वाकई जीवन चाहे कोई भी हो, योनि चाहे कोई भी हो, जीवन तो जीवन है. हर कोई चाहे वह मनुष्य हो या पशु-पक्षी अपने जीवन से बहुत प्रेम करता है. सबको उसके हिस्से का जीवन जीने देना चाहिये. इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है.

गधे का आलाप हिंदी कहानी Gadhe Kaa Aalap Hindi Story

गधे का आलाप हिंदी कहानी Gadhe Kaa Aalap Hindi Story  Baccho ki Kahaniyan in hindi | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

एक गाँव में एक धोबी रहता था. उसके पास एक गधा था. धोबी रोज सुबह कपड़ों का गट्ठर गधे की पीठ पर लादकर नदी पर जाता और शाम ढले घर लौटता. इतनी मेहनत के बाद भी गधे को यह शिकायत रहती कि उसका मालिक उसे पूरा खाने को नहीं देता. बेचारा गधा मौका देखकर आसपास के खेतों में घुस जाता और वहाँ उगनेवाली फसल खा जाता.

Gadhe Kaa Aalap Hindi Story

Gadhe Kaa Aalap Hindi Story गधे का आलाप हिंदी कहानी

इसी तरह एक दिन घुमते-फिरते गधे की मुलाकात एक लोमड़ी से हो गई. शीध्र ही दोनों में मित्रता हो गई और भोजन की तलाश में वे साथ-साथ रहने लगे.

एक रात किसी खेत में घुसकर दोनों तरबूजों पर हाथ साफ कर रहे थे. बहुत दिनों बाद खाने को मिले थे, सो गधा कुछ ज्यादा ही तरबूज खा गया. भरपेट खाने के बाद गधा का मूड बन गया  और उसका मन किया कि गाना गाया  जाए. उसने लोमड़ी से कहा कि आज वह इतना खुश है कि अपने मन की भावना को गाकर प्रकट करना चाहता है.

लोमड़ी चतुर थी, सो आने वाले खतरे को तुरंत भांप गई. लोमड़ी चिंतित स्वर में बोली, “बेवकूफ मत बनो. यदि तुमने गाना शुरू किया तो इस खेत के रखवाले तथा दूसरे गाँव वाले जाग जाएंगे और मार-पीटकर हमारी हड्डी-पसली एक कर देंगे.”
लेकिन गधा तो आखिर गधा था, समझदारी की बात भला कैसे पल्ले पड़ती.

गधे का आलाप हिंदी कहानी Gadhe Kaa Aalap Hindi Story

यह सुनकर गधा बोला, ”तुम बेहद नीरस प्राणी हो. गाने से तो दिल-दिमाग व शरीर तरोताजा रहता है. मैं तो जरूर गाऊंगा, चाहे कोई क्यों न आ जाए.”

अब लोमड़ी की चिंता और बढ़ गई, क्योंकि गधा गाने पर अड़ा  था और खेत के रखवाले वहीं पास सोए पड़े थे.

लोमड़ी गधे से बोली, “गाना गाने से पहले जरा रूको. मैं भागकर सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाती हूँ, तब तुम गाना शुरू करना.” कहकर लोमड़ी ने बिना एक क्षण गंवाए खेत की बाड़ फांद कर वहां से भाग निकली.

इधर खेत में बैठे गधे ने छेड़ दिया अपना गदर्भ- राग. इतनी रात गए अचानक गधे की बेसुरी ‘ढेंचू-ढेंचू’ सुन खेत का मालिक जाग गया. उसने लाठी उठाई और भाग चला गधे की ओर.

गधा अभी भी मस्ती में बैठा अपना राग अलाप रहा था.

 गधे का आलाप हिंदी कहानी Gadhe Kaa Aalap Hindi Story 

खेत के मालिक ने जब अपनी फसल की दुर्दशा देखी तो गुस्से में आकर लाठी लेकर गधे पर पिल पड़ा. गधे की इतनी पिटाई हुई कि वह अधमरा-सा हो गया. किसी तरह जान बचाकर गधा खेत से बाहर निकलने में सफल हुआ. उसका हाल-बेहाल था, चलते भी न बन पा रहा था.

