June 15, 2018 | Hindigk50k

मेरा प्रिय खेल – फुटबॉल हिन्दी निबंध-Essay On My Favorite Game FootBall -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

मेरा प्रिय खेल – फुटबॉल हिन्दी निबंध-Essay On My Favorite Game FootBall -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi Here we are providing you this essay in hindi हिन्दी निबंध  which will help in hindi essays for class 4, hindi essays for class 10,  hindi essays for class 9,  hindi essays for class 7, hindi essays for class 6, hindi essays for class 8.

खेल बच्चों को बहुत पसंद है . हमारे विद्यालय में अनेक खेल खेले जाते हैं . इन खेलों में फुटबॉल एवं क्रिकेट अपना प्रमुख स्थान रखते हैं . खेल हमारे जीवन में बहुत ही उपयोगी हैं . हमारी कक्षा के अधिकाँश विद्यार्थी क्रिकेट खेलते हैं ,परन्तु मुझे तो फुटबॉल का खेल बहुत पसंद है . यह खेल बहुत ही जनप्रिय है . इस खेल में प्रारंभ से अंत तक उत्साह बना रहता है . देखने वालों के लिए भी पूरे खेल में उत्सुकता बनी रहती है .

वर्णन :

फुटबॉल का खेल खुले मैदान में खेला जाता है . इस खेल के लिए १०० से १५० गज लम्बे तथा ६० गज से १००

गज तक चौड़े मैदान की अवश्यकता होती है . मैदान के दोनों किनारों पर गोल पोस्ट होता है . यह खेल दो दलों के बीच में खेला जाता है . खेल में दोनों ओर ९-९ या ११ -११ खिलाड़ी होते हैं . इस खेल के निर्णायक को हम रेफरी कहते हैं . यह खेल प्रायः १ -३० घंटे तक होता है . यह खेल होते ही दोनों दल एक दूसरे पर आक्रमण करते हैं और विजय पाने के लिए गोल करना चाहते हैं . रेफ्री का निर्णय दोनों दल मानने के लिए बाध्य होता है . इस खेल में खेलने वाले एवं दर्शक गन दोनों को बहुत आनंद आता है . खेल की जिम्मेदारी सभी खिलाड़ी पर होती है .यह खेल सहयोग से खेला जाता है . यह खेल उस समय बहुत ही रोमांचक हो जाता है जब कि कोई दल गेंद लेकर विपक्षी दल के गोल के पास पहुँच जाता है . दर्शकगण इस रोमांचक दृश्य को देखकर आनंद पाते है .

लाभ :

फुटबॉल खेल खेलने से शरीर के सभी अंगों का विकास होता है . शरीर में फुर्ती आती है . सहयोग एवं अनुशासन की भावना का विकास होता है . कोलकाता में यह खेल बहुत ही प्रसिद्ध है .

उपसंहार :

खेल आनंद के लिए खेला जाता है . आजकल खेलों में भी गुटबंदी चल रही है . यह ठीक नहीं है . हमें खेलों को स्वास्थ्य लाभ ,अनुशासन एवं सहयोग की भावना को लेकर खेलना चाहिए .फुटबॉल एक अंतर्राष्ट्रीय खेल है . इस खेल से उच्च भावना का विकास होता है . सरकार को भी इस खेल के विकास में अपनी दिलचस्पी दिखानी चाहिए .

पुस्तकालय हिन्दी निबंध-Essay On Library -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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पुस्तकालय दो शब्दों से मिल कर बना है .पुस्तक + आलय . इसका अर्थ है वह स्थान जहाँ पुस्तकों का ढेर लगा हो . मनुष्य जाति का ज्ञान पुस्तकों में ही संचित रहता है .पुस्तकें मनुष्य को सही दिशा देती हैं . जीवन यात्रा में कदम – कदम पर पुस्तकें सच्ची साथी की तरह सहयोग करती हैं .

पुस्तकालय का स्वरुप एवं व्यवस्था :

पुस्तकों का संग्रह ही पुस्तकालय है . पुस्तकालय दो प्रकार के होते हैं :-१ .व्यक्तिगत २.सार्वजनिक . हर

पुस्तकालय

पुस्तकालय में पुस्तकालय अध्यक्ष एवं कर्मचारी होते हैं .प्रत्येक पुस्तकालय में एक पुस्तक सूचि होती है ,जिसके आधार पर पाठक पुस्तकों का चुनाव करते हैं .पुस्तकालय में कोई व्यक्ति ७ या अधिक अधिक से अधिक १५ दिन के लिए एक पुस्तक ले जा सकता है .पुस्तकें हर हालत में सुरक्षित रखनी होती हैं .देर से पुस्तक जमा करने पर दंड भी देना पड़ता है .

