काम की दवा प्रेरक हिंदी कहानी

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काम की दवा प्रेरक हिंदी कहानी 

खाली दिमाग शैतान का घर कहा जाता है. वहाँ ऊल-जलूल विचारों का प्रवेश हो जाना भी सहज होता है. प्रस्तुत कहानी द्वारा यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि सद्विचार और कर्म मनुष्य की लिये क्यों बहुत आवश्यक है.

Kaam Ki Davaa Motivational Hindi Story

Kaam Ki Davaa Motivational Hindi Story

एक धनाढ्य सेठ का एकलौता बेटा गुजर गया सेठ को बहुत दुःख हुआ. अपनी विधवा पुत्रवधू को जब –जब देखता उसके दिल में होली जलाने लगती. पर उपाय भी क्या था ? पुत्रवधू को दुखियारी समझ कर सास भी उससे कोई काम नहीं करवाती थी. बहू सारे दिन हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती. ऐसा होते – होते उसकी चढ़ती जवानी ने उसे पथभ्रष्ट हो जाने पर विवश कर दिया. मौका देखकर उसने अपनी निकट की दासी से उसे किसी पुरुष से मिलने को कह दिया.

बात के भी पर होते है. जब इस बात का भेद सेठ को मालूम हुआ तो वह बहुत ही चिंतित हुआ और अपनी  इज्जत का विचार करके एक दिन सेठानी से कहा – ”तुम दुलार के कारण बहू से कुछ कम नहीं करवाती.  निकम्मा आदमी क्या करे ? आज से तुम उससे कुछ काम करवाया करो.” और फिर बहू को सुना कर बोला – ’’ सुना है हमारी बहू रसोई बनाने में बहुत निपुण है. मैंने आज तक उसके हाथ की रसोई नहीं खाई.  आज शाम मै उसी के हाथ का बनाया भोजन करूंगा.”

अपनी प्रशंसा सुनकर बहू फूल गई और रसोई बनाने लगी. धीरे – धीरे वह इतनी व्यस्त रहने लगी कि सारा चिन्तन –मनन ही भुल गई. एक दिन सेठ ने दासी द्वारा बहू से गुप्तरूप से पुछवाया – ”अब बहू को किसी पुरूष की जरूरत है क्या?” उसने तपाक से कहा – ” अब मुझे किसी की जरूरत नहीं है. मुझे जो चाहिए था, वह आलंबन काम और सद विचार मुझे मिल गए हैं.”

वास्तव में काम की दवा काम है और कुविचार की दवा सद्विचार है. इसलिए मनुष्य को सदैव अच्छे कार्य करना चाहिए और मन में बुरे विचार की जगह अच्छे विचार को जगह देनी चाहिए.

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

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