माता न कुमाता हो सकती Hindi kahani Story

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माता न कुमाता हो सकती Hindi kahani Story

बात बेगुसराय  रेलवे स्टेशन की है. कुछ दिनों पहले की बात है. रात का समय था.  मैं ट्रेन के इंतज़ार में रेल्वे – प्लेटफार्म पर टहल रहा था .
एक वृद्ध महिला , जिनकी उम्र लगभग 60 – 65 वर्ष के लगभग रही होगी, वो मेरे पास आयी और मुझसे खाने के लिए पैसे माँगने लगी …. उनके कपडे फटे ., पूरे तार – तार थे ., उनकी दयनीय हालत देख कर ऐसा लग रहा था की पिछले कई दिनों से भोजन भी ना किया हो .. मुझे उनकी दशा पर बहुत तरस आया तो मैंने अपना पर्स टटोला ., कुछ बीस रुपये के आसपास छुट्टे पैसे और एक हरा ” गांधी ” मेरे पर्स में था ., मैंने वो पूरे छुट्टे उन्हें दे दिए… मैंने पैसे उन्हें दिए ही थे ., की इतने में एक महिला एक छोटे
से रोते – बिलखते., दूधमुहे बच्चे के साथ टपक पड़ी और छोटे दूधमुहे बच्चे का वास्ता देकर वो भी मुझसे पैसे माँगने लगी … मैं उस दूसरी महिला को कोई ज़वाब दे पाता की उन वृद्ध माताजी ने वो सारे पैसे उस दूसरी महिला को दे दिए , जो मैंने उन्हें दिए थे …. पैसे लेकर वो महिला तो चलती बनी… लेकिन मैं सोच में पड़ गया … मैंने उनसे पूछा की-” आपने वो पैसे उस
महिला को दे दिए ..??? ” उनका ज़वाब आया -” उस महिला के साथ उसका छोटा सा दूधमुहा बच्चा भी तो था ., मैं भूखे रह लूंगी लेकिन वो छोटा बच्चा बगैर दूध के कैसे रह पायेगा … ??? भूख के मारे रो भी रहा था …”
उनका ज़वाब सुनकर मैं स्तब्ध रह गया …. सच … भूखे पेट भी कितनी बड़ी मानवता की बात उनके ज़ेहन में बसी थी …. उनकी सोच से मैं प्रभावित हुआ ., तो उनसे यूं ही पूछ लिया की यूं दर -बदर की ठोकरे खाने के पीछे आखिर कारण क्या है …??? उनका ज़वाब आया की उनके दोनों बेटो ने शादी के बाद उन्हें साथ रखने से इनकार कर दिया, पति भी चल बसे, आखिर में कोई चारा न बसा … बेटो ने तो दुत्कार दिया ., लेकिन वो भी हर बच्चे में अपने दोनों बेटो को ही देखती है ., इतना कहकर उनकी आँखों में आंसू आ गए … मैं भी भावुक हो गया ., मैंने पास की एक होटल
से उन्हें खाने का सामान ला दिया … मैं भी वहा से फिर साईड हट गया …
लेकिन बार-बार ज़ेहन में यही बात आ रही थी ., की आज की पीढी कैसी निर्लज्ज है ., जो अपनी जन्म देने वाली माँ तक को सहारा नहीं दे सकती …???  लानत है ऐसी संतान पर …. और दूसरी तरफ वो ” माँ ” जिसे हर बच्चे में अपने ” बेटे ” दिखाई देते है …. धन्य है ” मातृत्व-प्रेम”.
यह कहानी 100 %  वास्तविक है.
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धन्यवाद!

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