June 13, 2018 | Hindigk50k

muhavare-idioms-मुहावरे Muhavare (Idioms) ( मुहावरे) मुहावरे Muhaware और उनका प्रयोग

muhavare-idioms-मुहावरे Muhavare (Idioms) ( मुहावरे) मुहावरे Muhaware और उनका प्रयोग

muhavare-idioms-मुहावरे Muhavare (Idioms) ( मुहावरे) मुहावरे Muhaware और उनका प्रयोग with example

मुहावरा :- विशेष अर्थ को प्रकट करने वाले वाक्यांश को मुहावरा कहते है। मुहावरा पूर्ण वाक्य नहीं होता, इसीलिए इसका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं किया जा सकता । मुहावरा का प्रयोग करना और ठीक -ठीक अर्थ समझना बड़ा ही  कठिन है ,यह अभ्यास से ही सीखा जा सकता है । इसीलिए इसका नाम मुहावरा पड़ गया ।

यहाँ पर कुछ प्रसिद्ध मुहावरे और उनके अर्थ वाक्य में प्रयोग सहित दिए जा रहे है।

१.अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना – (स्वयं अपनी प्रशंसा करना ) – अच्छे आदमियों को अपने मुहँ मियाँ मिट्ठू बनना शोभा नहीं देता ।
२.अक्ल का चरने जाना – (समझ का अभाव होना) – इतना भी समझ नहीं सके ,क्या अक्ल चरने गए है ?
३.अपने पैरों पर खड़ा होना – (स्वालंबी होना) – युवकों को अपने पैरों पर खड़े होने पर ही विवाह करना चाहिए ।
४.अक्ल का दुश्मन – (मूर्ख) – राम तुम मेरी बात क्यों नहीं मानते ,लगता है आजकल तुम अक्ल के दुश्मन हो गए हो ।
५.अपना उल्लू सीधा करना – (मतलब निकालना) – आजकल के नेता अपना अपना उल्लू सीधा करने के लिए ही लोगों को भड़काते है ।

६.आँखे खुलना – (सचेत होना) – ठोकर खाने के बाद ही बहुत से लोगों की आँखे खुलती है ।
७.आँख का तारा – (बहुत प्यारा) – आज्ञाकारी बच्चा माँ -बाप की आँखों का तारा होता है ।
८.आँखे दिखाना – (बहुत क्रोध करना) – राम से मैंने सच बातें कह दी , तो वह मुझे आँख दिखाने लगा ।
९.आसमान से बातें करना – (बहुत ऊँचा होना) – आजकल ऐसी ऐसी इमारते बनने लगी है ,जो आसमान से बातें करती है ।
१० .ईंट से ईंट बजाना – (पूरी तरह से नष्ट करना) – राम चाहता था कि वह अपने शत्रु के घर की ईंट से ईंट बजा दे।
११.ईंट का जबाब पत्थर से देना – (जबरदस्त बदला लेना) – भारत अपने दुश्मनों को ईंट का जबाब पत्थर से देगा ।
१२.ईद का चाँद होना – (बहुत दिनों बाद दिखाई देना) – राम ,तुम तो कभी दिखाई ही नहीं देते ,ऐसा लगता है कि तुम ईद के चाँद हो गए हो ।
१३.उड़ती चिड़िया पहचानना – (रहस्य की बात दूर से जान लेना) – वह इतना अनुभवी है कि उसे उड़ती चिड़िया पहचानने में देर नहीं लगती ।
१४.उन्नीस बीस का अंतर होना – (बहुत कम अंतर होना) – राम और श्याम की पहचान कर पाना बहुत कठिन है ,क्योंकि दोनों में उन्नीस बीस का ही अंतर है ।
१५.उलटी गंगा बहाना – (अनहोनी हो जाना) – राम किसी से प्रेम से बात कर ले ,तो उलटी गंगा बह जाए ।

