ईश्वर की धरोहर हिंदी कहानी Ishwar kee Dharohar Hindi Short Story

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ईश्वर की धरोहर हिंदी कहानी Ishwar kee Dharohar Hindi Short Story

अपने प्रियजन की मृत्यु हो जाने पर सामान्यत: यह उपदेश सुनने को मिलता है. भगवान ने जीवन दिया था, भगवान ने ही वापस ले लिया. दुःख के समय ऐसे उपदेश को कुछ लोग तो ग्रहण करते हैं लेकिन कुछ ऐसे सुनकर सामान्य नहीं हो पाते. कभी –कभी महत्वपूर्ण यह हो जाता है कि उपदेश कौन दे रहा है, किस प्रकार दे रहा है और ग्रहण करने वाला किस मानसिकता में है.

Ishwar kee Dharohar Hindi Short Story

Ishwar kee Dharohar Hindi Short Story

इस संबंध में यह  कहानी  बहुत प्रासंगिक है. यह कहानी है एक भक्त परिवार के सम्बन्ध में. पति – पत्नी आस्तिक थे और उनको  भगवान पर पूरा विश्वास था. उनका पुत्र कई दिनों से बीमार चल रहा था. एक दिन पति किसी काम से बाहर गया हुआ था. उसी समय उनका इकलौता पुत्र चल बसा. पत्नी ने धैर्यपूर्वक बेटे के शव को ढंक दिया और पति के लिए भोजन बनाने में लग गई. पति ने आते ही पूछा, “पुत्र की क्या दशा है?” पत्नी बोली, “आज वह पूरा विश्राम कर रहा है. आप भोजन कर  लीजिए.”

भोजन कराते हुए पत्नी ने कहा, “पड़ोसन ने मुझसे एक वर्तन में पानी माँगा था, जो मैंने उसे दे दिया. अब मैं अपना वर्तन माँग रही हूँ तो वह देना नहीं चाहती. उल्टे रोने –चिल्लाने लगती है. पति ने कहा, “बड़ी मूर्ख है वह. दूसरे  की वस्तु लौटाने में रोने का क्या काम?” तब तक पति भोजन से निवृत हो चुका था. तभी पत्नी ने कहा, “अपना पुत्र भी प्रभु की धरोहर था. आज प्रभु ने अपनी वस्तु ले ली है तो क्या हम रोकर मूर्ख बनें?”

पति ने गंभीरतापूर्वक अपनी पत्नी की ओर देखा सारा माजरा समझ में आने पर उसने कहा, “तुम ठीक कहती हो.” और फिर दोनों ने अपने पुत्र का धैर्यपूर्वक दाह – संस्कार किया. यह कहानी हमें यह बताती है कि यह मनुष्य जीवन ईश्वर की धरोहर मात्र है. अतः इसके छिन जाने पर हमें संवेदनाओं से पूर्णत: तो मुक्त नहीं होना चाहिए, किन्तु अवसाद में भी नहीं डूबना चाहिए.

एक अन्य प्रसंग:

इसी सम्बन्ध में श्री कृष्ण और अर्जुन का संवाद अति प्रसिद्द है. जब महाभारत की लड़ाई में अभिमन्यु का वध हो जाता है तो अर्जुन विक्षिप्त हो जाते हैं. अभिमन्यु को लेकर विलाप करने लगते हैं. तब श्री कृष्ण उनको अभिमन्यु के पास ले जाते हैं.  वहां क्या होता है, यह आप सबको पता ही होगा. यदि हम किसी भी चीज को ईश्वर की धरोहर समझे तो उसके प्रति हमारे मन में मोह उत्पन्न होगा ही नहीं.

 

आपको यह हिंदी कहानी कैसी लगी, अपने विचार कमेंट द्वारा दें. धन्यवाद!

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