उत्तर प्रदेश राज्य के खनिज संसाधन (Mineral Resources of Uttar Pradesh)

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उत्तर प्रदेश राज्य के खनिज संसाधन (Mineral Resources of Uttar Pradesh)

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उत्तर प्रदेश राज्य खनिज संसाधन के दृष्टिकोण से एक महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रदेश के विन्ध्य क्षेत्र की पर्वत श्रृंखला के मध्य विभिन्न प्रकार की खनिज सम्पदाओं का भण्डार है। राज्य में उपलब्ध सभी खनिज पदार्थ मुख्य रूप से 9 जिलों में केन्द्रित हैं – आगरा, ललितपुर, झाँसी, चित्रकूट, बांदा, प्रयागराज, मिर्जापुर, महोबा एवं सोनभद्र।

उत्तर प्रदेश में पाए जाने वाले खनिज संसाधनों का विवरण

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क्र. खनिज प्रमुख खान क्षेत्र
1 ग्लास सैण्ड
  • प्रयागराज (इलाहाबाद) (करछना तहसील)
  • बांदा (करवी तहसील)
  • मऊ जिला
2 डोलोमाइट
  • मिर्जापुर, सोनभद्र एवं बांदा
  • मिर्जापुर के कजराहट क्षेत्र में उच्च स्तर का डोलोमाइट उपलब्ध
3 तांबा
  • सोनराई (जिला ललितपुर)
4 जिप्सम
  • झांसी, हमीरपुर, मिर्जापुर जिलों में उपलब्ध
5 चूना पत्थर
  • मिर्जापुर (गुरुमाकनाच-बपुहाटी)
  • सोनभद्र (कजराहट)
6 संगमरमर
  • मिर्जापुर एवं सोनभद्र
7 नॉन प्लास्टिक फायर क्ले
  • मिर्जापुर जिले के बांसी, मकरीखोह क्षेत्र में
8 यूरेनियम
  • ललितपुर जिला
9 बैराइट्स एवं एडालूसाइट
  • मिर्जापुर एवं सोनभद्र जिलों में
10 ऐस्बेस्टॉस
  • मिर्जापुर जिले में
11 कोयला
  • सोनभद्र के निचले गोंडवाना क्षेत्र में
  • मिर्जापुर जिले के सिंगरौली क्षेत्र में (प्रदेश में कोयला के अपर्याप्त भण्डार)
12up current affairs in hindi 2018 हीरा
  • बांदा जिले में कुछ मात्रा में उपलब्ध
  • मिर्जापुर के जंगल क्षेत्र में भी उपलब्ध
13 रॉक फॉस्फेट
  • बांदा जिले में उपलब्ध
14 सेलखड़ी
  • हमीरपुर और झांसी जिलों में
15 एण्डालसाइट
  • सोनभद्र
16 पाइराइट्स
17 कांच बालू
  • वाराणसी के चकिया क्षेत्र, झांसी के मुडारी बाला बहेट और प्रयागराज (इलाहाबाद) तथा बांदा जिलों के शंकरगढ़, लौहगुढ, बोरगढ़ और धानद्रोल क्षेत्र में, गंगा में वाराणसी और बावली, यमुना में आगरा व इलाहाबाद की कांच बालू प्राप्त

खनिज संसाधन से संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • पाइरोफिलाइट खनिज का प्रयोग कीटनाशकों के निर्माण में किया जाता है, जो कि हमीरपुर व झाँसी जिलों में मिलता है।
  • सोनभद्र तथा मिर्जापुर में अच्छे किस्म का चूना-पत्थर मिलता है।
  • उत्तर प्रदेश का काँच-बालू के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान है।
  • शारदा व रामगंगा नदियों के बालू के कण में सोने के कण पाए जाते हैं।
  • उत्तर प्रदेश में उत्तम कोटि का लोहा नहीं पाया जाता।
  • स्पार्क प्लग और पोर्सिलेन बनाने में मिर्जापुर से प्राप्त एण्डालुसाइट खनिज का उपयोग होता है।
  • उत्तर प्रदेश का देश के कुल खनिज उत्पादन में 2.6% का योगदान है तथा खनिज उत्पादन में राज्य का भारत में दसवाँ स्थान है।
  • भू-तत्त्व एवं खनिकर्म निदेशालय की स्थापना वर्ष 1963 में की गई थी।
  • रॉक फॉस्फेट उर्वरक बनाने के काम आता है तथा अम्लीय मृदा के उपचार में भी इसका प्रयोग किया जाता है।
  • सन् 1974 में उत्तर प्रदेश खनिज विकास निगम की स्थापना की गयी थी।
  • उत्तर प्रदेश में प्रथम खनिज नीति वर्ष 1998 में बनी।
  • ग्लासलैण्ड, इलाहाबाद, बाँदा और मऊ जनपद में प्राप्त होता है।
  • मिर्जापुर के बाँस मकरी खोह क्षेत्र में प्लास्टिक फायरक्ले पाया जाता है।
  • जनपद ललितपुर में यूरेनियम के भण्डार हैं।
  • उत्तर प्रदेश चूना पत्थर के संचित राशि की दृष्टि से देश का दूसरा बड़ा राज्य है।
  • राज्य में प्राप्त डोलोमाइट का प्रयोग इस्पात उद्योग में निस्सरण एवं तापसह्य के लिए किया जाता है।
  • शारदा एवं रामगंगा नदियों के रेत में सोने के कण पाए जाते हैं।
  • राज्य में उत्तम कोटि के लौह अयस्क नहीं पाए जाते हैं और निम्न कोटि का लौह अयस्क भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि लौह अयस्क को बिहार, मध्य प्रदेश, आदि राज्यों से खरीदा जाता है।
  • कांच बालू के उत्पादन में उत्तर प्रदेश का अग्रणी स्थान है।
  • मिर्जापुर जिले के सिंगरौली क्षेत्र में कोयले की खुदाई कोल इण्डिया लिमिटेड द्वारा की जा रही है जिसका उपयोग ओबरा के ताप विद्युतगृह में किया जाता है।
  • बॉक्साइट चित्रकूट जिले में प्राप्त होता है। इस खनिज की मदद से ऐलुमिनियम बनाया जाता है। रेणुकूट (मिर्जापुर) की ऐलुमिनियम फैक्ट्री में बॉक्साइट का प्रयोग हो रहा है।
  • उत्तर प्रदेश में खनिज विकास की गति को बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य खनिज विकास निगम की स्थापना 23 मार्च, 1974 को की गई थी। निगम की स्थापना के मुख्य उद्देश्य हैं
    • उत्तर प्रदेश एवं अन्य स्थानों में खनिज एवं उप खनिजों का वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक संचालन तथा विकास एवं उस पर आधारित उद्योगों की स्थापना तथा उन्हें प्रोत्साहित कर खनिजों के मूल्य में वृद्धि करना।
    • उत्तर प्रदेश में भूतत्व खनिकर, खनिज उच्चीकरण, खनिज आधारित उद्योगों तथा शोध एवं विकास के द्वारा खनिज विकास की गति को बढ़ाना।

उत्तर प्रदेश की खनिज नीति

राज्य की पहली खनिज नीति 29 दिसम्बर, 1998 को घोषित। खनिज विकास को उद्योग का दर्जा। राज्य के 10 जिले खनिज बहुल घोषितसहारनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, प्रयागराज (इलाहाबाद), बांदा, हमीरपुर, महोबा, जालौन, झांसी, ललितपुर। खनिजों से प्राप्त राजस्व के 5% भाग से ‘खनिज विकास निधि’ स्थापित करने की योजना। औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक कार्यकारी दल गठित। राज्य के ITI तथा पालीटेक्निकों में खनन पाठ्यक्रम आरम्भ करने की घोषणा। खनिज उत्पादन में राज्य का देश में 10वां स्थान तथा देश के कुछ खनिज उत्पादन का प्रदेश में 2.6% भाग ही उत्पादित।