उसकी मित्र लोमड़ी जो पास की झाड़ियों में जा छिपी थी, गधे की यह हालत देख सहानुभूति भरे स्वर में बोली,  “मुझे तुम पर तरस आ रहा है, मैंने तुम्हें मना भी किया था कि मत गाओ, लेकिन तुमने मेरी एक न सूनी.”

अब गधे को अपनी मूर्खता का अहसास हुआ और उसका सिर शर्म से झुक गया.

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

तेनालीराम की कहानियां Tenali Rama Stories in Hindi

तेनालीराम की कहानियां Tenali Rama Stories in Hindi  Baccho ki Kahaniyan in hindi | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

सोलहवीं शताब्दी में विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय का मुसाहिब तेनालीराम (कृष्ण) दक्षिण भारत में उतना ही जाना-पहचाना है जितना उत्तर भारत में अकबर का मुसाहिब बीरबल और बंगाली गोपाल भांड.

Tenali Rama Stories in Hindi

Tenali Rama Stories in Hindi

तेलुगु, तमिल और कन्नड़ में उसके सैकड़ों किस्से प्रचलित हैं. किंवदंती बन गए इस मुसाहिब पर बच्चों के लिए अनेक किताबें लिखी गईं और कई चित्रकथाएँ रची गईं. उस पर एक टीवी धारावाहिक भी बना है.

तेनालीराम मुसाहिब कैसे बने Tenali Rama Stories in Hindi

दक्षिण भारत के तेनाली गाँव में राम नाम का ब्राह्मण लड़का रहता था. एक बार उस गाँव में एक घुमक्कड़ संन्यासी आया. लडके के चेहरे-मोहरे और बुधिमत्तापूर्ण बातों से वह बहुत प्रभावित हुआ. उसने लडके को एक मन्त्र सिखाया. कहा, ’यदि रात को काली के मन्दिर में तुम इसका तीस लाख बार जाप करोगे तो अपने सहस्त्र चेहरों के साथ देवी प्रकट होगी. यदि तुम उससे डरे नहीं तो वह तुम्हारी हर इच्छा पूरी करेगी.”

एक मांगलिक रात को राम गाँव के बाहर बनी काली के मन्दिर में गया और मन्त्र का जाप करने लगा. तीस लाख जाप पूरे होते ही सहस्त्र चेहरों और दो हाथों वाली काली प्रकट हुई. देवी का विकराल रूप देखकर डरने की बजाय वह जोर-जोर से हंसने लगा. प्रचंड काली के सामने आज तक किसी ने हँसने का साहस नहीं किया था. काली ने चिढकर पूछा, “ए दुष्ट छोकरे, तू मुझ पर हँस क्यों रहा है?”

छोकरे ने जबाब दिया, “हे माँ, आदमी को जब जुकाम हो जाता है तो वह नाक पोंछ-पोंछकर परेशान हो जाता है, जबकि उसके दो हाथ हैं और सिर्फ एक नाक. अगर तुम्हें जुकाम हो जाए तो तुम दो हाथों से हजार नाक कैसे पोंछती होंगी?”
काली को बहुत क्रोध आया, “तू मुझ पर हंसता है ! तू हँसकर ही अपना पेट भरेगा. इस जन्म में हंसना ही तेरा धंधा होगा. तू विकट कवि (मसखरा) बनेगा.”

 तेनालीराम की कहानियां Tenali Rama Stories in Hindi 

“ओह, वि-क-ट-क-वि! क्या खूब! यह विलोमपद है. दाएं से पढो तब भी इसे वि-क-ट-क-वि ही पढ़ा जाएगा.”
राम की बुधिमानी से देवी बहुत प्रसन्न हुई. उसने शाप में भी परिहास ढूंढ निकला था. उसका क्रोध ठंढा हो गया. बोली, “तू मसखरा तो बनेगा, पर राजा के दरबार में” यह कहकर वह अंतर्ध्यान हो गई.
कुछ दिनों बाद तेनालीराम विजयनगर के राजा का मुसाहिब हो गया.

