June 17, 2018 | Hindigk50k

वनोन्मूलन पर निबंध -Essay On Deforestation -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

वनोन्मूलन पर निबंध -Essay On Deforestation -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi Here we are providing you  this essay in hindi हिन्दी निबंध वनोन्मूलन पर निबंध -Essay On Deforestation -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi which will help in hindi essays for class 4, hindi essays for class 10,  hindi essays for class 9,  hindi essays for class 7, hindi essays for class 6, hindi essays for class 8.

वनोन्मूलन एक मुख्य पर्यावरणीय और सामाजिक मुद्दे के रुप में उत्पन्न हो रहा है। जो अब एक शक्तिशाली राक्षस से भी अधिक का रुप ले चुका है। हमें इसके कारण, प्रभाव और इस समस्या को सुलझाने का रास्ता जानना चाहिये। भावी पीढ़ी को इस समस्या के बारे में जागरुक करने के लिये हम यहां पर विभिन्न शब्द सीमाओं के साथ बेहद सरल भाषा में कई पैराग्राफ, दीर्घ और लघु निबंध उपलब्ध करा रहें हैं। दिये गये निबंधों का प्रयोग विद्यार्थी अपनी सुविधानुसार स्कूली परीक्षा और विभिन्न प्रतियोगिताओं में कर सकते हैं।

वनोन्मूलन पर निबंध (डिफोरेस्टेशन एस्से) Essay On Deforestation

You can get below some essays on Deforestation in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

वनोन्मूलन पर निबंध 1 (100 शब्द) Essay On Deforestation

व्यक्तिगत ज़रुरतों को पूरा करने के लिये पेड़ों और जंगलों को जलाने के द्वारा एक बड़े स्तर पर जंगलों को हटाना वनोन्मूलन है। पर्यावरण में प्राकृतिक संतुलन बनाने के साथ ही पूरे मानव बिरादरी के लिये जंगल बहुत महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, समाज और पर्यावरण पर इसके नकारात्मक परिणामों को बिना देखे और समझे इंसान लगातार पेड़ों को काट रहा है। प्राचीन समय से ही लकड़ियों का ऐतिहासिक रुप से बहुत महत्व रहा है तथा बहुत सारे प्रयोजनों के लिये इस्तेमाल किया जाता है जैसै ईंधन के लिये, घर बनाने के लिये, नौका, कागज उत्पादन तथा मानव जाति के बहुत से कार्यों में उपयोग होती है। प्रदूषण मुक्त स्वस्थ पर्यावरण में एक स्वस्थ और शांतिपूर्ण जीवन जीने और आनन्द उठाने के लिये हमें और हमारी भविष्य की पीढ़ी के लिये जंगल बेहद ज़रुरी है।

वनोन्मूलन

वनोन्मूलन पर निबंध 2 (150 शब्द) Essay On Deforestation

वनोन्मूलन समाज और पर्यावरण के लिये एक मुख्य वैश्विक समस्या के रुप में सामने आ रही है। ये हमारे ग्रह के लिये एक गंभीर दंड के रुप में है साथ ही ये जीवन के खात्मे की ओर भी इंशारा कर रहा है। लगातार होते पेड़ों की कटाई की वजह से जलवायु, पर्यावरण, जैव-विविधता तथा पूरे वातावरण में बहुत ही नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है साथ ही साथ मानव जाति के सांस्कृतिक और भौतिक रहन-सहन के लिए खतरा भी है। वनोन्मूलन के बहुत से कारण हैं जैसे मानव जनसंख्या और लोगों की औद्योगिक ज़रुरत के बढ़ने की वजह से लकड़ियों का संग्रह। लकड़ियों को जंगल का मुख्य उत्पाद और मानव जाति की भौतिक ज़रुरुत का संरचनात्मक भाग माना जाता है।

विस्फोटक मानव जनसंख्या के रहने और खेती के लिये अधिक ज़मीन की ज़रुरत है इसलिये मानव को जंगलों की काटने की आवश्यकता है। इस तरह से मानव ज़रुरतों को पूरा करने के लिये वनोन्मूलन और तेजी से हो रहा है। हालांकि, स्वयं से वनोन्मूलन से अधिक तेज वन-कटाई का प्रभाव है। पर्यावरण और वातावरण के लिये नकारात्मक बदलाव लाने के द्वारा ये बड़े स्तर पर मानव जीवन को प्रभावित कर रहा है।

वनोन्मूलन पर निबंध 3 (200 शब्द) Essay On Deforestation

बढ़ती जनसंख्या की सभी ज़रुरतों को पूरा करने के लिये बड़े स्तर पर पेड़ों को काटना या हटाना वनोन्मूलन है। इंसान बहुत स्वार्थी है; बिना दुबारा पौधा लगाये जंगलों को पूरी तरह से हटाने के द्वारा वो वनोन्मूलन कर रहें हैं। हालांकि, मनुष्य नहीं जानते नहीं जानते कि अनजाने में वो अपने लिये ही कुआँ खोद रहें हैं। अधिक लकड़ी, ईंधन, खेती, खेत बनाने, घर और आराम से रहने के लिये शहरों को बनाने के लिये लोग जंगलों को भूमि के रुप में बदल रहें हैं।

वनोन्मूलन के बहुत सारे प्रभाव पड़ते हैं जैसे पशुओं के घरों का नुकसान, जानवर मर रहें हैं, पर्यावरण में बदलाव, तापमान का बढ़ना, पर्यावरणीय उष्मा का बढ़ना, ग्लोबल वार्मिंग, ग्रीन हाउस गैस का प्रभाव बढ़ना, आईस कैप और ग्लेशियरों का पिघलना, समुद्र जल स्तर में बढ़ौतरी, ओजोन परत में कमी और छेद होना, समुद्री जानवरों का मरना, प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बहुत बढ़ जाता है जैसे तूफान, चक्रवात, प्रचण्ड तूफान, बाढ़, सूखा आदि जैसे नकारात्मक प्रभाव बदलाव जो धरती पर जीवन के अस्तित्व का विनाश करने के लिये पर्याप्त है।

जल चक्र, मिट्टी का उत्पादन, जानवरों के लिये रहने का स्थान उपलब्ध कराना, ऑक्सीजन उपलब्ध कराना, खतरनाक CO2 का इस्तेमाल, पर्यावरणीय तापमान का नियंत्रण तथा मृदा अपरन आदि से बचाने आदि के द्वारा मानव जीवन और पर्यावरणीय चक्र को संतुलित करने में जंगल बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।


 

वनोन्मूलन पर निबंध 4 (250 शब्द) Essay On Deforestation

बिना पौधा-रोपण किये पेड़ों को लगातार काटने के द्वारा जंगलों का तेजी से नुकसान वनोन्मूलन है। ये वन्य-जीवन, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण, बढ़ती मानव जनसंख्या के लिये बहुत खतरनाक है, विश्व में बढ़ती प्रतियोगिता मानव जाति को अच्छी तरह से विकसित शहर की स्थापना करने या खेती के लिये जंगलों को काटने को मजबूर कर रही है। ऐसे प्रतियोगी विश्व में, सभी राष्ट्र दूसरे विकसित और उन्नत राष्ट्रों से आगे तथा शक्तिशाली बनना चाहते हैं। लोगों को घर, पार्क, मल्टीप्लेक्स, उद्योग, कागज उत्पादन, लोक संरचना आदि के लिये जंगलों को काटने की ज़रुरत है। लकड़ियों को बेचने के द्वारा कुछ लालची लोग अधिक पैसा कमाने के लिये जंगलों को काट रहें हैं और वन्य जीवन तथा मानव जीवन को खतरे में डाल रहें हैं।

वन्य जीव विस्थापित और मर रहें हैं, वास्तविक वनस्पति और जीव-जन्तु खत्म हो रहें हैं, पर्यावरण में मकारात्मक बदलाव हो रहा है और मानव जीवन को गड़बड़ कर रहें हैं। इस वजह से बहुत महत्वपूर्ण जानवरों के प्राकृतिक आवास खत्म हो रहें हैं और कुछ दूसरी जगह विस्थापित हो रहें हैं या मानव क्षेत्रों में प्रवेश कर रहें हैं। भविष्य में यहाँ जीवन को बचाने के लिये पर्यावरण के प्राकृतिक चक्र को बनाये रखने और पशु अभयारण्य को बचाने के लिये जंगलों की कटाई रोकना या दुबारा पेड़-पौधा लगाने के द्वारा हमें पेड़ों को संरक्षित करना होगा। कार्बन डाइऑक्साईड की मात्रा को कम करने के साथ ही ताजे और स्वस्थ ऑक्सीजन के लिये जंगलों का संरक्षण बहुत ज़रुरी है।

वनोन्मूलन के कारण वायु प्रदूषण, पर्यावरण में जहरीली गैसों के स्तर में बढ़ौतरी, मृदा और जल प्रदूषण का बढ़ना, पर्यावरणीय उष्मा का बढ़ना आदि नकारात्मक बदलाव होते हैं। वनोन्मूलन के सभी नकारात्मक प्रभाव से बहुत सारे स्वास्थ्य विकार और खासतौर से फेफड़े और साँस संबंधी बिमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

वनोन्मूलन पर निबंध 5 (300 शब्द) Essay On Deforestation

मानव जाति के द्वारा जंगलों को समाप्त करना वनोन्मूलन है। दिनों-दिन बढ़ती जनसंख्या के कारण कृषि, उद्योग, आवास, व्यवसाय, शहर आदि दूसरे उद्देश्यों की पूर्ति के लिये भूमि की आवश्कता बढ़ती जा रही है जिसमें स्थायी जंगलों को हटाना शामिल है। पिछले दशक में, हमारी पृथ्वी हर तरफ से जंगलों से घिरी हुई थी जबकि अब के दिनों में केवल कुछ गिने हुये जंगल ही बचे हैं। वनोन्मूलन भारत के साथ दूसरे देशों के लिये भी एक बड़ी समस्या है। बड़े पर्यावरणीय सामाजिक मुद्दे के रुप में ये पूरे विश्व में फैल रहा है।

पारिस्थितिक और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण वनोन्मूलन मानव जीवन को गड़बड़ कर देता है। धरती पर जीवन के अस्तित्व को बचाने के लिये पेड़ों की कटाई को रोकने की ज़रुरत के लिये वनोन्मूलन लगातार हमें आगाह कर रहा है। कुछ लालची लोग लकड़ी से पैसा कमाने के लिये वनोन्मूलन कर रहे हैं। लोग अपने कृषिगत कार्यों, कागज, माचिस, फर्निचर आदि बनाने के लिये, शहरीकरण (सड़क निर्माण, घर आदि), भूमि का मरुस्थलीकरण, खनन (तेल और कोयला खनन), आग (गर्मी पाने के लिये) आदि के लिये पेड़ों को काट रहें हैं।

जलवायु असंतुलन, ग्लोबल वार्मिंग का बढ़ना, मृदा अपरदन, बाढ़, वन्य-जीवन का लोप, शुद्ध ऑक्सीजन स्तर का घटना और कार्बन डाइऑक्साईड गैस का बढ़ना आदि के माध्यम से वनोन्मूलन मानव जाति और शुद्ध पर्यावरण को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। सामान्य तरीके से जीवन को चलाने के लिये वनोन्मूलन को रोकना बेहद आवश्यक है। देश की सरकार के द्वारा कुछ कड़े नियम-कानून होने चाहिये जिसका पालन सभी नागिरकों को करना चाहिये। वनोन्मूलन के कारण और प्रभाव के बारे में आम जन को जागरुक करने के लिये कुछ साधारण और आसान तरीके होने चाहिये। जंगल कटाई की ज़रुरत को कम करने के लिये जनसंख्या पर नियंत्रण करना चाहिये। जब कभी भी कोई पेड़ काटा जाये, उसकी जगह पर कोई दूसरा पेड़-पौधा लगाने का नियम होना चाहिये।


 

वनोन्मूलन पर निबंध 6 (400 शब्द) Essay On Deforestation

जीवन के स्रोतों और लकड़ियों के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिये जंगलों का स्थायी नाश वनोन्मूलन है। पेड़ काटना बुरा नहीं है लेकिन स्थायी रुप से काटना बुरा है। अगर कोई पेड़ काटता है, उसे उसी या दूसरी जगह पर दुबारा पेड़ लगाना चाहिये। वनोन्मूलन बहुत से प्रयोजनों जैसै खेती, आजीविका, घर, फर्निचर, सड़क, ईंधन तथा औद्योगीकरण आदि कई कार्यों के लिये किया जाता है। वनोन्मूलन पर्यावरण को बहुत बुरी और तेजी से विनाश की ओर ले जा रहा है। पिछली सदी में पृथ्वी जंगलों से पटी पड़ी थी जबकि वर्तमान में लगभग 80% तक जंगल काटे और नष्ट किये जा चुके हैं और यहां तक कि वर्षा वन भी स्थायी रुप से गायब हो चुका है।

जंगली जानवरों, इंसानों और पर्यावरण के भले के लिये जंगल की ज़रुरत होती है। वनोन्मूलन के कारण पौधों और जानवरों की बहुत सी अनोखी प्रजातियाँ स्थायी रुप से खत्म हो चुकी हैं। पेड़ काटने की प्रक्रिया प्राकृतिक कार्बन चक्र को गड़बड़ कर रही है और दिनों-दिन पर्यावरण में अपने स्तर को बढ़ा रही है। वातावरण से प्रदूषकों को हटाने के साथ ही पर्यावरण से CO2 गैस का उपयोग करने के लिये जंगल बेहतर माध्यम है और जो पर्यावरण की शुद्धता को बनाये रखता है। किसी भी तरीके से जब कभी भी पेड़ों को नष्ट या जलाया जाता है, वो कार्बन और मीथेन छोड़ता है जो मानव जीवन के लिये नुकसानदायक होता है। दोनों गैसों को ग्रीन हाउस गैस कहते हैं जो अंतत: ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनता है।

पूरी तरह से वर्षा, दवा प्राप्ति, शुद्ध हवा, वायु प्रदूषण को हटाने, बहुत से प्रयोजनों के लिये लकड़ी प्राप्त करने आदि के लिये जंगल बहुत ज़रुरी है। जब हम पेड़ काटते हैं, ये सभी चक्रों को गड़बड़ करती है और मानव जीवन को प्रभावित करती है। कागज की ज़रुरत को पूरा करने के लिये पेड़ काटने के बजाय, हमें नये पेड़ों को काटने के बचने के लिये जितना संभव हो सके पुरानी चीजों के पुनर्चक्रण की आदत को बनाना चाहिये। बिना पानी के ग्रह की कल्पना कीजिये, जीवन संभव नहीं है। और उसी तरह से, बिना पेड़ और जंगल के जीवन नामुमकिन है क्योंकि ये वर्षा, ताजी हवा, जानवरों का रहवास, छाया, लकड़ी आदि का साधन होता है।

बिना पेड़ के, पृथ्वी पर बारिश, शुद्ध हवा, पशु, छाया, लकड़ी, और ना ही दवा होना संभव है। हर जगह केवल गर्मी, सूखा, बाढ़, तूफान, कार्बन डाईऑक्साईड गैस, मीथेन, अन्य जहरीली गैसें, तथा गर्मी का मौसम होगा, सर्दी का मौसम नहीं होगा। वनोन्मूलन को रोकने के लिये हमें एक साथ होकर कोई कदम उठाना चाहिये। हमें कागजों को बरबाद नहीं करना चाहिये और कागज किचन का तौलिया, मुंह साफ करने का टिशु आदि जैसी चीजों के अनावश्यक इस्तेमाल से बचना चाहिये। पेड़ काटने की ज़रुरत को कम करने के लिये कागज के वस्तुओं को हमें दुबारा प्रयोग और पुनर्चक्रण के बारे में सोचना चाहिये। जंगल और पेड़ों को बचाना हमारे अपने हाथ में है और हमारी तरफ से उठाया गया एक छोटा सा कदम वनोन्मूलन को रोकने की ओर एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

प्रकृति संरक्षण पर निबंध -Essay On Conservation of Nature -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

प्रकृति संरक्षण पर निबंध -Essay On Conservation of Nature -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi Here we are providing you  this essay in hindi हिन्दी निबंध प्रकृति संरक्षण पर निबंध -Essay On Conservation of Nature -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi  which will help in hindi essays for class 4, hindi essays for class 10,  hindi essays for class 9,  hindi essays for class 7, hindi essays for class 6, hindi essays for class 8.

प्रकृति का संरक्षण प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से सबंधित है। इनमें मुख्यतः पानी, धूप, वातावरण, खनिज, भूमि, वनस्पति और जानवर शामिल हैं। इन संसाधनों में कुछ संसाधन का अधिक उपयोग हो रहा है जिस कारण वे तेज़ गति से कम हो रहे हैं। हमें प्रकृति के संरक्षण के महत्व को समझना चाहिए तथा पारिस्थितिक संतुलन सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। प्रकृति का संरक्षण किसी भी मानवीय हस्तक्षेप के बिना स्वाभाविक रूप से बनने वाले संसाधनों का संरक्षण दर्शाता है।

अक्सर ऐसा देखा जाता है की प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व पर काफ़ी ज़ोर दिया जाता है क्योंकि यह पृथ्वी पर संतुलित वातावरण बनाए रखने के लिए आवश्यक है। आपकी परीक्षा में आप की सहायता करने के लिए इस विषय पर हमने यहाँ अलग-अलग शब्द सीमा के निबंध उपलब्ध करवाए हैं।

प्रकृति संरक्षण पर निबंध (कंज़र्वेसन ऑफ़ नेचर एस्से) Essay On Conservation of Nature

You can get below some essays on Conservation of Nature in Hindi language for students in  200, 300, 400, 500 and 600 words.

प्रकृति संरक्षण पर निबंध 1 (200 शब्द)

प्रकृति का संरक्षण मूलतः संसाधनों का संरक्षण है जैसे हवा, पानी, धूप, भूमि, वनस्पति, पशु जीवन और खनिज। हमें ये सभी संसाधन बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के प्रकृति द्वारा प्राप्त होते हैं। इन संसाधनों को आगे विभिन्न चीजों के निर्माण करने के लिए नियोजित किया जाता है जो मनुष्यों के साथ-साथ पृथ्वी पर मौजूद अन्य प्राणियों के जीवन को सहज बनाती हैं।

प्राकृतिक संसाधनों का मुख्य तौर पर अक्षय संसाधनों और गैर-अक्षय संसाधनों में वर्गीकरण किया गया है। अक्षय संसाधन वह हैं जिनकी स्वाभाविक रूप से फिर से उत्पत्ति हो सकती हैं। इसमें हवा, पानी और सूर्य का प्रकाश शामिल हैं। आम तौर पर गैर-अक्षय संसाधनों की बजाए अक्षय संसाधनों के उपयोग पर बल दिया जाता है क्योंकि गैर-अक्षय संसाधन तेज़ी से घट रहे है तथा इनकी भरपाई करना मुश्किल है।

प्रकृति का संरक्षण एक ऐसा मुद्दा है जिसे गंभीरता से लिए जाने की जरुरत है। विभिन्न देशों की सरकारें संसाधनों को संरक्षित करने के लिए कई तरीकों का इस्तेमाल कर रही हैं, उसी तरह इस दिशा में लोगों को भी अपना योगदान करने के लिए आगे आना चाहिए। कुछ ऐसे भी तरीके है जिससे आम आदमी प्रकृति के संरक्षण में मदद कर सकता है। उन तरीकों में पेड़ों का रोपण, कागज के उपयोग को सीमित करना, पानी और बिजली की बर्बादी को रोकना, जानवरों का शिकार बंद करना और वर्षा के जल को पुनः उपयोग में लाने वाली प्रणाली को नियोजित करना आदि शामिल है। उपर्युक्त उपायों को सुनियोजित तरीके से अभ्यास में लाना ज्यादा मुश्किल नहीं है। अगर हममें से प्रत्येक ने अपना सार्थक योगदान प्रकृति के संरक्षण के लिए दिया  तो इससे जो भी फायदे होंगे वह मानव जाति के लिए वाकई जबरदस्त होंगे।

प्रकृति संरक्षण

प्रकृति संरक्षण पर निबंध 2 (300 शब्द)

प्रकृति हमें  पानी, भूमि, सूर्य का प्रकाश और पेड़-पौधे प्रदान करके हमारी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करती है। इन संसाधनों का उपयोग विभिन्न चीजों के निर्माण के लिए किया जा सकता है जो निश्चित ही मनुष्य के जीवन को अधिक सुविधाजनक और आरामदायक बनाते हैं। दुर्भाग्य से, मनुष्य इन संसाधनों का उपयोग करने के बजाए नई चीजों का आविष्कार करने में इतना तल्लीन हो गया है कि उसने उन्हें संरक्षित करने के महत्व को लगभग भुला दिया है। फ़लस्वरूप, इन संसाधनों में से कई तेज़ गति से कम हो रहे हैं और यदि इसी तरह से ऐसा जारी रहा तो मानवों के साथ-साथ पृथ्वी पर रहने वाले अन्य जीवों का अस्तित्व मुश्किल में पड़ जाएगा।

प्रकृति के संरक्षण से अभिप्राय जंगलों, भूमि, जल निकायों की सुरक्षा से है तथा प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण खनिजों, ईंधन, प्राकृतिक गैसों जैसे संसाधनों की सुरक्षा से है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि ये सब प्रचुर मात्रा में मनुष्य के उपयोग के लिए उपलब्ध रहें। ऐसे कई तरीके हैं जिससे आम आदमी प्रकृति के संरक्षण में मदद कर सकता है। यहां कुछ ऐसे ही तरीकों का विस्तृत वर्णन किया गया है जिससे मानव जीवन को बड़ा लाभ हो सकता है:-

पानी का सीमित उपयोग

पानी को बुद्धिमानी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अगर पानी का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब हमें थोड़े से पानी के लिए भी तरसना पड़ेगा। पानी का सही इस्तेमाल काफी तरीकों से किया जा सकता है जैसे अपने दांतों को ब्रश करते हुए बहता हुआ पानी बंद करके, फव्वारें के जगह बाल्टी के पानी से नहाकर, आरओ का अपशिष्ट पानी का उपयोग पौधों में देकर या घर को साफ करने के लिए इस्तेमाल करके ताकि पानी ज्यादा मात्रा में ख़राब न हो।

बिजली का सीमित उपयोग

प्रकृति के संरक्षण के लिए बिजली के उपयोग को भी सीमित करना आवश्यक है। बिजली की बचत हम कई तरह से कर सकते है जैसे विद्युत उपकरण बंद करके  खासकर जब वे उपयोग में ना हो या फिर ऐसे बल्ब अथवा ट्यूबलाइट का इस्तेमाल करके जिससे कम कम से बिजली की खपत हो उदाहरण के लिए एलईडी लाइट।

ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे और सब्जियां उगाकर

जितना संभव हो सके उतने पेड़ लगाए तभी हर दिन जो पेड़ कट रहे हैं उनकी भरपाई हो सकेगी। पेशेवर खेती में उपयोग किए जाने वाले रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को प्रतिबंधित करने के लिए कोशिश करें कि घर पर ही सब्जियां उगायें। इसके अलावा लोग पेपर के उपयोग को सीमित करके, वर्षा जल संचयन प्रणाली को नियोजित करके, कारों के उपयोग को सीमित कर और प्रकृति के संरक्षण के बारे में जागरूकता फैला कर अपना बहुमूल्य योगदान दे सकते हैं।

प्रकृति संरक्षण पर निबंध 3 (400 शब्द)

प्रकृति ने हमें कई उपहार जैसे हवा, पानी, भूमि, धूप, खनिज, पौधों और जानवर दिए है। प्रकृति के ये सभी तोहफ़े हमारे ग्रह को रहने लायक जगह बनाते हैं। इन में से किसी के भी बिना पृथ्वी पर मनुष्य के जीवन का अस्तित्व संभव नहीं होगा। अब, जबकि ये प्राकृतिक संसाधन पृथ्वी पर प्रचुरता में मौजूद हैं, दुर्भाग्य से मानव आबादी में वृद्धि के कारण सदियों से इनमें से अधिकांश की आवश्यकता बढ़ गई है।

इनमे से कई प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग अधिक गति से किया जा रहा है जबकि उनका उत्पादन  क्षमता कम है। इस प्रकार प्रकृति के संरक्षण तथा प्रकृति द्वारा उपलब्ध कराये प्राकृतिक संसाधनों को बचाने की आवश्यकता है। यहां कुछ तरीकों पर एक विस्तृत नजर डाली गई है, जिनसे ये संसाधन संरक्षित किए जा सकते हैं:-

पानी की खपत कम करके

पृथ्वी पर पानी प्रचुरता में उपलब्ध है इसलिए लोग इसका उपयोग करने से पहले इसकी कम होती मात्रा की तरफ ज्यादा ध्यान देना जरुरी नहीं समझते। अगर हम पानी का इसी तेज़ गति से उपयोग करते रहें तो निश्चित ही रूप से हमे भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। पानी को बचने के लिए हम कुछ सरल चीजों को प्रयोग में ला सकते है जैसे ब्रश करने के दौरान नल को बंद करना, वॉशिंग मशीन में पानी का उपयोग कपड़ो की मात्रा के अनुसार करना तथा बचा हुआ पानी पौधों में देकर।

बिजली का उपयोग कम करके

बिजली की बचत करके ही बिजली बनाई जा सकती है। इसीलिए बिजली के सीमित उपयोग को करने का सुझाव दिया जाता है। सिर्फ इतना ध्यान रखकर जैसे कि अपने कमरे से बाहर निकलने से पहले रोशनी को बंद करना, उपयोग के बाद बिजली के उपकरणों को बंद करना और फ्लोरोसेंट या एलईडी बल्बों को ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल में लाना आदि बिजली बचाने में एक महतवपूर्ण कदम हो सकता है।

कागज़ का सीमित उपयोग करके

कागज़ पेड़ से बनता है। अधिक कागज़ का प्रयोग करने से मतलब है कि वनों की कटाई को प्रोत्साहित करना जो आज के समय में चिंता का विषय है। हमे यह सुनिश्चित करने कि जरुरत है कि जितना आवश्यकता है उतना ही कागज़ का उपयोग करें। प्रिंट आउट लेना और ई-कॉपी का उपयोग करना बंद करना होगा।

नई कृषि पद्धतियों का उपयोग करें

सरकार को चाहिए की वह किसानों को मिश्रित फसल, फसल रोटेशन तथा कीटनाशकों, खाद, जैव उर्वरक और जैविक खाद के उचित उपयोग करने सिखाए।

जागरूकता फैलाए

प्रकृति के संरक्षण के बारे में जागरूकता फ़ैलाना तथा इसके लिए इस्तेमाल होने वाली विधि का सही तरीका अपनाना अति महत्वपूर्ण है। यह लक्ष्य तभी प्राप्त किया जा सकता है जब अधिक से अधिक लोग इसके महत्व को समझें और जिस भी तरीके से वे मदद कर सकते हैं करे।

इसके अलावा अधिक से अधिक पौधे लगाना भी बेहद जरुरी है। लोग यात्रा के लिए साझा परिवहन का उपयोग करके और प्रकृति के संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन प्रणाली को नियोजित करके वायु प्रदूषण को कम करने की दिशा में अपना योगदान दे सकते है।

प्रकृति संरक्षण पर निबंध 4 (500 शब्द) Essay On Conservation of Nature

प्रकृति का संरक्षण उन सभी संसाधनों के संरक्षण को संदर्भित करता है जो स्वाभाविक रूप से मनुष्यों की सहायता के बिना बने हैं। इनमें पानी, हवा, धूप, भूमि, वन, खनिज, पौधें और जानवर शामिल हैं।  ये सभी प्राकृतिक संसाधन पृथ्वी पर जीवन को जीने लायक बनाते हैं। पृथ्वी पर मौजूद हवा, पानी, धूप और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के बिना मनुष्य का जीवन संभव नहीं है। इसलिए पृथ्वी पर जीवन तथा पर्यावरण को बरकरार रखने के लिए इन संसाधनों को संरक्षित करना अति आवश्यक है। यहां धरती पर मौजूद प्राकृतिक संसाधनों और इनका संरक्षण करने के तरीकों पर एक नजर डाली गई है:-

प्राकृतिक संसाधनों के प्रकार

  • अक्षय संसाधन:- यह ऐसे संसाधन हैं जो स्वाभाविक रूप से फिर से उत्पन्न हो सकते हैं जैसे वायु, पानी और सूरज की रोशनी।
  • गैर-अक्षय संसाधन:- यह ऐसे संसाधन हैं जो या तो फिर से उत्पन्न नहीं होते या बहुत धीमी गति से बनते हैं जैसे जीवाश्म ईंधन और खनिज आदि।
  • जैविक: ये जीवित प्राणियों तथा पौधों और जानवरों की तरह कार्बनिक सामग्री से आते हैं
  • अजैविक: ये गैर-जीवित चीजों और गैर-कार्बनिक पदार्थों से प्राप्त होते हैं। इसमें हवा, पानी और भूमि शामिल हैं, साथ ही लोहे, तांबे और चांदी जैसी धातुएं को भी इसमें गिना जा सकता है।

प्राकृतिक संसाधनों को भी वास्तविक संसाधन, आरक्षित संसाधन, स्टॉक संसाधन और उनके विकास के स्तर के आधार पर संभावित संसाधन जैसे श्रेणियों में विभाजित किया गया है।

प्रकृति संरक्षण के तरीके

प्रकृति का संरक्षण एक गंभीर विषय है जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।

प्रकृति के अधिकांश संसाधन तेज़ गति से घट रहे हैं। इसका कारण है इन संसाधनों की मांग अधिक होना जबकि उनके निर्माण की दर कम है। हालांकि, हमे यह समझने की जरूरत है कि प्रकृति ने हमें उन सभी संसाधनों को प्रचुर मात्रा में दिया है जिनकी हमें आवश्यकता है। हमें केवल उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग बुद्धिमानी से करने की आवश्यकता है। इन संसाधनों को संरक्षित करने के लिए हमे  नीचे दिए गए तरीकों का पालन करना चाहिए:

सीमित उपयोग

जल और बिजली दो ऐसी चीजें हैं जो आज के समय में सबसे ज्यादा बर्बाद हो रही हैं। हमारे लिए इन दोनों को बचाने के महत्व को समझना आवश्यक है। कोशिश करें जितनी जरुरत हो उतने ही पानी को उपयोग में लायें। ऐसा ही नियम बिजली पर लागू करना होगा। बिजली के उपकरणों का उपयोग बुद्धिमानी से करें तथा जब वे प्रयोग में ना हो तब उन्हें बंद कर दें। इसी तरह कागज, पेट्रोलियम और गैस जैसे अन्य संसाधनों का उपयोग भी एक सीमित दर में होना चाहिए।

प्रकृति को फिर से हरा भरा बनाएं

लकड़ी के बने पेपर, फर्नीचर और अन्य वस्तुओं के निर्माण के लिए काटे गए पेड़ों की जगह अधिक से अधिक वनरोपण करें। इसके अलावा अपने क्षेत्र के आसपास सफाई सुनिश्चित करें तथा जल निकायों और अन्य जगहों में अपशिष्ट उत्पादों को न फेकें।

जागरूकता फैलाएं

अंत में, जितना हो सके प्रकृति के संरक्षण के महत्व के बारे में उतनी जागरूकता फैलाए।

निष्कर्ष

प्राकृतिक संसाधनों की खपत अपने उत्पादन से अधिक है। यह हम में से हर एक का कर्तव्य है कि प्रकृति के इन उपहारों की बर्बादी को बंद करे और उन्हें बुद्धिमानी से उपयोग करना शुरू करें ताकि पृथ्वी पर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखा जा सके। उपरोक्त दी विधियों का पालन करके हम प्रकृति के संरक्षण में अपना योगदान दे सकते है।


 

प्रकृति के संरक्षण पर निबंध 5 (600 शब्द) Essay On Conservation of Nature

प्रकृति का संरक्षण मूल रूप से उन सभी संसाधनों का संरक्षण है जो प्रकृति ने मानव जाति को भेंट की है। इसमें खनिज, जल निकायों, भूमि, धूप और वातावरण आदि शामिल हैं तथा इसमें वनस्पतियों और जीवों का संरक्षण भी शामिल हैं। प्रकृति द्वारा दिए ये सभी उपहार संतुलित वातावरण बनाने में मदद करते है तथा ये सब मनुष्य के अस्तित्व और पृथ्वी पर अन्य जीवों के अस्तित्व के लिए उपयुक्त है। इसलिए प्रकृति का संरक्षण अति महत्वपूर्ण है।

प्राकृतिक संसाधनों को उनकी विशेषताओं के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। यहां इस वर्गीकरण पर एक नजर डाली गई है, जिसमें से प्रत्येक को संरक्षित करने के सुनियोजित तरीके हैं:

प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण

प्राकृतिक संसाधनों को मुख्यतः नवीनीकृत करने, विकास का स्रोत और विकास के स्तर पर अपनी क्षमता के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। इन्हें आगे उप श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इनकी विस्तृत जानकारी इस प्रकार से है:

कुछ संसाधन नवीकरणीय हैं जबकि अन्य गैर-नवीकरणीय हैं यहां इन दोनों श्रेणियों पर विस्तृत रूप से डाली गई है:

  1. नवीकरणीय संसाधन: ये संसाधन वह है जो स्वाभाविक रूप से पुनः उत्पन्न होते हैं। इनमें हवा, पानी, भूमि और सूर्य का प्रकाश शामिल हैं।
  2. गैर-नवीकरणीय संसाधन: ये संसाधन या तो बहुत धीमी गति उत्पन्न होते हैं या स्वाभाविक रूप से नहीं बनते। खनिज और जीवाश्म ईंधन इस श्रेणी के कुछ उदाहरण हैं।

उनके मूल के आधार पर, प्राकृतिक संसाधनों को दो प्रकारों में बांटा गया है:

  1. अजैविक: ये वह संसाधन हैं जो गैर-जीवित चीजों और गैर-कार्बनिक पदार्थों से बनते हैं। इस प्रकार के प्राकृतिक संसाधनों के कुछ उदाहरणों में पानी, वायु, भूमि और धातु जैसे लोहा, तांबे, सोना और चांदी शामिल हैं।
  2. जैविक: ये वह संसाधन है जो जीवित प्राणियों, पौधों और जानवरों जैसे कार्बनिक पदार्थों से उत्पन्न होते हैं। इस श्रेणी में जीवाश्म ईंधन भी शामिल है क्योंकि वे क्षययुक्त कार्बनिक पदार्थ से प्राप्त होते हैं।

विकास के स्तर के आधार पर, प्राकृतिक संसाधनों को निम्नलिखित तरीके से वर्गीकृत किया गया है:

  1. वास्तविक संसाधन: इन संसाधनों का विकास प्रौद्योगिकी की उपलब्धता और लागत पर निर्भर है। ये संसाधन वर्तमान समय में उपयोग लिए जाते हैं।
  2. रिज़र्व संसाधन: वास्तविक संसाधन का वह भाग जिसे भविष्य में सफलतापूर्वक विकसित और उपयोग में लाया जाए उसे रिज़र्व संसाधन कहा जाता है।
  3. संभावित संसाधन: ये ऐसे संसाधन हैं जो कुछ क्षेत्रों में मौजूद होते हैं लेकिन वास्तव में इस्तेमाल में लाने से पहले उनमें कुछ सुधार करने की आवश्यकता होती है।
  4. स्टॉक संसाधन: ये वह संसाधन हैं जिन पर इस्तेमाल में लाने के लिए सर्वेक्षण तो किए गए हैं लेकिन प्रौद्योगिकी की कमी के कारण अभी तक उपयोग में नहीं लाए जा सके हैं।

प्रकृति के संरक्षण के विभिन्न तरीके

चाहे नवीकरणीय हो या गैर नवीकरणीय, जैविक हो या गैर-जैविक, प्रकृति के संसाधनों का संरक्षण होना चाहिए। यहां कुछ ऐसे तरीके दिए गए हैं जो सरकार और व्यक्तियों को प्रकृति के संरक्षण के लिए प्रयोग में लाने चाहियें:

  1. प्राकृतिक संसाधनों का अधिक उपयोग करना बंद कर देना चाहिए। उपलब्ध संसाधनों को अपव्यय के बिना समझदारी से उपयोग करने की जरुरत है।
  2. वन्य जीवों के संरक्षण के लिए जंगली जानवरों का शिकार करना बंद कर दिया जाना चाहिए।
  3. किसानों को मिश्रित फसल की विधि, उर्वरक, कीटनाशक, कीटनाशक, और फसल रोटेशन के उपयोग को सिखाया जाना चाहिए। खाद, जैविक उर्वरक और बायोफलाइलाइजर्स के इस्तेमाल को प्रोत्साहितकरने की जरुरत है।
  4. वनों की कटाई को नियंत्रित करना चाहिए।
  5. वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए।
  6. सौर, जल और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय संसाधनों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  7. कृषि प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले पानी को दोबारा उपयोग में लाने की प्रणाली का पालन करना चाहिए।
  8. कार-पूलिंग जीवाश्म ईंधन की खपत को कम करने का एक अच्छा तरीका है।
  9. कागज के उपयोग को सीमित करें और रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करें।
  10. पुराने लाइट बल्ब की जगह फ्लोरोसेंट बल्ब को इस्तेमाल करके ऊर्जा की बचत करें जिससे बिजली बचाई जा सके। इसके अलावा जब आवश्यकता नहीं हो रोशनी के उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक आइटम बंद करें।

निष्कर्ष

संतुलित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए प्रकृति का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है हालांकि दुख की बात यह है कि बहुत से प्राकृतिक संसाधन तेज़ी से घट रहे हैं। उपर्युक्त विधियों का पालन करके प्रकृति के संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपना योगदान करना चाहिए।

जलवायु परिवर्तन पर निबंध-Essay On Climate Change -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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जलवायु परिवर्तन वास्तव में पृथ्वी पर जलवायु की परिस्थितियों में बदलाव को कहा जाता है। यह विभिन्न बाह्य एवं आंतरिक कारणों से होता है जिनमें सौर विकिरण, पृथ्वी की कक्षा में परिवर्तन, ज्वालामुखी विस्फोट, प्लेट टेक्टोनिक्स आदि सहित अन्य आंतरिक एवं बाह्य कारण सम्मिलित हैं। वास्तव में, जलवायु परिवर्तन, पिछले कुछ दशकों में विशेष रूप से चिंता का कारण बन गया है। पृथ्वी पर जलवायु के स्वरूप में परिवर्तन वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। जलवायु परिवर्तन के कई कारण होते हैं और यह परिवर्तन विभिन्न तरीकों से पृथ्वी पर जीवन को प्रभावित करता है। आपके परीक्षा के दौरान आपको इस विष्य पर लिखने में मदद करने के उद्देश्य से हम यहां आपको जलवायु परिवर्तन विषय पर विभिन्न शब्द सीमा के निबंध प्रदान कर रहे हैं जो निश्चित रूप से आपकी परीक्षा में मददगार साबित होंगे।

जलवायु परिवर्तन पर निबंध (क्लाइमेट चेंज एस्से) Essay On Climate Change

You can get below some essays on Climate Change in Hindi language for students in 200, 300, 400, 500 and 600 words.

जलवायु परिवर्तन पर निबंध 1 (200 शब्द) Essay On Climate Change

जलवायु परिवर्तन को मूल रूप से जलवायु के संरचना में हो रहे बदलाव, जो कई दशकों तथा सदियों सो लगातार  होते आ रहे हैं, के रूप से जाना जाता है। धरती के वातावरण के स्वरूप को परिवर्तित करने वाले विभिन्न प्राकृतिक कारकों कों वातावरण पर दबाव ड़लने वाली परिस्थितिकी तंत्र के तौर पर भी जाना जाता है।

वातावरण पर दबाव डालने वाले ये विशेष बाह्य तंत्र या तो प्राकृतिक हो सकते हैं जैसे कि पृथ्वी की कक्षा में भिन्नता, सौर विकिरण में असमानता, ज्वालामुखी विस्फोट, प्लेट टेक्टोनिक्स, आदि एवं विभिन्न मानवीय गतिविधियां जैसे ग्रीन हाउस गैस, कार्बन उत्सर्जन, इत्यादि।

मानव द्वारा की जा रही विभिन्न गतिविधियां, जैसे जंगलों की कटाई, जमीन का अत्यधिक इस्तेमाल भी इस विशेष बाह्य तंत्र में सम्मिलित हैं, जो वातावरण में बदलाव लाने के लिए विभिन्न परिस्थितियों के स्वरूपों का निर्माण प्राकृतिक तरीके से होता है, क्योंकि इसमें महासागरीय गतिविधियां-वातावरण परिवर्तनशीलता और पृथ्वी पर जीवन की मौजूदगी शामिल है।


 

जलवायु परिवर्तन पर निबंध 2 (300 शब्द) Essay On Climate Change

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, जलवायु परिवर्तन पृथ्वी पर जलवायु की परिस्थितियों में होने वाला बदलाव है। इसके लिए कई कारक सदियों से इस परिवर्तन को लाने में अपना योगदान देते रहे हैं। हालांकि अभी हाल ही के वर्षों मे वातावरण में हुआ प्रदूषण मुख्यतः मानव गतिविधियों का परिणाम है और इन गतिविधियों ने वातावरण पर बेहद नकारात्मक प्रभाव डाले हैं और इसे बुरी तरह प्रदूषित कर दिया है।

शोधकर्ता लगातार अतीत एवं वर्तमान के साथ ही भविष्य में पैदा होने वाले जलवायु के परिस्थितियों को समझने के साथ जलवायु के विविध स्वरूपों का अध्ययन करते रहे हैं। जलवायु परिवर्तनों का एक पूरा अभिलेख तैयार हो चुका है जिनमें नियमित रूप से नए-नए परिवर्तनों को शामिल किया जा रहा है और इस वजह से इस अभिलेख का इस्तेमाल जलवायु में हो रहे परिवर्तनों के अध्ययन के दौरान साक्ष्यों के रूप में किया जाता है। इन साक्ष्यों में वनस्पतियों एवं जीवों, हिमनदों और परिगमन प्रक्रियाओं, समुद्री स्तरों के रिकॉर्ड तथा बोरहोल तापमान प्रोफाइल एवं तलछट परतों के अलावा कई अन्य चीज भी सम्मिलित हैं।

यहां हमने जलवायु परिवर्तन के कारणों और प्रभावों को नजदीक से समझने का प्रयास किया है:

जलवायु परिवर्तन के विभिन्न कारण

जलवायु में परिवर्तन लाने वाले कारक निम्नलिखित हैं:

  • सौर विकिरण

सूर्य से उत्सर्जित जो ऊर्जा पृथ्वी तक पहुंचती है और फिर हवाओं और महासागरों द्वारा विश्व के विभिन्न भागों में आगे बढ़ती है, वह जलवायु परिवर्तन का एक प्रमुख कारण है।

  • मानवीय गतिविधियां

नए युग की तकनीकों का प्रयोग पृथ्वि पर कार्बन उत्सर्जन के दर को बढ़ा रहा है और इस प्रकार वतावरण को विपरीत रूप से प्रभावित कर रहा है।

इसके अलावा, कक्षीय रूपांतरों, प्लेट टेक्टोनिक्स और ज्वालामुखी विस्फोटों से भी जलवायु में बदलाव हो सकते हैं।

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

  • वनों एवं और वन्यजीव पर पड़ने वाले दुष्प्रप्रभाव

जलवायु परिस्थितियों में होने वाले व्यापक परिवर्तनों के कारण कई पौधों और जानवरों की पूरी जनसंख्या विलुप्त हो गई है एवं कई अन्यों की जनसंख्या विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है। कुछ क्षेत्रों में कुछ विशेष प्रकार के वृक्ष सामूहिक रूप से विलुप्त हो गए हैं और इस कारण वनाच्छादिन क्षेत्र कम होते जा रहे हैं।

  • जल पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव

जलवायु परिस्थितियों में परिवर्तनों की वजह से जल-प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप ग्लेशियर पिघलते जा रहे हैं एवं वर्षा अनियमित रूप से हो रही है और साथ ही वर्षा का स्वरूप भी बिगड़ता जा रहा है। ये सारी परिस्थितियां पर्यावरण में असंतुलन को बढ़ा रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन की समस्या को गंभीरता से लेना आवश्यकक है और वातावरण को प्रभावित कर रहे मानवीय गतिविधियां जो वतावरण को खराब करने में योगदान दे रहे हैं, उनको नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है।

जलवायु परिवर्तन पर निबंध 3 (400 शब्द) Essay On Climate Change

जलवायु परिवर्तन को मूलतः धरती पर मौसम की औसत स्थितियों के स्वरूपों के वितरण में हो रहे परिवर्तन के तौर पर जाना जाता है। जब यह परिवर्तन कुछ दशकों या सदियों तक तक कायम रह जाता है तो इसे जलवायु परिवर्तन कहते हैं। जलवायु की परिस्थितियों में बदलाव लाने में कई कारकों का योगदान होता है। यहां हम जलवायु परिवर्तन के इन कारणों की व्याख्या कर रहे हैं:

जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार घटक

यहां पृथ्वी पर जलवायु परिस्थितियों में बदलाव लाने वाले कुछ मुख्य कारकों पर हम आपका ध्यानाकर्षित कर रहे हैं:

सौर विकिरण

सूर्य की ऊर्जा पृथ्वी पर पहुंचती है और अंतरिक्ष में वापिस उत्सर्जित हो जाती है। सूर्य की ऊर्जा हवा, समुद्र के प्रवाह एवं अन्य तंत्रो के माध्यम से विश्व के विभिन्न हिस्सों में पहुंच जाती है, जिसके द्वारा उन हिस्सों के जलवायु तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

