सबसे बड़ी पूजा Biggest Prayer Hindi Short Story | Hindigk50k

सबसे बड़ी पूजा Biggest Prayer Hindi Short Story

सबसे बड़ी पूजा Biggest Prayer Hindi Short Story collection of 100+ hindi story kahaniyan short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

सबसे बड़ी पूजा Biggest Prayer Hindi Short Story 

प्रख्यात महिला संत आंडाल एक बार भगवत प्राथर्ना में लीन थीं. तभी कई लोग उनकी कुटिया पर आ पहुंचे. उन्होंने पहले उनकी जय-जयकार की. फिर मदद की गुहार करने लगे.  वे चिल्ला रहे थे,”रक्षा करो, रक्षा करो”.

Biggest Prayer Hindi Short Story

Biggest Prayer Hindi Short Story

आंडाल के शिष्यों ने उन्हें ऐसा करने से रोका और समझाया कि वे संत आंडाल की पूजा में विघ्न न डालें. शोर –शराबे से आंडाल का ध्यान भंग हो गया. वह बाहर आई. उन्होंने लोगों से इस तरह आने का कारण पूछा.

लोगों ने बताया कि गाँव के मुखिया की हालत बेहद खराब है. अब उसको सिर्फ आप ही  बचा सकती हैं.

संत आंडाल ने जब यह सुना तो वे तत्काल उनके साथ चल पडीं.  उनके शिष्यों के लिए यह आश्चर्य का विषय था.  वे समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर कर  आंडाल ने मुखिया के लिए अपनी पूजा अधूरी क्यों छोड़ दी?  शिष्य इस बात पर हैरान थे कि संत ने मुखिया के मामले को इतनी गंभीरता से क्यों लिया. ऐसे भी उस मुखिया की छवि बहुत अच्छी  नहीं थी.

एक पहर  बाद उन्होंने देखा कि आंडाल बीमार मुखिया को साथ लिए गाँव वालों के साथ चली आ रही हैं.  उन्होंने उसकी चारपाई एक वृक्ष की छाया में डाल दी.  उन्होंने  गांववालों को लौट जाने को कहा. फिर वे अपनी कुटिया में गई और कुछ औषधियां निकाल लाई.

उन्होंने अपने शिष्यों को निर्देश दिया कि वे मुखिया को समय – समय पर औषधियां देते रहें और सेवा करें.  शिष्यों ने उनकी आज्ञा का पालन तो किया पर उनका विस्मय बढ़ता ही जा रहा था.  आखिरकार एक शिष्य ने उनसे पूछ ही लिया, “माते ! आज आपने बीच में ही आराधना छोडकर इस मुखिया की सेवा की. इसमें क्या रहस्य है.”

आंडाल ने शांत भाव से उत्तर दिया, “पुत्र ! ईश्वर समस्त प्राणियों में है. उसका कोई एक रूप या आकार नहीं है. वे तो कण –कण में निवास करते हैं और प्रत्येक कर्म उनकी ही पूजा है. मनुष्य की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है. आज हम सबको इसका अवसर प्राप्त हुआ है, इसलिए हमें प्रसन्नता होनी चाहिए.”

संत आंडाल की सीख में एक बहुत बड़ा सन्देश छिपा हुआ है. मानव सेवा करना सबसे बड़ी पूजा है. हम व्यर्थ में इधर- उधर भटकते रहते हैं. गरीबों, जरुरतमंदों, बेबस और लाचार लोगों की सेवा करें. दूसरों की मदद करके देखें और उसके बाद उसकी अनुभूति को महसूस करें. वह अनुभूति अनमोल होती है. उसे आप जब भी याद करेंगे, आपको अपने बारे में सोचकर बहुत अच्छा लगेगा.

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

Comments

comments

Leave a Comment

error: