राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi  Hindi Essay in 100-200 words, Hindi Essay in 500 words, Hindi Essay in 400 words, list of hindi essay topics, hindi essays for class 4, hindi essays for class 10, hindi essays for class 9, hindi essays for class 7, hindi essay topics for college students, hindi essays for class 6, hindi essays for class 8

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध (National Flag In Hindi) :

भूमिका : प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट का अपना एक ध्वज होता है जो उस देश के स्वतंत्र देश होने का संकेत होता है। भारतीय राष्ट्रिय ध्वज को सभी लोग तिरंगा के नाम से जानते हैं जिसका मतलब होता है तीन रंग। यह केसरिया , सफेद और हरे रंग से बना होता है और इसके केंद्र में नीले रंग से बना हुआ अशोक चक्र होता है।

भारतीय राष्ट्रिय ध्वज की अभिकल्पना पिंगली वैकैयानंद ने की थी और इसे इसके वर्तमान स्वरूप में 22 जुलाई , 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था। यह ध्वज देश के एकजुट अस्तित्व का प्रतीक होता है। यह 15 अगस्त , 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के कुछ दिन पहले ही की गयी थी।

तिरंगे का विस्तार : तिरंगे में तीनों रंग समतालीय एक बराबर हिस्सों में बंटे होते हैं। सबसे उपर केसरिया रंग होता है जो साहस , निस्वार्थता व शक्ति का प्रतीक होता है। केसरिया रंग से नीचे सफेद रंग होता है जो सच्चाई , शांति और पवित्रता का प्रतीक होता है।

यह रंग देश में सुख-शांति की उपयोगिता को दर्शाता है। सफेद रंग से नीचे हरा रंग होता है जो विश्वास , शिष्टता , वृद्धि व हरी भूमि की उर्वरता का प्रतीक होता है। यह रंग समृद्धि व जीवन को दर्शाता है। तिरंगे की चौडाई व लम्बाई का अनुपात 2:3 होता है।

तिरंगे के बीच में सफेद रंग के उपर नीले रंग का अशोक चक्र बना होता है जिसमें 24 धारियां होती हैं। इसे धर्म चक्र और विधि चक्र भी कहा जाता है। नीले रंग का अशोक चक्र तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक द्वारा बनाया गया था इसे तिरंगे के बीच में लगाया गया था। यह चक्र जीवन के गतिशील होने को दर्शाता है। इसके न होने का अर्थ मृत्यु है।

भारतीय राष्ट्रिय ध्वज का इतिहास : राष्ट्रिय ध्वज स्वतंत्रता के लिए भारत की लम्बी लड़ाई व राष्ट्रिय खजाने का प्रतिनिधित्व करता है। तिरंगा स्वतंत्र भारत के गणतंत्र का प्रतीक होता है। देश के आजाद होने के कुछ दिन पहले 22 जुलाई , 1947 को स्वतंत्र भारत के संविधान को लेकर एक सभा आयोजित की गई थी जहाँ पर पहली बार सबके सामने राष्ट्रिय ध्वज तिरंगे को प्रस्तुत किया गया था।

इसके बाद 15 अगस्त , 1947 से लेकर 26 जनवरी , 1950 तक राष्ट्रिय ध्वज को भारत के अधिराज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया था। सन् 1950 में संविधान लागू होने पर इसे स्वतंत्र गणतंत्र का राष्ट्रिय ध्वज घोषित किया गया था। राष्ट्रिय ध्वज को पिंगली वेंक्क्या द्वारा बनाया गया था।

राष्ट्रिय ध्वज से जुडी बातें : ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड ने ध्वज निर्माण के लिए मानक सेट किया था। उन्होंने उसके निर्माण से जुडी हर छोटी बड़ी बात जैसे- उसका कपड़ा , धागा , रंग उसका अनुपात सब कुछ नियम के अनुसार सेट किया यहाँ तक कि उसके फहराने से जुडी हुई बातें भी नियम में लिखी गई हैं।

यह एक राष्ट्रिय प्रतीक है जिसका सम्मान हर भारतीय करता है। राष्ट्रिय ध्वज के सम्मान से जुडी कुछ बातें आम आदमी को हमेशा याद रखनी चाहिए। जब राष्ट्रिय ध्वज को उपर उठाया जाए तो ध्यान रखें कि केसरिया रंग सबसे उपर हो। कोई भी ध्वज अथवा प्रतिक राष्ट्रिय ध्वज के उपर नहीं होना चाहिए।

अगर और अन्य ध्वज फहराए जा रहे हों तो वे हमेशा इसके बायीं ओर पंक्ति में फहराए जाने चाहिए। अगर कोई जुलुस या परेड निकल रही हो तो राष्ट्रिय ध्वज दाहिने ओर होना चाहिए या फिर बाकि सभी ध्वजों की पंक्ति में बीच में होना चाहिए।

राष्ट्रिय ध्वज हमेशा मुख्य सरकारी ईमारत व् संस्थान जैसे राष्ट्रपति भवन , संसद भवन , सुप्रीम कोर्ट , हाई कोर्ट आदि में फेहरा हुआ होना चाहिए। राष्ट्रिय ध्वज किसी भी पर्सनल व्यवसाय या काम के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता। राष्ट्रिय ध्वज शाम को सूर्यास्त के समय उतार देना चाहिए।

तिरंगे का विकास : हमारा राष्ट्रिय ध्वज अपने आरंभ में बहुत से परिवर्तनों से गुजरा है। इसे हमारे स्वतंत्रता के राष्ट्रिय संग्राम के दौरान खोजा गया था। भारतीय राष्ट्रिय ध्वज का विकास आज के इस रूप में पहुंचने के लिए अनेक दौरों से गुजरा है। पहला रष्ट्रीय ध्वज 7 अगस्त , 1906 को पारसी बागान चौक कलकत्ता में फहराया गया था जिसे अब कोलकाता कहा जाता है इस ध्वज को लाल , पीले और रंग की पट्टियों से बनाया गया था।

दूसरे ध्वज को पेरिस में मैडम कामा और 1907 में उनके साथ निर्वासित किये गये क्रांतिकारियों द्वारा फहराया गया था। यह भी पहले ध्वज की तरह था लेकिन इसमें उपर की पट्टी में एक कमल था किन्तु सात तारे सप्तऋषि को दर्शाते हैं। इस ध्वज को बर्लिन के समाजवादी सम्मेलन में भी प्रदर्शित किया गया था। तीसरा ध्वज 1917 में आया जब हमारे राजनैतिक संघर्ष ने एक निश्चित मोड़ लिया था।

डॉ एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक जी ने घरेलू शासन आन्दोलन के दौरान इसे फहराया था। इस ध्वज में 5 लाल और 4 हरी पट्टियाँ एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर बने सात सितारे थे। बायीं और उपरी किनारे पर यूनियन जैक था। एक कोने में सफेद अर्धचन्द्र और सितारा भी था।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के स्तर के दौरान इसको 1921 में बेजवाडा में किया गया यहाँ आंध्रप्रदेश के एक युवक ने एक झंडा बनाया और गाँधी जी को दिया। यह ध्वज दो रंगों से बना हुआ था। लाल और हरा रंग जो दो प्रमुख समुदायों अथार्त हिन्दू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता है। गाँधी जी ने सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसमें एक सफेद पट्टी और राष्ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए।

राष्ट्रिय ध्वज फहराने के नियम : हमें राष्ट्रिय ध्वज को फहराने के नियमों का सख्ती के साथ पालन करना चाहिए। कभी भी खराब या क्षतिग्रस्त ध्वज को फहराना नहीं चाहिए। ध्वज को कभी भी किसी भी सजावट के काम में नहीं लिया जाना चाहिए। तिरंगे का साईज हमेशा 3:2 के अनुपात में होना चाहिए।

ध्वज पर किसी भी प्रकार से कुछ लिखना या बनाना मना होता है। राष्ट्रिय शोक दिवस के अवसर पर ध्वज को आधा झुका हुआ होना चाहिए। किसी भी दुसरे झंडे को राष्ट्रिय झंडे से उपर या बराबर नहीं लगाना चाहिए। कोई भी भारत का नागरिक ध्वज को फहरा सकता है।

ध्वज को सिर्फ सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाता है। जब विशेष अवसर होते हैं तो इन्हें रात को भी फहराया जाता है। ध्वज का पोल इमारत के सबसे ऊँचे हिस्से पर होना चाहिए। प्राईवेट इंस्टीटूशन्स सभी सामान्य दिन भी ध्वज को फहराया जा सकता है लेकिन पूरे सम्मान , कायदे व नियम के अनुसार।

ध्वज को कभी भी किसी गाड़ी , नाव या हवाई जहाज के पीछे नहीं लगाया जाना चाहिए। ध्वज का प्रयोग किसी भी सामान को या किसी इमारत को ढकने के लिए नहीं करना चाहिए। ध्वज हमेशा कॉटन , खादी या सिल्क का होना चाहिए। ध्वज को बनाने के लिए प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

उपसंहार : भारतीय राष्ट्रिय ध्वज भारत के नागरिकों की आशाएं और आकांक्षाएं दर्शाता है। यह हमारे राष्ट्रिय गर्व का प्रतीक होता है। पिछले 5 दशकों से अधिक समय से सशस्त्र सेना बलों के सदस्यों सहित अनेक नागरिकों ने तिरंगे की शान को बनाये रखने के लिए लगातार अपने जीवन न्यौछावर किये हैं। हमारी यह जिम्मेदारी होती है कि इसकी शान को जाने या अनजाने में किसी भी प्रकार की चोट न पहुंचाई जाए।

 

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

हमारा राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध | Essay on Our National Flag in Hindi!

