June 16, 2018 | Hindigk50k

ग्लोबल वार्मिंग के परिणाम पर निबंध-Essay On Results of Global Warming -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

ग्लोबल वार्मिंग के परिणाम पर निबंध-Essay On Results of Global Warming -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi 

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ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी के सतही तापमान में निरंतर वृद्धि हो रही है जिससे धरातल की जलवायु पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। पृथ्वी के वातावरण पर ग्लोबल वार्मिंग ने बुरा असर डाला है। ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने से तापमान में अत्यधिक बढ़ोतरी हुई है जिससे पृथ्वी पर जीवन खतरे में पड़ गया है। ग्लोबल वार्मिंग, जिसकी उत्पत्ति कार्बन और मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसों के कारण होती है, ने पृथ्वी पर अप्रत्यक्ष रूप से नकारात्मक प्रभाव डाला है जिसमें समुद्र-तल के स्तर में बढ़ोतरी होना, वायु प्रदूषण में वृद्धि तथा अलग-अलग क्षेत्रों के मौसम में भयंकर बदलाव की स्थिति का पैदा होना शामिल है। हमने यहाँ अलग-अलग शब्द सीमा में कुछ निबंध उपलब्ध करवाए हैं, आप अपनी आवश्यक्ता अनुसार इनमे से कोई भी निबंध का चयन कर सकते है।

ग्लोबल वार्मिंग के परिणाम पर निबंध (कांसेकुएंसेस ऑफ़ ग्लोबल वार्मिंग एस्से)

You can get below some essays on Consequences of Global Warming in Hindi language for students in 200, 300, 400, 500 and 600 words.

ग्लोबल वार्मिंग के परिणाम पर निबंध 1 (200 शब्द)

पृथ्वी के तापमान में ग्लोबल वार्मिंग का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन वातावरण में तेज़ी से हो रहा है। ग्रीनहाउस गैसों में होती वृद्धि के पीछे वाहनों और औद्योगिक फैक्ट्रीयों से निकलता प्रदूषण है जिससे पृथ्वी का सतही तापमान भी बढ़ रहा है।

ग्लोबल वार्मिंग के कुछ गंभीर परिणाम निम्नलिखित रूप से हैं:-

  • ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र के पानी का स्तर बढ़ रहा है जिससे तटीय इलाकों के डूबने का खतरा पैदा हो गया है।
  • वायु में प्रदूषण की मात्रा बढ़ गई है।
  • ग्लोबल वार्मिंग के कारण गरम लहरों की आवृत्ति तथा तीव्रता भी बढ़ गई हैं।
  • ग्लोबल वार्मिंग के चलते ही जंगलों में आग लगने जैसे हादसे शुरू हो गये हैं।
  • बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के परिणामस्वरुप ही बाढ़, तूफ़ान, सूखा, भीषण गर्मी जैसी आपदाओं ने कई क्षेत्रों में मनुष्य जीवन को मुश्किल कर दिया है।
  • ग्लोबल वार्मिंग के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ जैसे फेफड़ों में इन्फेक्शन, सांस लेने में दिक्कत, लू लगना, शरीर के अंगों का विफल होना आदि बढ़ गई हैं।

ग्लोबल वार्मिंग गंभीर चिंता का विषय है। इसके परिणामों की अनदेखी केवल तभी की जा सकती है जब कार्बन उत्सर्जन की मात्रा न के बराबर हो जाए। हालाँकि कई देशों की सरकारें इस दिशा लगातार प्रयास कर रही हैं पर यह हर व्यक्ति का भी कर्तव्य बनता है कि वह अपने निज़ी स्तर पर कार्बन उत्सर्जन की मात्रा को नियंत्रित करे।

ग्लोबल वार्मिंग के परिणाम

ग्लोबल वार्मिंग के परिणाम पर निबंध 2 (300 शब्द)

न्यू जर्सी के साइंटिस्ट वैली ब्रोएक्केर ने सबसे पहले ग्लोबल वार्मिंग को परिभाषित किया था जिसका अर्थ था ग्रीनहाउस गैसों (कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन) के कारण पृथ्वी के औसत तापमान में बढ़ोतरी होना। ये गैसें वाहनों, कारखानों और अन्य कई स्रोतों से उत्सर्जित होतीं हैं। ये खतरनाक गैसें गर्मी को गायब करने की बजाए पृथ्वी के वातावरण में मिल जाती है जिससे तापमान में वृद्धि होती है।
ग्लोबल वार्मिंग के परिणामस्वरूप पृथ्वी पर जलवायु गर्म हो रही है और यह पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। ग्लोबल वार्मिंग के परिणामों से जुड़े हुए कुछ बिन्दुओं पर विस्तृत वर्णन इस प्रकार है:-

वायु पर प्रभाव

पृथ्वी के सतही तापमान में वृद्धि के कारण वायु प्रदूषण में भी इज़ाफा हो रहा है। इसका कारण यह है कि तापमान में वृद्धि से पृथ्वी के वायुमंडल में ओजोन गैस का स्तर बढ़ जाता है जो की कार्बन गैसों और सूरज की रोशनी की गर्मी के साथ प्रतिक्रिया करने पर पैदा होती है। वायु प्रदूषण के स्तर में होती वृद्धि ने कई स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं को जन्म दिया है। खासकर श्वास की समस्याएं और फेफड़ों के संक्रमण के मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है। इससे अस्थमा के रोगी सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।

जल पर प्रभाव

बढती ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर गल रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप महासागर का पानी दिन प्रतिदिन गर्म हो रहा है। इन दोनों के चलते समुद्र में पानी का स्तर बढ़ गया है। इससे आने वाले समय में तापमान में वृद्धि के साथ समुद्र के पानी के स्तर में और ज्यादा वृद्धि होने की उम्मीद है।

यह चिंता का एक कारण है क्योंकि इससे तटीय और निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाएगी जिससे मनुष्य जीवन के सामने बड़ा मसला खड़ा हो जाएगा। इसके अलावा महासागर का पानी भी अम्लीय हो गया है जिसके कारण जलीय जीवन खतरे में है।

भूमि पर प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग के कारण कई जगहों के मौसम में भयंकर बदलाव हो रहे हैं। कई जगहों में बार-बार भारी बारिश तथा बाढ़ के हालत बन रहे हैं जबकि कुछ क्षेत्रों को अत्यधिक सूखा का सामना करना पड़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग ने न केवल लोगों के जीवन को प्रभावित किया है बल्कि कई क्षेत्रों में भूमि की उपजाऊ शक्ति को भी कम कर दिया है। इसी वजह से कृषि भूमि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

ग्लोबल वार्मिंग के परिणाम पर निबंध 3 (400 शब्द)

कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन की वजह से पृथ्वी के औसत सतह तापमान में वृद्धि हुई है जिसे हम ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं। वाहनों, कारखानों और विभिन्न अन्य स्रोतों द्वारा उत्सर्जित ये गैसें उस गर्मी को अपने अन्दर खपा लेती हैं जिसे पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर चले जाना चाहिए। ग्लोबल वार्मिंग ने पृथ्वी के वायुमंडल पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है और आने वाले समय में वह इसे और भी प्रभावित कर सकती है। नीचे दिए गए निम्नलिखित बिन्दुओं में ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों की व्याख्या की गयी है:-

  1. वर्षा के स्वरुप में बदलाव

पिछले कुछ दशकों से बरसात होने के तरीके में बहुत बदलाव आया है। कई क्षेत्रों में लगातार भारी वर्षा होने के कारण वहां बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है जबकि अन्य क्षेत्रों को सूखा का सामना करना पड़ता है। इस वजह से उन क्षेत्रों में लोगों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

  1. गर्म लहरों का बढ़ता प्रभाव

पृथ्वी की सतह के तापमान में वृद्धि के कारण गर्म तरंगों की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि हुई है। इसने सिरदर्द, लू लगने से बेहोश होना, चक्कर आना और यहां तक ​​कि शरीर के प्रमुख अंगों को नुकसान पहुँचाने वाली जैसी विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दिया है।

  1. महासागरों पर प्रभाव और समुद्र के स्तर में वृद्धि

ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियरों की बर्फ पिघल रही है तथा महासागरों के पानी भी गरम हो रहा है जिससे समुद्र के पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे अप्रत्यक्ष रूप से तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा पैदा हो गया है। दूसरी तरफ, इन गैसों के अवशोषण के कारण महासागर अम्लीय होते जा रहे हैं और यह जलीय जीवन को बड़ा परेशान कर रहा है।

  1. बढ़ती स्वास्थ्य समस्याएं

ग्लोबल वार्मिंग के कारण स्वास्थ्य समस्याओं में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। हवा में प्रदूषण के बढ़ते स्तर से साँस लेने की समस्याएं और फेफड़े के संक्रमण जैसी बीमारियाँ पनप रही है। इससे अस्थमा के रोगियों के लिए समस्या पैदा हो गई है। तेज़ गर्म हवाएं और बाढ़ भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में इज़ाफे का एक कारण है। बाढ़ के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में जमा हुए पानी मच्छरों, मक्खियों और अन्य कीड़ों के लिए आदर्श प्रजनन स्थल है और इनके कारण होने वाले संक्रमणों से हम अच्छी तरह परिचित है।

  1. फसल का नुकसान

वर्षा होने के पैटर्न में गड़बड़ होने से न केवल लोगों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है बल्कि उन क्षेत्रों में उगाई गई फसलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सूखा और भारी बारिश दोनों ही फसलों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। ऐसी जलवायु परिस्थितियों के कारण कृषि भूमि बुरी तरह प्रभावित हुई है।

  1. जानवरों के विलुप्त होने का खतरा

ग्लोबल वार्मिंग के कारण न केवल मनुष्यों के जीवन में कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं बल्कि इसने विभिन्न जानवरों के लिए भी जीवन कठिन बना दिया है। मौसम की स्थितियों में होते परिवर्तन ने पशुओं की कई प्रजातियों का धरती पर अस्तित्व मुश्किल बना दिया है। कई पशुओं की प्रजातियाँ या तो विलुप्त हो चुकी है या फिर विलुप्त होने की क़गार पर खड़ी हैं।

  1. मौसम में होते बदलाव

ग्लोबल वार्मिंग से विभिन्न क्षेत्रों के मौसम में भारी बदलाव होने लगा है। भयंकर गर्मी पड़ना, तेज़ गति का तूफ़ान, तीव्र चक्रवात, सूखा, बेमौसम बरसात, बाढ़ आदि सब ग्लोबल वार्मिंग का ही परिणाम है।

निष्कर्ष

ग्लोबल वार्मिंग बड़ी चिंता का विषय बन चुका है। अब सही समय आ चुका है कि मानव जाति इस तरफ ध्यान दे तथा इस मुद्दे को गंभीरता से ले। कार्बन उत्सर्जन में कमी से ग्लोबल वार्मिंग के परिणामों को कम किया जा सकता है। इसलिए हम में से हर एक को अपने स्तर पर कार्य करने की जरुरत है जिससे ग्लोबल वार्मिंग के दुष्परिणामों पर क़ाबू पाया जा सके।

ग्लोबल वार्मिंग के परिणाम पर निबंध 4 (600 शब्द)

ग्लोबल वार्मिंग से पृथ्वी के सतही तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। इस वृद्धि के पीछे ग्रीन हाउस गैसों (कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन) का बड़ी मात्रा में उत्सर्जन होता है। वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए कई सबूत साबित करते हैं कि 1950 के बाद से पृथ्वी का तापमान बढ़ता जा रहा है। पिछले कुछ दशकों में मानव गतिविधियों ने पृथ्वी पर जलवायु प्रणाली को गर्म करने के लिए प्रेरित किया है और यह भविष्यवाणी की जा रही है कि 21 वीं सदी में वैश्विक सतह का तापमान और ज्यादा बढ़ सकता है। बढ़ते तापमान से पृथ्वी पर कई तरह के बुरे हालात पैदा हो गये हैं। यहाँ नीचे उन्हीं बुरे हालातों पर एक विस्तृत नज़र डाली गई है:-

जलवायु की स्थितियों पर प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग ने दुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों में वर्षा के पैटर्न में बदलाव ला दिया है। इसके परिणामस्वरूप, जबकि कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, जबकि अन्य क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। जिन इलाकों में ज्यादा बरसात होती है वहां और ज्यादा बारिश होने लग गई है और सूखे क्षेत्रों में और ज्यादा सूखा पड़ने लगा है। बढ़ते तापमान से तूफ़ान, चक्रवात, तेज़ गरम हवाएं और जंगल में आग जैसी आपदाएं आम बात हो गई है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी पर कई क्षेत्र मौसम की स्थिति में भारी गड़बड़ी का अनुभव कर रहे हैं और भविष्य में ऐसी समस्यों के बढ़ने की संभावना है।

समुद्र पर प्रभाव

20वीं शताब्दी से वैश्विक समुद्र का स्तर लगातार बढ़ रहा है। समुद्र के स्तर बढ़ने के पीछे दो कारण है जिसमें पहला है महासागर के पानी का गरम होना जिससे पानी का थर्मल विस्तार हो रहा है तथा दूसरा कारण है ग्लेशियर पर बर्फ का लगातार पिघलना। यह भविष्यवाणी की जा रही है कि आने वाले समय में समुद्र के स्तर में और भी वृद्धि देखने को मिल सकती है। समुद्र के स्तर में होती निरंतर वृद्धि ने तटीय और निचले इलाकों में जीवन के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न कर दिया है।

वातावरण पर प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी के वातावरण पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। तापमान में होती यह वृद्धि वायु प्रदूषण के स्तर को और ज्यादा बढ़ा रही है। मूलतः कारखानों, कारों और अन्य स्रोतों द्वारा उत्सर्जित धुआं गर्मी और सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आकर पृथ्वी पर ओजोन के स्तर को बढ़ा देती है जिससे वायु प्रदूषण में भारी मात्रा में बढ़ोतरी हो रही है। वायु प्रदूषण में होती बढ़ोतरी ने विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दिया है और इससे दिन प्रतिदिन मानव जीवन के लिए हालात खराब हो रहें है।

पृथ्वी पर जीवन पर प्रभाव

तापमान में वृद्धि, अनिश्चित जलवायु की स्थिति और वायु तथा जल प्रदूषण में वृद्धि ने पृथ्वी पर जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। बार-बार आती बाढ़, सूखे और चक्रवातों ने कई जिंदगियां खत्म कर दीं तथा प्रदूषण के बढ़ते स्तर से कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो गयी हैं। मनुष्यों की तरह पशुओं की कई अलग-अलग प्रजातियां और पेड़ पौधें बदलते मौसम का सामना करने में असमर्थ हैं। जलवायु परिस्थितियों में होते तेजी से बदलाव के कारण भूमि के साथ ही समुद्र पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। जानवरों और पौधों की विलुप्त होने की दर भी बढ़ गई है। शोधकर्ताओं के अनुसार जलवायु में प्रदूषण और परिवर्तन के बढ़ते स्तर की वजह से पक्षियों, स्तनधारियों, सरीसृप, मछलियों और उभयचर की कई प्रजातियों गायब हो गई हैं।

कृषि पर प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग के परिणामस्वरूप होती अनियमित वर्षा पैटर्न के कारण कृषि पर सबसे ज्यादा असर हुआ है। कई क्षेत्रों में अक्सर सूखे, अकाल जैसी स्थिति बन गयी है जबकि अन्य इलाकों में भारी वर्षा और बाढ़ ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। इससे न केवल उन क्षेत्रों में रहने वाले लोग प्रभावित हो रहे है बल्कि इसका फसलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कृषि भूमि अपनी प्रजनन क्षमता खो रही है और फसल क्षतिग्रस्त हो रही है।

निष्कर्ष

ग्लोबल वार्मिंग एक गंभीर मुद्दा है। इसके नतीजे भयानक तथा विनाशकारी हैं। ग्लोबल वार्मिंग के परिणामों को कम करने के लिए सबसे पहले कार्बन उत्सर्जन करने वाले साधनों को तुरंत नियंत्रित किया जाना चाहिए। यह केवल तभी किया जा सकता है जब प्रत्येक व्यक्ति अपनी ओर से इस मानव कल्याणकारी कार्य के लिए अपना योगदान दे।

पेड़ बचाओ पर निबंध-Essay On Save Trees -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

पेड़ बचाओ पर निबंध-Essay On Save Trees -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi 

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पेड़ हमारे जीवन में भोजन और पानी की तरह ही महत्वपूर्ण हैं। पेड़ के बिना जीवन बहुत कठिन बन जायेगा या हम कह सकते हैं कि जीवन खत्म हो जायेगा क्योंकि हमें स्वस्थ और समृद्ध जीवन देने में पेड़ बहुत मुख्य पहलू है। आज के दिनों में पेड़ बचाओ महत्वपूर्ण सामाजिक जागरुकता है और शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थी के जीवन में जोड़ा गया है। आमतौर पर इस विषय को विद्यार्थियों को कक्षा में चर्चा के लिये या स्कूली परीक्षा अथवा अन्य प्रतियोगिता में दिया जाता है। यहाँ पर विभिन्न शब्द सीमाओं तथा बेहद सरल भाषा में निबंध उपलब्ध करा रहें हैं। इनका प्रयोग विद्यार्थी अपनी आवश्यकतानुसार कर सकते हैं।

पेड़ बचाओ पर निबंध (सेव ट्री एस्से)

You can get here some essays on Save Trees in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, 400 and 800 words.

पेड़ बचाओ पर निबंध 1 (100 शब्द)

पेड़ हमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष जीवन प्रदान करता है क्योंकि ये ऑक्सीजन उत्पादन, CO2 उपभोग का स्रोत, और बारिश का स्रोत है। प्रकृति की तरफ से धरती पर मानवता को दिया गया ये सबसे अनमोल उपहार है जिसका हमें आभारी होना चाहिये तथा इसको सम्मान देने के साथ ही मानवता की भलाई के लिये संरक्षित करना चाहिये।

हमें अपने जीवन में पेड़ के महत्व को समझना चाहिये और जीवन को बचाने के लिये, धरती पर पर्यावरण को बचाने के लिये और पृथ्वी को हरित पृथ्वी बनाने के लिये पेड़ों को बचाने के लिये अपना सबसे बेहतर प्रयास करना चाहिये। पेड़ सोने की तरह मूल्यवान है इसी वजह से इन्हें धरती पर “हरा सोना” कहा जाता है। संपत्ति के साथ ही हमारी सेहत का ये वास्तविक स्रोत हैं क्योंकि ये ऑक्सीजन, ठंडी हवा, फल, मसाले, सब्जी, दवा, पानी, लड़की, फर्नीचर, छाया, जलाने के लिये ईंधन, घर, जानवरों के लिये चारा आदि बहुत कुछ उपयोगी देता है। पेड़ सभी CO2 उपभोग करता है, जहरीले गैसों से हवा को ताजा करता है और हमें वायु प्रदूषण से बचाता है।

पेड़ बचाओ

पेड़ बचाओ पर निबंध 2 (150 शब्द)

पेड़ हमें जीवन देता है और जीवन जीने के लिये बहुत ज़रुरी होता है। बहुत सारे लोग आर्थिक रुप से जीने के लिये पेड़ों पर निर्भर होते हैं उदाहरण के तौर पर कागज उद्योग, रबर उद्योग, माचिस उद्योग आदि। पेड़ों की मुख्य भूमिका हमें शुद्ध ऑक्सीजन और हवा देना है तथा CO2 का उपभोग करना है जबकि ये हमें सुरक्षा, छाया, भोजन, कमाई का ज़रिया, घर, दवा आदि भी उपलब्ध कराते हैं।

पेड़ धरती पर बारिश का साधन होता है क्योंकि वो बादलों को आकर्षित करते हैं जो अंत में बारिश लाता है। ये मृदा अपरदन होने से भी बचाते हैं और प्रदूषण से बचाने के द्वारा पर्यावरण को ताजा रखते हैं। पेड़ जंगली जानवरों का घर भी है और जंगलों में जंगली जानवरों का साधन है। पेड़ बहुत मददगार होते हैं तथा मानवता के उपयोगी मित्र होते हैं। ये सीवेज़ और रसायनों को छानने के द्वारा मिट्टी को साफ करते हैं, ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण को नियंत्रित करते हैं, आकस्मिक बाढ़ को घटाते आदि हैं। हमारे जीवन में पेड़ों की महत्ता और मूल्य को देखते हुए हमें जीवन और पर्यावरण बचाने के लिये पेड़ों का सम्मान करना चाहिये।

पेड़ बचाओ पर निबंध 3 (200 शब्द)

प्रकृति के द्वारा दिया गया हमारे जीवन में पेड़ बहुत अनमोल उपहार है। ये धरती पर हरे सोना के सामान है और हरेक के जीवन में बहुत मायने रखता है। पेड़ों के कुछ महत्व को यहां उल्लेखित किया गया है जो साबित करेंगे कि क्यों पेड़ों को बचाना जीवन बचाना है:

