निःस्वार्थ प्रेम हिंदी कहानी

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निःस्वार्थ प्रेम हिंदी कहानी

एक वृद्ध व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ एक बड़े मकान में सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे थे. उनका इकलौता बेटा अपनी पत्नी और बच्चों के साथ कनाडा में बस गया था.

एक दिन अचानक उस वृद्ध व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ा और वे चल बसे. उनकी पत्नी तो मानो जैसे बुत बन गयी. इतना बड़ा दुख जो पड़ा. पति का साथ छूटना एक पत्नी के लिए सर्वाधिक दुखद होता है. बेटा अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए कनाडा से भागा -भागा आया. वह बहुत उदास था क्योंकि वह अपने पिता को उनके अंतिम दिनों में अपने साथ नहीं रख पाया. वह यहाँ भारत में अपनी मां के साथ लगभग एक सप्ताह तक रहा और यह निर्णय किया कि वह मां को भी अपने साथ कनाडा ही लेकर चला जायेगा. उसने कहा कि पिता की तरह ही वह अपनी माँ को खोना नहीं चाहता है.
माँ को जब यह पता चला तो वह बहुत खुश हुई कि चलो अपने बेटे – पोते के साथ बुढ़ापा कट जायेगी. उन्होंने अपना बड़ा सा मकान और अन्य जगह जमीन बेच दिया और सबकुछ बेटे को दे दिया. निश्चित दिन अपना सब कुछ पैक कर बेटे के साथ हवाई हवाई अड्डे के लिए निकल पड़ी.
सामान और अन्य सुरक्षा जांच के बाद  वे लोग वेटिंग एरिया में बैठकर अपने फ्लाइट का इंतजार करने लगे. लड़के को पेशाब लगी. वह अपनी मां से बोला कि मां मैं शौचालय तक जा रहा हूँ, पांच मिनट में वापस आता हूँ. मां ने सिर हिलाया और अपने बेटे का इंतजार करने लगी.
उसका बेटा ऐसा गया कि फिर कभी वापस नहीं आया. जी हाँ! वह अकेले ही सारा माल लेकर कनाडा के लिये उड़ान भर दी.
भोली और मासूम मां बहुत देर तक यह सोचती रही कि  मेरा बेटा कहाँ चला गया. वह यह नहीं समझ पा रही थी कि वह क्या करे. वह कई घंटे तक अपने बेटे का इंतजार करती रही. अब वह रोने लगी, बेचारी अकेली, बूढी औरत क्या करे! करीब 16 घंटे के बाद एक सुरक्षा गार्ड उनके पास आया और उनसे पूछा – क्या बात है माता जी, आप क्यों रो रही हो? उसने बुझी सी आवाज में बताया कि उसका बेटा उसे छोड़ कर चला गया है. उसने यहाँ का मकान जगह- जमीन सब कुछ बेच दिया है. अब वह कहाँ जायेगी? क्या करेगी?  इस शहर में उसका कोई नहीं है, न ही कोई रिश्तेदार है? गार्ड यह सब सुन दुखी हो गया, लेकिन वह क्या कर सकता था. उसने उस बूढी औरत से कहा – ‘माता जी! आप अपने उसी घर पर चले जाइए और जिसने भी वह घर ख़रीदा है उसको बोलिए कि वह आपको वहीँ रहने के लिए थोड़ी -सी  जगह दे दे. उसने उस वृद्धा को उनके मुहल्ले को जाने वाली गाड़ी में बिठा दिया और किराया भी दे दिया.
उस घर को एक युवा दंपत्ति ने ख़रीदा था. उसका एक छोटा बच्चा भी था. वृद्ध महिला ने जब दरवाजा खटखटाया तो एक महिला ने दरवाजा खोली. उस बूढी माँ ने सारी बातें उस महिला को बताई.  वह बोल भी रही थी और रो भी रही थी. आप मुझे थोड़ी सी रहने के लिए जगह दे दो. मैं आपके बर्तन धोऊँगी, बच्चे को सम्हालूंगी और आपके घर के एक कोने में पड़ी रहूंगी. उस महिला ने उस वृद्ध औरत को घर के अन्दर उस कमरे में ले गयी जहाँ उसका पति टीवी देख रहा था.
अपनी पत्नी से सारी बातें जानने के बाद उस युवक ने कहा – ‘हमारे घर में यहाँ बहुत जगह है, इसलिए आपको यहाँ रखने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन मेरे खुद के माता पिता नहीं हैं, यदि आप यहाँ मेरी मां की तरह रहना चाहती हो तो आपको मैं यहाँ रहने की अनुमति दे सकता हूँ. यह सुन वह वृद्ध महिला अभिभूत हो गयी.
अब वह उनके साथ रह रही है. वह उनके बच्चे का ख्याल रखती  हैं और वे लोग उन्हें अपनी माँ की तरह व्यवहार करते हैं. जब कोई अपना सगा इस तरह बेरहमी से पेश आता है तो कई निःस्वार्थ प्रेम वाले व्यक्ति आगे आकर सहारा दे ही देते हैं, तभी तो यह  दुनिया चल रही है.
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धन्यवाद!

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