July 3, 2018 | Hindigk50k

देश के प्रति मेरा कर्त्तव्य पर निबंध- Essay My Duty towards my Country in Hindi-हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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देश के किसी भी व्यक्ति के कर्तव्यों का आशय उसके/उसकी सभी आयु वर्ग के लिये उन जिम्मेदारियों से हैं जो वो अपने देश के प्रति रखते हैं। देश के लिये अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की याद दिलाने के लिये कोई विशेष समय नहीं होता, हांलाकि ये प्रत्येक भारतीय नागरिक का जन्मसिद्ध अधिकार हैं कि वो देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझे और आवश्यकता के अनुसार उनका निर्वाह या निष्पादन अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करें। भारत के प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2016 के गणतंत्र दिवस के अवसर पर इस विषय पर स्कूलों, कॉलेजों, और अन्य स्थानों पर चर्चा करने के लिये कहा हैं।

हम यहाँ छात्रों की मदद करने के लिये अपने देश के प्रति मेरे कर्त्तव्य पर निबंधों की विभिन्न श्रृंखला उपलब्ध करा रहे हैं। ‘अपने देश के प्रति मेरे सभी कर्त्तव्य निबंध’, निबंध सरल हिन्दी वाक्यों का प्रयोग करके विद्यार्थियों के लिये लिखे गये हैं। वो इनमें से अपनी आवश्यकता और जरुरत के अनुसार कोई भी निबंध चुन सकते हैं:

अपने देश के प्रति मेरे कर्त्तव्य पर निबंध (माय ड्यूटी टुवर्ड्स माय नेशन एस्से)

You can get here some essays on My Duty towards my Country in Hindi language for students in 100, 200, 250, 300, 400 and 650 words.

देश के प्रति मेरा कर्त्तव्य पर निबंध 1 (100 शब्द) (Essay My Duty towards my Country in Hindi 100 Words)

हम कह सकते हैं कि, कर्त्तव्य किसी भी व्यक्ति के लिये नैतिक या वैधानिक जिम्मेदारी हैं जिनका पालन सभी को अपने देश के लिये करना चाहिये। ये एक कार्य या कार्यवाई हैं जिसका पालन देश के प्रत्येक और सभी नागरिकों को अपनी नौकरी या पेशे की तरह करना चाहिये। अपने राष्ट्र के लिये अपने कर्तव्यों का पालन करना एक नागरिक का अपने राष्ट्र के प्रति सम्मान को प्रदर्शित करता हैं। हर किसी को सभी नियमों और नियमन का पालन करने के साथ ही विनम्र और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों के लिए वफादार होना चाहिए।

एक व्यक्ति के लिये राष्ट्र के प्रति बहुत से कर्त्तव्य होते हैं जैसे: आर्थिक विकास एवं वृद्धि, साफ-सफाई, सुशासन, गुणवत्ता की शिक्षा, गरीबी मिटाना, सभी सामाजिक मुद्दों को खत्म करना, लिंग समानता लाना, सभी के लिये आदर-भाव रखना, वोट डालने जाना, स्वस्थ्य युवा देने के लिये बाल श्रम को खत्म करना और भी बहुत से।

देश के प्रति मेरा कर्त्तव्य

देश के प्रति मेरा कर्त्तव्य पर निबंध 2 (200 शब्द) (Essay My Duty towards my Country in Hindi 200 Words)

देश के प्रति लोगों के व्यक्तिगत कर्त्तव्य

एक समाज, समुदाय या देश के नागरिक होने के नाते कुछ कर्त्तव्यों का पालन व्यक्तिगत रुप से भी किये जाने की आवश्यकता हैं। देश में उज्ज्वल भविष्य प्रदान करने के लिये सभी को नागरिकता के कर्त्तव्यों का पलान करना चाहिये। एक देश पिछड़ा, गरीब या विकासशील हैं तो सब-कुछ उसके नागरिकों पर निर्भर करता हैं तब तो और भी विशेष रुप से जब वो देश एक प्रजातांत्रिक देश हों। प्रत्येक को देश के अच्छे नागिरक होने के साथ ही देश के प्रति वफादार भी होना चाहिये। लोगों को सभी नियमों, अधिनियमों और सरकार द्वारा सुरक्षा और बेहतर जीवन के लिये बनाये गये कानूनों पालन करना चाहिये।

उन्हें समानता और समाज में उचित समीकरण में विश्वास करना चाहिये। एक आम नागरिक बनों, किसी को भी अपराध के प्रति सहानुभूति नहीं दिखानी चाहिये और इसके खिलाफ आवाज भी उठानी चाहिये। भारत के लोग मतदान के द्वारा मुख्य-मंत्री, प्रधानमंत्री और अन्य राजनीतिक नेताओं को चुनने का अधिकार रखते हैं, इसलिये उन्हें गलत नेता को चुनकर अपनी वोट को बेकार नहीं करना चाहिये जो देश को भ्रष्ट करें। हांलाकि, उन्हें अपने नेता को अच्छे से जानकर और समझ कर अपना मत देना चाहिये। उनका कर्त्तव्य देश को स्वच्छ और सुंदर बनाना हैं। उन्हें अपने देश की ऐतिहासिक विरासत और पर्यटन स्थलों को नष्ट और गंदा नहीं करना चाहिये। लोगों को दैनिक समाचारों और अन्य दैनिक गतिविधियों में देश में चल रही अच्छी और बुरी खबरों के बारे में जानने के लिये दिलचस्पी लेनी चाहिये।

