July 1, 2018 | Hindigk50k

प्राकृतिक संसाधन पर निबंध- Essay on Natural Resources in Hindi-हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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प्राकृतिक संसाधन पर निबंध- Essay on Natural Resources in Hindi-हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

राकृतिक संसाधन सामान्य रुप से प्रकृति के द्वारा दिया गया एक उपहार हैं। सूरज की रोशनी, पानी, मिट्टी और हवा प्राकृतिक संसाधनों के कुछ ऐसे उदाहरण हैं जो मनुष्यों के हस्तक्षेप के बिना स्वाभाविक रूप से उत्पादित होते हैं। ये प्रकृति में प्रचुर मात्रा में पाए जाते है। हालांकि, ऐसे औऱ कई अन्य प्राकृतिक संसाधन भी हैं, जो आसानी से नहीं मिलते जैसे- खनिज और जीवाश्म ईंधन। यहां पे आपको लम्बे-छोटे दोनों तरह के प्राकृतिक संसाधन पर निबंध उपलब्ध कराए गए है, जो आपके परीक्षा में आपकी मदद कर सकता हैं। ये बहुत ही सरल भाषा में लिखा गया हैं। आप अपनी आवश्यकता के अनुसार किसी भी प्राकृतिक संसाधन पर निबंध का चयन कर सकते हैं।

प्राकृतिक संसाधन पर लम्बे और छोटे निबंध (Long and Short Essay on Natural Resources in Hindi)

प्राकृतिक संसाधन पर निबंध – 1 (200 शब्द) (Essay on Natural Resources in Hindi 200 words)

प्रस्तावना

प्राकृतिक संसाधन हमारे ग्रह पर स्वाभाविक रूप से उपलब्ध हैं। हमें उन्हें प्राप्त करने के लिए किसी भी मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं पड़ती। जीवित प्राणियों के अस्तित्व के लिए ये संसाधन आवश्यक हैं। कुछ प्राकृतिक संसाधन जैसे हवा, पानी और सूरज की रोशनी आदि सीधे उपयोग में लायी जाती है, वहीं अन्य संसाधन, कच्चा मॉल के रूप में अन्य आवश्यक चीजों को बनाने में प्रयोग किया जाता हैं।

कई प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा तथा नवीकरणीय की स्थिती में मौजुद हैं, जिसका अर्थ है कि हम इनका पुनर्नवीनीकरण करके पुन: उपयोग में ला सकते है। हालांकि, ऐसे कई अन्य अनवीकरणीय पदार्थ भी हैं जिन्हें पुनर्नवीनीकरण करने में हजारों साल लग जाते हैं। कई प्राकृतिक संसाधन तेजी से कम हो रहे हैं। इसके कई कारण हैं उसमे से सबसे प्रमुख कारण हैं, जनसंख्या में प्रतिदिन वृद्धि, जिनकी वजह से प्राकृतिक संसाधन में तेजी से कमी आती जा रही हैं, तेजी से जनसंख्या की वृद्धि के कारण प्राकृतिक संसाधनों की खपत लगातार बढ़ते जा रही है।

वनों की कटाई प्राकृतिक संसाधनों में होने वाली कमी का एक और कारण है, तथा भूमि का उपयोग शहरीकरण के लिए किया जा रहा है, जिससे वन्यजीवन तथा पेड़ों में कमी आती जा रही है। उनके द्वारा उत्पन्न कच्चा मॉल में भी प्रतिदिन कमी होती जा रही है। बढ़ते प्रदूषण, नकारात्मक रूप से जल निकायों को प्रभावित कर रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है, जो कभी प्रचुर मात्रा में हुआ करता था।

अब वो समय है जब हम मनुष्यों को प्राकृतिक संसाधनों को बर्बाद करने के बजाये उसका बुद्धिमानी, समझदारी और सावधानी से उपयोग करना चाहिए।


 

प्राकृतिक संसाधन पर निबंध – 2 (300 शब्द) (Essay on Natural Resources in Hindi 200 words)

प्रस्तावना

प्राकृतिक संसाधन, वे संसाधन होते हैं जो प्रकृति द्वारा उपलब्ध कराए जाते हैं। प्राकृतिक संसाधनों के कुछ उदाहरण जैसे पानी, वायु,  सूरज की रोशनी, लकड़ी, खनिज और प्राकृतिक गैस इत्यादि हैं, जिन्हें प्राप्त करने के लिए मनुष्यों को काम करने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जबकि कई ऐसे प्राकृतिक संसाधन भी है जो प्रकृति में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जिसे लोग अलग-अलग आवश्यक चीज बनाने के लिए उपयोग करते हैं। परन्तु उन्हें पूर्ण रूप से तैयार करने में लोगों को काफी समय लग जाता हैं और वो स्वतंत्र रूप से उपलब्ध भी नहीं हो पाते है।

 

प्राकृतिक संसाधनों के प्रकार

हालांकि प्रत्येक प्राकृतिक संसाधन की विशेषताएँ और उनके उपयोग एक दूसरे से अलग होते हैं, इसलिए इन्हें दो व्यापक श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जिन्हें नवीकरणीय तथा अनवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन कहते हैं। आइये इन्हें यहां विस्तार से देखें:

नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन:- नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन, जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि वे स्वाभाविक रूप से नवीनीकृत किए जा सकते हैं और बार-बार उपयोग में लाये जा सकते हैं, जैसे पानी, सौर ऊर्जा, लकड़ी, बायोमास, वायु और मिट्टी इत्यादि इस श्रेणी के अन्तरगत आते है। हालांकि इनमें से कई संसाधन जैसे पानी, वायु और सूरज की रोशनी आसानी से नवीकरणीय किये जा सकते है, परंतु लकड़ी और मिट्टी जैसे कुछ प्राकृतिक संसाधनों को नवीनीकृत करने में समय लगता है। नवीकरणीय संसाधनों को आगे जैविक और अजैविक में वर्गीकृत किया गया है।

जब नवीकरणीय संसाधन जानवरों और पौधों से उत्पन्न होते हैं तो इन्हें जैविक नवीकरणीय संसाधन कहा जाता है, वहीं जब नवीकरणीय संसाधन अजीवित चीजों से प्राप्त होते हैं, तो उन्हें अजैविक नवीकरणीय संसाधन कहा जाता है।

अनवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन:- ये वे संसाधन हैं जिन्हें नवीनीकृत या पुनर्नवीनीकरण नहीं किया जा सकता या क्योकि इन्हें बनने में बहुत लंबा समय लग जाता है। कोयले, तेल, खनिज और प्राकृतिक गैस अनवीकरणीय प्राकृतिक संसाधनों के उदाहरण हैं। स्वाभाविक रूप से किसी भी मानव हस्तक्षेप के बिना, खनिज पदार्थों जैसे अनवीकरणीय प्राकृतिक संसाधनों को बनने में हजारों साल लग जाते हैं। इन्हें भी दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है- जैविक और अजैविक।

अनवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन, जीव जंतु से व्युत्पन्न होते है तो इन्हें जैविक प्राकृतिक संसाधन कहा जाता है। इसका एक उदाहरण जीवाश्म ईंधन हो सकता है।

अनवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन जब अजीवित चीजों से उत्पन्न होती है तो उसे अजैविक प्राकृतिक संसाधन कहा जाता हैं जैसे- पवन, खनिज, भूमि और मिट्टी।

निष्कर्ष

प्राकृतिक संसाधन, विशेष रूप से अनवीकरणीय संसाधनों का उपयोग हमें समझदारी से करना चाहिए जिससे ये समाप्त न हों।

 

प्राकृतिक संसाधन पर निबंध -3 (400 शब्द) (Essay on Natural Resources in Hindi 200 words)

प्रस्तावना

प्राकृतिक संसाधन ऐसे संसाधन हैं जो समय की शुरुआत से ही प्रकृति में उपस्थित हैं। ये संसाधन पृथ्वी पर जीवन को संभव और आसान बनाते हैं पृथ्वी पर प्राकृतिक संसाधन जैसे सूरज की रोशनी, हवा और पानी के बिना जीना हमारे लिए असंभव हैं। अन्य प्राकृतिक संसाधन भी हमारे जीवन का एक महवत्पूर्ण हिस्सा है जो हमारे लिए अनिवार्य बन गए हैं।

प्राकृतिक संसाधन के विभिन्न उपयोग

हालांकि प्राकृतिक संसाधन पृथ्वी पर मनुष्य और अन्य जीवित प्राणियों की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने तथा विभिन्न चीजों को प्राप्त करने का एक आधार हैं। ये चीजें मनुष्य के जीवन को सरल तथा आरामदायक बनाती हैं आज, मनुष्य इनमें से अधिकांश के बिना अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता। चलिए देखते हैं प्राकृतिक संसाधनों के विभिन्न उपयोग के तरीके:

  • सूरज की रोशनी:- इसका उपयोग सौर ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है जिससे विभिन्न उपकरणों के प्रयोग में मदद मिलती है। सनलाइट प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को भी सक्षम बनाता है।
  • वायु:- वायु का उपयोग वायु ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग विभिन्न उद्देश्यों जैसे अनाज पीसने और पानी को पंप करने के लिए किया जाता है।
  • पानी:- पानी का उपयोग हाइड्रोइलेक्ट्रिक ऊर्जा उत्पन्न करने तथा सफाई और खाना पकाने जैसे अनेक कार्यों के लिए किया जाता है।
  • खनिज:- खनिज का उपयोग कई वस्तुओं को उत्पन्न करने के लिए किया जाता है जैसे तार, एल्यूमीनियम के डिब्बे और ऑटोमोबाइल के कुछ हिस्से, जो विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थ है जिनका उपयोग हम हमारे दैनिक जीवन में करते है तथा सोने और चांदी जैसे खनिज पदार्थ जो आभूषण तैयार करने के लिए उपयोग में लाए जाते हैं।
  • प्राकृतिक गैसों:- इनका उपयोग बिजली उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। साथ ही साथ रसोईघर में हीटिंग के लिए भी किया जाता है।
  • कोयला:- यह एक प्राकृतिक संसाधन है जिसका उपयोग बिजली उत्पन्न करने के उद्देश्य से किया जाता है।
  • पौधे:- पौधे लकड़ी, फल और सब्जियों जैसे कई प्राकृतिक संसाधन प्रदान करते हैं। फल और सब्जियां जो प्राणियों को जीवित रखने के लिए अति आवश्यक होती हैं वहीं लकड़ियों का इस्तेमाल फर्नीचर, कागज और अन्य उत्पादों के निर्माण के लिए किया जाता है।
  • पशु:- पशु भी कई प्राकृतिक संसाधन प्रदान करते हैं जैसे- दूध, जो दही, पनीर, मक्खन और कई अन्य डेयरी उत्पादों का उत्पादन करने के लिए प्रयोग किया जाता है। पशु फर और उनकी त्वचा का उपयोग विभिन्न कपड़ों के {सामान} और आवश्यकता की अन्य चीजों के निर्माण में प्रयोग किया जाता है। ऊनी स्वेटर और टोपी, चमड़े के बेल्ट और बैग, रेशमी साड़ियां और बिस्तरों के चादर आदि जैसे अनेक चीजें जो जानवरों से प्राप्त प्राकृतिक संसाधनों के बने होते हैं।

निष्कर्ष

प्राकृतिक संसाधन न केवल अपने रा मटेरियल के रुप में ही उपयोगी होते है बल्कि ये अन्य चीज़ें उत्पन्न करने में भी लाभदायक होते है मनुष्यों ने निश्चित रूप से जीवन को बेहतर बनाने के लिए इन संसाधनों को सर्वोत्तम तरीके से उपयोग करना प्रारम्भ कर दिया है।


 

प्राकृतिक संसाधन पर निबंध – 4 (500 शब्द) (Essay on Natural Resources in Hindi 200 words)

प्रस्तावना

प्राकृतिक संसाधन, प्रकृति के तरफ से हमारे लिए अमुल्य उपहार हैं। ये मनुष्यों द्वारा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से उपभोग किए जाते हैं। प्राकृतिक संसाधनों के प्रत्यक्ष उपयोग का तात्पर्य है उसके शुद्ध रूप में ही उसका उपभोग करना हैं जिसका सबसे अच्छा उदाहरण सूरज की रोशनी तथा ऑक्सीजन हैं। प्राकृतिक संसाधनों की अप्रत्यक्ष खपत का अर्थ है, उन्हें संशोधित करके या अन्य वस्तुओं और सेवाओं को उनकी सहायता से उत्पन्न करके, उनका उपयोग करना। उदाहरण: खनिजों, लकड़ीयों और अन्य कई प्राकृतिक संसाधनों को उपयोग में लाने से पहले विभिन्न तरीको से तैयार किया जाता है।

विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग

प्राकृतिक संसाधन को हम अनेक तरह से प्रयोग करते हैं। जिसके बिना, पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होता। एक सर्वेक्षण के अनुसार यह पता चला है कि, विकसित देश, कम विकसित देशों की तुलना में अधिक से अधिक प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं।

यहां पर बताया गया है कि इनका उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए कैसे किया जाता है:

  1. पशु

जानवरों द्वारा उत्पादित प्राकृतिक संसाधन ऐसे संसाधन हैं जिनकी मांग बहुत अधिक हैं ऐसा इसलिए है क्योंकि वे हमें आहार प्रदान करते हैं जो हमारे अस्तित्व को बनाये रखने में मदद करता है। जानवरों को, उनके द्वारा जैविक प्राकृतिक संसाधन देने के लिए पाला जाता है। दूध और अन्य डेयरी उत्पाद जो प्राणियों को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं, वे पोषक तत्व जानवरों से प्राप्त होते हैं। पशु अपशिष्ट से उत्पन्न जीवाश्म ईंधन भी विभिन्न कार्यों जैसे हीटिंग, वाहन और बिजली उत्पन्न करने के लिए नियोजित किये जाते हैं। कपड़े, बैग, जूते, बेल्ट और अन्य ऐसी कुछ वस्तुएँ, जिनके निर्माण के लिए पशु फर और उनकी त्वचा का उपयोग किया जाता है।

  1. पौधे

पौधे हमें फल और सब्जियां प्रदान करते हैं जो हमारे जिवन के लिए अति आवश्यक हैं। इन प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर विभिन्न प्रकार की बीमारियों को ठीक करने के लिए दवाइयां भी उत्पादित की जाती हैं। पौधे कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे हानिकारक और जहरीले गैसों को अवशोषित कर हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। ये मनुष्यों के हस्तक्षेप किये बिना कुदरती रूप से कार्य करती है। इसके अलावा, पौधों का अपशिष्ट जीवाश्म ईंधन के उत्पादन में भी योगदान देता है जिसका प्रयोग विभिन्न तरीकों से किया जाता है।

इसके अलावा, पेड़ हमें लकड़ीयां प्रदान करती हैं जिनका उपयोग हम विभिन्न उद्देश्यों तथा आवश्यकताओं के लिए करते है जैसे घरों के निर्माण, फर्नीचर, कागज तथा विभिन्न छोटी और बड़ी चीजों को बनाने के लिए करते हैं।

  1. खनिज और धातु

धातुओं और खनिजों का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है। इन सभी में अद्वितीय गुण होते है जो बहुत उपयोगी होते हैं। खनिज और धातु के उपयोगों में, बैटरी बनाने, चिकित्सा उपकरणों के निर्माण, ऑटोमोबाइल पार्ट्स बनाने, आभूषण बनाने, भवनों और बर्तनों के निर्माण इत्यादि शामिल हैं। ये संसाधन सीमित हैं और अनवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।

  1. सूरज की रोशनी, वायु और पानी

इन प्राकृतिक संसाधनों का महत्व और उपयोग सभी जानते है। ये वायुमंडल में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं और जीवित प्राणियों द्वारा सीधे अमिश्रित रूप में उपयोग किए जाते हैं। इन्हें संशोधित किया जाता है और विभिन्न प्रक्रियाओं को चलाने के लिए उपयोग किया जाता है। संयोग से, ये नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन हैं इनका पुनः इस्तेमाल किया जा सकता हैं।

निष्कर्ष

हम जानबूझकर या अनजाने में दैनिक आधार पर प्राकृतिक संसाधनों का उपभोग करते हैं। हालांकि इनमें से कुछ वातावरण में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होती हैं और कुछ बहुत तेजी से कम होती जा रही हैं। हमें प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग समझदारी से करना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार से संसाधनों की बर्बादी को रोका जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि ये हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए उपलब्ध रहे। प्रत्येक देश की सरकार को इन संसाधनों की खपत की जांच करनी चाहिए तथा इसके खपत को कम करना चाहिए।


 

प्राकृतिक संसाधन पर निबंध – 5 (600 शब्द) (Essay on Natural Resources in Hindi 200 words)

प्रस्तावना

प्राकृतिक संसाधन मानव जाति के साथ-साथ अन्य जीवों के लिए भी आवश्यक हैं। ये हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। वास्तव में, इन प्राकृतिक संसाधनों में से अधिकांश के बिना पृथ्वी पर हमारा जीवन संभव नहीं हैं।

प्राकृतिक संसाधनों का वितरण

प्राकृतिक संसाधन पृथ्वी पर अनियमित ढ़ंग से वितरित किए जाते हैं। पृथ्वी के विभिन्न हिस्से, विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध हैं। कुछ स्थानों में सूरज की रोशनी की प्रचुर मात्रा प्राप्त की जाती है, जबकि वहीं कुछ स्थान ऐसे भी है जहाँ लोग अधिकतर सूरज की रोशनी से वंचित रहते है, उसी प्रकार, कुछ स्थानों पर जल निकाय अनेक हैं, तो कुछ क्षेत्र खनिज पदार्थों से भरे हुए हैं। ऐसे कई कारक हैं जो प्राकृतिक संसाधनों के असमान वितरण को प्रभावित करते हैं। जलवायु और भूमि इनके मुख्य कारकों में से एक हैं।

कुछ देश जिनमे प्राकृतिक संसाधनों के समृद्ध भंडार हैं, उनमें चीन, इराक, वेनेजुएला, रूस, सऊदी अरब, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और ब्राजील भी शामिल हैं। जो देश प्राकृतिक संसाधनों में समृद्ध हैं चलिए उन देशों के बारे में जानते हैं:-

  • रूस: रूस प्राकृतिक संसाधनों में नंबर एक स्थान पर आता है, इस देश में लकड़ी, तेल, प्राकृतिक गैस, कोयले और सोने की अधिकता है। इसके आर्थिक विकास का मुख्य कारण, मूल्यवान प्राकृतिक संसाधनों का निर्यात है।
  • चीन: चीन कोयले, लकड़ी और विभिन्न धातुओं से समृद्ध है। यह देश इन संसाधनों को दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आपूर्ति करता है।
  • इराक: इराक को पुरे विश्व के तेल का 9% तेल जमा करने वाला देश माना जाता है। तेल के अलावा, यह देश फॉस्फेट चट्टान में भी समृद्ध है।
  • वेनेजुएला: यह देश प्राकृतिक संसाधनों जैसे प्राकृतिक गैस, लौह और तेल में समृद्ध है। जब तेल भंडार की बात आती है तो यह दुनिया भर में छठवें स्थान पर आता है। यह दुनिया भर के कई देशों को तेल निर्यात करता है।
  • सऊदी अरब: यह दुनिया में पांचवां सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस रिजर्व करने वाला देश माना जाता है। सऊदी अरब में लकड़ी प्रचुर मात्रा में पाई जाती है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका: जब प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता की बात आती है तो संयुक्त राज्य अमेरिका दूसरे स्थान पर आता है। यह अपने कोयले, प्राकृतिक गैस, तेल भंडार, सोने और तांबा के लिए जाना जाता है।
  • कनाडा: जब प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता की बात आती है तो कनाडा नंबर चार पर आता है। यह अपने तेल रिज़र्व करने के लिए जाना जाता है। यह दुनिया भर के विभिन्न देशों को तेल की आपूर्ति कराता है। यह देश यूरेनियम, फॉस्फेट और प्राकृतिक गैस भंडार और लकड़ी के उत्पादन के लिए भी जाना जाता है।
  • ब्राज़िल: ब्राजील दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा लौह उत्पादक देश है। यह दुनिया भर के विभिन्न देशों को लकड़ी की अच्छी आपूर्ति कराता है। इसके अलावा, यह देश ब्रिल यूरेनियम और सोने के रिज़र्व के लिए भी जाना जाता है।

विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के फल और सब्जियां उगाई जाती हैं और उन्हें अन्य स्थानों पर निर्यात किया जाता है इसी तरह सभी प्रकार के जानवर हर जगह उपलब्ध नहीं होते, तो उन्हें भी इसी प्रकार निर्यात किया जाता है। ये देश कच्चे माल का उत्पादन भी इस प्रकार करके अन्य देशों के साथ आदान-प्रदान करते हैं।

प्राकृतिक संसाधनों के असमतल वितरण का प्रभाव

प्राकृतिक संसाधनों का यह असमतल वितरण अंतरराष्ट्रीय व्यापारों को मार्ग प्रदान करता है जिससे व्यवसायों को बढ़ावा मिलता है और दुनिया भर के विभिन्न देशों के आर्थिक विकास का दावा करता है जिन देशों में तेल, प्राकृतिक गैसों, खनिजों और अन्य प्राकृतिक संसाधन अधिक मात्रा में जमा होते है वो उनके विपरित जिनके पास इन संसाधनो की कमी होती हैं उनके साथ सत्ता खेलना शुरू कर देते है। इन्हीं कारणो की वजह से अमीर और अमीर तथा गरीब औऱ गरीब होते जा रहे हैं।

निष्कर्ष

प्राकृतिक संसाधन हमारे लिए बहुत जरूरी हैं इन संसाधनों के अस्तित्व के बिना, पृथ्वी पर हमारा जीवन संभव नहीं हैं तथा मनुष्य भी बिना नियंत्रण के इनका उपयोग कर रहा हैं, उन्हें इस तथ्य का एहसास नहीं है कि इनमें से अधिकतर संसाधन अनवीकरणीय हैं और इनका नवीनीकरण करने में हजारों साल लग जाते हैं। हमें प्राकृतिक संसाधनों का समझदारी से उपयोग करना चाहिए और इनको किसी भी प्रकार से बर्बाद होने से बचना चाहिए ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां भी इनका आनंद ले सकें।

वृक्षारोपण के लाभ पर निबंध- Essay on Benefits of Planting Trees-हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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वृक्षारोपण के लाभ पर निबंध- Essay on Benefits of Planting Trees-हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

