उत्तर प्रदेश की जलवायु

उत्तर प्रदेश की जलवायु

उत्तर प्रदेश की जलवायु: उत्तर प्रदेश की जलवायु एवं उत्तर प्रदेश के सम्पूर्ण सामान्य ज्ञान एवं जिलेवार सामान्य-ज्ञान हमारी “Uttar Pradesh GK” फ्री मोबाइल एप्प से भी पढ़ सकते हैं । उत्तर प्रदेश सामान्य-ज्ञान नोट्स आपकी आगामी परीक्षाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है एवं हमारी मोबाइल एप्प पर फ्री उपलब्ध है।  उत्तर प्रदेश सामान्य-ज्ञान नोट्स के कुछ अंश आपकी जानकारी के लिए निम्न है ।
उत्तर प्रदेश की जलवायु 

  • उत्तर प्रदेश की जलवायु में मुख्यतया तीन ऋतुओं का स्थान है: ग्रीष्म ऋतु (मार्च से मध्य जून), वर्षा ऋतु (मध्य जून से सितम्बर) एवं शीत ऋतु (अक्टूबर से फरवरी)
  • उत्तर प्रदेश की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी है।
  • उत्तर प्रदेशमें औसत तापमान जनवरी में 12.50 से 17.50 से. रहता है, जबकि मई-जून में यह 27.50 से 32.50 से. के बीच रहता है।
  • वर्षा के इन चार महीनों में होने के कारण बाढ़ एक आवर्ती समस्या है, जिससे ख़ासकर राज्य के पूर्वी हिस्से में फ़सल, जनजीवन व सम्पत्ति को भारी नुक़सान पहुँचता है।
  • ग्रीष्म ऋतु में प्रदेश के दक्षिणी भाग में अधिक तापमान होने का   प्रमुख कारण कर्क रेखा का नजदीक होना है। ग्रीष्मकाल में प्रदेश में चलने वाली शुष्क पछुआ हवाओं को लू कहा जाता है।
  • प्रदेश में बंगाल की खाड़ी वाले मानसून को पूर्वा के नाम से जाना जाता है। प्रदेश में बंगाल की खाड़ी के मानसून का प्रवेश पूर्व तथा दक्षिण पूर्व दिशा से होता है।
  • प्रदेश में सर्वाधिक वर्षा पूर्वी मैदान के तराई क्षेत्र में होती है। प्रदेश में शीतकाल और ग्रीष्मकाल में चक्रवाती और संवहनीय वर्षा होती है।
  • मानसून की लगातार विफलता के परिणामस्वरूप सूखा पड़ता है व फ़सल का नुक़सान होता है।
  • राज्य में वन मुख्यत: दक्षिणी उच्चभूमि पर केन्द्रित हैं, जो ज़्यादातर झाड़ीदार हैं। विविध स्थलाकृति एवं जलवायु के कारण इस क्षेत्र का प्राणी जीवन समृद्ध है। इस क्षेत्र में शेर, तेंदुआ, हाथी, जंगली सूअर, घड़ियाल के साथ-साथ कबूतर, फ़ाख्ता, जंगली बत्तख़, तीतर, मोर, कठफोड़वा, नीलकंठ और बटेर पाए जाते हैं।
  • उत्तर प्रदेश की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी है।
  • राज्य में औसत तापमान जनवरी में 12.50 से 17.50 से. रहता है, जबकि मई-जून में यह 27.50 से 32.50 से. के बीच रहता है।
  • पूर्व से (1,000 मिमी से 2,000 मिमी) पश्चिम (610 मिमी से 1,000 मिमी) की ओर वर्षा कम होती जाती है।
  • राज्य में लगभग 90 प्रतिशत वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान होती है, जो जून से सितम्बर तक होती है।
  • वर्षा के इन चार महीनों में होने के कारण बाढ़ एक आवर्ती समस्या है, जिससे ख़ासकर राज्य के पूर्वी हिस्से में फ़सल, जनजीवन व सम्पत्ति को भारी नुक़सान पहुँचता है।
  • मानसून की लगातार विफलता के परिणामस्वरूप सूखा पड़ता है व फ़सल का नुक़सान होता है।

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