भारत की राजधानी–दिल्ली पर निबंध-Essay On Delhi In Hindi

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भारत की राजधानी–दिल्ली पर निबंध-Essay On Delhi In Hindi

भारत की राजधानी–दिल्ली पर निबंध (Essay On Delhi In Hindi) :

भूमिका : हमारा भारत एक विशाल देश है। भारत में कई प्रदेश हैं। भारत के हर प्रदेश में कई नगर हैं। भारत के हर नगर का अपने एक विशेष महत्व है। कोई नगर प्राकृतिक दृष्टि से अपना महत्व रखता है तो कोई सांस्कृतिक दृष्टि से गरिमापूर्ण है। कोई औद्योगिक दृष्टि से समृद्ध है तो कोई अपने धार्मिक स्थान होने की वजह से देश के निवासियों के लिए वंदनीय है।

कोई नगर ऐतिहासिक यादों को संजोये होने की वजह से देश-विदेश के लोगों को आकृष्ट करता है तो कोई नगर राजनीति में होने वाली हल-चल की वजह से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। लेकिन दिल्ली भारत का एक विशाल नगर है जो अनेक नजरों से बहुत महत्वपूर्ण है। दिल्ली भारत की राजधानी है।

दिल्ली भारत का दिल भी है और धडकन भी। दिल्ली एक ऐसा दर्पण है जिसमें पुरे भारत का चित्र दिखाई देता है। दिल्ली राजनीतिक , सामाजिक ,धार्मिक , सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रंगमंच है जो कहीं भी दिखाई नहीं देता। वास्तविकता में कहें तो दिल्ली भारत का दिल है। इसका उल्लेख कई साहित्यकारों ने किया। दिल्ली का एक नाम इंद्रप्रस्थ भी था।

दिल्ली की ऐतिहासिकता :- दिल्ली भारत की एक ऐतिहासिक नगरी है। दिल्ली को ऐतिहासिक रूप से अनंगपाल और पृथ्वीराज की दिल्ली कहा जाता है। ये दिल्ली कभी तो फूलों की सेज पर सोई है और कभी काँटों का ताज पहन कर रोई है। कभी दुल्हनों की तरह सजी है और कभी इसके माथे से सिंदूर मिटाया गया है।

यवन बादशाहों ने भी यहाँ पर अपनी कूटनीति का जल बिछाया था। कुछ राज वंशों ने इसे संवारा तो कुछ लुटेरों ने इसे लुटा भी और उजाड़ा भी। इस दिल्ली ने तैमूर और नादिरशाह के जन-संहार का करुण दृश्य देखा था। देश विदेश के अनेक शिल्पियों ने दिल्ली के सौन्दर्य को बढाया है। यहाँ पर हर कण-कण में इतिहास की गूंज सुनाई देती हैं।

जब कभी भी अंग्रेजी सरकार की विजय होती थी तब उसका मनोरंजन दिल्ली में ही मनाया जाता था। अंग्रेजों ने यहाँ पर अपनी प्रतिमाएं स्थापित करने की कोशिश की लेकिन वे इस बात को नहीं जानते थे कि दिल्ली भारत के निवासियों की भूमि है। यहीं पर अंग्रेजों के खिलाफ नारे लगे थे और हड़तालें हुई थी।

गाँधी , जवाहर लाल नेहरु और भगत सिंह जैसे देश भक्तों ने स्वतंत्रता की मांग की और अंत में अंग्रेजों को भारत छोडकर जाना ही पड़ा। स्वतंत्रता मिलने के बाद यहाँ के कई नेताओं ने दिल्ली का दुबारा से उद्धार किया था। दिल्ली में सभी अंग्रेजी शासन के निशानों को मिटा दिया गया था और भारतीयता के निशानों को स्थापित किया गया था।

भारत का ये नगर दिल्ली सभी देशों और विदेशों के लोगों के लिए भ्रमण की बहुत अच्छी जगह है। भारत सरकार इसे और अधिक सुंदर बनने के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहती है। दिल्ली की सडकें इतनी बड़ी हैं कि हर तरह की गाड़ी इस पर चल सकती हैं। सडकों के दोनों ओर फूल लगें हैं जो सडकों की शोभा बढ़ाते हैं।

दिल्ली की हर सडक किसी न किसी वाटिका का बोध करती है। दिल्ली की सडकों पर गाड़ी , बस , स्कूटर , मोटरसाईकिल और ट्रकों को हमेशा देखा जा सकता है। दिल्ली भारत की राजधानी है इसी वजह से यहाँ पर भारत सरकार के प्रमुख कार्यालय भी हैं। दिल्ली की आबादी बहुत अधिक है यहाँ पर एक करोड़ से भी अधिक लोग रहते हैं।

दर्शनीय स्थल :- भारत के इस नगर का हर अंग दृश्यनीय है। दिल्ली ऐतिहासिक भवनों के लिए अतुल्य मानी जाती है। यहाँ पर अनेक भव्य इमारतें और चौड़ी स्द्कं भी हैं। दिल्ली में सडक परिवहन के साथ -साथ रेल और वायु परिवहन की भी अच्छी व्यवस्था है।

यहाँ के बाजारों का अपना ही आकर्षण होता है ये सजे हुए बहुत सुंदर लगते हैं इसी वजह से लोग यहाँ पर घूमते हुए देखे जा सकते हैं। दिल्ली में बहुत से ऐतिहासिक स्थल जैसे :- लाल किला , कुतुबमीनार , जंतर-मंतर , जामा मस्जिद , बिरला मन्दिर , लोटस टेंपल , मोर्यकालीय लौह स्तंभ , छतर पुर मन्दिर , इंडिया गेट , हुमायु का मकबरा , गुरुद्वारा सीसगंज हैं।

चांदनी चौक और कनाट प्लेस की सजावट देखने के योग्य होती है। लोटस टेंपल में सभी धर्मों के लोग बैठकर भगवान को याद करते हैं। लौह स्तंभ में कभी भी जंग नहीं लगता इसकी इसी विशेषता की वजह से यह आकर्षण का केद्र बन गया है। पुराने किले में पांडवों के अवशेष देखे जा सकते हैं।

दिल्ली के सभी मैदानों की घास आँखों और पैरों के लिए बहुत सुख देती है। दिल्ली का चिड़ियाघर आकर्षण का केंद्र बन चुका है। दिल्ली के चिड़िया घर में अनेक प्रकार के पशु-पक्षी देखे जा सकते हैं। दिल्ली को उद्योग नगरी कहा जाता है। यहाँ पर हर मोहल्ले में उद्यान देखे जा सकते हैं।

यहाँ पर बड़ी बड़ी कपड़ों की कंपनियां और अन्य उद्योग धंधे हैं। खेलों के आयोजन से भी दिल्ली की सुन्दरता में चार-चाँद लग गये हैं। बड़े-बड़े मॉल्स से दिल्ली की शान और अधिक बढ़ गई है। दिल्ली में लोगों के रहने के लिए बड़ी -बड़ी इमारतें हैं जो आकर्षण का कारण बने हुए हैं।

दिल्ली में देश की राजनीतिक व्यवस्था का प्रमुख केंद्र संसद भवन है। दिल्ली में एक मुगल उद्यान है जो बसत ऋतु में आम लोगों के लिए खोल दिया जाता है और इस का आकर्षण का केंद्र गुलाब का फूल है जो यहाँ पर अनेक किस्मों में पाया जाता है। दिल्ली में एक अप्पूघर भी है जो बच्चों की आकर्षण की सैरगाह है।

उपसंहार :- दिल्ली भारत का सबसे अधिक सुंदर और ऐतिहासिक नगर है। यहाँ पर समन्वय का पाठ पढ़ाया जाता है। दिल्ली में बहुत से धर्मों और सम्प्रदायों और राजनीतिक दलों के लोग एक साथ एक परिवार की तरह रहते हैं। दिल्ली में संपन्नता और गरीबी की चर्म सीमा को देखा जा सकता है।

दिल्ली में अनेकता में एकता की भावना को देखा जा सकता है। दिल्ली को लघु भारत के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ के लोग साथ रहने के साथ-साथ सभी त्यौहारों को भी एक साथ मनाते हैं। दीपावली , दशहरा , होली , बैशाख , ईद , आदि प्रमुख त्यौहार मनाये जाते हैं। दिल्ली की समृद्धि से भारत की समृद्धि का पता चलता है।

भारत की राजधानी–दिल्ली पर निबंध-Essay On Delhi In Hindi

भारत की राजधानी–दिल्ली पर निबंध ! Essay on Capital of India – Delhi in Hindi

दिल्ली ऐतिहासिक नगरी है । यह भारतीय सम्राट पृथ्वीराज चौहान की राजधानी थी । बाद में यह मुहम्मद गौरी के नियंत्रण में आ गई । मुगलकाल में भी यह नगर महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक केन्द्र था । अंग्रेजों ने सन् 1911 में कोलकाता के स्थान पर दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया । 1947 ई. में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् यह भारत की राजधानी बनी । आज नई दिल्ली भारत की राजधानी है । यह यमुना नदी के तट पर बसी हुई है ।

आज दिल्ली एक आधुनिक भव्य नगर का रूप ले चुकी है । यहाँ अनेक भव्य इमारतें और चौड़ी सड़कें हैं । सड़क परिवहन के अलावा यहाँ रेल परिवहन और वायु परिवहन की भी अच्छी व्यवस्था है । इक्कीसवीं सदी की आवश्यकताओं को देखते हुए

वातानुकूलित एवं स्वचालित मैट्रो रेल की स्थापना की गई है । इससे स्थानीय यात्रा में लगनेवाले श्रम, समय एवं धन की बचत होती है । दिल्ली के बाजार भी बड़े भव्य हैं । बड़े-घड़े मॉल्स शहर की रौनक बढ़ाते हैं । सुपर बाजारों की संख्या भी दिनोदिन बढ़ती जा रही है । लोगों के निवास के लिए बहुमंजिली इमारतें बनाई गई हैं ।

देश की राजधानी होने के कारण यहाँ भारत सरकार के सभी प्रमुख कार्यालय हैं । देश की राजनीतिक व्यवस्था का प्रमुख केन्द्र संसद भवन है । पास ही अनेक कार्यालय हैं । राष्ट्रपति भवन में भारत के राष्ट्रपति का कार्यालय एवं निवास है । यह बहुत आकर्षक भवन है । यहाँ विदेशी राष्ट्रप्रमुखों का स्वागत किया जाता है । उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है । यहीं पर प्रसिद्ध मुगल उद्‌यान है जिसे बसंत ऋतु में आम लोगों के लिए खोल दिया जाता है । इस उद्‌यान का प्रमुख आकर्षण गुलाब का पुष्प है जो यहाँ विभिन्न किस्मों में पाया जाता है ।

राष्ट्रपति भवन की सीध में इंडिया गेट परिसर है । इंडिया गेट भारत के शहीदों को समर्पित है । यहाँ भारत के लिए प्राण अर्पित करने वाले शहीदों के सम्मान में रात-दिन ज्योति प्रज्वलित रहती है । महत्त्वपूर्ण अवसरों पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति एवं रक्षा मंत्री यहाँ आते हैं तथा राष्ट्र की ओर से शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं ।

राजधानी दिल्ली में अनेक दर्शनीय स्थल हैं । यहाँ शाहजहाँ द्वारा निर्मित लाल किला और जामा मस्जिद बहुत प्रसिद्ध है । लालकिला एक भव्य किला है जिसे लाल बलुए पत्थर से बनाया गया था । इसके भीतर संग्रहालय, दीवाने आम, दीवाने खास जैसी सुंदर इमारतें हैं । जामा मस्जिद भी बहुत आकर्षक है । पर्यटक इन स्थानों को देखने बड़ी संख्या में आते हैं ।

