दहेज प्रथा पर निबंध-Dahej Pratha In Hindi | Hindigk50k

दहेज प्रथा पर निबंध-Dahej Pratha In Hindi

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दहेज प्रथा पर निबंध-Dahej Pratha In Hindi

दहेज प्रथा पर निबंध (Dahej Pratha In Hindi) :

भूमिका : मानवीय समाज में विकास और सामाजिक जीवन की शुरुआत के लिए विवाह को एक पावन और अनिवार्य बंधन के रूप में स्वीकार किया गया है। वैवाहिक जीवन में नर-नारी एक दुसरे के पूरक बनकर जीवन को और मधुर बनाते हैं और भारतीय संस्कृति में जो पितृ ऋण होता है उसे वंश वृद्धि के रूप में बढ़ाते हैं।

एक पुरुष के जीवन में स्त्री के शीतल जल की तरह होती है जो उसके जीवन को अपने प्यार और सहयोग से सुखी और शांतिपूर्ण बनाती है। लेकिन आज भारत के समाज में जो अनेक कुरीतियाँ फैली हुई हैं वो सब भारत के गौरवशाली समाज पर एक कलंक के समान हैं।

जाति , छूआछूत और दहेज जैसी प्रथाओं की वजह से ही विश्व के उन्नत समाज में रहने पर भी हमारा सिर शर्म से झुक जाता है। समय-समय से कई लोग और राजनेता इसे खत्म करने की कोशिश करते रहते हैं लेकिन इसका पूरी तरह से नाश नहीं हो पाया है। दहेज प्रथा दिन-ब-दिन और अधिक भयानक होती जा रही है।

जब हम समाचार पत्रों को पढ़ते हैं तो हमें ज्यादातर ऐसी खबरे मिलती हैं जैसे – सास ने बहु पर तेल छिडककर आग लगा दी , दहेज न मिलने की वजह से बारात लौटाई , स्टोव फट जाने की वजह से नवविवाहित स्त्री की मृत्यु हो गई। जब हम इन समाचारों को विस्तार से पढ़ते हैं तो हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। कभी-कभी हम यह सोचने के लिए बाध्य हो जाते हैं कि क्या कोई मनुष्य सच में इतना निर्मम और जालिम हो सकता है ?

दहेज प्रथा : दहेज शब्द अरबी भाषा के जहेज शब्द से निर्मित हुआ है जिसका अर्थ होता है सौगात। साधारणतया दहेज का अर्थ होता है – विवाह के समय दी जाने वाली वस्तुएँ। जब लडकी का विवाह किया जाता है तो वर पक्ष को जो धन , संपत्ति और सामान दिया जाता है उसे ही दहेज कहते हैं।

हमारे समाज के अनुसार विवाह के बाद लडकी को माता-पिता का घर छोडकर पति के घर जाना होता है। इस समय में कन्या पक्ष के लोग अपना स्नेह दर्शाने के लिए लडकी , लडकों के संबंधियों को भेंट स्वरूप कुछ-न-कुछ अवश्य देते हैं।

दहेज प्रथा का आरम्भ : ऐसा लगता है जैसे की यह प्रथा बहुत ही पुरानी है। प्राचीन काल से हमारे भारत में इस कथा का चलन होता आ रहा है। हमारे भारत में कन्यादान को एक धार्मिक कर्म माना जाता है। दहेज प्रथा का वर्ण हमारी लोक कथाओं और प्राचीन काव्यों में भी देखा जा सकता है।

प्राचीनकाल में बेटी को माता-पिता के आशीर्वाद के रूप में अपनी समर्थ शक्ति के अनुसार वस्त्र , गहने , और उसकी गृहस्थी के लिए सामान भेंट में दिया जाता था। इस दहेज का उद्देश्य वर वधु की गृहस्थी को सुचारू रूप से चलाना था। प्राचीनकाल में लडकी का मान-सम्मान ससुराल में उसके व्यवहार और संस्कारों के आधार पर तय किया जाता था न कि उसके लाए हुए दहेज पर।

सात्विक रूप : दहेज को एक सात्विक प्रथा माना जाता था। जब पुत्री अपने पिता के घर को छोडकर अपने पति के घर जाती है तो उसके पिता का घर पराया हो जाता है। उसका अपने पिता के घर पर से अधिकार खत्म हो है। अत: पिता अपनी संपन्नता का कुछ भाग दहेज के रूप में विदाई के समय अपनी पुत्री को दे देता है।

दहेज में एक और सात्विक भावना भी है। दहेज का एक सात्विक रूप कन्या का अपने घर में श्री समृद्धि की सूचक बने। उसके खाली हाथ को पतिगृह में अपशकुन माना जाता है। इसी वजह से वः अपने साथ कपड़े , बर्तन , आभूषण और कुछ ऐसे प्रकार के पदार्थों को साथ लेकर जाती है।

विकृत रूप : दहेज प्रथा आज के युग में एक बुराई का रूप धारण कर चुकी है। आज के समय में दहेज प्रेम पूर्वक देने की नहीं बल्कि अधिकार पूर्वक लेने की वास्तु बनता जा रहा है। आधुनिक युग में कन्या को उसकी श्रेष्ठता और शील-सौन्दर्य से नहीं बल्कि उसकी दहेज की मात्रा से आँका जाता है।

आज के समय में कन्या की कुरूपता और कुसंस्कार दहेज के आवरण की वजह से आच्छादित हो गये हैं आज के समय में खुले आम वर की बोली-बोली जाती है। दहेज में राशि से परिवारों का मुल्यांकन किया जाता है। पूरा समाज जिसे ग्रहण कर लेता है वह दोष नहीं गुण बन जाता है।

इसी के परिणाम स्वरूप दहेज एक सामाजिक विशेषता बन गयी है। दहेज प्रथा जो शुरू में एक स्वेच्छा और स्नेह से देने वाली भेंट होती थी आज वह बहुत ही विकट रूप धारण कर चुकी है। आज के समय में वर पक्ष के लोग धन-राशि और अन्य कई तरह की वस्तुओं का निश्चय करके उन्हें दहेज में मांगते हैं और जब उन्हें दहेज मिलने का आश्वासन मिल जाता है तभी विवाह पक्का किया जाता है।

इसी वजह से लडकी की ख़ुशी के लिए लडके वालों को खुश करने के लिए ही दहेज दिया जाता है। आज के समय में लोग धन का हिसाब लगाते हैं कि इतने सालों से हर महीने का कितना रुपया जमा होगा।

दहेज प्रथा के कारण : एक तरफ जहाँ पर वर पक्ष के लोगों की लोभी वृत्ति ने भी इस कुरीति को बहुत अधिक बढ़ावा दिया है। दूसरी जगह पर कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने बहुत कालाधन कमाया जिसकी वजह से वे बढ़-चढकर दहेज देने लगे। उनकी देखा-देख निर्धन माता-पिता भी अपनी बेटी के लिए अच्छे वर ढूंढने लगे और उन्हें भी दहेज का प्रबंध करना पड़ा।

दहेज का प्रबंध करने के लिए निर्धन माता-पिता को बड़े-बड़े कर्ज लेने पड़े , अपनी संपत्ति को बेचना पड़ा और बहुत से कठिन परिश्रम करने पड़े लेकिन फिर भी वर पक्ष की मांगें बढती ही चली गयी । दहेज प्रथा का एक सबसे प्रमुख कारण यह भी है कि लडकी को कभी बराबर ही नहीं समझा गया।

वर पक्ष के लोग हमेशा यह समझते हैं कि उन्होंने कन्या पक्ष पर कोई एहसान किया है। यही नहीं वे विवाह के बाद भी लडकी को पूरे मन से अपने परिवार का सदस्य स्वीकार नहीं कर पाते हैं। इसी वजह से वे बेचारी सीधी-साधी , भावुक , नवविवाहिता को इतने कठोर दंड देते हैं।

दहेज प्रथा के दुष्परिणाम : दहेज प्रथा की वजह से ही बाल विवाह , अनमेल विवाह , विवाह विच्छेद जैसी प्रथाओं ने फिर से समाज में अपना अस्तित्व स्थापित कर लिया है। दहेज प्रथा की वजह से कितनी बड़ी-बड़ी समस्याएं आ रही हैं इसका अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता है।

जन्म से पहले ही गर्भ में लडकी और लडकों की जाँच की वजह से लडकियों को गर्भ में ही मरवा देते हैं जिसकी वजह से लडकों और लडकियों का अनुपात असंतुलित हो गया है। लडकियों के माता-पिता दूसरों की तरह दहेज देने की वजह से कर्ज में डूब जाते हैं और अपनी परेशानियों को और अधिक बढ़ा देते हैं।

लडके वाले अधिक दहेज मांगना शुरू कर देते हैं और दहेज न मिलने पर नवविवाहिता को तंग करते हैं और उसे जलाकर मारने की भी कोशिश करते हैं। कभी-कभी लडकी यह सब सहन नहीं कर पाती है और आत्महत्या करने के लिए विवश हो जाती है या फिर तलाक देने के लिए मजबूर हो जाती है।

दहेज न होने की वजह से योग्य कन्या को अयोग्य वर को सौंप दिया जाता है। जो कन्याएं योग्य होती हैं वे अपने धन के बल पर योग्य वरों को खरीद लेती हैं। माता-पिता अपने बच्चों की ख़ुशी के लिए गैर क़ानूनी काम भी करने से पीछे नहीं हट पाते हैं। आज के समय में लडकों और लडकियों की खुले आम नीलामी की जाती है।

आज के माता-पिता अपने सरकारी , अधिकारी और इंजीनियर लडके को लाखों से कम में नीलाम नहीं करते हैं जिसकी वजह से अनेक सामाजिक कुरीतियाँ भी उत्पन्न हो जाती हैं। रोज समाचार पत्र और पत्रिकाओं में पढ़ा जाता है कि दहेज न मिलने की वजह से लडकी पर उसके ससुराल वालों ने अमानवीय और क्रूर अत्याचार किये जिसकी वजह से आधुनिक पीढ़ी बहुत अधिक प्रभावित होती है।

उन्हें देखने को मिलता है कि स्टोव फटना , आग लगना , गैस या सिलिंडर से जलना यह सब कुछ सिर्फ नवविवाहिताओं के साथ ही होता है। आज की नारी जागृत , समानता , वैज्ञानिक दृष्टि , प्रगति और चहुमुखी विकास के इस युग में अपनी वास्तविकता की भावना से हटकर दहेज प्रथा एक तरह से दवाब डालकर लाभ कमाने का एक सौदा और साधन बनकर रह गया है। दहेज अपनी आखिरी सीमा को पार करके एक सामाजिक कलंक बन चूका है।

दहेज प्रथा का समाधान : अगर दहेज प्रथा को खत्म करना है तो उसके लिए खुद युवकों को आगे बढना चाहिए। उन्हें अपने माता-पिता और सगे संबंधियों को बिना दहेज के शादी करने के लिए स्पष्ट रूप से समझा देना चाहिए। जो लोग नवविवाहिता को शारीरक और मानसिक कष्ट देते हैं युवकों को उनका विरोध करना चाहिए।

दहेज प्रथा को खत्म करने के लिए नारी का आर्थिक दृष्टि से स्वतंत्र होना भी बहुत जरूरी होता है। जो युवती अपने पैरों पर खड़ी होती है उस युवती से कोई भी अनाप-शनाप नहीं कह सकता है। इसके अलावा वह पूरे दिन घर में बंद नहीं रहेगी और सास और नन्द के तानों से भी बच जाएगी।

बहु के नाराज होने की वजह से मासिक आय के हाथ से निकल जाने का डर भी उन्हें कुछ बोलने नहीं देगा। लडकियों को हमेशा लडकों के बराबर समझना होगा और उन्हें भी लडकों जितने ही अधिकार और शिक्षा भी देनी होगी। दहेज की लड़ाई को लड़ने में कानून भी हमारी सहायता कर सकता है।

जब से हमारा देश दहेज निषेध विधेयक बना है तब से वर पक्ष के अत्याचारों में बहुत कमी आ गयी है। दहेज प्रथा की बुराई को तभी खत्म किया जा सकता है जब युवक और युवतियां खुद जाग्रत होंगे। जो लोग दहेज देते और लेते हैं उन पर कड़ी से कड़ी कर्यवाई की जानी चाहिए और उन पर जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए।

विवाह में अधिक खर्च और अधिक बारातियों को रोकने का विधान था। लेकिन जब कानून को समाज का सहयोग नहीं मिल रहा हो तो कानून भी विवश हो गया है। दहेज प्रथा को सामाजिक चेतना और नैतिक जागृति के माध्यम से खत्म किया जा सकता है। अनेक प्रकार की स्वयं सेवी संस्थाओं के द्वारा दहेज प्रथा के विरुद्ध आन्दोलन चलाकर इसे कम कर सकते हैं।

युवतियां दहेज प्रथा को खत्म करने में विशेष योगदान दे सकती हैं वे अपने माता-पिता को दहेज न देने के लिए प्रेरित करें और लोभी व्यक्तियों से विवाह न करें। लोग दहेज का सख्ती से विरोध करें इसकी वजह से जो लोग दहेज की मांग करते हैं उनमें एक प्रकार से प्रेरणा उत्पन्न हो जायेगा। अगर बिना दहेज के विवाह के लिए उन्हें सरकार द्वारा प्रोत्साहन दिया जाये और उन्हें सम्मान और पुरुष्कृत करने से भी समाज में बहुत परिवर्तन किया जा सकता है।

उपसंहार : यह समस्या किसी एक पिता की नहीं बल्कि पुरे राष्ट्र की समस्या है। इसकी वजह से जीवन बगिया नष्ट हो जाती है। दहेज प्रथा हमारे समाज के लिए एक कोढ़ साबित हो रही है। दहेज को खत्म करने के लिए हमें अपनी मानसिकता को बदलना होगा। यह हमें यह याद दिलाती है कि हमें अपने आप को मनुष्य कहने का कोई अधिकार नहीं है।

जिस समाज में दुल्हनों को यातनाएं दी जाती हैं वह सभ्यों का नहीं बल्कि बिलकुल असभ्यों का समाज है। अब ही समय है कि हम सब मिलकर इस कुरीति को उखाडकर अपने आप को मनुष्य कहलाने का अधिकार वापस प्राप्त कर लें। मनुष्य को सभी कठिनाईयों का सामना करने के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए।

 

जानिए दहेज प्रथा को विस्तार से: Detailed Introduction to Dowry System:

दहेज प्रथा एक सामाजिक बीमारी है जो की आज कल समाज में काफी रफ़्तार पकडे गति कर रहा है| ये हमारे जीवन के मकसद को छोटा कर देने वाला प्रथा है| ये प्रथा पूरी तरह इस सोच पर आधारित है, की समाज के सर्व श्रेष्ठ व्यक्ति पुरुष ही हें और नारी की हमारे समाज में कोई महत्व भी नहीं है|

इस तरह की नीच सोच और समझ ही हमारे देश की भविष्य पर बड़ी रुकावट साधे बैठे हें|

दहेज प्रथा को भी हमारे समाज में लगभग हर श्रेणी की स्वीकृति मिल गयी है जो की आगे चल के एक बड़ी समस्या का रूप भी ले सकती है |

महात्मा गाँधी ने दहेज प्रथा के बारे में कहा था की

जो भी व्यक्ति दहेज को शादी की जरुरी सर्त बना देता है , वह अपने शिक्षा और अपने देश की बदनाम करता है, और साथ ही पूरी महिला जात का भी अपमान करता है | 

ये बात महात्मा गाँधी ने देश की आजादी से पहले कही थी| लेकिन आजादी के इतने साल बाद भी दहेज प्रथा को निभायी जाती है| हमारे सभ्य समाज के गाल पर इससे बड़ा तमाचा और क्या हो सकता है?

हम सभी ऊँचे विचारों और आदर्श समाज की बातें करते हें, रोज़ दहेज जैसी अपराध के खिलाफ चर्चे करते हें, लेकिन असल जिंदगी में दहेज प्रथा जैसी जघन्य अपराध को अपने आस पास देख के भी हम लोग अनदेखा कर देते हें| ये बड़ी ही शर्म की बात है|

दहेज प्रथा को निभाने वालों से ज्यादा दोषी इस प्रथा को आगे बढ़ते हुए देख समाज में कोई ठोस कदम नहीं उठाने वाले है|

 दहेज प्रथा एक गंभीर समस्या : Dowry System- A Serious Concern:

दहेज प्रथा सदियों से चलती आई एक विधि है जो की बदलते वक़्त के साथ और भी गहरा होने लगा है| ये प्रथा पहले के जमाने में केवल राजा महाराजाओं के वंशों तक ही सिमित था| लेकिन जैसे जैसे वक़्त गुजरता गया, इसकी जड़ें धीरे धीरे समाज के हर वर्ग में फैलने लगा| आज के दिन हमारे देश के प्रयात: परिवार में दहेज प्रथा की विधि को निभाया जाता है|

दहेज प्रथा लालच का नया उग्र-रूप है जो की एक दुल्हन की जिंदगी की वैवाहिक, सामाजिक, निजी, शारीरिक, और मानसिक क्षेत्रों पर बुरा प्रभाव डालता है, जो की कभी कभी बड़े ही भयंकर परिणाम लाता है|

दहेज प्रथा का बुरा परिणाम के बारे में सोच कर हर किसी का रूह काँपने लगता है, क्यूंकि इतिहास ने दहेज प्रथा से तड़पती दुल्हनों की एक बड़ी लिस्ट बना रखी है| ये प्रथा एक लड़की की सारी सपनो और अरमानो को चूर चूर कर देता है जो की बड़ी ही दर्दनाक परिणाम लाता है |