लाभ :

पुस्तकालय हमारे ज्ञान भंडार की वृद्धि में सहायक होता है ,कोई भी व्यक्ति सभी पुस्तकें अपने पास नहीं रख सकता है .पुस्तकालय में सभी पुस्तकें आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं .पुस्तकालय की पुस्तकें पढ़ने से हमें जीवन की अनेक समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है . पठन – पाठन की ओर प्रवृति हो जाती है .जिस पर हमारा भविष्य निर्भर करता है . स्कूलों एवं कॉलेज से वंचित व्यक्ति भी पुस्तकालय  के माध्यम से ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं . पुस्तकें ही हमारा मार्ग दर्शन करती हैं .
पुस्तकालय एक विश्वविद्यालय की तरह होता है . जहाँ अनेक विषयों की जानकारी होती है . यही कारण है कि आजकल पुस्तकालयों की लोकप्रियता बढ़ती ही जा रही है .

गणतंत्र दिवस हिन्दी निबंध-Essay On Republic Day Essay in Hindi-हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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सालों की परतंत्रता के बाद १५ अगस्त ,१९४७ को भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई , पर उस समय हमारा अपना कोई संविधान नहीं था . स्वतंत्र भारत का अपना संविधान २६ जनवरी ,१९५० को लागू किया गया . इसी दिन भारत एक गणराज्य घोषित किया गया . इसीलिए २६ जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं .
२६ जनवरी ,१९३० को रावी नदी के तट पर कांग्रेस के अधिवेशन में पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा की गयी थी .इसीलिए स्वतंत्र भारत का संविधान २६ जनवरी को ही लागू किया गया .

राष्ट्रीय पर्व :

गणतंत्र दिवस भारत का प्रमुख ‘राष्ट्रीय पर्व ‘ है ,जिसे पूरे देश में अत्यंत हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है . स्कूल ,कॉलेज ,सरकारी तथा ग़ैर सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय -ध्वज लहराया जाता है तथा अमर शहीदों को याद किया जाता है .

प्रदर्शन :

भारत की राजधानी दिल्ली में यह पर्व अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है . इण्डिया गेट पर शहीद -स्मारक पर पुष्प अर्पित करने के कार्यक्रम से इसकी शुरुआत होती है . राजपथ पर लाखों की भीड़ के समक्ष भारत के राष्ट्र्पति राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं . इस अवसर पर जल ,थल एवं वायु सेना के जवान उनका अभिवादन करते हुए निकलते हैं . राष्ट्रपति को २१ तोपों की सलामी दी जाती है . इस परेड में अर्द्धसैनिक बल भी भाग लेते हैं . सैनिकों के साथ आधुनिक शास्त्र का प्रदर्शन भी किया जाता  है .
इस अवसर पर स्कूलों के बच्चे ,देश के विभिन्न राज्यों के लोक – नर्तक अत्यंत आकर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं . विभिन्न राज्यों की झाकियाँ सबका मन मोह लेती हैं .अंत में विमानों की उड़ान होती है .

देश की रक्षा :

इन कार्यक्रमों को देखने विदेशों के राजदूत तथा सम्मानित व्यक्ति आते हैं . सायंकाल सरकारी भवनों पर रोशनी की जाती है . इस अवसर पर राष्ट्रपति विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट व्यक्तियों को अलंकरण प्रदान करते हैं . दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में हिंदी कवि -सम्मेलन और उर्दू -मुशायरे का आयोजन किया जाता है . इस दिन हमें देश की रक्षा तथा सेवा की शपथ लेनी चाहिए .