  • वायुवाहित कण, रसायन, जहरीले गैसों, गर्मी को घटाना, CO2 का उपभोग और दूसरे प्रदूषक जैसे सल्फर डाईऑक्साइड और नाईट्रोजन डाईऑक्साइड को रोकने और छानने के द्वारा पेड़ हवा को साफ करने और ताजा करने का बहुत महत्वपूर्ण साधन है (क्योंकि ये ऑक्सीजन उत्पादित करते हैं और ग्रीन हाउस गैसों को सोखते हैं)।
  • पर्यावरण में खतरनाक गैसों के लिये पेड़ प्राकृतिक कूड़ेदान की तरह कार्य करता है।
  • पेड़ प्राकृतिक छाया और ठंडी हवा का साधन है और कृत्रिम ठंडा करने की तकनीक जैसे पंखा, कूलर, एयर कंडीशन आदि से ज्यादा आरामदायक और फायदेमंद होता है।
  • पवन के ताकत को तोड़ने में ये असरकारी है इस वजह से घरों, वनस्पति और खेत आदि को सुरक्षित करने में मददगार है।
  • शहरी क्षेत्रों में खासतौर से धूल के स्तर और प्रदूशण के स्तर को कम करने के द्वारा हमें स्वस्थ रखता है।
  • हवा को ताजा करने के द्वारा पेड़ हमें साँस संबंधी गड़बड़ी और समस्याओं से बचाता है।
  • ये ध्वनि प्रदूषण को कम करने में मदद करता है और ध्वनि बाधा के रुप में असरकारी है क्योंकि आवाज़ को रोकने में पत्थर के जैसे बहुत प्रभावशाली तरीके से कार्य करता है। ये हमें भीड़-भाड़ वाले सड़कों, रेलवे स्टेशन, हवाईअड्डों आदि के आवाजों से बचाता है।
  • पेड़ मिट्टी बहने से बचाता है, बारिश के पानी के संरक्षण में मददगार है और तूफान के दौरान अवसाद जमा होने से बचाता है।

 

पेड़ बचाओ पर निबंध 4 (250 शब्द)

पेड़ बचाओ, जीवन बचाओ केवल एक नारा भर नहीं है, ये एक ज़िम्मेदारी है जिसे धरती पर रहने वाले हरेक इंसान को समझना और मानना चाहिये। पेड़ों को बचाने के द्वारा अपने स्वस्थ पर्यावरण और हरी पृथ्वी को बचाने के लिये ये हम सभी के लिये बड़ा मौका है। पेड़ धरती पर जीवन का प्रतीक है और बहुत सारे लोगों और जंगली जानवरों के लिये प्राकृतिक घर है। आज की आधुनिक दुनिया में पेड़ों को बचाना बहुत ज़रुरी है जहाँ शहरीकरण, औद्योगिकीकरण और ग्लोबल वार्मिंग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे तकनीकी दुनिया में, जहाँ लोग अपने लिये केवल कार्य रहे और लड़ रहें है, केवल पेड़ दूसरों के लिये जीते हैं (इंसान और पशु)।

फल, सब्जी, वनस्पति, फूल, मसाले, ठंडी छाया, दवा, जड़, वृक्ष की छाल, लकड़ी, अंकुर आदि उपलब्ध कराने के द्वारा बहुत तरीके से धरती पर जीवन पोषित करती है। एक पूरी तरह से विकसित पेड़ बिना कुछ वापस लिये मानवता की बहुत वर्षों तक सेवा करता है। हवा को शुद्ध करने, पारिस्थितिकी संतुलन को बनाये रखने, दवा आदि उपलब्ध कराने के द्वारा ये हमें कई बीमारियों से भी बचाता है। पेड़ हमारे लिये महत्वपूर्ण संपत्ति की तरह होते हैं जो मिट्टी के कटाव से बचाती है, पशु प्रजातियों के लिये घर उपलब्ध कराती है, मिट्टी से पोषक तत्व आदि उपलब्ध कराती है। पेड़ और पर्यावरण को बचाने के लिये हम यहाँ निम्न तरीके उल्लिखित कर रहें हैं:

  • पेड़ों को बचाने के लिये कार्य कर रहें संगठनों से जुड़ने के द्वारा हमें अपनी तरफ से कुछ प्रभावकारी प्रयास करने चाहिये।
  • हमें स्वेच्छा से पेड़ों को बचाना चाहिये जिससे दूसरे लोग भी प्रेरित हो सकें।
  • हमें अपने परिवारजन, दोस्त, पड़ोसी, छोटे बच्चे को धरती के इस महत्वपूर्ण संसाधन को बचाने के लिये बढ़ावा देना चाहिये।
  • हमें समुदायिक या राज्य में पेड़ संरक्षण मुद्दे पर चर्चा या मीटिंग में भाग लेना चाहिये।
  • हमें अपनी नयी पीढ़ी और बच्चे को सैर या शिविरों में उन्हें ले जाने के द्वारा पेड़, प्रकृति और पर्यावरण का सम्मान करना सिखाना चाहिये।
  • हमें अपने आस-पास नये पेड़-पौधों को लगाना चाहिये।

पेड़ बचाओ पर निबंध 5 (300 शब्द)

परिचय

हमारे जीवन का पालन-पोषण करने के लिये हमारी धरती माँ की तरफ से वास्तव में हमें बहुत सारे बहुमूल्य उपहार दिये गये हैं। उनमें से एक सबसे महत्वपूर्ण उपहार पेड़ है। ये धरती पर मानव और पशु दोनों के लिये भोजन और छत का महत्वपूर्ण साधन है। पेड़ जंगल के अंदर रहने वाले बहुत सी जन जातियों के लिये प्राकृतिक घर है साथ ही सभी पक्षियों के भी घर उपलब्ध कराता है। ये हमें फर्निचर बनाने के लिये टिम्बर, शुद्ध हवा, मृदा अपरदन और बाढ़ से बचाता है, गर्मी में ठंडी और स्वच्छ हवा प्रदान करता है तथा गोंद, कागज, रबर, दवा, बारिश आदि का बड़ा साधन है। हमें अपने जीवन में पेड़ का भूमिका और महत्ता को समझना चाहिये और इसे सुरक्षित रखने की प्रतिज्ञा के साथ ही लोगों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिये प्रेरित करना चाहिये।

पेड़ को कैसे बचाना चाहिये

धरती पर जीवन और पर्यावरण को बचाने के लिये पेड़ों को बचाने के कुछ असरकारी तरीके निम्न हैं:

  • खास क्षेत्रों में पेड़ों को हटाने का कारण हमें पता करना चाहिये और विश्लेषण करें कि क्या मुरझाने, खराब होने या गलत जगह पर लगाने के कारण पेड़ को काटने की ज़रुरत थी।
  • शहरी विभाग, शहरी वानिकी के स्थानीय विभाग को बुलाने या शहरी वन अधिकारी को पेड़ों को हटाने के संबंध में आपत्ति दर्ज कराने के संदर्भ में एक पत्र लिखने के द्वारा सड़कों से पेड़ हटाने के बारे में हमें उचित जानकारी प्राप्त करनी चाहिये।
  • पेड़ों को हटाने के संदर्भ में हम अपने शहरी परिषद प्रतिनिधि से हम संपर्क कर सकते हैं।
  • हम अपने पड़ोसियों के साथ मिलकर पेड़ों को बचाने के संबंध में अधिकारियों के सामने लोक सुनवाई करनी चाहिये।
  • इस मामले को अधिक मजबूत और असरकारी बनाने के लिये हमें पेड़ों के सभी फायदों पर शोध करना चाहिये।
  • हमें मीडिया से संपर्क करना चहिये और उन्हें अपनी ओर करना चाहिये जिससे लोगों तक पेड़ों को हटाने का मुद्दा पहुँचे और जन जागरुकता बढ़े।
  • अगर पेड़ों को हटाया जाता है, हमें उसी क्षेत्र में दुबारा पेड़ लगाने को लेकर आश्वस्त करने के लिये स्थानीय सरकार और गैर लाभकारी संगठनों से संपर्क करना चाहिये।

निष्कर्ष

धरती पर जीवन जल, ऑक्सीजन और पेड़ों की वजह से मुमकिन है और हम ये दरकिनार नहीं कर सकते हैं कि धरती पर ऑक्सीजन और पानी के लिये पेड़ मुख्य साधन के रुप में है। अगर हम पेड़ और जंगल को खत्म करेंगे, हम हरी पृथ्वी से जीवन और पर्यावरण को खत्म करेंगे। धरती पर इंसान सबसे बुद्धिमान प्राणी के रुप में जाना जाता है। इसलिये हमें प्रकृति की ओर अपनी ज़िम्मेदारी को समझना चाहिये और पेड़, धरती के हरे सोने को बचाने की शुरुआत करनी चाहिये।


 

पेड़ बचाओ पर निबंध 6 (400 शब्द)

परिचय

पेड़ धरती पर जीवन का सबसे मूल्यवान और महत्वपूर्ण साधन है। धरती पर स्वास्थ्य और व्यवसायिक समुदायों के लिये ये बहुत काम का है। कुछ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीकों से धरती पर ये सभी जीव जन्तुओं को फायदा पहुँचाते हैं। धरती पर सब कुछ एक-दूसरे से जुड़ी हुई है और प्रकृति के संतुलन से चलता है, अगर इसके साथ कोई गड़बड़ी होती है, पूरा पर्यावरण बाधित हो सकता है और धरती पर जीवन को नुकसान पहुँचा सकता है। पेड़ हमें बहुत सारी प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखता है और बहुत तरीकों से हमारे जीवन का पालन-पोषण करता है। ये हमारे पर्यावरण को स्वच्छ और पृथ्वी को हरा रखता है इसलिये, हम भी इनके प्रति पूरे जिम्मेदार बने और इनको बचाने के लिये अपना सबसे बेहतर प्रयास करना है। लंबे और परिपक्व पेड़ छोटे पेड़ों से अधिक लाभदायक होते हैं क्योंकि वो अधिक कार्बन को सोखता है, ग्रीन हाउस गैसों को अत्यधिक दर पर छानता है, तूफानी पानी का अभिग्रहण करता है, बड़ी छाया उपलब्ध कराता है और शहरी उष्मा का विरोध करता है, ऊर्जा के इस्तेमाल को घटाता है आदि। इसलिये हमें आपात समय में भी इसे नहीं काटना चाहिये।

पेड़ के फायदे

यहां हम पेड़ के कुछ वास्तविक फायदे उल्लिखित कर रहें हैं जो आपको समझने में मदद करेगा कि क्यों पेड़ों को नहीं काटना चाहिये हालांकि समय दर समय पेड़ लगाने की भी बहुत ज़रुरत है।

  • हवा को शुद्ध करने और ग्रीन हाउस गैसों को सोखने के द्वारा परिपक्व पेड़ जलवायु परिवर्तन से विरोध करने में हमें मदद करता है क्योंकि वो जलवायु परिवर्तन के मुख्य स्रोत होते हैं।
  • वायु को ताजा करने के द्वारा पेड़ हवा को साफ करने में मदद करता है क्योंकि ये पर्यावरण में सभी दुर्गंध और प्रदूषक गैसों को सोख लेता है।
  • एक एकड़ में परिपक्व पेड़ प्रति वर्ष 18 लोगों को ऑक्सीजन उपलब्ध करा सकता है।
  • पेड़ गर्मी के मौसम की उष्मा के साथ ही कम सर्दी के तापमान का विरोध करता है।
  • पेड़ सबसे बेहतर ऊर्जा संरक्षण और ग्लोबल वार्मिंग प्रबंधन तकनीक है क्योंकि ये 50% तक ग्रीष्मकालीन वायु अनुकूलन की जरुरत को घटाती है।
  • छाया के द्वारा जमीन से जल वाष्पीकरण को कम करने के द्वारा ये पानी बचाती है।
  • पेड़ प्राकृतिक रुप से पानी छानता है और पेड़ों के नीचे धरती से बहने के लिये पानी को अंदर आने देने के द्वारा जल प्रदूषण को बचाने में बड़ी भूमिका निभाता है इसलिये बारिश के पानी को महासागर से प्रदूषक लेने से बचाता है।
  • एक जगह से मिट्टी की बड़ी मात्रा को लेने के द्वारा पेड़ मृदा अपरदन से बचाता है।
  • अल्ट्रा वाइलेट किरणों से बचाने के लिये पेड़ हमें एक मजबूत कवच प्रदान करता है और इसी वजह से त्वचा कैंसर और त्वचा की दूसरी समस्याओं से भी बचाता है।
  • पेड़ भोजन, (जैसे फल, सब्जी आदि) छत, दवा, अर्थव्यवस्था आदि का एक अच्छा साधन है।
  • मरीजों के बीच में पेड़ों के पास अच्छी उपचारात्मक विशेषता है कोई भी स्वास्थ्य संबंधी मुश्किल हो जैसे ADHD से पीड़ीत बच्चों को सीधे पेड़ों और प्रकृति के संपर्क में रखा जाये।
  • पेड़ मौसम को पहचानने का अच्छा साधन है, ये हिंसा को घटाते हैं और लोगों के लिये आर्थिक मौके उत्पन्न करते हैं।
  • पेड़ सबसे अच्छे शिक्षक हैं जो कभी बात नहीं करते लेकिन सब सिखाते हैं। ये बच्चों के साथ खेलने वाले सबसे अच्छे साथी हैं।
  • ये विविधता में एकता के सबसे बेहतर उदाहरण हैं।
  • पेड़ ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण और मृदा प्रदूषण को घटाने का अच्छा साधन हैं।

निष्कर्ष

पेड़ों के यहां दिये गये सभी फायदों को देखने के द्वारा, हम अपने जीवन में पूरी तरह से पेड़ों के मूल्यों को समझ सकते हैं। इसलिये हमें पेड़ों और जंगलों को नहीं काटना चाहिये। हमें मानव भीड़-भाड़ वाले इलाकों में और पेड़ लगाने के लिये प्रेरित करना चाहिये और आम लोगों को पेड़ बचाने के लिये प्रोत्साहित करना चाहिये।


 

पेड़ बचाओ पर निबंध 7 (800 शब्द)

परिचय

पेड़ हवा, मिट्टी और पानी को शद्ध करने में बड़ी भूमिका निभाता है इस वजह से धरती को रहने के लिये एक बेहतर जगह बनाता है। लोग जो पेड़ों के पास रहते हैं वो आमतौर पर स्वस्थ और खुश रहते हैं। पूरे जीवन भर अपनी असीमित सेवा के द्वारा पेड़ हमारी बहुत मदद करता है। मानव होने के नाते, क्या हम कभी पेड़ों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को समझते हैं या केवल हम उसके फायदे का आनन्द लेते रहेंगे। पेड़ों को बचाना उसके प्रति दया दिखाना नहीं है बल्कि हम अपने जीवन के प्रति दया दिखाते हैं क्योंकि धरती पर बिना पेड़ के जीवन संभव नहीं है। इसलिये, अगर हम स्वस्थ तरीके से जीना चाहते हैं, हमें हमेशा के लिये पेड़ों को बचाना होगा।

पेड़ों का महत्व

यहां पर हम पेड़ों के कुछ महत्वपूर्ण और अनमोल गुण बता रहें हैं जो हमें ये जानने में मदद करेगा कि क्यों धरती पर पेड़ों को हरा सोना और स्वस्थ जीवन के लिये बहुत महत्वपूर्ण कहा जाता है।

  • पेड़ हमारे जीवन में ढेर सारी उपयोगिता जोड़ता है साथ ही ताजा हवा और पोषक भोजन उपलब्ध कराने के द्वारा हमारे जीवन की स्थिति को सुधारता है।
  • पेड़ हमारी अतिरिक्त ज़रुरतों जैसे छत, दवा और हमारे आधुनिक जीवन शैली की दूसरी ज़रुरतों को पूरा करता है।
  • शांतिपूर्ण पर्यावरण और सौंदर्यपरक सुखदायी पर्यावरण उपलब्ध कराने में पेड़ समाज, समुदाय, सड़क, पार्क, खेल का मैदान और मकान के पीछे के आँगन में बड़ी भूमिका निभाता है। हमारी बाहरी क्रियाओं के दौरान ठंडी छाया उपलब्ध कराने के द्वारा जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने में पेड़ मदद करता है।
  • रहने के क्षेत्र में पुराने पेड़ ऐतिहासिक स्थल और शहर का गौरव बन जाते हैं।
  • पेड़ सूर्य की रोशनी को मोड़ने में मदद करता है और इसी वजह से गर्मी को घटाता है और पर्यावरण को स्वच्छ और ठंडा रखता है।
  • पेड़ शुद्ध ऑक्सीजन उपलब्ध करता है और खतरनाक गैसों के निस्पंदन के द्वारा वायु प्रदूषण को घटाता है।
  • जल वाष्पीकरण बचाने के द्वारा ये जल संरक्षण में मदद करता है।
  • ये मिट्टी को कटाव से बचाता है और वन्यजीवन को सहायता प्रदान करता है।
  • सूर्य, वर्षा और हवा के प्रभाव के प्रबंधन के द्वारा पेड़ जलवायु को नियंत्रित करने का उपयोगी साधन है।
  • प्रकृति में पारिस्थिकी को संतुलित करने में पेड़ बहुत जरुरी है।
  • पेड़ बारिश के पानी को सोखने और इकट्ठा करने का अच्छा साधन है इस वजह से तूफान के बाद नुकसान से बचाता है।
  • जंगली जानवरों के लिये पेड़ भोजन और छाया का अच्छा साधन है। पक्षी पेड़ों की टहनियों पर ही अपने घोसलें बनाती हैं।
  • पेड़ों के पास अपना व्यक्तिगत और आध्यात्मिक गुण होता है क्योंकि वो रंग-बिरंगे और सुंदर दिखाई देते हैं। कुछ पेड़ों को प्रचीन समय से ही लोग पूजते आ रहें हैं।
  • पेड़ बहुत सारे लोगों के लिये अर्थव्यवस्था का साधन है क्योंकि ये वाणिज्यिक रुप से ईंधन, मकान निर्माण में, औज़ार, फर्निचर बनाने में खेल के सामान बनाने आदि में प्रयोग किये जाते हैं।

पेड़ों को क्यों बचायें

नीचे हमने कुछ बिन्दु रखें जो ये बतायेगा कि क्यों पेड़ों को बचाना चाहिये:

  • धूल, सूक्ष्म धातु कण, प्रदूषक, ग्रीन हाउस गैसों, (ओजोन, अमोनिया, नाईच्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड) आदि सहित ऑक्सीजन छोड़ने और छोटे कण पदार्थ को निस्पंदन के द्वारा पेड़ हमेशा हवा को स्वच्छ और ताजा करता है।
  • पेड़ धुंध और वायु प्रदूषण को पर्यावरण से घटाता है।
  • ये जल की गुणवत्ता को सुधारता है, जल प्रदूषण से बचाता है, इसका जड़ तंत्र तूफानी पानी के अपवाह को घटाता है, बाढ़ और मिट्टी के कटाव से बचाता है।
  • पेड़ ऊर्जा संरक्षण का अच्छा साधन है क्योंकि ये पंखा, एयर कंडीशन आदि को गर्मी के मौसम में हवा को ठंडा करने की व्यवस्था को घटाता है।
  • भूमि भवन पर सकारात्मक आर्थिक प्रभाव होने के कारण अच्छे भूदृश्य स्थल और भूमि भवन का अच्छा मूल्य होता है, ये घर की बिक्री को तेज कर देते हैं।
  • मानव पर्यावरण शोध प्रयोगशाला के अनुसार, पड़ोस में हिंसा के स्तर घटाने में पेड़ बहुत प्रभावकारी है।
  • 4 पेड़ घर के पास 30% तक गर्मी को ठंडा करने की कीमत को बचा सकता है जबकि 1 मिलियन पेड़ प्रति वर्ष लगभग $10मिलियन ऊर्जा की कीमत को बचा सकता है।
  • 40 से 50 पेड़ प्रति वर्ष वायु प्रदूषकों का लगभग 80 पाउंड हटाने में मदद करता है।
  • पेड़ों को प्रति वर्ष बहुत कम पानी की ज़रुरत होती है (400 पेड़ों को लगभग 40,000 गैलन वर्षा के जल की आवश्यकता होती है)।
  • एक पेड़ 50 वर्ष के अपने पूरे जीवन काल तक $31,250 कीमत का ऑक्सीजन उपलब्ध कराता है।
  • घर के चारों तरफ पेड़ 6% से 7% तक इसका बाजार मूल्य बढ़ा देती है और लगभग 10% तक संपत्ति के मूल्य में (USDA वन संवा के अनुसार)।

निष्कर्ष

जैसा कि हमने पेड़ों के महत्व के बारे में देखा, हमारे जीवन में पेड़ों के मूल्य के साथ ये भी जाने कि क्यों पेड़ को बचाना चाहिये; आम लोगों को जागरुक करने के लिये अपने आस-पास में पेड़ बचाओ जागरुकता का एक अभियान हमें शुरु करना चाहिये। धरती पर पेड़ों की संख्या घटने से संबंधित मुद्दे को जानने के लिये इस प्रकार के कार्यक्रमों में अत्यधिक भागीदारी के लिये हमें लोगों को बढ़ावा देना चाहिये। हमें हमेशा सक्रिय रहना चाहिये और धरती पर हरे सोने के अस्तित्व के संबंध में अपनी आँखों को खुला रखना चाहिये। हमें पेड़ काटने में शामिल नहीं चाहिये और पेड़ों और जंगलों के काटने का विरोध करना चाहिये। हमें हमेशा लोगों के रहने वाली जगह और प्रदूषित क्षेत्रों में पेड़ लगाने में भागीदार बनना चाहिये।

ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध-Essay On Global Warming -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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ग्लोबल वार्मिंग पूरे विश्व के लिये एक बड़ा पर्यावरणीय और सामाजिक मुद्दा है जिसे हर एक को जानना चाहिये खास तौर पर हमारे बच्चों को क्योंकि वो हमारा भविष्य है। चलिये, इस निबंध के द्वारा हम अपने बच्चों को पर्यावरण से जुड़े हर पहलू से रुबरु कराते है, इसके कारण के साथ इस पर लगाम लगाने का तरीका भी भी समझेंगे। विद्यार्थीयों को जल्दी समझ में आये इसके लिये आसान शब्दों का इस्तेमाल किया गया है।

ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध (ग्लोबल वार्मिंग एस्से)

You can get below some essays on Global Warming in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, 400 and 800 words.