पेड़ और पौधे मुख्य कारण हैं कि हम इस धरती पर जीवित क्यों हैं। वे जीवन देने वाली ऑक्सीजन गैस प्रदान करते हैं जिसके बिना इस ग्रह पर हमारा अस्तित्व असंभव है। इसके अलावा पेड़ों के रोपण के कई अन्य लाभ हैं।

वृक्षारोपण के कई फायदे हैं। उनके द्वारा मिलने वाले कुछ लाभों में हानिकारक गैसों, जो पर्यावरण को दूषित करते हैं, को अवशोषित करना, पक्षियों और जानवरों के लिए भोजन और आश्रय प्रदान करना और गर्मियों के दिनों में छाया प्रदान करना शामिल है। आपकी परीक्षा में इस विषय पर आपकी मदद करने के लिए वृक्षारोपण के लाभ पर हमने अलग-अलग लंबाई के निबंध उपलब्ध करवाएं हैं। आप अपनी रुचि के हिसाब से किसी भी निबंध को चुन सकते हैं:

वृक्षारोपण के लाभ पर लंबे और छोटे निबंध (Long and Short Essay on Benefits of Planting Trees)

वृक्षारोपण के लाभ पर निबंध 1 (200 शब्द) (Essay on Benefits of Planting Trees 200 words)

वृक्षारोपण के महत्व पर बार-बार जोर दिया जाता है। इसका कारण है उनके द्वारा प्रदान किए जाने वाले कई प्रकार के लाभ। पेड़ों के रोपण के मुख्य लाभों में से एक यह है कि वे हमें जीवन देने वाली ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। ऑक्सीजन की उपस्थिति के बिना जीवित प्राणियों का अस्तित्व संभव नहीं है। पेड़ लगाना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि उनके पास हानिकारक गैसों को अवशोषित करने की शक्ति है। कार्बन मोनो-ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों और वाहनों द्वारा उत्सर्जित धुएं और उद्योगों से निकलते प्रदूषण को पेड़ों की उपस्थिति के कारण काफी हद तक नियंत्रित और शुद्ध किया जाता है।

पेड़ पक्षियों और जानवरों को भी आश्रय प्रदान करते हैं। गर्मी के दिनों में वे तेज़ सूरज की किरणों से यात्रियों को राहत देते हैं। पेड़ हमारे ग्रह को रहने लायक बनाते हैं। हालाँकि पेड़ों द्वारा हमें कई प्रकार के लाभ मिलते हैं और हम उनके बिना हमारी ज़िंदगी की कल्पना नहीं कर सकते पर फिर भी हम उन्हें विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तीव्र गति से काट रहे हैं।

लकड़ी का उपयोग विभिन्न प्रकार के उत्पादों और चीजों को बनाने के लिए किया जाता है। यही कारण है कि कई पेड़ हर दिन काट जा रहे हैं। बढ़ती आबादी एक और कारण है कि कई पेड़ों को तेजी से काटा जा रहा है। वनों की जगह को औद्योगिक क्षेत्रों और आवासीय स्थानों में बदला जा रहा है।

यह सही समय है जब सरकार को पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए और लोगों को अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।


 

वृक्षारोपण के लाभ पर निबंध 2 (300 शब्द) (Essay on Benefits of Planting Trees 300 words)

प्रस्तावना

पेड़ पर्यावरण का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। धरती पर पेड़ों और पौधों के अस्तित्व के बिना मनुष्य और जानवरों की अन्य प्रजातियों का अस्तित्व संभव नहीं है। यही कारण है कि पेड़ों को काटने की निंदा की जाती है और सरकार ने अधिक से अधिक पेड़ों को लगाने का प्रचार किया है।

पेड़ लगाने के लाभ

समय-समय पर पौधे लगाने का जोर दिया जाता है। पेड़ों के रोपण के विभिन्न लाभ यहां बताए गए हैं:

  1. ऑक्सीजन का स्रोत

वृक्ष लगाने का पहला और सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि वे कार्बन डाइऑक्साइड और श्वास ऑक्सीजन का आदान-प्रदान करते हैं। पर्यावरण में ऑक्सीजन की जरूरत सभी को ज्ञात है।

  1. हानिकारक गैसों को अवशोषित करते हैं

पेड़ों न केवल कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं बल्कि वातावरण से कई अन्य हानिकारक गैसों को भी अवशोषित करते हैं जिससे वातावरण को ताजगी मिलती है। इन दिनों वाहनों और औद्योगिक फैक्ट्रियों से बहुत प्रदूषण निकल रहा है। अधिक से अधिक पेड़ लगाने से प्रदूषित हवा से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी।

 

  1. जलवायु को शांत रखते हैं

पेड़ पर्यावरण को शांत रखते हैं। वे गर्मी के असर को कम करने में मदद करते हैं। उनसे प्राप्त ठंडक का असर ऐसा है कि यह आसपास के स्थानों में 50% तक एयर कंडीशनर की आवश्यकता को कम कर सकता है।

  1. आश्रय प्रदान करते हैं

पक्षी पेड़ों पर घोंसलों का निर्माण करते हैं जिससे उन्हें आश्रय मिलता है। पेड़ मकड़ी, बंदरों, कोआला, अजगर, कंगारू और जानवरों की अन्य प्रजातियों के लिए भी घर हैं।

  1. भोजन उपलब्ध कराते हैं

पेड़ों पर फल लगते हैं जो पक्षियों, जानवरों और मनुष्यों के लिए भोजन हैं। गाय, बकरियां और अन्य शाकाहारी जानवर भी वृक्षों के पत्ते खाते हैं।

  1. वायु और जल प्रदूषण नियंत्रित करते हैं

वृक्ष वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए हानिकारक गैसों को न केवल अवशोषित करते हैं बल्कि जल प्रदूषण को भी नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

निष्कर्ष

यह सही समय है जब हम पेड़ों के रोपण के महत्व को पहचाने और इस दिशा में जितना हो सके उतना योगदान करने की जिम्मेदारी ले सकें।


 

वृक्षारोपण के लाभ पर निबंध 3 (400 शब्द) (Essay on Benefits of Planting Trees 400 words)

प्रस्तावना

पेड़ों के रोपण के विभिन्न लाभों को बार-बार बताया गया है। सतही स्तर पर आपको इन लाभों में से कुछ दिखाई दे सकते हैं लेकिन जब आप गहराई से देखते और उन्हें महसूस करते हैं तो आपको पता चलेगा कि हमारे अस्तित्व के लिए वे बेहद जरूरी क्यों हैं।

वृक्षारोपण में गैर सरकारी संगठनों की सहायता  

कई गैर लाभकारी संगठन हैं जो पेड़ों को रोपण करके साफ़-सुथरे और हरियाली भरे वातावरण का निर्माण करने की ज़िम्मेदारी उठाते हैं। ये संगठन पेड़ों के कटाई का भी विरोध करते हैं। हमारे देश में इस दिशा में काम करने वाले कुछ गैर सरकारी संगठनों में संकल्प तरू फाउंडेशन, यूथ सर्विसेज फॉर पीस, से ट्रीज, ग्रो ट्रीज, ग्रीन यात्रा, रिफोरेस्ट इंडिया, ग्रीन लाइफ इंडिया और ट्री प्लांटेशन शामिल हैं।

इन गैर-सरकारी संगठनों का एकमात्र उद्देश्य लोगों को वृक्षारोपण के लाभों के बारे में सूचित करना और उन्हें ऐसा करने में संलग्न करना है। इस कारण से कई लोग देश को हरा-भरा बनाने के लिए हाथ मिला रहे हैं और इस दिशा में काम कर रहे हैं। जो लोग इन संगठनों के साथ हरियाली को फैलाने के लिए काम कर रहे हैं उन्हें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए। समय-समय पर वे ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए अभियान चला सकते हैं।

 

इन योजना को सफल बनाने के लिए हम अपने पास के क्षेत्र में पेड़ों को लगा सकते हैं। हालांकि अगर हम एक बड़ा अंतर लाना चाहते हैं तो हमें बड़े पैमाने पर काम करने के लिए इन गैर-सरकारी संगठनों में शामिल होना चाहिए।

वृक्षारोपण के लाभों को संवेदनशील होना चाहिए

सरकार को गैर-लाभकारी संगठनों का समर्थन करना चाहिए ताकि वे वृक्षारोपण के महत्व को फैलाने में सहायता करें। पेड़ों के कटाई पर भी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। वृक्षारोपण की योजना कभी भी सफल नहीं होगी यदि उन्हें क्रूर रूप से तीव्र गति से काटा गया तो।

लोगों को अपने लाभों को बल देते हुए अधिक पेड़ों के रोपण के महत्व के बारे में संवेदनशील होना चाहिए। इसका प्रसार रेडियो, टेलीविजन, समाचार पत्र, सोशल मीडिया, होर्डिंग और पत्रक के माध्यम से किया जा सकता है। गैर-सरकारी संगठनों के संपर्क विवरणों को इन माध्यमों के ज़रिए फैलाना होगा। समस्या यह है कि भले ही बहुत से लोग इस दिशा में काम करना चाहते हैं लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि किस तरह अपना योगदान दें।

शुरुआत से ही छात्रों को पेड़ों के रोपण के महत्व के बारे में सिखाना एक अच्छा विचार है। शैक्षिक संस्थान समय-समय पर अपने छात्रों को कार्यों में व्यस्त कर पेड़ों की कटाई के बारे में बता सकते हैं।

निष्कर्ष

एक चीनी कहावत के शब्द कुछ इस प्रकार हैं, “20 साल पहले पेड़ को लगाने का समय सबसे अच्छा समय था। दूसरा सबसे अच्छा समय अब ​​है।” इसलिए अपना काम करें और इस जगह को और अधिक सुंदर बनाएं।


 

वृक्षारोपण के लाभ पर निबंध 4 (500 शब्द) (Essay on Benefits of Planting Trees 500 words)

प्रस्तावना

पौधों और पेड़ों ने इस ग्रह को रहने लायक बनाया है। पेड़ों के अस्तित्व के बिना हम पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। वृक्षारोपण के बुनियादी लाभों में से एक यह है कि वे जीवन देने वाली ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और जानवरों द्वारा छोड़ी गई कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं। हालांकि पेड़ न सिर्फ हमें ऑक्सीजन देते हैं बल्कि फल, लकड़ी, फाइबर, रबर आदि और भी बहुत कुछ प्रदान करते हैं। पेड़ पशुओं और पक्षियों के लिए आश्रय का भी काम करते हैं।

पेड़ स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं

पेड़ों के विभिन्न लाभों में से यह सबसे महत्वपूर्ण है। पेड़ विभिन्न प्रकार से हमारे स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं। यहां एक संक्षिप्त नज़र डाली गई है कि वे हमारे स्वास्थ्य को सकारात्मक रूप से कैसे प्रभावित करते हैं:

  1. प्रदूषण के प्रभाव को कम करते हैं

पेड़ न केवल कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं बल्कि वाहनों और उद्योगों द्वारा उत्सर्जित विभिन्न हानिकारक गैसों को भी अवशोषित करते हैं। यह प्रदूषण को कम करने का एक स्वाभाविक तरीका है। अधिक पेड़ लगाने का मतलब प्रदूषण को कम करना है। वायु प्रदूषण के अलावा पेड़ भी ध्वनि और जल प्रदूषण को कम करने में सहायता करते हैं। प्रदूषण रहित वातावरण निश्चित रूप से स्वस्थ है।

  1. औषधि प्रदान करते हैं

सेब, राख, देवदार, बीच, एलो वेरा, तुलसी, सफेद पाइन और सिल्वर बिर्च सहित कई पेड़ और पौधें अपनी औषधीय गुणों के लिए जाने जाते हैं। जहाँ इनमें से कुछ पेड़ों की छाल में औषधीय गुण मौजूद हैं वहीँ अन्य के पत्ते और फल राहत देने के लिए जाने जाते हैं। विभिन्न बीमारियों को रोकने / इलाज करने के लिए इन पेड़ों से विभिन्न दवाएं ली गई हैं। विभिन्न दवाओं और उपचारों के लिए बढ़ती आवश्यकता के साथ ऐसे पेड़ों को बढ़ाना आवश्यक है।

  1. तनाव कम करते हैं

पेड़ों में हमें फिर से जीवंत करने की शक्ति है। एक पेड़ के नीचे हरी घास पर समय बिताना तनाव को काफी कम कर सकता है। पेड़ों की शाखाओं पर बैठे पक्षियों की आवाज़, तेज़ हवाओं से पत्तियों का हिलना और पेड़ों पर पत्तियों और फूलों की गंध – इन सबसे मन पर अच्छा प्रभाव पड़ता है और तनाव को कम करने में मदद मिलती है। शोधकर्ताओं का यह भी दावा है कि पेड़ को गले लगाने से भी तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है। तनाव जो कि विभिन्न शारीरिक और मानसिक बीमारियों का कारण है, इन दिनों इस प्रकार पेड़ों से कम किया जा सकता है।

  1. प्राकृतिक उपचार देते हैं

ऐसा कहा जाता है कि पत्तेदार पेड़, झरने वाली नदियाँ और हरी-भरी घाटियाँ सभी प्राकृतिक उपचार प्रदान करते हैं। इसका कारण यह है कि वे सांस लेने के लिए ताजी हवा देते हैं जिससे हमारे मन पर शांत प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि लोगों को उनकी बीमारियों से उबरने के लिए पहाड़ी स्टेशनों का दौरा करने का सुझाव दिया जाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि जो लोग पेड़ों और प्रकृति के करीब रहते हैं उन्हें कम रोग होते हैं। उनकी बीमारियाँ भी जल्दी ठीक होती हैं बजाए उन लोगों के अपने कृत्रिम शहरी वातावरण में बंद रहते हैं।

पेड़: हमारे सभी दौर विकास के लिए आवश्यक

एक व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए पेड़ और पौधें वास्तव में आवश्यक हैं। ऐसा स्थान जहां कोई पेड़ नहीं है वहां की हवा में ही दुख झलकता है जबकि एक अच्छी संख्या में वृक्षों से घिरा हुआ स्थान स्वचालित रूप से जीवंत और रहने लायक दिखता है। पेड़ न केवल हमें शारीरिक रूप से फिट रखते हैं बल्कि हमारे दिमाग के विकास में भी सहायता करते हैं। पेड़ों का हमारे दिमाग पर शांत प्रभाव पड़ता है और शांति धैर्य रखने की कुंजी है। जो शांत है वह बेहतर निर्णय ले सकता है और विभिन्न परिस्थितियों में अच्छी तरह से काम कर सकता है।

निष्कर्ष

पेड़ इस दुनिया को जीने के लिए एक बेहतर स्थान बनाती हैं। हमें इसलिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।


 

वृक्षारोपण के लाभ पर निबंध 5 (600 शब्द) (Essay on Benefits of Planting Trees 600 words)

प्रस्तावना

पेड़ पर्यावरण, सामाजिक और आर्थिक लाभ प्रदान करते हैं। यही कारण है कि सरकार और पर्यावरण विशेषज्ञ अधिक से अधिक वृक्षों के रोपण के महत्व पर जोर देते हैं। वृक्षारोपण के विभिन्न लाभों का एक संक्षिप्त रूप इस प्रकार है।

वृक्षारोपण के पर्यावरणीय लाभ

वृक्षारोपण के पर्यावरणीय लाभों को सभी जानते हैं। पर्यावरण में पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने के लिए वृक्ष ऑक्सीजन छोड़ते हैं और सांस लेने हेतु कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं। वे सभी हानिकारक गैसों को भी अवशोषित करते हैं और हमें सांस लेने के लिए ताजा और शुद्ध हवा देते हैं। अधिक पेड़ लगाने का मतलब ताज़ी हवा और शुद्ध वायुमंडल है। बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित नहीं किया जा सकता लेकिन इसके प्रभाव को अधिक से अधिक वृक्ष लगाकर कम किया जा सकता है। बड़ी संख्या में लगे वृक्षों का स्थान कंक्रीट जंगलों की तुलना में काफी ठंडे हैं। पेड़ हमें हानिकारक अल्ट्रा वायलेट किरणों से बचाने के लिए एक परत का निर्माण भी करते हैं।

पेड़ भी पक्षियों और जानवरों की विभिन्न प्रजातियों के लिए एक आवास के रूप में सेवा करते हैं। इसके अलावा उन पर लगने वाले पत्ते, फूल और फल जीवित प्राणियों के लिए भोजन का एक स्रोत हैं। वृक्षारोपण का अर्थ है पर्याप्त भोजन और आश्रय होना। इन सबके अलावा पेड़ जल प्रदूषण को नियंत्रित करने और मिट्टी के क्षरण को रोकने में भी मदद करते हैं। पहाड़ी इलाकों में वे मिट्टी को पकड़ उसे खिसकने से भी रोकते हैं।

वृक्षारोपण के सामाजिक लाभ

शहरीकरण ने लोगों को अपनी संस्कृति से दूर कर दिया है। लोग आज के आधुनिक गैजेट्स में इतने तल्लीन हो गए हैं कि वे धीरे-धीरे प्रकृति से दूर जा रहे हैं। अधिक से अधिक पेड़ लगाने से वे प्रकृति के करीब जा सकते हैं। कस्बों और शहरों में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर वृक्षों और उद्यान तथा पार्कों की बढ़ती संख्या से लोगों के बीच सामूहीकरण करना आसान है। लोग इन पार्कों में सुबह की सैर, शाम को टहलना, योग सत्र और हँसी थेरेपी के लिए आते हैं। पार्क और उद्यान बच्चों को खेलने और सामूहीकरण के लिए एक सुरक्षित स्थान के रूप में भी काम करते हैं। इस प्रकार पार्क विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों में शामिल होने का मौका देते हैं। वृक्ष लगाने से आपको हाइकिंग और शिकार आदि जैसी गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिल सकता है।

एक अच्छा माहौल हमारी मनोदशा के उत्थान में मदद करता है और पेड़ भी उसी के निर्माण में मदद करते हैं। इन दिनों आसपास इतना तनाव है कि हम उन चीजों की तलाश करते हैं जो हमें खुशी देते हैं और हमारे मनोदशा का उन्नयन करते हैं। जो चीज़ हम नहीं समझ पाते वह यह है कि जितनी जल्दी और अच्छी तरह से प्रकृति हमारे तनाव को कम करती है उतनी जल्दी और कोई नहीं कर सकता। पेड़ों को उनके चिकित्सा गुणों के लिए भी जाना जाता है। शोधकर्ता दावा करते हैं कि जो रोगी अपनी खिड़की से पेड़ों और पौधों को देखते हैं वे तेजी से ठीक हो जाते हैं।

वृक्षारोपण के कई सामाजिक लाभ उनके आर्थिक लाभ से संबंधित हैं।

वृक्षारोपण के आर्थिक लाभ

पेड़ से मिलने वाली लकड़ी का उपयोग कई प्रकार से किया जा सकता है जैसे फर्नीचर, घर में सजाने वाली वस्तुएं, स्टेशनरी का समान आदि। इसके अलावा पेड़ फाइबर, रेसिन, रबड़, टैनीन, शहद और बहुत सी चीजें प्रदान करते हैं। इसलिए जितने भी पेड़ हम लगाएंगे उतनी ही अधिक चीजें हम बना सकते हैं और ऐसी चीजों के निर्माण के लिए अधिक कारखानों का अर्थ है अधिक व्यापार। अधिक से अधिक लोगों की संख्या का मतलब है आर्थिक समृद्धि जो पूरे देश के लिए अच्छा है। अधिक कारखानों और तेजी से बढ़ने वाले व्यवसायों का मतलब लोगों के लिए अधिक रोजगार के अवसर हैं। पेड़ संपत्ति की दर भी बढ़ा देते हैं। पेड़ों से घिरी जगह रहने के लिए एक अच्छा माहौल प्रदान करती है और इसी वजह से इसकी मांग भी अधिक है।

निष्कर्ष

इस प्रकार हम कह सकते हैं वृक्षारोपण के लाभ बहुत ज्यादा हैं लेकिन हम अभी भी उनके महत्व की अनदेखी करते हैं। यह समय है कि हम यह महसूस करें कि पेड़ हमारे पर्यावरण के साथ-साथ हमारे सामाजिक और आर्थिक कल्याण के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। हम में से हर एक को जब भी संभव हो वृक्ष लगाना एक ज़िम्मेदारी के रूप में लेना चाहिए ताकि हम अपने ग्रह को जीवित रहने के लिए एक बेहतर स्थान बना सकें।

वृक्षारोपण के महत्व पर निबंध- Essay on Importance of Tree Plantation-हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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वृक्षारोपण के महत्व पर निबंध- Essay on Importance of Tree Plantation-हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

वृक्षारोपण के महत्व पर समय-समय पर जोर दिया गया है। पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण की वजह से वृक्षारोपण की आवश्यकता इन दिनों अधिक हो गई है।

वृक्षारोपण से तात्पर्य वृक्षों के विकास के लिए पौधों को लगाना और हरियाली को फैलाना है। पर्यावरण के लिए वृक्षारोपण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण क्यों है इसके कई कारण हैं। आपकी परीक्षा में इस विषय के साथ आपकी मदद करने के लिए विभिन्न लंबाई के वृक्षारोपण के महत्व पर निबंध यहाँ उपलब्ध कराए गए हैं। आप अपनी आवश्यकता के अनुसार किसी भी वृक्षारोपण के महत्व पर निबंध को चुन सकते हैं:

Long and Short Essay on Importance of Tree Plantation

वृक्षारोपण के महत्व पर निबंध 1 (200 शब्द) Essay on Importance of Tree Plantation 200 words

वृक्षारोपण पर्यावरण के लिए अच्छा है। हर कोई जानता है कि पेड़ ऑक्सीजन का स्रोत हैं। वे कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं जिसके बिना पृथ्वी पर जीवित प्राणियों का अस्तित्व संभव नहीं है।

कार्बन डाइऑक्साइड लेने के अलावा पेड़ सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड सहित कई हानिकारक गैसों को भी अवशोषित करते हैं और वातावरण से हानिकारक प्रदूषक को भी फिल्टर करते हैं जिससे हमें ताज़ा और साफ़-सुथरी हवा सांस लेने के लिए मिलती है। वाहनों और कारखानों द्वारा उत्सर्जित धुएं के कारण वायु प्रदूषण की बढ़ती मात्रा केवल तभी नियंत्रित की जा सकती है जब हम अधिक से अधिक पेड़ लगाएंगे। हालांकि यह कारण एकमात्र नहीं है कि वृक्षारोपण महत्वपूर्ण क्यों है। यह कई अन्य लाभ भी प्रदान करता है। वृक्षारोपण के कुछ लाभ इस प्रकार हैं:

  • पक्षियों, जानवरों और मनुष्य के लिए भोजन के रूप में फलों और पत्तियों को प्रदान करना।
  • जैव विविधता को बनाए रखना।
  • फर्नीचर, दरवाजे, खिड़कियां, बर्तन, स्टेशनरी वस्तुएं और सजावटी वस्तुओं जैसी विभिन्न चीजों के निर्माण के लिए लकड़ी, रबड़ और अन्य कच्ची सामग्रियों का उपयोग किया जाता है।
  • पानी का संरक्षण
  • पक्षियों और जानवरों के लिए आवास
  • वातावरण नियंत्रण
  • मिट्टी का संरक्षण
  • हालांकि पेड़ बहुत सारे लाभ प्रदान करते हैं और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं पर हम इन क्रूरता से काटते जा रहे हैं। इस नुकसान की क्षतिपूर्ति करने के लिए वृक्षारोपण आवश्यक है।

 

वृक्षारोपण के महत्व पर निबंध 2 (300 शब्द) Essay on Importance of Tree Plantation 300 words

प्रस्तावना

वृक्षारोपण महत्वपूर्ण क्यों है इसके पीछे कई कारण हैं। मुख्य कारणों में से एक कारण यह है कि वृक्ष जीवन-प्रदान करने वाली ऑक्सीजन प्रदान करते हैं जिसके बिना मानव जाति का अस्तित्व असंभव है।

पेड़ जीवनदायिनी ऑक्सीजन देते हैं

एक प्रसिद्ध कहावत इस प्रकार है, “कल्पना कीजिए कि अगर पेड़ वाईफाई सिग्नल देते तो हम कितने सारे पेड़ लगाते, शायद हम ग्रह को बचाते। बहुत दुख की बात है कि वे केवल ऑक्सीजन का सृजन करते हैं”। कितना दुखद है कि हम प्रौद्योगिकी के इतने आदी हो गए हैं कि हम अपने पर्यावरण पर होने वाले हानिकारक प्रभावों की अनदेखी करते हैं। न केवल प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल प्रकृति को नष्ट कर रहा है बल्कि यह हमें उससे अलग भी कर रहा है।

अगर हम वास्तव में जीवित रहना चाहते हैं और अच्छे जीवनयापन करना चाहते हैं तो अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाने चाहिए। ऑक्सीजन लेने और कार्बन डाइऑक्साइड को छोड़ने के अलावा पेड़ पर्यावरण से अन्य हानिकारक गैसों को अवशोषित करते हैं जिससे वायु शुद्ध और ताज़ी बनती है। जितने हरे-भरे पेड़ होंगे उतना अधिक ऑक्सीजन का उत्पादन होगा और अधिक विषैली गैसों को यह अवशोषित करेंगे।

 

प्रदूषण का स्तर इन दिनों बहुत अधिक बढ़ रहा है। इससे लड़ने का एकमात्र तरीका अधिक से अधिक पेड़ लगाना है। उदाहरण के लिए पेड़ों से घिरे क्षेत्र, गांव और जंगल शुद्ध पर्यावरण को बढ़ावा देते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये कम प्रदूषण से प्रभावित क्षेत्र हैं। दूसरी ओर शहरी आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों में खराब प्रदूषण और कम पेड़ों की संख्या के कारण ख़राब गुणवत्ता की वायु है।

निष्कर्ष

वृक्षारोपण का महत्व इतना स्पष्ट है तब भी कुछ ही मुट्ठी भर लोग हैं जो वास्तव में इस गतिविधि में शामिल होने का प्रण लेते हैं। बाकी अपने जीवन में इतने तल्लीन हो चुके हैं कि वे यह नहीं समझते कि बिना पर्याप्त पेड़ों के हम लंबे समय तक जीवित नहीं रह पाएंगे। यह सही समय है जब हमें वृक्षारोपण के महत्व को पहचानना चाहिए और उसकी ओर अपना योगदान देना चाहिए।


 

वृक्षारोपण के महत्व पर निबंध 3 (400 शब्द) Essay on Importance of Tree Plantation 400 words

प्रस्तावना

पर्यावरण को बेहतर बनाने में वृक्ष और पौधे मदद करते हैं। ये हवा को शुद्ध करते हैं, पानी को संरक्षित करते हैं, जलवायु नियंत्रण में मदद करते हैं, मिट्टी की शक्ति को बरकरार रखते हैं और कई अन्य तरीकों से समग्र पर्यावरण को लाभ पहुंचाते हैं।

वृक्षारोपण में शामिल गैर-सरकारी संगठन

उद्योगपति और मंत्री पैसों के लालच में अंधे हो चुके हैं। वे चाहते हैं कि वे अपने व्यवसाय का विस्तार करें और पैसा कमाएं। वे पेड़ों को काटने, धरती पर वनों को खत्म करने और प्रदूषण के स्तर को बढ़ाने के बारे में नहीं सोचते। दूसरी तरफ ऐसे लोग हैं जो पर्यावरण के बारे में ध्यान रखते हैं और नि: स्वार्थ भाव से अपनी स्थिति को सुधारने के लिए काम कर रहे हैं। वे पर्यावरण को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के लिए पेड़ों का रोपण, जल निकायों और अन्य गतिविधियों की सफाई में शामिल हैं। ऐसे लोगों के संयुक्त प्रयासों से दुनिया भर में कई गैर-लाभकारी संगठन बनाए गए हैं। इनमें से कुछ में ग्रीन यात्रा, ग्रो ट्री, संकल्प तरु, ग्रीन लाइफ, से ट्रीज, सेव ग्रीन, कुदम्बन, बीइंग ग्रीन और गो सकथी शामिल हैं।

पर्यावरण विभाग समय-समय पर इन एनजीओ को अपना समर्थन प्रदान करता है। वृक्षारोपण की प्रक्रिया में शामिल होने और अन्य ऐसी गतिविधियां करने के अलावा कई गैर-सरकारी संगठन भी सड़क के किनारे नाटक प्रदर्शन और अपने सोशल पेजों को अपडेट करने और स्कूलों और कॉलेजों में इस वजह के बारे में बताने के लिए इस कारण को फैलाने के लिए बढ़ावा देते हैं।

 

स्कूल स्तर पर वृक्षारोपण का महत्व संवेदनशील होना चाहिए

छात्रों को वृक्षारोपण के महत्व और उनके पर्यावरण विज्ञान वर्ग में पर्यावरण को साफ रखने के बारे में संक्षिप्त ज्ञान दिया जाता है। वे अपनी परीक्षा के लिए सबक सीखते हैं और इसके बारे में बाद में भूल जाते हैं। यह ऐसे नहीं होना चाहिए। बढ़ते पेड़ों और पौधों के महत्व के बारे में उन्हें संवेदनशील बनाने के लिए विशेष कक्षाएं आयोजित की जानी चाहिए। इन सत्रों में शिक्षकों को वृक्षारोपण के महत्व पर जोर देना चाहिए और छात्रों को समझना चाहिए कि वे अच्छे के लिए पर्यावरण को बदलने में कैसे मदद कर सकते हैं। स्कूलों और कॉलेजों के लिए कुछ गैर-सरकारी संगठनों के साथ सहयोग करना और छात्रों से स्वच्छता अभियान के लिए और साथ ही वृक्षारोपण के लिए प्रत्येक महीने मिलना एक अच्छा विचार है। सैद्धांतिक ज्ञान की तुलना में व्यावहारिक अनुभव हमेशा अधिक प्रभावशाली होता है। इससे इस क्षेत्र में उनकी रुचि उत्पन्न होगी और वे इस दिशा में प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

इसके अलावा यदि देश में हर स्कूल और कॉलेज का प्रत्येक छात्र हर महीने वृक्षारोपण अभियान में हिस्सा लेता है तो हम कई पेड़ों को लगाने में सफल होंगे।

निष्कर्ष

हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए और हमें ऐसा करने के लिए आसपास के लोगों को भी प्रोत्साहित करना चाहिए। इस दिशा में कुशलता से काम करने के लिए काम करने वाले निकट गैर-सरकारी संगठन में शामिल होना सबसे अच्छा है।


 

वृक्षारोपण के महत्व पर निबंध 4 (500 शब्द) Essay on Importance of Tree Plantation 500 words

प्रस्तावना

वृक्षारोपण मानव जाति को कई लाभ प्रदान करता है और हम सभी इस बारे में अच्छी तरह जानते हैं। हम यह भी जानते हैं कि हम में से प्रत्येक के द्वारा किए गए छोटे-छोटे प्रयास पृथ्वी पर समग्र पर्यावरण के लिए बहुत बड़ा अंतर उत्पन्न कर सकते हैं।

अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने में वृक्षारोपण मदद करता है

हम विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन के लिए पेड़ों पर निर्भर हैं। पेड़ लकड़ी, रबड़ आदि जैसा कच्चा माल प्रदान करते हैं जो कि फर्नीचर, बर्तन, कागज़, सजावटी वस्तुओं और पता नहीं किस किस में बदल जाता है। इसका उपयोग घरों के निर्माण में भी किया जाता है। पेड़ फल प्रदान करते हैं जिन्हें संसाधित कर जैम, जेली, जूस, सॉस आदि के उत्पादन में इस्तेमाल किया जाता है। पेड़ों से निकाले जाने वाले कच्चे माल के साथ उत्पादित कई वस्तुएं अन्य देशों में निर्यात की जाती हैं ताकि देश के व्यवसायों और देश की संपूर्ण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सके। इसलिए जितना अधिक से अधिक हम पेड़ों को लगायेंगे उतना ही अधिक हम इस तरह के सामानों का उत्पादन कर सकेंगे।

पेड़ पक्षी और जंगली जीवन के लिए एक वरदान है

पेड़ पक्षियों के साथ-साथ कई जानवरों के लिए भी एक आवास के रूप में सहायता करते हैं। पेड़ पर रहने वाले कुछ जानवरों में ट्री कंगारू, ट्री फ्रॉग, स्पाइडर मंकी, उड़नेवाला लामूर, ग्रीन ट्री पाइथन और कोआला शामिल हैं। वे पेड़ों के नजदीक और आसपास रहते हैं और उनसे भोजन प्राप्त करते हैं। इनमें से कुछ पेड़ों के फलों का सेवन करते हैं जो उन पर लगे होते हैं जबकि दूसरे जानवरों को उन पर लगी हरी पत्तियां अच्छी लगती हैं। इसके अलावा वन जंगली जानवरों के लिए एक प्राकृतिक आवास भी है। यह वह जगह है जहां वे रहते हैं। वनों की कटाई ने पक्षियों और जानवरों की विभिन्न प्रजातियों को विलुप्त होने की ओर अग्रसर किया है। कई अन्य प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर हैं। जानवरों और पक्षियों के लिए यह स्वाभाविक है कि अगर हम उनके भोजन के स्रोतों को छीन लेते हैं और उनके निवास स्थान को बर्बाद कर देते हैं तो उनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ जाता है।

वृक्षारोपण उन्हें जीवित रहने और शांति से रहने में मदद कर सकता है। पर्यावरण में जैव विविधता को बनाए रखने के लिए यह महत्वपूर्ण है। पर्यावरण में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए जैव विविधता अत्यंत आवश्यक है।

वृक्षारोपण बनाम वनों की कटाई

हालांकि वनों की कटाई रोकना और पेड़ों को बचाना लकड़ी, रबर और पेड़ों से बने विभिन्न उत्पादों की बढ़ती मांग की वजह से इसे कुछ हद तक सीमित किया जा सकता है। हम इसे पूरी तरह से नहीं बचा सकते। माल की उच्च मांग के अलावा शहरीकरण की आवश्यकता भी बढ़ गई है। यहां अधिक से अधिक लोगों को समायोजित करने के लिए शहरों में आवासीय क्षेत्रों का निर्माण करने के लिए वन काटे जा रहे हैं। उद्योगों की स्थापना के लिए भूमि का भी उपयोग किया जा रहा है। बढ़ती हुई प्रौद्योगिकी के इस युग में यह समय की आवश्यकता बन गई है। हालांकि हम इन सब से बच नहीं सकते हैं लेकिन हम वृक्षारोपण के माध्यम से नुकसान की भरपाई कर सकते हैं। यह केवल सरकार की ही ज़िम्मेदारी नहीं है कि वह शहर को हरा-भरा बनाने के लिए पेड़ लगाए। हमें भी इस ओर काम करना चाहिए।

निष्कर्ष

हम सभी जानते हैं कि हमारे अस्तित्व और कल्याण के लिए पेड़ और पौधे कितने महत्वपूर्ण हैं लेकिन हम में से कितने लोग नियमित रूप से पेड़ लगाते हैं? यदि आप ऐसा नहीं कर रहे हैं तो यह समय है जब आपको इसे गंभीरता से लेना चाहिए और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए जो कुछ भी प्रयास कर सके उन्हें करना चाहिए।


 

वृक्षारोपण के महत्व पर निबंध 5 (600 शब्द) Essay on Importance of Tree Plantation 600 words

प्रस्तावना 

वृक्षारोपण मूल रूप से पौधों को पेड़ का रूप देने की प्रक्रिया है और इसीलिए उनका अलग-अलग स्थानों पर रोपण किया जाता है। वृक्षारोपण के पीछे का कारण ज्यादातर वनों को बढ़ावा देना, भूनिर्माण और भूमि सुधार है। वृक्षारोपण के इन उद्देश्यों में से प्रत्येक अपने स्वयं के अनूठे कारण के लिए महत्वपूर्ण है।

वनों को बढ़ावा देने के लिए वृक्षारोपण का महत्व

वृक्षारोपण के सबसे सामान्य उद्देश्यों में से एक वनों को बढ़ावा देना है। पृथ्वी पर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए वन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमारे ग्रह का एक प्रमुख हिस्सा जंगलों के साथ ढंका गया है। हालांकि औद्योगिक युग की शुरुआत के बाद से वन तीव्र गति से काटे जा रहे हैं। हालांकि वृक्ष स्वाभाविक रूप से विकसित होते हैं लेकिन वनों की कटाई की वजह से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए हमें अपनी ओर से अपना योगदान देना जरूरी है। वृक्षारोपण इस प्रयोजन के लिए किया जाता है। वृक्षारोपण की मदद से वन तेजी से उगाए जा सकते हैं।

भूदृश्य के लिए वृक्षारोपण का महत्व

वृक्षारोपण बागवानी के उद्देश्य के लिए भी किया जाता है। आजकल शहरी क्षेत्र ज्यादातर पेड़ों और पौधों से रहित होते हैं। इन जगहों का भूनिर्माण इन जगहों को रहने लायक बनाने के साथ-साथ उन्हें एक अच्छा कारक बनाने के लिए किया जाता है। वृक्षारोपण परिवेश को सुशोभित करने का सर्वोत्तम और आसान तरीका है। ये अक्सर सड़क के किनारे, सोसाइटीयों में, पार्कों के साथ-साथ भूनिर्माण के प्रयोजन के लिए शहर में अन्य स्थानों पर लगाए जाते हैं। इससे न केवल जगह सुंदर दिखती है बल्कि गर्मी को कम करने में भी मदद करती है और तथा कई अन्य लाभ भी प्रदान करती है।

गैर-लाभकारी संगठन स्वयंसेवी का योगदान

वृक्षारोपण हरियाली को फैलाने के सबसे आसान और तेज़ तरीके से एक है। दुनिया भर के लोगों ने समय-समय पर पर्यावरण की ओर योगदान करने के लिए स्वयंसेवा की है। उनमें से कई ने संयुक्त प्रयासों के साथ गैर-लाभकारी संस्थाएं स्थापित की हैं और पृथ्वी को रहने के लिए बेहतर जगह बनाने के लिए काम किया है। इन संगठनों ने न केवल वृक्षारोपण गतिविधियों बल्कि अन्य कार्यवाही से भी हरियाली को फैलाने के लिए अन्य लोगों को इस उद्देश्य के लिए काम करने हेतु प्रेरित किया है। वे वृक्षारोपण के महत्त्व को समझाने के लिए स्कीट्स का आयोजन करते हैं और अपने पड़ोसियों, दोस्तों और सहकर्मियों के बीच प्रचार करते हैं। सोशल मीडिया और इंटरनेट के आगमन से वृक्षारोपण के महत्व के बारे में ज्ञान फैलाना और लोगों को इस ओर भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना आसान हो गया है।

वृक्षारोपण के लिए आवश्यक सरकारी सहायता

जहाँ गैर-सरकारी संगठन पर्यावरण को साफ़-सुथरा और हरा-भरा बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं वही उनसे कही-कही गलती भी हो रही हैं। इस अभियान हेतु काम करने के लिए अधिक से अधिक लोगों को शामिल करने के लिए प्रचार व्यापक पैमाने पर किया जाना चाहिए। चूंकि ये सभी गैर-लाभकारी संगठन हैं इसलिए उनके पास ऐसा करने के लिए पर्याप्त धन नहीं है। सरकार को उनके उद्देश्यों को सहारा देने के लिए पूरी तरह से उनका समर्थन करना चाहिए। आखिरकार ये संगठन बेहतर राष्ट्र बनाने के लिए काम कर रहे हैं। सरकार द्वारा प्रदान की गई वित्तीय सहायता के साथ ये संगठन बड़ी परियोजनाओं को बढ़ावा दे सकते हैं और टेलीविजन, समाचार पत्रों और सड़क के किनारें लगे बड़े होर्डिंग विज्ञापनों में अन्य लोगों को प्रोत्साहित कर सकते हैं।

लोगों को इस बारे में संवेदनशील होना चाहिए ताकि वे बड़ी संख्या में भाग लें सके। इस दिशा में एक बड़ा परिवर्तन केवल तभी संभव है जब हम में से हर एक पेड़ को लगाने की जिम्मेदारी लेता है। यहां तक ​​कि अगर हमारे पास गैर-सरकारी संगठन में शामिल होने और नियमित रूप से इस उद्देश्य के लिए काम करने का समय नहीं है तो भी हम अपने आस-पास के क्षेत्रों में पेड़ लगाकर अपना छोटा सा योगदान दे सकते हैं।

निष्कर्ष

यह सही समय है जब लोगों को वृक्षारोपण के महत्व को पहचानना चाहिए और इसके लिए योगदान करना चाहिए। सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए और अधिक से अधिक लोगों को इस उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए।

रिसाइक्लिंग पर निबंध-Essay On Recycling -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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रिसाइक्लिंग पर निबंध-Essay On Recycling -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi  

रीसाइक्लिंग कचरे को नई सामग्री या उत्पाद में बदलने की प्रक्रिया है। यह पर्यावरण की सुरक्षा और सार्वभौमिक कार्बन उत्सर्जन को कम करने का एक शानदार तरीका है। रीसाइक्लिंग का मतलब बेकार सामग्री को कुछ उपयोगी सामग्री में परिवर्तित करना है जैसे – ग्लास, पेपर, प्लास्टिक और एल्यूमीनियम तथा स्टील जैसी धातुएं आमतौर पर पुनर्नवीनीकरण की जाती हैं।

अगर हम अपनी भविष्य की पीढ़ियों के लिए इस दुनिया की रक्षा करना चाहते हैं तो रीसाइक्लिंग आवश्यक है। हम पुराने इस्तेमाल किए हुए उत्पादों से नए उत्पाद बनाते हैं। अपने पुराने उत्पादों को पुन: उपयोग और ना फेंकने से आप वास्तव में रीसाइक्लिंग कर रहे हैं। रीसाइक्लिंग से तात्पर्य कई आधुनिक अनुप्रयोगों के साथ एक पुरानी से प्रथा है जो प्राकृतिक वातावरण के साथ-साथ इंसानों के लिए महत्वपूर्ण है। यह इस्तेमाल उत्पादों से संसाधनों के पुनरुद्धार और पुन: उपयोग को संदर्भित करता है। पर्यावरण नीति में प्रमुख रूप से रीसाइक्लिंग का हिस्सा है। यह मुख्य रूप से ठोस और खतरनाक अपशिष्ट निपटान, प्राकृतिक संसाधनों की कमी और प्रदूषित भूमि, जल और वायु पर बढ़ती चिंता की बढ़ती लागतों के कारण है। हमने आपकी परीक्षा में इस विषय के साथ आपकी मदद करने के लिए विभिन्न लंबाई के रीसाइक्लिंग पर निबंध उपलब्ध करवाए हैं। आप अपनी आवश्यकता के अनुसार किसी भी रीसाइक्लिंग निबंध का चयन कर सकते हैं:

रिसाइक्लिंग पर लम्बे और छोटे निबंध (Essay on Recycling in Hindi)

रिसाइक्लिंग पर निबंध 1 (200 शब्द) (Essay on Recycling in Hindi 200 words)

रीसाइक्लिंग के इतिहास पर नज़र डाले तो यह प्रक्रिया 1900 में शुरू हुई थी जब लोगों ने बर्तन, धूपदान और अन्य धातुओं को पिघलाकर उनका पुनर्नवीनीकरण किया लेकिन जैसे जैसे अधिक प्लास्टिक उत्पाद बनते चले गए रीसाइक्लिंग शब्द की परिभाषा में जटिलता बढ़ गई और इसे दूर करने के लिए कोड तैयार किए गए। इस प्रकार रीसाइक्लिंग कोड महत्वपूर्ण हैं ताकि आपको पता चल जाए कि रीसाइकल  क्या है। आज रीसाइक्लिंग पहले से भी कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। प्रोत्साहन कार्यक्रम लोगों को अधिक जागरूक और पर्यावरण की मदद करने के लिए मदद कर रहे हैं। रीसाइक्लिंग पूरे विश्व में की जाती है। कई देशों में कुछ प्रोग्राम रीसाइक्लिंग उत्पादों के लिए आपको भुगतान करते हैं। रीसाइक्लिंग रीड्यूस, रीयूज़ और रीसायकल का तीसरा ‘र’ है। जब आप रीसाइक्लिंग और पर्यावरण को साफ करने के लिए अपना योगदान देते हैं तो निम्न बातों को ध्यान में रखें:

  1. जब आपको किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है तो उसे ना ख़रीदे। ऐसा करके आप उसे व्यर्थ होने से बचा रहे हैं।
  2. अगर चीज़ खरीदने की ज़रूरत है तो उस चीज़ को ख़रीदे जिसकी कम मात्रा में पैकिंग हो। उस उत्पाद का पुन: उपयोग किया जा सकता है। उत्पाद वो खरीदें जो पर्यावरण के अनुकूल हैं।
  3. पुनर्नवीनीकरण सामग्री से बने उत्पादों को खरीदने की कोशिश करें। कागज और प्लास्टिक पुनर्नवीनीकरण उत्पादों के कुछ उदाहरण हैं।

कुछ भी फेंकने से पहले उस चीज़ को पुनः उपयोग करने का तरीका सोचें। प्लास्टिक के कंटेनरों का इस्तेमाल फ्रिज में सामानों को स्टोर करने के लिए किया जा सकता है। पुरानी वस्तुएं धर्मार्थ संगठनों को दी जा सकती हैं जहां उनका उपयोग किया जा सकता है। बगीचों में डिब्बे और कंटेनरों का उपयोग फूलों के बर्तन के रूप में किया जा सकता है।


 

रिसाइक्लिंग पर निबंध 2 (300 शब्द) (Essay on Recycling in Hindi 300 words)

प्रस्तावना

रीसाइक्लिंग अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता के बिना समाज को बहुत अधिक उपयोगी उत्पाद प्रदान करने के अलावा पर्यावरण का बचाव करने में मदद करता है। इसके महत्व को कई मायनों में देखा जा सकता है। जनता को इसके महत्व के बारे में शिक्षित करना आवश्यक है ताकि वे पूरे दिल से इसके प्रति अपना योगदान दें।

रिसाइक्लिंग क्यों महत्वपूर्ण है?