स्वतंत्रता दिवस हिन्दी निबंध-Essay On Independence Day-हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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पंद्रह अगस्त एवं छब्बीस जनवरी दो ऐसे राष्ट्रीय पर्व हैं जिन्हें सम्पूर्ण देश बड़े ही धूम – धाम से मनाता है . पंद्रह
अगस्त को हमें आजादी मिली थी . इसीलिए इसे स्वतंत्रता दिवस भी कहते हैं

वर्णन :

स्वतंत्रता दिवस पूरे देश के लिए गौरव का दिवस है . इस दिवस को मनाने के लिए महीनों पहले आयोजन होने लगता है . दिल्ली में तो इस दिवस को मनाने के लिए पूरे देश से सैनिक जाते हैं . पूरे भारत में सभाएँ होती हैं . इस दिन सुबह से ही बड़े भवनों पर तिरंगे झंडे पहराने लगते हैं . प्रातः काल ही सड़कों पर प्रभात फेरियाँ होने लगती है ,भारत माता की जय से सम्पूर्ण देश गूँज उठता है . बड़े बड़े शहरों में सैनिक परेड होती हैं . देश की प्रत्येक राजनीतिक पार्टियाँ तरह – तरह के आयोजन करती हैं . इस अवसर पर देश भक्ति के गाने ,नाटक एवं प्रहसन किये जाते हैं . स्कूलों ,विद्यालयों एवं कॉलेजों में सभाएँ होती हैं . यह दिन प्रतिज्ञा का दिन है . हम सभी एक झंडे के नीचे देश की शान एवं समृधि के लिए आयोजन करते हैं . राष्ट्रपति का सन्देश रेडियो एवं टेलीवीजन द्वारा प्रसारित किया जाता है .

महत्व :

पंद्रह अगस्त देशवासियों के लिए बहुत ही महत्व का दिन है . इस दिन हम अंग्रेजों के अत्याचार एवं देश वासियों के अद्भुत त्याग को याद करते हैं . इसी दिन हम गांधी जी ,सुभाष बाबु ,भगत सिंह ,नेहरु जी , सरदार पटेल आदि का स्मरण करते हैं . यह वही दिन है जब एक झंडे के नीचे हम सब एक होकर देश की रक्षा की प्रतिज्ञा करते हैं . इसे मनाने से लोगों के अन्दर राष्ट्रीय प्रेम की भावना का विकास होता है . इस दिन को प्राप्त करने के लिए कितने घर जला दिए गए .कितने लोग फाँसी पर झूल गए . उन्हें भुलाना ठीक नहीं .

कमी :

१५ अगस्त १९४७ के बाद हम हर साल इस त्यौहार को मनाते हैं . हमलोग केवल भाषण एवं नारे देकर ही संतोष कर लेते हैं .

उपसंहार :

स्वतंत्रता हर व्यक्ति के लिए एक नयी प्रेरणा लेकर आती है . हमें स्वार्थ को छोड़कर देश की गरिमा बढ़ाने में लग जाना चाहिए . यह स्वतंत्रता बहुत बहुमूल्य है .अतः हमें इसकी रक्षा का प्रयास प्राण देकर भी करना चाहिए .

दीपावली हिन्दी निबंध-Essay On Deepawali- Diwali-हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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हमारा देश त्योहारों का देश है . यहाँ रोज ही कोई न कोई त्यौहार मनाया ही जाता है . इन त्योहारों में निम्नलिखित चार त्योहार बहुत ही प्रमुख हैं :-
क .दीपावली
ख . होली .
ग .दुर्गापूजा
घ.जन्माष्टमी .
दीपावली कार्तिक महीने में अमावस्या के दिन मनाई जाती है . इस दिन लक्ष्मीजी की पूजा बड़े धूम – धाम से होती है .

मनाने के कारण :

इस त्यौहार को मनाने के दो कारण हैं – क . धार्मिक कारण ख . वैज्ञानिक कारण .

धार्मिक कारण : 
इसी दिन भगवान् रामचंद्र रावण को मारकर लक्ष्मण व सीता के साथ अयोध्या पधारे थे . उनके आने की खुशी में अयोध्या वासियों ने असंख्य दीप जलाकर अगवानी की थी . उसी दिन से यह त्यौहार मनाया जाता है .

वैज्ञानिक कारण :

वर्षा ऋतू में अनेक कीडे-मकोडे की भरमार हो जाती है ,जिससे वातावरण शुद्ध नहीं रह पाता . घरों की सफाई व दीप जलाने से इन कीड़ों का विनाश हो जाता है ,इसीलिए यह त्यौहार वर्षा ऋतू के बाद मनाया जाता है .