तेनालीराम का रामायण Tenali Rama Stories in Hindi

एक बार एक वेश्या ने तेनालीराम को रामायण सुनाने के लिए बुलाया. तेनालीराम ने कथा शुरू करते हुए कहा, ”राम और सीता वन में गए.” इतना कहकर वह चुप हो गया. प्रतीक्षा करते-करते वेश्या का धीरज चुक गया. पूछा, “फिर क्या हुआ ?” तेनालीराम ने कहा, “थोडा धैर्य रखो. वे अभी वन में चल रहे हैं.”

कुछ समय पश्चात् दूसरी घमंडी वेश्या से ऐसी ही विनती सुनकर वह चिढ गया. बोला, “रामायण की कथा का मैं तुम्हें प्रत्यक्ष अनुभव कराऊंगा. रामायण में हनुमान लंका को आग लगा देते हैं, बिलकुल ऐसे!” और उसने वेश्या के मकान को आग लगा दी.

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

आपस में फूट हिंदी कहानी Aapas Mein Fut Hindi Story

आपस में फूट हिंदी कहानी Aapas Mein Fut Hindi Story  Baccho ki Kahaniyan in hindi | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

किसी पेड़ पर एक चिड़ियाँ रहती थी. वह बहुत खुश थी कि रहने के लिए उसका अपना एक सुंदर-सा आरामदायक घोंसला है.

Aapas Mein Fut Hindi Story आपस में फूट हिंदी कहानी

दिनभर चिडियां दूर-दराज के खेतों में दाना चुगने जाती और शाम ढलने तक अपने घोंसले में लौट आती. ऐसे ही सुख-शांति से गुजर रहे थे चिडियां के दिन.

एक दिन चिडियां ने भरपेट भोजन तो कर लिया, लेकिन  समय रहते घोंसले में लौट न सकी,क्योंकि रात भर बारिश ने रूकने का नाम ही न लिया.

चिडियां को अपने ठिकाने से कुछ दूरी पर स्थित बरगद के विशाल वृक्ष पर शरण लेनी पड़ी. सुबह होने पर जब वर्षा थमी और आसमान साफ हो गया तो वह अपने घोंसले की ओर उड़ चली. तब उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा, जब उसने देखा कि उसके घोंसले पर तो एक खरगोश ने कब्जा कर उसपर अपना अधिकार जमाये  बैठा है.

गुस्से में अपना आपा खो बैठी चिडियां बोली, “तुम जहाँ आराम से लेटे हो वह मेरा घर है. चलो, जाओ मेरे घर से .”
“बेवकूफों जैसी बात मत करो,” खरगोश बोला, “पेड़ों, नदियों,तालाबों पर किसी एक का हक नहीं होता, यह तो तभी तक अपने होते हैं, जब तक हम वहाँ रहते हैं. यदि अनुपस्थिति में कोई और वहाँ आकर रहने लगे,तो वह स्थान उसी का हो जाता है. इसलिए मैं नहीं तुम जाओ यहां से, मुझे परेशान मत करो.”

 आपस में फूट हिंदी कहानी Aapas Mein Fut Hindi Story 

खरगोश के इस अटपटे उत्तर से चिडियां बिलकुल  संतुष्ट नहीं  हुई. वह बोली, “चलो, चलकर किसी बुद्धिमान प्राणी से पूछते हैं. तभी हमारा फैसला होगा.”

आपस में फूट हिंदी कहानी Aapas Mein Fut Hindi Story

उस पेड़ के निकट ही एक जंगली बिल्ली रहती थी. उस दिन  संयोगवश वह बिल्ली भी वहीँ थी. उसने  उन दोनों के बीच वार्तालाप को सुन लिया था.

अब बिल्ली आखिर बिल्ली ठहरी. उसे मौसी यूँ ही तो नहीं कहा जाता.

बिल्ली को तुरंत एक योजना सूझी. वह नदी में नहाकर आई और पास ही एक पेड़ के नीचे तपस्वी जैसी मुद्रा में बैठकर जोर-जोर से राम नाम जपने लगी.

