डॉ मनमोहन सिंह पर निबंध-Dr. Manmohan Singh in Hindi | Hindigk50k

डॉ मनमोहन सिंह पर निबंध-Dr. Manmohan Singh in Hindi

डॉ मनमोहन सिंह पर निबंध-Dr. Manmohan Singh in Hindi  Hindi Essay in 100-200 words, Hindi Essay in 500 words, Hindi Essay in 400 words, list of hindi essay topics, hindi essays for class 4, hindi essays for class 10, hindi essays for class 9, hindi essays for class 7, hindi essay topics for college students, hindi essays for class 6, hindi essays for class 8

डॉ मनमोहन सिंह पर निबंध-Dr. Manmohan Singh in Hindi

डॉ. मनमोहन सिंह पर निबंध (Short Essay on Dr Manmohan Singh In Hindi Language)

 

विश्व में वर्ष 2008 में आई आर्थिक मंदी से संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे विकसित देश भी त्रस्त नजर आए,  किंतु पूरी दुनिया इस बात से आश्चर्यचकित थी कि भारत जैसे विकासशील देश पर इसका कोई असर नहीं हुआ ! भारत ने यदि आर्थिक मंदी के बावजूद प्रगति हासिल की, तो इसमें इसकी आर्थिक नीतियों का बहुत बड़ा योगदान था और जिन आर्थिक नीतियों के कारण इसने यह करिश्मा कर दिखाया उनके निर्माण क्रियान्वयन में डॉ. मनमोहन सिंह की भूमिका प्रमुख रही है | यही कारण है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री दुनियाभर में एक कुशल अर्थशास्त्री के रूप में अधिक प्रसिद्ध हैं |

डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर, 1932 को पश्चिम पंजाब के गाह नमक स्थान (जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था | उनके पिता का नाम श्री गुरमुख सिंह तथा माता का नाम श्रीमती किशन कौर था | जब भारत का विभाजन हुआ तो उनका परिवार अमृतसर में आकर बस गया |

डॉक्टर मनमोहन सिंह की प्रारंभिक शिक्षा ज्ञान आश्रम स्कूल में हुई | इसके बाद 1948 में उन्होंने मैट्रिकुलेशन तथा 1950 ई. में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की | उन्होंने 1952 ई. में पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी में स्नातक प्रतिष्ठा की उपाधि तथा 1954 में इसी विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी के साथ स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की | स्नातकोत्तर परीक्षा में उन्होंने विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया था | इसके बाद उन्होंने लंदन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पी.एच.डी एंव ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डी.फिल. की उपाधि प्राप्त की |

उच्च शिक्षा प्राप्त कर वे स्वदेश लौट आए एंव अर्थशास्त्र के अध्यापक के रूप में काफी ख्याति अर्जित की | 1957 ई. से लेकर 1959 ई. तक वे चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के वरिष्ठ प्रवक्ता रहे | 1959 से 1963 तक वे इसी विश्वविद्यालय में रीडर के पद पर कार्यरत रहे तथा 1963 ई. से 1965 ई. तक वहीँ प्रोफेसर के रूप में कार्य करने के बाद इन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार विभाग में प्रोफेसर के रूप में कार्य किया | 1976 ई. में वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में ऑनरेरी प्रोफेसर के रूप में नियुक्त हुए | इसके बाद वे अध्यापन का कार्य छोड़कर आर्थिक जगत की शीर्षस्थ संस्थाओं में कार्य करने लगे | इस दौरान उन्होंने कई विश्वविद्यालयों में ऑनरेरी प्रोफेसर के पद को भी सुशोभित किया |

1972 ई. से 1974 ई. तक उन्होंने भारत में अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष समिति की अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक सुधार समिति के डिप्टी के रूप में कार्य किया | 1972 ई. से 1976 ई. तक वे भारत के वित्त मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष रहे | 1982 ई. से 1985 ई. तक वे भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में कार्यरत रहे | सन 1985 ई. में वे इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे तथा साथ ही 1985 से 1987 ई. तक योजना आयोग के उपाध्यक्ष के पद पर भी कार्यरत रहे |

डॉ. मनमोहन सिंह को विश्वस्तरीय राजनीतिक पहचान तक मिली, जब 1991 से 1996 ई. के बीच वे नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री के पद पर कार्यरत रहे | जब डॉ. मनमोहन सिंह वित्त मंत्री बने थे, उस समय देश की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी | उन्होंने वित्त मंत्री के रूप में कार्य करते हुए आर्थिक उदारीकरण की नीति से भारत को आर्थिक विकास के पथ पर अग्रसर कर दिया | इसके बाद 1998 ई. एंव 2001 ई. में वे राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे |

2004 ई. में समय से पूर्व राष्ट्रीय गठबंधन सरकार द्वारा करवाए गए लोकसभा चुनाव में आशा के विपरीत भाजपा को कम सीटों पर विजय हासिल हुई एंव कांग्रेस अधिक सीटों पर जीत के साथ अन्य पार्टियों के सहयोग से सरकार बनाने में सफल रही | कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने स्वयं प्रधानमंत्री का पद अस्वीकार करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह को भारत का नया प्रधानमंत्री घोषित कर दिया | इस तरह 22 मई 2004 को डॉ. मनमोहन सिंह ने देश के 15वें प्रधानमंत्री के रुप में शपथ ली | डॉ. मनमोहन सिंह ने इस पद पर रहते हुए अपने उत्तरदायित्वों का हमेशा सही ढंग से पालन किया | 2009 ई. में हुए लोकसभा चुनाव में मिली जीत के बाद वे जवाहरलाल नेहरू के बाद भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री बन गए, जिनको 5 वर्षों का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिला | 22 मई 2009 को उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में अपनी दूसरी पारी प्रारंभ की |

डॉ मनमोहन सिंह की उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें भारत सरकार एवं विश्व के कई अन्य संस्थानों ने विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया | 1956 ई. में कैंब्रिज विश्वविद्यालय में उन्हें ‘ऐडम-स्मिथ पुरस्कार’ से सम्मानित किया | 1987 ई. में भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया | 1995 ई. में उन्हें इंडियन कांग्रेस का जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार प्राप्त हुआ | उन्हें 1993 ई. एंव 1994 ई. का ‘एशिया मनी अवार्ड फॉर फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर’ एंव इसके साथ ही 1994 ई. का ‘यूरो मनी अवार्ड फॉर द फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर’ भी प्राप्त हुआ | प्रतिष्ठित अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्स द्वारा मार्च 2011 को जारी विश्व की सर्वाधिक शक्तिशाली 100 व्यक्तियों की सूची में भारत के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को 18वां स्थान प्रदान किया गया |

डॉ. मनमोहन सिंह ने कई अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में भारत का नेतृत्व किया है | भ्रष्टाचार से त्रस्त भारतीय राजनीति में जहां अधिकतर नेता दागदार हैं, वहीं डॉ. मनमोहन सिंह अपनी बेदाग एंव ईमानदार छवि के कारण न केवल जनता के बीच लोकप्रिय हैं बल्कि सभी राजनीतिक दलों में भी उनकी अच्छी साख है | अनुभवी अर्थशास्त्रियों का मानना है कि उदारीकरण एंव वैश्वीकरण के इस दौर में भारत की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ विश्वस्तरीय आर्थिक प्रतिद्विन्द्ता के दृष्टिकोण से डॉ. मनमोहन सिंह जैसे अनुभवी अर्थशास्त्री के हाथ में देश की बागडोर के दूरगामी सकारात्मक परिणाम होंगे, जिससे यह देश आर्थिक जगत में नए मुकाम हासिल करेगा |

डॉ मनमोहन सिंह पर निबंध :

भूमिका : सरदार डॉ मनमोहन सिंह हमारे लोकप्रिय नेताओं में सर्वप्रमुख हैं। उन्हें भारत के प्रतिभासंपन्न प्रधानमंत्री माना जाता है। भारत राष्ट्र के प्रधानमंत्री होने की वजह से वे आज विश्व के नेताओं में उनका बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है।

आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे एक गंभीर और समर्पित व्यक्ति भी हैं। डॉ मनमोहन सिंह जी में ज्ञान और योग्यता का अपार भंडार छिपा हुआ है उनसे कोई कुछ न कुछ सीख सकता है।

मनमोहन सिंह का जन्म : डॉ मनमोहन सिंह जी का जन्म 26 सितंबर 1932 को एक गाँव गाह में हुआ था। ये एक सरदार थे। इनके पिता का नाम गुरमुख सिंह और माता का नाम अमृत कौर है। जब इनके घर का बंटवारा हुआ था तब इन्हें अमृतसर के स्वांग मंडी के किशन सिंह संत राम तबेले में भी रहना पड़ा था।

बाल्यकाल एवं परिवार : इनका विवाह 14 सितंबर 1958 को गुरशरण कौर से हुआ था। इनकी तीन बेटियाँ हैं। जब इनके पिता ने इनको कठिन परिश्रम करते हुए देखा तो इनके पिता ने कहा कि – मैं रहूँ या न रहूँ लेकिन तुम एक अच्छे प्रधानमंत्री जरुर बनोगे। उनके पिता की बातों को सच होने में लगभग तीस साल लगे थे। इस समय उनके पिता उनके साथ नहीं हैं लेकिन उनके आशीर्वाद से डॉ मनमोहन सिंह जी प्रधानमंत्री बने गये हैं।

शिक्षा का सम्मान : इन्होने बी० ए० ऑनर्स की परीक्षा को स्थानीय हिन्दू कॉलेज से सन् 1952 में प्रथम श्रेणी से पास किया था। इन्होने एम० ए० ऑनर्स की परीक्षा को होशियार पुर के खालसा कॉलेज से सन् 1954 को प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण किया था। इन्होने केंब्रिज विश्व विद्यालय के रेनबरी स्कॉलर सन् 1969 से लेकर सन् 1971 को प्राप्त किया था।