देश के प्रति मेरा कर्त्तव्य पर निबंध 3 (250 शब्द) (Essay My Duty towards my Country in Hindi 250 Words)

देश के प्रति कर्त्तव्य एक व्यक्ति या समूह की नैतिक प्रतिबद्धता और सामूहिक जिम्मेदारियों को रखते हैं। इसे देश के सभी लोगों द्वारा अवश्य समझा जाना चाहिये। भारत वो देश हैं जो ‘विविधता में एकता’ के सिद्धान्त में विश्वास रखता हैं जहाँ एक से अधिक धर्म, जाति, पंथ, संप्रदाय और भाषाओं के लोग एक साथ रहते हैं। ये वो देश हैं जो पूरी दुनिया में इसकी संस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक धरोहरों के कारण प्रसिद्ध हैं, हांलाकि, ये यहाँ के नागरिकों की गैर-जिम्मेदारियों के कारण अभी भी विकासशील देशों की श्रेणी में गिना जाता हैं।

अमीर और गरीब के बीच में बहुत ज्यादा अन्तर हैं। अमीर व्यक्ति गरिबों को न तो समझते ही हैं न ही उनके प्रति अपनी जिम्मेदारियों का पालन करते हैं। वो देश की आर्थिक वृद्धि के बारे में अपनी जिम्मेदारी को भूल गये हैं जो देश में से गरीबी को हटाने से ही बढ़ सकती हैं। सभी को पिछड़े लोगों की उठने में (आर्थिक रुप से समृद्ध होने में), सामाजिक संघर्ष के मुद्दों को हटाने में, भ्रष्टाचार को खत्म करने में, गंदी राजनीति को बंद करके देश की समृद्धि में मदद करनी चाहिये। एक स्वार्थ रहित और देश के प्रति सबसे अच्छे कर्त्तव्य के पालन का उदाहरण भारतीय सैनिकों द्वारा देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिये निभाई जाने वाली ड्यूटी हैं। वो हमें और हमारे देश को विरोधियों से बचाने के लिये 24 घंटे बॉडर पर खड़े रहते हैं। वो अपनी जिम्मेदारी को प्रतिदिन निभाते हैं यहाँ तक कि इसके लिये इन्हें बहुत-सी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता हैं। वो अपने प्रियजनों से अलग रहते हैं और आरामदायक जीवन भी नहीं जीते हैं। हांलाकि, सभी प्रकार की आधारभूत सुविधाओं के होने के बाद भी हम बहुत छोटी सी जिम्मेदारियों जैसे साफ-सफाई, नियमों का पालन करना आदि को निभाने में भी असक्षम हैं।


 

देश के प्रति मेरा कर्त्तव्य पर निबंध 4 (350 शब्द) (Essay My Duty towards my Country in Hindi 350 Words)

भारत एक धार्मिक, सांस्कृतिक और परंपरागत देश हैं और विवधता में एकता के लिये प्रसिद्ध हैं। हांलाकि, इसे विकास के लिये स्वच्छ, भ्रष्टाचार, सामाजिक संघर्षों, महिलाओं के खिलाफ अपराधों, गरीबी, प्रदूषण, ग्लोबल वॉर्मिंग आदि के अन्त के लिये अपने नागरिकों के और अधिक प्रयासों की आवश्यकता हैं। लोगों को सरकार पर चिल्लाने और दोषी ठहराने के स्थान पर देश के प्रति अपने कर्त्तव्यों को समझना चाहिये। देश की वृद्धि एवं विकास के लिये सभी व्यक्ति व्यक्तिगत रुप से जिम्मेदार हैं। लोगों को लाओं तुज़ के प्रसिद्ध कथन,“हजारों कोसो की यात्रा एक कदम से शुरु होती हैं।” को कभी नहीं भूलना चाहिये। सभी को अपने मौलिक कर्त्तव्यों के बारे में जानकारी रखनी चाहिये और उन्हें नजरअंदाज किये बिना अनुकरण करना चाहिये। देश के अच्छे और जिम्मेदार नागरिक होने के कारण, सभी को अपने कर्त्तव्य वफादारी से निभाने चाहिये जैसे:

  • लोगों को सरकार के बनाये हुये सभी नियमों और कानूनों का पालन करना चाहिये। उन्हें प्राधिकरणों का आदर करना चाहिये और कोई नियम नहीं तोड़ना चाहिये साथ ही साथ दूसरों को भी ऐसा करने के लिये प्रेरित करना चाहिये।
  • उन्हें अपने खिलाफ किसी भी अपराध को सहन नहीं करना चाहिये और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठानी चाहिये। उन्हें समाज को नकारात्मक प्रभाव से बचाते हुये अपने सभी नागरिक और सामाजिक कर्त्तव्यों का पालन करना चाहिए।
  • उन्हें जरुरतमंद लोगों के लिये समाधान उपलब्ध कराने चाहिये, बुद्धिमत्ता पूर्ण मतदान करना चाहिये और अपने सभी करों का भुगतान समय पर करना चाहियें।
  • उन्हें समाज के हित के लिये आर.टी.आई. और आर.टी.ई. जैसे अधिनियमों की मदद लेनी चाहिये।
  • सभी को अपने चारों ओर साफ-सफाई रखने के लिये स्वच्छता अभियान में भाग लेना चाहिये। उन्हें बच्चों को बेकार वस्तुओं को कूड़ेदान में डालना और सार्वजनिक वस्तुओं की देखभाल करना सिखाना चाहिये।
  • वो लोग जो समर्थ हैं उन्हें गैस के अनुदान (सब्सिडी) को छोड़ देना चाहिये।
  • सभी को देश और संगी नागरिकों के प्रति ईमानदार और वफादार होना चाहिये। उन्हें एक-दूसरे के लिये सम्मान की भावना रखनी चाहिये और देश के कल्याण के लिये बनायी गयी सामाजिक व आर्थिक नीतियों का भी सम्मान करना चाहिये।
  • लोगों को अपने बच्चों को शिक्षा में शामिल करना चाहिये और उनके स्वास्थ्य और बचपन की देखभाल करनी चाहिये। उन्हें अपने बच्चों को बाल-श्रम और अन्य अपराध करने के लिये मजबूर नहीं करना चाहिये।
  • लोगों को अपने देश को दुनिया में सबसे अच्छा देश बनाने के लिये प्रयास करना चाहिये।

देश के प्रति मेरा कर्त्तव्य पर निबंध 5 (400 शब्द) (Essay My Duty towards my Country in Hindi 400 Words)

परिचय

किसी भी व्यक्ति के कर्त्तव्य उसकी वो जिम्मेदारी हैं जिन्हें उसे व्यक्तिगत रुप से निभाना होता हैं। एक नागरिक जो समाज, समुदाय या देश में रहता हैं, वो देश, समाज या समुदाय के लिये बहुत से कर्त्तव्यों और जिम्मेदारियों को रखता हैं जिन्हें उसे सही तरीके से निभाना होता हैं। लोगों को अच्छाई में विश्वास रखना चाहिये और देश के प्रति महत्वपूर्ण कर्त्तव्यों को कभी भी नजअंदाज नहीं करना चाहिये।

देश का एक नागरिक होने के नाते मेरा देश के लिये कर्त्तव्य

हमारे देश को ब्रिटिश शासन से आजादी मिले बहुत वर्ष बीत गये जो बहुत से महान स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और संघर्ष से प्राप्त हुई थी। वो देश के प्रति अपने कर्त्तव्यों के वास्तविक अनुसरणकर्त्ता थे जिन्होंने लाखों लोगों के साथ अपना अमूल्य जीवन गवाकर स्वतंत्रता के सपने को हकीकत बनाया। भारत की स्वतंत्रता के बाद, अमीर लोग और राजनेता केवल अपने खुद के विकास में लग गये न कि देश के विकास में। ये सत्य हैं कि हम ब्रिटिश शासन से आजाद हो गये हैं हांलाकि, लालच, अपराध, भ्रष्टाचार, गैर-जिम्मेदारी, सामाजिक मुद्दों, बाल श्रम, गरीबी, क्रूरता, आतंकवाद, कन्या भ्रूण-हत्या, लिंग-असमानता, दहेज-मृत्यु, सामूहिक दुष्कर्म और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों से आज-तक आजाद नहीं हुये।

केवल सरकार द्वारा नियम, कानून, प्राधिकरण, अधिनियम, अभियान या कार्यक्रमों को बनाना काफी नहीं हैं, वास्तविकता में सभी गैर-कानूनी गतिविधियों से मुक्त होने के लिये इन सभी का प्रत्येक भारतीय नागरिकों के द्वारा कड़ाई से अनुसरण किया जाना चाहिये। भारतीय नागरिकों को वफादारी के साथ देश के प्रति अपने कर्त्तव्यों को पालन गरीबी, लिंग असमानता, बाल श्रम, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और अन्य सामाजिक मुद्दों के उन्मूलन के साथ ही सभी के भले के लिये करना चाहिये। भारतीय नागरिकों को अपना राजनीतिक नेता चुनने के अधिकार हैं जो देश के विकास को सही दिशा में आगे ले जा सके। इसलिये, उन्हें अपने जीवन में बुरे लोगों को दोष देने का कोई अधिकार नहीं हैं। उन्हें अपने राजनीतिक नेता को वोट देते समय अपनी आँखे खुली रखनी चाहिये और एक ऐसा नेता चुनना चाहिये जो वास्तव में भ्रष्ट मानसिकता से मुक्त हो और देश का नेतृत्व करने में सक्षम हो।

निष्कर्ष

ये भारत के नागरिकों के लिये आवश्यक है कि वो वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर होने के लिये अपने देश के लिये अपने कर्त्तव्यों का व्यक्तिगत रुप से पालन करें। ये देश के विकास के लिये बहुत आवश्यक हैं जो तभी संभव हो सकता है जब देश में अनुशासित, समय के पाबंद, कर्तव्यपरायण और ईमानदार नागरिक हो।


 

देश के प्रति मेरा कर्त्तव्य पर निबंध 6 (650 शब्द) (Essay My Duty towards my Country in Hindi 650 Words)

देश के प्रति नागरिकों के कर्त्तव्य

भारतीय नागरिकों के विभिन्न पदों के लिये निम्नलिखित जिम्मेदारियाँ हैं:

  • माता-पिता: माता-पिता देश के प्रति सबसे ज्यादा जिम्मेदार होते हैं क्योंकि वो ही देश के लिये एक अच्छे और बुरे नेता देने के मुख्य स्त्रोत हैं। वो बच्चों के प्राथिमक आधारभूत विद्यालय होते हैं इसलिये उन्हें हर समय चौकस रहना चाहिये क्योंकि वो देश के भविष्य को पोषण देने के लिये जिम्मेदार हैं।

