उदार बनो हिंदी कहानी Generous Hindi Short Story | Hindigk50k

उदार बनो हिंदी कहानी Generous Hindi Short Story

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उदार बनो हिंदी कहानी Generous Hindi Short Story 

दक्षिण कर्नाटक के बेलगाम जिले की एक महिला सन्तान न होने के कारण बहुत दुखी रहा करती थी. भजन, पूजन, व्रत, उपवास जिसने जो बताया, उसने बड़ी श्रद्धा से अपनाया.  फिर भी उसकी गोद सूनी की सूनी ही रही. अंत में उदास मन लेकर वह सन्तान पाने की लालसा से चिदम्बर दीक्षित के पास पहुंची.

 Generous Hindi Short Story

Generous Hindi Short Story

दीक्षित जी सिद्ध पुरूष, समाजसेवी और लोकोपकारी व्यक्ति थे. वे दूसरों  के दुःख और दर्द को अपना दुःख-दर्द समझकर उसे दूर करने का भरसक प्रयत्न करते थे.

जिस समय वह महिला वहाँ पहुंची, उस समय दीक्षित जी के पास वर्तन में भुने हुए चने रखे थे. उन्होंने उस महिला को अपने पास बुलाकर दो मुट्ठी चने दिए. फिर उसको  कहा, “ उस आसन पर बैठ कर  चबा लो.”  उस ओर कई बच्चे खेल रहे थे. छोटे – छोटे बच्चों को अपने –पराए का ज्ञान कहाँ होता है ? वे खेल बंद कर उस महिला के पास आकर इस आशा से खड़े हो गए कि वह महिला शायद उन्हें भी खाने के लिए कुछ चने देगी. लेकिन महिला तो मुँह फेरकर अकेले ही चने खाती जा रही थी. बच्चे ललचाई दृष्टि से उसे ताकते ही रह गए.

जब चने समाप्त हो गए तो वह दीक्षित जी के पास पहुंची. वह उनसे बोली, “अब आप हमारे दुःख दूर करने का उपाय बतला दीजिए.” तब दीक्षित जी ने कहा, “देखो देवी ! मुफ्त में मिले चनों से तुम उन बच्चों को चार दाने भी न दे सकीं, जबकि एक बच्चा तो तुम्हारी ओर एक हाथ तक पसार रहा था.

उदार भगवान से और भी अधिक उदारता पाने वालों को अपने स्वभाव और चरित्र में भी उदारता लानी चाहिए. उन्हें अधिक से अधिक उदार बनने का प्रयत्न करना चाहिए. तभी ईश्वर भी उनकी सुनते हैं. उस औरत को दीक्षित जी की बात समझ में आ गयी.

हम अक्सर किसी चीज को पाने की लालसा तो रखते हैं. लेकिन हमारे अन्दर उसकी योग्यता नहीं होती. मनुष्य को चाहिए कि वह अपनी वर्तमान स्थिति के बारे में सोचे. आत्म अवलोकन से सारी  समस्या अपनेआप सुलझ जाती है.

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

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