ज्वालामुखी विस्फोट

ज्वालामुखी विस्फोट पृथ्वी पर अक्सर होते रहते हैं और यह जलवायु में परिवर्तन लाने वाला एक और महत्वपूर्ण कारण है। पृथ्वी पर ज्वालामुखी विस्फोट का प्रभाव कुछ वर्षों तक रहता है।

मानवीय गतिविधियां

पृथ्वी पर जीवन स्वयं पृथ्वि के जलवायु में होने वाले परिवर्तनों में अपना योगदान देती है। मनुष्यों द्वारा कार्बन उत्सर्जन की प्रक्रिया एक ऐसा कारण है जो जलवायु को विपरीत रूप से प्रभावित करता है। जीवाश्म ईंधन के दहन, औद्योगिक अपशिष्टों को जलाए जाने एवं वाहनों द्वारा हो रहे प्रदूषणों में कार्बन का लगातार उत्सर्जन उत्सर्जित जलवायु पर गंभीर परिणाम छोड़ते हैं।

कक्षीय परिवर्तन

पृथ्वी की कक्षा में होने वाले बदलाव की वजह से सूर्य के प्रकाश के मौसमी वितरण पर बुरा असर पड़ता है और यह परिवर्तित हो जाता है। इस परिवर्तन की वजह से होने वाले विपरीत प्रभावों की वजह से मिल्नकोविच चक्रों का निर्माण होता है जो जलवायु पर विपरीत प्रभाव डालते हैं।

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

यहां जलवायु परिवर्तन के प्रभवों का वर्णन किया जा रहा है:

वनों पर प्रभाव

वन एक प्रकार से विभिन्न पशुओं और पौधों की कई प्रजातियों के लिए आवास की भूमिका निभाते हैं और साथ ही ये पृथ्वी पर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखते हैं। हालांकि, विश्व के कई क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के कारण वन विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गए हैं।

जल पर प्रभाव

जलवायु परिवर्तन के कारण धरती पर जल का पूरी प्रणाली अव्यवस्थित हो गई है। वर्षा का स्वरूप भी अनिश्चित हो गया है जिसके परिणामस्वरूप कई स्थानों पर सूखा एवं और बाढ़ जैसी चरम स्थितियों का सामना लोगों को करना पड़ रहा है। इसकी वजह से हिमनद भी पिघलते जा रहे हैं।

वन्य जीवन पर प्रभाव

जलवायु परिवर्तन विभिन्न जंगली प्रजातियों के अस्तित्व के लिए एक भीषण खतरे के रूप में उभर कर आया है जिसकी वजह से जंगली जानवरों और पौधों की कई प्रजातियां की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है और कुछ तो विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गए हैं।

निष्कर्ष

जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक समस्या है। प्राकृतिक कारकों के अलावा, मानव गतिविधियों ने भी इस परिवर्तन में प्रमुख योगदान दिया है। मनुष्य प्राकृतिक कारणों को तो नियंत्रित नहीं कर सकता लेकिन वह कम से कम यह तो सुनिश्चित जरूर कर सकता है वह वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाली अपनी गतिविधियों को नियंत्रण में रखे ताकि धरती पर सामंजस्य बनाया रखा जा सके।

जलवायु परिवर्तन पर निबंध 4 (500 शब्द) Essay On Climate Change

जलवायु परिवर्तन वैश्विक जलवायु पैटर्न में बदलाव को दर्शाता है। हमारे ग्रह ने सदियों से जलवायु पैटर्न में परिवर्तन होते हुए देखा है। हालांकि, 20वीं शताब्दी के मध्य के बाद से हुए परिवर्तन अधिक स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होते हैं। वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड के अनुपात में बहुत अधिक वृद्धि हो चुकी है जिसकी वजह से पृथ्वी के जलवायु में कई बड़े परिवर्तन हुए हैं। इसके अलावा, सदियों से कई प्राकृतिक बल जैसे कि सौर विकिरण, पृथ्वि की कक्षा में बदलाव एवं ज्वालामुखी विस्फोट इत्यादि पृथ्वी की जलवायु की परिस्थितियों को प्रभावित करते रहे हैं। यहां हमने जलवायु की परिस्थितियों में परिवर्तन के मुख्य कारणों एवं उनके नकारात्मक प्रभावों की विवेचना की है।

जलवायु परिवर्तन की वजहें

कई ऐसे कारक हैं जो अतीत में मौसम में परिवर्तन लाने के लिए जिम्मेदार रहे हैं। इनमें पृथ्वी पर पहुंचने वाली सौर ऊर्जा में विविधताएं, ज्वालामुखी विस्फोट, कक्षीय परिवर्तन और प्लेट टेक्टोनिक्स इत्यादि शामिल हैं। इसके अलावा, कई मानवीय गतिविधियां भी पिछले कुछ दशकों में जलवायु परिस्थितियों में परिवर्तन लाने के लिए जिम्मेदार रहीं हैं। अभी हाल ही में जो जलवायु की स्थितियों में बदलाव हुआ है उसे ग्लोबल वार्मिंग के तौर पर भी जाना जाता है। आइए हम इनमें से प्रत्येक कारणों के बारे में विस्तार से जानें:

सौर विकिरण

जिस दर पर सूर्य से ऊर्जा प्राप्त होती है और जिस गति से यह चारो तरफ फैलती है उसी के अनुरूप हमारे ग्रह पर तापमान एवं जलवायु का संतुलन तय होता है। हवाएं, महासागरीय जलधाराएं एवं वातावरण के अन्य तंत्र पूरी दुनिया में इसी सौर ऊर्जा को लेते हैं जिससे विभिन्न क्षेत्रों की जलवायुवीय परिस्थितियां प्रभावित होती हैं। सौर ऊर्जा की तीव्रता में दीर्घकालिक और साथ ही अल्पकालिक परिवर्तनों का असर वैश्विक जलवायु पर पड़ता है।

ज्वालामुखी विस्फोट

वे ज्वालामुखीय विस्फोट, जो स्ट्रैटोस्फियर में 100,000 टन से भी अधिक SO2 को उत्पन्न करते हैं, पृथ्वी के जलवायु को प्रभावित करने के लिए जाने जाते हैं। इस तरह के विस्फोट एक सदी में कई बार होते हैं और अगले कुछ सालों तक ये लिए पृथ्वी के वायुमंडल को ठंडा करते रहते हैं क्योंकि क्योंकि यह गैस पृथ्वी की सतह पर सौर विकिरण के संचरण को अंशतः अवरुद्ध करती है।

कक्षीय परिवर्तन

पृथ्वी की कक्षा में मामूली परिवर्तन से भी पृथ्वि की सतह पर सूर्य की रोशनी के मौसमी वितरण में बदलाव आते हैं। कक्षीय परिवर्तन तीन प्रकार के होते हैं – पृथ्वी की विकेन्द्रता में परिवर्तन, पृथ्वी की धुरी का पुरस्सरण और पृथ्वी के अक्ष में घूर्णन करते हुए पृथ्वी के धुरी के झुकाव कोण में बदलाव आदि। ये तीनों साथ मिलकर जलवायु पर बहुत बड़ा प्रभाव डालते हैं।

प्लेट टेक्टोनिक्स

टेक्टोनिक प्लेटों की गति पृथ्वी पर भूमि एवं महासागरों के स्वरूप में परिवर्तन लाती है और साथ ही लाखों वर्षों की अवधि में स्थलाकृति को बदलती है। इसकी वजह से वैश्विक जलवायु परिस्थितियां भी बदल जाती हैं।

निष्कर्ष

मौसम की स्थिति प्रतिदिन खराब होती जा रही है। ऊपर बताए गए प्राकृतिक कारकों की वजह से जलवायु पर हो रहे नकारात्मक प्रभाव को तो नियंत्रित नहीं किया जा सकता है, लेकिन, वैसी मानवीय गतिविधियां जो वायु, स्थल एवं जल प्रदूषण का कारण हैं और जो जलवायु पर नकारात्म प्रभाव डालती हैं उनपर प्रतिबंध जरूर लगाया जा सकता है। इस वैश्विक समस्या को नियंत्रित करने के लिए हममें से प्रत्येक को अपना योगदान देना चाहिए।


 

जलवायु परिवर्तन पर निबंध 5 (600 शब्द) Essay On Climate Change

जैसा कि नाम से स्पष्ट है पृथ्वी पर जलवायु की परिस्थितियों में बदलाव होने को जलवायु परिवर्तन कहते हैं। यूं तो मौसम में अक्सर बदलाव होते रहते हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन केवल तभी घटित होता है जब ये बदलाव पिछले कुछ दशकों से लेकर सदियों तक कायम रहें। कई ऐसे कारक हैं जो जलवायु में बदलाव लाते हैं। यहां इन कारकों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है:

जलवायु परिवर्तन के विभिन्न कारण

विभिन्न बाह्य एवं आंतरिक तंत्रों में बदलाव की वजह से जलवायु परिवर्तन होता है। आइए इनके बारे में में हम विस्तार से जानें:

बाहर से दबाव डालने वाले वाले तंत्र

  1. ज्वालामुखी विस्फोट

वे ज्वालामुखीय विस्फोट, जो पृथ्वि के स्ट्रैटोस्फियर में 100,000 टन से भी अधिक SO2 को उत्पन्न करते हैं, पृथ्वी के जलवायु को प्रभावित करने के लिए जाने जाते हैं। ये विस्फोट पृथ्वि के वायुमंडल को ठंडा करते रहते हैं क्योंकि इनसे निकलने वाली यह गैस पृथ्वी की सतह पर सौर विकिरण के संचरण में बाधा डालते हैं।

  1. सौर ऊर्जा का उत्पादन

जिस दर पर पृथ्वी को सूर्य से ऊर्जा प्राप्त होती है एवं वह दर जिससे यह ऊर्जा वापिस जलवायु में उत्सर्जित होती है वह पृथ्वी पर जलवायु संतुलन एवं तापमान को निर्धारित करती है। सौर ऊर्जा के उत्पादन में किसी भी प्रकार का परिवर्तन इस प्रकार वैश्विक जलवायु को प्रभावित करता है।

  1. प्लेट टेक्टोनिक्स

टेक्टोनिक प्लेटों की गति लाखों वर्षों की अवधि में जमीन और महासागरों को फिर से संगठित करके नई स्थलाकृति तैयार करती है। यह गतिविधि वैश्विक स्तर पर जलवायु की परिस्थितियों को प्रभावित करता है।

  1. पृथ्वी की कक्षा में बदलाव

पृथ्वी की कक्षा में परिवर्तन होने से सूर्य के प्रकाश के मौसमी वितरण, जिससे सतह पर पहुंचने वाले सूर्य के प्रकाश की मात्रा प्रभावित होती है, में परिवर्तन होता है। कक्षीय परिवर्तन तीन प्रकार के होते हैं इनमें पृथ्वी की विकेंद्रता में परिवर्तन, पृथ्वी के घूर्णन के अक्ष के झुकाव कोण में परिवर्तन और पृथ्वी की धुरी की विकेंद्रता इत्यादि शामिल हैं। इनकी वजह से मिल्नकोविच चक्रों का निर्माण होता है जो जलवायु पर बहुत बड़ा प्रभाव डालते हैं।

  1. मानवीय गतिविधियां

जीवाश्म ईंधनों के दहन की वजह से उत्पन्न CO2,  वाहनों का प्रदूषण, वनों की कटाई, पशु कृषि और भूमि का उपयोग आदि कुछ ऐसी मानवीय गतिविधियां हैं जो जलवायु में परिवर्तन ला रही हैं।

आंतरिक बलों के तंत्र का प्रभाव

  1. जीवन

कार्बन उत्सर्जन और पानी के चक्र में नकारात्मक बदलाव लाने में जीवन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका असर जलवायु परिवर्तन पर भी पड़ता है। यह कई अन्य नकारात्मक प्रभाव प्रदान करने के साथ ही, बादलों का निर्माण, वाष्पीकरण, एवं जलवायुवीय परिस्थितियों के निर्माण पर भी असर डालता है।

  1. महासागर-वायुमंडलीय परिवर्तनशीलता

वातावरण एवं महासागर एक साथ मिलकर आंतरिक जलवायु में परिवर्तन लाते हैं। ये परिवर्तन कुछ वर्षों से लेकर कुछ दशकों तक रह सकते हैं और वैश्विक सतह के तापमान को विपरीत रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी के पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। यहां इन प्रभावों का वर्णन किया जा रहा है:

  1. वनों पर प्रभाव

वन पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे कार्बन डाईऑक्साइड को अवशोषित कर लेते हैं। हालांकि, पेड़ों की कई प्रजातियां तो वातावरण के लगातार बदलते माहौल का सामना करने में असमर्थ होने की वजह से विलुप्त हो गए हैं। वृक्षों और पौधों के बड़े पैमाने पर विलुप्त होने के कारण जैव विविधता के स्तर में कमी आई है जो पर्यावरण के लिए बुरा संकेत है।

  1. ध्रुवीय क्षेत्रों पर प्रभाव

हमारे ग्रह के उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव इसके जलवायु को विनियमित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं और बदलते जलवायु परिस्थितियों का बुरा प्रभाव इन पर भी हो रहा है। यदि ये परिवर्तन इसी तरह से जारी रहे, तो यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में ध्रुवीय क्षेत्रों में जीवन पूरी तरह से विलुप्त हो सकता है।

  1. जल पर पड़ने वाले प्रभाव

जलवायु परिवर्तन ने दुनिया भर में जल प्रणालियों के लिए कुछ गंभीर परिस्थितियों को जन्म दिया है। बदलते मौसम की स्थिति के कारण वर्षा के स्वरूप में पूरे विश्व में परिवर्तन हो रहा है और इस वजह से धरती के विभिन्न भागों में बाढ़ या सूखे की परिस्थितियां निर्मित हो रही हैं। तापमान में वृद्धि के कारण हिमनदों का पिघलना एक और महत्वपूर्ण मुद्दा है।

  1. वन्य जीवन पर प्रभाव

बाघ, अफ्रीकी हाथियों, एशियाई गैंडों, एडली पेंगुइन और ध्रुवीय भालू सहित विभिन्न जंगली जानवरों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है और इन प्रजातियों में से अधिकांश विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुके हैं, क्योंकि वे बदलते मौसम का सामना नहीं कर पा रहे हैं।

निष्कर्ष

जलवायु में होने वाले बदलावों के कारण पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, पिछले कुछ दशकों के दौरान मानवीय गतिविधियों ने इस बदलाव में तेजी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने और धरती पर स्वस्थ वातावरण बनाए रखने के लिए, धरती पर मानवीय गतिविधियों द्वारा होने वाले वाले प्रभावों को नियंत्रित किए जाने की आवश्यकता है।

जैव विविधता पर निबंध-Essay On Bio Diversity -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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जैव विविधता से तात्पर्य विस्तृत रूप से उन विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु और वनस्पति से है जो संसार में या किसी विशेष क्षेत्र में एक साथ रहते है| जैव विविधता की समरसता को बनाये रखने के लिए हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है की हम अपनी धरती की पर्यावरण संबंधित स्थिति  के तालमेल को बनाये रखे| जैव विविधता का संबंध, जिसे हम जैविक विविधता भी कह सकते है, मुख्य रूप से अलग अलग तरह के पेड़ पौधों और पशु पक्षियों का धरती पर एक साथ अपने अस्तित्व को बनाये रखने से है|यह बहुत ही जरुरी है की ऊँचे स्तर की जैव विविधिता को बनाये रखने के लिए हम अपने प्राकृतिक परिवेश की अवस्था सही तरीके से बना के रखे| यहाँ पर जैव विविधता पर कुछ निबंध दिए जा रहे है जो आपको अपनी परीक्षा में इस विषय को समझने में मदद करेंगे|

जैव विविधता पर निबंध (बायोडायवर्सिटी एस्से)

You can get below some essays on Biodiversity in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

जैव विविधता पर निबंध 1 (100 शब्द)

जैव विविधता जिसको संक्षेप में हम जैविक विविधता भी कहते है उन विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षी एवं पेड़ पौधों से संबंधित है जो एक साथ धरती पर एक ही क्षेत्र में वास करते है| हमारे लिए यह बहुत ही जरुरी है की हम जैव विविधता की सुरक्षा करे जिससे वातावरण की शुद्धता भी बनी रहे और यह मानवजाति के अस्तित्व को भी बनाये रखे| हालाँकि बढ़ते हुए वायु, जल और भूमि प्रदूषण के कारण जैव विविधता को बचाना काफी मुश्किल होता जा रहा है|

वातावरण में तीव्र गति से होते नकारात्मक बदलाव के कारण बहुत से पेड़-पौधे और पशु-पक्षी विलुप्त हो चुके है जिससे जैव विविधता को बनाये रखने के स्तर में भी काफी गिरावट आई है| इसलिए यह और भी जरुरी हो जाता है की मानव के अस्तित्व को बचाये रखने के लिए और अपने वातावरण की शुद्धता के लिए इन नकारात्मक बदलावों को काबू किया जाये|

जैव विविधता

जैव विविधता पर निबंध 2 (150 शब्द)

जैव विविधता के बारे में अगर स्पष्ट शब्दो में कहा जाये तो यह एक तरीके का वनस्पति, जन्तुओ और अन्य जीवों का पारिस्थितिक तंत्र में सही संतुलन है| ये सभी वातावरण की शुद्धता को बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देते है|

हमारी धरती पर तरह तरह के पशुओं और पौधों का प्रकृति ने बटवांरा असामान्य तरीके से किया  है| कहीं ज्यादा तो कहीं कम| प्रकृति द्वारा किये इस असामान्य वितरण के पीछे मूल कारण है हमारे गृह की जलवायु का अनियमित होना| धरती के अलग अलग भागों का मौसम एक दूसरे से बिलकुल भिन्न है और इसी वजह से हर जगह का जीवन एक दूसरे से विविध है| पिछले कुछ दशकों में वातावरण में भीषण बदलाव हुए जिसके कारण जैव विविधता को बनाये रखने में गिरावट आयी है| यह बिगड़ते हालात हमारे मनुष्य जीवन के लिए किसी भंयकर ख़तरे से कम नहीं है|

हमारे लिए यह बहुत जरुरी है की हम बिगड़ते भौगोलिक परिस्थितियों पर शीघ्र ध्यान दे ताकि जैव विविधता के लिए कोई खतरा न हो और जीव-जन्तुओ, पेड़-पौधों के जीवन पर भी किसी तरह का कोई प्रश्न-चिन्ह न लगे|

जैव विविधता पर निबंध 3 (200 शब्द)

जैव विविधता का सम्बन्ध तरह तरह के पशुओं और पेड़ पौधों की प्रजातियों से है| ये अलग तरह की विचित्रता ही हमारे गृह को जीवन जीने के योग्य बनाती है|

इस विषम परिस्थितियों के पीछे मुख्य कारण है अलग अलग जीवों का अलग अलग जगहों एवं  आबोहवा में पाया जाना| भूमध्य रेखा के करीब जैव विविधिता अधिक पायी जाती है| इसकी वजह है वहां की गरम जलवायु तथा उच्च प्राथमिक उत्पादकता| दूसरी तरफ देखा जाये तो समुद्री जैव विविधता पश्चिमी प्रशांत महासागर के तटों पर अधिक पायी जाती है| कारण है वहाँ समुद्री सतह पर उच्च तापमान का होना| जैव विविधिता मुख्यतः आकर्षण का केंद्र मानी जाती है और कई शोधकर्ताओं का मानना था की जैव विविधता और बढ़ेगी परंतु अब उनका यह कथन असत्य होता दिख रहा है| जिस तरह की भौगोलिक परिस्थिति बनी है उनसे साफ़ है की आने वाले समय में जैव विविधता के स्तर में गिरावट देखने को मिलेगी|

हमारे लिए बहुत जरुरी है की हम सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाये रखे जो मूल रूप से समृद्ध विविधता को क़ायम रखने में सहायता करेगी| इससे मनुष्य भी अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने में सक्षम होगा जिसमें रोटी, कपड़ा, मकान, दवाईयाँ इत्यादि शामिल है| परंतु बढ़ता हुआ प्रदूषण वातावरण को लगातार दूषित कर रहा है जो जैव विविधता पे बहुत नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है| विभिन्न प्रकार की प्रजातियां जो कभी पृथ्वी पर निवास किया करती थी अब वे विलुप्त हो चुकी है तथा कई प्रजातियों पर आने वाले सालों में लुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है| बढ़ते प्रदूषण की ही वजह से पर्यावरण असंतुलित होता जा रहा है जो मनुष्य के लिए निस्संदेह ख़तरे की घंटी है|


 

जैव विविधता पर निबंध 4 (250 शब्द)

जैव विविधता जिसे जैविक विविधता भी कहते है, अलग-अलग तरह की वनस्पतियों एवं जानवरों का संग्रह है जो एक ही विशेष क्षेत्र में रहते या फैले हुए है| जैव विविधता जितनी समृद्ध होगी उतना ही सुव्यवस्थित और संतुलित हमारा वातावरण होगा| अलग-अलग तरह की वनस्पति तथा जीव-जंतु भी धरती को रहने के योग्य बनाने के लिए अपना योगदान देते है| इंसान के जीवन के पीछे भी जैव विविधता का ही हाथ है| ऐसा इसलिए है क्योंकि अलग-अलग जंतु और पेड़-पौधे ही मिलकर मनुष्य की मूलभूत जरूरतें पूरी करने में सहायता करते है|

एक अनुमान के मुताबिक पृथ्वी पर लगभग 3,00,000 वनस्पति तथा इतने ही जानवर है जिसमें पक्षी, मछलियां, स्तनधारी, कीड़े, सींप आदि शामिल है| हमारे गृह पृथ्वी की खोज लगभग 450 करोड़ साल पहले हुई थी और ऐसा वैज्ञानिकों का मानना है की पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत 350 करोड़ साल पहले हुई थी| पिछली कुछ शताब्दियों में कई वनस्पति एवं जानवरों की प्रजातियां विलुप्त हो गयी है और आने वाले समय में कई लुप्त होने की कग़ार पर है| यह जैव विविधता के लिए ख़तरे का संकेत है|

पिछले कुछ समय से मनुष्य का तकनीक की तरफ इतना ज्यादा झुकाव हो गया है की वह इसके दुष्परिणाम को भी नहीं समझना चाहता| शुद्धता की नज़र से देखा जाये तो कई नए अविष्कार मनुष्य एवं जैव विविधता के प्रति नकरात्मक प्रभाव डाल रहे है| मनुष्य के लिए यह बिलकुल सही समय है की वो इस संकट को गंभीरता से ले और वातावरण को शुद्ध बनाने का संकल्प ले| साफ़ सुथरा वातावरण ही समृद्ध जैव विविधता को बढ़ावा दे सकता है जिससे मानव जाति को अपना जीवनयापन में किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े|

जैव विविधता पर निबंध 5 (300 शब्द)

जैव विविधता मुख्य रूप से एक मापदंड है जिसमें अलग-अलग तरह के पेड़-पौधे और पशु-पक्षी एक साथ रहते है| हर किस्म की वनस्पति और पशुवर्ग पृथ्वी के वातावरण को बेहतर बनाने में अपना अमूल्य योगदान देते है जिससे आख़िरकार पृथ्वी पर जीवन समृद्धशाली बनता है| ये सभी प्रजातियां एक दूसरे की मूलभूत जरूरतों को पूरा करती है जिससे एक समृद्धशाली जैव विविधिता का निर्माण होता है|

जैव विविधता का पतन कैसे हुआ?