नीचे दिए कारणों में रीसाइक्लिंग सहायक हो सकती है:

  • रीसाइक्लिंग पृथ्वी को बचाता है – एक उत्पाद का पुनर्नवीनीकरण पर्यावरण को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है। उदाहरण के लिए कागज को रीसाइक्लिंग करने के कारण अधिक पेड़ों को काटे बिना पेपर उत्पादन का परिणाम हो सकता है।
  • पुनर्चक्रण ऊर्जा बचाता है – सामग्री से एक नया उत्पाद बनाने की अपेक्षा उसी उत्पाद को रीसाइक्लिंग करने से कम ऊर्जा खर्च होती है। उदाहरण के लिए नए एल्यूमीनियम उत्पाद को बनाने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा खर्च होती है। इस प्रकार एक पुराने एल्यूमीनियम को फिर से रीसाइक्लिंग करके हम धातु का पुन: उपयोग कर सकते हैं और बड़ी ऊर्जा खर्च होने से बच सकते हैं जो पर्यावरण की सुरक्षा में मदद करती है।
  • रीसाइक्लिंग ग्लोबल वार्मिंग को कम करने और प्रदूषण को कम करने में मदद करता है – रीसाइक्लिंग के मुख्य लाभों में से एक ऊर्जा बचत है। कार्बन या ग्रीनहाउस गैसों, जो वातावरण के लिए बहुत हानिकारक है यदि वे उत्सर्जित हो जाती हैं, के कम उत्सर्जन में ऊर्जा की बचत के परिणाम देखने को मिलते हैं जो कि ऊर्जा उत्पादन द्वारा गठित उप-उत्पाद है।
  • लैंडफिल में रीसाइक्लिंग अपशिष्ट उत्पाद को कम कर देता है – अपशिष्ट जिसे पुनर्नवीनीकरण नहीं किया जा सकता वह आम तौर पर लैंडफिल में डाला जाता है। यहाँ कचरे को क्षय, सड़ांध या विघटित होने के लिए छोड़ दिया जाता है और यह पूरी तरह से विघटित करने के लिए कई साल ले सकता है। अधिक से अधिक कचरे को लैंडफिल में भेजा जा रहा है और यदि भविष्य में लैंडफिल भेजने की बजाए रीसाइक्लिंग नहीं की गई तो लैंडफिल की जगह हमारे घरों के ठीक पीछे हो सकती है।
  • रीसाइक्लिंग पैसे बचाने में मदद करता है – पुनर्नवीनीकरण वस्तुओं पर आमतौर पर कम लागत लगती है। पुरानी सामग्री और बहुत कम ऊर्जा का उपयोग करके पुनर्नवीनीकरण उत्पाद को बहुत कम राशि पर बेचा जा सकता है। इसके अलावा रीसाइक्लिंग के लिए बेकार कचरे को बेचना फ़ायदे का सौदा है।

निष्कर्ष

रीसाइक्लिंग घर पर भी की जा सकती है और इसे बच्चों को पोषण के समय एक अच्छी आदत के रूप में सिखाया जाना चाहिए। बायोडिग्रेडेबल अपशिष्ट को पौधों के लिए खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

रिसाइक्लिंग पर निबंध 3 (400 शब्द) (Essay on Recycling in Hindi 400 words)

प्रस्तावना

पर्यावरण के लिए रीसाइक्लिंग आवश्यक है। इस अभ्यास को बढ़ावा देने के लिए सरकार को सिस्टम स्थापित करने में निवेश करना चाहिए। मनुष्य को भी बेकार सामग्री को रीसाईकल करने के लिए प्रयास करना चाहिए। रीसाइक्लिंग के महत्व पर कई बार जोर दिया गया है हालांकि अभी भी बहुत से लोग इससे बचना चाहते हैं।

कारण क्यों लोग रीसायकल नहीं करते?

  1. रीसाइक्लिंग असुविधाजनक है

रीसाइक्लिंग न करने के लिए किए गए सर्वेक्षण के अनुसार प्राथमिक कारण यह था कि लोगों को यह प्रथा सुविधाजनक या उनके हिसाब सरल नहीं लगी। उन्हें लगा कि उनको स्क्रैप डीलर या रीसाइक्लिंग सेंटर में अपने घरेलू अपशिष्ट को छोड़ने के लिए अतिरिक्त कदम उठाना होगा। कई अपार्टमेंट या सोसाइटी में पर्याप्त रीसाइक्लिंग डिब्बे नहीं हैं। जिसे कोई दिलचस्पी नहीं है वह सोचता है कि रीसाइक्लिंग का कोई कार्यक्रम नहीं है लेकिन यह सच नहीं है। जब तक आपको स्क्रैप डीलिंग केंद्र नहीं मिल जाता तब तक आपको रीसाइक्लिंग में थोड़ा प्रयास करना पड़ेगा।

  1. लोगों को रीसाइक्लिंग समझ नहीं आता

रीसाइक्लिंग न करने का एक अन्य कारण यह है कि लोग रीसाइकिल करने योग्य और रीसाइकिल ना करने योग्य उत्पादों के बीच अंतर करने में सक्षम नहीं हैं। उनके अनुसार रीसाइक्लिंग समझने योग्य प्रक्रिया नहीं है।

  1. कम जगह का होना

लोगों के पास आम तौर पर छोटे घर हैं और जगह की कमी कई लोगों के लिए एक मुद्दा है। वे अपने घर के आसपास कचरा देखना नहीं चाहते जहां जगह एक समस्या है।

  1. मैं केवल तभी रिसाइकिल करूँगा जब मुझे पैसा मिलेगा

यह भी एक ख़राब बहाना है जो लोग बनाते हैं जब उनसे रीसाइक्लिंग के बारे में पूछा जाता है। उनके अनुसार स्क्रैप का निपटान से उन्हें अच्छी मात्रा में पैसा नहीं मिलता या उन्हें इसमें किसी प्रकार का कोई प्रोत्साहन शामिल नहीं दिखता। बहुत से लोगों को तब तक रीसाइकिल जरूरी नहीं लगता जब तक इसमें कोई मौद्रिक लाभ न हो।

  1. रीसाइक्लिंग से कोई फर्क नहीं पड़ता

एक बड़ी गलत धारणा यह है कि रिसाइकिलिंग से कोई अंतर नहीं पड़ता। उनके पास वास्तव में पुनर्नवीनीकृत वस्तुओं की मात्रा और इसकी संबंधित चीजों के बारे में ज्ञान नहीं है। लोग यह भी मानते हैं कि धरती पर प्राकृतिक संसाधन बहुत मात्रा में मौजूद हैं।

  1. हरियाली देखने की इच्छा नहीं है

आज ऐसे भी लोग हैं जो ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण के बारे में परवाह नहीं करते हैं। उनकी प्राथमिकता सूची में इन चीजों की कोई अहमियत नहीं है। इसलिए उनमें ग्रीन-फ्रेंडली पर्यावरण के लिए रीसाइक्लिंग की पहल में योगदान करने की कोई इच्छा नहीं दिखती।

निष्कर्ष

हम मनुष्यों ने वर्षों से वातावरण को बहुत नुकसान पहुंचाया है। ग्लोबल वार्मिंग हमारी गलतियों का परिणाम है। रीसाइक्लिंग से प्राकृतिक संसाधनों के अपव्यय को रोका जा सकता है। यह प्रदूषण को रोक सकता है, पर्यावरण को बचा सकता है और अधिक उपयोगी वस्तुओं को बनाने में मदद करता है। इसलिए पर्यावरण की दिशा में हमारी जिम्मेदारी बनती है और अगर हम अपने ग्रह को बचाना चाहते हैं तो हमें दूसरों को भी रीसाईकल करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

रिसाइक्लिंग पर निबंध 4 (500 शब्द) (Essay on Recycling in Hindi 500 words)

प्रस्तावना

रीसाइक्लिंग में अपशिष्ट सामग्रियों को इकट्ठा करने की प्रक्रिया शामिल होती है जिसके तहत उन्हें ब्लॉक्स में तोड़ा जाता है जिसके फ़लस्वरूप वे नए उत्पादों में बदल जाते हैं। मुख्य रूप से पांच प्रकार के अपशिष्ट पदार्थ हैं। इसमें कागज, स्टील, ग्लास, एल्यूमीनियम और प्लास्टिक शामिल हैं। इन सभी का विभिन्न तरीकों से उपयोग करके पुनर्नवीनीकरण किया गया है।

रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया

यहां बताया गया है कि कैसे अलग-अलग चीजों का पुन: उपयोग किया जाता है:

पेपर – पेपर के कचरे में कागज शीट, अख़बार, कार्डबोर्ड और कार्यालयों तथा शैक्षणिक संस्थानों में इस्तेमाल किए गए अन्य कागज़ शामिल हैं। पेपर में 2 घटक है – लकड़ी और पानी। तो सबसे पहले रीसाइक्लिंग के माध्यम से कागज को दो भागों में विभाजित किया जाता है ताकि इसे सुधारा जा सके। स्याही और गंदगी जैसे प्रदूषण को फ़िल्टर्ड किया जाता है। पेपर संकलित किया जाता है और उसे गर्म पानी में डाला जाता है। यह स्नान जल्दी से कागज को सेलूलोज़ फाइबर के छोटे से तारों में तोड़ देती है जिससे ‘पल्प’ नामक एक मसालेदार पदार्थ कहा जाता है – मूल रूप से गीला ढक्कनदार पेपर। हालांकि कागज अभी भी गंदा है। इसके बाद इसे एक स्क्रीन पर डाला जाता है जहां शेष गंदगी गोंद या प्लास्टिक के कणों की तरह निकाली जाती है। फिर इसे डी-इनकर भेजा जाता है जहां इसे धोया जाता है जिसमें हवा के बुलबुले और साबुन जैसे रासायनिक पदार्थ मुख्यतः ‘सर्फैक्टेंट’ शामिल होते हैं जो कागज को स्याही से अलग करते हैं। हवा के बुलबुले स्याही को सतह और पल्प तक ले जाते हैं जो नीचे तक जाती है। वह पल्प अब साफ है और उससे नए पेपर उत्पाद बनाए जा सकते हैं।

स्टील – स्टील का इसके किसी भी गुण को खोए बिना दोबारा पुनर्नवीनीकरण किया जा सकता है। तरल फ़्लोटिंग सिस्टम की मदद से उच्च वायु-दबाव प्रणाली स्टील को अन्य धातु से अलग करती है और इसके बाद हाइड्रोलिक मशीनरी द्वारा भारी दबाव डालने के बाद इसे कम किया जाता है। कभी-कभी गैस और प्लाज्मा मेक भी इस्तेमाल होता है तब स्टील को पिघला दिया जाता है और नए आइटम जैसे कि डिब्बे, बर्तन, कार के हिस्सों, पेपर क्लिप इत्यादि में परिवर्तित किया जाता है।

ग्लास – ग्लास बिखर जाता है और ‘क्यूलेट’ नामक छोटे टुकड़ों में टूट जाता है जिसकी चौड़ाई 5 सेमी से अधिक नहीं है। कांच के टुकड़े रंगीन, स्पष्ट, भूरे और हरे रंग में छाटें जाते हैं। अलग-अलग रंग महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्थायी है। ग्लास सिलिका से बना है जो पिघल जाता है और नए आकारों और उत्पादों में ढल जाता है।

एल्यूमिनियम – स्टील के समान एक बार अलग हो जाने पर एल्यूमीनियम पुनः उपयोग करने योग्य बनाने के लिए इसके साथ ज्यादा कुछ नहीं करना पड़ता। यह काटा जाता है, धोया जाता है और चिप्स में बदल जाता है जो एक बड़ी भट्ठी में पिघल जाता है और फिर मोल्ड में डाला जाता है। फिर उन्हें निर्माताओं के लिए भेज दिया जाता है जहां वे फिर से पिघलाए जाते हैं और पतली चादरों में बदल दिए जाते हैं जिन्हें नए उत्पादों में काटा, बदला और आकार दिया जाता है।

प्लास्टिक – प्लास्टिक 6 विभिन्न प्रकार के रसायनों से बना है – पॉलीथीन टेरेफाथलेट, उच्च घनत्व पॉलीथीन, पॉलीविनाइल क्लोराइड, कम घनत्व पॉलीथीन, पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीस्टायरीन। प्रत्येक प्लास्टिक में एक अलग आणविक संरचना होती है जो प्लास्टिक के भौतिक गुणों को निर्धारित करती है, जिसका मतलब है कि कुछ प्लास्टिक का दूसरों की तुलना में पुनरावृत्ति करना आसान है। प्लास्टिक को बड़ी कार्बन शृंखला से बनाया जाता है। इसलिए प्लास्टिक के कुछ रूपों को पिघला या जा सकता है और कुछ में सुधार किया जा सकता है जबकि अन्य को नए प्लास्टिक के साथ मिश्रित किया जा सकता है और अन्य को केवल अलग-अलग उपयोगों के लिए अन्य आकारों में ढाला जा सकता है।

निष्कर्ष

लगभग कुछ भी पुनर्नवीनीकरण किया जा सकता है और कचरे को पुन: उपयोग के लिए नया आकार दिया जा सकता है लेकिन फिर भी कुछ चीजें और सामग्री जैसे कंप्यूटर, बैटरी, लाइट बल्ब आदि हैं जिनको रीसाईकल करना जटिल हैं क्योंकि उनमें काफी हद तक विषाक्त पदार्थ शामिल हैं। इसलिए हमें उन्हें जिम्मेदारी से निपटाना होगा।


 

रिसाइक्लिंग पर निबंध 5 (600 शब्द) (Essay on Recycling in Hindi 600 words)

प्रस्तावना

हम मनुष्यों ने वर्षों से वातावरण को बहुत नुकसान पहुंचाया है। ग्लोबल वार्मिंग हमारी गलतियों का परिणाम है। रीसाइक्लिंग से प्राकृतिक संसाधनों के अपव्यय को रोका जा सकता है। इससे प्रदूषण को रोका जा सकता है, पर्यावरण को बचाया जा सकता है और अधिक उपयोगी वस्तुओं को बनाने में मदद ली जा सकती है। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में रीसाइक्लिंग एक महत्वपूर्ण कारक है और यह पर्यावरण में सुधार के लिए बहुत योगदानकारी भी है।

घरेलू रीसाइक्लिंग

अगर आपके पास रिसाइकिलिंग का ज्ञान है तो आपको पता होगा कि घर में और आसपास रिसाइकिलिंग काफी सरल है। आप जो खाद्य उत्पाद बाजार से खरीदते हैं उसके बारे में सख्ती से सोचकर और उन्हें रीसाईकल करने का तरीका आर्थिक रीसाइक्लिंग की दिशा में शुरुआत है।

  • विभिन्न घरेलू सामग्रियों को रिसाइकल करना – कई सामग्रियां जैसे कागज, प्लास्टिक, धातु और काँच को रिसाइकल किया जाता है। फर्नीचर, उपकरण, आर्टिफैक्ट और वाहनों की तरह वैकल्पिक चीजें भी रिसाइकल की जा सकती हैं हालांकि हम में से बहुत से ऐसा करने की कोशिश नहीं करते हैं।
  • एक ऐसा उत्पाद खरीदें जिसे रिसाइकल किया जा सके – किरयाने की दुकानों पर सामान खरीदते समय ऐसे उत्पादों को ख़रीदे जिनको रीसाईकल किया जा सके जैसे कांच के जार और टिन के डिब्बे आदि।
  • रिसाइकिलिंग प्रक्रिया से बने सामान को खरीदें – आप पैकेजिंग पर लेबल को देख कर यह बता सकते हैं कि कोई उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल है या नहीं।
  • असुरक्षित सामग्री की खरीदारी से बचें – असुरक्षित कचरा वाले उत्पाद को रीसाईकल करने में परेशानी होती है। कोशिश करें और घर साफ़ करने के लिए सुरक्षित विकल्प की पहचान करें और संभव हो तो गैर विषैले उत्पादों का उपयोग करें।
  • रिसाइकल डिब्बे – सुनिश्चित करें कि आपके पास अपने घर में रिसाइकल करने के लिए डिब्बे हो। इसे एक साफ़ सुथरी जगह में रखें ताकि आप इसका उपयोग करना ना भूले। आपकी देशी काउंसिल आपको रिसाइकल डिब्बे देने में सक्षम होनी चाहिए जो कांच, कागज, एल्यूमीनियम और प्लास्टिक जैसी सामग्री के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

बगीचे में रिसाइकल

बगीचे के उत्पादों और पौधों का रीसाइक्लिंग करके आप अपने बगीचे में पर्यावरण को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

  • कम्पोस्टिंग – कम्पोस्टिंग एक ऐसा तरीका है जहां कचरा खाद में परिवर्तित हो जाता है जो पौधों के विकास की सहायता के लिए आपके बगीचे में उपयोग किया जा सकता है। उद्यान में पौधों और घर में बचे हुए खाने के रूप में कचरे को रीसाइक्लिंग करने का एक शानदार तरीका है।
  • ग्रास साइक्लिंग – ग्रास साइक्लिंग करना बगीचे की घास को काटने के बाद उन्हें रीसाइक्लिंग करने के एक शानदार दृष्टिकोण है। उन्हें नीचे फेंकने की बजाए नीचे की कटाई करके छोड़ दें। वे पोषक तत्वों में विकसित होंगे और मिट्टी के भीतर उर्वरक के रूप में कार्य करेंगे।
  • बीज बोना – कचरे के डिब्बे में फलों और सब्जी के बीज ना फेंके। इसके बजाए उन्हें अपने बगीचे में बोएं। बढ़ते पौधे और पेड़ ग्लोबल वार्मिंग को कम करके और कई पक्षियों और प्राणियों के लिए घर उपलब्ध कराने के द्वारा परिवेश को बढ़ाएंगे।

समाज में रिसाइकिलिंग

  • स्थानीय रिसाइकिलिंग सुविधाएं – रीसाइक्लिंग सुविधाएं समुदाय के उपयोग के लिए प्रदान की जाती हैं। जहां कहीं भी आपकी स्थानीय रीसाइक्लिंग सुविधाएं हैं उनका उपयोग करने का तरीका सत्यापित करें।
  • स्कूल और व्यवसाय – ये रीसाइक्लिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अपने संकायों या कार्यस्थल पर उपलब्ध रीसाइक्लिंग योजनाओं का पालन करें और उन्हें सुधारने के तरीकों के बारे में सोचें।
  • सामुदायिक परियोजनाएं – नकदी दान करके या नई अवधारणाओं को प्रदान करने और कार्यान्वित करने से रीसाइक्लिंग के संबंध में स्थानीय सामुदायिक परियोजनाएं भी शामिल हो गई हैं।
  • कैन्स के लिए कैश – यह परियोजना उन लोगों को नकद पैसा देती है जो अपने एल्यूमीनियम के डिब्बे को रीसाइकल करते हैं। यूनाइटेड किंगडम में डिब्बों को रीसाइकल करने के लिए 500 से अधिक पैसा मिलता है। भारत में हमारे पास स्क्रैप डीलर हैं जहां हम नकद पैसे के लिए इन कैन्स का आदान-प्रदान कर सकते हैं। यह एक बहुत ही अच्छी पहल है इसलिए हमें इसमें शामिल होना चाहिए और इस पद्धति द्वारा अतिरिक्त पैसा कमाना चाहिए।

निष्कर्ष

इन सरल बिंदुओं के बाद हम पर्यावरण के लिए थोड़ा सा योगदान कर सकते हैं जो निश्चित रूप से लंबे समय तक फलदायी होंगे। इससे न केवल पर्यावरण का लाभ होगा बल्कि मनुष्य को भी फायदा होगा। इसलिए इससे पहले कि आप कुछ फेंके, पहले सोचें क्या इसका पुन: उपयोग किया जा सकता है।

जंगल पर निबंध -Essay On Forest -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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जंगल पर निबंध -Essay On Forest -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

जंगल मूल रूप से भूमि का एक टुकड़ा है जिसमें बड़ी संख्या में वृक्ष और पौधों की विभिन्न किस्में शामिल हैं। प्रकृति की ये खूबसूरत रचनाएं जानवरों की विभिन्न प्रजातियों के लिए घर का काम करती हैं।

घने पेड़ों, झाड़ियों, श्लेष्मों और विभिन्न प्रकार के पौधों द्वारा कवर किया गया एक विशाल भूमि क्षेत्र को वन के रूप में जाना जाता है। दुनिया भर में कई प्रकार के वन हैं जो विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों और जीवों के लिए घर हैं। जब भी आप को इस विषय से संबंधित कोई आवश्यकता होगी तो आपकी मदद करने के लिए हमने यहां विभिन्न प्रकार के ‘जंगल पर निबंध’ उपलब्ध करवाएं हैं। आप अपनी आवश्यकता के अनुसार किसी भी निबंध को चुन सकते हैं:

जंगल/ वन पर निबंध (Essay on Forest in Hindi)

जंगल/ वन पर निबंध – 1 (200 शब्द) (Essay on Forest in Hindi 200 words)

एक जंगल एक जटिल पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में जाना जाता है जो पेड़ों, झाड़ियों, घास और श्लेष्मों से घनी होती है। वृक्षों और अन्य पौधों जो कि जंगलों का हिस्सा बनाते हैं एक ऐसा वातावरण बनाते हैं जो जानवरों की प्रजातियों के प्रजनन के लिए स्वस्थ होता है। ये जंगली जानवरों और पक्षियों की एक विशाल विविधता के लिए एक आवास है।

दुनिया के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न प्रकार के जंगलों का विकास होता है। ये मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित हैं – वर्षा वन, शंकुधारी वन और पर्णपाती वन। वन पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाते हैं क्योंकि वे जैव विविधता में मुख्य रूप से सहायता करते हैं। जंगलों की मौजूदगी की वजह से बड़ी संख्या में पक्षियों और जानवरों की जिंदगी जीवित रहती है।

हालांकि दुर्भाग्य से विभिन्न उद्देश्यों के लिए वनों को तेजी से काटा जा रहा है। वनों की कटाई के प्रमुख कारणों में से विभिन्न वृक्षों से बनने वाली विभिन्न वस्तुओं की मांग में वृद्धि और बढ़ती आबादी को समायोजित करने की आवश्यकता है। यह जानना महत्वपूर्ण है कि मानव जाति के अस्तित्व के लिए जंगल आवश्यक हैं। वातावरण को शुद्ध करने, जलवायु नियंत्रण में सहायता, प्राकृतिक वाटरशेड के रूप में कार्य करने और कई लोगों के लिए आजीविका का एक स्रोत है।

इस प्रकार वनों को संरक्षित किया जाना चाहिए। वनों की कटाई एक वैश्विक मुद्दा है और इस मुद्दे को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपाय किए जाने चाहिए।


 

जंगल/ वन पर निबंध – 2 (300 शब्द) (Essay on Forest in Hindi 300 words)

प्रस्तावना

वन को आम तौर पर एक विशाल क्षेत्र के रूप में संदर्भित किया जाता है जिसमें विभिन्न प्रकार के पौधें और पेड़ होते हैं। यह जंगली जानवरों और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों के लिए एक आवास हैं। वनों का निर्माण अलग-अलग तरह की परतों से होता है जिनका अपना महत्व और कार्य हैं।

वनों का महत्व

वन पारिस्थितिक तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जंगलों को संरक्षित करने और अधिक पेड़ों का विकास करने की आवश्यकता पर अक्सर जोर दिया जाता है। ऐसा करने के कुछ प्रमुख कारण निम्नानुसार हैं:

  1. वायुमंडल की शुद्धि

यह सामान्य सा ज्ञान है कि पौधें ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। वे अन्य ग्रीनहाउस गैसों को भी अवशोषित करते हैं जो वातावरण के लिए हानिकारक होती हैं। पेड़ और जंगल हमें पूरी हवा के साथ-साथ वातावरण की भी सफ़ाई करने के लिए मदद करते हैं।

  1. वातावरण नियंत्रण

वृक्ष और मिट्टी वायुमंडलीय तापमान को बाष्पीकरण की प्रक्रिया के माध्यम से विनियमित करते हैं। यह जलवायु को स्थिर करने में सहायता करता है। वन तापमान ठंडा रखता है। उनके पास स्वयं के माइक्रोक्लिमेंट्स बनाने की भी क्षमता है। उदाहरण के लिए अमेज़ॅन वायुमंडलीय स्थितियों को बनाता है जो आसपास के क्षेत्रों में नियमित रूप से वर्षा को बढ़ावा देता है।

  1. पशु और पक्षी के लिए आवास

वन जंगली जानवरों और पक्षियों की कई प्रजातियों के लिए एक घर के रूप में सेवा करते हैं। इस प्रकार जैव विविधता को बनाए रखने के लिए ये एक बढ़िया साधन हैं जो एक स्वस्थ वातावरण को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।

  1. प्राकृतिक वाटरशेड

वृक्ष जंगलों से निकल रही नदियों और झीलों पर छाया का निर्माण करते हैं और उन्हें सूखने से बचाएं रखते हैं।

  1. लकड़ी का स्रोत

लकड़ी के अन्य सामानों में टेबल, कुर्सियां और बिस्तरों के साथ फर्नीचर के विभिन्न टुकड़े बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। वन विभिन्न प्रकार के जंगल के स्रोत के रूप में सेवा करते हैं।

  1. आजीविका का साधन

दुनिया भर के लाखों लोग सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से अपनी आजीविका के लिए जंगलों पर निर्भर हैं। वनों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए लगभग 10 मिलियन लोग प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत हैं।

निष्कर्ष

इस प्रकार मानव जाति के अस्तित्व के लिए वन महत्वपूर्ण हैं। ताजा हवा से लेकर लकड़ी तक जिसका इस्तेमाल हम सोने के लिए बिस्तर के रूप में करते हैं – यह सब कुछ जंगलों से प्राप्त होता है।

जंगल/ वन पर निबंध – 3 (400 शब्द) (Essay on Forest in Hindi 400 words)

प्रस्तावना

वन पेड़ों का विशाल विस्तार है। दुनिया भर में विभिन्न प्रकार के वन हैं। ये अपने प्रकार के मिट्टी, पेड़ों और वनस्पतियों और जीवों की अन्य प्रजातियों के आधार पर वर्गीकृत किए गए हैं। पृथ्वी का एक बड़ा हिस्सा जंगलों के साथ कवर हुआ है।

वन शब्द की उत्पत्ति

वन शब्द की उत्पत्ति फ्रांसीसी शब्द से हुई है जिसका मतलब है कि बड़े पैमाने पर पेड़ों और पौधों का प्रभुत्व होना। इसे अंग्रेजी के एक ऐसे शब्द के रूप में पेश किया गया था जो कि जंगली भूमि को संदर्भित करता है जिसको लोगों ने शिकार के लिए खोजा था। इस भूमि पर पेड़ों द्वारा कब्जा हो भी सकता है या नहीं भी हो सकता। यदि यह बात थी तो कुछ लोगों ने दावा किया था कि जंगल शब्द मध्यकालीन लैटिन शब्द “फोरेस्टा” से लिया गया था जिसका अर्थ था खुली लकड़ी। मध्यकालीन लैटिन में यह शब्द विशेष रूप से राजा के शाही शिकार मैदानों को संबोधित करने के लिए इस्तेमाल किया गया था।

वन में विभिन्न परतें

जंगल विभिन्न परतों से बना है जो एक साथ एक जगह को पकड़ने में अपनी भूमिका निभाते हैं। इन परतों में वन भूमि, अंडरस्टोरी, कैनोपी और एमर्जेंट परत शामिल हैं। ये उष्णकटिबंधीय जंगलों में बड़े स्तर मौजूद होते हैंI इन प्रत्येक परतों के बारे में यहाँ जानकारी दी गयी है:

  1. जंगल की ज़मीन

इस परत में पत्तियों, मृत पौधों, टहनियाँ और पेड़ों और जानवरों के विच्छेदन के घटक शामिल हैं। इन चीजों के क्षय नई मिट्टी बनाते हैं और पौधों को आवश्यक पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं।

  1. अंडरस्टोरी

यह परत झाड़-फ़ूस, झाड़ियों और वृक्षों से बनी है जो वृक्षों की छाया को बढ़ने और रहने के लिए उपयोग किए जाते हैं। यह पर्याप्त धूप से रहित होने के लिए जानी जाती है।

  1. कैनोपी

यह तब बनता है जब बड़ी संख्या में शाखाएं, टहनियां और बड़े पेड़ों की पत्तियां जुड़ जाती हैं। इन पूर्ण विकसित पेड़ों को सूर्य के प्रकाश की अधिकतम मात्रा प्राप्त होती है और ये जंगल में अन्य पौधों और पेड़ों के लिए सुरक्षात्मक परत बनाते हैं। यह सबसे मोटी परत के रूप में जानी जाती है। यह पौधों और पेड़ों तक पहुंचकर बारिश को प्रतिबंधित करता है। बंदर, मेंढक, स्लॉथ, सांप, छिपकली और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां यहां रहने के लिए जानी जाती हैं।

  1. आकस्मिक परत

यह परत, जो उष्णकटिबंधीय बारिश के जंगल का एक हिस्सा है, बिखरे हुए पेड़ की शाखाओं और पत्तियों से बनी है, जो कैनोपी के ऊपर की परत बनाती है। सबसे ऊँचा पेड़ इस स्थान तक पहुंच कर इस परत का एक हिस्सा बनाते हैं।

निष्कर्ष

वन पर्यावरण का एक अनिवार्य हिस्सा है। हालांकि दुर्भाग्य से मनुष्य विभिन्न प्रकार के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पेड़ों को काट रहा हैं जिससे पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ रहा है। पेड़ों और जंगलों को बचाने की आवश्यकता को और अधिक गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

जंगल/ वन पर निबंध – 4 (500 शब्द) (Essay on Forest in Hindi 500 words)

प्रस्तावना

जंगल एक विशाल भूमि है जिसमें बड़ी संख्या में वृक्ष, दाखलता, झाड़ियां और पौधों की अन्य किस्में शामिल हैं। वनों में काई, कवक और शैवाल शामिल होते हैं। ये पक्षी, सरीसृप, सूक्ष्मजीव, कीड़े और जानवरों की एक विस्तृत विविधता के लिए घर हैं। वन पृथ्वी पर जैव विविधता को बनाए रखता है और इस प्रकार ग्रह पर एक स्वस्थ वातावरण बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

जंगल के प्रकार

दुनिया भर के वनों को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। यहां विभिन्न प्रकार के जंगलों का विस्तृत जानकारी दिया गया है जो पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्र का एक हिस्सा बनाते हैं:

  1. ऊष्णकटिबंधीय वर्षावन

ये बेहद घने जंगल हैं और इनमें बड़े पैमाने पर सदाबहार वृक्ष शामिल होते हैं जो हर साल हरे भरे रहते हैं। आप हालांकि हरी भरी हरियाली को देख सकते हैं क्योंकि ये कैनोपी के साथ आच्छादित होती हैं और इनमें एक आकस्मिक परत भी होती हैं ये पर्याप्त धूप से रहित होती और इस तरह से अधिकतर काली और नम होती हैं। इन वनों में वर्ष भर में बहुत अधिक बारिश होती है लेकिन फिर भी तापमान यहां अधिक है क्योंकि ये भूमध्य रेखा के निकट स्थित हैं। यहां पशुओं, पक्षियों और मछलियों की कई प्रजातियां प्रजनन करती हैं।

  1. उप-उष्णकटिबंधीय वन

ये जंगल उष्णकटिबंधीय जंगलों के उत्तर और दक्षिण में स्थित हैं। ये जंगल ज्यादातर सूखा जैसी स्थिति का अनुभव करते हैं। यहां के पेड़ और पौधें गर्मियों में सूखे के अनुकूल होते हैं।

  1. पर्णपाती वन

ये जंगल मुख्य रूप से पेड़ों के लिए घर है जो हर साल अपने पत्ते खो देते हैं। पर्णपाती वन ज्यादातर उन क्षेत्रों में हैं जो हल्की सर्दियों और गर्मियों को अनुभव करते हैं। ये यूरोप, उत्तरी अमेरिका, न्यूजीलैंड, एशिया और ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों में पाए जा सकते हैं। वालनट, ओक, मेपल, हिकॉरी और चेस्टनट पेड़ अधिकतर यहां पाए जाते हैं।

  1. टेम्पेरेट वन

टेम्पेरेट वनों में पर्णपाती और शंकुधारी सदाबहार पेड़ों का विकास होता है। पूर्वोत्तर एशिया, पूर्वी उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी पूर्वी यूरोप में स्थित इन जंगलों में पर्याप्त वर्षा होती है।

  1. मोंटेन वन

ये बादल वनों के रूप में जाने जाते हैं ऐसा इसलिए है क्योंकि इन जंगलों में अधिकतर बारिश धुंध से होती है जो निचले इलाकों से होती है। ये ज्यादातर उष्णकटिबंधीय, उप उष्णकटिबंधीय और समशीतोष्ण क्षेत्रों में स्थित हैं। इन जंगलों में ठंड के मौसम के साथ-साथ गहन धूप का अनुभव होता है। इन वनों के बड़े भाग पर कोनीफर्स का कब्जा है

  1. बागान वन

ये मूल रूप से बड़े खेत हैं जो कॉफी, चाय, गन्ना, तेल हथेलियों, कपास और तेल के बीज जैसे नकदी फसलों का उत्पादन करते हैं। बागन वन के जंगलों में लगभग 40% औद्योगिक लकड़ी का उत्पादन होता है। ये टिकाऊ लकड़ी और फाइबर के उत्पादन के लिए विशेष रूप से जानी जाती हैं।

  1. भूमध्य वन

ये जंगल भूमध्यसागरीय, चिली, कैलिफ़ोर्निया और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के समुद्र तट के आसपास स्थित हैं। इनमें सॉफ्टवुड और दृढ़ लकड़ी के पेड़ों का मिश्रण है और लगभग सभी पेड़ सदाबहार हैं।

  1. शंकुधारी वन

ये जंगल ध्रुवों ​​के पास पाए जाते हैं मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध और वर्ष भर में ठंड और हवा के मौसम का अनुभव करते हैं। ये दृढ़ लकड़ी और शंकुवृक्ष के पेड़ों के विकास का अनुभव करते हैं। पाइंस, फर, हेमलॉक्स और स्प्रूस का विकास यहां एक आम दृश्य है। शंकुवृक्ष के पेड़ सदैव सदाबहार होते हैं और यहां सूखे जैसी स्थिति को अच्छी तरह से अनुकूलित किया जाता है।

निष्कर्ष

वन प्रकृति का एक सुंदर सृजन हैं। हमारे ग्रह के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न प्रकार के वनों को शामिल किया गया है जो विभिन्न पौधों और जानवरों के लिए घर हैं और कई लोगों के लिए आजीविका के साधन हैं।


 

जंगल/ वन पर निबंध – 5 (600 शब्द) (Essay on Forest in Hindi 600 words)

प्रस्तावना

पेड़ों, पौधों और झाड़ियों के साथ कवर एक विशाल भूमि और जंगली जानवरों की विभिन्न प्रजातियों के लिए घर वन के रूप में जाना जाता है। जंगल पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। वे ग्रह की जलवायु को बनाए रखने में मदद करते हैं, वातावरण को शुद्ध करते हैं, वाटरशेड की रक्षा करते हैं। वे जानवरों के लिए एक प्राकृतिक आवास और लकड़ी के एक प्रमुख स्रोत हैं जो कि हमारे दिन-प्रतिदिन जीवन में उपयोग किए जाने वाले कई उत्पादों के उत्पादन के लिए उपयोग की जाती है।

भारत – सबसे बड़ा वन वाला देश

भारत ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, कनाडा, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, रूसी संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनेशिया और सूडान के साथ दुनिया के शीर्ष दस वन-समृद्ध देशों में से एक है। भारत के साथ ये देश दुनिया के कुल वन क्षेत्र का लगभग 67% हिस्सा है।

अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र उन राज्यों में से हैं जिनके पास भारत में सबसे बड़ी वन क्षेत्र भूमि है।

भारत में शीर्ष वन

भारत कई हरे-भरे वनों के लिए जाना जाता है। इनमें से कई को पर्यटक स्थलों में बदल दिया गया है। दूर-दूर के लोग इस यात्रा पर जंगल का अनुभव करते हैं और शांति पाते हैं। यहां देश के कुछ शीर्ष वनों पर एक नजर डाली गई है:

  1. सुंदरबन, पश्चिम बंगाल

देश में सबसे आकर्षक वनों की बात करे तो सुंदरबन पश्चिम बंगाल में जंगलों की सूची में सबसे ऊपर आता है। यह सफेद बाघ का घर है जो शाही बंगाल टाइगर का एक प्रकार है।

  1. गिर वन, गुजरात

गुजरात के जूनागढ़ जिले में 1,412 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में जंगल फैले हुए हैं। गिर जंगल एशियाटिक शेर के लिए घर है।

  1. जिम कॉर्बेट, उत्तराखंड

वर्ष 1936 में स्थापित यह जगह वन्यजीव प्रेमियों के लिए अनुकूल है। यह देश में ऐसे वन हैं जो दुनिया भर के पर्यटकों की अधिकतम संख्या को आकर्षित करने के लिए जाने जाते हैं।

  1. रणथंबोर, राजस्थान

रणथंबोर राजस्थान में सवाई माधोपुर के पास स्थित है। यह तेंदुए, बाघ और मगरमच्छ का घर है। यह पदम् तालाओ झील के लिए भी जाना जाता है जिसमें प्रचुर मात्रा में लिली पाए जाते है।

  1. खासी वन, मेघालय

उत्तर-पूर्व भारत में यह जगह अपनी समृद्ध हरियाली के लिए जानी जाती है। खासी जंगलों को वर्षा की उच्च मात्रा प्राप्त होती है और हर साल हरा-भरा रहता है।

भारत में वानिकी

भारत में वानिकी एक प्रमुख ग्रामीण उद्योग है। यह बड़ी संख्या में लोगों के लिए आजीविका का एक साधन है। भारत संसाधित वन उत्पादों की एक विशाल श्रृंखला का उत्पादन करने के लिए जाना जाता है। इनमें केवल लकड़ी से बने उत्पाद शामिल नहीं होते बल्कि गैर-लकड़ी के उत्पादों की पर्याप्त मात्रा भी शामिल होती हैं। गैर-लकड़ी के उत्पादों में आवश्यक तेल, औषधीय जड़ी-बूटियों, रेजिन, फ्लेवर, सुगंध और सुगंध रसायन, गम्स, लेटेक्स, हस्तशिल्प, अगरबत्तियां और विभिन्न सामग्री शामिल है।

वनों की कटाई की समस्या

वनों की कटाई जंगल के बड़े हिस्से में इमारतों के निर्माण जैसे उद्देश्यों के लिए पेड़ों को काटने की प्रक्रिया है। इस जमीन पर फिर से पेड़ों को लगाया नहीं जाता।

आंकड़े बताते हैं कि औद्योगिक युग के विकास के बाद से दुनिया भर के लगभग आधे जंगलों को नष्ट कर दिया गया है। आने वाले समय में यह संख्या बढ़ने की संभावना है क्योंकि उद्योगपति लगातार निजी लाभ के लिए वन भूमि का उपयोग कर रहे हैं। लकड़ी और वृक्षों की अन्य घटकों से विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन के लिए बड़ी संख्या में वृक्षों को भी काटा जाता है।

वनों की कटाई के कारण पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इन्हीं कारणों से मिट्टी का क्षरण, जल चक्र का विघटन, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता का नुकसान होता है।

निष्कर्ष

वन मानव जाति के लिए एक वरदान है। भारत को विशेष रूप से कुछ सुंदर जंगलों का आशीष मिला है जो पक्षियों और जानवरों की कई दुर्लभ प्रजातियों के लिए घर हैं। वनों के महत्व को पहचाना जाना चाहिए और सरकार को वनों की कटाई के मुद्दे पर नियंत्रण के लिए उपाय करना चाहिए।

 

बाढ़ पर निबंध -Essay On Flood -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विनाश का कारण पानी की भारी मात्रा में अतिप्रवाह है। हर साल दुनिया भर में कई क्षेत्रों को बाढ़ की समस्या का सामना करना पड़ता है।

बाढ़ अत्यधिक बारिश और उचित जल निकासी व्यवस्था की कमी के कारण होती है। बाढ़ की गंभीरता हर क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है और उसी के कारण होने वाला विनाश भी अलग-अलग होता है। जब भी आप को इस विषय पर निबंध लिखने की आवश्यकता होती है तो इस विषय पर आपकी सहायता करने के लिए हमने अलग-अलग लंबाई के निबंध उपलब्ध करवाएं हैं। आप अपनी आवश्यकता के अनुसार किसी भी बाढ़ पर निबंध को चुन सकते हैं:

बाढ़ पर निबंध (Essay on Flood in Hindi)

बाढ़ पर निबंध – 1 (200 शब्द)  Essay on Flood in hindi 200 words

बाढ़ ज्यादातर उन क्षेत्रों में आती है जहां अत्यधिक बारिश और ख़राब जल निकासी व्यवस्था होती है। बाढ़ के अन्य कारणों में नदियों और महासागरों से पानी का बहना, बाँध के टूटने के कारण मैदानों में अत्यधिक पानी बहना, ग्लेशियरों के अचानक पिघलने के कारण पानी की अत्यधिक मात्रा में वृद्धि शामिल है। तटीय क्षेत्रों में तूफान और सूनामी बाढ़ का कारण बनते हैं। अन्य प्राकृतिक आपदाओं के रूप में बाढ़ भी विनाश का बड़ा कारण हो सकता है।

दुनिया भर के कई कस्बें और शहर भारी बाढ़ से पीड़ित हैं जिससे लोगों और जानवरों को नुकसान पहुँचा है जिसके परिणामस्वरूप संपत्ति और अन्य मूल्यवान संपत्तियों और मिट्टी तथा पौधों का नुकसान हुआ है। किसान भी बाढ़ से प्रभावित होते हैं क्योंकि इस मौसम की स्थिति के कारण उनकी फसल बर्बाद हो जाती है। एक विशेष स्थान पर कई दिनों के लिए इक्कठा पानी भी विभिन्न रोगों के फैलने का कारण होता है। जब बाढ़ से हालात गंभीर होते हैं तो स्कूल और कार्यालय बंद हो जाते हैं और इससे लोगों के सामान्य जीवन को परेशानी होती है। गंभीर बाढ़ का सामना करने वाले स्थानों को सामान्य होने के लिए महीनों लगते हैं।

विडंबना यह है कि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जो अक्सर बाढ़ से प्रभावित होते हैं और भले ही सरकार इस समस्या से अवगत हो फिर भी इसे दूर करने के लिए उचित उपाय नहीं किए जा रहे हैं। सरकार को इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए अच्छी जल निकासी व्यवस्था और जल भंडारण प्रणाली का निर्माण करना चाहिए।


 

