नशा मुक्ति पर निबंध-Essay on Nasha Mukti In Hindi | Hindigk50k

नशा मुक्ति पर निबंध-Essay on Nasha Mukti In Hindi

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नशा मुक्ति पर निबंध-Essay on Nasha Mukti In Hindi

नशा मुक्ति पर निबंध :

भूमिका : संघर्ष को मानव जीवन का दूसरा नाम कहा जाता है। इसी संघर्ष से व्यक्ति कुंदन की तरह शुद्ध और पवित्र बन जाता है जिन लोगों का ह्रदय कमजोर होता है या जिनका निश्चय सुदृढ नहीं होता है वे संघर्ष के आगे घुटने टेक देते हैं। वे अपनी सफलता से बचने के लिए नशे को सहारा बनाते हैं।

कहने का क्या है वे लोग तो कह देते हैं कि हम गम को भुलाने के लिए पीते हैं। इसी से हमारे मन को शांति मिलती है। नशा करने से दुखों और कष्टों से मुक्ति मिलती है लेकिन क्या सचमुच नशा करने से व्यक्ति दुखों से मुक्त हो जाता है ? अगर ऐसा होता तो पुरे विश्व में कोई भी दुखी और चिंताग्रस्त नहीं होता।

सद्वृत्तियाँ बनाम दुष्प्रवृत्तियाँ : मानव जीवन बहुत ही निर्मल होता है। मानव जीवन में सात्विकता , सज्जनता , उदारता और चरित्र का उत्कर्ष होता है। वह खुद का ही नहीं बल्कि अपने संपर्क में आने वाले का भी उद्धार करता है। इसके विरुद्ध तामसी वृत्तियाँ मनुष्य को पतनोन्मुखी करती हैं उनका मजाक करती हैं।

एक पतनोन्मुख व्यक्ति समाज और राष्ट्र के लिए भी बहुत ही घातक सिद्ध होता है। इसलिए समाज सुधारक और धार्मिक नेता समय-समय पर दुष्प्रवृत्तियों की निंदा करते हैं और उन से बचने के लिए भी प्रेरणा देते हैं। मदिरापान और नशा सब बुराईयों की जड़ होते हैं।

मदिरापान बुराईयों की जड़ : किसी विद्वान् ने यह बात बिलकुल सत्य कही है कि मदिरापान सब बुराईयों की जड़ होती है। मदिरा मनुष्य को असंतुलित बनाती है। शराबी व्यक्ति से किसी भी समाज की बुराई की अपेक्षा की जा सकती है। इसी कारण से हमारे शास्त्रों में मदिरापान को पाप माना जाता है।

शुरू में तो व्यक्ति शौक के तौर पर नशा करता है। उसके दोस्त उसे मुफ्त में शराब पिलाते हैं। कुछ लोग ये बहाना बनाते हैं कि वे थोड़ी-थोड़ी दवाई की तरह शराब को लेते हैं लेकिन बाद में उन्हें लत पड़ जाती है। जिन लोगों को शराब पीने की आदत पड़ जाती है उनकी शराब की आदत फिर कभी भी नहीं छूटती।

शराबी व्यक्ति शराब को पीकर विवेकशून्य हो जाता है और बेकार ,असंगत और अनिर्गल प्रलाप करने लगता है। उसकी चेष्टाओं में अशलीलता का समावेश होने लगता है। वह शिक्षा , सभ्यता , संस्कार और सामाजिक मर्यादा को तोडकर अनुचित व्यवहार करने लगता है। गाली -गलोंच और मारपीट उसके लिए आम बात हो जाती है।

मदिरापान पारिवारिक बरबादी का कारण : कहने को तो कम मात्रा में शराब दवाई का काम करती है। डॉ और वैद्य भी इसकी सलाह देते हैं लेकिन ज्यादा तो प्रत्येक वस्तु का बुरा है। ज्यादा पीने से ये शराब जहर बन जाती है। नशे की लत से हमने बड़े-बड़े घरों को उजड़ते हुए देखा है।

जिस पैसे को व्यक्ति खून-पसीना एक करके सुबह से लेकर शाम तक कमाता है जिसके इंतजार में पत्नी और बच्चे बैठे होते हैं वह नशे की हालत में लडखडाता हुआ घर पहुंचता है। पड़ोसी उसे देखकर उसका मजाक उड़ाते हैं ,मोहल्ले वाले उसकी बुराई करते हैं लेकिन बेचारी पत्नी कुछ नहीं कह पाती है। वह केवल एक बात से डरती रहती है कि उसका शराबी पति उसे आकर बहुत पीटेगा। इसलिए वह बेचारी दिल पर पत्थर रखकर जीवन को गुजार देती है।