ग्लोबल वार्मिंग निबंध 1 (100 शब्द)

ग्लोबल वार्मिंग पूरे विश्व में एक मुख्य वायुमण्लीय मुद्दा है। सूरज की रोशनी को लगातार ग्रहण करते हुए हमारी पृथ्वी दिनों-दिन गर्म होती जा रही है जिससे वातावरण में कॉर्बनडाई ऑक्साइड का स्तर बढ़ रहा है। इसके लगातार बढ़ते दुष्प्रभावों से इंसानों के लिये बड़ी समस्याएं हो रही है। जिसके लिये बड़े स्तर पर सामाजिक जागरुकता की जरुरत है। इस समस्या से निपटने के लिये लोगों को इसका अर्थ, कारण और प्रभाव पता होना चाहिये जिससे जल्द से जल्द इसके समाधान तक पहुँचा जा सके। इससे मुकाबला करने के लिये हम सभी को एक साथ आगे आना चाहिये और धरती पर जीवन को बचाने के लिये इसका समाधान करना चाहिए।

ग्लोबल वार्मिंग

ग्लोबल वार्मिंग निबंध 2 (150 शब्द)

आज धरती पर वायुमण्डल के बड़े विषय के रुप में ग्लोबल वार्मिंग है जिसकी वजह से धरती के सतह का तापमान लगातार बढ़ रहा है। ऐसा आकलन किया गया है कि अगले 50 या 100 वर्षों में धरती का तापमान इतना बढ़ जायेगा कि जीवन के लिये इस धरती पर कई सारी मुश्किलें खड़ी हो जाएँगी। धरती पर तापमान के बढ़ने पर जो सबसे मुख्य और जाना हुआ कारण है, वो है वायुमंडल में बढ़ती कॉर्बनडाई आक्साइड की मात्रा का स्तर।

धरती पर इस विनाशक गैस के बढ़ने की मुख्य वजह जीवाश्म ईंधनों जैसे-कोयला और तेल का अत्यधिक इस्तेमाल और जंगलों की कटाई है। धरती पर घटती पेड़ों की संख्या की वजह से कॉर्बनडाई आक्साइड का स्तर बढ़ता है, इस हानिकारक गैसों को इस्तेमाल करने के लिये पेड़-पौधें ही मुख्य श्रोत होते तथा इंसानों द्वारा इसे कई रुपों (साँस लेने की क्रिया द्वारा आदि) में छोड़ा जाता है। बढ़ते तापमान की वजह से समुद्र जल स्तर बढ़ना, बाढ़, तूफान, खाद्य पदार्थों की कमी, तमाम तरह की बीमारीयाँ आदि का खतरा बढ़ जाता है।

ग्लोबल वार्मिंग निबंध 3 (200 शब्द)

धरती के लगातार बढ़ते तापमान स्तर को ग्लोबल वार्मिंग कहते है। पूरे विश्व में इंसानों की न ध्यान देने वाली गलत आदतों की वजह से हमारी धरती की सतह दिनों-दिन गर्म होती जा रही है। धरती के वातावरण के लिये ये सबसे चिंताजनक पहलू है क्योंकि इससे लगातार धरती पर जीवन की संभावानाएँ कम होती जाएँगी। इसके समाधान तक पहुचने से पहले, हमें वातावरण पर इसके कारण और पड़ने वाले प्रभाव के बारे में जरुर सोचना चाहिए जिससे हम आश्वस्त हो सके कि हम इससे राहत पाने की सही दिशा में आगे बढ़ रहे है। धरती के लगातार गर्म होने का मतलब पर्यावरण में CO2 गैस का बढ़ना है। जबकि, CO2 के बढ़ते स्तर के कई कारण है जैसे पेड़ों की कटाई, कोयले का इस्तेमाल, जीवाश्म ईंधनों का इस्तेमाल, परिवहन के लिये गैसोलिन का इस्तेमाल, बिजली का गैर-जरुरी इस्तेमाल आदि से धरती का तापमान बढ़ता है। इससे ओजोन परत में क्षरण, समुद्र जल स्तर में वृद्धि, मौसम के स्वभाव में बदलाव, बाढ़, तूफान, महामारी, खाद्य पदार्थों की कमी, मौंते आदि में बढ़ौतरी होगी जो धरती पर जीवन के संभावानाओं को कम करता जाएगा।

ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते खतरे लिये किसी एक को दोष नहीं दिया जा सकता बल्कि पूरी मानव जाति इसके लिये जिम्मेदार है जिसका समाधान वैश्विक जागरुकता और हर एक के उदार प्रयास से ही संभव होगा।


 

ग्लोबल वार्मिंग निबंध 4 (250 शब्द)

धरती के तापमान में लगातार बढ़ते स्तर को ग्लोबल वार्मिंग कहते है। वर्तमान में ये पूरे विश्व के समक्ष बड़ी समस्या के रुप में उभर रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि धरती के वातावरण के गर्म होने का मुख्य कारण का ग्रीनहाउस गैसों के स्तर में वृद्धि है। अगर इसे नजरअंदाज किया गया और इससे निजात पाने के लिये पूरे विश्व के देशों द्वारा तुरंत कोई कदम नहीं उठाया गया तो वो दिन दूर नहीं जब धरती अपने अंत की ओर अग्रसर हो जाएगी।

दिनों-दिन बढ़ते इसके खतरनाक प्रभाव से संपूर्ण विश्व के लिये खतरा उत्पन्न हो रहा है। इससे समुद्र जल स्तर में वृद्धि, बाढ़, तूफान, चक्रवात, मौसम के स्वरुपों में परिवर्तन, संक्रामक बीमारीयाँ, खाद्य कमी, मौतें आदि आने वाले समय में दिखाई देंगी। इससे निजात पाने का एक ही तरीका है व्यक्तिगत स्तर पर जन-जागरुकता। लोगों को इसका अर्थ, कारण, और प्रभाव की समझ होनी चाहिये जिससे इसको जड़ से मिटाया जा सके और धरती पर जीवन की संभावानाएँ सदा के लिये मुमकिन हो।

लोगों को उनकी बुरी आदतों जैसे तेल, कोयला और गैस के अत्यधिक इस्तेमाल, पेड़ों की कटाई(क्योंकि ये कार्बनडाई ऑक्साइड को सोखने का मुख्य स्रोत है) को रोक कर, कम बिजली का इस्तेमाल कर आदि से CO2 को फैलने से रोकना चाहिए। पूरी दुनिया के लोगों में थोड़े से बदलाव से, एक दिन हम लोग इसके प्रभावों को घटाकर वातावरण में हुए नकारात्मक परिवतर्नों को रोक सकते है।

ग्लोबल वार्मिंग निबंध 5 (300 शब्द)

पर्यावरण में कॉर्बनडाई ऑक्साइड के बढ़ते स्तर के कारण धरती के सतह का तापमान लगातार बढ़ना ग्लोबल वार्मिंग है। ये विश्व समुदाय के लिये एक बड़ा और गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। जरुरत है कि विश्व समाज के सभी देश इसके समाधान के लिये सकारात्मक कदम उठाये। नियमित बढ़ते धरती के तापमान से कई सारे खतरों का जन्म होगा जो इस ग्रह पर जीवन के अस्तित्व को कठिन बना देगा। ये धरती के आबोहवा में नियमित और स्थायी परिवर्तन को बढ़ा देगा और इससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ने लगेगा।

धरती पर CO2 के बढ़ने से इंसानी जीवन पर इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा इससे लगातार गर्म हवाएँ, अचानक से आया तूफान, अप्रत्याशित चक्रवात, ओजोन परत में क्षरण, बाढ़, भारी बरसात, सूखा, खाद्य पदार्थों की कमी, महामारी, और मौंते आदि में बढ़ौतरी होगी। ऐसा शोध में पाया गया है कि CO2 के अधिक उत्सर्जन का कारण जीवाश्म ईंधनों के प्रयोग, खाद का इस्त्माल, पेड़ों की कटाई, फ्रिज और एसी से निकलने वाली गैस, अत्यधिक बिजली के इस्तेमाल आदि है। ये ध्यान देने योग्य है कि अगर इसको नहीं रोका गया तो 2020 तक ग्लोबल वार्मिंग से धरती पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि CO2 का उत्सर्जन लगातार बढ़ रहा है।

धरती पर ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव बढ़ने का कारण CO2 के स्तर में बढ़ना है, सभी ग्रीनहाउस गैस (जलवाष्प, CO2, मीथेन, आदि) गर्म किरणों की पात को सोखता है जिसके बाद सभी दिशाओं में दुबारा से विकीकरण होता है और धरती पर वापस आकर तापमान में वृद्धि करता है जो हमें ग्लोबल वार्मिंग के रुप में दिखाई देता है।

ग्लोबल वार्मिंग के जीवन से संबंधित दुष्प्रभावों को रोकने के लिये, हमें CO2 और ग्रीनहाउस गैसों के प्रभावों को बढ़ाने वाले सभी कारकों को हमेशा के लिये त्यागना पड़ेगा जिससे हमारी पृथ्वी का तापमान गर्म न हो। हमें पेड़ों की कटाई नहीं करनी चाहिए, बिजली का सही इस्तेमाल करना चाहिए, लकड़ी को नहीं जलाना चाहिए आदि।


 

ग्लोबल वार्मिंग निबंध 6 (400 शब्द)

ग्लोबल वार्मिंग के रुप में आज हम लोग एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहे है जिसका हमें स्थायी समाधान निकालने की जरुरत है। असल में, धरती के सतह के तापमान में लगातार और स्थायी वृद्धि ग्लोबल वार्मिंग है। इसके प्रभाव को खत्म करने के लिये पूरे विश्व को व्यापक तौर पर चर्चा करने की जरुरत है। इससे दशकों से धरती की आबोहवा और जैव-विविधता प्रभावित हो रहा है।

धरती पर ग्लोबल वार्मिंग बढ़ने का मुख्य कारण CO2 और मिथेन जैसे ग्रीनहाउस गैस है, जिसका सीधा प्रभाव समुद्र जल स्तर में वृद्धि, ग्लेशियरों का पिघलना, अप्रत्याशित वायुमंडलीय परिवर्तन जो धरती पर जीवन की संभावानाओं को प्रदर्शित करता है। आँकड़ों के अनुसार, 20वीं सदी के मध्य से ही धरती का तापमान निरंतर बढ़ रहा है और इसका मुख्य कारण लोगों के जीवन शैली में बदलाव से है।

1983,1987,1988,1989 और 1991 बीती सदी का सबसे का गर्म साल रहा। इसके लगातार बढ़ने से धरती पर बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूस्खलन, सुनामी, महामारी आदि जैसे प्रकोप जीवन के लिये खतरा पैदा हो कर रहें हैं जो प्रकृति के असंतुलन को दिखाती है।

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से जल का वाष्पीकरण वातावरण में हो जाता है, जिसकी वजह से ग्रीनहाउस गैस बनता है और जिसके कारण फिर से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ता है। दूसरी क्रियांएँ जैसे जीवाश्म ईंधनों को जलाना, खादों का इस्तेमाल, CFCs जैसे गैसों में वृद्धि, ट्रौपोसफेरिक ओजोन और नाईट्रस ऑक्साइड भी ग्लोबल वार्मिंग के लिये जिम्मेदार है। इसके बढ़ने का मौलिक कारण तकनीकी उन्नति, जनसंख्या विस्फोट, औद्योगिकीकरण, वनों की कटाई, और शहरीकरण आदि है।

अत्यधिक वन-कटाई से हम प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ रहे है साथ ही तकनीकी उन्नति जैसे ग्लोबल कार्बन साईकिल ओजोन परत में छेद कर रहे है और इससे अल्ट्रावॉयलेट किरणों को धरती पर आसानी से आने का मौका मिल रहा है जो ग्लोबल वार्मिंग में बढ़ौतरी का कारण बन रही है। हवा से कॉर्बनडाई ऑक्साइड को हटाने के लिये पेड़-पौधे सर्वश्रेठ विकल्प है अत: वनों की कटाई को रोकना होगा तथा ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को खत्म करने के लिये पेड़ों को लगाने के लिये लोगों को प्रोत्साहित करना होगा जिससे हमे इसके खतरे को कम करने में हमें बड़े स्तर की सफलता मिल सकती है। पूरे विश्व में जनसंख्या विस्फोट को भी रोकने की आवश्कता है क्योंकि इससे धरती पर विनाशकारी तकनीकों का इस्तेमाल कम होगा।


 

ग्लोबल वार्मिंग निबंध 7 (800 शब्द)

ग्लोबल वार्मिंग क्या है ?
महासागर, बर्फ की चोटी सहित पूरा पर्यावरण और धरती की सतह का नियमित गर्म होने की प्रक्रिया को ग्लोबल वार्मिंग कहते है। पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक तौर पर वातावरणीय तापमान में वृद्धि देखी गई है। पर्यावरणीय सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, पिछले शताब्दी में 1.4 डिग्री फॉरेनहाईट (0.8 डिग्री सेल्सियस) के लगभग धरती के औसत तापमान में वृद्धि हुई है। ऐसा भी आकलन किया गया है कि अगली शताब्दी तक 2 से 11.5 डिग्री F की वृद्धि हो सकती है।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण:

ग्लोबल वार्मिंग के बहुत सारे कारण है, इसका मुख्य कारण ग्रीनहाउस गैस है जो कुछ प्राकृतिक प्रक्रियाओं से तो कुछ इंसानों की पैदा की हुई है। जनसंख्या विस्फोट, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा के इस्तेमाल की वजह से 20वीं सदी में ग्रीनहाउस गैसों को बढ़ते देखा गया है। वातावरण में कई सारे ग्रीनहाउस गैसों के निकलने का कारण औद्योगिक क्रियाएँ है, क्योंकि लगभग हर जरुरत को पूरा करने के लिये आधुनिक दुनिया में औद्योगिकीकरण की जरुरत है।

पिछले कुछ वर्षों में कॉर्बनडाई ऑक्साइड(CO2) और सलफरडाई ऑक्साइड (SO2) 10 गुना से बढ़ा है। ऑक्सीकरण चक्रण और प्रकाश संश्लेषण सहित प्राकृतिक और औद्योगिक प्रक्रियाओं के अनुसार कॉर्बनडाई ऑक्साइड का निकलना बदलता रहता है। कार्बनिक समानों के सड़न से वातावरण में मिथेन नाम का ग्रीनहाउस गैस भी निकलता है। दूसरे ग्रीनहाउस गैस है-नाइट्रोजन का ऑक्साइड, हैलो कार्बन्स, CFCs क्लोरिन और ब्रोमाईन कम्पाउंड आदि। ये सभी वातावरण में एक साथ मिल जाते है और वातावरण के रेडियोएक्टिव संतुलन को बिगाड़ते है। उनके पास गर्म विकीकरण को सोखने की क्षमता है जिससे धरती की सतह गर्म होने लगती है।

अंर्टाटिका में ओजोन परत में कमी आना भी ग्लोबल वार्मिंग का एक कारण है। CFCs गैस के बढ़ने से ओजोन परत में कमी आ रही है। ये ग्लोबल वार्मिंग का मानव जनित कारण है। CFCc गैस का इस्तेमाल कई जगहों पर औद्योगिक तरल सफाई में एरोसॉल प्रणोदक की तरह और फ्रिज में होता है, जिसके नियमित बढ़ने से ओजोन परत में कमी आती है।

ओजोन परत का काम धरती को नुकसान दायक किरणों से बचाना है। जबकि, धरती के सतह की ग्लोबल वार्मिंग बढ़ना इस बात का संकेत है कि ओजोन परत में क्षरण हो रहा है। हानिकारक अल्ट्रा वॉइलेट सूरज की किरणें जीवमंडल में प्रवेश कर जाती है और ग्रीनहाउस गैसों के द्वारा उसे सोख लिया जाता है जिससे अंतत: ग्लोबल वार्मिंग में बढ़ौतरी होती है। अगर आँकड़ों पर नजर डाले तो ऐसा आकलन किया गया है कि अंर्टाटिका (25 मिलियन किलोमीटर) की छेद का दोगुना ओजोन परत में छेद है। सर्दी और गर्मी में ओजोन क्षरण का कोई खास चलन नहीं है।

वातावरण में एरोसॉल की मौजूदगी भी धरती की सतह के तापमान को बढ़ाती है। वातावरणीय ऐरोसॉल में फैलने की क्षमता है तथा वो सूरज की किरणों को और अधोरक्त किरणों को सोख सकती है। ये बादलों के लक्षण और माइक्रोफिजीकल बदलाव कर सकते है। वातावरण में इसकी मात्रा इंसानों की वजह से बढ़ी है। कृषि से गर्द पैदा होता है, जैव-ईंधन के जलने से कार्बनिक छोटी बूँदे और काले कण उत्पन्न होते है, और विनिर्माण प्रक्रियाओं में बहुत सारे विभिन्न पदार्थों के जलाए जाने से औद्योंगिक प्रक्रियाओं के द्वारा ऐरोसॉल पैदा होता है। परिवहन के माध्यम से भी अलग-अलग प्रदूषक निकलते है जो वातावरण में रसायनों से रिएक्ट करके एरोसॉल का निर्माण करते है।

ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव:

ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने के साधनों के कारण कुछ वर्षों में इसका प्रभाव बिल्कुल स्पष्ट हो चुका है। अमेरिका के भूगर्भीय सर्वेक्षणों के अनुसार, मोंटाना ग्लेशियर राष्ट्रीय पार्क में 150 ग्लेशियर हुआ करते थे लेकिन इसके प्रभाव की वजह से अब सिर्फ 25 ही बचे हैं। बड़े जलवायु परिवर्तन से तूफान अब और खतरनाक और शक्तिशाली होता जा रहा है। तापमान अंतर से ऊर्जा लेकर प्राकृतिक तूफान बहुत ज्यादा शक्तिशाली हो जा रहे है। 1895 के बाद से साल 2012 को सबसे गर्म साल के रुप में दर्ज किया गया है और साल 2003 के साथ 2013 को 1880 के बाद से सबसे गर्म साल के रुप में दर्ज किया गया।

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बहुत सारे जलवायु परिवर्तन हुए है जैसे गर्मी के मौसम में बढ़ौतरी, ठंडी के मौसम में कमी,तापमान में वृद्धि, वायु-चक्रण के रुप में बदलाव, जेट स्ट्रीम, बिन मौसम बरसात, बर्फ की चोटियों का पिघलना, ओजोन परत में क्षरण, भयंकर तूफान, चक्रवात, बाढ़, सूखा आदि।

ग्लोबल वार्मिंग का समाधान:

सरकारी एजेँसियों, व्यापारिक नेतृत्व, निजी क्षेत्रों और एनजीओ आदि के द्वारा, कई सारे जागरुकता अभियान और कार्यक्रम चलाये और लागू किये जा रहे है। ग्लोबल वार्मिंग के द्वारा कुछ ऐसे नुकसान है जिनकी भरपाई असंभव है(बर्फ की चोटियों का पिघलना)। हमें अब पीछे नहीं हटना चाहिए और ग्लोबल वार्मिंग के मानव जनित कारकों को कम करने के द्वारा हर एक को इसके प्रभाव को घटाने के लिये अपना बेहतर प्रयास करना चाहिए। हमें वातावरण से ग्रीनहाउस गैसों का कम से कम उत्सर्जन करना चाहिये और उन जलवायु परिवर्तनों को अपनाना चाहिये जो वर्षों से होते आ रहे है। बिजली की ऊर्जा के बजाये शुद्ध और साफ ऊर्जा के इस्तेमाल की कोशिश करनी चाहिये अथवा सौर, वायु और जियोथर्मल से उत्पन्न ऊर्जा का इस्तेमाल करना चाहिये। तेल जलाने और कोयले के इस्तेमाल, परिवहन के साधनों, और बिजली के सामानों के स्तर को घटाने से ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को घटाया जा सकता है।

पर्यावरण पर निबंध-Essay On Environment -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

पर्यावरण पर निबंध-Essay On Environment -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi 

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एक स्वच्छ वातावरण एक शांतिपूर्ण और स्वस्थ जीवन जीने के लिए बहुत आवश्यक है। लेकिन मनुष्य के लापरवाही से हमारा पर्यावरण दिन ब दिन गन्दा होता जा रहा है। यह एक मुद्दा है जिसके बारे में हर किसी को पता होना चाहिए खासकर के बच्चो को। हम कुछ निम्नलिखित निबंध प्रदान कर रहे है जो की पर्यावरण पर लिखा है जो आपके बच्चो व छात्रों को स्कूल प्रोजेक्ट और निबंध प्रतियोगिता में भाग लेने में मदद करेंगी|

पर्यावरण पर निबंध (एनवायरनमेंट एस्से)

You can get below some essays on Environment in Hindi language for students in 100, 150, 250, 300, 400 and 500 words.

