नजरिया हिंदी कहानी Hindi Kahani Story

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नजरिया हिंदी कहानी Hindi Kahani Story

हम जैसा चश्मा पहनेंगे, दुनिया वैसी दिखेगी. अक्सर हम चीजों को उस तरह से नहीं देखते जैसा वह है, बल्कि उसे हम अपने नजरिये से देखते हैं. इससे जुड़ी एक पुरानी कहानी है.

नजरिया

नजरिया हिंदी कहानी

एक बुद्धिमान व्यक्ति अपने गांव के बाहर बैठा हुआ था. एक यात्री आया और उससे पूछा, ” इस गांव में किस तरह के लोग रहते हैं क्योंकि मैं अपने वर्तमान गाँव से स्थानांतरित होकर दूसरे गाँव में बसना चाहता हूँ.”

उस बुद्धिमान व्यक्ति ने पूछा, “आपके गाँव में किस तरह के लोग रहते हैं, जहाँ से आप स्थान बदलना चाहते हो?” उस आदमी ने कहा, “वे मतलबी, क्रूर और कठोर स्वभाव के लोग हैं.” तब बुद्धिमान व्यक्ति ने कहा, “इस गाँव में भी उसी तरह के लोग रहते हैं.”

कुछ समय बाद एक अन्य यात्री उसी बुद्धिमान आदमी के पास आया और वही सवाल पूछा. तब बुद्धिमान व्यक्ति ने उससे पूछा, “आपके गाँव में किस तरह के लोग रहते हैं जहाँ से आप स्थान बदलना चाहते हो?” और उस यात्री ने जबाव दिया, ” वे लोग बहुत विनम्र, सदाचारी और अच्छे स्वभाव के हैं.“बुद्धिमान व्यक्ति ने कहा, “आपको यहाँ भी उसी तरह के लोग मिलेंगे.”

इस कहानी से  यह स्पष्ट होता है कि आम तौर पर हम दुनिया को उस तरह से नहीं देखते जैसा कि वह है. हम उसे अपने नजरिये से देखते हैं. ज्यादातर दूसरे लोगों का हमारे प्रति व्यवहार हमारे खुद के व्यवहार का प्रतिक्रिया मात्र होता है. हमारा लोगों के प्रति जैसा नजरिया होगा, लोगों का भी हमारे प्रति वैसा ही नजरिया होगा.

कहानी से सीख

इसलिए हमें सबसे पहले अपने नजरिये पर विचार करना चाहिए. क्या वह सही है? इसका सटीक और निष्पक्ष जबाव आपको एक ही जगह मिल सकता है – वह है आपका अंतर्मन. जब भी कभी आपको लगे कि हमारा नजरिया या दृष्टिकोण सही है या फिर इसमें सुधार की कोई गुंजाइश है तो आप अपने मन से जरुर पूछे.

 

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धन्यवाद!

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