विषैली शराब के दुष्परिणाम : विषैली शराब के दुष्परिणाम को रोज अख़बारों में पढ़ा जा सकता है। आर्थिक संकट होने की वजह से वह घटिया शराब पीने लगता है। शराब वाले भी ज्यादा पैसे कमाने के लिए शराब में मिलावट कर देते है। इस तरह की मिलावटी शराब हजारों की जान ले चुकी है तब भी यह प्रक्रिया समाप्त नहीं हुई है।

पुलिस और सरकार की आँखों के नीचे यह काम बहुत ही तेजी से चल रहा है। लोग शराब पी रहे हैं और मर रहे हैं। समाचार पत्र छप रहे हैं और सब कुछ हो रहा है। सिनेमा में भी बार-बार इस बात को बताया जा रहा है लेकिन सरकार इसके विरुद्ध कदम ही नहीं उठा रही है। इसका कारण यह है की शराब बेचने वालों को राजनेताओं का संरक्षण मिला हुआ है।

नशाबन्दी कानून के लाभ : पश्चिमी सभ्यता के अन्धानुकरण ने शराब सेवन को बहुत ही बढ़ावा दिया है। शराब को पश्चिमी राष्ट्र के लोगों के लिए अनुकूल माना गया है क्योंकि वहाँ पर सर्दी अधिक पडती है। हमारा भारत एक कृषि प्रधान देश है। शराब को यहाँ के वातावरण के प्रतिकूल माना जाता है।

प्राचीन काल में मदिरालयों के सामने धरने दिए जाते थे। गाँधी जी ने इसके विरुद्ध रोजगार अभियान चलाया था। नशे से होने वाली हानियों को सामने रखकर भारत सरकार ने नशाबन्दी कानून बनाया था। इस कानून के अनुसार सिर्फ वो लोग शराब बेच सकते थे जिनके पास लाईसेंस होते थे। मद्य-निषेध के लिए समय-समय पर अनेक प्रयास किये गये है।

उपसंहार : देश में नशाबन्दी के बहुत से लाभ हो सकते हैं। हमारे बहुत से बड़े-बड़े नेता चारित्रिक पतन के लिए बार-बार चीखते-चिल्लते हैं। नशाबन्दी कानून के लागु होने से उन्हें रोना नहीं पड़ेगा। देश खुद सुधरने लगेगा और हजारों घर उजड़ने से बच जायेंगे।

देश सामूहिक शक्ति प्राप्त कर लेगा। इससे लोग चरित्रवान और बलवान बनेंगे। तामसी वृत्ति समाप्त हो जाएगी और सात्विक वृत्ति बढने लगेगी। इससे धर्म और कर्तव्य की भावना विकसित होगी।

नशा मुक्ति पर निबंध-Essay on Nasha Mukti In Hindi

Short Essay on Nasha Mukti in Hindi Language – नशा मुक्ति पर निबंध ( 200 words )

आज के युवाओं में नशे के सेवन का प्रचलन बहुत ज्यादा देखने को मिलता है। वह शराब, गुटखा , सीगरेट आदि नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। युवाओं का जीवन अंधकार में है। नशे में रहने वाला व्यक्ति अस्थाई रूप से असंवेदनशील रहता है। जिस व्यक्ति को नशे की लत लग जाती है वह अपनी पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक छवी को खो बैठता है। आज के युवा नशा करने को फैशन और बड़े गर्व की बात समझते हैं। नशे में धुत व्यक्ति अपने ही घर में चोरी तक कर बैठते हैं। नशा बहुत से संगीन अपराधों को जन्म देता है।

युवाओं और देश के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए लोगों को नशे के जाल से निकालना होगा। इसके लिए बहुत से नशा मुक्ति केंद्र भी खोले गए हैं। टीवी, पत्रिका आदि के माध्यम से लोगों को नशे से होने वाली हानियों के प्रति जागरूक करना होगा। नशा कर रहें लोगो और नशीले पदार्थ खरीदने और बेचने वालों को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए। देश को नशा मुक्त करने के लिए परिवार, समाज और देश को मिलकर कोशिश करनी होगी और नशे में फँस चुके व्यक्ति को प्यार और सहानुभूति से ही नशे से मुक्ति दिलानी होगी।

Essay on Nasha Mukti in Hindi Language – नशा मुक्ति पर निबंध ( 400 words )

आज के आधुनिक समस में लोग नशा करने के आदि होते जा रहें हैं। वह शराब, सिगरेट, तंबाकू, चरस आदि नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। नशे ने हमारे पूरे देश को घेर लिया है और लोगों की जिंदगी में अंधकार कर दिया है। ज्यादातर नशे का सेवन युवाओं में देखा जाता है क्योंकि वह विदेशों की संस्कृति को अपनाना चाहते हैं। वह नशा करने को फैशन समझते है और गर्व महसूस करते हैं। नशे के वजह से देश के युवा अंधकार में है और देश का भविष्य भी सुरक्षित नहीं है।

नशा करने वाला व्यक्ति अपना मान सम्मान सब कुछ खो देता है। वह अपनी पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति को खराब कर लेता हैं। नशे की लत में पड़कर यह लोग पहले धन देकर नशीले पदार्थ खरीदते हैं। बाद में घर के सामान आदि भी बेचने लगते है। नशे की लत में पड़ा हुआ मनुष्य अस्थाई रूप से असंवेदनशील हो जाता है। नशे की लत के चलते लोग बहुत से अपराधों को भी अंजाम देते हैं। वह चोरी छिपे भी विदेशों से नशीले पदार्थ मंगवाते है। नशा बहुत सी गंभीर बिमारियों को जन्म देता है। इसकी वजह से लीवर और अमाशय कमजोर होता है। कैंसर जैसी गंभीर बिमारियाँ भी इसी से उत्पन्न होती है।

लोगों को नशे से मुक्त करना उनके और देश के भविष्य के लिए बहुत ही जरूरी है। इसके लिए बहुत से नशा मुक्ति केंद्र भी खोले गए है। देश को नशा मुक्त बनाने के लिए हमें और सरकार को मिलकर प्रयास करना होगा। लोगों को नशे से होने वाली हानियों के बारे में जागरूक करना होगा। संचार माध्यम जैसे की टीवी, अखबार और पत्रिकाओं के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए। नशीले पदार्थों का आयात भारत में बंद किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

यदि कोई फिर भी नशा करता हुआ या नशीले पदार्थ बेचता या खरीदता हुआ पाया जाता है तो उसे सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए। अगर देश के युवा नशा मुक्त होंगे और उनका भविष्य उज्जवल होगा तभी तो देश की उन्नति होगी। नशे में पड़े हुए व्यक्ति को प्यार और सहानुभूति से ही नशे से मुक्ति दिलाई जा सकती है। परिवार, समाज और देश के लोग मिलकर ही देश को नशा मुक्त बनाने में सहायता कर सकते हैं। सभी अवैध ठेके बंद किए जाने चाहिए। देश की सबसे बड़ी संपति उसके युवा होते है और उसकी समृद्धि के लिए युवा नशे से मुक्त होने चाहिए।

हम आशा करते हैं कि आप इस निबंध ( Essay on Nasha Mukti in Hindi – नशा मुक्ति पर निबंध ) को पसंद करेंगे।

 

नशा मुक्ति पर निबंध-Essay on Nasha Mukti In Hindi

जीवन दो विपरीत ध्रुवों के बीच गतिमान रहता है। सुख और दुख, लाभ और हानि, यश और अपयश तथा जीवन और मृत्यु। ये कभी अलग न होने वाले दो किनारे हैं। सुख के समय में आनंद और उल्लास, हँसी और कोलाहल जीवन (essay on nasha mukti in hindi) में छा जाते हैं तो दुख में मनुष्य निराश होकर रूदन करता है। नैराश्य के क्षणों में बोझ और दुख को भुलाने के लिए वह उन मादक द्रव्यों का सहारा लेता है, जो उसे दुखों की स्मृति से दूर बहा ले जाते हैं। ये मादक द्रव्य ही नशा कहे जाते हैं। मादक द्रव्यों को लेने के लिए आज केवल असफलता और निराशा ही कारण नहीं बने हैं, अपितु रोमांच, पाश्चात्य दुनिया की नकल और नशे के व्यापारियों की लालची प्रवृत्ति भी इसमें सहायक होती है।

