ईसा मसीह की प्रेरक कहानियाँ Jesus Christ Motivational Stories in Hindi | Hindigk50k

ईसा मसीह की प्रेरक कहानियाँ Jesus Christ Motivational Stories in Hindi

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ईसा मसीह की प्रेरक कहानियाँ Jesus Christ Motivational Stories in Hindi 

Jesus Christ Motivational Stories in Hindi : 1. Hriday Parivartan

ईसा मसीह की प्रेरक कहानियाँ : 1. ह्रदय परिवर्तन

ईसा मसीह को प्रेम और शांति का मसीहा कहा जाता है. वे एक दिव्य आत्मा थे. उनके जन्म के हजारों वर्षों के बाद भी लोग श्रद्धापूर्वक उनके उपदेशों को सुनते हैं और उसका पालन करते हैं.

जॉन से दीक्षा लेने के बाद ईसा जंगल में चालीस दिनों तक उपवास किया और निरंतर ईश्वर की आराधना में लगे रहे. तब जाकर उनको वास्तविक ज्ञान की प्राप्ति हुई.

ज्ञान प्राप्ति के बाद जब वे भ्रमण पर निकले, उनके बहुत सारे शिष्य बन गए. आम जनता उनके प्रवचनों और उपदेशों को बहुत ही चाव के साथ सुनते थे.

एक दिन एक वेश्या ने उनको अपने घर आने का निमंत्रण दिया जिसे उन्होंने शीघ्र ही स्वीकार कर लिया.

वेश्या के निमंत्रण को स्वीकार करने की बात चारों और फ़ैल गयी और लोगों में इसकी चर्चा होने लगी. उनका एक शिष्य सिमोन उनके पास आया और अपने मन की बात उनसे कह दी – “उद्धार करने के लिए क्या सज्जन कम पड़ गए थे जो आप बदनाम लोगों के यहाँ जाने की सोच रहे हैं. इससे आपका नाम बदनाम हो रहा है.”

ईसा ने उस शिष्य से पूछा – “ यदि तुम डॉक्टर होते तो एक जुकाम वाले या दर्द से तड़प रहे व्यक्तियों में से पहले किसके पास जाते?”
सिमोन ने कहा – “ प्रभु! पहले दर्द से तड़पने वाले रोगी के यहाँ जाता.”

इसपर ईसा ने कहा – “ उसी तरह से मैं कम अपराधी से पहले अधिक पापी को सुधारने को प्राथमिकता देता हूँ, तो इसमें भूल क्या है और बदनामी कैसी?”

सिमोन चुप था. यह बात जब वेश्या को पता चली तो वह भाव विभोर हो गयी. अगले दिन वह वेश्या अब वेश्या न रहकर संत बन चुकी थी.

Jesus Christ Motivational Stories in Hindi : 2.  Annapurna

ईसा मसीह की प्रेरक कहानियाँ : 2. अन्नपूर्णा

एक दिन ईसा अपने शिष्यों के साथ एक गाँव के पास से गुजर रहे थे. चलते चलते सबको भूख लग चुकी थी. ईसा से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा – “जो कुछ भी तुम्हारे पास है, उसे पहले इकट्ठा करो और तब मिल- बांटकर खाओ.”

शिष्यों के पास कुल मिलाकर पांच रोटी और थोड़ी सी सब्जी बची थी. जब वे खाने बैठे तो उधर से भूखा –प्यासा भिखारी भी आ गया. शिष्यों ने अपने भोजन से उसे भी दिया और खुद भी खाया. उतनी ही रोटी खाकर सबका पेट भर गया और सभी तृप्त हो गए.

सोलोमन नामक शिष्य ने ईसा से पूछा – प्रभु! हमारे पास इतनी कम रोटियाँ थी फिर सभी लोग इसे खाकर संतुष्ट हो गए, इसका क्या रहस्य है?”

इसपर ईसा बोले – “ देखो, धर्मात्मा वह होता है जो अपने से पहले दूसरे के बारे में सोचता है. यह सच है कि तुम्हारे पास बहुत कम संसाधन थे. लेकिन जब तुमने दूसरों के बारे में सोचा तभी वह अक्षय अन्नपूर्णा बन गयी. जो जोड़ते हैं और संचय करते हैं उनको अभाव में भी असीम संतुष्टि मिलती है.”

सभी शिष्यों के मुखमंडल पर एक गजब की आभा का संचार हो गया था.

Jesus Christ Motivational Stories in Hindi : 3. Jyada Sneh

ईसा मसीह की प्रेरक कहानियाँ : 3. ज्यादा स्नेह

ईसा मसीह ने एक बार एक गड़ेरिये को देखा कि उसने अपने कंधे पर एक छोटे से भेड़ को लिए जा रहा है. उसने उस भेड़ को अपने कंधे से बहुत प्यार से उतारा. उसे स्नान कराया. उसके बालों को सुखाया. फिर उसने उस भेड़ को खाने के लिए हरी और मुलायम घास दी. जब भेड़ उस घास को खा रही थी, तब उस गड़ेरिये की ख़ुशी देखते ही बनती थी.

उस समय ईसा उसी गड़ेरिये के निकट आराम कर रहे थे. गड़ेरिये को इतना प्रसन्न देख उन्होंने उससे पूछा – “ तुम इतना प्रसन्नचित्त क्यों हो रहे हो?”

गड़ेरिये ने कहा – “प्रभु! यह भेड़ जंगल में प्रायः हमेशा भटक जाती है. मेरे पास सौ भेड़ें है, वे सभी शाम को अपने घर वापस आ जाती हैं. इसीलिये मैं इसे विशेष स्नेह और प्यार देता हूँ कि यह फिर कहीं न भटके.”

यह सुनकर ईसा ने अपने शिष्यों से कहा – “सुनो, अपने भटके हुये भाइयों के साथ हमें भी उसी तरह का व्यवहार करना चाहिए जैसा कि यह गड़ेरिया अपने इस भेड़ के साथ करता है.”

जो लोग अपने मार्ग से भटक गए हैं उनको विशेष स्नेह और प्रेम द्वारा ही वापस रास्ते पर लाया जा सकता है.

Jesus Christ Motivational Stories in Hindi : 4. Doctor

ईसा मसीह की प्रेरक कहानियाँ : 4. डॉक्टर

ईसा मसीह भोजन कर रहे थे. उनके आस पास में तीन चार दुष्ट लोग आकर बैठ गए. उन्हें देख कर कुछ तार्किकों ने उनके शिष्यों से कहा – “ तुम्हारा गुरु कैसा है.दुष्ट लोगों के बीच में बैठकर भोजन करता है.”

यह बात ईसा तक पहुँची. उन्होंने पूछा – “ यह बताओ डॉक्टर की जरूरत किसको होती है? स्वस्थ व्यक्ति को या बीमार को?”

तार्किकों ने कहा – बीमार को

ईसा बोले – “ मैं इन अवांछनीय लोगों के बीच बैठकर इसीलिये खाता पीता हूँ क्योंकि ये रोगी हैं और इन्हें डॉक्टर की जरुरत है.”

सच में ईसा मसीह के सन्देश प्रेम और भाईचारे का मार्ग प्रशस्त करता है.

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