जब चिड़िया और खरगोश ने बिल्ली को राम नाम जपते सुना तो वे निष्पक्ष न्याय की आस लिए उसके पास गए और बिना किसी पक्षपात के उनका न्याय करने को कहा.

उन दोनों को सामने देख बिल्ली मन ही मन बेहद खुश हुई. वह उन दोनों की बातें सुनने का नाटक करती रही. जैसे ही उसे मौका हाथ लगा, उसने झपट्टा मारकर उनका काम तमाम कर  दिया. उसके स्वादिष्ट भोजन का जुगाड़ हो चुका था.

यह कहानी ऐसे तो बहुत सीधी और सरल है. लेकिन यह तो साफ़ है कि किसी अन्य के काम पर अपना अधिकार कर लेना और छोटी-छोटी बातों पर झगड़ना कई बार घातक सिद्ध हो जाता है . इसलिए हमें इनसे बचना चाहिए. जब कोई conflict हो जाए तो शांति पूर्वक उस conflict को manage करना चाहिए. इसमें अनावश्यक रूप से किसी बाहरी व्यक्ति की दखलंदाजी आपके लिए नुकसानदेह हो सकता है. आपस में फूट का नतीजा always बुरा ही होता है.

गोबर बादशाह का कमाल हिंदी कहानी Gobar Badshah kaa Kamaal Hindi Story

गोबर बादशाह का कमाल हिंदी कहानी Gobar Badshah kaa Kamaal Hindi Story Baccho ki Kahaniyan in hindi | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

एक औरत का छोटा और मासूम बच्चा कई दिनों से बीमार चला आ रहा था. कई डॉक्टर को दिखा चुकी थी. जिसने भी जिस डॉक्टर या वैद्य का नाम बताया, बच्चे को लेकर उधर ही दौड़ पड़ती. कोई दवा काम नहीं कर रही थी. जो भी जान-पहचान का मिलता, तो यह पूछता था, “अभी ठीक नहीं हुआ तुम्हारा बच्चा?”

वह उसको सीधा-सादा जबाब देती, “किसी की दवा नहीं लग रही है. कई वैद्यों को दिखा चुके हैं.” एक दिन वह कहीं से बच्चे की दवा लेकर आ रही थी. रास्ते में उसे मोहल्ले का एक व्यक्ति मिला. मोहल्ले के नाते से वह उसे भाभी कहता था. बोला, “भाभी क्या हाल है तुम्हारे बच्चे का ?”

उसने उत्तर दिया, “अभी तो कोई दवा नहीं लगी है. बहुतों का इलाज करा लिया है. तुम्हीं बता दो कोई डॉक्टर हो तो ?”
वहीं गली के किनारे एक छोटा मैदान-सा था. वहाँ एक पीपल का पेड़ खड़ा था. वहाँ घुमतु गाएँ आकर बैठ जाती थीं. वहाँ गोबर हमेशा पड़ा ही रहता था. उसने उसी गोबर की ओर इशारा करते हुए मजाक किया, “देखो, वो गोबर बादशाह हैं. वहाँ पीपल के नीचे जाकर मत्था टेको और दो अगरबत्ती जलाओ. ठीक हो जाएगा. लेकिन दवाएं खिलाना बंद मत करना.”

उसने कहा, “अच्छा देवर जी. मैं यह भी करके देखती हूँ,” और आगे बढ़ गई. एक दिन सुबह स्नान करके वह महिला वहां आई. वहाँ उसे कुछ नजर नहीं आया. फिर उसे याद आया कि उसने गोबर बादशाह कहा था. गोबर तो पड़ा था. उसने वहीं मत्था टेका. दो अगरबत्ती जलाकर गोबर में लगाई और चली गई. इधर वह दवा भी खिलाती रही और उधर वह मत्था टेकती, अगरबत्ती जलाती और जय गोबर बादशाह कह कर चल देती. एक दिन उसे वही आदमी फिर मिला. वह बोला “भाभी, अब तुम्हारे बच्चे की तबीयत कैसी है?”

