राजस्थान की प्रमुख लोक देवियाँ Lok Deviyaan- Rajasthan GK | Hindigk50k

राजस्थान की प्रमुख लोक देवियाँ Lok Deviyaan- Rajasthan GK

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 Rajasthan Districts wise General Knowledge

1. अजमेर  6. भरतपुर  11. चित्तौड़गढ़  16. हनुमानगढ़  21. झुंझुनूं  26. पाली  31. सिरोही 
2. अलवर  7. भीलवाड़ा 12. दौसा  17. जयपुर  22. जोधपुर  27. प्रतापगढ़  32. टोंक
3. बांसवाड़ा  8. बीकानेर  13. धौलपुर  18. जैसलमेर  23. करौली  28. राजसमंद  33. उदयपुर 
4. बारां  9. बूंदी  14. डूंगरपुर  19. जालोर  24. कोटा  29. सवाई माधोपुर 
5. बाड़मेर  10. चुरू  15. गंगानगर  20. झालावाड़  25. नागौर  30. सीकर 

राजस्थान की प्रमुख लोक देवियाँ Lok Deviyaan- Rajasthan GK

राजस्थान की प्रमुख लोक देवियाँ
Rajasthan Ki Lok Deviyaan

करणी माता  – देशनोक बीकानेर चूहों वाली देवी के नाम से प्रसिद्ध
जीण माता – सीकर चौहान वंश की आराध्य देवी
शीलादेवी – आमेर  कछवाहा वंश की आराध्य देवी
जमुवाय माता – जमुवारामगढ़  ढुन्ढाड़ के कछवाहा राजवंश की कुलदेवी
आयड माता , स्वागियाजी –  जैसलमेर भाटी राजवंश की कुलदेवी
नागणेची – जोधपुर राठोड़ों की कुलदेवी
बाण माता – उदयपुर सिसोदिया राजवंश की कुलदेवी
सच्चिया माता – ओसियां जोधपुर ओसवालों की कुलदेवी
आशापुरी या महोदरी माता – मोदरा जालोर जालौर के सोनगरा चौहानों की कुलदेवी
शाकम्भरी देवी – सांभर चौहानों की कुल देवी
ज्वाला माता – जोबनेर खंगारोतों की कुलदेवी

चामुंडा माता – जोधपुर  प्ररती हार राजवंश की कुल देवी

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करणीमाता मंदिर – देशनोक बीकानेर – बीकानेर राठौड़ शासकों की कुलदेवी, चारणीदेवी व चूहों की देवी के रूप में प्रसिद्ध, सफेद चूहे काला कहलाते हैं। जन्म का नाम रितू बाई विवाह – देवा के साथ, जन्म का स्थान सुआप (बीकानेर) बीकानेर राज्य की स्थापना इनके संकेत पर राव बीका द्वारा की गई। वर्तमान मंदिर का निर्माण महाराजा सूरज सिंह द्वारा।

जीणमाता मंदिर – जन्म – रैवासी (सीकर)
शेखावाटी क्षेत्र की प्रमुख देवी, चौहान राजपूतों की कुल देवी, ढाई प्याला मदीरा पान की प्रथा, चैत्र व अश्विन माह में मेला, भाई – हर्ष, मंदिर का निर्माण पृथ्वीराज चैहान प्रथम के काल में।

. कैला देवी:
त्रिकूट पर्वत पर, काली सिंध नदी के तट पर मंदिर, यदुवंशी राजवंश (करौली) की कुल देवी, मंदिर निर्माण गोपाल सिंह द्वारा। नरकासुर राक्षस का वध, चैत्र मास में शुक्ल अष्टमी को लख्खी मेला, लागुरई गीत प्रसिद्ध।

शिला देवी:
मन्दिर आमेर में, अष्टभूजी महिषासुर मदरनी की मूर्ति, पूर्वी बंगाल विजय के उपरान्त आमेर शासक मानसिंह प्रथम द्वारा जससौर से लाकर स्थापित की गई। वर्तमान मंदिर का निर्माण मिर्जा राजा जयसिंह द्वारा कछवाहा वंश की कुल देवी, इच्छानुसार मदिरा व जल का चरणामृत चढ़ाया जाता है।

. लट्टीयाल माता: फलौदी (जोधपुर में)

. त्रिकूट सुन्दरी मंदिर: तिलवाड़ा (बांसवाड़ा) में मन्दिर, उपनाम तरताई माता, निर्माण – सम्राट कनिष्क के काल में पांचालों की कुल देवी,हाथो में अठारह प्रकार के अस्त्र-शस्त्र।

दधीमती माता: मंदिर गोठ मांगलोद (नागौर) में, पुराणों के अनुसार इन्होंने विकटासुर राक्षस का वध किया था। उदयपुर महाराणा को
इन्हीं के आर्शीवादों से पुत्र प्राप्ति हुई थी। यह दाधीच ब्राह्मणों की कुल देवी है।

चारण देवी (आवण माता): मंदिर तेमडेराय (जैसलमेर) में जैसलमेर के मामड़राज जी के यहाँ हिंगलाज माता की वंशावतार 7 कन्या हुई थी जिन्होंने संयुक्त रूप से चारण देवियाँ कहा जाता है। इनकी संयुक्त प्रतिमा डाला तथा स्तुति चर्जा कहलाती है। चर्जा दो प्रकार की होती है।
सिंगाऊ – शांति के समय की जाने वाली स्तुति।
घडाऊ – विपति के समय की जाने वाली स्तुति।

सुगाली माता: आऊवा (पाली) में मंदिर। कुशाल सिंह चंपावत की कुल देवी, इनके 10 सिर से 54 भुजायें है। 1857 की क्रांति में इसकी मूर्ति को अंग्रेजो द्वारा अजमेर लाया गया था।
. नागणेचिया माता: नागेणा (बाड़मेर) में, निर्माण रावदुहण द्वारा 13वीं शताब्दी में, राठौड़ वंश की कुल देवी, राठौड़ वृक्ष मीन के वृक्ष को न काटता है, न ही उपयोग करता है।

ढाढ माता: कोटा में पोलियो की देवी।

तणोटिया माता: तनोट (जैसलमेर) सेना की रक्षा करे, पर सैनिकों की आराध्य देवी मानी जाती है।

आमजा माता: मंदिर रीछड़ा (उदयपुर) में, भीलों की देवी, प्रतिवर्ष ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी को मेला।

. बाण माता: कुम्भलगढ़ किले के पास, केलवाड़ा में मंदिर, मेवाड़ शासकों की कुल देवी।

महामाया: शिशु रक्षक देवी, मंदिर मावली उदयपुर में गर्भवती स्त्रियों द्वारा पूजा।

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. कालिका माता: मंदिर पद्मिनी महल, चित्तौड़गढ़ दुर्ग, निर्माण मानमौ द्वारा 8वीं शताब्दी में, गोहिल वंश (गहलोतों) की कुल देवी।

. कुशला माता: मंदिर बदनौर (भीलवाड़ा) में, निर्माण – महाराणा कुम्भा द्वारा, इसी के पास बैराठ माता का मंदिर है। ये दोनों बहनें मानी जाती है तथा चामुण्ड माता का अवतार है।

ज्वाला माता: मंदिर जोबनेर (जयपुर में) जेत्रसिंह ने इनके आशीर्वाद से लाल वेग की सेना को हराया था।

चामुण्डा देवी: मंदिर अजमेर, निर्माण पृथ्वीराज चैहान द्वारा चैहानों की कुल देवी, चारण भाट चन्दरबरदाई की इष्ट देवी।

बडली माता: छीपों के आकोला (चित्तौड़गढ़) बेडच नदी के किनारे, बीमार बच्चों को मंदिर की दो तिबारी से निकाला जाता है।

आशापुरा माता: उपनाम – आक्षापुरा, मंदिर – पोकरण (जैसलमेर) बिस्सा जाति की कुल देवी, मनोकामना पूर्व करने वाली देवी, माता के मेहन्दी नहीं लगाई जाती है।

. स्वांगीया माता: मंदिर गजरूपसागर (जैसलमेर) में, यादव भाटी वंश की कुल देवी, राजकीय प्रतिचिन्ह पालमचिड़ी व स्वांग (मुडाहुआ)।

तुलजा भवानी: चित्तौड़ दुर्ग में प्राचीन माता मंदिर, छत्रपति शिवाजी की आराध्य देवी।

जल देवी: बावडी (टांेक) में स्थित।
छींक माता: जयपुर
हिचकी माता: सनवाड़ (उदयपुर)

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जिलाजी माता: बहरोड़ (अलवर) हिन्दूओं को मुस्लिम बनने से रोकने के लिए
माता रूप में प्रसिद्ध।

आवरी माता: निकुम्भ (चित्तौड़गढ़)
में मन्दिर, लूले लंगड़े लखवाग्रस्त लोगों का ईलाज।
भदाणा माता: कोटा में, मूठ की पकड़ में आये व्यक्ति में इलाज के लिए।

शीतला माता: मंदिर चाकसू (जयपुर)
में शील डूंगरी पर, निर्माण सवाई माधोसिंह द्वारा, उपनाम मातृर

नाम स्थान पूजक वंश
करणी माता देशनोक बीकानेर चूहों वाली देवी के नाम से विख्यात
जीण माता सीकर चौहान वंश की अराध्य देवी
शिला देवी आमेर कछवाहा वंश की अराध्य देवी
जमुवाय माता जमुवारामगढ़ ढूंढाड़ के कछवाहा राजवंश की कुलदेवी
आवड़ माता जैसलमेर भाटी राजवंश की कुलदेवी
नागणेची जोधपुर राठोड़ों की कुलदेवी
बाणमाता उदयपुर सिसोदिया राजवंश की कुलदेवी
सच्चियां माता ओसियां ओसवालों की कुलदेवी
आशापुरी या महोदरी माता मोदरा (जालौर) जालौर के सोनगरा चौहानों की कुलदेवी
शाकम्भरी देवी सांभर चौहानों की कुलदेवी
ज्वाला माता जोबनेर खंगारोतों की कुल देवी

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