आतंकवाद पर निबंध-Essay On Terrorism In Hindi | Hindigk50k

आतंकवाद पर निबंध-Essay On Terrorism In Hindi

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आतंकवाद पर निबंध-Essay On Terrorism In Hindi

आतंकवाद पर निबंध (Essay On Terrorism In Hindi) :

भूमिका : विविधता में एकता भारत की प्रमुख विशेषता है। उक्त विविध जनों को हमारे संविधान ने अपने में समान रूप से समाहित किया है। लेकिन विवध संस्कृतियों के इस अद्भुत सामंजस्य को देखकर बहुत से देश निस्तबद्ध रह जाते हैं। वे इस देश के एकीकरण को तोडकर देश को बिखेरना चाहते हैं।

वे हमारे देश को मिलकर रहता हुआ नहीं देख सकते हैं। वे अपने दलालों को भेजकर हमें तोडना चाहते हैं। हमारे समाज में विविध प्रकार से विघटन करके जनसाधारण को अपने कुकृत्यों से आतंकित कर देते हैं जिसकी वजह से समाज में आतंकवाद छा जाता है। आतंकवाद आधुनिक युग की सबसे भयंकर समस्या है।

आतंकवाद की समस्या सिर्फ हमारे ही देश की नहीं सभी देशों की एक बड़ी समस्या बन चुकी है। आतंकवादी अपने-अपने गिरोह बनाकर रखते हैं वे किसी भी देश की क़ानूनी व्यवस्था को स्वीकार नही करते हैं। अपनी इच्छा से लोगों की हत्या करते हैं। आज के समय में जब हम विभिन्न समस्याओं के बारे में सोचते हैं तो हमें यह पता चलता है कि हमारा देश अनेक प्रकार की समस्याओं से घिरा हुआ है।

एक तरफ भुखमरी , दूसरी तरफ बेरोजगारी, कहीं पर अकाल पड़ रहा है तो कहीं पर बाढ़ अपना प्रकोप दिखा रही है। इन समस्याओं में सबसे बड़ी समस्या है आतंकवाद की समस्या जो देश रूपी वृक्ष को धीरे-धीरे खोखला करती जा रही है। भारत देश की कुछ अलगाववादी शक्तियाँ और पथ-भ्रष्ट नवयुवक हिंसात्मक रूप से देश के बहुत से क्षेत्रों में दंगा-फसाद कराकर अपनी स्वार्थ सिद्धि में लगे हुए हैं।

आतंकवाद का अर्थ :-आतंकवाद दो शब्दों से मिलकर बना होता है – आतंक + वाद। आतंक का अर्थ होता है – भय या डर और वाद का अर्थ होता है – पद्धति। आतंकवाद शब्द आतंक से बनता है। समाज को अपने कुकृत्यों से भयभीत कर देना आतंकवाद कहलाता है। जो उन्हें भयभीत करते हैं वो आतंकवादी कहलाते हैं।

आतंकवादियों का केवल एक ही उद्देश्य होता है सरकार और देश के लोगों में भय उत्पन्न करके अपनी अनुचित बातों को मनवाना। आतंकवादियों का कोई देश , धर्म तथा जाति नहीं होते हैं। आतंकवादी भोले-भले बच्चों , स्त्रियों , बूढों और जवानों की बहुत ही बेरहमी से हत्या कर देते हैं। क़ानूनी व्यवस्था को ताक पर रखकर आतंकवादी देश में आराजकता फैलाते हैं।

इनके कार्यों का विरोध करने वाले व्यक्तियों या उनके विरुद्ध कार्यवाई करने वाले अधिकारीयों को हताहत करके भगा देते हैं जिससे आगे आने वाले उनका विरोध न कर सकें। वे ऐसा करने के बाद किसी समुचित स्थान पर छिप जाते हैं। भारतवर्ष में इस तरह का आतंकवाद कई जगहों पर छाया हुआ है।

आतंकवाद दो प्रकार के होते हैं – राजनितिक आतंकवाद और आपराधिक आतंकवाद। राजनितिक आतंकवाद वह होता है जो अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए जनता में डर फैलाता है और आपराधिक आतंकवाद वह होता है जो अपहरण करके पैसे की मांग करता है।

भारत में आतंकवाद की समस्या : भारत में आतंकवाद का मतलब है भारत में आतंक की स्थिति का उत्पन्न होना। भारत में आतंकवाद के लिए देश के कई क्षेत्रों में हिंसात्मक तरीके अपनाये जाते हैं जिससे सरकार देश के विकास के लिए कोई कार्य नहीं कर पाती है। जब भारत निरंतर विकास करने लगता है तो कुछ विदेशी शक्तियाँ भारत के विकास से जलने लगती हैं।

वे भारत के लालची लोगों को पैसा देकर उनसे दंगे-फसाद करवाती हैं जिसकी वजह से देश विकास न कर सके। अधिकतर आतंकवादी रेल पटरियों को उखाडकर , बस के यात्रयों को मारकर , बैंकों को लूटकर , सार्वजनिक स्थानों पर बम्ब फेंककर आदि इन कामों से आतंकवाद फ़ैलाने में सफल हो जाते हैं।

छठे और सातवें दशक में बंगाल , उड़ीसा , आंद्रप्रदेश , बिहार में नक्सलवादी लोग जनता में आतंक फ़ैलाने का काम करते थे , अब नक्सलवादियों का आतंक अन्य प्रान्तों से हटकर आंध्र और मध्यप्रदेश में पहुंच गया है। इस समय में पंजाब और कश्मीर दो ऐसे स्थान है जहाँ पर अब आतकवाद ज्यादा है।

जनता को आतंकवादियों से मुक्ति दिलाने के लिए हमारी सरकार प्रयत्नशील है। कुछ बड़ी शक्तियाँ और पड़ोसी देश हमारे देश में अव्यवस्था को फैलाना चाहते हैं। अगर हमारा देश दो भागों में विभक्त हो जाता है तो उन्हें बहुत प्रसन्नता होगी।

आतंकवादियों की गतिविधियाँ : सशक्त सैन्य शक्ति से सुदृढ सरकार का मुकाबला प्रत्यक्ष सामने आकर करना बिलकुल असंभव है। इसीलिए आतंकवादी किसी भी सरकार व जनता का सामना छिपकर , आतंक दिखाकर , आतंक फैलाकर करते हैं। हमारे यहाँ आतंकवादी किसी सार्वजनिक जगह पर अचानक पहुंचकर अँधा-धुंध गोली-बारी कर देते है।

पटरी पर सोये हुए मजदूर भी आतंकवादियों की गोली के शिकार होते हैं। प्रमुख राजनेताओं , अधिकारीयों , सामाजिक कार्यकर्ताओं को वे अवसर पाकर गोली मारकर मौत के घाट उतार देते हैं। उनके विरोध करने वालों को वे कोई-न-कोई अवसर पाकर या कोई षड्यंत्र रचकर मृत्यु को प्राप्त करा देते हैं।

कई बार आतंकवादी चलती बस को रोककर उसमें बैठे हुए यात्रियों को चुन-चुनकर मार देते हैं जिसकी वजह से लोग बसों में यात्रा करने से घबराते हैं। विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर टाइम बम्ब आदि रखकर आतंक का वातावरण फैलाए रखते हैं।

आतंकवाद के मूल कारण : भारत में आतंकवाद के विकसित होने के अनेक कारण हैं। आतंकवाद की समस्या पिछले एक दशक से शुरू हुई है। आज से दस साल पहले छोटे-छोटे लूटपाट के मामले सामने आते थे लेकिन आज के समय में यह समस्या बहुत बढ़ गयी है आज यह छोटी लूटपाट से मारकाट पर उतर आये हैं।

आतंकवाद के उत्पन्न होने के मूल कारण हैं गरीबी , बेरोजगारी , भुखमरी , और धार्मिक उन्माद। आतंकवाद की गतिविधियों को सबसे अधिक प्रोत्साहन धार्मिक कट्टरता से मिलता है। लोग धर्मों के नाम पर एक-दुसरे का गला काटने से भी पीछे नहीं हटते हैं। धर्म के विपक्षी लोग धर्म मानने वाले लोगो को सहन नहीं कर पाते हैं।

इसी के फल स्वरूप हिन्दू-मुस्लिम , हिन्दू-सिक्ख , मुस्लिम , ईसाई आदि धर्मों के नाम पर बहुत से दंगे-फसाद भड़का दिए जाते हैं। बहुत से अलगाववादी धर्म के नाम पर अलग राष्ट्र की भी मांग करने लगते हैं। इसकी वजह से देश की एकता भी खतरे में पड़ जाती है। कुछ विदेशी ताकतें भारत को कमजोर बनाना चाहती हैं इसलिए वे भारत में अक्सर आतंकवाद को बढ़ावा देती रहती हैं।

आतंकवादियों को बाहर से हथियार भेजे जाते हैं। उनका प्रयोग करके आतंकवादी देश में आतंक का वातावरण पैदा करते हैं। लेकिन अगर अपनी नीति स्पष्ट हो , सुदृढ हो , राष्ट्रिय भावना बलवती हो तो बाहर की कोई शक्ति भारत में हस्तक्षेप करने की हिम्मत नहीं कर सकती है इसलिए हमारे देश के नेताओं की ढुलमुल नीति ही हमें आतंकवाद का शिकार बना रही है।

आजकल हिन्दू आतंकवाद भारत में एक नए सिरे से सिर उठा रहा है जिसे कुछ सिरफिरे नेता लोग हवा देकर भारत की एकता और अखण्डता को खतरा पैदा कर रहे है। कश्मीरी आतंकवादियों ने नेहरु जी की कमजोर एवं गलत नीति के कारण सहारा पाया , तो सिख आंतकवादियों का जन्म भी इंदिरा जी की कुटिल नीति से हुआ। जो देशभक्त व निष्ठ्वन थे उन्हें आतंकवाद का शिकार होना पड़ता था। कुछ नेता और अधिकारी अंदर से आतंकवादियों से मिले रहते हैं और दिखावे के लिए उनका विरोध करते हैं।

आतंकवाद पर नियंत्रण : भारत सरकार को आतंकवादी गतिविधियों को खत्म करने के लिए कठोर कदमों को उठाना चाहिए। ऐसा करने के लिए सबसे पहले कानून व्यवस्था को सुदृढ बनाना चाहिए। जहाँ-जहाँ पर अंतर्राष्ट्रीय सीमा हमारे देश की सीमा को छू रही है, उन समस्त क्षेत्रों की नाकाबंदी की जानी चाहिए जिसकी वजह से आतंकवादी सीमा पार से हथियार , गोला-बारूद और प्रशिक्षण प्राप्त करने में असफल हो जाएँ।

जो युवक और युवतियां अपने रास्ते से भटक चुके हैं उन्हें समुचित प्रशिक्षण देकर उनके लिए रोजगार के बहुत से पर्याप्त अवसर ढूंढने चाहियें। अगर युवा वर्ग को व्यस्त रखने तथा उनकों उनकी योग्यता के अनुरूप कार्य दे दिए जाएँ तो वे कभी भी रास्ते से नहीं भटकेंगे। इसकी वजह से आतंकवादियों को अपने षड्यंत्रों को पूरा करने के लिए जन शक्ति नहीं मिल पायेगी और वे खुद ही समाप्त हो जायेंगे।

साम्प्रदायिकता का जहर : साम्प्रदायिकता आतंकवाद का एक प्रमुख कारण होता है। हमारे देश में कुछ ऐसे लोगों का वर्ग रहता है जो 61 साल की स्वतंत्रता के बाद भी संकीर्ण और कट्टर धार्मिक विचारधारा के शिकार बने हुए हैं। ऐसे लोग ही दुसरे धर्मों के प्रति असहज हो जाते हैं।

ये लोग पुन: धर्म और राजनीति को मिलाने की कोशिश करते हैं। ये सभी धर्म के नाम पर अलग राज्य बनाना चाहते हैं। जो लोग उनकी धार्मिक पद्धति में नहीं आते हैं उनके प्रति वे सभी नफरत की भावना को फैलाते हैं। इस तरह से साम्प्रदायिकता की भावना ही आतंकवाद को जन्म देती है। जो लोग एक सम्प्रदाय के प्रति समर्पित होते हैं वे दूसरे सम्प्रदायों के लोगों से नफरत करते हैं।

जनता का सहयोग : जनता को भी सरकार से सहयोग करना चाहिए। कहीं-भी किसी भी संदिग्ध व्यक्ति अथवा वस्तु को देखते ही उसकी सूचना पुलिस को देनी चाहिए। बस अथवा रेलगाड़ी में बैठते समय यह देख लेना चाहिए कि आस-पास कोई लावारिस वस्तु तो नहीं पड़ी है अथवा रखी है।

जिन व्यक्तियों को आप जानते न हों उनसे कभी भी कोई उपहार नहीं लेना चाहिए। सार्वजनिक स्थल पर भी संदिग्ध आचरण वाले व्यक्ति से हमेशा ही बचकर रहना चाहिए। हम सभी जागरूक रहकर भी आतंकवादियों को आतंक फ़ैलाने से रोक सकते हैं।

दूषित राजनीति : आज के समय में देश असंख्य समस्याओं के लिए हमारी दूषित राजनीति जिम्मेदार होती है। हमारे देश के राजनीतिज्ञ और राजनीति पार्टियाँ देश में धर्म और जाति के नाम पर लोगों को भडकाते हैं और अपनी वोटों को पक्का कर लेते हैं। आज के समय में भी धर्म और जाति के नाम पर उम्मीदवारों को खड़ा किया जाता है।

कालान्तर में जो लोग संकीर्ण और कट्टर बन जाते हैं वही लोग आतंकवादी बन जाते हैं। 11 सितम्बर , 2001 को आतंकवादियों ने न्यूयार्क में स्थित विश्व व्यापर संगठन कार्यालय के दो टावरों और अमेरिका में अमेरिकी रक्षा वभाग के प्रमुख कार्यालय पेंटागन के कुछ क्षेत्रों को विमान द्वारा टक्कर मारकर ध्वस्त कर दिया था।

अमेरिका की यह सबसे बड़ी दुर्घटना मानी जाती है जिसमें हजारों बेगुनाह लोगों की हत्या हो गयी थी। अमेरिका सरकार इस दुर्घटना के लिए ओसामा बिन लादेन को दोषी मानती है। हमारे देश के 55 हजार लोग पिछले 20 सालों से आतंकवादियों के आतंकवाद के शिकार बन चुके हैं।

सरकार के कदम : कोई भी धर्म किसी की भी निर्मम हत्या की आज्ञा नहीं देता है। हर धर्म मानव से ही नहीं बल्कि प्राणी मात्र से भी प्यार करना सिखाता है। अत: जो लोग धर्मिक संकीर्णता से ग्रस्त व्यक्तियों का समाज से बहिष्कार किया जाना चाहिए और धार्मिक स्थानों की पवित्रता को अपने स्वार्थ के लिए नष्ट करने वाले लोगों के विरुद्ध सभी धर्मावलम्बियों को एक साथ मिलकर प्रयास करना चाहिए। इसकी वजह से धर्म की ओट में आतंकवाद फ़ैलाने वाले लोगों पर अंकुश लग सकेगा। सरकार को भी धार्मिक स्थलों के राजनीतिक उपयोगों पर प्रतिबन्ध लगाना चाहिए।

विषयों की गंभीरता : अगर आतंकवाद की समस्या को गंभीरता से समाप्त नहीं किया गया तो देश का अस्तित्व खतरे में पड़ जायेगा। इस प्रकार से लड़कर सभी समाप्त हो जायेंगे। जिस आजादी को प्राप्त करने के लिए हमारे पूर्वजों ने अपने प्राणों को भी न्योछावर कर दिया था हम उस आजादी को आपसी वैर भाव की वजह से समाप्त करके अपने ही पैरों पर कुलाढ़ी मार लेंगे। देश फिर से परतंत्रता के बंधन में बंध जायेगा। आतंकवादी हिंसा के बल से हमारा मनोबल तोड़ रहे हैं।

युवकों में बेरोजगारी : जितने भी लोग आतंकवादी बनते हैं वे सभी या तो बेरोजगार होते हैं या फिर आधे पढ़े-लिखे होते हैं। जो लोग आतंकवाद की नीति चलाते हैं वे इन बेरोजगार युवकों को अपने जाल में फंसा लेते हैं। जब भी कोई युवक अपराधी बन जाता है तो उसका आतंकवाद से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।

युवकों का मन और मस्तिष्क अपरिपक्व होते हैं उन्हें किसी भी सांझे में ढाला जा सकता है। युवक जिस प्रकार के लोगों के पास रहते हैं वे खुद भी वैसे ही बन जाते है। पंजाब में जितने भी आतंकवादियों को पकड़ा गया था उन्होंने बेरोजगारी से परेशान होकर इस रास्ते को अपनाया था।

आतंकवाद रोकने के उपाय : आतंकवाद मानवता के नाम पर एक कलंक होता है। आतंकवाद किसी के लिए भी लाभकारी नहीं होता है खुद आतंकवादियों के लिए भी नहीं। आतंकवाद से मानवता को बहुत हानि हो चुकी है। आतंकवाद ने पता नहीं कितने बच्चों को अनाथ बना दिया , कितनी औरतों को विधवा कर दिया और कितने ही लोगों को बेसहारा बना दिया।

सबसे पहले सरकार को आतंकवादियों के साथ बहुत कठोरता से कार्यवाई करनी चाहिए। देश की सीमा पर बहुत ही कड़ी निगरानी रखने की जरूरत है। जों युवक आतंकवाद के जाल में फंस गये हैं उन्हें सही रास्ते पर लाकर किसी रोजगार में लगा देना चाहिए। इसी तरह से लोगों में देशभक्ति की भावना को उत्पन्न करना चाहिए।

स्कूलों और कॉलेजों में भी राष्ट्रिय एकता की भावना को उत्पन्न करने की शिक्षा दी जानी चाहिए। देश की बढती हुई आर्थिक विषमता को भी समाप्त करना चाहिए। देश में आतंकवादियों के अड्डे सफेदपोश धूर्त नेताओं के संरक्षण में सुरक्षित होते हैं उनको समाप्त किया जाये। जब तक इन धूर्त सफेदपोशों का देश से नाश नहीं होता तब तक देशों की कोई भी समस्या नहीं सुलझ सकती। बिना उनके संरक्षण व संकेतों के कोई भी देश के अंदर गलत कदम नहीं बढ़ा सकता है।

उपसंहार : हमारा देश शांति और अहिंसा की जन्म भूमि है। इस देश में महात्मा गाँधी जी जैसे मानवता प्रेमियों का जन्म हुआ था। हमें महान संतों , ऋषियों , मुनियों , गुरुओं की वाणी का पुरे देश में प्रचार करना चाहिए। हमें संगठित होकर ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहिए।

जिससे उनका मनोबल समाप्त हो जाए तथा वे जान सके कि उन्होंने अपने गलत मार्ग पर पैर रख दिया है। जब वे आत्मग्लानी से वशीभूत होकर जब अपने किए पर पश्चाताप करेंगें तभी उन सभी को देश की मुख्य धारा में सम्मिलित किया जा सकता है। हमें आतंकवादी समस्या का समाधान जनता और सरकार दोनों के मिले-जुले प्रयासों से ही संभव हो सकता है।

हिन्दू , सिख , मुसलमान , ईसाई सब भारत के सपूत हैं। इन सभी को आतंकवाद को खत्म करने के लिए प्रयास करना चाहिए। भारत देश सभी सम्प्रदायों की अमूल्य निधि है। जिस प्रकार से आतंकवाद का विस्तार हो रहा है उसको समय रहते नहीं रोका गया तो यह भारत और अन्य देशों के लिए बहुत बड़ी समस्या बन जायेगा।

आतंकवाद पर निबंध-Essay On Terrorism In Hindi

हिंसापूर्वक आम लोगों को सीधे डराने के लिये आतंकवाद एक गैर-कानूनी कृत्य है। आज के दिनों में हर समय वास्तव में लोग आतंकवाद और आतंकवादी हमलों से डरते रहते हैं। ये सभी देशों के लिये एक ज्वलंत मुद्दा बन चुका है क्योंकि ये एक सामाजिक मुद्दा है। यहाँ पर विद्यार्थियों के लिये आतंकवाद के संदर्भ में आधारभूत समझ बनाने के लिये बेहद सरल शब्दों में कुछ निबंध प्रस्तुत किया जा रहा है जो इन्हें विभिन्न परीक्षाओं और निबंध लेखन प्रतियोगिताओं में उपयोगी साबित होगा।

आतंकवाद पर निबंध (टेररिज्म एस्से)

आतंकवाद पर निबंध-Essay On Terrorism In Hindi

Get here some essays on Terrorism in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

आतंकवाद पर निबंध 1 (100 शब्द)

आतंकवाद पर निबंध-Essay On Terrorism In Hindi

आतंकवाद हिंसा का एक गैर-कानूनी तरीका है जो लोगों को डराने के लिये आतंकवादियों द्वारा प्रयोग किया जाता है। आज, आतंकवाद एक सामाजिक मुद्दा बन चुका है। इसका इस्तेमाल आम लोगों और सरकार को डराने-धमकाने के लिये हो रहा है। बहुत आसानी से अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये विभिन्न सामाजिक संगठन, राजनीतिज्ञ और व्यापारिक उद्योगों के द्वारा आतंकवाद का इस्तेमाल किया जा रहा है। लोगों का समूह जो आतंकवाद का समर्थन करते हैं उन्हें आतंकवादी कहते हैं। आतंकवाद को परिभाषित करना बहुत आसान नहीं है क्योंकि इसने अपनी जड़ें बहुत गहराई तक जमायी हुयी है। आतंकवादियों के पास कोई नियम और कानून नहीं है; ये समाज और देश में आतंक के स्तर को बढ़ाने और उत्पन्न करने के लिये केवल हिंसात्मक गतिविधियों का सहारा लेते हैं।

आतंकवाद

आतंकवाद पर निबंध 2 (150 शब्द)

आतंकवाद पर निबंध-Essay On Terrorism In Hindi

पूरे विश्व के लिये आतंकवाद एक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समस्या बन चुका है। ये एक वैश्विक समस्या है जिसने लगभग सभी राष्ट्रों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से प्रभावित किया हुआ है। हालाँकि बहुत सारे देशों के द्वारा आतंकवाद का सामना करने की कोशिश की जा रही है; लेकिन कुछ लोगों के द्वारा इसे आज भी समर्थन दिया जा रहा है। आम लोगों को किसी भी समय ख़ौफनाक तरीके से डराने का एक हिंसात्मक कुकृत्य है आतंकवाद। आतंकवादियों के बहुत सारे उद्देश्य होते हैं जैसे कि समाज में हिंसा के डर को फैलाना, राजनीतिक उद्देश्यों की प्राप्ति आदि। इनके निशाने पर हर वक्त देश का आम नागरिक होता है।