१६.कलेजा टूक टूक होना (शोक में दुखी होना ) – पुत्र की मृत्यु का स्मरण होते ही कलेजा टूक टूक हो जाता है .
१७.कागजी घोड़े दौड़ाना ( बेहद लिखी पढ़ी करना ) कुछ काम धाम क्यों नहीं करते ,केवल कागजी घोड़े दौड़ाने से क्या लाभ ?
१८.कमर कसना (तैयार होना ) शत्रुओं से लड़ने के लिए भारतीयों को कमर कसकर तैयार हो जाना चाहिए .
१९.कलेजा मुँह का आना (भयभीत होना ) गुंडे को देख कर उसका कलेजा मुँह को आ गया .
२०. कलेजे पर सांप लोटना (ईर्ष्या करना ) राम के प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने पर मोहन की माँ के कलेजे पर सांप लोट गया .
२१. कमर टूट जाना -(बहुत बड़ी हानि होना) डाकुओं ने जब से उसके घर को लूटा है ,उसकी कमर ही टूट गयी है .
२२. किताब का कीड़ा होना (पढाई के अलावा कुछ न करना ) विद्यार्थी को केवल किताब का कीड़ा नहो होना चाहिए .
२३.ख़ाक छानना (दुःख उठाना ) मैंने आपके लिए सारे जगत की छान डाली .

२४.खून पसीना एक करना ( अधिक परिश्रम करना ) खून पसीना एक करके विद्यार्थी परीक्षा में सफल होते है .
२५.खून खौलना (क्रोधित होना ) झूठ बातें सुनते ही मेरा खून खौलने लगता है .
२६.खून का प्यासा (जानी दुश्मन होना )उसकी क्या बात कर रहे हो ,वह तो मेरे खून का प्यासा हो गया है .
२७.गले का हार होना (बहुत प्रिय होना )छोटू अपने घर में गले का हार बन गया है .
२८.गला छूटना (पिंड छोड़ना)बुरी तरह फँस गया था किन्तु अब गला छूट गया .
२९.गर्दन पर छुरी चलाना (नुकसान पहुचाना) मुझे पता चल गया कि विरोधियों से मिलकर किस तरह मेरे गले पर छुरी चला रहे थे .
३०.गड़े मुर्दे उखाड़ना (पुरानी बातों का याद दिलाना )आप समय देख कर चलें . गड़े मुर्दें उखाड़ना ठीक नहीं है .
३१.गागर में सागर भरना (थोड़े शब्दों में अधिक बातें कहना )बिहारी ने अपने दोहों में ऐसा भाव भरा है,लगता है कवि ने गागर में सागर भर दिया है .
३२.गुल खिलना (नयी बात का भेद खुलना ,विचित्र बातें होना) सुनते रहिये ,देखिये अभी क्या गुल खिलेगा .
३३.गिरगिट की तरह रंग बदलना (बातें बदलना) गिरगिट की तरह रंग बदलने से तुम्हारी कोई इज्जत नहीं करेगा .
३४.घर का न घाट का (कहीं का नहीं )तुम्हारी आदत ने तुम्हे न घर का न घाट का बना रखा है .
३५.घाव पर नमक छिड़कना (दुःख में दुःख देना )राम वैसे ही दुखी है ,तुम उसे परेशान करके घाव पर नमक छिड़क रहे हो .

३६. चल बसना (मर जाना ) उसकी माँ अचानक ही चल बसी .
३७.चार चाँद लगाना (चौगुनी शोभा देना ) निबन्धों में मुहावरों का प्रयोग करने से चार चाँद लग जाता है .
३८.चिकना घड़ा होना (बेशर्म होना ) तुम ऐसा चिकना घड़ा हो तुम्हारे ऊपर कहने सुनने का कोई असर नहीं पड़ता .
३९.चिराग तले अँधेरा (भलाई में बुराई) छात्र की मूर्खता पर शिक्षक ने कहा बेटा चिराग तले अँधेरा होता है .
४०.चैन की बंशी बजाना(मौज करना ) आजकल राम चैन की बंशी बजा रहा है .
४१.छक्के छुड़ाना ( परेशान करना ) झाँसी की रानी ने थोड़ी सी सेना के बल पर अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिया था .
४२.छप्पर फाडकर देना (बिना मेहनत का अधिक धन पाना) ईश्वर जिसे देता है ,छप्पर फाड़कर देता है .