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा । झंडा ऊंचा रहे हमारा ।।

प्रत्येक देश का अपना राष्ट्रीय ध्वज होता है जो उस देश के गौरव और सम्मान का प्रतीक होता है । हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है, जो देश की स्वतंत्रता के बाद से हमारे राष्ट्रीय भवनों पर फहरा रहा है ।

15 अगस्त 1947 को भारतवर्ष स्वतन्त्र हुआ था और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहरलाल नेहरू ने लालकिले पर प्रथम बार ध्वजारोहण किया था । हमारी पराधीनता का प्रतीक यूनियन जैक उस दिन उतार दिया गया था । तब से आज तक राष्ट्र की आन-बान और शान का प्रतीक तिरंगा फहरा रहा है ।

हमारा राष्ट्रीय ध्वज केसरीया, श्वेत और हरे रंगों से बना है । इस के मध्य में अशोक चक्र है । इस चक्र में चौबीस शलाकाएं हैं और इसका रंग गहरा नीला (Navy Blue) है । भारत सरकार ने सम्राट अशोक के इस चक्र को ग्रहण कर भारतीय प्राचीन गौरव की रक्षा की है ।

 

तिरंगे के तीन रंग अपने विशेष गुणों के प्रतीक हैं । केसरिया रंग उत्साह और वीरता का परिचायक है । इसी से प्रेरणा लेकर देश के अगणित वीरों ने देश की स्वतन्त्रता प्राप्ति हेतु अपने प्राणों की बाजी लगा दी थी । श्वेत रंग हमारी पवित्रता, उज्यल चारित्रिकता सत्य और सांस्कृतिक श्रेष्ठता का प्रतीक है ।
हरा रंग हमारे वैभव, श्री और सम्पत्रता का परिचायक है । लहलहाती हरी-भरी फसलों का रंग ही तो झलकता है, इस हरे रंग में । किसी दिन हमारा देश सोने की चिड़िया कहलाता था । यह हरा रंग उसी ओर संकेत करता है । आज हजारे देश ने कृषि उद्योग और व्यापार के क्षेत्र में जो बहुमुखी प्रगति की है हरा रंग उसी प्रगति का सूचक है ।

ध्वज के मध्य में बना अशोक चक्र हमारी धार्मिक स्वतन्त्रता का प्रतीक है । उसकी चौबीस शलाकाएं हमारे विभिन्न धर्मों और उनकी समन्वित सांस्कृतिक एकता तथा ‘सर्वधर्म समभाव’ का परिचायक है । हमारे देश में सभी धर्मों के अनुयायियों को पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त है ।

 

सभी धर्म अपनी पूजा-पद्धति अपनाने में स्वतंत्र हैं । सभी धर्म अलग-अलग दिखाई पड़ते हैं । पर अनेकता में एकता ही हमारे राष्ट्र की वह विशेषता है जो विश्व में अन्यत्र दुर्लभ है । स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर यह ध्वज समारोह पूर्वक फहराया जाता है । स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले पर प्रधानमंत्री द्वारा ध्वजारोहण किया जाता है ।

गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्वारा इंडिया गेट पर ध्वज फहराया जाता है । दोनों ही अवसरों पर इक्कीस तोपों की सलामी दी जाती हैं । सेना की टुकड़िया ध्वज का अभिवादन करती हैं । देश के राज्यों में मुख्यमंत्रियों अथवा राज्यपालों द्वारा ध्वजारोहण किया जाता हैं । विभिन्न देशों में राजदूत ध्वजारोहण करते हैं ।

देश के विभिन्न भागों में नगरों और गांवों में भी देश के नागरिक सांसदों, विधान सभा सदस्यों, पार्षदों, और मुख्य अधिकारियों की अध्यक्षता में ध्वजारोहण करते हैं । दोनों ही अवसरों पर राष्ट्रीय-एकता और स्वतंत्रता से संबंधित सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं ।

स्वतंत्रता के प्रतीक तिरंगे के अनन्तकाल तक फहराते रहते की कामना की जाती है । राष्ट्र ध्वज के नीचे दिवंगत स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी जाती है । हमें इस ध्वज की आन-बान और शान बनाए रखने के लिए प्राणों की परवाह भी नहीं करनी चाहिए ।

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

भारत का राष्ट्रीय ध्वज़ देश के लिये सम्मान और स्वतंत्रता का प्रतीक है। इसका हमारे लिये बहुत महत्व है। हमें इसका सम्मान करना चाहिये साथ ही इसके बारे हमें जानकारी होनी चाहिये। यहाँ पर हम स्कूली विद्यार्थी और अन्य सभी के लिये सरल और विभिन्न शब्द सीमाओं के साथ राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध उपलब्ध करा रहें हैं। दिये गये इन निबंधों का प्रयोग आप अपनी जरुरत के अनुसार किसी भी स्कूली परीक्षा या अन्य प्रतियोगिता में आसानी कर सकते हैं।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध (नेशनल फ्लैग एस्से)

Find here some essays on National Flag of India in Hindi language for students in different words limit (100, 150, 200, 250, 300, and 400 words).