लगभग देश की हर कोने में ये प्रथा को आज भी बड़े ही बेजिजक निभाया जाता है|

ये प्रथा केवल अमीरों तक ही सिमित नहीं है, बल्कि ये अब मध्य बर्गियों और गरीबों का भी सरदर्द बन बैठा है|

सोचने की बात है की देश में बढती तरक्की दहेज प्रथा को निगलने में कहाँ चूक जाती है? ऊँच शिक्षा और सामाजिक कार्यकर्मों के बावजूद दहेज प्रथा अपना नंगा नाच आज भी पूरी देश में कर रही है| ये प्रथा हर भारतीयों के लिए सच में एक गंभीर चर्चा बन गयी है जो की हमारे बहु बेटियों पर एक बड़ी ही मुसीबत बन गयी है|

दहेज प्रथा के कारण: Causes of Dowry System in Hindi:

दहेज प्रथा समाज की बीमारी है | इस बीमारी ने न जाने कितने ही परिवारों की खुशियों को मिटा दिया है| आज समाज में दहेज प्रथा पूरी तरह अपनी जगह बना चुकी है जो की एक दस्तक है आगे चलते समय के लिए|

दहेज प्रथा को बढ़ावा देने में समाज की ही अहम् भूमिका है | वह समाज ही है जो की दहेज प्रथा की जड़ को मजबूत कर रही है|

दहेज प्रथा की कई कारण हें, जैसे की–

  1.    इ-शादी की विज्ञापन से फैलती दहेज प्रथा-

आज के इन्टरनेट युग में शादी के लिए लड़का-लड़की इन्टरनेट के माध्यम से भी खोजे जाते हें| इस प्रकार की विज्ञापनों में लड़की की परिवार वाले कई बार अच्छे लड़के की आश में अपना स्टेटस और कमाई को ज्यादा बताने की भूल कर बैठते हें, जो की लड़के वालों में कभी कभी लोभ आ जाता है| इस प्रकार की लोभ शादी के बाद मांग में बदल जाते हें, जो की धीरे धीरे दहेज प्रथा को पनपने देता हें| और दहेज की मांग होने लगती है|

2.    समाज में पुरुष प्रधान की लहर से फैलती देहेज प्रथा-

हमारे समाज पुरुष प्रधान है| बचपन से ही लड़कियों की मन में ये बात बिठा दिया जाता है की लडके ही घर के अन्दर और बाहर प्रधान हें, और लड़कियों को उनकी आदर और इज्ज़त करनी चाहिए| इस प्रकार की अंधविश्वास और दक्क्यानूसी सोच  लड़कियों की लड़कों के अत्याचार के खिलाफ अवाज़ उठाने की साहस की गला घूंट देते हें| और इससे बढती है लड़कियों पर अत्याचार और रूप लेता है विभिन्न मांगों की, जो की दहेज प्रथा का रास्ता खोल देता है|

3.     समाज में अपनी झूठी स्टेटस से फैलती दहेज प्रथा-

जी हाँ, चौंकाने वाला पर सच| ऊँचे समाज में आज कल अपना सोशल स्टेटस की काफी कम्पटीशन चल रही है| बेटी की शादी में ज्यादा से ज्यादा खर्च करना, महँगी तोहफे देना, लड़के वालों को मांग से ज्यादा तोहफे देना, आदि लड़के वालों के मन को कई बार छू जाता है| ये आदतें धीरे धीरे लड़की पर दबाव बना देती है| शादी के बाद भी लड़के वालों की इस तरह के तोहफों की लत लग जाती है, जो की धीरे धीरे मांग की रफ़्तार को और आगे ले जाती है| और इसी झूठी शान के चलते हम जाने अनजाने में दहेज प्रथा को पनपने देते हैं|

4 .    लड़की की सुन्दरता या कोई कमी कई बार दहेज की रस्म को निभा जाती है-

कई बार दहेज प्रथा खुद लड़की की माँ बाप की गलती से भी पनपता है| अगर लड़की की सुन्दरता में कोई कमी है या फिर लड़की की किसी भी कमी के कारण शादी में दिक्कत आती है, तो माँ- बाप लड़की की शादी को तुरंत करवाने की आड़ में दहेज देना आरम्भ कर देते हें| और ये बात दहेज प्रथा को हवा देती है|

दहेज प्रथा के कारण तो अनगिनत हैं, लेकिन अब वक़्त आ गया है की हमे कारणों की नहीं, दहेज प्रथा के समाधान के बारे में सोचें|

दहेज प्रथा के दुष्परिणाम in Hindi: Effects of Dowry System in Hindi

दहेज प्रथा के परिणाम बहोत ही भयंकर हैं| दहेज प्रथा के कारण गरीब माँ बाप अपनी बेटी की भविष्य को अनसुलझा ही पाते हें|

लड़कियों की शादी के वक़्त दहेज प्रथा अपने सबसे खतरनाक रूप लेती है| शादी या उसके बाद भी जिस घर में दहेज की बू आई, उस घर में दहेज प्रथा के दुष्परिणाम दिखाई देती है| दहेज प्रथा के दुष्परिणाम से हम सब वाकिफ हैं, लेकिन इस कलंक को हम ही बढ़ावा देते हैं|

दहेज प्रथा के बुरे असर हें

  1. दहेज प्रथा के कारण होती लड़कियों के साथ अन्याय:

कई बार दहेज दुल्हन के परिवार पर बहोत ही बुरा प्रभाव डालती है | दहेज के खर्चे पूरा सन्न कर जाति है| लड़की के शादी का माहोल खुशियों भरा नहीं रहता, अपमान और शर्मसार का माहोल बन के रह जाती है| इसी कारण हमारे समाज में लडकीयों को कई बार एक बोझ माना जाता है |

      2. दहेज प्रथा के कारण लड़कियों पर अत्याचार :

शादी के बाद जैसे ही दिन गुजरने लगते हें, वैसे ही दहेज की मांगे बढ़ने लग जाती है| अगर लड़की दहेज लाने के खिलाफ बोलती है तो उस पर शारीरिक, मानसिक अत्याचार किया जाता है | घरोई हिंसा को हवा दिया जाता है | लडकी पर कई तरह के जुर्म किया जाता है ताकि वह अपने माईके से दहेज की बात कर सके|

      3. देहेज प्रथा से बढती लड़का लड़की में अंतर:

दहेज प्रथा के कारण कई घरों मे लड़कियों को उतना मोह और प्यार नहीं मिलता जितना की घर के लड़कों को दिया जाता है| माँ बाप को लड़कियों को आने वाली वक़्त में खर्चा का साधन लगता है, और इसी कारण वह कन्या संतान को कई बार अपने हाल में छोड़ते हें|  इसी तरह लड़का और लड़की में अंतर बनता है |

दहेज़ प्रथा रोकने के उपाय in Hindi:How to Stop Dowry Practice:

दहेज प्रथा हमारे समाज को खोंखला और बेमतलब बना रही है| ये प्रथा हमारे ही जिंदगी को तबाह कर रही है| लेकिन अब वक़्त आ गया है की हमे दहेज प्रथा के खिलाफ एक जूट हो कर अपना आवाज़ बुलंद करना है|

हर समस्या का समाधान उसके अन्दर ही है| इस तरह से दहेज प्रथा का समाधान भी इसी प्रथा में ही है, बस दहेज लेने और देने की आदत को “हाँ” से “ना” में बदलना है|

आइए जानते हें की दहेज प्रथा को कैसे रोकें

दहेज प्रथा को रोकने के लिए हम ही सबसे बड़ा और कामयाब कदम उठा सकते हें |

दहेज प्रथा को पूरी तरह मिटाने के लिए हमे बस दो ही बातों को अपनाना है-

  1.  अगर आप एक लड़की हें- तो आप कभी भी ऐसी घर में शादी करने के लिए अपना स्वीकृति न दें जो दहेज की मांग कर रही हें|
  2. अगर आप एक लड़का हें- तो आप दहेज को अपने शादी या वैवाहिक जिंदगी का हिस्सा न बनने दें|

बस हममे ही है समस्या|

हम दहेज प्रथा को पूरी तरह नाकामयाब बना सकते हें अगर हम अपने आप को पूरी तरह इसके लिए जिम्मेदार मानें |

दहेज प्रथा हमारे समाज का एक पुराने जमाने की हिस्सा है| हम ऐसे ही इस प्रथा को झट से बंद नहीं कर सकते| इसके लिए हमे कदम कदम कर के चलना होगा| हमे अपने समाज और देश में कई प्रकार के बदलाव लाना होगा, जैसे की-

  • दहेज प्रथा को रोकने के लिए क़ानून व्यवस्था में बदलाव लाना होगा-

आज कल हमारे समाज में दहेज प्रथा खुली तरह से निभाया जाता है जब कि ये कानूनन जुर्म है| दहेज की व्यापार को बिना किसी दर से किया जाता है| ये ऐसा है क्यूंकि हमारे देश की कानूनी व्यवस्था जरुरत के मुताबिक़ मजबूत नहीं है| जरुरत है दहेज के खिलाफ क़ानून में बदलाव लाना|

  • लड़का-लड़की एक सामान के बारे में लोगों को अवगत करना होगा –

सबसे पहले हमे अपने सोच में बदलाव की जरुरत है| हमे लड़कियों को लड़कों के बराबर समझना है| लड़कियों को लड़कों से किसी भी तरह छोटा महसूस नहीं होने देना है| अगर ऐसा हुआ तो लड़कियों को ससुराल जाने के लिए दहेज का साथ की जरुरत नहीं होगी| कहते हैं की कोई भी कार्य की शुरुवात पहले अपने आस पास की माहोल से करनी चाहिए| घर में अपने बच्चो को लडकियों को सम्मान और आदर करने के बारे में बताना होगा| हमे लड़का लड़की एक समान  को अपनाना होगा|

  • कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना होगा –

हमे कन्या भ्रूण हत्या(को पूरी तरह से बंद करने की सपथ लेना होगा| | जितनी लड़कियों की हत्या होगी, दहेज प्रथा को उतना हाथ मिलेगा| दहेज प्रथा लड़कियों की कमी के कारण भी हमारे समाज में पनपती है | ज्यादा से ज्यादा कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जागृति बना के हम दहेज प्रथा पर रोक लगा सकते हें|

  • दहेज प्रथा को रोकने के लिए महिला सशक्तिकरण पर जोर देना होगा –

इसकी चाबी है एजुकेशन | हमे लड़कियों को ज्यादा से ज्यादा पढ़ाना होगा| उन्हें आजादी देनी होगी, आजादी अपने आप को एक मजबूत नारी बनाने की | हमे लड़कियों के पढाई पे ज्यादा से ज्यादा ध्यान और महत्व देना होगा | लड़कियों को पढ़ा लिखा के अपने पैरों पे खड़े होने के काबिल बनाना होगा, जो की वक़्त आने पर दहेज के खिलाफ खुद लढ सकती हें |

  • देहेज्प्रथा के खिलाफ सामाजिक जागरूकता फैलाना होगा –

हमे दहेज के खिलाफ समाज में जागरूकता पैदा करना है| गाँव और सहारों में दहेज के बुरे प्रकोप के बारे में बताना होगा जो की कई इंसानों को दहेज की पाप करने से रोकने में सहायक साबित होगी| खुद दहेज के खिलाफ सख्ती से पेश आना होगा|

  • हमे सही और गलत तय करना होगा –

जी हाँ!

हमे कुछ बातें अपनी जिंदगी में तय करना होगा| तय करना होगा की हम किसी भी ऐसी शादी में न शामिल हों जहां दहेज की प्रथा को निभायी गयी है|

लड़कियों को ये तय करना होगा की उन्हें दहेज मांगे जाने वाली घरों को अलविदा कहना है, बिना इस बात कि झूठी सपने देख कर की वक़्त सब कुछ ठीक कर देगा|

दहेज प्रथा पर अन्तिम चर्चा: conclusion on dowry system

दहेज प्रथा हमारे समाज को हमारा नहीं छोड़ा | ये प्रथा पुरे समाज को अपने वस में कर खोखला बना चुका है | वक़्त आ गया है इसके खिलाफ आवाज़ उठाने की| वक़्त आ गया है दहेज प्रथा के क़ानून कि सख्ति से इस्तेमीलकरने की| देहेज प्रथा के कारण आज भी हमारा समाज पिछडा हुआ है| लड़का और लड़की में अंतर मानते हें|

तो चलिए एक मुहीम छेड़ें देहेज प्रथा के खिलाफ| अगर आप के मन में दहेज प्रथा के बारे में कोई जानकारी है तो प्लीज निचे हमे लिख के जरुर भेजें ताकि आप कि कही हुई शायद कोई छोटी सी बात कई जिंदगियों को तबाह होने से बचा दे| दहेज की आदत को हमे जड़ से उखाड़ फेंकना है और एक स्वच्छ भारत की गठन करना है|

हमे अपने सुझाव जरुर दें | और दहेज प्रथा को “ना” बोले|

dehej pratha par nibandh wo lekh
दहेज प्रथा पर भाषण व निबंध in Hindi

दहेज प्रथा पर निबंध-Dahej Pratha In Hindi

दहेज प्रथा पर निबंध | Essay on Dowry System in Hindi!

भारत में दहेज एक पुरानी प्रथा है । मनुस्मृति मे ऐसा उल्लेख आता है कि माता-कन्या के विवाह के समय दाय भाग के रूप में धन-सम्पत्ति, गउवें आदि कन्या को देकर वर को समर्पित करे ।

यह भाग कितना होना चाहिए, इस बारे में मनु ने उल्लेख नहीं किया । समय बीतता चला गया स्वेच्छा से कन्या को दिया जाने वाला धन धीरे-धीरे वरपक्ष का अधिकार बनने लगा और वरपक्ष के लोग तो वर्तमान समय में इसे अपना जन्मसिद्ध अधिकार ही मान बैठे हैं ।

अखबारों में अब विज्ञापन निकलते है कि लड़के या लडकी की योग्यता इस प्रकार हैं । उनकी मासिक आय इतनी है और उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि बहुत सम्माननीय है । ये सब बातें पढ़कर कन्यापक्ष का कोई व्यक्ति यदि वरपक्ष के यहा जाता है तो असली चेहरा सामने आता है । वरपक्ष के लोग घुमा-फिराकर ऐसी कहानी शुरू करते हैं जिसका आशय निश्चित रूप से दहेज होता है ।

दहेज मांगना और देना दोनों निन्दनीय कार्य हैं । जब वर और कन्या दोनों की शिक्षा-दीक्षा एक जैसी है, दोनों रोजगार में लगे हुए हैं, दोनों ही देखने-सुनने में सुन्दर हैं, तो फिर दहेज की मांग क्यों की जाती है? कन्यापक्ष की मजबूरी का नाजायज फायदा क्यों उठाया जाता है?

शायद इसलिए कि समाज में अच्छे वरों की कमी है तथा योग्य लड़के बड़ी मुश्किल से तलाशने पर मिलते हैं । हिन्दुस्तान में ऐसी कुछ जातियां भी हैं जो वर को नहीं, अपितु कन्या को दहेज देकर ब्याह कर लेते हैं; लेकिन ऐसा कम ही होता है । अब तो ज्यादातर जाति वर के लिए ही दहेज लेती हैं ।

दहेज अब एक लिप्सा हो गई है, जो कभी शान्त नहीं होती । वर के लोभी माता-पिता यह चाह करते हैं कि लड़की अपने मायके वालों से सदा कुछ-न-कुछ लाती ही रहे और उनका घर भरती रहे । वे अपने लड़के को पैसा पैदा करने की मशीन समझते हैं और बेचारी बहू को मुरगी, जो रोज उन्हें सोने का अडा देती रहे । माता- पिता अपनी बेटी की मांग कब तक पूरी कर सकते हैं । फिर वे भी यह जानते हैं कि बेटी जो कुछ कर रही है, वह उनकी बेटी नहीं वरन् ससुराल वालों के दबाव के कारण कह रही है ।

यदि फरमाइश पूरी न की गई तो हो सकता है कि उनकी लाड़ली बिटिया प्रताड़ित की जाए, उसे यातनाएं दी जाएं और यह भी असंभव नहीं है कि उसे मार दिया जाए । ऐसी न जाने कितनी तरुणियों को जला देने, मार डालने की खबरें अखबारों में छपती रहती हैं ।

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दहेज-दानव को रोकने के लिए सरकार द्वारा सख्त कानून बनाया गया है । इस कानून के अनुसार दहेज लेना और दहेज देना दोनों अपराध माने गए हैं । अपराध प्रमाणित होने पर सजा और जुर्माना दोनों भरना पड़ता है । यह कानून कालान्तर में संशोधित करके अधिक कठोर बना दिया गया है ।

किन्तु ऐसा लगता है कि कहीं-न-कहीं कोई कमी इसमें अवश्य रह गई है; क्योंकि न तो दहेज लेने में कोई अंतर आया है और न नवयुवतियों द्वारा की जाने वाली आत्महत्याओं अथवा उनकी हत्याओं में ही कोई कमी आई है । दहेज संबंधी कानून से बचने के लिए दहेज लेने और दहेज देने के तरीके बदल गए हैं ।

वरपक्ष के लोग शादी से पहले ही एक मोटी रकम कन्यापक्ष वालों से ऐंठ लेते हैं । जहां तक सामान का सवाल है रंगीन टीवी, सोफा सेट, अलमारी, डायनिंग टेबल, घड़ी, अंगूठियां-ये सब चीजें पहले ही वर पक्ष की शोभा बढ़ाने के लिए भेज दी जाती हैं या शादी के समय दी जाती है । बाकी बचती हैं ज्योनार उसमें खा-पीकर लोग चले जाते हैं ।