नशाखोरी : Essay on Nasha Mukti in Hindi

नशीले पदार्थ वे मादक और उत्तेजक पदार्थ होते हैं। जिनका प्रयोग करने से व्यक्ति अपनी स्मृति और संवेदन-शीलता अस्थायी रूप में खो देता है। नशीले पदार्थ स्नायु तंत्र को प्रभावित करते हैं और इससे व्यक्ति उचित-अनुचित, भले-बुरे की चेतना खो देता है। उसके अंग-प्रत्यंग शिथिल हो जाते हैं, वाणी लड़खड़ाने लगती है, शरीर में कंपन होने लगता है। आँखें असामान्य हो जाती हैं। नशा किए हुए व्यक्ति को सहजता से पहचाना जाता है। नशीले पदार्थों में आज तंबाकू भी माना जाता है, क्योंकि इससे शरीर पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। लेकिन विशेष रूप से जो नशा आज के युग में व्याप्त है, उसमें- चरस, गांजा, भांग, अफीम, स्मैक हेरोइन जैसी ड्रग्स उल्लेखनीय हैं। शराब भी इसी प्रकार का जहर है, जो आज भी सबसे अधिक प्रचलित है।

शराब जैसे नशीले पदार्थ का प्रचलन तो समाज में बहुत पहले से ही था, लेकिन आधुनिक युग में पाश्चात्य संस्कृति से नशे को नए रूप मिले हैं। मारफीन, हेरोइन तथा कोकीन जैसे संवेदन मादक पदार्थ इनके उदाहरण हैं। इस नशे के व्यवसाय के पीछे आज अनेक राष्ट्रों की सरकार का सीधा संबंध होता है, जिनसे बड़े-बड़े अधिकारी वर्ग भी सम्मिलित होते हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैले नशे के व्यवसायियों का जाल बहुत ही संगठित होता है। पाश्चात्य देशों में ‘हिप्पी वर्ग‘ का उदय इस नशे के सेवन करने वाले लोगों के रूप में हुआ है। आज के भौतिकवादी जीवन में नशाखोरी के अनेक कारण हैं। आज के व्यस्त मशीनी जीवन में घर में बच्चों को परिवार का साथ और प्यार न मिलने से अकेलेपन की प्रवृत्ति ने इस नशे को अपनाया। स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों में होस्टल में रहने वाले विद्यार्थी इसके शिकार बन जाते हैं। इसके पीछे या तो नशे के व्यापारीयों का जाल होता है या अपने व्यक्तिगत कारणों से ये लोग नशे की ओर आकर्षित होते हैं। धनी परिवार के लड़कों को इस जाल में फँसाया जाता है और वे कभी-कभी धन के आधिक्य से भी तथाकथित झूठी शान दिखाने के लिए इस ओर मुड़ जाते हैं। उच्च संपन्न वर्ग में शराब का नशा तो प्रायः उनके स्तर का द्योतक और प्रतीक बन जाता है। भारत जैसे देश में शराब प्रमुख नशा माना जाता है, लेकिन आज की युवा पीढ़ी इन नशे के नए रूपों के जाल में भी फँस गई है। युवा-वर्ग इस ओर अपनी बेकारी और असफलता के कारण भी आकर्षित हुआ है। दुखी और निराश युवक नशे का सहारा लेकर अपराधी प्रकृति के हो जाते हैं। आरंभ में ये दूसरे लोगों को नशा बेचकर धन भी कमाते हैं, लेकिन जब इस घेरे में घिरकर असहाय हो जाते हैं तो घर का सामान चुराकर, चोरी और अन्य साधनों से धन जुटाकार अपनी नशे की लत बुझाते हैं। संपन्न वर्ग के युवक भी इस अपराध में सम्मिलित हो जाते हैं।

शराब की लत पारिवारिक, शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक सभी स्तरों पर अपना कु-प्रभाव दिखाती है। इससे व्यक्ति के स्नायु संस्थान प्रभावित होते हैं, निर्णय और नियंत्रण शक्ति कमजोर होती है। आमाशय, लीवर और हृदय प्रभावित होते हैं। शराबी चालक सड़क पर हत्यारा बनकर निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतारता है। पत्नी के आभूषण बेचता है, बच्चों की परवरिश और शिक्षा का उचित प्रबंध नहीं कर पाता है और नशे की हालत में सड़कों और नालियों में गिरकर आत्मसम्मान भी बेचता है तथा दिवालिया भी बन बैठता है। लज्जा को त्याग कर अनैतिक और असामाजिक कर्मों की ओर भी उन्मुख होता है। संवेदन मादक पदार्थ हृदय, मस्तिष्क, श्रवण शक्ति, स्नायु, आँख आदि पर अपना प्रभाव दिखाते हैं और संवेदन क्षमता को अस्थायी रूप में मंद तथा विकृत कर देते हैं। एक बार इस नशे का लत पड़ने पर वे निरंतर इसमें धँसते चले जाते हैं और इसकी माँग बढ़ती ही चली जाती है। इस माँग को पूरा करने के लिए वह अपराधी कार्यों में भी भाग लेने लगता है। अनेक घर और परिवार इस भयावह नशे से उजड़ गए हैं और कई युवक जीवन से ही हाथ धो बैठते हैं। इन युवकों का प्रयोग अनेक असामाजिक संगठन भी करते हैं। आज के आतंकवाद फैलाने में, विनाशकारी हथियारों की खरीदारी में भी इनका हाथ रहता है। बड़े पैमाने पर ये हत्याएँ, लूट-पाट, आगज़नी तथा दंगे-फसाद करवा कर राष्ट्र की एकता के लिए गंभीर चुनौती उत्पन्न करते हैं।

इस दुष्प्रवृत्ति को रोकने के लिए (nasha mukti upay) सरकार और जनता दोनों का सक्रिय सहयोग ही सफल हो सकता है। सरकार में भ्रष्ट लोगों और अधिकारियों, जो इस अपराध में भागीदार होते हैं, को यदि कड़ी सजा दी जाए तो जनता के लिए यह एक उदाहरण और भय का कारण बन जाएगा। बड़े से बड़े गिरोह और व्यापारियों को भी कड़े दंड दिए जाने आवश्यक हैं। कठोर कानून बनाना और कठोरता से उनका पालन करना भी नितांत आवश्यक है। दोषी व्यक्ति को किसी भी रूप में, चाहे वह कोई भी हो, क्षमा नहीं करना चाहिए। संचार माध्यम, टी.वी., सिनेमा, पत्र-पत्रिकाएँ आदि भी इसके प्रति जनमत तैयार कर सकते हैं और लोगों की मानसिकता बदल सकते हैं। इसके लिए अनेक समाज सेवी संस्थाएँ, जो सरकारी और गौर-सरकारी रूप में कार्य करती हैं, महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। इस नशे में प्रवृत्त लोगों को, सहानुभूति और प्यार के द्वारा ही सही धीरे-धीरे रास्ते पर लाया जा सकता है। उनकी मनः स्थिति को बदलना और उन्हें सबल बनाकर तथा नशा विरोधी केंद्रों में उनकी चिकित्सा करवा कर उन्हें नया जीवन दिया जा सकता है।

भारत जैसे विकासशील देशों में इस प्रकार की प्रवृत्ति देशघाती होती है (nasha mukt bharat) और इससे युवाशक्ति को रचनात्मक कार्यों के प्रति प्रोत्साहित करना कठिन हो जाता है। अतः परिवार, देश और समाज सभी के सहयोग से ऐसे दिशाहीन युवकों को सुमार्ग पर लाया जा सकता है। इसके लिए विद्यालयों में इस प्रकार की शिक्षा की व्यवस्था अवश्य होनी चाहिए, ताकि इस आत्मधाती प्रवृत्ति से युवा पीढ़ी को परिचित कराया जाए और इसके विनाश को सम्मुख रख कर उन्हें इससे दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा सके। व्यक्ति, समाज, सरकार और अधिकारियों के सहयोग से ही यह संभव हो सकता है।

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नशा मुक्ति पर निबंध-Essay on Nasha Mukti In Hindi

नशाखोरी का देश व उसके युवाओं पर दुष्परिणाम, तंबाकू मुक्ति दिवस व विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2018 (Nashakhori ka samaj and yuva par prabhav | World No Tobacco Day (WHO) theme, activities in hindi)