बाढ़ पर निबंध – 2 (300 शब्द) Essay on Flood in hindi 300 words

प्रस्तावना

भारी बारिश के कारण होने वाली बाढ़ के पानी की वजह से बीमारियों से होने के घातक परिणाम सामने आए हैं। इससे जीवन का नुकसान, बीमारियों में वृद्धि, मूल्य वृद्धि, आर्थिक नुकसान और अन्य मुद्दों के अलावा पर्यावरण का विनाश होता है। बाढ़ उनके प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करती है।

बाढ़ के प्रकार

कई बार बाढ़ पर कुछ दिनों में काबू पाया जा सकता है जबकि कई बार इस पर हफ़्तों में काबू पाया जाता है जिससे उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के जीवन पर एक बुरा प्रभाव पड़ता है। यहां विभिन्न प्रकार की बाढ़ों पर एक नजर डाली गई है:

  1. धीमी गति से स्थापित बाढ़

इस तरह की बाढ़ तब होती है जब नदियों के पानी की मात्रा अत्यधिक हो जाती है और आसपास के इलाकें इससे प्रभावित होते हैं। इस तरह की बाढ़ धीरे-धीरे विकसित होती है और कुछ दिनों से लेकर कुछ सप्ताह तक रह सकती है। यह कई किलोमीटर तक फैल जाती है और इससे अधिकतर निचले इलाकों पर प्रभाव पड़ता है। ऐसे क्षेत्रों में बाढ़ के कारण इक्कठे पानी से जान-माल की संपत्ति का नुकसान हो सकता है और विभिन्न रोग भी पनप सकते हैं।

  1. तेज़ गति से स्थापित बाढ़

इनका निर्माण होने में थोड़ा समय लगता है और ऐसी बाढ़ एक या दो दिन तक रह सकती है। इस तरह की बाढ़ बेहद विनाशकारी भी हैं। हालांकि ज्यादातर लोगों को इन के बारे में चेतावनी भी दी जाती है और इससे पहले कि स्थिति बदतर हो जाए इनसे बचने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसी जगहों पर छुट्टी की योजना बनाने वाले पर्यटकों को अपनी योजना रद्द करनी चाहिए और अगर समय हो तो इस स्थिति से बचने की कोशिश करनी चाहिए।

  1. अचानक बनती बाढ़

इस तरह की बाढ़ ज्यादातर समय की एक छोटी अवधि के भीतर उत्पन्न होती है जैसे कुछ घंटे या मिनट। यह ज्यादातर भारी बारिश के कारण, बर्फ या बांध के टूटने के कारण होती है। इस तरह की बाढ़ को सबसे ज्यादा घातक माना जाता है और इससे बड़े पैमाने पर विनाश भी हो सकता है क्योंकि यह लगभग अचानक होती है और लोगों को सावधानी बरतने के लिए कोई समय नहीं मिलता है।

निष्कर्ष

प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ दिन-प्रतिदिन के कार्य को बाधित करती है। बाढ़ इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विभिन्न समस्याएं पैदा करती है। भारी बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में जन-जीवन को फिर से पुनर्निर्माण करने में महीनों लगते हैं और कई बार तो सालों-साल भी।

बाढ़ पर निबंध – 3 (400 शब्द) Essay on Flood in Hindi 400 words

प्रस्तावना

बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है जो किसी क्षेत्र में अत्यधिक पानी के जमा होने के कारण होती है। यह अक्सर भारी बारिश का नतीजा है। कई क्षेत्रों को नदी या समुद्र के पानी के स्तर के बढ़ने के कारण, बांधों के टूटने के कारण और बर्फ की पिघलने के कारण बाढ़ का सामना करना पड़ता है। तटीय क्षेत्रों में तूफान और सूनामी इस स्थिति का कारण बनते हैं।

दुनिया भर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र

विश्व भर में कई क्षेत्रों में लगातार बाढ़ होने की संभावना है। गंभीर और लगातार बाढ़ का सामना करने वाले दुनिया भर के शहरों में भारत में मुंबई और कोलकाता, चीन में गुआंगजो, शेनज़न और टियांजिन, एक्वाडोर, न्यू यॉर्क, न्यू जर्सी, हो ची मिन्ह सिटी, वियतनाम, मियामी और न्यू ऑरलियन्स शामिल हैं।  पहले भी इन क्षेत्रों में बाढ़ के कारण विनाश होते रहें हैं।

बाढ़ के कारण उत्पन्न समस्या को कैसे नियंत्रित करें?

मानव जीवन को बाधित करने से लेकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने तक – बाढ़ के कई नकारात्मक नतीजे हैं जिनसे निपटना मुश्किल है। इस प्रकार बाढ़ को नियंत्रित करना बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस समस्या को नियंत्रित करने के कुछ तरीके यहां दिए गए हैं:

  1. बाढ़ चेतावनी सिस्टम

बेहतर बाढ़ चेतावनी प्रणालियों को स्थापित करना यह समय की आवश्यकता है ताकि लोगों को आगामी समस्या के बारे में सही समय पर चेतावनी दी जा सके और उनके पास अपने और अपने सामान की रक्षा करने के लिए पर्याप्त समय हो।

  1. बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में भवनों का निर्माण

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में इमारतों का बाढ़ के पानी के स्तर से ऊपर निर्माण किया जाना चाहिए ताकि संपत्ति के नुकसान के साथ-साथ वहां रहने वाले लोगों को भी नुकसान से बचाया जा सके।

  1. जल भंडारण प्रणाली की शुरुआत

बारिश के पानी को पुन: उपयोग करने के लिए सरकार को जल भंडारण प्रणालियों के निर्माण में निवेश करना चाहिए। इस तरह से मैदानी इलाकों में पानी के अतिप्रवाह होने और बाढ़ का कारण बनने की बजाए पानी का अत्यधिक इस्तेमाल किया जा सकता है।

  1. ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत बनाएं

बाढ़ के मुख्य कारणों में से एक ख़राब जल निकासी व्यवस्था है। जल निकासी से बचने के लिए अच्छी जल निकासी प्रणाली होना जरूरी है जिससे बाढ़ की स्थिति ना उत्पन्न हो।

  1. बाढ़ बैरियर स्थापित करें

उन क्षेत्रों में बाढ़ बैरियर स्थापित किए जाने चाहिए जो बाढ़ से प्रभावित हैं। पानी निकल जाने के बाद इन्हें हटाया जा सकता है।

निष्कर्ष

हालांकि बारिश की घटनाएं, बर्फ-पहाड़ों का पिघलना, जल निकासियों और तूफानों को रोकना मुश्किल हो सकता है लेकिन इनमें से अधिकांश मामलों में पहले एतियात बरती जा सकती है और सरकार जल निकासी सुनिश्चित करने के लिए उपाय कर सकती है जिससे बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती हैं। यहाँ ऊपर साझा किए गए कुछ तरीकों को नियोजित करके बाढ़ की स्थिति से बचा जा सकता है।

बाढ़ पर निबंध – 4 (500 शब्द) Essay on Flood in Hindi 500 words

प्रस्तावना

बाढ़ की स्थिति भारी बारिश, नदियों और महासागरों जैसे जल निकायों से पानी के अतिप्रवाह, ग्लेशियर पिघलने, तूफान और तटीय किनारों के साथ तेज हवाओं के कारण बनती हैं। जब अत्यधिक मात्रा में जल निकलने के लिए अच्छी जल निकासी प्रणाली की कमी होती है तब यह पानी बाढ़ का कारण बनता है

बाढ़ के परिणाम

बाढ़ का पानी प्रभावित क्षेत्र के सामान्य कामकाज को बाधित करता है गंभीर बाढ़ के कारण बड़े पैमाने पर विनाश हो सकता है। यहां बताया गया है कि धरती पर बाढ़ कैसे प्रभावित करती है:

  1. जीवन को ख़तरा

बहुत से लोग और जानवर गंभीर बाढ़ के कारण अपने जीवन से हाथ धो बैठते हैं। इससे कई लोग घायल और विभिन्न रोगों से संक्रमित होते हैं। कई जगहों पर मच्छरों और अन्य कीड़ों के प्रजनन के लिए जमा होने वाला पानी मलेरिया और डेंगू जैसी विभिन्न बीमारियों का कारण है। हाल ही में पेचिश, न्यूमोनिक प्लेग और सैन्य बुखार के मामलों में वृद्धि हुई है।

  1. बिजली कटौती

आज कल बिजली और पानी की आपूर्ति में बाधा आई है जिससे आम जनता की समस्याओं में वृद्धि हो रही है। उन स्थानों पर करंट पकड़ने का जोखिम भी है जहां बिजली की आपूर्ति बरकरार है।

  1. आर्थिक नुकसान

बहुत से लोग अपने घरों और अन्य संपत्तियों जैसे कार, मोटरसाइकिल बाढ़ में खो देते हैं जिन्हें ख़रीदने में सालों लगते हैं। यह सरकार के लिए चिंताजनक विषय है क्योंकि संपत्ति बचाव अभियान के लिए कई पुलिसकर्मियों, फायरमैनों और अन्य अधिकारियों को तैनात करना पड़ता है। गंभीर बाढ़ के मामलों में प्रभावित क्षेत्रों को फिर से तैयार करने में कई साल लगते हैं।

  1. कीमत का बढ़ना

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में माल की आपूर्ति कम हो जाती है क्योंकि सड़क परिवहन वहां तक ​​नहीं पहुंच सकता है। इसके अलावा इन क्षेत्रों में संग्रहीत सामान भी बाढ़ के कारण खराब हो जाते हैं। आपूर्ति की कमी है और मांग अधिक है और इस प्रकार वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी होती है।

  1. मृदा अपरदन

जब मूसलधार बारिश होती है तो मिट्टी पूरे पानी को अवशोषित नहीं कर पाती और इससे अक्सर मिट्टी का क्षरण होता है जिसके भयानक परिणाम होते हैं। मिट्टी के क्षरण के अलावा मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।

  1. पेड़-पौधें

बाढ़ सिर्फ मनुष्यों और जानवरों के लिए ही खतरा नहीं है बल्कि वनस्पति के लिए भी ख़तरा है। भारी बारिश अक्सर गड़गड़ाहट, बिजली और तेज हवाओं के साथ होती है। तूफान पेड़ों को उखाड़ फेंकने का एक कारण है। इसके अलावा बाढ़ के दौरान फसल क्षतिग्रस्त हो जाती है और कई अन्य पौधें भी नष्ट हो जाते हैं।

भारत में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र

साल-दर-साल भारत में कई क्षेत्रों को बाढ़ की समस्या का सामना करना पड़ता है। देश में इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित प्रमुख क्षेत्रों में उत्तर बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल, मुंबई, महाराष्ट्र, पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों, तटीय आंध्र प्रदेश और उड़ीसा, ब्रह्मपुत्र घाटी और दक्षिण गुजरात सहित अधिकांश गंगा मैदान हैं। बाढ़ के कारण इन जगहों को अतीत में गंभीर नुकसान पहुंचा है और अभी भी ख़तरे का सामना कर रहे हैं।

निष्कर्ष

बाढ़ प्राकृतिक आपदाओं में से एक है जो विभिन्न क्षेत्रों में बड़े विनाश का कारण है। यह समय है कि भारत सरकार को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए और इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए मजबूत उपायों का पालन करना चाहिए।


 

बाढ़ पर निबंध – 5 (600 शब्द) Essay on Flood in Hindi 600 words

प्रस्तावना

बाढ़ तब होती है जब एक विशेष सूखे क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा के कारण ज़मीन पर बहने वाले पानी की मात्रा बढ़ जाती है। नदी, महासागर और झील जैसे जल निकायों से पानी के अतिप्रवाह के कारण यह भी हो सकता है। बाढ़ जन विनाश के कारण जानी जाती है। कुछ क्षेत्रों में विनाश का कारण इतना गंभीर है कि नुकसान की मरम्मत के लिए कई साल लगते हैं।

बाढ़ के कारण

बाढ़ के विभिन्न कारणों पर एक नजर इस प्रकार है:

  1. भारी बारिश

बाढ़ की स्थिति ख़राब जल निकासी प्रणाली के कारण हो सकती है। कई बार थोड़ी अवधि की भारी बारिश भी बाढ़ का कारण बन सकती है जबकि दूसरी तरफ कई दिनों तक चलने वाली हल्की बारिश भी बाढ़ जैसी स्थिति बना सकती है।

  1. बर्फ का पिघलना

सर्दियों के मौसम के दौरान जो पहाड़ बर्फ से ढंके होते है उनका पिघलना शुरू हो जाता है क्योंकि तापमान बढ़ जाता है। बर्फ का अचानक पिघलना तापमान बढ़ने के कारण होता है और इसके परिणामस्वरूप मैदानी इलाकों में पानी की मात्रा बढ़ जाती है। जिन क्षेत्रों में अत्यधिक पानी की मात्रा है वहां उचित जल निकासी प्रणाली नहीं होने के कारण बाढ़ की स्थिति बन जाती है। इसे प्रायः बर्फ से पिघलने वाली बाढ़ के रूप में जाना जाता है।

  1. बाँध का टूटना

ऊंचाई से पानी बहने के लिए बांधों को बनाया जाता है। पानी से बिजली बनाने के लिए प्रोपेल्लर्स का इस्तेमाल किया जाता है। कई बार बाँध टूट जाते हैं क्योंकि वे बड़ी मात्रा में पानी नहीं पकड़ पाते जिसके फलस्वरूप आसपास के इलाकों में बाढ़ आ जाती है। कभी-कभी अत्यधिक जल बांध से जानबूझकर जारी किया जाता है ताकि इसे टूटने से रोका जा सके। इसका परिणाम बाढ़ भी हो सकता है।

  1. जल निकायों का अतिप्रवाह

जल निकायों जैसे नदियाँ आदि से पानी बार-बार बह निकलने से आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। नदियों के नजदीक निचले इलाके इस समय के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं क्योंकि जल नदी से नीचे की ओर बहता है।

  1. तटीय क्षेत्र में हवाएं

मजबूत हवाओं और तूफानों में समुद्र के पानी को सूखे तटीय इलाकों में ले जाने की क्षमता होती है जो की बाढ़ का कारण बनता है। इससे तटीय क्षेत्रों में गंभीर क्षति हो सकती है। तूफान और सुनामियों को तटीय भूमि में बड़ी तबाही का कारण जाना जाता है।

ग्लोबल वार्मिंग: बाढ़ का मुख्य कारण

हाल के दिनों में बाढ़ की आवृत्ति बढ़ी है। ऐसा कहा जाता है कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते औसत समुद्री तापमान में काफी बढ़ोतरी हुई है और इससे कैरिबियन में उष्णकटिबंधीय तूफान की बढ़ती दर और कठोरता में वृद्धि हुई है। ये तूफान उनके रास्ते में देशों में भारी बारिश का कारण है। ग्लोबल वार्मिंग, जो वायुमंडल के तापमान में वृद्धि पैदा कर रहा है, ग्लेशियरों और बर्फ के पिघलने का भी एक कारण है जो फिर से कई क्षेत्रों में बाढ़ का कारण है। कहा जाता है कि आने वाले समय में ध्रुवीय बर्फ पर फिर से बुरा प्रभाव पड़ेगा जिससे स्थिति खराब होने की संभावना है।

पृथ्वी पर समग्र जलवायु परिस्थितियों में एक बड़ा परिवर्तन आया है और ग्लोबल वार्मिंग को इस परिवर्तन का कारण माना जाता है। जहाँ कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बाढ़ का अनुभव होता है वहीँ अन्य लोग सूखे का अनुभव करते हैं।

निष्कर्ष

यद्यपि हम बारिश या ग्लेशियरों को पिघलने से नहीं रोक सकते पर हम निश्चित रूप से बाढ़ के पानी से निपटने के लिए अच्छी जल निकासी व्यवस्था का निर्माण कर सकते हैं। सालभर कई देशों में जैसे सिंगापुर के अधिकांश हिस्सों में भारी वर्षा होती है पर वहां अच्छी जल निकासी प्रणाली है। भारी बारिश के दिनों में भी वहां समस्या नहीं होती। बाढ़ की समस्या और प्रभावित क्षेत्रों में होने वाली क्षति से बचने के लिए भारत सरकार को भी अच्छी जल निकासी व्यवस्था का निर्माण करना चाहिए।

सूखा पर निबंध -Essay On Drought -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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सूखा वह स्थिति है जब लंबे समय तक वर्षा नहीं होती है। देश के कई हिस्सों में सूखा की घटना एक सामान्य बात है। इस स्थिति के परिणाम कठोर हैं और कई बार तो अपरिवर्तनीय हैं। सूखा की स्थिति तब होती है जब दुनिया के कुछ हिस्से महीनों के लिए बारिश से वंचित रह जाते हैं या फिर पूरे साल के लिए भी। ऐसे कई कारण हैं जो सूखा जैसी स्थितियों को विभिन्न भागों में पैदा करते हैं और स्थिति को गंभीर बनाते हैं। इस विषय के साथ आपकी सहायता करने के लिए हमने यहां सूखा पर विभिन्न लंबाई के कुछ छोटे और लंबे निबंध उपलब्ध करवाएं हैं। आप नीचे दिए गए किसी भी निबंध को चुन सकते हैं:

सूखा पर निबंध (Essay on Drought in Hindi) 

सूखा पर निबंध – 1 (200 शब्द) Essay on Drought in Hindi 200 words- Sukha par nibandh-

सूखा, जो किसी विशेष क्षेत्र में लंबे समय तक अनुपस्थित या कम बारिश से चिह्नित है, अक्सर ग्लोबल वार्मिंग, वनों की कटाई और कई अन्य मानव गतिविधियों सहित विभिन्न कारणों के कारण होता है। इस जलवायु स्थिति से पर्यावरण और साथ ही जीवित प्राणियों पर भी विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है। सूखा के कुछ प्रभाव में फसलों की विफलता, वित्तीय हानि, मूल्य वृद्धि और मृदा की गिरावट शामिल हैं।

कई भारतीय राज्य सूखा से प्रभावित हुए हैं जिससे फसल का सामूहिक विनाश और समाज के सामान्य कामकाज में बाधा उत्पन्न हो सकती है। कई हिस्सों में भूख से मरने के कारण कई लोगों की मौत हो गई। ऐसे क्षेत्रों में लोगों द्वारा सही गई प्रतिकूल समस्याओं को देखते हुए भारत सरकार ने विभिन्न सूखा राहत योजनाओं को शुरू किया है लेकिन इस समस्या को नियंत्रित करने और उसके बाद के प्रभावों से निपटने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत है।

इस दिशा में सुझाए गए कुछ समाधान वर्षा जल संचयन, रीसाइक्लिंग और पानी का पुन: उपयोग करना, वनों की कटाई को नियंत्रित करना, समुद्री जल अलवणीकरण, बादलों की सीडिंग, अधिक पौधों और पेड़ों को लगाना, पानी की समग्र बर्बादी रोकना आदि। हालांकि इनमें से अधिकतर कार्य किये नहीं जा सकते हैं। सामान्य जनता को इन कोशिशों का समर्थन करना चाहिए है। इस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को इस समस्या को रोकने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।


 

सूखा पर निबंध – 2 (300 शब्द) Essay on Drought in Hindi 300 words – Sukha par nibandh-

सूखा, जिसका परिणाम पानी की कमी से होता है, मुख्य रूप से बारिश की कमी के कारण होता है स्थिति समस्याग्रस्त है और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए घातक साबित हो सकती है। यह विशेष रूप से किसानों के लिए एक अभिशाप है क्योंकि यह उनकी फसलों को नष्ट कर देता है। सतत सूखा जैसी स्थिति में भी मिट्टी कम उपजाऊ हो जाती है।

सूखा के कारण

कई कारक हैं जो सूखा का आधार बनते हैं। यहां इन कारणों को विस्तार से देखें:

  1. वनों की कटाई

वनों की कटाई को वर्षा की कमी के मुख्य कारणों में से एक कहा जाता है जिससे सूखा की स्थिति उत्पन्न होती है। पानी के वाष्पीकरण, भूमि पर पर्याप्त पानी की ज़रूरत और बारिश को आकर्षित करने के लिए भूमि पर पेड़ों और वनस्पतियों की पर्याप्त मात्रा की आवश्यकता है। वनों की कटाई और उनके स्थान पर कंक्रीट की इमारतों के निर्माण ने पर्यावरण में एक प्रमुख असंतुलन का कारण बना दिया है। यह मिट्टी की पानी की पकड़ की क्षमता को कम करता है और वाष्पीकरण बढ़ाता है। ये दोनों कम वर्षा का कारण है।

  1. कम सतह जल प्रवाह

नदियां और झीलें दुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों में सतह के पानी के मुख्य स्रोत हैं। अत्यधिक गर्मियों या विभिन्न मानव गतिविधियों के लिए सतह के पानी के उपयोग के कारण इन स्रोतों में पानी सूख जाता है जिससे सूखा उत्पन्न होता है।

  1. ग्लोबल वॉर्मिंग

पर्यावरण पर ग्लोबल वार्मिंग का नकारात्मक प्रभाव के बारे में सभी को पता है। अन्य मुद्दों में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन है जिसमें पृथ्वी के तापमान में वृद्धि के परिणामस्वरूप वाष्पीकरण में वृद्धि हुई है। उच्च तापमान भी जंगल की आग का कारण है जो सूखा की स्थिति को बढ़ावा देता है।

इसके अलावा अत्यधिक सिंचाई भी सूखा के कारणों में से एक है क्योंकि यह सतह के पानी को खत्म कर देती है।

निष्कर्ष

हालांकि सूखा का कारण काफी हद तक हम सभी को ज्ञात हैं और यह ज्यादातर जल संसाधनों और गैर-पर्यावरण अनुकूल मानव गतिविधियों के दुरुपयोग का परिणाम है। इस समस्या को रोकने के लिए कुछ ज्यादा नहीं किया जा रहा है। यह समय है कि इस वैश्विक मुद्दे को दूर करने के लिए विभिन्न देशों की सरकारों को हाथ मिलाना चाहिए।

सूखा पर निबंध – 3 (400 शब्द) Essay on Drought in Hindi 400 words – Sukha par nibandh-

सूखा तब होता है जब किसी क्षेत्र को वर्षा की औसत मात्रा से कम या ना के बराबर पानी प्राप्त होता है जिसके कारण पानी की कमी, फसलों की विफलता और सामान्य गतिविधियों का विघटन है। ग्लोबल वार्मिंग, वनों की कटाई और इमारतों के निर्माण जैसे विभिन्न कारकों ने सूखा को जन्म दिया है।