इन्होने डी० फ़िल० और डी० लि० की उपाधियाँ ऑक्सफोर्ड विश्व विद्यालय और होनोरिस कौसा से प्राप्त की थीं। उन्होंने भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता पर पीएच० डी० की उपाधि प्राप्त की थी। इन्हें कैंब्रिज विश्व विद्यालय ने एडम स्मिथ पुरुस्कार से सन् 1965 को सम्मानित किया था।

भारत ने इन्हें पदम् विभुषण पुरस्कार से सन् 1987 में सम्मानित किया था। इन्हें साल के वित्तमंत्री के लिए युरोमनी पुरस्कार से सन् 1993 में सम्मानित किया था। इन्हें एशिया के साल के वित्तमंत्री के रूप में एशिया मनी पुरस्कार से सन् 1993 और सन् 1994 में सम्मानित किया गया था।

मनमोहन सिंह की नौकरी : इन्होने पंजाब विश्व विद्यालय में अर्थशास्त्र के अध्यापक और रीडर के रूप में सन् 1957 से सन् 1965 तक काम किया था। इन्होने दिल्ली विश्वविद्यालय में भी अर्थशास्त्र के अध्यापक के रूप में सन् 1969 से सन् 1971 तक काम किया था।

ये सन् 1976 में जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के मानद प्रोफेसर के रूप में भी कार्यरत रहे थे। ये दिल्ली विश्वविद्यालय में भी मानद प्रोफ़ेसर के रूप में सन् 1996 में काम किया था। इन्होने प्रधानमंत्री बनने से पहले बहुत से पदों का दायित्व संभाला था।

प्रधानमंत्रित्व एक चुनौती : डॉ मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ 22 मई 2004 को ली थी। इस पद पर चुने जाने के बाद भी इनके सामने अपनी प्रतिभा और क्षमता को दिखाने के लिए अनेक विराट चुनौतियाँ थीं। उन सब को उन्होंने बहुत ही ख़ुशी से निभाया था।

जिस समय पर सोनिया गाँधी ने प्रधानमंत्री पद को ठुकराया था उस समय डॉ मनमोहन सिंह के विपक्ष दल के पास कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था जो इस पद को सर्व संपत्ति के साथ स्वीकार कर सके। डॉ मनमोहन सिंह को दुबारा से प्रधानमन्त्री पद के लिए सन् 2009 को चुना गया था।

कुशल अर्थशास्त्री : डॉ मनमोहन सिंह को अर्थशास्त्र के रूप में लब्धब्द्ध माना जाता था। वे नर सिंह राव सरकार में भी सन् 1991 में वित्तमंत्री रहे थे। उन्ही की नीतियों पर चलने से अर्थव्यवस्था दृढता की ओर आगे बढ़ी थी।

आज के समय में देश जिस दौर से गुजर रहा है उसमें हमे प्रधानमंत्री के रूप में ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी जो राजनीति के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को भी समझ सके। डॉ मनमोहन सिंह इस कसौटी पर खरे उतरे थे।

अंतर्मुखी व्यक्तित्व : दुनिया की नजर में प्रधानमंत्री पद का दायित्व राजनितिक एवं सार्वजनिक दृष्टि से देखा जाये तो बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें प्रधानमंत्री को अपनी राजनितिक पारी में स्वभावगत संकोचों को दूर करके जनता के समक्ष अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करनी चाहिए। यह ख़ुशी की बताई की अब वे अपनी अंतर्मुखी और संकोची स्वभाव को दूर करके बहुत से मंचों के द्वारा अपनी बात को निडरता से रख रहे हैं और साथ ही साथ जनता क साथ संवाद भी स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

समस्याओं से निबटने का साहस : जब प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने सत्ता की बागडोर संभाली तभी जनता को सूखा , बाढ़ , बढती मुद्रा स्फीति दर ,ट्रक हड़ताल , विवाद ,बंधक संकट जैसी बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ा था।

इसके बाद देरी से राजनीति में प्रवेश करने की वजह से अर्थशास्त्री डॉ मनमोहन सिंह को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। इसी क्रम में उनका अर्थशास्त्री का रूप सामने आता है क्योंकि वे छोटी-से-छोटी जानकारी प्राप्त करने की कोशिश करते थे।

विनम्र एवं संवेदन शील : डॉ मनमोहन सिंह जी विनम्र,उदार,और संवेदनशीलता से धनी व्यक्ति है। मनमोहन जी का विश्वास सादा जीवन उच्च विचार में था। वे एक साधारण वेशभूषा में भी बहुत ही प्रभावशाली व्यक्तित्व रखते हैं। इतने बड़े पद पर काम करने पर भी घमंड उनके पास भी नहीं फटका। इतने पदों पर सम्मानित होते हुए भी परिवार के प्रति उनकी जिम्मेदारियाँ कम नहीं हुई हैं।

उपसंहार : भारत की जनता को अपने इस सपूत से बहुत आशाएं हैं। हम लोग यह आशा करते हैं की डॉ मनमोहन जी के नेतृत्व में यह देश लगातार आगे बढ़ता रहेगा। भगवान इन्हें लम्बी उम्र और स्वास्थ्य प्रदान करे।

डॉ मनमोहन सिंह पर निबंध-Dr. Manmohan Singh in Hindi

 

Comments

comments

Leave a Comment