गोबर बादशाह का कमाल हिंदी कहानी Gobar Badshah kaa Kamaal Hindi Story

महिला बोली, “देवर जी, भगवान तुम्हारा भला करे. गोबर बादशाह को मत्था टेकने से मेरा बेटा बिलकुल ठीक हो गया है.” यह सुन उस आदमी को बड़ा आश्चर्य हुआ. फिर वह बोला, “अच्छा, बिलकुल ठीक हो गया ?” महिला ने हंसते हुए कहा, “हां देवर जी.”

वह आदमी बोला, “सब ऊपर वाले की मेहरबानी है.” इतना कहकर वह सोचने लगा, “मैंने तो ऐसे ही मजाक में कह दिया था. यानि डॉक्टर की दवा ने काम किया और इस महिला को गोबर पर विश्वास हो गया.”

बच्चे के ठीक होने की खुशी में उस महिला ने वहां पीपल के पेड़ के नीचे एक आयताकार जगह में किनारे-किनारे ईंटे गडवा दीं और छ: इंच उंचा चबूतरा बना दिया. रास्ते में जब उसे कोई दूसरी महिला मिलती तो वह पूछती कि तुम्हारा बच्चा किसकी दया से ठीक हुआ. मेरे बच्चे को भी किसी की दवा नहीं लग रही है, तो वह महिला कहती, “बहन, मैंने तो गोबर बादशाह को मत्था टेका था और दो अगरबत्तियां जलाई थीं.”

दूसरी महिला बोली, “बहन यह गोबर बादशाह हैं कहाँ?” उसने बताते हुए कहा, “डेयरी के सामने वाली गली में पीपल का पेड़ है. उसके नीचे मैदान-सा है. वहाँ गोबर पड़ा रहता है.” वह बोली, “अच्छा बहन! मैं भी जाउंगी मत्था टेकने,” उस महिला ने यह भी बताया कि जिस डॉक्टर की दवा दे रही हो, दवा करते रहना है. दवा बंद नहीं करना है. महिला ने ‘अच्छा बहन’ कहा और चली गई. इस प्रकार जो भी उस महिला के पास आता, वह उसे गोबर बादशाह का स्थान बता देती और साथ में हिदायत देती कि दवा खिलाना बंद मत करना.

कुछ दिन बाद किसी को किसी डॉक्टर की दवा सटीक बैठ गई और वह ठीक हो गया. लेकिन उसने समझा कि गोबर बादशाह की कृपा से ठीक हुआ है. वह महिला थोडा अधिक खाते-पीते घराने की थी. उसने उस छ: इंच उंची जगह पर तीन फुट उंचा चबूतरा बनवा दिया. इसी प्रकार जब तीसरे का बच्चा ठीक हुआ, उसने उस चबूतरे पर संगमरमर के पत्थर बिछवा दिए. इसी प्रकार कुछ दिन बाद एक ने पक्का कमरा बनवा दिया. अब वहाँ मत्था टेकने वालों की भीड़ होने लगी.

गोबर बादशाह का कमाल हिंदी कहानी Gobar Badshah kaa Kamaal Hindi Story

उधर से एक भिखारी निकला करता था. उसने देखा कि यहाँ पर तो कुछ नहीं था. धीरे-धीरे यहाँ कमरा बन गया और कोई देखभाल करने वाला भी नहीं है. उसने वहाँ अपना डेरा जमा लिया. अब वह सुबह-शाम उसको पानी से धोकर साफ रखता और अगरबत्ती लगा देता. आने वाले लोग जो श्रद्धा से देते, ले लेता था. कुछ समय बाद वहां शहर तथा आस-पास के गांव के लोग मत्था टेकने आने लगे. जब किसी की मनौती पूरी हो जाती तो कुछ न कुछ उस जगह की बढ़ोत्तरी हो जाती. अब वह स्थान गोबर बादशाह के नाम से प्रसिद्ध हो गया.

कुछ दिन बाद उस पुजारी ने साल में दो-तीन तारीखें निश्चित कर दीं. उन तारीखों में मेले लगने शुरू हो गए. मन्दिर के आस-पास फूल वाले, धुप-अगरबत्ती वाले, प्रसाद वाले, चाट वाले आदि रास्ते के एक लाइन में बैठने लगे. आस-पडोस वालों को तो गोबर बादशाह की जन्म-कुंडली मालूम ही थी. इसलिए वे मत्था टेकने नहीं जाते थे.