हालाँकि पिछले कई सालों से जैव विविधता को समृद्ध बनाये रखने पे जोर दिया जा रहा है परंतु फिर भी कुछ समय से इसकी गरिमा में गिरावट देखी गयी है जिसकी आने वाले समय में और भी ज्यादा गिरने की आंशका जताई जा रही है| इसके पीछे मुख्य कारण है औद्योगिक फैक्टरियों से लगातार निकलता प्रदूषण| इस प्रदूषण के कारण ही कई वनस्पतियों की और जानवरों की प्रजातियां विलुप्त हो गयी है और कई होने की कग़ार पर है| इस बदलाव का एक संकेत तो साफ़ है की आने वाले समय में हमारे गृह पृथ्वी पे बहुत ही भयंकर संकट खड़ा हो जायेगा| इससे जैव विविधता का संतुलन तो निश्चित रूप से बिगड़ेगा ही तथा मनुष्य के साथ साथ जीवजंतुओं के जीवन पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा हो जायेगा|

जैव विविधता को समृद्ध कैसे बनाये?

सबसे पहले यह जरुरी है की हम वातावरण संबंधी मुसीबतों के प्रति अत्यंत संवेदनशील हो| कई देशों की सरकार लोगों के बीच जैव विविधता के बिगड़ते संतुलन को लेकर जागरूकता फैला रही है और कोशिश कर रही है की इस पर जल्दी काबू पाया जाये| यह आम आदमी की भी जिम्मेदारी है की वह इस नेक कार्य में हिस्सा ले और वातावरण को शुद्ध बनाने में सरकार का सहयोग करे|

निष्कर्ष

मनुष्य के तकनीक के प्रति बढ़ते प्रेम को कम करने की जरुरत है| वह तकनीक और नए नए अविष्कार करने में इतना मग्न हो गया है की उसे अपने आसपास के वातावरण के बढ़ते प्रदूषण से कोई लेना देना ही नहीं है| मनुष्य को इस तरफ सोचना होगा की दूषित होते वातावरण से सिर्फ उसका ही नुकसान हो रहा है|


 

जैव विविधता पर निबंध 6 (400 शब्द)

भिन्न-भिन्न प्रकार की वनस्पति एवं जीव जन्तुओ के एक साथ रहने को ही जैव विविधता का नाम दिया गया है| इसने प्रजातीय समृद्धि और प्रजातीय विविधता जैसे शब्दों के अर्थ को ही बदल के रख दिया है|

जैव विविधिता – जैविक किस्मों के प्रति एकीकृत दृष्टिकोण

जैव विविधिता को स्पष्ट करने के लिए और भी कई शब्दावली है जिसमें मुख्य है पारिस्थितिक विविधता (पारिस्थितिक तंत्र से उत्पन्न), वर्गीकरण विविधता (वर्गीय तंत्र से उत्पन्न), कार्यात्मक विविधता (कार्य तंत्र से उत्पन्न) और रूपात्मक विविधता (आनुवंशिक विविधता से उत्पन्न)| जैव विविधता इन सभी के प्रति एक नई सोच को दर्शाती एवं एकत्रित करती है|

जैव विविधता क्यों महत्वपूर्ण है?

जैव विविधता के महत्वपूर्ण होने के पीछे तर्क है की यह पारिस्थितिकीय प्रणाली के संतुलन को बना के रखती है| विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षी तथा वनस्पति एक दूसरे की जरूरतें पूरी करते है और साथ ही ये एक दूसरे पर निर्भर भी है| उदाहरण के तौर पर मनुष्य को ही ले लीजिए| अपनी मूलभूत आवश्यकता जैसे खाने, रहने के लिए वह भी पशु, पेड़ और अन्य तरह की प्रजातियों पर आश्रित है| हमारी जैव विविधता की समृद्धि ही पृथ्वी को रहने के लिए तथा जीवन यापन के लायक बनाती है|

दुर्भाग्य से बढ़ता हुआ प्रदूषण हमारे वातावरण पर गलत प्रभाव डाल रहा है| बहुत से पेड़-पौधे तथा जानवर प्रदूषण के दुष्परिणाम के चलते अपना अस्तित्व खो चुके है और कई लुप्त होने की राह पर खड़े है| अगर ऐसा ही रहा तो सभी प्रजातियों के सर्वनाश का दिन दूर नहीं है|

जैव विविधता को कैसे बचाये?

सबसे पहले इंसान को जैव विविधता के महत्व को समझना होगा| सड़को पे दौड़ते बड़े बड़े वाहन बड़े पैमाने पे प्रदूषण फैला रहे है जो मनुष्य जाति के लिए बहुत बड़ा खतरा है| वातावरण की शुद्धता को बचाने के लिए इन वाहनों पर अंकुश लगाना होगा ताकि ये वातावरण को और दूषित न कर पाए| फैक्टरियों से निकलता दूषित पानी जल जीवन को ख़राब कर रहा है| पानी में रहने वाले जीवों की जान पर संकट पैदा हो गया है| इस निकलते दूषित पानी का जल्दी से जल्दी उचित प्रबंध करना होगा ताकि ये बड़ी आपदा का रूप न ले ले| इसी तरह से ध्वनि प्रदूषण पर भी लगाम लगानी होगी|

वनों की कटाई भी एक बहुत बड़ी वजह है जैव विविधता में होती गिरावट का| इससे न सिर्फ पेड़ो की संख्या घटती जा रही है बल्कि कई जानवरों एवं पक्षियों से उनका आशियाना भी छिनता जा रहा है जो उनके जीवन निर्वाह में एक बड़ी मुसीबत बन चुका है| वातावरण की दुर्गति को देखते हुए इस पर तुरंत प्रभाव से नियंत्रण करना होगा|

निष्कर्ष

हर एक वनस्पति तथा जीव का वातावरण को रहने के योग्य बनाने में अलग-अलग उद्देश्य है| इसलिए अगर हमें अपने वातावरण की शुद्धता को ऊँचे स्तर तक पहुँचाना है तो हमें जैव विविधता के संतुलन को बनाये रखने पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा|

पृथ्वी बचाओ पर निबंध-Essay On Save Earth -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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पृथ्वी हमारा ग्रह है और जीवन की निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण आवश्यकता है। यह जीवन की निरंतरता के लिए सभी आधारभूत संसाधनों से भरी हुई है हालांकि, यह मनुष्य के अनैतिक व्यवहार के कारण लगातार नष्ट हो रही है। धरती बचाओ या पृथ्वी बचाओ अभियान बहुत महत्वपूर्ण सामाजिक जागरुकता अभियान है, पृथ्वी पर कुछ सकारात्मक बदलाव लाने के लिए जिसके बारे में सभी को अवश्य जानना चाहिए। विद्यार्थियों के बीच में जागरुकता लाने के लिए, शिक्षक पृथ्वी बचाओ विषय पर निबंध या पैराग्राफ लिखने के लिए दे सकते हैं।

आजकल, विद्यार्थियों में लेखन क्षमता और कौशल को बढ़ाने के लिए कॉलेज और स्कूलों में शिक्षकों के द्वारा निबंध लेखन या पैराग्राफ लेखन के कार्य को दिया जाता है। यह किसी भी विषय पर विद्यार्थियों में हिन्दी लेखन कौशल और ज्ञान को बढ़ाता है। यह किसी भी विषय पर विद्यार्थियों के विचारों, मतों और सकारात्मक सुझावों को जानने का सबसे अच्छा तरीका है। निम्नलिखित पृथ्वी बचाओ पर निबंध, छोटे निबंध, बड़े निबंध की श्रेणियों में वर्गीकृत किए गए हैं; जो दिए हुए कार्य को पूरा करने में विद्यार्थियों की मदद करेंगे। सभी पृथ्वी बचाओ पर निबंध बहुत ही साधारण वाक्यों में लिखे गए हैं। इसलिए, आप इनमें से कोई भी निबंध अपनी जरुरत और आवश्यकता के अनुसार चुन सकते हैं:

पृथ्वी बचाओ पर निबंध (सेव अर्थ एस्से) Essay On Save Earth

You can get below some essays on Save Earth in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, 400 and 450 words.

पृथ्वी बचाओ पर निबंध 1 (100 शब्द) Essay On Save Earth

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि, पूरे ब्रह्मांड में जीवन वाला एकमात्र ज्ञात ग्रह है। इसलिए, हमें पृथ्वी से जो कुछ भी प्राप्त होता है, उसका सम्मान करना चाहिए और उन्हें बनाए रखना चाहिए। हमें धरती माँ की रक्षा करनी चाहिए, ताकि हमारे भविष्य की पीढ़ियाँ सुरक्षित वातावरण में रह सकें। हम पृथ्वी की रक्षा पेड़ों, प्राकृतिक वनस्पति, पानी, प्राकृतिक संसाधन, बिजली आदि की रक्षा करके कर सकते हैं। हमें पर्यावरण प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने वाले संभव प्रयासों का कड़ाई से पालन करना चाहिए।

प्रदूषण को खत्म करने और ग्लोबल वार्मिंग को खत्म करने के लिए, सभी को अपने आस-पास के क्षेत्रों में अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने चाहिए। वनीकीकरण, पुनःवनोत्पादन, कागजों और अन्य प्राकृतिक पदार्थों का पुनः प्रयोग, प्राकृतिक संसाधनों (खनिज, कोयला, पत्थर, तेल आदि), बिजली, पानी और वातावरण को बचाना चाहिए, बढ़ावा देना चाहिए और समर्थन करना चाहिए।

पृथ्वी बचाओ

पृथ्वी बचाओ पर निबंध 2 (150 शब्द) Essay On Save Earth

हम पृथ्वी के अलावा पूरे ब्रह्मांड में ऐसे ग्रह को नहीं जानते हैं, जहाँ जीवन संभव हो। यह केवल अकेला ज्ञात ग्रह है, जहाँ सभी सबसे अधिक आवश्यक प्राकृतिक संसाधनों, ऑक्सीजन, पानी और गुरुत्वाकर्षण का संयोजन पाया जाता है, जो यहाँ जीवन को सफल बनाने की संभावना का निर्माण करता है। हमें इसके बारे में अधिक सोचने की आवश्यकता नहीं है और भविष्य की पीढ़ी को स्वस्थ्य पृथ्वी देने के लिए बहुत से प्रभावी तरीकों के द्वारा गंभीरता से पृथ्वी की रक्षा करनी चाहिए। लोगों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन प्राप्त करने और वायु प्रदूषण व ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को कम करने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए।

हमारे जीवन, वातावरण और विभिन्न प्रजातियों के घरों को बचाने के लिए हमें वनों को काटने से रोकना चाहिए। लोगों को बिजली का प्रयोग सीमित करना चाहिए और ग्लोबल वार्मिंग से वातावरण की रक्षा करने के लिए जीवाश्म ईंधन के प्रयोग को कम करना चाहिए। हमें पृथ्वी को विनाश से बचाने के लिए सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए। निम्नलिखित 3R नियम (रिडीयूज, रियूज, रिसाइकिल), हमारी अनमोल धरती को बचाने में बहुत ही प्रभावी साबित हो सकते हैं।

पृथ्वी बचाओ पर निबंध 3 (250 शब्द) Essay On Save Earth

पृथ्वी ब्रह्मांड में सबसे अनमोल वस्तु है, जो जीवन के लिए आवश्यक वस्तुएं, ऑक्सीजन और पानी को रखती है। पृथ्वी पर पाए जाने वाले प्राकृतिक संसाधन दिन प्रति दिन मानव के गलत कार्यों के कारण बिगड़ रहे हैं। इसने पृथ्वी पर जीवन को संकट में डाल दिया है। अनुकूल वातावरण की कमी के कारण बहुत से जंगली जानवर पूरी तरह से विलुप्त हो गए हैं। बहुत प्रकार के प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और अन्य पर्यावरणीय मुद्दों की दर दिन प्रति दिन बढ़ रही है। इसके नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए सभी गलत प्रचलनों को रोकना बहुत आवश्यक है। पूरे विश्वभर के लोगों के बीच में जागरुकता फैलाने के लिए पृथ्वी दिवस हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है। यह वार्षिक रुप से पृथ्वी के प्राकृतिक पर्यावरण को बनाए रखने के साथ ही लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है।

हमारी पृथ्वी हमसे कभी भी कुछ बदले में नहीं लेती है हालांकि, पृथ्वी पर स्वस्थ जीवन की निरंतरता को बनाए रखने के लिए यह इसको बनाए रखने की मांग अवश्य करती है। पृथ्वी पर रहने वाले हम अकेले नहीं है: पृथ्वी पर रहने वाली कई अज्ञात प्रजातियाँ भी हैं। इसलिए, हमें स्वार्थी नहीं होना चाहिए और हमें पृथ्वी पर रहने वाली सभी प्रजातियों के बारे में सोचना चाहिए। हमें अपनी पृथ्वी और वातावरण को अपशिष्टों, प्लास्टिक, कागज, लकड़ी आदि की मात्रा को कम करने के द्वारा रक्षा करनी चाहिए। हमें गंदगी और अपशिष्टों को कम करने के लिए वस्तुओं (कपड़े, खिलौने, फर्नीचर, किताबें, कागज आदि) के पुनः प्रयोग की आदत को डालना चाहिए। प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के स्तर को बढ़ाने में शामिल गलत गतिविधियों को हमें रोकना चाहिए।


 

पृथ्वी बचाओ पर निबंध 4 (300 शब्द) Essay On Save Earth

विषाक्त वातावरण, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, वनों का उन्मूलन और अन्य बहुत से पर्यावरणीय मुद्दों के कारण पृथ्वी पर स्वस्थ्य जीवन के अस्तित्व के लिए वर्तमान परिस्थितियाँ बहुत ही चुनौतिपूर्ण है। बहुत से आसान तरीकों को अपनाकर हम अपने ग्रह को बचा सकते हैं हालांकि, यह अच्छी आदतों को अपनाने वाले लोगों की लगन और दर पर निर्भर करता है। इसके लिए पर्यावरण के अनुकूल तकनीकियों को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि वे ग्रह को हानि नहीं पहुंचाए। लोगों को हानिकारक चीजों के प्रयोग की आदत में कमी के साथ ही कम मात्रा में कचरे की उत्पत्ति के लिए वस्तुओं के पुनः प्रयोग की आदत को अपनाना चाहिए।

आमतौर पर, बहुत से लोग अपने घरों को साफ और कीटाणु रहित रखने के लिए बहुत से घरों को साफ रखने वाले रसायनों का प्रयोग करते हैं। वे उस द्रव्य में रसायनिक तत्वों की उपस्थिति को कभी भी नहीं देखते हैं, जो पानी, मिट्टी और वायु के लिए बहुत विनाशकारी हो सकते हैं। हमें अपने दैनिक जीवन में प्रयोग करने वाले पदार्थों के बारे में स्पष्ट ज्ञान होना चाहिए और सदैव पर्यावरण के अनुकूल सफाई उत्पादों का प्रयोग करना चाहिए। प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग आमतौर पर वाणिज्यिक उद्योगों के द्वारा बड़े स्तर पर फैलाए जा रहे हैं। उन्हें प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार के द्वारा बनाए गए नियमों और कानूनों का पालन करना चाहिए। उन्हें वातावरण को प्रदूषित करने वाले व्यवसायिक उत्पादों को सीमित करके पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों के उत्पादन में शामिल होना चाहिए।

युवाओं में पृथ्वी बचाओ से संबंधित जागरुकता को बढ़ावा देने के संदर्भ में उनके अध्ययन में यह विषय शामिल करना चाहिए। उन्हें पर्यावरण के बारे में जागरुकता लाने के लिए स्कूल या कॉलेजों में आयोजित वृक्षारोपण करने, समूह चर्चा, निबंध लेखन, वाद-विवाद, बैनर बनाने, नारे लिखने, निर्धारित विषय पर आधारित नाट्य प्रदर्शन आदि में भाग लेना चाहिए। पृथ्वी को बचाने के सन्दर्भ में लोगों के बीच में जागरुकता लाने के लिए पृथ्वी दिवस हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है।

पृथ्वी बचाओ पर निबंध 5 (450 शब्द) Essay On Save Earth

परिचय

पृथ्वी इस ब्रह्मांड में सबसे ज्ञात ग्रह है, जहाँ जीवन संभव है, क्योंकि इसके पास जीवन के लिए आवश्यक सभी चीजें हैं। हमें यहाँ स्वस्थ जीवन की निरंतरता के लिए हमारी धरती माता की प्राकृतिक गुणवत्ता को बनाए रखने की आवश्यकता है। पृथ्वी बचाओ, पर्यावरण बचाओ और पृथ्वी बचाओ, जीवन बचाओ, दोनों ही नारे लोगों के बीच में पृथ्वी बचाओ अभियान के सन्दर्भ में जागरुकता लाने के लिए बहुत प्रसिद्ध है। पृथ्वी की स्थिति दिन प्रति दिन प्रदूषण, ग्रीन हाउस प्रभाव आदि के कारण नष्ट हो रही है। यह वातावरण पर हानिकारक प्रभाव पैदा करते हैं और इस प्रकार से, मनुष्य के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। पृथ्वी को साफ, स्वच्छ और प्राकृतिक रखने की जिम्मेदारी मनुष्य की है।

अपनी पृथ्वी को कैसे बचाया जाए

पृथ्वी को बचाने के कुच प्रभावी तरीके निम्नलिखित है:

  • हमें पानी को बर्बाद नहीं करना चाहिए और केवल अपनी आवश्यकता के अनुसार प्रयोग करना चाहिए। हमें केवल गंदे कपड़ों को ही ठंडे पानी में धोना चाहिए। इस तरह से, हम प्रति दिन कई गैलन पानी बचा सकते हैं।
  • लोगों को निजी कारों को साझा करना चाहिए और आमतौर पर, ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहनों का प्रयोग करना चाहिए।
  • स्थानीय क्षेत्रों में कार्य करने के लिए लोगों को साइकिल का प्रयोग करना चाहिए।
  • लोगों को 3R तरीकों अर्थात् रीसाइकिल, रीयूज और रीडियूस का पालन करना चाहिए।
  • लोगों को प्राकृतिक उर्वरकों का निर्माण करना चाहिए, जो फसलों के लिए सबसे अच्छे उर्वरक होते हैं।
  • हमें आम बल्बों के स्थान पर कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट प्रकाश बल्ब (सीएफएल) का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि, इनकी अवधि ज्यादा होती है और बिजली का बहुत कम एक तिहाई भाग प्रयोग करते हैं, जो बिजली के प्रयोग और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करेगी।
  • हमें बिना जरुरत के बिजली के हीटर और एयर कंडीशनर का अनावश्यक प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • हमें समय-समय पर अपने निजी वाहनों की मरम्मत करानी चाहिए और प्रदूषण को कम करने के लिए बेहतर तरीके से चलाने चाहिए।
  • हमें बिजली का प्रयोग कम करने के लिए लाइट, पंखों और अन्य बिजली के उपकरणों को बन्द कर देना चाहिए।
  • हमें प्रदूषण और ग्रीन हाउस गैस के प्रभाव को कम करने के लिए अपने आसपास के क्षेत्रों में अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए।

पृथ्वी दिवस क्या है

पर्यावरण प्रोजेक्ट के अन्तर्गत पृथ्वी को बचाने के लिए 1970 से हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला दिन पृथ्वी दिवस है। इस प्रोजेक्ट को शुरु करने का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ वातावरण में रहने के लिए प्रोत्साहित करना है।

निष्कर्ष

पृथ्वी हमारी माता है, जो हमें हमारे जीवन के लिए आवश्यक सभी वस्तुएं देती है। इसलिए, हम इसकी प्राकृतिक गुणवत्ता और हरे-भरे वातावरण को बनाए रखने के लिए भी जिम्मेदार है। हमें छोटे लाभों के लिए इसके प्राकृतिक संसाधनों को बर्बाद और प्रदूषित नहीं करना चाहिए।


 

पृथ्वी बचाओ पर निबंध 6 (500 शब्द) Essay On Save Earth

परिचय

पृथ्वी बचाओ, पर्यावरण बचाओ दोनों ही पृथ्वी पर जीवन को बचाने से संबंधित है। एक मनुष्य होने के नाते, हमें प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग को कम करने वाली गतिविधियों में सख्ती से शामिल होना चाहिए।

पृथ्वी को बचाने के आसान तरीके

ऐसे बहुत से आसान तरीके हैं, जो पृथ्वी को बचाने में सहायक हो सकते हैं। पृथ्वी पूरे सौर मंडल में केवल एकमात्र ग्रह है, जिस पर जीवन संभव है। प्राचीन समय में, लोग विनाशकारी कार्यों में शामिल नहीं थे, इसलिए, उन्हें प्रदूषण और पर्यावरणीय मुद्दों पर चिन्तित होने की आवश्यकता नहीं थी। जनसंख्या विस्फोट के बाद, लोगों ने आधुनिक जीवन-शैली और सभी के लिए आसान जीवन के लिए शहरों और उद्योगों का विकास करना शुरु किया। औद्योगिकीकरण के लिए, लोगों ने एक निश्चित सीमा से बढ़कर प्राकृतिक संसाधनों का गलत प्रयोग करना शुरु कर दिया है। लोग वनों के उन्मूलन में शामिल है, जिसके परिणामस्वरुप जंगली जानवरों का विलुप्त होना, प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग जैसे मुद्दे बढ़े हैं। ओजोन परत में छेद, समुद्री स्तर का बढ़ना, अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड में बर्फ का पिघलना आदि ग्लोबल वार्मिंग के कारण होने वाले नकारात्मक प्रभाव है। इस तरह से पर्यावरणीय परिवर्तन हमारे लिए खतरे की घंटी का संकेत है। पृथ्वी बचाने के सन्दर्भ में कुछ निम्नलिखित तरीके हैं:

  • हमें वनीकरण और पुनःवृक्षारोपण के माध्यम से जंगलों को बढ़ाना चाहिए। हजारों प्रजातियाँ और पक्षियों के आवासों के नष्ट होने के कारण विलुप्त हो गई हैं। वे प्रकृति में भोजन श्रृंखला को सन्तुलित करने के लिए बहुत आवश्यक है।
  • हमारे वातावरण में वनों के उन्मूलन, औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, और प्रदूषण के परिणामस्वरुप निरंतर गिरावट आ रही है। यह कार्बन डाई ऑक्साइड और अन्य ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के कारण ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण के माध्यम से जीवन के लिए खतरा है। हमें अपने वातावरण के प्राकृतिक चक्र को संतुलित करने के लिए पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए।
  • हमें पृथ्वी को बचाने के लिए अपने अप्राकृतिक जीवन में अधिक से अधिक बड़े बदलावों को लाने की आवश्यकता है।
  • वातावरण में पारिस्थितिक सन्तुलन को बनाए रखने के लिए शहरों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की आवश्यकता है।
  • सभी देशों की सरकारों को वैश्विक परिवर्तन लाने के लिए एक साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।

पृथ्वी बचाओ अभियान की आवश्यकता क्यों

निरंतर बढ़ते वैश्विक तापमान, ध्रुवीय क्षेत्रों की बर्फ के पिघलने, सुनामियों, बाढ़ों और सूखे के बढ़ते हुए खतरों आदि से पृथ्वी को बचाना तत्कालीन अनिवार्यता है। हमारी धरती माता की स्थिति दिन प्रति दिन गिरती जा रही है, जो स्वस्थ्य जीवन के अवसरों को कम रही है। पृथ्वी जीवित रहने के लिए आवश्यक सभी आधारभूत तत्वों के लिए महत्वपूर्ण स्रोत है। गलत मानवीय गतिविधियों ने बहुत से पर्यावरणीय मुद्दों: विषाक्त धूंआ, रासायनिक कचरे और अत्यधिक शोर को जन्म दिया है।

निष्कर्ष

सरकार ने पृथ्वी बचाओ, जीवन बचाओ और पृथ्वी बचाओ, पर्यावरण बचाओ के सन्दर्भ में पृथ्वी पर स्वस्थ जीवन को निरंतर रखने के लिए बहुत से प्रभावी कदमों को उठाया है। पृथ्वी के बिना पूरे ब्रह्मांड में कहीं भी जीवन संभव नहीं है। मानव की प्राकृतिक संसाधनों का विनाश करने वाली गतिविधियाँ पृथ्वी के वातावरण को बहुत बुरी तरह से प्रभावित कर रही है। इसलिए, यह हमारी स्वंय की जिम्मेदारी है कि, हम पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों को अपनाकर पृथ्वी को बचाएं।

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध-Essay On Noise Pollution -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध-Essay On Noise Pollution -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi Here we are providing you  this essay in hindi हिन्दी निबंध ध्वनि प्रदूषण पर निबंध-Essay On Noise Pollution -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi   which will help in hindi essays for class 4, hindi essays for class 10,  hindi essays for class 9,  hindi essays for class 7, hindi essays for class 6, hindi essays for class 8.