पर्यावरण निबंध 1 (100 शब्द)

वातावरण एक प्राकृतिक परिवेश है जो पृथ्वी नामक इस ग्रह पर जीवन को विकसित, पोषित और नष्ट होने में मदद करता है। प्राकृतिक वातावरण पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व में एक बड़ी भूमिका निभाता है और यह मनुष्यों, पशुओं और अन्य जीवित चीजो को बढ़ने और स्वाभाविक रूप से विकसित होने में मदद करता है। लेकिन मनुष्य के कुछ बुरे और स्वार्थी गतिविधियों के कारण हमारा पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। यह एक महत्वपूर्ण विषय है और हर किसी को हमारे पर्यावरण को कैसे बचाया जाये और इसे सुरक्षित रखने के बारे में जानना चाहिए ताकि इस ग्रह पर जीवन के अस्तित्व को जारी रखने के लिए प्रकृति का संतुलन सुनिश्चित हो सके|

पर्यावरण

पर्यावरण निबंध 2 (150 शब्द)

जैसा की हम सब लोग पर्यावरण से भली भाति परिचित है, पर्यावरण वह है जो प्रकिृतिक रूप से हमारे चारो तरफ है और पृथ्वी पर हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित करता है। जो हवा हम हर पल सांस लेते है, पानी जो हम अपनी दिनचर्या में इस्तेमाल करते है, पौधें, जानवर और अन्य जीवित चीजे यह सब पर्यावरण के तहत आता है। जब प्राकृतिक चक्र किसी भी गड़बड़ी के बिना साथ साथ चलता रहे तब एक पर्यावरण स्वस्थ वातावरण कहा जाता है| प्रकृति के संतुलन में किसी भी प्रकार का बाधा वातावरण को पूरी तरह प्रभावित करता है जो की मानव जीवन का नाश कर देता है|

इंसान की उन्नत जीवन स्तर के युग में, वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, वनों की कटाई, जल प्रदूषण, मिट्टी प्रदूषण, अम्ल वर्षा और तकनीकी प्रगति के माध्यम से मनुष्यो द्वारा किये गए अन्य खतरनाक आपदाओं के रूप में हमारा प्रदुषण काफी हद तक प्रभावित हो रहा है| हम सभी को हमारे प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा के लिए और इसे सामान्य रूप से सुरक्षित रखने के लिए एक साथ शपथ लेनी चाहिए।

पर्यावरण निबंध 3 (250 शब्द)

पर्यावरण का मतलब है सभी प्राकृतिक परिवेश जैसे की भूमि, वायु, जल, पौधें, पशु, ठोस सामग्री, कचरा, धूप, जंगल और अन्य वस्तु। स्वस्थ वातावरण प्रकृति के संतुलन को बनाए रखता है और साथ ही साथ पृथ्वी पर सभी जीवित चीजों को बढ़ने, पोषित और विकसित करने में मदद करता है। हालांकि अब कुछ तकनीकी उन्नति परिणाम स्वरुप मानव निर्मित चीजे वातावरण को कई प्रकार से विकृत कर रहीं हैं जोकि अंततः प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ रही है। हम अपने जीवन को साथ ही साथ इस ग्रह पर भविष्य में जीवन के अस्तित्व को खतरे में डाल रहे हैं|

यदि हम प्रकृति के अनुशासन के खिलाफ गलत तरीके से कुछ भी करते हैं तो ये पूरे वातावरण के माहौल जैसे की वायु-मंडल, जलमंडल और स्थलमंडल को अस्तव्यस्त करती है। प्राकृतिक वातावरण के अलावा, मानव निर्मित वातावरण भी मौजूद है जो की प्रौद्योगिकी, काम के माहौल, सौंदर्यशास्त्र, परिवहन, आवास, सुविधाएं और शहरीकरण के साथ सम्बंधित है| मानव निर्मित वातावरण काफी हद तक प्राकृतिक वातावरण को प्रभावित करता है जिसे हम सभी एकजुट होकर बचा सकते हैं|

प्राकृतिक वातावरण के घटक संसाधन के रूप में उपयोग किया जाता है हालाँकि कुछ बुनियादी भौतिक जरूरतों और जीवन के उद्देश्य को पूरा करने के लिए इंसान द्वारा इसका शोषण किया जाता है| हमें हमारे प्राकृतिक संसाधनों को चुनौती नहीं देनी चाहिए और पर्यावरण में इतना प्रदूषण या अपशिष्ट डालने में रोक लगानी चाहिए। हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों को महत्व देना चाहिए और प्राकृतिक अनुशासन के तहत उन्हें इस्तेमाल करना चाहिए।


 

पर्यावरण निबंध 4 (300 शब्द)

हमें कई प्रकार से मदद करने के लिए वातावरण में हमारे आस पास की सभी प्राकृतिक संसाधन शामिल है| यह हमें आगे बढ़ने और विकास करने के लिए बेहतर माध्यम प्रदान करता है। यह हमें इस ग्रह पर जीवन जीने के लिए सभी चीजे देता है। हालांकि, हमारे वातावरण को भी ये जैसा है वैसे ही बनाये रखने के लिए हम सब की मदद की जरुरत होती है, ताकि ये हमारे जीवन को पोषण दे सके और हमारे जीवन को बर्बाद न करे। मानव निर्मित प्रौद्योगिकीय आपदा की वजह से हमारे पर्यावरण के तत्वों में दिन ब दिन गिरावट आ रही है।

सिर्फ पृथ्वी ही एक ऐसी जगह जहा पर ही पुरे ब्रह्मांड में जीवन संभव है, और पृथ्वी पर जीवन जारी रखने के लिए हमें हमारे पर्यावरण की मौलिकता को बनाए रखने की जरूरत है| विश्व पर्यावरण दिवस एक अभियान है जो कई वर्षो से हर साल 5 जून को पूरे विश्व में पर्यावरण सुरक्षा और सफाई के लिए जनता में जागरूकता का प्रसार करने के लिए मनाया जाता है। हम अपने पर्यावरण को बचाने के तरीके और सभी बुरी आदतें जो की हमारे पर्यावरण को दिन ब दिन नुकसान पंहुचा रहा है के बारे में जानने के लिए हमें इस अभियान में भाग लेना चाहिए|

हम पृथ्वी के हर व्यक्ति के द्वारा उठाए गए छोटे कदम से बहुत ही आसान तरीके से हमारे पर्यावरण को बचा सकते हैं जैसे की; कचरे की मात्रा कम करना, कचरे को ठीक से उसकी जगह पर फेकना, पोली बैग का इस्तेमाल बंद करना, पुराने वस्तुओं को नए तरीके से पुन: उपयोग में लाना, टूटी हुई चीजों का मरम्मत करना और पुन: उपयोग में लाना, रिचार्जेबल बैटरी या अक्षय एल्कलाइन बैटरी का उपयोग करना, फ्लोरोसेंट प्रकाश का प्रयोग करना चाहिए, वर्षा जल संरक्षण करना, पानी की बर्बादी को कम करना, ऊर्जा संरक्षण करना, और बिजली का कम से कम उपयोग इत्यादि|

पर्यावरण निबंध 5 (400 शब्द)

पर्यावरण पृथ्वी पर जीवन के पोषण के लिए प्रकृति द्वारा भेंट दी गयी है। वह हर चीज जो हम अपने जीवन जीने के लिए इस्तेमाल करते है वो पर्यावरण के अंतर्गत आता है जैसे की पानी, हवा, सूरज की रोशनी, भूमि, पौंधें, जानवर, जंगल और अन्य प्राकृतिक चीजें। हमारा पर्यावरण पृथ्वी पर स्वस्थ जीवन का अस्तित्व बनाये रखने में एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, आधुनिक युग में हमारा पर्यावरण मानव निर्मित तकनीकी उन्नति के कारण दिन ब दिन बद्तर होती जा रही है। इस प्रकार, पर्यावरण प्रदूषण सबसे बड़ी समस्या बन गयी है जिसका हम आज सामना कर रहे हैं।

पर्यावरण प्रदूषण हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे की सामाजिक, शारीरिक, आर्थिक, भावनात्मक और बौद्धिक को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। पर्यावरण का दूषितकरण कई रोगों को लाता है जिससे इंसान पूरी जिंदगी पीड़ित हो सकता है। यह किसी समुदाय या शहर की समस्या नहीं है, बल्कि ये पुरे दुनिया की समस्या है जो की किसी एक के प्रयास से खत्म नहीं हो सकता। अगर इसका ठीक से निवारण नहीं हुआ तो ये एक दिन जीवन का अस्तित्व खत्म कर सकता है। हर आम नागरिक को सरकार द्वारा शुरू की गयी पर्यावरण सुरक्षा कार्यक्रम में भाग लेना चाहिए।

हमें हमारे पर्यावरण को स्वस्थ्य और प्रदुषण से दूर रखने के लिए अपने स्वार्थ और गलतियों को सुधारना होगा। यह विश्वास करना मुश्किल है, लेकिन सच है की हर किसी द्वारा केवल एक छोटे से सकारात्मक आंदोलनों की वजह से बिगड़ते पर्यावरण में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। वायु और जल प्रदूषण विभिन्न बीमारियों और विकारों द्वारा हमारे स्वास्थ्य को खतरे में डाल रहे हैं। आज कल हम किसी भी चीज को सेहतमंद नहीं कह सकते क्योकि जो हम खाते है वो पहले से ही कृत्रिम उर्वरकों के दुष्प्रभाव से प्रभावित हो चूका है और हमारे शरीर को रोगों से लड़ने की छमता को कमजोर कर दिया है| यही कारण है कि हम में से कोई भी स्वस्थ और खुश रहने के बावजूद कभी भी रोगग्रस्त हो सकता है।

अतः यह दुनिया भर के लिए गंभीर मुद्दा है जो हर किसी के निरंतर प्रयासों से हल होना चाहिए। हमें विश्व पर्यावरण दिवस में भाग लेना चाहिए ताकि हम सक्रिय रूप से पर्यावरण सुरक्षा कार्यो में भाग ले सके|


 

पर्यावरण निबंध 6 (500 शब्द)

वो सभी प्राकृतिक चीजें जो पृथ्वी पर जीवन संभव बनाती है पर्यावरण के अंतरगर्त आती है जैसे की जल, वायु, सूर्य के प्रकाश, भूमि, अग्नि, वन, पशु, पौंधें, इत्यादि| ऐसा माना जाता है की केवल पृथ्वी ही पुरे ब्रह्माण्ड में एक मात्र ऐसा गृह है जहा जीवन के अस्तित्व के लिए आवश्यक पर्यावरण है| पर्यावरण के बिना यहाँ हम जीवन का अनुमान नहीं लगा सकते इसीलिए हमें भविष्य में जीवन की संभावना सुनिश्चित करने के लिए अपने पर्यावरण को स्वस्थ्य और सुरछित रखना चाहिए| यह पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है| हर किसी को आगे आना चाहिए और पर्यावरण की सुरक्षा के अभियान में शामिल होना चाहिए।

प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए पर्यावरण और जीवित चीजो के बीच नियमित रूप से विभिन्न चक्र घटित होते रहते है। हालांकि, अगर किसी भी कारण से ये चक्र बिगड़ जाते हैं तो प्रकृति का भी संतुलन बिगड़ जाता है जो की अंततः मानव जीवन को प्रभावित करता है। हमारा पर्यावरण हजारो वर्षो से हमें और अन्य प्रकार के जीवो को धरती पर बढ़ने, विकसित होने और पनपने में मदद कर रहा है। मनुष्य पृथ्वी पर प्रकृति द्वारा बनाई गई सबसे बुद्धिमान प्राणी के रूप में माना जाता है इसीलिए उनमे ब्रह्मांड के बारे में पता करने की उत्सुकता बहोत ज्यादा है जोकि उन्हें तकनीकी उन्नति की दिशा में ले जाता है।

हर व्यक्ति के जीवन में इस प्रकार की तकनीकी उन्नति दिन-ब-दिन पृथ्वी पर जीवन के संभावनाओं को खतरे में डाल रहा है क्योकि हमारा पर्यावरण धीरे-धीरे नष्ट हो रहा है| ऐसा लगता है की ये एक दिन जीवन के लिए बहोत हानिकारक हो जाएगी क्योकि प्राकृतिक हवा, मिट्टी और पानी प्रदूषित होते जा रहे हैं| हालाँकि यह इंसान, पशु, पौधे और अन्य जीवित चीजों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है। हानिकारक रसायनों के उपयोग द्वारा कृत्रिम रूप से तैयार उर्वरक जो की मिट्टी को खराब कर रहे हैं परोक्ष रूप से हमारे दैनिक खाना खाने के माध्यम से हमारे शरीर में एकत्र हो रहे हैं। औद्योगिक कंपनियों से उत्पन्न हानिकारक धुँआ दैनिक आधार पर प्राकृतिक हवा को प्रदूषित कर रहे हैं जो की काफी हद तक हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं क्योकि इसे हम हर पल साँस लेते हैं|

इस व्यस्त, भीड़ और उन्नत जीवन में हमे दैनिक आधार पर छोटी छोटी बुरी आदतों का ख्याल रखना चाहिए। यह सत्य है की हर किसी के छोटे से छोटे प्रयास से हम हमारे बिगड़ते पर्यावरण की दिशा में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। हम हमारे स्वार्थ के लिए और हमारे विनाशकारी इच्छाओं को पूरा करने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का गलत उपयोग नहीं करना चाहिए। हम हमारे जीवन को बेहतर बनाने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास करना चाहिए लेकिन हमेशा यह सुनिश्चित रहे की भविष्य में हमारे पर्यावरण को इससे कोई नुकसान न हो। हमें सुनिश्चित होना चाहिए की नई तकनीक हमारे पारिस्थितिकी संतुलन को कभी गड़बड़ न करे|

लाल किला पर निबंध-Essay On Laal Quila Red Fort -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

लाल किला पर निबंध-Essay On Laal Quila-हिन्दी निबंध – Essay in Hindi 

Here we are providing you this essay in hindi हिन्दी निबंध  which will help in hindi essays for class 4, hindi essays for class 10,  hindi essays for class 9,  hindi essays for class 7, hindi essays for class 6, hindi essays for class 8.

लाल किला भारत की महान ऐतिहासिक इमारतों में से एक है। स्कूलों में विद्यार्थियों को यह विषय भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के बारे में ज्ञान और जानकारी बढ़ाने के लिए कुछ लाइन या पैराग्राफ लिखने के लिए दिए जाते हैं। हम यहाँ विद्यार्थियों की मदद करने के उद्देश्य से लाल किले पर निबंध उपलब्ध कर रहे हैं। वे लाल किले पर निबंध में से कोई भी सरल और आसान निबंध अपनी आवश्यकता और जरुरत के अनुसार चुन सकते हैं:

लाल किले पर निबंध (रेड फोर्ट एस्से)

You can get below some essays on Red Fort in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

लाल किला पर निबंध 1 (100 शब्द)

लाल किला भारत में महान ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है। यह दिल्ली के केन्द्र (नई दिल्ली) में स्थित है। इसका निर्माण मुगल सम्राट, शाहजहाँ ने कराया था। दिल्ली ब्रिटिश सरकार द्वारा मुगल सम्राट, बहादुर शाह जफर को 1857 में निष्कासित किए जाने तक मुगलों की राजधानी थी। यह यमुना नदी के किनारे पर स्थित है।

लाल किले की दीवारों का निर्माण 30 मीटर ऊँचे पत्थरों का प्रयोग करके किया गया है। इसके निर्माण को पूरा करने में लगभग नौ साल लगे। यह दिल्ली के लाल किले के नाम से भी जाना जाता है। यह देश की राजधानी की प्रसिद्धी को कई सालों से बढ़ा रहा है। इसका निर्माण लाल पत्थरों और संगमरमर का प्रयोग करके उस समय के कुशल कलाकारों द्वारा किया गया था।

लाल किला

लाल किला पर निबंध 2 (150 शब्द)

लाल किला भारत के महान स्मारकों में से एक है। यह नई दिल्ली में, शहर के केन्द्र में स्थित है। लाल किला, देश की राजधानी में, बहुत सी ऐतिहासिक इमारतों में सबसे ज्यादा महान है। यह पूरे विश्वभर में प्रसिद्ध है। यह भारत की शान बन गया है और पूरे विश्वभर के कोने-कोने से लोग इसे देखने के लिए आते हैं। यह मुगल सम्राट शाहजहां के द्वारा, 1648 में उस समय के कुशल कारीगरों की मदद से बनवाया था। यह बहुत लम्बें पत्थरों का प्रयोग करके बनाया गया है और इसके निर्माण को पूरा होने में लगभग नौ साल लगे।

यह लगभग यमुना नदी के किनारे पर स्थित है। यह दिल्ली में चाँदनी चौक बाजार के सामने स्थित है। यह अन्दर और बाहर की तरफ से बहुत सुन्दरता से बनाया गया है। इसके अन्दर मुगल काल के ऐतिहासिक अवशेष बड़े और भव्य संग्रहालय में परिसंपत्ति के रुप में रखे गए हैं। सार्वजनिक दर्शकों के लिए हॉल के रुप में दीवन-ए-आम है। बैठक करने के उद्देश्य से इसमें एक दीवान-ए-खास भी है।

लाल किला पर निबंध 3 (200 शब्द)

लाल किला दिल्ली में शहर के बिल्कुल केन्द्र में स्थित है। यह हिन्दुस्तानी लाल किले के रुप में भी जाना जाता है, क्योंकि यह लाल बलुआ पत्थरों के प्रयोग से बनाया गया है। यह मूल रुप से, प्राचीन काल से ही आशीर्वाद किला अर्थात् किला-ए-मुबारक के रुप में जाना जाता है। भारत के मुगल शासक लगभग 200 साल पहले से 1857 तक यहाँ रहा करते थे। इसमें एक बड़ा संग्रहालय है, एक दीवान-ए-आम (सार्वजनिक दर्शकों के लिए) और दीवान-ए-खास (बैठकों के उद्देश्य के लिए)। यह मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा 1648 में यमुना नदी के किनारे बनवाया था।। यह शाहजहानाबाद (शाहजहां की 5 वीं मुगल सम्राट राजधानी) के सुसज्जित महल के रूप में बनाया गया था।

यह पुराने सलीमगढ़ किला, जो सन् 1546 में इस्लाम शाह सूरी के द्वारा बनवाया गया था से सटा हुआ है। दोनों ही पानी की धार के साथ जुड़े हुए हैं, जिसे स्वर्ग (नहर-ए-बहिश्त) की धारा कहा जाता है। यह तिमुरिड, फारसी और हिंदू परंपराओं का मिश्रण सहित इस्लामी प्रतिकृति का उपयोग कर नवीन स्थापत्य शैली में बनाया गया था। इसे यूनेस्को द्वारा 2007 में विश्व विरासत स्थल के तहत लिया गया है। हर साल 15 अगस्त को, प्रधानमंत्री के द्वारा एक भारतीय ध्वज, इसके मुख्य द्वार पर देश के प्रतिष्ठित प्रतीक के रुप में फहराया जाता है।


 

लाल किला पर निबंध 4 (250 शब्द)