सूखा के प्रकार

कुछ क्षेत्रों को लंबे समय तक बारिश के अभाव में चिह्नित किया जाता है, दूसरे क्षेत्रों को वर्ष में औसत मात्रा से कम मिलता है और कुछ हिस्सों में सूखा का सामना कर सकते हैं – इसलिए जगह और समय-समय पर सूक्ष्मता और सूखा का प्रकार स्थान से भिन्न होता है। यहां विभिन्न प्रकार के सूखों पर एक नज़र है:

  1. मौसम संबंधी सूखा

जब किसी क्षेत्र में एक विशेष अवधि के लिए बारिश में कमी आती है – यह कुछ दिनों, महीनों, मौसम या वर्ष के लिए हो सकता है – यह मौसम संबंधी सूखा से प्रभावित होता है। भारत में एक क्षेत्र को मौसम संबंधी सूखा से प्रभावित तब माना जाता है जब वार्षिक वर्षा औसत बारिश से 75% कम होती है।

  1. हाइड्रोलॉजिकल सूखा

यह मूल रूप से पानी में कमी के साथ जुड़ा हुआ है। हाइड्रोलॉजिकल सूखा अक्सर दो लगातार मौसम संबंधी सूखा का परिणाम होता है। ये दो श्रेणियों में विभाजित हैं:

  • सतह जल सूखा
  • भूजल सूखा
  1. मृदा की नमी का सूखा

जैसा कि नाम से पता चलता है इस स्थिति में अपर्याप्त मिट्टी की नमी शामिल है जो कि फसलों की वृद्धि को बाधित करती है। यह मौसम संबंधी सूखा का नतीजा है क्योंकि इससे मिट्टी में पानी की आपूर्ति कम हो जाती है और वाष्पीकरण के कारण अधिक पानी का नुकसान होता है।

  1. कृषि सूखा

जब मौसम संबंधी या हाइड्रोलॉजिकल सूखा एक क्षेत्र में फसल उपज पर नकारात्मक प्रभाव डालता है तो इसे कृषि सूखा से प्रभावित माना जाता है।

  1. अकाल

यह सबसे गंभीर सूखा की स्थिति है। ऐसे क्षेत्रों में लोग भोजन तक पहुंच नहीं पाते हैं और बड़े पैमाने पर भुखमरी और तबाही होती है। सरकार को ऐसी स्थिति में हस्तक्षेप करने की ज़रूरत है और अन्य स्थानों से इन जगहों पर भोजन की आपूर्ति की जाती है।

  1. सामाजिक-आर्थिक सूखा

यह स्थिति तब होती है जब फसल की विफलता और सामाजिक सुरक्षा के कारण भोजन की उपलब्धता और आय में कमी आती है।

निष्कर्ष

सूखा एक कठिन स्थिति है खासकर अगर सूखा की गंभीरता ज्यादा है। हर साल सूखा की वजह से कई लोग प्रभावित होते हैं। जबकि सूखा की घटना एक प्राकृतिक घटना है हम निश्चित रूप से ऐसे मानवीय गतिविधियों को कम कर सकते हैं जो ऐसी स्थिति पैदा कर सकते हैं। इसके बाद के प्रभावों से निपटने के लिए सरकार को प्रभावी उपाय करने चाहिए।

सूखा पर निबंध – 4 (500 शब्द) Essay on Drought in Hindi 500 words – Sukha par nibandh-

सूखा, ऐसी स्थिति जिसमें ना के बराबर या बहुत कम वर्षा होती है, को मौसम संबंधी सूखा, अकाल, सामाजिक-आर्थिक सूखा, हाइड्रोलॉजिकल सूखा और कृषि सूखा सहित विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। जिस भी तरह का सूखा हो, यह प्रभावित क्षेत्रों के सामान्य कामकाज को परेशान करता है।

सूखा का प्रभाव

सूखा से प्रभावित इलाकों में आपदा से उबरने के लिए पर्याप्त समय लगता है खासकर अगर सूखा की गंभीरता अधिक होती है। सूखा में लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी बिगड़ती है और विभिन्न क्षेत्रों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। यहां नीचे बताया गया है कि इस प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले लोगों के जीवन पर कैसे प्रभाव डालता है:

  1. कृषि हानि

सूखा से कृषि और अन्य संबंधित क्षेत्रों पर एक बड़ा प्रभाव पड़ता है क्योंकि ये सीधे जमीन और सतह के पानी पर निर्भर होते हैं। फसल की पैदावार में कमी, पशुधन उत्पादन की कम दर, पौधे की बीमारी और हवा के क्षरण में वृद्धि सूखा के कुछ प्रमुख प्रभाव हैं।

  1. किसानों के लिए वित्तीय नुकसान

सूखा से किसान सबसे प्रभावित होते हैं। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में फसलों का उत्पादन नहीं होता है और किसानों की एकमात्र आय खेती के जरिए उत्पन्न होती है। इस स्थिति से किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। अपनी जरूरतों को पूरा करने के प्रयास में कई किसान ऋण ले लेते हैं जिसे बाद में उनके लिए चुका पाना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति के कारण किसानों के आत्महत्या के मामले भी आम हैं।

  1. वन्यजीवों का जोखिम

सूखा की वजह से जंगलों में आग के मामलों में वृद्धि हुई है और यह उच्च जोखिम वाले वन्यजीव आबादी को प्रभावित करता है। वनों को जलाने के कारण कई जंगली जानवर अपने जीवन से हाथ धो बैठते हैं जबकि कई अन्य अपना आश्रय खो देते हैं।

  1. कीमत बढ़ना

कम आपूर्ति और उच्च मांग के कारण विभिन्न अनाजों, फलों, सब्जियों की कीमतें बढ़ रही हैं। खाद्य पदार्थों जैसे कि जैम, सॉस और पेय पदार्थों विशेष रूप से फलों और सब्जियों से बने पदार्थों की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। कुछ मामलों में लोगों की मांगों को पूरा करने के लिए माल अन्य स्थानों से आयात किया जाता है। इसलिए कीमतों पर लगाए गए कर के मूल्य उच्च हैं। खुदरा विक्रेता जो किसानों को माल और सेवाओं की पेशकश करते हैं वे कम व्यापार के कारण वित्तीय नुकसान का सामना करते हैं।

  1. मिट्टी का क्षरण

लगातार सूखा और इसकी गुणवत्ता में कमी के कारण मिट्टी में नमी कम हो जाती है। कुछ क्षेत्रों में फसलों को प्राप्त करने की योग्यता हासिल करने के लिए बहुत समय लगता है।

  1. पर्यावरण पर समग्र प्रभाव

पर्यावरण में नुकसान पौधों और जानवरों की विभिन्न प्रजातियों के कारण होता है। वहां परिदृश्य गुणवत्ता और जैव विविधता का विघटन होता है। सूखा के कारण हवा और पानी की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। हालांकि इन स्थितियों में से कुछ अस्थायी अन्य लंबे समय तक चल सकते हैं या स्थायी भी हो सकते हैं।

  1. दाँव पर सार्वजनिक सुरक्षा

भोजन की कमी और विभिन्न वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने चोरी जैसे अपराधों को जन्म दिया है और इससे सार्वजनिक सुरक्षा दांव पर लग गई है। इससे आम तौर पर लोगों के बीच तनाव पैदा करने वाले पानी के उपयोगकर्ताओं के बीच संघर्ष भी हो सकता है।

सूखा से प्रभावित देश

कुछ ऐसे देशों में जो सूखा से ग्रस्त हैं उनमें अल्बानिया, अफगानिस्तान, अर्मेनिया, बहरीन, ब्राजील का पूर्वोत्तर भाग, बर्मा, क्यूबा, ​​मोरक्को, ईरान, चीन, बांग्लादेश, बोत्सवाना, सूडान, युगांडा, सोमालिया, इर्र्शिया और इथियोपिया शामिल हैं।

निष्कर्ष

सूखा सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। अकाल सूखा का सबसे गंभीर रूप है जो प्रभावित क्षेत्रों को मुख्यतः सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय नुकसान पहुँचाता है।


 

सूखा पर निबंध – 5 (600 शब्द) Essay on Drought in Hindi 600 words – Sukha par nibandh-

सूखा एक ऐसी स्थिति है जब कुछ क्षेत्रों को कम या ना के बराबर वर्षा के कारण पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। भारत कई समस्याओं का कारण रहा है। देश में ऐसे कई क्षेत्र हैं जो हर साल सूखा से प्रभावित होते हैं जबकि अन्य लोगों को कभी-कभी इस स्थिति का सामना करना पड़ता है। सूखा का कारण वनों की कटाई, ग्लोबल वार्मिंग और अपर्याप्त सतह के पानी जैसे विभिन्न कारकों के कारण होता है और प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन पर और पर्यावरण के सामान्य संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।

भारत में सूखा प्रभावित क्षेत्र

देश में कई प्रदेश सूखा से हर साल प्रभावित होते हैं। आंकड़े बताते हैं कि लगभग 12% जनसंख्या में रहने वाले देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग एक छठा हिस्सा सूखा प्रकोष्ठ है।

देश में सबसे अधिक सूखाग्रस्त राज्यों में से एक राजस्थान है। इस राज्य में ग्यारह जिले सूखा प्रभावित है। इन क्षेत्रों में कम या ना के बराबर बारिश होती है और भूजल का स्तर कम है। आंध्र प्रदेश राज्य में सूखा भी एक आम घटना है। हर साल यहां हर जिला सूखा से प्रभावित होता है।

यहां देश के कुछ अन्य क्षेत्रों पर एक नजर डाली गई है जो बार-बार सूखा का सामना करते हैं:

  • सौराष्ट्र और कच्छ, गुजरात
  • केरल में कोयम्बटूर
  • मिर्जापुर पठार और पलामू, उत्तर प्रदेश
  • कालाहांडी, उड़ीसा
  • पुरुलिया, पश्चिम बंगाल
  • तिरुनेलवेली जिला, दक्षिण वाइगई नदी, तमिलनाडु

सूखा के लिए संभव समाधान

  1. बारिश के पानी का संग्रहण

यह टैंकों और प्राकृतिक जलाशयों में वर्षा जल इकट्ठा करने और संग्रहीत करने की तकनीक है ताकि इसे बाद में इस्तेमाल किया जा सके। सभी के लिए वर्षा जल संचयन अनिवार्य होना चाहिए। इसके पीछे का विचार है उपलब्ध पानी को इस्तेमाल करना।

  1. सागर जल विलवणीकरण

सागर जल अलवणीकरण किया जाना चाहिए ताकि समुद्र में संग्रहीत पानी की विशाल मात्रा सिंचाई और अन्य कृषि गतिविधियों के प्रयोजन के लिए इस्तेमाल की जा सके। सरकार को इस दिशा में बड़ा निवेश करना चाहिए।

  1. पानी को रीसायकल करना

पुनः प्रयोग के लिए अपशिष्ट जल शुद्ध और पुनर्नवीनीकरण किया जाना चाहिए। यह कई मायनों में किया जा सकता है। बारिश बैरल को स्थापित करने, आरओ सिस्टम से अपशिष्ट जल एकत्र करने, शॉवर की बाल्टी का उपयोग, सब्जियां धोने के पानी को बचाने और बारिश के बगीचे बनाने से इस दिशा में मदद कर सकते हैं। इन तरीकों से एकत्र पानी पौधों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

  1. बादलों की सीडिंग

बादलों की सीडिंग मौसम को संशोधित करने के लिए की जाती है। यह वर्षा की मात्रा को बढ़ाने का एक तरीका है। पोटेशियम आयोडाइड, सिल्वर आयोडाइड और सूखी बर्फ बादल सीडिंग के प्रयोजन के लिए इस्तेमाल किये गये कुछ रसायन हैं। सरकार को सूखा ग्रस्त इलाकों से बचने के लिए बादलों की सीडिंग में निवेश करना चाहिए।

  1. अधिक से अधिक पेड़ लगायें

वनों की कटाई और कंक्रीट संरचनाओं का निर्माण दुर्लभ वर्षा के कारणों में से एक है। अधिक पेड़ लगाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। यह सरल कदम जलवायु की स्थिति को बदल सकता है और पर्यावरण में अन्य सकारात्मक बदलाव भी ला सकता है।

  1. पानी का सही उपयोग

प्रत्येक व्यक्ति को इस पानी की बर्बादी को रोकने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए ताकि कम वर्षा के दौरान भी पर्याप्त पानी उपलब्ध हो। सरकार को पानी के उपयोग पर नज़र रखने के लिए कदम उठाने चाहिए।

  1. अभियान चलाने चाहिए

सरकार को बारिश के पानी की बचत के लाभों के बारे में बताते हुए अभियान चलाना चाहिए, अधिक पेड़ लगाने चाहिए और अन्य उपाय करने चाहिए जिससे आम जनता सूखा से लड़ सके। यह जागरूकता फैलाने और समस्या को नियंत्रित करने का एक अच्छा तरीका है।

निष्कर्ष

हालांकि सरकार ने कुछ सूखा राहत योजनाएं बनाई हैं पर ये सूखा की गंभीर समस्या को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इस समस्या से बचने के लिए मजबूत कदम उठाना महत्वपूर्ण है। इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपना योगदान देना चाहिए।

अम्लीय वर्षा पर निबंध -Essay On Acid Rain -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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अम्लीय वर्षा पर निबंध -Essay On Acid Rain -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

एसिड रेन का तात्पर्य अत्यधिक अम्लीय बारिश से है जिससे पर्यावरण तथा वायुमंडल के संतुलन के बिगड़ने का खतरा पैदा हो जाता है। यह प्रमुख रूप से पौधों, जलीय प्राणियों, अवसंरचना आदि को प्रभावित करती है। अम्लीय होने का अर्थ है इसमें हाइड्रोजन के आयनों का स्तर ऊँचा होना, अर्थात् कम  पीएच। वास्तव में सामान्य वर्षा का जल पहले से ही थोड़ी अम्लीय होता है, जिसमें पीएच का स्तर 5.3-6.0 होता है। वर्षा के जल का अम्लीय होने के पीछे कारण है कार्बन डाइऑक्साइड और वायु में मौजूद पानी का कार्बोनिक एसिड बनाने के लिए एक साथ प्रतिक्रिया करना, जो खुद एक कमजोर एसिड है। जब बारिश के पानी का पीएच स्तर इस सीमा से नीचे आता है, तो यह एसिड रेन में तब्दील हो जाता है।

प्राकृतिक और मानव निर्मित स्रोत दोनों ही एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन यह मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन के दहन के कारण होती है जिससे सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOX) वातावरण में फैल जाती है। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) एक महत्वपूर्ण विषय है जिस पर छात्रों को अक्सर अनुच्छेद या निबंध लिखने के लिए कहा जाता है। हम यहां विभिन्न शब्द सीमाओं में एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) पर निबंध उपलब्ध करा रहे हैं। छात्र जिस शब्द सीमा से संबंधित निबंध का चुनाव करना चाहते है अपनी आवश्यकता के अनुसार कर सकते हैं।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) पर निबंध- Essay On Acid Rain- Essay in Hindi

You can get below some essays on Acid Rain in Hindi language for students in 200, 300, 400, 500 and 600 words.

अम्ल वर्षा पर निबंध 1 (200 शब्द) – Essay On Acid Rain- Essay in Hindi

हममें से अधिकांश बारिश को पर्यावरण के लिए ताज़ा और फायदेमंद मानते हैं, लेकिन वास्तव में सभी प्रकार की वर्षा अच्छी नहीं होती है। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) बारिश का ही एक प्रकार है जो पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक है।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) में बारिश, बर्फबारी, ओलों का गिरना, कोहरा या ओस शामिल हैं जिनमें एसिड प्रदूषक, विशेष रूप से सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक एसिड अधिक मात्रा में होते हैं। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन के कारण होती है, जो एसिड के उत्पादन के लिए वातावरण में मौजूद पानी के अणुओं के साथ प्रतिक्रिया करते हैं।

अम्लीय वर्षा

प्राकृतिक और मानव निर्मित हवा में एसिड की उपस्थिति के दो मुख्य कारण हैं। ज्वालामुखीय विस्फोट और क्षयकारी वनस्पति प्राकृतिक कारणों के उदाहरण है तथा सड़क परिवहन, चिमनी, औद्योगिकीकरण, जीवाश्म इंधनों के जलने से पैदा होता धुआं मानव निर्मित कारणों के उदाहरण है जिनसे एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होने का खतरा रहता है।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से जंगलों, पानी और मिट्टी पर खराब प्रभाव पड़ता है। इससे कीड़े और समुद्री जीव-रूपों के जीवन के साथ-साथ भवनों को नुकसान तथा मानव स्वास्थ्य को भी हानि पहुँचती है।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) नदियों, झीलों और अन्य जल निकायों को भी जहरीली बनाती है। कई इमारतों और स्मारकों के क्षतिग्रस्त होने के पीछे एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) ही मुख्य कारण है क्योंकि एसिड कैल्शियम कार्बोनेट पत्थर को काटता है।

हालाँकि एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के प्राकृतिक कारणों के संबंध में तो ज्यादा कुछ किया नहीं जा सकता परन्तु हम मानव निर्मित कारकों को कम करने के लिए कदम जरुर उठा सकते हैं। हमें ऊर्जा के साफ़ सुथरे तरीकों का चयन करना चाहिए, जैसे कि सौर ऊर्जा का उपयोग, प्राकृतिक संसाधनों का पुनः पुनर्चक्रण और अधिक से अधिक पेड़ लगाना।

अम्ल वर्षा पर निबंध 2 (300 शब्द) – Essay On Acid Rain- Essay in Hindi

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) का नाम सुनकर ऐसा लगता है की शुद्ध एसिड आकाश से गिर रहा है लेकिन नहीं, एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) वास्तव में तब होती है जब कुछ गैसें वायुमंडल में मौजूद नमी के साथ मिलकर मिश्रण बनाती हैं जो सामान्य बारिश के मुकाबले अधिक अम्लीय होती है। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) को बारिश, कोहरे, ओलों के साथ भारी वर्षा या बर्फ के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो कि जीवाश्म ईंधन और औद्योगिक दहन के परिणामस्वरूप हवा में मौजूद दूषित पदार्थों द्वारा अम्लीय बन गई है और जो ज्यादातर नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOX) और सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) का उत्सर्जन करती है।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) को निम्नानुसार वर्गीकृत किया जा सकता है: सूखी एसिड वर्षा या गीली एसिड वर्षा। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के दोनों रूप, गीले और शुष्क, बरसने से पहले हवा के द्वारा लंबी दूरी की यात्रा करते हैं। इन प्राकृतिक कारणों के अलावा चिमनी, उद्योग, वाहनों से निकलता प्रदूषण आदि एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के मानव निर्मित कारणों में शामिल है।

जब एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) गिरती है, तो यह नाटकीय रूप से निवास स्थान के अम्लता स्तर को बदल देती है जिससे गैर-जीवित के साथ-साथ जीवित चीजों की जीवन शैली में विनाश का खतरा हो सकता है।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के प्रभाव हर एक के लिए, जिसमें वनों सहित सभी वन्यजीव, जलीय जैव विविधता, मनुष्य, भवन, अवसंरचना, मिट्टी, ऐतिहासिक स्मारक शामिल है, हानिकारक हो सकते हैं।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) को केवल तभी रोका जा सकता है जब हम सभी मिल कर ऊर्जा का सही इस्तेमाल करें जैसे सौर ऊर्जा का ज्यादा से ज्यादा उपयोग, प्राकृतिक संसाधनों का रीसाइक्लिंग करना और वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करना। यदि हम सभी एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) को रोकने के लिए दृढ़ संकल्प ले तो इससे निश्चित रूप से पर्यावरण की स्थिति बेहतर और हवा में पीएच के संतुलित स्तर का निर्माण हो सकता है जो हमारे वातावरण के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।

अम्ल वर्षा पर निबंध 3 (400 शब्द) – Essay On Acid Rain- Essay in Hindi 400 words

एसिड रेन (गीली या शुष्क) मुख्यतः एक प्रकार का एक मिश्रण होती है जो बड़े पैमाने पर अपने अन्दर भारी मात्रा में नाइट्रिक एसिड और सल्फ्यूरिक एसिड का समावेश रखती हैं।

सरल शब्दों में कहें तो इसका मतलब है कि चलती कारों और औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकलते प्रदूषण की वजह से हवा में कुछ तत्वों की उपस्थिति बढ़ जाती है जिस कारण धरती पर एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होती है। अम्लता को पानी की बूंदों के पीएच संतुलन के आधार पर निर्धारित किया जाता है। हालांकि सामान्य वर्षा का जल 5.3-6.0 की पीएच श्रेणी के साथ थोड़ा अम्लीय है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और पानी (H2O) हवा में मौजूद कार्बोनीक एसिड को बनाने के लिए एक साथ प्रतिक्रिया करते हैं।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के कारण Reasons of acid rain

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होने में प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों ही कारण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ज्वालामुखी तथा क्षयकारी वनस्पति गैस से जहरीली गैस निकलती है जिससे एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) का निर्माण होता है। हालांकि अधिकांश गैस मानव निर्मित स्रोतों से जन्म लेती हैं, जैसे कि जीवाश्म ईंधन दहन।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) का प्रभाव effects of acid rain

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के कई नकारात्मक प्रभाव है, जिन्हें इस प्रकार वर्णित किया गया है:

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से विभिन्न श्वसन समस्याएँ जन्म लेती है जिससे साँस लेने में अधिक कठिनाई महसूस होती है।

  • एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से भवन और इमारतों की निर्माण सामग्री की क्षति तेज़ी से होती है तथा किए हुए पेंट का रंग भी जल्दी फ़ीका पड़ने लगता है।
  • एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से पत्थर की मूर्तियों पर भी बुरा असर पड़ता है जिस कारण वे समय से पहले पुरानी दिखनी लगती है तथा उनकी अहमियत और उनका मूल्य भी कम हो जाता है। उदाहरण के लिए ताजमहल के रंग-रूप पर एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) का खराब प्रभाव किसी से छुपा नहीं है।
  • एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के कारण पेड़ के चारों ओर की मिट्टी में एल्यूमीनियम की मात्रा अधिक हो जाती है जिसकी वजह से पेड़ की जड़ों को पानी सोखने में मुश्किल होती है। उदाहरण के लिए जर्मनी में “ब्लैक फॉरेस्ट” नामक एक जगह है। इसे यह नाम इसलिए मिला है क्योंकि एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) ने पेड़ों को काफी नुक्सान पहुँचाया जिस कारण पेड़ सूखी पत्तियों और शाखाओं में बदल गए।
  • हमें ऐसा लगता है कि एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) एक सामान्य सा मुद्दा है पर यह बड़ी आपदाओं को जन्म दे सकता है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) को कैसे बंद करें 