पश्चिमी सभ्यता ने हमारे देश किस तरह अपनी ओर आकर्षित किया, इससे सभी भलीभांति परिचित है. इसकी ओर देश के युवा सबसे अधिक आकर्षित होते है, और अपनी भारतीय संस्कृति छोड़ पाश्चात्य संस्कृति के पीछे भागते है. नशाखोरी भी इसी का उदाहरण है. भारत देश की बड़ी मुख्य समस्याओं में से एक युवाओं में फैलती नशाखोरी भी है. देश की जनसँख्या आज 125 करोड़ के पार होते जा रही है, इस जनसँख्या का एक बड़ा भाग युवा वर्ग का है. नशा एक ऐसी समस्या है, जिससे नशा करने वाले के साथ साथ, उसका परिवार भी बर्बाद हो जाता है. और अगर परिवार बर्बाद होगा तो समाज नहीं रहेगा, समाज नहीं रहेगा तो देश भी बिखरता चला जायेगा. इन्सान को इस दलदल में एक कदम रखने की देरी होती है, जहाँ आपने एक कदम रखा फिर आप मजे के चलते इसके आदि हो जायेगें, और दलदल में धसते चले जायेगें. नशे के आदि इन्सान, चाहे तब भी इसे नहीं छोड़ पाता, क्युकी उसे तलब पड़ जाती है, और फिर तलब ही उसे नशा की ओर और बढ़ाती है.“नशा नाश है”

तंबाकू मुक्ति दिवस व विश्व तंबाकू निषेध दिवस कब मनाया जाता है? (World No Tobacco Day or WHO  Day 2018 Date)

देश के लोगो को नशे से मुक्ति के लिए जागरूक करने व देश के युवा वर्ग को उनकी जिम्मेदारी का अहसास करने के लिए हर साल देश में 31 मई को तंबाकू मुक्ति दिवस व विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है.

इस साल 2018 में भी इसे 31 मई, दिन गुरुवार को मनाया जायेगा.

हर रोज नशा के सेवन से मरने वालों लोगों की संख्या –

क्रमांक प्रदेश का नाम मरने वालों की संख्या
1. तमिलनाडु 205
2. पंजाब 186
3. हरियाणा 76
4. केरल 64
5. मध्यप्रदेश 40

नशा की अधिकता से मरने वालों की संख्या में तमिलनाडु सबसे आगे है.

नशा कई तरह का होता है, जिसमें शराब, सिगरेट, अफीम, गांजा, हेरोइन, कोकीन, चरस मुख्य है. नशा एक ऐसी आदत है, जो किसी इन्सान को पड़ जाये तो, उसे दीमक की तरह अंदर से खोखला बना देती है. उसे शारीरिक, मानसिक व आर्थिक रूप से बर्बाद कर देती है. जहरीले और नशीले पदार्थ का सेवन इन्सान को बर्बादी की ओर ले जाता है. आजकल नशा का आदि छोटे बच्चे भी हो रहे है, युवाओं के साथ साथ बड़े बुजुर्ग भी इसकी गिरफ्त में है, लेकिन सबसे अधिक ये युवा पीढ़ी को प्रभावित कर रहा है. युवा पीढ़ी के अंदर सिर्फ लड़के ही नहीं, लड़कियां भी आती है. नशा करने वाला व्यक्ति घर, देश, समाज के लिए बोझ बन जाता है, जिसे सब नीचे द्रष्टि से देखते है. नशा करने वाले व्यक्ति का न कोई भविष्य होता है, न वर्तमान, उसके अंत में भी लोग दुखी नहीं होते है. देश में जो आज आतंकबाद, नक्सलवाद, बेरोजगारी की समस्या फ़ैल रही है, इसका ज़िम्मेदार कुछ हद तक नशा भी है. नशा के चलते इन्सान अपना अच्छा बुरा नहीं समझ पाता और गलत राह में चलने लगता है.

