लोमड़ी और मोर हिंदी कहानी

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लोमड़ी और मोर हिंदी कहानी

लोमड़ी और मोर हिंदी कहानी एक बहुत ही मनोरंजक और प्रसिद्ध  कहानी है. यह कहानी पंचतंत्र से ली गयी है.  एक लोमड़ी जंगल में घूम रही थी. तभी उसने देखा कि एक पेड़ की ऊँची टहनी पर एक सुंदर-सा मोर बैठा है. लोमड़ी ने सोचा कि किस प्रकार इस मोर को अपना आहार बनाया जाए, वह जानती थी कि मोर को मारने के लिए वह पेड़ पर नहीं चढ़ सकती.

तब लोमड़ी ने अपनी चतुराई दिखाते हुए कहा, “तुम इस पेड़ पर क्यों बैठे हो? क्या तुम्हें पता नहीं कि आज हुई जानवरों की सभा में यह निर्णय हुआ है कि कोई भी जानवर या पक्षी किसी दूसरे को शिकार के लिए नहीं मारेगा. ‘बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है’ वाला नियम अब नहीं चलेगा.”

लोमड़ी और मोर हिंदी कहानी

लोमड़ी और मोर हिंदी कहानी पंचतंत्र की एक प्रसिद्द कहानी है.

मोर ने नहले पर दहला मारते हुए जबाब दिया, “इसका मतलब तो यह हुआ कि आज से शेर, चीते, भेड़िये आदि सभी हिंसक जीव घास-फूस खाने लगे हैं.”

लोमड़ी थोडा सकपकाई अवश्य, लेकिन वह भी आसानी से पीछा छोड़ने वाली नहीं थी. वह बोली, “हाँ, इसके बारे में तो पड़ताल करनी होगी, अभी, नीचे उतरो. हम दोनों जंगल के राजा के पास चलकर पूछते हैं.”

“वहाँ जाने की कोई जरूरत नहीं” – मोर बोला, “मुझे तुम्हारे कुछ साथी इसी ओर आते दिख रहे हैं.”

“मेरे साथी! कौन ?” लोमड़ी आश्चर्य मिश्रित स्वर में बोली.

“कुछ शिकारी कुत्ते हैं.” – मोर ने उत्तर दिया.

“अरे बाप रे, शिकारी कुत्ते!” लोमड़ी भयभीत स्वर में बोली और वहाँ से भागने लगी.

“तुम भाग क्यों रही हो? अभी तुमने ही तो कहा था कि जंगल के सभी प्राणी आपस में मित्रवत रहा करेंगे,” – मोर ने हँसते हुए कहा.
“लेकिन शिकारी कुत्ते शायद उस सभा में मौजूद नहीं थे उन्हें मालूम नहीं होगा.”

कहती हुई लोमड़ी वहाँ से भाग निकली.

इस मोर और कौआ  हिंदी कहानी से यही शिक्षा मिलती है कि संकट के समय, मुसीबत के समय अपना विवेक ना खोएं और बुद्धि से काम लें. आप पाएंगे कि बहुत बड़ा सा दीखने वाला problem बहुत ही आसानी से solve हो जाता है.

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. तथा अपने दोस्तों के साथ शेयर करें
धन्यवाद!

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