दिल्ली में स्थित कुतुबमीनार भारत की सबसे ऊँची प्राचीन मीनार है । यह भारत की राष्ट्रीय धरोहर है । इसमें की गई कलाकारी बहुत आकर्षक है । पास ही मौर्यकालीय लौह स्तंभ है । इसकी विशेषता यह है कि इसमें कभी जंग नहीं लगता ।

ADVERTISEMENTS:

दिल्ली में कमल मंदिर, पुराना किला, हुमायूँ का मकबरा, बिड़ला मंदिर, छतरपुर मंदिर, जंतर-मंतर, चिड़ियाघर, अप्पुघर जैसे अनेक दर्शनीय स्थान हैं । कमल मंदिर में सभी धर्मों के लोग शांत बैठकर परमात्मा का ध्यान लगा सकते हैं । पुराने किले में पांडव काल के अवशेष देखे जा सकते हैं । छतरपुर मंदिर आधुनिक वास्तुकला का अच्छा नमूना है । जंतर-मंतर राजा जयसिंह द्वारा बनाई गई वेधशाला है । दिल्ली स्थित चिड़ियाघर में अनेक प्रकार के दुर्लभ पशु-पक्षियों के दर्शन होते हैं । अप्पुघर चिड़ियाघर के पास ही है । यह बच्चों की आकर्षक सैरगाह है ।

दिल्ली को उद्‌यानों की नगरी कहा जाता है । यहाँ हर मोहल्ले में पार्क एवं उद्‌यान हैं । ये दिल्ली को हरा- भरा रखने में बहुत मदद करते हैं । ग्रीष्म ऋतु में जब यहाँ अत्यधिक गर्मी पड़ती है, पेड़ तापमान को नियंत्रित करने में बहुत मदद करते हैं ।

दिल्ली की आबादी बहुत घनी है । यहाँ सवा करोड़ से अधिक लोग रहते हैं । उत्तर भारत के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग प्रतिवर्ष यहाँ रोजी-रोटी की खोज में आते हैं । आबादी के बढ़ने से दिल्ली के उपनगरीय क्षेत्र बढ़ रहे हैं । दिल्ली लगातार फैलती जा रही है । इतनी बड़ी आबादी के लिए बिजली, पानी, सड़क, परिवहन आदि का प्रबंध कर पाना सचमुच एक चुनौतीपूर्ण कार्य है । जनसंख्या है तो प्रदूषण की समस्या भी है । वाहनों की अत्यधिक संख्या तथा कूड़े-करकट के ढेर प्रदूषण के मुख्य कारण हैं ।

दिल्ली को ‘ लघु भारत ‘ कहा जा सकता है । यहाँ भारत के कोने-कोने से आए बहुधर्मी और बहुभाषी लोग रहते हैं । सभी लोग मिलजुल कर तथा आपस में भाईचारा बनाकर रहते हैं । लोग एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं । दीपावली, दशहरा, होली, बैशाखी, ईद आदि यहाँ के मुख्य त्योहार हैं । दिल्ली की समृद्धि भारत की समृद्धि की ओर संकेत करती है ।

भारत की राजधानी–दिल्ली पर निबंध-Essay On Delhi In Hindi

Bharat Ki Rajdhani Delhi par laghu nibandh

प्रस्तावना- भारत की राजधानी है दिल्ली। यह भारत का दिल है। इसकी धड़कन से भारत की दशा का पता चल जाता है। वैसे भी दिल्ली ऐतिहासिक नगर है। यह कई बार उजड़ी और कई बार बसी। पर इसका रूप और रंग लगातार निखरता गया है। इसने अपने कई नाम भी बदले। कभी यह हस्तिनापुर कहलाई तो कभी इन्द्रप्रस्थ, पर इसके महत्व में कभी कमी नहीं आई।Short Essay on Bharat Ki Rajdhani Delhi