गोबर बादशाह का कमाल हिंदी कहानी Gobar Badshah kaa Kamaal Hindi Story

जब कभी उस गली के लोग आपस में बैठकर बातें करते तो एक बुजुर्ग उस आदमी की ओर हाथ उठाकर कहता, “असली तो गोबर बादशाह ही हैं. इन्होने वहाँ पड़े गाय के गोबर को मजाक में गोबर बादशाह कह दिया था. आज सचमुच ‘गोबर बादशाह’ का कमाल है.”

यदि आप ध्यान से देखें तो आपको अपने आस-पास इस तरह के गोबर बादशाह किसी और अन्य नाम से अवश्य मिल जायेंगे. जय हो गोबर बादशाह!

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

ईश्वर की माया, कहीं धूप कहीं छाया Ishwar ki Maya Kahin Dhoop Kahin Chhaya

ईश्वर की माया, कहीं धूप कहीं छाया Ishwar ki Maya Kahin Dhoop Kahin Chhaya  Baccho ki Kahaniyan in hindi | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

अक्सर लोगों के मुंह से सुनने को मिल जाता है – ईश्वर की माया, कहीं धूप कहीं छाया. इसको और स्पष्ट करने के लिए एक दृष्टान्त का जिक्र करना लाजिमी हो जाता है.

Ishwar ki Maya Kahin Dhoop Kahin Chhaya

पिछले दिनों एक सज्जन अपने एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने गए थे. उस परिवार की गिनती शहर के अमीर और संपन्न लोगों में होती है. उनका फलता-फूलता व्यवसाय ही उनकी सम्पन्नता का कारण है. उनके घर में शहर के नामी-गिरामी लोगों का आना-जाना लगा रहता है.

शादी वाले दिन तो उनके घर की प्रत्येक चीज से उनकी सम्पन्नता झलक रही थी. उनकी शानो-शौकत देखते ही बन रही थी. पूरे बंगले को फूलों और रंग-बिरंगी बत्तियों से सजाया गया था. मेहमानों को लाने और ले जाने के लिए मँहगी-मँहगी कारों का काफिला लगा था. जो लोग इस शादी में शामिल होने के लिए शहर के बाहर से आये थे, उनके ठहरने के लिए डीलक्स होटलों में व्यवस्था की गयी थी. उनके बंगले की ओर जो भी जाता था वह कुछ पल के लिए भौचक्का रह जाता था. दूर-दूर तक इसी शादी के चर्चे थे.

खान-पान की भी व्यवस्था किसी पाँच सितारा होटल से कम नहीं थी. लोग जितना खा रहे थे उससे ज्यादा बरबाद कर रहे थे. मेहमानों की विदाई मँहगे उपहारों से की जा रही थी.

ईश्वर की माया, कहीं धूप कहीं छाया Ishwar ki Maya Kahin Dhoop Kahin Chhaya

रात काफी हो चुकी थी, इसलिए वे सज्जन भी सभी से इजाजत लेकर अपने घर की ओर चल पड़े . दिसम्बर का महीना था, रात को ठंड थोड़ी बढ़ गई थी. उन्होंने ओला का कैब मंगाया और घर की ओर बढ़ चले.रास्ते में टैक्सी में कुछ खराबी आ गई और उसकी मरम्मत में थोड़ा समय लग गया. ड्राइवर खराबी को ठीक करने में लगा हुआ था. इस बीच में उस सज्जन ने सड़क के किनारे एक छोटी सी चाय की दुकान पर गए और चाय की चुस्कियाँ लेने लगे. वहीं पास में उनकी  नजर एक माँ-बच्चे पर पड़ी जो भूखे-प्यासे ठंडी रात में ठिठुर रहे थे.