नशाखोरी का समाज में फैलने का कारण (Nashakhori Reason) –

  • शिक्षा की कमी – देश में शिक्षा की कमी की समस्या आज भी व्याप्त है, सरकार इसकी ओर कड़े कदम उठा रही है. शिक्षा का महत्व हमारे जीवन में बहुत है, लेकिन कई लोग इसे नहीं समझते है, और शिक्षा की कमी के चलते कई दुष्प्रभाव सामने आते है. जो लोग कम पढ़े लिखे होते है, वे इसके दुष्प्रभाव को नहीं समझते है, और इसकी चपेट में आ जाते है. गाँव में कम पढ़े लिखे लोग कई तरह के नशा करते है, जिससे उनका परिवार तक नष्ट हो जाता है.
  • नशा संबधी पदार्थो की खुलेआम बिक्री – हम व हमारे देश की सरकार नशा के दुष्परिणाम को जानती है, लेकिन फिर भी इसकी बिक्री खुलेआम होती है. नशा के पदार्थ आसानी से कही भी मिल जाते है, जिससे इसे देखदेख कर भी लोग इसकी ओर आकर्षित होते है.
  • संगति का असर – स्कूल के बच्चों में ये नशाखोरी संगति के चलते फैलती है. कम उम्र में ये बच्चे भटक जाते है, और ऐसे लोगों के साथ संगती करते है, जो नशा को अपना जीवन समझते है. बच्चों के अलावा युवा को भी कई बार संगति ही बिगाड़ती है. युवा पीढ़ी के कई ऐसे दोस्त होते है, जो नशा करते है, और देखा देखि में वे भी इसे करने लगते है. जो लोग इस नशा को करते है, वे अपने साथ वालों को भी इसे करने के लिए प्रेरित करते है.
  • मॉडर्न बनने के लिए – नशा को कुछ लोग मॉडर्नता का माध्यम मानते है. उनका मानना होता है, नशा करने से लोग उन्हें एडवांस समझेगें, और उनकी वाह वाही होगी. नशा को अमीरों की शान भी माना जाता है, उन्हें लगता है, नशा करने से हमारा रुतवा सबको दिखेगा. जो व्यक्ति शिक्षित है, वो भी नशा से दूर नहीं है, उनका मानना है कि नशा करने से उनकी बुद्धि में विकास, याददाश और आतंरिक शक्ति में विकास होता है.
  • पाश्चात्य संस्कृति – पाश्चात्य सभ्यता में मादक पदार्थ को सामाजिक रूप से स्वीकारा गया है, जिससे यहाँ खुलेआम लोग इसे लेते है और इसकी खपत भी अधिक होती है. इसे देख देख हमारे देश के युवा अपने आप को पाश्चात्य संस्कृति में ढालने के लिए नशा को अपनाते है. उनका मानना होता है, नशा उन्हें पाश्चात्य बनाएगा.
  • सिनेमा का प्रभाव – हमारे सिनेमा जगत का नशाखोरी फ़ैलाने में बहुत बड़ा हाथ है. टीवी, फिल्मों में खुलेआम शराब, सिगरेट, गुटखा खाते हुए लोगों को दिखाया जाता है, जिससे आम जनता विशेषकर बच्चे और युवा प्रभावित होते है, और उसे अपने जीवन में उतार लेते है. टीवी पर तो इसके बड़े बड़े विज्ञापन भी आते है, जिस पर हमारे देश की सरकार भी कोई कदम नहीं उठा रही है. युवा पीढ़ी टीवी पर देखती है, कैसे किसी का दिल टूटने पर जब गर्लफ्रेंड या पत्नी छोड़ कर चली जाती है तो हीरो शराब पीने लगता है, बस वो भी इसे देख अपने जीवन में उतार लेता है. गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप होने पर वो भी देवदास बन शराब पीने लगता है.
  • तनाव, परेशानी – किसी तरह की पारिवारिक परेशानी, समस्या के कारण भी इन्सान नशा का आदि हो जाता है. अपने गम को भुलाने के लिए इन्सान नशा करने लगता है, लेकिन इससे वो नशा के द्वारा दूसरी समस्या को बुलावा दे देता है. बेरोजगारी, गरीबी, कोई बीमारी या किसी पारिवारिक समस्या के चलते इन्सान नशा की ओर रुख करता है. मूड को बदलने के लिए भी लोग नशा करना पसंद करते है, उनके हिसाब से नशा करने के बाद उन्हें अपने दुःख दर्द याद नहीं रहते और उन्हें सुख की अनुभूति होती है.

नशाखोरी का देश व उसके युवाओं पर दुष्परिणाम (Nashakhori ka samaj and yuva par prabhav in hindi)