लाल किला भारत का बहुत सुन्दर ऐतिहासिक स्मारक है। यह नई दिल्ली में शहर के बीच में स्थित है। इसका निर्माण शाहजहां (महान मुगल सम्राट अकबर का पौता) के द्वारा कराया गया था। इसे खूबसूरती से तैयार किया गया है और स्थापत्य शैली में कुशल कारीगरों द्वारा निर्मित किया गया है। यह देश में राजनीतिक उपलब्धियों और प्रशासनिक नवाचारों का केंद्र बन गया है। यह प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थापत्य कला; जैसे- ताजमहल, जामा मस्जिद, मयूर सिंहासन, मोती मस्जिद आदि में से एक है। शाहजहां ने यहाँ 31 सालों, (मुगल स्थापत्य कला और ललित कला का स्वर्णकाल) 1627-1658 तक शासन किया था।

उसने कुशल कारीगरों और पेशेवर कारीगरों को बुलाकर यमुना नदी के पश्चिम में लाल बलुआ पत्थरों का प्रयोग करके लाल किले की प्रतिकृति को तैयार करके उसका निर्माण करने का आदेश दिया था। इसमें एक संग्रहालय, रंग महल, मोती महल, दीवान-ए-आम और दीवान-ए-खास जैसी सुन्दर संरचनाएं हैं। मंडप के आसपास बहुमूल्य रत्न, बहुमूल्य पत्थर, और सिल्वर लाइनों को लगाकर सजाया गया है। दीवान-ए-खास खूबसूरती से सजाया गया है और इसकी दीवारों पर निम्नलिखित सीख को उत्कीर्ण किया गया है कि, “यदि पृथ्वी पर कहीं स्वर्ग है, तो वह यहीं है, वह यहीं है, वह यहीं है”। इसके अन्दर एक दीवान-ए-आम का भी निर्माण एक सार्वजनिक दर्शकों के हॉल के रुप में किया गया है। अन्य सर्वोकृष्ट संरचना जैसे मोती मस्जिद को रंग महल के पास बनाया गया है। शाहजहां बहुत प्रसिद्ध मुगल सम्राट था और “इमारतों के युवराज” के रुप में जाना जाता था। प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस पर, भारत के प्रधानमंत्री यहाँ राष्ट्रीय ध्वज का ध्वजारोहण करते हैं।

लाल किला पर निबंध 5 (300 शब्द)

लाल किला देश का राष्ट्रीय प्रतीक है। यह भारत का सबसे सुन्दर और अलग ढ़ंग से तैयार किया गया स्मारक है। पूरे भारत में बहुत से ऐतिहासिक स्थल हैं हालांकि, यह सबसे अधिक गौरवान्वित और आकर्षक है। यह उच्च कौशल वाले कारीगरों के द्वारा बहुत खूबसूरती से तैयार और निर्मित किया गया है। यह देश का ऐतिहासिक प्रतीक है और शैक्षणिक और ऐतिहासिक मूल्य का स्मारक बन गया है। अभिभावक आमतौर पर, यहाँ अपने बच्चों के साथ छुट्टियों में ऐतिहासिक स्थल और स्मारकों के बारे में उन्हें कुछ ज्ञान प्रदान करने के लिए आते हैं। यह विद्यार्थियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण स्थल बन गया है।

लाल किला, नई दिल्ली में, यमुना नदी के किनारे पर शहर के बिल्कुल केन्द्र में स्थित है। यह प्रसिद्ध मुगल सम्राट, शाहजहां के द्वारा 1648 में 17वीं शताब्दी के दौरान निर्मित कराया गया था। यह लाल पत्थरों का प्रयोग करके निर्मित किया गया है। यह महान ऐतिहासिक स्थल है और दिल्ली में, सलीमगढ़ किले के पास स्थित है। दिल्ली में लाल किले पास अन्य ऐतिहासिक स्थल, कुतुब मीनार, हुमायूँ का मकबरा आदि हैं। हमारे स्कूल के प्रधानाचार्य हर साल हमारे लिए लाल किला देखने की व्यवस्था करते हैं। वहाँ से लाल किले को देखकर वापस आने के बाद हमें अपनी कक्षा में लाल किले पर गृह कार्य को प्रस्तुत करना पड़ता है। यह बहुत से देशों के लोगों के लिए आकर्षण का स्थल है।

यह भारत में प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है, जहाँ हर साल बहुत से देशों से लोगों की एक भारी भीड़ आती है। भारत के प्रधानमंत्री, यहाँ हर साल 15 अगस्त, अर्थात् स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, राष्ट्रीय ध्वज का (लाहौरी गेट की प्राचीर पर) ध्वजारोहण (फहराते) करते हैं। यह 2007 में विश्व धरोहर स्थलों में से एक के रूप में यूनेस्को द्वारा में चयनित किया गया है।


 

लाल किला पर निबंध 6 (400 शब्द)

लाल किले को रेड फोर्ट के नाम से भी जाना जाता है और यह शहर के बिल्कुल बीच में स्थित है। यह ऐतिहासिक स्थापत्य कला की उत्कृष्ट कृति है और बहुत से देशों के लोगों के लिए पर्यटन का आकर्षक स्थल है। इसे देश की ऐतिहासिक सम्पत्ति के रुप में स्वभाविक और सुरक्षित बनाने के लिए, भारत की सरकार के द्वारा समय-समय पर इसकी देखरेख की है। यह मुगल सम्राट शाहजहाँ के द्वारा, 17वीं शताब्दी में वर्ष 1648 में, यमुना नदी के किनारे पर बनवाया गया था। यह नई दिल्ली में सलीमगढ़ किले के पास स्थित है। भारत के स्वतंत्रता दिवस पर, प्रधानमंत्री यहाँ राष्ट्रीय ध्वज को फहराते हैं। लाल किला अपने आप में बहुत सी सुन्दर संरचनाओं (जैसे- रंग महल या रंगों का महल, मुमताज महल, खास महल, हरम, शाह बुर्ज, दीवान-ए-खास, दीवान-ए-आम, नहर-ए-बहिश्त (स्वर्ग की धारा) आदि) को लिए हुए है। यह लाल पत्थरों का प्रयोग करके निर्मित किया गया था और इसको उच्च कुशल और पेशेवर कारीगरों द्वारा तैयार किया गया है। पहली मंजिल पर युद्ध स्मारक संग्रहालय रखे हैं।

शीश महल (शीश का अर्थ है- शीशा और महल का अर्थ है- राजमहल) उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों में स्थित है। अच्छी तरह से तैयार किया गया खास महल (सम्राट का महल) को एक विशेष कमरे के रुप में निजी उद्देश्यों; जैसे- पूजा करने या सोने आदि के लिए बनाया गया है। सफेद संगमरमर का प्रयोग करके यमुना के किनारे की ओर एक बहुत अच्छी बॉलकनी तैयार की गई है। यहाँ एक अच्छी तरह से तैयार किया गया मयूर सिंहासन भी है। इसकी दीवारों पर लिखा गया है कि, “यदि धरती पर कहीं स्वर्ग है तो वह यहीं है, यहीं है, यहीं है।” महल के अन्दर सम्राट के निजी उद्देश्यों और अकेले में आराम करने के लिए अच्छी तरह से तैयार किया गया एक शाह बुर्ज है। मोती मस्जिद को पर्ल मस्जिद भी कहा जाता है, जो राजमहल में सम्राट औरंगजेब के द्वारा जुड़वाया गया है। इसमें तीन गुम्बदें हैं और जो बहुत ही लालित्यपूर्ण लगते हैं। मोती मस्जिद के उत्तर में हयात बक्स अर्थात् मुगल गार्डन है, जो शाहजहां के द्वारा बनवाया गया था।

जीवांत समारोह और दावतों का आयोजन करने के लिए वहाँ एक शाह बुर्ज की राजसी मीनार भी है। दिल्ली के लाल किले को, महान मुगल महल के रुप में माना जाता है और शाहजहां के साम्राज्य के हृदय के रुप में जाना जाता है। लाल किला भारत के साथ ही विदेशों के लोगों के लिए भी पर्यटन के लिए शानदार और आकर्षक स्थान है। पिछले साल, मैं अपने माता-पिता के साथ लाल किला देखने के लिए गया था, जहाँ मैंने बहुत मस्ती की और किले के साथ ही इसके इतिहास के बारे में बहुत सा ज्ञान प्राप्त किया।

कुतुब मीनार पर निबंध-Essay On Qutub Minaar -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

कुतुब मीनार पर निबंध-Essay On Qutub Minaar -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi 

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हम यहाँ आपके बच्चों और विद्यार्थियों के लिए उनके स्कूल या कॉलेज में आयोजित निबंध प्रतियोगिता में भाग लेने में मदद करने के लिए विभिन्न शब्द सीमाओं में कुछ निबंध पैराग्राफ और कुतुब मीनार पर निबंध उपलब्ध करा रहे हैं। आप इनमें से कोई भी कुतुब मीनार पर निबंध या पैराग्राफ अपनी जरुरत और आवश्यकता के अनुसार चुन सकते हैं।

कुतुब मीनार पर निबंध (क़ुतुब मीनार एस्से)

You can get below some essays on Qutub Minar in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

कुतुब मीनार पर निबंध 1 (100 शब्द)

कुतुब मीनार (जिसे कुतब मीनार या कतब मीनार भी कहा जाता है) प्रसिद्ध भारतीय ऐतिहासिक स्मारक है, जो भारत की दूसरी सबसे बड़ी मीनारों (पहली मीनार फतेह बुर्ज (चप्पड़ चिड़ी, मौहाली) है, जो 100 मीटर लम्बी) में गिनी जाती है। कुतुब मीनार 73 मीटर लम्बी है, जो इन्डो-इस्लामिक शैली में बनाई गई है। यह यूनेस्को के द्वारा विश्व विरासत में जोड़ी गई है। यह प्रत्येक दिन सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक खोली जाती है। यह महरौली, दिल्ली-गुड़गाँव सड़क पर स्थित है। इस स्मारक को देखना ही इतिहास के बारे में जानने का अच्छा तरीका है। दिल्ली बहुत से ऐतिहासिक स्मारकों के लिए प्रसिद्ध शहर है।

कुतुब मीनार

कुतुब मीनार पर निबंध 2 (150 शब्द)

कुतुब मीनार भारत के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारकों में एक है। इसे कुतुब मीनार या कुतब मीनार भी लिख सकते हैं। यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी मीनार (लगभग 73 मीटर) कही जाती है। भारत की पहली सबसे ऊँची मीनार चप्पड़ चिड़ी, मौहाली (पंजाब) में फतेह बुर्ज है। कुतुब मीनार को यूनेस्को विश्व विरासत में जोड़ा गया है। यह दिल्ली में स्थित है और इंडो-इस्लामिक स्थापत्य शैली में लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर का उपयोग करके बनाई गई है।

कुतुब मीनार के आधार का व्यास 14.3 मीटर और शीर्ष का व्यास 2.7 मीटर है। इसकी 379 सीढ़ियाँ है। इसका निर्माण कुतुब-उद्दीन-ऐबक के द्वारा 1193 में शुरु हुआ था हालांकि, इसे इल्तुतमिश नामक उत्तराधिकारी के द्वारा पूरा किया गया। इसकी पाँचवी और आखिरी मंजिल 1368 में फिराज शाह तुगलक के द्वारा बनवाई गई थी। कुतुब मीनार के परिसर के आसपास कई अन्य प्राचीन और मध्ययुगीन संरचनाओं के खंडहर हैं।

कुतुब मीनार पर निबंध 3 (200 शब्द)

कुतुब मीनार एक भारतीय ऐतिहासिक स्मारक है, जो भारत के अन्य ऐतिहासिक स्मारकों के बीच एक प्रमुख आकर्षण के रूप में अकेला खड़ा है। कुतुब का अर्थ न्याय का स्तम्भ है। यह भारत की राजधानी अर्थात् दिल्ली में स्थित है। कुतुब मीनार दुनिया की सबसे बड़ी और प्रसिद्ध टावरों में से एक बन गई है। यह यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में सूचीबद्ध की गई है। यह मुगल वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति का एक बड़ा उदाहरण है। यह एक 73 मीटर लम्बी, 13 वीं सदी की स्थापत्य शैली (इंडो-इस्लामिक वास्तुकला) में लाल बलुआ पत्थर से बनी मीनार है।

यह 12वीं और 13वीं सदी में कुतुब-उद्दीन ऐबक और उसके उत्तराधिकारियों द्वारा राजपूतों के ऊपर मौहम्मद गौरी की जीत का जश्न मनाने के लिए निर्मित की गई थी। इससे पहले, यह तुर्क-अफगान साम्राज्य और इस्लाम की सैन्य शक्ति का प्रतीक थी। यह शंक्वाकार आकार में 14.3 मीटर के आधार व्यास और 2.7 मीटर के शीर्ष व्यास वाली सबसे ऊँची मीनारों में से एक है। इसके अंदर 379 सीढ़ियाँ और पाँच अलग मंजिलें हैं। मीनार की ऊपरी मंजिल से शहर का एक शानदार दृश्य दिखाई देता है। इसकी पहली तीन मंजिलें लाल बलुआ पत्थरों से निर्मित हैं हालांकि, चौथी और पाँचवीं मंजिल का निर्माण संगमरमर और लाल बलुआ पत्थरों के प्रयोग से हुआ है।


 

कुतुब मीनार पर निबंध 4 (250 शब्द)

कुतुब मीनार एक सबसे प्रसिद्ध और भारत की सबसे ऊँची मीनारों में से एक है। यह अरबिन्द मार्ग, महरौली पर स्थित है और विश्व धरोहरों में जोड़ी जा चुकी है। यह भारत की दूसरी सबसे ऊँची इमारत है, जिसका निर्माण 1192 में कुतुब-उद्दीन-ऐबक के द्वारा शुरु कराया गया था और बाद में उसके उत्तराधिकारी इल्तुतमिश के द्वारा पूरा कराया गया। यह एक शंक्वाकार इंडो-इस्लामिक अफगान स्थापत्य शैली में बनाई गई मीनार है। यह 379 सीढ़ियों को रखने वाली 73 मीटर (23.8 फीट) की ऊँचाई वाली मीनार है।

कुतुब मीनार के चारों ओर एक आकर्षक हरा बगीचा है, जो आगन्तुकों के ध्यान को खींचता है। यह भारत के सबसे प्रसिद्ध और आकर्षक पर्यटन स्थलों में से एक है। यह भारत का सबसे अधिक देखा जाने वाला स्मारक है, जिसे देखने के लिए पूरी दुनिया के कोने-कोने से लोग आते हैं। यह 14.3 मीटर के आधार व्यास और 2.7 मीटर के शीर्ष व्यास वाली सबसे अलग शैली में निर्मित पाँच मंजिल (इसकी पहली तीन मंजिल लाल बलुआ पत्थरों का प्रयोग करके और ऊपर की दो मंजिल संगमरमर और बलुआ पत्थर का उपयोग करके बनाई गई है) की मीनार है।

कुतुब मीनार से सटी हुई एक और लम्बी मीनार अलाई मीनार है। कुतुब मीनार इस्लाम की विजय और ताकत के प्रतीक के साथ ही कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद में प्रार्थना करने के लिए लोगों को बुलाने की सेवा का कार्य करने का भी प्रतीक है। यह दिल्ली में आकर्षक पर्यटक गंतव्य है और इसका गर्मियों व सर्दियों की छुट्टियों में सबसे अधिक बच्चों और विद्यार्थियों द्वारा दौरा किया जाता है।

कुतुब मीनार पर निबंध 5 (300 शब्द)

कुतुब मीनार दक्षिण दिल्ली में अरबिन्द मार्ग मौहाली पर स्थित है। यह लाल बलुआ पत्थर से बनी एक प्रसिद्ध शानदार संरचना है। यह भारत की दूसरी सबसे ऊँची मीनार है, जो 800 सालों से भी अधिक प्राचीन है। इस मीनार का निर्माण कार्य 1192 में कुतुब-उद्दीन-ऐबक (जो प्रथम सबसे सफल मुस्लिम शासक के रुप में जाना जाता है, जिसने भारत में इस इस्लामिक राजवंश को बनाया था) के द्वारा शुरु कराया गया था। यह माना जाता है कि, यह मीनार भारत में राजपूतों को हराने के प्रतीक के रुप में बनवाई गई थी। इस मीनार का कार्य इसके उत्तराधिकारियों में से एक इल्तुतमिश के द्वारा पूरा कराया गया था।

यह मुगल स्थापत्य कला का शानदार नमूना है और भारत में एक पर्यटन स्थल के रुप में प्रसिद्ध है। यह हर साल लाखों पर्यटकों, विशेषरुप से छात्रों को आकर्षित करती है। यह यूनेस्को की विश्व धरोहरों में शामिल है। प्राचीन समय में, कुतुब-उद्दीन ऐबक भारत आया और उसने राजपूतों के साथ युद्ध किया और उन्हें हराने में सफल हो गया। राजपूतों के ऊपर अपनी विजय की सफलता को मनाने के लिए, उसने इस अद्भुत मीनार को बनाने का आदेश दिया। इसका निर्माण कार्य बहुत सी शताब्दियों में खत्म हुआ हालांकि, समय-समय पर इसके निर्माण कार्य में कुछ परिवर्तन (अन्तिम परिवर्तन सिकन्दर लोदी के द्वारा किया गया था) भी किए गए। मूल रुप से, यह सबसे पहले केवल एक मंजिल ऊँची थी और बाद के शासकों द्वारा इसमें और मंजिलें जोड़ी गई।

इसके आधार का व्यास 14.3 मीटर और शीर्ष व्यास 7.3 मीटर है। यह 73 मीटर लम्बी है, जिसमें 379 सीढ़ियाँ है। यह माना जाता है कि, यह सात मंजिल की थी हालांकि, ऊपरी दो मंजिल भूकम्प में गिर गई। कुछ अन्य अद्वितीय संरचनाएं, जैसे- अलाई-दरवाजा, इल्तुतमिश का मकबरा, दो मस्जिदें, आदि इस मीनार के आस-पास होने के साथ ही इसके आकर्षण को बढ़ाती है। यह इंडो-इस्लामिक स्थापत्य शैली में बनाया गया है।


 

कुतुब मीनार पर निबंध 6 (400 शब्द)

भारत की दूसरी सबसे बड़ी, आकर्षक और ऐतिहासिक स्मारक कुतुब मीनार, अरबिंद मार्ग, महरौली दिल्ली में स्थित है। यह लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर का उपयोग कर अनूठी स्थापत्य शैली में बनाई गई है। यह माना जाता है कि, मुगलों ने राजपूतों पर अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए इस विजय मीनार का निर्माण कराया था। इसकी दुनिया की प्रसिद्ध मीनारों में गिनती होती है और विश्व धरोहर स्थलों में इसे जोड़ा जाता है। यह 73 मीटर लम्बी, 14.3 मीटर आधार व्यास, 2.7 मीटर शीर्ष व्यास, 379 सीढ़ियाँ और पाँच मंजिल वाली मीनार है।

कुतुब मीनार का निर्माण कुतुब-उद्दीन ऐबक के द्वारा शुरू कराया गया था हालांकि, इसे इल्तुतमिश द्वारा पूरा किया गया। इस मीनार का निर्माण कार्य 1200 ईस्वी में पूरा हुआ था। यह मुगल स्थापत्य कला की सबसे महान कृतियों में से एक है, जो सुन्दर नक्काशी के साथ बहुत सी मंजिलों की इमारत है। यह आकर्षक पर्यटन स्थलों में से एक है, जो हर साल एक बड़ी भीड़ को दुनिया भर के कोनों से इसे देखने के लिए आकर्षित करती है। इसने भूकम्प के कारण बहुत से विनाशों को झेला है हालांकि, उसी समय इसे शासकों द्वारा पुनर्निर्मित भी कराया गया है। फिरोज शाह ने इसकी ऊपरी दो मंजिलों का पुनर्निर्माण कराया था, जो भूकम्प में नष्ट हो गई थी। एक अन्य पुनर्निर्माण का कार्य सिकन्दर लोदी के द्वारा 1505 में और मेजर स्मिथ के द्वारा 1794 में मीनार के नष्ट हुए भागों में कराया गया था। यह सप्ताह के सभी दिनों में सुबह 6 बजे खुलती है, और शाम 6 बजे बन्द होती है।

मीनार का निर्माण बहुत समय पहले लाल बलुआ पत्थरों और संगमरमर का प्रयोग करके किया गया था। इसमें बहुत से बाहरी किनारे और बेलनाकार या घुमावदार रास्ते हैं और इसकी बालकनियाँ इसकी मंजिलों को अलग करती हैं। कुतुब मीनार की पहली तीन मंजिलों का निर्माण लाल बलुआ पत्थरों का प्रयोग करके हुआ है हालांकि, चौथी और पाँचवीं मंजिल का निर्माण संगमरमर और बलुआ पत्थरों से हुआ है। इस मीनार के आधार में एक कुव्वत-उल-इस्लाम (जिसे भारत में निर्मित पहली मस्जिद माना जाता है) मस्जिद है। कुतुब परिसर में 7 मीटर की ऊँचाई वाला एक ब्राह्मी शिलालेख के साथ लौह स्तंभ है। मीनार की दिवारों पर कुरान (मुस्लिमों का पवित्र पौराणिक शास्त्र) की बहुत सी आयतें भी लिखी गई हैं। यह देवनागिरी और अरेबिक रुप में लिखे अपने इतिहास को भी रखता है।

यह पर्यटकों के आकर्षण का प्रसिद्ध स्मारक है, जिसके आस-पास अन्य स्मारक भी हैं। प्राचीन समय से ही, यह माना जाता है कि, यदि कोई व्यक्ति इसकी ओर पीठ करके इसके सामने खड़े होकर अपने हाथों से इस (लौह स्तम्भ) के चक्कर लगाता है, तो उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। हर साल दुनिया भर के कोनों से, पर्यटक यहाँ इस ऐतिहासिक और अद्भुत स्मारक की सुन्दरता को देखने के लिए आते हैं।

ताजमहल पर निबंध-Essay On Taj Mahaal -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

ताजमहल पर निबंध-Essay On Taj Mahaal -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi 

Here we are providing you this essay in hindi हिन्दी निबंध  which will help in hindi essays for class 4, hindi essays for class 10,  hindi essays for class 9,  hindi essays for class 7, hindi essays for class 6, hindi essays for class 8.

