रम्पलस्टिल्टस्किन हिंदी कहानी Hindi Story Dwarf Rampalstiltskin | Hindigk50k

रम्पलस्टिल्टस्किन हिंदी कहानी Hindi Story Dwarf Rampalstiltskin

रम्पलस्टिल्टस्किन हिंदी कहानी Hindi Story Dwarf Rampalstiltskin | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, रम्पलस्टिल्टस्किन हिंदी कहानी Hindi Story Dwarf Rampalstiltskin , moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

रम्पलस्टिल्टस्किन हिंदी कहानी Hindi Story Dwarf Rampalstiltskin 

एक समय में एक कारखाने के मालिक की एक सुंदर लडकी थी. एक दिन राजा के सामने उसने अपना महत्व जताने के लिए कह दिया कि उसकी एक बेटी है, जो घास से बुनकर सोना बना सकती है. राजा को सोने से बेहद प्यार था. उसने सोचा, ”यह कला तो मुझे बेहद पसंद आयेगी.” और उसने कारखाने के मालिक से कहा, “यदि तुम्हारी लडकी इतनी चतुर है तो उसे एक दिन महल में लेकर आओ. मैं उसका काम देखूँगा.”

sleepy

जैसे ही वह महल में आयी, राजा उसे एक कमरे में ले गया, जिसमें घास भरी थी. राजा ने उसे एक चरखा और चरखी दी और बोला, ”अब काम शुरू करो. यदि कल सुबह तक तुमने सारी घास को काटकर सोना न बना दिया तो तुम अपनी जान से हाथ धो बैठोगी.” यह कहकर उसने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और लडकी को अकेला छोड़ दिया.

वहाँ वह बहुत देर तक बैठी रही और अपनी जान बचाने के बारे में सोचते रही, क्योंकि वह तो घास से सोना कातने की कला बिलकुल भी नहीं जानती थी. उसकी चिंता बढती गयी और आखिरकार वह रोने लगी. तभी दरवाजा खुला और एक बौना भीतर आकर बोला, ”नमस्कार, सुंदर लडकी, तुम इतनी बुरी तरह क्यों रो रही हो?” वह बोली, ”ओह, मुझे इस घास को कातकर सोना बनाना ही होगा, जो कि मुझे आता ही नहीं है.”
बौने ने पूछा, “यदि मैं तुम्हारे लिए यह कात दूं तो तुम मुझे क्या दोगी?”

लडकी बोली, “मेरा हार”

बौने ने हार ले लिया और चरखे के सामने बैठ गया – सर्र,सर्र,सर्र. तीन बार पहिया घूमा और चरखी भर गयी. फिर उसने दूसरी तरफ लगाया – सर्र,सर्र,सर्र,तीन बार फिर और दूसरी चरखी भर गईं. वह इसी तरह पूरी रात काम करता रहा. जब तक कि पूरी घास खत्म नहीं हो गयी और सारी चरखियां सोने से भर गईं. अगले दिन सुबह-सुबह राजा आया और सोने को देखकर चकित रह गया. वह बेहद खुश था, लेकिन संतुष्ट नहीं, वह लडकी को एक दूसरे और बड़े घास से भरे कमरे में ले गया और उसे जान की धमकी देते हुए घास को कातकर सोना बनाने के लिए कहा.

लडकी परेशान थी और रो रही थी कि तभी पहले की तरह अचानक दरवाजा खुला और बौना भीतर आया. बौने ने पूछा कि लडकी उसे सहायता के बदले क्या देगी. वह बोली, “मेरी अंगूठी,” बौने ने अंगूठी ली और काम शुरू कर दिया. सुबह तक सारी घास सोने में बदल गयी थी. राजा बेहद खुश था, लेकिन अभी भी संतुष्ट नहीं. वह लडकी को तीसरे और बड़े कमरे में ले गया, उसमें भी और कमरों की तरह घास भरी थी. वह बोला, “यह सब तुम रात भर में कात लोगी तो मैं तुमसे विवाह कर लूँगा.” उसने सोचा, “क्योंकि इतनी अमीर पत्नी दुनिया में किसी और को नहीं मिलेगी.”

जब लड़की अकेली रह गयी तो बौना फिर आ गया और उसने तीसरी बार लड़की से पूछा, ”यदि मैं यह कात दूं तो तुम मुझे क्या दोगी?”
लड़की बोली, “मेरे पास तो कुछ नहीं है, तुम्हें देने के लिए.” वह बोला, ‘तब मुझे अपना पहला बच्चा देने का वादा करो.”

लड़की ने सोचा, “कौन जनता है कि कब क्या होगा?” उसे इस मुसीबत से बचने का कोई रास्ता न मालूम था. उसने हाँ कर दी. वह तुरंत बैठ गया और काम खत्म कर दिया. जब सुबह हुई और राजा ने देखा कि उसकी इच्छा पूरी हो गयी है तो उसने लड़की से विवाह कर लिया और कारखाने के मालिक की सुंदर लड़की रानी बन गयी.

एक साल बाद जब वह बौने को बिलकुल भूल चुकी थी, उसका एक बेटा पैदा हुआ. तभी अचानक बौना आया और उसने अपनी इच्छा दुहराई. भयभीत रानी ने उसे अपने राज्य की अमूल्य सम्पति लेकर अपने बेटे को छोड़ने के लिए कहा, लेकिन बौना बोला- “नहीं, दुनिया की सारी सम्पत्ति से अधिक मुझे बच्चा प्यारा है.”

रानी इतना रोयी और चिल्लायी कि बौने को उस पर दया आ गयी और वह बोला, “मैं तुम्हें तीन दिन का समय देता हूँ. इस बीच यदि तुम मेरा नाम पता लगा लोगी तो मैं तुम्हारे बच्चे को छोड़ दूँगा.”

पूरी रात रानी सोचती रही. फिर उसने एक आदमी को पूरे देश में अनोखे और नये नाम खोजने के लिए भी भेजा. अगली सुबह बौना आया और रानी ने ‘कैस्पर,’ ‘मुलशुआर, ’बाल्थासार’और दूसरे अजीब नामों से शुरूआत की, लेकिन हर बार बौना बोलता, “यह मेरा नाम नहीं हैं.”

दूसरे दिन रानी ने अपने आदमियों से नाम पूछे और बौने को ‘गाय की पसली’,’भेड़ का कंधा’और ‘ह्वेल की हड्डी’ कहकर बुलाया. लेकिन हर बार वह बोला, “यह मेरा नाम नहीं है.” तीसरे दिन रानी का एक आदमी वापस आया और बोला, “मुझे एक भी नाम नहीं मिला. लेकिन जब मैं जंगल के पास एक ऊँचे पहाड़ पर आया, जहाँ लोमड़ियाँ और खरगोश एक दूसरे को शुभरात्रि कह रहे थे, तो मैंने वहां एक छोटा-सा घर देखा. उस घर के दरवाजे के सामने आग जल रही थी. आग के आसपास अनोखा-सा बौना एक पैर पर नाच रहा था और जोर-जोर से गा रहा था.-

“आज तो मैंने उबला है, लेकिन कल उसे भूनूंगा,
कल मैं रानी का बच्चा लूँगा;
आह! कितना प्रसिद्ध है, पर सब हैं अनजान,
कि मेरा नाम है – “रम्पलस्टिल्टस्किन.”

जब रानी ने यह सुना तो वह बहुत खुश हुई क्योंकि अब उसे नाम पता चल गया था. जल्दी ही बौना आया और बोला, “अब बोलो रानी, मेरा नाम क्या है?”

पहले वह बोली, “क्या तुम्हारा नाम है कामर्स?” “नहीं.”

“क्या तुम हल हो?”

“नहीं.”

“क्या तुम्हारा नाम है रम्पलस्टिल्टस्किन?”

“जरूर जादूगरनी ने तुम्हें बताया है – जादूगरनी ने बताया है.” बौना चीखा और उसने अपना दायाँ पैर गुस्से में इतनी जोर से जमीन पर पटका कि वह उसे दोबारा उठा ही नहीं पाया. फिर उसने दोनों हाथों से अपना बायां पैर पकड़ा और दायाँ पैर इतनी जोर से खींचा कि वह बाहर आ गया और जोर से चीखते हुए दूर भाग गया. उस दिन के बाद से आज तक रानी ने अपने उस दुष्ट मेहमान को फिर कभी नहीं देखा.

इस कहानी से यह सीख मिलती है कि धैर्य और बुद्धिमत्ता से कठिन से कठिन समस्या का समाधान हो जाता है. आपको इस कहानी को पढने के लिये और इस ब्लॉग पर पधारने के लिये बहुत – बहुत धन्यवाद!

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

Comments

comments

Leave a Comment