कुछ लालची माता-पिता (चाहे गरीब हो या अमीर) के कारण, हमारा देश आज भी गरीबी, लिंग असमानता, बाल-श्रम, बुरे सामाजिक और राजनीतिक नेता, कन्या भ्रूण-हत्या जैसी सामाजिक बुराईयों को अस्तित्व में रखता हैं और जिससे देश का भविष्य बेकार है। सभी माता-पिता को देश के प्रति अपने कर्त्तव्यों को समझना चाहिये और अपने बच्चों (चाहे लड़की हो या लड़का) को उचित शिक्षा के लिये स्कूल अवश्य भेजना चाहिये, इसके साथ ही अपने बच्चों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और नैतिक विकास की देखभाल करनी चाहिये, उन्हें अच्छी आदतें, शिष्टाचार, और देश के प्रति उनके कर्त्तव्यों को सिखाना चाहिये।

  • शिक्षक: अपने छात्रों को अच्छा और सफल नागरिक बनाकर देश को अच्छा भविष्य देने में शिक्षक द्वितीय स्त्रोत हैं। उन्हें अपने देश के प्रति अपने कर्त्तव्यो को समझना चाहिये और कभी भी अपने छात्रों के मध्य (अमीर-गरीब, बुद्धिमान- औसत छात्रों में) भेदभाव नहीं करना चाहिये। उन्हें देश के लिए अच्छे नेता और उज्ज्वल भविष्य देने के लिए अपने सभी छात्रों को समान ढंग से पढ़ाना चाहिए।
  • डॉक्टर: मरीज के लिये डॉक्टर एक भगवान की तरह माना जाता हैं क्योंकि वो उन्हें नया जीवन देता/देती हैं। कुछ लालची डॉक्टरों के कारण देश में उच्च तकनीकी उपचार उपलब्ध नहीं हैं। जो देश के गरीब यहाँ तक कि मध्यम श्रेणी के लोगों के लिये भी बहुत मंहगे है इसलिये वो इन्हें जुटा नहीं पाते हैं। कुछ सरकारी डॉक्टर अस्पतालों (हॉस्पिटल्स) में अपने कर्त्तव्यों को सही से नहीं निभाते हैं और अपने निजी चिकित्सालयों (क्लीनिकों) को खोल लेते हैं। उन्हें देश में सभी महंगे उपचारों को सभी जरुरतमंदों के लिये किफायती मूल्यों पर उपलब्ध कराने की अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिये। उन्हें उच्च शिक्षा के बाद विदेश नहीं जाना चाहिये हांलाकि, अपने देश में रहकर देश के बेहतर विकास के लिये कार्य करने चाहिये।
  • इंजीनियर (अभियन्ता): इंजीनियर देश के निर्माण विकास कार्य के लिये बहुत ज्यादा जिम्मेदार हैं। उन्हें देश के विकास के लिये अपने ज्ञान और पेशेवर कौशल तकनीकों सकारात्मक तरीके से सही दिशा में प्रयोग करना चाहिये। उन्हें भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं होना चाहिये और अपने कर्त्तव्यों के प्रति वफादार होना चाहिये।
  • राजनेता: एक देश का स्तर देश के राजनेताओं पर निर्भर करता हैं। एक राजनेता (जो लालची न हो और न ही भ्रष्टाचार में लिप्त हो) देश के विकास में अपनी विभिन्न महान भूमिकाओं को निभाता हैं वहीं एक भ्रष्ट राजनेता देश को नष्ट कर सकता हैं। इसलिये एक राजनेता को अपने कर्त्तव्यों को समझकर देश के प्रति अपने कर्त्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना चाहिये।
  • पुलिस सिपाही: पुलिस की नियुक्ति शहर, राज्यों और राष्ट्र स्तर पर विभिन्न स्थानों पर पूरे देश में सुरक्षा, शान्ति और सद्भावना को बनाये रखने के लिये की जाती हैं। वो लोगों की उम्मीद हैं, इसलिये उन्हें अपने देश और लोगों के साथ वफादार होना चाहिये।
  • व्यवसायी या कारोबारी: एक व्यवसायी का अपने देश के प्रति मुख्य कर्त्तव्य ये हैं कि वो देश में ज्यादा से ज्यादा रोजगार प्रदान करे, न कि विदेशों में और अपने देश की आर्थिक वृद्धि दर को बढ़ाने के साथ ही देश में गरीबी के उन्मूलन के प्रयास करें। उन्हें किसी तरह के भ्रष्टाचार और तस्करी में शामिल नहीं होना चाहिये।
  • खिलाड़ी: खिलाड़ियों को अपने खेल और देश के प्रति वफादारी रखनी चाहिये और किसी भी तरह के भ्रष्टाचार या मैच-फिक्सिंग में शामिल नहीं होना चाहिये क्योंकि वो देश के युवाओं के आदर्श होते हैं।
  • सामान्य नागरिक (आम-आदमी): आम आदमी विभिन्न तरीकों से देश के लिये जिम्मेदार हैं। उन्हें अपने निष्ठापूर्ण कर्त्तव्यों को समझना चाहिये और देश के नेतृत्व के लिये अच्छा नेता चुनना चाहिये जो देश को सही दिशा में ले जा सके। उन्हें अपने घर के साथ-साथ अपने आस-पास के वातावरण को साफ और स्वच्छ रखना चाहिये जिससे कि उनका परिवार स्वस्थ्य, खुशहाल और बीमारी मुक्त बना सके। उन्हें अनुशासित, समय का पाबंद और अपने पेशे के प्रति कर्त्तव्य निष्ठ होना चाहिये।

 

देश के प्रति मेरा कर्त्तव्य पर निबंध 7 (700 शब्द) (Essay My Duty towards my Country in Hindi 700 Words)