शुरू-शुरू में वर एवं कन्यापक्ष दोनों में मेलभाव होता है, अतएव दोनों से पूरी सतर्कता बरती जाती है । यदि सब कुछ खुशी-खुशी चलता रहा, तब तो सब गुप्त रहता है अन्यथा कोई दुर्घटना हो जाने पर सब रहस्य खुल जाते हैं । कन्या अथवा कन्यापक्ष के लोगों में यह हिम्मत नहीं होती कि वे लोग ये सुनिश्चित कर लें कि शादी होगी तो बिना दहेज अन्यथा शादी ही नहीं होगी ।

दहेज के कलंक और दहेज रूपी सामाजिक बुराई को केवल कानून के भरोसे नहीं रोका जा सकता । इसके रोकने के लिए लोगों की मानसिकता में बदलाव लाया जाना चाहिए । विवाह अपनी-अपनी जाति में करने की जो परम्परा है उसे तोड़ना होगा तथा अन्तर्राज्यीय विवाहों को प्रोत्साहन देना होगा; तभी दहेज लेने के मौके घटेंगे और विवाह का क्षेत्र व्यापक बनेगा ।

 

अन्तर्राज्यीय, अन्तर्प्रान्तीय और अन्तर्राष्ट्रीय विवाहों का प्रचलन शुरू हो गया है, यदि कभी इसमें और लोकप्रियता आई और सामाजिक प्रोत्साहन मिलता रहा, तो ऐसी आशा की जा सकती है कि दहेज लेने की प्रथा में कमी जरूर आएगी । सरकार चाहे तो इस प्रथा को समूल नहीं तो आंशिक रूप से जरूर खत्म किया जा सकता है । सरकार उन दम्पतियों को रोजगार देने अथवा धंधों में ऋण देने की व्यवस्था करे, जो अन्तर्राज्यीय अथवा बिना दहेज के विवाह करना चाहते हों या किया हो ।

पिछले दिनों बिहार के किसी सवर्ण युवक ने हरिजन कन्या से शादी की थी, तो उसे किस प्रकार सरकार तथा समाज का कोपभाजन बनना पड़ा था, इसे सभी जानते हैं, ज्यादा पुरानी घटना नहीं है । अत: आवश्यकता है कि सरकार अपने कर्तव्य का पालन करे और सामाजिक जागृति आए, तो दहेज का कलंक दूर हो सकता है ।

दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है । आजकल यह प्रथा व्यवसाय का रूप लेने लगी है । मां-बाप चाहते हैं कि बच्चे को पढ़ाने-लिखाने और उसे लायक बनाने के लिए उन्होंने जो कुछ खर्च किया है, वह लड़के का विवाह करके वसूल कर लेना चाहिए । इंजीनियर, डॉक्टर अथवा आई.ए.एस. लड़कों का दहेज पचास लाख से एक करोड़ रुपये तक पहुंच गया है । बताइए एक सामान्य गृहस्थ इस प्रकार का खर्च कैसे उठा सकता है ।

 

वर्तमान परिस्थितियों में उचित यही है कि ऐसे सभी लोग एक मंच पर आवें, जो दहेज को मन से निकृष्ट और त्याज्य समझते हों । वे स्वयं दहेज न लें तथा दहेज लेने वालों के खिलाफ आवाज उठाएं । यदि वे ऐसा समझते हों कि उनके काम का विरोध होगा, तो वे अपने सद्उद्देश्य के लिए सरकार से मदद भी मांग सकते हैं ।

कुछ साल तक यदि समग्र देश में दहेज विरोधी आन्दोलन चलाया जाए, तभी इस कुप्रथा को मिटाना संभव बन पाएगा । अन्यथा, अन्य कोई सूरत ऐसी दिखाई नहीं पड़ती जो इस अमानवीय कुप्रथा को समाप्त कर सके ।

 

दहेज प्रथा पर निबंध : 21वीं सदी में विकासशील भारत के लिए दहेज प्रथा एक कोड का काम कर रही है। दहेज प्रथा हमारे देश के लिए एक कलंक है जो कि दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। यह फोड़े की तरह इतना नासूर हो गया है कि अब बहू – बेटियों की जान भी लेने लगा। दहेज प्रथा किसी आतंकवाद से कम नहीं है। दहेज प्रथा का चंगुल हर जगह व्याप्त है।  इसकी जड़ें इतनी मजबूत हो गई है कि अमीर हो या गरीब हर वर्ग के लोगों को जकड़ रखा है।

dehej pratha par nibandh

Dehej Pratha Par Nibandh

दहेज प्रथा के खिलाफ भारत सरकार ने कई कानून भी बनाए है लेकिन उन कानूनों का हमारे रूढ़िवादी सोच वाले लोगों पर कोई असर नहीं होता है। वह दहेज लेना एक अभिमान का विषय मानते है, जिसको जितना ज्यादा दहेज मिलता है वह उतना ही गर्व करता है और पूरे गांव में इसका ढिंढोरा पीटता है। जबकि दहेज गर्व का नहीं शर्म का विषय है।

आइए जानते है दहेज प्रथा क्या है (What is dowry system in Hindi)

जब वर पक्ष की ओर से वधू पक्ष को विवाह करने के लिए किसी भी प्रकार की रुपयों, गाड़ी, सामान अन्य विलासता की वस्तुएं मांगना दहेज प्रथा के अंतर्गत आता है। दहेज लेना और देना दोनों भारतीय कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। पुरुष प्रधान देश होने के कारण हमारे देश में महिलाओं का शोषण किया जाता है। उसी शोषण का दहेज प्रथा एक रुप है।

दहेज लेना लोगों में एक गर्व का विषय बन चुका है, वह सोचते है कि अगर हम ने दहेज नहीं लिया तो समाज में हमारी कोई इज्जत नहीं रह जाएगी। इसलिए लड़के वाले लड़कियों से जितनी ज्यादा हो सके उतनी दहेज की मांग करते है। पुराने रीति रिवाजों की ढाल लेकर इसे एक विवाह का रिवाज बना दिया गया है जिसे भारत के हर वर्ग ने अच्छी तरह से अपना लिया है।

इसके खिलाफ नहीं तो कोई बोलना चाहता है ना ही कोई सुनना चाहता है क्योंकि इसमें सब अपना – अपना स्वार्थ देखते है।  दहेज प्रथा नहीं लोगों की सोच को इतना खोखला कर दिया है कि अगर उनको दहेज नहीं मिलता है तो वह शादी करने से इनकार कर देते है और अगर कुछ लोग शादी कर भी लेते है तो फिर दहेज के लिए दुल्हन पर अत्याचार करते है उसका शोषण करते है जिसके कारण उसके मां-बाप मजबूर होकर दहेज देने को तैयार हो जाते है।

दहेज लेने  के वर्तमान में नए आयाम भी बना दिए गए है जिसके अनुसार दूल्हे की आय जितनी अधिक होगी उसको उतना ही अधिक दहेज मिलेगा। दहेज प्रथा मध्यम वर्गीय लोगों में आजकल बहुत प्रचलित हो गई है।

दहेज प्रथा की उत्पत्ति (Origin of dowry practice)

पुराने जमाने में लड़की वालों की तरफ से लड़के वालों को उपहार स्वरूप कुछ वस्तुएं दी जाती थी जैसे कि घोड़ा, बकरी, ऊंट आदि है। लेकिन फिर जैसे जैसे भारत में प्रगति की तो लोगों के सोचने विचारने की मानसिकता भी बदलती गई।  लड़कियों वालों को जो वस्तुएं उपहार स्वरूप मिलती थी अब वे लड़की वालों पर उपहार देने के लिए विशेष मांग करने लगे है। जब से लड़के वालों की तरफ से यह विशेष मांग होने लगी है तब से दहेज प्रथा की उत्पत्ति होने लगी थी।

इसका एक अन्य पहलू यह भी है कि जब लड़की और लड़के की शादी कर दी जाती है तो उनकी आर्थिक सहायता के लिए उनको कुछ रुपए दिए जाते थे ताकि वह अपना जीवन ठीक प्रकार से निर्वाह कर सकें।

दहेज प्रथा को हवा तभी मिलती है जब लड़की में कुछ कमी हो जैसे कि वह  विकलांग हो उसका रंग रूप सावला होने पर लड़की वाले अपनी लड़की की शादी करने के लिए लड़की वालों को दहेज के रूप में बहुत सारे रुपए और अन्य विलासता की वस्तुएं देते है। जिससे इस प्रथा को और भी हवा मिलती है।

और वर्तमान में तो यह स्थिति है कि अगर लड़का कोई सरकारी नौकरी या किसी बड़े पद पर है तो उसको दहेज देना जरूरी है। लड़के वाले इसके लिए विशेष मांग रखने लगे है। जिसके कारण गरीब परिवार की लड़की वालों की आधी कमाई तो अपनी बेटी की शादी करने में ही चली जाती है।  और इसके कारण एक करने अभिशाप ने जन्म ले लिया है अब बेटियों को कोख में ही मार आज आने लगा है क्योंकि लोग मानते है कि बेटियां पराई होती है वह हमारे किसी भी प्रकार से काम नहीं आने वाली और उनकी शादी पर उनको दहेज भी देना पड़ेगा इसलिए अब बेटों की तुलना में बेटियों की संख्या बहुत कम हो गई है।