Note –

  • उत्तर प्रदेश के विन्ध्य क्षेत्र की पर्वत श्रृंखला के मध्य विभिन्न प्रकार की खनिज सम्पदाओं का भण्डार है।
  • सोनराई (जिला ललितपुर) तांबे का प्रमुख खान क्षेत्र है।
  • ललितपुर जिला यूरेनियम का प्रमुख खान क्षेत्र है।
  • मिर्जापुर जिले ऐस्बेस्टॉस का प्रमुख खान क्षेत्र है।
  • हमीरपुर और झांसी जिलों में सेलखड़ी खनिज संसाधन है।
  • उत्तर प्रदेश में उत्तम कोटि का लोहा नहीं पाया जाता।
  • उत्तर प्रदेश का देश के कुल खनिज उत्पादन में 2.6% का योगदान है।
  • भू-तत्त्व एवं खनिकर्म निदेशालय की स्थापना वर्ष 1963 में की गई थी।
  • सन् 1974 में ‘उत्तर प्रदेश खनिज विकास निगम’ की स्थापना की गयी थी।
  • कांच बालू के उत्पादन में उत्तर प्रदेश का अग्रणी स्थान है।
  • बॉक्साइट चित्रकूट जिले में प्राप्त होता है।
  • उत्तर प्रदेश में राज्य खनिज विकास निगम की स्थापना 23 मार्च, 1974 को की गई थी।
  • खनिज उत्पादन में राज्य का देश में 10वां स्थान है।

उत्तर प्रदेश राज्य के खनिज संसाधन (Mineral Resources of Uttar Pradesh)

उत्‍तर प्रदेश के खनिज संसाधन   

उत्‍तर प्रदेश के विंध्‍य क्षेत्र की पर्वत श्रृंखला के बीच विभिन्‍न प्रकार की खनिज संपदा दबी हुई हैं। उत्‍तर प्रदेश में पाए जाने वाले खनिजों में चूना, पत्‍थर, मैग्‍नेसाइट, सॉफ्टस्‍टोन, तांबा, ग्‍लास-सैंड, संगमरमर, नॉन-प्‍लास्टिक फायर क्‍ले, यूरेनियम, वेराइट्स एवं एंडलुसाइट प्रमुख हैं। उत्‍तर प्रदेश के आठ दक्षिणी जिले खनिज पदार्थो के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं।