परिचय

एक व्यक्ति अपने जीवन में अपने, परिवार, माता-पिता, बच्चों, पत्नी, पति, पड़ोसियों, समाज, समुदाय और सबसे अधिक महत्वपूर्ण देश के प्रति बहुत से कर्त्तव्यों को रखता हैं। देश के प्रति एक व्यक्ति के कर्त्तव्य इसकी गरिमा, उज्ज्वल भविष्य बनाये रखने और इसे भलाई की ओर अग्रसर करने के लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं।

मैं कौन हूँ

मैं एक भारतीय नागरिक हूँ क्योंकि मैनें यहाँ जन्म लिया हैं। देश का/की एक जिम्मेदार नागरिक होने के कारण मैं अपने देश के प्रति बहुत से कर्त्तव्यों को रखता/रखती हूँ जो सभी पूरे किये जानी चाहिये। मुझे अपने देश के विकास से संबंधित विभिन्न पहलुओं के कर्त्तव्यों का पालन करना चाहिये।

कर्त्तव्य क्या हैं

कर्त्तव्य वो कार्य या गतिविधियाँ हैं जिन्हें सभी को व्यक्तिगत रुप से दैनिक आधार पर देश की भलाई और अधिक विकास के लिये करनी चाहिये। अपने कर्त्तव्यों को पालन वफादारी से करना ये प्रत्येक भारतीय नागरिक की जिम्मेदारी हैं और ये देश के लिये आवश्यक माँग भी हैं।

देश के लिये मेरे क्या कर्त्तव्य है

देश का एक नागरिक वो होता है जो न केवल अपना बल्कि उसके/उसकी पूर्वजों ने भी लगभग पूरा जीवन उस देश में व्यतीत किया हो, इसलिये प्रत्येक राष्ट्र के लिये कुछ कर्त्तव्य भी रखते हैं। एक घर का उदाहरण लेते है जहाँ विभिन्न सदस्य एक साथ रहते हैं हांलाकि, प्रत्येक घर के मुखिया, सबसे बड़े सदस्य द्वारा बनाये गये सभी नियमों एवं प्रतिनियमों का अनुसरण घर की भलाई और शान्तिपूर्ण जीवन के लिये करते है। उसी तरह, हमारा देश भी हमारे घर की तरह ही है जिसमें विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ रहते है हांलाकि उन्हें कुछ नियमों और कानूनों का अनुसरण करने की आवश्यकता होती है जो सरकार ने देश के विकास के लिये बनाये हैं। देश के कर्त्तव्यों के प्रति वफादार नागरिकों का उद्देश्य सभी सामाजिक मुद्दों को हटाकर, देश में वास्तविक स्वतंत्रता लाकर देश को विकासशील देशों की श्रेणी में लाना होता हैं।

सरकारी या निजी क्षेत्र के कार्यालयों में, कार्य करने वाले कर्मचारियों को समय से जाकर बिना समय व्यर्थ में गवाये अपने कर्त्तव्यों को वफादारी के साथ निभाना चाहिये क्योंकि इस सन्दर्भ में सही कहा गया हैं कि, “यदि हम समय बर्बाद करेंगें तो समय हमें बर्बाद कर देगा।” समय किसी के लिये भी इंतजार नहीं करता, ये लगातार भागता रहता हैं और हमें समय से सीखना चाहिये। हमें तब तक नहीं रुकना चाहिये जब तक कि हम अपने लक्ष्य तक न पहुँच जाये। हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य अपने देश को वास्तविक अर्थों में महान बनाना हैं।

हमें स्वार्थी नहीं होना चाहिये और अपने देश के प्रति अपने कर्त्तव्यों को समझना चाहिये। ये केवल हम है, न कि कोई और, जो इससे लाभान्वित हो सकते हैं और शोषित भी। हमारी प्रत्येक गतिविधि सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से (यदि हम सकारात्मक कार्य करेंगें तो लाभान्वित होंगे और यदि नकारात्मक कार्य करेंगें तो शोषित होंगें) प्रभावित करती हैं। इसलिये, क्यों न आज ये प्रतिज्ञा करें कि अपने ही देश में शोषित बनने से खुद को बचाने के लिये आज से हम प्रत्येक कदम सही दिशा में सकारात्मकता के साथ उठायेगें। ये हम ही हैं जिन्हें अपने देश के लिये सही नेता को चुनकर उस पर राज्य करने का अधिकार प्राप्त हैं। तो हम दूसरों और नेताओं को क्यों दोष दे, हमें केवल खुद को दोष देना चाहिये न कि दूसरों को क्योंकि वो हम हीं थे जिन्होंने माँग के अनुसार अपने कर्त्तव्यों का पालन नहीं किया। हम केवल अपनी ही दैनिक दिनचर्या में लगे रहे और दूसरों के जीवन, पाठ्येतर गतिविधियों, देश के राजनीतिक मामलों, आदि से कोई मतलब नहीं रखा। ये हमारी गलती हैं कि हमारा देश आज भी विकासशील देशों की श्रेणी में हैं न कि विकलित देशों की श्रेणी में।

निष्कर्ष

ये बहुत बड़ी समस्या हैं हमें इसे हल्कें में नहीं लेना चाहिये। हमें लालची और स्वार्थी नहीं होना चाहिये; हमें खुद और दूसरों को स्वस्थ्य और शान्तिपूर्ण जीवन जीने देना चाहिये। अपने देश का उज्ज्वल भविष्य हमारे अपने हाथ में हैं। अभी भी खुद को बदलने का समय हैं, हम और भी अच्छा कर सकते हैं। खुली आँखों से जीवन जीना शुरु करके अपने देश के प्रति अपने कर्त्तव्यों का पालन करना चाहिये। हमें अपने हृदय, शरीर, मस्तिष्क और चारों तरफ के क्षेत्रों को साफ करके एक नयी व अच्छी शुरुआत करनी चाहिये।