दहेज प्रथा का जहरीला दंश (Poisonous bite of dowry practice)

दहेज प्रथा ने वर्तमान में एक महामारी का रुप ले लिया है, यह किसी आतंकवाद से कम नहीं है क्योंकि जब गरीब परिवार के माता पिता अपनी बेटी  की शादी करने जाते है तो उनसे दहेज की मांग की जाती है और वह दहेज देने में असमर्थ होते है तो या तो वे आत्महत्या कर लेते है या फिर किसी जमीदार से दहेज के लिए रुपए उधार लेते है और जिंदगी भर उसका ब्याज चुकाते रहते है।

इसका विस्तार होने का कारण इन लोगों की दकियानूसी सोच है वह सोचते है कि अगर बेटे की शादी में दहेज नहीं मिला तो समाज में उनकी थू-थू  होगी उनकी कोई इज्जत नहीं करेगा। वह दहेज लेना अपना अधिकार समझने लगे है जिस कारण यह दहेज रूपी महामारी हर वर्ग में फैल गई है। अगर जल्द ही इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह  मानव सभ्यता पर बहुत बड़ा कलंक होगा।

महात्मा गांधी जी ने भी दहेज प्रथा को एक कलंक बताया है उन्होंने अपनी एक पुस्तक में लिखा है कि

“जो भी व्यक्ति दहेज को शादी की जरुरी शर्त बना देता है, वह अपने शिक्षा और अपने देश की बदनाम करता है, और साथ ही पूरी महिला जात का भी अपमान करता है “

यह ऐसा कटु सत्य है जिस को झुठलाया नहीं जा सकता है। 21वीं सदी के भारत में लोग अपने सभ्य होने का दावा करते है लेकिन जब उनको कहा जाता है कि दहेज ना लें तो वह अपनी सभ्यता भूल जाते है और दहेज की मांग ऐसे करते है जैसे यह उनका जन्मसिद्ध अधिकार हो।

समाज के पढ़े लिखे युवा भी इसके खिलाफ नहीं बोलते है क्योंकि उनको भी कहीं ना कहीं यह डर रहता है कि अगर उन्हें दहेज में कुछ नहीं मिला तो अपने परिवार वालों और दोस्तों में उनकी इज्जत घट जाएगी इसलिए वे भी दहेज की मांग करने लगे है। अगर पढ़े लिखे युवा ही इस प्रथा को बढ़ाने में लगे रहे तो मानव सभ्यता का विनाश दूर नहीं है।

दहेज प्रथा एक गंभीर समस्या (Dowry System is a Serious Problem)

दहेज प्रथा का जहरीला दंश सदियों से चला आ रहा है। और अब लोगों ने इसको एक परंपरा का रूप दे दिया है जिसके कारण लोगों को लगता है कि दहेज देना अनिवार्य है। इसके खिलाफ भारत सरकार ने कई कानून बनाए है लेकिन उनकी पालना सही प्रकार से नहीं होने के कारण लोगों का दहेज के प्रति आत्मविश्वास और बढ़ गया है।

दहेज प्रथा के कारण सभी लोग अमीर परिवारों में ही शादी करना चाहते है क्योंकि उनको उम्मीद होती है कि वहां से ज उनको ज्यादा दहेज मिलेगा। जिससे गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी नहीं हो पाती है और अगर कोई करना नहीं चाहता है तो लड़के वाले इतना दहेज मांगते है कि गरीब परिवार वाले उस देश की रकम को चुकाने में असमर्थ होते है। इसके कारण एक और गंभीर समस्या जन्म ले रही है। हम लड़कियों को कोख में ही मारे जाने लगा है क्योंकि हमारे आधुनिक भारत में अब  गर्भ में ही पता लगाया जा सकता है कि लड़का होगा या लड़की, अगर गर्भ में लड़की पाई जाती है तो उसको कोख में ही मरवा दिया जाता है क्योंकि लोग सोचते है कि लड़कियां किसी काम की नहीं होती और उनकी शादी पर दहेज भी देना पड़ेगा।

दहेज प्रथा के कारण भारत के कई राज्य में लड़के और लड़कियों का लिंगानुपात भी बिगड़ गया है जिसके कारण कई लड़कों की शादी नहीं हो पाती है। जिसके कारण देश में अब बलात्कार की घटनाएं भी बढ़ने लगी है।

कुछ राज्यों में तो दहेज प्रथा के लिए Rate List भी बना ली गई है कुछ समय पहले राज्यों से खबर आई थी कि लड़के की शादी के लिए अभी दहेज की Rate List तय कर दी गई है।

– अगर कोई लड़का आईएएस अधिकारी है तो उसको साठ लाख से एक करोड़ का दहेज मिलेगा (इसमें जाति के  प्रकार पर दहेज कम ज्यादा हो सकता है)।

– और अगर कोई लड़का IPS अधिकारी है तो उसको 30 लाख से 60 लाख तक का दहेज मिल सकता है।

– अगर कोई लड़का किसी कंपनी के उच्च पद पर है तो उसे 40 से 50 लाख रुपए की रकम दहेज में मिल सकती है।

–  बैंक में काम करने वाले को 20 से 25 लाख और अगर कोई सरकारी Peon है तो वह भी 5 लाख तक का दहेज ले ही जाता है।

इस तरह की Rate List 21वीं सदी में आश्चर्य का विषय है। सोचने की बात तो यह है कि जिनको भी ज्यादा दहेज मिल रहा है वह उतने ही पढ़े-लिखे है लेकिन उनको दहेज देने में कोई शर्म नहीं आती है। वह इतने बड़े-बड़े सरकारी पदों पर बैठे है लेकिन सरकार के कानून का उनको कोई भी खौफ नहीं है। हम यह नहीं कह रहे कि सभी सरकारी या प्राइवेट पद के लोग दहेज लेते है लेकिन कुछ लालची लोग ऐसे है जो कि दहेज लेने को अभिमान मानते है।

उन लोगों को ऐसा करते हुए जरा भी शर्म का एहसास नहीं होता है वह खुलेआम दहेज की मांग करते है। अगर उनको दहेज नहीं मिलता है तो भी शादी करने से भी इनकार कर देते है। यह लोग समाज के लिए बहुत ही खतरनाक है। यह लोग हर जगह पर पाए जाते है जब भी किसकी नई शादी होती है तो यह लोग वहां पर पहुंच जाते है और उनसे पूछते है कि बताओ दहेज में क्या-क्या मिला और अगर दहेज में  कम समान मिला होता है तो यह लोग अपना बखान करने लग जाते है और दूसरे को नीचा दिखाते है जिससे इस प्रथा को और हवा मिलती है।

वर्तमान समय में तो दहेज के लिए अब महिलाओं का शोषण भी होने लगा है उनको तरह-तरह के ताने सुनाए जाते है। और कोई लोग तो अब इतना आगे बढ़ गए है कि दहेज ना मिलने पर अपनी बहुओं को मारते-पीटते है और कुछ समय पहले खबर आई थी कि अब उनको जिंदा जलाकर मारा भी जाने लगा है।

ऐसे लोगों के कारण एक तरफ भारत विकासशील देश से विकसित होने के लिए बढ़ रहा है लेकिन इन लोगों की सोच की वजह से भारत में एक दहेज रूपी महामारी भी भयानक रूप ले रही है। अब समय आ गया है कि इन लोगों को समाज से बाहर किया जाए और उचित दंड का प्रावधान भी किया जाए।

दहेज प्रथा के कारण (Causes of Dowry System in Hindi)

दहेज प्रथा अभी इतनी नासूर बन गई है कि इतने कई अमीर और गरीब परिवारों की जिंदगी तबाह कर दी है।  जिसके कारण कई हंसते खेलते परिवार अब टूट गए है। दहेज प्रथा का यह विकराल रूप धारण करने के कई कारण है जैसे की हमारे समाज में चले आ रहे पुराने रीति रिवाज और लोगों का लालच, अशिक्षा, लोगों की दकियानूसी सोच के कारण इस प्रथा को बढ़ावा मिल रहा है।

1. पुराने रीति रिवाज –

लोग दहेज लेने के लिए अब पुराने रीति रिवाजों का सहारा लेते है और लड़की वालों से कहते है कि यह तो पुरानी परंपरा है आपको दहेज देना ही पड़ेगा। लेकिन अब उनको यह कौन समझाए कि पुराने समय में लोग अपनी इच्छा अनुसार उपहार दिया करते थे। लेकिन लोगों ने पुराने रीति रिवाजों को दहेज का चोला पहना करें अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे है।

