सोना बरसाने वाला संत हिंदी कहानी Saint aur Gold Rain Hindi Story

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एक बहुत सिद्ध संत थे. उन्हें आकाश से सोना बरसाने की विद्या आती थी. परन्तु वह विद्या एक खास नक्षत्र में ही अपना काम कर सकती थी. यह नक्षत्र समाप्त हो जाने पर विद्या बेअसर हो जाती थी. विद्या में एक खास बात यह थी कि उसका प्रयोग वे संत अपने लाभ के लिये नहीं कर सकते थे.

Hindi Story Saint aur Gold Rain

चूँकि संत भ्रमण बहुत करते हैं, इसलिए उनको कभी नगर तो कभी निर्जन स्थान से गुजरना पड़ता है. एक दिन वे अपनी यात्रा के दौरान उनके मार्ग में एक भयंकर जंगल पड़ा. जंगल में एक पेड़ के नीचे कुछ डाकू बैठे थे जिन्हें कई दिनों से कुछ मिला नहीं था. डाकुओं ने संत को घेर लिया, और बोले- ‘तुम्हारे पास जो कुछ हो उसे रख दो नहीं तो तलवार से काटकर दो टुकड़े कर देंगे,’ संत बोले – मैं तो स्वयं भिक्षा मांगने जा रहा हूँ मेरे पास कुछ नहीं है जो आप लोगों को दूं.’ डाकू बोले – ‘तो मरने के लिए तैयार हो जा.’

संत बहुत घबरा गए. तभी उसे अपनी स्वर्ण विद्या का ख्याल आया. यह भी ध्यान आया कि वह नक्षत्र अब लगने ही वाला है. वे डाकुओं से बोले –‘आप लोग आधे घंटे इंतजार कीजीये. मुझे स्वर्ण – विद्या आती है. पर वह विद्या एक खास नक्षत्र में ही काम कर सकती है. उस नक्षत्र के लगने में अभी आधे घंटे बाकी है. आप लोग मेरे साथ यहाँ से थोड़ी दूर पर बहने वाली नदी के किनारे चलें. वहीं मैदान में आकाश से सोने की बारिश होगी.’

डाकू संत की बात मान गये. उसे बांधकर नदी के किनारे लाये. संत ने कहा –‘ अब नक्षत्र लगने वाला है. मैं नदी में छाती भर पानी में खड़ा होकर मन्त्र जाप करूंगा. इससे आकाश से एक क्षण के लिए सोना बरसेगा. आप लोग उसे ले लीजिएगा.’ संत नदी के अंदर जाकर छाती भर पानी में मन्त्र जपने लगा. इतने में आकाश से सोने की बूंदें गिरने लगी. ठीक एक क्षण तक यह स्वर्ण-वर्षा हुई. डाकुओं ने अपनी- अपनी झोलियां भर लीं. वे खुशी से आगे बढ़े.

Hindi Story Saint aur Gold Rain

कुछ ही दूर जाने पर उन्हें डाकुओं का एक अन्य गिरोह मिल गया. उस गिरोह में बहुत सारे डाकू थे. गिरोह ने उन्हें घेर लिया और जो भी पास में हो, रख देने को कहा. पहले वाले गिरोह के डाकुओं ने कहा, – ‘हमें छोड़ दो. हमारे पीछे-पीछे जो संत आ रहा है, वह आकाश से स्वर्ण की वर्षा कर सकता है. इससे आप लोगों को इतना सारा सोना मिल जायेगा कि सारी जिन्दगी आपको मेहनत नहीं करनी पड़ेगी. पर डाकुओं के दूसरे गिरोह ने उन्हें बंदी बना लिया और उस संत के पास आये. उस संत ने साफ मना कर दिया. उसने कहा – ‘जिस नक्षत्र में वह विद्या काम कर सकती है, वह अब समाप्त हो गया है वह नक्षत्र अब साल भर के बाद लगेगा.’

दूसरा गिरोह इस पर बहुत नाराज हुआ. उसने संत को वहीं तलवार से मार डाला और कहा कि यह झूठ बोलता है. हमें सोना देना नहीं चाहता.’ इसके बाद उन्होंने डाकुओं के पहले वाले गिरोह को मारना शुरू किया. थोड़ी ही देर में पहले गिरोह के सभी डाकू मार डाले गये. दूसरे गिरोह ने सारा सोना अपने कब्जे में कर लिया.

अब डाकुओं के बीच लूट का बंटवारा शुरू हुआ. थोड़ी ही देर में उनके बीच बंटवारे के बारे में झगड़ा होने लगा और मार-काट मच गई, अंत में दो को छोडकर शेष डाकू कट मरे.

शेष बचे दोनों डाकू बहुत थक गये थे. वे भूखे भी थे. उन्होंने आपस में सलाह किया कि एक डाकू सोने की रखवाली करता रहे, दूसरा पास के गाँव से जाकर कुछ खाना लाये.

Hindi Story Saint aur Gold Rain

जो डाकू खाना लेने गया था उसने वहीं भर पेट खाना खा लिया और अपने साथी के लिये लाये जाने वाले खाने में जहर मिला दिया, ताकि जहरीला खाना खाकर वह मर जाये और वह सारा सोना ले ले.

उधर उसका साथी इस फिराक में था कि जब वह खाना लेकर आये तो वह उसके उपर अचानक से टूट पड़े और तलवार से मारकर उसे खत्म कर दें और सारा सोना ले ले.

जब डाकू खाना लेकर आया और वह निश्चिंततापूर्वक खाना रखा रहा था तो पहले से ही मन बनाये उसका साथी उसके ऊपर टूट पड़े और मार डाला.

अपने साथी को मारकर डाकू ने सोचा कि अब आराम से भोजन कर थोडा सुस्ता ले, तब सोना लेकर चले.

भोजन कर वह लेट गया और थोड़ी देर में सदा के लिए आँख मूँद ली. सारा सोना धरा का धरा रह गया.

लालच या लोभ करनेवाले का यही हश्र होता है.

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