  • गरीबी बढ़ती है – देश में कई ऐसे परिवार है जो एक वक्त की रोटी के लिए रोते है, उन्हें बिना खाना खाए सोना होता है. नशा का आदि इन्सान भले खाना न खाए, लेकिन उसके लिए नशा बहुत जरुरी होता है. वह अपनी दिन भर की कमाई नशा में गवां देता है, यह तक नहीं सोचता की कि उसके बच्चे भूखे है. जो इन्सान पैसा नहीं कमाता, अपने घर के पैसों को इस नशे में लगा देता है, जिससे घर के दुसरे लोगों के लिए समस्या खड़ी हो जाती है. रोज रोज के इस खर्चे से घर में गरीबी आने लगती है, और घर में खाने पीने तक की समस्या हो जाती है.
  • नशा एक ऐसी समस्या है, जो दूसरी समस्या को न्योता देती है. इससे गरीबी आती है, बेरोजगारी, आतंकवाद फैलता है. देश में अपराधियों की संख्या बढ़ने लगती है|
  • घरेलु हिंसा को बुलावा – नशा करने वाला इन्सान अपना आपा खो देता है, उसे याद नहीं होता है वो कहाँ है, क्या कर रहा है. नशा वाला इन्सान घरेलु हिंसा को दावत देता है, वो आने घर में अपनी बीवी, बच्चों को मारने लगता है.
  • अपराधी बना देता है – नशा एक अपराध से कम नहीं है, और नशा वाला इन्सान एक अपराधी. नशे की तलब को पूरा करने के लिए इन्सान चोरी करने लगता है, और छोटे छोटे अपराध कब बड़े अपराध में बदल जाते है पता ही नहीं चलता. अफीम, चरस, कोकीन का नशा लेने के बाद इन्सान के अंदर उत्तेजना आ जाती है, जिससे वो अपने काबू में नहीं रहता और इस नशे के बाद इन्सान चोरी, मृत्यु, हिंसा, लड़ाई-झगड़े, बलात्कार जैसे कामों को अंजाम देता है, जो उसे एक बड़ा अपराधी बना देता है. घर टूटते है
  • भविष्य नष्ट होता है – नशेबाज को नशे के अलावा कुछ नहीं दिखाई देता है. मैंने ऐसे कई किस्से सुने है, जहाँ नशा ने अच्छे खासे बने बनाये इन्सान को बर्बाद कर दिया है. नशा का आदि इन्सान अपना भविष्य नष्ट कर लेता है, उसे उससे कोई लेना देना होता है.
  • स्वास्थ्य संबधी समस्या – नशा की लगातार लत से शरीर नष्ट हो जाता है. तम्बाकू, शराब, सिगरेट अधिक पीने से शरीर में फेफड़े, गुर्दा, दिल, और न जाने क्या क्या ख़राब होने लगता है. हम सबको पता है, धुम्रपान हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, फिर भी हम इसके आदि हो जाते है. धुम्रपान का धुँआ अगर सामने वाले व्यक्ति के शरीर में भी जाता है, तो उसे नुकसान पहुंचता है. इसी तरह गुटका जिस पर लिखा भी होता है कि इसे खाने से स्वास्थ्य संबधी समस्या होती है फिर भी लोग मजे से इसे खाते है, मुहं का कैंसर, गले का कैंसर सब नशा के कारण होते है. नशा करने से व्यक्ति की उम्र घटती जाती है, और ये कई शोध के द्वारा प्रमाणित हो चूका है.
  • अलग अलग नशा पदार्थ अलग अलग नुकसान देते है. शराब पीने से लीवर, पेट ख़राब होता है, और लीवर कैंसर भी होता है. गुटखा खाने से मुहं में कैंसर, अल्सर की परेशानी होती है. गांजा, भांग से इन्सान का दिमाग खराब होने लगता है, इससे वो पागल भी हो सकता है.
  • परिवार टूट जाते है – नशेबाज इन्सान अपने परिवार से ज्यादा अपने नशे को तवज्जो देते है, जिससे परिवार टूट जाते है. नशाखोरी, आज के समय में परिवार बिखरने की सबसे बड़ी वजह है. नशे के चलते पति पत्नी में झगड़े बढ़ते है, जिसका असर बच्चों पर भी होता है. कई बार तो ये बच्चे बड़े होकर अपने बड़ों की तरह ही काम करते है, और नशा को अपना लेते है.

मादक पदार्थ का सेवन इन्सान को घटक से घटक बना देता है, वो अपनी तलब को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. हमारे देश की सरकार देश की इस बड़ी समस्या की ओर उतनी नजर नहीं की हुई है, जितनी उसे करना चाइये. सरकार को नशामुक्ति के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए,

  • सरकार को खुलेआम मादक पदार्थ का सेवन पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए.
  • सिनेमा, टीवी में इसके प्रयोग को वर्जित करना चाहिए.
  • नशाखोरी की समस्या के बारे में लोगों बताने के लिए कैम्पेन, सभा, आयोजित करनी चाहिए. गाँव, शहर सभी जगह लोगों को इस समस्या के बारे में खुलकर बताना चाइये.
  • नशाखोरी सिर्फ भारत देश की ही नहीं, पुरे विश्व की समस्या है तो इससे निपटने के लिए, सभी देखों को इकठ्ठे होकर काम करना चाहिए.
  • नशामुक्ति केंद्र, समझाइश कार्यालय अधिक से अधिक खोलें जाएँ.

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