भारत में ध्वनि प्रदूषण कई मायनों में मानव जीवन को प्रभावित करने वाली कई बड़ी समस्याओं में से एक बन गया है। हमें ध्वनि प्रदूषण के कारकों, प्रभावों और सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण इसके प्रभावों को रोकने के उपायों को जानना चाहिये। स्कूल के बच्चों को सामान्य तौर यह विषय किसी भी प्रतियोगिता में जैसे निबंध लेखन प्रतियोगिता आदि में अपने विचारों को लिखने के लिये दिया जाता है। हम नीचे कुछ आसानी से लिखे ध्वनि प्रदूषण के निबंध विभिन्न समय सीमाओं में उपलब्ध करा रहे हैं। आप अपनी जरुरत और आवश्यकता के अनुसार कोई भी निबंध चुन सकते हैं।

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध (नॉइज़ पोल्लुशन एस्से) Essay On Noise Pollution

You can find below some essays on Noise Pollution in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, 400 and 800 words.

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 1 (100 शब्द) Essay On Noise Pollution

ध्वनि प्रदूषण को पर्यावरण प्रदूषण के रुप में पर्यावरण को बड़े स्तर पर विभिन्न स्त्रोतों के माध्यम से हानि पहुंचाने वाले तत्वों के रुप में माना जाता है। ध्वनि प्रदूषण को ध्वनि अव्यवस्था के रुप में भी जाना जाता है। अत्यधिक शोर स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होता है और मानव या पशु जीवन के लिए असंतुलन का कारण है। यह भारत में व्यापक पर्यावरणीय मुद्दा है जिसे सुलझाने के लिये उचित सतर्कता की आवश्यकता है, हालांकि, यह जल, वायु, मृदा प्रदूषण आदि से कम हानिकारक है।

बाहरी शोर मशीनों, परिवहन व्यवस्था, खराब शहरी योजना (साइड वाई साइड औद्योगिक और रिहायशी इमारतों का निर्माण) आदि के द्वारा होता है। इंडोर शोर के स्रोत घरेलू मशीनों, निर्माण गतिविधियों, तेज आवाज में संगीत, आदि के द्वारा होता है। ध्वनि प्रदूषण के कारण सबसे ज्यादा हानि कान के पर्दे खराब हो जाने के कारण हमेशा के लिये सुनने की क्षमता का चले जाना है।

ध्वनि प्रदूषण

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 2 (150 शब्द) Essay On Noise Pollution

ध्वनि के सामान्य स्तर को दैनिक जीवन में बनाये रखना बहुत आवश्यक है, हालांकि, अवांछित शोर या ध्वनि जो लोगों, जानवरों या पेड़-पौधों के द्वारा असहनीय होती है पर्यावरण में ध्वनि प्रदूषण का कारण बनती है। शोर को सामान्यतः कई औद्योगिक या गैर औद्योगिक स्त्रोतों के द्वारा अवांछित आवाज को कहा जाता है जो हमारे चारों ओर दैनिक जीवन में उत्पन्न होती है। उच्च स्तर ध्वनि अप्रिय प्रभाव पैदा करती है और विशेष रूप से कानों के स्वास्थ्य को असुविधा उत्पन्न करती है।

अवांछित आवाज हमारी दैनिक दिनचर्या की गतिविधियों में जैसे; रात को सोना, वार्तालाप करते समय, सुनने की क्षमता, आराम करने, आदि में व्यवधान उत्पन्न करती है। जलीय जीव भी समुद्र में पनडुब्बियों और बड़े जहाजों के द्वारा उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण से प्रभावित होते हैं। जंगली जानवर भी लकड़ी की कम्पनियों के द्वारा चैन-शो संचालन (बहुत ज्यादा शोर उत्पन्न करने वाली) के दौरान उत्पन्न आवाज से बहुत अधिक प्रभावित होते हैं। ध्वनि प्रदूषण के सामान्य स्त्रोत घरेलू गैजेट, परिवहन के साधन, जेट प्लेन्स, हैलिकॉप्टर, औद्योगिक मशीनों से निकलने वाली आवाज आदि है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, उद्योगों को अपनी उत्पादन आवाज 75डीबी तक सीमित करनी चाहिये।

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 3 (200 शब्द) Essay On Noise Pollution

ध्वनि प्रदूषण वो प्रदूषण है जो उच्च और असुरक्षित स्तर तक ध्वनि के कारण पर्यावरण में लोगों में बहुत सी स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का, पशुओं, पक्षियों और पेड़ों आदि की असुरक्षा का कारण बनता है। ध्वनि प्रदूषण से होने वाली बहुत ही सामान्य समस्या बीमारी से संबंधी चिन्ता, बेचैनी, बातचीत करने में समस्या, बोलने में व्यवधान, सुनने में समस्या, उत्पादकता में कमी, सोने के समय व्यवधान, थकान, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, घबराहट, कमजोरी, ध्वनि की संवेदन शीलता में कमी जिसे हमारे शरीर की लय बनाये रखने के लिये हमारे कान महसूस करते हैं, आदि। यह लंबी समयावधि में धीरे-धीरे सुनने की क्षमता को कम करता है। ऊंची आवाज में लगातार ढोल की आवाज सुनने से कानों को स्थायी रुप से नुकसान पहुंचता है।

उच्च स्तर की ध्वनि उपद्रव, चोट, शारीरिक आघात, मस्तिष्क में आन्तरिक खून का रिसाव, अंगों में बड़े बुलबुले और यहां तक कि समुद्री जानवरों मुख्यतः व्हेल और डॉलफिन आदि की मृत्यु का कारण बनती है क्योंकि वो बातचीत करने, भोजन की खोज करने, अपने आपको बचाने और पानी में जीवन जीने के लिये अपने सुनने की क्षमता का ही प्रयोग करती हैं। पानी में शोर का स्त्रोत जल सेना की पनडुब्बी है जिसे लगभग 300 माल दूरी से महसूस किया जा सकता है। ध्वनि प्रदूषण के परिणाम बहुत अधिक खतरनाक है और निकट भविष्य में चिंता का विषय बन रहे हैं। ध्वनि प्रदूषण के कई निवारक उपाय हैं जैसे, उद्योगों में साउड प्रूफ कमरों के निर्माण को बढ़ावा देना, उद्योग और कारखानें आवासीय इमारत से दूर होनी चाहिए, मोटरसाइकिल के खराब हुये पाइपों की मरम्मत, शोर करने वाले वाहनों पर प्रतिबंध, हवाई अड्डों, बस, रेलवे स्टेशनों और अन्य परिवहन टर्मिनलों का आवासीय स्थलों से दूर होना चाहिए, शैक्षणिक संस्थानों और हॉस्पिटल्स के आसपास के इलाकों को आवाज-निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया जाये, सड़को पर शोर के कारण उत्पन्न होने वाले ध्वनि प्रदूषण को अवशोषित करने के लिये रिहायसी इलाकों के आस-पास हरियाली लगाने की अनुमति देनी चाहिये।


 

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 4 (250 शब्द) Essay On Noise Pollution

वातावरण में ध्वनि प्रदूषण तेज वांछित आवाज के कारण होता है जो दर्द का कारण बनता है। ध्वनि प्रदूषण के कुछ मुख्य स्त्रोत सड़क पर यातायात के द्वारा उत्पन्न शोर, निर्माणकार्य (भवन, सड़क, शहर की गलियों, फ्लाई ओवर आदि) के कारण उत्पन्न शोर, औद्योगिक शोर, दैनिक जीवन में घरेलू उत्पादकों (जैसे घरेलू सामान, रसोइ घर का सामान, वैक्यूम क्लीनर, कपड़े धोने की मशीन, मिक्सी, जूसर, प्रेसर कूकर, टीवी, मोबाइल, ड्रायर, कूलर आदि) से उत्पन्न शोर, आदि हैं।

कुछ देशों में (बहुत अधिक जनसंख्या वाले शहर जैसे भारत आदि) खराब शहरी योजना ध्वनि प्रदूषण में मुख्य भूमिका निभाती है क्योंकि इसकी योजना में बहुत छोटे घरों का निर्माण किया जाता है जिसमें कि संयुक्त बड़े परिवार के लोग एक साथ रहते हैं (जिसके कारण पार्किंग के लिये झगड़ा, आधारभूत आवश्यकताओं के लिये झगड़ा होता है आदि।), जो ध्वनि प्रदूषण का नेतृत्व करता है। आधुनिक पीढ़ी के लोग पूरी आवाज में गाना चलाते हैं और देर रात तक नाचते हैं जो पड़ौसियों के लिये बहुत सी शारीरिक और मानसिक समस्याओं का कारण बनता है। अधिक तेज आवाज सामान्य व्यक्ति की सुनने की क्षमता को हानि पहुँचाती है। अधिक तेज आवाज धीरे-धीरे स्वास्थ्य को प्रभावित करती है और एक धीरे जहर के रुप में कार्य करती है।

यह जंगली जीवन, पेड़-पौधों के जीवन और मनुष्य जीवन को बहुत बड़े पैमाने पर प्रभावित करती है। सामान्यतः, हमारे कान एक निश्चित ध्वनि की दर को बिना कानों को कोई हानि पहुंचाये स्वीकार करते हैं। हालांकि, हमारे कान नियमित तेज आवाज को सहन नहीं कर पाते और जिससे कान के पर्दें बेकार हो जाते हैं जिसका परिणाम अस्थायी या स्थायी रुप से सुनने की क्षमता की हानि होता है। इसके कारण और भी कई परेशानी होती हैं जैसे: सोने की समस्या, कमजोरी, अनिद्रा, तनाव, उच्च रक्त दाब, वार्तालाप समस्या आदि।

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 5 (300 शब्द) Essay On Noise Pollution

पर्यावरण में बहुत प्रकार के प्रदूषण हैं, ध्वनि प्रदूषण, उनमें से एक है, और स्वास्थ्य के लिये बहुत खतरनाक है। यह बहुत ही खतनराक हो गया है कि इसकी तुलना कैंसर आदि जैसी खतरनाक बीमारियों से की जाती है, जिससे धीमी मृत्यु निश्चित है। ध्वनि प्रदूषण आधुनिक जीवन और बढ़ते हुये औद्योगिकीकरण व शहरीकर का भयानक तौहफा है। यदि इसे रोकने के लिये नियमित और कठोर कदम नहीं उठाये गये तो ये भविष्य की पीढियों के लिये बहुत गंभीर समस्या बन जायेगा। ध्वनि प्रदूषण वो प्रदूषण है जो पर्यावरण में अवांछित ध्वनि के कारण उत्पन्न होता है। यह स्वास्थ्य के लिये बहुत बड़ा जोखिम और बातचीत के समय समस्या का कारण बनता है।

उच्च स्तर का ध्वनि प्रदूषण बहुत से मनुष्यों के व्यवहार में चिडचिड़पन लाता है विशेषरुप से रोगियों, वृद्धों और गर्भवति महिलाओं के व्यवहार में। अवांछित तेज आवाज बहरेपन और कान की अन्य जटिल समस्याओं जैसे, कान के पर्दों का खराब होना, कान में दर्द, आदि का कारण बनती है। कभी-कभी तेज आवाज में संगीत सुनने वालों को अच्छा लगता है, बल्कि अन्य लोगों को परेशान करता है। वातावरण में अनिच्छित आवाज स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होती है। कुछ स्त्रोत ऐसे है जो ध्वनि प्रदूषण में मुख्य रुप से भाग लेते हैं जैसे उद्योग, कारखानें, यातायात, परिवहन, हवाई जहाज के इंजन, ट्रेन की आवाज, घरेलू उपकरणों की आवाज, निर्माणकार्य आदि।

60 डीबी आवाज को सामान्य आवाज माना जाता है, हालांकि, 80 डीबी या इससे अधिक आवाज शारीरिक दर्द का कारण और स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होती है। वो शहर जहां ध्वनि की दर 80 डीबी से अधिक हैं उनमें से दिल्ली (80 डीबी), कोलकत्ता (87 डीबी), मुम्बई (85 डीबी), चेन्नई (89 डीबी) आदि हैं। पृथ्वी पर जीवन जीने के लिये अपने स्तर पर शोर को सुरक्षित स्तर तक कम करना बहुत आवश्यक हो गया है क्योंकि अवांछित शोर मनुष्यों, पेड़-पौधो, और जानवरों के भी जीवन को प्रभावित करता है। ये लोगों में ध्वनि प्रदूषण, इसके मुख्य स्त्रोत, इसके हानिकारक प्रभावों के साथ ही इसे रोकने के उपायों बारे में सामान्य जागरुकता लाकर संभव किया जा सकता है।


 

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 6 (400 शब्द) Essay On Noise Pollution

ध्वनि प्रदूषण

ध्वनि प्रदूषण उस स्थिति में उत्पन्न होता है जब पर्यावरण में आवाज का स्तर सामान्य स्तर से बहुत अधिक होता है। पर्यावरण में अत्यधिक शोर की मात्रा जीने के उद्देश्य से असुरक्षित है। कष्टकारी आवाज प्राकृतिक सन्तुलन में बहुत सी परेशानियों का कारण बनती है। तेज आवाज या ध्वनि अप्राकृतिक होती है और अन्य आवाजों के बाहर जाने में बाधा उत्पन्न करती है। आधुनिक और तकनीकी के इस संसार में, जहां सब कुछ घर में या घर के बाहर बिजली के उपकरणों से संभव है, ने तेज ध्वनि के खतरे के अस्तित्व में वृद्धि कर दी है।

भारत में औद्योगिकीकरण और शहरीकरण की बढ़ती हुई मांग लोगों में अवांछित आवाज के प्रदर्शन का कारण हैं। रणनीतियों का समझना, योजना बनाना और उन्हें प्रयोग करना ध्वनि प्रदूषण को रोकना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वो आवाज जिसका हम प्रतिदिन निर्माण करते हैं जैसे, तेज संगीत सुनना, टीवी, फोन, मोबाइल का अनावश्यक प्रयोग, यातायात का शोर, कुत्ते का भौंकना, आदि ध्वनि उत्पन्न करने वाले स्त्रोत शहरी जीवन का एक अहम हिस्सा होने के साथ ही सबसे ज्यादा परेशान करने वाले, सिर दर्द, अनिद्रा, तनाव आदि कारण बनता हैं। ये चीजें दैनिक जीवन के प्राकृतिक चक्र को बाधित करती हैं, वो खतरनाक प्रदूषक कहलाते हैं। ध्वनि प्रदूषण के स्त्रोत, कारक और प्रभाव निम्नलिखित हैं:

ध्वनि प्रदूषण के कारक या कारण

  • औद्योगिकीकरण ने हमारे स्वास्थ्य और जीवन को खतरे पर रख दिया है क्योंकि सभी (बड़े या छोटे) उद्योग मशीनों का प्रयोग करते हैं जो बहुत ज्यादा मात्रा में तेज आवाज पैदा करती है। कारखानों और उद्योगों में प्रयोग होने वाले अन्य उपकरण (कम्प्रेशर, जेनरेटर, गर्मी निकालने वाले पंखे, मिल) भी बहुत शोर उत्पन्न करते हैं।
  • सामान्य सामाजिक उत्सव जैसे शादी, पार्टी, पब, क्लब, डिस्क, या पूजा स्थल के स्थान मन्दिर, मस्जिद, आदि आवासीय इलाकों में शोर उत्पन्न करते हैं।
  • शहरों में बढ़ते हुए यातायात के साधन (बाइक, हवाई जहाज, अंडर ग्राउंड ट्रेन आदि) तेज शोर का निर्माण करते हैं।
  • सामान्य निर्माणी गतिविधियाँ (जिसमें खानों, पुलों, भवनों, बांधो, स्टेशनों, आदि का निर्माण शामिल है), जिसमें बड़े यंत्र शामिल होते हैं उच्च स्तर का शोर उत्पन्न करते हैं।
  • दैनिक जीवन में घरेलू उपकरणों का उपयोग ध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण है।

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव

  • ध्वनि प्रदूषण से बहुत सी सुनने की समस्याएं (कान के पर्दों का खराब होना और स्थायी रुप से सुनने की क्षमता का ह्रास होना) अवांछित आवाज के कारण होती हैं।
  • यह कानों की ध्वनि संवेदनशीलता को कम करता है जो शरीर नियंत्रित रखने में सहायक होती है।
  • जंगली जानवरों के जीवन को प्रभावित करके उन्हें बहुत आक्रामक बनाता है।

रोकने के उपाय

पर्यावरण में असुरक्षित आवाज के स्तर को नियंत्रित करने के लिये लोगों के बीच में सामान्य जागरुकता को बढ़ाना चाहिये और प्रत्येक के द्वारा सभी नियमों को गंभीरता से माना जाना चाहिये। घर में या घर के बाहर जैसे: क्लब, पार्टी, बार, डिस्को आदि में अनावश्यक शोर उत्पन्न करने वाले उपकरणों के प्रयोग को कम करना चाहिये।


 

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 7 (800 शब्द) Essay On Noise Pollution

ध्वनि प्रदूषण

ध्वनि प्रदूषण वो औद्योगिक या गैर-औद्योगिक क्रियाएं हैं जो मनुष्य, पौधो और पशुओं के स्वास्थ्य पर बहुत से आयामों से विभिन्न ध्वनि स्त्रोतों के द्वारा आवाज पैदा करके प्रभावित करती है। निरंतर बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के स्तर ने वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के जीवन को बड़े खतरे पर रख दिया है। हम नीचे ध्वनि प्रदूषण के स्त्रोतों, प्रभावों और ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिये वैधानिक आयामों पर चर्चा करेंगे।

ध्वनि प्रदूषण के मुख्य स्त्रोत निम्न लिखित हैं

भारत में बहुत अधिक ध्वनि प्रदूषण शहरीकरण, आधुनिक सभ्यता, औद्योगिकीकरण आदि के द्वारा बढ़ा है। ध्वनि का प्रसार औद्योगिक और गैर-औद्योगिक स्त्रोतों के कारण हुआ है। ध्वनि के औद्योगिक स्त्रोतों में तेज गति से काम करने वाली उच्च तकनीकी की बड़ी मशीनें और बहुत से उद्योगों में ऊंची आवाज पैदा करने वाली मशीनें शामिल हैं। ध्वनि पैदा करने वाले गैर-औद्योगिक स्त्रोतों में यातायत के साधन, परिवहन और अन्य मानव निर्मित गतिविधियाँ शामिल हैं। ध्वनि प्रदूषण के कुछ औद्योगिक और गैर-औद्योगिक स्त्रोत नीचे दिये गये हैं:

  • वायु सेना के एयर क्राफ्ट पर्यावरण में बहुत बड़े स्तर पर ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि करते हैं।
  • सड़क पर चलने वाले परिवहन के साधन दिन प्रति दिन मोटर वाहनों जैसे ट्रक, बसों, ऑटो, बाइक, वैयक्तिक कार आदि अधिक आवाज उत्पन्न करने लगें हैं। शहरों की बड़ी इमारतें अपने निर्माण के समय में कुछ समय के लिये अपने आस-पास के क्षेत्र में ध्वनि उत्पन्न करती हैं।
  • विनिर्माण उद्योगों में मोटर और कम्प्रशेर, पंखे आदि के प्रयोग के कारण उत्पन्न औद्योगिक शोर।
  • बड़ी इमारतों, सड़को, हाई-वे, शहर की सड़कों आदि के निर्माण के समय हथौड़े, बुलडोजर, एयर कम्प्रेशर, डम्पिंग ट्रक, लोडर आदि के माध्यम से उत्पन्न निर्माणी ध्वनि।
  • रेल की पटरियों का शोर (ट्रेन के लोकोमोटिव इंजन, सीटी, हार्न, रेलवे फाटक को उठाते और गिराते समय) उच्च स्तर के शोर का निर्माण करने में बहुत प्रभावी होता है क्योंकि ये चरम सीमा की ध्वनि लगभग 120 डीबी से 100 फीट की दूरी तक की आवाज पैदा करते हैं।
  • इमारतों में प्लम्बिंग, जैनरेटर, ब्लोअर, घरेलू उपकरणों, संगीत, एयर कंडीशनर, वैक्यूम क्लिनर, रसोइघर के उपकरण, पंखों और अन्य गतिविधियों के कारण उत्पन्न शोर।
  • ध्वनि प्रदूषण का एक अन्य स्त्रोत विभिन्न किस्मों के पटाखों का त्योहारों और अन्य पारिवारिक उत्सवों के दौरान प्रयोग है।