अनुशासन पर निबंध- Essay on Discipline in Hindi-हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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सभी के लिये खुशहाल और एक सफल जीवन जीने के लिये अनुशासन बहुत ही जरुरी है। यहाँ पर हम कुछ संख्याओं में आपके स्कूल जाने वाले बच्चों के लिये निबंध उपलब्ध करा रहें है। सामान्यत: स्कूलों में विद्यार्थीयों को अनुशासन पर निबंध लिखने को दिया जाता है। अत: आप दिये गये निबंधों का प्रयोग किसी भी प्रतियोगिता आदि में कर सकते हैं।

अनुशासन पर निबंध (Essay on Discipline in Hindi)

Get below some essays on Discipline in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

अनुशासन पर निबंध 1 (100 शब्द) (Essay on Discipline in Hindi 100 Words)

हर एक के जीवन में अनुशासन सबसे महत्पूर्ण चीज है। बिना अनुशासन के कोई भी एक खुशहाल जीवन नहीं जी सकता है। कुछ नियमों और कायदों के साथ ये जीवन जीने का एक तरीका है। अनुशासन सब कुछ है जो हम सही समय पर सही तरीके से करते हैं। ये हमें सही राह पर ले जाता है।

हम अपने रोजमर्रा के जीवन में कई प्रकार के नियमों और कायदों के द्वारा अनुशासन पर चलते हैं। इसके कई सारे उदाहरण हैं जैसे हम सुबह जल्दी उठते हैं, एक ग्लास साफ पानी पीते हैं, तरोताजा होने के लिये शौचालय जाते हैं, दाँत साफ करते हैं, स्नान करते हैं, नाश्ता करते हैं, स्कूल जाते हैं आदि सभी अनुशासन का ही एक प्रकार है।

अनुशासन

अनुशासन पर निबंध 2 (150 शब्द) (Essay on Discipline in Hindi 150 Words)

जीवन के सभी कार्यों में अनुशासन अत्यधिक मूल्यवान है। हमें हर समय इसका पालन करना है चाहे वो स्कूल, घर, कार्यालय, संस्थान, फैक्टरी, खेल का मैदान, युद्ध का मैदान या दूसरी जगह हों। ये खुशहाल और शांतिपूर्णं जीवन जीने की सबसे बड़ी जरुरत है। ये हमें ढेर सारे बड़े मौके देती है, अनुशासन आगे बढ़ने के लिये सही रास्ता देती है, जीवन में सही बातें सीखाती है, कम समय में ज्यादा अनुभव मिलता है आदि। जबकि अनुशासन की कमी की वजह से ढेर सारी दुविधा और गड़बड़ी होती है, अनुशासनहीनता की वजह से जीवन में शांति और प्रगति के बजाय ढेर सारी परेशानी उत्पन्न हो जाती है।

अनुशासन अपने बड़ों, ऑफिस के सीनीयर, शिक्षक, और माता-पिता के हुक्म का पालन करना है जिससे हम सफलता की ओर आगे बढ़ते हैं। हमें नियमों पर चलने की, आज्ञा का पालन करने की और सही तरीके से व्यवहार करने की जरुरत है। हमें अपने जीवन में अनुशासन के महत्व को समझना चाहिये। जो लोग अनुशासनहीन होते हैं वो अपने जीवन में बहुत सारी समस्या ओं को झेलते हैं साथ ही निराश भी होते हैं।

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अनुशासन पर निबंध 3 (200 शब्द) (Essay on Discipline in Hindi 200 Words)

अनुशासन किसी भी कार्य को ठीक ढंग से करने का एक तरीका है। इसके लिये आपके शरीर और दिमाग पर एक नियंत्रण की जरुरत होती है। कुछ लोगों के पास स्व-अनुशासन प्राकृतिक संपत्ति के रुप में होता है जबकि कुछ को इसे अपने अंदर विकसित करना पड़ता है। अनुशासन में वो दक्षता है कि वो भावनाओं को नियंत्रित कर सकता है और मुश्किलों से पार पाने के साथ ही सही समय पर सही कार्य करने में मदद करता है। बिना अनुशासन के जीवन अधूरा और असफल है। अपने बड़ों और वरिष्ठों का सम्मान करने के द्वारा हमें कुछ नियमों का पालन करना चाहिये।

ये जीवन के सभी कार्यों के लिये एक महत्वपूर्णं यंत्र है चाहे वो घर, कार्यालय, खेल का मैदान या दूसरी जगह हो। अगर हम अनुशासन का पालन न करें तो हमारा जीवन अव्यवस्थित हो जायेगा। इस दुनिया में हर चीज अनुशासित है और अनुशासन के द्वारा संगठित है। हवा, पानी और जमींन हमें जीवन जीने का रास्ता देते है। ये दुनिया, देश, समाज, समुदाय आदि सबकुछ बिना अनुशासन के असंगठित हो जायेगा क्योंकि सब कुछ अनुशासन पर निर्भर है। अनुशासन एक स्वभाव है जो प्रकृति द्वारा प्रदत्त सभी चीजों में उपस्थित है।

 


अनुशासन पर निबंध 4 (250 शब्द) (Essay on Discipline in Hindi 250 Words)