आयोजन व उत्सव :

पर्व के एक सप्ताह पहले से ही लोग अपने घरों की सफाई करने लगते हैं . दुकानों तथा कार्यालयों को रंग – विरंगे रंगों से सजाया जाता है . कार्तिक कृष्ण तेरस को धनतेरस कहते हैं . इस दिन प्रत्येक हिंदी के घर में नवीन वर्तन ख़रीदा जाता है . दीपावली के दिन सुबह से लोगों के मन में आनंद की लहरें उठने लगती हैं . लक्ष्मी गणेश की मूर्ति खरीद कर सायं काल उनकी पूजा की जाती है . घर के प्रत्येक जगहों पर दीप जलाया जाता है . लोग नए वस्त्र धारण करते हैं . बच्चे इस दिन खूब आतिशबाजी करते हैं . पांचवे दिन भैया दूज का पर्व मनाया जाता है .

उदेश्य :

हर त्यौहार का कुछ न कुछ उदेश्य होता है . यह पर्व हमारे प्राचीन आर्दशों की याद दिलाता है . इसी बहाने घरों की सफाई भी हो जाती है .

उपसंहार :

दीपावली प्रसन्नता एवं भाई चारा का त्यौहार है .कुछ लोग इस दिन जुआ खेलते हैं . यह समाज के लिए कलंक की बात है . हमें इस त्यौहार को सादगीपूर्ण मनाना चाहिए . आतिशबाजी से कभी कभी दुर्घटना भी हो जाती हैं . एक ही दिन में सैकड़ो रुपये व्यर्थ ही खर्च हो जाते हैं . इस त्यौहार का सामाजिक ,वैज्ञानिक व धार्मिक महत्व है .

होली का त्योहार-Essay On Holi Ka Tyohaar-हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है क्योंकि यहाँ पूरे वर्ष समय – समय पर कोई न कोई त्योहार मनाया जाता है . समय – समय पर आने वाले ये त्योहार हमारे जीवन में अत्यधिक उल्लास और हर्ष भर देते हैं , तो साथ ही हमें अपनी संस्कृति और परम्पराओं से जोड़े भी रखते हैं .

त्योहार का समय

होली भी हिन्दुओं का प्रसिद्ध त्योहार है जो प्रति वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को अत्यंत उत्साह से पूरे देश में मनाया जाता है . यह त्योहार वसंत – ऋतू का संदेशवाहक बनकर आता है . इन दिनों किसानों की फसलें पाक कर तैयार होती हैं तथा चारों ओर वसंत का सौन्दर्य छाया रहता है .

पौराणिक कथा

प्रत्येक त्यौहार से कोई – न – कोई पौराणिक कथा या सामाजिक सन्दर्भ अवश्य जुड़ा होता है . होली से एक प्राचीन कथा जुडी है . दैत्यराज हिरण्यकश्यप नास्तिक था . वह नहीं चाहता था कि उसके राज्य में कोई भी ईश्वर का नाम ले , पर दैत्यराज का पुत्र प्रहलाद ईश्वर का परम – भक्त निकला . जब वह पिता के मना करने पर भी ईश्वर भक्ति से बिमुख न हुआ , तो पिता ने अपने पुत्र को अनेक यातनाएँ दी , पर एक बार भी प्रहलाद का बाल बाँका न हुआ .
अंत में उसने अपनी बहन होलिका से प्रहलाद को गोद में लेकर जलती अग्नि में बैठने को कहा . होलिका को आग में न जलने का वरदान मिला हुआ था . ईश्वर की माया कुछ ऐसी हुई कि होलिका अग्नि में जल गयी और प्रहलाद बच गया . इसी घटना की याद में आज भी लोग लकड़ियों की ढेर की होली बना कर जलाते हैं तथा उसकी परिक्रमा करते हैं .

होली का सन्देश

अगले दिन फाग खेला जाता है . सुबह से ही लोग टोलियाँ बना कर एक – दूसरे को गुलाल लगाते हैं ,रंग डालते हैं और गले मिलते हैं . लोग नाचते – गाते अपने घरों से निकलते हैं और रंग का उत्सव दोपहर तक चलता रहता है. दोपहर के बाद लोग एक दूसरे को मिठाइयाँ खिलाते हैं . होली का पर्व प्रेम , एकता और भाई -चारे का सन्देश देता है . कुछ लोग इस दिन मद्यपान करके इसकी पवित्रता को नष्ट करते हैं . हमें इस बुराई को रोकना चाहिए और ख़ुशी -ख़ुशी रंगों के त्योहार होली का आनंद लेना चाहिए .

