मृदा प्रदूषण पर निबंध-Essay On Land Pollution -हिन्दी निबंध – Essay in Hindi

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मिट्टी इस धरती पर मौजूद सभी जीव-जन्तुओं के जीवन के लिये बेहद आवश्यक है। लेकिन इंसान अपनी कुछ स्वार्थी गतिविधियों से इसकी गुणवत्ता को बड़े स्तर पर प्रभावित कर रहा है। स्कूली बच्चों को मिट्टी की महत्ता को समझाने के लिये हम यहां पर विभिन्न शब्द सीमाओं में बेहद सरल भाषा के साथ कुछ निबंध उपलब्ध करा रहे हैं। इसका उपयोग विद्यार्थी अपने स्कूली परीक्षा और अन्य प्रतियोगिताओं में अपनी आवश्कतानुसार कर सकता है।

मृदा प्रदूषण पर निबंध (साइल पोल्लुशन एस्से) Essay On Land Pollution

You can get below some essays on Soil Pollution in Hindi language for students in 100, 150, and 200 words.

मृदा प्रदूषण पर निबंध 1 (100 शब्द) Essay On Land Pollution

पृथ्वी पर एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन मिट्टी है जो प्रत्यक्ष रुप से वनस्पतियों और धरती पर मानव जाति तथा पशुओं को अप्रत्यक्ष रुप से सहायता करती है। ये पृथ्वी पर हर जगह उपलब्ध बहुत जटिल तत्व है। उपजाऊ मिट्टी वो मिट्टी है जो फसलों को बढ़ने में मदद करती है। इंसान होने के नाते, हमें अपनी भूमी को सुरक्षित और सभी अशुद्धियों से दूर रखने की जरुरत है। हालांकि, अत्यधिक तकनीकी उन्नति के कारण ये मुमकिन नहीं है।

रसायनिक खादों, कीटनाशक दवाइयाँ, औद्योगिक कचरों आदि के इस्तेमाल के द्वारा छोड़े गये जहरीले तत्वों के माध्यम से मिट्टी प्रदूषित हो रही है जो बुरी तरह से भूमि की उर्वरता को भी प्रभावित कर रहा है। रसायनों के माध्यम से मिट्टी में अवांछनीय बाहरी तत्वों के भारी सघनता की उपलब्धता के कारण मृदा प्रदूषण मिट्टी के पोषकता को कमजोर कर रहा है।

मृदा प्रदूषण

मृदा प्रदूषण पर निबंध 2 (150 शब्द) Essay On Land Pollution

मनुष्यों और प्राकृतिक प्रक्रियाओं के विभिन्न कार्यों के द्वारा कम गुणवत्ता की मृदा प्रदूषित मिट्टी है जो फसल उत्पादन के लिये मिट्टी को अयोग्य बना देता है। बढ़ती मानव जनसंख्या और इंसानी जीवन में उन्नति बड़े स्तर पर मृदा प्रदूषण का कारण है। अत्यधिक मृदा अपरदन, जंगलों को जलाना, फसल उत्पादन में सुधार के लिये रसायनिक खादों का प्रयोग, कीटनाशक (कीटनाशक दवाइयाँ और तृणनाशक), कीटो के उपर नियंत्रण करने के लिये बॉयोसाइड (मैलेथियॉन, डी.डी.टी, डिल्ड्रिन, एनड्रिन, एल्ड्रिन, लिनडेन), शहरी और औद्योगिक कचरा, निक्षालन, वनोन्मूलन, सूखा, अशोधित औद्योगिक जल सिंचाई, जल संलेखन, अत्यधिक सिंचाई आदि मृदा प्रदूषण का मुख्य कारण है। ये देश के शहरी औऱ ग्रामीण क्षेत्रों में दिनों-दिन बहुत तेजी से बढ़ रहा है।

आँकड़ों के अनुसार, ये ध्यान देने योग्य है कि फसल उत्पादन बढ़ाने के लिये 1999 से 2000 तक 18.07 मिलीयन टन द्वारा और 1980 से 81 तक 5.5 मिलियन टन रसायनिक खादों का उपभोग किसानों द्वारा किया गया। ऐसे जहरीले रसायन खाद्य पदार्थों द्वारा मानव शरीर में प्रवेश करते हैं और नये जन्म लिये बच्चे में शारीरिक गड़बड़ी, तंत्रिक ट्यूब कमी होने के द्वारा नुकसान पहुंचाते हैं।

मृदा प्रदूषण पर निबंध 3 (200 शब्द) Essay On Land Pollution

उपजाऊ भूमि की मिट्टी में अत्यधिक सघनता में जहरीले रसायनों (प्रदूषक या दूषणकारी तत्व भी कहा जाता है) की मौजूदगी के कारण प्रदूषित मिट्टी को मृदा प्रदूषण कहते हैं। कुछ संदूषक प्राकृतिक रुप से आ जाते हैं हालांकि ज्यादातर औद्योगिकीकरण और मानव क्रियाओं से उत्पन्न होती है। मृदा प्रदूषण आमतौर पर दो तरीके के होते हैं- जैविक और अजैविक चाहे वो प्राकृतिक या मनुष्यों द्वारा छोड़े गये हों। मृदा प्रदूषण का मुख्य कारण आकस्मिक लीकेज़, छलकन, निर्माण प्रक्रियाओं में, क्षेपण आदि है। मानव द्वारा छोड़े गये जहरीले रसायन से कुल मृदा जहरीलेपन स्तर में बढ़ौतरी हो रही है।

सभी मृदा प्रदूषक उपजाऊ भूमि से मिल जाते हैं और प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रुप से कई प्रकार की बिमारियों का कारण बनती है जैसे साँस संबंधी बीमारी, ब्रोंकाइटिन, अस्थमा, कैंसर आदि। वयस्कों से अधिक बच्चे प्रदूषक मिट्टी से जुड़े होते हैं क्योंकि वो उसी मिट्टी में खेलते हैं जिससे वो कई सारी बिमारियों से ग्रसित हो जाते हैं खासतौर से साँस संबंधी गड़बड़ियों से। बढ़ती जनसंख्या को अधिक अनाज की जरुरत है इसलिये इस जरुरत को पूरा करने के लिये लोग फसल उत्पादन में सुधार के लिये अत्यधिक सघन खाद का प्रयोग कर रहें हैं जो अंतत: भोजन के माध्यम से शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है। मृदा प्रदूषण मिट्टी को जहरीला करने का एक धीमी प्रक्रिया है। हमें मिट्टी की उर्वरता को बरकरार रखने और इसको सुरक्षित रखने के लिये उचित कदम उठाने की आवश्यकता है, जिससे आने वाली पीढ़ी और विभिन्न जीव-जन्तु जीवित रह सके।


 

मृदा प्रदूषण पर निबंध 4 (250 शब्द) Essay On Land Pollution

मृदा प्रदूषण उपजाऊ भूमि की मिट्टी का प्रदूषण है जो कि धीरे-धीरे उर्वरक और औद्योगिकीकरण के उपयोग के कारण दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। आधुनिक समय में पूरी मानव बिरादरी के लिए मृदा प्रदूषण एक बड़ी चुनौती बन गया है। स्वस्थ जीवन को बनाए रखने के लिए मिट्टी सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। जहाँ यह कई छोटे-छोटे जानवरों का घर है वहीँ यह पौधों का जीवन भी है। मिट्टी का मनुष्यों द्वारा जीवन चक्र को बनाए रखने के लिए विभिन्न फसलों के उत्पादन के लिए भी उपयोग किया जाता है। हालांकि मानव आबादी में वृद्धि से जीवन को आराम से जीने के लिए फसलों के उत्पादन और अन्य तकनीकी संसाधनों की आवश्यकता बढ़ जाती है। कई अत्यधिक प्रभावी उर्वरक बाजार में उपलब्ध हैं जो फसल उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए अपने आप को सर्वश्रेष्ठ बताते हैं लेकिन फसल पर इसका छिड़काव करते ही पूरा उर्वर मिट्टी को ख़राब करते हुए प्रदूषण फ़ैला देता हैं।

अन्य कीटनाशकों की किस्में (जैसे फंगीसाइड आदि) भी किसानों द्वारा कीड़े और कवक से अपनी फसलों को बचाने के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। इस प्रकार के कीटनाशक भी बहुत जहरीले होते हैं तथा भूमि और हवा को प्रदूषित करके पर्यावरण में उनके दुष्प्रभावों को फैलाते हैं। मृदा प्रदूषण के अन्य तरीकों में अम्लीकरण, एग्रोकेमिकल प्रदूषण, सेलीनाइजेशन और धातुओं के कचरे द्वारा फैलाया प्रदूषण शामिल है। एसिडिफिकेशन एक सामान्य प्राकृतिक कारण है जो दीर्घकालिक लीचिंग और माइक्रोबियल श्वसन से जुड़ा हुआ है जिससे धीरे-धीरे मिट्टी के जैविक पदार्थ (जैसे ह्यूमिक और फुल्विक एसिड) विघटित होते हैं जो फिर से लीचिंग को उत्तेजित करता है। उपजाऊ भूमि पर अकार्बनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी का प्रदूषण स्तर बढ़ गया है और मिट्टी की उर्वरता कम हो गयी है।

मृदा प्रदूषण पर निबंध 5 (300 शब्द) Essay On Land Pollution

मृदा प्रदूषण उपजाऊ मिट्टी का प्रदूषण है जो विभिन्न जहरीले प्रदूषकों की वजह से मिट्टी की उत्पादकता को कम कर देता है। जहरीले प्रदूषक बहुत खतरनाक होते हैं और मिट्टी के भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। कीटनाशकों, उर्वरक, रसायन, रेडियोधर्मी अपशिष्ट, जैविक खाद, अपशिष्ट भोजन, कपड़े, प्लास्टिक, कागज, चमड़े का सामान, बोतलें, टिन के डिब्बे, सड़े हुए शव आदि जैसे प्रदूषक मिट्टी में मिल कर उसे प्रदूषित करते हैं जो मृदा प्रदूषण का कारण बनता है। लोहा, पारा, सीसा, तांबा, कैडमियम, एल्यूमीनियम, जस्ता, औद्योगिक अपशिष्ट, साइनाइड, एसिड, क्षार आदि जैसे विभिन्न तरह के रसायनों द्वारा उत्सर्जित प्रदूषक मृदा प्रदूषण का कारण बनते हैं। अम्लीय वर्षा भी एक प्राकृतिक कारण है जो मिट्टी की उर्वरता को सीधे प्रभावित करती है।

पहले किसी भी उर्वरक के उपयोग के बिना मिट्टी बहुत उपजाऊ होती थी लेकिन अब एक साथ सभी किसानों ने बढ़ती आबादी से भोजन की अत्यधिक मांग के लिए फसल उत्पादन में वृद्धि हेतु तेज़ी से उर्वरकों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। कीड़ों, कीटों, कवक आदि से फसलों को सुरक्षित करने के क्रम में मजबूत कार्बनिक या अकार्बनिक कीटनाशकों (डीडीटी, बेंजीन, हेक्सा क्लोराइड, अल्द्रिन) हर्बाइसाइड्स, फंगलसाइड, कीटनाशकों आदि के विभिन्न प्रकार का अनुचित, अनावश्यक और सतत उपयोग धीरे-धीरे मिट्टी को ख़राब कर रहा है। इस तरह के रसायनों के सभी प्रकार पौधों के विकास को रोकते हैं, उनका उत्पादन कम करते हैं तथा फलों के आकार को भी कम कर देते हैं जिससे मानव स्वास्थ्य पर अप्रत्यक्ष रूप से बहुत खतरनाक प्रभाव पड़ता है। ऐसे रसायन धीरे-धीरे मिट्टी और फिर पौधों के माध्यम से अंततः जानवरों और मनुष्यों के शरीर तक पहुँच कर खाद्य शृंखला के माध्यम से अवशोषित हो जाते हैं।

खनन और परमाणु प्रक्रिया जैसे स्रोतों से अन्य रेडियोधर्मी अपशिष्ट पानी के माध्यम से मिट्टी तक पहुंच जाता है तथा मृदा और पौधों, पशुओं (चराई के माध्यम से) और मानव (भोजन, दूध, मांस आदि) को प्रभावित करते हैं। इस प्रकार के भोजन को खाने से विकास में कमी होती है और जानवरों और मानवों में असामान्य वृद्धि होती है। आधुनिक दुनिया में औद्योगीकरण में वृद्धि से दैनिक आधार पर अपशिष्टों का भारी ढेर उत्पन्न होता है जो सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से मिट्टी में मिल जाता है और इसे दूषित करता है।


 

मृदा प्रदूषण पर निबंध 6 (400 शब्द) Essay On Land Pollution

मृदा प्रदूषण ताजा और उपजाऊ मिट्टी का प्रदूषण है जो उसमें पनपने वाली फसलों, पौधों, जानवरों, मनुष्यों और अन्य जीवों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। अवांछित पदार्थों और कई स्रोतों से विषाक्त रसायनों के विभिन्न प्रकार अलग-अलग अनुपात में मिलकर पूरी मृदा के प्रदूषण का कारण बनते है। एक बार जब प्रदूषक मिट्टी में मिश्रित हो जाता है तो वह लंबे समय तक मिट्टी के साथ सीधे संपर्क में रहता है। उपजाऊ भूमि में औद्योगिकीकरण और विभिन्न प्रभावी उर्वरकों की बढ़ती खपत से लगातार धरती की मिट्टी संरचना और उसका रंग बदल रहा है जो पृथ्वी पर जीवन के भविष्य के लिए बहुत खतरनाक संकेत है।

उद्योगों और घरेलू सर्किलों द्वारा जारी किए जाने वाले विषाक्त पदार्थों के मिश्रण के माध्यम से पृथ्वी पर सारी उपजाऊ जमीन धीरे-धीरे प्रदूषित हो रही है। मृदा प्रदूषण के प्रमुख स्रोत औद्योगिक अपशिष्ट, शहरी अपशिष्ट, रासायनिक प्रदूषकों, धातु प्रदूषण, जैविक एजेंट, रेडियोधर्मी प्रदूषण, गलत कृषि पद्धतियां आदि है। औद्योगिक प्रक्रियाओं द्वारा जारी औद्योगिक कचरे में कार्बनिक, अकार्बनिक और गैर-बायोडिग्रेडेबल सामग्रियां होती है जिनमें मिट्टी की भौतिक और जैविक क्षमताएँ बदलने की ताकत होती है। यह पूरी तरह से मिट्टी की बनावट और खनिज, बैक्टीरिया और फंगल कालोनियों के स्तर को बदल कर रख देता है।

शहरी अपशिष्ट पदार्थ ठोस अपशिष्ट पदार्थ होते है जिनमे वाणिज्यिक और घरेलू कचरे शामिल होते हैं जो मिट्टी पर भारी ढेर बनाते हैं और मृदा प्रदूषण में योगदान देते हैं। रासायनिक प्रदूषक और धातु प्रदूषक, कपड़ा, साबुन, रंजक, सिंथेटिक, डिटर्जेंट, धातु और ड्रग्स उद्योगों से औद्योगिक अपशिष्ट हैं जो मिट्टी और पानी में लगातार अपने खतरनाक कचरे को डंप कर रहे हैं। यह सीधे मिट्टी के जीवों को

प्रभावित करता है और मिट्टी के प्रजनन स्तर को कम करता है। जैविक एजेंट (जैसे कि बैक्टीरिया, शैवाल, कवक, प्रोटोजोआ और निमेटोड्स, मिलीपैड, केचुएँ, घोंघे आदि जैसे सूक्ष्म जीव) मिट्टी के भौतिक-रासायनिक तथा जैविक वातावरण को प्रभावित करते हैं और मृदा प्रदूषण का कारण बनते हैं।

परमाणु रिएक्टरों, विस्फोटों, अस्पतालों, वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं आदि जैसे स्रोतों से कुछ रेडियोधर्मी प्रदूषक मिट्टी में घुस जाते हैं और लंबे समय तक वहां रहकर मृदा प्रदूषण का कारण बनते हैं। अग्रिम कृषि-प्रौद्योगिकी का उपयोग करने वाली गलत कृषि पद्धति (कीटनाशकों सहित विषाक्त उर्वरकों की भारी मात्रा में उपयोग) से धीरे-धीरे मिट्टी की शारीरिक और जैविक संपत्ति में गिरावट आ जाती है। मृदा प्रदूषण के अन्य स्रोत नगरपालिका का कचरा ढेर, खाद्य प्रसंस्करण अपशिष्ट, खनन प्रथाएं आदि हैं। मृदा प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक है क्योंकि विषाक्त रसायन शरीर में खाद्य श्रृंखला के माध्यम से प्रवेश कर जाते हैं और पूरे आंतरिक शरीर प्रणाली को परेशान करते हैं। मृदा प्रदूषण को कम करने और प्रतिबंधित करने के लिए पर्यावरण संरक्षण कानूनों सहित सभी प्रभावी नियंत्रण उपायों का अनुसरण लोगों द्वारा विशेष रूप से उद्योगपति द्वारा किया जाना चाहिए। ठोस अपशिष्टों के रीसाइक्लिंग और पुन: उपयोग तथा लोगों के बीच जहाँ तक संभव हो सके वृक्षारोपण को भी बढ़ावा देना चाहिए।

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