  • 2014-15 में उ.प्र. में खनिज उत्‍पादन मूल्‍य 7,043 करोड रूपए के स्‍तर पर रहा जो पिछले वर्ष की तुलना में 5 प्रतिशत कम हैं। जब कि भारत में इस दौरान उत्‍पादित खनिज का मूल्‍य 2,80,332 करोड रूपए रहा। उ.प्र. में लघु खनिज का उत्‍पादन मूल्‍य 2014-15 में 5373 करोड रूपए रहा।
  • उ.प्र. में खनिज मुख्‍यत: दक्षिण के पठारी क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
  • वर्ष 2013-14 में उत्‍तर प्रदेश में कुल 17 खदानें (रिपोर्टिंग माल्‍स) थीं।
  • उ.प्र. के अन्‍य क्षेत्रों के खनिज संसाधनों में निर्धन होने का प्रमुख कारण यहां की भूगर्भिक संरचना में अधिकांशत: जलोढ निक्षेपों का पाया जाना हैं जिनमें प्राय: खनिजों का अभाव पाया जाता हैं।
  • उत्‍तर प्रदेश, देश में एंडलुसाइट और डायस्‍पोर खनिज संसाधन में प्रमुख धारक हैं। यहॉ पर 78 प्रतिशत एंडलुसाइट और 37 प्रतिशत डायस्‍पोर, 17 प्रतिशत सिलिमेनाइट तथा 10 प्रतिशत पाइरोफिलाइट के संसाधन विघमान हैं।
  • हमीरपुर डायस्‍पोर और पाइरोफिलाइट में अग्रणी जिला हैं। इसके अतिरिक्‍त झांसी, ललितपुर और महोबा में भी इनका उत्‍पादन होता हैं।
  • इलाहाबाद जिले में नैनी में उच्‍च गुणवत्‍ता युक्‍त सिलिका बालू का उत्‍पादन किया जाता हैं।
  • सिलिका की रेत, जो कि कांच बालू का महत्‍वपूर्ण स्रोत हैं, में 98% SiO2 और थोडी मात्रा में Fe2O3 पाया जाता हैं। यह इलाहाबाद के शंकरगढ, लोहरगढ, में तथा बांदा जिले के बरगढ, अलीगढ, एवं चित्रकूट जिले में पाया जाता हैं।
  • मिर्जापुर-केल्‍साइट, एंडालुसाइट
  • उ.प्र. में चूना पत्‍थर का उत्‍पादन गुरूमाा-कनाच-बापुहारी मिर्जापुर जिला एंव कजरहट सोनभद्र जिलें में किया जाता हैं।
  • चूना पत्‍थर का उपयोग अधिकांशत: सीमेंट उघोग में किया जाता हैं।
  • चाइना क्‍ले और डोलोमाइट उ.प्र. के सोनभद्र मिर्जापुर एवं बांदा जिलों में पाया जाता हैं।
  • उ.प्र. में हीरा बांदा जिलें से प्राप्‍त होता हैं।
  • उ.प्र. के जंगल क्षेत्र (मिर्जापुर) में भी हीरे की खोज की गई हैं।
  • उ.प्र. मे रॉक फॉस्‍फेट के भंडार ललितपुर जिले में पाए जाते हैं।
  • रॉक फॉस्‍फेट के सुरक्षित भंडार पिसनारी एंव टोरी (ललितपुर) में हैं।
  • रॉक फॉस्‍फेट का उपयोग मुख्‍यत: उर्वरक उघोग में किया जाता हैं।
  • उ.प्र. में सोना की प्राप्ति शारदा एवं रामगंगा नदियों की रेत से होती हैं।
  • ललितपुर में घसान नदी तट पर सोने और प्‍लेटिनम के निक्षेप प्राप्‍त हुए हैं।
  • उ.प्र. के इलाहाबाद, झांसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, बांदा, हमीरपुर, महोबा, जालौन, एवं ललितपुर जिलों को खनिज बहुत जिला घोषित किया गया हैं।
  • उ.प्र. में कोयले की प्राप्ति सिंगरौली (सोनभद्र) क्षेत्र से होती हैं।
  • सिंगरौली क्षेत्र में खुदाई का कार्य कोल इंडिया लि. द्वारा किया जाता हैं।
  • सिंगरौली में कोयले के कुल भंडार क्षेत्र 10-22 मीटर मोटी परत में 220 वर्ग किमी. क्षेत्र की दो पट्टियों में फैले हैं।
  • उ.प्र. के कुल खनिज उत्‍पादन मूल्‍य का लगभग 47 प्रतिशत हिस्‍सा कोयले का हैं।

 

प्रदेश में खनिज संसाधन : एक दृष्टि में
चूना पत्‍थर गुरूमा-कनाच-बापुहारी (मिर्जापुर) एवं कजराहट (सोनभद्र)
कोयला सिंगरौली (सोनभद्र)
बाक्‍साइट बांदा, वाराणसी और ललितपुर
डोलोमाइट बारी (सोनभद्र), बांदा
कांच बालू शंकरगढ, लोहरगढ (इलाहाबाद), बरगढ (बांदा), अलीगढ, चित्रकूट
पोटाश लवण इलाहाबाद, चंदौली, बांदा, झांसी (सोनभद्र)
एंडालुसाइट सोनभद्र, मिर्जापुर
पाइरोफिलाइट झांसी, ललितपुर, एवं महोबा, हमीरपुर
सेलखडी हमीरपुर, झांसी
पाइराइट्स सोनभद्र
राक फॉस्‍फेट ललितपुर
फायरक्‍ले बांसी-मकरी-खोह (मिर्जापुर), सोनभद्र
हीरा बांदा एवं मिर्जापुर
सोना शारदा एवं रामगंगा के रेत में, परसोई क्षेत्र सोनभद्र, बेरवार ललितपुर
तांबा ललितपुर (सोनराई क्षेत्र)
यूरेनियम ललितपुर
संगमरमर मिर्जापुर, सोनभद्र
एस्‍बेस्‍टस मिर्जापुर, झांसी (बडागांव क्षेत्र)
जिप्‍सम झांसी, हमीरपुर
सैंड स्‍टोन मिर्जापुर
डायस्‍पोर झांसी, महोबा एवं ललितपुर, हमीरपुर
ग्रेनाइट बांदा, हमीरपुर, ललितपुर, महोबा
लौह अयस्‍क ललितपुर
कैल्‍साइट मिर्जापुर
चाइना क्‍ले बांदा, सोनभद्र
फेल्‍सपार झांसी
सिल्‍लीमेनाइट सोनभद्र
गेरू बांदा

 

  • मिर्जापुर के बांसी, मकरी-खोह क्षेत्र में नॉन प्‍लास्टिक फायर क्‍ले प्राप्‍त होती हैं।
  • उ.प्र. में कांच बनाने योग्‍य बालू की प्राप्ति गंगा एंव यमुना नदियों से होती हैं।
  • उ.प्र. में कांच की बालू (Quartz- Silica sand) का कुल सुरक्षित भंडार (Reserves + Remaining Resources) 10 करोड टन से अधिक हैं (1 अप्रैल, 2010 तक की स्थिति)

नोट:- कांच की बालू के उत्‍पादन में उत्‍तर प्रदेश का नहीं बल्कि आंध्र प्रदेश का अग्रणी स्‍थान हैं।

  • उ.प्र. में कांच बनाने वाली बालू के भंडार मुख्‍यत: शंकरगढ, लालापुर (इलाहाबाद), बरगढ (बांदा) एवं अलीगढ जिलों में पाए जाते हैं।
  • उ.प्र. में बॉक्‍साइट बांदा, वाराणसी, चित्रकूट जिलों से प्राप्‍त होता हैं।
  • मैग्‍नेसाइट का उपयोग मुख्‍यत: सहताप ईंटों के निर्माण कार्य हेतु किया जाता हैं।
  • उ.प्र. में बांदा एवं वाराणसी जिलों से मैग्‍नेसाइट की प्राप्ति होती हैं।
  • तांबा मुख्‍यत: आग्‍नेय एवं परतदार चट्ठानों में पाया जाता हैं।
  • उ.प्र. में तांबा उत्‍पादक मुख्‍य जिला ललितपुर हैं।
  • पाइरोफिलाइट उ.प्र. में झांसी, ललितपुर एंव महोबा हमीरपुर जिलों में पाया जाता हैं।
  • पाइरोफिलाइट का उपयोग सहताप एवं सिरेमिक उघोग में किया जाता हैं।
  • टैल्‍क खनिज उ.प्र. के कानपुर, गाजीपुर, इलाहाबाद एवं वाराणसी, चंदौली, बांदा, झांसी, सोनभद्र जिलों से प्राप्‍त होता हैं।
  • उ.प्र. में डायस्‍पोर उत्‍पादक प्रमुख जिले महोबा, ललितपुर, हमीरपुर एवं झांसी हैं।
  • डायस्‍पोर के उत्‍पादन में उ.प्र. का देश में प्रथम स्‍थान हैं।
  • उ.प्र. में इमारती पत्‍थर की प्राप्ति मिर्जापुर एवं चुनार से होती हैं।
  • यूरेनियम उत्‍तर प्रदेश के ललितपुर जिले में पाया जाता हैं।
  • बेस मेटल्‍स की प्राप्ति उ.प्र. के बांदा जिले से होती हैं।
  • उ.प्र. के हमीरपुर जिले में ग्रेफाइट के भंडारों का पता चला हैं।
  • उ.प्र. में ‘राज्‍य खनिज निगम’ की स्‍थापना 23 मार्च, 1974 को की गई थी।