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 1 (100 शब्द)

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

भारत हमारा देश है और इसका राष्ट्रीय ध्वज़ हमारे लिये बहुत मायने रखता है। यहाँ पर रह रहे विभिन्न धर्मों के लोगों के लिये हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ एकता के प्रतीक के रुप में है। हमें अपने देश के राष्ट्रीय ध्वज़ का सम्मान करना चाहिये। ये बहुत जरुरी है कि सभी आजाद देशों के पास उनका अपना राष्ट्रीय ध्वज़ हो। हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ तीन रंगों का है इसलिये इसे तिरंगा भी कहते हैं। तिरंगे के सबसे ऊपर की पट्टी में केसरिया रंग, बीच की पट्टी में सफेद रंग और सबसे नीचे की पट्टी में हरा रंग होता है। तिरंगे के बीच की सफेद पट्टी में एक नीले रंग का अशोक चक्र होता है जिसमें एक समान दूरी पर 24 तीलियाँ होती है।

राष्ट्रीय ध्वज़

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 2 (150 शब्द)

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

राष्ट्रीय ध्वज़ एक स्वतंत्र राष्ट्र के एक नागरिक होने की हमारी अलग पहचान है। हर स्वतंत्र राष्ट्र का अपना अलग राष्ट्रीय ध्वज़ होता है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ एकता और आजादी का प्रतीक है। सरकारी अधिकारियों के द्वारा सभी राष्ट्रीय अवसरों पर राष्ट्रीय ध्वज़ को फहराया जाता है हालाँकि भारतीय नागरिकों को भी कुछ अवसरों पर राष्ट्रीय ध्वज़ को फहराने की अनुमति है। गणतंत्रता दिवस, स्वतंत्रता दिवस और कुछ दूसरे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में सरकारी कार्यालयों, स्कूल और दूसरे शिक्षण संस्थानों में इसे फहराया जाता है।

22 जुलाई 1947 को पहली बार भारतीय राष्ट्रीय ध्वज़ को अंगीकृत किया गया था। हमारे राष्ट्रीय ध्वज़ को बहुत ही सुंदर तरीके से तीन रंगों में डिज़ाइन किया गया है, जिसे तिरंगा भी कहते हैं। ये खादी के कपड़े से हाथ से बना हुआ होता है। ख़ादी के अलावा तिरंगे को बनाने के लिये किसी दूसरे कपड़े का इस्तेमाल करने की सख्ती से मनाही है। तिरंगे के सबसे ऊपर केसरिया रंग होता है, दूसरी पट्टी में सफेद रंग होता है इसमें एक नीले रंग का चक्र भी होता है जिसमें एक सामन दूरी पर 24 तीलियाँ होती हैं तथा अंतिम पट्टी में हरा रंग होता है। केसरिया रंग समर्पण और नि:स्वार्थ भाव का प्रतीक है, सफेद रंग शांति, सच्चाई और शुद्धता को प्रदर्शित करता है जबकि हरा रंग युवा और ऊर्जा को दिखाता है।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 3 (200 शब्द)

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

22 जुलाई 1947 को भारत ने अपना राष्ट्रीय ध्वज़ अंगीकृत किया और इसके कुछ ही दिन बाद 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से भारत स्वतंत्र घोषित हुआ। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज़ में तीन रंग है इसलिये इसे तिरंगा भी कहते हैं। तिरंगे के सबसे ऊपर केसरिया रंग समर्पण और निस्वार्थ भाव को दिखाता है, सफेद रंग शांति, सच्चाई और शुद्धता को इंगित करता है और सबसे नीचे का हरा रंग युवा और ऊर्जा को प्रदर्शित करता है। बीच के सफेद पट्टी में एक नीले रंग का अशोक चक्र बना हुआ है जिसमें एक बराबर 24 तीलियाँ होती हैं। हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ स्वतंत्रता, गर्व, एकता और सम्मान का प्रतीक है तथा अशोक चक्र ईमानदारी और न्याय की वास्तविक जीत को दिखाता है।

हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ हमें एकता, शांति और इंसानियत की सीख देता है। सच्चाई और एकता में ये हमें भरोसा करने में मदद करता है। यह हर वर्ष 15 अगस्त को भारत के प्रधानमंत्री द्वारा और 26 जनवरी को देश के राष्ट्रपति द्वारा इसे फहराया जाता है। हालाँकि, भारत के लोगों को संबंधित करने के द्वारा ये दोनों के द्वारा लाल किले पर फहराया जाता है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ ख़ादी के कपड़े से बना होता है, ये एक हाथ से बना हुआ कपड़ा है जिसकी पहल महात्मा गाँधी द्वारा की गयी थी। ख़ादी के अलावा किसी दूसरे कपड़े से बने तिरंगे को भारत में फहराने की बिल्कुल इज़ाजत नहीं है।


 

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 4 (250 शब्द)

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

हजारों लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के अथक प्रयास से लंबे संघर्ष के बाद भारत को आजादी मिली। 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजी शासन से भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुयी। आजादी मिलने के कुछ दिनों पहले 22 जुलाई 1947 (संविधान सभा के सम्मेलन में) को भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ को एकता और विजय के प्रतीक रुप में अंगीकृत किया गया। हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ तीन रंगों का है इसलिये इसे तिरंगा झंडा भी कहते हैं। हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ हमारे लिये हिम्मत और प्रेरणा के रुप में है। ये हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में हमें याद दिलाता है। ये हमें बताता है कि उनके लिये देश को आजाद कराना कितना कठिन कार्य था। आजादी पाना आसान नहीं था। हमें हमेशा अपने राष्ट्रीय ध्वज़ का सम्मान करना चाहिये और अपनी मातृभूमि के लिये कभी भी इसे झुकने नहीं देना चाहिये।

हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ केसरिया, सफेद और हरे रंग की तीन पट्टीयों के साथ क्षितिज के समांतर दिशा में डिज़ाइन किया गया है। बीच की सफेद पट्टी में एक नीले रंग का अशोक चक्र बना हुआ है जिसमें 24 तीलियाँ हैं। सभी तीन रंग, अशोक चक्र और 24 तीलियों के अपने मायने हैं। सबसे ऊपर का केसरिया रंग लगन और त्याग का प्रतीक है, सफेद पट्टी शांति और सौहार्द को इंगित करती है तथा सबसे नीचे की हरी पट्टी युवा और ऊर्जा को प्रदर्शित करती है। जबकि, अशोक चक्र (अर्थात् अशोक का पहिया) शांति और हिम्मत का प्रतीक है।

हमारा राष्ट्रीय ध्वज़ ख़ादी के कपड़े से बना हुआ है जो कि हाथ से बुना हुआ कपड़ा होता है इसकी शुरुआत महात्मा गाँधी के द्वारा हुयी थी। निर्माण की सभी प्रक्रिया और डिज़ाइन के विशेष विवरण को भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा देखा जाता है। हमारे देश में ख़ादी के अलावा किसी भी दूसरे कपड़े से तिरंगा बनाने की एकदम मनाही है।

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 5 (300 शब्द)

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

अपने तीन रंगों के कारण हमारे राष्ट्री ध्वज़ को तिरंगा झंडा भी कहते हैं। इसमें क्षितिज के समांतर दिशा में तीन रंग की पट्टियाँ होते है, सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और सबसे नीचे की पट्टी में हरा रंग होता है। बीच की सफेद पट्टी में एक अशोक चक्र (धर्म चक्र भी कहा जाता है) होता है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज़ को पहली बार संविधान सभा द्वारा 22 जुलाई 1947 को अंगीकृत किया गया था। राष्ट्रीय ध्वज़ की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 का है।

अनुचित प्रयोग की रोकथाम धारा 1950 और अपमान की रोकथाम के लिये राष्ट्रीय सम्मान की धारा 1971 के तहत ही इसके इस्तेमाल और प्रदर्शन को निर्धारित किया जाता है। भारतीय ध्वज़ के सम्मान और आदर के लिये सभी कानून, प्रथा और निर्देशों के नियमन करने के लिये वर्ष 2002 में भारत के ध्वज़ कोड की स्थापना की गयी थी। भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के लिये वर्ष 1921 में महात्मा गाँधी के द्वारा पहली बार भारतीय राष्ट्रीय ध्वज़ को प्रस्तावित किया गया था। पिंगली वैंकया के द्वारा पहली बार तिरंगे झंडे को डिज़ाइन किया गया था। ऐसा माना जाता है कि हिन्दू और मुस्लिम जैसे दोनों धर्मों के लिये सम्मान के लिये केसरिया और हरे रंग की पट्टी की घोषणा की गयी थी। बाद में सफेद पट्टी को बीच में दूसरे धर्मों के लिये आदर के प्रतीक के रुप में घूमते हुए पहियों के साथ जोड़ा गया था।

भारत की आजादी के पहले ब्रिटिश शासन से आजादी प्राप्ति के लिये भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के पहले से कई सारे भारतीय झंडे को डिज़ाइन किया गया था। अंतत: राष्ट्रीय ध्वज़ के मौजूदा डिज़ाइन को आधिकारिक रुप से अंगीकृत किया गया। पूर्व में इसे आम लोगों द्वारा प्रदर्शित करना मना था और किसी राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान इसे केवल सरकारी अधिकारियों द्वारा ही प्रदर्शित किया जा सकता था हालाँकि बाद में अपने परिसर के अंदर राष्ट्रीय ध्वज़ को आम लोगों द्वारा फहराने की अनुमति मिल गयी। हमारी मातृभूमि के लिये ये एकता और सम्मान का प्रतीक है। इसलिये हम सभी को हमेशा अपने राष्ट्रीय ध्वज़ का सम्मान करना चाहिये और इसे कभी भी झुकने नहीं देना चाहिये।


 

भारत के राष्ट्रीय ध्वज़ पर निबंध 6 (400 शब्द)

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज़ को तिरंगा झंडा भी कहा जाता है। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा के सम्मेलन के दौरान इसे पहली बार आधिकारिक रुप से अंगीकृत किया गया। अंग्रेजी हुकुमत से भारत की स्वतंत्रता के 24 दिन पहले ही इसे अंगीकृत किया गया। इसे पिंगाली वैंकया द्वारा डिज़ाइन किया गया था। एक बराबर अनुपात में, ऊर्द्धवाकार में केसरिया, सफेद और हरे रंग की पट्टी के साथ डिज़ाइन किया गया था। इसमें सबसे ऊपर की पट्टी में केसरिया, बीच में सफेद और सबसे नीचे की पट्टी में गाढ़ा हरा रंग है। हमारे तिरंगे झंडे की लंबाई और चौड़ाई 3:2 के अनुपात में है। तिरंगे के मध्य सफेद पट्टी में 24 तीलियों के साथ एक अशोक चक्र है। सारनाथ के अशोक स्तंभ से अशोक चक्र को लिया गया है (अशोक की लॉयन कैपिटल राजधानी)।

हम सभी के लिये हमारे राष्ट्रीय ध्वज़ का बहुत महत्व है। सभी रंगों की पट्टियाँ, पहिया और तिरंगे में इस्तेमाल होने वाले कपड़े का खास महत्व है। भारतीय ध्वज़ कोड इसके इस्तेमाल और फहराने के नियम को निर्धारित करता है। भारत की आजादी के 52 वर्ष के बाद भी इसे आम लोगों के द्वारा प्रदर्शन या फहराने की इज़ाज़त नहीं थी हालाँकि बाद में नियम को बदला गया (ध्वज़ कोड 26 जनवरी 2002 के अनुसार) और इसको घर, कार्यालय और फैक्टरी में कुछ खास अवसरों पर इस्तेमाल करने की छूट दी गयी। राष्ट्रीय ध्वज़ को राष्ट्रीय अवसरों पर फहराया जाता है जैसे गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस आदि। भारतीय ध्वज़ को सम्मान और आदर करन के लिये तथा विद्यार्थियों को प्रेरणा देने के लिये इसे स्कूल और शिक्षण संस्थानों (कॉलेज, विश्वविद्यालय, खेल कैंप, स्कॉऊट कैंप आदि) में भी फहराया जाता है।

स्कूल और कॉलेज में झंडा रोहण के दौरान विद्यार्थी प्रतिज्ञा लेते हैं और राष्ट्र-गान गाते हैं। सरकारी और निजी संगठन भी किसी भी अवसर या कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज़ को फहरा सकते हैं। किसी भी सांप्रदायिक और निजी फायदे के लिये ऱाष्ट्रीय ध्वज़ को फहराने की सख्त मनाही है। किसी को भी ख़ादी के अलावा किसी दूसरे कपड़े से बने तिरंगे को फहराने की अनुमति नहीं है ऐसा करने पर जेल और अर्थदंड की व्यवस्था है। राष्ट्रीय ध्वज़ को किसी भी मौसम में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच में फहराया जा सकता है। इसे जमीन से स्पर्श कराने या पानी में डुबाने, तथा जानबूझकर अपमान करने की सख्त मनाही है। कार, बोट, ट्रेन या हवाई जहाज जैसे किसी भी सवारी के बगल, पिछले हिस्से, सबसे ऊपर या नीचे को ढकने के लिये इसका प्रयोग नहीं होना चाहिये।


भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के महत्व पर निबंध 7 (600 शब्द)

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

प्रस्तावना : प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट्र का अपना एक ध्वज होता है। यह एक स्वतंत्र देश होने का संकेत है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की अभिकल्पना पिंगली वैंकैयानन्द ने की थी और इसे इसके वर्तमान स्वरूप में 22 जुलाई 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था।


यह 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के कुछ ही दिन पूर्व की गई थी। इसे 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 के बीच भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया और इसके पश्चात भारतीय गणतंत्र ने इसे अपनाया। भारत में ‘तिरंगे’ का अर्थ भारतीय राष्ट्रीय ध्वज है।
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में तीन रंग की क्षैतिज पट्टियां हैं, सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद ओर नीचे गहरे हरे रंग की पट्टी और ये तीनों समानुपात में हैं। ध्वज की चौड़ाई का अनुपात इसकी लंबाई के साथ 2 और 3 का है। सफेद पट्टी के मध्य में गहरे नीले रंग का एक चक्र है। यह चक्र अशोक की राजधानी के सारनाथ के शेर के स्तंभ पर बना हुआ है। इसका व्यास लगभग सफेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर होता है और इसमें 24 तीलियां है।
तिरंगे का विकास : यह जानना अत्यंत रोचक है कि हमारा राष्ट्रीय ध्वज अपने आरंभ से किन-किन परिवर्तनों से गुजरा। इसे हमारे स्वतंत्रता के राष्ट्रीय संग्राम के दौरान खोजा गया या मान्यता दी गई। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का विकास आज के इस रूप में पहुंचने के लिए अनेक दौरों से गुजरा। हमारे राष्ट्रीय ध्वज के विकास में कुछ ऐतिहासिक पड़ाव इस प्रकार हैं :
प्रथम राष्ट्रीय ध्वज 7 अगस्त 1906 को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कलकत्ता में फहराया गया था जिसे अब कोलकाता कहते हैं। इस ध्वज को लाल, पीले और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों से बनाया गया था।
द्वितीय ध्वज को पेरिस में मैडम कामा और 1907 में उनके साथ निर्वासित किए गए कुछ क्रांतिकारियों द्वारा फहराया गया था (कुछ के अनुसार 1905 में)। यह भी पहले ध्वज के समान था सिवाय इसके कि इसमें सबसे ऊपरी की पट्टी पर केवल एक कमल था किंतु सात तारे सप्तऋषि को दर्शाते हैं। यह ध्वज बर्लिन में हुए समाजवादी सम्मेलन में भी प्रदर्शित किया गया था।
तृतीय ध्वज 1917 में आया जब हमारे राजनैतिक संघर्ष ने एक निश्चित मोड़ लिया। डॉ. एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान इसे फहराया। इस ध्वज में 5 लाल और 4 हरी क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर बने सात सितारे थे। बांयी और ऊपरी किनारे पर (खंभे की ओर) यूनियन जैक था। एक कोने में सफेद अर्धचंद्र और सितारा भी था।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र के दौरान जो 1921 में बेजवाड़ा (अब विजयवाड़ा) में किया गया यहां आंध्र प्रदेश के एक युवक ने एक झंडा बनाया और गांधी जी को दिया। यह दो रंगों का बना था। लाल और हरा रंग जो दो प्रमुख समुदायों अर्थात हिन्दू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता है।
गांधी जी ने सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्वि करने के लिए इसमें एक सफेद पट्टी और राष्ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए।
वर्ष 1931 ध्वज के इतिहास में एक यादगार वर्ष है। तिरंगे ध्वज को हमारे राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया। यह ध्वज जो वर्तमान स्वरूप का पूर्वज है, केसरिया, सफेद और मध्य में गांधी जी के चलते हुए चरखे के साथ था।
22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने इसे मुक्त भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया। स्वतंत्रता मिलने के बाद इसके रंग और उनका महत्व बना रहा। केवल ध्वज में चलते हुए चरखे के स्थान पर सम्राट अशोक के धर्म चक्र को दिखाया गया। इस प्रकार कांग्रेस पार्टी का तिरंगा ध्वज अंतत: स्वतंत्र भारत का तिरंगा ध्वज बना।
ध्वज के रंग : भारत के राष्ट्रीय ध्वज की ऊपरी पट्टी में केसरिया रंग है जो देश की शक्ति और साहस को दर्शाता है। बीच में स्थित सफेद पट्टी धर्म चक्र के साथ शांति और सत्य का प्रतीक है। निचली हरी पट्टी उर्वरता, वृद्धि और भूमि की पवित्रता को दर्शाती है।


चक्र : इस धर्म चक्र को विधि का चक्र कहते हैं जो तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनाए गए सारनाथ मंदिर से लिया गया है। इस चक्र को प्रदर्शित करने का आशय यह है कि जीवन गति‍शील है और रुकने का अर्थ मृत्यु है।


उपसंहार : भारतीय राष्ट्रीय ध्वज भारत के नागरिकों की आशाएं और आकांक्षाएं दर्शाता है। यह हमारे राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है। पिछले पांच दशकों से अधिक समय से सशस्त्र सेना बलों के सदस्यों सहित अनेक नागरिकों ने तिरंगे की शान को बनाए रखने के लिए निरंतर अपने जीवन न्यौछावर किए हैं।

प्रस्तावना

भारत का राष्ट्रीय  झंडा जो की तिरँगा के नाम से जाना जाता है और यह हमारे राष्ट्र के गौरव का प्रतिक है। यह भारतीय गणराज्य का एक महत्वपूर्ण और अभिन्न अंग है। तिरंगा हमारे देश के एकता और अखंङता को दर्शाता को है इसी कारणवश देश के सभी नागरीक इसका सम्मान करते हैं।

तिरँगा देश के सभी सरकारी भवनों पे फहराया जाता है। गणतंत्र दिवस, स्वतन्त्रा दिवस और गांधी जंयती जैसे अवसरो पऱ तिरंगा फहराना एक सामान्य प्रथा है।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का महत्व

हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा हमारे देश के सांस्कृतिक विरासत, सभ्यता और इतिहास को दर्शाता है। हवा में लहराता हुआ तिरंगा हमारी आज़ादी का प्रतिक है। यह हम भारतीय नागरिको को उन स्वतंत्र सेनानियों की याद दिलाता है, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत से लड़ते हुए देश के लिए बलिदान दिया।

इसके साथ ही यह हमे विनम्र रहने की भी प्रेरणा देता है तथा हमारे स्वतन्त्रा और आजादी के महत्व को दर्शाता है, जो हमे इतने अथक प्रयासों के बाद मिली है।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को तिरंगा कहते हैं क्योंकि इसमें तीन रंग केसरिया, सफेद और हरा समाहित हैं। इसमें से सबसे उपर केसरिया रंग तटस्थता को दर्शता है, जिसका अर्थ है कि हमारे देश के नेताओ को सभी  भौतिकवादी चीजो से तटस्थ रहना चाहिये और राष्ट्र की सेवा उनकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिये। इसके बाद मध्य में आता है सफेद रंग जोकि सत्य और पवित्रता को दर्शता है, जिसका अर्थ है कि हमे सदैव सत्य के मार्ग पर चलना चाहिये।

तिरंगे के सबसे निचले हिस्से मे हरा रंग होता है जोकि हमारे देश की मिट्टी और प्राकृतिक धरोहर को दर्शाता है। इसके साथ ही तिरंगे के मध्य मे अशोक चक्र का चिन्ह अंकित है जोकि धर्म के नियम को प्रदर्शित करता है, यह दर्शाता है कि धर्म और सदाचार राष्ट्र सेवा के मुख्य गुण है। इसके साथ ही यह हमें जीवन मे चुनौतियो और कठिनाइयों के को पार करके निरन्तर आगे बढने की प्रेरणा देता है।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास बहुत ही रोचक है, सन् 1921 में भारतीय स्वाधीनता संर्घष के दौरान सर्वप्रथम महात्मा गाँधी के मन में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के लिये एक झंण्डे का विचार आया। इस झंण्डे के मध्य में चरखे का घूमता हुआ पहिया बना हुआ था। जोकि गाँधी जी के देशवासियों को चरखे द्वारा खादी कातकर उससे कपडे बनाकर स्वालम्बित बनने के लक्ष्य को दर्शाता था, समय के साथ इसमे कई परिवर्तन आये और भारत के आजादी के समय इसमे और कई बदलाव किये गये। जिसमें चरखे के पहियें को अशोक चक्र से परिवर्तित कर दिया गया, जोकि धर्म चक्र को प्रदर्शित करता करता है।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के नियमानुपालन से जुडी महत्वपूर्ण बातें

भारतीय गणराज्य के प्रत्येक व्यक्ति से भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के आदर और सम्मान करने की अपेक्षा रखी जाती है। इसी कारणवश राष्ट्रीय ध्वज के अनादर को रोकने को लिये कुछ नियम-कानून बनायें गये  है। इन्ही में से कुछ नियम क्रमशः नीचे दिये गये हैं।

  • लहराये जाने वाला तिरंगा सिर्फ खादी या हाँथ से बुने हुये कपडे से बनाया जा सकता है, अन्य किसी प्रकार के वस्तु से बनाया हुआ तिरंगा कानून के तहत दंडनीय है।
  • समारोह के दौरान तिरंगा ध्वजवाहक द्वारा सिर्फ दाहिनें कन्धे पे धारण किया जा सकता है और ध्वजयात्रा सदैव समारोह के सामने से निकाली जानी चाहियें।
  • तिरंगा हमेशा उंचा लहराया जाना चाहिये, यह कीसी वस्तु के सामने झुका नही होना चाहीये।
  • अन्य कोई झण्डा तिरंगे से उपर या इसके बराबर नही लहराया जा सकता।
  • जब भी तिरंगा फहराया जा रहा हो, तो वहा मौजूद लोगो को सावधान मुद्रा मे खड़े होकर तिरंगे का सम्मान करना आवश्यक है।
  • मस्तूल की आँधी ऊँचाई पर फहराया हुआ तिरंगा शोक को प्रदर्शित करता है, यदि अपने सेवाकाल के दौरान राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री की मृत्यु हो जाती है तो देश भर में तिरंगा आँधे मस्तूल तक ही फहराया जाता है।

निष्कर्ष

हमारा राष्ट्रीय ध्वज हमारे गौरव का प्रतीक है, हमे हर कीमत पर इसके गरिमा की रक्षा करनी चाहिये। तिरंगा सदैव ऊँचा फहराया होना चाहिये क्योंकि ये हमारी उस आजादी का प्रतीक है, जो हमे इतने वर्षो के संर्घषो और बलिदानों के बाद मिली है।

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध in sanskrit,

हमारा राष्ट्रीय ध्वज par anuched,

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध इन हिंदी,

तिरंगा पर निबंध,

हमारा तिरंगा झंडा पर निबंध,

तिरंगा झंडा पर निबंध hindi,

तिरंगा झंडा पर निबंध class 3,

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा,

meaning of three colours of indian national flag in hindi,

about national flag in hindi wikipedia,

indian flag in hindi pdf,

about flag in hindi in points,

about flag in hindi 5 points,

indian flag colors meaning in hindi,

few lines on tiranga in hindi,

write few lines on tiranga in hindi,

राष्ट्रीय ध्वज पर निबंध-National Flag In Hindi

Comments

comments

Leave a Comment

error: