कुएँ में पायजामा शेखचिल्ली की कहानी Shekhchilli Story in Hindi | Hindigk50k

कुएँ में पायजामा शेखचिल्ली की कहानी Shekhchilli Story in Hindi

कुएँ में पायजामा शेखचिल्ली की कहानी Shekhchilli Story in Hindi | short bal kahani in hindi, baccho ki kahani suno, dadi maa ki kahaniyan, bal kahaniyan, cinderella ki kahani, hindi panchatantra stories, baccho ki kahaniya aur cartoon, stories, kids story in english, moral stories, kids story books, stories for kids with pictures, short story, short stories for kids, story for kids with  moral, moral stories for childrens in hindi, infobells hindi moral stories, hindi panchatantra stories, moral stories in hindi,  story in hindi for class 1, hindi story books, story in hindi for class 4, story in hindi for class 6, panchtantra ki kahaniya.

 

कुएँ में पायजामा शेखचिल्ली की कहानी Shekhchilli Story in Hindi 

एक दिन की बात है. शेखचिल्ली की माँ ने सारे कपडे धोकर सूखने के लिए बाहर डाल दी थी. कपड़े बाहर आकर वह घर के कामों में व्यस्त हो गयी. उधर शेखचिल्ली आराम से चारपाई पर लेटे – लेटे सपनों की दुनिया में खोया हुआ था.

Shekhchilli Story in Hindi Language

बाहर धीमी गति से चल रही हवा अब थोड़ी तेज गति से चलने लगी थी. देखते ही देखते हवा ने अंधड़ का विकराल रूप धारण कर लिया. धूल का इतना बड़ा बबंडर उठा कि कुछ भी देखना मुहाल हो गया. आस –पड़ोस के लोग तेजी से अपने अपने घरों की ओर भागे. शेखचिल्ली भी अपनी माँ के साथ अपने घर में बंद हो गया.

शेखचिल्ली की माँ को अचानक याद आया कि उसने सारे कपडे तो सूखने के लिए बाहर डाल रखे हैं.उसने खिड़की की झिर्री से देखा तो सारे कपडे उस अंधड़ में उड़ चुके थे. जब अंधड़ थोडा शांत हुआ तो वह अपने कपड़ों को ढूंढने घर से बाहर निकली. गाँव के अन्य लोग भी अपने अपने सामान ढूंढने के लिए इधर –उधर भटक रहे थे. कुछ देर इधर –उधर ढूंढने के बाद उसको अपने सारे कपडे मिल गए थे.

जब वह घर वापस आयी तो चारपाई पर बैठे शेखचिल्ली को देखकर उदास स्वर में बोली – “बेटा! अंधड़ में उड़े सारे कपडे तो मिल गए सिर्फ तुम्हारा पायजामा नहीं मिला. ना जाने कैसे उड़कर उस कुएँ में जा गिरा. जाओ जाकर अपने पायजामे को उस कुएँ से निकाल लो.”

“ओ माँ! इसमें उदास होने वाली कौन सी बात है?” – शेखचिल्ली बोला – “यह तो बहुत खुशी की बात है, इसके लिए तो आपको अल्लाह का शुक्रगुजार होना चाहिए.”

शेखचिल्ली की माँ को कुछ भी समझ में नहीं आया. वह आश्चर्यपूर्वक बोली – “बेटा, इसमें अल्लाह का शुक्रगुजार होने जैसी कौन सी बात है?”

“आप समझी नहीं माँ! यदि वह पायजामा मैंने पहना होता तो मैं भी उड़ता हुआ उसी कुएँ में जा गिरता. जा गिरता क्या, अबतक तो कुआँ में डूब भी गया होता और अल्लाह को प्यारा हो गया होता.”

शेखचिल्ली की माँ अपने बेटे की बात सुनकर उसकी बुद्धि पर तरस खा रही थी. सच ही कहा गया है कि मूर्ख लोग इसी तरह से बिना सिर- पैर की बातें करते हैं.

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

Comments

comments

Leave a Comment