उत्‍तर प्रदेश खनन नीति, 2017

       मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल द्वारा 30 मई, 2017 को सुशासन (Good Governance) एवं भ्रष्‍टाचार मुक्‍त के मूलतंत्रों पर आधारित एक सुदृढ एवं पारदर्शी खनन नीति (उत्‍तर प्रदेश खनन नीति, 2017) के प्रख्‍यापन को मंजूरी प्रदान की गई। राज्‍य सरकार की इस खनन नीति के प्रमुख मंत्र हैं-

  • पार‍दर्शिता
  • कानून का राज
  • समता
  • प्रभावशीलता
  • आम सहमति
  • उत्‍तरदायी
  • भागीदारी

लक्ष्‍म- नीति के तहत उपर्युक्‍त मंत्रों के आधार पर निम्‍नलिखित लक्ष्‍यों को प्राप्‍त किया जाना हैं।

  1. खनिजों के विषम में जागरूकता (Awareness) को बढाना
  2. सर्व सामान्‍य की खान एवं खनिजों तक पहुंच (Accessibility) को सुनिश्चित करना।  
  3. सर्व, सामान्‍य को खनिजों की उपलब्‍धता (Availability) में वृद्धि करना।
  4. खनिजों के मूल्‍य को जन साधारण के सामर्थ्‍य के अनुरूप (Affordability) बनाए रखना तथा
  5. उपर्युक्‍त आधारों पर जनसाधारण में खनिजों की स्‍वीकार्यता (Acceptability) को बढाना।

खनन नीति के उद्देश्‍य –

  1. सामाजिक एवं आर्थिक सतत विकास (Sustainable Socio-Economic Development) की गति को तीव्र करना।
  2. खनिजों का संरक्षण (Mineral Conservation) करना।
  3. पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (Environment and Ecology) का संतुलन बनाए रखना।
  4. खनिजों से प्राप्‍त राजस्‍व के राज्‍य के कुल राजस्‍व प्राप्ति में अंश को 1.85 प्रतिशत को बढाकर आगामी 5 वर्षो में 3 प्रतिशत करना।
  5. अवैध खनन/परिवहन पर नियंत्रण
  6. खनिज क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढाना।
  7. खनिज उघोग में स्‍वच्‍छ प्रतिस्‍पर्धा को प्रोत्‍साहन।
  8. खनिजों के वैज्ञानिक विकास हेतु तकनीकी ज्ञान सुविधाएं तथा परामर्श उपलब्‍ध कराना।
  9. खनिज संबंधी सूचना/आंकडों की उपलब्‍धता को बढाना।
  10. इस क्षेत्र में निजी पूंजी निवेश को प्रोत्‍साहन और उघमिता का विकास करना।
  11. तकनीक के माध्‍यम से नए खनिज भंडारों के अन्‍वेषण को प्रोत्‍साहित करना।
  12. ई-टेंडरिंग/ई-नीलामी/ई-बिडिंग प्रणाली के माध्‍यम से खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता लाना तथा इसे भ्रष्‍टाचार मुक्‍त बनाना।
  13. खनन से प्रभावित व्‍यक्तियों हेतु कल्‍याणकारी योजनाओं का संचालन करना।