एक खास देशों की सरकार से अपनी माँगों को पूरा करवाना ही आतंकवादियों का मुख्य लक्ष्य होता है। लोगों और सरकार तक अपनी आवाज को पहुँचाने के लिये वो ऑनलाइन सोशल मीडिया, समाचारपत्र या पत्रिकाओं से संपर्क करते हैं। कई बार आतंकवादी हमले अपने वैचारिक और धार्मिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिये होते है।

आतंकवाद पर निबंध 3 (200 शब्द)

आतंकवाद पर निबंध-Essay On Terrorism In Hindi

भारत एक विकसित देश है जिसने पूर्व और वर्तमान में बहुत सारी चुनौतियों का सामना किया है, आतंकवाद उनमें से एक बड़ी राष्ट्रीय समस्या है। भारत ने भूखमरी से होने वाली मृत्यु, अशिक्षा, गरीबी, असमानता, जनसंख्या विस्फोट और आतंकवाद जैसी चुनौतियों का सामना किया है जिसने इसकी विकास और वृद्धि को बुरी तरह प्रभावित किया है। आतंकवादियों के धर्म, मातृभूमि और दूसरे गैर-तार्किक भावनाओं के उद्देश्यों के लिये आम लोगों और सरकार से लड़ रहा आतंकवाद एक बड़ा खतरा है। आतंकवादी अपने आप को एक बहादुर सैनिक बताते हैं हालाँकि, वो वास्तविक सैनिक नहीं होते हैं। सच्चे सैनिक कभी-भी आम लोगों को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं और वो केवल दुश्मनों से अपने देश को बचाने के लिये ही लड़ते हैं। वास्तव में असली सैनिक वो होते हैं जो राष्ट्रहित के लिये लड़ते हैं। जबकि आतंकवादी अपने खुद के गलत उद्देश्यों के लिये लड़ते हैं।

एक राष्ट्रीय सैनिक अपनी सभी जिम्मेदारियों को समझता है जबकि एक आतंकवादी कभी-भी ऐसा नहीं करता। आतंकवादियों को उनका नाम आतंक शब्द से मिला है। पूर्व में, आतंकवाद केवल कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित था जैसे जम्मू- कश्मीर हालाँकि; आज के दिनों में, ये लगभग सभी क्षेत्रों में फैल चुका है खासतौर से भारत के उत्तरपूर्वी इलाकों में। हाल ही में, भारत में आतंकवादी हमला मुम्बई में नरीमन हउस और ताज होटल में हुआ था। उस हमले ने भारत में कई जिन्दगियों को लील लिया था और बहुत आर्थिक हानि पहुँचायी थी।


 

आतंकवाद पर निबंध 4 (250 शब्द)

आतंकवाद पर निबंध-Essay On Terrorism In Hindi

आतंकवाद एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा है जो पूरी जीत के लिये मानव दिमाग का इस्तेमाल कर रहा है। लोगों को कमजोर बनाने के लिये उन्हें डरा रहा है जिससे वो दुबारा से राष्ट्र पर राज कर सकें। इसको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुलझाने की जरुरत है। हमें इसे जड़ से खत्म करने के बारे में सोचना होगा। मानव मस्तिष्क से असाधारण आतंक को हटाने के साथ ही इसके साम्राज्य को पूरी तरह से नेस्तानाबूद करने के लिये हमें एक मजबूत नीति बनानी चाहिये। आतंकवाद अपने सकारात्मक परिणामों को पाने के लिये हिसांत्मक तरीका अपनाता है।

आतंकवाद एक हिंसात्मक कुकृत्य है जिसको अंजाम देने वाले समूह को आतंकवादी कहते हैं। वो बहुत साधारण लोग होते हैं और दूसरों के द्वारा उनके साथ घटित हुये कुछ गलत घटनाओं और या कुछ प्राकृतिक आपदाओं के कारण वो किसी तरह अपने दिमाग पर से अपना नियंत्रण खो देते हैं जो उनकी इच्छाओं को सामान्य या स्वीकृत तरीके से पूरा करने के में अक्षम बना देता है। धीरे-धीरे वो समाज के कुछ बुरे लोगों के प्रभाव में आ जाते हैं जहाँ उनकी सभी इच्छाओं को पूरा करने का वादा किया जाता है। वो सभी एक साथ मिलते हैं और एक आतंकवादी समूह बनाते हैं जो कि अपने ही राष्ट्र, समाज और समुदाय से लड़ता है। आतंकवाद, देश के सभी युवाओं के विकास और वृद्धि को प्रभावित करता है।

ये राष्ट्र को उचित विकास से कई वर्ष पीछे ढकेल देता है। आतंकवाद देश पर अंग्रेजों की तरह राज कर रहा है, जिससे हमें फिर से आजाद होने की जरुरत है। हालाँकि, ऐसा प्रतीत होता है कि आतंकवाद हमेशा अपने जड़ को गहराई से फैलाता रहेगा क्योंकि अपने अनैतिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये राष्ट्र के कुछ अमीर लोग अभी-भी इसको समर्थन दे रहें हैं।

 

आतंकवाद पर निबंध 5 (300 शब्द)

आतंकवाद पर निबंध-Essay On Terrorism In Hindi

भारत ढ़ेर सारी चुनौतियों का सामना कर रहा है जैसे गरीबी, जनसंख्या वृद्धि, निरक्षरता, असमानता आदि बहुत कुछ, फिर भी आतंकवाद इन सबसे ज्यादा खतरनाक है जो पूरी मानव जाति को प्रभावित कर रहा है। ये बहुत ही डरावनी बीमारी है जो लोगों को मानसिक और बौद्धिक स्तर पर प्रभावित कर रही है। चाहे ये छोटे देशों में होता हो (आयरलैंड, इज़रायल आदि) या बड़े देशों (यूएसए, रुस आदि) में; ये दोनों ही जगह चुनौती के रुप में है। अपने कुछ राजनीतिक, धार्मिक या व्यक्तिगत लक्ष्य की प्राप्ति के लिये आतंकवादी अर्थात् परेशान लोगों के समूह के द्वारा हिंसात्मक तरीकों का प्रयोग आतंकवाद है। आज ये दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है।