अनुशासित व्यक्ति आज्ञाकारी होता है और उसके पास उचित सत्ता के आज्ञा पालन के लिये स्व-शासित व्यवहार होता है। अनुशासन पूरे जीवन में बहुत महत्व रखता है और जीवन के हर कार्यों में इसकी जरुरत होती है। यह सभी के लिये आवश्यक है जो किसी भी प्रोजेक्ट पर गंभीरता से कार्य करने के लिये जरुरी है। अगर हम अपने वरिष्ठों की आज्ञा और नियमों को नहीं मानेंगे तो अवश्य हमें परेशानियों का सामना करना पड़ेगा और असफल भी हो सकते हैं।

हमें हमेशा अनुशासन में होना चाहिये और अपने जीवन में सफल होने के लिये अपने शिक्षक और माता-पिता के आदेशों का पालन करना चाहिये। हमें सुबह जल्दी उठना चाहिये, निययमित दिनचर्या के तहत साफ पानी पीकर शौचालय जाना चाहिये, दाँतों को साफ करने के बाद नहाना चाहिये और इसके बाद नाश्ता करना चाहिये। बिना खाना लिये हमें स्कूल नहीं जाना चाहिये। हमें सही समय पर स्वच्छता और सफाई से अपना गृह-कार्य करना चाहिये। हमें कभी भी अपने माता-पिता की बातों का निरादर, नकारना या उन्हें दुखी नहीं करना चाहिये। हमें अपने स्कूल में पूरे यूनिफार्म में और सही समय पर जाना चाहिये। कक्षा में स्कूल के नियमों के अनुसार हमें प्रार्थना करना चाहिये। हमें अपने शिक्षकों की आज्ञा का पालन करना चाहिये, साफ लिखावट से अपना कार्य करना चाहिये तथा सही समय पर दिये गये पाठ को अच्छे से याद करना चाहिये।

हमें शिक्षक, प्रधानाध्यापक, चौकीदार, खाना बनाने वाले या विद्यार्थियों से बुरा बर्ताव नहीं करना चाहिये। हमें सभी के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिये चाहे वो घर, स्कूल, कार्यालय या कोई दूसरी जगह हो। बिना अनुशासन के कोई भी अपने जीवन में कोई भी बड़ी उपलब्धि प्राप्त नहीं कर सकता। इसलिये अपने जीवन में सफल इंसान बनने के लिये हमें अपने शिक्षक और माता-पिता की बात माननी चाहिये।

अनुशासन पर निबंध 5 (300 शब्द) (Essay on Discipline in Hindi 300 Words)

अनुशासन एक क्रिया है जो अपने शरीर, दिमाग और आत्मा को नियंत्रित करता है और परिवार के बड़ों, शिक्षकों और माता-पिता की आज्ञा को मानने के द्वारा सभी कार्य को सही तरीके से करने में मदद करता है। ये एक ऐसी क्रिया है जो अनुशासन में रह कर हर नियम-कानून को मानने के लिये हमारे दिमाग को तैयार करती है। हम अपने दैनिक जीवन में सभी प्राकृतिक संसाधनों में वास्तविक अनुशासन के उदाहरण को देख सकते हैं। सूरज और चाँद का सही समय पर उगना और अस्त होना, सुबह और शाम का अपने सही समय पर आना और जाना, नदियाँ हमेशा बहती है, अभिभावक हमेशा प्यार करते हैं, शिक्षक हमेशा शिक्षा देते है और भी बहुत कुछ। तो फिर क्यों हम अपने जीवन में पीछे हैं, बिना परेशानियों का सामना किये आगे बढ़ने के लिये हमें भी अपने जीवन में सभी जरुरी अनुशासन का पालन करना चाहिये।

हमें अपने शिक्षक, अभिभावक और बड़ों की बातों को मानना चाहिये। हमें उनके अनुभवों के बारे में उनसे सुनना चाहिये और उनकी सफलता और असफलता से सीखना चाहिये। जब भी हम किसी चीज को गहराई से देखना और समझना शुरु करते हैं, तो ये हमें जीवन में महत्वपूर्ण सीख देता है। मौसम अपने सही समय पर आता और जाता है, आकाश बारिश करता है और रुकता है आदि सभी सही समय होती हैं जो हमारे जीवन को संतुलित बनाती है। इसलिये, इस धरती पर जीवन चक्र को कायम रखने के लिये हमें भी अनुशासन में रहने की जरुरत है। हमारे पास अपने शिक्षक, अभिभावक, पर्यावरण, परिवार, वातावरण और जीवन आदि के प्रति बहुत सारी जिम्मेदारियां हैं। मानव होने के नाते हमारे पास सोचने-समझने का, सही-गलत के बारे में फैसला करने के लिये और अपनी योजना को कार्य में बदलने के लिये अच्छा दिमाग है। इसलिये, अपने जीवन में अनुशासन के महत्व और जरुरत को जानने के लिये हम अत्यधिक जिम्मेदार हैं।

अनुशासनहीनता की वजह से जीवन में ढेर सारी दुविधा हो जाती है और व्यक्ति को गैर-जिम्मेदार और आलसी बना देता है। ये हमारे विश्वास के स्तर को कम करती है और आसान कार्यों में भी व्यक्ति को दुविधाग्रस्त रखती है। जबकि अनुशासन में होने से ये हमें जीवन के सबसे अधिक ऊंचाईयों की सीढ़ी पर ले जाती है।


 

अनुशासन पर निबंध 6 (400 शब्द) (Essay on Discipline in Hindi 400 Words)