2. पुरुष प्रधान समाज –

भारत में पुरुष प्रधान समाज होने के कारण महिलाओं को अपनी बात रखने का कोई अधिकार नहीं होता है।  जिसके कारण दहेज के लिए महिलाओं का शोषण होता है उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। ताकि वे अपने घरवालों से दहेज लेकर आए। महिलाओं को बचपन से ही यह समझा दिया जाता है कि पुरुषों की हर बात माननी चाहिए और उनका आदर सम्मान करना चाहिए इसी में उनकी भलाई है और यही उनका कर्तव्य है जिस कारण महिलाएं अपने आप को कमजोर मानती है। और इस दहेज रूपी महामारी का शिकार हो जाती है।

3. अशिक्षा –

हमारे विशाल देश में आज भी कई लोग पढ़े लिखे नहीं है जिसके कारण वह सोचते है कि अगर उन्होंने दहेज नहीं दिया तो उनकी बिटिया की शादी नहीं होगी। उन्हें कहा जाता है कि दहेज देना उनका कर्तव्य है।  शिक्षा की कमी के कारण उन लोगों को भारत सरकार के द्वारा बनाए गए दहेज के खिलाफ कानूनों का भी नहीं पता है। जिसका लाभ लालची व्यक्ति दहेज लेने के लिए उठाते है।

4. दहेज मान – सम्मान का विषय –

वर्तमान में दहेज को लोगों ने अपने मान सम्मान का विषय बना लिया है जिसको जितना ज्यादा दहेज मिलता है लोग उसका उतना ही सम्मान करते है जिसके कारण दहेज प्रथा को और बढ़ावा मिल रहा है। लोग सोचते है कि अगर उन्होंने दहेज नहीं लिया तो समाज में उनका कोई सम्मान नहीं करेगा उनकी कोई इज्जत नहीं रह जाएगी इसलिए वह लड़की वालों से दहेज के लिए विशेष मांग रखते है।  अगर उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो भी रिश्ता तोड़ देते है या फिर शादी होने के बाद लड़की को दहेज के लिए प्रताड़ित करते है।

5. विवाह के लिए ई-विज्ञापन –

आजकल लोग शादी करने के लिए इंटरनेट पर भी विज्ञापन जारी करते है  जिसमें वे अपने आप को बढ़ा चढ़ाकर बताते है। जो स्वयं के पास नहीं भी होती है उनका भी बखान करते है। जिसके कारण  लड़के वाले सोचते है कि यह तो बहुत ही अमीर परिवार है इसलिए मैं उनसे अधिक दहेज की मांग करते है।

6. सांवला रंग या अन्य कोई विकार –

लोगों की मानसिकता का इसी से पता लगाया जा सकता है कि आपने अखबारों या इंटरनेट पर देखा होगा कि शादी के विज्ञापनों में लिखा होता है कि सुंदर लड़की या लड़का चाहिए इससे यह साफ जाहिर होता है कि लोग सुंदर लड़कियों  से ही शादी करना पसंद करते है। जिसके कारण सांवला रंग या अन्य कोई विकार होने पर उस लड़की से कोई शादी नहीं करता है इसलिए उसके मां-बाप उसकी शादी करने के लिए दहेज की पेशकश करते है या फिर कई लोग लड़की शादी करने के लिए दहेज की विशेष मांग रख देते है। जिसके कारण दहेज प्रथा को  बढ़ावा मिलता है।

7. अशिक्षित लड़कियां –

लड़कियों के शिक्षित होने के कारण उनकी शादी नहीं हो पाती है। इसलिए कुछ लोग अशिक्षित लड़कियों से शादी करने के लिए तो तैयार हो जाते है लेकिन वह कहते है कि हम इसकी जिंदगी भर देखभाल करेंगे इसलिए हमें आप दहेज के रूप में कुछ सहायता प्रदान करें। वह सहायता के नाम पर अपनी लालच की अभिलाषा को पूरा करते है।  ऐसे लोगों से बचकर रहना चाहिए क्योंकि यह लोग दहेज मिलने के बाद भी लड़कियों को प्रताड़ित करते रहते है।

8. बेरोजगारी –

जी हां बेरोजगारी भी दहेज प्रथा का एक मुख्य कारण है क्योंकि जब बेरोजगार युवकों की शादी के लिए प्रस्ताव आता है तो वह कहते है कि हमें अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए आप कुछ धन की सहायता कीजिए जिससे कि हम विवाह के पश्चात अपना जीवन  सुख पूर्वक निर्वाह कर सकें। वह धन की सहायता के रूप में दहेज लेते है और दहेज प्रथा को बढ़ावा देते है। ऐसे लोग ना ही तो व्यवसाय करते है ना ही कोई नौकरी करते है यह लोगों दहेज के पैसों से ही अपना जीवन यापन करना चाहते है और दहेज के पैसे खत्म होते ही उस लड़की को प्रताड़ित करने लगते है कि वह अपने घरवालों से और दहेज लेकर आए। इस पर आपने कई कहानियां, फिल्में और नाटक भी देखे होंगे।

दहेज प्रथा के दुष्परिणाम (Effects of Dowry System in Hindi)

वर्तमान में आप देख ही रहे होंगे कि दहेज प्रथा के कारण महिलाओं का कितना शोषण हो रहा है उनको कितना प्रताड़ित किया जा रहा है। आए दिन खबरों में आता रहता है कि दहेज के लिए लड़के वालों वालों ने लड़की को जिंदा जलाकर मार डाला या फिर उस को घर से बाहर निकाल दिया। इससे आप सीधा अनुमान लगा सकते है कि लोगों की मानसिकता उनकी सोचने की शक्ति कितने हद तक नीचे गिर गई है।

दहेज प्रथा के कारण जब भी किसी परिवार में लड़की पैदा हो जाती है तो लोग खुश होने की वजह से सहम जाते है। क्योंकि उनको इस बात की चिंता सताती है कि अब इसके विवाह के लिए दहेज कहां से लाएंगे। दहेज का यह विकराल रूप हम बढ़ते हुए देख रहे है लेकिन इसके खिलाफ हम कोई आवाज नहीं उठा रहे है।  जिसके कारण आए दिन लड़कियों का शोषण होता रहता है।

अगर आप दहेज लेते या देते है और या फिर इसका समर्थन करते है तो आप भी कानून की नज़रों में गुनहगार है आप भी इसको बढ़ाने में सहयोग कर रहे है इसलिए जब भी आप ऐसा होते हुए देखें तो इसका विरोध करें और पुलिस को इसकी सूचना दें।

दहेज प्रथा के दुष्परिणाम इस प्रकार है-

1. लड़कियों का शोषण –

दहेज प्रथा के कारण आए दिन लड़कियों का शोषण हो रहा है क्योंकि जब लड़के वालों को  शादी में पर्याप्त धन नहीं मिलता है तो वे लड़की से कहते है कि अपने घरवालों से और अधिक धन की मांग करें अगर वह ऐसा नहीं करती है तो वह उसे मानसिक और शारीरिक रूप से पर्दा ना देते है कभी-कभी यह प्रताड़ना इतनी बढ़ जाती है कि लड़कियां आत्महत्या तक कर लेती है।  वर्तमान में तो यह भी देखने में आया है कि लड़कियों को दहेज के लिए या तो उन्हें जिंदा जला दिया जाता है या फिर उन्हें कहीं और ले जा कर उनकी हत्या कर दी जाती है।

2. लड़कियों के साथ भेदभाव –

दहेज प्रथा के कारण लड़कियों का उन्हीं के परिवार में भेदभाव किया जाता है क्योंकि लोग मानते है कि लड़कियां तो पराई होती है इसलिए मैं उनको ना तो पढ़ाते लिखाते है ना ही उन्हें किसी प्रकार के कार्य करने की आजादी होती है। कई परिवारों में तो यह भी देखा गया है कि  लड़कों की तुलना में लड़कियों को खाने और पहनने के लिए कम वस्तुएं दी जाती है। उन्हें घर से बाहर जाने की आजादी नहीं होती है।

3. घटता लिंगानुपात –

दहेज प्रथा के कारण लोग अब अपने घर में लड़कियां नहीं चाहते है वह लड़कियों को कोख में ही मरवा देते है जिसके कारण वर्तमान में लड़के और लड़कियों  के लिंगानुपात में भारी अंतर देखा गया है। वह लड़की होने को सिर्फ खर्चा मानते है जिस कारण बेचारी लड़कियों को बिना किसी कसूर की कोख में ही मरवा दिया जाता है। इसके खिलाफ कई कानून भी बनाए गए है लेकिन सब बेअसर है।

4. जनसंख्या वृद्धि –

जनसंख्या वृद्धि भी दहेज प्रथा का एक दुष्परिणाम है क्योंकि जहां पर अब लड़कियों के कोख में मारने पर  सख्त कार्रवाई होने लगी है वहां पर लोग अब लड़कियों को भी तो नहीं मारते है लेकिन लड़के की चाह में वे  एक के बाद एक बच्चे पैदा करते रहते है जिसके कारण जनसंख्या वृद्धि होती है।