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव निम्नलिखित हैं

ध्वनि प्रदूषण मनुष्यों, जानवरों और सम्पत्ति के स्वास्थ्य को बहुत अधिक प्रभावित करता है। उनमे से कुछ निम्न है:

  • दिन प्रति दिन बढ़ता ध्वनि प्रदूषण मनुष्यों की काम करने की क्षमता और गुणवत्ता को कम करता है।
  • ध्वनि प्रदूषण थकान के कारण एकाग्रता की क्षमता को बड़े स्तर पर कम करता है।
  • गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक प्रभावित करता है और चिड़चिड़ेपन और गर्भपात का कारण बनता है।
  • लोगों में बहुत सी बीमारियों (उच्च रक्तदाब और मानसिक तनाव) का कारण होता है क्योंकि मानसिक शान्ति को भंग करता है।
  • तेज आवाज काम की गुणवत्ता को कम करती है और जिसके कारण एकाग्रता का स्तर कम होता है।
  • यदि आवाज का स्तर 80 डीबी से 100 डीबी हो तो यह लोगों में अस्थायी या स्थायी बहरेपन का कारण बनता है।
  • यह ऐतिहासिक इमारतों, पुरानी इमारतों, पुलों आदि को हानि पहुंचाता है क्योंकि ये संरचना में बहुत कमजोर होती है और तेज ध्वनि खतरनाक तरंगों का निर्माण करती है जो उनकी दिवारों को हानि पहुंचाती है।
  • पशु अपने मस्तिष्क पर अपना नियंत्रण खो देते हैं और बहुत खतरनाक हो जाते हैं क्योंकि तेज आवाज उनके नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) को प्रभावित करती है।
  • यह पेड़-पौधों को भी प्रभावित करता है और जिसके कारण खराब किस्म का उत्पादन होता है।

ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिये वैधानिक कदम निम्नलिखित है:

  • भारत के संविधान ने जीवन जीने, सूचना प्राप्त करने, अपने धर्म को मानने और शोर करने के अधिकार प्रदान किये हैं।
  • धारा 133 ने नागरिकों को शक्ति प्रदान की हैं कि वो सशर्त और स्थायी आदेश पर पब्लिक प्रदर्शन को हटा सकती है।
  • पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम 1996 के अन्तर्गत ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियम 2000 को ध्वनि प्रदूषण की बढ़ती हुई समस्या को नियंत्रित करने के लिये शामिल किया है।
  • ध्वनि की कमी और तेल की मशीनरी का कारखाना अधिनियम कार्यस्थल पर शोर को नियंत्रित करता है।
  • मोटर वाहन अधिनियम हार्न और खराब इंजन के इस्तेमाल को शामिल करता है।
  • भारतीय दंड संहिता ध्वनि प्रदूषण के द्वारा उत्पन्न स्वास्थ्य और सुरक्षा के मुद्दों से संबंधित है। किसी को भी ट्रोट कानून के अन्तर्गत दंडित किया जा सकता है।

निष्कर्ष

ध्वनि प्रदूषण ने इसके स्त्रोत, प्रभाव और ध्वनि प्रदूषण को रोकने के उपायों के बारे में सामान्य जागरुकता की तत्काल आवश्यकता का निर्माण किया है। कार्यस्थल, शैक्षणिक संस्थान, आवासीय क्षेत्र, अस्पताल आदि स्थानों पर ध्वनि का तेज स्तर रोका जाना चाहिये। युवा बच्चों और विद्यार्थियों को तेज आवाज करने वाली गतिविधियों जैसे; किसी भी अवसर पर तेज आवाज पैदा करने वाले उपकरणों और यंत्रो का प्रयोग आदि में शामिल न होने के लिये प्रोत्साहित किया जाना चाहिये। तेज आवाज करने वाले पटाखों के विशेष अवसरों जैसे; त्योहारों, पार्टियों, शादियों, आदि में प्रयोग को कम करना चाहिये। ध्वनि प्रदूषण से संबंधित विषयों को पाठ्यपुस्तकों में जोड़ा जाये और विद्यालय में विभिन्न गतिविधियों जैसे लेक्चर, चर्चा आदि को आयोजित किया जा सकता है, ताकि नयी पीढ़ी अधिक जागरुक और जिम्मेदार नागरिक बन सके।

मृदा प्रदूषण पर निबंध-Essay On Land Pollution -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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मिट्टी इस धरती पर मौजूद सभी जीव-जन्तुओं के जीवन के लिये बेहद आवश्यक है। लेकिन इंसान अपनी कुछ स्वार्थी गतिविधियों से इसकी गुणवत्ता को बड़े स्तर पर प्रभावित कर रहा है। स्कूली बच्चों को मिट्टी की महत्ता को समझाने के लिये हम यहां पर विभिन्न शब्द सीमाओं में बेहद सरल भाषा के साथ कुछ निबंध उपलब्ध करा रहे हैं। इसका उपयोग विद्यार्थी अपने स्कूली परीक्षा और अन्य प्रतियोगिताओं में अपनी आवश्कतानुसार कर सकता है।

मृदा प्रदूषण पर निबंध (साइल पोल्लुशन एस्से) Essay On Land Pollution

You can get below some essays on Soil Pollution in Hindi language for students in 100, 150, and 200 words.

मृदा प्रदूषण पर निबंध 1 (100 शब्द) Essay On Land Pollution

पृथ्वी पर एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन मिट्टी है जो प्रत्यक्ष रुप से वनस्पतियों और धरती पर मानव जाति तथा पशुओं को अप्रत्यक्ष रुप से सहायता करती है। ये पृथ्वी पर हर जगह उपलब्ध बहुत जटिल तत्व है। उपजाऊ मिट्टी वो मिट्टी है जो फसलों को बढ़ने में मदद करती है। इंसान होने के नाते, हमें अपनी भूमी को सुरक्षित और सभी अशुद्धियों से दूर रखने की जरुरत है। हालांकि, अत्यधिक तकनीकी उन्नति के कारण ये मुमकिन नहीं है।

रसायनिक खादों, कीटनाशक दवाइयाँ, औद्योगिक कचरों आदि के इस्तेमाल के द्वारा छोड़े गये जहरीले तत्वों के माध्यम से मिट्टी प्रदूषित हो रही है जो बुरी तरह से भूमि की उर्वरता को भी प्रभावित कर रहा है। रसायनों के माध्यम से मिट्टी में अवांछनीय बाहरी तत्वों के भारी सघनता की उपलब्धता के कारण मृदा प्रदूषण मिट्टी के पोषकता को कमजोर कर रहा है।

मृदा प्रदूषण

मृदा प्रदूषण पर निबंध 2 (150 शब्द) Essay On Land Pollution

मनुष्यों और प्राकृतिक प्रक्रियाओं के विभिन्न कार्यों के द्वारा कम गुणवत्ता की मृदा प्रदूषित मिट्टी है जो फसल उत्पादन के लिये मिट्टी को अयोग्य बना देता है। बढ़ती मानव जनसंख्या और इंसानी जीवन में उन्नति बड़े स्तर पर मृदा प्रदूषण का कारण है। अत्यधिक मृदा अपरदन, जंगलों को जलाना, फसल उत्पादन में सुधार के लिये रसायनिक खादों का प्रयोग, कीटनाशक (कीटनाशक दवाइयाँ और तृणनाशक), कीटो के उपर नियंत्रण करने के लिये बॉयोसाइड (मैलेथियॉन, डी.डी.टी, डिल्ड्रिन, एनड्रिन, एल्ड्रिन, लिनडेन), शहरी और औद्योगिक कचरा, निक्षालन, वनोन्मूलन, सूखा, अशोधित औद्योगिक जल सिंचाई, जल संलेखन, अत्यधिक सिंचाई आदि मृदा प्रदूषण का मुख्य कारण है। ये देश के शहरी औऱ ग्रामीण क्षेत्रों में दिनों-दिन बहुत तेजी से बढ़ रहा है।

आँकड़ों के अनुसार, ये ध्यान देने योग्य है कि फसल उत्पादन बढ़ाने के लिये 1999 से 2000 तक 18.07 मिलीयन टन द्वारा और 1980 से 81 तक 5.5 मिलियन टन रसायनिक खादों का उपभोग किसानों द्वारा किया गया। ऐसे जहरीले रसायन खाद्य पदार्थों द्वारा मानव शरीर में प्रवेश करते हैं और नये जन्म लिये बच्चे में शारीरिक गड़बड़ी, तंत्रिक ट्यूब कमी होने के द्वारा नुकसान पहुंचाते हैं।

मृदा प्रदूषण पर निबंध 3 (200 शब्द) Essay On Land Pollution

उपजाऊ भूमि की मिट्टी में अत्यधिक सघनता में जहरीले रसायनों (प्रदूषक या दूषणकारी तत्व भी कहा जाता है) की मौजूदगी के कारण प्रदूषित मिट्टी को मृदा प्रदूषण कहते हैं। कुछ संदूषक प्राकृतिक रुप से आ जाते हैं हालांकि ज्यादातर औद्योगिकीकरण और मानव क्रियाओं से उत्पन्न होती है। मृदा प्रदूषण आमतौर पर दो तरीके के होते हैं- जैविक और अजैविक चाहे वो प्राकृतिक या मनुष्यों द्वारा छोड़े गये हों। मृदा प्रदूषण का मुख्य कारण आकस्मिक लीकेज़, छलकन, निर्माण प्रक्रियाओं में, क्षेपण आदि है। मानव द्वारा छोड़े गये जहरीले रसायन से कुल मृदा जहरीलेपन स्तर में बढ़ौतरी हो रही है।

सभी मृदा प्रदूषक उपजाऊ भूमि से मिल जाते हैं और प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रुप से कई प्रकार की बिमारियों का कारण बनती है जैसे साँस संबंधी बीमारी, ब्रोंकाइटिन, अस्थमा, कैंसर आदि। वयस्कों से अधिक बच्चे प्रदूषक मिट्टी से जुड़े होते हैं क्योंकि वो उसी मिट्टी में खेलते हैं जिससे वो कई सारी बिमारियों से ग्रसित हो जाते हैं खासतौर से साँस संबंधी गड़बड़ियों से। बढ़ती जनसंख्या को अधिक अनाज की जरुरत है इसलिये इस जरुरत को पूरा करने के लिये लोग फसल उत्पादन में सुधार के लिये अत्यधिक सघन खाद का प्रयोग कर रहें हैं जो अंतत: भोजन के माध्यम से शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है। मृदा प्रदूषण मिट्टी को जहरीला करने का एक धीमी प्रक्रिया है। हमें मिट्टी की उर्वरता को बरकरार रखने और इसको सुरक्षित रखने के लिये उचित कदम उठाने की आवश्यकता है, जिससे आने वाली पीढ़ी और विभिन्न जीव-जन्तु जीवित रह सके।


 

मृदा प्रदूषण पर निबंध 4 (250 शब्द) Essay On Land Pollution

मृदा प्रदूषण उपजाऊ भूमि की मिट्टी का प्रदूषण है जो कि धीरे-धीरे उर्वरक और औद्योगिकीकरण के उपयोग के कारण दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। आधुनिक समय में पूरी मानव बिरादरी के लिए मृदा प्रदूषण एक बड़ी चुनौती बन गया है। स्वस्थ जीवन को बनाए रखने के लिए मिट्टी सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। जहाँ यह कई छोटे-छोटे जानवरों का घर है वहीँ यह पौधों का जीवन भी है। मिट्टी का मनुष्यों द्वारा जीवन चक्र को बनाए रखने के लिए विभिन्न फसलों के उत्पादन के लिए भी उपयोग किया जाता है। हालांकि मानव आबादी में वृद्धि से जीवन को आराम से जीने के लिए फसलों के उत्पादन और अन्य तकनीकी संसाधनों की आवश्यकता बढ़ जाती है। कई अत्यधिक प्रभावी उर्वरक बाजार में उपलब्ध हैं जो फसल उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए अपने आप को सर्वश्रेष्ठ बताते हैं लेकिन फसल पर इसका छिड़काव करते ही पूरा उर्वर मिट्टी को ख़राब करते हुए प्रदूषण फ़ैला देता हैं।

अन्य कीटनाशकों की किस्में (जैसे फंगीसाइड आदि) भी किसानों द्वारा कीड़े और कवक से अपनी फसलों को बचाने के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। इस प्रकार के कीटनाशक भी बहुत जहरीले होते हैं तथा भूमि और हवा को प्रदूषित करके पर्यावरण में उनके दुष्प्रभावों को फैलाते हैं। मृदा प्रदूषण के अन्य तरीकों में अम्लीकरण, एग्रोकेमिकल प्रदूषण, सेलीनाइजेशन और धातुओं के कचरे द्वारा फैलाया प्रदूषण शामिल है। एसिडिफिकेशन एक सामान्य प्राकृतिक कारण है जो दीर्घकालिक लीचिंग और माइक्रोबियल श्वसन से जुड़ा हुआ है जिससे धीरे-धीरे मिट्टी के जैविक पदार्थ (जैसे ह्यूमिक और फुल्विक एसिड) विघटित होते हैं जो फिर से लीचिंग को उत्तेजित करता है। उपजाऊ भूमि पर अकार्बनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी का प्रदूषण स्तर बढ़ गया है और मिट्टी की उर्वरता कम हो गयी है।

मृदा प्रदूषण पर निबंध 5 (300 शब्द) Essay On Land Pollution

मृदा प्रदूषण उपजाऊ मिट्टी का प्रदूषण है जो विभिन्न जहरीले प्रदूषकों की वजह से मिट्टी की उत्पादकता को कम कर देता है। जहरीले प्रदूषक बहुत खतरनाक होते हैं और मिट्टी के भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। कीटनाशकों, उर्वरक, रसायन, रेडियोधर्मी अपशिष्ट, जैविक खाद, अपशिष्ट भोजन, कपड़े, प्लास्टिक, कागज, चमड़े का सामान, बोतलें, टिन के डिब्बे, सड़े हुए शव आदि जैसे प्रदूषक मिट्टी में मिल कर उसे प्रदूषित करते हैं जो मृदा प्रदूषण का कारण बनता है। लोहा, पारा, सीसा, तांबा, कैडमियम, एल्यूमीनियम, जस्ता, औद्योगिक अपशिष्ट, साइनाइड, एसिड, क्षार आदि जैसे विभिन्न तरह के रसायनों द्वारा उत्सर्जित प्रदूषक मृदा प्रदूषण का कारण बनते हैं। अम्लीय वर्षा भी एक प्राकृतिक कारण है जो मिट्टी की उर्वरता को सीधे प्रभावित करती है।

पहले किसी भी उर्वरक के उपयोग के बिना मिट्टी बहुत उपजाऊ होती थी लेकिन अब एक साथ सभी किसानों ने बढ़ती आबादी से भोजन की अत्यधिक मांग के लिए फसल उत्पादन में वृद्धि हेतु तेज़ी से उर्वरकों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। कीड़ों, कीटों, कवक आदि से फसलों को सुरक्षित करने के क्रम में मजबूत कार्बनिक या अकार्बनिक कीटनाशकों (डीडीटी, बेंजीन, हेक्सा क्लोराइड, अल्द्रिन) हर्बाइसाइड्स, फंगलसाइड, कीटनाशकों आदि के विभिन्न प्रकार का अनुचित, अनावश्यक और सतत उपयोग धीरे-धीरे मिट्टी को ख़राब कर रहा है। इस तरह के रसायनों के सभी प्रकार पौधों के विकास को रोकते हैं, उनका उत्पादन कम करते हैं तथा फलों के आकार को भी कम कर देते हैं जिससे मानव स्वास्थ्य पर अप्रत्यक्ष रूप से बहुत खतरनाक प्रभाव पड़ता है। ऐसे रसायन धीरे-धीरे मिट्टी और फिर पौधों के माध्यम से अंततः जानवरों और मनुष्यों के शरीर तक पहुँच कर खाद्य शृंखला के माध्यम से अवशोषित हो जाते हैं।

खनन और परमाणु प्रक्रिया जैसे स्रोतों से अन्य रेडियोधर्मी अपशिष्ट पानी के माध्यम से मिट्टी तक पहुंच जाता है तथा मृदा और पौधों, पशुओं (चराई के माध्यम से) और मानव (भोजन, दूध, मांस आदि) को प्रभावित करते हैं। इस प्रकार के भोजन को खाने से विकास में कमी होती है और जानवरों और मानवों में असामान्य वृद्धि होती है। आधुनिक दुनिया में औद्योगीकरण में वृद्धि से दैनिक आधार पर अपशिष्टों का भारी ढेर उत्पन्न होता है जो सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से मिट्टी में मिल जाता है और इसे दूषित करता है।


 

मृदा प्रदूषण पर निबंध 6 (400 शब्द) Essay On Land Pollution

मृदा प्रदूषण ताजा और उपजाऊ मिट्टी का प्रदूषण है जो उसमें पनपने वाली फसलों, पौधों, जानवरों, मनुष्यों और अन्य जीवों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। अवांछित पदार्थों और कई स्रोतों से विषाक्त रसायनों के विभिन्न प्रकार अलग-अलग अनुपात में मिलकर पूरी मृदा के प्रदूषण का कारण बनते है। एक बार जब प्रदूषक मिट्टी में मिश्रित हो जाता है तो वह लंबे समय तक मिट्टी के साथ सीधे संपर्क में रहता है। उपजाऊ भूमि में औद्योगिकीकरण और विभिन्न प्रभावी उर्वरकों की बढ़ती खपत से लगातार धरती की मिट्टी संरचना और उसका रंग बदल रहा है जो पृथ्वी पर जीवन के भविष्य के लिए बहुत खतरनाक संकेत है।

उद्योगों और घरेलू सर्किलों द्वारा जारी किए जाने वाले विषाक्त पदार्थों के मिश्रण के माध्यम से पृथ्वी पर सारी उपजाऊ जमीन धीरे-धीरे प्रदूषित हो रही है। मृदा प्रदूषण के प्रमुख स्रोत औद्योगिक अपशिष्ट, शहरी अपशिष्ट, रासायनिक प्रदूषकों, धातु प्रदूषण, जैविक एजेंट, रेडियोधर्मी प्रदूषण, गलत कृषि पद्धतियां आदि है। औद्योगिक प्रक्रियाओं द्वारा जारी औद्योगिक कचरे में कार्बनिक, अकार्बनिक और गैर-बायोडिग्रेडेबल सामग्रियां होती है जिनमें मिट्टी की भौतिक और जैविक क्षमताएँ बदलने की ताकत होती है। यह पूरी तरह से मिट्टी की बनावट और खनिज, बैक्टीरिया और फंगल कालोनियों के स्तर को बदल कर रख देता है।

शहरी अपशिष्ट पदार्थ ठोस अपशिष्ट पदार्थ होते है जिनमे वाणिज्यिक और घरेलू कचरे शामिल होते हैं जो मिट्टी पर भारी ढेर बनाते हैं और मृदा प्रदूषण में योगदान देते हैं। रासायनिक प्रदूषक और धातु प्रदूषक, कपड़ा, साबुन, रंजक, सिंथेटिक, डिटर्जेंट, धातु और ड्रग्स उद्योगों से औद्योगिक अपशिष्ट हैं जो मिट्टी और पानी में लगातार अपने खतरनाक कचरे को डंप कर रहे हैं। यह सीधे मिट्टी के जीवों को

प्रभावित करता है और मिट्टी के प्रजनन स्तर को कम करता है। जैविक एजेंट (जैसे कि बैक्टीरिया, शैवाल, कवक, प्रोटोजोआ और निमेटोड्स, मिलीपैड, केचुएँ, घोंघे आदि जैसे सूक्ष्म जीव) मिट्टी के भौतिक-रासायनिक तथा जैविक वातावरण को प्रभावित करते हैं और मृदा प्रदूषण का कारण बनते हैं।

परमाणु रिएक्टरों, विस्फोटों, अस्पतालों, वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं आदि जैसे स्रोतों से कुछ रेडियोधर्मी प्रदूषक मिट्टी में घुस जाते हैं और लंबे समय तक वहां रहकर मृदा प्रदूषण का कारण बनते हैं। अग्रिम कृषि-प्रौद्योगिकी का उपयोग करने वाली गलत कृषि पद्धति (कीटनाशकों सहित विषाक्त उर्वरकों की भारी मात्रा में उपयोग) से धीरे-धीरे मिट्टी की शारीरिक और जैविक संपत्ति में गिरावट आ जाती है। मृदा प्रदूषण के अन्य स्रोत नगरपालिका का कचरा ढेर, खाद्य प्रसंस्करण अपशिष्ट, खनन प्रथाएं आदि हैं। मृदा प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक है क्योंकि विषाक्त रसायन शरीर में खाद्य श्रृंखला के माध्यम से प्रवेश कर जाते हैं और पूरे आंतरिक शरीर प्रणाली को परेशान करते हैं। मृदा प्रदूषण को कम करने और प्रतिबंधित करने के लिए पर्यावरण संरक्षण कानूनों सहित सभी प्रभावी नियंत्रण उपायों का अनुसरण लोगों द्वारा विशेष रूप से उद्योगपति द्वारा किया जाना चाहिए। ठोस अपशिष्टों के रीसाइक्लिंग और पुन: उपयोग तथा लोगों के बीच जहाँ तक संभव हो सके वृक्षारोपण को भी बढ़ावा देना चाहिए।

जल प्रदूषण पर निबंध-Essay On Water Pollution -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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जल प्रदूषण सभी के लिये एक गंभीर मुद्दा है जो कई तरीकों से मानव जाति को प्रभावित कर रहा है। हम सभी को अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिये इसके कारण, प्रभाव और रक्षात्मक उपाय के बारे में जानना चाहिये। समाज में जल प्रदूषण के बारे में जागरुकता को बढ़ाने के लिये बच्चों को उनके स्कूल और कॉलेजों में कुछ रचनात्मक क्रियाकलापों के माध्यम से समझाने का प्रयास करें। यहां पर जल प्रदूषण पर विभिन्न शब्द सीमाओं और सरल भाषा में कुछ निबंध उपलब्ध करा रहें हैं जो आपके बच्चों को उनके स्कूली परीक्षा और प्रतियोगिता में काफी उपयोगी साबित होगा।

जल प्रदूषण पर निबंध (वाटर पोल्लुशन एस्से) Essay On Water Pollution

You can get here some essays on Water Pollution in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