अनुशासन कुछ ऐसा है जो सभी को अच्छे से नियंत्रित किये रखता है। ये व्यक्ति को आगे बढ़ने के लिये प्रेरित करता है और सफल बनाता है। हम में से हर एक ने अपने जीवन में समझदारी और जरुरत के अनुसार अनुशासन का अलग-अलग अनुभव किया है। जीवन में सही रास्ते पर चलने के लिये हर एक व्यक्ति में अनुशासन की बहुत जरुरत पड़ती है। अनुशासन के बिना जीवन बिल्कुल निष्क्रिय और निर्थक हो जाता है क्योंकि कुछ भी योजना अनुसार नहीं होता है। अगर हमें किसी भी प्रोजेक्ट को पूरा करने के बारे में अपनी योजना को लागू करना है तो सबसे पहले हमें अनुशासन में होना पड़ेगा। अनुशासन दो प्रकार का होता है एक वो जो हमें बाहरी समाज से मिलता है और दूसरा वो जो हमारे अंदर खुद से उत्पन्न होता है। हालाँकि कई बार, हमें किसी प्रभावशाली व्यक्ति से अपने स्व-अनुशासन आदतों में सुधार करने के लिये प्रेरणा की जरुरत होती है।

हमारे जीवन के कई पड़ावों पर बहुत से रास्तों पर हमें अनुशासन की जरुरत पड़ती है इसलिये बचपन से ही अनुशासन का अभ्यास करना अच्छा होता है। स्व-अनुशासन का सभी व्यक्तियों के लिये अलग-अलग अर्थ होता है जैसे विद्यार्थियों के लिये इसका मतलब है सही समय पर एकाग्रता के साथ पढ़ना और दिये गये कार्य को पूरा करना। हालाँकि काम करने वाले इंसान के लिये सुबह जल्दी उठना, व्यायाम करना, समय पर कार्यालय जाना और ऑफिस के कार्य को ठीक ढंग से करना। हर एक में स्व-अनुशासन की बहुत जरुरत है क्योंकि आज के आधुनिक समय में किसी को भी दूसरों को अनुशासन के लिये प्रेरित करने का समय नहीं है। बिना अनुशासन के कोई भी अपने जीवन में असफल हो सकता है, अनुशासन के बिना कोई भी इंसान कभी भी अपने अकादमिक जीवन या दूसरे कार्यों की खुशी नहीं मना सकता।

स्व-अनुशासन की जरुरत हर क्षेत्र में होती है जैसे संतुलित भोजन करना (मोटापे और बेकार खाने को नियंत्रित करना), नियमित व्यायाम (इसके लिये एकाग्रता की जरुरत है) आदि। गड़बड़ और अनियंत्रित खाने-पीने से किसी को भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएँ हो सकती हैं इसलिये स्वस्थ रहने के लिये अनुशासन की जरुरत है। अभिवावक को स्व-अनुशासन को विकसित करने की जरुरत है क्योंकि उसी से वो अपने बच्चों को एक अच्छा अनुशासन सिखा सकते हैं। उन्हें हर समय अपने बच्चों को प्रेरित करते रहने की जुरुरत पड़ती है जिससे वो दूसरों से अच्छा व्यवहार करें और हर कार्य को सही समय पर करें। कुछ शैतान बच्चे अपने माता-पिता के अनुशासन को नहीं मानते हैं, ऐसे वक्त में अभिभावकों को हिम्मत और धैर्य के साथ अपने बदमाश बच्चों को सिखाना चाहिये। प्रकृति के अनुसार अनुशासन को ग्रहण करने की सभी व्यक्ति का अलग समय और क्षमता होती है । इसलिये, कभी हार मत मानो और लगातार प्रयास करते रहो अनुशासन में होने को, छोटे-छोटे कदमों से ही बड़ी मंजिलें हासिल की जा सकती हैं।

Current affairs 03 July 2018 Daily Current Affairs Today

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Current affairs 03 July 2018 Daily Current Affairs Today

1. Former Indian captain Rahul Dravid has been inducted into the ICC Cricket Hall of Fame. 
पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ को आईसीसी क्रिकेट हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया है।
 
2. Alka Tiwari has been appointed as the Secretary of Central Vigilance Commission (CVC). 
अल्का तिवारी को केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है।
3. Commander Abhilash Tomy only invitee from Asia to the Golden Globe Race. 
केवल कमांडर अभिलाष टॉमी एशिया से गोल्डन ग्लोब रेस के लिए आमंत्रित किये गए हैं।
4. The Income Tax department has launched an ‘instant’ PAN allotment service. 
आयकर विभाग ने ‘तत्काल’ पैन आवंटन सेवा शुरू की है।
5. First meeting of Cauvery Water Management Authority was held in New Delhi to resolve dispute among southern states. 
दक्षिणी राज्यों के बीच विवाद को हल करने के लिए नई दिल्ली में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की पहली बैठक आयोजित की गई।
 
6. The Chhattisgarh government has decided to set up a tribal museum in the state’s upcoming new capital Naya Raipur. 
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की होने वाली नई राजधानी नया रायपुर में जनजातीय संग्रहालय स्थापित करने का निर्णय लिया है।
 
8. T Latha has taken charge as Managing Director and CEO of Dhanlaxmi Bank. 
टी लता ने धनलक्ष्मी बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ के रूप में पदभार संभाला है।
 
9. Vishwas Patel has been appointed as the Chairman of Payments Council of India. 
विश्वास पटेल को भारतीय भुगतान परिषद के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है।
10. Sathyasri Sharmila has become the country’s first transgender lawyer. 
सत्य श्री शर्मिला देश की पहली ट्रांसजेंडर वकील बन गई है।