वैसे तो एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) को रोकने के कई तरीके हैं लेकिन एक रास्ता है जिसके द्वारा हम सभी इसे रोक सकते हैं वह है सौर ऊर्जा के स्वच्छ तरीके इस्तेमाल करके। जैसे कचरे के पुनर्चक्रण और इलेक्ट्रिक कारों के उपयोग को शुरू करना आदि मुख्य है। हालाँकि हवा को साफ करने के कई प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन अभी भी वातावरण को साफ करने के मनुष्य को बहुत लंबा रास्ता तय करना है। यदि मनुष्य पर्यावरण के बारे में अधिक सावधानी बरतता है तो एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से होने वाले नुकसानों की घटना को कम किया जा सकता है। लेकिन अगर वायुमंडलीय प्रदूषण को कम करने के हमारे प्रयासों में मजबूती नहीं हैं तो हमारे सभी प्राकृतिक संसाधनों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, जिससे पृथ्वी ग्रह पर जीवन के विलुप्त होने का खतरा पैदा हो जाएगा।


 

अम्ल वर्षा पर निबंध 4 (500 शब्द) – Essay On Acid Rain- Essay in Hindi 500 words

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) को बारिश या कोहरे के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो प्राकृतिक रूप से अम्लीय है।

मूल रूप से, एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) तब होती है जब कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOX) जैसी खतरनाक गैसें वर्षा के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया करती हैं। वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड के फैलने के पीछे कारखानों से तथा वाहनों से निकलता धुआं है।

जब ये गैसें वातावरण में प्रवेश करती हैं तो वे जंगली रसायनों और कार्बोनिक एसिड, सल्फ्यूरिक एसिड और नाइट्रिक एसिड जैसे एसिड बनाने के लिए शुद्ध बारिश के पानी से मिलकर रासायनिक प्रतिक्रिया करती हैं जिसके फलस्वरूप एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) का निर्माण होता है।

एसिड रेन के कारण

मुख्यतः प्रदूषण के बढ़ते स्तर के परिणामस्वरूप एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) उत्पन्न होती है। बड़े शहरों जैसे बेंगलुरु, मुंबई और नई दिल्ली आदि में एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होना काफी आम बात है। ऐसा तेजी से होता औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के कारण है। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) और उसके खतरनाक प्रभाव किसी एक निश्चित क्षेत्र तक ही सीमित नहीं हैं जैसे ही हवा चलती है, वह अपने साथ एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) में मौजूद खतरनाक रसायनों को दूर स्थानों तक ले जाती है। वैज्ञानिक भी इस बात से सहमत हैं कि तेल और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म इंधनों का जलना एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) का एक प्रमुख कारण है। इसलिए वे कारखाने जो ऑटोमोबाइल उद्योगों, पेपर उद्योगों और रासायनिक उद्योगों में जीवाश्म ईंधन का उपयोग करते हैं उन्हें हानिकारक गैसों के उत्सर्जन को कम करना चाहिए जिससे बारिश में एसिड की मौजूदगी की प्रतिशत कम हो जाएगी।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के प्रतिकूल प्रभाव

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के कई प्रतिकूल प्रभाव हैं जिनका वर्णन निम्नानुसार किया गया है:

  • झीलों और नदियों के पानी में जब एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से बरसा पानी मिल जाता है तो वहां जलीय जीवन की कोई गुंजाईश नहीं बचती। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) पारिस्थितिकी तंत्र के जलीय आवास को प्रभावित करती है। झीलों, नदियों और अन्य मीठे पानी के निकायों के अधिक अम्लीय बनने के कारण इनके जल में रहने वाले पानी के पशुओं और अन्य जलीय पौधों की संख्या और कम हो जाती हैं।
  • इससे फसल की पैदावार में भी कमी हो जाती है।
  • इससे जंगलों और वन्यजीवों को भारी क्षति पहुंचती है। जब एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) वन क्षेत्रों में पड़ती है तो इससे सीसा और जस्ता जैसे विषाक्त धातु निकलते है जिससे वृक्षों और पौधों की कम वृद्धि होती है। इस तरह एसिड रेन से वनों और जंगल के विस्तार में कम वृद्धि होती है।
  • संक्षारक होने के कारण यह भवनों और बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा सकती है। इसका एक महत्वपूर्ण है ताजमहल की इमारत जिस पर एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से चढ़ता जंग साफ़ देखा जा सकता है।
  • एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) मनुष्यों को भी प्रभावित करती है। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के कारण त्वचा पर दाने निकलना, खुजली, बालों का झड़ना और श्वास संबंधी समस्याएं हो जाती हैं। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से हृदय और फेफड़ों की समस्याएं हो सकती हैं।
  • एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के कारण जहरीले धातुएं भूमिगत पेयजल स्रोतों में मिलकर भूमि के पानी को मानव उपयोग के लिए अयोग्य बना देती हैं।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के उपाय:

अधिकांश कारखानों को अब स्क्रबर्स से लैस होना आवश्यक है। महंगा होने के बावजूद कोयले को जला दिया जाता है जिससे उसमें मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड की अधिकतम मात्रा खत्म हो जाती है। स्क्रबर्स में पानी और चूने के मिश्रण से जहरीली गैसों का छिड़काव किया जाता है जिससे लाइमवाटर बनता है, जो कि गाढ़ा कीचड़ के रूप में जाना जाता है।

झीलों के पानी में मौजूद अम्लता का दूसरा समाधान चूना है। चूना बहुत क्षारीय हैं, इसलिए जब झीलों में डाला जाता है तो यह अम्लता को साफ करता है। इस प्रक्रिया की एक ही समस्या कि यह बहुत महंगी है तथा केवल एक अस्थायी समाधान है।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) का अन्य समाधान उत्प्रेरक कनवर्टर है, जो सभी कारों, बसों, ऑटो और अन्य सड़क परिवहन के लिए आवश्यक है। कनवर्टर को धुंए के निकासी पाइप पर लगाया जाता है जिससे धुआं इस निकासी पाइप से होकर गुजरता है। वह उत्प्रेरक कनवर्टर, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, और अपरिवर्तित हाइड्रोकार्बन जैसे गैसों को शुद्ध वायु में परिवर्तित करता है।


 

अम्ल वर्षा पर निबंध 5 (600-800 शब्द) – Essay On Acid Rain- Essay in Hindi 600-800 words

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) में बारिश, बर्फ, ओलों, कोहरे या ओस आदि शामिल है जिसमें एसिड प्रदूषक विशेष रूप से सल्फरिक और नाइट्रिक एसिड होता है। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन के कारण होती है, जो वातावरण में पानी के अणुओं के साथ प्रतिक्रिया करके एसिड का उत्पादन करती है।

पहली बार “एसिड रेन” शब्द 1872 में रॉबर्ट एंगस स्मिथ द्वारा इस्तेमाल में लाया गया था। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) की समस्या न केवल आबादी और औद्योगिकीकरण में होती वृद्धि के साथ बढ़ी है, बल्कि अब यह और भी अधिक खतरनाक हो गई है। वास्तव में, स्थानीय प्रदूषण को कम करने के लिए प्रयोग में लाई गई स्मोकास्टेक्स (फैक्ट्री, जहाज, आदि पर लंबी चिमनी) ने क्षेत्रीय वायुमंडलीय परिसंचरण में गैसों को जारी करके एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के फैलाव को बढ़ावा दिया है।

कनाडा, संयुक्त राज्य और स्वीडन, नॉर्वे और जर्मनी के कुछ हिस्सों सहित यूरोप के अधिकांश भागों में एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होती अक्सर देखी जा सकती है। वर्तमान में इसके अलावा दक्षिण अफ़्रीका और दक्षिण एशिया के इलाकों खासकर श्रीलंका और भारत में बंगलौर, नई दिल्ली, मुम्बई जैसे कुछ दक्षिणी हिस्सों में एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होती देखी गई है।

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के प्रकार:

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के दो प्रकार हैं जिन्हें निम्नानुसार वर्गीकृत किया गया है:

गीली एसिड रेन: जब एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) बारिश, बर्फ, कोहरे या धुंध के रूप में जमीन पर गिरती है तो यह वातावरण से एसिड को निकाल कर उन्हें पृथ्वी की सतह पर जमा देती है। उसके बाद यह एसिड भूमि के माध्यम से बहने लगता है जिससे पौधों, जानवरों और जलीय जीवन का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित होता है। नाले से निकलता गन्दा पानी नदियों और नहरों जैसे जल स्रोतों में बह जाता है जिससे बाद में यह समुद्र के पानी में मिल कर जलीय जीवन को प्रभावित करता है।

सूखी एसिड रेन: जब अम्लीय प्रदूषक धूल या धुएं मिलकर सूखे कणों के रूप में जमीन पर गिरते हैं तो यह जमीन पर और अन्य सतहों जैसे इमारतों, कारों, घरों, पेड़ और स्मारकों पर चिपक जाते हैं। वातावरण में अम्लीय प्रदूषकों का अधिकांश भाग जमने से फैलता है।

एसिड रेन के कारण

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के प्रमुख कारण प्राकृतिक और मानव-संगठित होते है। हालांकि एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) मूल रूप से जीवाश्म ईंधन के दहन के कारण होती है जो वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOX) की मात्रा को बढ़ावा देती है।

प्राकृतिक स्रोत: एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के प्राकृतिक स्रोत में मुख्य हैं ज्वालामुखी विस्फोट। ज्वालामुखी बड़ी मात्रा में लावा को उत्सर्जित करता है जो हानिकारक गैसों का उत्पादन करता है जिससे एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) सामान्य मात्रा से अधिक होती है। वनस्पति, जंगल की आग और अन्य जैविक प्रक्रियाओं से जो गैस उत्पन्न होती है उस कारण भी एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) बनती है। डाइमिथाइल सल्फाइड वायुमंडल में मौजूद सल्फर युक्त एक प्रमुख जैविक योगदानकर्ता का एक विशिष्ट उदाहरण है। बिजली गिरने से भी नाइट्रिक ऑक्साइड बनती है जो नाइट्रिक एसिड के उत्पादन के लिए विद्युत गतिविधि के माध्यम से पानी के अणुओं के साथ प्रतिक्रिया करती है जिससे एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) का निर्माण होता है।

मानव-संगठित स्रोत: मानव गतिविधियों में सबसे पहले शामिल है कारखानों, बिजली उत्पादन परिसर और ऑटोमोबाइल उद्योगों से निकलती सल्फर और नाइट्रोजन गैस जो रासायनिक गैस का रूप है। इनसे एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) की मात्रा में बढ़ोतरी होती है। इसके अलावा बिजली उत्पादन के लिए कोयले का उपयोग गैसीय उत्सर्जन का प्रमुख कारण है जो सीधे-सीधे एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से के होने से जुड़ी है। इन गैसों में मौजूद पानी ऑक्सीजन और अन्य रसायनों के साथ प्रतिक्रिया करता है ताकि वे सल्फ्यूरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड आदि जैसे विभिन्न अम्लीय यौगिकों का निर्माण कर सकें। परिणामस्वरूप, उन इलाकों में एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) अत्यधिक मात्रा में होती है।

एसिड रेन के हानिकारक प्रभाव:

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) पर्यावरण को निम्नलिखित व्यापक श्रेणियों में प्रभावित करती है:

  • समुद्री जैव विविधता
  • मिट्टी
  • वास्तुकला और अवसंरचना
  • वन और वन्यजीव
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य

एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से बचने के तरीके:

प्राकृतिक कारणों से होने वाली एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) को नहीं रोका जा सकता लेकिन ऐसे तरीके हैं जिनसे हम मानव-निर्मित कारणों से होती एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से बच सकते है। एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) से जिस तरह बचा जा सकता है वह इस प्रकार हैं:

चूना के पत्थर का उपयोग करके जिसे लाईमिंग प्रक्रिया के रूप में जाना जाता है जिसके द्वारा लोग लोग झीलों, नदियों और अन्य जल स्रोतों को एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) के कारण होने वाले नुकसान की मरम्मत कर सकते हैं। इसके तहत अम्लीय सतह में चूने को डाला जाता है जो पानी की अम्लता को संतुलित करता है। यद्यपि, यह केवल SO2 और NOX के उत्सर्जन की व्यापक चुनौतियों को सुलझाने और मानव स्वास्थ्य के जोखिम के लिए केवल एक अल्पकालिक समाधान प्रदान करता है। फिर भी लाईमिंग प्रक्रिया से समुद्री जीवों के अस्तित्व को पुनर्स्थापित करने में सहायता मिलती है तथा लंबे समय से अम्लीकृत पानी में सुधार भी देखने को मिलता है।

लाखों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से SO2 और NOX के उत्सर्जन की ओर योगदान देते हैं। इस चुनौती के निवारण के लिए लोगों को ऊर्जा संरक्षण के बारे में अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है जैसे रोशनी या विद्युत उपकरणों का उपयोग न करने पर उन्हें बंद करना, सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना, कुशल बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल तथा हाईब्रिड वाहनों को उपयोग में लाना जिनसे कम से कम मात्रा में SO2 और NOX का उत्सर्जन होता हो।

जीवाश्म ईंधन के अलावा और कई ऊर्जा स्रोतों की एक विस्तृत श्रृंखला है जो विद्युत शक्ति उत्पन्न कर सकते है। इनमें पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और जल ऊर्जा शामिल है। ये ऊर्जा के स्रोत जीवाश्म ईंधन की बजाय प्रभावी विद्युत शक्ति का विकल्प प्रदान कर सकते है। प्राकृतिक गैस, ईंधन कोशिकाएं और बैटरी भी जीवाश्म ईंधन की जगह इस्तेमाल सकते हैं।

निष्कर्ष

जैसा कि आप देख सकते हैं हमारी हवा को साफ करने के कई तरीके हैं लेकिन आबादी और तेजी से औद्योगिकीकरण में वृद्धि के कारण हमें एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) की घटना को कम करने के लिए युद्धपद्धति पर प्रयास करने की आवश्यकता है। पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने से बचने के लिए पूरी दुनिया को इस दिशा में एक साथ योगदान देने की आवश्यकता है।

New Name of Villages in Haryana Recently changed

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New Name of Villages in Haryana Recently changed list of the villages whose names are changed recently by Haryana Govt. Haryana gk for haryana police   haryana gk in hindi 

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हरियाणा के स्थानों के बदले गए नाम की सूची –

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हरियाणा के जिला रेवाड़ी के गाँव लूला अहीर का नाम बदलकर कृष्ण नगर रखा गया –

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रेवाड़ी के गाँव लूला अहीर का नाम बदलने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है | इस का नया नाम कृष्ण नगर रखा गया है|

क्र स

जिले का नाम

पुराना गाँव का नाम

बदला गया नया नाम

1 गुरुग्राम गुडगाँव गुरुग्राम
2 नुंह मेवात नुंह
3 हिसार किन्नर गैबीनगर
4 फ़तेहाबाद गंदा अजीत नगर
5 महेन्द्रगढ़ चामखेड़ा देवनगर
6 हिसार कुतियावाली शहजादपुर
7 हिसार कुत्ताबढ़ प्यारनगर
8 रेवाड़ी गोठड़ा टप्प खेरी गोठड़ा अहीर
9 करनाल झिमरी खेड़ा जौली
10 गुरुग्राम भोंडसी भुवनेश्वरी
11 जींद पिंडारी पांडु पिंडारा
12 भिवानी दुर्जनपुर सज्जनपुर
13 सिरसा माखेस्योराज माखोसरानी
14 करनाल बाल रांगडान बाल राजपूतान
15 यमुनानगर मुस्तफ़ाबाद सरस्वती नगर
16 सिरसा संघ-सरिता बाबा भूषण शाहनगर
17 हिसार चमार खेड़ा सुंदर खेड़ा
18 रोहतक गढ़ी सांपला चौ. छोटूराम नगर
19 अंबाला पंजोखड़ा पंजोखड़ा साहिब
20 कुरुक्षेत्र अमीनगाँव अभिमन्युपुर
21 यमुनानगर खिज्राबाद प्रतापनगर
22 फ़रीदाबाद बल्भ्भगढ़ बलरामगढ़
23 रेवाड़ी  लूला अहीर कृष्ण नगर

 

Current affairs 01 July 2018 Daily Current Affairs Today

01 July 2018

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1.संयुक्त राष्ट्र कुटीर, लघु और मध्यम उद्योग दिवस कब मनाया जाता है?
[A] 25 जून
[B] 26 जून
[C] 27 जून
[D] 28 जून

 

Correct Answer: C [27 जून]
2.अपने नए सौर चरखा मिशन के तहत MSME क्लस्टर के लिए सरकार द्वारा अनुमोदित प्रारंभिक सब्सिडी क्या है?
[A] 200 करोड़ रुपये
[B] 550 करोड़ रुपये
[C] 700 करोड़ रुपये
[D] 950 करोड़ रुपये

 

Correct Answer: B [550 करोड़ रुपये]
3.किस प्रदेश की सरकार ने हाल ही में कन्या वन समृद्धि योजना शुरू की है?
[A] राजस्थान
[B] महाराष्ट्र
[C] गुजरात
[D] कर्नाटक

 

Correct Answer: B [महाराष्ट्र]
4.भारत के किस प्रदेश में सर्वाधिक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं?
[A] उत्तर प्रदेश
[B] मध्य प्रदेश
[C] महाराष्ट्र
[D] तमिलनाडु

 

Correct Answer: C [महाराष्ट्र]
5.वर्तमान में (जून, 2018), निम्नलिखित राज्य सरकारों में से कौन सा आपदा प्रबंधन प्राधिकरण क्षेत्रीय एकीकृत मल्टी-हैजर प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (RIMES) के साथ काम कर रहे हैं?
[A] कर्नाटक और आंध्र प्रदेश
[B] ओडिशा और तमिलनाडु
[C] पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु
[D] गोवा और कर्नाटक

 

Correct Answer: B [ओडिशा और तमिलनाडु]

Current affairs 01 July 2018 Daily Current Affairs Today

6.निम्नलिखित में से कौन से जिले ने NITI आयोग द्वारा जून 2018 में जारी पहली डेल्टा रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया है जो स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य विकास मानकों पर आकांक्षी जिलों के बढ़ते सुधार को कैप्चर करता है?
[A] रामनाथपुरम (तमिलनाडु)
[B] पश्चिमी सिक्किम(सिक्किम)
[C] विजयनगरम (आंध्र प्रदेश)
[D] दाहोद (गुजरात)

 

Correct Answer: D [दाहोद (गुजरात)]
7.‘IPledgedfor9’ अचीवर्स पुरस्कार निम्नलिखित सरकारी योजनाओं से संबंधित हैं?
[A] बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
[B] प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान
[C] प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
[D] प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

 

Correct Answer: B [प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान]
8.भारत में लापता बच्चों को ढूंढने के लिए केंद्र सरकार ने कौन सा एप लांच किया है?
[A] ReUnite
[B] Scout
[C] Rummage
[D] Pathway

 

Correct Answer: A [ReUnite]
9.सांख्यिकी दिवस 2018 की थीम क्या है?
[A] Statistics for Common Man
[B] Quality Assurance in Official Statistics
[C] Statistics for New India
[D] Statistics for Development

 

Correct Answer: B [Quality Assurance in Official Statistics]
10. 2018 ग्लोबल रियल एस्टेट पारदर्शिता सूचकांक (GRTI) में भारत की रैंक क्या है?
[A] 32
[B] 35
[C] 39
[D] 42

 

Correct Answer: B [35]

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1. Anandabazar.com, the digital version of leading Bengali newspaper Anandabazar Patrika has been awarded International News Media Association (INMA) Award.

अग्रणी बंगाली समाचार पत्र आनंदबाजार पत्रिका के डिजिटल संस्करण Anandabazar.com को ‘ इंटरनेशनल न्यूज़पेपर मीडिया एसोसिएशन (आईएनएमए) पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
2. Girish Chandra Chaturvedi has been appointed as the non-executive part-time chairman of ICICI Bank.
गिरीश चंद्र चतुर्वेदी को आईसीआईसीआई बैंक के नॉन एक्जिक्यूटिव अंतरिम चेयरमैन के रूप में नियुक्त किया गया है।
3. Madhya Pradesh has been awarded for reducing maternal mortality under Prime Minister’s Safe Motherhood Campaign. 
मध्य प्रदेश को प्रधान मंत्री के सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए सम्मानित किया गया है।
4. 29thJune has been celebrated as the “Statistics Day” in recognition of the notable contributions made by Late Professor Prasanta Chandra Mahalanobis.The theme for this year was ‘‘Quality Assurance in Official Statistics’. 
स्‍वर्गीय प्रोफेसर पी सी महालानोबिस द्वारा किए गए उल्‍लेखनीय योगदानों के सम्‍मान में 29 जून को ‘सांख्यिकी दिवस’के रूप में मनाया गया। इस वर्ष की थीम‘आधिकारिक सांख्यिकी में गुणवत्‍तापूर्ण आश्वासन’ थी ।
5. Union Cabinet has approved the signing of the Memorandum of Understanding between India and Germany on Cooperation in the field of Civil Aviation.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नागर विमानन के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और जर्मनी के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर को स्‍वीकृति दे दी है।
6. Union HRD Minister participated in a 4th Meeting of Australia-India Education Council (AIEC).
केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री ने ऑस्ट्रेलिया-भारत शिक्षा परिषद (एआईईसी) की चौथी बैठक में भाग लिया।
 
7. Union Cabinet has approved the signing of the Memorandum of Understanding between India and Germany on Cooperation in the field of Civil Aviation.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नागर विमानन के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और जर्मनी के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर को स्‍वीकृति दे दी है।
 
8. Janardan Singh Gehlot has been elected the president of the International Kabaddi Federation (IKF).
जनार्दन सिंह गहलोत को अन्तरराष्ट्रीय कबड्डी फैडरेशन के अध्यक्ष के रूप में चुना गया है|