जल प्रदूषण पर निबंध 1 (100) Essay On Water Pollution

धरती पर जल प्रदूषण लगातार एक बढ़ती समस्या बनती जा रही है जो सभी पहलुओं से मानव और जानवरों को प्रभावित कर रही है। मानव गतिविधियों के द्वारा उत्पन्न जहरीले प्रदूषकों के द्वारा पीने के पानी का मैलापन ही जल प्रदूषण है। कई स्रोतों के माध्यम से पूरा पानी प्रदूषित हो रहा है जैसे शहरी अपवाह, कृषि, औद्योगिक, तलछटी, अपशिष्ट भरावक्षेत्र से निक्षालन, पशु अपशिष्ट और दूसरी मानव गतिविधियाँ। सभी प्रदूषक पर्यावरण के लिये बहुत हानिकारक हैं।

मानव जनसंख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है इसलिये उनकी ज़रुरत और प्रतियोगिता प्रदूषण को बड़े स्तर पर ले जा रही है। यहाँ जीवन की संभावना को जारी रखने के साथ ही धरती के जल को बचाने के लिये हमारी आदतों में कुछ कठोर बदलाव को मानने की ज़रुरत है।

जल प्रदूषण

जल प्रदूषण पर निबंध 2 (150) Essay On Water Pollution

जीवन को खतरे में डाल रहा प्रदूषण का एक सबसे खतरनाक और खराब रुप जल प्रदूषण है। जो पानी हम रोज पीते हैं वो बिल्कुल साफ दिखायी देता है हालांकि इसमें तैरते हुए विभिन्न प्रकार के प्रदूषक रहते हैं। हमारी पृथ्वी जल से ढकी हुई है (लगभग पूरे भाग का 70%) इसलिये इसमें छोटा सा बदलाव भी पूरे विश्वभर के जीवन को प्रभावित कर सकता है। कृषि क्षेत्र से आने वाले प्रदूषकों के द्वारा सबसे बड़े स्तर का जल प्रदूषण होता है क्योंकि वहाँ फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिये खाद, कीटनाशक दवाईयाँ आदि का अत्यधिक प्रयोग किया जा रहा है।

हमें कृषि में इस्तेमाल होने वाले रसायनों में बड़े सुधार करने की ज़रुरत है। जल को प्रदूषित करने का तेल एक दूसरा बड़ा प्रदूषक है। ज़मीन और नदियों से तेल रिसना, पानी के जहाजों से तेल परिवहन, जहाजों का दुर्घटनाग्रस्त होने आदि से समुद्र में फैलने वाला तेल पूरे जल को प्रभावित करता है। महासागर या समुद्री जल में बारिश के पानी के माध्यम से हवा से दूसरे हाईड्रोकार्बन कण नीचे बैठ जाते हैं। अपशिष्ट भरावक्षेत्र, पुरानी खदानें, कूड़े का स्थान, सीवर, औद्योगिक कचरा और कृषिक्षेत्र में लीकेज़ से जल में इनका जहरीला कचरा मिल जाता है।

जल प्रदूषण पर निबंध 3 (200) Essay On Water Pollution

धरती पर ताजे पानी का स्तर हर दिन घटता ही जा रहा है। पृथ्वी पर पीने के पानी की उपलब्धता सीमित है जबकि वो भी इंसानों की गलत गतिविधियों की वजह से प्रदूषित हो रही है। ताजे पीने के पानी के अभाव में धरती पर जीवन की संभावना का आकलन करना बहुत कठिन है। जल की उपयोगिता और गुणवत्ता का गिरना जल में कार्बनिक, अकार्बनिक, जैविक और रेडियोलॉजिकल के माध्यम से बाहरी तत्वों का मिलना जल प्रदूषण है।

खतरनाक प्रदूषक नुकसानदायक रसायन, घुले हुए गैस, प्रसुप्त पदार्थ, घुले हुए मिनरल्स और कीटाणु सहित अशुद्धि के विभिन्न प्रकार लिये रहता है। सभी प्रदूषक पानी में घुले हुए ऑक्सीजन की मात्रा को घटा देता है और इंसान और जानवर को बड़े स्तर पर प्रभावित करता है। पौधों और जानवरों के जीवन को जारी रखने के लिये जलीय तंत्र के द्वारा जरुरी पानी में मौजूद ऑक्सीजन घुला हुआ ऑक्सीजन होता है। हालांकि कार्बनिक पदार्थों के कचरे का ऑक्सीकरण करने लिये वायुजीवी सूक्ष्मजीव के द्वारा ज़रुरी ऑक्सीजन जैव-रसायनिक ऑक्सीजन है। जल प्रदूषण दो कारणों से होता है, एक प्राकृतिक प्रदूषण (चट्टानों के निक्षालन से, कार्बनिक पदार्थों का अपक्षय, मरे जीवों का अपक्षय, अवसादन, मृदा अपरदन आदि) और दूसरा मानव जनित जल प्रदूषण (वन कटाई, जलीय स्रोतों के पास उद्योग लगाना, औद्योगिक कचरों का उच्च स्तर का उत्सर्जन, घरेलू सीवेज़, सिन्थेटिक रसायन, रेडियो-धर्मी कचरा, खाद, कीटनाशक दवाई आदि)।


 

जल प्रदूषण पर निबंध 4 (250) Essay On Water Pollution

धरती पर जीवन का सबसे मुख्य स्रोत ताजा पानी है। कोई भी जीव-जन्तु कुछ दिन तक बिना भोजन के गुजार सकता है लेकिन एक मिनट भी बिना पानी और ऑक्सीजन के जीवन की कल्पना करना मुश्किल है। पीने, धोने, औद्योगिक इस्तेमाल, कृषि, स्वीमिंग पूल और दूसरे जल क्रिड़ा केन्द्रों जैसे उद्देश्यों के लिये अधिक पानी की माँग लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण बढ़ रही है। बढ़ती मांग और विलासिता के जीवन की प्रतियोगिता के कारण जल प्रदूषण पूरे विश्व के लोगों के द्वारा किया जा रहा है। कई सारी मानव क्रियाकलापों से उत्पादित कचरा पूरे पानी को खराब करता है और जल में ऑक्सीजन की मात्रा को कम करता है। ऐसे प्रदूषक जल की भौतिक, रसायनिक, थर्मल और जैव-रसायनिक विशेषता को कम करते हैं और पानी के बाहर के साथ ही पानी के अंदर के जीवन को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।

जब हम प्रदूषित पानी पीते हैं, खतरनाक रसायन और दूसरे प्रदूषक शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं और शरीर के सभी अंगों के कार्यों को बिगाड़ देते हैं और हमारा जीवन खतरे में डाल देते हैं। ऐसे खतरनाक रसायन पशु और पौधों के जीवन को भी बुरी तरह से प्रभावित करते हैं। जब पौधे अपनी जड़ों के द्वारा गंदे पानी को सोखते हैं, वो बढ़ना बंद कर देते हैं और मर या सूख जाते हैं। जहाजों और उद्योगों से छलकते तेल की वजह से हजारों समुद्री पक्षी मर जाते हैं। खाद, कीटनाशकों के कृषि उपयोगों से बाहर आने वाले रसायनों के कारण उच्च स्तरीय जल प्रदूषण होता है। जल प्रदूषक की मात्रा और प्रकार के आधार पर जल प्रदूषण का प्रभाव जगह के अनुसार बदलता है। पीने के पानी की गिरावट को रोकने के लिये तुरंत एक बचाव तरीके की ज़रुरत है जो धरती पर रह रहे हरेक अंतिम व्यक्ति की समझ और सहायता के द्वारा संभव है।

जल प्रदूषण पर निबंध 5 (300) Essay On Water Pollution

धरती पर जीवन के लिये जल सबसे ज़रुरी वस्तु है। यहाँ किसी भी प्रकार के जीवन और उसके अस्तित्व को ये संभव बनाता है। जीव मंडल में पारिस्थितिकी संतुलन को ये बनाये रखता है। पीने, नहाने, ऊर्जा उत्पादन, फसलों की सिंचाई, सीवेज़ के निपटान, उत्पादन प्रक्रिया आदि बहुत उद्देश्यों को पूरा करने के लिये स्वच्छ जल बहुत ज़रुरी है। बढ़ती जनसंख्या के कारण तेज औद्योगिकीकरण और अनियोजित शहरीकरण बढ़ रहा है जो बड़े और छोटे पानी के स्रोतों में ढेर सारा कचरा छोड़ रहें हैं जो अंतत: पानी की गुणवत्ता को गिरा रहा है। जल में ऐसे प्रदूषकों के सीधे और लगातार मिलने से पानी में उपलब्ध ओजोन (जो खतरनाक सूक्ष्म जीवों को मारता है) के घटने के द्वारा जल की स्व:शुद्धिकरण क्षमता घट रही है। जल प्रदूषक जल की रसायनिक, भौतिक और जैविक विशेषता को बिगाड़ रहा है जो पूरे विश्व में सभी पौड़-पौधों, मानव और जानवरों के लिये बहुत खतरनाक है। पशु और पौधों की बहुत सारी महत्वपूर्ण प्रजातियाँ जल प्रदूषकों के कारण खत्म हो चुकी है। ये एक वैश्विक समस्या है जो विकसित और विकासशील दोनों देशों को प्रभावित कर रही हैं। खनन, कृषि, मछली पालन, स्टॉकब्रिडींग, विभिन्न उद्योग, शहरी मानव क्रियाएँ, शहरीकरण, निर्माण उद्योगों की बढ़ती संख्या, घरेलू सीवेज़ आदि के कारण बड़े स्तर पर पूरा पानी प्रदूषित हो रहा है।

विभिन्न स्रोतों से निकले जल पदार्थ की विशिष्टता पर निर्भर जल प्रदूषण के बहुत सारे स्रोत हैं (बिन्दु स्रोत और गैर-बिन्दु स्रोत या बिखरा हुआ स्रोत)। उद्योग, सीवेज़ उपचार संयंत्र, अपशिष्ट भरावक्षेत्र, खतरनाक कूड़े की जगह से बिन्दु स्रोत पाइपलाईन, नाला, सीवर आदि सम्मिलित करता है, तेल भण्डारण टैंक से लीकेज़ जो सीधे पानी के स्रोतों में कचरा गिराता है। जल प्रदूषण का बिखरा हुआ स्रोत कृषि संबंधी मैदान, ढेर सारा पशुधन चारा, पार्किंग स्थल और सड़क में से सतह जल, शहरी सड़कों से तूफानी अपवाह आदि हैं जो बड़े पानी के स्रोतों में इनसे निकले हुए प्रदूषकों को मिला देता है। गैर-बिन्दु प्रदूषक स्रोत बड़े स्तर पर जल प्रदूषण में भागीदारी करता है जिसे नियंत्रित करना बहुत कठिन और महँगा है।


 

जल प्रदूषण पर निबंध 6 (400) Essay On Water Pollution

पूरे विश्व के लिये जल प्रदूषण एक बड़ा पर्यावरणीय और सामाजिक मुद्दा है। ये अपने चरम बिंदु पर पहुँच चुका है। राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी), नागपुर के अनुसार ये ध्यान दिलाया गया है कि नदी जल का 70% बड़े स्तर पर प्रदूषित हो गया है। भारत की मुख्य नदी व्यवस्था जैसे गंगा, ब्रह्मपुत्र, सिंधु, प्रायद्वीपीय और दक्षिण तट नदी व्यवस्था बड़े पैमाने पर प्रभावित हो चुकी है। भारत में मुख्य नदी खासतौर से गंगा भारतीय संस्कृति और विरासत से अत्यधिक जुड़ी हुई है। आमतौर पर लोग जल्दी सुबह नहाते हैं और किसी भी व्रत या उत्सव में गंगा जल को देवी-देवताओं को अर्पण करते हैं। अपने पूजा को संपन्न करने के मिथक में गंगा में पूजा विधि से जुड़ी सभी सामग्री को डाल देते हैं।

नदियों में डाले गये कचरे से जल के स्व:पुनर्चक्रण क्षमता के घटने के द्वारा जल प्रदूषण बढ़ता है इसलिये नदियों के पानी को स्वच्छ और ताजा रखने के लिये सभी देशों में खासतौर से भारत में सरकारों द्वारा इसे प्रतिबंधित कर देना चाहिये। उच्च स्तर के औद्योगिकीकरण होने के बावजूद दूसरे देशों से जल प्रदूषण की स्थिति भारत में अधिक खराब है। केन्द्रिय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में गंगा सबसे प्रदूषित नदी है अब जो पहले अपनी स्व शुद्धिकरण क्षमता और तेज बहने वाली नदी के रुप में प्रसिद्ध थी। लगभग 45 चमड़ा बनाने का कारखाना और 10 कपड़ा मिल कानपुर के निकट नदी में सीधे अपना कचरा (भारी कार्बनिक कचरा और सड़ा सामान) छोड़ते हैं। एक आकलन के अनुसार, गंगा नदी में रोज लगभग 1,400 मिलियन लीटर सीवेज़ और 200 मिलियन लीटर औद्योगिक कचरा लगातार छोड़ा जा रहा है।

दूसरे मुख्य उद्योग जिनसे जल प्रदूषण हो रहा है वो चीनी मिल, भट्टी, ग्लिस्रिन, टिन, पेंट, साबुन, कताई, रेयान, सिल्क, सूत आदि जो जहरीले कचरे निकालती है। 1984 में, गंगा के जल प्रदूषण को रोकने के लिये गंगा एक्शन प्लान को शुरु करने के लिये सरकार द्वारा एक केन्द्रिय गंगा प्राधिकारण की स्थापना की गयी थी। इस योजना के अनुसार हरिद्वार से हूगली तक बड़े पैमाने पर 27 शहरों में प्रदूषण फैला रही लगभग 120 फैक्टरियों को चिन्हित किया गया था। लखनऊ के पास गोमती नदी में लगभग 19.84 मिलियन गैलन कचरा लुगदी, कागज, भट्टी, चीनी, कताई, कपड़ा, सीमेंट, भारी रसायन, पेंट और वार्निश आदि के फैक्टरियों से गिरता है। पिछले 4 दशकों ये स्थिति और भी भयावह हो चुकी है। जल प्रदूषण से बचने के लिये सभी उद्योगों को मानक नियमों को मानना चाहिये, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सख्त कानून बनाने चाहिये, उचित सीवेज़ निपटान सुविधा का प्रबंधन हो, सीवेज़ और जल उपचार संयंत्र की स्थापना, सुलभ शौचालयों आदि का निर्माण करना चाहिये।

वायु प्रदूषण पर निबंध-Essay On Air Pollution -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

वायु प्रदूषण पर निबंध-Essay On Air Pollution -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi 

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दिन प्रति दिन पर्यावरण की ताजी हवा विविक्त, जैविक अणुओं, और अन्य हानिकारक सामग्री के मिलने के कारण प्रदूषित हो रही है। इस तरह की प्रदूषित वायु से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, बीमारी और मृत्यु का कारण बनती है। वायु प्रदूषण प्रमुख पर्यावरणीय समस्याओं में से एक है जिस पर ध्यान देने के साथ ही सभी के सामूहिक प्रयासों से सुलझाने की आवश्यकता है। इस विषय पर बच्चों में जागरुकता लाने के लिये, वायु प्रदूषण पर निबंध, निबंध प्रतियोगिता में सबसे महत्वपूर्ण विषय हो गया है। इसलिये, विद्यार्थियों आप आगे बढ़ने के लिये बिल्कुल सही स्थान पर हो। वायु प्रदूषण पर उपलब्ध इस तरह के निबंध आपको निबंध प्रतियोगिता को जीतने में मदद करेंगे क्योंकि ये सभी वायु प्रदूषण पर निबंध हिन्दी भाषा में बहुत ही सरल और साधारण शब्दों में लिखे गये हैं।

वायु प्रदूषण पर निबंध (एयर पोल्लुशन एस्से) -Essay On Air Pollution

You can get here some essays on Air Pollution in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

वायु प्रदूषण पर निबंध 1 (100 शब्द) -Essay On Air Pollution

वायु प्रदूषण वर्तमान समय पूरे विश्व में विशेषरुप से औद्योगिकीकरण के कारण बड़े शहरों में सबसे बड़ी समस्या है। पर्यावरण में धूंध, धुआं, विविक्त, ठोस पदार्थों आदि का रिसाव शहर के वातावरण को संकेन्द्रित करता है जिसके कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी खतरनाक बीमारी हो जाती हैं। लोग दैनिक आधार पर बहुत सा गंदा कचरा फैलाते हैं, विशेषरुप से बड़े शहरों में जो बहुत बड़े स्तर पर शहर के वातावरण को प्रदूषित करने में अपना योगदान देता है।

मोटर साइकिल (बाइक), औद्योगिक प्रक्रिया, कचरे को जलाना आदि के द्वारा निकलने वाला धुआं और प्रदूषित गैसें वायु प्रदूषण में में अपना योगदान देती हैं। कुछ प्राकृतिक प्रदूषण भी जैसे पराग-कण, धूल, मिट्टी के कण, प्राकृतिक गैसें आदि वायु प्रदूषण के स्त्रोत है।

वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण पर निबंध 2 (150 शब्द)

वायु प्रदूषण किसी भी प्रकार के हानिकारक पदार्थों को वातावरण मिलाना है जिससे ताजी हवा, मनुष्य का स्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता आदि बड़े स्तर पर प्रभावित होती है। वायु प्रदूषण दिन प्रति दिन उद्योगों के बढ़ने के कारण बढ़ता जा रहा है। इस तरह की प्रदूषित हवा केवल एक स्थान पर नहीं रहती है, हालांकि पूरे वातावरण में फैल जाती है और पूरे विश्व के लोगों के जीवन को प्रभावित करती है। बहुत सी बीमारियों के बढ़ने के कारण मनुष्य की मृत्यु दर में बहुत ज्यादा वृद्धि हो रही है। प्रदूषित हवा जिसमें हम प्रत्येक क्षण सांस लेते हैं फेंफड़ों के विकारों और यहां तक कि फेफड़ों के कैंसर की भी कारक है, इस प्रकार यह स्वास्थ्य के साथ-साथ अन्य शारीरिक अंगों को भी प्रभावित करती है।

वायु प्रदूषण पूरे पारिस्थितिक तंत्र को लगातार नष्ट करके पेड़-पैधों और पशुओं के जीवन को प्रभावित करने के साथ ही यह अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया है और पृथ्वी पर सूर्य की हानिकारक गर्म विकिरणों को अनुमति देकर पूरे वातावरण को प्रभावित कर रहा है। फिर से प्रदूषित हवा बेहतर इन्सुलेटर के रुप में ऊष्मा को वापस अंतरिक्ष में जाने से रोकती है।

वायु प्रदूषण पर निबंध 3 (200 शब्द)-Essay On Air Pollution

आजकल, वायु प्रदूषण प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दों में से एक है। वायु प्रदूषण के निरंतर बढ़ने के पीछे कई कारण है। सबसे अधिक वायु प्रदूषण ऑटोमोबाइल, परिवहन साधन, औद्योगीकरण, बढ़ते शहरों आदि के कारण हो रहा है। इस तरह के स्त्रोतों से कई हानिकारक गैसों या खतरनाक तत्वों का रिसाव पूरे वायुमंडल को प्रदूषित कर रहा है। वायु प्रदूषण के कारण ओजोन परत भी बहुत अधिक प्रभावित हो रही है जो पर्यावरण में गंभीर व्यवधान का कारण बन रही है। मनुष्य की हमेशा बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण उनकी आवश्यकता में भी वृद्धि हो रही है जो प्रदूषण का मुख्य कारण है। मनुष्य की दैनिक गतिविधियाँ बहुत से खतरनाक रसायनों, वातावरण को गंदा करने का कारण होती है, जो जलवायु में नकारात्मक परिवर्तन के लिये मजबूर करती है।

औद्योगिकीकरण की प्रक्रिया में कई हानिकारक गैसों, कणों, पेंट और बैट्रियों का आक्रामक संचालन, सिगरेट, आदि कार्बन मोनो ऑक्साइड, परिवहन के साधन कार्बन डाई ऑक्साइड और अन्य जहरीले पदार्थों को वातावरण में छोडते हैं। सभी तरह के प्रदूषण पर्यावरण से जुड़े हुये हैं, जो ओजोन परत को हानि पहुँचाकर सूर्य की हानिकारक किरणों पर पृथ्वी पर आमंत्रित करते हैं। वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिये हमें दैनिक आधार पर अपनी क्रिया-कलापों में बड़े स्तर पर परिवर्तन लाने होंगे। हमें वायु प्रदूषण के प्रभावों को कम करने के लिये पेड़ो को नहीं काटना चाहिये, सार्वजिनक परिवहन का प्रयोग करना चाहिये, छिडकाव करने वाली कैनों को वर्जित करना चाहिये और अन्य उन गतिविधियों को करना चाहिये जो वातावरण को प्रदूषित करने वाले तत्वों को रोकने में सहायक हो।


 

वायु प्रदूषण पर निबंध 4 (250 शब्द)-Essay On Air Pollution

वायु प्रदूषण पूरी वायुमंडलीय हवा में बाह्य तत्वों का मिश्रण है। उद्योगों और मोटर वाहनों से उत्सर्जित हानिकारक और बिषैली गैसें मौसम, पेड़-पौधों और मनुष्य सभी को बहुत हानि पहुँचाती हैं। कुछ प्राकृतिक और कुछ मानवीय संसाधन वायु प्रदूषण के कारक हैं। हालांकि सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण मानव गतिविधियों के कारण होता है जैसे: जीवाश्म, कोयला और तेल का जलना, हानिकारक गैसों को छोड़ना और कारखानों और मोटर वाहनों के पदार्थ आदि। इस तरह के हानिकारक रासायनिक तत्व जैसे कार्बन ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड, ठोस पदार्थ आदि ताजी हवा में मिश्रित हो रहे हैं। वायु प्रदूषण का स्तर बहुत बड़े स्तर पर बढ़ा है, जिसका कारण पिछली शताब्दी में मोटर वाहनों की बढ़ती हुई आवश्यकता है, जिससे 69% तक वायु प्रदूषण में वृद्धि की है।

वायु प्रदूषण के अन्य स्त्रोतों में लैंडफिल में कचरे का अपघटन और ठोस पदार्थों के निराकरण की प्रक्रिया से मीथेन गैस (जो स्वास्थ्य के लिये बहुत हानिकारक होता है) का निकलना है। तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या, औद्योगिकीकरण, स्वचलित वाहनों के प्रयोग में वृद्धि, हवाई जहाज आदि ने इस मुद्दे को गंभीर पर्यावरण का मुद्दा बना दिया है। जिस हवा को हम सांस के द्वारा प्रत्येक क्षण लेते हैं, वो पूरी तरह से प्रदूषित है जो हमारे फेफड़ों और पूरे शरीर में रक्त परिसंचरण के माध्यम से जाती है और अनगिनत स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बनती है। प्रदूषित वायु पेड़-पौधों, पशुओं और मनुष्य के लिये प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से नष्ट करने का कारण बनती है। यदि पर्यावरण को सुरक्षित करने वाली नीतियों का गंभीरता और कड़ाई से पालन नहीं किया गया तो वायु प्रदूषण का बढ़ता हुआ स्तर आने वाले दशकों में 1 मिलियन टन वार्षिक के आधार पर बढ़ सकता है।