आतंकवाद का कोई नियम कानून नहीं होता वो केवल अपनी माँगों को पूरा करने के लिये सरकार के ऊपर दबाव बनाने के साथ ही आतंक को हर जगह फैलाने के लिये निर्दोष लोगों के समूह या समाज पर हमला करते हैं। उनकी माँगे बेहद खास होती हो, जो वो चाहते हैं केवल उसी को पूरा कराते हैं। ये मानव जाति के लिये एक बड़ा खतरा है। वो कभी-भी अपने दोस्त, परिवार, बच्चे, महिला या बूढ़े लोगों के लिये समझौता नहीं करते हैं। वो केवल लोगों की भीड़ पर बम गिराना चाहते हैं। वो लोगों पर गोलियाँ चलाते हैं, विमानों का अपहरण करते हैं और दूसरी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं।

कम से कम समय में अपने मुख्य क्षेत्रों या देशों में आतंक फैलाने के लिये आतंकवादी लक्ष्य बनाते हैं। पूर्व में, ऐसा माना जाता है कि आतंकवादी गतिविधियाँ केवल जम्मू और कश्मीर तक ही सीमित थी लेकिन अब ये अपनी जड़ें देश के दूसरे क्षेत्रों में भी फैला रहा है। देश में अलग-अलग नामों के साथ कई सारे आतंकवादी समूह सक्रिय हैं। अपने कार्य के अनुसार राजनीतिक और आपराधिक आतंकवाद के दो मुख्य प्रकार हैं। कुछ खास लक्ष्यों को पूरा करने के लिये प्रशिक्षित लोगों का समूह है आतंकवाद। विभिन्न उद्देश्यों को पूरा करने के लिये एक से ज्यादा आतंकी समूह प्रशिक्षित किये जाते हैं। ये एक बीमारी की तरह है जो नियमित तौर पर फैल रही है और अब इसके लिये कुछ असरदार उपचार की जरुरत है।


 

आतंकवाद पर निबंध 6 (400 शब्द)

आतंकवाद पर निबंध-Essay On Terrorism In Hindi

आतंकवादी कहे जाने वाले प्रशिक्षित लोगों के समूह के द्वारा अन्यायपूर्ण और हिंसात्मक गतिविधियों को अंजाम देने की प्रक्रिया को आतंकवाद कहते हैं। वहाँ केवल एक मालिक होता है जो समूह को किसी भी खास कार्य को किसी भी तरीके से करने का सख्त आदेश देता है। अपने अन्यायी विचारों की पूर्ति के लिये उन्हें पैसा, ताकत और प्रचार की जरुरत होती है। ऐसी परिस्थिति में, ये मीडिया होती है जो किसी भी राष्ट्र के समाज में आतंकवाद के बारे में खबर फैलाने में वास्तव में मदद करती है। अपनी योजना, विचार और लक्ष्य के बारे में लोगों तक पहुँच बनाने के लिये आतंकवाद भी मीडिया का सहारा लेता है।

अपने उद्देश्य और लक्ष्य के अनुसार विभिन्न आतंकी समूह का नाम पड़ता है। आतंकवाद की क्रिया मानव जाति को बड़े पैमाने पर प्रभावित करती है और लोगों को इतना डरा देती है कि लोग अपने घरों से बाहर निकलने में डरते हैं। वो सोचते हैं कि आतंक हर जगह है जैसे घर के बाहर रेलवे स्टेशन, मंदिर, सामाजिक कार्यक्रमों, राष्ट्रीय कार्यक्रमों आदि में जाने से घबराते हैं। लोगों के दिमाग पर राज करने के साथ ही अपने कुकृत्यों कों प्रचारित और प्रसारित करने के लिये अधिक जनसंख्या के खास क्षेत्रों के तहत आतंकवादी अपने आतंक को फैलाना चाहते हैं। आतंकवाद के कुछ हालिया उदाहरण अमेरिका का 9/11 और भारत का 26/11 हमला है। इसने इंसानों के साथ ही बड़े पैमाने पर देश की अर्थव्यवस्था को भी चोट पहुँचायी है।

राष्ट्र से आतंकवाद और आतंक के प्रभाव को खत्म करने के लिये, सरकार के आदेश पर कड़ी सुरक्षा का प्रबंध किया गया है। वो सभी जगह जो किसी भी वजह से भीड़-भाड़ वाली जगह होती या बन जाती है जैसे सामाजिक कार्यक्रम, राष्ट्रीय कार्यक्रम जैसे गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, मंदिर आदि को मजबूत सुरक्षा घेरे में रखा जाता है। सभी को सुरक्षा नियमों का पालन करता पड़ता है और ऑटोमैटिक बॉडी स्कैनर मशीन से गुजरना पड़ता है। इस तरह के उपकरणों का इस्तेमाल करने के द्वारा सुरक्षा कर्मियों को आतंकवादी की मौजूदगी का पता लगाने में मदद मिलती है। इस तरह की कड़ी सुरक्षा प्रबंधन के बाद भी हम लोग अभी-भी आतंकवाद का खिलाफ प्रभावशाली रुप से नहीं खड़े हो पा रहें हैं।

आतंकी समूह को खत्म करने के साथ ही आतंक के खिलाफ लड़ने के लिये हर साल हमारा देश ढ़ेर सारे पैसे खर्च करता है। हालाँकि, ये अभी-भी एक बीमारी की तरह बढ़ रही है क्योंकि रोजाना नये आतंकवादी तैयार हो रहें हैं। वो हमारी तरह ही बहुत सामान्य लोग हैं लेकिन उन्हें अन्याय करने के लिये तैयार किया जाता है और अपने एक समाज, परिवार और देश के खिलाफ लड़ने के लिये दबाव बनाया जाता है। वो इस तरह से प्रशिक्षित होते हैं कि उन्हें अपने जीवन से भी प्यार नहीं होता, वो लड़ते समय हमेशा अपना कुर्बान होने के लिये तैयार रहते हैं। एक भारतीय नागरिक के रुप में, आतंकवाद को रोकने के लिये हम सभी पूरी तरह से जिम्मेदार हैं और ये तभी रुकेगा जब हम कुछ बुरे और परेशान लोगों की लालच भरी बातों में कभी नहीं आयेंगे।

आतंकवाद पर निबंध | Terrorism in Hindi!

आतंकवाद पर निबंध-Essay On Terrorism In Hindi

आतंकवाद किसी एक व्यक्ति, समाज अथवा राष्ट्र विशेष के लिए ही नहीं अपितु पूरी मानव सभ्यता के लिए कलंक है । हमारे देश मे ही नहीं बल्कि पूरे विश्व मे इसका जहर इतनी तीव्रता से फैल रहा है कि यदि इसे समय रहते नहीं रोका गया तो यह पूरी मानव सभ्यता के लिए खतरा बन सकता है ।

शाब्दिक अर्थों में आतंकवाद का अर्थ भय अथवा डर के सिद्‌धांत को मानने से है । दूसरे शब्दों में, भययुक्त वातावरण को अपने निहित स्वार्थो की पूर्ति हेतु तैयार करने का सिद्धांत आतंकवाद कहलाता है । विश्व के समस्त राष्ट्र प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इसके दुष्प्रभाव से ग्रसित हैं । रावण के सिर की तरह एक स्थान पर इसे खत्म किया जाता है तो दूसरी ओर एक नए सिर की भाँति उभर आता है ।

यदि हम अपने देश का ही उदाहरण लें तो हम देखते हैं कि अथक प्रयासों के बाद हम पंजाब से आतंकवाद का समाप्त करने में सफल होते है तो यह जम्यू-कश्मीर, आसाम व अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों में प्रारंभ हो जाता है । पड़ोसी देश पाकिस्तान द्‌वारा भारत में आतकवाद को समर्थन देने की प्रथा तो निरंतर पचास वर्षो से चली आ रही है ।

हमारा देश धर्मनिरपेक्ष देश है । यहाँ अनेक धर्मो के मानने वाले लोग निवास करते हैं । हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, ब्रहम समाजी, आर्य समाजी, पारसी आदि सभी धर्मो के अनुयाइयों को यहाँ समान दृष्टि से देखा जाता है तथा सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं ।

वास्तविक रूप में धर्मो का मूल एक है । सभी ईश्वर पर आस्था रखते है तथा मानव कल्याण को प्रधानता देते हैं । सभी धर्म एक-दूसरे को प्रेमभाव व मानवता का संदेश देते है परंतु कुछ असामाजिक तत्व अपने निहित स्वार्थो की पूर्ति के लिए धर्म का गलत प्रयोग करते है ।

धर्म की आड़ में वे समाज को इस हद तक भ्रमित कर दैत है कि उनमें किसी एक धर्म के प्रति घृणा का भाव समावेशित हो जाता है । उनमें ईर्ष्या, द्वेष व परस्पर अलगाव इस सीमा तक फैल जाता है कि वे एक पूँक्षर कह खून बहच सं भी नहीं चूकते हैं ।

 

देश में आतंकवाद के चलते पिछले पाँच दशकों में 50,000 से भी अधिक परिवार प्रभावित हो चुके हैं । कितनी ही महिलाओं का सुहाग उजड़ गया है । कितने ही माता-पिता बेऔलाद हो चुके हैं तथा कितने ही भाइयों से उनकी बहनें व कितनी ही बहनें अपने भाइयों से बिछुड़ चुकी हैं । पिछले दशक के हिंदू-सिख में कितने ही लोग जिंदा जला दिए गए । इसी आतंकवाद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी की हत्या कर दी ।

हमारे भूतपूर्व युवा प्रधानमंत्री स्व॰ राजीव गाँधी इसी आतंक रूपी दानव की क्रूरता का शिकार बने । अनेक नेता जिन्होंने अपने स्वार्थों के लिए आतंकवाद का समर्थन किया बाद में वे भी इसके दुष्परिणाम से नहीं बच सके । पाकिस्तान के अंदर बढ़ता हुआ आतंकवाद इसका प्रमाण है । वहाँ के शासनाध्यक्षों पर लगातार आतंकी हमले हो रहे है ।

पूरी दुनिया में छोटी-बड़ी आतंकवादी घटनाओं का एक सिलसिला सा चल पड़ा है । धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में तो खून की नदियाँ बहना आम बात हो गई है । प्राकृतिक सौंदर्य का यह खजाना आज भय और आतंक का पर्याय बन रहा है । खून-खराबा, मार-काट, बलात्कार आदि घटनाओं से ग्रस्त यह प्रदेश पाँच दशकों से पुन: अमन-चैन की उम्मीदें लिए कराह रहा है ।

आतंकवाद के कारण यहाँ का पर्यटन बुरी तरह प्रभावित हुआ है । हजारों की संख्या में लोग वहाँ से पलायन कर चुके हैं । विगत वर्षो में इस आतंकवाद ने जितनी जाने ली हैं कितने सैनिक शहीद हुए हैं इसका अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है । चूँकि यह आतंकवाद एक सुनियोजित अभियान के तहत चलाया जा रहा है, इसलिए इसकी समाप्ति उतनी सरल नहीं है ।

आतंकवाद के चलते खलनायकों को नायक के रूप में देखा जा रहा है । ऐसा नहीं है कि केवल निरीह लोग ही इसकी गिरफ्त में आते हैं । आतंकवाद ने अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश को भी नहीं छोड़ा जिसके फलस्वरूप हजारों लोग मौत के मुँह में समा गए तथा अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा ।