ताजमहल भारत में सबसे लोकप्रिय ऐतिहासिक स्मारक है। बच्चों को सुंदर भारतीय स्मारक, ताज महल के बारे में कुछ जानकारी प्रदान करने का अवसर देते हैं। हमने यहाँ कुछ, ताजमहल पर निबंध उपलब्ध कराए हैं। आप इनमें से कोई भी ताजमहल पर निबंध चुन सकते हैं:

ताजमहल पर निबंध (ताजमहल एस्से)

You can get below some essays on Taj Mahal in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

ताजमहल पर निबंध 1 (100 शब्द)

ताजमहल बहुत आकर्षक और प्रसिद्ध प्राकृतिक दृश्य की तरह दिखने वाला ऐतिहासिक स्थान है। यह आगरा, उत्तर प्रदेश में स्थित है। यह बहुत सुन्दर स्थान पर बहुत बड़े क्षेत्र में स्थित है, जिसके पीछे की तरफ नदी है। यह पृथ्वी पर स्वर्ग की तरह दिखता है। यह सफेद संगमरमर का प्रयोग करके बनाया गया है। यह हर साल पूरे विश्व भर के लोगों का ध्यान, इसे देखने के लिए आकर्षित करता है। ताजमहल मुमताज के लिए, शाहजहाँ के आन्तरिक प्रेम का प्रतीक है, जिसने अपनी पत्नी मुमताज की याद में इसका निर्माण कराया था। ताज महल दुनिया के सात आश्चर्यों में गिना जाता है। यह महा साम्रज्ञी मुमताज महल की कब्र (समाधि) है।

ताजमहल

ताजमहल पर निबंध 2 (150 शब्द)

भारत में ताजमहल सुंदर और सबसे आकर्षक ऐतिहासिक जगह है। यह भारत का एक सांस्कृतिक स्मारक है, जो राजा शाहजहां द्वारा अपनी पत्नी (मुमताज महल) की मृत्यु के बाद में उसकी याद में बनवाया गया था। यह बहुत बड़े क्षेत्र में आमने-सामने बहुत सी हरियाली, पीछे की ओर एक नदी का किनारा, एक झील और एक लॉन को लिए हुए है। यह आगरा में स्थित है। यह दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक है। यह सफेद संगमरमर से बनी हुई सबसे सुन्दर इमारत है। यह सपनों के स्वर्ग जैसा लगता है। यह आकर्षक तरीके से बनाया गया है और शाही सुंदरता के साथ सजा है। यह पृथ्वी पर अद्भुत प्रकृति की सुंदरता में से एक है।

गुबंद के नीचे अन्धेरे कक्ष में राजा और रानी दोनों की कब्र है। इसकी दिवारों पर कांच के टुकड़ों का उपयोग करके कुरान की कुछ आयतों को लिखा गया है। इसके चारों कोनों पर स्थित बहुत ही आकर्षक चार मीनारें हैं।

ताजमहल पर निबंध 3 (200 शब्द)

ताजमहल बहुत खूबसूरती से बनाई गई ऐतिहासिक इमारत है। यह सफेद संगमरमर से बनी हुई है, जो इसे भव्य और चमकदार बनाता है। यह अपने आस-पास के क्षेत्रों में आकर्षक लॉन, सजावटी पेड़, सुंदर पशु, आदि को रखता है। यह आगरा, उत्तर प्रदेश में यमुना नदी के किनारे स्थित है। यह शाहजहां द्वारा अपनी पत्नी मुमताज महल की बनवाई गई बहुत ही सुन्दर कब्र है। प्राचीन समय में, शाहजहां एक राजा था और उसकी पत्नी मुमताज महल थी। शाहजहां अपनी पत्नी को बहुत प्यार करता था और वह उसकी मृत्यु के बाद बहुत दुखी हो गया। तब उसने अपनी पत्नी की याद में बड़ी कब्र का निर्माण कराने का निर्णय लिया। और उसने ताजमहल का निर्माण कराया जो आज दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक है।

ताजमहल आगरा के किले के बिल्कुल पीछे स्थित है, जहाँ से राजा अपनी प्यारी पत्नी की याद में ताजमहल को नियमित देखा करता था। हर साल हजारों लोग आगरा में ताजमहल की सुन्दरता को देखने के लिए आते हैं। यह बहुत से कलाकारों और कारीगरों ने कठिन परिश्रम द्वारा बनाया था। इसे 20 करोड़ भारतीय मुद्रा के द्वारा तैयार कराने में 20 सालों का समय लगा। ताजमहल रात में चाँद की चाँदनी में बहुत ही सुन्दर लगता है।


 

ताजमहल पर निबंध 4 (250 शब्द)

ताजमहल 17वीं शताब्दी में, मुगल सम्राट शाहजहां के द्वारा बनवाया गया, भारत का बहुत ही सुन्दर ऐतिहासिक स्मारक है। यह उसने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया था। वह उसकी तीसरी पत्नी थी, जिसे वह बहुत प्यार करता था। उसकी मृत्यु के बाद, राजा बहुत दुखी हो गया और बहुत सा धन, जीवन और समय खर्च करने के द्वारा ताजमहल का निर्माण कराया था। वह अपनी पत्नी की याद में आगरा के किले से प्रतिदिन ताजमहल को देखा करता था। ताजमहल उत्तर प्रदेश राज्य के आगरा शहर में बहुत बड़े और विस्तृत क्षेत्र में स्थित है। पूरी दुनिया की सात सबसे सुन्दर इमारतों में से एक है और सातवां अजूबा के नाम से जाना जाता है। यह भारत में सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में से एक है, जहाँ हर साल हजारों से भी ज्यादा पर्यटक आते हैं।

ताजमहल और आगरा के किले को यूनेस्को के द्वारा विश्व विरासत के रुप में चिह्नित किया गया है और 2007 में इसे दुनिया के सात अजूबों में चुना गया। ताजमहल आगरा किले से 2.5 किलोमी. दूर स्थित है। यह मुगल कालीन स्थापत्य कला है और भारतीय, इस्लामिक, मुस्लिम, पारसी कला आदि के मिश्रण के द्वारा बहुत सुन्दरता से बनाया गया है। यह माना जाता है कि, शाहजहां स्वंय के लिए ऐसी ही काले रंग की कब्र का निर्माण कराना चाहता था हालांकि, वह अपने इस विचार को कार्य रुप में बदलने से पहले से ही मर गया। उसकी मृत्यु के बाद उसे ताजमहल में ही अपनी पत्नी के बराबर में दफन कर दिया गया।

ताजमहल पर निबंध 5 (300 शब्द)

ताजमहल भारत की सबसे अच्छी और सुन्दर पर्यटन स्थलों में से एक है। भारत में बहुत से ऐतिहासिक स्मारक हैं हालांकि, ताजमहल केवल अकेला है। यह एक महान कलात्मक आकर्षण है, जो हर साल, बहुत से लोगों के मन को इसे देखने के लिए खींच लाता है। यह भारत का सबसे आकर्षक स्मारक है, जो दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक है। ताजमहल आगरा के महान राजा के प्रेम का प्रतीक है। यह सफेद संगमरमर का प्रयोग करके बनाया गया है, जो इसे आकर्षक और अद्भुत रुप देता है। इसे रबिन्द्रनाथ टैगोर ने “संगमरमर का एक स्वप्न” कहा है। यह पृथ्वी पर वास्तविक स्वर्ग है, जिसे यूनेस्को के द्वारा विश्व धरोहर बनाया गया है।

इसे महान मुगल सम्राट, शाहजहां, ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में उसकी मृत्यु के बाद बनवाया था। यह माना जाता है कि, वह अपनी पत्नी को बहुत प्यार करता था और उसकी मृत्यु के बाद बहुत दुखी हो गया था। उसने बिना भोजन और पानी के रहना शुरु कर दिया था। उसने अपनी पत्नी की सभी यादों को अपनी नजरों के सामने रखने का निर्णय लिया, तब उसने आगरा के किले के सामने अपने आन्तरिक प्रेम की याद में ताजमहल का निर्माण कराया। वह आगरा के किले से नियमित रुप से ताजमहल को देखा करता था और अपनी पत्नी को याद करता था। ताजमहल का निर्माण कराने में बहुत वर्षों का समय लगा। यह ऐतिहासिक स्मारक शाहजहां और मुमताज के प्रेम का प्रतीक है।

ताजमहल के आस-पास का वातावरण बहुत प्राकृतिक और आकर्षक है। यह उत्तर प्रदेश में, आगरा शहर में यमुना नदी के किनारे पर स्थित है। ताजमहल कई कलाकारों और कारीगरों के विचारों के द्वारा शाही कलाकृतियों का प्रयोग करके बनाया गया है। बहुत से सजावटी घास और पेड़ इसकी सुन्दरता और पर्यावरण की खुशबू में वृद्धि करते हैं। ताजमहल की इमारत के सामने पुख्ता पगडंडी के मध्य में कुछ आकर्षक पानी के फव्वारे बनाए गए हैं। ये आकर्षक फव्वारे कब्र में प्रवेश रास्ते को बनाते हैं।


 

ताजमहल पर निबंध 6 (400 शब्द)

ताजमहल महान भारतीय स्मारक है जो हर साल दुनिया भर के लोगों के मन को आकर्षित करता है। यह भारत में आगरा, उत्तर प्रदेश, में यमुना नदी के किनारे पर स्थित है। यह भारत में मुगल स्थापत्य कला की एक शानदार कृति है। यह आगरा किले से कम से कम 2.5 किमी की दूरी पर स्थित है। यह मुगल सम्राट शाहजहां के आदेश पर, अपनी सम्मानीय और प्रिय पत्नी, अर्ज़ुमंद बानों (बाद में मुमताज महल के नाम से जाना गया), की याद में बनाया गया था। वह बहुत सुन्दर थी और राजा उसे बहुत प्यार करता था। उसकी मृत्यु के बाद, राजा ने उसकी याद में अपने कलाकारों को भव्य कब्र का निर्माण करने का आदेश दिया। यह विश्व के सबसे महान और आकर्षक स्मारकों में से एक है, जो विश्व के सात आश्चर्यों में शामिल है।

यह स्मारक मुगल सम्राट शाहजहां के अपनी पत्नी के प्रति प्रेम और लगाव का प्रतीक है। यह भव्य मुगल स्मारक (एक राजसी ऐतिहासिक संरचना) के रुप में भी कहा जाता है), जो भारत के दिल में स्थित है। इसका निर्माण सफेद संगमरमर और महँगे पत्थरों के प्रयोग के साथ ही दिवारों पर बहुत खूबसूरती से नक्काशी करके किया गया है। यह माना जाता है कि, ताज महल को राजा शाहजहां ने अपनी प्रिय मृत पत्नी, मुमताज महल को उपहार के रुप में दिया था। उसने ताजमहल का निर्माण करने के लिए दुनिया के सबसे अच्छे कारीगरों को बुलाया था। इसके तैयार होने में बहुत सा धन और समय लगा। यह भी माना जाता है कि, उसने लगभग सौ से भी अधिक डिजाइनों को इंकार कर दिया था और अन्त में इसे स्वीकृति दी। ताजमहल के चारों कोनों पर चार आकर्षक मीनारें हैं। उन्हें बहुत ही खूबसूरती से बनाया गया है और वे थोड़ी सी बाहर की ओर झुकी हुई हैं ताकि, भविष्य में किसी भी प्राकृतिक आपदा में वे ताजमहल की इमारत को सुरक्षित कर सकें।

ताजमहल के निर्माण में जिस संगमरमर का प्रयोग किया गया है, वह बहुत ही महँगा है और आगरा में राजा के द्वारा कहीं बाहर से मँगवाया गया था। ताजमहल की संरचना में बहुत सी कलाकृतियों का समन्वय है, जैसे- भारतीय, पाकिस्तानी, इस्लामिक और तुर्किस। इसे 1983 में यूनेस्को के द्वारा विश्व की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल किया गया था। इसने विश्व के सात आश्चर्यों के रुप में भी पूरे विश्वभर में प्रसिद्धी प्राप्त की है। पिछले साल, मैं अपने प्रिय माता-पिता के साथ आगरा विशेषरुप से, आगरा का किला और ताजमहल देखने के लिए गया था। तब मेरी सर्दियों की छुट्टी थी, मैं भारत की ऐतिहासिक खूबसूरती देखकर बहुत खुश हुआ। मेरे माता-पिता ने स्पष्टरुप से इसके इतिहास और सत्य के बारे में बताया। वास्तव में, मैंने अपनी आँखों से इसकी वास्तविक खूबसूरती को देखा और भारतीय होने पर बहुत गर्व महसूस किया।

गर्मी के मौसम पर निबंध-Essay On Summer Season -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

गर्मी के मौसम पर निबंध-Essay On Summer Season -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi 

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गर्मी वर्ष का सबसे गर्म मौसम होता है हालांकि, बच्चों के लिए बहुत ही रुचिपूर्ण और मनोरंजक मौसम है क्योंकि, उन्हें तैराकी करने, पहाड़ी क्षेत्रों में जाने, आइस-क्रीम खाने, लस्सी पीने, पसंदीदा फल खाने आदि का मौका मिलता है। वे गर्मी के मौसम में स्कूल की छुट्टियों का आनंद लेते हैं। यह चार शीतोष्ण ऋतुओं में से एक है, जो वंसत और पतझड़ के बीच में आता है। हम यहाँ विद्यार्थियों की मदद करने के उद्देश्य से गर्मी के मौसम पर कुछ निबंध उपलब्ध करा रहे हैं, जो उन्हें उनके शिक्षकों के द्वारा गृहकार्य के रुप में पैराग्राफ या निबंध लिखने के लिए दिए जाते हैं। आप यहाँ दिए गए किसी पैराग्राफ या निबंधों में से कोई भी गर्मी के मौसम पर निबंध को अपनी जरुरत और आवश्यकता के अनुसार चुन सकते हो।

ग्रीष्म ऋतु पर निबंध (समर सीजन एस्से)

You can get below some essays on Summer Season in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

गर्मी के मौसम पर निबंध या ग्रीष्म ऋतु पर निबंध 1 (100 शब्द)

गर्मी लम्बें दिनों और छोटी रातों को रखने वाला सबसे गर्म मौसम होता है। यह साल के अन्य मौसमों की तुलना में सबसे लम्बा मौसम होता है। ग्रीष्म संक्रांति के दौरान, दिन बड़े होते हैं और रात छोटी। ग्रीष्म ऋतु आमतौर पर, होली (मार्च के महीने) के बाद शुरु हो जाती है और जून के महीने में खत्म होती है। जैसे-जैसे दिन लम्बा होता है, ग्रीष्म ऋतु का तापमान अपने शिखर पर होता है: हालांकि, जैसे-जैसे दिन घटता है, गर्मी का तापमान धीरे-धीरे कम होता जाता है। जब उत्तरी ध्रुव पर गर्मी होती है, तो दक्षिणी ध्रुव पर सर्दी होती है।

इस ऋतु में मौसम बहुत रूखा होता है हालांकि, उच्च तापमान होने के कारण, पूरे मौसम के दौरान गर्म हवाएं चलती है, जो हमारे लिए असहनीय होती है।

ग्रीष्म ऋतु

गर्मी के मौसम पर निबंध या ग्रीष्म ऋतु पर निबंध 2 (150 शब्द)

गर्मी का मौसम मार्च, अप्रैल, मई और जून के महीनों में रहता है। यह साल का सबसे गर्म मौसम होता है, क्योंकि तापमान अपने उच्च शिखर पर पहुँचता है। इस ऋतु के दौरान, दिन लम्बे और गर्म होते हैं, वहीं रातें छोटी है। दिन के बीच में, सूर्य की किरणें बहुत गर्म होती है। पूरे दिनभर गर्म हवाएं चलती रहती है, जो चारों तरफ के वातावरण को रूखा और शुष्क बनाती है। ग्रीष्म ऋतु की ऊँचाई पर, छोटी धाराएं, कुएं, और तालाबें सूख जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग पानी की कमी, उच्च तापमान, सूखे आदि बहुत सी परेशानियों से बिजली और अन्य आरामदायक संसाधनों की कमी के कारण जूझते हैं।

उच्च तपमान के बावजूद, गरमी के मौसम में लोग; आम, खीरा, ककड़ी, लीची, कटहल, खरबूजा, तरबूजा जैसे आदि फलों और सब्जियों को खाने का आनंद लेते हैं। शहरी क्षेत्रों में लोग इस मौसम में गरमी से निजात पाने के लिए बहुत सी गतिविधियों में शामिल होते हैं; जैसे- तैराकी, पहाड़ी क्षेत्र पर घूमने के लिए जाना आदि।

गर्मी के मौसम पर निबंध या ग्रीष्म ऋतु पर निबंध 3 (200 शब्द)

ग्रीष्म ऋतु साल का सबसे गर्म मौसम होता है, जो पूरे दिन भर में बाहर जाने को लगभग असंभव बनाता है। लोग आमतौर पर, बाजार देर शाम या रात में जाते हैं। बहुत से लोग गर्मियों में सुबह को इसके ठंडे प्रभाव के कारण टहलने का आनंद लेते हैं। धूल से भरी हुई, शुष्क और गर्म हवा पूरे दिनभर चलती रहती है। कभी-कभी लोग अधिक गरमी के कारण हीट-स्ट्रोक, डीहाइड्रेशन (पानी की कमी), डायरिया, हैजा, और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से प्रभावित होते हैं। यहाँ कुछ बिन्दु दिए गए है, जिनका हमें गर्मियों के दौरान पालन करना चाहिए:

  • यह बहुत धूप वाला मौसम होता है।
  • हमें आरामदायक सूती कपड़े पहनने चाहिए।
  • हमें गर्मी की ऊष्मा से बचने के लिए ठंड़े पदार्थ खाने व पीने चाहिए।
  • हमें पूरे मौसम में स्वस्थ और तंदरुस्त रहने के लिए बहुत सी सावधानियाँ रखनी चाहिए।
  • हमें गर्मियों की छुट्टियों के दौरान गर्मियों का सामना करने के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में जाना चाहिए।
  • हमें शरीर में पानी की कमी और लू लगने (हीट स्ट्रोक) से बचने के लिए बहुत सारा पानी पीना चाहिए।
  • हमें दिन के दौरान, हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाव के लिए विशेषरुप से, सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक बाहर नहीं जाना चाहिए।
  • हमें गरमी में पक्षियों को बचाने के लिए अपनी बॉलकनी या गलियारे (कौरीडोर) में थोड़ा सा पानी और कुछ चावल या अनाज के दाने रख देने चाहिए।
  • हमें लोगों से विशेषरुप से, वस्तु विक्रेता, डाकिया, आदि से पानी के लिए अवश्य पूछना चाहिए।
  • हमें गर्मियों के मौसम में ठंडक प्रदान करने वाले संसाधनों का प्रयोग करना चाहिए: हालांकि, ग्लोबल वार्मिंग के बुरे प्रभावों को रोकने के लिए बिजली का प्रयोग कम करना चाहिए।
  • हमें बिजली और पानी बर्बाद नहीं करना चाहिए।
  • हमें अपने आस-पास के क्षेत्रों में अधिक पेड़-पौधे लगाने चाहिए और गर्मी को कम करने के लिए उन्हें नियमित रुप से पानी देना चाहिए।

 

गर्मी के मौसम पर निबंध या ग्रीष्म ऋतु पर निबंध 4 (250 शब्द)