दुर्गा पूजा-Essay On Durga Pooja-हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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भारत वर्ष त्योहारों का देश है . ये पर्व सामाजिक एकता के मूल आधार हैं . इनमे से कुछ पर्व तो विशेष क्षेत्र में ही सीमित होते हैं ,जबकि कुछ पर्व पूरे देश में मनाये जाते हैं . दुर्गा पूजा एक ऐसा पर्व है जो सम्पूर्ण देश में किसी न किसी रूप में मनाया जाता हैं . बंगाल में इस पूजा का विशेष महत्व है .यह पूजा वर्ष में दो बार मनाई जाती है .
१. वसंत काल में वसंत काल की पूजा को वसंत पूजा कहते हैं .
२ .शरद काल में : जो पूजा शरद काल में मनाई जाती है ,उसे शारदीय पूजा कहते है .

पौराणिक कथा :

ऐसा कहा जाता है कि महिसासुर नाम का एक असुर ,देवताओं को बड़ा कष्ट देता था . उसके उपद्रव से समस्त देवता स्वर्ग से भाग गए थे .देवताओं की प्रार्थना पर महाशक्ति दुर्गा देवी ने राक्षस का वध किया था . रामचंद्र ने भी रावण का वध करने के लिए शरद काल में दुर्गापूजा की थी . वर्तमान काल में भी लोग दुर्गा को शक्ति मानकार पूजा करते हैं .

प्रतिमा वर्णन :

दुर्गा दस भुजाओं वाली एवं तीन नेत्र वाली हैं . सिंह इनका वाहन है . ये गौर वर्ण की हैं . इसीलिए इनका नाम गौरी है .देवी की दाहिनी ओर लक्ष्मी और गणेश तथा बायीं ओर सरस्वती एवं कार्तिकेय की प्रतिमा होती है . कुछ प्रान्तों में रावण का पुतला जलाया जाता है . अस्त्र -शस्त्र की पूजा करते हैं .रामलीला का आयोजन होता है . दिल्ली एवं वाराणसी की राम लीला भारत में प्रसिद्ध है .

पूजा का वर्णन :

आश्विन मास की सप्तमी की तिथि में ही माँ दुर्गा की पूजा प्रारंभ हो जाती है .अष्टमी एवं नवमी को समारोह चरम सीमा पर रहता है . प्रति दिन सुबह एवं संध्या समय देवी की आरती होती है . दसमी के दिन बड़े ही धूम -धाम से प्रतिमा विसर्जन होता है .बंगाली लोग इस पूजा को बड़े ही प्यार से मनाते हैं .

उपसंहार :

यह त्यौहार भाई – चारे ,प्रेम एवं अपनापन की भावना से आता है . बुरे कर्म वाले का विनाश अवश्य होता है .अतः हमें सच्चाई के मार्ग पर चलते हुए देवी की पूजा करनी चाहिए .वह निश्चय ही हमें मनोवांछित फल देंगी . इस त्यौहार को सादगी से मनाना चाहिए .

सरस्वती पूजा-Essay On Saraswati Pooja-हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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माँ सरस्वती ज्ञान व कला की  देवी हैं . इन्हें भारती , शारदा , वाणी , वीणापाणी , गिरा , महाश्वेता आदि अनेक
माँ सरस्वती

नामों से पुकारा जाता है . इनका वाहन हंस है . ये स्वेत वस्त्र धारण की हुई हैं . इनके चरणों के नीचे कमल है . इनके एक हाथ में वीणा एवं दूसरे हाथ में पुस्तक है . इनकी पूजा माघ की शुक्ल पंचमी के दिन होती है . इस पंचमी को ‘वसंत पंचमी ‘ भी कहते हैं . यह पूजा विशेष तौर से विद्यार्थी वर्ग ही करता है . स्कूल , कॉलेज , पुस्तकालय , क्लब एवं हास्टलों में सरस्वती की पूजा बड़ी ही धूम – धाम से होती है .

