और मोबाइल मिल गया – एक सत्यकथा Hindi Kahani Story | Hindigk50k

और मोबाइल मिल गया – एक सत्यकथा Hindi Kahani Story

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और मोबाइल मिल गया – एक सत्यकथा Hindi Kahani Story

27 जून 2013, दिन गुरुवार था. किसी अन्य दिन की तरह ही सुविनीता अपने ऑफिस में काम में व्यस्त थी. उसके माता -पिता घर पर ही थे. अचानक उनके पास एक फ़ोन आता है जिसमें उनसे उनकी बेटी सुविनीता के बारे में पूछताछ की जाती है और वे दोनों घबरा जाते हैं. फ़ोन करनेवाला व्यक्ति अपने आप को सरोजिनी नगर पुलिस स्टेशन का एस एच ओ (थानेदार) बताता है. अब प्रश्न यह उठता है कि एक एस एच ओ ने सुविनीता के मम्मी पापा को क्यों फ़ोन किया. इसके लिए इस कहानी को थोड़ा फ्लैशबैक में ले जाना पड़ेगा.

10 नबम्वर 2012. सुविनीता सरोजिनी नगर, दिल्ली में अपने परिवार के साथ खरीददारी कर रही थी. दोपहर का समय था. वह शौपिंग करने का आनंद ले रही थी. इस दूकान से उस दूकान..ये सामान .. वो सामान …..अचानक उसे याद आया कि आज मुझे एक दोस्त को फोन करना था. अपने बैग में हाथ डाला तो फ़ोन गायब. बेतहाशा वह बैग में पड़े सभी चीजों को उलट- पलट कर देखने लगी. अब अपनी नजर चारों तरफ घुमाई सारे लोग अपने -अपने कामों में व्यस्त अपनी खरीददारी कर रहे थे. मोलभाव में व्यस्त थे.

एकाएक सुविनीता को लगा कि किसी ने उसके बैग से मोबाइल फोन चुरा लिया. यह उसके लिए अति प्रिय था क्योंकि यह उसे मम्मी-पापा ने पिछले जन्मदिन पर उपहार स्वरुप दिया था. उसने इसके बारे में अपने माता -पिता को बताया, वे भी समान रूप से व्यथित थे. उन लोगों ने सरोजिनी नगर पुलिस स्टेशन में तुरंत एक प्राथमिकी दर्ज कराने का फैसला किया.कई दिन बीत गए. उसे पुलिस थाने से कॉल का इंतजार रहता था. सुविनीता निराश हो गयी. उसने एक निर्णय लिया और मार्च में दिल्ली के पुलिस आयुक्त को एक पत्र लिखा. लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ. अंत में उसने कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी को मई में एक पत्र लिखा. पत्र लिखने के बाद भी उसे कुछ उम्मीद नहीं थी कि इस पत्र का कुछ होगा. लेकिन 27 जून की घटना उसके लिए एक सुखद आश्चर्य था.

एस एच ओ सरोजिनी नगर का फ़ोन उसके पापा के पास इसलिए आया था कि उनकी बेटी के मोबाइल को पुलिस ने ट्रैक कर लिया है. वह मोबाइल लेने थाना आ जायें. और उसे मोबाइल मिल गया.

इसके लिए सुविनीता ने कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी और एस एच ओ सरोजिनी नगर को धन्यवाद दिया.

अब सवाल यह उठता है कि सुविनीता को उसका खोया मोबाइल क्यों मिल गया. इसलिए कि उसने इसके लिए प्रयास किया. प्राथमिकी दर्ज कराई, पुलिस आयुक्त को पत्र लिखा और एक अति प्रभावशाली नेता को पत्र लिखा. हमें अपने अधिकार को जानना चाहिए और उसका प्रयोग करना चाहिए.

 

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