ग्रीष्म ऋतु साल की चार ऋतुओं में से एक ऋतु है। साल का सबसे गर्म मौसम होने के बावजूद बच्चे इसे सबसे अधिक पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें बहुत तरीकों से मस्ती करने के लिए गर्मी की छुट्टियाँ मिलती है। ग्रीष्म ऋतु पृथ्वी के घूर्ण अक्ष के सूर्य की ओर होने के कारण होती है। गर्मी का मौसम बहुत ही शुष्क और गर्म (भूमध्य सागरीय क्षेत्रों में) और बरसात का मौसम (पूर्वी एशिया में मानसून के कारण) लाता है। कुछ स्थानों पर, गर्मी के दौरान वसंत ऋतु में तुफान और बवंडर (जो विशेषरुप से सुबह और शाम के समय तेज और गर्म हवाओं के कारण उत्पन्न होता है) बहुत ही आम बात है।

शहरी क्षेत्रों में रहने वाले बहुत से लोग बहुत अधिक गर्मी को नहीं सहन कर पाते हैं, जिसके कारण वे गर्मी की छुट्टियों में अपने बच्चों के साथ समुद्र तटीय रिसोर्ट्स, पहाड़ी क्षेत्रों, तटों, ठंडे स्थानों पर कैम्पों या पिकनिक के लिए जाते हैं। वे तैराकी, गर्मी के मौसमी फलों को खाने और ठंडे पेय पदार्थों को पीने आनंद लेते हैं। कुछ लोगों के लिए, गर्मियों का मौसम अच्छा होता है, क्योंकि वे उन दिनों में ठंडे स्थानों पर मनोरंजन और मस्ती करते हैं; हालांकि, यह मौसम गरमी से राहत पाने वाले संसाधनों की कमी के कारण ,ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए असहनीय होता है। कुछ स्थानों पर, लोग अपने क्षेत्रों में पानी की बहुत अधिक किल्लत या कमी से पीड़ित होते हैं और उन्हें बहुत अधिक दूरी तक पानी को लेकर जाना पड़ता है।

यह पूरा मौसम बच्चों के लिए बहुत अच्छा होता है, क्योंकि उन्हें गर्मियों की छुट्टियों के रुप में अपने घर में परिवार के साथ मस्ती के लिए, किसी ठंड़े स्थान पर घूमने के लिए, तैराकी का आनंद लेने के लिए, मौसमी फलों के साथ आइस-क्रीम का आनंद लेने के लिए एक महीने 15 दिन (डेढ़ महीने) का समय मिलता है। आमतौर पर, लोग सूरज निकलने से पहले टहलने के लिए जाते हैं, क्योंकि यह उन्हें ठंडक, शान्ति और ताजी हवा की खुशी वाली भावना देती है।

ग्रीष्म ऋतु पर निबंध या गर्मी के मौसम पर निबंध 5 (300 शब्द)

भारत में मुख्य रुप से चार मौसम होते हैं: गर्मी का मौसम उसमें से एक है। यह बहुत ही गर्म मौसम होता है, परन्तु लोगों के द्वारा अधिकतर पसंद किया जाता है। यह चार महीनों के लिए होता है (मार्च, अप्रैल, मई और जून), हालांकि, मई और जून सबसे अधिक गर्मी वाले महीने होते हैं। गरमी का मौसम पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर घूमने के कारण होता है। इस प्रक्रिया के दौरान, जब पृथ्वी का भाग सूर्य के करीब आता है, तो वह भाग (सूर्य की सीधी किरणों के पड़ने के कारण) गर्म हो जाता है, जो गर्मियों का मौसम लाता है। इस मौसम में, दिन लम्बे होते हैं और रातें छोटी हो जाती है।

यह होली के त्योहार के बाद पड़ता है और बरसात के मौसम की शुरुआत के साथ खत्म होता है। गर्मी के मौसम के दौरान वाष्पीकृत पानी वाष्प के रुप में वातावरण में संग्रहित हो जाता है (जो बादलों का निर्माण करता है) और बरसात के मौसम में बारिश के रुप में गिरता है। गर्मी के मौसम के लाभों के साथ ही कुछ हानियाँ भी है। एक तरफ, जहाँ यह मौसम बच्चों के मनोरंजन और आराम के लिए होता है; वहीं दूसरी ओर, यह लोगों को बहुत सी मुश्किलों और जोखिमों में डालता है; जैसे- उच्च ऊष्मा, तुफान, शरीर में पानी की कमी, कमजोरी, बेचैनी आदि। गर्मियों में मध्याह्न का समय भयंकर गर्मी से भरा हुआ होता है, जिसके कारण बहुत से कमजोर लोग लू लगने के कारण बीमार हो जाते हैं या मर जाते हैं।

भारत में बहुत से स्थानों पर, लोग पानी की कमी और सूखे की स्थितियों से पीड़ित होते हैं, क्योंकि कुए, तालाब और नदियाँ सूख जाती है। पेड़ों का पत्तियाँ पानी की कमी के कारण सूख कर गिर जाती है। चारों तरफ धूल से युक्त गर्म हवाएं चलती है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण होती है। हमें गर्मी के मौसम में गर्मी को कम करने के लिए अधिक फल खाने चाहिए, ठंडी चीजों को पीना चाहिए।


 

ग्रीष्म ऋतु पर निबंध या गर्मी के मौसम पर निबंध 6 (400 शब्द)

परिचय

साल के चारों मौसमों में सबसे गर्म मौसम गरमी का होता है। यह ग्रीष्मकालीन संक्रान्ति के दौरान शुरु होता है, हालांकि इसकी समाप्ति शरद कालीन विषुवत के दिन होती है। दक्षिणी और उत्तरी गोलार्द्ध एक दूसरे की विपरीत दिशा में स्थित है; इसलिए जब दक्षिणी गोलार्द्ध में गरमी होती है, तो उत्तरी गोलार्द्ध में सर्दी होती है।

ग्रीष्म ऋतु के बारे में तथ्य

ग्रीष्म ऋतु के बारे में कुछ मुख्य तथ्य निम्नलिखित है:

  • पृथ्वी अपने घूर्ण काल के दौरान जब सूर्य की ओर झुकती है, तो गर्मी का मौसम आता है (अर्थात् गोलार्द्ध के सूर्य की ओर झुकने पर गर्मी और गोलार्द्ध के सूर्य से दूर होने पर सर्दी होती है)।
  • बच्चे गर्मियों में खुश हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें स्कूल से एकसाथ बहुत सारी छुट्टियाँ मिल जाती है।
  • दक्षिणी गोलार्द्ध में दिसम्बर, जनवरी और फरवरी भी गर्मी के मौसम है, हालांकि, उत्तरी गोलार्द्ध में जून, जुलाई और अगस्त महीनों में गर्मी का मौसम होता है।
  • यह वह मौसम है, जिसमें ज्यादातर लोग अपने घरों से दूर पहाड़ी या ठंडे क्षेत्रों में रहते हैं।
  • यह साल के सबसे लम्बे और गर्म दिनों को रखता है।
  • हमें पसंदीदा फल और फसल मिलती है।

ग्रीष्म ऋतु गर्म मौसम क्यों है

यह बहुत अधिक तापमान और शुष्क मौसम होता है, जिसमें हिंसक मानसून भी शामिल रहता है, जो मत्यु दर को बढ़ाने का मुख्य कारण बनता है। इस ऋतु में मौसम उच्च तापमान के कारण अधिक गर्म हो जाता है, जो कुछ क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति में कमी की वजह से सूखे का कारण बनता है। गर्म हवाएं और तापमान में वृद्धि, दोनों ही इस ऋतु को बहुत अधिक गर्म बनाती है, जो मनुष्य और जंगली जानवरों दोनों के लिए बहुत अधिक परेशानी का निर्माण करता है।

गरमी के मौसम में बहुत सी (मनुष्य और पशुओं दोनों की) मृत्यु शरीर में पानी की कमी के कारण होती है। बीमारी नियंत्रक और रोकथाम केन्द्र की रिपोर्ट के अनुसार, उच्च ऊष्मीय तरंगे ग्रीष्म ऋतु में गरमी की चरम सीमा का कारण होती है। इसलिए, इस मौसम में सबसे अच्छा अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रहना चाहिए। विज्ञान की राष्ट्रीय खाद्य अकादमी एवं पोषण बोर्ड के अनुसार, महिलाओं को सामान्य रूप से पानी की 2.7 लीटर मात्रा और पुरुषों को गर्मियों में दैनिक आधार पर 3.7 लीटर पानी लेना चाहिए। यद्यपि, जो लोग अधिक शारीरिक व्यायाम में शामिल रहते हैं उन्हें सामान्य से अधिक पानी लेना चाहिए।

एनओएए के राष्ट्रीय जलवायु केंद्र द्वारा दर्ज किए गए आकड़ों के अनुसार, यह दर्ज किया गया कि, साल 2014 में सबसे अधिक गर्मी थी। नासा के अनुसार, गर्मी के मौसम में साल दर साल ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती जा रही है। और ऐसा लगता है कि, यह बढ़ता हुआ तापमान बहुत शीघ्र ही इस संसार में सभी स्थानों को गरमी के स्थान जैसा बना देगा।

निष्कर्ष:

जैसे कि हम सभी जानते हैं कि, मनुष्य भगवान द्वारा निर्मित सबसे बुद्धिमान प्राणी है, हमें हमेशा बढ़ते तापमान पर सोचने के साथ ही सकारात्मक रुप से कार्य करना चाहिए। हमें गर्मी के सभी आरामदायक संसाधनों के द्वारा इस मौसम का आनंद लेना चाहिए हालांकि, हमें सीमा का उल्लंघन नही करना चाहिए। हमें सीमा क्षेत्र में रहकर आनंद लेना चाहिए और हमेशा पानी और बिजली की बचत करनी चाहिए। हमें बिजली और पानी को बर्बाद नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस पृथ्वी पर साफ पानी बहुत ही कम प्रतिशत में है और बिजली का अनावश्यक प्रयोग भी ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाता है। चलो! हम सभी मिलकर इसके लिए प्रयास करे।

शरद ऋतु पर निबंध-Essay On Winter Season -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

शरद ऋतु पर निबंध-Essay On Winter Season -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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हम यहाँ विद्यार्थियों की मदद करने के लिए शरद ऋतु पर निबंध उपलब्ध करा रहे हैं। आजकल, निबंध लेखन प्रतियोगिता स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों के ज्ञान को बढ़ाने के लिए प्रयोग की जाने वाली सामान्य रणनीति बन गई है। स्कूलों में शिक्षक विद्यार्थी के ज्ञान के स्तर को जानने के लिए उन्हें किसी भी विषय पर निबंध या पैराग्राफ लिखने के लिए दे देते हैं। यहाँ शरद ऋतु पर उपलब्ध सभी निबंध सरल शब्दों का प्रयोग करके विभिन्न शब्द सीमाओं में विद्यार्थियों की कक्षा के अनुसार लिखे गए हैं। प्रिय, विद्यार्थियों आप यहाँ दिए गए किसी भी शरद ऋतु पर निबंध को अपनी जरुरत और आश्यकता के अनुसार चुन सकते हो।

शरद ऋतु पर निबंध (विंटर सीजन एस्से)

You can get below some essays on Winter Season in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

सर्दी के मौसम पर निबंध या शरद ऋतु पर निबंध 1 (100 शब्द)

शरद ऋतु साल का सबसे ठंडा मौसम होता है, जो दिसम्बर महीने में शुरु होता है और मार्च के महीने में समाप्त होता है। दिसम्बर और जनवरी के महीने में सर्दी अपनी चरम सीमा पर होती है और इन्हें सबसे ठंडे महीने के रुप में गिना जाता है, जब तापमान देश के उत्तरी क्षेत्रों में लगभग 100 से 150 सेल्सियस (अर्थात् 50 से 590 फोरेनाइट) होता है हालांकि, दक्षिणी क्षेत्रों (देश की मुख्य भूमि) में यह 20 से 250 सेल्सियस (अर्थात् 68 से 770 फोरेनाइट) रहता है। शरद ऋतु की चरम सीमा पर उत्तरी क्षेत्रों में तेज गति से सर्द हवाएं चलती है। हमें धुंध का सामना करना पड़ता है, जो प्रायः सूर्य के प्रकाश को छुपा लेता है, जो पूरे सर्दी के मौसम में ठंड का सामना कराता है।

शरद ऋतु

सर्दी के मौसम पर निबंध या शरद ऋतु पर निबंध 2 (150 शब्द)

शरद ऋतु भारत में चारों ऋतुओं में सबसे ठंडी ऋतु होती है। यह दिसम्बर के महीने में पड़ती है और मार्च में होली के दौरान खत्म होती है। दिसम्बर और जनवरी को शरद ऋतु के सबसे ठंडे महीने माना जाता है। यह पतझड़ के मौसम के बाद आती है और वसंत ऋतु (बाद में ग्रीष्म ऋतु) से पहले समाप्त हो जाती है। हम आमतौर पर, इसे दिवाली के त्योहार (शरद ऋतु की शुरुआत) से होली के त्योहार (शरद ऋतु की समाप्ति) तक वातावरण के तापमान में निरंतर कमी के द्वारा महसूस करते हैं।

हमें शरद ऋतु की चरम सीमा के महीने में उच्च स्तरीय ठंड और तेज सर्द हवाओं का सामना करना पड़ता है। हम वातावरण में दिन और रात के दौरान बड़े स्तर पर तापमान में परिवर्तन देखते हैं, रातें लम्बी होती है और दिन छोटे होते हैं। आसमान साफ दिखता है हालांकि, कभी-कभी सर्दी के चरमोत्कर्ष पर पूरे दिनभर धुंध या कोहरे के कारण अस्पष्ट रहता है। कभी-कभी शरद ऋतु में बारिश भी होती है और स्थिति को और भी अधिक बुरा बना देती है।

शरद ऋतु पर निबंध या सर्दी के मौसम पर निबंध 3 (200 शब्द)

सर्दी का मौसम साल का सबसे ठंडा चरण होता है, जो दिसम्बर में शुरु होता है और मार्च में खत्म होता है। शरद ऋतु के दौरान सभी जगहों पर बहुत अधिक ठंड लगती है। शरद ऋतु के चरम सीमा के महीनों में वातावरण का तापमान बहुत कम हो जाता है। पहाड़ी क्षेत्र (घरों, पेड़ों, और घासों सहित) बर्फ की सफेद मोटी चादर से ढक जाते हैं और बहुत ही सुन्दर लगते हैं। इस मौसम में, पहाड़ी क्षेत्र बहुत ही सुन्दर दृश्य की तरह लगते हैं। सर्दियों में कड़ाके की ठंड और मौसम की स्थिति के कारण, लोगों को घर से बाहर जाने के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

देश के कुछ स्थानों पर, जलवायु सामान्य तापमान (न तो बहुत अधिक सर्दी और न ही बहुत अधिक गर्मी) के साथ मध्यम रहती है और बहुत ही सुखद अहसास देती है। सभी पूरे सर्दी के मौसम के दौरान शरीर को गर्म रखने के लिए मोटे ऊनी कपड़े पहनने के साथ ही बहुत ही कम तापमान से सुरक्षित महसूस करते हैं। हम थोड़ी सी गर्मी पाने और आरामदायक महसूस करने के लिए सुबह और शाम को गर्म कॉफी, चाय, सूप आदि का सेवन करते हैं। लोग आमतौर पर, रविवार को दोपहर के समय सूर्य से प्राकृतिक रुप से गर्मी लेने के लिए पिकनिक पर जाते हैं और अपने परिवार व मित्रों के साथ मनोरंजन करते हैं। हम रात को स्वंय को गर्म रखने और सर्दी से बचाने के लिए अपने बिस्तर पर जल्दी जाते हैं।


 

शरद ऋतु पर निबंध या सर्दी के मौसम पर निबंध 4 (250 शब्द)

परिचय

भारत में शरद ऋतु बहुत ही अधिक ठंडी ऋतु होती है। यह पतझड़ के बाद शुरु होती है और वसंत ऋतु के आगमन पर समाप्त होती है। हम वातावरण में शरद ऋतु के दौरान अन्य मौसमों की तुलना में बड़े स्तर पर परिवर्तन देखते हैं। वातावरण का तापमान बहुत कम हो जाता है, तेज गति में हवाएं चलने लगती है, दिन छोटे हो जाते हैं और रातें लम्बी हो जाती है आदि। कभी-कभी तो हम घने बादलों, कोहरे और धुंध के कारण सूरज को भी नहीं देख पाते हैं हालांकि, अन्य सर्दियों के दिनों में आसमान बहुत ही साफ और नीला दिखाई देता है। पूरे सर्दी के मौसम के दौरान गीले कपड़ों के सूखने में बहुत अधिक परेशानी आती है। यह स्वास्थ्यवर्धक और पसंदीदा फलों संतरा, अमरुद, चीकू, पपीता, आंवला, गाजर, अंगूर आदि का मौसम है।

शरद ऋतु क्यों आती है

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि, पृथ्वी अपनी धुरी पर सूर्य के चारो ओर चक्कर लगाती है। पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूमना ही पूरे साल भर में मौसम और ऋतुओं के बदलने में मुख्य भूमिका निभाता है। जब पृथ्वी उत्तरी गोलार्द्ध (अर्थात् सूर्य से दूरी) पर चक्कर लगाती है, तो सर्दी होती है। ऋतुएं जब बदलती है, तब पृथ्वी सूर्य के चारो ओर घूमती है। पृथ्वी अपने अक्ष पर 23.5 डिग्री क्रान्तिवृत (सूर्य की ओर) झुकी हुई है।

सर्दियों के दौरान प्राकृतिक दृश्य

सर्दियों के मौसम के दौरान पहाड़ी क्षेत्र बहुत ही सुन्दर दिखने लगते हैं, क्योंकि सबकुछ बर्फ की चादर से ढका होता है और प्राकृतिक दृश्य की तरह बहुत सुन्दर दिखाई देता है। सभी वस्तुओं पर पड़ी हुई बर्फ मोती की तरह दिखाई देती है। सूर्य के निकलने पर अलग-अलग रंग के फूल खिलते हैं और पूरे वातावरण को नया रुप देते हैं।

शरद ऋतु पर निबंध या सर्दी के मौसम पर निबंध 5 (300 शब्द)

सर्दियों का मौसम भारत में सबसे ठंडा मौसम होता है। सर्दियों के मौसम को ठंडी हवाओं के चलने, बर्फ के गिरने, बहुत कम वायुमण्डलीय तापमान, छोटे दिन, लम्बी रातें आदि विशेषताओं के द्वारा पहचाना जा सकता है। यह मौसम लगभग तीन महीने का होता है, जो दिसम्बर में शुरु होता है और मार्च में खत्म होता है। सर्दियों के चरमोत्कर्ष (दिसम्बर के आखिरी हफ्ते और जनवरी के शुरुआती सप्ताह) पर स्कूल में बच्चों को अधिक सर्दी से बचाने के लिए सर्दियों की छुट्टियाँ कर दी जाती है। व्यापार करने वाले और ऑफिस या कार्यालयों व कारखानों में काम करने वाले लोगों को बिगड़े हुए कार्यक्रम के कारण अपने काम को करने में परेशानी होती है। सुबह को सूर्य बहुत कम रोशनी और गर्मी के साथ देरी से उगता है और शाम को जल्दी छुपता है।

शरद ऋतु सभी के लिए बहुत ही कठिनाई वाली ऋतु है। यह विशेषरुप से, गरीब लोगों के लिए सबसे अधिक कठिनाईयाँ पैदा करती है, क्योंकि उनके पास पहनने के लिए गर्म कपड़े और रहने के लिए पर्याप्त आवास की कमी होती है। वे आमतौर पर, फुटपाथ या अन्य खुले हुए स्थानों, पार्कों आदि में सूरज की रोशनी में शरीर को गर्मी देने का प्रयास करते हैं। बहुत से बुजुर्ग लोग और छोटे बच्चे अधिक सर्दी के कारण अपना जीवन भी खो देते हैं।

शरद ऋतु स्वास्थ्यवर्धक फलों और हरी पत्तेदार सब्जियों का मौसम है, जैसे- अंगूर, संतरा, सेब, अमरुद, पपीता, गन्ने का जूस, अनानास, गाजर, आंवला, गोभी, चुकंदर, शलजम, मूली, टमाटर, आलू आदि। हम कह सकते हैं कि, सर्दियों का मौसम स्वास्थ्य बनाने का मौसम है। शरद ऋतु फसलों का मौसम है; जैसे- गेहूँ, बाजरा, मूँगफली, और अन्य कुछ फसलें आदि। बहुत प्रकार के मौसमी फूल (डेहलिया, गुलाब आदि) सुन्दर रंगों में खिलते हैं और प्रकृति की सुन्दरता को बढ़ाते हैं।

शरद ऋतु की मुख्य एजेंट सर्द हवाएं और कोहरा होता है, जो इस मौसम को और अधिक शुष्क और ठंडा बनाता है। कभी-कभी बिना मौसम की बरसात भी होती है, जो जीवन को और भी अधिक दर्दनाक बना देती है। सर्दियों की ठंडी बारिश फसलों, सब्जियों और फलों को नष्ट कर देती है। घना कोहरा सर्दियों में रात को घर बाहर जाना मुश्किल बना देता है।