उनके तन पर कपड़ों के नाम पर चिथड़े लिपटे हुए थे. माँ बच्चे को सीने से लगाकर उसे ठंड से बचाने की कोशिश कर रही थी. उसने  अभिलाषा भरी नजरों से उस सज्जन की और देखा और अपने बच्चे को खिलाने के लिए उनसे कुछ याचना की. उसके लिए कुछ खाने को माँगा. उनका  मन करुणा से भर गया और उन्होंने उसे  कुछ पैसे दे दिए.

इस बीच ड्राईवर आया और बोला कि साहब  टैक्सी ठीक हो गई. टैक्सी पर सवार होते हुए उन्होंने कुछ समय के ही अंतराल की दोनों घटनाओं को याद किया  और उनके  मुँह से अनायास ही निकल पड़ा- ‘ईश्वर की माया, कहीं धूप कहीं छाया’.

मूर्ख मित्र जान का ग्राहक हिंदी कहानी | Murkh Mitra Jaan ka Grahak Hindi Story | Baccho ki Kahaniyan in hindi |

मूर्ख मित्र जान का ग्राहक हिंदी कहानी | Murkh Mitra Jaan ka Grahak Hindi Story | Baccho ki Kahaniyan in hindi |  short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

ऐसे तो यह एक बहुत प्रचलित कहानी है. लेकिन इस पोस्ट Murkh Mitra Jaan ka Grahak Hindi Story द्वारा इसे एक नए परिपेक्ष्य में देखने की जरुरत है. खासकर जब  हम अपने मित्र का चुनाव करें. कहा भी गया है पूत परखिये मीत से. अर्थात आपका पुत्र की संगति कैसे लोगों से है, इसे देखकर आप उसके बारे में अंदाजा लगा सकते हैं. यदि उसका मित्र मूर्ख या बुद्धिहीन है तो वह कभी भी संकट से घिर सकता है.

Murkh Mitra Jaan ka Grahak Hindi Story

एक राजा था. उसे बंदरों से बहुत ही लगाव था. उसने एक  बड़े बन्दर को तो  अपने निजी सेवक के रूप में पाल रखा  था. वह राजा लोगों से कहता – ‘यह बन्दर नहीं, यह तो मेरा मित्र है.’ जब राजा अपने शयनकक्ष में होता तो वह बंदर वहीं निकट ही पहरेदारी करता रहता.

एक बार राजा जंगल में शिकार खेलने गया तो काफी दिनों बाद वापस लौटा.  वह यात्रा के दौरान काफी थक चुका था. अतः आते ही वह शयनकक्ष में आराम करने चला गया. उसने बंदर को आदेश दिया कि  किसी को भी उसकी नींद में खलल न डालने दे. बंदर आदेश का पालन करने के लिए वहीं राजा के पलंग के निकट नंगी तलवार हाथ में लेकर बैठ गया.

मूर्ख मित्र जान का ग्राहक हिंदी कहानी | Murkh Mitra Jaan ka Grahak Hindi Story | Baccho ki Kahaniyan in hindi |

थोड़ी देर बाद बंदर ने देखा कि एक मक्खी शयनकक्ष में घुस आई है. फिर वह मक्खी राजा की नाक पर बैठ गई. बंदर ने उसे उड़ाना चाहा लेकिन मक्खी वहीं आसपास मंडराती रही.

अब बंदर से रहा न गया, इस बार जैसे ही मक्खी राजा की नाक पर बैठी. बंदर ने आव देखा न ताव, उस पर तलवार चला दी. मक्खी  का तो क्या होना था, वह तो उड़ गई, लेकिन राजा का सिर जरूर धड़ से अलग हो गया.

यदि राजा ने एक बन्दर की मानसिक दशा, उसकी सोच और समझ को ध्यान में रखा होता तो उसे अपनी जान गवानी नहीं पड़ती. इसलिए कहा भी गया है कि एक मूर्ख मित्र से कहीं अच्छा होता है एक बुद्धिमान शत्रु.

यह अब आप पर निर्भर करता है कि आप अपने लिए कैसा मित्र चुनते हैं एक बन्दर या फिर एक समझदार जो आपको सुख और दुःख में समझता हो और आपको अच्छे काम में प्रोत्साहित करता हो , वहीँ बुरे काम से बचाता हो.

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

error: