मृत्यु का चिन्तन Remember Death Hindi Short Story | Hindigk50k

मृत्यु का चिन्तन Remember Death Hindi Short Story

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मृत्यु का चिन्तन Remember Death Hindi Short Story

एक व्यक्ति रोज संत फरीद के पास जाकर पूछता था, “मेरी बुरी आदतें, मेरा दुष्ट स्वभाव कैसे छूटेगा?” फरीद उसे रोज टाल देते थे.

Remember Death Hindi Short Story

Remember Death Hindi Short Story

एक दिन जब उसने बहुत जिद की. तब  संत फरीद ने कहा, “मैं तुमसे क्या कहूँ ? तुम्हारा अंत समय निकट है. तुम्हारी जिन्दगी अब चालीस दिनों से ज्यादा नहीं है.” इतना सुनना था कि वह व्यक्ति चिंता में डूब गया. इसके बाद वह चालीस दिनों तक दुःख, भय, पश्चाताप और भजन में लगा रहा.

चालीस दिन खत्म होने में जब एक दिन शेष बचा, तो संत फरीद ने उसे अपने पास बुलाया. उन्होंने उससे  पूछा. “इन उनतालीस दिनों में कितनी बार तुमने दुष्टतापूर्ण कार्य किए ? कितने पापकर्म किए?” उसने उत्तर दिया, “आश्चर्य की बात है कि इतने दिनों में एक बार भी मेरे मन में कोई गलत ख्याल नहीं आया. चित्त पर हर क्षण मृत्यु का भय छाया रहा.ऐसे में दुष्ट आदतें कहाँ हावी हो पातीं.”

उसकी बातें सुनकर संत फरीद जोर से हंसे और बोले,”बुराइयों से बचने का एक ही उपाय है और वह यह है कि हर घड़ी मृत्यु को याद रखो और वह काम करने की सोचो जिससे भविष्य उज्ज्वल बने,”

मृत्यु टल जाने के अभयदान को पाकर वह व्यक्ति चला गया. अब उसके स्वभाव में दुष्टता और बुराईयां नहीं रह गई थी. मृत्यु के स्मरण ने उसे निष्पाप कर दिया था. मृत्यु का चिन्तन करने से बड़े से बड़े भय का निराकरण हो जाता है.

जो व्यक्ति मृत्यु को ध्यान में रखते हुए कर्म करता है, उसके कर्म दूषित नहीं हो सकते. वह सदैव इसी प्रयास में रहता है कि उसमें कोई बुराई उत्पन्न न हो जाए.

 

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