पूजा का आयोजन :
माँ सरस्वती के पूजा के एक सप्ताह पहले से ही पूजा मंडप बनने लगता है . नाट्य , अभिनय , नृत्य आदि के लिए अभ्यास तो महीने पहले से होता है . पूजा के दिन सुबह से रात तक कुछ न कुछ आयोजन होता ही रहता है .
सरस्वती पूजा विधि : 
वसंत पंचमी के दिन विद्यार्थी सुबह से ही स्नान कर नया वस्त्र पहनते हैं . इस दिन विशेष कर लड़के धोती एवं लडकियाँ वसंती साड़ी पहनती हैं . पूजा स्थल पर देवी की प्रतिमा फूलों से और भी सुन्दर हो जाती है . छात्र – छात्राएँ अपनी कलम , पुस्तकें माँ के चरणों में रखते हैं . पूजा के अंत में पुष्पांजलि होती हैं . सभी लड़के अपने हाथ में फूल लेकर माता की पूजा करते हैं . और उनकी वंदना करते हैं . संध्या समय आरती की जाती हैं .
आमोद – प्रमोद :
बच्चे संध्या – समय संगीत एवं अभिनय के द्वारा आमोद – प्रमोद करते हैं . कभी – कभी बाहर के भी पेशेवर कलाकारों को बुलाया जाता है .
प्रतिमा – विसर्जन :
पूजा के दूसरे दिन प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है . नगरों तथा उपनगरों में विसर्जन का दृश्य देखते ही बनता है . जब माता की मूर्ति सड़कों से होकर गुजरती है तब लड़के सड़कों पर नाचते गाते एवं ‘सरस्वती माता की जय ‘ के नारे लगाते हुए चलते हैं . अंत में किसी नदी या तालाब में प्रतिमा का विसर्जन होता है .
उपसंहार :
सरस्वती पूजा प्रेरणादायक पर्व है . इस पूजा के बाद ही विद्यालयों में पढ़ाई प्रारंभ होती है . यह विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रेरणा का पर्व है .

मेरा प्रिय पशु कुत्ता-Essay On MY Dog-हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

मेरा प्रिय पशु कुत्ता-Essay On MY Dog-हिन्दी निबंध – Essay in Hindi  Here we are providing you this essay in hindi हिन्दी निबंध  which will help in hindi essays for class 4, hindi essays for class 10,  hindi essays for class 9,  hindi essays for class 7, hindi essays for class 6, hindi essays for class 8.

कुत्ता चार पैर वाला जानवर है . यह एक पालतू पशु है . इसके गुणों की कहानी अनमोल है . यह रीढ़दार हिंसक प्राणी है .
आकार :
कुत्ता
इसके चार पैर , दो आँखें , एक मुँह , दो कान एवं एक नाक होता है . इसकी एक लम्बी पूँछ होती है . कुत्ते
अधिकतर काले रंग के होते हैं . इसके अलावा कुछ सफ़ेद कुछ मिश्रित रंग के होते हैं . इनका शरीर रोयें से भरा रहता है .
भोजन :
यह माँसाहारी पशु है . इसके साथ ही साथ यह शाकाहारी भोजन भी बड़े चाव से खाता है . यह दूध बड़े ही चाव से पीता है .

 

स्वभाव:
कुत्ता का स्वभाव बड़ा ही सरल होता है . इसकी बुद्धि बड़ी ही तेज़ होती है . इसके अन्दर सूँघने की तीव्र शक्ति होती है . आजकल कुत्ते सूँघकर अपराधियों को पकड़ने में सहायक हो रहे हैं . घरों की रखवाली ये बड़े ही मुस्तैदी के साथ करते हैं .
प्राप्तिस्थान : 
पृथ्वी के प्रायः सभी देशों में कुत्ते पाए जाते हैं . भारत के अलावा इंग्लैंड, स्पेन ,फ़्रांस ,इटली ,रूस , अमरीका आदि देशों में विभिन्न आकार एवं जाती के कुत्ते पाए जाते हैं .
उपसंहार :
कुत्ता मनुष्य का सेवक है . किन्तु आज कुत्ते की स्थिति बड़ी दुखद है . हमारे देश में विदेशी कुत्तों को ठीक से रखा जाता है ,परन्तु स्वदेशी कुत्ते लावारिश होकर भटकते रहते हैं . अतः इनकी देखभाल करना हमारा धर्म है . हमारे देश के कुत्तों को संभाल कर रखा जाए तो ये भी विदेशी कुत्तों से अधिक लाभदायक हो सकते हैं .