उबंटू- हिंदी कहानी

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उबंटू- हिंदी कहानी

उबंटू- हिंदी कहानी

उबंटू- हिंदी कहानी

उबंटू एक ज़ुलू या खोसा शब्द है. यह एक पारंपरिक अफ्रीकी अवधारणा है. यह एक ऐसा शब्द है जिसमें मानवता का भाव है, जो सद्भाव और सामासिकता के गुण से भरा हुआ है. यह एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे समाज की चिंता करता है. आप पूछेगें वो कैसे? आइये जानते हैं.
एक मानव विज्ञानी, उबंटू जनजाति की आदतों और रीति-रिवाजों का अध्ययन इस समाज के लोगों के साथ रहकर कर रहे थे. जब उनका अध्ययन समाप्त हो गया तो वह एअरपोर्ट जाने के लिये टैक्सी का इन्तजार कर रहे थे. अपने स्टडी के दौरान वह वहां के बच्चों के साथ घुल मिल गये थे.

जाते- जाते उस मानव विज्ञानी ने उस जनजाति के बच्चों के साथ एक खेल खेलने का प्लान बनाया.
चूँकि वह बाहर से आये थे इसलिए वह शहर से बहुत सारा कैंडी और मिठाई लेकर आये थे. उन सबको उन्होंने एक सुंदर रिबन लगी टोकरी में डाल दिया और पास ही एक पेड़ के नीचे रख दिया और बच्चों को एक लाइन दिखाते हुए कहा कि आप लोग  इस लाइन के पास खड़े रहो. जैसे ही मैं कहूँगा – जाओ. तब आप लोगों को जाना है और जो सबसे पहले जायेगा उसे पूरे टोकरी कैंडी मिल जायेगी.
जब उन्होंने कहा, “जाओ!” बच्चों के कार्यकलाप देख वह मानव विज्ञानी दंग रह गए. सभी बच्चों ने एक दूसरे का हाथ पकड़ लिया और एक समूह के रूप में टोकरी की तरफ दौड़ पड़े. सबने कैंडी लिया और एक दूसरे के साथ मिल बांटकर मजे के साथ खाया.
मानव विज्ञानी बहुत हैरान था. उसने उन बच्चों से पूछा – ‘आप लोग सब एक ही साथ क्यों गए जबकि शर्त के मुताबिक जो पहले जाता उसे पूरी टोकरी मिल जाती.’

एक छोटी लड़की ने सरलतापूर्वक कहा: “हम में से कोई एक कैसे खुश हो सकता है जबकि अन्य सभी दुखी हों”.
मानव विज्ञानी चुपचाप और स्तब्ध था. वह वहां उनके बीच कई महीने से रहता चला आ रहा था लेकिन उनके वास्तविक परम्परा और संस्कार का पता उसे आज चला था वह भी बच्चों के द्वारा. था! वास्तव में उसे उनकी असली सार का पता चल गया था.
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धन्यवाद!

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