४३.छाती पर पत्थर रखना (कठोर ह्रदय) उसने छाती पर पत्थर रखकर अपने पुत्र को विदेश भेजा था .
४४.छाती पर सवार होना (आ जाना) अभी वह बात कर रही थी कि बच्चे उसके छाती पर सवार हो गए .
४५.जहर उगलना (द्वेषपूर्ण बात करना )पडोसी देश चीन और पाकिस्तान हमारे देश के प्रति हमेशा जहर उगलते रहते है .
४६.जलती आग में घी डालना (क्रोध बढ़ाना)बहन ने भाई की शिकायत करके जलती आग में भी डाल दिया .
४७.जमीन आसमान एक करना (बहुत प्रयन्त करना)मै शहर में अच्छा मकान लेने के लिए जमीन आसमान एक कर दे रहा हूँ परन्तु सफलता नहीं मिल रही है .
४८.जान पर खेलना (प्राण की परवाह न करना) भगत सिंह देशभक्ति के लिए अपनी जान पर खेल गए .
४९.जूते चाटना(जी में जी करना) वह नेताओं की जूते चाटते चाटते थक गया .
५०.झक मारना (विवश होना)दूसरा कोई साधन नहीं है . झक मारकर तुम्हे साइकिल से जाना पड़ेगा .