आतंकवाद मानव सम्यता के लिए कलंक है । उसे किसी भी रूप में पनपने नहीं देना चाहिए । विश्व के सभी राष्ट्रों को एक होकर इसके समूल विनाश का संकल्प लेना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी को हम एक सुनहरा भविष्य प्रदान कर सकें ।

आतंकवाद पर निबंध। Terrorism Essay in Hindi

आतंकवाद पर निबंध-Essay On Terrorism In Hindi

आतंकवाद पर निबंध। Terrorism Essay in Hindi
प्रस्तावना : आतंकवाद वर्तमान समय की एक गंभीर समस्या है। आतंकवादी वह व्यक्ति होता है जो अपना स्वार्थ पाने के लिए लोगों में भय फैलाता है। सामान्यतः दो प्रकार के आतंकवाद होते है। एक तो राजनीतिक आतंकवाद जो अपने राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ती के लिए भय फैलाते हैं और दूसरा आपराधिक आतंकवाद जो अपहरण करके रूपए मांगते हैं।
राजनीतिक आतंकवाद : राजनीतिक आतंकवाद बहुत खतरनाक है। राजनीतिक आतंकी सुसंगठित और प्रशिक्षित होते हैं। यह पुलिस के लिए भी कठिन होता है की इनको समय से गिरफ्तार कर पाए। राजनीतिक आतंकवादी बड़े पैमाने पर हिंसा कर सकते हैं। इनका उद्देश्य जनता और सरकार को भयभीत करना होता है। वे हवाईजहाजों को बंधक बनाते हैं, डकैती करते हैं, बैंक लूटते हैं। वे मासूम लोगों की ह्त्या करते हैं। भय फैलाने के लिए वे बेम विस्फोट करते है और अफवाहें फैलाते हैं।
आतंकी और आतंकवाद : सामान्यतः आतंकी युवा होते हैं और उनके पीछे जिनका समर्थन होता है वे वृद्ध होते हैं। वे आतंकी क्रियाकलापों को संगठित करते हैं। आतंकी उग्रवादी होते हैं जो अपना कार्य महान उत्साह के साथ करते हैं लेकिन वे लोगों को गलत सलाह देते हैं जो कभी-कभी यह नहीं समझ पाते हैं की वे वास्तव में क्या कर रहे हैं। कभी-कभी विदेशी एजेंसियां देश के भीतर भय फैलाने के लिए आतंकियों की सहायता करती हैं। ऐसे मामलों में, आतंकियों को जटिल हथियारों से प्रशिक्षण दिया जाता है। विदेशी एजेंसियां उन्हें हथियार और धन भी देती हैं।
भारत और आतंकवाद : भारत लम्बे समय से आतंकवाद का सामना कर रहा है। नागा विद्रोहियों की समस्या भारत में चिंता का विषय है। देश में नक्सल आंदोलन भी चल रहा है। वर्तमान में आतंकवाद पंजाब और अन्य स्थानों तक फ़ैल चुका है।  कुछ बड़ी शक्तियां और पड़ोसी देश हमारे देश में अव्यवस्था फैलाने की कोशिश में लगे रहते हैं। यदि हमारा देश दो भागों में विभक्त हो गया तो वे बहुत प्रसन्न होंगे। कुछ समस्याएँ जम्मू-कश्मीर की हैं जिन्हे शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जा सकता है। लेकिन दुर्भाग्यवश हत्याएं जारी हैं। हमें आशा है की राजनीतिक शक्तियां इस समस्या का समाधान निकालेंगी।
शान्ति के लिए खतरा : फिलिस्तीन की समस्या अभी तक हल नहीं हुई है और यह आतंकवाद और हिंसा को बढ़ा रही है। इंग्लैण्ड में आइरिश आतंकी देश की शान्ति को भांग करने में लगे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और लैटिन अमेरिकी देशों में आतंकवाद एक बड़ी समस्या है। पाकिस्तान और श्रीलंका भी हिंसा की चपेट में हैं। आतंकवाद अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से हल किया जा सकता है। संसार के देशों को अन्य देशों के विरुद्ध आतंकी क्रियाकलापों की अनुमति नहीं देनी चाहिए। आतंकियों का कोई धर्म नहीं होता और मणनवीय मूल्यों में कोई विश्वास भी नहीं होता है। यूं. एन. ओ. ने इस समस्या को हल करने की अनुमति दे दी है। हमें आशा है की भारत और सम्पूर्ण विश्व शीघ्र ही इस भयावह स्वप्न से बाहर आ पाने में सफल होंगे।
प्रमुख आतंकवादी घटना : 11 सितम्बर 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर जो की अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थित है पर बंधक हवाई जहाजों द्वारा हमला किया गया। इसमें लगभग 7000 लोगों की मृत्यु हुई। वर्तमान में सीरिया और उसके आस-पास के क्षेत्र भी आतंकवाद से ग्रसित हैं। इन इलाकों में गृहयुद्ध जैसी स्थिति व्याप्त है। बमों और मिसाइलों के हमलों में हजारों की संख्या में निर्दोष और मासूम लोग मारे जा रहे हैं। भारज के मुंबई शहर में ताज होटल में हुए आतंकी हमले में भी कई लोग मारे गए। इसके अलावा रोज कहीं न कहीं छोटे-बड़े आतंकी हमले होते ही रहते हैं। आतंकवाद में आज सम्पूर्ण विश्व को युद्ध की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।
उपसंहार : आतंकवाद का जिस ढंग से विस्तार हो रहा है यदि उसको समय रहते नहीं रोका गया तो भारत सहित सभी देशों के लिए यह एक विकत समस्या बन जाएगा। दुनिया की सभी देशों को मिलकर ऐसी आपराधिक प्रवृत्ति पर रोक लगाने के प्रयास करने चाहिए। लेकिन दुःख इस बात का है की दुनिया के बड़े देश इस समस्या से मुकाबला करने में भी अपने हितों पर अधिक ध्यान देते हैं।

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