ऐतिहासिक नगर- दिल्ली एक ऐतिहासिक नगर है। यहाँ का लाल किला, जामा मस्जिद, कुतुब मीनार, जन्तर मन्तर, हुमायूँ का मकबरा, अशोक की लाट, बिरला मन्दिर और अनेक दर्शनीय स्थान हैं।

नई दिल्ली- दिल्ली महानगर है। इसमें विश्व भर की संस्कृतियों का समागम देखा जा सकता है। इस महानगर को दो भागों में बाँटा गया है- नई दिल्ली और पुरानी दिल्ली। नई दिल्ली में ही सभी बड़े बड़े कार्यालय हैं। लोकसभा और राज्यसभा, के सभा भवन, राष्ट्रपति भवन, केन्द्रीय सचिवालय, रिजर्व बैंक आदि नई दिल्ली में ही स्थित हैं। कृषि भवन, रेल भवन, आकाशवाणी केन्द्र, दूरदर्शन केन्द्र, उच्चतक न्यायालय, इण्डिया गेट भी नई दिल्ली में ही स्थित हैं। इतना ही नहीं, निर्वाचन सदन और विज्ञान भवन भी इसी में स्थित हैं।

पुरानी दिल्ली- पुरानी दिल्ली के चारों ओर दीवार बनी हुई थी। इसे परकोटा कहते हैं। इस परकोटे के अवशेष कई स्थानों पर दिखाई देते हैं। कश्मीरी गेट के स्थान पर तो यह परकोटा अभी तक सुरक्षित है। इसकी दीवार बहुत ऊँची और चौड़ी है। पुरानी दिल्ली में कश्मीरी गेट के अतिरिक्त अजमेरी गेट और दिल्ली गेट पर भी परकोटा देखा जा सकता है। गुरूद्वारा सीसगंज भी पुरानी दिल्ली चांदनी चौंक में स्थित है।

फतेहपुरी मस्जिद भी पुरानी दिल्ली में है। इसी मस्जिद के पास खारी बाबली है। यह किराने की बहुत बड़ी मंडी है। सदर बाजार मनियारी, प्लास्टिक आदि की बहुत बड़ी मंड़ी है। यह भी पुरानी दिल्ली में है। पुरानी दिल्ली का यह क्षेत्र बहुत घनी आबादी वाला क्षेत्र है।

दिल्ली में हवाई जहाज से लेकर बेलगाड़ी तक को देखा जा सकता है। यहाँ ओखला, बुद्धागार्डन, तालकटोरा गार्डन, मुगल गार्डन, रोशनआरा बाग आदि बड़े ही सुन्दर और दर्शनीय स्थान हैं।

दिल्ली गेट के पास यमुना नदी के तट पर भारत के महान नेताओं की समाधियाँ हैं। राजघाट, महात्मा गांधी का समाधि स्थल है। शांतिवन में स्वतन्त्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री और युग निर्माता पंडित जवाहर लाल नेहरू की समाधि है। विजय घाट भी शांतिवन के समीप स्थित है। यहाँ लाल बहादुर शास्त्री का समाधि स्थल है। शक्ति स्थल में इन्दिरा गांधी की समाधि है। देश विदेश से आने वाले यात्री इन समाधि स्थलों को देखने के लिए जाते हैं और उन्हें अपने श्रद्धा सुमन भेंट करते हैं।

उपसंहार- पिछले दस सालों में दिल्ली का बहुत विस्तार हुआ है। यमुना के पूर्वी आंचल में शाहदरा है तो पश्चिमी आंचल में पुरानी दिल्ली और नई दिल्ली। दिल्ली के इन दो भागों को जोड़ने के लिए अब कई स्थानों पर पुल बना दिए गए हैं, पर दिल्ली है कि रूकने का नाम ही नहीं लेती। सुरसा के मुँह की भाँति बढ़ती चली जा रही है।

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