५१ . टका सा जबाब देना ( साफ़ इनकार करना ) – मै नौकरी के लिए मैनेज़र से मिला लेकिन उन्होंने टका सा जबाब दे दिया .
५२.टस से मस न होना ( कुछ भी प्रभाव न पड़ना ) – दवा लाने के लिए मै घंटों से कह रहा हूँ , परन्तु आप आप टस से मस नहीं हो रहे हैं .
५३.टोपी उछालना (अपमान करना ) – अपने घर को देखो ,दूसरों की टोपी उछालने से क्या लाभ ?
५४. डकार जाना ( हड़प जाना ) – सियाराम अपने भाई की सारी संपत्ति डकार गया .
५५. तिल का ताड़ बनाना (छोटी बातों को बढ़ा देना ) – मै समझ रहा हूँ कि तुम तिल को ताड़ बनाकर झगड़ा कर रहे हो .
५६.तूती बोलना (प्रभावशाली होना ) – सत्ता में सोनिया गांधी की तूती बोल रही थी .
५७.थूक कर चाटना (बात देकर फिरना ) – मै राम की तरह थूक कर चाटना वाला नहीं हूँ.
५८.दम टूटना (मर जाना ) – शेर ने एक ही गोली में दम तोड़ दिया .
५९.दाल में काला होना (संदेह होना ) – हम लोगों की ओट में ये जिस तरह धीरे -धीरे बातें कर रहें है, उससे मुझे दाल में काला लग रहा है .
६०.बाजी मारना (जीत पाना ) – आज आपने खेल में बाजी मार लिया .
६१.बात बनाना (बहाना बनाना ) – तुम हर काम में बात बनाना जानते हो .
६२.भीगी बिल्ली होना (बिलकुल डर जाना) – वह अपने पापा के सामने भीगी बिल्ली हो जाता है .
६३.मिट्टी के मोल (बहुत सस्ता ) – यह मकान मिट्टी के मोल बिक गया .
६४.मुट्ठी गरम करना (घूस लेना ) – चलो मुट्ठी गरम कराओ, आज ही काम करवा देता हूँ.
६५.मुँह बंद कर देना (शांत कराना) – तुम धमकी देकर मेरा मुँह बंद कर देना चाहते हो .
६६. मीठी छुरी (छली मनुष्य )- वह तो मीठी छुरी है ,मैं उसके बातों में नहीं आता हूँ।
६७. मुँह काला होना – अपमानित होना – उसका मुँह काला हो गया है ,अब वह कैसे किसी के सामने आएगा।
६८. मुँह की खाना ( पराजित होना ) – पाकिस्तान ,भारत के आगे हमेशा मुँह की खाता रहता है।
६९. मख्खन लगाना ( चापलूसी करना ) – साहब को मख्खन लगाने के बाद भी मेरा काम नहीं बना।
७०. मगरमच्छ के आँसू ( दिखावटी सहानुभूति ) मेरे घर में चोरी हो जाने पर रहीम चाचा मगरमच्छ के आँसू बहाने लगे।
७१. न रहेगा बॉस न बजेगी बाँसुरी – (कारण का ही नाश कर देना) – अपने मोहल्ले को मच्छरों के प्रकोप से बचाने के लिए लोग गन्दी नालियों की सफाई में जुट गए। इस तरह न रहेगा बॉस न बजेगी बाँसुरी।
७२. राम मिलायी जोड़ी ,एक अँधा एक कोढ़ी – (दो मनुष्यों का एक सामान होना) – राम और श्याम की अच्छी जोड़ी मिली। दोनों चोर हैं। इस तरह ठीक ही कहा है राम मिलायी जोड़ी ,एक अँधा एक कोढ़ी।
७३. लकीर के फ़क़ीर – (पुरानी परम्परों का पालन करने वाला) – कबीरदास लकीर के फ़क़ीर नहीं थे तभी तो उन्होंने भक्ति मार्ग द्वारा उन्नति की राह निकाली।
७४. लाठी टूटे न साँप मरे – (किसी की हानि हुए बिना स्वार्थ सिद्ध हो जाना)- राम किसी को हानि पहुँचाए बिना काम करना चाहते है। जैसे – लाठी टूटे न साँप मरे।
७५. लालच बुरी बला – (लालच से बहुत हानि होती है) – सभी जानते है कि लालच बुरी बला है ,फिर भी लालच में पड़ जाते हैं।

बादशाह की लाजवाब किताब | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #46

बादशाह की लाजवाब किताब | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #46

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अकबर बादशाह ने एक पुस्तक लिखकर छपवाई थी. बादशाह उसे बहुत ही सुन्दर पुस्तक समझते थे. एक दिन बीरबल ने कहा – हुजूर ! आपने बड़ी कमाल की पुस्तक लिखी है . आज मैंने घीसा हलवाई के पास देखी थी. बादशाह ने पूछा – उसने पूरी पढ़ी थी ? क्या कहता था वह ? बीरबल ने कहा – हुजूर ! पढता न था ,वह तो उसमे चमचम बाँधकर बेचता है. इस पर बादशाह को बड़ी खिसियाहट हुई और उन्होंने सब पुस्तक इकट्ठी करवा कर अग्निदेव को भेंट कर दी.

बेफिक्र कौन | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #45

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एक दिन बादशाह ने दरबार में पूछा कि संसार में कोई ऐसा भी आदमी है , जिसे किसी प्रकार की चिंता कभी न होती हो ? इस प्रश्न पर सब दरबारी चुप हो गए . तब बीरबल से उत्तर देने को कहा गया. उसने कहा – हुजूर ! पाँच बर्ष का बालक . इस उत्तर से दरबारी और बादशाह सभी खुश हो गए .