5. देश के विकास की राह में रोड़ा –

चूँकि दहेज प्रथा के कारण जनसंख्या वृद्धि होती है तो बेरोजगारी भी उतनी ही बढ़ती है जिसके कारण देश के विकास की राह में बाधा आती है। और इससे देश की महिलाओं का शोषण भी होता है उनके मान सम्मान को भी ठेस पहुंचती है। और बाहरी देशों के लोग सोचते है कि जहां पर महिलाओं को सम्मान नहीं होता वहां के लोग कैसे होंगे इसलिए लोग यहां आने से कतराते है जिससे हमारे देश का विकास नहीं हो पाता है।

दहेज प्रथा को रोकने के उपाय (How to Stop Dowry Practice)

दहेज नामक इस प्रथा नहीं हमारी सोच को इतना नीचे तक गिरा दिया है कि अब हमें दहेज लेने पर शर्म तक नहीं आती है। ऐसा लगता है कि दहेज का दंश इतना घातक हो गया है कि ने हमारे जमीर को भी मार दिया है। यह कम होने की वजह दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है  जो कि हम और हमारे समाज के लिए बहुत ही घातक है। यह तो अभी इसका ट्रेलर है अगर इसे रोका नहीं गया तो यह हमारे पूरे समाज को निकल जाएगा और हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रह जाएंगे। दहेज लेना या देना हमारे ही हाथ में होता है इसलिए आग से हमें ही प्रण लेना होगा कि ना तो हम दहेज लेंगे ना ही किसी को देंगे।

दहेज प्रथा को रोकना कोई बड़ा कार्य नहीं है क्योंकि अगर दहेज प्रथा के दो मुख्य किरदार लड़का और लड़की ही इसका विरोध करने लगेंगे तो इसकी कमर वही टूट जाएगी।

दहेज प्रथा को रोकने के लिए लड़का और लड़की को दो बातें अपनानी होंगी-

  1. अगर आप लड़की है तो किसी भी ऐसे परिवार में शादी ना करें जो कि दहेज की मांग करते हो, या फिर आप को जरा सा भी ऐसा लगे कि यह परिवार आपके लिए सही नहीं है तो तुरंत शादी के लिए मना कर दें।
  2. और अगर आप लड़का है तो अपने घरवालों से साफ कह दें कि मैं शादी तभी करूंगा जब आप लड़की वालों से दहेज नहीं लेंगे।

लेकिन हमें पता है कि दहेज प्रथा को खत्म करना इतना आसान नहीं है क्योंकि किसी ना किसी के मन में तो खोट   आ ही जाती है। लड़की को उसके घर वाले किसी भी बात का दबाव देकर शादी के लिए मना लेते है और लड़के वाले लड़के को इतना गुमराह कर देते है कि वह दहेज लेने के लिए तैयार हो जाता है इसलिए हमें  दहेज प्रथा को रोकने के लिए कुछ कारगर उपाय खोजने होंगे जो कि इस प्रकार है –

1. दहेज प्रथा के खिलाफ कानून बनाकर –

हमें सरकार से निवेदन करना चाहिए कि वह दहेज प्रथा के खिलाफ सख्त से सख्त कानून बनाकर इस प्रथा को रोकने का प्रयास करें।  वर्तमान में कुछ ऐसे कानून भी आए है जो कि दहेज प्रथा को रोकने के लिए बनाए गए है उनमें प्रमुख है दहेज प्रतिबंध अधिनियम 1961 जिसके अंतर्गत दहेज लेना और देना दोनों दंडकारी है।

2. लड़कियों को शिक्षित बनाकर –

हमें लोगों में जागरूकता फैलाने होगी कि लड़कियों को जितना हो सके उतना ज्यादा पढ़ाया जाए उन्हें शिक्षित किया जाए जिससे कि वह कोई भी कार्य करने में सक्षम हो और उनको शादी करने के लिए दहेज भी नहीं देना पड़ेगा। शिक्षा ही हर विनाशकारी बीमारी का तोड़ है। अब तो सरकार भी बेटियों को पढ़ाने के लिए निशुल्क शिक्षा व्यवस्था जारी कर चुकी है बस लोगों को इस बारे में बताना है कि लड़कियां लड़कों से कम नहीं होती है।

3. लड़का और लड़की में भेदभाव बंद करें –

जब तक हम लड़की और लड़का में भेदभाव करते रहेंगे दहेज प्रथा को उतना ही अधिक बल मिलता रहेगा इसलिए हमें  लड़का और लड़की में भेदभाव बंद करना होगा लड़की को भी वही सभी सुविधाएं देनी होगी क्योंकि एक लड़के को दी जाती है  लड़की को भी उतना ही प्यार दिया जाए जितना कि लड़के को दिया जाता है। क्योंकि लड़की को भी उतना ही खुश रहने का हक है जितना कि लड़के को है। लड़की को भी उतनी आजादी दी जानी चाहिए जितनी कि लड़के को होती है उसे हर कार्य को करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए ना की मुझे लड़की जात होने का कहकर घर में बैठने को कहा जाए।

4. दहेज प्रथा के खिलाफ सामाजिक जागरूकता फैलाना –

दहेज प्रथा के खिलाफ हमें समाज में जागरूकता लानी होगी क्योंकि लोगों  की सोच इस कदर गिर चुकी है कि उन्हें दहेज के अलावा और कुछ भी नहीं सोचता इसलिए हमें गांव गांव जाकर दहेज प्रथा के खिलाफ चेतना के लानी होगी वहां के लोगों को बताना होगा कि इससे  देश का कितना नुकसान हो रहा है और साथ ही लड़कियों को इसके कारण कितनी प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।

हर स्कूल में ऐसे कार्यक्रम और नाटक होने चाहिए जिस दिन के माध्यम से समझाया जा सके कि लड़का और लड़की समान होते है उन्हें किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए और दहेज लेना और देना दोनों ही पाप है  दंडकारी है। लोगों की सोच को बदलना होगा।

5. हमें दहेज प्रथा का विरोध करना होगा –

जब भी आप किसी भी विवाह में जाएं तो वहां देखें कि दहेज लिया और दिया तो नहीं जा रहा है अगर ऐसा होता है तो आपको उसका विरोध करना चाहिए। आपको ऐसे विवाह में नहीं जाना चाहिए जहां पर दहेज प्रथा को बढ़ावा मिलता हो। और आपकी सब की जिम्मेदारी बनती है कि आपको भी दहेज के लिए हां की जगह ना कहना होगा क्योंकि आपके जीवन में भी कभी ना कभी यह पल जरूर आएगा।

आपको इस दहेज प्रथा निबंध के माध्यम से पता तो चल ही गया होगा कि दहेज प्रथा के कारण हमारे समाज और परिवार को कितना नुकसान हो रहा है इसलिए जब भी ऐसा होते देखे तो इसका विरोध जरुर करें।

आप दहेज प्रथा के विरोध में हीन भावना फैला सकते है जब कोई भी व्यक्ति है दहेज ले रहा होता है तो उसे सिर्फ सिर्फ इतना कह दें कि लड़की वालों ने दहेज देकर लड़के को खरीद लिया। बस यह इतना सफ़र भी इतना असर  कर जाएगा कि लड़के के मन में दहेज प्रथा के खिलाफ हीन भावना उत्पन्न हो जाएगी और वह दहेज लेने से इंकार करेगा।

उपसंहार (Epilogue)

दहेज प्रथा में हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया है। इसके कारण कई बहू बेटियों की जिंदगी खराब हो गई। दहेज प्रथा के कारण हमारे समाज के लोगों की  छोड़ आज इतनी गिर गई है कि वह दहेज लेने के लिए किसी भी हद तक जा सकते है।  और इसका उदाहरण आप आए दिन आने वाले समाचार और अखबारों में देख सकते है कि कैसे लोग दहेज के लिए अपनी बहुओं  की हत्या कर देते है या फिर उनका इतना शोषण करते है कि वह खुद मजबूर हो सकती है आत्महत्या करने के लिए।

अब बहुत हुआ दहेज प्रथा के खिलाफ हमें आवाज उठानी होगी अगर आज हम ने आवाज नहीं उठाई तो कल हमारी ही बहन-बेटियां इसकी शिकार होंगे जिसके बाद आपको अफसोस होगा कि अगर हमने पहले ही इसके खिलाफ आवाज उठानी होती तो आज यह नहीं होता। हमें लोगों की पहचान उसकी सोच को बदलना होगा अगर हम उनका विरोध नहीं करेंगे तो कौन करेगा।

चलो आज हम सब प्रण ले कि दहेज प्रथा नामक इस महामारी को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे। ना तो किसी को नहीं देंगे ना ही दहेज लेंगे।

हम आशा करते है कि हमारे द्वारा दहेज प्रथा पर लिखा गया आपको पसंद आया होगा। अगर यह लेख आपको पसंद आया है तो अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ शेयर करना ना भूले। इसके बारे में अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

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