वायु प्रदूषण पर निबंध 5 (300 शब्द)-Essay On Air Pollution

जब शुद्ध ताजी हवा धूल, धुआं, विषैली गैसों, मोटर वाहनों, मिलों और कारखानों आदि के कारण प्रदूषित होती है, तो उसे वायु प्रदूषण कहते हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि, ताजी हवा स्वस्थ्य जीवन का बहुत महत्वपूर्ण तथ्य है, हमें यह सोचने की जरुरत है, तब क्या होगा जब पूरे वातावरण की वायु गंदी हो जायेगी। सबसे पहले वायु प्रदूषण पूरी मानव जाति के लिये बड़े खेद की बात है। वायु प्रदूषण के कुछ प्रमुख बड़े कारकों में भोले किसानों को द्वारा अपनी फसल की ऊपज को बढ़ाने के लिये विषैले उर्वरकों, कीटनाशकों आदि का प्रयोग है। इन उर्वरकों से रासायनिक और खतरनाक गैसें (अमोनिया) निकलती हैं, और वायु में मिलकर वायु प्रदूषण का कारण बनती है।

जीवाश्म ईधन का जलना जैसे; कोयला, पैट्रोलियम जिसमें अन्य कारखानों के जलावन भी शामिल है, आदि वायु प्रदूषण के मुख्य कारक हैं। मोटर वाहनों और स्वचलित वाहनों से निकलने वाला विभिन्न प्रकार का धुआं जैसे कारों, बसों, बाइक, ट्रक, जीप, ट्रेन, हवाई जहाज आदि भी वायु प्रदूषण का कारण हैं। उद्योगों की बढ़ती संख्या के कारण विषैले औद्योगिक धुएं और हानिकारक गैसें (जैसे कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बनिक यौगिकों, हाइड्रोकार्बन, रसायन, आदि) कारखानों तथा मिलों में से पर्यावरण में छोड़ी जाती हैं। कुछ घरेलू गतिवधियाँ जैसे सफाई करने के लिये अज्ञानतावश सफाई उत्पादकों का प्रयोग करना, कपड़े धोने का पाउडर, पेंट आदि भी बहुत से विषैले रसायनों को वायु में छोड़ता है।

लगातार बढ़ते प्रदूषण के स्तर ने इसके सजीवों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक और हानिकारक प्रभावों को भी बढ़ाया है। वायु प्रदूषण ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने का भी कारण है क्योंकि वातावरण का तापमान ग्रीन हाउस गैसों के स्तर के बढ़ने के कारण ही बढ़ रहा है। ये ग्रीन हाउस गैसें ग्रीन हाउस प्रभाव और बढ़ता हुआ समुद्र का स्तर, ग्लेशियर का पिघलना, मौसम का बदलना, जलवायु का बदलना आदि को फिर से बढ़ाती हैं। बढ़ता हुआ वायु प्रदूषण कई घातक रोगों (कैंसर, हार्टअटैक, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, गुर्दें की बीमारियाँ आदि) और मृत्यु का कारण बन रहा है। बहुत से महत्वपूर्ण पशुओं और पेड़-पौधों की प्रजातियाँ इस ग्रह से पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। पर्यावरण में हानिकारक गैसों का बढ़ना अम्लीय वर्षा और ओजोन परत के क्षरण का कारण बन रहा है।


 

वायु प्रदूषण पर निबंध 6 (400 शब्द)-Essay On Air Pollution

वातावरण की ताजी हवा में हानिकारक और विषैले पदार्थों का लगातार बढ़ना वायु प्रदूषण का कारण है। विभिन्न बाह्य तत्वों, विषाक्त गैसों और अन्य मानवीय क्रियाओं के कारण उत्पन्न प्रदूषण ताजी हवा को प्रभावित करता है जो प्रतिकूलता से फिर मानव जीवन, पेड़-पौधों और पशुओं को प्रभावित करता है। वायु प्रदूषण का स्तर उन सभी प्रदूषणों पर निर्भर करता है जो विभिन्न स्त्रोतों से निकलता है। स्थलाकृति और मौसम की स्थिति प्रदूषण की निरंतरता को बढ़ा रही हैं। उद्योगों में विनिर्माण प्रक्रिया में इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के कच्चे माल से हानिकारक गैसों के उत्सर्जन की मात्रा बढ़ती जा रही है। बढ़ता हुआ जनसंख्या घनत्व और अधिक औद्योगिकीकरण की मांग कर रहा है, जो आखिरकार वायु प्रदूषण का कारण बनता है।

वायु प्रदूषण हानिकारक तरल बूंदों, ठोस पदार्थों और विषाक्त गैसों (कार्बन ऑक्साइड, हलोगेनटेड और गैर- हलोगेनटेड हाईड्रोकार्बन, नाइट्रोजन और सल्फर गैसें, अकार्बनिक पदार्थ, अकार्बनिक और कार्बनिक अम्ल, बैक्टीरिया, वायरस, कीटनाशक आदि) का मिश्रण है, जो सामान्यतः ताजी हवा में नहीं पाये जाते और पेड़-पौधों और पशुओं के जीवन के लिये बहुत खतरनाक है। वायु प्रदूषण दो प्रकार का होता है जोकि प्राकृतिक और मानव निर्मित स्त्रोत है। वायु प्रदूषण के कुछ प्राकृतिक स्रोतों जैसे, ज्वालामुखी विस्फोट, ज्वालामुखी (राख, कार्बन डाइऑक्साइड, धुआं, धूल, और अन्य गैसें), रेत संकुचन, धूल, समुद्र और महासागर की लवणीयता, मिट्टी के कण, तूफान, जंगलों की आग, ब्रह्मांडीय कण, किरण, क्षुद्रग्रह सामग्री की बमबारी, धूमकेतु से स्प्रे , पराग अनाज, कवक बीजाणु, वायरस, बैक्टीरिया आदि है।

वायु प्रदूषण के मानव निर्मित साधन उद्योग, कृषि, ऊर्जा सयंत्र, स्वचलित वाहन, घरेलू स्त्रोत आदि है। मानव निर्मित साधनों से कुछ वायु प्रदूषण जैसे धूम्रपान, धूल, धुएं, पार्टिकुलेट पदार्थ, रसोई से गैस, घरेलू ऊष्मा, विभिन्न वाहनों से निकलने वाला धुआं, कीटनाशकों का उपयोग, खर-पतवार को मारने के लिये प्रयोग की जाने वाली विषाक्त गैसें, ऊर्जा संयत्रों से निकलने वाली ऊष्मा, फ्लाई ऐश आदि से होता है। वायु प्रदूषण की संख्या बढ़ने के कारण इसे दो प्रकार में बांटा गया, प्राथमिक प्रदूषण, और द्वितीयक प्रदूषण। प्राथमिक प्रदूषण वो है जो प्रत्यक्ष रुप से ताजी हवा को प्रभावित करता है और धुआं, राख, धूल, धुएं, धुंध, स्प्रे, अकार्बनिक गैसों, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड, अमोनिया, नाइट्रिक ऑक्साइड और रेडियोधर्मी यौगिकों से उत्सर्जित होता है। द्वितीयक प्रदूषक वो हैं जो वायु को अप्रत्यक्ष रुप प्राथमिक कारकों के साथ रासायनिक क्रिया करके जैसे सल्फर ट्राई ऑक्साइड, ओजोन, हाइड्रोकार्बन, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, आदि से प्रभावित करते हैं।

पूरी दुनिया के लोगों के सामूहिक प्रयासों के द्वारा वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना रिहायशी इलाकों से दूर होनी चाहिए, लम्बी चिमनी का प्रयोग करने के लिये प्रोत्साहित करना चाहिये (फिल्टर और इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर्स के साथ), छोटे तापमान सूचकों के स्थान पर उच्च तापमान संकेतकों को प्रोत्साहन, ऊर्जा के अज्वलनशील स्रोतों का उपयोग करना, पैट्रोल में गैर-नेतृत्वकारी एन्टीनॉक ऐजेंट के प्रयोग को बढ़ावा देना, वृक्षारोपण को बढ़ावा देना और भी बहुत से सकारात्मक प्रयासों को करना।

प्रदूषण पर निबंध-Essay On Pollution -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

प्रदूषण पर निबंध-Essay On Pollution -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi  

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भारत में प्रदूषण एक बड़ी पर्यावरणीय मुद्दा है जिसके बारे में हर किसी को पता होना चाहिए । हमारे बच्चो और कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 व 12 विद्यार्थियों को आम तौर पे स्कूल में प्रदुषण पे निबंध लिखने को दिया जाता है। माता पिता को प्रदुषण के प्रकार, कारण और रोकथाम के बारे में पता होना चाहिए ताकि वो अपने बच्चो को इसके बारे में बता सके|

प्रदूषण पर निबंध (पोल्लुशन एस्से)

You can find here some essays on Pollution in Hindi language for students in 100, 150, 200, 300, 350 and 450 words.

प्रदूषण पर निबंध 1 (100 शब्द)

प्रदूषण प्राकृतिक वातावरण को दूषित करता है जो की हमारे सामान्य जीवन के लिए महत्वूर्ण है| किसी भी प्रकार का प्रदुषण हमारे प्राकृतिक वातावरण और इकोसिस्टम में अस्थिरता, स्वास्थ्य विकार और सामान्य जीवन में असुविधा उत्पन्न करता है| यह प्राकृतिक व्यवस्था को अव्यवस्थित कर देता है और प्रकृति के संतुलन को बिगड़ देता है|

प्रदूषक या प्रदुषण के तत्त्व मनुष्यों द्वाया उत्पन्न किया गया वाह्य पदार्थ या वेस्ट मटेरियल होता है जो की प्राकृतिक संसाधन जैसे की वायु, जल और भूमि आदि को प्रदूषित करते है| प्रदूषक का रासायनिक प्रकृति, सांद्रता और लम्बी आयु इकोसिस्टम को लगातार कई वर्षो से असंतुलित कर रहा है। प्रदूषक जहरीली गैस, कीटनाशक, शाकनाशी, कवकनाशी, ध्वनि, कार्बनिक मिश्रण, रेडियोधर्मी पदार्थ हो सकते है|

प्रदूषण

प्रदूषण पर निबंध 2 (150 शब्द)

प्रदूषण पृथ्वी पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों में कुछ हानिकारक या जहरीले पदार्थ का मिश्रण है। यह इस ग्रह पर रहने वाले जीवों की साधारण जीवन को प्रभावित करता है और प्राकृतिक जीवन चक्र को छति पहुँचाता है। वायु प्रदुषण दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है जिसका मुख्य कारण है बढ़ रही ऑटोमोबाइल की संख्या, ज़हरीली गैसों का रिलीज़, औद्योगिक कंपनियों का धुआं, फाइनली डिसॉल्वड सॉलिड्स और तरल एयरोसौल्ज़ इत्यादि का वातावरण में होना। जिस हवा में हरपल हम साँस लेते है वो हमारे फेफड़ों संबंधी विकार का कारण बनती है।

इस प्रकार भू प्रदुषण और जल प्रदुषण भी विभिन्न कारणों से होता है जैसे की पीने के पानी में सीवेज के पानी (जीवाणु, वायरस व हानिकारक रसायन ग्रसित) का मिश्रण, कुछ खतरनाक एग्रोकेमिकल्स जैसे की कीटनाशक, शाकनाशी, कवकनाशी, ईथर बेंजीन जैसे कार्बनिक मिश्रण, रेडियम और थोरियम सहित कुछ रेडियोधर्मी पदार्थ, ठोस वेस्ट (औद्योगिक राख, कचरा, मलबा) इत्यादि| हमें इसके दुष्प्रभाव से बचने के लिए सरकार द्वारा लागू सभी नियंत्रण के उपायों का पालन करना चाहिए|

प्रदूषण पर निबंध 3 (200 शब्द)

प्रदुषण एक प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दा बन गया है क्योकि यह हर आयु वर्ग के लोगों और जानवरों के लिए स्वास्थ्य का खतरा है। हाल के वर्षों में प्रदूषण की दर बहोत तेजी से बढ़ रही है क्योकि औद्योगिक अपशिष्ट पदार्थ सीधे मिट्टी, हवा और पानी में मिश्रित हो रहीं हैं। हालांकि हमारे देश में इसे नियंत्रित करने के लिए पूरा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसे गंभीरता से निपटने की जरूरत है अन्यथा हमारी आने वाली पीढ़ी बहोत ज्यादा भुगतेगी।

प्रदूषण प्राकृतिक संसाधनों के प्रभाव के अनुसार कई श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है जैसे की वायु प्रदूषण, भू प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण आदि| प्रदूषण की दर इंसान के अधिक पैसे कमाने के स्वार्थ और कुछ अनावश्यक इच्छाओं को पूरा करने की वजह से बढ़ रही है। आधुनिक युग में जहाँ तकनीकी उन्नति को अधिक प्राथमिकता दी जाती है वहां हर व्यक्ति जीवन का असली अनुशासन भूल गया है।

लगातार और अनावश्यक वनो की कटौती, शहरीकरण, औद्योगीकरण के माध्यम से ज्यादा उत्पादन, प्रदूषण का बड़ा कारण बन गया है। इस तरह की गतिविधियों से उत्पन्न हुआ हानिकारक और विषैले कचरा, मिट्टी, हवा और पानी के लिए अपरिवर्तनीय परिवर्तन का कारण बनता है जोकि अंततः हमें दुःख की ओर अग्रसर करता है| यह बड़े सामाजिक मुद्दे को जड़ से खत्म करने और इससे निजात पाने के लिए सार्वजनिक स्तर पर सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम की आवश्यकता है।


 

प्रदूषण पर निबंध 4 (300 शब्द)

प्रदूषण शब्द का अर्थ होता है चीजो को गन्दा करना। तदनुसार प्राकृतिक संसाधनों का प्रदूषण, पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन का कारण बनता है। वर्तमान में हम प्राणघातक रूप से पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से घिरे हुए हैं। प्रदूषण, क़ुदरती प्राकृतिक पर्यावरण की तुलना में बहुत तेज दर से पर्यावरण में किसी भी वाह्य या जहरीले पदार्थ का मिश्रण होता है| इस शैतानीय सामाजिक समस्या के मुख्य कारण हैं औद्योगीकरण, वनों की कटाई और शहरीकरण, प्राकृतिक संसाधन को गन्दा करने वाले उपोत्पाद जो की सामान्य जीवन की दिनचर्या के रूप इस्तेमाल की जाती है|

वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और भू प्रदूषण सबसे खतरनाक प्रदुषण के प्रकार है जो की मानव जाति के लिए प्रतच्छ स्वास्थ विकार है| हमारे पास पिने के लिए स्वच्छ पानी, सांस लेने के लिए शुद्ध हवा, और फसल उगाने ने लिए प्रदुषण रहित भूमि नहीं है। भविष्य में इस ग्रह पर जीवन के अस्तित्व को बनाये रखने के लिए इस व्यापक रूप से फैल रहे प्रदूषण को नियंत्रित करना पड़ेगा। विभिन्न प्रकार के प्रदूषक जो की हमारे प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बिगड़ रहे हैं वे हैं गैस (NO, SO2, CO2, CO, NO2), हैलोजन (आयोडीन, क्लोरीन, ब्रोमीन), जमा पदार्थ (धूल, धुंध, कंकरी), एग्रोकेमिकल्स (इंसेक्टिसाइड, कीटनाशक, शाकनाशी), शोर, फोटोकेमिकल ओक्सिदेंट्स (फोटोकेमिकल स्मोग, पेरॉक्सीएसीटिल नाइट्रेट, ओजोन, नाइट्रोजन ऑक्सीडेस), उद्योगों से कार्बनिक यौगिक (एसिटिक एसिड, बेंजीन, ईथर), रेडियोएक्टिव पदार्थ (रेडियम, थोरियम), कुछ ठोस अपशिष्ट (राख, कचरा), आदि ।

प्रदूषण आधुनिक युग के औद्योगिक समाजों का सबसे बड़ा पार्श्व प्रभाव है जहां की औद्योगिक विकास और ग्रीन हाउस प्रभाव प्रतिकूल रूप से पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित किया है। औद्योगीकरण की वजह से जीवन रक्षा प्रणाली तेजी से जीवन विनाशी प्रणाली में परिवर्तित हो रही है। मानव लोभ और कुछ भी करने की आज़ादी, गंभीर पतन और संसाधनों के कुप्रबंधन की ओर ले जा रही है|

प्रदूषण पर निबंध 5 (350 शब्द)

प्रदूषण सबसे गंभीर मुद्दा बन गया है और हर किसी को अपने दैनिक जीवन में स्वास्थ्य सम्बंधि खतरों का सामना करना पड़ रहा है। औद्योगिक कचरे और अन्य गतिविधियों से उत्पन्न हुए विभिन्न प्रकार के प्रदूषक हमारे प्राकृतिक संसाधनों जैसे की मिट्टी, हवा और पानी को दूषित कर रहे हैं| हवा, पानी, मिट्टी में मिश्रित होने के बाद ये मानव जाति और जानवर प्रणाली को प्रभावित कर रहे है और स्वास्थ्य के लिए घातक बीमारियां उत्पन्न कर रहे हैं| ध्वनि प्रदूषण शरीर के सुनने की प्रणाली को प्रभावित करने के साथ ही स्मृति में बाधा पैदा कर रही है।

वाहनों के परिवहन की वजह से शहरों में प्रदूषण की दर गांवों की तुलना में अधिक है। वाहनो, फैक्टरियों और उद्योगो से निकलने वाले धुएं शहरों में स्वच्छ हवा को प्रभावित कर रहे है जो की सांस लेने के लिए उचित नहीं है| बड़े सीवेज सिस्टम से गन्दा पानी, घरों से अन्य कचरा, कारखानों और उद्योगों से उपोत्पाद, सीधे नदियों, झीलों और महासागरों को मिल रहें हैं। ज्यादातर ठोस अपशिष्ट, कचरा और अन्य अनोपयोगी वस्तु लोगो द्वारा भूमि पर फेंके जाते हैं जो की फसल उत्पादन को प्रभावित करते है। शहरों में अधिकांश लोग सिर्फ अपने छड़ीक खुशी के लिए जन्मदिन, विवाह या अन्य अवसरों के दौरान काफी हद तक शोर प्रदूषण फैलाते हैं। वाहनों की बढ़ती संख्या की वजह से शहरों में सभी सड़के दिन भर यातायात के पूर्ण होते जा रहे हैं जो की वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण के कारण हैं।

अंततः मनुस्यो द्वारा बना प्रौद्योगिक उन्नति पृथ्वी पर सभी प्रकार के प्रदूषण का मुख्य कारण है। कोई और नहीं बल्कि मनुस्य खुद ही दुनिया भर में प्रदूषण रूपी एक गढ्ढा खोद रहा है और पृथ्वी पर रहने वाले जीवो के लिए गंभीर समस्या उत्पन्न कर रहा है| जीवन की गुणवत्ता दिन-ब-दिन गिरती जा रही है क्योकि प्रदुषण एक राक्षक की तरह काम कर रहा है और विभिन्न प्रकार के बीमारी जैसे की उच्च रक्तचाप, गुर्दा रोग, सांस की बीमारी, कैंसर, महामारी, त्वचा रोग, आदि का कारण है|


 

प्रदूषण पर निबंध 6 (450 शब्द)

प्रौद्योगिक उन्नति की आधुनिक दुनिया में, प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा बन गया है जो की पृथ्वी पर जीवन को प्रभावित कर रहा है। प्रदूषण का सबसे महत्वपूर्ण प्रकार हैं वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, भू प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण। सभी प्रकार के प्रदूषण निस्संदेह पूरे पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं अतः जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं। मनुष्य के मूर्ख आदतों से पृथ्वी पर हमारी स्वाभाविक रूप से सुंदर वातावरण दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।

वाहनो के बढ़ती संख्या की वजह से उत्पन्न हानिकारक और ज़हरीली गैसों का उत्सर्जन, कारखाने और खुले में आग जलाना, वायु प्रदुषण के मुख्य कारण हैं। जीवन को बेहतर बनाने की भीड़ में, हर कोई अपने आसान दैनिक दिनचर्या के लिए अच्छी तरह से संसाधन चाहता है, लेकिन वे अपने प्राकृतिक परिवेश के बारे में जरा सा भी नहीं सोचते। ज्यादातर वायु प्रदूषण रोजमर्रा की सार्वजनिक परिवहन के द्वारा होता है। कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड विषैली गैसें है जो की वायु को प्रदूषित करती है और वातावरण में ऑक्सीजन के स्तर को कम कर रहीं हैं|

उत्पादक कारखानें भी लोगों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, वायु प्रदूषण के लिए बड़ा योगदान कर रहीं हैं। निर्माण प्रक्रिया के दौरान कारखानों के द्वारा कुछ विषाक्त गैसें, गर्मी और ऊर्जा रिलीज होती है। कुछ अन्य आदतें जैसे की खुले स्थान पे घरेलु कचरे को जलाना आदि भी हवा की गुणवत्ता बिगाड़ रहीं हैं| वायु प्रदूषण इंसान और जानवरों में फेफड़ों के कैंसर सहित अन्य सांस की बीमारियां उत्पन्न कर रहीं हैं|

जल प्रदूषण भी एक बड़ा मुद्दा है जो सीधे समुद्री जीवन को प्रभावित करता है क्योंकि वे अपने उत्तरजीविता के लिए केवल पानी में पाए जाने वाले पोषक तत्वों पर निर्भर रहते हैं। धीरे-धीरे समुद्री जीवन का ग़ायब होना वास्तव में मनुष्य और जानवरों की आजीविका पर असर डालेगा। कारखानों, उद्योगो, सीवेज सिस्टम और खेतों आदि के हानिकारक कचरे का सीधे तौर पे नदियों, झीलों और महासागरों के पानी के मुख्य स्रोत में मिलाना ही जल को दूषित करने का कारण है। दूषित पानी पीना गंभीर स्वास्थ्य संबंधी विकार उत्पन्न करता है।

उर्वरक, कवकनाशी, शाकनाशी, कीटनाशकों और अन्य कार्बनिक यौगिकों के उपयोग के कारण मृदा प्रदूषण होता है। यह परोक्ष रूप से हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है क्योकि हम मिट्टी में उत्पादित खाद्य सामग्री खाते हैं। भारी मशीनरी, वाहन, रेडियो, टीवी, स्पीकर आदि द्वारा उत्पन्न ध्वनि, ध्वनि प्रदूषण के कारण है जो की सुनने की समस्याओ और कभी कभी बहरापन का कारण बनती हैं। हमें प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए अपने पर्यावरण का ध्यान रखना चाहिए। प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए संयुक्त प्रयास की आवश्यकता है जिससे की हम एक स्वस्थ्य और प्रदुषण मुक्त वातावरण पा सके।