रणनीति-

  • खनिजों के व्‍यावसायिक दोहन हेतु उनके अन्‍वेषण में तीव्रता लाना।
  • निम्‍न श्रेणी के खनिजों का उच्‍चीकरण करना।
  • खनिज विकास एवं खनिज आधारित उघोंगों को प्रोत्‍साहित करना।
  • खनन प्रशासन की प्रक्रिया को सरलीकृत, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाना।
  • खनिज आधारित सूचना के लिए सूचना प्रदान करनेहेतु निदेशालय स्‍तर पर विशेष सेल की स्‍थापना करना।
  • अवस्‍थापना एवं आधारभूत सुविधाओं का विकास करना।
  • अवैध खनन/परिवहन पर नियंत्रण के लिए सचल दल तथा विभागीय सुरक्षा बल का गठन।
  • खनन संबंधी अपराधों की त्‍वरित सुनवाई के लिए विशेष न्‍यायालय का गठन।
  • खनिज क्षेत्रों के लिए कल्‍याणीकारी योजनाओं का क्रियान्‍वयन करना।
  • वर्ष 2017-18 (1st A.E.) में राष्‍ट्रीय स्‍तर पर माइनिंग पंडूक्‍वैरिंग का GVA में अंश (चालू कीमतों पर) गत पांच वर्षो में 3.1 प्रतिशत से घटकर 2.3 प्रतिशत रह गया हैं।
  • राज्‍य के स्‍वयं के अर्जित संसाधनों में खनिजों से आय का अंश 1.24 प्रतिशत से बढकर 1.8 प्रतिशत हो गया हैं।
  • प्रस्‍तावित नीति सुधार से राज्‍य में यह अगले पांच वर्षो में बढाकर 3 प्रतिशत किया जाना संभव हो सकेगा।
  • उत्‍तर प्रदेश राज्‍य के GDP में खनन एवं उत्‍खनन का हिस्‍सा (चालू कीमतों पर) वर्ष 2017-18 में मात्र 1.3 प्रतिशत हैं।

 

प्रदेश में पाए जाने वाले खनिज
मुख्‍य खनिज जिला
1.       कोयला सोनभद्र (बीना, ककडी, खडिया, कृष्‍णशिला)
2.       लाइमस्‍टोन सोनभद्र (बिल्‍ली, मारकुंडी, कजरहट, भलुआ, गुरमा)
             उप‍खनिज
1.       सिलिका सैंड2.       डायस्‍पोर (पायरोफिलाइट)

3.       ग्रेनाइट डायमेंशनल स्‍टोन

4.       ग्रेनाइट-खंड/गिट्टी

5.       डोलोस्‍टोन-खंडा गिट्टी

6.       सैंडस्‍टोन ब्‍लॉक एवं खंडा/गिट्टी

7.       बालू, बजरी बोल्‍डर मिश्रित अवस्‍था में

8.       बालू/मोरम

 

9.       साधारण बालू

इलाहाबाद (बारा, शंकरगढ), चित्रकूट (बरगढ)ललितपुर, झांसी, हमीरपुर, महोबा

ललितपुर

ललितपुर, झांसी, हमीरपुर, महोबा

सोनभद्र

सोनभद्र मिर्जापुर, इलाहाबाद, चित्रकूट, ललितपुर, आगरा

सहारनपुर, बिजनौर

जालौन, हमीरपुर, फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट, कौशम्‍बी, झांसी, ललितपुर, सोनभद्र

प्रदेश के जनपद हाथरस, मेरठ, मुजफ्फरनगर, अमेठी, जौनपुर को छोडकर सभी जनपदों में।

 

नोट- राज्‍य सरकार की अधिसूचना के तहत प्रत्‍येक जिले में एक लाभरहित जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) नयास की स्‍थापना की गई हैं, जो खनन संक्रिया से प्रभावित क्षेत्रों/व्‍यक्तियों के विकास संबंधी कार्यवाही को अंजाम देगा।

  • जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) न्‍यास में जमा धनराशि का उपयोग ‘प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्‍याण योजना’ (PMKKKY) में भी किया जाएगा।

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