खिजाब लगाने वालों के दिमाग नहीं होता | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #44

खिजाब लगाने वालों के दिमाग नहीं होता | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #44

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एक बार बादशाह खिजाब लगा रहे थे . वे मज़ाक में बीरबल को नीचा दिखाने के लिए बोले – बीरबल ! जो लोग खिजाब नहीं लगाते उनका दिमाग बड़ा रद्दी होता है. इस बात को सुनकर बीरबल ने उत्तर दिया – जहाँपनाह ! खिजाब न लगाने वालों का दिमाग तो ख़राब होता है , पर खिजाब लगाने वालों के दिमाग ही नहीं होता . उस दिन से बादशाह अकबर ने खिजाब लगाना छोड़ दिया .

लोहे की तलवार | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #43

लोहे की तलवार | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #43

 

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एक दिन दरबार में एक कारीगर एक बहुत बढ़िया तलवार बना कर लाया . बादशाह अकबर को बड़ी पसंद आई , उन्होंने उसे कुछ देर तक हाथ में लेकर देखा और कहा – बीरबल तुम भी देखो , कह कर बीरबल को दे दी . बीरबल ने पहले तो उसे बड़ी उत्सुकता पूर्वक उलट – पलट कर देखते रहे फिर उन्होंने उसे पलट कर तथा घिसकर देखा , परन्तु ऐसा मालुम हुआ कि उनकी समझ में कुछ न आया .
बीरबल बोले – हुजूर ! गुस्ताखी माफ़ हो ! आपके पारस जैसे हाथों में आकर तलवार सोने की क्यों नहीं हुई ? यही देख रहा था . इसीलिए मैंने इसे घिसा भी था . यह बात अभी तक मेरे समझ में नहीं आई .
बीरबल का ऐसा जबाब सुनकर बादशाह बड़े प्रसन्न हुए और उन्हें वही तलवार इनाम में दे दी .

सत्य और असत्य का अंतर | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #42

सत्य और असत्य का अंतर | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #42

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क बार बादशाह ने बीरबल से पूछा – बीरबल ! सत्य और असत्य में क्या अंतर है ? बीरबल ने कहा – हुजूर ! जितना आँख और कान में है . बादशाह ने कारण पूछा तो तो उन्होंने जबाब दिया – देखिये जो बात अपनी आँख से देखी जाय , वह सत्य है , उसे कोई झूठा नहीं कर सकता , लेकिन कान से सुनी जानी वाली बात असत्य होती है , इसीलिए सत्य और असत्य में आँख और कान का अंतर है .

सबसे बड़ी चीज | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #41

सबसे बड़ी चीज | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #41

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एक दिन बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं थे। ऐसे में बीरबल से जलने वाले सभी सभासद बीरबल के खिलाफ अकबर के कान भर रहे थे। अकसर ऐसा ही होता था, जब भी बीरबल दरबार में उपस्थित नहीं होते थे, तभी दरबारियों को मौका मिल जाता था। आज भी ऐसा ही मौका था।

बादशाह के साले मुल्ला दो प्याजा की शह पाए कुछ सभासदों ने कहा-‘‘जहांपनाह ! आप वास्तव में बीरबल को आवश्यकता से अधिक मान देते हैं, हम लोगों से ज्यादा उन्हें चाहते हैं। आपने उन्हें बहुत सिर चढ़ा रखा है। जबकि जो काम वे करते हैं, वह हम भी कर सकते हैं। मगर आप हमें मौका ही नहीं देते।’’

बादशाह को बीरबल की बुराई अच्छी नहीं लगती थी, अतः उन्होंने उन चारों की परीक्षा ली-‘‘देखो, आज बीरबल तो यहाँ हैं नहीं और मुझे अपने एक सवाल का जवाब चाहिए। यदि तुम लोगों ने मेरे प्रश्न का सही-सही जवाब नहीं दिया तो मैं तुम चारों को फांसी पर चढ़वा दूंगा।’’ बादशाह की बात सुनकर वे चारों घबरा गए।