सर्दियों का मौसम अपनी स्वंय की विशेषता भी रखता है। यह स्वास्थ्य बनाने, सुबह को टहलने, सांस लेने के लिए वातावरण में ताजी हवा, मच्छरों का कोई डर नहीं, किसानों की फसल आदि के लिए अच्छा होता है।


 

शरद ऋतु पर निबंध या सर्दी के मौसम पर निबंध 6 (400 शब्द)

परिचय

शरद ऋतु भारत में चार ऋतुओं में से एक है, जो दिसम्बर में शुरु होती है और मार्च के अन्त तक रहती है। कम तापमान वाली सूर्य की रोशनी के कारण सर्दियों के दिन बहुत ही अच्छे और सुहावने होते हैं। उत्तरी भारत के पहाड़ी इलाके तेज बर्फबारी के कारण बहुत ही सुन्दर दिखते हैं। दिसम्बर और जनवरी सबसे अधिक ठंड वाले मौसम होते हैं, जिनके दौरान अधिक ठंडा मौसम होने के कारण हम बहुत अधिक परेशानी महसूस करते हैं। यह लम्बी यात्रा और पर्यटन पर जाने के लिए सबसे अच्छा मौसम होता है। यह मौसम भारत में सबसे अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के साथ ही आसमान के मनमोहक वातावरण में सुन्दर चिड़ियाओं को भी आमंत्रित करता है।

सर्दियों का मौसम गरीबों के लिए बहुत अधिक परेशानियों का निर्माण करता है, क्योंकि उनके पास गरम कपड़े और रहने के लिए पर्याप्त आवासों का अभाव होता है। बहुत अधिक सर्दी के कारण बहुत से पक्षी पलायन कर जाते हैं और पशु शीत निद्रा (हाइबरनेशन) में चले जाते हैं। इस मौसम के दौरान कोहरा और धुंध बहुत ही सामान्य होते हैं, जो सड़कों पर अधिक भीड़ और दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। हमें सर्दियों से बचने के लिए बहुत से गरम कपड़े पहनने चाहिए और अपने घरों में रहना चाहिए।

शरद ऋतु की अवधि

भारत में सर्दियों के मौसम के शुरु होने की अवधि क्षेत्रों और पृथ्वी के अपने अक्ष पर सूर्य के चारों ओर घूमने के अनुसार अलग-अलग है। हाल के मौसम विज्ञान के अनुसार, उत्तरी गोलार्द्ध में सर्दी का मौसम दिसम्बर में आता है और फरवरी के अन्त में या मार्च की शुरुआत में खत्म होता है। दक्षिण के लोगों के लिए, सर्दियों के महीने जून, जुलाई और अगस्त होते हैं।

शरद ऋतु की विशेषताएं

हम सर्दी के मौसम में अन्य मौसमों की तुलना में बहुत से बदलाव देखते हैं; जैसे- लम्बी रातें, छोटे दिन, ठंडा मौसम, ठंडी हवा, बर्फ का गिरना, सर्द तुफान, ठंडी बारिश, घना कोहरा, धुंध, बहुत कम तापमान आदि।

सर्दियों का आनंद लेने के लिए चीजें और वस्तुएं

मौसम के स्थितियों और रुचि के अनुसार, बहुत सी सर्दियों की गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं; जैसे- आइस-स्केटिंग, आइस-बाइकिंग, आइस-हॉकी, स्कींग, स्नोबॉल फाइटिंग, स्नोमैन को बनाना, स्नो-कैसल (बर्फ का घर) आदि।

कुछ शीतकालीन तथ्य

सर्दियाँ भारत में सबसे महत्वपूर्ण मौसमों में से एक है, जो शरद संक्रांति पर शुरु होता है हालांकि, वसंत विषुवत पर खत्म होता है। सर्दियों में दिन छोटे होते हैं, रातें लम्बी होती हैं और अन्य मौसमों से कम तापमान रहता है। पृथ्वी के सूर्य से दूर झुके होने पर शरद ऋतु का आगमन होता है। यह स्वास्थ्य का निर्माण करने का मौसम है हालांकि, पेड़-पौधों के लिए बुरा होता है, क्योंकि वे बढ़ना छोड़ देते हैं। बहुत से जानवर असहनीय ठंडे मौसम के कारण शीतकालीन निद्रा में चले जाते हैं। इस मौसम के दौरान बर्फ गिरना और सर्द तुफानों का आना सामान्य बात है।

वसंत ऋतु पर निबंध-Essay On Spring Season -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

वसंत ऋतु पर निबंध-Essay On Spring Season -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi 

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वसंत ऋतु साल का सबसे पसंदीदा मौसम है और सभी के द्वारा अन्य मौसमों से अधिक पसंद किया जाता है। विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों के द्वारा वसंत ऋतु पर कुछ पैराग्राफ या पूरा निबंध लिखने के लिए दिया जा सकता है। इसलिए, हम विद्यार्थियों की मदद करने के उद्देश्य से वसंत ऋतु पर निबंध उपलब्ध करा रहे हैं, जो विभिन्न शब्द सीमाओं में लिखे गए हैं। इनमें से आप कोई भी वसंत ऋतु पर निबंध अपनी जरुरत और आवश्यकता के अनुसार चुन सकते हो।

वसन्त ऋतु पर निबंध (स्प्रिंग सीजन एस्से)

You can get below some essays on Spring Season in Hindi language for students in 100, 150, 250, 350, 400 and 450 words.

वसंत ऋतु पर निबंध 1 (100 शब्द)

वसन्त ऋतु का हम सभी को आनंद देने वाला होता है। भारत में वसन्त ऋतु मार्च, अप्रैल और मई के महीने में आती है। यह सर्दियों के तीन महीनों के लम्बे समय के बाद आती है, जिसमें लोगों को सर्दी और ठंड से राहत मिलती है। वसन्त ऋतु में तापमान में नमी आ जाती है और सभी जगह हरे-भरे पेड़ों और फूलों के कारण चारों तरफ हरियाली और रंगीन दिखाई देता है।

एक लम्बें इंतजार के बाद वह समय आता है, जब हम हल्के कपड़े पहनना शुरु करते हैं और प्राय कभी भी घर से बाहर जा सकते हैं। छोटे बच्चे पतंग उड़ाते हैं। इस मौसम की शुरुआत में होली का त्योहार आता है, जब सभी रंगों और पानी के साथ होली खेलने के द्वारा इस मौसम का आनंद लेते हैं।

वसंत ऋतु

वसंत ऋतु पर निबंध 2 (150 शब्द)

भारत में वसंत ऋतु सर्दियों के मौसम के बाद मार्च, अप्रैल और मई के महीने में आती है। यह मौसम गर्मियों के रुप मे खत्म होता है। भारत में वसंत मार्च के महीने में शुरु होता है और मई के महीने में खत्म होता है। भारत के कुछ भागों में, लोग इस मौसम का आनंद गर्म वातावरण के कारण पूरी तरह से नहीं ले पाते हैं। पूरी वसंत ऋतु के मौसम के दौरान तापमान सामान्य रहता है, न तो सर्दी की तरह बहुत अधिक ठंडा होता है और न ही गर्मी की तरह बहुत गर्म हालांकि, अन्त में यह धीरे-धीरे गर्म होना शुरु कर देता है। रात को मौसम और भी अधिक सुहावना और आरामदायक हो जाता है।

वसंत ऋतु बहुत प्रभावशाली होती है: जब यह आती है, तो प्रकृति में सबकुछ जाग्रत कर देती हैं; जैसे- यह पेड़, पौधे, घास, फूल, फसलें, पशु, मनुष्य और अन्य जीवित वस्तुओं को सर्दी के मौसम की लम्बी नींद से जगाती है। मनुष्य नए और हल्के कपड़े पहनते हैं, पेड़ों पर नई पत्तियाँ और शाखाएं आती है और फूल तरोताजा और रंगीन हो जाते हैं। सभी जगह मैदान घासों से भर जाते हैं और इस प्रकार पूरी प्रकृति हरी-भरी और ताजी लगती है।

वसंत ऋतु पर निबंध 3 (250 शब्द)

भारत में वसंत ऋतु को सबसे सुहावना मौसम माना जाता है। प्रकृति में सब कुछ सक्रिय होता है और पृथ्वी पर नए जीवन को महसूस करते हैं। वसंत ऋतु सर्दियों के तीन महीने के लम्बे अन्तराल के बाद बहुत सी खुशियाँ और जीवन में राहत लाती है। वसंत ऋतु सर्दियों के मौसम के बाद और गर्मियों के मौसम से पहले, मार्च, अप्रैल और मई के महीने में आती है। वसंत ऋतु का आगमन सभी देशों में अलग-अलग होने के साथ ही तापमान भी अलग-अलग देशों में अलग-अलग होता है। कोयल पक्षी गाना गाना शुरु कर देती है और सभी आम खाने का आनंद लेते हैं। प्रकृति में सभी जगह फूलों की खूशबू और रोमांस से भरी हुई होती हैं, क्योंकि इस मौसम में फूल खिलना शुरु कर देते हैं, पेड़ों पर नए पत्ते आते हैं, आसमान पर बादल छाए रहते हैं, कलकल करती हुई नदियाँ बहती है आदि। हम कह सकते हैं कि, प्रकृति आनंद के साथ घोषणा करती है कि, वसंत आ गया है: अब यह उठने का समय है।

इस मौसम की सुन्दरता और चारों ओर की खुशियाँ, मस्तिष्क को कलात्मक बनाती है और आत्मविश्वास के साथ नए कार्य शुरु करने के लिए शरीर को ऊर्जा देती है। सुबह में चिड़ियों की आवाज और रात में चाँद की चाँदनी, दोनों ही बहुत सुहावने, ठंडे और शान्त हो जाते हैं। आसमान बिल्कुल साफ दिखता है और हवा बहुत ही ठंडी और तरोताजा करने वाली होती है। यह किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण मौसम होता है, क्योंकि उनकी फसलें खेतों में पकने लगती हैं और यह समय उन्हें काटने का होता है। सभी आनंद और खुशियों को महसूस करते हैं क्योंकि, यह मौसम त्योहारों का मौसम है; जैसे- होली, राम नवमीं, हनुमान जयंती, गुड फ्राइडे, ईस्टर, बिहू, नवरोज, बैसाखी आदि।


 

वंसत ऋतु पर निबंध 4 (350 शब्द)

परिचय

भारत में वसंत ऋतु मार्च, अप्रैल और मई के महीने में, सर्दियों और गर्मियों के बीच में आती है। इसे सभी ऋतुओं के राजा के रुप में माना जाता है और युवाओं की प्रकृति के रुप में प्रसिद्ध है।

वसंत ऋतु के लाभ

वसंत ऋतु अच्छी भावनाएं, अच्छा स्वास्थ्य और पौधों को नया जीवन देती है। यह सबसे अधिक सुन्दर और आकर्षक मौसम है, जो फूलों के खिलने के लिए अच्छा मौसम है। मधुमक्खियाँ और तितलियाँ फूलों की कलियों के आस-पास मंडराती हैं और स्वादिष्ट जूस (फूलों की सुगंध) को चूसने का आनंद लेती है और शहद बनाती है। इस मौसम में लोग फलों के राजा, आम को खाने का आनंद लेते हैं। कोयल घने पेड़ों की शाखाओं पर बैठकर गाना गाती है और सबके दिलों को जीत लेती है। दक्षिण की दिशा से एक बहुत ही प्यारी और ठंडी हवा चलती है, जो फूलों की बहुत अच्छी सुगंध लाती है और हमारे दिलों को छूती है। यह लगभग सभी धर्मों के त्योहारों का मौसम है, जिसके दौरान लोग अपने परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर अच्छी तैयारियाँ करते हैं। यह किसानों का मौसम है, जब वे अपनी नई फसलों को अपने घरों में लाते हैं और कुछ राहत महसूस करते हैं। कवियों को कविताओं की रचना करने के लिए नई-नई कल्पनाएं मिलती हैं और वे अच्छी-अच्छी प्यारी कविताओं की रचनाएं करते हैं। इस मौसम में, मस्तिष्क बहुत अधिक कलात्मक और अच्छे विचारों से भरा होता है।

वसंत ऋतु के मौसम की हानियाँ

वसंत ऋतु की कुछ हानियाँ भी है। जैसा कि, ये मौसम सर्दियों के मौसम के अन्त में शुरु होता है और गर्मियों के शुरु होने से पहले आता है, जिसके कारण बहुत अधिक संवेदनशील मौसम होता है। बहुत से महामारी (छूत वाले रोग) वाले रोग, जैसे- सामान्य जुकाम, चेचक, चिकिन-पॉक्स, खसरा आदि होते हैं, इसलिए लोगों को अपने स्वास्थ्य के लिए अतिरिक्त तैयारियाँ करनी पड़ती है।

निष्कर्ष

वसंत ऋतु का मौसम सभी मौसमों का राजा होता है। वसंत ऋतु के दौरान प्रकृति अपने सबसे सुन्दर रुप में प्रकट होती है और हमारे हृदय को आनंद से भरती है। वसंत ऋतु का पूरी तरह से आनंद लेने के लिए, हमें हमारे स्वास्थ्य की देखभाल पहले से ही करनी चाहिए, जिसके लिए हमें विभिन्न छूत वाली बीमारियों से प्रतिरक्षा के लिए टीके लगवाने चाहिए।

वसंत ऋतु पर निबंध 5 (400 शब्द)

परिचय

वसंत ऋतु वर्ष का सबसे पसंदीदा और सबसे अच्छा मौसम होती है। लोग (विशेषरुप से बच्चे) इस मौसम की सुन्दरता, थोड़ी शान्ति और आरामदायक स्वभाव के कारण इसके बहुत अधिक शौकीन होते हैं। यह साल के सभी मौसमों की रानी होती है और इसे कवियों का सबसे पसंदीदा मौसम माना जाता है। यह सर्दियों के मौसम के बाद में और गर्मियों के मौसम से पहले आती है। यह मार्च के महीने से शुरु होती है और मई के महीने पर खत्म होती है। वसंत ऋतु के आगमन पर पृथ्वी पर सब-कुछ मनमोहक और आकर्षक लगता है। सभी पेड़ नई पत्तियों, के रुप में नए कपड़े प्राप्त करते हैं, फूल महकना शुरु कर देते हैं, पक्षी पेड़ों की शाखाओं पर नाचना और गाना शुरु कर देते हैं, आसमान बादलों के बिना बिल्कुल साफ और नीला होता है, मैदान हरी-भरी घास से भरे होते हैं और प्रकृति में अन्य बहुत से परिवर्तन होते हैं।

वसंत ऋतु फूलों और त्योहारों का मौसम है, इस प्रकार यह बहुत सी खुशियाँ और आनंद लाता है। रंग-बिरंगे और सुन्दर फूल पूरी तरह से दिल जीत लेते हैं और हरी घास हमें टहलने के लिए अच्छा मैदान देती है। सुबह या शाम को सुन्दर तितलियाँ प्राय हमारे ध्यान को खिंचती है। दिन और रात दोनों ही बहुत सुहावने और ठंडे होते हैं। वातावरण हर सुबह मधुमक्खियों, कोयल और अन्य पक्षियों की मधुर आवाज से आकर्षण से भरा होता है।

आनंद और खुशियों का मौसम

वसंत ऋतु का मौसम महान प्रसन्नता, आनंद और खुशी प्रदान करता है। सर्दियों में बहुत अधिक सर्दी होती है, गर्मी होती है और बरसात के मौसम में चारों ओर मिट्टी और गंदगी हो जाती है, इसी वजह से वसंत ऋतु आनंद और खुशियों का मौसम कही जाती है। सभी इस मौसम का बड़े स्तर पर आनंद लेते हैं और सर्दी और गर्मी के बीच के इस मौसम के सभी आकर्षणों को कैद करना चाहते हैं।

वसंत ऋतु सभी सजीवों के लिए; जैसे- पेड़, पौधे, फूलों, पशुओं, पक्षियों, मनुष्यों आदि के लिए आनंद और खुशियों का मौसम है, क्योंकि यह न तो बहुत अधिक गर्म होता है और न ही बहुत अधिक ठंडा। दिन और रात लगभग समान होते हैं, न तो बहुत अधिक बड़े और न ही बहुत अधिक छोटे। सभी सर्दियों में बहुत अधिक ठंड से, गर्मियों में बहुत अधिक गर्मी से और बरसात में बहुत अधिक मिट्टी और गंदगी से परेशान हो जाते हैं, लेकिन वसंत ऋतु इन सभी का मिश्रण होती है, जो स्वंय में सभी मौसमों की विशेषताओं को धारण करती है।

निष्कर्ष

वसंत ऋतु का वास्तविक सौंदर्य हमारे स्वास्थ्य को पोषण देता है और हम जीवन के सभी दुखों को भूल जाते हैं। यह हमारे हृदय को बहुत अधिक उत्साह, आनंद और खुशी से भर देती है। इसलिए, वास्तव में इस मौसम का आनंद हम सभी जगहों पर आकर्षक दृश्यों को देखकर लेते हैं।


 

वसंत ऋतु पर निबंध 6 (450 शब्द)

वसंत ऋतु तीन महीने की होती है हालांकि, इसकी चारों ओर की सुन्दरता के कारण ऐसा लगता है कि, यह बहुत थोड़े समय के लिए ही रहती है। पक्षी वंसत ऋतु के स्वागत में मीठी आवाज में गाना गाना शुरु कर देते हैं। तापमान सामान्य रहता है, इस मौसम में न तो बहुत अधिक सर्दी होती है और न ही बहुत अधिक गर्मी। चारों ओर की हरियाली के कारण यह हमें ऐसा महसूस कराता है कि, पूरी प्रकृति ने स्वंय को हरी चादर से ढक लिया है। सभी पेड़ और पौधे नया जीवन और नया रुप प्राप्त करते हैं, क्योंकि उनकी शाखाओं पर नई पत्तियाँ और फूल विकसित होते हैं। फसलें खेतों में पूरी तरह से पक जाती है और सभी तरफ वास्तविक सोने की तरह दिखती है।

पेड़-पौधों की शाखाओं पर नई और हल्की हरी पत्तियाँ आना शुरु होती है। सर्दियों की लम्बी खामोशी के बाद, पक्षी हमारे चारों ओर घर के पास और आसमान में चहचाना शुरु कर देते हैं। वसंत ऋतु के आगमन पर, वे स्वंय को तरोताजा महसूस करते हैं और अपनी खामोशी को मीठी आवाज के द्वारा तोड़ते हैं। उनकी गतिविधियाँ हमें यह महसूस कराती है कि, वे बहुत खुशी महसूस कर रहे हैं और भगवान को इस अच्छे मौसम को देने के लिए धन्यवाद कह रहे हैं।

इस मौसम की शुरआत में, तापमान सामान्य हो जाता है, जो लोगों को राहत महसूस कराता है, क्योंकि वे शरीर पर बिना गरम कपड़ों को पहने बाहर जा सकते हैं। अभिभावक सप्ताह के अन्त के दौरान बच्चों के साथ मस्ती करने के लिए पिकनिक का आयोजन करते हैं। फूलों की कलियाँ अपने पूरे शबाव में खिलती है और प्रकृति का स्वागत अच्छी मुस्कान के साथ करती है। फूलों का खिलना चारों ओर खूशबू को फैलाकर बहुत सुन्दर दृश्य और रोमांटिक भावनाओं का निर्माण करता है।

मनुष्य और पशु-पक्षी स्वस्थ, सुखी और सक्रिय महसूस करते हैं। लोग सर्दियों के मौसम में बहुत कम तापमान के कारण अपने रुके हुए कार्य और योजनाओं को इस मौसम में करना शुरु करते हैं। वसंत का बहुत ठंडा वातावरण और बहुत सामान्य तापमान लोगों को बिना थके बहुत अधिक कार्य करने के लिए तैयार करता है। सभी सुबह से शाम तक बहुत अच्छे से दिन की शुरुआत करते हैं, यहाँ तक कि, बहुत अधिक भीड़ होने के बाद भी तरोताजा और राहत महसूस करते हैं।

किसान बहुत अधिक खुश और राहत महसूस करते हैं, क्योंकि वे नई फसल को बहुत महीनों की कठिन मेहनत के बाद अपने घर पुरस्कार के रुप में सफलता पूर्वक लाते हैं। हम होली, हनुमान जंयती, नवरात्री और अन्य त्योहार अपने मित्रों, परिवार के सदस्यों, पड़ौसियों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर मनाते हैं। वसंत ऋतु, हमारे और पूरे वातावरण को प्रकृति की ओर से बहुत अच्छा तौहफा है और हमें बहुत अच्छा संदेश देती है कि, सुख और दुख एक के बाद एक आते जाते रहते हैं। इसलिए कभी भी बुरा महसूस नहीं करना चाहिए और धैर्य रखना चाहिए, क्योंकि हमेशा काली घनी रात के बाद सुबह अवश्य होती है।