उनमें से एक ने हिम्मत करके कहा-‘‘प्रश्न बताइए बादशाह सलामत ?’’ ‘‘संसार में सबसे बड़ी चीज क्या है ? और अच्छी तरह सोच-समझ कर जवाब देना वरना मैं कह चुका हूं कि तुम लोगों को फांसी पर चढ़वा दिया जाएगा।’’ बादशाह अकबर ने कहा- ‘‘अटपटे जवाब हरगिज नहीं चलेंगे। जवाब एक हो और बिलकुल सही हो।’’ ‘‘बादशाह सलामत ? हमें कुछ दिनों की मोहलत दी जाए।’’ उन्होंने सलाह करके कहा।

‘‘ठीक है, तुम लोगों को एक सप्ताह का समय देता हूं।’’ बादशाह ने कहा।

चारों दरबारी चले गए और दरबार से बाहर आकर सोचने लगे कि सबसे बड़ी चीज क्या हो सकती है ?

एक दरबारी बोला-‘‘मेरी राय में तो अल्लाह से बड़ा कोई नहीं।’’

‘‘अल्लाह कोई चीज नहीं है। कोई दूसरा उत्तर सोचो।’’ दूसरा बोला।

‘‘सबसे बड़ी चीज है भूख जो आदमी से कुछ भी करवा देती है।’’ तीसरे ने कहा।

‘‘नहीं…नहीं, भूख भी बरदाश्त की जा सकती है।’’

‘‘फिर क्या है सबसे बड़ी चीज ?’’ छः दिन बीत गए लेकिन उन्हें कोई उत्तर नहीं सूझा। हार कर वे चारों बीरबल के पास पहुँचे और उसे पूरी घटना कह सुनाई, साथ ही हाथ जोड़कर विनती की कि प्रश्न का उत्तर बता दें।

बीरबल ने मुस्कराकर कहा-‘‘मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दूंगा, लेकिन मेरी एक शर्त है।’’ ‘‘हमें आपकी हजार शर्तें मंजूर हैं।’’ चारों ने एक स्वर में कहा-‘‘बस आप हमें इस प्रश्न का उत्तर बताकर हमारी जान बख्शी करवाएं। बताइए आपकी क्या शर्त है ?’’ ‘‘तुम में से दो अपने कन्धों पर मेरी चारपाई रखकर दरबार तक ले चलोगे। एक मेरा हुक्का पकड़ेगा, एक मेरे जूते लेकर चलेगा।’’ बीरबल ने अपनी शर्त बताते हुए कहा।

यह सुनते ही वे चारों सन्नाटे में आ गए। उन्हें लगा मानो बीरबल ने उनके गाल पर कसकर तमाचा मार दिया हो। मगर वे कुछ बोले नहीं। अगर मौत का खौफ न होता तो वे बीरबल को मुंहतोड़ जवाब देते, मगर इस समय मजबूर थे, अतः तुरन्त राजी हो गए।

दो ने अपने कन्धों पर बीरबल की चारपाई उठाई, तीसरे ने उनका हुक्का और चौथा जूते लेकर चल दिया। रास्ते में लोग आश्चर्य से उन्हें देख रहे थे। दरबार में बादशाह ने भी यह मंजर देखा और वह मौजूद दरबारियों ने भी। कोई कुछ न समझ सका। तभी बीरबल बोले-‘‘महाराज ? दुनिया में सबसे बड़ी चीज है-गरज। अपनी गरज से ये पालकी यहां तक उठाकर लाए हैं।’’ बादशाह मुस्कराकर रह गए। वे चारों सिर झुकाकर एक ओर खड़े हो गए।

बादशाह की पहेली | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #40

बादशाह की पहेली | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #40

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बादशाह अकबर को पहेली सुनाने और सुनने का काफी शौक था। कहने का मतलब यह कि पक्के पहेलीबाज थे। वे दूसरो से पहेली सुनते और समय-समय पर अपनी पहेली भी लोगो को सुनाया करते थे। एक दिन अकबर ने बीरबल को एक नई पहेली सुनायी, “ऊपर ढक्कन नीचे ढक्कन, मध्य-मध्य खरबूजा। मौं छुरी से काटे आपहिं, अर्थ तासु नाहिं दूजा।”

बीरबल ने ऐसी पहेली कभी नहीं सुनी थी। इसलिए वह चकरा गया। उस पहेली का अर्थ उसकी समझ में नहीं आ रहा था। अत प्रार्थना करते हुए बादशाह से बोला, “जहांपनाह! अगर मुझे कुछ दिनों की मोहलत दी जाये तो मैं इसका अर्थ अच्छी तरह समझकर आपको बता सकूँगा।” बादशाह ने उसका प्रस्ताव मंजूर कर लिया।

बीरबल अर्थ समझने के लिए वहां से चल पड़ा। वह एक गाँव में पहुँचा। एक तो गर्मी के दिन, दूसरे रास्ते की थकन से परेशान व विवश होकर वह एक घर में घुस गया। घर के भीतर एक लड़की भोजन बना रही थी।

बेटी! क्या कर रही हो?” उसने पूछा। लडकी ने उत्तर दिया, “आप देख नहीं रहे हैं। मैं बेटी को पकाती और माँ को जलाती हूँ।”

अच्छा, दो का हाल तो तुमने बता दिया, तीसरा तेरा बापू क्या कर रहा है और कहाँ है?” बीरबल ने पूछा।

वह मिट्टी में मिट्टी मिला रहे हैं।” लडकी ने जवाब दिया। इस जवाब को सुनकर बीरबल ने फिर पूछा, “तेरी माँ क्या कर रही है?” एक को दो कर रही है।” लडकी ने कहा।

बीरबल को लडकी से ऐसी आशा नहीं थी। परन्तु वह ऐसी पण्डित निकली कि उसके उत्तर से वह एकदम आश्चर्यचकित रह गया। इसी बीच उसके माता-पिता भी आ पहुँचे। बीरबल ने उनसे सारा समाचार कह सुनाया। लडकी का पिता बोला, मेरी लड़की ने आपको ठीक उत्तर दिया है। अरहर की दाल अरहर की सूखी लकड़ी से पक रही है। मैं अपनी बिरादरी का एक मुर्दा जलाने गया था और मेरी पत्नी पडोस में मसूर की दाल दल रही थी।” बीरबल लडकी की पहेली-भरी बातों से बड़ा खुश हुआ। उसने सोचा, शायद यहां बादशाह की पहेली का भेद खुल जाये, इसलिए लडकी के पिता से उपरोक्त पहेली का अर्थ पूछा।
यह तो बड़ी ही सरल पहेली है। इसका अर्थ मैं आपको बतलाता हूँ – धरती और आकाश दो ढक्कन हैं। उनके अन्दर निवास करने वाला मनुष्य खरबूजा है। वह उसी प्रकार मृत्यु आने पर मर जाता है, जैसे गर्मी से मोम पिघल जाती है।” उस किसान ने कहा। बीरबल उसकी ऐसी बुध्दिमानी देखकर बड़ा प्रसन्न हुआ और उसे पुरस्कार देकर दिल्ली के लिए प्रस्थान किया। वहाँ पहुँचकर बीरबल ने सभी के सामने बादशाह की पहेली का अर्थ बताया। बादशाह ने प्रसन्न होकर बीरबल को ढेर सारे इनाम दिये।

बीरबल और तानसेन का विवाद | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #39

बीरबल और तानसेन का विवाद | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #39

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तानसेन और बीरबल में किसी बात को लेकर विवाद हो गया। दोनों ही अपनी-अपनी बात पर अटल थे। हल निकलता न देख दोनों बादशाह की शरण में गए। बादशाह अकबर को अपने दोनों रत्न प्रिय थे। वे किसी को भी नाराज नहीं करना चाहते थे, अतः उन्होंने स्वयं फैसला न देकर किसी और से फैसला कराने की सलाह दी।

‘‘हुजूर, जब आपने किसी और से फैसला कराने को कहा है तो यह भी बता दें कि हम किस गणमान्य व्यक्ति से अपना फैसला करवाएं ?’’ बीरबल ने पूछा।

‘‘तुम लोग महाराणा प्रताप से मिलो, मुझे यकीन है कि वे इस मामले में तुम्हारी मदद जरूर करेंगे।’’ बादशाह अकबर ने जवाब दिया।

अकबर की सलाह पर तानसेन और बीरबल महाराणा प्रताप से मिले और अपना-अपना पक्ष रखा। दोनों की बातें सुनकर महाराणा प्रताप कुछ सोचने लगे, तभी तानसेन ने मधुर रागिनी सुनानी शुरू कर दी। महाराणा मदहोश होने लगे। जब बीरबल ने देखा कि तानसेन अपनी रागिनी से महाराणा को अपने पक्ष में कर रहा है तो उससे रहा न गया, तुरन्त बोला—‘‘महाराणाजी, अब मैं आपको एक सच्ची बात बताने जा रहा हूं, जब हम दोनों आपके पास आ रहे थे तो मैंने पुष्कर जी में जाकर प्रार्थना की थी कि मेरा पक्ष सही होगा तो सौ गाय दान करूंगा; और मियां तानसेन जी ने प्रार्थना कर यह मन्नत मांगी कि यदि वह सही होंगे तो सौ गायों की कुर्बानी देंगे। महाराणा जी अब सौ गायों की जिंदगी आपके हाथों में है।’’

बीरबल की यह बात सुनकर महाराणा चौंक गए। भला एक हिंदू शासक होकर गो हत्या के बारे में सोच कैसे सकते थे। उन्होंने तुरन्त बीरबल के पक्ष को सही बताया।

जब बादशाह अकबर को यह बात पता चली तो वह बहुत हंसे।

बादशाह की जीत | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #38

बादशाह की जीत | Akbar Birbal ke Kisse | अकबर-बीरबल के रोचक और मजेदार किस्से #38

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बादशाह अकबर जंग में जाने की तैयारी कर रहे थे। फौज पूरी तरह तैयार थी। बादशाह भी अपने घोड़े पर सवार होकर आ गए। साथ में बीरबल भी था। बादशाह ने फौज को जंग के मैदान में कूच करने का निर्देश दिया।

बादशाह आगे-आगे थे, पीछे-पीछे उनकी विशाल फौज चली आ रही थी। रास्ते में बादशाह को जिज्ञासा हुई और उन्होंने बीरबल से पूछा—‘‘क्या तुम बता सकते हो कि जंग में जीत किसकी होगी ?’’

‘‘हुजूर, इस सवाल का जवाब तो मैं जंग के बाद ही दूँगा।’’ बीरबल ने कहा।

कुछ देर बाद फौज जंग के मैदान में पहुंच गई। वहां पहुंचकर बीरबल ने कहा—‘‘हुजूर, अब मैं आपके सवाल का जवाब देता हूं और जवाब यह है कि जीत आपकी ही होगी।’’

‘‘यह तुम अभी कैसे कह सकते हो, जबकि दुश्मन की फौज भी बहुत विशाल है।’’ बादशाह ने शंका जाहिर की।

‘‘हुजूर, दुश्मन हाथी पर सवार हैं और हाथी तो सूंड से मिट्टी अपने ऊपर ही फेंकता है तथा अपनी ही मस्ती में रहता है, जबकि आप घोड़े पर सवार है और घोड़ों को तो गाजी मर्द कहा जाता है। घोड़ा आपको कभी धोखा नहीं देगा।’’ बीरबल ने कहा।

उस जंग में जीत बादशाह अकबर की ही हुई।